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Romance श्राप [Completed]

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avsji

Weaving Words, Weaving Worlds.
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Beautiful-Eyes
* इस चित्र का इस कहानी से कोई लेना देना नहीं है! एक AI सॉफ्टवेयर की मदद से यह चित्र बनाया है। सुन्दर लगा, इसलिए यहाँ लगा दिया!
 
Last edited:

parkas

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धन्यवाद दोस्तों 🙏🙏
आज बड़ी राहत है, लेकिन एहतियात के तौर पर आज भी आराम करने का फ़ैसला लिया है।
आप सभी अपना खयाल रखें 😊
Take care....
Intezaar rahega next update ka avsji bhai.....
 

avsji

Weaving Words, Weaving Worlds.
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Update # 15


“अरे जय?” क्लेयर ने जय को साढ़े पाँच बजे किचन में आते देख कर आश्चर्य से कहा।

ऐसा नहीं है कि वो बहुत देर से जागता था, लेकिन इतनी जल्दी भी नहीं जागता था। और ख़ास तौर पर तब, जब कल रात बहुत देर से सोया हो।

“जी भाभी?” जय मुस्कुराते हुए बोला, “गुड मॉर्निंग भाभी!”

वो क्लेयर के पास आया और जैसा कि उन दोनों की रस्म थी, क्लेयर के दोनों गालों को चूमा।

“गुड मॉर्निंग... गुड मॉर्निंग... सोए नहीं क्या आज रात?” क्लेयर ने ख़ुशनुमा अंदाज़ में पूछा।

“ओह भाभी... आप अन्तर्यामी हैं क्या? हा हा!”

“हा हा... हाँ... हो सकती हूँ... बदमाश लड़के!” क्लेयर ने हँसते हुए और बड़े प्यार से जय का कान उमेठते हुए कहा, “... अब बोलो... नींद नहीं आई?”

“आऊ आऊ भाभी... लेकिन पहले कान तो छोड़ो...”

“लो... छोड़ दिया! अब बताओ...”

जय मुस्कुराया... आज उसके चेहरे पर एक नया ही आत्मविश्वास देखने को मिल रहा था। आनंद से उसका मुखड़ा दीप्त हो रहा था। क्लेयर भी समझ रही थी कि कुछ बढ़िया हुआ है उसके देवर के जीवन में।

आई प्रोपोस्ड हर, भाभी!” क्लेयर की बात का जवाब न दे कर, उसने एक बहुत ही बड़ा खुलासा किया।

व्हाट?”

“आई प्रोपोस्ड हर...”

आई हर्ड यू द फर्स्ट टाइम, जय!” क्लेयर ने अविश्वास भरे सुर में कहा, “वाओ! ... मीना श्योर इस अ स्पेशल गर्ल...”

“हा हा...”

“बड़ी जल्दी से कर दिया प्रोपोज़...”

“वो... वो भाभी... मुझे लगा कि आपको अच्छी लगी वो!”

“अरे अच्छी नहीं, बहुत अच्छी लगी, जय!” क्लेयर अभी भी इस रहस्य के सामने आने से उबर नहीं सकी, “बहुत अच्छी!”

“थैंक यू भाभी...”

“नहीं लव, थैंक यू वाली बात नहीं है। ... मीना अच्छी लेडी तो है। शी विल बी अ वैरी गुड मैच फॉर यू! आई ऍम हैप्पी फॉर यू... एंड फॉर हर...” फिर थोड़ा सोच कर, “क्या बोली वो? उसने एक्सेप्ट किया?”

आई थिंक सो भाभी... रिजेक्ट तो नहीं किया... और एक्सप्लिसिटली एक्सेप्ट नहीं किया... न नाराज़ हुई... और न ही बहुत एक्साइटेड! ... ऐसा लगा कि शायद वो एक्सपेक्ट कर रही थी कि मैं कुछ ऐसा ही करूँगा!”

“गुड... गुड!” क्लेयर ने जय को गले से लगा कर कहा, “आई ऍम सो हैप्पी! ... मेरा मानना है कि अगर किसी से प्यार हो जाए, तो उसको तुरंत बता देना चाहिए... और टाइम नहीं वेस्ट करना चाहिए... तो अब जितना जल्दी हो सके, शादी कर लो दोनों!”

“हा हा!”

“अरे, हँस क्यों रहा है! ... क्या गलत कह दिया मैंने?”

“कुछ भी नहीं भाभी, कुछ भी नहीं! ... यू आर द बेस्ट!” जय बड़े प्यार से क्लेयर को अपने आलिंगन में भरते हुए बोला।

“हाँ हाँ... भाभी से काम पड़ा, तो आ गए मक्खन लगाने!” क्लेयर ने उसको चिढ़ाते हुए कहा, “... नहीं तो ऐसे दूर भागते हो जैसे काँटें लगें हों मुझमें!”

“हा हा... नहीं भाभी! वैसा कुछ नहीं है!”

“अरे भई, क्या पक रहा है सवेरे सवेरे देवर भाभी के बीच में?” इसी बीच आदित्य ने भी किचन में आते हुए कहा।

“गुड मॉर्निंग भैया!”

“गुड मॉर्निंग बेटा...” आदित्य ने कहा और फिर क्लेयर को होंठों पर चूमते हुए विनोदपूर्वक आगे कहा, “क्या बात है भाई, आज सूरज जल्दी निकल आया लगता है!”

“क्यों नहीं होगा,” क्लेयर ने हँसते हुए कहा, “आपके भाई को प्यार हो गया है... अपनी मीनाक्षी से!”

“हा हा... वो तो मैंने पहली ही मुलाकात में ही समझ लिया था।” आदित्य ठहाके मार कर हँसते हुए बोला, “उस दिन इसकी शकल देखने लायक थी। ... और हो भी क्यों न! मीना अच्छी है... उसके बारे में मैंने पता किया है!”

“क्या भैया...” जय ने झेंपते हुए कहा, “आपने मेरे पीछे पीछे इतना कुछ कर दिया, और मुझको बताया भी नहीं!”

“बता ही तो रहा हूँ...” आदित्य ने जैसे कोई राज़ खोलते हुए कहा, “और ये मत सोचना कि तुम अपनी भाभी को कोई मैसिव सरप्राइज़ दे रहे हो... मैंने इनको कह रखा है कि जल्दी ही हमको अपनी बहू मिलने वाली है!”

“व्हाट! भा...भी...” जय ने लज्जा से लाल होते हुए कहा, “आप सब कुछ जानते हुए भी मुझसे मज़े ले रही थीं!”

“नहीं मेरा बेटा,” क्लेयर ने हँसते हुए जय को अपने आलिंगन में लेते हुए कहा, “मज़े नहीं ले रही थी... बस, तुम्हारी ख़ुशी देख कर ख़ुश हो रही थी!”

“ओह भाभी,” जय बहुत खुश था, “थैंक यू सो मच! ... एंड आई लव यू!”

“हाँ... यू बेटर!”

“तो बताओ जय,” आदित्य बोला, “क्या प्लान है अब? शादी कब तक कर रहे हो?”

“एक बार मीना ‘हाँ’ कह दे! ... फिर कभी भी भैया!”

“अरे, तो उसने अभी तक हाँ नहीं कहा?”

“नहीं भैया, ... लेकिन उसने मना भी नहीं किया!”

“हम्म्म... ठीक है! ... कर लो तुम दोनों जने रोमांस!” आदित्य ने हँसते हुए जोड़ा, “कर लो रोमांस... और मैं इस बीच माँ से बात करता हूँ तुम दोनों की शादी की...”

“ओह भैया... थैंक यू... थैंक यू सो मच!”

“गुड मॉर्निंग आदित्य...” इतने में मीना भी किचन के सामने खड़ी हो कर लगभग पुकारती हुई बोली - जाहिर सी बात है कि वो कुछ देर से उस तरफ़ आई हुई थी, और उसने उन तीनों की बातों का कुछ अंश तो सुना ही था, “गुड मॉर्निंग क्लेयर...” और अंत में लगभग झिझकते हुए, “... जय!”

“हे मीना! गुड मॉर्निंग!” आदित्य ने कहा।

“ओह मीना,” क्लेयर ने उसको देखते ही चहकते हुए कहा, “गुड मॉर्निंग, लव! ... क्या बात है! आज किसी को भी नींद नहीं आई है लगता है!”

“ओह नो, ऐसा नहीं है क्लेयर... मैं उठ जाती हूँ बहुत सुबह! ... आज ही देर से उठी हूँ!”

“नाइस...” फिर जय को देख कर, “सीखो कुछ!”

क्लेयर की बात पर मीना थोड़ा सा झेंप गई।

“भा...भी...!” जय ने भी झेंपते हुए कहा।

“हाँ ठीक है... बाद में कम्प्लेन कर लेना!" क्लेयर बोली, "कॉफ़ी लोगी मीना?”

“ओह क्लेयर... आप अकेली काम न करें! ... आई विल हेल्प यू?”

“ओह डोंट बी फॉर्मल मीना... तुम पहली बार आई हो... तुमसे काम नहीं करवा सकती!”

“फॉर्मल मैं नहीं, आप हो रही हो,” मीना ने अंदर ही अंदर खुश होते हुए कहा - उसको बहुत अच्छा लग रहा था कि उसको सभी से इतना प्यार, इतना अवधान मिल रहा था, “... वैसे भी घर में काम तो करती ही हूँ!”

आई नो, लेकिन बाद में कर लेना काम... और जैसा तुमको मन करे वैसा!” क्लेयर ने अर्थपूर्वक कहा - जिसका मंतव्य मीना ने बखूबी समझ लिया।

“ठीक है क्लेयर...”

“गुड गर्ल...” क्लेयर ने कहा, “देखो, अभी अधिक सुबह है... तो मैं तुमको फ्रेंच टोस्ट और कॉफ़ी देती हूँ? फिर हम सभी साथ में ब्रेकफ़ास्ट करेंगे?”

“जानेमन,” आदित्य जो कुछ देर से चुप था बोला, “जो मन करे, बना लो! ... आज तो अच्छा दिन होने वाला है! मीना भी है तो उसको जाने नहीं देंगे! आज मस्ती करते हैं?”

“हाँ हाँ! बिल्कुल!” क्लेयर ने तुरंत इस प्लान की रज़ामंदी कर दी, जैसे मीना की इच्छा के जानकारी की कोई आवश्यकता ही न हो!

“लेकिन क्लेयर...”

“आज कोई काम है क्या मीना?” क्लेयर ने पूछा, “या कहीं बिजी हो?”

“नहीं, ऐसी तो कोई बात नहीं!”

“तो फिर?” क्लेयर ने कहा, “... लुक लव, हमको अपने से अलग मत समझो! ऑन द कोंट्ररी, विद अ बिट ऑफ़ लक एंड गॉड्स ग्रेस, हम सब एक साथ भी हो सकते हैं!”

क्लेयर की ऐसी खुली बात पर मीना थोड़ा हिचकिचा गई और थोड़ा शरमा भी गई। बीती रात की बातें उसको पूरी तरह से याद थीं। एक तरह से वो रात में सोई ही नहीं - बस, जय की कही बातों पर विचार करती रही। ऐसा नहीं था कि उसको किसी ने पहली बार प्रेम-निवेदन किया हो। लेकिन यह अवश्य था कि जय को देख कर न जाने कैसी अदृश्य शक्ति जैसे उसको खींच ले रही थी। मन ही मन में जैसे उसको समझ आता कि जय उसका ही है और वो जय की! गज़ब का आकर्षण! एक तरह से कल रात जय ने उसको प्रोपोज़ कर के उसके मन की उधेड़बुन को सुलझा दिया था जैसे! जय का परिवार इतना सुन्दर, इतना स्नेही था, कि वो स्वयं भी उसी परिवार का हिस्सा बनने के सपने देखने लगी!

मन ही मन उसको जय स्वीकार था। और जय को वो! जय को मीना के अतीत से जैसे कोई सरोकार ही नहीं था! युवा लड़कों की यही समस्या है - वो हर बात को खिलवाड़ में ले लेते हैं! शादी जैसी गंभीर बात को भी! लेकिन वो चाहती थी कि जय उसके बारे में सब बातें जान जाए! उसके बारे में कुछ छुपा न रहे।

उधर जय मुँह बाये अपनी भाभी की जादूगरी देख सुन रहा था। प्रोपोज़ करना एक बात होती है, लेकिन वैवाहिक सरोकार दो परिवारों का मिलन होता है। ऐसे में मीना को भी इस परिवार में स्वीकृति मिलनी आवश्यक थी। जय मन ही मन सोच रहा था कि वो किस तरह से इस बात को कह दे! लेकिन क्लेयर भाभी तो रॉक स्टार हैं उसकी! उन्होंने इतनी आसानी से इतनी बड़ी बड़ी बातें मीना से कह दी थीं, जो कहने की वो सोच भी नहीं सकता था। भाभी हों, तो ऐसी!

“ठीक ही तो कह रही है क्लेयर, मीना!” इस बार बात की बागडोर आदित्य ने पकड़ी, “भई हम तो तुमको अपनी ही मान रहे हैं! तुम देख लो अपना!” वो हँसते हुए बोला।

‘ऑफिस वाला आदित्य और ये आदित्य कितने अलग लोग हैं...’ मीना सोचने लगी, ‘वहाँ वो कितना धीर गंभीर रहता है, और यहाँ वो कितना हल्का फुल्का - शायद सब क्लेयर का असर है!’

“अरे जय, मीना को एस्टेट घुमा देना सवेरा होने पर! ठीक है?”

“ठीक है भैया! ठीक है!”

“बढ़िया,” आदित्य ने क्लेयर की तरफ़ मुखातिब होते हुए कहा, “आओ जानेमन, मैं तुम्हारी हेल्प कर दूँ!”

“थैंक यू माय लव!”

*
 

avsji

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Take care your health....
Get well soon....
intezaar rahega avsji bhai.....

अपना ध्यान रखिए........... बरसात का मौसम है.....

ख़्याल रखिए, भैया। 🫂

Take care of your health bhai. Perhaps seasonal fever ho sakta hai. Dr. se check up karate rahiyega.

Koi baat nahi avsji Bhai,

Aap apna khyal rakho

Take care....
Intezaar rahega next update ka avsji bhai.....

दोस्तों - आप सभी के संदेशों के लिए शुक्रिया!
ठीक होने के बाद आज फ़ुर्सत मिली, तो अपडेट # 15 पोस्ट किया है।
पढ़ कर बताएँ! :)
 

avsji

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बढ़िया अपडेट, गौरीशंकर जी ने खुद ही आगे बढ़ कर महाराज से बात करने की जिम्मेदारी ले ली, लेकिन मुझे लगता है कि प्रियम्बदा का भी इसका हिस्सा बनना जरूरी है।

हर्ष को एक बार सुहासनी को प्रियम्बदा से मिलवा तो देना चाहिए।

प्रियम्बदा इस कहानी का हिस्सा है। पढ़ते रहिए - कुछ राज़ भविष्य के लिए आवश्यक होते हैं :)
 
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Thakur

असला हम भी रखते है पहलवान 😼
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मन ही मन उसको जय स्वीकार था। और जय को वो! जय को मीना के अतीत से जैसे कोई सरोकार ही नहीं था! युवा लड़कों की यही समस्या है - वो हर बात को खिलवाड़ में ले लेते हैं! शादी जैसी गंभीर बात को भी! लेकिन वो चाहती थी कि जय उसके बारे में सब बातें जान जाए! उसके बारे में कुछ छुपा न रहे।
:roll3: Yah baat solah aane sach he, aur yah bhi satya he ke jitni jaldbaji ladke mehboob ko paane me karte he utne he jaldi wo niras hoke sust bhi ho jate he :lol:
Khair he, par jo khatakne wali baat he wo Mina ka past he ! Kya wo uski pichhli 2 relations wala past he ya fir kuchh aur ?
 

avsji

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:roll3: Yah baat solah aane sach he, aur yah bhi satya he ke jitni jaldbaji ladke mehboob ko paane me karte he utne he jaldi wo niras hoke sust bhi ho jate he :lol:

हा हा हा!

Khair he, par jo khatakne wali baat he wo Mina ka past he ! Kya wo uski pichhli 2 relations wala past he ya fir kuchh aur ?

अतीत के कई पन्ने होते हैं। मीना उसको सब बताना चाहती है, और बताएगी भी!
और कुछ नहीं लिखूँगा अभी! साथ बने रहें, :)
 

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Update #16


आज रात हर्ष ने एक बड़ा ही सुखद सपना देखा... वो और सुहासिनी अपने उसी कैर के कुञ्ज में साथ में बैठे हुए थे। कुछ अलग ही तरह का सपना था वो, जो पूरी तरह से हर्ष को समझ में भी नहीं आ पाया। लेकिन, जब वो सुबह उठा, तो उसको लगा कि इतना सुन्दर सपना उसने शायद पहले कभी नहीं देखा था।

दिन में सुहासिनी से जब मुलाकात हुई तो वो बोला,

“आपको पता है... कल रात... कल रात हमने अपने सपने में आपको देखा।”

सुहासिनी यह सुन कर लाज से मुस्कुराने लगी।

“हमारी इच्छा होती कि हम पूरे दिन भर... बस आपके साथ ही बैठे रहें...” वो बोले जा रहा था।

“हमारी भी...” सुहासिनी ने लज्जा से दोहरी होते हुए, बुदबुदा कर कहा।

दोनों के ही चेहरों पर मुस्कान थी।

“भैया और भाभी माँ भी एक दूसरे से बहुत प्रेम करते हैं!” थोड़ी देर बाद हर्ष ने कहा - निष्प्रयोजन!

“हाँ...” यह कोई वार्तालाप नहीं था।

सुहासिनी के चेहरे की मुस्कान और भी बढ़ गई थी।

“आपको पता है... कुछ दिनों पहले हमने उनको कुछ करते हुए देखा...” हर्ष बोलते बोलते कुछ सोचकर रुक गया।

“क्या कर रहे थे?” सुहासिनी के स्वर में एक आत्मीय जिज्ञासा थी।

हर्ष कुछ क्षण चुप रहा, और फिर बड़े ही अप्रत्याशित ढंग से उसने सुहासिनी का एक गाल चूम लिया। एक कोमल, बाल-सुलभ चुम्बन... जो शायद केवल बच्चे ही कर सकते हैं... निष्पाप और प्यारा!

किन्तु यह अप्रत्याशित था। सुहासिनी घबराकर थोड़ा पीछे हट गई और स्तब्ध सी होकर हर्ष को देखती रही।

“आपको खराब लगा?”

सुहासिनी ने ‘न’ में सर हिलाया। लेकिन लज्जा की सुन्दर सी रक्तिम लालिमा उसके पूरे शरीर पर फ़ैल गई।

थोड़ी देर दोनों के बीच कोई संवाद नहीं हुआ। शायद बात आई-गई हो गई!

आज और भी भीषण गर्मी थी। हर्ष गर्मी के कारण पसीना पसीना हो गया था।

आज उसकी ये दशा देख कर सुहासिनी को हँसी नहीं आई... बल्कि उसके मन में ‘पत्नी वाले दायित्व’ की भावना आ गई, कि काश वो अपने राजकुमार को थोड़ी सी भी राहत दे सके! वो अल्हड़, चंचल लड़की अचानक ही न जाने कहाँ गायब हो गई, और उसका स्थान वापस उस गरिमामई लड़की ने ले लिया, जिस पर हर्ष मोहित हुआ था।

उसने अपनी चुनरी से, हर्ष के चेहरे पर से चुहचुहाते पसीने को सुखाने का उपक्रम शुरू कर दिया।

हर्ष ने बड़े प्रेम से सुहासिनी को निहारा।

सुहासिनी ने हर्ष को अपनी तरफ़ देखते हुए देखा, तो लजा कर उसने अपनी नज़रें नीची कर लीं।

उसकी यह हरकत हर्ष को इतनी प्यारी लगी कि उसने न जाने किस भावना से वशीभूत हो कर सुहासिनी के उस हाथ को चूम लिया, जिस हाथ से वो उसका पसीना सुखा रही थी। इन दो चुम्बनों के कारण, अचानक ही दोनों के बीच संवाद में शब्दों की आवश्यकता जैसे समाप्त हो गई हो! जब संवाद भाव-भंगिमाओं, और संकेतों में हो, तो उसमें शब्दों का क्या स्थान?

सुहासिनी लजा तो गई, लेकिन फिर भी उसने पसीना सुखाना बंद नहीं किया।

उधर हर्ष को अपनी पसंद, अपने प्रेम पर इतना अभिमान हो रहा था कि वो कुछ कह ही नहीं सकता था। सुहासिनी का रमणीय, गरिमामय रूप भी कितना सुहाना था, और उसका अल्हड़, सरल रूप भी! वो पानी की तरह पारदर्शी थी - उसमें न तो कोई दिखावा था, और न ही कोई मिलावट!

चुनरी हटने के कारण, सुहासिनी के सीने पर केवल उसकी कुर्ती ही रह गई थी। और उस दिन की याद हर्ष के मानस-पटल से हटी नहीं थी। हर्ष की दृष्टि वापस सुहासिनी के कुर्ती के महरम पर पड़ी। सुहासिनी की कनपटियों से नन्ही नन्ही, बूँद बूँद कर के रिसता पसीना, उसके गले से होता हुआ उसके सीने पर, उसकी छातियों के बीच के हिस्से को भिगो रहा था! और इस बात का गवाह था उसकी कुर्ती के सामने बढ़ता हुआ गीलापन!

वह दृश्य देख कर हर्ष के अंदर, अल्पवय की उदात्त भावनाएँ अचानक से हिलोरें भरने लगीं! हर्ष ने हाथ बढ़ा कर पसीने की क्षीण, पतली धारा को पोंछ दिया।

अगर कोई और होता, तो सुहासिनी उस बढ़े हुए हाथ को झटक देती... और यदि उसके सामर्थ्य में होता, तो उस हाथ को कटार से काट भी देती! कोई और समय होता, तो संभव है सुहासिनी हर्ष की इस हरकत का भी कोई विरोध करती! लेकिन इस समय... इस समय, न जाने क्यों उसको हर्ष का ऐसा करना उचित लगा। हर्ष भी बहुत घबराया हुआ था - उसको स्त्रियों और लड़कियों के साथ सभ्य व्यवहार करना सिखाया गया था! और इस समय वो जो कर रहा था, वो सभ्य तो शायद नहीं ही था! लेकिन, सुहासिनी तो अपनी थी! अपनी पत्नी के साथ तो अंतरंग हुआ जा सकता है न? लेकिन ऐसे ही निश्चय - अनिश्चय के बीच हर्ष के मन में एक अनोखी लालसा जाग उठी!

हर्ष ने अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाए, और सुहासिनी की कुर्ती के बटनों में उलझा दिए। सुहासिनी का दिल धक्-धक्-धक्-धक् कर के तेजी से धड़कने लगा। इस बात की उम्मीद नहीं थी उसको, लेकिन अब जब ये बात उसके साथ हो रही थी, वो उसको रोकने में अक्षम थी! और तो और, वो इस बात को होने से रोकना भी नहीं चाहती थी।

कुछ ही क्षणों में उसकी कुर्ती के सभी बटन खुल गए थे - लेकिन सुहासिनी को लग रहा था कि कितना समय हो गया! वो जानती थी कि अगले किसी ही पल वो अपने राजकुमार के सामने अभूतपूर्व तरीके से नग्न होने वाली थी! अभूतपूर्व इसलिए, क्योंकि उसको आज तक उस रूप में अन्य किसी ने भी नहीं देखा था। उसके मन में एक अजीब सी घबराहट होने लगी - कि क्या राजकुमार को वो पसंद आएगी?

जैसे ही उसकी कुर्ती के दोनों पट अलग हुए, हर्ष के गले से एक आश्चर्यजनक, संतुष्ट, किन्तु दबी हुई आह निकल गई।

छोटे छोटे नारंगी के फलों के आकर के गोल-मटोल, और उन्ही के जैसे थोड़े सख़्त, थोड़े मुलायम, थोड़े चिकने, तो थोड़े खुरदुरे, और अत्यंत युवा स्तन!

“अति सुन्दर...” उसके मुँह से स्वयं ही बढ़ाई निकल गई।

सुहासिनी को शर्म आ रही थी, लेकिन एक गज़ब का आंदोलन भी हो रहा था उसके मन में! उसको लग रहा था जैसे घण्टों बीते जा रहे हों - उसका राजकुमार उसके स्तनों को बड़ी लालसा, बड़ी रुचिकर दृष्टि से देखे डाल रहा था।

रहा नहीं गया सुहासिनी से, “राजकुमार जी...?”

उसको आशा थी कि शायद राजकुमार उसको यूँ ताकना रोक दें, लेकिन हुआ उसका उल्टा! हर्ष पुकारे जाने पर जैसे किसी तन्द्रा से जागा। और जागते ही वो अपनी इच्छाओं पर क्रियान्वयन करने लगा। वो सुहासिनी की कुर्ती को उसके शरीर से उतारने लगा। वो भी हर्ष की इस हरकत में सहायता करने लगी। कुछ ही क्षणों में सुहासिनी कमर के ऊपर पूरी तरह से नग्न थी।

हर्ष ने अपनी सुहासिनी को मन भर के देखा - कमसिन, क्षीण से शरीर वाली लड़की! लेकिन नग्न हो कर कैसी सुन्दर सी लग रही थी! मनभावन! कामुक भी!

“तुम बहुत सुन्दर हो, सुहासिनी!” हर्ष ने कहा, और बढ़ कर उसको अपने आलिंगन में भर लिया।

सुहासिनी भी, और हर्ष भी, दोनों के ही शरीर काँप रहे थे। नया एहसास था ये। अपरिचित, और थोड़ा डरावना भी! कुछ देर दोनों ऐसे ही आलिंगनबद्ध हुए रहे, फिर हर्ष से जैसे रहा नहीं गया। उसने सुहासिनी को अपने से अलग किया, और बारी बारी से उसके दोनों स्तनों को चूम लिया।

‘बाप रे!’

सच में, न जाने कैसे अजीब शय थे ये दोनों अंग, कि हर्ष के चूमते ही, उसके पूरे शरीर में कँपकँपी दौड़ गई! यह तो एक बात हुई! उस दिन की ही भाँति फिर से सुहासिनी को अपना पूरा शरीर तपता हुआ महसूस हुआ! लज्जा की लालिमा उसके पूरे शरीर पर फ़ैल गई!

साथ ही वापस आ गया उस दिन का संशय! उसने अपने मन को मना लिया था कि स्तन तो बच्चों के भरण-पोषण के लिए होते हैं, इसलिए उनका पति के लिए कोई उपयोग नहीं है। लेकिन राजकुमार के चुम्बन ने उस आश्वासन को डिगा दिया।

‘क्या करने वाले हैं ये?’

सुहासिनी के मन में यह विचार आया ही, कि अगले ही पल उसको अपने प्रश्न का उत्तर मिल गया।

हर्ष ने सुहासिनी का एक चूचक अपने मुँह में भर लिया और उसको चूसने लगा!

सुहासिनी को जो एहसास हुआ, उसको वो शब्दों में बयान नहीं कर सकती थी! जैसे ही हर्ष ने उसके चूचक को मुँह में लिया, वैसे ही उसको गुदगुदी का एक ज़ोरदार झटका सा लगा! और जैसे जैसे चूषण की अवधि बढ़ती गई, वैसे वैसे ही उसके पूरे शरीर में कामुक तरंग फैलती गई। अभी तक उसको वैसा अनुभव नहीं हुआ था! एक और एहसास हुआ - सुहासिनी को लगा कि जैसे उसका पेशाब निकल गया हो! उसका पूरा शरीर अनियंत्रित हो कर काँप रहा था, और उधर हर्ष उसका दूसरा दूसरा चूचक पीने में व्यस्त हो गया था। सुहासिनी बहुत कमज़ोर सा महसूस कर रही थी। ऊपर से यह संज्ञान कि उसका पेशाब निकल गया है, उसके कारण उसको एक अलग तरह की शर्म आ रही थी। उसका मन हो रहा था कि अब वो अपने घर चली जाए!

लेकिन वो चाहती थी कि राजकुमार को अपने मन का ‘आनंद’ मिल जाए।

हर्ष को अपार आनंद मिल रहा था। जोश में आ कर वो ज़ोर ज़ोर से चूस रहा था। लेकिन शायद जिस बात की उसको उम्मीद थी, वो नहीं हो रही थी। अंततः उसने सुहासिनी के स्तनों से खेलना बंद किया। इतनी देर में दोनों की ही साँसें उखड़ गई थीं, जिनको संयत कारने में थोड़ा समय लगा।

जब दोनों के होश थोड़ा वापस आए तब सुहासिनी ने पहले तो अपनी कुर्ती वापस पहनी, और शरमाते सकुचाते हर्ष से बोली,

“राजकुमार जी... अभी इनमें दूध नहीं आता...”

उसकी बात सुन कर हर्ष ने बड़ी हैरत से सुहासिनी की तरफ़ देखा।

“आपको कैसे पता कि हम आपका दूध पीना चाहते हैं?”

“उस दिन भी आप इन्ही को देख रहे थे... और आज...! अब अगर ये दूध पीने की चाहत नहीं है, तो फिर और क्या है?”

हर्ष मुस्कुराया।

“कब आएगा?”

“जब हमारा बच्चा होगा।” वो शर्माते हुए बोली।

“और हमारा बच्चा कब होगा?”

सुहासिनी अब तक लाज से पानी पानी हो गई थी, “जब आप और हम विवाह के बंधन में बँध जाएँगे...”

हर्ष आनंद से मुस्कुराया, “मतलब जल्दी ही...?”

“हाँ... जल्दी ही!”

“तब हम आपका दूध पी सकेंगे?”

“आप चाहेंगे तो... लेकिन, वो तो हमारे बच्चे के लिए होगा न?”

“हाँ,” हर्ष ने थोड़ी निराशा से कहा, और फिर अचानक ही उम्मीद से बोला, “बहुत नहीं... बस, थोड़ा ही?”

“हा हा...” और बस, अचानक से ही, सुहासिनी फिर से वो चुलबुली सी लड़की बन गई, “हम जाएँ?”

“इतनी जल्दी?”

“लू लग जाएगी... आप भी चलिए!” सुहासिनी ने बड़े प्यार से हर्ष के गले में गलबैयाँ डाल कर कहा, “कल मिलेंगे न फिर!” जैसे उसने हर्ष को समझाया हो।

“वचन है न?”

“आपसे मिले बिना...” उसने बात अधूरी ही छोड़ दी, और हर्ष के माथे को चूम कर उठ गई, और अपने घर की ओर चल दी।

*
 

parkas

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“अरे जय?” क्लेयर ने जय को साढ़े पाँच बजे किचन में आते देख कर आश्चर्य से कहा।

ऐसा नहीं है कि वो बहुत देर से जागता था, लेकिन इतनी जल्दी भी नहीं जागता था। और ख़ास तौर पर तब, जब कल रात बहुत देर से सोया हो।

“जी भाभी?” जय मुस्कुराते हुए बोला, “गुड मॉर्निंग भाभी!”

वो क्लेयर के पास आया और जैसा कि उन दोनों की रस्म थी, क्लेयर के दोनों गालों को चूमा।

“गुड मॉर्निंग... गुड मॉर्निंग... सोए नहीं क्या आज रात?” क्लेयर ने ख़ुशनुमा अंदाज़ में पूछा।

“ओह भाभी... आप अन्तर्यामी हैं क्या? हा हा!”

“हा हा... हाँ... हो सकती हूँ... बदमाश लड़के!” क्लेयर ने हँसते हुए और बड़े प्यार से जय का कान उमेठते हुए कहा, “... अब बोलो... नींद नहीं आई?”

“आऊ आऊ भाभी... लेकिन पहले कान तो छोड़ो...”

“लो... छोड़ दिया! अब बताओ...”

जय मुस्कुराया... आज उसके चेहरे पर एक नया ही आत्मविश्वास देखने को मिल रहा था। आनंद से उसका मुखड़ा दीप्त हो रहा था। क्लेयर भी समझ रही थी कि कुछ बढ़िया हुआ है उसके देवर के जीवन में।

आई प्रोपोस्ड हर, भाभी!” क्लेयर की बात का जवाब न दे कर, उसने एक बहुत ही बड़ा खुलासा किया।

व्हाट?”

“आई प्रोपोस्ड हर...”

आई हर्ड यू द फर्स्ट टाइम, जय!” क्लेयर ने अविश्वास भरे सुर में कहा, “वाओ! ... मीना श्योर इस अ स्पेशल गर्ल...”

“हा हा...”

“बड़ी जल्दी से कर दिया प्रोपोज़...”

“वो... वो भाभी... मुझे लगा कि आपको अच्छी लगी वो!”

“अरे अच्छी नहीं, बहुत अच्छी लगी, जय!” क्लेयर अभी भी इस रहस्य के सामने आने से उबर नहीं सकी, “बहुत अच्छी!”

“थैंक यू भाभी...”

“नहीं लव, थैंक यू वाली बात नहीं है। ... मीना अच्छी लेडी तो है। शी विल बी अ वैरी गुड मैच फॉर यू! आई ऍम हैप्पी फॉर यू... एंड फॉर हर...” फिर थोड़ा सोच कर, “क्या बोली वो? उसने एक्सेप्ट किया?”

आई थिंक सो भाभी... रिजेक्ट तो नहीं किया... और एक्सप्लिसिटली एक्सेप्ट नहीं किया... न नाराज़ हुई... और न ही बहुत एक्साइटेड! ... ऐसा लगा कि शायद वो एक्सपेक्ट कर रही थी कि मैं कुछ ऐसा ही करूँगा!”

“गुड... गुड!” क्लेयर ने जय को गले से लगा कर कहा, “आई ऍम सो हैप्पी! ... मेरा मानना है कि अगर किसी से प्यार हो जाए, तो उसको तुरंत बता देना चाहिए... और टाइम नहीं वेस्ट करना चाहिए... तो अब जितना जल्दी हो सके, शादी कर लो दोनों!”

“हा हा!”

“अरे, हँस क्यों रहा है! ... क्या गलत कह दिया मैंने?”

“कुछ भी नहीं भाभी, कुछ भी नहीं! ... यू आर द बेस्ट!” जय बड़े प्यार से क्लेयर को अपने आलिंगन में भरते हुए बोला।

“हाँ हाँ... भाभी से काम पड़ा, तो आ गए मक्खन लगाने!” क्लेयर ने उसको चिढ़ाते हुए कहा, “... नहीं तो ऐसे दूर भागते हो जैसे काँटें लगें हों मुझमें!”

“हा हा... नहीं भाभी! वैसा कुछ नहीं है!”

“अरे भई, क्या पक रहा है सवेरे सवेरे देवर भाभी के बीच में?” इसी बीच आदित्य ने भी किचन में आते हुए कहा।

“गुड मॉर्निंग भैया!”

“गुड मॉर्निंग बेटा...” आदित्य ने कहा और फिर क्लेयर को होंठों पर चूमते हुए विनोदपूर्वक आगे कहा, “क्या बात है भाई, आज सूरज जल्दी निकल आया लगता है!”

“क्यों नहीं होगा,” क्लेयर ने हँसते हुए कहा, “आपके भाई को प्यार हो गया है... अपनी मीनाक्षी से!”

“हा हा... वो तो मैंने पहली ही मुलाकात में ही समझ लिया था।” आदित्य ठहाके मार कर हँसते हुए बोला, “उस दिन इसकी शकल देखने लायक थी। ... और हो भी क्यों न! मीना अच्छी है... उसके बारे में मैंने पता किया है!”

“क्या भैया...” जय ने झेंपते हुए कहा, “आपने मेरे पीछे पीछे इतना कुछ कर दिया, और मुझको बताया भी नहीं!”

“बता ही तो रहा हूँ...” आदित्य ने जैसे कोई राज़ खोलते हुए कहा, “और ये मत सोचना कि तुम अपनी भाभी को कोई मैसिव सरप्राइज़ दे रहे हो... मैंने इनको कह रखा है कि जल्दी ही हमको अपनी बहू मिलने वाली है!”

“व्हाट! भा...भी...” जय ने लज्जा से लाल होते हुए कहा, “आप सब कुछ जानते हुए भी मुझसे मज़े ले रही थीं!”

“नहीं मेरा बेटा,” क्लेयर ने हँसते हुए जय को अपने आलिंगन में लेते हुए कहा, “मज़े नहीं ले रही थी... बस, तुम्हारी ख़ुशी देख कर ख़ुश हो रही थी!”

“ओह भाभी,” जय बहुत खुश था, “थैंक यू सो मच! ... एंड आई लव यू!”

“हाँ... यू बेटर!”

“तो बताओ जय,” आदित्य बोला, “क्या प्लान है अब? शादी कब तक कर रहे हो?”

“एक बार मीना ‘हाँ’ कह दे! ... फिर कभी भी भैया!”

“अरे, तो उसने अभी तक हाँ नहीं कहा?”

“नहीं भैया, ... लेकिन उसने मना भी नहीं किया!”

“हम्म्म... ठीक है! ... कर लो तुम दोनों जने रोमांस!” आदित्य ने हँसते हुए जोड़ा, “कर लो रोमांस... और मैं इस बीच माँ से बात करता हूँ तुम दोनों की शादी की...”

“ओह भैया... थैंक यू... थैंक यू सो मच!”

“गुड मॉर्निंग आदित्य...” इतने में मीना भी किचन के सामने खड़ी हो कर लगभग पुकारती हुई बोली - जाहिर सी बात है कि वो कुछ देर से उस तरफ़ आई हुई थी, और उसने उन तीनों की बातों का कुछ अंश तो सुना ही था, “गुड मॉर्निंग क्लेयर...” और अंत में लगभग झिझकते हुए, “... जय!”

“हे मीना! गुड मॉर्निंग!” आदित्य ने कहा।

“ओह मीना,” क्लेयर ने उसको देखते ही चहकते हुए कहा, “गुड मॉर्निंग, लव! ... क्या बात है! आज किसी को भी नींद नहीं आई है लगता है!”

“ओह नो, ऐसा नहीं है क्लेयर... मैं उठ जाती हूँ बहुत सुबह! ... आज ही देर से उठी हूँ!”

“नाइस...” फिर जय को देख कर, “सीखो कुछ!”

क्लेयर की बात पर मीना थोड़ा सा झेंप गई।

“भा...भी...!” जय ने भी झेंपते हुए कहा।

“हाँ ठीक है... बाद में कम्प्लेन कर लेना!" क्लेयर बोली, "कॉफ़ी लोगी मीना?”

“ओह क्लेयर... आप अकेली काम न करें! ... आई विल हेल्प यू?”

“ओह डोंट बी फॉर्मल मीना... तुम पहली बार आई हो... तुमसे काम नहीं करवा सकती!”

“फॉर्मल मैं नहीं, आप हो रही हो,” मीना ने अंदर ही अंदर खुश होते हुए कहा - उसको बहुत अच्छा लग रहा था कि उसको सभी से इतना प्यार, इतना अवधान मिल रहा था, “... वैसे भी घर में काम तो करती ही हूँ!”

आई नो, लेकिन बाद में कर लेना काम... और जैसा तुमको मन करे वैसा!” क्लेयर ने अर्थपूर्वक कहा - जिसका मंतव्य मीना ने बखूबी समझ लिया।

“ठीक है क्लेयर...”

“गुड गर्ल...” क्लेयर ने कहा, “देखो, अभी अधिक सुबह है... तो मैं तुमको फ्रेंच टोस्ट और कॉफ़ी देती हूँ? फिर हम सभी साथ में ब्रेकफ़ास्ट करेंगे?”

“जानेमन,” आदित्य जो कुछ देर से चुप था बोला, “जो मन करे, बना लो! ... आज तो अच्छा दिन होने वाला है! मीना भी है तो उसको जाने नहीं देंगे! आज मस्ती करते हैं?”

“हाँ हाँ! बिल्कुल!” क्लेयर ने तुरंत इस प्लान की रज़ामंदी कर दी, जैसे मीना की इच्छा के जानकारी की कोई आवश्यकता ही न हो!

“लेकिन क्लेयर...”

“आज कोई काम है क्या मीना?” क्लेयर ने पूछा, “या कहीं बिजी हो?”

“नहीं, ऐसी तो कोई बात नहीं!”

“तो फिर?” क्लेयर ने कहा, “... लुक लव, हमको अपने से अलग मत समझो! ऑन द कोंट्ररी, विद अ बिट ऑफ़ लक एंड गॉड्स ग्रेस, हम सब एक साथ भी हो सकते हैं!”

क्लेयर की ऐसी खुली बात पर मीना थोड़ा हिचकिचा गई और थोड़ा शरमा भी गई। बीती रात की बातें उसको पूरी तरह से याद थीं। एक तरह से वो रात में सोई ही नहीं - बस, जय की कही बातों पर विचार करती रही। ऐसा नहीं था कि उसको किसी ने पहली बार प्रेम-निवेदन किया हो। लेकिन यह अवश्य था कि जय को देख कर न जाने कैसी अदृश्य शक्ति जैसे उसको खींच ले रही थी। मन ही मन में जैसे उसको समझ आता कि जय उसका ही है और वो जय की! गज़ब का आकर्षण! एक तरह से कल रात जय ने उसको प्रोपोज़ कर के उसके मन की उधेड़बुन को सुलझा दिया था जैसे! जय का परिवार इतना सुन्दर, इतना स्नेही था, कि वो स्वयं भी उसी परिवार का हिस्सा बनने के सपने देखने लगी!

मन ही मन उसको जय स्वीकार था। और जय को वो! जय को मीना के अतीत से जैसे कोई सरोकार ही नहीं था! युवा लड़कों की यही समस्या है - वो हर बात को खिलवाड़ में ले लेते हैं! शादी जैसी गंभीर बात को भी! लेकिन वो चाहती थी कि जय उसके बारे में सब बातें जान जाए! उसके बारे में कुछ छुपा न रहे।

उधर जय मुँह बाये अपनी भाभी की जादूगरी देख सुन रहा था। प्रोपोज़ करना एक बात होती है, लेकिन वैवाहिक सरोकार दो परिवारों का मिलन होता है। ऐसे में मीना को भी इस परिवार में स्वीकृति मिलनी आवश्यक थी। जय मन ही मन सोच रहा था कि वो किस तरह से इस बात को कह दे! लेकिन क्लेयर भाभी तो रॉक स्टार हैं उसकी! उन्होंने इतनी आसानी से इतनी बड़ी बड़ी बातें मीना से कह दी थीं, जो कहने की वो सोच भी नहीं सकता था। भाभी हों, तो ऐसी!

“ठीक ही तो कह रही है क्लेयर, मीना!” इस बार बात की बागडोर आदित्य ने पकड़ी, “भई हम तो तुमको अपनी ही मान रहे हैं! तुम देख लो अपना!” वो हँसते हुए बोला।

‘ऑफिस वाला आदित्य और ये आदित्य कितने अलग लोग हैं...’ मीना सोचने लगी, ‘वहाँ वो कितना धीर गंभीर रहता है, और यहाँ वो कितना हल्का फुल्का - शायद सब क्लेयर का असर है!’

“अरे जय, मीना को एस्टेट घुमा देना सवेरा होने पर! ठीक है?”

“ठीक है भैया! ठीक है!”

“बढ़िया,” आदित्य ने क्लेयर की तरफ़ मुखातिब होते हुए कहा, “आओ जानेमन, मैं तुम्हारी हेल्प कर दूँ!”

“थैंक यू माय लव!”

*
Bahut hi shaandar update diya hai avsji bhai....
Nice and lovely update.....
 

park

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Update # 15


“अरे जय?” क्लेयर ने जय को साढ़े पाँच बजे किचन में आते देख कर आश्चर्य से कहा।

ऐसा नहीं है कि वो बहुत देर से जागता था, लेकिन इतनी जल्दी भी नहीं जागता था। और ख़ास तौर पर तब, जब कल रात बहुत देर से सोया हो।

“जी भाभी?” जय मुस्कुराते हुए बोला, “गुड मॉर्निंग भाभी!”

वो क्लेयर के पास आया और जैसा कि उन दोनों की रस्म थी, क्लेयर के दोनों गालों को चूमा।

“गुड मॉर्निंग... गुड मॉर्निंग... सोए नहीं क्या आज रात?” क्लेयर ने ख़ुशनुमा अंदाज़ में पूछा।

“ओह भाभी... आप अन्तर्यामी हैं क्या? हा हा!”

“हा हा... हाँ... हो सकती हूँ... बदमाश लड़के!” क्लेयर ने हँसते हुए और बड़े प्यार से जय का कान उमेठते हुए कहा, “... अब बोलो... नींद नहीं आई?”

“आऊ आऊ भाभी... लेकिन पहले कान तो छोड़ो...”

“लो... छोड़ दिया! अब बताओ...”

जय मुस्कुराया... आज उसके चेहरे पर एक नया ही आत्मविश्वास देखने को मिल रहा था। आनंद से उसका मुखड़ा दीप्त हो रहा था। क्लेयर भी समझ रही थी कि कुछ बढ़िया हुआ है उसके देवर के जीवन में।

आई प्रोपोस्ड हर, भाभी!” क्लेयर की बात का जवाब न दे कर, उसने एक बहुत ही बड़ा खुलासा किया।

व्हाट?”

“आई प्रोपोस्ड हर...”

आई हर्ड यू द फर्स्ट टाइम, जय!” क्लेयर ने अविश्वास भरे सुर में कहा, “वाओ! ... मीना श्योर इस अ स्पेशल गर्ल...”

“हा हा...”

“बड़ी जल्दी से कर दिया प्रोपोज़...”

“वो... वो भाभी... मुझे लगा कि आपको अच्छी लगी वो!”

“अरे अच्छी नहीं, बहुत अच्छी लगी, जय!” क्लेयर अभी भी इस रहस्य के सामने आने से उबर नहीं सकी, “बहुत अच्छी!”

“थैंक यू भाभी...”

“नहीं लव, थैंक यू वाली बात नहीं है। ... मीना अच्छी लेडी तो है। शी विल बी अ वैरी गुड मैच फॉर यू! आई ऍम हैप्पी फॉर यू... एंड फॉर हर...” फिर थोड़ा सोच कर, “क्या बोली वो? उसने एक्सेप्ट किया?”

आई थिंक सो भाभी... रिजेक्ट तो नहीं किया... और एक्सप्लिसिटली एक्सेप्ट नहीं किया... न नाराज़ हुई... और न ही बहुत एक्साइटेड! ... ऐसा लगा कि शायद वो एक्सपेक्ट कर रही थी कि मैं कुछ ऐसा ही करूँगा!”

“गुड... गुड!” क्लेयर ने जय को गले से लगा कर कहा, “आई ऍम सो हैप्पी! ... मेरा मानना है कि अगर किसी से प्यार हो जाए, तो उसको तुरंत बता देना चाहिए... और टाइम नहीं वेस्ट करना चाहिए... तो अब जितना जल्दी हो सके, शादी कर लो दोनों!”

“हा हा!”

“अरे, हँस क्यों रहा है! ... क्या गलत कह दिया मैंने?”

“कुछ भी नहीं भाभी, कुछ भी नहीं! ... यू आर द बेस्ट!” जय बड़े प्यार से क्लेयर को अपने आलिंगन में भरते हुए बोला।

“हाँ हाँ... भाभी से काम पड़ा, तो आ गए मक्खन लगाने!” क्लेयर ने उसको चिढ़ाते हुए कहा, “... नहीं तो ऐसे दूर भागते हो जैसे काँटें लगें हों मुझमें!”

“हा हा... नहीं भाभी! वैसा कुछ नहीं है!”

“अरे भई, क्या पक रहा है सवेरे सवेरे देवर भाभी के बीच में?” इसी बीच आदित्य ने भी किचन में आते हुए कहा।

“गुड मॉर्निंग भैया!”

“गुड मॉर्निंग बेटा...” आदित्य ने कहा और फिर क्लेयर को होंठों पर चूमते हुए विनोदपूर्वक आगे कहा, “क्या बात है भाई, आज सूरज जल्दी निकल आया लगता है!”

“क्यों नहीं होगा,” क्लेयर ने हँसते हुए कहा, “आपके भाई को प्यार हो गया है... अपनी मीनाक्षी से!”

“हा हा... वो तो मैंने पहली ही मुलाकात में ही समझ लिया था।” आदित्य ठहाके मार कर हँसते हुए बोला, “उस दिन इसकी शकल देखने लायक थी। ... और हो भी क्यों न! मीना अच्छी है... उसके बारे में मैंने पता किया है!”

“क्या भैया...” जय ने झेंपते हुए कहा, “आपने मेरे पीछे पीछे इतना कुछ कर दिया, और मुझको बताया भी नहीं!”

“बता ही तो रहा हूँ...” आदित्य ने जैसे कोई राज़ खोलते हुए कहा, “और ये मत सोचना कि तुम अपनी भाभी को कोई मैसिव सरप्राइज़ दे रहे हो... मैंने इनको कह रखा है कि जल्दी ही हमको अपनी बहू मिलने वाली है!”

“व्हाट! भा...भी...” जय ने लज्जा से लाल होते हुए कहा, “आप सब कुछ जानते हुए भी मुझसे मज़े ले रही थीं!”

“नहीं मेरा बेटा,” क्लेयर ने हँसते हुए जय को अपने आलिंगन में लेते हुए कहा, “मज़े नहीं ले रही थी... बस, तुम्हारी ख़ुशी देख कर ख़ुश हो रही थी!”

“ओह भाभी,” जय बहुत खुश था, “थैंक यू सो मच! ... एंड आई लव यू!”

“हाँ... यू बेटर!”

“तो बताओ जय,” आदित्य बोला, “क्या प्लान है अब? शादी कब तक कर रहे हो?”

“एक बार मीना ‘हाँ’ कह दे! ... फिर कभी भी भैया!”

“अरे, तो उसने अभी तक हाँ नहीं कहा?”

“नहीं भैया, ... लेकिन उसने मना भी नहीं किया!”

“हम्म्म... ठीक है! ... कर लो तुम दोनों जने रोमांस!” आदित्य ने हँसते हुए जोड़ा, “कर लो रोमांस... और मैं इस बीच माँ से बात करता हूँ तुम दोनों की शादी की...”

“ओह भैया... थैंक यू... थैंक यू सो मच!”

“गुड मॉर्निंग आदित्य...” इतने में मीना भी किचन के सामने खड़ी हो कर लगभग पुकारती हुई बोली - जाहिर सी बात है कि वो कुछ देर से उस तरफ़ आई हुई थी, और उसने उन तीनों की बातों का कुछ अंश तो सुना ही था, “गुड मॉर्निंग क्लेयर...” और अंत में लगभग झिझकते हुए, “... जय!”

“हे मीना! गुड मॉर्निंग!” आदित्य ने कहा।

“ओह मीना,” क्लेयर ने उसको देखते ही चहकते हुए कहा, “गुड मॉर्निंग, लव! ... क्या बात है! आज किसी को भी नींद नहीं आई है लगता है!”

“ओह नो, ऐसा नहीं है क्लेयर... मैं उठ जाती हूँ बहुत सुबह! ... आज ही देर से उठी हूँ!”

“नाइस...” फिर जय को देख कर, “सीखो कुछ!”

क्लेयर की बात पर मीना थोड़ा सा झेंप गई।

“भा...भी...!” जय ने भी झेंपते हुए कहा।

“हाँ ठीक है... बाद में कम्प्लेन कर लेना!" क्लेयर बोली, "कॉफ़ी लोगी मीना?”

“ओह क्लेयर... आप अकेली काम न करें! ... आई विल हेल्प यू?”

“ओह डोंट बी फॉर्मल मीना... तुम पहली बार आई हो... तुमसे काम नहीं करवा सकती!”

“फॉर्मल मैं नहीं, आप हो रही हो,” मीना ने अंदर ही अंदर खुश होते हुए कहा - उसको बहुत अच्छा लग रहा था कि उसको सभी से इतना प्यार, इतना अवधान मिल रहा था, “... वैसे भी घर में काम तो करती ही हूँ!”

आई नो, लेकिन बाद में कर लेना काम... और जैसा तुमको मन करे वैसा!” क्लेयर ने अर्थपूर्वक कहा - जिसका मंतव्य मीना ने बखूबी समझ लिया।

“ठीक है क्लेयर...”

“गुड गर्ल...” क्लेयर ने कहा, “देखो, अभी अधिक सुबह है... तो मैं तुमको फ्रेंच टोस्ट और कॉफ़ी देती हूँ? फिर हम सभी साथ में ब्रेकफ़ास्ट करेंगे?”

“जानेमन,” आदित्य जो कुछ देर से चुप था बोला, “जो मन करे, बना लो! ... आज तो अच्छा दिन होने वाला है! मीना भी है तो उसको जाने नहीं देंगे! आज मस्ती करते हैं?”

“हाँ हाँ! बिल्कुल!” क्लेयर ने तुरंत इस प्लान की रज़ामंदी कर दी, जैसे मीना की इच्छा के जानकारी की कोई आवश्यकता ही न हो!

“लेकिन क्लेयर...”

“आज कोई काम है क्या मीना?” क्लेयर ने पूछा, “या कहीं बिजी हो?”

“नहीं, ऐसी तो कोई बात नहीं!”

“तो फिर?” क्लेयर ने कहा, “... लुक लव, हमको अपने से अलग मत समझो! ऑन द कोंट्ररी, विद अ बिट ऑफ़ लक एंड गॉड्स ग्रेस, हम सब एक साथ भी हो सकते हैं!”

क्लेयर की ऐसी खुली बात पर मीना थोड़ा हिचकिचा गई और थोड़ा शरमा भी गई। बीती रात की बातें उसको पूरी तरह से याद थीं। एक तरह से वो रात में सोई ही नहीं - बस, जय की कही बातों पर विचार करती रही। ऐसा नहीं था कि उसको किसी ने पहली बार प्रेम-निवेदन किया हो। लेकिन यह अवश्य था कि जय को देख कर न जाने कैसी अदृश्य शक्ति जैसे उसको खींच ले रही थी। मन ही मन में जैसे उसको समझ आता कि जय उसका ही है और वो जय की! गज़ब का आकर्षण! एक तरह से कल रात जय ने उसको प्रोपोज़ कर के उसके मन की उधेड़बुन को सुलझा दिया था जैसे! जय का परिवार इतना सुन्दर, इतना स्नेही था, कि वो स्वयं भी उसी परिवार का हिस्सा बनने के सपने देखने लगी!

मन ही मन उसको जय स्वीकार था। और जय को वो! जय को मीना के अतीत से जैसे कोई सरोकार ही नहीं था! युवा लड़कों की यही समस्या है - वो हर बात को खिलवाड़ में ले लेते हैं! शादी जैसी गंभीर बात को भी! लेकिन वो चाहती थी कि जय उसके बारे में सब बातें जान जाए! उसके बारे में कुछ छुपा न रहे।

उधर जय मुँह बाये अपनी भाभी की जादूगरी देख सुन रहा था। प्रोपोज़ करना एक बात होती है, लेकिन वैवाहिक सरोकार दो परिवारों का मिलन होता है। ऐसे में मीना को भी इस परिवार में स्वीकृति मिलनी आवश्यक थी। जय मन ही मन सोच रहा था कि वो किस तरह से इस बात को कह दे! लेकिन क्लेयर भाभी तो रॉक स्टार हैं उसकी! उन्होंने इतनी आसानी से इतनी बड़ी बड़ी बातें मीना से कह दी थीं, जो कहने की वो सोच भी नहीं सकता था। भाभी हों, तो ऐसी!

“ठीक ही तो कह रही है क्लेयर, मीना!” इस बार बात की बागडोर आदित्य ने पकड़ी, “भई हम तो तुमको अपनी ही मान रहे हैं! तुम देख लो अपना!” वो हँसते हुए बोला।

‘ऑफिस वाला आदित्य और ये आदित्य कितने अलग लोग हैं...’ मीना सोचने लगी, ‘वहाँ वो कितना धीर गंभीर रहता है, और यहाँ वो कितना हल्का फुल्का - शायद सब क्लेयर का असर है!’

“अरे जय, मीना को एस्टेट घुमा देना सवेरा होने पर! ठीक है?”

“ठीक है भैया! ठीक है!”

“बढ़िया,” आदित्य ने क्लेयर की तरफ़ मुखातिब होते हुए कहा, “आओ जानेमन, मैं तुम्हारी हेल्प कर दूँ!”

“थैंक यू माय लव!”

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park

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Update #16


आज रात हर्ष ने एक बड़ा ही सुखद सपना देखा... वो और सुहासिनी अपने उसी कैर के कुञ्ज में साथ में बैठे हुए थे। कुछ अलग ही तरह का सपना था वो, जो पूरी तरह से हर्ष को समझ में भी नहीं आ पाया। लेकिन, जब वो सुबह उठा, तो उसको लगा कि इतना सुन्दर सपना उसने शायद पहले कभी नहीं देखा था।

दिन में सुहासिनी से जब मुलाकात हुई तो वो बोला,

“आपको पता है... कल रात... कल रात हमने अपने सपने में आपको देखा।”

सुहासिनी यह सुन कर लाज से मुस्कुराने लगी।

“हमारी इच्छा होती कि हम पूरे दिन भर... बस आपके साथ ही बैठे रहें...” वो बोले जा रहा था।

“हमारी भी...” सुहासिनी ने लज्जा से दोहरी होते हुए, बुदबुदा कर कहा।

दोनों के ही चेहरों पर मुस्कान थी।

“भैया और भाभी माँ भी एक दूसरे से बहुत प्रेम करते हैं!” थोड़ी देर बाद हर्ष ने कहा - निष्प्रयोजन!

“हाँ...” यह कोई वार्तालाप नहीं था।

सुहासिनी के चेहरे की मुस्कान और भी बढ़ गई थी।

“आपको पता है... कुछ दिनों पहले हमने उनको कुछ करते हुए देखा...” हर्ष बोलते बोलते कुछ सोचकर रुक गया।

“क्या कर रहे थे?” सुहासिनी के स्वर में एक आत्मीय जिज्ञासा थी।

हर्ष कुछ क्षण चुप रहा, और फिर बड़े ही अप्रत्याशित ढंग से उसने सुहासिनी का एक गाल चूम लिया। एक कोमल, बाल-सुलभ चुम्बन... जो शायद केवल बच्चे ही कर सकते हैं... निष्पाप और प्यारा!

किन्तु यह अप्रत्याशित था। सुहासिनी घबराकर थोड़ा पीछे हट गई और स्तब्ध सी होकर हर्ष को देखती रही।

“आपको खराब लगा?”

सुहासिनी ने ‘न’ में सर हिलाया। लेकिन लज्जा की सुन्दर सी रक्तिम लालिमा उसके पूरे शरीर पर फ़ैल गई।

थोड़ी देर दोनों के बीच कोई संवाद नहीं हुआ। शायद बात आई-गई हो गई!

आज और भी भीषण गर्मी थी। हर्ष गर्मी के कारण पसीना पसीना हो गया था।

आज उसकी ये दशा देख कर सुहासिनी को हँसी नहीं आई... बल्कि उसके मन में ‘पत्नी वाले दायित्व’ की भावना आ गई, कि काश वो अपने राजकुमार को थोड़ी सी भी राहत दे सके! वो अल्हड़, चंचल लड़की अचानक ही न जाने कहाँ गायब हो गई, और उसका स्थान वापस उस गरिमामई लड़की ने ले लिया, जिस पर हर्ष मोहित हुआ था।

उसने अपनी चुनरी से, हर्ष के चेहरे पर से चुहचुहाते पसीने को सुखाने का उपक्रम शुरू कर दिया।

हर्ष ने बड़े प्रेम से सुहासिनी को निहारा।

सुहासिनी ने हर्ष को अपनी तरफ़ देखते हुए देखा, तो लजा कर उसने अपनी नज़रें नीची कर लीं।

उसकी यह हरकत हर्ष को इतनी प्यारी लगी कि उसने न जाने किस भावना से वशीभूत हो कर सुहासिनी के उस हाथ को चूम लिया, जिस हाथ से वो उसका पसीना सुखा रही थी। इन दो चुम्बनों के कारण, अचानक ही दोनों के बीच संवाद में शब्दों की आवश्यकता जैसे समाप्त हो गई हो! जब संवाद भाव-भंगिमाओं, और संकेतों में हो, तो उसमें शब्दों का क्या स्थान?

सुहासिनी लजा तो गई, लेकिन फिर भी उसने पसीना सुखाना बंद नहीं किया।

उधर हर्ष को अपनी पसंद, अपने प्रेम पर इतना अभिमान हो रहा था कि वो कुछ कह ही नहीं सकता था। सुहासिनी का रमणीय, गरिमामय रूप भी कितना सुहाना था, और उसका अल्हड़, सरल रूप भी! वो पानी की तरह पारदर्शी थी - उसमें न तो कोई दिखावा था, और न ही कोई मिलावट!

चुनरी हटने के कारण, सुहासिनी के सीने पर केवल उसकी कुर्ती ही रह गई थी। और उस दिन की याद हर्ष के मानस-पटल से हटी नहीं थी। हर्ष की दृष्टि वापस सुहासिनी के कुर्ती के महरम पर पड़ी। सुहासिनी की कनपटियों से नन्ही नन्ही, बूँद बूँद कर के रिसता पसीना, उसके गले से होता हुआ उसके सीने पर, उसकी छातियों के बीच के हिस्से को भिगो रहा था! और इस बात का गवाह था उसकी कुर्ती के सामने बढ़ता हुआ गीलापन!

वह दृश्य देख कर हर्ष के अंदर, अल्पवय की उदात्त भावनाएँ अचानक से हिलोरें भरने लगीं! हर्ष ने हाथ बढ़ा कर पसीने की क्षीण, पतली धारा को पोंछ दिया।

अगर कोई और होता, तो सुहासिनी उस बढ़े हुए हाथ को झटक देती... और यदि उसके सामर्थ्य में होता, तो उस हाथ को कटार से काट भी देती! कोई और समय होता, तो संभव है सुहासिनी हर्ष की इस हरकत का भी कोई विरोध करती! लेकिन इस समय... इस समय, न जाने क्यों उसको हर्ष का ऐसा करना उचित लगा। हर्ष भी बहुत घबराया हुआ था - उसको स्त्रियों और लड़कियों के साथ सभ्य व्यवहार करना सिखाया गया था! और इस समय वो जो कर रहा था, वो सभ्य तो शायद नहीं ही था! लेकिन, सुहासिनी तो अपनी थी! अपनी पत्नी के साथ तो अंतरंग हुआ जा सकता है न? लेकिन ऐसे ही निश्चय - अनिश्चय के बीच हर्ष के मन में एक अनोखी लालसा जाग उठी!

हर्ष ने अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाए, और सुहासिनी की कुर्ती के बटनों में उलझा दिए। सुहासिनी का दिल धक्-धक्-धक्-धक् कर के तेजी से धड़कने लगा। इस बात की उम्मीद नहीं थी उसको, लेकिन अब जब ये बात उसके साथ हो रही थी, वो उसको रोकने में अक्षम थी! और तो और, वो इस बात को होने से रोकना भी नहीं चाहती थी।

कुछ ही क्षणों में उसकी कुर्ती के सभी बटन खुल गए थे - लेकिन सुहासिनी को लग रहा था कि कितना समय हो गया! वो जानती थी कि अगले किसी ही पल वो अपने राजकुमार के सामने अभूतपूर्व तरीके से नग्न होने वाली थी! अभूतपूर्व इसलिए, क्योंकि उसको आज तक उस रूप में अन्य किसी ने भी नहीं देखा था। उसके मन में एक अजीब सी घबराहट होने लगी - कि क्या राजकुमार को वो पसंद आएगी?

जैसे ही उसकी कुर्ती के दोनों पट अलग हुए, हर्ष के गले से एक आश्चर्यजनक, संतुष्ट, किन्तु दबी हुई आह निकल गई।

छोटे छोटे नारंगी के फलों के आकर के गोल-मटोल, और उन्ही के जैसे थोड़े सख़्त, थोड़े मुलायम, थोड़े चिकने, तो थोड़े खुरदुरे, और अत्यंत युवा स्तन!

“अति सुन्दर...” उसके मुँह से स्वयं ही बढ़ाई निकल गई।

सुहासिनी को शर्म आ रही थी, लेकिन एक गज़ब का आंदोलन भी हो रहा था उसके मन में! उसको लग रहा था जैसे घण्टों बीते जा रहे हों - उसका राजकुमार उसके स्तनों को बड़ी लालसा, बड़ी रुचिकर दृष्टि से देखे डाल रहा था।

रहा नहीं गया सुहासिनी से, “राजकुमार जी...?”

उसको आशा थी कि शायद राजकुमार उसको यूँ ताकना रोक दें, लेकिन हुआ उसका उल्टा! हर्ष पुकारे जाने पर जैसे किसी तन्द्रा से जागा। और जागते ही वो अपनी इच्छाओं पर क्रियान्वयन करने लगा। वो सुहासिनी की कुर्ती को उसके शरीर से उतारने लगा। वो भी हर्ष की इस हरकत में सहायता करने लगी। कुछ ही क्षणों में सुहासिनी कमर के ऊपर पूरी तरह से नग्न थी।

हर्ष ने अपनी सुहासिनी को मन भर के देखा - कमसिन, क्षीण से शरीर वाली लड़की! लेकिन नग्न हो कर कैसी सुन्दर सी लग रही थी! मनभावन! कामुक भी!

“तुम बहुत सुन्दर हो, सुहासिनी!” हर्ष ने कहा, और बढ़ कर उसको अपने आलिंगन में भर लिया।

सुहासिनी भी, और हर्ष भी, दोनों के ही शरीर काँप रहे थे। नया एहसास था ये। अपरिचित, और थोड़ा डरावना भी! कुछ देर दोनों ऐसे ही आलिंगनबद्ध हुए रहे, फिर हर्ष से जैसे रहा नहीं गया। उसने सुहासिनी को अपने से अलग किया, और बारी बारी से उसके दोनों स्तनों को चूम लिया।

‘बाप रे!’

सच में, न जाने कैसे अजीब शय थे ये दोनों अंग, कि हर्ष के चूमते ही, उसके पूरे शरीर में कँपकँपी दौड़ गई! यह तो एक बात हुई! उस दिन की ही भाँति फिर से सुहासिनी को अपना पूरा शरीर तपता हुआ महसूस हुआ! लज्जा की लालिमा उसके पूरे शरीर पर फ़ैल गई!

साथ ही वापस आ गया उस दिन का संशय! उसने अपने मन को मना लिया था कि स्तन तो बच्चों के भरण-पोषण के लिए होते हैं, इसलिए उनका पति के लिए कोई उपयोग नहीं है। लेकिन राजकुमार के चुम्बन ने उस आश्वासन को डिगा दिया।

‘क्या करने वाले हैं ये?’

सुहासिनी के मन में यह विचार आया ही, कि अगले ही पल उसको अपने प्रश्न का उत्तर मिल गया।

हर्ष ने सुहासिनी का एक चूचक अपने मुँह में भर लिया और उसको चूसने लगा!

सुहासिनी को जो एहसास हुआ, उसको वो शब्दों में बयान नहीं कर सकती थी! जैसे ही हर्ष ने उसके चूचक को मुँह में लिया, वैसे ही उसको गुदगुदी का एक ज़ोरदार झटका सा लगा! और जैसे जैसे चूषण की अवधि बढ़ती गई, वैसे वैसे ही उसके पूरे शरीर में कामुक तरंग फैलती गई। अभी तक उसको वैसा अनुभव नहीं हुआ था! एक और एहसास हुआ - सुहासिनी को लगा कि जैसे उसका पेशाब निकल गया हो! उसका पूरा शरीर अनियंत्रित हो कर काँप रहा था, और उधर हर्ष उसका दूसरा दूसरा चूचक पीने में व्यस्त हो गया था। सुहासिनी बहुत कमज़ोर सा महसूस कर रही थी। ऊपर से यह संज्ञान कि उसका पेशाब निकल गया है, उसके कारण उसको एक अलग तरह की शर्म आ रही थी। उसका मन हो रहा था कि अब वो अपने घर चली जाए!

लेकिन वो चाहती थी कि राजकुमार को अपने मन का ‘आनंद’ मिल जाए।

हर्ष को अपार आनंद मिल रहा था। जोश में आ कर वो ज़ोर ज़ोर से चूस रहा था। लेकिन शायद जिस बात की उसको उम्मीद थी, वो नहीं हो रही थी। अंततः उसने सुहासिनी के स्तनों से खेलना बंद किया। इतनी देर में दोनों की ही साँसें उखड़ गई थीं, जिनको संयत कारने में थोड़ा समय लगा।

जब दोनों के होश थोड़ा वापस आए तब सुहासिनी ने पहले तो अपनी कुर्ती वापस पहनी, और शरमाते सकुचाते हर्ष से बोली,

“राजकुमार जी... अभी इनमें दूध नहीं आता...”

उसकी बात सुन कर हर्ष ने बड़ी हैरत से सुहासिनी की तरफ़ देखा।

“आपको कैसे पता कि हम आपका दूध पीना चाहते हैं?”

“उस दिन भी आप इन्ही को देख रहे थे... और आज...! अब अगर ये दूध पीने की चाहत नहीं है, तो फिर और क्या है?”

हर्ष मुस्कुराया।

“कब आएगा?”

“जब हमारा बच्चा होगा।” वो शर्माते हुए बोली।

“और हमारा बच्चा कब होगा?”

सुहासिनी अब तक लाज से पानी पानी हो गई थी, “जब आप और हम विवाह के बंधन में बँध जाएँगे...”

हर्ष आनंद से मुस्कुराया, “मतलब जल्दी ही...?”

“हाँ... जल्दी ही!”

“तब हम आपका दूध पी सकेंगे?”

“आप चाहेंगे तो... लेकिन, वो तो हमारे बच्चे के लिए होगा न?”

“हाँ,” हर्ष ने थोड़ी निराशा से कहा, और फिर अचानक ही उम्मीद से बोला, “बहुत नहीं... बस, थोड़ा ही?”

“हा हा...” और बस, अचानक से ही, सुहासिनी फिर से वो चुलबुली सी लड़की बन गई, “हम जाएँ?”

“इतनी जल्दी?”

“लू लग जाएगी... आप भी चलिए!” सुहासिनी ने बड़े प्यार से हर्ष के गले में गलबैयाँ डाल कर कहा, “कल मिलेंगे न फिर!” जैसे उसने हर्ष को समझाया हो।

“वचन है न?”

“आपसे मिले बिना...” उसने बात अधूरी ही छोड़ दी, और हर्ष के माथे को चूम कर उठ गई, और अपने घर की ओर चल दी।


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Nice and superb update.....
 
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