Ajju Landwalia
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राजमाता को अब इस खुले अस्तबल में इससे आगे की गतिविधियां करना सही नही लगा... उन्हों ने इशारे से उस युवक को अपने तंबू में आने के लिए कहा... अपने वस्त्र ठीक कर वह फौरन तंबू की तरफ चल दी।
युवक ने अपने तंग लंड को दबाकर अपनी पतलून पहन ली... ऊपर का वस्त्र चढ़ाकर, वह सब से नजर बचाते हुए, पीछे के रास्ते से राजमाता के तंबू में पहुँच गया... उसके अंदर आते ही राजमाता ने तंबू के द्वार को गांठ से बांधकर सुरक्षित कर दिया...
अब आगे कैसा बढ़ा जाए यह सोच में डूबे उस युवक का सर पकड़कर राजमाता ने उसे नीचे की ओर दबा दिया... इतने नीचे की वह लगभग जमीन पर बैठ गया... राजमाता ने दोनों हाथों से अपना घाघरा उठाया और अपना फनफनाता हुआ भोसड़ा, उसके चेहरे के सामने पेश कर दिया।
असमंजस में वह युवक मूर्ति की तरह उनकी चुत के सामने देखता ही रहा... उसे पता ही नही चल रहा थी की आगे क्या करें!! राजमाता ने नाड़ी खोलकर अपना घाघरा निकाल ही दिया... और अपनी चोली खोलकर स्तनों को मुक्त कर दिया... फिर उस घुग्गू बनकर बैठे युवक का सर पकड़कर, अपने झांटेदार भोसड़े में उसका चेहरा दबा दिया...
उस हांफ रहे कामुक युवक को पता नहीं चल रहा था कि अब उसे आगे क्या करना था!! उसके नथुने राजमाता की सुलगती चुत की गंध से भर गए। काफी अलग फिर भी बेहद मादक गंध थी। अस्थायी तौर पर उसकी जीभ ने उसकी योनि के होठों को छुआ। उसने ख़ुशी से आह भरी. इससे उन्हें आगे बढ़ने का प्रोत्साहन मिला। सिर्फ अंदाजे से उसने अपनी जीभ बाहर निकाली... और राजमाता की चुत के होंठों पर फेरने लगा.. राजमाता कराह उठी... और उस युवक को वैसे ही करते रहने के लिए उत्तेजित करने लगी।
राजमाता को अधिक प्रसन्न करने के लिए उत्सुक होकर वह अपनी जीभ से उनकी पूरी चुत को चाटने लगा.. चुत के होंठों को.. जंगामूल को और ऊपरी चर्बीयुक्त हिस्से को। वह धीरे-धीरे उनके मदनमणि तक पहुँच गया और फिर अपनी गरम जीभ को उनकी चुत में डाल दिया। अन्दर-बाहर और गोल-गोल तब तक घुमाता रहा जब तक की राजमाता मजे से सिहरने न लगी। इस युवक की अनुभवहीन हरकतें राजमाता को बड़ा ही अनोखा आनंद दे रही थी।
अचानक उन्होंने उसे अपनी चुत से धक्का देकर दूर कर दिया और उसे हाथ खींचकर खड़ा किया। फिर वह उसे धकेलते हुए अपने बिस्तर तक ले गई और आखिर एक धक्का देकर उसे अपने बिस्तर पर गिरा दिया।
राजमाता अब बिस्तर पर चढ़कर इस युवक के दोनों पैरों के बीच जम गई। नीचे झुककर उन्होंने उसके आधे खड़े लंड को अच्छी तरह चूसकर फिर से उसे सख्त कर दिया। युवक नौसिखिया था... राजमाता के तीन-चार बार चूसने पर ही उसके लंड तन कर खड़ा हो गया।
अब वह उस पर सवार होने लगी और उसके लंड को पकड़कर धीरे-धीरे अपनी चुत फैलाकर अंदर डालने लगी। आहहह... कठोर लंड को गरमाई चुत में अंदर लेने की वह दिव्य अनुभूति... उनकी चुत में भूचाल सा आ गया..!!
अब राजमाता ने अपने चूतड़ों खुद को ऊपर उठाया और फिर नीचे गिरा दिए, धीरे-धीरे स्थिर गति से वह उस नौजवान लंड पर उछलने लगी। वह युवक अब पूरी तरह मंत्रमुग्ध हो चुका था, उसकी इंद्रियाँ अभिभूत हो चुकी थीं। अब वह राजमाता के शरीर के और अधिक अंगों का आनंद चाहता था। उसने अपना सिर उठाकर पहले एक और फिर उनके दूसरे स्तन को दोनों हाथों से पकड़कर पागलों की तरह चूसने लगा। फिर उसने अपने हाथों से उनके नितंबों को खोज लिया और राजमाता के प्रत्येक नीचे के धक्के के साथ उन्हे अपने ऊपर खींचने लगा।
राजमाता इस संभोग की अनुभूति जितना हो सके लंबा करना चाहती थी, उस उत्तेजना और अंतरंगता का स्वाद लेना चाहती थी जो वह महसूस कर रही थी, लेकिन कई दिनों के चुदाई के अभाव के बाद मिले लंड के कारण, उनका अतिउत्साह उन पर हावी हो गया और वह एक लंबी और तेज़ कराह के साथ झड़ने लगी। उनकी चुत से निकले तरल पदार्थ की एक धार ने उस युवक को लंड को सराबोर कर दिया।
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उस युवक ने मोर्चा संभाल लिया और उनके चूतड़ों को मजबूती से पकड़कर नीचे से प्रहार करने लगा। जब वह निष्क्रिय रूप से उठती थी और उसके लंड पर गिरती थी, तब भी वह उसके लंड को अपने अंदर चुभवाती थी। युवक ने उनकी भरपूर नितंबों को दोनों हथेलियों में मजबूती से दबोच लिया... राजमाता ने उसके होंठों को चूम लिया तब वह उनके मुंह की लार को शहद की तरह चूसने लगा।
नीचे से ताबड़तोड़ धक्के लगाते हुए वह लम्बी घुरघुराहट और एक चीख के साथ झड़ गया। उसके स्खलित होते ही राजमाता ने उसका लंड अपनी चुत से निकाला... बाहर निकले उस डंडे की नोक से अभी भी वीर्य की धराएं निकल रही थी... तृप्त राजमाता बिस्तर पर लेटकर हांफने लगी।
उस युवक को अपने तंबू में ज्यादा देर तक रोके रखना उन्हे ठीक नही लग रहा था... अगर वह इस मिलन को गुप्त रखेगा तो आगे भी ऐसे मौके मिलेंगे, ऐसा वचन देकर राजमाता ने उसे कपड़े पहनकर रुखसत होने को कहा... जिस रास्ते से वह आया था उसी रास्ते अस्तबल लौट गया।
और राजमाता ने अपना वादा निभाया, उचित समय और स्थानों पर उससे मिलने की व्यवस्था की। यदि कोई व्यक्ति समय और स्थान का चयन बहुत सावधानी से करता है तो उस जंगल के आस-पास के वातावरण में ऐसी कई जगहें थी, जो उनकी गुप्त मुलाकातों के लिए उत्कृष्ट थी। और राजमाता ने बड़ी ही सावधानी से यह काम किया!
उन्होंने अस्तबल के एकांत मे(दोपहर के समय जब सब का भोजन और विश्राम का समय होता था) पीछे से खड़े-खड़े चुदवाया; दोपहर की धूप की गर्मी में तंबू के बिस्तर पर, शाम के समय जंगल की झाड़ियों में... राजमाता ने अपने नग्न रूप को एक पेड़ के सामने पकड़ रखा था और अपने लंबे पैरों को उस युवक की कमर के चारों ओर लपेटकर, उछल उछलकर चुदवाया। रात के अंधेरे में, खुले मैदान में जाकर, उसके लंड को तब तक चूसा जब तक कि वह उनके खूबसूरत मुँह में झड़ नहीं गया, फिर उन्होंने पास के एक टीले के शिखर पर घास की शैया में सोये सोये भरपूर चुदाई करवाई।
चूँकि उन दोनों को समय की हमेशा कमी रहती थी इसलिए उनका मैथुन उन्मत्त होता था। वह कभी-कभी चाहती थी कि उनका प्रेम-प्रसंग अधिक आरामदायक और लंबा चले, जैसा कि शक्तिसिंह के साथ होता था। पर वह युवक अनुभवहीन था.. और राजमाता की मदमस्त सुंदरता उसे ज्यादा देर टिकने नही देती थी... इसलिए उन्हे जो कुछ भी मिल सकता था और जब भी मिलता था, वह ले लेते थे।
Gazab ki aag laga dene wali update he vakharia Bhai
Rajmata ne aakhir apne liye ek naya khilona dhundh hi liya..................
Shaktisingh jaisa maja to nahi mil paya rajmata ko............lekin kuch bhi na hone se kuch hona better he..........
Agli dhamakedar update ki pratiksha rahegi Bhai









