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Romance मै सिर्फ तुम्हारा हूँ

DREAMBOY40

सपनों का सौदागर 😎
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परम पिता परमेश्वर
की
असीम अनुकम्पा
और
मात पिता गुरूजनो के आशीर्वाद से
आज इस कहानी पर पहले 10000 व्यूज मिले है ।
:D :D :D :D

मेरे सभी अतरंंगि , रोस्टबाज , गुदगुदीदार और गुप्त पाठक का बारम्बार अभिवादन
​



🙏
आपका अपना
दीन दयाल दुबे उर्फ़ 3D बाबू
समाधान पार्टी के महामंत्री ,अलबेला ड्रामा कम्पनी के प्रोडुसर​
 
Last edited:

aalu

Well-Known Member
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Naina Adirshi AK_01 Naik RB7
Destiny TharkiPo evil royal wilson Sasha! aalu Lib am Lutgaya Mahi Maurya kingkhankar Lucky..
Vickyabhi Guri006 anitarani Scripted SANJU ( V. R. ) Sanju@ Rajatthegame1379 11 ster fan Dkumar

Itane saare loyal readers lekin revo ek ne bhi nhi diya :waiting1:

क्या तुम सब के आसू सुख चुके है जो इतनी बेरहमी बरती जा रही है ,, आज का लेखक एक एक रेवो के लिए तरस रहा है । :verysad:
aaba taani...
 

Destiny

Will Change With Time
Prime
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UPDATE 011 ​

पिछ्ले अध्याय मे जइसा कि आप लोगो ने पढा कि सिरफ एक पिच्चर कानपुर मे गलत टेम पर रिलीज होवे से कितना बवंडर होई सकता है । भई परिणाम आप लोगन के सामने हय । स्वीटी जी ने जगत-कल्याणकारी , मनमौजी और सबके संकटहरता यानी हमाये 3D भैया को अल्टीमेटम दे दी । बस तबसे देवदास बने फिरी रहे हैं ।

अब आगे


मसलपट्टी मे ड्राई फ्रूट्स ​

जैसा कि हमने पहले अपडेट आप लोगो से दुबे परिवार का राशनकार्ड साझा नही किया था । लेकिन हम भी क्या करे , नवीन कल्पनाओ से चुलमुलाते खोपड़ी के धारक है । ऐसे ही सोचा कि क्यू ना कहानी की इस सादी मसलपट्टी मे कुछ किरदार स्वरुप सुखे मेवे डाल दिया जाये ,, जिससे कहानी का स्वाद भी चौकस हो जाये और 3D भैया जैसे जोरदार जबरदस्त जिन्दाबाद किरदार का भी एक पारिवारिक माहौल भी बन जाये ।
चलिये अब पूर्व चेयरमैन साहब के परिवार का राशन कार्ड भी खोल ही लेते है ।

1. लल्लो देवी

20220108-100546

इन देवी जी का नाम ही परिवार के मुखिया के तौर पर दर्ज हैं । इसके दो कारण है , पहली बात तो ये 3D भैया की दादी है और उपर से विधवा पेंशन योजना मे रजिस्ट्री भी हुआ है ।

2. हरिशंकर दुबे उर्फ पिंकू

20220108-100531

ये महानुभाव लल्लो देवी के एकलौते सुपुत्र है और 3D के इस संसार मे आने के एक मात्र माध्यम । पेशे से दस साल तक नवाबगंज मे पूर्व चैयरमैन रह चुके हैं और प्रतिस्था अभी भी बरकरार है ।

3. 3D

4. लल्लन
पेशे से दुबे परिवार मे नौकर है और लल्लो देवी की बडी मेहरबानी है इनपे । एक तरह से जान लो लल्लो देवी के व्यक्तिगत सहायक है । इनका परिचय पहले भी हो चुका था ।


अब राशन कार्ड पढ कर समझ ही गये होगे कि 3D की अम्मा और दादाजी अब इस दुनिया मे नही है । भई ज्यादा भावुक होने की जरुरत ना है ।वो कनपुरिये है ,जहा रहेंगे रंगबाजी और नवाबी कम नही रहेगी ।
खैर हम लोग कहानी पर वापस आते हैं ।


लल्लो जासूस​

वो शाम भी बीत गयी और अगले दिन रविवार को भले सवेरे-सवेरे ही लल्लो देवी अपनी बनारस की यात्रा से वापस आ गयी थी ।

लल्लो जी के आते ही दुबे आवास मे कामचोरो और निठल्लो की शामत आ जाती है । किचन से लेके पार्टी कार्यालय तक और शौचालय से लेके बेडरूम तक हर जगह लल्लो जी का हस्तक्षेप शुरु हो जाता है । यानी मिला जुला कर दुबे आवास मे गोपनीयता की ढोल फटी हुई होती है ।
सुबह आते ही लल्लो देवी सबके उठने से पहले ही लल्लन को लेके पुरे दुबे आवास का निरिक्षण करते हुए पहुच गयी उपर की मंजिल पर और उनकी नजर छत पर एक कोने में पड़े डिसपोजल ग्लास गयी जिसमे कल रात मे बने इम्पीरियल ब्लू के कुछ अंश मौजुद थे ।


लल्लो - ये लल्ल्न , कल शीशी खुली रही का

लल्ल्न सकपका कर - अब ब ब हा हा अम्मा

लल्लो देवी कुछ सोच कर - हम्म्म कौन सी ब्राण्ड रही

लल्ल्न डरते हुए - आईबी

लल्लो - लल्ला के साथ कोऊ और भी रहा

लल्ल्न - नाही अम्मा , 3D भैया कल बहुत परेशान रहे और रोये भी रहे ।

लल्लो देवी झल्ला कर बुदबुदाइ - इ वर्माइन फिर का कहीस हमाये लल्ला से ,,, हम्म्म्म

लल्लो - सुनो लल्ल्न !! इ ग्लास हटा दो यहा से और ध्यान रहे कि पिंकू के पता ना पड़े ।

लल्ल्न - जी अम्मा।

इधर लल्लो देवी के मन मे तहकीकात की चूल मच गयी थी इसिलिए वो सुबह नासता करने के बाद बनारस से लाये प्रसाद लेके निकल पडी शुक्ला भवन की ओर , इस आश के कि शायद आयुष के माध्यम से कोई सुराख मिले । मगर आयुष बाबू इस समय ग्रीनपार्क के शानदार फ्लैट मे तकिये मे मुह गाड़े अपना पिछवाडा उठाए सोये हुए है ।


बंगाली बाबा का चुरण ​

लल्लो देवी जब शुक्ला भवन मे प्रवेश करती है तब तक आशिष अपने दुकान पर जा चुका था । मनोहर जी अपनी यारी दोस्ती निभाने बाहर निकल लिये थे । बाकी शान्ति देवी का सुबह सुबह सत्संग का लाइव टेलीकास्ट शुरु हो गया था । वही किचन मे मीरा दोपहर के खाने की तैयारियो मे जुडी थी ।

लल्लो देवी शान्ति को आवाज देते हुए शुकला भवन मे घुस्ती है - ये शुक्लाइन ,,कहा हओ

हाल मे आते आते ही जब लल्लो देवी की आवाज मे फ्रेकवेन्सी हर्टज तेज हुआ तो फटाफट दोनो सास-बहू घूंघट काढ़े तेजी से हाल मे आती है ।

शान्ति मुस्कुरा कर - अरे अम्मा तुम हो का ,,,आओ आओ बैठो ,, ऊ हम टीवी देख रहे थे ।

मीरा अपनी सास को आवभगत करता देख किचन मे वापस घूम जाती है और फिर एक ट्रे मे बिस्किट पानी लेके हाल मे आती है । फिर लल्लो देवी के पाव छुते हुए खड़ी हो जाती है ।

लल्लो देवी खुश होकर - हा हा खुश रहा दुल्हीन ,,,दूधो नहाओ-पुतो फलो

लल्लो देवी ने तो आशीर्वाद देकर अपना कोटा पुरा कर दिया , मगर उनके आशीर्वाद से सास बहू दोनो का चेहरा लटक गया ।

इसका कारण था कि मीरा की शादी को इतने साल बीत गये लेकिन कोई बच्चा ना हुआ । काफी सारी दवाइयां, टेस्ट और ना जाने कितने मंदिर की घंटी बजाने के बाद भी कोई बात नही बनी ।
इधर शान्ति देवी ने भी पारिवारिक गणित मे बार बार फेल होने का सारा थिकरा मीरा के उपर ही फोडती रही । आखिरकार तंग आकर मीरा ने पिछ्ले साल एक आखिरी परिक्षा की बात रख दी ,,दोनो दम्पतियो का टेस्ट हुआ और जब डाक्टर साहब ने रेज्लट निकाला तो नतिजा ये हुआ कि मीरा तो अच्छे नम्बर से पास हो गयी लेकिन आशिष बाबू के नम्बर उत्तीर्ण श्रेणी से थोडे कम पड़ गये ।
देसी हिन्दी वक्तव्य में कहे तो इस्पिरम काउंट कम पडी गया आशीष बाबू का ।

लल्लो देवी से अपनी दुलारि पतोह का मुरझाया चेहरा देखा नही गया ।

लल्लो - इ ल्यो छोटकी दुल्हीन , बनारस गये रहे हम औ उहा से भोलेनाथ का परसाद लाये है । लेओ पकड़ो ।

मीरा ने सुबकते हुए अपने उम्मीदो का दामन फैलाया और ल्ल्लो देवी ने प्रसाद का पैकेट मीरा के आंचल मे रख दिया ।

लल्लो शान्ति से - सुनो शुक्लाईन , यही पास मे अटलघाट पर एक बंगाली बाबा आये हैं, सुने हैं बडे तजुर्बेकार है , हम तो कह रहे हैं कि एक बार आशिष को दिखा दो वही ।

शुक्लाइन जो हर तरफ से पोते का मुह देखने की उम्मीद खोती जा रही थी ,,ऐसे मे लल्लो देवी की बाते सुन कर मन मे एक उम्मीद की किरण चमकी और होठो पर मुस्कान झलक उठी । उन्होने गंगा मैयया का नाम लिया ।

शान्ति - ठीक हय हम आशिष के बाऊजी से बात करीत हय

इधर इनका सुख दुख का मेल जोल चल रहा था और वही लल्लो देवी की निगाहे हाल मे बैठे हुए ही आयुष को पुरे शुक्ला भवन मे खन्गाल रही थी ।

शान्ति की निगाह जब ल्ल्लो देवी पर गयी तो वो चहक कर पूछी - का हुआ अम्मा

लल्लो थोडा उलझन भरे भाव मे - अरे तुम्हाओ लाड साब आयुष ना दिख रहा है ।

शान्ती देवी मुस्कुरा कर - अरे अम्मा बबुआ तो अपना नौकरी पर गवा अभी परसो ही ।

लल्लो देवी बडे अफसोस के साथ अपना मॉरल डाउन करते हुए - अच्छा

शान्ति - हा अम्मा , कौनौ बात रही का
लल्लो देवी फिलहाल आयुष से संपर्क करने के साधन के बारे मे सोच रही थी कि शान्ति देवी के सवाल ने उनका ध्यान तोड़ा

लल्लो - हा अब ब नाही नाही शुक्लाईन कौनौ बात नाही । बस ऐसे ही हाल चाल और का ।

फिर थोडी देर ऐसे ही हसी ठिठोली चली और लल्लो देवी अपने आवास की ओर निकल गयी ये सोच कर की अब आयुष से फोन पर ही बात हो पायेगी ।


STD काल​

शुक्ला भवन से निकलने के बाद आयुष से बात ना हो पाने पर लल्लो देवी को अपने नाती 3D की बहुत चिन्ता हो रही थी कि आयुष की अनुपस्थिति मे कही उनके वंश का चश्मो चराग पर कोई संकट तो नही ।

इसिलिए लल्लो देवी अपने आवास तक पहुचने के बाद भी 100 कदम और आगे चल कर, शान्ति देवी मिष्ठान भंडार का रुख कर लिया ।

दुकान पर सवेरे की भीड़ लगी थी और आशिष भी काफी व्यस्त दिख रहा था । मगर दुकान के एक नौकर की नजर लल्लो देवी पर गयी तो उसने फौरन आशिष को बताया ।

आशिष सारा काम छोड कर लल्लो देवी के पास पहुचते ही पैर छूकर - अरे अम्मा तुम ,,इहा कयिसे ,,कोऊ से सन्देसा करा देती हम भेजवा देते है समान

लल्लो एक तो सुबह से वैसे ही परेशान थी और हर जगह से उसे निराशा मिल रही थी इसिलिए आशिष की मीठी बाते भी अब उसको तीखि मिर्ची सी लग रही थी ।

लल्लो झल्लाकर- अरे हम तुम्हारा दही जलेबी खाने नही आये है ,,, हमको आयुष से कुछ काम है ,,,जरा उका नम्बर देओ

अशीष जो अपने छोटे भाई के लिए हमेशा फिकरमन्द रहता था वो थोडा डर और शंका के भाव मे - का हुआ अम्मा ,सब ठीक है ना

लल्लो - हा भाई सब ठीक हय ,,तुम एक कागज पर उका नम्बर लिख कर देओ ,,, पिंकू बात करिहे

आशिष की हालत और खराब हो गयी ,,कि अब चेयरमैन साहब का बात करेंगे आयुष से , मगर लल्लो देवी के सामने वो कुछ बोला नही और सोचा कि अभी खुद आयुष से बात करके पुछ लेगा ।

फिर आशिष के कागज पर नम्बर लिख कर दे देता है और लल्लो वो परचा लेके एक STD बूथ पर चली जाती है ।

नम्बर डायल होता है और सातवे रिंग मे आयुष बाबू कुनमुनाते हुए फोन पिक करते है ।

आयुष - हा हलो
लल्लो तगड़े आवाज मे - हा आयुष हम बोल रहे है
आयुष ने बार मे ही लल्लो की आवाज पहचान ली - अरे दादी आप ,,,हा कहिये
लल्लो - इ कल रात कुछ हुआ था का तुम्हाये और 3D मे
आयुष - नाही तो दादी
लल्लो रौब दिखाते हुए - देखो आयुष हम आज सुबह ही देखे है कि छत पर कल रात आईबी खुली रही और लललन भी गवाही दिया है ।
आयुष को अब थोडा याद आता है रात की घटना तो वो उबासी लेते हुए - हा दादी वो पिया था ,,,लेकिन हम उसको समझाए थे फिर वो सो गया था । कोनो दिक्कत वाली बात नाही रही उसमे तो

लल्लो गुस्सा कर - देखो इंजीनियर साब ये सत्यापन वाला समीकरण कही और बताओ , हमको नाही , बहुत गणित पढे हैं हम समझे

आयुष लल्लो की बात पर खिस्स से हस देता है
लल्लो - अब बताओ कल फिर से ऊ वर्माइन से कुछ हुआ रहा का ???

आयुष समझ गया कि बात छिपाने से कोई मतलब नही है काहे की अगर हम नही बतायेंगे तो वो खुद स्वीटी के घर पहुच जायेगी और फिर कही 3D का शादी होने से पहले ही टुट ना जाये ।

फिर आयुष हडब्डा कर कल की सारी बाते बताता है जो 3D ने उसे बतायी थी और स्वीटी का 15 दिन वाला अल्टीमेटम भी ।

आयुष से पूरी कहानी सुन के लल्लो गुस्से से तिलमिला जाती है और आयुष की बात खतम होने से पहले ही फोन काट कर तेज कदमो से अपने आवास की ओर निकल देती है ।


जारी रहेगी

दादी अम्मा दादी को ऐसे ही नहीं कहते पोते को बिगाड़ने में जीतना हाथ दादी का होता हैं उतना ही हाथ सुधरने में भी होता हैं। 3D बाबू के दादी तो महा दादी हैं साथ ही माहिर खोज कर्ता आईबी के छूटे गिलास में देख पल भार में जान गई कुछ तो कारण रहा होगा जो दादी के एक पोते दीन दयाल दुबे आईबी के गिलास पी पी कर कलेजा जलाया हैं। खोज खबर से जाना 3D बाबू के आंरकली ने 15 दिन का अल्टीमेटम दिया हैं।

इसी खोज खबर में जानें हैं मीरा भाभी बहुत परेशान हैं क्योंकि वो मां नहीं बन पा रही हैं। जिस कारण शांति जी भी बहु से कुछ खिसियाए से रहते है। मां न बन पाने की ये पीढ़ा बहुत दुख दाई होता हैं न जानें कितना कुछ सहना पड़ता हैं इस पर मैने एक चोटी कहानी लिखा था बेटी- माँ मुझे कोख में ही मार दे! इच्छा हों तो इस कहानी को पढ़ कर देख सकते हैं। बरहाल मीरा ने एक बोल्ड स्टेप लिया खुद के साथ आशीष बाबू का भी टेस्ट करवा लिया।

अदभुत अतुलनीय लेखन कौशल
 

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बाबू तरसने और तड़पने के बाद जब प्यार मिलता हैं तो वो प्यार अनूठा होता हैं 😌
 

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लगता अब लल्लो देवी 3D बाबू की नैय्या पार लगा कर ही मानेगी। मस्त अपडेट ।
😁😁😁 dekhate hai dost kys hota hai
Bs sath bnaye rakhe

Dhanywaad
 

DREAMBOY40

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To lalli Devi na aake to utpaat macha diya... Aur chalti bhi khoob hai unki bas ye dekhna hai ki jo akhiri mein tilmilate huye gayi hain to kahan aur kiske upar bijli girne wali hai.. aur us bijli se 3d bhaiya ka ghar roshan hoga ya.. fuse hi ud jayega.
Meera bhabhi bechari bina santan pareshan hain. Kisi or type ki story hoti to bahut se samadhan the par isme to kuch alag hi dhoondhna hoga

Bahut hi shandar update bhai.. agali update ka besabri se intezar hai.
:thank_you: abhaar mitra ... dekhate hai aage kya hota hai
 

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Bahot behtareen
Shaandaar update bhai
Dadi ji tow badi mazedaar character lag rahi h
Dekhte h kiski khatia khadi kerti h ab
Lajawab behad shaandaar
Bahut bahut dhanywaad bhai Keep supporting
 

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दादी अम्मा दादी को ऐसे ही नहीं कहते पोते को बिगाड़ने में जीतना हाथ दादी का होता हैं उतना ही हाथ सुधरने में भी होता हैं। 3D बाबू के दादी तो महा दादी हैं साथ ही माहिर खोज कर्ता आईबी के छूटे गिलास में देख पल भार में जान गई कुछ तो कारण रहा होगा जो दादी के एक पोते दीन दयाल दुबे आईबी के गिलास पी पी कर कलेजा जलाया हैं। खोज खबर से जाना 3D बाबू के आंरकली ने 15 दिन का अल्टीमेटम दिया हैं।

इसी खोज खबर में जानें हैं मीरा भाभी बहुत परेशान हैं क्योंकि वो मां नहीं बन पा रही हैं। जिस कारण शांति जी भी बहु से कुछ खिसियाए से रहते है। मां न बन पाने की ये पीढ़ा बहुत दुख दाई होता हैं न जानें कितना कुछ सहना पड़ता हैं इस पर मैने एक चोटी कहानी लिखा था बेटी- माँ मुझे कोख में ही मार दे! इच्छा हों तो इस कहानी को पढ़ कर देख सकते हैं। बरहाल मीरा ने एक बोल्ड स्टेप लिया खुद के साथ आशीष बाबू का भी टेस्ट करवा लिया।

अदभुत अतुलनीय लेखन कौशल
Bahut bahut dhanywaad bhai

बेटी- माँ मुझे कोख में ही मार दे!
Ispar bhi samay milte hi jarur jaunga :love:
 

DREAMBOY40

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बाबू तरसने और तड़पने के बाद जब प्यार मिलता हैं तो वो प्यार अनूठा होता हैं 😌
Bat to sahi h .. lekin intezaar bahut dukh deta h
 

evil royal wilson

I am devil of my world
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ka kahat ho be shure kare revo...to launde 3d ke ghar ka introduction diya..ghar ma hai 4 sadasys..pinku ji dadi aur 3d aur chautha hai tuffy matlab ki lallo. to buddhan ghar me ghuste sath hi khojbeen karne lagi ki unke peeth peech dube sadan me ka ka kand bhava. aur chat par dekhi gilas aur ib ki botal..aur buddhan ne chillane ki jagah pucha ki brand kaun sa raha..ye andaj accha laga..ki 3d kahi tharra to nhi tika rahe. fir shukla bhavan me dono sass bahu ne ashirvad bhi liya wo bhi accha laga dukariya gyan bhi pel gayi prasad ke sath bangali baba ka. Matlab ashish babu me defect hai..ek bast samajh me nahi aayi ki inki hai mithai ki dukan kahe khoya aur rabdi nahi pel rahe..agar dhar bechne ke sath khud bhi thoda pele hote to eii naubat na aati dekhte hai bangai kaun sa tantra karta hai.. udhar pco se ayush ke sara hasl janne ke baad buddhan daudi ghar ki taraf..ab pinku ke pinki banne ka time. dekhte hai ka hota hai aage...

(मेरे प्रिय लेखक मित्र तुम्हारे लिखने का जो ढंग है। वो बहुत बढ़िया है। जिस प्रकार से तुम कहानी में शब्दों को और किरदार को गढ़ते हो वो प्रशंसनीय है। और मैं विश्वास से कह सकता हूँ कि यह कहानी इस फाॅरम की उत्कृष्ट कहानियों में से एक होगी। इस बात में तनिक भी संदेह नहीं है कि तुम इसे पूरा नहीं करोगे। सबसे बड़ी बात है वास्तविकता जो तुमने दिखाई है। किरदारों को लेकर चाहे कहानी को लेकर। पर बताते हुए दुख हो रहा है कि साथ यहीं तक था। एक युद्ध चल रहा है अंतर्मन में जिसका निराकरण करना अब अत्यावश्यक या कहें कि अनिवार्य है। अभी समय है समाधान का इससे पहले समय निकले और हम हंसी का पात्र बन जायें। करना तो एक वर्ष पूर्व ही था। पर कुछ न कुछ अवरोध आते गये और विलम्ब होता गया। पर अब समय है इष्ट के सानिध्य में खुद के अवलोकन का। जब वापस आयेंगे तब तक हो सकता है कि कहानी पूर्ण हो जाये। पर जब भी आयेंगे सबसे पहले आपसे सम्पर्क करेंगे मिलते हैं अन्तराल के बाद। प्रणाम। अब विराम लेते हैं।

धन्यवाद

आभार
आपका मित्र
 
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