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कामदंड के प्रभाव के कारण धीरे धीरे शरीर की भुख सुमित्रा के पतिव्रता धर्म पर भारी पड़ती जा रही थी।
दिन ब दिन उसकी यौन इच्छा बढ़ती ही जा रही थी।
इधर राजेश को भी लगने लगा कि आज रात को मामी चांस दे सकती है यह सोचकर उसका लंड तनकर लम्बा और मोटा हो गया था। वह रात होने का बेसब्री से इंतज़ार करने लगा।
इधर सुमित्रा को भी राजेश से चिपकने उनके आस पास रहने, लिपटने की इच्छा हो रही थी।
काम दंड अपने कार्य पर लगा हुआ था, चलते, झुकते बैठते, वह बुर को ठोकता जिससे सुमित्रा की बुर पानी छोड़ने लगती।
उसकी बुर की खुजली बड़ती ही जा रही थी।उसे भी लगने लगी की रात जल्दी हो जाए,ताकि राजेश , उसकी क़मर पे बंधा,कामदंड निकालने के बाद अपनी गोद में बिठा ले।
शाम को,उसके खड़े लंड को अपनी गाड़ के नीचे महसूस कर उसकी उत्तेजना और बड़ गई थी।
किसी तरह मुस्किल से दोनो के लिए समय बीता और वह समय भी आ गया जब, रात में सुमित्रा राजेश के कमरे मे पहुंची,,
सुमित्रा राजेश के कमरे में जाकर खड़ी हो गई,,
सुमित्रा _राजेश, बेटा चलो मेरे कमरे मे,,, कामदंड निकाल दो।
राजेश इसी पल का इंतजार कर रहा था।
राजेश _जी मामी, आप चलिए, मै आता हूं।
राजेश,अपनी मामी के कमरे में जाने से पहले, अपनी पिता जी और स्वीटी के कमरे का मुआइना कर लिया कही कोई जग तो नही रहा,,
जब वह पूरी आश्वस्त हो गया कि घर के बांकी सभी लोग सो गए हैं, तब वह अपनी मामी के कमरे मे घुसा,,
इस समय सुमित्रा बेड में लेट कर उसी के आने का इंतजार कर रही थी।
सुमित्रा _राजेश, आने में लेट कर दिया?
राजेश _ओह मामी मै देखने गया था की घर के बांकी लोग सो गए हैं कि नही।
सुमित्रा _आज क्यू गया? पहले तो नही जाता था।
राजेश _क्यू की मामी आज मैं तुम्हे कुछ ज्यादा देर तक प्यार करना चाहता हूं।
सुमित्रा _अच्छा, लेकिन ऐसी कोई हरकत न कर देना जिससे बाद में मुझे शर्मिंदा होना पड़ जाए।
राजेश _मामी अगर आपको मूझसे डर लग रहा है तो मैं चला जाता हूं।
सुमित्रा _अरे तू चला जायेगा, तो कामदंड निकालेगा कौन।
राजेश _अच्छा ठीक है चलो निकाल देता हूं।
सुमित्रा बेड से उठी और अपनी साडी निकाल कर अलग कर दी।
राजेश बेड किनारे बैठा देख रहा था।
सुमित्रा, उसके पास आई और पीछे घूम कर बोली लो, निकाल दो।
राजेश ने उसकी पेटी कोट के अंदर अपना हाथ डालकर रेशम की धागे का गठान ढूंढा।
सुमित्रा राजेश का हाथ उसके क़मर पर पड़ते ही सिसक उठी।
राजेश _क्या huwa मामी,
सुमित्रा _कुछ नही,re तू जल्दी गांठ खोल।
राजेश _मामी थोडा पेटिकोट नीचे करो गांठ दिख नही रहा।
सुमित्रा _क्यू मुझे शर्मिंदा करने पर तुला है मुआ। देखो वही पर होगा।
राजेश ने हांथ क़मर के अंदर और ज्यादा डाल कर, उसके कूल्हे की तरफ ले गया।
सुमित्रा फिर से सिसक उठी,,
राजेश के पकड़ में गांठ नही आया।
राजेश _मामी पेटिकोट ढीला करो।
सुमित्रा _लगता है तू मुझे आज पथभ्रष्ट करके ही दम लेगा।
सुमित्रा अपनी पेटिकोट की नाडा की गांठ खोल कर नाडा पकड़ ली।
सुमित्रा _ले अब ठीक से ढूंढ, वही कही होगा?
राजेश ने हाथ और अंदर डालकर ढूंढा।
सुमित्रा के शरीर उत्तेजना से भरने लगा। उसकी सांसे तेज हो गई।
राजेश मामी गांठ मिल गया।
राजेश ने रेशम की धागे को पेटी कोट से उपर खीचा और उसकी गांठ खोलने लगा।
सुमित्रा _पेटिकोट के नाडा पकड़ी हुई थी।
राजेश ने गांठ खोलकर कामदंड निकाल दिया।
फिर बेड में बैठ कर सुमित्रा को अपनी गोद में बिठा लिया।
सुमित्रा _अरे छोड़ मुझे।
राजेश _क्यू, तुम्हारी मदद करने का ईनाम नही दोगी।
सुमित्रा _क्या चाहिए, तुझे।
राजेश _वही किस।
सुमित्रा ने अपनी गाल राजेश की ओर कर दिया। ले, लेले किस।
राजेश _न ,आज मैं बहुत देर तक किस करूंगा।
सुमित्रा एक हाथ से अपनी पेटिकोट की नाडा पकड़े राजेश की गोद में बैठी थी।
सुमित्रा को भी राजेश की गोद में बैठ कर बहुत अच्छी महसूस कर रही थी। आखिर उसकी शरीर की भुख जो बड़ चुकी थी।
राजेश ने उसे घुमाकर अपनी गोद में बिठा लिया।
अब दोनो के चेहरे आमने सामने थे।
राजेश का खड़ा लंड सुमित्रा की बुर में चुभने लगी, जिससे वह और उत्तेजित हो गई।
अब राजेश ने अपनी मुंह में सुमित्रा की ओंठ को भरकर चूसना शुरू कर दिया।
सुमित्रा बहुत अधिक उत्तेजित हो गई। सोचने समझने की क्षमता उसमे अब न रही, उसके उपर हवस हावी हो गई।
राजेश ने सुमित्रा की को अपने बाहों में भरकर सीने से चिपका लिया।
सुमित्रा भी राजेश को जोर से जकड़ ली।
अब राजेश ने सुमित्रा की गर्दन को चूमना चाटना शुरू कर दिया। सुमित्रा अपनी आंखे बन्द कर सिसक रही थी।
राजेश ने अब सुमित्रा को अपनी गोद में उठा कर खड़ा हो गया और सुमित्रा को बेडकेकिनारे पर लिटा दिया।
सुमित्रा, राजेश की ओर देखने लगी।
राजेश ने उसके ऊपर झुक कर उसकी ओंठ चुसने लगा। फिर किस करते हुवे नीचे जाने लगा। वह उसकी खूबसूरत बदन को चाटने लगा।
सुमित्रा राजेश की हरकतों से अत्यंत काम विहिल हों गई।
इधर राजेश सुमित्रा की खूबसूरत नाभी को चुसने लगा।
सुमित्रा, आह, उन करते हुए राजेश की बाल पकड़ कर सहलाने लगी।
फिर राजेश ने वो किया जिसके बारे में सुमित्रा ने कल्पना भी नही की थी।
राजेश ने शुमित्रा की पेटिकोट खिंचकर अलग कर दिया।
सुमित्रा के उपर इस समय हवस हावी हो गई थी।
वह कोई विरोध न कर सकी।
राजेश नीचे झुका और सुमित्रा की मस्त फुली हुई चिकनी एकदम गोरी chut को पहले हाथ से सहलाया फिर जीभ से चाटना शुरू कर दिया।
सुमित्रा सोंची नही थी की राजेश ऐसी हरकत कर सकता है।
जैसे ही राजेश ने बुर चूसना शुरू किया सुमित्रा की शरीर में झन झनाहट पैदा होने लगी। उसकी आंखों की पुतलियां पलटने लगी।
वह हवस में इतनी अंधी हो चुकी थी कि वह राजेश को रोक नहीं सकी केवल उसके मुंह से दबी दबी आवाज आई,नही ईई,,,बेटा,,, आ,, आ,, ये कैसी ई ईई मां गंदी ई ई,,, हरक,,,,,
आह मां,,, मत,,,, क,,,,,, र,,, आह,, मां।
राजेश ने उसकी बुर की भग्नाशा को मुंह में भरकर जब चूसना शुरू किया तो सुनिता का बदन कपकपाने लगी,, उससे बर्दास्त करना मुस्किल हो गई। वह अपनी हाथो से बेड को भींचने लगी अपनी होंठ को दांतो से चबाने लगी। ऊ आ ई ई,,, की आवाज उसकी मुंह से निकल रही थी।
वह खुद को ज्यादा देर तक न रोक सकीऔर चीखते हुए झड़ने लगी।
वह अपनी होश खो बैठी थी।
राजेश को समझ में आ गया था की उसकी मामी झड़ गई है।
राजेश _मामी तुम ठीक तो हो न,
सुमित्रा तो होश में नही थी। कोई जवाब नही दी। राजेश ने उसे हिलाया।
राजेश _मामी तुम ठीक तो हो। आंखे खोलो।
राजेश ने बाथरूम पे जाकर पानी लाया और उसके मुंह पी छिड़का।
पानी पड़ते ही सुमित्रा आंखे खोली, वह राजेश की ओर देखने लगी।
वह अपनी हालत देखी जो सिर्फ़ ब्लाउज पहनी थी। वह राजेश के सामने नीचे से नंगी थी।
वह उठी और अपनी साडी से अपने बदन को ढक ली।
वह बहुत शर्मिंदगी महसूस कर रही थी।
सुमित्रा _छी, तुमने मेरे साथ कितनी गंदी हरकत की जानवरो की तरह। छी मैने तुम्हे रोका भी नहीं हे भगवान,,, ये मुझे क्या हो गया था।
राजेश _मामी ये आप क्या कह रही हो,,
अभी तो आप मजे ले रही थी।
सुमित्रा _चुप कर बदमाश कही का, अपनी मामी के साथ गंदी हरकत करते तुम्हे शर्म नही आई।
हवस का भूत उसके सिर से जा चुका था।
वह बहुत लज्जित महसूस कर रही थी।
हे भगवान, मै हवस में अपनी पतिव्रता धर्म भंग कर डाली,,, वह रोने लगी।
राजेश _मामी, आप रो क्यू रही?
सुमित्रा _इतना सब होने के बाद भी पूछ रहा है। क्या हुआ है। तुम्हे शर्म नही आ रहा, अपनी मामी के साथ इतनी गंदी हरकत करके ।
राजेश _मामी मुझे माफ कर दो, मै बहक गया था।
सुमित्रा _तुम्हारी माफी मांगने से मेरी उतरी इज्जत वापस तो नही आ जायेगी।
चल जा मेरे सामने से,।
गंदा कही का।
राजेश को अपनी मामी की बात बुरी लगी।
वह चुपचाप सुमित्रा के कमरे से निकल गया।
उसका खड़ा लंड भी सिकुड़ कर चूहा बन गया था।
वह अपने बेड पर लेट कर सोचने लगा की, उसे ये सब नही करना चाहिए था। अब वह सोच लिया की आगे वह मामी के साथ कुछ नहीं करेगा।
इधर सुमित्रा कुछ देर आंसू बहाने के बाद सोचने लगी की इसमें राजेश को ही सारा दोष देकर ठीक नही किया। आखिर वह भी तो उसकी हरकतों का विरोध नही की।
लगता हैं वह नाराज हो गया।
अगली सुबह राजेश जब सोकर उठा। जिम जाने के लिए तैयार हुआ और जाने लगा किचन में उसकी मां और मामी काम कर रही थी।
वह दूर से ही बोला
राजेश _गुड मार्निंग मां ,
सुनीता _गुड मार्निंग बेटा।
सुनीता को आश्चर्य huwa की राजेश ने आज शरारत नही किया।
राजेश और बिना कुछ बोले वहा से चला गया।
राजेश जब जिम से आया सीधे अपने कमरे मे चला गया।
वह नहाकर तैयार होकर नाश्ता किया किसी से ज्यादा बात चीत नही किया।
वह कालेज चला गया।
सुनीता _भाभी, पता नही आज राजेश को क्या हो गया है?
कालेज से आने दो मै उससे पूछूंगी, कोई बात है क्या?
इधर सुनिता समझ चुकी थी की राजेश को उनके व्यवहार से बुरा लगा है।
उसे भी अब अच्छा नहीं लग रहा था।
राजेश जब शाम को घर आया,
वह सीधा अपने रूम में चला गया।
सुनीता _भाभी मुझे लगता है कोई बात है?राजेश से पूछना पड़ेगा, आखिर उसका चहेरा उतरा हुआ क्यू है?
सुमित्रा _सुनिता, लाओ काफी काट्रे मुझे दो , मै पूछती हूं आखिर बात क्या है?
सुनीता _ठीक है भाभी?
सुनीता_काफी लेकर राजेश के कमरे मे गई।
राजेश अपनी मामी को देखकर चुप ही रहा।
सुमित्रा _राजेश की ओर काफी आगे बढ़ाते हुवे, लो कॉफी पी लो।
वह बेड के किनारे बैठ गई।
राजेश _मुझे काफी पीने का मन नहीं।
सुमित्रा _क्यू? काफी तो तुम्हे पसंद है। नाराज़ हो आपनी मामी से।
राजेश ने कुछ नहीं बोला,,,
सुमित्रा _अपनी मामी से नाराज़ हो,, उसने फिर पूछा।
राजेश _नही।
सुमित्रा _राजेश मै जानती हूं कल मैंने तुम्हारे साथ बहुत बुरा बरताव किया। उसके लिए मुझे माफ कर दो। मैने सारा दोष तुम पर ही डाल दिया।
राजेश _नही मामी, गलती मेरी ही थी। मुझे आपके साथ गंदी हरकत नही करनी चाहिए थी। आप तो भोली भाली है, मुझे ये सब नही करना चाहिए था।
मुझे माफ कर दीजिए।
सुमित्रा _अच्छा अब जो huwa उसे भूल जाओ। लो काफी पिलो।
आओ मै अपने तुम्हे अपनी हाथो से पिला दू।
राजेश के सिर को सहलाते हुवे उसे प्यार से काफी पिलाने लगी।
कॉफी पी लेने के बाद राजेश ने अपनी मामी को धन्यवाद दिया।
सुमित्रा, मुस्कुराते हुवे कमरे से चली गई।
राजेश अपने पढाई में लग गया।
सुमित्रा घर के कामों में।
रात में भोजन के समय राजेश को मुस्कुराते , देख सुनीता को अच्छा लगा।
सुनीता _भाभी, राजेश को शाम को आपने कुछ घुट्टी पिलाई क्या जो अब खुश दिख रहा है।
सुमित्रा _अरे कुछ बातो को लेकर मूझसे नाराज था।
मैंने उसकी नाराजगी दूर करदी।
सुनीता _भाभी ये आपने अच्छा किया, मुझे राजेश का उतरा चेहरा देखकर दिनभर चैन नहीं पड़ता।
सुमित्रा _सुनिता तुम चिंता न करो, देखना राजेश पहले जैसे, कल सुबह उठते ही तुम्हे बाहों मे भर लेगा,,,
सुनीता _भाभी तुम भी न।
रात में सोने से पहले सुमित्रा ने घर की अच्छे से मुआइना की देखी की सब सो गए की नही फिर वह राजेश की कमरे की ओर गई।
कमरे में जाकर,,
सुमित्रा _अरे बेटा सो गया क्या?
राजेश की नींद लग गई थी।
सुमित्रा की आवाज सुनकर नींद खुली, वह सामने देखा,मामी खड़ी थी।
राजेश _राजेश, मामी आप, सोई नहीं अभी तक।
सुमित्रा _अरे बेटा, भूल गया क्या? बाबा ने कहा है काम दंड निकालकर सोना है।
चलो तुम्हे मेरी मदद करनी है।
राजेश _ओ, हां, मै तो भूल ही गया था।
आप चलो मैं आता हूं।
राजेश कुछ देर बाद सुमित्रा के कमरे में पहुंचा।
सुमित्रा सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी। वह साड़ी निकाल कर बेड पर लेटी थी।
राजेश _मामी आओ मै कामदंड निकाल दू।
सुमित्रा, ने अपनी पेटी कोट की नाडा खोल कर पेट के बल,पीठ उपर करके लेट गई।
लो बेटा निकाल दो कामदंड को।
राजेश बेड किनारे बैठ गया, उसने अपनी मामी की नंगी कूल्हे को देखा, तो उसका शरीर गरमाने लगा।
राजेश ।
राजेश ने रेशम की धागे को पकड़ा और उसकी गांठ खोलने लगा।
कुछ देर बाद,,
सुमित्रा _क्या huwa बेटा गांठ नही खुल रही है क्या?
राजेश _मामी, गांठ कस गया है।
सुमित्रा _बेटा, जल्दी कर, मै ज्यादा देर तक तेरे सामने कूल्हे उघाड़कर कर लेट नही पाऊंगी, मुझे बडी शर्म आ रही।
राजेश ने जब सुमित्रा की मासल, गुदाज, गोरी गोरी चूतड और उसकी गाड़ की छोटी छेद को देखा तो, न चाहते हुए भी।उसका लंड तनकर खड़ा हो गया।
राजेश किसी तरह अपने को काबू में रखते हुए।
धागे की गांठ खोला। धागे की गांठ खुलते ही वह कामदंड को खींचा, काम दण्ड सुमित्रा की बुर से दबा होने के कारण निकला नही।
सुमित्रा _अरे रूको, मै सीदी होती हू, तब निकलेगा।
सुमित्रा सीधी होकर लेट गई।
सुमित्रा की बुर राजेश के आंखों के सामने था।
राजेश का मन तो कर रहा था की वह सुमित्रा की बुर चाट ले, पर कल की गलती दोहराना नही चाहता था। वह किसी तरह अपने पर काबू रख कर काम दण्ड को निकालकर उसे उचित जगह पर रख दिया। और बेड से उतरने लगा।
सुमित्रा _ने राजेश का हाथ पकड़कर रोक दिया।
सुमित्रा _अरे, क्या huwa आज मामी को किस नही करेगा?
राजेश _मामी आप नाराज़ हो जाती हो।
सुमित्रा _अरे नही होऊंगी, बाबा, जहां किस लेना है लेलो।
राजेश खुश हो गया। वैसे तो वह पहले से गर्म हो चुका था। मामी की तरफ से ग्रीन सिग्नल मिलने पर उसका लंड और लम्बा और मोटा हो गया।
राजेश अपनी मामी के ऊपर लेट गया और उसकी ओंठ का रस चुसने लगा।
राजेश _मामी तुम सच बहुत रसीली लो।
सुमित्रा _पी लो न रस किसने रोका है।
राजेश ने उसकी गरदन को चूमा फिर नीचे ब्लाउज पर नजर गया। उसे अपनी मामी की चुचियों का दीदार करने का मन हुआ, वह उसकी बटन खोलने लगा।
बटन खुलते ही सुमित्रा की बड़ी बड़ी, गोरी गोरी सुडौल चूचियां देख कर राजेश से रहा न गया और वह उसकी निप्पल को मुंह में भरकर दबा दबा कर पीने लगा।
सुमित्रा के मुंह से मादक सिसकारी निकलने लगी।
वह बहुत अधिक उत्तेजित हो गई। उसकी बुर पानी छोड़ने लगी।
जी भरकर चूची मसल मसल कर पीने के बाद राजेश बेड पर खडा हो गया। राजेश एक एक करके अपने सारे कपड़े निकाल कर नंगा हो गया।
जब सुनिता की नजर राजेश के खड़े लंड पर पड़ी तो उसकी लम्बाई मोटाई देखकर दंग रह गई।
राजेश नीचे बैठ गया और सुमित्रा की नाभी चूसते हुए धीरे धीरे नीचे गया, फिर उसकी मस्त फुली हुई रस भरी गोरी गोरी chut को सहलाने लगा।
सुमित्रा सिहर उठी, वह अपनी आंखे बन्द कर। अपनी ओंठ को दांतो से दबाने लगी।
राजेश ने सुमित्रा की पेटिकोट को उसकी पैरो से अलग कर दिया।
अब सुमित्रा भी पूरी तरह नंगी हो गई।
राजेश ने सुमित्रा की क़मर को ऊपर उठाया और उसके नीचे तकिया लगा दिया।
जिससे उसकी बुर ऊपर आ गया।
राजेश सुमित्रा की टांगें फ़ैला दिया और खुद उसके बीच आकर उकडू बैठ गया।
राजेश ने सुमित्रा की ओर देखा वह हवस की आग में जल रही थी। उसने लंड का टोपा बुर की छेद पर सेट किया और एक जोर का धक्का मारा।
सुमित्रा _दर्द से चीख उठी।
बुर गीली होने के कारण, लंड बुर को चीरकर आधा अंदर चला गया था
सुमित्रा _बेटा दर्द कर रहा है।
राजेश ने सुमित्रा चूची के निप्पल को , अपनी मुंह में भरकर चुसने लगा , उसे मसलने लगा।
जिससे सुमित्रा फिर गर्म हो गई।
राजेश ने फिर अपने लंड को बाहर खिंचकर एक जोर का धक्का मारा लंड जड़ तक घूस कर बच्चे दानी से टकराया
सुमित्रा फिर चीख उठी,,
सुमित्रा_मां, मारा डाला रे, कमबख्त, रहम खा अपनी मामी पर घोड़े जैसा लंड जड़ तक घुसा दिया, मै औरत हूं कोई घोड़ी नही।
राजेश _मामी, आपको तो मैं घोड़ी समझकर ही चोदूंगा
क्या मस्त मॉल तू। अब देखना कैसे मैं तुम्हे अपने घोड़े में बिठाकर जन्नत की सैर कराता हूं।
अब राजेश लंड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करना शुरू किया
लंड ने जल्दही बुर में अपनी जगह बना लिया। बुर तो एक दम गीली थी। अतः वह लंड को पूरी तरह निगल गई। लंड के बुर में अंदर बाहर होने से सुमित्रा को दर्द की जगह मजा आने लगा।
अब राजेश भी अपनी गति बढ़ाते हुए तेज तेज चोदना शुरु किया। लंड बुर में सर सर अंदर बाहर होने लगा। राजेश ने अपनी दोनो हाथों से चूची पकड़ कर मसल मसल कर चूदाई करना जारी रखा।
सुमित्रा तो जैसे जन्नत में पहुंच गई। चूदाई में ऐसा मज़ा उसे आज तक नही आया।
जब राजेश लंड को बुर में गच से पेलता लंड का टोपा सीधा बच्चेदानी से टकरा जाता, जिससे सुमित्रा की शरीर झनझना उठती।
वह संभोग के अथाह सुख को प्राप्त करने लगी। सुमित्रा राजेश की कमर को पकड़ कर राजेश को अपनी बुर के अंदर घूस जाने के लिए उसकी मदद करने लगी। कमरे में, सुमित्रा की मादक सिसकारी आह,, उह,, उन आई मां,, उन, के साथ बुर और लंड के बीच होने वाली लड़ाई से फच फ्च गाच गच की आवाज और सुमित्रा की चूड़ी और कंगन की खनकने की आवाज आपस मे मिलकर एक मधुर धुन उत्पन कर रहे थे।
राजेश को भी सुमित्रा को चोदने में बड़ा मजा आ रहा था।
सुमित्रा की बुर अभी भी कुंवारी लड़कियों की बुर की तरह टाइट थी। बुर से पानी झरने की तरह बहकर सुमित्रा की टांगों से होता huwa बिस्तर पर गिर रहा था।
दोनो ही अपना वजूद भुलकर स्वर्ग में चले गए थे।
राजेश जो अब तक सुमित्रा की टांगें फ़ैला कर चोद रहा था अब वह उसकी टांगो को अपने कंधे में डालकर जोर जोर से चोदना शुरू कर दिया।
सुमित्रा को उसका पति कभी ऐसा नहीं चोदा था। उसे गजब का आनंद मिलने लगा जिसकी वह कभी परिकल्पना तक नहीं की थी।
इधर राजेश लगातार दनादन चूदाई करना जारी रखा। सुमित्रा अपनी दोनो हांथी से बेड को भींच ली और चीखते हुए झड़ने लगी।
वह झड़कर बेहोश सी हो है।
राजेश चोदना बंद कर सुमित्रा की ओंठ मुंह में भरकर चुसने लगा ।
कुछ देर बाद,
राजेश _मामी आप ठीक तो हैं न,,
सुमित्रा _हा में सिर हिलाई।
इधर राजेश का लंड अभी भी बुर के अंदर घुसा था।
सुमित्रा _राजेश अब बस करो, मै थक गई।
राजेश_पर मामी, मेरा अभी huwa नही ।
सुमित्रा_लाओ इसे मै हाथ से शांत कर देती हूं।
राजेश न चाहते हुए भी अपना लंड अपनी मामी के बुर से बाहर निकाल लिया। और बेड पर लेट गया।
सुमित्रा _फिर नाराज़ हो गया क्या re
राजेश _नही मामी। मै आपसे नाराज नही हु।
सुमित्रा उठी और राजेश के क़मर जाकर बैठ गई और उसके खड़े लंड को पकड़ कर हिलाने लगी।
काफी देर तक हिलाने के बाद भी पानी नहीं निकला तब
सुमित्रा _अरे तेरा पानी तो छूट ही नही रहा बाबा, मेरा हांथ भी दुखने लगा।
राजेश _मामी, आज कल की लड़किया मर्दों को दूसरे तरीके से झाड़ता है!
सुमित्रा _और क्या तरीका है re मै भी तो जानू।
राजेश _अच्छा ये बताओ मैने कल आपकी चूसा तो कैसा लगा?
सुमित्रा _चुप बदमाश।
राजेश _मजा आया था न, सच बोलो।
सुमित्रा _चुप बेशर्म कही का। सुमित्रा शर्माने लगी।
राजेश _आपकी आंखे बता रही है कि आपको बहुत मजा आया। वैसे ही जब महीला पुरुष लंड मुंह में लेकर चूसती है तब पुरुष को बहुत मज़ा आता है और वह जल्दी झड़ जाता है।
सुमित्रा _छी, आज कल की लड़किया कितनी गंदी हो गई है।
राजेश _मामी तुम भी चूसो न।
सुमित्रा _न बाबा मै ऐसा गंदा काम नही कर सकती।
राजेश _कोशिश करके तो देखो। मैने आपको मजा दिया न फिर आपकी बारी आई तो मुकर रही हो।
सुमित्रा _अरे मैने कभी किया नहीं ऐसा।
राजेश _कोशिश तो करो देखना आपको भी अच्छा लगने लगेगा।
सुमित्रा _पर तुम्हारा इतना बड़ा है मुंह में नही आ पाएगा।
राजेश _जितना ले सकती हो ले लो।
सुमित्रा _पहले अपने घोड़े को पानी से धो लो बाबा, इसमें मेरा पानी लगा huwa है।
राजेश _ठीक है चलो आप ही धो देना।
सुमित्रा और राजेश दोनो बाथरूम में चले गए।
वहा सुमित्रा ने राजेश के लंड को साबुन लगा लगाकर अच्छी तरह धोया।
फिर टावेल से पोछी और दोनो बेडरूम में आ गए।
राजेश खड़ा रहा और सुमित्रा नीचे बैठ कर लंड को पकड़ ली और पहले हिलाईउसके बाद उसके सुपाड़े को चांटी।
कुछ देर बाद वह सुपाड़े को मुंह में लेकर चूसी।
राजेश _मामी थोडा अंदर लो।
सुमित्रा ने थोडा अंदर लेकर चूसना शुरू की।
राजेश _आह मामी अब हुई न बात। ऐसे ही चूसती रहो बड़ा मजा आ रहा है।
सुमित्रा राजेश केआधे लंड को मुंह में भरकर चुसने लगी।
राजेश उसके सिर को पकड़ कर हल्के हल्के मुंह में लंड ठेलने लगा।
उसे बड़ा मजा आ रहा था।
राजेश _आह मामी सच में तुम बहुत अच्छी चूस रही हो लग ही नहीं रहा की पहली बार चूस रही हो।
थोडा और अंदर लो।
सुमित्रा जितना लंड को मुंह में अंदर ले सकती थी अंदर लेकर ग्लैप ग्लप, चुसने लगी।
राजेश तो जैसे जन्नत में पहुंच गया।
चूस मेरी जान आह क्या मस्त चूस रही है तू, आह बहुत मजा आ रहा है,
अब राजेश को खुद को रोक पाना मुस्किल होने लगा।
कुछ देर लगातार सुमित्रा द्वारा आधे से ज्यादा लंड मुंह में लेकर चूसने से वह खुद को रोक न सका और सुमित्रा के सिर पकड़कर।
आह मां आह,, आह, मै गया,, आह मामी,,,
सारा वीर्य सुमित्रा के मुंह में ही छोड़ दिया।
पूरा मुंह वीर्य से भर जाने पर किसी तरह वह अपने को छुड़ाई तब राजेश ने एक पिचकारी उसके चेहरे और आखरी पिचकारी उसकी चूची पर मारी।
सुमित्रा सीधा बाथरूम की ओर भागी।
वह खो खो करते हुए, वीर्य को मुंह से उगलने लगी, फिर भी कुछ वीर्य उसके पेट में चला गया। पहली बार वह किसी पुरुष का वीर्य पी थी।
उसने आईने में अपने अपने को देखा पूरा वीर्य से नहा डाली थी। पुरे शरीर को पानी से साफ कर बेडरूम में आई।
सुमित्रा _छी, कितना गन्दा हो गया है तू, बता नही सकता था की तेरा आने वाला है, पूरा मुंह में ही झड़ गया। राजेश से नाराज़ होते हुए बोली,
राजेश _मामी, वीर्य को पी लेना था न तुमको, आज कल की औरते तो वीर्य पीना पसंद करती हैं।
डाक्टर भी कहते हैं वीर्य पीने से औरत की खूबसूरती ओर जवानी दोनो बड़ती है। वैसे मेरे वीर्य का स्वाद कैसा लगा?
सुमित्रा _चुप कर बेशरम।
राजेश हसने लगा।
सुमित्रा _चल अब जल्दी अपने कपड़े पहन और जा यहां से कही कोई देख लिया तो मैं किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहूंगी।
राजेश ने अपना कपड़ा पहना और अपने कमरे मे चला गया।
इसके बाद अगली रात राजेश ने सुमित्रा को घोड़ी बना कर जमकर चोदा, और अंत में अपना वीर्य उसके मुंह में छोड़ दिया।
अब राजेश रोज रात को सुमित्रा की अलग अलग आसन में जमकर चूदाई करता।
सुमित्रा भी दिनभर कामदंड के प्रभाव से गर्म रहती और रात में राजेश से जमकर चुदाती। वह राजेश के लंड की गुलाम बन गई थी।
अब वह बन ठन कर रहने लगी। कपड़े भी ऐसे पहनने लगी जिससे उसकी अंग राजेश को दिखे और राजेश उसकी ओर आकर्षित हो। एक दिन किचन में,
सुनीता _भाभी, क्या बात है, आप तो दिन ब दिन जवान और खूबसूरत होती जा रही हो।
सुमित्रा शर्मा गई,,,
सुमित्रा _अरे अब शहर में आने के बाद यहां की औरतों को देखकर मुझ में भी बदलाव आ रहा है।
सुमित्रा _सच में भाभी तुम तो पहले से काफी खूबसूरत हो गई हो, भैया आपको देखेंगे तो खुश हो जाएंगे।
सुमित्रा _मुसकुराते हुवे बोली,चल हठ, अब तू भी मुझे छेड़ने लगी।
एक दिन राजेश और सुमित्रा दरवाज़ा बंद करना भूल गए और दोनों चूदाई में मस्त थे। सुमित्रा की मादक सिसकारी पुरे कमरे मे गूंज रही थी।
इतिफाक से सुनिता की नींद खुल गई। वह किचन की ओर गई ही थी की कुछ आवाजे उसके कानो मे पड़ी जब वह उस आवाज को सुनकर उस ओर गई जिधर से आवाजे आ रही थी। जब वह सुमित्रा के रूम के पास पहुंची तो लगा की आवाज अंदर से आ रही हैं।
वह दरवाजा थोडा धकेली, दरवाज़ा खुल गया अंदर का नजारा देख कर उसके पाव तले जमीन खिसक गई।
राजेश सुमित्रा को घोड़ी बना कर दना दन चोद रहा था।
सुमित्रा बेड पर घोड़ी बनी थी उसकी नजर दरवाजे की तरफ ही थी।
राजेश और सुमित्रा दोनों की नजर सुनिता पर पड़ी।
दोनो की हालत खराब हो गया।
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सुनीता जब सुमित्रा और राजेश को सेक्स करते देखी वह दंग रह गई।
इधर सुमित्रा और राजेश की नजरे जब सुनिता पर गई। दोनो की हालत खराब हो गया। दोनो बिल्कुल नग्न होकर। सेक्स का खेल खेल रहे थे।
राजेश अपनी मां को सामने देखते ही चूदाई बंद कर दिया।
सुमित्रा तेजी से बेड से नीचे उतरी और अपनी साडी उठाकर अपनी शरीर को ढकने लगी।
राजेश और सुमित्रा दोनों का सेक्स का नशा उतर चुका था।
राजेश का लंड ढीला पड़ गया।
इधर सुनिता रूम से बाहर आई और अपनी माथा पकड़कर हाल में रखी सोफे पर जाकर बैठ गई।
सुमित्रा _राजेश, सुनिता ने सब देख लिया, हे भगवान अब मैं किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रही। अब मैं सुनिता के सामने कैसे जाउंगी।
राजेश _मामी, तुम घबराओ मत, सब ठीक हो जायेगा।
सुमित्रा _अब क्या ठीक होगा राजेश, जो नई होना था वो तो हो गया। मै हवस में अंधी होकर अपनी मर्यादा भूल गई।
अब मैं सुनिता का सामना नहीं कर सकूंगी।
हे भगवान, अब मैं क्या करूं?
राजेश _मामी आप चिंता न करें? और हिम्मत से काम ले। आप मां के पास जाए और सब सच बता दें।आगे जो भी होगा देखा जाएगा।
सुमित्रा अपनी साड़ी पहनी और कामदंड लेकर हाल में आ गई।
सुमित्रा _सुनिता, मुझे माफ़ को, मै हवस में अंधी हो गई थी।
सुनीता _भाभी, राजेश का तो समझ में आता है, वह एक जवान लड़का है। उसे तो बस मौका चाहिए। पर तुम तो एक संस्कारी, धार्मिक और पतिव्रता नारी थी, आपसे मुझे ये उम्मीद नहीं थी। मै सपने में भी नही सोच सकती थी, कि आप ऐसी हरकत भी कर सकती है।
सुमित्रा _सुनिता, ये सब इस कामदंड की वजह से है।
सुनीता _क्या, कामदंड?
सुमित्रा _हां सुनिता कामदंड।उस दिन अनुष्ठान संपन्न होने के बाद , बाबा ने मेरी क़मर पे नाभी के नीचे यह कामदंड बांधा था, और कहा था कि इस काम दंड को रात में सोने से पहले निकाल देना पर इस कामदंड को कोई पुरुष ही निकाल सकता है।
अब आपके भैया तो यहां है नही इसलिए यह कामदंड को राजेश से निकलवाती हूं और सुबह स्नान के बाद इसे फिर से पहन लेती हूं।
इस कामदंड ने मेरी अंदर छुपी औरत के जगा दिया और मुझे इतना मजबूर कर दिया कि मैं अपनी मर्यादा भूल गई। अपनी पतिव्रता धर्म भूल गई। और यह पाप करने के लिए मजबूर हो गई।
सुनीता _भाभी आप अपनी गलती पर पर्दा डालने के लिए बाबा कि झूठी सहारा ले रही हैं।
सुमित्रा _अगर मेरी बाते झूठी लग रही है तो ये कामदंड कल सुबह अपनी नाभी के नीचे बांध लेना, फिर मूझसे बात करना। अभी मैं आपसे कुछ बाते बोलूं तो वह आपको झूठ ही लगेगी।
यह बोलकर कामदंड को वही छोड़कर सुमित्रा अपने कमरे में चली गईं।
इधर सुनिता उस कामदंड को अपने हाथों में लेकर देखने लगी जो पंच धातुओं से बना वजनी कामदंड बिलकुल लंड जैसा दिख रहा था।
कामदंड को लेकर सुनिता अपनी कमरे मे चली गई और कामदंड को आलमारी में रख दी।
सुबह वह उठ कर स्नान करने के बाद, भाभी सच बोल रही है या झूठ,यह जानने के लिए उसने कामदंड को अपने नाभि के नीचे बांध ली।
सुनीता सामान्य दिनों की तरह पूजा पाठ करने के बाद किचन में जाकर काम करने लगी।सुमित्रा भी स्नान करने के बाद किचन में आ गईऔर सुनिता की मदद करने लगी।
सुमित्रा _सुनिता, अभी तक मूझसे नाराज हो क्या?
सुनीता कुछ नही बोली।
सुमित्रा _क्या तुमने वह कामदंड पहनी?
सुनीता _हूं।
सुमित्रा _अब तुमको खुद ही पता चल जाएगा कि मैं झूठ बोल रही थी या सच।
इधर राजेश सुबह उठकर अपनी मां और मामी को दूर से ही गुड मॉर्निंग बोलकर जिम चला गया।
सुमित्रा और सुनिता अपने काम में लग गई।
इधर कामदंड भी अपना काम शुरू कर दिया। सुनिता जब चलती, उठती, बैठती, झुकती तो वह सुनिता की बुर पर चोट करता जिससे सुनिता सिहर उठती।
धीरे धीरे वह उत्तेजित होने लगी और उसकी बुर पानी छोड़ने लगी।
शाम तक उसकी हालत बहुत ज्यादा खराब हो गई।
उसकी बुर का पानी बह बह कर सूखने से खुजली करने लगी और वह सुमित्रा से छिप छुपा छुपा कर खुजाने लगी।
एक बार सुमित्रा ने सुनिता को बुर खुजाते देख ली, वह हसने लगी।
सुमित्रा, सुनिता को छेड़ते हुए बोली।
सुनीता, सब ठीक तो है न।सुनीता , शर्मा गई।
सुमित्रा _अब तो आपको पता चल गया होगा कि मैं झूठ नहीं बोल रही थी।
सुनीता _भाभी आप शायद, सही है।
सुमित्रा _चलो, अच्छा huwa जो यह जान गई की मैं कल जो भी बोली सच थी। नही तो मै आपसे मुंह दिखाकर बात करने के लायक नहीं रहती।
इधर राजेश और कालेज से घर आया।
और अपनी मां से जाकर लिपट गया।
सुनीता _सिहर उठी।
राजेश _मां क्या बनाने की तैयारी चल रही है।
सुनीता _अरे बेटा, छोड़ों मुझे जाओ अपने मामी से चिपको।
राजेश _क्यू, आपसे क्यू नही?
सुनीता _क्यू कि मूझसे ज्यादा, आपकी मामी को ज्यादा जरूरत है तुम्हारे प्यार की।
राजेश ने सुनिता को और कस लिया। उसका लंड खड़ा हो गया था जो सुनिता की गाड़ को दबा रहा था।
सुनीता को राजेश का खड़े लंड का एहसास हुआ तो उसकी बुर पानी छोड़ने लगी। क्यू की वह कामदंड के प्रभाव से पहले से ही उत्तेजित थी। उसकी पूरा शरीर कपकपाने लगी।
इधर सुमित्रा मुस्कुरा रही थी।
सुमित्रा _अरे, मुआ सारा प्यार अपनी मां पर ही लुटाएगा की अपनी मामी का भी कुछ ख्याल रखेगा।
सुनीता, को भी राजेश से चिपक कर बहुत अच्छा लग रहा था, उसका मन कर रहा था कि राजेश उससे ऐसा ही चिपका रहे।
सुनीता _भाभी, लगता है मां बेटे की प्यार से आपको जलन हो रही है।
सुमित्रा _अरे मै क्यू जलने लगी? राजेश तुम्हारा बेटा है, तुम्हारा उस पर पहले हक है। मै तो कह रहि थी की मां से जी भर जाय तो अपनी मामी का भी खयाल कर लेना।
राजेश _मामी, आज तो मेरा मन मां को जी भर कर प्यार करने की हो रहा है।
सुमित्रा _तो करो न, कौन तुम्हे रोक रहा है। अगर कहो तो मैं यहां से चली जाती हूं। फिर कर लो जी भर कर प्यार अपनी मां को। वैसे भी लगता है आज तुम्हारी मां को भी बड़ा मन है आज अपने बेटे पर प्यार लुटाने की।
राजेश _नही मामी, मै तो आपके सामने ही प्यार करुंगा ,अपनी मां को।
राजेश का लंड और तन गया जिसका एहसास सुनिता को हुई, वह और ज्यादा उत्तेजित हो गई। राजेश ने अपनी मां को और कसते हुए जैसे ही एक हाथ से अपनी मां की पेट को सहलाया, सुनिता अपने को ना रोक सकी, वह किचन की प्लेट को अपनी मुठ्ठी में भींचते हुए,आह मां, उई ऊं की आवाज़ करते हुए झड़ गई।
इधर सुमित्रा और राजेश दोनो घबरा गए।
राजेश ने अपनी मां को छोड़ दिया,
राजेश _मां क्या हुआ तुम ठीक तो हो न,,
कुछ समय बाद सुनिता होश में आई।
सुनीता _हां, बेटा मैं ठीक हूं अब जा अपनी कमरे में, जाकर पढ़ाई कर।
राजेश _ठीक है मां।
राजेश, चला गया।
सुमित्रा _सुनिता, क्या huwa चीखी क्यू? कही तू झड़,,,
सुनीता _चुप करो भाभी न बिलकुल शर्म हया सब भूल गई हो,,,
सुमित्रा _मुसकुराते हुवे, क्या करू सुनिता बाबा का कामदंड और तुम्हारे बेटे की हरकतों ने मुझे निर्लज बना दिया है?
एक बार झड़ने के बाद भी रात होते तक कामदंड के प्रभाव से सुनिता फिर से बहुत गर्म हो गई थी।
रात में जब सभी भोजन कर लिए। सुमित्रा और सुनिता दोनो किचन में बर्तन धो रही थी।सुमित्रा _सुनिता, रात में सोने से पहले कामदंड को निकालना है तुम्हे याद है न।
सुनीता _हा भाभी।
सुमित्रा _शेखर भाई साब से याद से निकलवा लेना।
सुनीता _भाभी ये क्या कह रही हो?अगर उसने पूछा कि ये क्या है तो मैं क्या जवाब दूंगी, न बाबा मुझे जवाब देते नही बनेगा।
सुमित्रा _तब तो तुमको भी राजेश की मदद लेनी पड़ेगी। एक काम करना,भैया के सो जाने के बाद, तुम राजेश के कमरे में जाकर यह कामदंड निकलवा लेना।
सुनीता _ठीक है भाभी।
जब शेखर सो गया, सुनिता राजेश के कमरे में गई।
राजेश को बताया की भाभी सच बोल रही है कि झूठ यह जानने कामदंड को वह पहन रखी है जिसे तुम्हे निकालनी है।
राजेश ने वह कामदंड सुनिता की क़मर से निकाल दिया।
सुनीता ने कामदंड को पकड़कर सुमित्रा के कमरे मे चली गईं।
सुनीता _भाभी, लो रखो अपना कामदंड।
सुमित्रा _अरे सुनिता, उतरवा ली क्या राजेश से?
सुनीता _हा भाभी।
सुमित्रा _अरे, एक दो दिन और पहन के देखो आज तो पहला दिन है।
सुनीता _न बाबा, अब मेरे अंदर अब और इतनी शक्ति नही की मैं इसे और पहन सकू।
सुमित्रा _देखा न भाभी यह कामदंड का शरीर पर कैसा प्रभाव पड़ता है।
सुनीता शर्मा गई।
सुमित्रा _वैसे कामदंड निकालते समय राजेश ने तुम्हारे साथ कोई छेड़छाड़ तो नही की।सुनीता _नही ,भाभी पर ऐसा क्यो?
सुमित्रा _मेरी क़मर से निकालते वक्त तो बड़ा शरारत करता था ।
सुनीता _अच्छा भाभी अब मैं चलती हूं k
सुनीता अपनी कमरे में चली गईं।
सुनीता के जाने के बाद सुनित्रा, राजेश की कमरे की ओर जाने लगी।
वहा पहुंचने पर,,
राजेश _मामी तुम।
सुमित्रा _क्यू re, कामदंड निकालते वक्त तुमने अपनी मां के साथ कोई शरारत नही की मेरे साथ तो बीना किए मानता नहीं।
राजेश ने, सुमित्रा को अपनी गोद में बिठा लिया, और उसकी चूची मसलते हुए कहा,,राजेश _डर था कही मां को बुरा लग गया तो,,
इधर राजेश ने सुमित्रा की ब्लाउज खोलना शुरु कर दिया।
सुमित्रा _अरे मुआ ये क्या कर रहा है?
राजेश _हाय, आपकी दुदू पीने का मन कर रहा है।
सुमित्रा _अरे, तुम्हारी मां का दुदू पीने का मौका मिला था उसे तो खो दिया,, अब फिर मेरे पीछे पड़ गया।
राजेश _गुस्सा होते हुए बोला,
अगर मेरी हरकते तुम्हे अच्छी नहीं लग रही है तो जाओ,
उसने, सुमित्रा को अपनी गोद से उतारने की कोशिश किया।
पर सुमित्रा गोद से उतरी नही।
सुमित्रा _अले, अले तू तो नाराज़ हो गया। मै तो मजाक कर रही थी।
वैसे तूने मेरी भी आदत खराब कर दिया है जब तक तुमसे अपना दुदू जी भर कर चुसवा न लू मुझे भी नींद नहीं आता। ले चूस ले मेरे दुदू,
सुनीता ने अपनी ब्लाउज निकाल दिया।
राजेश उसकी चुचियों पर टूट पड़ा।
सुमित्रा _अरे बाबा, तू तो ऐसा टूट पड़ा जैसे वर्षो से भूखा हो। आराम से करो मैं कही भागी नहीं जा रही।
राजेश ने जी भर कर सुमित्रा की चूची मसल मसल कर चूसा। फिर वह अपना लोवर नीचे खींच कर नंगा हो गया।
राजेश _ले मेरी जान, जरा मेरी गन्ना चूस।
सुमित्रा ने राजेश का लंड मुंह में भरकर चुसने लगी।
राजेश का लंड और लम्बा मोटा, लोहे की तरह सख्त हो गया।
फिर राजेश ने सुमित्रा की साड़ी खिच कर अलग कर दिया।
उसे बेड किनारे लिटा दिया उसकी पेंटी खिंचकर निकाल दिया।
उसकी पेटी कोट ऊपर उठा कर क़मर तक ले गया। उसकी मस्त फुली हुई गोरी चिकनी बुर को मुंह में भरकर चुसने लगा।
और जब सुमित्रा अत्यंत काम विहिल हो गई वह बोली,,
सुमित्रा _, बेटा अब बस कर, अब मूझसे बर्दास्त नही हो रहा। डाल दे अपने सांप को मेरे बिल में। अपने कपकपाते हुवेऑटो से बोली।
राजेश ने अपना साप को हाथ से पकड़ा और उसे बिल का रास्ता दिखाया।
बिल मिलते ही राजेश ने एक जोर का धक्का मारा, साप सरसराता हुवा, बिल के अंदर चला गया।
सुमित्रा सिसक उठी।
आह, मांआई,,,
अब राजेश ने एक और धक्का मारा तो साप जड़ तक बिल में जा चुका था
राजेश कुछ देर अपनी मामी की खूबसूरत जिस्म पर से चिपक कर उसकी ओंठो को पीने लगा।
कुछ देर ओंठो का रस चुसने के बाद वह शुरू कर दिया खेल जो दोनो को स्वर्ग में ले गया।
राजेश ने भचा भच सुमित्रा को चोदना शुरु कर दिया।
सुमित्रा के मुंह से आह, मां ई, ऊ,, आह मैया रि,, ई,, जैसी मादक आवाज निकलते लगी कमरे में उसकी चुड़िओ की खनकने खन खन और लंड का बुर में आने जाने से, फ्च फाच, गच गाच की मधुर संगीत कमरे में गूंजने लगे।इधर सुनिता अपने कमरे मे आकर सोने की कोशिश करने लगी, पर उसी बुर की पानी जो निकल निकल कर सुख गई थी, उसके कारण उसकी बुर पे खुजली बड़ गई थी। वह चादर के अंदर से बुर में अपनी हाथ ले जाकर खुजाने लगी। वह जितना खुजाती, बुर की खुजली और बड़ जाति, धीरे धीरे वह अपनी उंगली से भगनाश को छेड़ने लगी जिससे वह और भी बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गई।उसे कल का सीन याद आ गई , कैसे राजेश अपनी मामी को पलंग पर घोड़ी बनाकार चोद रहा था। उस सीन को याद कर वह और बेचैन हो गई। उससे रहा न गया क्यू की उसके शरीर के अंदर की हवस जग चुका था। अब वो क्या कर रही है उसे खुद होश नही रहा।
वह सीधे राजेश के कमरे की ओर चली गई।
राजेश के कमरे की दरवाज़ा अंदर से बंद था।
अंदर राजेश बेड में पीठ के बल लेटा था और सुमित्रा उसके लंड पर उछल उछल कर chud रही थी।
दोनो जन्नत की सैर कर रहें थे। संभोग की असीम आनन्द को प्राप्त कर रहे थे।
कमरे में खन खन गच गच फच fach, आह उई मां आह उन,की आवाज गूंज रही थी।
तभी किसी की दरवाज़ा खटखटाने की आवाज दोनो के कानो पे पड़ी ।
दोनो चौंक गए। दोनो चूदाई बंद कर दिए।
सुमित्रा _राजेश, कोई दरवाज़ा खटखटा रहा है।
हे भगवान हम फिर फस गए।
राजेश _मामी आप घबराव मत, आप सारे कपड़े बेड के नीचे डाल दो और बाथरूम में चली जाओ मैं देखता हूं।
राजेश ने अपना लोवर और टी शर्ट पहना फिर दरवाज़ा खोला।
दरवाज़ा खुलते ही,,
राजेश _मां आप, इस वक्त।
राजेश _माफ करना बेटा, लगता है तुम सो गए थे। पर क्या करू पीठ दर्द के कारण मुझे नींद नहीं आ रही। तुम्हारे पापा तो नींद में खर्राटे भर रहा है मैं उसे जगाना उचित नहीं समझी।
अगर तुम कहो तो मैं वापस चली जाती हूं।
राजेश _अरे नही मां ये कैसी बातें कर रही है आप। आपके लिऐ तो मेरे कमरे की दरवाज़ा हर वक्त खुला रहेगा। आइए अंदर।
सुनीता बेड पर जाकर बैठ गई।
बेटा मेरे पीठ पर बड़ा दर्द हो रहा है मैं बॉम लेके आई हू जरा अच्छे से मालिश कर दो।
राजेश _ठीक है मां,दो बॉम मुझे लगा दू।
सुमित्रा ने राजेश को बॉम दे दिया।
राजेश _मां अपनी पीठ दिखाओ मै बॉम लगा देता हूं।
सुनीता _बेटा पहले दरवाज़ा तो बंद करदे, कोई आ जाएगा तो गलत समझेगा।
राजेश _ठीक है मां।
राजेश ने दरवाज़ा बंद कर दिया।
सुनीता ने अपना पीठ राजेश की ओर करते हुए कहा लो बेटे बॉम लगा कर अच्छे से मालिश कर दो।
राजेश! ने बॉम लगाना चाहा पर ब्लाउज सामने आ गया।
सुनीता _अरे बेटा, ब्लाऊज के कारण बॉम ठीक से लगा नही पाएगा, मै एक काम करती हूं, ब्लाऊज निकाल देती हूं, फिर अच्छे से लगा देना।
सुमित्रा अपनी ब्लाउज निकाल दी, ब्रा नही पहनी थी। ब्लाऊज निकलते ही उसकी सुडौल और बड़ी बड़ी चूचियां देखकर राजेश का लंड फिर से तनकर खड़ा हो गया।
सुनीता _अरे क्या देख रहा है रि पहली बार देख रहा है क्या?
राजेश _अरे नही मां आपके दुदू है ही इतने मस्त की इससे नजर ही नही हटती।
राजेश से रहा न गया वह चुचियों पर टूट पड़ा।
सुनीता _अरे बदमाश तू फिर शुरू हो गया।
राजेश ने सुनिता की मस्त चूचियों को अपने हाथों से मसल मसल कर पीने लगा।
सुनीता सिसकने लगी। गर्म तो वो पहले से ही थी।
उसकी बुर की पानी की धार और बड़ गया।
असल में सुनिता, राजेश से चुदने ही आई थी वह राजेश को सीधा कह नही सकती थी की बेटा मुझे चोद कर ठंडा करो मुझे चुदने का बड़ा मन है, इसलिए वह पीठ दर्द का बहाना बनाई।
राजेश सुनिता की चूची को जी भर कर मसल मसल कर चूसा। इधर सुनिता ने अपना हाथ राजेश के लोवर के अंदर ले गई। और उसके खड़े लंड पर हाथ चलाने लगी।
तभी राजेश अपना लोवर नीचे कर नंगा हो गया। और अपनी मां की आंखों में इशारा किया।
सुनीता समझ गई वह राजेश के लंड के नीचे बैठ कर, राजेश की लंड चुसने लगी।
राजेश तो जैसे जन्नत में पहुंच गया।
तभी सुनीता की पैर सुमित्रा की साड़ी पर पड़ी। साड़ी का कुछ हिस्सा बेड के निचे से बाहर आ गया था।
सुनीता का ध्यान उस और गई।
उसने उसे पकड़ कर देखा।
सुनीता _ये तो साड़ी है, किसकी साड़ी है? राजेश, बेटा ये किसकी साड़ी है।
राजेश _मां अब तुमसे क्या छुपाना, ये मामी की साड़ी है।
उसे रात में नींद नहीं आ रही थी तो वह मूझसे चुदने मेरे कमरे मे आई। जब तुम दरवाज़ा खटखाई तो वह मूझसे chud रही थी।
सुनीता _अच्छा तो ये बात है, कहा छिपी है।
सुमित्रा _सुनिता, मै यहां हूं।
सुनीता _भाभी, आज तो आपने कामदंड नही पहनी फिर भी चुदने आ गई।
सुमित्रा _क्या करू सुनिता, राजेश का लंड लेने की आदत हो गई है। बीना chude नींद नहीं आ रही थी।
तो यहां चुदने आ गई।
पर तुम यहां कैसे?
सुनीता _तुम्हारे कामदंड ने मेरी भी हालत खराब कर दी, मुझे यहां आने पर विवश कर दिया। तुम सच कह रही थी। काम दंड के ने मेरी बुर पर ऐसा प्रहार किया की, जब तक मेरी भुख मिटेगी नही मुझे चैन नहीं आएगी।
राजेश के पापा तो रोज थक कर सो जाता है उससे कुछ होता नहीं। इसलिए मजबूर होकर अपने ही बेटे के पास बहाने बनाकार आने मजबूर हो गई।
सुमित्रा _मै समझ गई सुनिता, मै भी एक औरत हूं, जब हवश की आग सताती है तो सब रिश्ते नाते जलकर भस्म हो जाती हैं।दोनो की समस्या एक ही है, और उसका समाधान है राजेश।
बेटा, अब तुमको ही हमारे इस शरीर के भुख को शांत करना पड़ेगा।
राजेश _मै तो आप दोनो की सेवा करने लिए सदैव तैयार हूं।
सुमित्रा भी नीचे बैठ गई और राजेश की लंड को मुंह में भरकर चुसने।
सुनीता राजेश की अंडकोष चाटने लगी।
सुनीता और सुमित्रा बारी बारी से राजेश का लंड चुसने लगी, फिर सुमित्रा सुनिता के पीछे गई और सुनिता को बुर चाटना शुरू कर दी।
सुनीता चौकते एवम सिसकते
हुए बोली _भाभी ये क्या कर रही है आप?
सुमित्रा _अरे सुनिता, असली मजा तो chut चटवाने से मिलता है।
और वह ग्लेप ग्लाप अपनी जीव से सुनिता की chut चाटने लगी।
इधर सुनिता सिसक् भी रही थी और राजेश का लंड भी चूस रही थी।
तीनो अपने बचे खुचे कपड़े उतार कर नंगे हो गए।
सुनीता _आह मां, उन , भाभी अब बस करो अब मूझसे बर्दास्त नही हो रहा।
सुमित्रा चूसना बंद कर दी।
सुमित्रा _राजेश लो बेटा, डाल दे अपना मूसल अपनी मां की बुर में बुझा दे इसकी प्यास।
राजेश अपनी मां के मुंह से लंड निकाल कर सुनिता के पीछे चला गया सुमित्राने राजेश कालंड पकड़ा और लंड सुनिता के बुर के छेद पर सेट कर दिया। राजेश ने बुर में लंड डालकर भचा भच चोदना शुरू कर दिया।
पूरा कमरा सुनिता की मादक सिसकारी और चीख से गूंजने लगी। इधर सुमित्रा नीचे बैठ कर एक उंगली से अपनी बुर रगड़ रही थी और अपनी जीव से सुनिता की बुर की पानी जो राजेश के अंडकोष से होकर नीचे टपक रहा था, उसे चांट रही थी।
इधर राजेश सुनिता को घोड़ी बना कर, तेज गति से भच भच चोद रहा था।
सुनीता और राजेश दोनो जन्नत में पहुंच गए थे। संभोग के असीम आनद को प्राप्त कर रहे थे। राजेश जोश में आकर और जोर जोर से गच गच चोदना शुरू कर दिया।
सुनिता ज्यादा देर तक अपने को रोक न सकी और और जोर से चीखते हुए झड़ने लगी।
आह मां मै गई re,, आह माई,,,
राजेश ने बुर ठोकना बंद कर दिया और वह भी सुस्ताने लगा।
फिर राजेश न सुनीता के बुर से लंड निकाल लिया और सुमित्रा को बेड के किनारे लिटा दिया। और कुछ देर उसकी बुर चाटने के बाद अपना लंड बुर में गच से पेल दिया, उसकी दोनो टांगें अपनी कंधे पे रख कर दना दन चोदना शुरू कर दिया।
लंड का टोपा बच्चेदानी को ठोक रहा था। पूरा कमरा सुमित्रा की चीख और कामुक सिसकारी से गूंजने लगा।
इधर सुनिता होश में आई, राजेश ने अपने पास बुलाया फिर अपना लंड सुमित्रा के बुर से बाहर निकाल दिया, सुनिता ने राजेश का लंड अपनी मुंह में भरकर ग्लप ग्लैप चुसने लगी। फिर लंड को अपने हाथों से सुमित्रा के बुर के छेद पर सेट करने को थी की राजेश ने कहा
मां लंड को गाड़ के छेद में रखो मैं मामी की गाड़ मारूंगा।
सुमित्रा _ बेटा, क्या कह रहा है गाड़ भी कोई मारने की चीज है।
राजेश _मामी शायद आपको पता नहीं आज कल की लड़किया गाड़ मराना पसंद करती हैं। एक बार आप भू मरा कर देखो आपको भी बहुत मज़ा आयेगा।
सुमित्रा _न बाबा मुझे नही करना ऐसा गंदा काम।
सुनीता _बेटा तुम्हारा इतना मोटा और बड़ा है गाड़ की छेद इतनी सकरी, कैसे जा पाएगा इसके अंदर, और कौन ले पाएगा अपनी गाड़ में इतना बड़ा लंड।
राजेश ने बिना सोचे जोश में कह दिया, प्रिया दी तो लेती है।
सुनीता _बेटा, तू ये क्या कह रहा है।
राजेश हड़बड़ा गया ओ नो ये मेरे मुंह से क्या निकल गया।
सुनीता _क्या तूने प्रिया के साथ, भी,,
सुमित्रा _सुनिता, ये लड़का तो पूरा बिगड़ गया है, अपनी बहन का भी ले डाला।
सुनीता _अब चुप चाप खड़ा क्यू है बोलता क्यू नही।
राजेश _ओ मां, मै उस दिन प्रिया दी के घर रुका था न तो हम दोनो बहक गए।
सुनीता _तूने प्रिया के साथ जबरदस्ती तो नही किया?
राजेश _नही मां, जो भी किया, उसकी सहमति से किया। दीदी खुद होकर अपनी गाड़ मरवाई।
बता रही थी की उसे गाड़ मरवाने की आदत है, पिंकी के होने के बाद फिर से गर्भ ने ठहर जाए करके जीजू प्रिया दी के गाड़ मारने लगे।
सुनीता _हूं दिखने में तो बडी भोली लगती है प्रिया,,
सुमित्रा _अरे तुम और मैं भी तो भोली थी पड़ गए न इस मुआ के चक्कर में।
प्रिया _वह भी बेचारी इसके चक्कर में आ गई होगी।
अब बस करो अपनी राम कहानी मेरी बुर में आग लगी है उसे बुझा।
राजेश ने फिर से सुमित्रा के बुर में लंड फिर गच से ठेल दिया। और जोर जोर ठोकना शुरू कर दिया।
सुमित्रा तो स्वर्ग में पहुंच गई।
सुमित्रा _आज, चोद बेटा और जोर से चोद फाड़ दे अपनी मामी की chut निगोडी दिनभर बहुत परेशान करती है।
राजेश और जोर जोर से ठोकने लगा।
सुमित्रा _आह, माई,, उन,,, आह गई रि उन मां,,
जोर से चीखते हुए झड़ने लगी।
राजेश ने चोदना बंद कर अपनी मां की ओंठ चूसना शुरू कर एक हाथ से उसकी योनी सहलाने लगा। जिससे सुनिता फिर गर्म हो गई।
राजेश बेड पर जाकर पीठ के बल लेट गया।
उसका लंड हवा में लहरा रहा था। वह अपने लंड को एक हाथ से सहलाते हुए दूसरे हाथ से अपनी मां को इशारा कर ऊपर बुलाया।
सुनीता बेड के ऊपर चढ़ गई और लंड के सिध में दोनो पैर फ़ैला कर खड़ी हो गई। फिर नीचे बैठी लंड को अपने हाथ से पकड़ कर अपने बुर की छेद में रखकर बैठ गई।
लंड बिना किसी अवरोध के बुर में समाहित हो गया।
सुनीता लंड पर पहले धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगी।
जब उसको मजा आने लगी तोअपना गति बड़ाने लगी। राजेश ने अपनी मां की चूची मुंह में भरकर चुसने लगा।
फिर वह अपनी मां की क़मर को अपने हाथों से पकड़ कर, अपनी क़मर उठा उठा कर सुनिता का बुर में लंड अंदर लेने में सहयोग करने लगा।
दोनो को फिर से बहुत मजा आने लगा।
सुनीता अब जोर जोर से लंड पर उछल उछल कर चुदने लगी।
राजेश भीं क़मर को पकड़कर अपनी लंड में पटक पटक कर सुनिता को चोदने लगा।
दोनो गिर से जन्नत में पहुंच गए।
सुनीता के मुंह से लगातार कामुक सिसकारी और चीख निकलने लगी। इधर सुमित्रा दोनो की चूदाई देखकर फिर गर्म हो गई थी, वह अपनी बुर को अपनी हाथो से सहला रही थी, उंगली अंदर बाहर करने लगी।
इधर सुनिता उछल उछल कर लंड को बुर में ले रही थीं।
पर ज्यादा देर तक अपने को रोक न पाई और फिर झड़ने लगी। राजेश ने सुनिता को अपनी सीने से लगा कर उसकी पीठ सहलाने लगा।
कुछ देर बाद सुनिता एक और लुड़क गई। वह बुरी तरह थक चुकी थी।
इधर राजेश का लंड अभी भी, खड़ा था। उसने अपनी मामी को ऊपर आने का इशारा किया।
सुमित्रा ऊपर आई और राजेश की ओर पीठ कर उसकी लंड को अपने बुर में सेट कर बैठ गई।
लंड एक बार फिर सुमित्रा के बुर में समाहित हो गया।
अब राजेश ने सुमित्रा की क़मर पकड़कर अपने लंड उसकी बुर में अंदर बाहर करना शुरू किया।
सुमित्रा भी अपनी क़मर को आगे पीछे लंड बुर में लेने लगी।
धीरे धीरे राजेश ने अपना गति बढ़ाया।
सुमिता फिर से स्वर्ग की सैर करने लगी वह भी अब अपने कूल्हे को राजेश के लंड पर पटक पटक कर चुदने लगी।
राजेश और सुमित्रा के मुंह से आह, ऊ,, उई मां,, आई,, आह,
राजेश आह, बहुत मजा आ रहा मेरी जान आह, ऊ और उछल, ले ले पूरा आह क्या मस्त मॉल है तू, आह। मां को चोदने के बाद सबसे ज्यादा मज़ा तुमको चोदने में आता है।
सुमित्रा _मै तो तेरी गुलाम हो गई re कितना मजा देता है तू, पूरा जन्नत की सैर करा देता है,, आह मां आई उन,,,
कुछ देर इसी पोजीशन में ठोकने के बाद राजेश उठ गया और सुमित्रा बेड पर घोड़ी बन गई।
राजेश अपना लंड बुर में डाल कर गच गच चोदने लगा।
सुमित्रा _चोद बेटा और जोर से चोद आह माई,,,
फाड़ दे मेरी chut आह,, डाल दे अपना बीज मेरी बुर में, अगर मर्द है तू तो बना दे अपने बच्चे की मां। मिटा दे मुझ पर बाज का लगा कलंक,,,,
सुनीता उठ कर बैठ गई।
सुनीता _चोद बेटा और चोद अपनी मामी को अगर तूने मेरी दूध पिया है तो छोड़ दे अपना बीज, भाभी की कोख में, बना दे अपने बच्चे की मां।
राजेश अपनी मां की बात सुनकर और जोश में आ गया और सुमित्रा की बुर तेज गति से चोदने लगा।
राजेश _आह मामी, ले chud मेरे से, ले, एक और ले ले,, आह, बन जा मेरे बच्चे की मां,, आह मां मै गया।
सुनीता राजेश की पीठ सहलाने लगा।
इधर राजेश ने अपना सारा वीर्य सुमित्रा के कोख में भर दिया गर्म गर्म वीर्य को अपनी गर्भ में जाने का एहसास पाकर सुमिता फिर से एक बार झड़ गई।
तीनो बुरी तरह थक चुके थे।
राजेश बेड पर लेट गया और सुनीत, सुमित्रा दोनो उसके आजू बाजू उसके कंधे पर सिर रख कर सो गए।
अचानक सुनिता की नींद खुल जाती है वह घड़ी की ओर देखि तो सुबह के 4बज चूके थे।
सुनीता _भाभी उठो सुबह के चार बज गाए।
सुमित्रा_सोने दे न सुनिता।
सुनीता _भाभी चलो अपने कमरे में वहा जाकर सो जाना, यहां रुकना ठीक नही, चलो उठो।
सुनीता ने सुमित्रा को जबरदस्ती उठाया।
राजेश की नींद भी खुल गई।
सुनीता _अरे बेटा तू भी उठ गया, तू सो जा बेटा,,
इधर सुमित्रा और सुनिता दोनो अपनी अपनी कपडे पहन कर अपने कमरे में चली गई।
कुछ दिन बाद प्रिया ने सुनिता को फ़ोन किया।
प्रिया _बुआ, चाची को ले आना उसका कुछ चेक अप करना है।
सुनीता _ठीक है प्रिया हम 12, बजे पहुंच जाएंगे।
सुनीता और सुमित्रा दोनों आटो से हॉस्पिटल पहुंच गए।
प्रिया के केबिन में जाकर उससे मिली।
प्रिया _चाची मैने आपको कहा था की आपका मासिक धर्म जैसे ही सुरू हो उसके 3दिन बाद हॉस्पिटल आना तुम्हारी जांच होगी और दवाइया लेनी होगी। पर इतने दिन हो गए आपने मासिक धर्म के बारे में मुझे जानकारी नहीं दी।
सुनीता _हा, भाभी, आपने बताया नही।
सुमित्रा _क्या बताऊंगी सुनिता, मेरी तो मासिक धर्म इस माह समय पर आया ही नहीं है एक सप्ताह हो गए।
प्रिया _क्या? पर पहले तो आपका मासिक पीरियड समय पर आता था तो इस बार लेट कैसे हो गया।
सुमित्रा _पता नही बेटी इस बार कैसे लेट हो गया।
ठीक है चलो मेरे साथ कुछ टेस्ट करते है।
प्रिया ने सुमित्रा की गर्भाशय की जांच किया वह चौंक गई, यह जानकर की उसकी चाची पेट से है।
जांच कर लेने के बाद,
सुनीता _बेटी, सब ठीक तो हैं न।
प्रिया _बुआ, चाची पेट से है।
सुमित्रा और सुनिता दोनो चौंक गई।
सुमित्रा और सुनिता दोनो एक दूसरे का मुंह देखने लगे।
प्रिया _चाची, चाचा जी तो गांव में है फिर ये चमत्कार हुआ कैसे?
सुनीता _अब तुमसे क्या छुपाना बेटी ये सब उस बाबा और राजेश का किया धरा है।
सुमित्रा और सुनिता ने सारी बातें प्रिया को बता दिया।
प्रिया हसने लगी,,,
लो अब आईवीएफ की जरूरत ही नहीं पड़ी। राजेश ने तो कमाल कर दिया।
गजब की मर्दानगी है उसमे।
सुनीता _हा हा जानते है तुमने भी देखि है उसकी मर्दानगी।
प्रिया चौकते हुवे,,
क्या, बुवा ये आप कह रही हो,,
सुमित्रा _मुआ ने जोश में सब बक दिया।
प्रिया _राजेश से मुझे ये उम्मीद नहीं थी। मिलने दो मुझे, फिर बताती हूं,,
सुमित्रा _अरे अब छोड़ों भी huwa सो huwa अब तो तीनो ही राजेश की रखैल बन गए हैं,,, अब एक दुसरे से क्या छिपानाऔर घबराना?
तीनो हसने लगे।
सुनीता _पर प्रिया हम भैय्या से क्या कहेंगे?
प्रिया _अरे बुवा हम चाचा जी से कह देंगे की आईवीएफ द्वारा चाची गर्भ धारण की, उसके वीर्य का सैंपल लेने कल बुला लेते है फिर बाद मे उसे कह देंगे की आपका वीर्य में शुक्राणु की गतिशीलता कम थी इसलिए राजेश की सुक्राणु के इस्तमाल किया गया।
तीनो फिर हसने लगे,,
bahot hi mast updateसुनीता जब सुमित्रा और राजेश को सेक्स करते देखी वह दंग रह गई।
इधर सुमित्रा और राजेश की नजरे जब सुनिता पर गई। दोनो की हालत खराब हो गया। दोनो बिल्कुल नग्न होकर। सेक्स का खेल खेल रहे थे।
राजेश अपनी मां को सामने देखते ही चूदाई बंद कर दिया।
सुमित्रा तेजी से बेड से नीचे उतरी और अपनी साडी उठाकर अपनी शरीर को ढकने लगी।
राजेश और सुमित्रा दोनों का सेक्स का नशा उतर चुका था।
राजेश का लंड ढीला पड़ गया।
इधर सुनिता रूम से बाहर आई और अपनी माथा पकड़कर हाल में रखी सोफे पर जाकर बैठ गई।
सुमित्रा _राजेश, सुनिता ने सब देख लिया, हे भगवान अब मैं किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रही। अब मैं सुनिता के सामने कैसे जाउंगी।
राजेश _मामी, तुम घबराओ मत, सब ठीक हो जायेगा।
सुमित्रा _अब क्या ठीक होगा राजेश, जो नई होना था वो तो हो गया। मै हवस में अंधी होकर अपनी मर्यादा भूल गई।
अब मैं सुनिता का सामना नहीं कर सकूंगी।
हे भगवान, अब मैं क्या करूं?
राजेश _मामी आप चिंता न करें? और हिम्मत से काम ले। आप मां के पास जाए और सब सच बता दें।आगे जो भी होगा देखा जाएगा।
सुमित्रा अपनी साड़ी पहनी और कामदंड लेकर हाल में आ गई।
सुमित्रा _सुनिता, मुझे माफ़ को, मै हवस में अंधी हो गई थी।
सुनीता _भाभी, राजेश का तो समझ में आता है, वह एक जवान लड़का है। उसे तो बस मौका चाहिए। पर तुम तो एक संस्कारी, धार्मिक और पतिव्रता नारी थी, आपसे मुझे ये उम्मीद नहीं थी। मै सपने में भी नही सोच सकती थी, कि आप ऐसी हरकत भी कर सकती है।
सुमित्रा _सुनिता, ये सब इस कामदंड की वजह से है।
सुनीता _क्या, कामदंड?
सुमित्रा _हां सुनिता कामदंड।उस दिन अनुष्ठान संपन्न होने के बाद , बाबा ने मेरी क़मर पे नाभी के नीचे यह कामदंड बांधा था, और कहा था कि इस काम दंड को रात में सोने से पहले निकाल देना पर इस कामदंड को कोई पुरुष ही निकाल सकता है।
अब आपके भैया तो यहां है नही इसलिए यह कामदंड को राजेश से निकलवाती हूं और सुबह स्नान के बाद इसे फिर से पहन लेती हूं।
इस कामदंड ने मेरी अंदर छुपी औरत के जगा दिया और मुझे इतना मजबूर कर दिया कि मैं अपनी मर्यादा भूल गई। अपनी पतिव्रता धर्म भूल गई। और यह पाप करने के लिए मजबूर हो गई।
सुनीता _भाभी आप अपनी गलती पर पर्दा डालने के लिए बाबा कि झूठी सहारा ले रही हैं।
सुमित्रा _अगर मेरी बाते झूठी लग रही है तो ये कामदंड कल सुबह अपनी नाभी के नीचे बांध लेना, फिर मूझसे बात करना। अभी मैं आपसे कुछ बाते बोलूं तो वह आपको झूठ ही लगेगी।
यह बोलकर कामदंड को वही छोड़कर सुमित्रा अपने कमरे में चली गईं।
इधर सुनिता उस कामदंड को अपने हाथों में लेकर देखने लगी जो पंच धातुओं से बना वजनी कामदंड बिलकुल लंड जैसा दिख रहा था।
कामदंड को लेकर सुनिता अपनी कमरे मे चली गई और कामदंड को आलमारी में रख दी।
सुबह वह उठ कर स्नान करने के बाद, भाभी सच बोल रही है या झूठ,यह जानने के लिए उसने कामदंड को अपने नाभि के नीचे बांध ली।
सुनीता सामान्य दिनों की तरह पूजा पाठ करने के बाद किचन में जाकर काम करने लगी।सुमित्रा भी स्नान करने के बाद किचन में आ गईऔर सुनिता की मदद करने लगी।
सुमित्रा _सुनिता, अभी तक मूझसे नाराज हो क्या?
सुनीता कुछ नही बोली।
सुमित्रा _क्या तुमने वह कामदंड पहनी?
सुनीता _हूं।
सुमित्रा _अब तुमको खुद ही पता चल जाएगा कि मैं झूठ बोल रही थी या सच।
इधर राजेश सुबह उठकर अपनी मां और मामी को दूर से ही गुड मॉर्निंग बोलकर जिम चला गया।
सुमित्रा और सुनिता अपने काम में लग गई।
इधर कामदंड भी अपना काम शुरू कर दिया। सुनिता जब चलती, उठती, बैठती, झुकती तो वह सुनिता की बुर पर चोट करता जिससे सुनिता सिहर उठती।
धीरे धीरे वह उत्तेजित होने लगी और उसकी बुर पानी छोड़ने लगी।
शाम तक उसकी हालत बहुत ज्यादा खराब हो गई।
उसकी बुर का पानी बह बह कर सूखने से खुजली करने लगी और वह सुमित्रा से छिप छुपा छुपा कर खुजाने लगी।
एक बार सुमित्रा ने सुनिता को बुर खुजाते देख ली, वह हसने लगी।
सुमित्रा, सुनिता को छेड़ते हुए बोली।
सुनीता, सब ठीक तो है न।सुनीता , शर्मा गई।
सुमित्रा _अब तो आपको पता चल गया होगा कि मैं झूठ नहीं बोल रही थी।
सुनीता _भाभी आप शायद, सही है।
सुमित्रा _चलो, अच्छा huwa जो यह जान गई की मैं कल जो भी बोली सच थी। नही तो मै आपसे मुंह दिखाकर बात करने के लायक नहीं रहती।
इधर राजेश और कालेज से घर आया।
और अपनी मां से जाकर लिपट गया।
सुनीता _सिहर उठी।
राजेश _मां क्या बनाने की तैयारी चल रही है।
सुनीता _अरे बेटा, छोड़ों मुझे जाओ अपने मामी से चिपको।
राजेश _क्यू, आपसे क्यू नही?
सुनीता _क्यू कि मूझसे ज्यादा, आपकी मामी को ज्यादा जरूरत है तुम्हारे प्यार की।
राजेश ने सुनिता को और कस लिया। उसका लंड खड़ा हो गया था जो सुनिता की गाड़ को दबा रहा था।
सुनीता को राजेश का खड़े लंड का एहसास हुआ तो उसकी बुर पानी छोड़ने लगी। क्यू की वह कामदंड के प्रभाव से पहले से ही उत्तेजित थी। उसकी पूरा शरीर कपकपाने लगी।
इधर सुमित्रा मुस्कुरा रही थी।
सुमित्रा _अरे, मुआ सारा प्यार अपनी मां पर ही लुटाएगा की अपनी मामी का भी कुछ ख्याल रखेगा।
सुनीता, को भी राजेश से चिपक कर बहुत अच्छा लग रहा था, उसका मन कर रहा था कि राजेश उससे ऐसा ही चिपका रहे।
सुनीता _भाभी, लगता है मां बेटे की प्यार से आपको जलन हो रही है।
सुमित्रा _अरे मै क्यू जलने लगी? राजेश तुम्हारा बेटा है, तुम्हारा उस पर पहले हक है। मै तो कह रहि थी की मां से जी भर जाय तो अपनी मामी का भी खयाल कर लेना।
राजेश _मामी, आज तो मेरा मन मां को जी भर कर प्यार करने की हो रहा है।
सुमित्रा _तो करो न, कौन तुम्हे रोक रहा है। अगर कहो तो मैं यहां से चली जाती हूं। फिर कर लो जी भर कर प्यार अपनी मां को। वैसे भी लगता है आज तुम्हारी मां को भी बड़ा मन है आज अपने बेटे पर प्यार लुटाने की।
राजेश _नही मामी, मै तो आपके सामने ही प्यार करुंगा ,अपनी मां को।
राजेश का लंड और तन गया जिसका एहसास सुनिता को हुई, वह और ज्यादा उत्तेजित हो गई। राजेश ने अपनी मां को और कसते हुए जैसे ही एक हाथ से अपनी मां की पेट को सहलाया, सुनिता अपने को ना रोक सकी, वह किचन की प्लेट को अपनी मुठ्ठी में भींचते हुए,आह मां, उई ऊं की आवाज़ करते हुए झड़ गई।
इधर सुमित्रा और राजेश दोनो घबरा गए।
राजेश ने अपनी मां को छोड़ दिया,
राजेश _मां क्या हुआ तुम ठीक तो हो न,,
कुछ समय बाद सुनिता होश में आई।
सुनीता _हां, बेटा मैं ठीक हूं अब जा अपनी कमरे में, जाकर पढ़ाई कर।
राजेश _ठीक है मां।
राजेश, चला गया।
सुमित्रा _सुनिता, क्या huwa चीखी क्यू? कही तू झड़,,,
सुनीता _चुप करो भाभी न बिलकुल शर्म हया सब भूल गई हो,,,
सुमित्रा _मुसकुराते हुवे, क्या करू सुनिता बाबा का कामदंड और तुम्हारे बेटे की हरकतों ने मुझे निर्लज बना दिया है?
एक बार झड़ने के बाद भी रात होते तक कामदंड के प्रभाव से सुनिता फिर से बहुत गर्म हो गई थी।
रात में जब सभी भोजन कर लिए। सुमित्रा और सुनिता दोनो किचन में बर्तन धो रही थी।सुमित्रा _सुनिता, रात में सोने से पहले कामदंड को निकालना है तुम्हे याद है न।
सुनीता _हा भाभी।
सुमित्रा _शेखर भाई साब से याद से निकलवा लेना।
सुनीता _भाभी ये क्या कह रही हो?अगर उसने पूछा कि ये क्या है तो मैं क्या जवाब दूंगी, न बाबा मुझे जवाब देते नही बनेगा।
सुमित्रा _तब तो तुमको भी राजेश की मदद लेनी पड़ेगी। एक काम करना,भैया के सो जाने के बाद, तुम राजेश के कमरे में जाकर यह कामदंड निकलवा लेना।
सुनीता _ठीक है भाभी।
जब शेखर सो गया, सुनिता राजेश के कमरे में गई।
राजेश को बताया की भाभी सच बोल रही है कि झूठ यह जानने कामदंड को वह पहन रखी है जिसे तुम्हे निकालनी है।
राजेश ने वह कामदंड सुनिता की क़मर से निकाल दिया।
सुनीता ने कामदंड को पकड़कर सुमित्रा के कमरे मे चली गईं।
सुनीता _भाभी, लो रखो अपना कामदंड।
सुमित्रा _अरे सुनिता, उतरवा ली क्या राजेश से?
सुनीता _हा भाभी।
सुमित्रा _अरे, एक दो दिन और पहन के देखो आज तो पहला दिन है।
सुनीता _न बाबा, अब मेरे अंदर अब और इतनी शक्ति नही की मैं इसे और पहन सकू।
सुमित्रा _देखा न भाभी यह कामदंड का शरीर पर कैसा प्रभाव पड़ता है।
सुनीता शर्मा गई।
सुमित्रा _वैसे कामदंड निकालते समय राजेश ने तुम्हारे साथ कोई छेड़छाड़ तो नही की।सुनीता _नही ,भाभी पर ऐसा क्यो?
सुमित्रा _मेरी क़मर से निकालते वक्त तो बड़ा शरारत करता था ।
सुनीता _अच्छा भाभी अब मैं चलती हूं k
सुनीता अपनी कमरे में चली गईं।
सुनीता के जाने के बाद सुनित्रा, राजेश की कमरे की ओर जाने लगी।
वहा पहुंचने पर,,
राजेश _मामी तुम।
सुमित्रा _क्यू re, कामदंड निकालते वक्त तुमने अपनी मां के साथ कोई शरारत नही की मेरे साथ तो बीना किए मानता नहीं।
राजेश ने, सुमित्रा को अपनी गोद में बिठा लिया, और उसकी चूची मसलते हुए कहा,,राजेश _डर था कही मां को बुरा लग गया तो,,
इधर राजेश ने सुमित्रा की ब्लाउज खोलना शुरु कर दिया।
सुमित्रा _अरे मुआ ये क्या कर रहा है?
राजेश _हाय, आपकी दुदू पीने का मन कर रहा है।
सुमित्रा _अरे, तुम्हारी मां का दुदू पीने का मौका मिला था उसे तो खो दिया,, अब फिर मेरे पीछे पड़ गया।
राजेश _गुस्सा होते हुए बोला,
अगर मेरी हरकते तुम्हे अच्छी नहीं लग रही है तो जाओ,
उसने, सुमित्रा को अपनी गोद से उतारने की कोशिश किया।
पर सुमित्रा गोद से उतरी नही।
सुमित्रा _अले, अले तू तो नाराज़ हो गया। मै तो मजाक कर रही थी।
वैसे तूने मेरी भी आदत खराब कर दिया है जब तक तुमसे अपना दुदू जी भर कर चुसवा न लू मुझे भी नींद नहीं आता। ले चूस ले मेरे दुदू,
सुनीता ने अपनी ब्लाउज निकाल दिया।
राजेश उसकी चुचियों पर टूट पड़ा।
सुमित्रा _अरे बाबा, तू तो ऐसा टूट पड़ा जैसे वर्षो से भूखा हो। आराम से करो मैं कही भागी नहीं जा रही।
राजेश ने जी भर कर सुमित्रा की चूची मसल मसल कर चूसा। फिर वह अपना लोवर नीचे खींच कर नंगा हो गया।
राजेश _ले मेरी जान, जरा मेरी गन्ना चूस।
सुमित्रा ने राजेश का लंड मुंह में भरकर चुसने लगी।
राजेश का लंड और लम्बा मोटा, लोहे की तरह सख्त हो गया।
फिर राजेश ने सुमित्रा की साड़ी खिच कर अलग कर दिया।
उसे बेड किनारे लिटा दिया उसकी पेंटी खिंचकर निकाल दिया।
उसकी पेटी कोट ऊपर उठा कर क़मर तक ले गया। उसकी मस्त फुली हुई गोरी चिकनी बुर को मुंह में भरकर चुसने लगा।
और जब सुमित्रा अत्यंत काम विहिल हो गई वह बोली,,
सुमित्रा _, बेटा अब बस कर, अब मूझसे बर्दास्त नही हो रहा। डाल दे अपने सांप को मेरे बिल में। अपने कपकपाते हुवेऑटो से बोली।
राजेश ने अपना साप को हाथ से पकड़ा और उसे बिल का रास्ता दिखाया।
बिल मिलते ही राजेश ने एक जोर का धक्का मारा, साप सरसराता हुवा, बिल के अंदर चला गया।
सुमित्रा सिसक उठी।
आह, मांआई,,,
अब राजेश ने एक और धक्का मारा तो साप जड़ तक बिल में जा चुका था
राजेश कुछ देर अपनी मामी की खूबसूरत जिस्म पर से चिपक कर उसकी ओंठो को पीने लगा।
कुछ देर ओंठो का रस चुसने के बाद वह शुरू कर दिया खेल जो दोनो को स्वर्ग में ले गया।
राजेश ने भचा भच सुमित्रा को चोदना शुरु कर दिया।
सुमित्रा के मुंह से आह, मां ई, ऊ,, आह मैया रि,, ई,, जैसी मादक आवाज निकलते लगी कमरे में उसकी चुड़िओ की खनकने खन खन और लंड का बुर में आने जाने से, फ्च फाच, गच गाच की मधुर संगीत कमरे में गूंजने लगे।इधर सुनिता अपने कमरे मे आकर सोने की कोशिश करने लगी, पर उसी बुर की पानी जो निकल निकल कर सुख गई थी, उसके कारण उसकी बुर पे खुजली बड़ गई थी। वह चादर के अंदर से बुर में अपनी हाथ ले जाकर खुजाने लगी। वह जितना खुजाती, बुर की खुजली और बड़ जाति, धीरे धीरे वह अपनी उंगली से भगनाश को छेड़ने लगी जिससे वह और भी बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गई।उसे कल का सीन याद आ गई , कैसे राजेश अपनी मामी को पलंग पर घोड़ी बनाकार चोद रहा था। उस सीन को याद कर वह और बेचैन हो गई। उससे रहा न गया क्यू की उसके शरीर के अंदर की हवस जग चुका था। अब वो क्या कर रही है उसे खुद होश नही रहा।
वह सीधे राजेश के कमरे की ओर चली गई।
राजेश के कमरे की दरवाज़ा अंदर से बंद था।
अंदर राजेश बेड में पीठ के बल लेटा था और सुमित्रा उसके लंड पर उछल उछल कर chud रही थी।
दोनो जन्नत की सैर कर रहें थे। संभोग की असीम आनन्द को प्राप्त कर रहे थे।
कमरे में खन खन गच गच फच fach, आह उई मां आह उन,की आवाज गूंज रही थी।
तभी किसी की दरवाज़ा खटखटाने की आवाज दोनो के कानो पे पड़ी ।
दोनो चौंक गए। दोनो चूदाई बंद कर दिए।
सुमित्रा _राजेश, कोई दरवाज़ा खटखटा रहा है।
हे भगवान हम फिर फस गए।
राजेश _मामी आप घबराव मत, आप सारे कपड़े बेड के नीचे डाल दो और बाथरूम में चली जाओ मैं देखता हूं।
राजेश ने अपना लोवर और टी शर्ट पहना फिर दरवाज़ा खोला।
दरवाज़ा खुलते ही,,
राजेश _मां आप, इस वक्त।
राजेश _माफ करना बेटा, लगता है तुम सो गए थे। पर क्या करू पीठ दर्द के कारण मुझे नींद नहीं आ रही। तुम्हारे पापा तो नींद में खर्राटे भर रहा है मैं उसे जगाना उचित नहीं समझी।
अगर तुम कहो तो मैं वापस चली जाती हूं।
राजेश _अरे नही मां ये कैसी बातें कर रही है आप। आपके लिऐ तो मेरे कमरे की दरवाज़ा हर वक्त खुला रहेगा। आइए अंदर।
सुनीता बेड पर जाकर बैठ गई।
बेटा मेरे पीठ पर बड़ा दर्द हो रहा है मैं बॉम लेके आई हू जरा अच्छे से मालिश कर दो।
राजेश _ठीक है मां,दो बॉम मुझे लगा दू।
सुमित्रा ने राजेश को बॉम दे दिया।
राजेश _मां अपनी पीठ दिखाओ मै बॉम लगा देता हूं।
सुनीता _बेटा पहले दरवाज़ा तो बंद करदे, कोई आ जाएगा तो गलत समझेगा।
राजेश _ठीक है मां।
राजेश ने दरवाज़ा बंद कर दिया।
सुनीता ने अपना पीठ राजेश की ओर करते हुए कहा लो बेटे बॉम लगा कर अच्छे से मालिश कर दो।
राजेश! ने बॉम लगाना चाहा पर ब्लाउज सामने आ गया।
सुनीता _अरे बेटा, ब्लाऊज के कारण बॉम ठीक से लगा नही पाएगा, मै एक काम करती हूं, ब्लाऊज निकाल देती हूं, फिर अच्छे से लगा देना।
सुमित्रा अपनी ब्लाउज निकाल दी, ब्रा नही पहनी थी। ब्लाऊज निकलते ही उसकी सुडौल और बड़ी बड़ी चूचियां देखकर राजेश का लंड फिर से तनकर खड़ा हो गया।
सुनीता _अरे क्या देख रहा है रि पहली बार देख रहा है क्या?
राजेश _अरे नही मां आपके दुदू है ही इतने मस्त की इससे नजर ही नही हटती।
राजेश से रहा न गया वह चुचियों पर टूट पड़ा।
सुनीता _अरे बदमाश तू फिर शुरू हो गया।
राजेश ने सुनिता की मस्त चूचियों को अपने हाथों से मसल मसल कर पीने लगा।
सुनीता सिसकने लगी। गर्म तो वो पहले से ही थी।
उसकी बुर की पानी की धार और बड़ गया।
असल में सुनिता, राजेश से चुदने ही आई थी वह राजेश को सीधा कह नही सकती थी की बेटा मुझे चोद कर ठंडा करो मुझे चुदने का बड़ा मन है, इसलिए वह पीठ दर्द का बहाना बनाई।
राजेश सुनिता की चूची को जी भर कर मसल मसल कर चूसा। इधर सुनिता ने अपना हाथ राजेश के लोवर के अंदर ले गई। और उसके खड़े लंड पर हाथ चलाने लगी।
तभी राजेश अपना लोवर नीचे कर नंगा हो गया। और अपनी मां की आंखों में इशारा किया।
सुनीता समझ गई वह राजेश के लंड के नीचे बैठ कर, राजेश की लंड चुसने लगी।
राजेश तो जैसे जन्नत में पहुंच गया।
तभी सुनीता की पैर सुमित्रा की साड़ी पर पड़ी। साड़ी का कुछ हिस्सा बेड के निचे से बाहर आ गया था।
सुनीता का ध्यान उस और गई।
उसने उसे पकड़ कर देखा।
सुनीता _ये तो साड़ी है, किसकी साड़ी है? राजेश, बेटा ये किसकी साड़ी है।
राजेश _मां अब तुमसे क्या छुपाना, ये मामी की साड़ी है।
उसे रात में नींद नहीं आ रही थी तो वह मूझसे चुदने मेरे कमरे मे आई। जब तुम दरवाज़ा खटखाई तो वह मूझसे chud रही थी।
सुनीता _अच्छा तो ये बात है, कहा छिपी है।
सुमित्रा _सुनिता, मै यहां हूं।
सुनीता _भाभी, आज तो आपने कामदंड नही पहनी फिर भी चुदने आ गई।
सुमित्रा _क्या करू सुनिता, राजेश का लंड लेने की आदत हो गई है। बीना chude नींद नहीं आ रही थी।
तो यहां चुदने आ गई।
पर तुम यहां कैसे?
सुनीता _तुम्हारे कामदंड ने मेरी भी हालत खराब कर दी, मुझे यहां आने पर विवश कर दिया। तुम सच कह रही थी। काम दंड के ने मेरी बुर पर ऐसा प्रहार किया की, जब तक मेरी भुख मिटेगी नही मुझे चैन नहीं आएगी।
राजेश के पापा तो रोज थक कर सो जाता है उससे कुछ होता नहीं। इसलिए मजबूर होकर अपने ही बेटे के पास बहाने बनाकार आने मजबूर हो गई।
सुमित्रा _मै समझ गई सुनिता, मै भी एक औरत हूं, जब हवश की आग सताती है तो सब रिश्ते नाते जलकर भस्म हो जाती हैं।दोनो की समस्या एक ही है, और उसका समाधान है राजेश।
बेटा, अब तुमको ही हमारे इस शरीर के भुख को शांत करना पड़ेगा।
राजेश _मै तो आप दोनो की सेवा करने लिए सदैव तैयार हूं।
सुमित्रा भी नीचे बैठ गई और राजेश की लंड को मुंह में भरकर चुसने।
सुनीता राजेश की अंडकोष चाटने लगी।
सुनीता और सुमित्रा बारी बारी से राजेश का लंड चुसने लगी, फिर सुमित्रा सुनिता के पीछे गई और सुनिता को बुर चाटना शुरू कर दी।
सुनीता चौकते एवम सिसकते
हुए बोली _भाभी ये क्या कर रही है आप?
सुमित्रा _अरे सुनिता, असली मजा तो chut चटवाने से मिलता है।
और वह ग्लेप ग्लाप अपनी जीव से सुनिता की chut चाटने लगी।
इधर सुनिता सिसक् भी रही थी और राजेश का लंड भी चूस रही थी।
तीनो अपने बचे खुचे कपड़े उतार कर नंगे हो गए।
सुनीता _आह मां, उन , भाभी अब बस करो अब मूझसे बर्दास्त नही हो रहा।
सुमित्रा चूसना बंद कर दी।
सुमित्रा _राजेश लो बेटा, डाल दे अपना मूसल अपनी मां की बुर में बुझा दे इसकी प्यास।
राजेश अपनी मां के मुंह से लंड निकाल कर सुनिता के पीछे चला गया सुमित्राने राजेश कालंड पकड़ा और लंड सुनिता के बुर के छेद पर सेट कर दिया। राजेश ने बुर में लंड डालकर भचा भच चोदना शुरू कर दिया।
पूरा कमरा सुनिता की मादक सिसकारी और चीख से गूंजने लगी। इधर सुमित्रा नीचे बैठ कर एक उंगली से अपनी बुर रगड़ रही थी और अपनी जीव से सुनिता की बुर की पानी जो राजेश के अंडकोष से होकर नीचे टपक रहा था, उसे चांट रही थी।
इधर राजेश सुनिता को घोड़ी बना कर, तेज गति से भच भच चोद रहा था।
सुनीता और राजेश दोनो जन्नत में पहुंच गए थे। संभोग के असीम आनद को प्राप्त कर रहे थे। राजेश जोश में आकर और जोर जोर से गच गच चोदना शुरू कर दिया।
सुनिता ज्यादा देर तक अपने को रोक न सकी और और जोर से चीखते हुए झड़ने लगी।
आह मां मै गई re,, आह माई,,,
राजेश ने बुर ठोकना बंद कर दिया और वह भी सुस्ताने लगा।
फिर राजेश न सुनीता के बुर से लंड निकाल लिया और सुमित्रा को बेड के किनारे लिटा दिया। और कुछ देर उसकी बुर चाटने के बाद अपना लंड बुर में गच से पेल दिया, उसकी दोनो टांगें अपनी कंधे पे रख कर दना दन चोदना शुरू कर दिया।
लंड का टोपा बच्चेदानी को ठोक रहा था। पूरा कमरा सुमित्रा की चीख और कामुक सिसकारी से गूंजने लगा।
इधर सुनिता होश में आई, राजेश ने अपने पास बुलाया फिर अपना लंड सुमित्रा के बुर से बाहर निकाल दिया, सुनिता ने राजेश का लंड अपनी मुंह में भरकर ग्लप ग्लैप चुसने लगी। फिर लंड को अपने हाथों से सुमित्रा के बुर के छेद पर सेट करने को थी की राजेश ने कहा
मां लंड को गाड़ के छेद में रखो मैं मामी की गाड़ मारूंगा।
सुमित्रा _ बेटा, क्या कह रहा है गाड़ भी कोई मारने की चीज है।
राजेश _मामी शायद आपको पता नहीं आज कल की लड़किया गाड़ मराना पसंद करती हैं। एक बार आप भू मरा कर देखो आपको भी बहुत मज़ा आयेगा।
सुमित्रा _न बाबा मुझे नही करना ऐसा गंदा काम।
सुनीता _बेटा तुम्हारा इतना मोटा और बड़ा है गाड़ की छेद इतनी सकरी, कैसे जा पाएगा इसके अंदर, और कौन ले पाएगा अपनी गाड़ में इतना बड़ा लंड।
राजेश ने बिना सोचे जोश में कह दिया, प्रिया दी तो लेती है।
सुनीता _बेटा, तू ये क्या कह रहा है।
राजेश हड़बड़ा गया ओ नो ये मेरे मुंह से क्या निकल गया।
सुनीता _क्या तूने प्रिया के साथ, भी,,
सुमित्रा _सुनिता, ये लड़का तो पूरा बिगड़ गया है, अपनी बहन का भी ले डाला।
सुनीता _अब चुप चाप खड़ा क्यू है बोलता क्यू नही।
राजेश _ओ मां, मै उस दिन प्रिया दी के घर रुका था न तो हम दोनो बहक गए।
सुनीता _तूने प्रिया के साथ जबरदस्ती तो नही किया?
राजेश _नही मां, जो भी किया, उसकी सहमति से किया। दीदी खुद होकर अपनी गाड़ मरवाई।
बता रही थी की उसे गाड़ मरवाने की आदत है, पिंकी के होने के बाद फिर से गर्भ ने ठहर जाए करके जीजू प्रिया दी के गाड़ मारने लगे।
सुनीता _हूं दिखने में तो बडी भोली लगती है प्रिया,,
सुमित्रा _अरे तुम और मैं भी तो भोली थी पड़ गए न इस मुआ के चक्कर में।
प्रिया _वह भी बेचारी इसके चक्कर में आ गई होगी।
अब बस करो अपनी राम कहानी मेरी बुर में आग लगी है उसे बुझा।
राजेश ने फिर से सुमित्रा के बुर में लंड फिर गच से ठेल दिया। और जोर जोर ठोकना शुरू कर दिया।
सुमित्रा तो स्वर्ग में पहुंच गई।
सुमित्रा _आज, चोद बेटा और जोर से चोद फाड़ दे अपनी मामी की chut निगोडी दिनभर बहुत परेशान करती है।
राजेश और जोर जोर से ठोकने लगा।
सुमित्रा _आह, माई,, उन,,, आह गई रि उन मां,,
जोर से चीखते हुए झड़ने लगी।
राजेश ने चोदना बंद कर अपनी मां की ओंठ चूसना शुरू कर एक हाथ से उसकी योनी सहलाने लगा। जिससे सुनिता फिर गर्म हो गई।
राजेश बेड पर जाकर पीठ के बल लेट गया।
उसका लंड हवा में लहरा रहा था। वह अपने लंड को एक हाथ से सहलाते हुए दूसरे हाथ से अपनी मां को इशारा कर ऊपर बुलाया।
सुनीता बेड के ऊपर चढ़ गई और लंड के सिध में दोनो पैर फ़ैला कर खड़ी हो गई। फिर नीचे बैठी लंड को अपने हाथ से पकड़ कर अपने बुर की छेद में रखकर बैठ गई।
लंड बिना किसी अवरोध के बुर में समाहित हो गया।
सुनीता लंड पर पहले धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगी।
जब उसको मजा आने लगी तोअपना गति बड़ाने लगी। राजेश ने अपनी मां की चूची मुंह में भरकर चुसने लगा।
फिर वह अपनी मां की क़मर को अपने हाथों से पकड़ कर, अपनी क़मर उठा उठा कर सुनिता का बुर में लंड अंदर लेने में सहयोग करने लगा।
दोनो को फिर से बहुत मजा आने लगा।
सुनीता अब जोर जोर से लंड पर उछल उछल कर चुदने लगी।
राजेश भीं क़मर को पकड़कर अपनी लंड में पटक पटक कर सुनिता को चोदने लगा।
दोनो गिर से जन्नत में पहुंच गए।
सुनीता के मुंह से लगातार कामुक सिसकारी और चीख निकलने लगी। इधर सुमित्रा दोनो की चूदाई देखकर फिर गर्म हो गई थी, वह अपनी बुर को अपनी हाथो से सहला रही थी, उंगली अंदर बाहर करने लगी।
इधर सुनिता उछल उछल कर लंड को बुर में ले रही थीं।
पर ज्यादा देर तक अपने को रोक न पाई और फिर झड़ने लगी। राजेश ने सुनिता को अपनी सीने से लगा कर उसकी पीठ सहलाने लगा।
कुछ देर बाद सुनिता एक और लुड़क गई। वह बुरी तरह थक चुकी थी।
इधर राजेश का लंड अभी भी, खड़ा था। उसने अपनी मामी को ऊपर आने का इशारा किया।
सुमित्रा ऊपर आई और राजेश की ओर पीठ कर उसकी लंड को अपने बुर में सेट कर बैठ गई।
लंड एक बार फिर सुमित्रा के बुर में समाहित हो गया।
अब राजेश ने सुमित्रा की क़मर पकड़कर अपने लंड उसकी बुर में अंदर बाहर करना शुरू किया।
सुमित्रा भी अपनी क़मर को आगे पीछे लंड बुर में लेने लगी।
धीरे धीरे राजेश ने अपना गति बढ़ाया।
सुमिता फिर से स्वर्ग की सैर करने लगी वह भी अब अपने कूल्हे को राजेश के लंड पर पटक पटक कर चुदने लगी।
राजेश और सुमित्रा के मुंह से आह, ऊ,, उई मां,, आई,, आह,
राजेश आह, बहुत मजा आ रहा मेरी जान आह, ऊ और उछल, ले ले पूरा आह क्या मस्त मॉल है तू, आह। मां को चोदने के बाद सबसे ज्यादा मज़ा तुमको चोदने में आता है।
सुमित्रा _मै तो तेरी गुलाम हो गई re कितना मजा देता है तू, पूरा जन्नत की सैर करा देता है,, आह मां आई उन,,,
कुछ देर इसी पोजीशन में ठोकने के बाद राजेश उठ गया और सुमित्रा बेड पर घोड़ी बन गई।
राजेश अपना लंड बुर में डाल कर गच गच चोदने लगा।
सुमित्रा _चोद बेटा और जोर से चोद आह माई,,,
फाड़ दे मेरी chut आह,, डाल दे अपना बीज मेरी बुर में, अगर मर्द है तू तो बना दे अपने बच्चे की मां। मिटा दे मुझ पर बाज का लगा कलंक,,,,
सुनीता उठ कर बैठ गई।
सुनीता _चोद बेटा और चोद अपनी मामी को अगर तूने मेरी दूध पिया है तो छोड़ दे अपना बीज, भाभी की कोख में, बना दे अपने बच्चे की मां।
राजेश अपनी मां की बात सुनकर और जोश में आ गया और सुमित्रा की बुर तेज गति से चोदने लगा।
राजेश _आह मामी, ले chud मेरे से, ले, एक और ले ले,, आह, बन जा मेरे बच्चे की मां,, आह मां मै गया।
सुनीता राजेश की पीठ सहलाने लगा।
इधर राजेश ने अपना सारा वीर्य सुमित्रा के कोख में भर दिया गर्म गर्म वीर्य को अपनी गर्भ में जाने का एहसास पाकर सुमिता फिर से एक बार झड़ गई।
तीनो बुरी तरह थक चुके थे।
राजेश बेड पर लेट गया और सुनीत, सुमित्रा दोनो उसके आजू बाजू उसके कंधे पर सिर रख कर सो गए।
अचानक सुनिता की नींद खुल जाती है वह घड़ी की ओर देखि तो सुबह के 4बज चूके थे।
सुनीता _भाभी उठो सुबह के चार बज गाए।
सुमित्रा_सोने दे न सुनिता।
सुनीता _भाभी चलो अपने कमरे में वहा जाकर सो जाना, यहां रुकना ठीक नही, चलो उठो।
सुनीता ने सुमित्रा को जबरदस्ती उठाया।
राजेश की नींद भी खुल गई।
सुनीता _अरे बेटा तू भी उठ गया, तू सो जा बेटा,,
इधर सुमित्रा और सुनिता दोनो अपनी अपनी कपडे पहन कर अपने कमरे में चली गई।
कुछ दिन बाद प्रिया ने सुनिता को फ़ोन किया।
प्रिया _बुआ, चाची को ले आना उसका कुछ चेक अप करना है।
सुनीता _ठीक है प्रिया हम 12, बजे पहुंच जाएंगे।
सुनीता और सुमित्रा दोनों आटो से हॉस्पिटल पहुंच गए।
प्रिया के केबिन में जाकर उससे मिली।
प्रिया _चाची मैने आपको कहा था की आपका मासिक धर्म जैसे ही सुरू हो उसके 3दिन बाद हॉस्पिटल आना तुम्हारी जांच होगी और दवाइया लेनी होगी। पर इतने दिन हो गए आपने मासिक धर्म के बारे में मुझे जानकारी नहीं दी।
सुनीता _हा, भाभी, आपने बताया नही।
सुमित्रा _क्या बताऊंगी सुनिता, मेरी तो मासिक धर्म इस माह समय पर आया ही नहीं है एक सप्ताह हो गए।
प्रिया _क्या? पर पहले तो आपका मासिक पीरियड समय पर आता था तो इस बार लेट कैसे हो गया।
सुमित्रा _पता नही बेटी इस बार कैसे लेट हो गया।
ठीक है चलो मेरे साथ कुछ टेस्ट करते है।
प्रिया ने सुमित्रा की गर्भाशय की जांच किया वह चौंक गई, यह जानकर की उसकी चाची पेट से है।
जांच कर लेने के बाद,
सुनीता _बेटी, सब ठीक तो हैं न।
प्रिया _बुआ, चाची पेट से है।
सुमित्रा और सुनिता दोनो चौंक गई।
सुमित्रा और सुनिता दोनो एक दूसरे का मुंह देखने लगे।
प्रिया _चाची, चाचा जी तो गांव में है फिर ये चमत्कार हुआ कैसे?
सुनीता _अब तुमसे क्या छुपाना बेटी ये सब उस बाबा और राजेश का किया धरा है।
सुमित्रा और सुनिता ने सारी बातें प्रिया को बता दिया।
प्रिया हसने लगी,,,
लो अब आईवीएफ की जरूरत ही नहीं पड़ी। राजेश ने तो कमाल कर दिया।
गजब की मर्दानगी है उसमे।
सुनीता _हा हा जानते है तुमने भी देखि है उसकी मर्दानगी।
प्रिया चौकते हुवे,,
क्या, बुवा ये आप कह रही हो,,
सुमित्रा _मुआ ने जोश में सब बक दिया।
प्रिया _राजेश से मुझे ये उम्मीद नहीं थी। मिलने दो मुझे, फिर बताती हूं,,
सुमित्रा _अरे अब छोड़ों भी huwa सो huwa अब तो तीनो ही राजेश की रखैल बन गए हैं,,, अब एक दुसरे से क्या छिपानाऔर घबराना?
तीनो हसने लगे।
सुनीता _पर प्रिया हम भैय्या से क्या कहेंगे?
प्रिया _अरे बुवा हम चाचा जी से कह देंगे की आईवीएफ द्वारा चाची गर्भ धारण की, उसके वीर्य का सैंपल लेने कल बुला लेते है फिर बाद मे उसे कह देंगे की आपका वीर्य में शुक्राणु की गतिशीलता कम थी इसलिए राजेश की सुक्राणु के इस्तमाल किया गया।
तीनो फिर हसने लगे,,