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Fantasy क्या यही प्यार है

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Lazy villain
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पंद्रहवाँ भाग


तनु के प्यार का इजहार को मानने के बाद महेश के कहने पर अभिषेक हमें रसगुल्ला खिलाने ले गया। दुकान पर जाने के बाद अभिषेक ने एक एक प्लेट में दो रसगुल्ले की तीन प्लेट का ऑर्डर दिया। थोड़ी देर बार रसगुल्ले की प्लेट हम लोगों के सामने आ गई। महेश रसगुल्ले पर टूट पड़ा। हम दोनों का एक रसगुल्ला भी नहीं खत्म हुआ था और महेश की प्लेट साफ हो चुकी थी। वो हम दोनों की तरफ ललचाई हुई नजरों से देख रहा था। अभिषेक ने उससे पूछा।

अभिषेक- अब क्या है। ऐसे क्यों देख रहा है। नजर लगाएगा क्या।

महेश- अबे और खाने का मन है। तू कहे तो और ले लूँ।

अभिषेक- रसगुल्ला मन बदलने और स्वाद लेने की चीज होती है। पेट भरने की नहीं। ठीक है ले ले।

फिर महेश ने अपने लिए और रसगुल्ला मंगा लिया। कुछ देर में उसने वो रसगुल्ले खा डाले और अभिषेक की तरफ फिर से देखने लगा। अभिषेक ने उससे फिर कहा।

अभिषेक- अब क्या है। और खाएगा क्या।

महेश ने बेचारे सी शक्ल बनाकर हाँ में सिर हिलाया। अभिषेक ने उससे कहा।

अभिषेक- साले एकदम पेटू है क्या तू। कोई इतना रसगुल्ला खाता है क्या। शादी नहीं हुई है मेरी जो तू रसगुल्ला पेले पड़ा है।

महेश- भाई बस तू बोल दे कि पेट भर कर खिला दें। 4 तो खा ही चुका हूँ ज्यादा से ज्यादा 2-3 और खाऊँगा। बोल दे न भाई।

महेश की बात सुनकर मैंने भी सोचा की महेश सही कह रहा है। और कितना खाएगा। 2-3 में पेट तो भर ही जाएगा। तो यही सोचकर मैंने उसे भरपेट रसगुल्ला खाने के लिए बोल दिया। बस फिर क्या था। महेश ने जो रसगुल्ला खाना शुरू किया तो खाता गया खाता गया। और आखिरकार 16 रसगुल्ला खाकर उसने एक लम्बी डकार ली और पानी पीने लगा। मैं और अभिषेक आँखे फाड़े महेश को देख रहे थे। इतने वर्षों की दोस्ती में आज बता चल रहा था कि महेश रसगुल्ले के लिए कितना पेटू है। जब महेश पानी पी कर खाली हुआ तो मैंने कहा।

मै- ये सब क्या था बे। कोई ऐसे खाता है क्या। कितने दिन से भूखा था तू। आस-पास देश सभी तुझे ही देख रहे हैं। और सोच रहे होंने कि कैसा भुक्खड़ इनसान है ये।

मेरी बात सुनकर महेश ने आस-पास देखा तो कुछ लोग महेश को ही देख रहे थे अजीब नजरों से। कुछ देर बाद अभिषेक ने महेश से कहा।

अभिषेक- साले मुझे पता होता कि तू आज मेरा बैंड बजाकर रहेगा तो मैं तुझे कभी न खिलाता रसगुल्ला। साले पूरा 16 रसगुल्ला खाया तूने। कम से कम रसगुल्ले का आकार देख लेता। छोटा वाला रसगुल्ला नहीं था ये मेरे बाप। बड़ा वाला था। मेरी बारात में नहीं आया था तू जो इतना छककर खाए पड़ा था। मेरी तो महीने भर का जेब खर्च तूने एक ही दिन में साफ कर दिया। देखने मेरी बददुआ लगेगी तुझे। कल तेरी गाँड़ न चल गई तो कहना।

अभिषेक की बात सुनकर महेश खीस निपोरने लगा। महेश ने जाकर रसगुल्ले के पैसे दिए हलवाई को। फिर अपने स्कूल चले गए। पूरी क्लास करने के बाद छुट्टी होने पर हम घर आ गए। उसके बाद कुछ खास नहीं हुआ। अगले दिन जब मैं स्कूल पहुँचा तो अभिषेक मुझे स्कूल में दिखा, परंतु महेश कहीं भी दूर-दूर तक नजर नहीं आया तो मैंने अभिषेक से पूछा।

मैं- अभिषेक ये महेश आज स्कूल नहीं आया क्या कहीं दिखाई नहीं दे रहा है।

मेरी बात सुनकर अभिषेक मुस्कुराने लगा, उसके मुस्कुराने का राज मैं नहीं समझ पाया तो मैंने फिर से अभिषेक से पूछा।

मैं- अरे यार मैं कुछ पूछ रहा हूँ और तू है कि बस मुस्कुराए जा रहा है। आखिर बात क्या है।

अभिषेक- तुझे पता है महेश क्यों नहीं आया है। उसकी तबीयत ठीक नहीं है।

मैं- उसकी तबीयत ठीक नहीं है तो इसमें हँसने की कौन सी बात हो गई है। हमें तो उसके लिए संवेदना जताना चाहिए।

अभिषेक- अरे बात वो नहीं है। बात ये है कि उसकी गाँड़ चलने लगी है। पेट में गुड़गुड़ाहट हो रही है उसके।

मैं- मुझे कैसे पता इस बारे में।

अभिषेक- अरे यार सुबह तड़के उसने मुझे फोन किया था और फोन उठाते ही मुझे गाली देने लगा। कहने लगा मैंने नजर लगा दी है। कल मैंने तो वैसे ही मजाक में वोल दिया था कि तुम्हारी गांड़ चल जाएगी। मुझे थोड़े ही मालूम था कि मेरी कही हुई बात सच हो जाएगी। सुबह से कई बार मुझे फोन कर चुका है बोल रहा है कि मेरी जुबान ही काली है। अब उसे कौन समझाए की ये सब मेरी जुबान का कमाल नहीं है कल खाए हुए 16 रसगुल्ले का कमाल है।

अभिषेक की बात सुनकर मेरे चेहरे पर भी मुस्कान आ गई। फिर हम दोनों अपनी कक्षा में जाने लगे तभी अभिषेक को फोन बजा। अभिषेक ने देखा तो महेश का ही फोन था। अभिषेक ने फोन मुझे दिया तो मैंने फोन उठाया। जैसे ही फोन मैंने अपने कान में लगाया महेश की मधुर वाणी मेरे कानों में शहद घोर लई।

महेश- साले भोस......ले। तू कभी सुखी नहीं रहेगा। भगवान करे एक दिन तेरे साथ भी यही हो। गाँडू तुझे पता है। सुबह से मैं नहर किनारे ही बैठा हूँ। घर भी नहीं जा पा रहा हूँ। घर जाते हुए रास्ते से मुझे वापस लौटना पड़ता है। ये सब तेरा किया धरा है साले।

मैं- और जो तुमने बिना सोचे समझे पेट भर के रसगुल्ले खाए थे उसका क्या। ये सब उसी का परिणाम है महेश।

महेश- अरे नूनू भाई। माफ करना भाई। मैंने सोचा वो साला अभिषेक है फोन पर। ये रसगुल्ले के कारण नहीं हुआ है। मैंने पहली वार थोड़े ही न रसगुल्ले खाए हैं। इसके पहले भी मैंने बहुत बार ऐसे ही खाए हैं, लेकिन कभी ऐसा नहीं हुआ। ये सब अभिषेक की काली जुबान की वजह से हुआ है। आहहहहहह.. मेरा पेट। भाई तू फोन रख। फिर से आई है। मैं जा रहा हूँ।

इतने कहकर महेश ने फोन काट दिया। मैने अभिषेक की तरफ देखा। तो वो मुझे ही देख रहा था। लगभग 3 सेकेण्ड बाद अचानक से दोनो के मुँह से हसी का ठहाका निकल पड़ा और हम दोनो हँसते हँसते अपनी कक्षा मैं चले गए। कक्षा में जाने के बाद देखा कि अभिषेक की मैना मतलब तनु पहले से ही कक्षा में बैठी हुई थी। उसने अभिषेक हो हाय... का इशारा किया। मैं चुपचाप अपनी सीट पर जाकर बैठ गया और पढ़ाई करने लगा। इसी तरह ये दिन भी बीत गया।

अगले दो दिन तक महेश स्कूल नहीं आया था। इन दो दिनों में कोई खास बात नहीं हुई। उसके बाद अगले दिन इतवार था। चौथे दिन महेश स्कूल आया। वो रोज की अपेक्षा कुछ ढीला लग रहा था। उसने मुझसे हाथ मिलाया अभिषेक की पीठ पर एक मुक्का मारा। अभिषेक अपनी पीठ को सहलाते हुए कहा।

अभिषेक- ये क्या है बे। मुझे क्यों मारा तूने।

महेश- साले तेरा प्यार मुझे रास नहीं आया। तेरे प्यार ने मेरे पेट के छक्के छुड़ा दिए।

महेश की बात सुनकर हम सब हँसने लगे। इसी तरह दिन बीतते रहे और अभिषेक और तनु का प्यार और गहरा होता जा रहा था। इस दौरान मैंने और महेश ने एक बात ध्यान दी कि तनु का व्यवहार अब मेरे और महेश के प्रति वैसा नहीं रह गया था जैसा पहले हुआ करता था। अब वो मुझसे और महेश से ठीक से बात भी नहीं करती थी। किसी भी छोटी सी बात को लेकर वो चिढ़ जाया करती थी। ये सब अभिषेक के सामने होता था पहले तो अभिषेक ने तनु को दो-चार बार समझाया भी लेकिन अब वह भी कुछ नहीं वोलता था, इस बात से कभी मुझे गुस्सा भी आता था। मुझे लगने लगा था कि ये तनु अभिषेक को मुझसे दूर ले जा रही है और अभिषेक मुझसे दूर जा रहा है। एक दिन मैं और महेश स्कूल के परिसर में बैठे हुए बातें कर रहे थे। अभिषेक और तनु हमसे कुछ दूरी पर बैठे हुए थे। तभी महेश ने मुझसे कहा।

महेश- यार नूनू। मैं कई दिनों से तुझसे एक बात कहना चाहता हूँ। पता नहीं ये सच है या मेरा भ्रम। लेकिन बात हमसे जुड़ी हुई है।

मैं- ऐसी क्या बात है यार। तू बता तो सही।

महेश- यार मुझे लग रहा है कि तनु और अभिषेक बदल गए हैं। अब तनु का बर्ताव हम दोनों के प्रति पहले की तरह नहीं रह गया है। बात बात पर चिढ़ जाती है। ऐसा लगता है जैसे उसके कोई मकसद पूरा हो गया हो और हमे दूध में पड़ी मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया उसने। अभिषेक भी अब पहले की अपेक्षा कम बात करता है हमसे। हो सकता है ये मेरा वहम हो, लेकिन यही बात कई दिनों से मेरे मन में आ रही थी।

मै- नहीं यार ये तेरा बहम नहीं है। मैंने भी इस बात को कई बात नोट किया है। तनु के बर्ताव से तो ऐसा ही लगता है यार की वो अभिषेक को मुझसे दूर लेकर जा रही है। इस बारे में हमें अभिषेक से बात करनी पड़ेगी। मुझे लगने लगा है कि मुझसे गलती हो गई है अभिषेक को तनु का प्यार स्वीकार करने की सलाह देकर। जिस तरीके से अभिषेक पर तनु अपना एकाधिकार जमाने लगी है, मुझे लगता है कि तनु अभिषेक के लिए सही लड़की नहीं है।

महेश- सही कह रहे हो तुम नूनू भाई। हमे अभिषेक से इस बारे में बात करनी चाहिए।

इसके बाद हम अपनी कक्षा में चले गए। छुट्टी की बाद मैं घर लौट आया। रात को खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में आकर लेट गया और सोचने लगा। मुझे अभिषेक से बात करनी चाहिए या नहीं। कहीं अभिषेक ने मेरी बातों के गलत मतलब निकाल लिया तो। मुझे तनु से कोई मतलब पहले भी नहीं था और अब भी नहीं था, मैं बस अभिषेक को लेकर चिंतित था। आखिरकार मैंने फैसला लिया कि सही समय देखकर किसी दिन अभिषेक से बात करनी पड़ेगी। लेकिन हर समय तो तनु उसे घेरे रहती है तो उससे बात हो भी तो कैसे। फोन पर ये सब बात करना ठीक नहीं था। अगले दिन मैं स्कूल गया उस दिन महेश नहीं आया था उसने मुझे फोन करके पहले ही वता दिया था। भोजनावकास के समय मैं अकेले बाहर बैठा हुआ था तभी अभिषेक और तनु मुझे अकेला देखकर मेरे पास आकर बैठ गए। अभिषेक ने मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए पूछा।

अभिषेक- क्या बात है यार नयन। तु किसी सोच में डूबा हुआ है।

मैं- अभिषेक मुझे तुझसे कुछ जरूरी बात करनी है।

अभिषेक- हाँ बता न क्या बात करनी है तुझे।

मै- मुझे सिर्फ तुझसे बात करनी है वो भी अकेले में।

मेरी बात सुनकर तनु ने अजीब सा मुँह बना लिया। अभिषेक तनु को वहीं बैठने को बोलकर मेरे साथ थोड़ी दूर आकर बैठ गया और बोला।

अभिषेक- अब बता क्या बात है।

मै- देख अभिषेक मैं जो बात करने जा रहा हूँ हो सकता है तुझे खराब लगे, क्योंकि ये बात हम चारों से संबंधित है। मुझे लगता है कि तनु का प्यार तुम्हें मुझसे दूर ले जा रहा है। ये मुझे तनिक भी अच्छा नहीं लगता। तनु का व्यवहार भी मेरे साथ पहले जैसा नहीं रह गया है। और तू भी उसे कुछ नहीं कहता। और मुझे ये भी लगता है कि तनु तेरे लिए सही लड़की नही है।

अभिषेक- ये क्या बात कर रहा है तू। पागल हो गया है, क्या बकवास किए जा रहा है। मैं तुझसे कभी दूर जा सकता हूँ भला। तू तो मेरा भाई है यार। तनु को लेकर तेरे मन में जो भी है वो इसलिए है कि तुझे लगता है कि उसके आने से मैं तुझसे दूर हो गया हूँ। लेकिन मुझे नहीं लगता कि तनु ऐसी लड़की है जो हम दोनों को अलग करने का सोचे।

मै- मैं सही कह रहा हूँ तू सच में मुझसे दूर हो गया है। अब पहले जैसा नहीं रह गया है तू अभिषेक। तू और महेश ही हैं मेरे दोस्त, लेकिन तुझे तनु मुझसे दूर कर रही है। मैं ये नहीं होने दूँगा अभिषेक, मैं तनु से सीधे इस बारे में बात करूँगा।

मैंने ये बात एकदम गमगीन होकर कहा था, मेरी आँखें भर आई थी ये बात कहते हुए। अभिषेक ने मुझे इस हालत में देखा तो मुझे अपने गले लगा लिया और बोला।

अभिषेक- मुझे माफ कर दे भाई। ये सही है कि मैं इन कुछ दिनों में तुमको ज्यादा समय नहीं दे पाया, लेकिन ये भी सही है कि तेरे लिए मैं ऐसी कई तनु को छोड़ सकता हूँ। लेकिन तेरी दोस्ती नहीं छोड़ सकता, तुझे नहीं छोड़ सकता। तू मेरे दोस्त भी है और भाई भी है। तू कहे तो मैं आज ही तनु से अलगाव कर लूँ। लेकिन यार तू ऐसे रो मत। अब मुझसे ऐसी गलती कभी नहीं होगी। मैं आगे से तुझे शिकायत का कोई मौंके नहीं दूँगा।

अभिषेक की बात सुनकर मुझे अपने आपपर बहुत गुस्सा आया, मुझे अपनी सोच पर गुस्सा आया कि मैं अभिषेक को बचपन से जानता हूँ उसके बाद भी मैंने उसपर शक किया। लेकिन क्या करता मैं एक अनजाना भय मेरे अंदर बैठ गया था उससे दूर होने का, मैं अभिषेक से अलग होकर उसका हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा।

मै- मुझे माफ कर देना भाई। गलती मुझसे हुई है। मैंने पता नहीं क्या क्या सोच लिया था तेरे बारे में।

अभिषेक- चल अब ये ड्रामा बंद कर और चल यहाँ से नहीं तो लोग हमारे बारे में पता नहीं क्या क्या सोच लेंगे।

अभिषेक की बात सुनकर मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गई। और हम दोनो हँसते हुए वहाँ से चले गए।


इसके आगे की कहानी अगले भाग में।

16 rasgulle kha gaya Mahesh wow yaar ...lekin bechare ka pet kharab ho gaya hai😝😃😂....kisi ne kya khoob kaha hai ki free ka mile to khub khao lekin dhyan se kyoki pet to apana hai (note:- ye kisi Mai hi hu)...aage aapne kafi real bato ko dikhaya hai jaise tanu ka vyavahar nain aur Mahesh ke parti badalana ... it's a little harse reality...girls akasar chahane lagati hai ki wo jisse pyar kare wo larka usse sabase jyada mahtav de even fraind se bhi jyada ....aur issi baat ko kai baar show Karne ke chakkar me wo over possessive ho jati hai...aur larka ek aisi sthiti me pahuch jata hai jisme wo bant ke rah jata hai .... Abhishek ne kah Diya ki wo tanu se breakup Kar lega lekin kya ye baat itna aasan hai ...yaha par nain ne samajhdari dikha ke iss baat se Mana Kar Diya...but agar ye breakup ho jata aur tanu reason puchhati to Abhishek kya answer karta..... Abhishek ke jindgi me tanu ke entry se bahut se dramatic changes aaye hai ..ab Abhishek ki apne utne hi time me padai , dost , school, family, most important tanu ko bhi time dena hai..pahale Abhishek Ki life sidha aur simple thi but ab wo ghumavo se bhar rha hai...kuchh dino me shayad Abhishek sab kuchh sambhal ke menten Kar le...
 

Sanju@

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चौदहवाँ भाग


तनु ने अभिषेक का हाथ अपने हाथ में ले लिया और उसकी आँखों में देखते हुए कहा।

तनु- मैं जब से यहाँ पर आई हूँ तब से मैं तुम्हारे साथ हूँ। तुम्हारा स्वभाव, तुम्हारी बात और तुम्हारा व्यवहार ने मेरे दिल में एक अलग छाप छोड़ी है। मैं तुम्हें बहुत पसंद करती हूँ और तुमसे बहुत प्यार करती हूँ अभिषेक। आई लव यू अभिषेक। आई लव यू।

तनु के ऐसा करने के बाद वहाँ सन्नाटा छा गया। सभी आँखे फाड़े एक दूसरे को देखने लगे। सबसे ज्यादा अचंभित इस समय महेश था। उसे तो विश्वास ही नहीं हो रहा था कि तनु जिस लड़के से प्यार करने की बात करती थी वह अभिषेक ही है। मुझे तो पहले से ही शक था इस बात पर इसलिए मेरा बर्ताव सामान्य ही था। अभिषेक भी यह सुनकर चकित ही था, लेकिन उसके मन में भी थोड़ा बहुत तनु के लिए कुछ था इसलिए तनु की बात सुनकर अभिषेक ने कहा।

अभिषेक- ये सब क्या है तनु। अभी हम सब पढ़ने लिखने की उम्र में प्यार मोहब्बत की बात कैसे कर सकते हैं। पहले बोर्ड की परीक्षा खत्म हो जाए उसके बाद इस बारे में बात करते हैं।

तनु- नहीं अभिषेक, पढ़ाई लिखाई के साथ ये सब भी जरूरी है। और मुझे तुम्हारा जवाब अभी चाहिए वो भी हाँ में चाहिए।

महेश- अरे ऐसे कैसे। मैंने भी तुमसे अपने प्यार का इजहार किया था, लेकिन तुमने इस घोंचू के लिए मुझे मना कर दिया। और अब जब अभिषेक कोई जवाब नहीं दे रहा है तो तुम उससे जबदस्ती कर रही हो। ये सही बात नहीं है तनु।

तनु- महेश तुम चुप रहो और दोबारा अभिषेक को घोंचू मत कहना। हाँ अभिषेक तुम इसके लिए कल तक का समय ले सकते हो। तब तक अच्छे से सोच लो। मुझे तुम्हारा जवाब हाँ में ही चाहिए। क्योंकि मैं बहुत जिद्दी हूँ और जब तक तुम हाँ नहीं कहोगे मैं तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ूँगी।

मैं- ये कैसी बात कर रही हो तनु। महेश हमारा बचपन का दोस्त है। हम सब आपस में ऐसी बाते करते रहते हैं। तुम्हें इस तरह से महेश से बात नहीं करनी चाहिए। आखिर वो तुम्हारा भी दोस्त है।

तनु- वो गलती से मेरे मुँह से निकल गया। मुझे माफ कर देना महेश। लेकिन तुम्हें ऐसे अभिषेक को नहीं बोलना चाहिए। अच्छा नहीं लगता है ये सब।

इतना कहकर तनु उठकर वहाँ से चली गई। अब वहाँ हम तीनो रह गए। अभिषेक गहरी सोच में बैठा था। मैंने अभिषेक को देखते हुए कहा।

मैं- क्या सोच रहा है यार। मैंने तो तुझसे पहले ही बोला था कि शायद तनु तुझसे प्यार करती है, लेकिन तुमने कहा था कि जब वो अपने प्यार का अजहार करेगी तब सोचेंगे इसके बारे में। अब तो उसने अपने प्यार का इजहार कर भी दिया है। अब क्या कहता है तू।

अभिषेक- मैं अभी भी असमंजस की स्थिति में हूँ भाई। मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि मुझे हाँ करना चाहिए या नहीं।

महेश- देखो अभिषेक, तुम्हें हाँ या न में जवाब तो देना ही है। तुम आराम से सोच समझकर ही अपना जवाब देना। इस मामले में कोई जल्दबाजी मत करना मेरे भाई।

अभिषेक- तुम ठीक कह रहे हो यार, चलो छोड़ो इस बात को। क्लास का समय हो रहा है कक्षा में चलते हैं।

इसके बाद हम तीनो कक्षा में चले गए। क्लास अटेंड करने के बाद हम लोग अपने अपने घर निकल गए। रात में खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में बैठा पढ़ाई कर रहा था, तभी अभिषेक के फोने मेरे मोबाइल पर आया। मैंने फोने उठाते हुए कहा।

मैं- हाँ अभिषेक। इस समय फोन सब ठीक तो है न।

अभिषेक- कुछ ठीक नहीं है भाई।

मैं- अरे क्या हुआ यार, तू इतना परेशान क्यों है।

अभिषेक- यार मेरे कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि मैं क्या करूँ। शुरू शुरू में मुझे भी ऐसा लगता था कि शायद मेरे मन में भी तनु के लिए कुछ है, लेकिन तुझसे बात करने के बाद मुझे समझ में आया कि वो मेरे आकर्षण था। अब तनु के इजहार के बाद वैसी ही इच्छा मेरे मन में फिर से आ रही हैं जैसे पहले आया करती थी। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि ये प्यार का एहसास है या आकर्षण है तनु के प्रति।

मैं- देख यार। मैं तुझे कभी कोई गलत सलाह नहीं दूँगा। अगर तेरे मन में उसके लिए तनिक भी प्यार है तो तू उसे हाँ कर दे। अगर फिर भी तेरे कुछ न समझ में न आए और तू कोई निर्णय न ले पा रहा हो तो अपनी आँख बंद करके अपना एक हाथ अपने दिल पर रखकर ठंडे दिमाक और शांत चित से सोच ले। तुझे जवाब मिल जाएगा। एक बात और कहूगाँ दोस्त तुझसे कि तुझे जो भी हाँ या न कहना है वो कहकर इस मामले को यहीं खत्म कर दे, क्योंकि बोर्ड की परीक्षा सिर पर है। अगर तू ऐसे ही विचलित रहेगा तो कैसे चलेगा भाई। मेरी बात पर अच्छी तरह गौर करने और कल अपने निर्णय तनु को सुना देना।

अभिषेक- धन्यवाद यार। तूने मेरे परेशानी एक मिनट में सुलझा दी। ठीक है अब फोन रख रहा हूँ। कल सुबह स्कूल में मिलता हूँ फिर बात करेंगें।

इसके बाद अभिषेक ने फोन रख दिया। काजल जो अभी तक सोई नहीं थी, मेरे फोन रखने के बाद बोली।

काजल-क्या बात है भैया। किससे चोरी चोरी बातें हो रही हैं।

मैं- अरे कुछ नहीं वो अभिषेक का फोन था उसी से बातें कर रहा था।

काजल- अभिषेक भैया का फोन था या चुपके चुपके अपनी महिला मित्र से बात कर रहे थे।

मैं- चुप कर तू। ज्यादा फालतू में अपना दिमाग मत चलाया कर। इतना दिमाग अगर पढाई में लगाती तो आज पूरी कक्षा में अव्वल आती। चल सो जा अब।

मेरे कहने के बाद पायल मुँह बनाकर करवट बदल ली और सोने लगी। मैंने थोड़ी देर और पढ़ाई की। उसके बाद मैंने किताब बंद की और सो गया।

सुबह उठकर मैं तैयार होकर नाश्ता करने के बाद स्कूल चला गया। वहाँ अभिषेक और महेश मुझे बाहर ही मिल गए। हम तीनो अपनी कक्षा में जाकर अपनी अपनी जगह पर बैठ गए। थोड़ी देर बाद शिक्षक आ गए और क्लास शुरू हो गई। इसी तरह पढ़ाई करते हुए भोजनावकाश का समय हो गया। कक्षा से बाहर आते हुए महेश बाथरूम जाने का बोलकर चला गया। मैं और अभिषेक आकर परिसर में खाली जगह देखकर बैठ गए। बैठने के बाद मैंने अभिषेक से पूछा

मैं- तो फिर क्या सोचा है तुमने तनु के बारे में।

अभिषेक- कल रात तेरे बताए हुए तरीके से मैंने सोचा, तो मुझे लगा कि शायद मेरे दिल के किसी कोने में तनु के लिए कुछ तो है। इसलिए मैंने निर्णय लिया है कि मैं तनु के प्यार के इजहार को स्वीकार कर लेना चाहिए।

अभिषेक की बात सुनकर मैं खुश हो गया और उसे गले से लगाकर बोला।

मैं- ये तुमने बहुत अच्छा किया अभिषेक। मेरा भी यही मानना था कि तुम्हें तनु के प्रपोजल को मान लेना चाहिए।

अभी हम बात कर ही रहे थे कि वहाँ पर तनु आ गई और उसके पीछे पीछे महेश भी आ गया। तनु आकर हम दोनों के पास बैठती हुई बोली।

तनु- क्या बात है। तुम दोनो बड़े खुश दिखाई दे रहे हो। जरा मैं भी तो सुनूँ कि किस खुशी में तुम दोनो एक दूसरे के गले मिल रहे हो।

मैं- ये हम दोनों दोस्तों के बीच की बात है। कुछ समय बाद तुम्हें भी पता चल जाएगा।

उसके बाद हम चारों बैठे हुए इधर उधर की बातें करने लगे। थोड़ी देर इधर उधर की बातें करने के बाद आखिरकार तनु ने अभिषेक से पूछ ही लिया।

तनु- अभिषेक तुमने अभी तक मेरे प्रपोजल का कोई जवाब नहीं दिया। क्या मैं तुम्हें पसंद नहीं हूँ। या तुम किसी और को चाहते हो जिसके लिए मेरा प्रपोजल ठुकरा रहे हो।

अभिषेक- नहीं मैं किसी और से प्यार नहीं करता और मैंने कहाँ तुम्हारा प्रपोजल ठुकराया है। अभी तो मैंने तुम्हें कोई जवाब भी नहीं दिया है।

तनु- तो तुम्हारा क्या जवाब है अभिषेक।

इतने कहकर तनु अभिषेक को देखने लगी। तनु के चेहरे का भाव प्रतिपल बदल रहा था। उसे अभिषेक के जवाब की प्रतीक्षा करना मुश्किल हो रहा था। अभिषेक ने गहरी सांस लेते हुए कहा।

तनु- देखो तनु। मैंने कल बहुत गहराई से तुम्हारे बारे में सोचा। मुझे भी ऐसा लगता है कि मेरे दिल में भी तुम्हारे लिए कुछ जज्बात तो हैं। शायद ये प्यार ही हो। इसलिए मैं तुम्हारा दिल नहीं तोड़ना चाहता। मैं भी तुम प्यार करता हूँ। आई लव यू तनु।

तनु- क्या सच में अभिषेक। थैंक यू सो मच। तुम नहीं जानते अभिषेक मैं आज कितनी खुश हूँ। मुझे पता था कि तुम्हारा जवाब हां में ही होगा।

इतना कहकर तनु अभिषेक से लिपट गई और उसे जोर से अपनी बाहों में भर लिया। बाहों में भरने के बाद तनु ने अभिषेक के होंठों पर अपने होंठ रख दिये और चूमने लगी। अभिषेक की आंखे बड़ी हो गई तनु के ऐसा करने पर, क्योंकि जब कोई लड़की पहली बार ऐसा करती है तो ये सब होना स्वाभाविक है। अभिषेक तो जैसे बुत से बन गया था। जिसे महेश ने होश में लाते हुए कहा।

महेश- कुछ तो शर्म करो तुम दोनों। एकदम बेशर्मों की तरह चूम रहे हो एक दूसरे को। हम दोनों यहां हैं तब ये हाल है। पता नहीं अकेले होंगे तो क्या क्या करोगे।

महेश ने क्या क्या पर बहुत जोर दिया जिसके मतलब हम अभिषेक, मैं और तनु भी समझ गए, तनु वहां से शरमाकर भाग गई और अभिषेक महेश को घूरने लगा। महेश ने दांत निपोरते हुए कहा।

महेश- हो गया अब तुम दोनों का। चल बेटा अभिषेक तेरा मुंह तो मीठा हो गया। अब हमारा भी मुंह मीठा करा।

अभिषेक- अच्छा तुझे मुंह मीठा करना है। आ यहां मेरे पास बैठ मैं तेरा मुंह मीठा करवाता हूँ।

अभिषेक ने महेश को अपने पास बैठने के लिए कहा और अपने होंठ को गोल बनाकर महेश को इशारा किया। अभिषेक की इस हरकत से मेरी हंसी छूट गई। महेश ने अभिषेक को घूरते हुए कहा।

महेश- बकचोद साले। मुझे गे समझता है क्या तू। अभी मेरे इतने बुरे दिन भी नहीं आए हैं कि मुझे तेरा चुम्मा लेना पड़े। अब चुपचाप चल बाहर और मुंह मीठा करवा हम दोनों का।

अभिषेक- तो उसके लिए बाहर जाने की क्या जरूरत में यहीं तेरा मुंह मीठा करवा देता हूँ।

इतना कहकर अभिषेक ने अपनी जेब मे हाथ डाला और लेबिनचूस/कम्पट (आज के जमाने का चॉकलेट जो 5 ₹ में दस मिलती है।) ऑरेंज फ्लेवर का निकाला और महेश को देते हुए बोला।

अभिषेक- ले अपना मुंह मीठा कर। मुझे पहले से पता था कि तू ऐसा ही कुछ करेगा। इसलिए खासतौर से मैंने तेरे लिए ही ली है ये।

लेबिनचूस/कम्पट देखकर महेश का पारा ऊपर चढ़ गया और वो महेश पर भड़कता हुआ बोला।

महेश- ये कम्पट तू अपनी गांड में दाल ले भोस.... ले। तू साले बहुत बड़ा कंजूस है। लड़की ने आगे से चलकर तुझे प्रपोज किया और तू मुझे कम्पट खिला रहा है। पता नहीं तनु को तुझमें क्या दिखा जो वो अपने होशोहवास खो बैठी है। पता नहीं उसका क्या होगा, जो इतना कंजूस प्रेमी मिला है।

महेश ने बात की शुरुआत तो गुस्से से की थी लेकिन बात खत्म होते होते उसकी बात हास्यप्रद हो गई। उसकी बात सुनकर हम दोनों हँसने लगे। जब हमारी हंसी रुकी तो अभिषेक ने कहा।

अभिषेक- चल तू भी क्या याद करेगा कि किसी दिलदार आदमी से पाला पड़ा है। चल तुझे नहर ददोली का सुप्रसिद्ध रसगुल्ला खिलाता हूँ।

रसगुल्ले का नाम सुनकर महेश बहुत खुश हुआ। और अभिषेक का हाथ पकड़कर उसे खींचते हुए स्कूल से बाहर ले जाने लगा। मैं भी दोनों के पीछे पीछे चलने लगा।


इसके आगे की कहानी अगले भाग में।

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Tanu ka pyar Abhishek ne accept hi kar liya
 
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Sanju@

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तनु के प्यार का इजहार को मानने के बाद महेश के कहने पर अभिषेक हमें रसगुल्ला खिलाने ले गया। दुकान पर जाने के बाद अभिषेक ने एक एक प्लेट में दो रसगुल्ले की तीन प्लेट का ऑर्डर दिया। थोड़ी देर बार रसगुल्ले की प्लेट हम लोगों के सामने आ गई। महेश रसगुल्ले पर टूट पड़ा। हम दोनों का एक रसगुल्ला भी नहीं खत्म हुआ था और महेश की प्लेट साफ हो चुकी थी। वो हम दोनों की तरफ ललचाई हुई नजरों से देख रहा था। अभिषेक ने उससे पूछा।

अभिषेक- अब क्या है। ऐसे क्यों देख रहा है। नजर लगाएगा क्या।

महेश- अबे और खाने का मन है। तू कहे तो और ले लूँ।

अभिषेक- रसगुल्ला मन बदलने और स्वाद लेने की चीज होती है। पेट भरने की नहीं। ठीक है ले ले।

फिर महेश ने अपने लिए और रसगुल्ला मंगा लिया। कुछ देर में उसने वो रसगुल्ले खा डाले और अभिषेक की तरफ फिर से देखने लगा। अभिषेक ने उससे फिर कहा।

अभिषेक- अब क्या है। और खाएगा क्या।

महेश ने बेचारे सी शक्ल बनाकर हाँ में सिर हिलाया। अभिषेक ने उससे कहा।

अभिषेक- साले एकदम पेटू है क्या तू। कोई इतना रसगुल्ला खाता है क्या। शादी नहीं हुई है मेरी जो तू रसगुल्ला पेले पड़ा है।

महेश- भाई बस तू बोल दे कि पेट भर कर खिला दें। 4 तो खा ही चुका हूँ ज्यादा से ज्यादा 2-3 और खाऊँगा। बोल दे न भाई।

महेश की बात सुनकर मैंने भी सोचा की महेश सही कह रहा है। और कितना खाएगा। 2-3 में पेट तो भर ही जाएगा। तो यही सोचकर मैंने उसे भरपेट रसगुल्ला खाने के लिए बोल दिया। बस फिर क्या था। महेश ने जो रसगुल्ला खाना शुरू किया तो खाता गया खाता गया। और आखिरकार 16 रसगुल्ला खाकर उसने एक लम्बी डकार ली और पानी पीने लगा। मैं और अभिषेक आँखे फाड़े महेश को देख रहे थे। इतने वर्षों की दोस्ती में आज बता चल रहा था कि महेश रसगुल्ले के लिए कितना पेटू है। जब महेश पानी पी कर खाली हुआ तो मैंने कहा।

मै- ये सब क्या था बे। कोई ऐसे खाता है क्या। कितने दिन से भूखा था तू। आस-पास देश सभी तुझे ही देख रहे हैं। और सोच रहे होंने कि कैसा भुक्खड़ इनसान है ये।

मेरी बात सुनकर महेश ने आस-पास देखा तो कुछ लोग महेश को ही देख रहे थे अजीब नजरों से। कुछ देर बाद अभिषेक ने महेश से कहा।

अभिषेक- साले मुझे पता होता कि तू आज मेरा बैंड बजाकर रहेगा तो मैं तुझे कभी न खिलाता रसगुल्ला। साले पूरा 16 रसगुल्ला खाया तूने। कम से कम रसगुल्ले का आकार देख लेता। छोटा वाला रसगुल्ला नहीं था ये मेरे बाप। बड़ा वाला था। मेरी बारात में नहीं आया था तू जो इतना छककर खाए पड़ा था। मेरी तो महीने भर का जेब खर्च तूने एक ही दिन में साफ कर दिया। देखने मेरी बददुआ लगेगी तुझे। कल तेरी गाँड़ न चल गई तो कहना।

अभिषेक की बात सुनकर महेश खीस निपोरने लगा। महेश ने जाकर रसगुल्ले के पैसे दिए हलवाई को। फिर अपने स्कूल चले गए। पूरी क्लास करने के बाद छुट्टी होने पर हम घर आ गए। उसके बाद कुछ खास नहीं हुआ। अगले दिन जब मैं स्कूल पहुँचा तो अभिषेक मुझे स्कूल में दिखा, परंतु महेश कहीं भी दूर-दूर तक नजर नहीं आया तो मैंने अभिषेक से पूछा।

मैं- अभिषेक ये महेश आज स्कूल नहीं आया क्या कहीं दिखाई नहीं दे रहा है।

मेरी बात सुनकर अभिषेक मुस्कुराने लगा, उसके मुस्कुराने का राज मैं नहीं समझ पाया तो मैंने फिर से अभिषेक से पूछा।

मैं- अरे यार मैं कुछ पूछ रहा हूँ और तू है कि बस मुस्कुराए जा रहा है। आखिर बात क्या है।

अभिषेक- तुझे पता है महेश क्यों नहीं आया है। उसकी तबीयत ठीक नहीं है।

मैं- उसकी तबीयत ठीक नहीं है तो इसमें हँसने की कौन सी बात हो गई है। हमें तो उसके लिए संवेदना जताना चाहिए।

अभिषेक- अरे बात वो नहीं है। बात ये है कि उसकी गाँड़ चलने लगी है। पेट में गुड़गुड़ाहट हो रही है उसके।

मैं- मुझे कैसे पता इस बारे में।

अभिषेक- अरे यार सुबह तड़के उसने मुझे फोन किया था और फोन उठाते ही मुझे गाली देने लगा। कहने लगा मैंने नजर लगा दी है। कल मैंने तो वैसे ही मजाक में वोल दिया था कि तुम्हारी गांड़ चल जाएगी। मुझे थोड़े ही मालूम था कि मेरी कही हुई बात सच हो जाएगी। सुबह से कई बार मुझे फोन कर चुका है बोल रहा है कि मेरी जुबान ही काली है। अब उसे कौन समझाए की ये सब मेरी जुबान का कमाल नहीं है कल खाए हुए 16 रसगुल्ले का कमाल है।

अभिषेक की बात सुनकर मेरे चेहरे पर भी मुस्कान आ गई। फिर हम दोनों अपनी कक्षा में जाने लगे तभी अभिषेक को फोन बजा। अभिषेक ने देखा तो महेश का ही फोन था। अभिषेक ने फोन मुझे दिया तो मैंने फोन उठाया। जैसे ही फोन मैंने अपने कान में लगाया महेश की मधुर वाणी मेरे कानों में शहद घोर लई।

महेश- साले भोस......ले। तू कभी सुखी नहीं रहेगा। भगवान करे एक दिन तेरे साथ भी यही हो। गाँडू तुझे पता है। सुबह से मैं नहर किनारे ही बैठा हूँ। घर भी नहीं जा पा रहा हूँ। घर जाते हुए रास्ते से मुझे वापस लौटना पड़ता है। ये सब तेरा किया धरा है साले।

मैं- और जो तुमने बिना सोचे समझे पेट भर के रसगुल्ले खाए थे उसका क्या। ये सब उसी का परिणाम है महेश।

महेश- अरे नूनू भाई। माफ करना भाई। मैंने सोचा वो साला अभिषेक है फोन पर। ये रसगुल्ले के कारण नहीं हुआ है। मैंने पहली वार थोड़े ही न रसगुल्ले खाए हैं। इसके पहले भी मैंने बहुत बार ऐसे ही खाए हैं, लेकिन कभी ऐसा नहीं हुआ। ये सब अभिषेक की काली जुबान की वजह से हुआ है। आहहहहहह.. मेरा पेट। भाई तू फोन रख। फिर से आई है। मैं जा रहा हूँ।

इतने कहकर महेश ने फोन काट दिया। मैने अभिषेक की तरफ देखा। तो वो मुझे ही देख रहा था। लगभग 3 सेकेण्ड बाद अचानक से दोनो के मुँह से हसी का ठहाका निकल पड़ा और हम दोनो हँसते हँसते अपनी कक्षा मैं चले गए। कक्षा में जाने के बाद देखा कि अभिषेक की मैना मतलब तनु पहले से ही कक्षा में बैठी हुई थी। उसने अभिषेक हो हाय... का इशारा किया। मैं चुपचाप अपनी सीट पर जाकर बैठ गया और पढ़ाई करने लगा। इसी तरह ये दिन भी बीत गया।

अगले दो दिन तक महेश स्कूल नहीं आया था। इन दो दिनों में कोई खास बात नहीं हुई। उसके बाद अगले दिन इतवार था। चौथे दिन महेश स्कूल आया। वो रोज की अपेक्षा कुछ ढीला लग रहा था। उसने मुझसे हाथ मिलाया अभिषेक की पीठ पर एक मुक्का मारा। अभिषेक अपनी पीठ को सहलाते हुए कहा।

अभिषेक- ये क्या है बे। मुझे क्यों मारा तूने।

महेश- साले तेरा प्यार मुझे रास नहीं आया। तेरे प्यार ने मेरे पेट के छक्के छुड़ा दिए।

महेश की बात सुनकर हम सब हँसने लगे। इसी तरह दिन बीतते रहे और अभिषेक और तनु का प्यार और गहरा होता जा रहा था। इस दौरान मैंने और महेश ने एक बात ध्यान दी कि तनु का व्यवहार अब मेरे और महेश के प्रति वैसा नहीं रह गया था जैसा पहले हुआ करता था। अब वो मुझसे और महेश से ठीक से बात भी नहीं करती थी। किसी भी छोटी सी बात को लेकर वो चिढ़ जाया करती थी। ये सब अभिषेक के सामने होता था पहले तो अभिषेक ने तनु को दो-चार बार समझाया भी लेकिन अब वह भी कुछ नहीं वोलता था, इस बात से कभी मुझे गुस्सा भी आता था। मुझे लगने लगा था कि ये तनु अभिषेक को मुझसे दूर ले जा रही है और अभिषेक मुझसे दूर जा रहा है। एक दिन मैं और महेश स्कूल के परिसर में बैठे हुए बातें कर रहे थे। अभिषेक और तनु हमसे कुछ दूरी पर बैठे हुए थे। तभी महेश ने मुझसे कहा।

महेश- यार नूनू। मैं कई दिनों से तुझसे एक बात कहना चाहता हूँ। पता नहीं ये सच है या मेरा भ्रम। लेकिन बात हमसे जुड़ी हुई है।

मैं- ऐसी क्या बात है यार। तू बता तो सही।

महेश- यार मुझे लग रहा है कि तनु और अभिषेक बदल गए हैं। अब तनु का बर्ताव हम दोनों के प्रति पहले की तरह नहीं रह गया है। बात बात पर चिढ़ जाती है। ऐसा लगता है जैसे उसके कोई मकसद पूरा हो गया हो और हमे दूध में पड़ी मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया उसने। अभिषेक भी अब पहले की अपेक्षा कम बात करता है हमसे। हो सकता है ये मेरा वहम हो, लेकिन यही बात कई दिनों से मेरे मन में आ रही थी।

मै- नहीं यार ये तेरा बहम नहीं है। मैंने भी इस बात को कई बात नोट किया है। तनु के बर्ताव से तो ऐसा ही लगता है यार की वो अभिषेक को मुझसे दूर लेकर जा रही है। इस बारे में हमें अभिषेक से बात करनी पड़ेगी। मुझे लगने लगा है कि मुझसे गलती हो गई है अभिषेक को तनु का प्यार स्वीकार करने की सलाह देकर। जिस तरीके से अभिषेक पर तनु अपना एकाधिकार जमाने लगी है, मुझे लगता है कि तनु अभिषेक के लिए सही लड़की नहीं है।

महेश- सही कह रहे हो तुम नूनू भाई। हमे अभिषेक से इस बारे में बात करनी चाहिए।

इसके बाद हम अपनी कक्षा में चले गए। छुट्टी की बाद मैं घर लौट आया। रात को खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में आकर लेट गया और सोचने लगा। मुझे अभिषेक से बात करनी चाहिए या नहीं। कहीं अभिषेक ने मेरी बातों के गलत मतलब निकाल लिया तो। मुझे तनु से कोई मतलब पहले भी नहीं था और अब भी नहीं था, मैं बस अभिषेक को लेकर चिंतित था। आखिरकार मैंने फैसला लिया कि सही समय देखकर किसी दिन अभिषेक से बात करनी पड़ेगी। लेकिन हर समय तो तनु उसे घेरे रहती है तो उससे बात हो भी तो कैसे। फोन पर ये सब बात करना ठीक नहीं था। अगले दिन मैं स्कूल गया उस दिन महेश नहीं आया था उसने मुझे फोन करके पहले ही वता दिया था। भोजनावकास के समय मैं अकेले बाहर बैठा हुआ था तभी अभिषेक और तनु मुझे अकेला देखकर मेरे पास आकर बैठ गए। अभिषेक ने मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए पूछा।

अभिषेक- क्या बात है यार नयन। तु किसी सोच में डूबा हुआ है।

मैं- अभिषेक मुझे तुझसे कुछ जरूरी बात करनी है।

अभिषेक- हाँ बता न क्या बात करनी है तुझे।

मै- मुझे सिर्फ तुझसे बात करनी है वो भी अकेले में।

मेरी बात सुनकर तनु ने अजीब सा मुँह बना लिया। अभिषेक तनु को वहीं बैठने को बोलकर मेरे साथ थोड़ी दूर आकर बैठ गया और बोला।

अभिषेक- अब बता क्या बात है।

मै- देख अभिषेक मैं जो बात करने जा रहा हूँ हो सकता है तुझे खराब लगे, क्योंकि ये बात हम चारों से संबंधित है। मुझे लगता है कि तनु का प्यार तुम्हें मुझसे दूर ले जा रहा है। ये मुझे तनिक भी अच्छा नहीं लगता। तनु का व्यवहार भी मेरे साथ पहले जैसा नहीं रह गया है। और तू भी उसे कुछ नहीं कहता। और मुझे ये भी लगता है कि तनु तेरे लिए सही लड़की नही है।

अभिषेक- ये क्या बात कर रहा है तू। पागल हो गया है, क्या बकवास किए जा रहा है। मैं तुझसे कभी दूर जा सकता हूँ भला। तू तो मेरा भाई है यार। तनु को लेकर तेरे मन में जो भी है वो इसलिए है कि तुझे लगता है कि उसके आने से मैं तुझसे दूर हो गया हूँ। लेकिन मुझे नहीं लगता कि तनु ऐसी लड़की है जो हम दोनों को अलग करने का सोचे।

मै- मैं सही कह रहा हूँ तू सच में मुझसे दूर हो गया है। अब पहले जैसा नहीं रह गया है तू अभिषेक। तू और महेश ही हैं मेरे दोस्त, लेकिन तुझे तनु मुझसे दूर कर रही है। मैं ये नहीं होने दूँगा अभिषेक, मैं तनु से सीधे इस बारे में बात करूँगा।

मैंने ये बात एकदम गमगीन होकर कहा था, मेरी आँखें भर आई थी ये बात कहते हुए। अभिषेक ने मुझे इस हालत में देखा तो मुझे अपने गले लगा लिया और बोला।

अभिषेक- मुझे माफ कर दे भाई। ये सही है कि मैं इन कुछ दिनों में तुमको ज्यादा समय नहीं दे पाया, लेकिन ये भी सही है कि तेरे लिए मैं ऐसी कई तनु को छोड़ सकता हूँ। लेकिन तेरी दोस्ती नहीं छोड़ सकता, तुझे नहीं छोड़ सकता। तू मेरे दोस्त भी है और भाई भी है। तू कहे तो मैं आज ही तनु से अलगाव कर लूँ। लेकिन यार तू ऐसे रो मत। अब मुझसे ऐसी गलती कभी नहीं होगी। मैं आगे से तुझे शिकायत का कोई मौंके नहीं दूँगा।

अभिषेक की बात सुनकर मुझे अपने आपपर बहुत गुस्सा आया, मुझे अपनी सोच पर गुस्सा आया कि मैं अभिषेक को बचपन से जानता हूँ उसके बाद भी मैंने उसपर शक किया। लेकिन क्या करता मैं एक अनजाना भय मेरे अंदर बैठ गया था उससे दूर होने का, मैं अभिषेक से अलग होकर उसका हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा।

मै- मुझे माफ कर देना भाई। गलती मुझसे हुई है। मैंने पता नहीं क्या क्या सोच लिया था तेरे बारे में।

अभिषेक- चल अब ये ड्रामा बंद कर और चल यहाँ से नहीं तो लोग हमारे बारे में पता नहीं क्या क्या सोच लेंगे।

अभिषेक की बात सुनकर मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गई। और हम दोनो हँसते हुए वहाँ से चले गए।


इसके आगे की कहानी अगले भाग में।

Lovely update
Amazing update
Lagta h Tanu Abhishek w nayan ko aaps me alg kar sakti h
 
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Mahi Maurya

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Behtareen update,
Jarur koi bada Bawal hone wala hai.
बहुत बहुत धन्यवाद आपका सर जी।

शायद ऐसा ही कुछ हो।
साथ बने रहिए।
 

Mahi Maurya

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सिर्फ सोलह रसगुल्ले खाने से महेश को लुज मोशन हो गया । जबकि मैं तो आज भी चालीस रसगुल्ले खा लूं तो भी कुछ न होने वाला है । रसगुल्ला ! नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाए ।
वैसे भी बंगाल का रसगुल्ला पुरे विश्व में फेमस है ।

जरूर महेश ने कचौड़ी या तले हुए खाद्य-पदार्थों को खाया होगा ।
वैसे अभिषेक और तनु को एक दूसरे को प्यार का इजहार किए हुए ज्यादा दिन नहीं हुए तो दोनों को कुछेक दिनों तक इलू इलू खेलना बनता ही है । अभिषेक कुछ दिनों से ज्यादा टाइम एक्सपेंड नहीं करता नयन के साथ तो इसमें कोई बड़ी बात नहीं थी ।
" पहला पहला प्यार है , पहली पहली बार है । " :D

बहुत ही बढ़िया अपडेट माही जी ।
आउटस्टैंडिंग अपडेट ।
धन्यवाद आपका सर जी आपकी समीक्षा के लिए।
40 रसगुल्ला खाने के लिए मजबूत मशीन की जरूरत पड़ती है सर जी। आप की मशीन बहुत मजबूत है ऐसा लगता है😂😂😂
आपकी बात भी सही है इलू इलू करने के लिए समय दिया जाना चाहिए, लेकिन नयन की भी बात सही है कि तनु का व्यवहार अब बदल गया है और ये आने वाले वक्त में पता चल ही जाएगा।
साथ बने रहिए।
 

Mahi Maurya

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mast update ..khushi manane ke chakkar me mahesh ne 16 rasgulle kha liye aur dusre din pet kharab hua phir abhishek ko gaali dena chalu kar liya 🤣🤣🤣🤣..

tanu ne apna rang dikhana chalu kiya aur ab wo mahesh aur nayan pe chidhne bhi lagi hai 😡..
mahesh ko bhi andaja ho gaya hai ki abhishek unse dur ho raha hai tanu ki wajah se aur ye baat usne nayan ko bata di .

nayan ne apne dil me jo hai wo abhishek ko bata diya aur abhishek bhi sehmat hai baat se ..

😍😍.. nayan aur abhishek ,mahesh ki dosti best hai ..isliye abhishek ne tanu ko chhodne ki baat keh di ..

aur shayad dono ka break up ho jayega aaj nahi to aage chalkar jiska jimmedar tanu nayan ko samjhegi 🤔🤔🤔..
धन्यवाद सर जी आपकी इतनी अच्छी समीक्षा के लिए।
तनु का व्यवहार बदल गया है और इसका परिणाम फिलहाल अच्छा तो नहीं होने वाला। कोई न कोई कांड जरूर करेगी तनु, ये कहना गलत न होगा।
अभिषेक और नयन को दोस्ती वैसी ही है आज भी, लेकिन तनु की नजर इस दोस्ती को लग चुकी है। देखते हैं आगे क्या होता है
साथ बने रहिए।
 
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