हमें अक्सर वो कहानिया पसंद आती है, जिन कहानियों में हम खुद को थोड़ा ढूंढ पाते है। ये कोई कहानी नही, बल्कि ये वास्तविक किस्सा है। आज के दौर में हमारे देश के बहुत से राज्य जैसे हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान के छोटे छोटे शहरों और गाँवों में सबसे बड़ी समस्या लड़को की शादी की। शहर और गाँव अविवाहित लड़को से भरे पड़े है, युवा धीरे धीरे अधेड़ होते जा रहे है, लेकिन उनका विवाह नही हो रहा। शादी के लिए लड़कियों का तो जैसे अकाल सा पड़ गया है।
अपने परिवार का वंश आगे बढ़ाने के लिए लोग पैसा देकर दलालों के माध्यम से अपने बेटो का विवाह कर रहे हैं लेकिन ये दलाल कभी कभी सीधे साधे लोगों के साथ धोखा भी कर देते है। इसी धोखे से हुए विवाह/शादी के बाद उस लड़के के साथ क्या हुआ उसी पर आधारित ये कहानी है।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में विशाल उम्र 35 साल, अपनी बहन शिल्पा उम्र 25 साल के साथ रहता है। विशाल ने दलाल के माध्यम से शादी की। सुहाग रात की रात संभोग के दोरान उसे पता चला कि जिस लड़की (कृति) के साथ लड़की समझ कर उसने शादी की वो एक ट्रांसजेंडर थी। विशाल एक समझ दार युवक था, उसने रात भर बिना कोई हंगामा किये सुबह होने का इंतजार किया।
सुबह जब अपनी बहन और रिश्तेदारों के बीच उसने अपनी पत्नी के बारे में सभी को बताया तो किसी के पास कोई जबाब नही था, वो दलाल जिसने शादी कराई थी उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उसे समझ नही आ रहा था अपनी पत्नी कृति के साथ वो क्या करे.... साथ रखे या छोड़ दे..???
विशाल समझदार था उसने कोई भी फैसला जल्दबाजी में ना लेते हुए कुछ दिन बीत जाने का इंतजार किया देखते देखते एक महिना निकल गया...... शिल्पा जानती थी कि उसके भाई ने एक ट्रांसजेंडर से शादी की है. शुरू शुरू में तो उसे थोडा अजीब लगा था पर उसकी कृति भाभी इतनी प्यारी थी कि धीरे धीरे उसने अपने भाई और कृति के रिश्ते को स्वीकार कर लिया था. अब उसे अपने भैया-भाभी के बीच सिर्फ पति-पत्नी का प्यार दिखाई देता था… उनके लिंग नहीं.
आखिर होना भी ऐसा ही चाहिए. पर समाज को ये बात समझने में थोडा समय लग जाता है.
भले कृति एक ट्रांसजेंडर थी पर किसी साधारण पत्नी की ही तरह थी वो. आखिर एक औरत थी वो. फर्क तो देखने वाले की नज़र में होता है. कृति के बूब्स पहले ही काफी बड़े थे और कृति का फिगर भी आकर्षक था, विशाल की नज़र में कृति का लिंग एक स्त्री का ही लिंग था… और विशाल को कृति के लिंग को छूकर हिलाना, चूमना और चूसना भी पसंद था. यदि घर में शिल्पा न होती तो विशाल तो शाम को काम से घर आते ही अपनी पत्नी की साड़ी उठाकर और उसकी पतली सी लेस वाली पेंटी उतारकर उसके साथ सेक्स करने लगते. विशाल कृति को एक संपूर्ण स्त्री मान चुका था. वो कृति को पूरा सम्मान देता था जो समाज में एक पत्नी को मिलना चाहिए. कृति भी अपने पति के व्यवहार से खुद को बड़ी भाग्यशाली मानती थी.
पति के जाने के बाद भी एक गृहिणी के लिए घर में बहुत से काम होते है… कृति को भी बहुत कुछ करना था. सबसे पहले तो शिल्पा के लिए टिफ़िन पैक करना था. इसलिए कृति शिल्पा के कमरे की ओर बढ़ चली ताकि उससे पूछ सके कि आज कितने बजे जॉब के लिए निकल रही है वो.
शिल्पा के कमरे के बाहर से ही कृति ने आवाज़ दी… “शिल्पा”.
“अन्दर आ जाओ भाभी”, शिल्पा ने जवाब दिया. जिसे सुनकर कृति दरवाज़ा खोलकर अन्दर आ गयी. अन्दर आते ही उसने देखा कि शिल्पा सिर्फ पेंटी पहनी हुई है और पूरी तरह से नग्न है. उसे ऐसी हालत में देखते ही कृति पीछे मुड गयी और बोली, “ओहो शिल्पा… कितनी बार तुझसे कहा है कि कपडे पहन कर रहाकर.”
पर शिल्पा ने मुडती हुई कृति का तुरंत हाथ पकड़ा और अपनी बांहों में खिंच लायी. शिल्पा के नग्न स्तन उसकी भाभी के स्तनों से अब लग रहे थे. “भाभी अब तुमसे क्या शर्माना. हम दोनों औरतें ही तो है. और वैसे भी मेरे बूब्स और आपके बूब्स में ज्यादा फर्क कहाँ है?”
“चल हट. बहुत बेशर्म हो गयी है तू. औरतों के बीच भी कुछ मर्यादा होती है.”, कृति ने शिल्पा को अपने से दूर धकेलते हुए कहा जिससे शिल्पा के स्तन कृति के हाथो से और दब गए.
“भाभी तुम भी न बहुत शर्माती हो. रुको मैं एक मिनट में कपडे पहनती हूँ.”, शिल्पा बोली और अपनी ब्रा पहनने लगी. और फिर उसने एक छोटी सी स्कर्ट पहनी और ऊपर से एक सेक्सी टॉप जिसमे उसका क्लीवेज काफी गहरा लग रहा था.
“आज ऑफिस नहीं जाओगी?”, कृति ने पूछा.
“नहीं भाभी. आज तो मैं अपने बॉयफ्रेंड के साथ सिनेमा जाऊंगी.”, शिल्पा मुस्कुराते हुए बोली.
शिल्पा तैयार हो चुकी थी. लिप ग्लॉस लगाये आज उसके होंठ बेहद रसीले लग रहे थे. काफी बिंदास स्वाभाव की लड़की थी शिल्पा. तैयार होकर वो अपनी ट्रांसजेंडर भाभी के करीब आई और उसका हाथ पकड़ कर बोली, “भाभी तुम यदि शरमाओ न तो एक बात का जवाब दोगी?”
“क्या सवाल है?”, कृति तो सवाल सुनने के पहले ही घबरायी हुई थी.
“क्या तुम लंड चुस्ती हो?”, शिल्पा ने बेझिझक अपनी भाभी की आँखों में देखते हुए पूछा.
“छी… ऐसा नहीं बोलते”, कृति ने शिल्पा से मुंह फेर कर अपनी साड़ी के पल्लू को पकड़ कर घुमाने लगी. वो अब भी नर्वस थी.
“ठीक है.. ठीक है.. तो ये बताओ क्या आप मेरे भैया को ब्लो जॉब देती हो?”, शिल्पा हँसते हुए बोली.
“बहुत बदतमीज़ हो गई है तू शिल्पा.”, कृति ने बिना शिल्पा की ओर देखे कहा.
“अरे भाभी… प्लीज़ बताओ न…
“हाँ, चुस्ती हूँ मैं उनका लंड.”, थोड़ी शर्माती थोड़ी मुस्काती कृति ने अपनी साड़ी से मुंह छिपाते हुए कहा. तो शिल्पा भी मुस्कुरा दी. “… पर तू क्यों पूछ रही है?”, कृति ने शिल्पा से पूछा.
“भाभी… मैं सोच रही हूँ कि अब से अपने बॉयफ्रेंड को खुश करने के लिए उसके लंड को चुसू. आखिर इससे गर्भवती होने का डर नहीं रहता न?”
“शिल्पा… शादी से पहले ये सब ठीक नहीं है.”, कृति ने एक भाभी के नज़रिए से कहा.
“ओहो भाभी.. अब तुम भी बुड्डी आंटियों की तरह लेक्चर न दो.
शिल्पा की बात सही थी इसलिए कृति चुप रह गयी.
“अच्छा भाभी… आप मुझे सिखाओगी कि लंड कैसे चूसते है?”, शिल्पा ने पूछा. तो कृति ने नटखट आँखों से उसकी ओर देखा और बोली, “चुप कर… कुछ भी कहती रहती है. मैं नहीं सिखाने वाली तुझे.”
“भाभी… क्यों इतने नखरे दिखा रही हो? ज़रा सिखा दोगी तो तुम्हारा कुछ बिगड़ जाएगा क्या?”, शिल्पा ने कृति का हाथ पकड़ते हुए कहा और कृति ने बिस्तर पर बैठकर अपने आँचल को संवारा और आँखें बंद कर बोली, “ठीक है तो तू सुन…”
“पर आँखें क्यों बंद कर रही हो भाभी?”
“मैं आँखें खोलकर तेरे सामने नहीं कह सकती. तुझे सुनना है तो सुन.”, कृति बोली.
“ठीक है. तुम आँखें बंद कर के ही सिखा दो.”, और शिल्पा अपनी भाभी से चिपक कर बैठ गयी.
“सबसे पहले उनके बेहद करीब जाना… इतने करीब कि तुम्हारे बूब्स उनके सीने से लग जाए. फिर उनकी बांहों को अपने दोनों हाथो से पकड़ कर उनके तन से लगकर खड़ी हो जाना. और फिर उनकी नजरो में देखते हुए उनके होंठो को चूमना”
कृति की बात सुन शिल्पा ने कृति की ब्लाउज की आस्तीन पर से उसकी दोनों बांहों को पकड़ा और उसे बिस्तर से उठाया और कृति के सीने से चिपक गयी. कृति की आँखें अब भी बंद थी और उसे समझ नहीं आया कि शिल्पा क्या कर रही है. पर शिल्पा अपनी भाभी के बूब्स से अपने बूब्स दबाकर बेहद करीब आ गयी और अपनी भाभी के मुलायम होंठो पर अपने होंठो से हल्का सा चुम्बन देकर बोली, “ऐसे?”
शिल्पा की गर्म सांसें और बूब्स को अपने सीने पर महसूस कर कृति एक बार फिर नर्वस होने लगी. और वो अपनी आँखें बंद की रही. शिल्पा अपनी भाभी के साथ कुछ ऐसा वैसा तो नहीं करेगी? ऐसे विश्वास के साथ कृति गहरी सांसें लेने लगी.
“इसके बाद क्या करना है भाभी?”, शिल्पा ने जब कहा तो कृति जैसे वापस होश में आते हुए बोली, “… और फिर… और फिर… धीरे धीरे उनके तन पर हाथ फेरते हुए उनकी पेंट के उस हिस्से पर ले जाना और उसे ऊपर से ही पकड़ने की कोशिश करना. इस वक़्त उनका लंड धीरे धीरे कर खड़ा होने की कोशिश करेगा.”
तो शिल्पा भी अपनी भाभी की साड़ी पर से ही उनके तन पर हाथ फेरते हुए उनकी कमर के निचे उस हिस्से तक ले गयी जहाँ प्लेट के पीछे कृति का लंड छुपा हुआ था. उसके ऊपर हाथ फेरते हुए शिल्पा ने धीरे से कृति के लंड को साड़ी के ऊपर से ही पकड़ने की कोशिश की. कृति भाभी का लंड इस वक़्त मुलायम से थोडा सख्त होने लगा था. “और आगे भाभी…”, शिल्पा आंहे भरती हुई बोली.
“… और फिर धीरे धीरे अपने बूब्स को उनके तन से दबाकर पूरे शरीर को छूते हुए निचे अपने घुटनों पर चली जाना.” और शिल्पा ने वैसा ही किया कृति की साड़ी पर शिल्पा के फिसलते हुए बूब्स धीरे धीरे उसके लंड के पास पहुच गए.
अब उनके लंड को फिर से अपने हाथो से उनकी पेंट के ऊपर से ही सहलाना.. जब तक वो थोडा और सख्त न हो जाए.” भाभी की बात सुन शिल्पा ने एक बार फिर भाभी की साड़ी की प्लेट के बीच हाथ डाला और ऊपर से ही उनके लंड को सहलाने लगी. कृति का लंड अब और सख्त हो चला था. आज तक कृति को इसके पहले किसी लड़की ने इस तरह छुआ नहीं था. वो तो हमेशा से ही अपने पति की ही थी. पर उसकी ननद शिल्पा आज उसे बेहद उकसा रही थी. शिल्पा को भी अपनी भाभी की सैटिन साड़ी को छूने में मज़ा आ रहा था. वो भी उत्सुक थी जानने के लिए कि उसकी भाभी का लंड आखिर कैसा है. छूने पर तो कृति का लंड शिल्पा को बड़ा ही लग रहा था पर उसने अब तक उसे देखा नहीं था. वो तो जैसे उसे देखने को बेताब हो रही थी. साड़ी में उसकी भाभी के लंड की उभरती हुई आकृति उसे उकसा रही थी.
कृति और शिल्पा… इन दोनों औरतों को एहसास ही नहीं रहा कि ये जो वो कर रही थी उन्हें इस तरह मदहोश करने लगेगा. इसके पहले न कभी कृति का और न ही शिल्पा का किसी औरत में इंटरेस्ट था… फिर भी दोनों इस तरह मदहोश हो रही थी.
शिल्पा ने कृति कीकमर पर हाथ फेरा और फिर साड़ी हटाकर अपने होंठो से उनकी नाभि को चूम लिया और फिर अपने दोनों हाथो से भाभी की कमर को पकड़कर उन्हें बिस्तर पर लिटा उनके ऊपर चढ़ने लगी.
जहाँ उसने अपनी भाभी की नाभि और थिरकती कमर को खूब चूमा.
कृति ने अपने लंड के इतने पास शिल्पा को चुमते हुए महसूस किया तो वो और मचल उठी… और खुद अपने हाथो से अपने ब्लाउज पर से अपने बूब्स को मसलने लगी.
अब उनके पेंट की ज़िप खोलकर उनके लंड को धीरे से बाहर निकालना.”, कृति आगे शिल्पा को बताती रही.
कृति भाभी ने तो पेंट पहनी नहीं थी इसलिए शिल्पा उनकी साड़ी के निचे से हाथ ले जाते हुए उनकी साड़ी को ऊपर उठाने लगी और उनके मखमली पैरो को छूने लगी और फिर उनकी जांघो पर अपने हाथ फेरने लगी. कृति अब पूरी तरह मचल उठी थी… वो तड़प रही थी कि कब शिल्पा उसके उफनते हुए लंड को पकडे पर शिल्पा अपनी भाभी को और उकसाती रही. कुछ देर जांघो को छूने के बाद शिल्पा ने कृति की साड़ी को और ऊपर उठाया और उनकी पेंटी पर उभरे हुए लंड को अपने हाथो से छूने लगी. अब तो उनके लंड का आकर उस पेंटी में साफ़ दिख रहा था. शिल्पा खुद अब उसे निकाल कर छूने को बेचैन हो गयी थी. उसने अपनी भाभी की पेंटी को निचे कर अपनी भाभी का लंड बाहर निकाल दिया… जिसे देखकर शिल्पा की आँखों में चमक आ गयी.
ये लंड बेहद ख़ास था… गुलाबी और साफ़ सुथरा.. जिसके आसपास एक भी बाल न था. चमकदार, गुलाबी, और बेहद सुन्दर लंड था वो… इतना साफ़ तो उसे कोई कृति की तरह की औरत ही रख सकती थी. शिल्पा उसे तुरंत चूस लेना चाहती थी पर उसे तो अभी अपनी भाभी को और तडपाना था.
“अब वो लंड तुम्हारे होंठो के लिए बेताब हो रहा होगा. पर तुम उसे कुछ देर अपने हाथो से छूना…” कृति बंद आँखों से मदमस्त होते हुए बोली और अपने होंठो को खुद ही कांटने लगी.
शिल्पा ने भी वैसा ही किया और उसकी आँखों के सामने वो लंड और मचलने लगा.
उफ़… शिल्पा के लिए खुद को उस लंड को चूसने से रोक पाना बेहद मुश्किल हो रहा था पर उसने सिर्फ उसे चूमा. तो वो लंड और मचलकर हिलोरे मारने लगा.
शिल्पा खुद बेचैन हो गयी थी. उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो खुद को उकसा रही है या भाभी को? “.. अब अपने हाथो से उसे पकड़ कर अपनी गर्म सांसें उस पर छोड़ना और फिर धीरे धीरे अपने होंठो को उस पर लपेट देना. और फिर अपने होंठो को धीरे धीरे उस लंड को अपने मुंह में लेना शुरू करना…. पर सिर्फ ऊपर का हिस्सा… एक अच्छी औरत अभी उस लंड को इसी तरह से और उकसाती है.”
फिर शिल्पा ने अपने लिप ग्लॉस लगे रसीले होंठो से उस लंड को लपेटा और फिर उसे धीरे धीरे मुंह में लेने लगी. उसकी भाभी का लंड शिल्पा के मुंह में जाने को बेताब होने लगा . इतने नर्म होंठ कभी उसने अपने लंड पर महसूस नहीं किये थे. और फिर शिल्पा ने अपनी भाभी के लंड को थोडा सा चूसकर अपने मुंह से बाहर निकाल दिया.
और अब… और अब…”, कृति बदहवास हो रही थी, “… अब अपनी जीभ से उस लंड की लम्बाई को निचे से ऊपर तक चाटना…” शिल्पा भी अपनी भाभी की मदहोशी से मचल कर उस लंड को जीभ से निचे से ऊपर तक चाटने लगी.
“… और अब… और अब… एक बार फिर….”, कृति से अपने बूब्स को मसलते हुए बोला भी न जा रहा था “… उसकी भाभी बेचैन हुए जा रही थी.
कृति की सांसें बहुत तेज़ होती जा रही थी… मचलती हुई कृति के पूरे जिस्म में आग लग चुकी थी और उसका बदन लहराने लगा… और उसके पैर भी सरकने लगी.. कमर थिरकने लगी… अब उससे रहा नहीं जा रहा था और वो उत्साह में लगभग चीख उठी..”अब चुस्ती क्यों नहीं है साली! कितना तडपाएगी मुझे…?” और उसने शिल्पा का सर पकड़ कर दबा दिया कि वो पूरे लंड को मुंह में ले ले.
भाभी को इस तरह तड़पते देख शिल्पा भी अब पूरे उत्साह से भाभी के गुलाबी लंड को चूसने लगी और अपने मुंह में अन्दर बाहर करने लगी… उसे बेहद मज़ा आ रहा था. उसके हर स्ट्रोक पर उसकी भाभी आँहें भरती और मदहोशी भरी आवाजें निकालती. इन दोनों औरतों को बेहद मज़ा आ रहा था… पर इस बेहद उत्तेजित समय का अंत भी जल्दी आता है… और जल्दी ही उसकी भाभी के लंड से रस बाहर आने लगा. शायद हॉर्मोन की वजह से उस लंड से रस कम आता था जिसे शिल्पा ने अपनी भाभी के पेटीकोट से ही पोंछ लिया. दोनों औरतें अब थक चुकी थी और ख़ुशी के मारे वहीँ एक दुसरे पर निढाल हो गयी.
थोड़ी देर बाद शिल्पा अपनी भाभी की बांहों से बाहर निकलकर बिस्तर पर उठ बैठी और भाभी की ओर मुस्कुराती हुई देख कर बोली, “भाभी अब सचमुच बहुत अच्छे से सिखाती हो.”
शिल्पा की बात सुन कृति शर्मा गयी. आज ननद और भाभी का रिश्ता ही बदल गया था. दोनों एक दुसरे की आँखों में एक चमक देख सकती थी.
“अच्छा भाभी… मैं शाम को मिलूंगी तुमसे.”, शिल्पा बिस्तर से उठने लगी तो कृति ने उसका हाथ पकड़कर रोक लिया… “इतनी जल्दी क्या है?
“भाभी… मेरा बॉयफ्रेंड मेरा इंतज़ार कर रहा है. मैं शाम को जल्दी आऊंगी… पक्का.”, शिल्पा ने कहा और झट से पर्स उठाकर कमरे से बाहर चल दी.
और कृति उस कमरे में बिस्तर में वैसे ही लेटी रही… वो सोच में पड़ गयी थी कि ये सब क्या हुआ? उसे अपने पति विशाल का ख्याल आने लगा… यदि उन्हें पता लगा तो क्या करेगी वो? इसी दुविधा में कृति वहीँ सोचती रह गयी.
बेचैन होकर उलटती पलटती कृति की दोपहर कैसे बीत गयी पता भी नहीं चला. इतनी देर बिस्तर पर बिताने के बाद भी वो थकी हुई थी. उठते ही उसने एक सफ़ेद रंग की सैटिन साड़ी निकाली जिसकी हरे रंग की बॉर्डर थी और हरे रंग के ही फुल-पत्तियों के प्रिंट थे. उस साड़ी से मैच करता हुआ एक नेट का पारदर्शी ब्लाउज था जिसके अन्दर सब कुछ दीखता था.
तैयार होकर कृति किचन आकर खाना बनाने में व्यस्त हो गयी. करीब एक घंटे बाद घर का दरवाज़ा खुला. कृति की ननंद शिल्पा दौड़ी चली आई और पूरे उत्साह के साथ आकर अपनी भाभी को पीछे से पकड़ ली. बहुत खुश लग रही थी वो.
कृति भी इस वक़्त खुश थी तो उसने पूछा, “क्या बात है? बड़ी खुश लग रही हो?”
शिल्पा ने कृति के कान के पास अपने होंठ लाकर धीमी आवाज़ में कहा, “भाभी.. धीरेन्द्र तो आज बहुत खुश हो गया.” न जाने क्यों कृति का मन एक बार फिर विचलित होने लगा. “कौन धीरेन्द्र?”, कृति ने रुखी आवाज़ में कहा.
कृति जानती थी कि धीरेन्द्र कौन है और शिल्पा ब्लो जॉब के बारे में बात कर रही थी. न जाने क्यों शिल्पा और उसके बॉयफ्रेंड के बारे में सोचकर ही कृति के मन में थोडा सा गुस्सा आने लगा. उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो ऐसा क्यों सोच रही है. क्या उसे जलन हो रही थी शिल्पा को किसी और के साथ सेक्स करते हुए सोच कर? मगर क्यों? वो तो खुद अपने पति के साथ ख़ुश थी… फिर शिल्पा जिसके साथ जो चाहे करे.. उसे क्या?
शिल्पा की बात को अनदेखा कर कृति ने बड़ी बेरुखी से कहा, “जाकर खाने की मेज सजाओ. तुम्हारे भैया आ गए है और खाने का इंतज़ार कर रहे है.
शिल्पा अपनी भाभी के मुंह से ऐसी बात सुनकर आश्चर्य में थी. भाभी उसकी ख़ुशी में शामिल क्यों नहीं हो रही है? सोचते हुए शिल्पा खाना मेज पर लगाने लगी.
थोड़ी देर बाद सभी बिना ज्यादा कुछ बोले खाना खाकर अपने कमरे में चले गए.
शिल्पा को अनदेखा कर कृति अपने बेडरूम आ गयी जहाँ उसके पति विशाल उसका बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे. उनकी आँखों की आतुरता देख कृति मुस्कुराते हुए बोली, “ज़रा रुको मैं अभी आती हूँ.” और पति को तडपाती हुई कृति कमर मटकाते हुए कमरे से लगे बाथरूम चली गयी.
बाथरूम में आते ही कृति ने ब्लाउज में लगी हुई पिन को खोलकर अपने पल्लू को उतारा और फिर अपना ब्लाउज उतारने लगी. ब्लाउज को किनारे में रख कृति ने अपनी ब्रा उतार दी. और फिर से ब्लाउज पहनने लगी. ब्लाउज पहनकर कृति ने खुद को आईने में देखा. उसके हरे पारदर्शी ब्लाउज में उसके बड़े बड़े निप्पल साफ़ झलक रहे थे. फिर कृति ने अपने हाथो को ब्लाउज के अन्दर डालकर अपने स्तनों को ब्लाउज में सही तरह से एडजस्ट किया कि उसके निप्पल पॉइंट कर उभरे हुए दिखे. संतुष्ट होने पर कृति ने एक बार फिर अपनी सैटिन साड़ी के पल्लू को अपने कंधे पर चढ़ाया और फिर अपनी बिंदी को माथे पर सही जगह पर लगाया. कृति इस वक़्त बेहद हॉट दिख रही थी. और फिर उसने अपने होंठो पर लिप ग्लॉस लगाया ताकि उसके होंठ चुमते वक़्त और रसीले लगे. कृति ने एक बार फिर अपने आँचल को संभाला और मुस्कुराती हुई बाथरूम से निकल कर बेडरूम आ गयी.
बिस्तर पर अपनी लेटी हुई पत्नी की ब्लाउज में खुली हुई पीठ और सैटिन साड़ी में लिपटी हुई खुबसूरत बड़ी सी गांड देख विशाल और बेचैन हो उठे. सचमुच कृति को अपने पति को रिझाना बखूबी आता था.
विशाल अब अपने हाथ कृति के ब्लाउज पर फेरने लगे और उसके स्तन दबाने लगे. कृति भी मुस्कुराती हुई अपने हाथ पीछे कर अपने पति के सर को अपने और करीब लाने लगी ताकि वो उसे गर्दन पर अच्छी तरह चूम सके. “आज तो तुमने ब्रा भी नहीं पहनी है डार्लिंग. अब मुझसे और रुका नहीं जाएगा.”, विशाल ने कहा.
“तो आपको रोक कौन रहा है जानू… मैं तो आपकी ही हूँ.”, कृति ने मदहोशी भरी आवाज़ में कहा.
विशाल अब और उत्साह से कृति के बूब्स के बीच हाथ डालकर दबाने लगे और फिर उसकी पीठ पर चूमने लगे. धीरे धीरे उन्होंने हाथो को निचे ले जाकर कृति की साड़ी की चुन्नटो के बीच ले गए जहाँ उन्होंने कृति के लंड को पकड़ लिया और उसे सहलाने लगे.
“ कृति का लंड भी खड़ा हो रहा था पर उसके दिल में कुछ और था. वो नहीं चाहती थी कि आज विशाल उसका लंड चुसे.
विशाल अब भी कृति के लंड को उसकी साड़ी पर से ही सहला रहे थे तो कृति ने अपने एक हाथ से उसे हटाया. और अपने हाथ को अपने पीछे लिपटे हुए पति के पैजामे में डाला और उनका खड़ा लंड अपने कोमल हाथों से बाहर निकाल कर उसे हिलाने लगी. हिलते हाथो के साथ उसकी हरे कांच की चूड़ियों की खनक बेहद मोहक लग रही थी. कृति ने फिर उस लंड को अपनी गांड पर दबाया. विशाल का लंड कृति के नर्म हाथो और गांड के बीच मचल उठा…
बिना ब्रा के तो वैसे भी कृति के स्तन आज़ाद ही थे. कृति की ब्लाउज की सारी हुक खुलते ही विशाल ने उन दोनों हिलते हुए स्तनों को अपने दोनों हाथो से जोरो से मसल दिया तो कृति एक मीठे दर्द भरी आंह निकाल कर मचलने लगी. मदमस्त होती कृति ने भी अपने हाथो से विशाल के सर को अपने बूब्स पर और जोर से दबाया और उनके सर को अपने सैटिन साड़ी के आँचल से ढँक दिया.
कुछ देर तक अपनी पत्नी के स्तनों का आनंद लेने के बाद विशाल ने अपनी पत्नी को पलटाकर उठाया और उसे डौगी पोजीशन में बिस्तर में तैयार किया और खुद पत्नी की गांड के पीछे आ गए. इस वक़्त कृति के बाल बिखर गए थे, ब्लाउज खुला हुआ था जिसमे से उसके स्तन उस पोजीशन में लटक कर झूल रहे थे.
कृति तो जैसे अब मदहोश हो चुकी थी. अब वो अपनी गांड को मदहोशी में लहराने लगी और अपने पति के लंड को और तरसाने लगी. पर वो तो खुद तरस रही थी. अपनी पत्नी की तड़प देखकर विशाल ने भी झट से अपने लंड को कृति के अन्दर डाल दिया. उस एक झटके में कृति तो जैसे झूम उठी और उसके मुंह से एक आवाज़ एक आंह निकल पड़ी. कामुकता की मारी कृति अपने एक हाथ से अपने स्तनों को छूकर दबाने लगी. और विशाल भी अपने एक हाथ से कृति की डोग्गी पोजीशन में झूलते हुए स्तनों को पकड़ कर दबाने लगे. “और जोर से दबाओ न!”, कृति मदहोशी में लगभग चीख उठी. तो पत्नी की बात सुनकर विशाल और जोर से दबाने लगे और जोर जोर से अपने लंड को अन्दर बाहर करने लगे. इस दौरान कृति के मुंह से निकलने वाली आन्हें और तेज़ हो गयी थी.
अक्सर कृति ऐसी आवाजें नहीं निकाला करती थी क्योंकि उसकी ननंद शिल्पा बगल के कमरे में ही सोया करती थी. पर आज न जाने कृति को क्या हो गया था, उसे बिलकुल परवाह नहीं थी कि उसकी ये चरम उत्तेजना में निकलने वाली आवाजें किसे सुनाई देती है. विशाल अपनी पत्नी के बड़े स्तनों को और जोर जोर से मसल मसल कर उसे और आनंद दे रहे थे, और वहीँ गांड में लंड को भी बड़े तेज़ी से अन्दर बाहर कर रहे थे.
और फिर कुछ समय में पति-पत्नी के बीच की ये लीला पूरी हो गयी. दोनों के चेहरे पर एक संतुष्टि का भाव था. आज कृति बाकी दिनों के मुकाबले बहुत ज्यादा कामोत्तेजित थी. चाहे जो भी वजह थी इसके पीछे, विशाल बहुत खुश थे. पर होता है न कि अक्सर ऐसी रातें यूँ ही ख़त्म नहीं हो जाती. खासकर पति तो अपनी पत्नी को छूकर पूरी रात उकसाते रहते है. और कृति बिस्तर में ही बेचैन होकर अपने तन को काबू में करने की कोशिश करती पर दोनों के जिस्म एक दुसरे के और करीब आ जाते.
और देखते ही देखते न जाने कब सुबह हो गयी दोनों को पता भी न चला. कृति बिस्तर में अभी भी पति की बांहों में लेटी हुई थी. उसने ब्लाउज तो पहना हुआ था पर उसके हुक खुले हुए थे और स्तन बाहर निकले हुए थे. कितने सुन्दर और सुडौल लग रहे थे वो स्तन. कृति की कमर के निचे अब भी साड़ी लिपटी हुई थी. साड़ी पहनने का यह तो फायदा है कि उसे बिना उतारे ही प्यार करने का आनंद लिया जा सकता है. और फिर उस साड़ी का मोहक कपडा यदि सैटिन हो तो पति पत्नी दोनों ही उसके स्पर्श से और उत्तेजित हो जाते है.
कृति ने अपनी साड़ी जो उठकर घुटनों के ऊपर तक आ गयी थी, उसे सरकाकर निचे किया. और फिर अपने ब्लाउज के हुक लगाने लगी.
मुस्कुराती हुई कृति जब किचन पहुंची तो उसने देखा कि उसकी ननंद शिल्पा जाग चुकी थी और ब्रेड टोस्ट का नाश्ता कर रही थी.
उसने शिल्पा को अनदेखा करते हुए किचन में जाकर अपने काम करने लगी. सबसे पहले तो उसने अपने बालों को बांधकर जूडा बनाया और फिर पति के लिए चाय बनाने लगी.
इस वक़्त शिल्पा का चेहरा भी कुछ उखड़ा हुआ था.
“लगता है कल रात पति-पत्नी के बीच बहुत प्रेम लीला हुई है.”, शिल्पा ने अपनी भाभी से कहा. उसकी आवाज़ में एक गुस्सा साफ़ झलक रहा था. आखिर उसे रात को पति-पत्नी की क्रीडा के दौरान आवाजें सुनाई पड़ ही गयी थी. पर क्यों नाराज़ थी वो कृति से? आखिर कृति भाभी ने तो उसे वो सीखाया था जो कल अपने बॉयफ्रेंड धीरेन्द्र के साथ आजमा सकी थी. कल शाम को तो अपनी भाभी को ये सब बताते हुए बड़ी खुश थी वो. फिर क्यों आज वो इतनी नाराज़ थी, ये तो वो खुद भी नहीं जानती थी.
“हाँ.. हमने कल रात प्यार किया है. तुझे क्या करना है?”, कृति ने भी लगभग उखड़े स्वर में जवाब दिया.
अपनी भाभी से रुखा जवाब मिलने पर शिल्पा बिना कुछ कहे उठकर किचन से अपने कमरे की ओर चली गयी. और कृति भी अपने पति के लिए खाना बनाने में व्यस्त हो गयी.
कल दिन में जब कृति की ननंद शिल्पा ने कृति के लिंग को चूसकर ब्लो जॉब दिया था उसके बाद से ही उसके मन में एक ग्लानी थी. कल के पहले कृति के जिस्म को उसके पति विशाल के अलावा किसी ने नहीं छुआ था… न किसी आदमी ने और न ही किसी औरत ने. पर कल? कल कृति ने अपने पति के पीछे उन्हें धोखा दिया और वो भी उनकी बहन के साथ. उसके मन में ग्लानी तो होनी ही थी. पर इसके अलावा भी कुछ और बात थी.
कल तक जो ननंद भाभी के बीच एक प्यार भरा रिश्ता था वो एक बार में ही जिस्म की आग में झुलसते हुए कही बिखर गया था.
भले ही कृति एक सीधी साड़ी गृहिणी थी पर उसे भी अपने रूप पर गर्व था. शिल्पा की चिंता छोड़ कर कृति ने अपने ब्लाउज को अपनी साड़ी से ढंका और अब नहाने के लिए बाथरूम आ गयी. बाथरूम में आकर कृति ने धीरे धीरे खुद को आईने में देख अपनी साड़ी उतारनी शुरू की. और फिर उसके बाद अपनी ब्लाउज को खोलने लगी. बिना ब्रा के उसके स्तन ब्लाउज से तुरंत बाहर निकल आये. और कृति ने अपने निप्पल को पकड़ कर मसलना शुरू कर दिया. जल्दी ही कृति का लंड खड़ा हो चूका था और उसकी वजह से उसका पेटीकोट उठ चूका था. आखिर उसने अन्दर पेंटी तक नहीं पहनी थी.
उत्तेजना में कृति ने अपना पेटीकोट उतारा और फिर अपने खड़े लंड को और सहलाने लगी. कठोर निप्पल और खड़े लंड के साथ वो आईने में बड़ी सेक्सी लग रही थी. खुद के लंड को देख वो बड़ी खुश हुई. गुलाबी चमचमाता हुआ और बिलकुल साफ़ सुथरा लिंग था कृति का जिसके आसपास एक बाल तक नहीं था. और फिर मुस्कुराती हुई कृति शावर में जाकर नहाने लगी. वो चाहती तो उत्तेजना में वो खुद को और सहला सकती थी. पर इतनी खुबसूरत औरत भला खुद को खुश करे? ये तो अपमान ही होगा न? जब पूरी दुनिया में कोई भी उसके जिस्म को छूकर उसे खुश करने को बेताब होगा तो वो क्यों भला खुद मेहनत करे? हंसती मुसकुराती हुई कृति नहाकर बाहर निकली और उसने एक सुन्दर सी लेस वाली ब्रा पहनी. भीगे बालो में बहुत ही सेक्सी लग रही कृति की ब्रा ने जब उसके बूब्स को अपने अन्दर कैद किया तब जाकर उसका खुद के तन पर थोडा सा वश वापस आने लगा था. और फिर कृति ने धीरे से अपने कोमल पैरो पर एक हलकी सी सैटिन पेंटी को सरकाया और खुद के चिकने पैरो को अपनी उँगलियों से छूते हुए कृति ने वो पेंटी पहन ली. और फिर उसके बाद एक मैचिंग पेटीकोट में अपनी कमर को लहराती हुई नाडा बांधकर कृति अब साड़ी पहनने को तैयार थी.
वैसे तो कृति को अपनी ब्रा के ऊपर ब्लाउज पहनना चाहिए था पर आज उसने बिना ब्लाउज के ही साड़ी पहनने की सोची. घर में वैसे भी सिर्फ शिल्पा थी आज कृति को उसके रहने न रहने से फर्क नहीं पड़ता था. और फिर कृति ने अपने बड़े बड़े कुलहो पर अपनी साड़ी को लपेटा और अपने साड़ी में एक एक प्लेट सलीके से बनाने लगी. भीगे लम्बे बालो में इतने करीने से प्लेट बनती हुई कृति को इस वक़्त कोई देख लेता तो यकीनन ही उसका खुद पर काबू नहीं रहता.
और यदि वहां शिल्पा होती तो? क्या शिल्पा अपनी भाभी के स्तनों को दबाती हुई अपने घुटनों पर बैठकर अपनी भाभी की साड़ी उठाती और उनके लंड को बाहर निकाल कर अपने रसीले होंठो से चुस्ती? हाय, ये कैसा ख्याल आ रहा था कृति के मन में? ये विचार आकर उसके जिस्म में आग लगा रहे थे.
जहाँ एक ओर कृति अपने मन से लड़ रही थी वहीँ उसकी ननंद शिल्पा की मनोदशा कुछ अलग ही थी. अपने कमरे में बिस्तर में नाइटी पहनी शिल्पा लेटी हुई थी और उसके मन में एक गुस्सा भरा हुआ था. करवटें बदलती हुई शिल्पा के मन में अपनी भाभी के प्रति क्यों इतना गुस्सा था वो खुद समझ नहीं पा रही थी. यदि उसकी भाभी ने अपने पति के साथ रात को सेक्स किया तो शिल्पा को इस बात से क्यों फर्क पड़ रहा था? आखिर वो भी तो अपने बॉयफ्रेंड के साथ सेक्स करके खुश थी? रह रह कर उसके मन में धीरेन्द्र के साथ सेक्स की जगह उसे कल दोपहर को अपनी भाभी के साथ किये सेक्स की तसवीरें आ रही थी जब वो अपनी भाभी का गुलाबी लंड चूस रही थी. ऐसा क्यों हो रहा था उसेक साथ? धीरेन्द्र को छोड़ वो भाभी के बारे में क्यों सोच रही थी? खुद के मन को शिल्पा खुद ही नहीं समझ पा रही थी. ऐसे ही न जाने क्या क्या सोचती हुई शिल्पा न तो आज नहाई थी और न आज ऑफिस गयी थी.
फिर शिल्पा बिना कुछ सोचे समझे अपनी घुटनों तक की नाइटी पहने हुए ही अपने कमरे से बाहर आ गयी. बाहर आकर उसने देखा कि उसकी भाभी सोफे पर बैठी हुई अपने घुटनों को मोड़े हुए गृहशोभा मैगज़ीन पढ़ रही थी. उसकी भाभी ने तो आज ब्लाउज भी नहीं पहना था. बस खुले पल्ले के साथ ब्रा को ढंककर साड़ी पहनी हुई उसकी भाभी उसे बेहद आकर्षक भी लग रही थी.
उसकी भाभी की गोरी कमर में सॉफ्ट सी नाभि के निचे साड़ी की खुबसूरत प्लेट्स के पीछे उसकी भाभी का लंड छुपा है, यह ख्याल उसके मन में क्यों आ रहा था? पर शिल्पा की ओर ज्यादा ध्यान न देते हुए कृति ने अपने एक पैर को दुसरे पैर पर रखा और अपनी नाभि को साड़ी से ढंकते हुए हाथ में रखी मैगज़ीन का पन्ने पलट कर देखने लगी. कृति शिल्पा को अनदेखा करने का ड्रामा कर रही थी. वो उसे सच में अनदेखा करना चाहती थी पर कर नहीं पा रही थी. इसलिए अपनी मैगज़ीन में ध्यान देने की कोशिश कर रही थी. पर वहां भी उसका दिल कहाँ लग रहा था?
अपनी भाभी की ऐसी हरकत देखकर एक बार फिर शिल्पा के दिल में गुस्सा बढ़ गया. और वो गुस्से में ही अपनी भाभी के बगल में आकर बैठ गयी. कृति की नज़र अब शिल्पा के गोरी चिकनी टांगो पर थी. उसे पता था कि बिना नहाई हुई शिल्पा के बिखरे बाल और उस नाइटी में उसकी गोरी चिकनी टाँगे सभी कुछ कृति को उकसा रही थी.
कृति ने शिल्पा को अनदेखा किया तो उससे रहा नहीं गया और वो गुस्से से अपनी भाभी पर चीख पड़ी, “क्यों भाभी रात को अपने पति के साथ बीतने के बाद भी तुम्हारे जिस्म की आग नहीं बुझी जो तुम अब भी इस तरह से अपने स्तन निकाले बेशर्मो की तरह बैठी हो?”
बहुत कडवी बात कह दी थी शिल्पा ने. तो कृति भला कैसे चुप रहती? “मेरे जिस्म की आग से तुझे क्या करना है? हाँ मैं सोयी थी अपने पति के साथ. कम से कम अपने पति के साथ ही कर रही थी न. किसी ऐरे गिरे आदमी का लंड तो नहीं चूस रही थी न मैं? और वैसे भी तुझे क्या फर्क पड़ता है कि मैं क्या करती हूँ?”, कृति ने भी गुस्से में मैगज़ीन को बंदकर पटकते हुए कहा.
“भाभी!”, “मुझे क्या फर्क पड़ता है? जानना चाहती हो मुझे क्या फर्क पड़ता है?”, शिल्पा ने और भी गुस्से में कहा तो कृति बस उसकी ओर देखते ही रह गयी. और फिर एक झटके में शिल्पा ने अपनी भाभी की बांह को जोरो से अपनी ओर ऐसे खिंचा कि दोनों के स्तन एक दुसरे से दब गए… और दोनों के चेहरे बेहद करीब आ गए. इतने करीब कि जब शिल्पा ने कृति के होंठो को जोरो से चूमा तो कृति उसे रोकने के लिए कुछ कर भी नहीं सकी. दोनों के स्तन और निप्पल तुरंत ही फूलकर एक दुसरे को दबाने लगे. शिल्पा अपनी भाभी के बालों में उंगलियाँ फेरती हुई अपनी भाभी को मदहोश होकर चूमने लगी… और एक हाथ से भाभी की साड़ी पर से उनके स्तनों को दबाने लगी.
जब दो खुबसूरत औरतों के जिस्म एक दुसरे के लिए बेकाबू हो, तब गुस्से को प्यार में बदलने में बहुत समय नहीं लगता है. अब शिल्पा के चुम्बन में गुस्सा नहीं प्यार और पैशन था. लेकिन कृति अब भी अपने दिल की बात कह देना चाहती थी. और अपने अपमान का बदला लेती हुई कृति ने शिल्पा से कहा, “तुझे लंड चूसने का बड़ा शौक है न?
तो आज अपने भाभी के लंड से चुद कर भी देख ले.” “तो तुम्हे रोक कौन रहा है भाभी?”, शिल्पा बोली और उसने अपने दोनों पैरो को फैला दिया और अपनी नाइटी उठाकर अपनी पेंटी को सरकाकर अपनी योनी को अपनी भाभी के लिए खोल दिया. उत्तेजना में कृति ने अपनी साड़ी से अपने लंड को निकाला और तुरंत ही शिल्पा की योनी में एक झटके में डाल दिया. कृति के लिए ये पहला अनुभव था पर शिल्पा की योनी के अन्दर उसके लंड के जाते ही उसे एक चरम आनंद महसूस हुआ. और कामोत्तेजना में बदहवास कृति अपने लंड को शिल्पा की योनी में अन्दर बाहर करने लगी. कृति के स्तन ऐसा करते हुए झूलने लगे और उसके लम्बे बाल शिल्पा के सीने पर लहराने लगे.
ननंद और भाभी के बीच ये पल बेहद कामुक था. दोनों कभी एक दुसरे के होंठो को जोरो से चूमती, कभी कांटती तो कभी एक दुसरे के स्तनों को दबाकर चुस्ती और फिर निप्पल को दांतों से कांटती. आखिर दोनों औरतें थी तो जानती थी कि कैसे एक दुसरे के स्तनों को मसल कर उन्हें आनंद देना है. ऐसा पल ऐसी उत्तेजना ऐसी कामुकता तो उन्होंने कभी किसी आदमी के साथ महसूस नहीं किया था. कुछ तो ख़ास था इस पल में जो इन लहराते हुए कोमल जिस्मो को इतना मादक बना रहे थे.
वहीँ कृति जीवन में पहली बार अपने लिंग का इस तरह एक औरत की योनी में कर रही थी. उसके लिए बिलकुल नया और कामुक अनुभव था ये. शिल्पा के स्तनों को दबाकर और उसकी योनी में अपने लिंग को डालकर इतना आनंद मिलेगा उसे, ऐसा तो उसने कभी सोची भी नहीं थी.
ये सच था कि उसके पति विशाल उसका लिंग कभी कभी चूसते थे, कभी खुद अपना लिंग कृति की गांड में डालते थे, उसका भी अपना मज़ा था पर ये पल तो उससे भी ज्यादा उतावला करने वाला था. और फिर लिपटते रगड़ते उन दोनों औरतों के नर्म जिस्म एक दुसरे में समाकर थोड़ी देर में शांत हो गए. दोनों औरतों के चेहरे पर एक अलग सी ख़ुशी थी. और दोनों एक दुसरे की बांहों में एक दुसरे को देखती रह गयी.
“भाभी, अब हम दोनों क्या करेंगी? इन सबका क्या मतलब है? हमारे रिश्तो का क्या होगा अब?”, शिल्पा ने अपने स्तनों पर लेटी हुई कृति के बालों को उँगलियों से सहलाते हुए पूछा. एक ही लाइन में बहुत कठिन सवाल कर दिए थे शिल्पा ने.
ये सवाल उसके मन को भी विचलित कर रहे थे. यदि कृति अपनी ननंद के साथ ये रिश्ता बनाये रखती है तो उसके पति विशाल का क्या होगा? अपने पति को छोड़कर वो शिल्पा के साथ क्या जीवन बिता सकती है? पर वो तो गलत होगा. आखिर विशाल उससे न जाने कितना ही प्यार करते है. और फिर उन्होंने उसे एक औरत होने का सम्मान दिलाया है जो शायद ही इस समाज में कृति जैसी औरत को कोई दिलाता. उसे एहसास था कि एक पत्नी होने का सौभाग्य उसे मिला है जो उसके जैसी औरतों के लिए बस एक सपना होता है. नहीं, वो विशाल को नहीं छोड़ सकती चाहे उसे शिल्पा के साथ जैसा भी लगा हो. पर शिल्पा के प्रति अपने आकर्षण का क्या करेगी वो?
“हम कुछ न कुछ करेंगे शिल्पा.” और फिर उसने शिल्पा के होंठो को अपने होंठो से चूसते हुए उसे दिलासा दिलाने की कोशिश की.
पर कृति का चुम्बन शिल्पा को दिलासा न दिला सका. कृति का लिंग अब नरम हो चूका था और अब भी शिल्पा की योनी में ही था. अपनी भाभी की साड़ी को पकड़कर उसके मखमली कपडे पर सुन्दर फूलो के प्रिंट को निहारती हुई शिल्पा भी कुछ विचारो में खो गयी थी. उसके दिल में अब एक चाहत घर कर गयी थी कि अब से उसकी भाभी सिर्फ और सिर्फ उसकी हो, किसी और की नहीं. पर वो अपने भैया के साथ ऐसा कैसे कर सकती है? जिस भाई और भाभी ने उसे इतना प्यार दिया था उन्ही का घर उजाड़ कर वो कैसे रह सकती है.
वैसे भी अपने भाई का जीवन यदि उसने बर्बाद कर दिया तो ये समाज उसके और कृति भाभी के रिश्ते को स्वीकार नहीं करेगा. और फिर कृति को भी समाज में इज्ज़त नहीं दिला सकेगी वो जो उसके भाई के साथ कृति को रहते हुए मिलती थी. उफ्फ.. ये कैसी स्थिति में फंस गयी थी ये दोनों औरतें. करे तो करे भी क्या ये दोनों अब? फिर भी जब तक इन सवालों का जवाब नहीं मिल जाता तब तक दोनों एक ही घर में साथ में खुश तो रह ही सकती है. शायद दोनों यही सोच रही थी और दोनों एक दुसरे की ओर मुस्कुरा कर देखने लगी.
दिन बित रहे थे और समय के साथ कृति और शिल्पा एक दुसरे के बेहद करीब आते जा रहे थे. और विशाल इन सबसे अनभिज्ञ थे. क्योंकि अपने पति के प्रति कृतज्ञ कृति अपने पति की भरपूर सेवा करती और वो सब कुछ करती जो एक पत्नी से अपेक्षित था.
शिल्पा का दिल भले धीरेन्द्र पर पूरी तरह से नहीं आया था पर वो अपनी भाभी की मजबूरी जानती थी, इसलिए जब धीरेन्द्र ने उससे शादी की बात की तो उसने हाँ कर दी थी.
कृति से बेहद प्यार करने लगी थी शिल्पा और शायद इसलिए उसने अपनी शादी के एक हफ्ते पहले एक रात उसने सुहागन के जोड़े में कृति के साथ अपनी सुहागरात मनाई थी.
पर फिर किस्मत ने भी ऐसा खेल खेला कि शिल्पा को पता चला कि वो माँ नहीं बन सकती है. डॉक्टर ने उसे बताया था कि धीरेन्द्र में ही कुछ कमी है. पर ये बात वो धीरेन्द्र को बताती तो वो तो बिलकुल टूट जाता. इसलिए उसने अपनी प्यारी कृति भाभी के साथ मिलकर तय किया कि वो कृति के अंश से अपनी कोख में बच्चा पैदा करेगी. और आखिर में उन दोनों की कोशिश रंग लायी और कृति ने अपने लंड के रस से शिल्पा को गर्भवती कर दिया था. कृति और शिल्पा को छोड़ कर इस राज़ को कोई भी नहीं जानता था.
और जब ९ महीने बाद शिल्पा ने जब एक प्यारे से बच्चे को जन्म दिया कृति ने तो सपने में भी नहीं सोची थी कि वो कभी एक माँ बन सकेगी, उसका अपना अंश उसकी गोद में खेलेगा. पर शायद किस्मत ने उसके और शिल्पा के बीच रिश्ता इसी वजह से बनाया था कि कृति एक औरत के साथ साथ एक माँ भी बन सके. कितनी भाग्यशाली थी कृति और कितना भाग्यशाली था वो बच्चा जिसकी दो मांएं थी!
समाप्त