प्रिय शीतान जी, आपकी दोनो कहानियां "साया - चुड़ैल की प्रेम कथा १और २" पढ़ी, और आपकी लेखन शैली और रचनात्मक सोच से बहुत प्रभावित हुआ। केवल आपके कार्य की सुंदरता की सराहना करने के लिए न चाहते हुए भी मैं ये अकाउंट बनाने के लिए बाध्य हो गया ताकि आप तक अपनी शुभकामनाएं पहुंचा सकूं, और आपको धन्यवाद कर सकूं। मेरे जैसे और भी पाठक होंगे जो आपकी कहानी को बहुत पसंद करते हैं, परंतु अपनी गोपनीयता बनाए रखने के लिए आपको टिप्पणी या "लाइक्स" नहीं दे पाते। आप ये जान लें की आपके कार्य के प्रशंसक बहुत हैं, पर हर कोई अपने विचार व्यक्त नहीं कर पाता किन्ही कारणों के चलते
कहानी बहुत ही उत्कृष्ट है, और जैसे जैसे आगे बढ़ रही है ये और रोमांचक होती जा रही है। सच कहूं तो ये कहानी नहीं अपने आप में एक उपन्यास है - रहस्यों से भरपूर। और आगे क्या होगा ये जानने जबरदस्त उत्कंठा है सब के मन में।
शमीर के माता पिता की जो कहानी गढ़ कर आप एक नए आयाम को जन्म दे रही हो उसके बारे में भी उत्सुकता बढ़ गई है। सुषुमि और शमीर की नई प्राप्त हुई शक्तियों का पिटारा अब तक पूरा नहीं खुला है, और कुमुत्रा (कामिनी) , करिश्मा - तान्या की भी शक्तियों का चरम देखने की जिज्ञासा बनी हुई है। बहुत संभव है की लियाका, कायरा मायरा और जियारा के साथ आर पार की लड़ाई में ये सब रहायोद्घायन होगा।
यद्यपि आरंभ भले ही एक इरोटिक कहानी की तरह हुआ हो, सच कहूं तो अब किसी भी अपडेट में यदि पटकथा से अधिक यौन क्रीड़ा (विशेषकर रीता की काम क्रीड़ा) को प्राथमिकता मिलती है तो थोड़ी निराशा होती है। हालांकि ये मेरी व्यक्तिगत सोच है और मैं समझ सकता हूं की आपको तो सारे पाठकगणों की अपेक्षाओं के अनुसार लिखना होता है।
फिर कहानी के ३-४ सिरों को साथ साथ चलना और आपस में जोड़े रखना भी एक कला है, जिसके लिए बहुत सटीक सृजनात्मक विचारों की आवश्यकता होती होगी, जो निश्चय ही समय लेती होगी।
वैसे तो कथाप्रवाह अद्भुत है और इस विषय में कहीं कोई समस्या नहीं है, किंतु कभी कभी पात्रों के नाम में अदलाबदली पठन अनुभव को प्रभावित कर देती है। इस त्रुटि पर अगर आप थोड़ा ध्यान दें तो आपकी रचना और निखर जाएगी ऐसा मेरा मानना है। यदि आपको इस संबद्ध में (प्रूफ रीडिंग) मैं कुछ भी सहायता कर पाऊं तो मुझे प्रसन्नता होगी। आशा है मेरी इस समीक्षा को आप सकारात्मक दृष्टि से देखेंगी।
अंत में पुनः एक बार आपको साभार धन्यवाद, और बहुत बहुत शुभकामनाएं। आपकी लेखनी ऐसे ही प्रगति करे, और आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि करती रहे।
एक तुच्छ प्रशंसक