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Incest ससुराल की नयी दिशा

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prkin

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TharkiPo

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ससुराल की नयी दिशा
अध्याय २४: दिशा की ससुराल ​

अब तक:

नलिनी दिशा की ससुराल पहुंच चुकी है और उसकी पहली चुदाई उसके ही दामाद देवेश के द्वारा ही हुई है. उसकी बेटी के साथ भी कुछ हल्की फुल्की सी चूमा चाटी भी हो आयी. देवेश से गांड मरवाने के बाद वो पूर्ण रूप से संतुष्ट थी. परन्तु इस कारण रितेश और जयेश को अतिरिक्त प्रतीक्षा करनी पड़ी अपनी प्यारी नानी के पास आने में. पर अब वो दोनों इसका पूरा लाभ उठाने वाले थे.

अब आगे:

सरिता का कमरा:


“नानी, कितनी देर लगा दी!” जयेश बोला.
रितेश और जयेश अब तक अपने कपड़े निकाल चुके थे. आज उनका आशय था कि नानी की घनघोर चुदाई की जाये. सरिता भी इस आशा से अपने दोनों नातियों को देख रही थी.
इन के कमरे में कुछ ही देर में लौटते हैं क्योंकि एक घटना हो रही है जिसे देखना नितांत आवश्यक है.

अविका का अप्रत्याशित कॉल:

जहाँ रितेश और जयेश अपनी नानी पर चढ़ने के लिए तत्पर थे वहीँ अविका के फोन की घंटी बजी. उसने देखा तो आश्चर्यचकित हो उठी. ये फोन उसकी भाभी संध्या का था. पिछले सात वर्ष से उसके भाई ने उनके साथ संबंध विच्छेद कर लिया था. जब उसके भाई अमोल को उनकी पारिवारिक चुदाई की भनक लगी तो उसने अविका को आड़े हाथ लिया था और उसके बाद से कभी दोबारा बात तक नहीं की थी. काँपते हाथों से उसने फोन उठाया.
“भाभी?” हल्के स्वर में बोली.
“अविका. कैसी हो?” संध्या ने पूछा.
“भाभी, क्या सच में अपने मुझे फोन किया है?”
“हाँ. तुम्हें ही किया है.”
“भैया से पूछा?”
“नहीं, पर वो कुछ नहीं कहेंगे. न मना ही करेंगे. मैंने उन्हें समझाया है.”
अविका रोने लगी. संध्या ने उसे कुछ समय दिया. जब अविका की सुबकियां बंद हुईं तो वो बैठ गई.
अविका: “तो क्या भैया ने मुझे, हम सबको क्षमा कर दिया है?”
संध्या: “कुछ ऐसा ही समझो।”
अविका: “भाभी, अंकुर और पराग कैसे हैं?”
अंकुर संध्या का बड़ा बेटा था और पराग छोटा.
संध्या: “दोनों अच्छे हैं, अविका अंकुर का विवाह भी हो चुका है, दो वर्ष पहले. मेरे बहुत कहने के बाद भी तुम्हारे भैया ने तुम सबको आमंत्रित नहीं किया. इसका मुझे दुःख है.”
अविका: “कोई बात नहीं भाभी. मैं समझती हूँ. भैया कैसे हैं? हमें याद करते हैं क्या कभी?”
संध्या: “हाँ, अच्छे हैं और अब बहुत याद करते हैं. ये सब रिया के ही कारण हुआ है.”
अविका: “रिया?”
संध्या: “हाँ, रिया. अंकुर की पत्नी. उसके आने के कुछ समय बाद ही हमारे घर में बहुत कुछ बदल गया.”
अविका: “ये तो अच्छा है न भाभी. आप भी खुश लग रही हो.”
संध्या: “हाँ. अविका, क्या अब भी तुम सब…”
अविका: “जी भाभी.”
संध्या: “अभी क्या कर रही हो?”
अविका: “बैठी हूँ, आपसे बात कर रही हूँ.”
संध्या कुछ देर शांत रही.
संध्या: “अविका, मैं तुम्हें वीडियो कॉल कर रही हूँ. तुम्हें देखने का मन है.”
अविका: “जी भाभी.”
कॉल कट गयी और कुछ ही देर में फिर कॉल आयी, इस बार वीडियो के लिए.

अविका ने संध्या भाभी को सात वर्ष बाद देखा तो उसकी आँखें भर आयीं। संध्या की आँखों में भी आँसू थे.
अविका: “भाभी आप तो अब और भी सुंदर लग रही हो. लगता है भैया बहुत ध्यान रखते हैं.”
संध्या: “कुछ ऐसा ही समझो. और तुम भी उतनी ही सुंदर हो, जैसे तुम्हारी आयु ठहर सी गयी है. और मैं इसका कारण समझ रही हूँ. वही है न?”
अविका: “हाँ भाभी.”
संध्या: “जानती हो मैंने वीडियो काल क्यों की?”
अविका: “एक दूसरे को देखने के लिए?”
संध्या: “वो भी, पर कुछ दिखाना भी था तुम्हें. सम्भल कर बैठना, ठीक है. ये तुम्हें हिला देगा.”

अविका का मन विचलित हो गया. उसे लगा कि कोई डरावना दृश्य देखने मिलेगा. पर उसने मन को ढाढस दिया और संध्या से कहा कि वो चिंता न करे. उसने संध्या को उठते हुए देखा और फिर एक कमरे की ओर का दृश्य दिखा.
कमरे को खुलते हुए देखा और फिर कैमरे में कुछ अँधेरा सा हुआ फिर ठीक हो गया. सामने सोफे पर उसने सात साल बाद अपने भाई को बैठा हुआ देखा. कैमरा पास गया तो अविका की आँखें आश्चर्य से चौड़ी हो गयीं. उसका भाई अमोल सोफे पर नंगा बैठा था और उसके सामने कोई स्त्री घुटने के बल बैठी थी. ये देखकर समझने में अधिक बुद्धि नहीं लगानी पड़ी कि वो उसके भाई का लंड चूस रही थी. संध्या आगे गयी और उसने उस स्त्री की पीछे फोन को केंद्रित किया तो अविका को उसकी गांड में से बहता हुआ वीर्य दिख गया. उसके आश्चर्य की सीमा नहीं रही.

फिर संध्या अमोल के पीछे गयी. अमोल तो आँखें बंद किये था और उसने अधिक ध्यान नहीं दिया. संध्या ने उस महिला के चेहरे को दिखाया और फिर कमरे से बाहर निकल पड़ी. कमरे से बाहर निकलकर संध्या ने अविका से पूछा कि क्या उसे कुछ पूछना है?
“वो वो वो कौन थी? भाभी. भैया किसके साथ? और आपको इसमें कोई आपत्ति नहीं है?”
“वो रिया है, हमारी बहू.”
“क्या? पर भाभी, अंकुर? और भाभी आपकी मम्मी भी तो आपके साथ रहती हैं, ये कैसे सम्भव है?”
“ठहरो नन्द रानी. सब बताती हूँ. पहले एक और कमरे में चलते हैं. पहले तुम्हें अंकुर और पराग से भी मिलवा तो दूँ. ”
अविका को अब कुछ कुछ समझ आ गया था पर वो देखना चाहती थी कि संध्या भाभी क्या दिखाना चाहती थीं. संध्या फोन लिए हुए कुछ दूर गयी और फिर एक अन्य कमरे के सामने खड़ी हुई और फिर दरवाजा खोला और अंदर चली गयी. कैमरा सामने के दृश्य को इस बार दिखने में नहीं चूका. बिस्तर पर दो लड़के, जो अंकुर और पराग ही रहे होंगे, एक महिला की चुदाई में व्यस्त थे. एक लड़का नीचे था और दूसरा उस महिला पर चढ़ा हुआ था.
ये समझने के लिए कि यहाँ कैसी चुदाई हो रही थी किसी विज्ञान की आवश्यकता नहीं थी. एक लंड उसकी चूत तो दूसरा अवश्य ही उसकी गांड में था. कोण ऐसा था कि चेहरे दिख नहीं रहे थे, पर संध्या ने इसका भी समाधान निकाला और उनके सामने जा खड़ी हुई.
“हैलो मम्मी, क्या हुआ, इस समय आप यहाँ कैसे?” ऊपर से गांड मारने वाले लड़के ने पूछा.
“बस देखने आई थी कि तुम मेरी माँ की सही सही चुदाई कर रहे हो या नहीं.”
“नानी की चुदाई में हमने कोई कसर छोड़ी है आज तक जो आज छोड़ेंगे. वैसे आपने रिया की गांड से पापा का माल चखा या नहीं?”
“अब तक नहीं, पर अभी जाकर ये भी करती हूँ. ठीक है माँ आप मजा करो.”
संध्या की माँ पंखुड़ी ने उसे कुछ भी नहीं कहा, पर संध्या सुनने के लिए रुकी भी नहीं. कमरे से बाहर आकर उसने अविका से पूछा, “तुम्हारी जिज्ञासा शांत हुई?”
“भाभी, ये कैसे हुआ? कब से?”

संध्या: “ये सब बताने के लिए समय चाहिए. पर तुम्हें ये बता देती हूँ कि ये सब रिया से विवाह के बाद हुआ. रिया के परिवार में ये पहले से स्थापित था. बाद में रिया ने अंकुर को इसमें मिला लिया. फिर पराग भी उनके साथ जुड़ गया. उसके बाद मैं और फिर तुम्हारे भैया और अंत में माँ. और इस सबमें सबसे बड़ी भूमिका रिया की माँ माधवी की रही. रिया केवल माध्यम ही रही.”
अविका अब स्वयं को संतुलित कर चुकी थी और भविष्य के सपने संजोने लगी थी. परन्तु संध्या की बात समाप्त नहीं हुई थी.
संध्या: “रिया के दो भाई हैं दक्ष और सत्या। और सच कहूँ तो माधवी और रिया इस विषय में भाग्यशाली हैं क्योंकि दोनों बहुत अच्छे से ...... तुम समझ रही हो न? वैसे मेरे बेटे अंकुर और पराग भी कम नहीं हैं.”
अविका: “ तो फिर भैया ने मुझे कभी फोन क्यों नहीं किया?”
संध्या: “कई बार प्रयास किया, पर साहस नहीं जुटा पाए. हर बार यही कहते कि मैं क्या कहूँगा। इसीलिए मैंने आज उन्हें व्यस्त कर दिया और फोन किया.”
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अविका: “भाभी, हम सब ललिता के घर में हैं कुछ दिनों से. अनुज और देवेश का भी विवाह हो चुका है, आपको आमंत्रण भी भेजा था अनुज के विवाह का. देवेश ने तो अमरीका में विवाह किया था, पर लड़की यहाँ पास की ही है. मैं ललिता से बात करुँगी। आप सब यहाँ आ जाओ कुछ दिनों के लिए. अच्छा लगेगा.”
संध्या: “मैंने भी इसी कारण से फोन किया था. इनके मन से डर निकालने का मुझे और कोई उपाय भी नहीं सूझ रहा है. तुम हाँ करोगी तो मैं आगे की योजना बना लूँगी माधवी के साथ.”
अविका: “ठीक है भाभी, कल सुबह मैं बता दूँगी, पर इसे ९९ प्रतिशत स्वीकृति ही समझिये. वैसे देवेश की पत्नी दिशा की माँ भी आई है आज और अभी कुछ ही देर पहले देवेश उसकी पहली बार चुदाई करके आया है.”
संध्या: “ओके. तो फिर आज एक और कमरे का दृश्य देख लो, जहाँ आज मेरी रात कटनी है. फिर कल बात होगी.”
ये कहकर संध्या उठकर फिर चल दी और एक अन्य कमरे के सामने जा खड़ी हुई.

कमरा खुला और संध्या उसमें चली गई. सामने सोफे पर एक सुंदर महिला बैठी हुई थी. उसके दोनों ओर दो लड़के बैठे थे. तीनों इस समय नंगे थे और वो महिला उनके मोटे लम्बे लंड अपने हाथों से सहला रही थी. अविका उनका आकार देखकर अचम्भित हो गई. वो महिला कोई और नहीं रिया की माँ माधवी थी और अपने बेटों के साथ बैठी थी. संध्या को देखकर वो प्रसन्न हो गई.
माधवी: “क्या हुआ बड़ी देर कर दी आने में, कबसे तुम्हारी राह देख रहे हैं हम.”
संध्या: “हाँ कुछ आवश्यक कार्य आ गया था जिसे पूरा करना ही था आज. आप अपना खेल आरम्भ कर सकते थे.”
माधवी: “मैं इतनी भी स्वार्थी नहीं हूँ. वैसे भी सत्या का मन आज तुम्हारी गांड पर आया हुआ है.” उसने अपने बायीं ओर बैठे लड़के को चूमते हुए कहा.
अविका ने सत्या के लंड को देखा तो उसे भी अपनी गांड में कुलबुली सी हुई. संध्या ऐसे लौड़े से गांड मरवाने जा रही थी. उसने निश्चय किया कि वो ललिता मनाने में कोई कमी नहीं रखेगी. ललिता को ऐसा लंड दिखेगा तो वो तुरंत स्वीकृति दे देगी.
संध्या: “बस दो मिनट, मैं बाथरूम से आती हूँ.”
ये कहकर वो बाथरूम में घुसी और अविका से बोली कि अब बोलो क्या करना है. अविका ने कहा कि वो आनंद ले, वो कल उससे बात करेगी.
संध्या: “अगर चाहो तो मैं वीडियो चलता छोड़ दूँ.” ये कहते हुए उसने फोन एक ओर रखा तो अविका ने देखा कि संध्या इस पूरे समय नंगी ही घूम रही थी.
अविका ने कुछ सोचा और मना कर दिया. संध्या ने फोन काटा और कमरे में चली गई. अविका कुछ सोचते हुए बैठक में गई कि अगर ललिता मिली तो अभी बात कर लूँगी। अविका ने सोचा कि मना कोई भी नहीं करने वाला. पाँच नए लंड स्त्रियों के लिए तो पुरुषों के लिए चार नयी चूतों का आकर्षण पर्याप्त थे. अपने पति इत्यादि से बाद में स्वीकृति मिल ही जाएगी, पहले ललिता की सहमति आवश्यक है.

सरिता का कमरा:

दोनों बल्लेबाज अपनी नानी की पिच पर बैटिंग करने के लिए उद्द्यत थे. अपने नातियों की इस अधीरता को देखकर सरिता का मन प्रसन्न हो गया. नलिनी की चुदाई देखकर वो वैसे भी अधीर हो गई थी. नलिनी ने देवेश को गांड मारने के लिए आमंत्रित नहीं किया होता तो अब तक उसकी चुदाई भी एक बार तो हो ही चुकी होती. उसने अपने नातियों के लंड पकड़े और उन्हें चूसने में व्यस्त हो गई. जिस व्यग्रता से सरिता लंड चूस रही थी उसे देखकर रितेश और जयेश हंस दिए.
“क्यों नानी? बड़ी आतुर रही हो, क्या बात है?”
“इतने दिनों बाद मिलते हैं तुम्हारे लंड, तो मन तो करेगा ही न?”
“अरे तुम्हारे लिए तो यहाँ लौडों की भरमार है.”
“वो तो है, पर जो नहीं मिलता उसी की इच्छा अधिक होती है. कल तुम फिर अपनी माँ के पास चले जाओगे और फिर मामी के पास. तुम्हारी माँ ने आज तुम्हें कैसे छोड़ दिया यही आश्चर्य है.”
“उन्हें भी आपकी इच्छा पता है नानी, इसीलिए.”
“तो देर मत करो चढ़ जाओ और चोदो अच्छे से. सारे कसबल निकाल दो इस बुढ़िया के.”
“नानी, जैसे तुम चुदवाती हो वैसे तो लड़कियां भी नहीं चुदवा पातीं, तो बूढ़ी तो अभी नहीं हो आप.” फिर रितेश ने उसके कान में कहा, “नानी, गांड तुम्हारी ऐसी मस्त है कि किसी का भी लंड खड़ा कर दे.”
“तो क्या करेगा?”
“गांड मारूँगा आज मैं, हर बार आप जयेश को ही गांड देती हो. इस बार नहीं.”
सरिता ने मुंह ऊपर किया और मुस्कुरा कर बोली, “छोटा है न इसीलिए. पर आज तू ही मार मेरी गांड.”
“मेरी प्यारी नानी, आई लव यू.” रितेश ने कहा तो सरिता का मन झूम उठा. उसकी चूत से बहे जा रहा था और वो अब चुदने के लिए लालायित थी.
“अब देर न करो बच्चों, मेरी चुदाई कर ही डालो, तुम्हारी प्रतीक्षा में मैंने आज किसी को भी अपने पास फटकने नहीं दिया. अब रुका नहीं जा रहा है.”
“जयेश चलो तुम जाकर लेटो, आज तुम्हें नानी की गांड पहले नहीं मिलने वाली.”
“ओह भैया, अपने तो मेरा मजा ही छीन लिया.” ये कहकर वो हंस दिया, उसने सरिता और रितेश की बातें सुन ली थीं. “पर नानी की चूत में बहुत आनंद है, देखो कैसे बह रही है.” जयेश ने सरिता की चूत पर ऊँगली फेरते हुए बोला और बिस्तर पर जा लेटा।
सरिता ने उसके लंड के ऊपर आसन बनाया और बैठ गई. लंड फच्च से अंदर चला गया. सरिता ने एक आह भरी और लंड पर उछलने लगी. पर रितेश ने उसे अधिक समय नहीं दिया और उसके कंधे पर हाथ रखा. सरिता समझ गई और रुककर आगे झुक गई. रितेश ने नानी की गांड के संकरे छेद को देखा जिसने आज कोई लंड नहीं लिया था. उसने अपने लंड पर थूक लगाया और सरिता की गांड पर लगाया. सरिता कसमसाई. इस चुदाई के लिए वो सुबह से तड़प रही थी.
“डाल दे दुष्ट, क्या सोच रहा है?” सरिता झुंझला कर बोली.
“जैसा कहो नानी. आज तुम्हारी गांड का बैंड बजा दूँगा।” ये कहते ही रितेश ने एक शानदार धक्का लगाया और उसका लंड नानी की गांड भेदता हुआ अंदर घुस गया. सरिता की चीख ने नलिनी को जगा दिया. उसने देखा कि सरिता की दोहरी चुदाई आरम्भ हो चुकी है तो वो देखने लगी. दोनों लंड जब पूरे अंदर जम गए तो भाइयों ने नानी की चुदाई आरम्भ कर दी. सरिता के मुंह से कामोत्तेजित स्वर निकल रहे थे. कोई विश्वास नहीं कर सकता था कि इस आयु की स्त्री ऐसी चुदाई झेल सकती है.
एक सधी हुई सुंदर ताल के साथ दोनों नानी की भरपूर चुदाई कर रहे थे. नलिनी ने हाथ बढ़ाकर सरिता के मम्मों पर रखा और उन्हें भींचने लगी. सरिता की आँखें फ़ैल गयीं और उसकी चीखों में और भी अधिक व्यग्रता आ गई.
“बड़ी चुदककड़ हो माँ जी, पर इसके बाद मैं आपको और भी नए नए आसन दिखाऊँगी। आपकी चूत और गांड के सारे बल खुल जायेंगे. हैं न रितेश और जयेश? नानी को कभी चोदा है जैसे…”
“नहीं.” रितेश ने कहा और नलिनी के खेल को समझते हुए उसने सरिता को उकसाने के लिए कहा, “पर नानी वैसी चुदाई झेल नहीं पाएंगी, आंटीजी.”
“मादरचोद, पाँचों से एक साथ चुदवाया था मैंने. दिखाना कैसे चोदा था इस कमीनी को, मैंने अगर उसे पीछे न छोड़ा तो मैं तुम्हारी नानी नहीं.”
नलिनी और रितेश समझ गए कि तीर सही स्थान पर लगा है. पर इस बार जयेश ने अपने विचार रखे.
“नानी इस चक्कर में मत पड़ो. आपके लिए इतनी ही कड़ाई बहुत है. गांड फट जाएगी नहीं तो. आप रहने दो.”
अब सरिता के स्वाभिमान पर बात आ गई.
“ऐसा नहीं होगा. अभी मुझे चोदो रंडी के समान फिर देखती हूँ इस माँ की लौड़ी कैसे चुदवाती थी.”
अब मछली फंस चुकी थी. तीनों षड्यंत्रकारी एक दूसरे को देखकर मुस्कुराये और दोनों नाती अपनी नानी की घनघोर चुदाई करने लगे. इस बार सरिता की चीखें और तीव्र हो गयीं. और आनंद भी कई गुना। उसकी चूत और गांड में जैसे एक नयी संवेदना जाग उठी.
दोनों भाई अब अपनी नानी की भीषण चुदाई कर रहे थे. सरिता भी अब दिन रात की चुदाई से अभ्यस्त हो चुकी थी और उसे इसमें असीम आनंद मिल रहा था. चूत और गांड में चलते अपने नातियों के लौड़े उसे एक अप्रतिम सुख दे रहे थे. नलिनी द्वारा उसके मम्मों पर भी आक्रमण चल रहा था और उसके ढले हुए स्तनों को नलिनी बड़ी क्रूरता से निचोड़ रही थी. अगर सरिता को अगली चुदाई में कोई कष्ट होना था तो वो उसके इस कष्ट के आगे कुछ न होगा.
सरिता की दस से पंद्रह मिनट तक सबल और तीव्र चुदाई के बाद दोनों भाई थकने लगे थे और अपने पड़ाव के निकट थे.
नलिनी: “मम्मी जी के मुंह में रस छोड़ना, अंदर मत डालना. ठीक है?”
निशब्द ही इस पर सहमति बन गई. कुछ ही समय पश्चात् रितेश ने सरिता की गांड से लंड निकाला और उसके मुंह के सामने ले गया. सरिता ने बेझिझक उसे मुंह में लिया और चाटने के बाद चूसने लगी ही थी कि रितेश ने उसके मुंह में अपना रस स्खलित कर दिया. रस का पूरा आनंद लेकर सरिता ने लंड निकाला और जयेश के लंड से उतर गई. झुकते हुए उसने जयेश के लंड पर जीभ फिराई और उसे भी चाटकर चूसने लगी. जयेश ने भी नानी को अपना रस का भोग कराया और फिर सरिता ने नलिनी को पकड़ा और उसके मुंह से मुंह लगाकर रस का आदान प्रदान किया.
“तुझे कैसे प्यासी रहने देती, कुछ तो तेरे भाग का भी है.” सरिता ने हटते हुए कहा.
“जी माँ जी.”
“अब कुछ विश्राम करने दे, फिर बताना कैसे चुदती थी मेरे बच्चों से.”
रितेश और जयेश के चेहरे खुल उठे.

बैठक में:

अविका को ललिता बैठक में ही मिल गयी. इस समय तक वो किसी न किसी कमरे में होती थी, पर आज रुकी हुई थी और महेश और भानु से बात कर थी.
“सुनोगी?” अविका ने कहा तो ललिता ने उसे देखा. वो समझ गई कि अविका किसी गंभीर विषय पर बात करना चाहती है.
“बस पाँच मिनट दो.”
कुछ देर में ललिता अविका के पास आई. अविका ने संध्या के कॉल से अवगत कराया और पूछा कि क्या उन्हें आमंत्रित कर सकते हैं. ललिता ने सहर्ष स्वीकृति दे दी. अब अविका को कल संध्या भाभी से बात करनी थी.

उधर संध्या के घर:

संध्या कमरे में गई और माधवी ने उसे बुलाया.
संध्या: “आती हूँ, एक काम अधूरा छूटा हुआ है. बस दस मिनट.”
ये कहते हुए वो अपने कमरे में गई जहाँ रिया ने अब तक अमोल के लंड को चाटकर चमका दिया था और दोनों बैठे हुए थे, रिया अमोल की गोद में थी.
संध्या: “रिया, तुम्हारी गांड की सफाई हो चुकी है क्या?”
“कहाँ मम्मीजी, आप तो मुझे छोड़कर जो चली गई थीं.” रिया ने इठलाकर बोला।
“बहुत ही आवश्यक कार्य था, और आज ही रात करना था. पर अब मैं आ गई हूँ, तो आओ तुम्हारी गांड साफ कर दूँ.”
रिया अमोल की गोदी से हटी और वहीँ सोफे पर घोड़ी बन गई. संध्या ने उसके पीछे जाकर उसकी गांड को चाटने के बाद रस को सोख लिया. पर पिया नहीं और तुरंत ही माधवी के कमरे में चली गई. अंदर जाकर उसने माधवी को खड़ा किया और उसके होंठ से होंठ जोड़कर रस को उसके मुंह में धकेल दिया. माधवी ने कोई आपत्ति नहीं की. रस बाँटने के बाद संध्या अलग हुई.
“रिया की गांड से निकालकर लाई थी इनका रस, पर आपके साथ बांटकर पीना ही उचित लगा.”
“यही सही है.”
“ तो अब चलो माँ के पास, वहाँ से बटोर लेते हैं, मेरे बेटों का पानी.” ये कहते हुए माधवी का हाथ पकड़कर संध्या अपनी माँ के कमरे में चली गई.
जैसा अनुमान था, पंखुड़ी की चुदाई समाप्त हो गई थी और वो भी बिस्तर पर ढही हुई थी. संध्या और माधवी के आक्रमण से वो सहम गई पर फिर अपनी टाँगे खोल दीं. संध्या और माधवी ने एक एक करके उसकी चूत और गांड का रस सोखा और बाँटा।
“मम्मी, आज बहुत मूड में लग रही हो.” अंकुर ने हँसते हुए कहा.
“सच में. और अगर मेरा अनुमान सही है तो कल तुम सबको एक अच्छा समाचार दे सकती हूँ.”
पंखुड़ी ने व्यंग्य से कहा, “क्या हुआ? फिर से गर्भवती है क्या?”
“नहीं, माँ. कुछ और है. कल तक रुको. वैसे भी तुम्हारे नाती आज तुम्हारी सेवा में हैं.”
इसके बाद माधवी को लेकर वो उसके कमरे में चल दी. आज उसकी गांड को सत्या का लौड़ा जो झेलना था.

रात अभी शेष थी.

क्रमशः ​


नए पात्र:​

अमोल: अविका का बड़ा भाई.
संध्या: अमोल की पत्नी, अविका की भाभी.
अंकुर: संध्या और अमोल का बड़ा बेटा।
पराग: छोटा बेटा।
रिया: अंकुर की पत्नी.
पंखुड़ी: संध्या की विधवा माँ

माधवी: रिया की विधवा माँ.
दक्ष: माधवी का बड़ा बेटा, रिया से दो वर्ष बड़ा है.
सत्या: छोटा बेटा, ये रिया से छोटा है और अभी पढ़ रहा है कॉलेज में.
बहुत सुन्दर अपडेट दोस्त, आखिर कुछ नए किरदार भी जुड़ रहे हैं दिशा की ससुराल बढ़ती जा रही है।
मज़दार प्रस्तुति इसी तरह आगे बढ़ते रहें।
 
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Mass

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prkin bhai, bahut busy ho kya? bahut dinon se koi khabar nahin...hope aap time nikal kar update doge..especially since new characters got added to the story, besabri barkaraar hain..hope to get an update soon for this fantastic sexy story...Thanks.
 

prkin

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I am putting "Kaise Kaise Pariwar" on hold for some time, say about a month. I will give one more update during this period.
I am not getting enough time to run two stories together.

I will continue with this one only till then.

Hope you will support.
 
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prkin

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मैं कुछ समय, लगभग एक महीने के लिए "कैसे कैसे परिवार" कहानी को स्थगित कर रहा हूँ. इस अवधि में एक अपडेट और दूँगा जो आधा लिखा हुआ है.
मुझे दोनों कहानियों के साथ न्याय करने का समय नहीं मिल पा रहा है.

तब तक के लिए केवल "ससुराल की नई दिशा" में ही अपडेट दे पाऊँगा।

आशा है कि आप सब मुझे सहयोग देंगे।
 
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Mass

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Absolutely fine...no issues..thx.
 

prkin

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Badhiya waise “kaise kaise pariwar” ko pehle khatm karte 🧐

मैंने ये नहीं कहा कि उसे बंद कर रहा हूँ.
वैसे भी वो कुछ लम्बी चलने वाली है. तो इसे थोड़ा आगे बढ़ाकर उधर लौटूँगा।

दूसरी बात अगर समय मिलेगा तो उसे भी आगे लिख दूँगा। ये केवल समय कम मिलने के कारण है.
 
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prkin

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ससुराल की नयी दिशा

इसके अपडेट आज से आने आरम्भ हो जायेंगे।

प्रयास रहेगा कि इस सप्ताह आधा लिखा हुआ कैसे कैसे परिवार का अपडेट भी आपको समर्पित करा दूँ ।

शाम चार बजे तक इसका अपडेट आएगा।
 
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Mass

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Dhanyawaad Bhai...intezaar rahega...
 
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