- 6,226
- 21,955
- 174
शुक्रिया राजी भाभी जीSuper duper sexiest update
![]()
![]()
![]()
अति उत्तेजनादायक अपडेट है भाईपीयूष: "और अगर फिगर दबाने के चक्कर में सर पर जूते पड़ेंगे तो!!"
शीला: "तेरे सर पर जूते नहीं पड़ेंगे.. मेरी गारंटी है.. "
कविता और शीला दोनों हंस पड़े.. तभी शो का टाइम हो गया और हॉल का गेट खुल गया.. ऑडियंस अंदर जाने लगी..
पीयूष: "चलिए भाभी.. चलते है अंदर"
तीनों अंदर जाने के लाइन में खड़े हो गए.. सब से आगे कविता.. पीछे पीयूष.. और उसके पीछे शीला.. भीड़ की धक्कामुक्की की आड़ में शीला ने जान बूझकर अपने बम्पर पीयूष के पीठ पर दबा दिए..
शीला भाभी के इस प्रथम हमले से ही पीयूष पिघल गया..
टिकट का नंबर देखकर अपनी लाइन में घुसते हुए पहले शीला भाभी, फिर उसकी बगल में कविता और अंत में पीयूष.. इस तरह बैठ गए। शीला और कविता के पसीने छूट गए.. अब पिंटू को कैसे कविता के साथ सेट करेंगे!! अब पिंटू के साथ पिक्चर देखने की और मजे करने की इच्छा मन में ही रह जाएगी, ये सोचकर कविता का दिल बैठ गया..
शीला का दिमाग काम पर लग गया.. अब क्या करू?? कविता ने शीला की कमर पर अपनी कुहनी मारकर इशारे से पूछा.. अब क्या करेंगे?
पीयूष तो मस्ती से स्क्रीन पर चल रही ऐड्वर्टाइज़्मन्ट की मॉडलों को ताड़ रहा था
शीला को यकीन था की इतना उत्तेजित करने के बाद पीयूष उसके बगल में ही बैठेगा.. और मौका मिलते ही पिंटू और कविता साथ में अपना कार्यक्रम कर पाएंगे.. पर ये तो सब उलटा हो गया!! कविता बार बार कुहनी मारकर शीला से पूछ रही थी की अब क्या किया जाएँ!!
शीला ने फुसफुसाकर कविता के कान में कहा "अब सिर्फ पिक्चर ही देखेंगे.. और तो कुछ हो नहीं सकता"
"भाभी प्लीज.. कुछ कीजिए ना!!" कविता की शक्ल रोने जैसी हो गई.. उसने देखा की पिंटू कब से उनकी सीटों की लाइन के इर्दगिर्द चक्कर काट रहा था
शीला और कविता दोनों निराश होकर अपनी सीट पर बैठे रहे.. कविता की नजर, कोने में खड़े पिंटू पर थी.. वो भी इशारे के इंतज़ार में था। शीला का दिमाग और भोसड़ा, इस समस्या का निराकरण ढूँढने के काम पर लगे हुए थे.. तभी शीला के दिमाग में चिंगारी हुई और उसकी चुत में ४४० वॉल्ट का झटका लगा.. वो एकदम से खड़ी हो गई..
"बाप रे.. कितनी गर्मी लग रही है.. मैं यहाँ कोने में नहीं बैठूँगी.. पीयूष, तू इस तरफ बैठ जा.. "
पीयूष: "कोई बात नहीं भाभी.. आप यहाँ आ जाइए.. मैं वहाँ चला जाता हूँ" कहते ही पीयूष खड़ा हो गया और शीला की सीट पर बैठ गया..
कविता की जान में जान आई। पीयूष अब शीला और कविता के बीच में बैठ गया.. शीला का इशारा मिलते ही, पिंटू कविता की बगल वाली सीट पर चुपके से बैठ गया
जल बिन मछली की तरह तड़प रही कविता को ऐसा महसूस हुआ जैसे उसे वापिस पानी में डाल दिया गया हो.. उसका चेहरा खिल उठा
स्क्रीन पर पिक्चर शुरू हो गया.. पूरे हॉल में अंधेरा छा गया.. शीला ने धीर से अपने पैर से पीयूष के पैरों का स्पर्श किया.. पर पीयूष ने तुरंत अपना पैर हटा लिया.. पीयूष की इस सज्जनता पर शीला को बड़ा गुस्सा आया..
दोनों सीटों के बीच के हेंडल पर जहां पीयूष ने अपना हाथ रखा था.. वहीं पर शीला ने अपना हाथ रख दिया.. लेकिन पीयूष ने अपना हाथ दूर ले लिया।
पिक्चर शुरू हुए आधा घंटा बीत चुका था.. कविता और पिंटू की छेड़खानियाँ शुरू हो गई थी.. पर शीला और पीयूष के बीच कुछ नहीं हो पा रहा था.. शीला के क्रोध का पारा चढ़ रहा था.. बहेनचोद समझता क्या है ये अपने आप को!! बड़ा आया सीधा साहूकार.. !! लगता है अब मुझे अपने ब्रह्मास्त्र का उपयोग करना ही पड़ेगा.. शीला ने घुटने मोड़कर अपने दोनों पैर सीट के ऊपर ले लिए.. अब पीयूष की जांघ पर शीला का घुटना छु रहा था.. और पीयूष इस स्पर्श से अपने आप को दूर कर पाने की स्थिति में नहीं थी। समस्या ये हुई की शीला के दूसरी तरफ बैठे पुरुष की जांघ पर भी शीला का दूसरा घुटना छुने लगा.. वो आदमी अपनी उँगलियाँ शीला के घुटने पर फेरने लग गया.. हालांकि शीला का सर ध्यान पीयूष पर ही था.. वो देखना चाहती थी की पीयूष के लंड पर उसके स्पर्श का कोई असर हो रहा था या नहीं!! वो तो शीला नहीं जान पाई.. पर शीला के बगल में बैठे आदमी का टावर खड़ा हो गया..
शीला का लक्ष्य था पीयूष का लंड.. और पाँच मिनट बीत गई.. पर पीयूष ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.. शीला की जांघों पर वो बगल में बैठा हरामी हाथ फेरने लगा.. पर शीला को इस बात की परवाह नहीं थी.. और वो आदमी इस बात का पूरा फायदा उठा रहा था.. करीब ४५-४६ की उम्र के उस आदमी को तिरछी नजर से एक बार देख लिया..
शीला ने देखा की पीयूष तो कविता के बबलों पर हाथ फेर रहा था.. शीला को अपने स्तनों का अपमान होता दिखा.. रत्नागिरी आम मिल रहे है और ये बेवकूफ कच्चे आम के पीछे पड़ा था.. कुछ करना पड़ेगा
शीला ने अपने घाघरे के अंदर हाथ डाला और तीन उँगलियाँ अपनी भोस में डालकर अंदर बाहर करते ही अंदर से पानी का झरना फुट पड़ा.. अपनी गीली उंगलियों को उसने अपने खुले घुटने पर रगड़ दी.. गरम भोसड़े की खुशबू पूरे वातावरण में फैलने लगी..
चुत चाटने के अनुभवी पुरुष.. इस खुशबू को बखूबी पहचानते है.. पानी पी रहे चीते को शिकार की खुशबू आते ही जिस तरह वो गर्दन उठाकर आजू बाजू देखने लगता है वैसे ही.. आगे पीछे की सीट पर बैठे मर्द.. चारों तरफ देखते हुए इस खुशबू के स्त्रोत को ढूँढने लगे.. साथ ही साथ सोचने लगे की कही हॉल के अंदर ही किसी ने चुदाई तो शुरू नहीं कर दी!! थोड़ी देर यहाँ वहाँ देखने के बाद वापिस वो सारे मूवी देखने में व्यस्त हो गए।
दूसरी तरफ शीला की इस हरकत का असर.. तीन सीट छोड़कर बैठे पिंटू के लंड पर तुरंत होने लगी.. चुत की गंध परखने के लिए वो यहाँ वहाँ देखने लगा.. पीयूष कविता के अपने तरफ वाले स्तन को मसल रहा था.. शीला को अपनी चुत की गंध का थोड़ा सा असर होता दिखा.. अब उसने फिर से अपनी चुत में तीन उँगलियाँ डाली और गीली उंगलियों को अपनी काँखों के नीचे रगड़ दिया.. और वहीं हाथ उसने पीयूष के कंधे पर इस तरह रख दिया जैसे दो दोस्त रखते है.. इस तरह शीला की चुत-रस लगी काँख, पीयूष के चेहरे के बिल्कुल करीब आ गई.. और शीला का एक स्तन की गोलाई पीयूष की कोहनी से रगड़ खाने लगी..
इस दोहरे हमले के आगे पीयूष ने घुटने टेक दिए.. अपने पसंदीदा बड़े बड़े स्तनों का स्पर्श मिलते ही वो जैसे स्वर्ग की सैर पर निकल गया.. उसे शीला भाभी के कहे शब्द याद आ गए "जूते नहीं पड़ेंगे.. मेरी गारंटी है".. पीयूष को अपनी मूर्खता का अब एहसास हुआ.. शीला भाभी का इशारा वो तब समझ नहीं पाया था.. अपने स्तन दबाने के लिए वो उसे परोक्ष आमंत्रण दे रही थी..
पीयूष ने अपना हाथ कविता के स्तन से हटा लिया और अपना रुख शीला की ओर किया.. अपने हाथ मोड़कर वो चुपके से शीला के स्तनों को छुने लगा.. और तिरछी नजर से शीला भाभी की प्रतिक्रिया देखने लगा..
शीला से अब रहा नहीं गया.. अपना चेहरा पीयूष कान के पास ले जाकर वो धीरे से बोली "आधा पिक्चर खतम हो गया.. थोड़ी देर में इन्टरवल हो जाएगा.. और तू अभी तक ट्रैलर पर ही अटका पड़ा है!! अगर मन कर रहा है तो दबा ले.. शरमाता क्यों है?? इतना अंधेरा है, किसी को कुछ भी पता नहीं चलेगा"
पीयूष की सांसें तेज हो गई.. आज अगर कविता साथ नहीं होती.. तो दोनों हाथों से भाभी के चुचे रगड़ लेता..
दूसरी तरफ पिंटू के पेंट में हाथ डालकर उसका लंड हिला रही कविता सोच रही थी की आज पीयूष साथ नहीं होता तो झुककर पिंटू का लंड चूस लेती..
शीला ने ब्लाउस के तीन हुक खोल दिए और अपना दायाँ उरोज बाहर निकाल दिया.. जैसे तकिये को कवर से निकाल रही हो बिल्कुल वैसे ही!! और पीयूष के हाथों में ही थमा दिया.. और बोली "कविता को पता नहीं चलेगा.. अंधेरे में तुझे जो करना है कर ले.. जितना मज़ा करना हो मेरी तरफ से पूरी छूट है"
शीला की बात सुनकर पीयूष में हिम्मत आ गई.. इतना मूर्ख तो वो था नहीं की हाथ में नंगा स्तन हो और वो दबाए ना!! शीला के ढाई किलो वज़न वाला चुचा हाथ में पड़ते ही पीयूष के तनबदन में आग लग गई.
"ओहह भाभी.. गजब के है ये तो.. माय गॉड!! इन स्तनों को छुने के लिए मैं कितना बेचैन था.. आज तो किस्मत खुल गई मेरी" अपने नसीब को शाबाशी देने लगा पीयूष.. और उसके बगल में उसकी पत्नी अपने प्रेमी से स्तन दबवा रही थी
"मज़ा आ रहा है ना तुझे? दबा ले जितना मन करे.. "बड़े ही कामुक अंदाज से शीला ने कहा और पीयूष की जांघ पर हाथ फेरते फेरते उसके लंड तक पहुँच गई और पतलून के ऊपर से ही दबाने लगी। शीला का स्पर्श अपने लंड पर होते ही पीयूष अधिक उत्तेजित हो गया.. और उसने जोर से शीला के स्तन को मसल दिया..
"आह्ह.. जरा धीरे से कर पीयूष.. दर्द हो रहा है" शीला कराह उठी
"रहा नहीं जाता भाभी.. क्या करू!!"
"नहीं रहा जाता तो बाहर निकाल.. पत्थर जैसा सख्त हो गया है"
"भाभी मुझे कविता का टेंशन है.. कहीं उसने देख लिया तो मुसीबत आ जाएगी" डरते हुए पीयूष ने कहा
पर उतनी देर में तो शीला के अनुभवी हाथों ने पीयूष के पेंट की चैन उतारकर अपना हाथ अंदर सरका दिया और कच्छे के ऊपर से ही लंड को पकड़ लिया।
"ओहह भाभी.. पर.. पर.. कविता.... " पीयूष के शब्द बाहर ही निकले क्योंकी शीला ने उसका कच्छा सरकाकर उसका लंड बाहर निकाल लिया था। फॉलो-ओन होने के बाद दूसरी इनिंगस में भी जब ज़ीरो पर तीन विकेट गिर जाए.. और बेट्समेन निसहाय अवस्था में देखते ही रह जाए.. बिल्कुल वैसे ही पीयूष भी शीला के बाउन्सर के सामने निसहाय था.. शीला ने झुककर पीयूष के कडक लोड़े के टोपे पर किस किया.. जितना हो सकता था अपने मुंह में ले लिया.. और चूसने लगी..
शीला के मुंह की गर्मी और लार का स्पर्श.. पीयूष को उसका गुलाम बनाने के लिए काफी था... तिरछी नज़रों से अपने पति का लंड चूस रही शीला को कविता देख रही थी.. और ये देखकर ज्यादा उत्तेजित होकर वह पिंटू का लंड मसल रही थी। शीला भाभी की सलाह अनुसार उसने ब्रा-पेन्टी नहीं पहनी थी.. और पिंटू इस सुवर्ण अवसर को गंवाना नहीं चाहता था.. उसने कविता के स्कर्ट में हाथ डाल दिया और अपनी दो उंगली चुत में डालकर दस पंद्रह बार फक-फक की आवाज के साथ फुल स्पीड के साथ अंदर बाहर करते ही कविता की चुत झड़ गई.. और साथ में ही पिंटू की पिचकारी से गरम वीर्य रिसकर कविता के हाथों के सौन्दर्य को ओर बढ़ाने लगा..
शीला की बायीं ओर बैठा वो अनजान आदमी शीला के मादक जिस्म के साथ छेड़खानी कर रहा था और उसके कामुक स्पर्श से शीला के भोसड़े का रस झरना फिर से शुरू हो गया था.. पीयूष शीला के स्तनों को अपने हिसाब से मसलते हुए पूरे मजे ले रहा था तो दूसरी तरफ शीला ने उस आदमी के लंड को सहला सहलाकर उसे पिक्चर से ज्यादा मज़ा देने लगी थी। शीला जैसी अनुभवी स्त्री के हाथों में लंड आने के बाद कोई कसर कैसे रह जाती भला.. !!
पीयूष से ओर रहा नहीं गया.. उसने शीला के कान में कहा.. "भाभी, कविता को भी सीखा दो ना आपकी तरह चूसना??"
शीला ने पीयूष के अहंकारी मुर्गे जैसे लंड के साथ अपनी जांघ रगड़ते हुए कहा "चिंता मत कर पीयूष.. कविता को में लंड चुसाई में एम.बी.ए करवा दूँगी.. मैं भी मदन के बगैर बहोत तकलीफ महसूस कर रही हूँ"
पीयूष: "आप कहें तो मैं कविता को कुछ दिनों के लिए मायके भेज दूँ??"
शीला: "और फिर??"
पीयूष: "फिर.. फिर मैं आपको..........!!"
शीला ने पीयूष के लंड को मुठ्ठी में पकड़कर उत्तेजनावश मसल दिया.. सिसकियाँ भरते हुए वो बोली.. "मुझसे तो अभी ही इसके बगैर रहा नहीं जा रहा.. आज रात का कुछ सेटिंग कर ना तू!!"
पीयूष: "आज रात का सेटिंग कैसे करू!! कविता को पता चल गया तो वो मेरी जान ले लेगी.. "
शीला: "कल तो मुझे तेरी माँ के साथ यात्रा पर जाना है.. आज का ही कुछ प्लान बना.. कुछ भी कर तू.. मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा"
शीला वास्तव में पीयूष के पतले लंड को सहलाते हुए उत्तेजित हो गई थी.. और शीला जब उत्तेजित हो जाती है तब वह सारे नियम और बंधन तोड़कर अपनी हवस बुजाने के काम में लग जाती है.. अच्छे बुरे का भेद भूल जाती है और अनाब-शनाब हरकतें करने लगती है..
शीला ने अपनी दोनों जांघों को भींचकर अपनी चुत की जलती आग को शांत करने की कोशिश की पर मामूली आग हो तो बुझेगी ना.. ये तो जंगल में लगी आग जैसी भीषण आग थी.. कैसे बुझती भला!!!
शीला और पीयूष एक दूसरे के जिस्मों से खेलने में मशरूफ़ थे तभी इंटरवल हुआ और हॉल में अचानक लाइट चालू हो गई.. घबराई हुई शीला ने फटाफट अपने स्तन को ब्लाउस के अंदर डाल और पीयूष ने तुरंत अपने लंड को पेंट में ठूस दिया.. चैन बंद करने का भी समय नहीं मिला.. उसने अपने शर्ट से पेंट के लंड वाले हिस्से को ढँक लिया.. और एकदम सामान्य होकर बैठ गया.. शीला ने देखा तो उसके बगल वाला पुरुष समय रहते अपने लंड को अंदर नहीं डाल पाया था.. उसने अपने लंड को रुमाल से ढँक लिया था.. शीला को ये देखकर हंसी आ गई.. लंड के ठुमके.. ऊपर रखे रुमाल से भी दिखाई दे रहे थे..
लंड ढीला होते ही पीयूष उठकर बाथरूम की तरफ गया.. पिंटू तो इन्टरवल के पहले ही छु-मंतर हो गया था.. कविता और शीला अब अकेली थी.. कविता उठकर शीला की बगल वाली सीट पर आकार बैठ गई.. ताकि उससे बात कर सकें
कविता: "भाभी.. आपने मेरी बरसों की तमन्ना पूरी कर दी.. आपका ये एहसान मैं ज़िंदगी भर नहीं भूलूँगी.. "
शीला: "कौन सी इच्छा??"
कविता: "पिंटू के साथ मूवी देखते हुए मजे करने की.. "
शीला: "हम्म.. तो फिर मजे किए की नहीं!! क्या क्या किया.. बता मुझे.. अच्छा हुआ ना जो तूने ब्रा और पेन्टी नहीं पहनी.. पहनी होती तो कितनी तकलीफ होती तुम दोनों को.. !! "
कविता: "हाँ भाभी.. आपकी सलाह मुझे बड़े काम आई.. पिंटू ने अंदर तक उंगली डाल दी थी.. इतना मज़ा आया की क्या बताऊँ!! और दोनों बॉल मसलते हुए मेरी निप्पलों को ऐसा कुरेद दिया है की अब तक जलन हो रही है!!"
शीला: "घर जाकर पीयूष से अपनी निप्पल चुसवा लेना.. जलन कम हो जाएगी.. तूने पिंटू का पकड़ा था क्या?"
कविता: "पकड़ा तो था.. पर चूस नहीं पाई.. मेरा बहोत दिल कर रहा था उसका चूसने का.. "
शीला: "तुझे पसंद है लंड चूसना?? पीयूष तो कह रहा था की मैं तुझे लंड चूसना सिखाऊँ.. और तू उसका मुंह में ही नहीं लेती..."
कविता: "आप तो जानती हो ना भाभी.. घर की मुर्गी दाल बराबर.. प्रेमी का लंड चूसना मुझे पसंद है.. पति का लंड मुंह में लेने में वो मज़ा कहाँ.. !! और इन पतियों का एक बार चूस लो तो हररोज लंड निकालकर मुंह के सामने रख देंगे.. "
शीला और कविता बातें कर रहे थे उतने में पीयूष पॉपकॉर्न ले कर आ गया.. कविता वापिस अपनी सीट पर जाकर बैठ गई और पीयूष उन दोनों के बीच में बैठ गया
शीला ने धीमे से पीयूष के कान में कहा "पॉपकॉर्न वाली उंगली कविता की चुत में मत घुसाना.. वरना जलने लगेगा उसे"
पीयूष: " कुछ भी कहो भाभी.. आप बड़ा मस्त चूसती हो!!"
शीला: "अरे मेरे राजा.. तू एक रात के लिए मुझे मिल.. दो घंटे तक तेरा लंड मुंह से नहीं निकालूँगी"
पीयूष: "आप तो जबरदस्त हो भाभी.. "
कविता: "ये तुम दोनों कब से क्या गुसपुस कर रहे हो? पीयूष तू मेरे साथ मूवी देखने आया है या भाभी के साथ? कब से उनके साथ चिपका हुआ है!"
पीयूष: "क्या यार कविता!! कुछ भी बोल रही है तू.. भाभी अकेले है तो वो बोर न हो जाएँ इसलिए कंपनी दे रहा था उन्हे"
कविता: "हाँ तो सिर्फ कंपनी ही देना.. कुछ और नहीं.. समझा!!"
हॉल में फिर से अंधेरा छा गया.. और उस अनजान शख्स ने अपने लंड से रुमाल हटा दिया.. जैसे चमकती बिजली में सांप नजर आता है वैसे ही पिक्चर की रोशनी में उसका लंड चमक रहा था.. लाल लाल सुपाड़े की नोक पर वीर्य की एक बूंद उभर आई थी.. शीला भूखी नज़रों से उसे तांक रही थी.. काफी तगड़ा मोटा लंड था.. पर उस अनजान शख्स का साथ उलझने में उसे डर लग रहा था.. इसलिए शीला ने अपने आप को रोक रखा.. पर दो घड़ी के लिए उसका भोसड़ा लालच में तो आ ही गया था.. शीला के चुपचाप बैठने के बावजूद उस आदमी ने अपना लंड उसके दर्शन के लिए खुला ही छोड़ दिया.. उसे आशा थी की लंड को देखकर कहीं शीला का मन कर जाएँ..
दो तीन मिनट के बाद, पिंटू वापिस कविता के पास आकार बैठ गया.. दूसरी तरफ पीयूष अपने हाथों से शीला के गदराए जोबन पर नेट-प्रेक्टिस कर रहा था.. पिंटू ने भी वही हरकत कविता के स्तनों के साथ शुरू कर दी
शीला ने अब अपने ब्लाउस के सारे हुक खोल दिए.. एक स्तन को पीयूष मसल रहा था और दूसरे स्तन पर उसने उस अनजान आदमी का हाथ पकड़कर रख दिया.. उस आदमी को दौड़ना था और स्लोप मिल गया.. वह बेरहमी से शीला के एक स्तन को मरोड़ने मसलने लग गया..
दो स्तन.. दो अलग अलग आदमी से एक साथ मसलवा रही साहसी शीला ने हिम्मत करके उस अनजान आदमी का लंड अपनी मुठ्ठी में पकड़ लिया और हिलाने लग गई.. उसके दूसरे हाथ में पीयूष का लंड था.. दो हाथ में दो लंड.. और फिर भी उसकी भोस खाली.. ये कैसी विडंबना!!! शीला को अपने भोसड़े के लिए सहानुभूति हो रही थी.. उस शख्स के लंड की साइज़ देखकर शीला फिदा हो गई.. और उसे जीवा और रघु के दमदार लंड की याद भी आ गई।
शीला की निप्पल से खेलते हुए पीयूष ने उनके कान में कहा "भाभी ये क्या कर रही हो आप? कौन है ये आदमी?"
शीला: "किसकी बात कर रहा है तू?"
पीयूष: "उस आदमी की.. जिसका आपने पकड़ रखा है और जो आपके दूसरे स्तन को मसल रहा है.. अभी मेरा हाथ उसके हाथ से टकरा गया"
शीला: "पीयूष.. तुझे मेरे साथ छेड़खानी करते देख.. इन्टरवल में वो मुझे ब्लेकमेल करने लगा.. की अगर मैं उसे नहीं दबाने दूँगी तो वो कविता को जाकर सबकुछ बता देगा.. अब तेरे भले के लिए मुझे एक अनजान आदमी को मेरे शरीर के साथ खेलने की छूट देनी पड़ी.. क्या करती!!"
सुनकर पीयूष चुप हो गया..
पिक्चर खतम होने की थी.. और हर कोई आखिरी पड़ाव पर था.. आखिरी ओवर में २० रन बनाने हो और जिस तरह बेट्समेन चारों तरफ अंधाधुन शॉट लगाता है.. बिल्कुल उसी तरह.. उस पूरी लाइन में धड़ल्ले से स्तन मर्दन पूरे जोश के साथ चल रहा था..
दो दो पुरुषों के साथ एक साथ बबले दबवाते हुए शीला ने एक विचित्र हरकत कर दी
पीयूष के कान में उसने कहा "ये आदमी मुझे मुंह में लेने के लिए कह रहा है.. पर मैं नहीं लेने वाली.. कुछ भी हो जाएँ.. मुझे ये सब नहीं पसंद.. ये तो तेरे भले के लिए मैं अपने बॉल दबवाने के लिए राजी हुई.. अब कंधा दिया तो वो कान में मूतने की बात कर रहा है"
पीयूष: "मत लेना मुंह में भाभी.. पिक्चर अब १० मिनट में खतम हो जाएगा.. तब तक कैसे भी कर के उसे टाल दो.. "
एक दो मिनट के लिए शांत रहकर शीला ने अपना घातक यॉर्कर फेंका..
"पीयूष.. वो मुझे धमकी दे रहा है की अभी के अभी वो कविता को सब बताया देगा.. क्या करू मैं? वो बता देगा तो गजब हो जाएगा"
पीयूष की गांड फट कर फ्लावर हो गई..
"अच्छा.. ब्लैकमेल कर रहा है आपको??"
"हाँ.. अब जल्दी बोल.. क्या करू मैं? अगर ये बता देगा तो कविता तेरी माँ चोद देगी" शीला अब रोहित शर्मा की तरह फटके लगा रही थी
"अब चूस लो भाभी.. और क्या कर सकते है" पीयूष अपनी गांड बचाने में लग गया..
पीयूष का लंड हिलाते हिलाते शीला दूसरी तरफ झुक गई और उस शख्स के फुँकारते लंड को एक पल में मुंह में भर लिया.. वो आदमी तो भोंचक्का रह गया.. और शीला के सिर पर हाथ फेरता रहा.. शीला ने अपने मुंह में उसके लंड को इतना टाइट पकड़ रखा था जैसे मदारी के चिमटे में जहरीला सांप फंसा हो..
सात आठ बार शीला ने लंड को पूरा बाहर निकालकर अपने कंठ तक अंदर घुसा दिया.. और ऐसा चूसा.. ऐसा चूसा की उसके लंड का सारा जहर शीला के मुंह में ही निकल गया.. और उसी के साथ हॉल में रोशनी चालू हो गई.. शीला ने तुरंत उसका लंड मुंह से निकाला और खड़ी हो गई.. अपने बाल ठीक करने लगी.. मुंह में भरे हुए वीर्य को थूकने का मौका नहीं मिल इसलिए वो उस अनजान पुरुष का सारा माल निगल गई.. पीयूष स्तब्ध होकर इस कामुक देवी और उसकी हरकतों को देखता ही रह गया.. शीला को अपने ब्लाउस के हुक बंद करने का समय नहीं मिल इसलिए उसने अपने स्तनों को पल्लू से ढँक दिया था.. शीला ने देखा की पीछे की लाइन में बैठी हुई स्त्री अपने ब्लाउस के हुक बंद कर रही थी.. उसकी नजर शीला से मिली और शीला ने मुस्कुरा दिया.. जैसे उसके राज को पकड़ लिया हो.. उस स्त्री ने अपने होंठ पर उंगली रखकर शीला को इशारा किया.. शीला ने तुरंत अपने होंठ पर चिपके वीर्य को पोंछ लिया.. और उस शरमाते हुए उस स्त्री की तरफ आभार प्रकट करते हुए आगे निकल गई..
रात के १२:३० बज चुके थे.. तीनों रिक्शा में बैठकर घर पहुंचे.. रिक्शा में भी पीयूष, शीला और कविता के बीच में बैठा था.. शीला के स्तन दबाते दबाते कब घर आ गया ये पता ही नहीं चला.. कविता सब देख रही थी.. पर वो क्यों कुछ बोलती?
Bhai sheela ko us patle duble dobi se chudwao..or sheela k beto ko v story me laao tb or maza aayega

Ssaandar dostपीयूष: "और अगर फिगर दबाने के चक्कर में सर पर जूते पड़ेंगे तो!!"
शीला: "तेरे सर पर जूते नहीं पड़ेंगे.. मेरी गारंटी है.. "
कविता और शीला दोनों हंस पड़े.. तभी शो का टाइम हो गया और हॉल का गेट खुल गया.. ऑडियंस अंदर जाने लगी..
पीयूष: "चलिए भाभी.. चलते है अंदर"
तीनों अंदर जाने के लाइन में खड़े हो गए.. सब से आगे कविता.. पीछे पीयूष.. और उसके पीछे शीला.. भीड़ की धक्कामुक्की की आड़ में शीला ने जान बूझकर अपने बम्पर पीयूष के पीठ पर दबा दिए..
शीला भाभी के इस प्रथम हमले से ही पीयूष पिघल गया..
टिकट का नंबर देखकर अपनी लाइन में घुसते हुए पहले शीला भाभी, फिर उसकी बगल में कविता और अंत में पीयूष.. इस तरह बैठ गए। शीला और कविता के पसीने छूट गए.. अब पिंटू को कैसे कविता के साथ सेट करेंगे!! अब पिंटू के साथ पिक्चर देखने की और मजे करने की इच्छा मन में ही रह जाएगी, ये सोचकर कविता का दिल बैठ गया..
शीला का दिमाग काम पर लग गया.. अब क्या करू?? कविता ने शीला की कमर पर अपनी कुहनी मारकर इशारे से पूछा.. अब क्या करेंगे?
पीयूष तो मस्ती से स्क्रीन पर चल रही ऐड्वर्टाइज़्मन्ट की मॉडलों को ताड़ रहा था
शीला को यकीन था की इतना उत्तेजित करने के बाद पीयूष उसके बगल में ही बैठेगा.. और मौका मिलते ही पिंटू और कविता साथ में अपना कार्यक्रम कर पाएंगे.. पर ये तो सब उलटा हो गया!! कविता बार बार कुहनी मारकर शीला से पूछ रही थी की अब क्या किया जाएँ!!
शीला ने फुसफुसाकर कविता के कान में कहा "अब सिर्फ पिक्चर ही देखेंगे.. और तो कुछ हो नहीं सकता"
"भाभी प्लीज.. कुछ कीजिए ना!!" कविता की शक्ल रोने जैसी हो गई.. उसने देखा की पिंटू कब से उनकी सीटों की लाइन के इर्दगिर्द चक्कर काट रहा था
शीला और कविता दोनों निराश होकर अपनी सीट पर बैठे रहे.. कविता की नजर, कोने में खड़े पिंटू पर थी.. वो भी इशारे के इंतज़ार में था। शीला का दिमाग और भोसड़ा, इस समस्या का निराकरण ढूँढने के काम पर लगे हुए थे.. तभी शीला के दिमाग में चिंगारी हुई और उसकी चुत में ४४० वॉल्ट का झटका लगा.. वो एकदम से खड़ी हो गई..
"बाप रे.. कितनी गर्मी लग रही है.. मैं यहाँ कोने में नहीं बैठूँगी.. पीयूष, तू इस तरफ बैठ जा.. "
पीयूष: "कोई बात नहीं भाभी.. आप यहाँ आ जाइए.. मैं वहाँ चला जाता हूँ" कहते ही पीयूष खड़ा हो गया और शीला की सीट पर बैठ गया..
कविता की जान में जान आई। पीयूष अब शीला और कविता के बीच में बैठ गया.. शीला का इशारा मिलते ही, पिंटू कविता की बगल वाली सीट पर चुपके से बैठ गया
जल बिन मछली की तरह तड़प रही कविता को ऐसा महसूस हुआ जैसे उसे वापिस पानी में डाल दिया गया हो.. उसका चेहरा खिल उठा
स्क्रीन पर पिक्चर शुरू हो गया.. पूरे हॉल में अंधेरा छा गया.. शीला ने धीर से अपने पैर से पीयूष के पैरों का स्पर्श किया.. पर पीयूष ने तुरंत अपना पैर हटा लिया.. पीयूष की इस सज्जनता पर शीला को बड़ा गुस्सा आया..
दोनों सीटों के बीच के हेंडल पर जहां पीयूष ने अपना हाथ रखा था.. वहीं पर शीला ने अपना हाथ रख दिया.. लेकिन पीयूष ने अपना हाथ दूर ले लिया।
पिक्चर शुरू हुए आधा घंटा बीत चुका था.. कविता और पिंटू की छेड़खानियाँ शुरू हो गई थी.. पर शीला और पीयूष के बीच कुछ नहीं हो पा रहा था.. शीला के क्रोध का पारा चढ़ रहा था.. बहेनचोद समझता क्या है ये अपने आप को!! बड़ा आया सीधा साहूकार.. !! लगता है अब मुझे अपने ब्रह्मास्त्र का उपयोग करना ही पड़ेगा.. शीला ने घुटने मोड़कर अपने दोनों पैर सीट के ऊपर ले लिए.. अब पीयूष की जांघ पर शीला का घुटना छु रहा था.. और पीयूष इस स्पर्श से अपने आप को दूर कर पाने की स्थिति में नहीं थी। समस्या ये हुई की शीला के दूसरी तरफ बैठे पुरुष की जांघ पर भी शीला का दूसरा घुटना छुने लगा.. वो आदमी अपनी उँगलियाँ शीला के घुटने पर फेरने लग गया.. हालांकि शीला का सर ध्यान पीयूष पर ही था.. वो देखना चाहती थी की पीयूष के लंड पर उसके स्पर्श का कोई असर हो रहा था या नहीं!! वो तो शीला नहीं जान पाई.. पर शीला के बगल में बैठे आदमी का टावर खड़ा हो गया..
शीला का लक्ष्य था पीयूष का लंड.. और पाँच मिनट बीत गई.. पर पीयूष ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.. शीला की जांघों पर वो बगल में बैठा हरामी हाथ फेरने लगा.. पर शीला को इस बात की परवाह नहीं थी.. और वो आदमी इस बात का पूरा फायदा उठा रहा था.. करीब ४५-४६ की उम्र के उस आदमी को तिरछी नजर से एक बार देख लिया..
शीला ने देखा की पीयूष तो कविता के बबलों पर हाथ फेर रहा था.. शीला को अपने स्तनों का अपमान होता दिखा.. रत्नागिरी आम मिल रहे है और ये बेवकूफ कच्चे आम के पीछे पड़ा था.. कुछ करना पड़ेगा
शीला ने अपने घाघरे के अंदर हाथ डाला और तीन उँगलियाँ अपनी भोस में डालकर अंदर बाहर करते ही अंदर से पानी का झरना फुट पड़ा.. अपनी गीली उंगलियों को उसने अपने खुले घुटने पर रगड़ दी.. गरम भोसड़े की खुशबू पूरे वातावरण में फैलने लगी..
चुत चाटने के अनुभवी पुरुष.. इस खुशबू को बखूबी पहचानते है.. पानी पी रहे चीते को शिकार की खुशबू आते ही जिस तरह वो गर्दन उठाकर आजू बाजू देखने लगता है वैसे ही.. आगे पीछे की सीट पर बैठे मर्द.. चारों तरफ देखते हुए इस खुशबू के स्त्रोत को ढूँढने लगे.. साथ ही साथ सोचने लगे की कही हॉल के अंदर ही किसी ने चुदाई तो शुरू नहीं कर दी!! थोड़ी देर यहाँ वहाँ देखने के बाद वापिस वो सारे मूवी देखने में व्यस्त हो गए।
दूसरी तरफ शीला की इस हरकत का असर.. तीन सीट छोड़कर बैठे पिंटू के लंड पर तुरंत होने लगी.. चुत की गंध परखने के लिए वो यहाँ वहाँ देखने लगा.. पीयूष कविता के अपने तरफ वाले स्तन को मसल रहा था.. शीला को अपनी चुत की गंध का थोड़ा सा असर होता दिखा.. अब उसने फिर से अपनी चुत में तीन उँगलियाँ डाली और गीली उंगलियों को अपनी काँखों के नीचे रगड़ दिया.. और वहीं हाथ उसने पीयूष के कंधे पर इस तरह रख दिया जैसे दो दोस्त रखते है.. इस तरह शीला की चुत-रस लगी काँख, पीयूष के चेहरे के बिल्कुल करीब आ गई.. और शीला का एक स्तन की गोलाई पीयूष की कोहनी से रगड़ खाने लगी..
इस दोहरे हमले के आगे पीयूष ने घुटने टेक दिए.. अपने पसंदीदा बड़े बड़े स्तनों का स्पर्श मिलते ही वो जैसे स्वर्ग की सैर पर निकल गया.. उसे शीला भाभी के कहे शब्द याद आ गए "जूते नहीं पड़ेंगे.. मेरी गारंटी है".. पीयूष को अपनी मूर्खता का अब एहसास हुआ.. शीला भाभी का इशारा वो तब समझ नहीं पाया था.. अपने स्तन दबाने के लिए वो उसे परोक्ष आमंत्रण दे रही थी..
पीयूष ने अपना हाथ कविता के स्तन से हटा लिया और अपना रुख शीला की ओर किया.. अपने हाथ मोड़कर वो चुपके से शीला के स्तनों को छुने लगा.. और तिरछी नजर से शीला भाभी की प्रतिक्रिया देखने लगा..
शीला से अब रहा नहीं गया.. अपना चेहरा पीयूष कान के पास ले जाकर वो धीरे से बोली "आधा पिक्चर खतम हो गया.. थोड़ी देर में इन्टरवल हो जाएगा.. और तू अभी तक ट्रैलर पर ही अटका पड़ा है!! अगर मन कर रहा है तो दबा ले.. शरमाता क्यों है?? इतना अंधेरा है, किसी को कुछ भी पता नहीं चलेगा"
पीयूष की सांसें तेज हो गई.. आज अगर कविता साथ नहीं होती.. तो दोनों हाथों से भाभी के चुचे रगड़ लेता..
दूसरी तरफ पिंटू के पेंट में हाथ डालकर उसका लंड हिला रही कविता सोच रही थी की आज पीयूष साथ नहीं होता तो झुककर पिंटू का लंड चूस लेती..
शीला ने ब्लाउस के तीन हुक खोल दिए और अपना दायाँ उरोज बाहर निकाल दिया.. जैसे तकिये को कवर से निकाल रही हो बिल्कुल वैसे ही!! और पीयूष के हाथों में ही थमा दिया.. और बोली "कविता को पता नहीं चलेगा.. अंधेरे में तुझे जो करना है कर ले.. जितना मज़ा करना हो मेरी तरफ से पूरी छूट है"
शीला की बात सुनकर पीयूष में हिम्मत आ गई.. इतना मूर्ख तो वो था नहीं की हाथ में नंगा स्तन हो और वो दबाए ना!! शीला के ढाई किलो वज़न वाला चुचा हाथ में पड़ते ही पीयूष के तनबदन में आग लग गई.
"ओहह भाभी.. गजब के है ये तो.. माय गॉड!! इन स्तनों को छुने के लिए मैं कितना बेचैन था.. आज तो किस्मत खुल गई मेरी" अपने नसीब को शाबाशी देने लगा पीयूष.. और उसके बगल में उसकी पत्नी अपने प्रेमी से स्तन दबवा रही थी
"मज़ा आ रहा है ना तुझे? दबा ले जितना मन करे.. "बड़े ही कामुक अंदाज से शीला ने कहा और पीयूष की जांघ पर हाथ फेरते फेरते उसके लंड तक पहुँच गई और पतलून के ऊपर से ही दबाने लगी। शीला का स्पर्श अपने लंड पर होते ही पीयूष अधिक उत्तेजित हो गया.. और उसने जोर से शीला के स्तन को मसल दिया..
"आह्ह.. जरा धीरे से कर पीयूष.. दर्द हो रहा है" शीला कराह उठी
"रहा नहीं जाता भाभी.. क्या करू!!"
"नहीं रहा जाता तो बाहर निकाल.. पत्थर जैसा सख्त हो गया है"
"भाभी मुझे कविता का टेंशन है.. कहीं उसने देख लिया तो मुसीबत आ जाएगी" डरते हुए पीयूष ने कहा
पर उतनी देर में तो शीला के अनुभवी हाथों ने पीयूष के पेंट की चैन उतारकर अपना हाथ अंदर सरका दिया और कच्छे के ऊपर से ही लंड को पकड़ लिया।
"ओहह भाभी.. पर.. पर.. कविता.... " पीयूष के शब्द बाहर ही निकले क्योंकी शीला ने उसका कच्छा सरकाकर उसका लंड बाहर निकाल लिया था। फॉलो-ओन होने के बाद दूसरी इनिंगस में भी जब ज़ीरो पर तीन विकेट गिर जाए.. और बेट्समेन निसहाय अवस्था में देखते ही रह जाए.. बिल्कुल वैसे ही पीयूष भी शीला के बाउन्सर के सामने निसहाय था.. शीला ने झुककर पीयूष के कडक लोड़े के टोपे पर किस किया.. जितना हो सकता था अपने मुंह में ले लिया.. और चूसने लगी..
शीला के मुंह की गर्मी और लार का स्पर्श.. पीयूष को उसका गुलाम बनाने के लिए काफी था... तिरछी नज़रों से अपने पति का लंड चूस रही शीला को कविता देख रही थी.. और ये देखकर ज्यादा उत्तेजित होकर वह पिंटू का लंड मसल रही थी। शीला भाभी की सलाह अनुसार उसने ब्रा-पेन्टी नहीं पहनी थी.. और पिंटू इस सुवर्ण अवसर को गंवाना नहीं चाहता था.. उसने कविता के स्कर्ट में हाथ डाल दिया और अपनी दो उंगली चुत में डालकर दस पंद्रह बार फक-फक की आवाज के साथ फुल स्पीड के साथ अंदर बाहर करते ही कविता की चुत झड़ गई.. और साथ में ही पिंटू की पिचकारी से गरम वीर्य रिसकर कविता के हाथों के सौन्दर्य को ओर बढ़ाने लगा..
शीला की बायीं ओर बैठा वो अनजान आदमी शीला के मादक जिस्म के साथ छेड़खानी कर रहा था और उसके कामुक स्पर्श से शीला के भोसड़े का रस झरना फिर से शुरू हो गया था.. पीयूष शीला के स्तनों को अपने हिसाब से मसलते हुए पूरे मजे ले रहा था तो दूसरी तरफ शीला ने उस आदमी के लंड को सहला सहलाकर उसे पिक्चर से ज्यादा मज़ा देने लगी थी। शीला जैसी अनुभवी स्त्री के हाथों में लंड आने के बाद कोई कसर कैसे रह जाती भला.. !!
पीयूष से ओर रहा नहीं गया.. उसने शीला के कान में कहा.. "भाभी, कविता को भी सीखा दो ना आपकी तरह चूसना??"
शीला ने पीयूष के अहंकारी मुर्गे जैसे लंड के साथ अपनी जांघ रगड़ते हुए कहा "चिंता मत कर पीयूष.. कविता को में लंड चुसाई में एम.बी.ए करवा दूँगी.. मैं भी मदन के बगैर बहोत तकलीफ महसूस कर रही हूँ"
पीयूष: "आप कहें तो मैं कविता को कुछ दिनों के लिए मायके भेज दूँ??"
शीला: "और फिर??"
पीयूष: "फिर.. फिर मैं आपको..........!!"
शीला ने पीयूष के लंड को मुठ्ठी में पकड़कर उत्तेजनावश मसल दिया.. सिसकियाँ भरते हुए वो बोली.. "मुझसे तो अभी ही इसके बगैर रहा नहीं जा रहा.. आज रात का कुछ सेटिंग कर ना तू!!"
पीयूष: "आज रात का सेटिंग कैसे करू!! कविता को पता चल गया तो वो मेरी जान ले लेगी.. "
शीला: "कल तो मुझे तेरी माँ के साथ यात्रा पर जाना है.. आज का ही कुछ प्लान बना.. कुछ भी कर तू.. मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा"
शीला वास्तव में पीयूष के पतले लंड को सहलाते हुए उत्तेजित हो गई थी.. और शीला जब उत्तेजित हो जाती है तब वह सारे नियम और बंधन तोड़कर अपनी हवस बुजाने के काम में लग जाती है.. अच्छे बुरे का भेद भूल जाती है और अनाब-शनाब हरकतें करने लगती है..
शीला ने अपनी दोनों जांघों को भींचकर अपनी चुत की जलती आग को शांत करने की कोशिश की पर मामूली आग हो तो बुझेगी ना.. ये तो जंगल में लगी आग जैसी भीषण आग थी.. कैसे बुझती भला!!!
शीला और पीयूष एक दूसरे के जिस्मों से खेलने में मशरूफ़ थे तभी इंटरवल हुआ और हॉल में अचानक लाइट चालू हो गई.. घबराई हुई शीला ने फटाफट अपने स्तन को ब्लाउस के अंदर डाल और पीयूष ने तुरंत अपने लंड को पेंट में ठूस दिया.. चैन बंद करने का भी समय नहीं मिला.. उसने अपने शर्ट से पेंट के लंड वाले हिस्से को ढँक लिया.. और एकदम सामान्य होकर बैठ गया.. शीला ने देखा तो उसके बगल वाला पुरुष समय रहते अपने लंड को अंदर नहीं डाल पाया था.. उसने अपने लंड को रुमाल से ढँक लिया था.. शीला को ये देखकर हंसी आ गई.. लंड के ठुमके.. ऊपर रखे रुमाल से भी दिखाई दे रहे थे..
लंड ढीला होते ही पीयूष उठकर बाथरूम की तरफ गया.. पिंटू तो इन्टरवल के पहले ही छु-मंतर हो गया था.. कविता और शीला अब अकेली थी.. कविता उठकर शीला की बगल वाली सीट पर आकार बैठ गई.. ताकि उससे बात कर सकें
कविता: "भाभी.. आपने मेरी बरसों की तमन्ना पूरी कर दी.. आपका ये एहसान मैं ज़िंदगी भर नहीं भूलूँगी.. "
शीला: "कौन सी इच्छा??"
कविता: "पिंटू के साथ मूवी देखते हुए मजे करने की.. "
शीला: "हम्म.. तो फिर मजे किए की नहीं!! क्या क्या किया.. बता मुझे.. अच्छा हुआ ना जो तूने ब्रा और पेन्टी नहीं पहनी.. पहनी होती तो कितनी तकलीफ होती तुम दोनों को.. !! "
कविता: "हाँ भाभी.. आपकी सलाह मुझे बड़े काम आई.. पिंटू ने अंदर तक उंगली डाल दी थी.. इतना मज़ा आया की क्या बताऊँ!! और दोनों बॉल मसलते हुए मेरी निप्पलों को ऐसा कुरेद दिया है की अब तक जलन हो रही है!!"
शीला: "घर जाकर पीयूष से अपनी निप्पल चुसवा लेना.. जलन कम हो जाएगी.. तूने पिंटू का पकड़ा था क्या?"
कविता: "पकड़ा तो था.. पर चूस नहीं पाई.. मेरा बहोत दिल कर रहा था उसका चूसने का.. "
शीला: "तुझे पसंद है लंड चूसना?? पीयूष तो कह रहा था की मैं तुझे लंड चूसना सिखाऊँ.. और तू उसका मुंह में ही नहीं लेती..."
कविता: "आप तो जानती हो ना भाभी.. घर की मुर्गी दाल बराबर.. प्रेमी का लंड चूसना मुझे पसंद है.. पति का लंड मुंह में लेने में वो मज़ा कहाँ.. !! और इन पतियों का एक बार चूस लो तो हररोज लंड निकालकर मुंह के सामने रख देंगे.. "
शीला और कविता बातें कर रहे थे उतने में पीयूष पॉपकॉर्न ले कर आ गया.. कविता वापिस अपनी सीट पर जाकर बैठ गई और पीयूष उन दोनों के बीच में बैठ गया
शीला ने धीमे से पीयूष के कान में कहा "पॉपकॉर्न वाली उंगली कविता की चुत में मत घुसाना.. वरना जलने लगेगा उसे"
पीयूष: " कुछ भी कहो भाभी.. आप बड़ा मस्त चूसती हो!!"
शीला: "अरे मेरे राजा.. तू एक रात के लिए मुझे मिल.. दो घंटे तक तेरा लंड मुंह से नहीं निकालूँगी"
पीयूष: "आप तो जबरदस्त हो भाभी.. "
कविता: "ये तुम दोनों कब से क्या गुसपुस कर रहे हो? पीयूष तू मेरे साथ मूवी देखने आया है या भाभी के साथ? कब से उनके साथ चिपका हुआ है!"
पीयूष: "क्या यार कविता!! कुछ भी बोल रही है तू.. भाभी अकेले है तो वो बोर न हो जाएँ इसलिए कंपनी दे रहा था उन्हे"
कविता: "हाँ तो सिर्फ कंपनी ही देना.. कुछ और नहीं.. समझा!!"
हॉल में फिर से अंधेरा छा गया.. और उस अनजान शख्स ने अपने लंड से रुमाल हटा दिया.. जैसे चमकती बिजली में सांप नजर आता है वैसे ही पिक्चर की रोशनी में उसका लंड चमक रहा था.. लाल लाल सुपाड़े की नोक पर वीर्य की एक बूंद उभर आई थी.. शीला भूखी नज़रों से उसे तांक रही थी.. काफी तगड़ा मोटा लंड था.. पर उस अनजान शख्स का साथ उलझने में उसे डर लग रहा था.. इसलिए शीला ने अपने आप को रोक रखा.. पर दो घड़ी के लिए उसका भोसड़ा लालच में तो आ ही गया था.. शीला के चुपचाप बैठने के बावजूद उस आदमी ने अपना लंड उसके दर्शन के लिए खुला ही छोड़ दिया.. उसे आशा थी की लंड को देखकर कहीं शीला का मन कर जाएँ..
दो तीन मिनट के बाद, पिंटू वापिस कविता के पास आकार बैठ गया.. दूसरी तरफ पीयूष अपने हाथों से शीला के गदराए जोबन पर नेट-प्रेक्टिस कर रहा था.. पिंटू ने भी वही हरकत कविता के स्तनों के साथ शुरू कर दी
शीला ने अब अपने ब्लाउस के सारे हुक खोल दिए.. एक स्तन को पीयूष मसल रहा था और दूसरे स्तन पर उसने उस अनजान आदमी का हाथ पकड़कर रख दिया.. उस आदमी को दौड़ना था और स्लोप मिल गया.. वह बेरहमी से शीला के एक स्तन को मरोड़ने मसलने लग गया..
दो स्तन.. दो अलग अलग आदमी से एक साथ मसलवा रही साहसी शीला ने हिम्मत करके उस अनजान आदमी का लंड अपनी मुठ्ठी में पकड़ लिया और हिलाने लग गई.. उसके दूसरे हाथ में पीयूष का लंड था.. दो हाथ में दो लंड.. और फिर भी उसकी भोस खाली.. ये कैसी विडंबना!!! शीला को अपने भोसड़े के लिए सहानुभूति हो रही थी.. उस शख्स के लंड की साइज़ देखकर शीला फिदा हो गई.. और उसे जीवा और रघु के दमदार लंड की याद भी आ गई।
शीला की निप्पल से खेलते हुए पीयूष ने उनके कान में कहा "भाभी ये क्या कर रही हो आप? कौन है ये आदमी?"
शीला: "किसकी बात कर रहा है तू?"
पीयूष: "उस आदमी की.. जिसका आपने पकड़ रखा है और जो आपके दूसरे स्तन को मसल रहा है.. अभी मेरा हाथ उसके हाथ से टकरा गया"
शीला: "पीयूष.. तुझे मेरे साथ छेड़खानी करते देख.. इन्टरवल में वो मुझे ब्लेकमेल करने लगा.. की अगर मैं उसे नहीं दबाने दूँगी तो वो कविता को जाकर सबकुछ बता देगा.. अब तेरे भले के लिए मुझे एक अनजान आदमी को मेरे शरीर के साथ खेलने की छूट देनी पड़ी.. क्या करती!!"
सुनकर पीयूष चुप हो गया..
पिक्चर खतम होने की थी.. और हर कोई आखिरी पड़ाव पर था.. आखिरी ओवर में २० रन बनाने हो और जिस तरह बेट्समेन चारों तरफ अंधाधुन शॉट लगाता है.. बिल्कुल उसी तरह.. उस पूरी लाइन में धड़ल्ले से स्तन मर्दन पूरे जोश के साथ चल रहा था..
दो दो पुरुषों के साथ एक साथ बबले दबवाते हुए शीला ने एक विचित्र हरकत कर दी
पीयूष के कान में उसने कहा "ये आदमी मुझे मुंह में लेने के लिए कह रहा है.. पर मैं नहीं लेने वाली.. कुछ भी हो जाएँ.. मुझे ये सब नहीं पसंद.. ये तो तेरे भले के लिए मैं अपने बॉल दबवाने के लिए राजी हुई.. अब कंधा दिया तो वो कान में मूतने की बात कर रहा है"
पीयूष: "मत लेना मुंह में भाभी.. पिक्चर अब १० मिनट में खतम हो जाएगा.. तब तक कैसे भी कर के उसे टाल दो.. "
एक दो मिनट के लिए शांत रहकर शीला ने अपना घातक यॉर्कर फेंका..
"पीयूष.. वो मुझे धमकी दे रहा है की अभी के अभी वो कविता को सब बताया देगा.. क्या करू मैं? वो बता देगा तो गजब हो जाएगा"
पीयूष की गांड फट कर फ्लावर हो गई..
"अच्छा.. ब्लैकमेल कर रहा है आपको??"
"हाँ.. अब जल्दी बोल.. क्या करू मैं? अगर ये बता देगा तो कविता तेरी माँ चोद देगी" शीला अब रोहित शर्मा की तरह फटके लगा रही थी
"अब चूस लो भाभी.. और क्या कर सकते है" पीयूष अपनी गांड बचाने में लग गया..
पीयूष का लंड हिलाते हिलाते शीला दूसरी तरफ झुक गई और उस शख्स के फुँकारते लंड को एक पल में मुंह में भर लिया.. वो आदमी तो भोंचक्का रह गया.. और शीला के सिर पर हाथ फेरता रहा.. शीला ने अपने मुंह में उसके लंड को इतना टाइट पकड़ रखा था जैसे मदारी के चिमटे में जहरीला सांप फंसा हो..
सात आठ बार शीला ने लंड को पूरा बाहर निकालकर अपने कंठ तक अंदर घुसा दिया.. और ऐसा चूसा.. ऐसा चूसा की उसके लंड का सारा जहर शीला के मुंह में ही निकल गया.. और उसी के साथ हॉल में रोशनी चालू हो गई.. शीला ने तुरंत उसका लंड मुंह से निकाला और खड़ी हो गई.. अपने बाल ठीक करने लगी.. मुंह में भरे हुए वीर्य को थूकने का मौका नहीं मिल इसलिए वो उस अनजान पुरुष का सारा माल निगल गई.. पीयूष स्तब्ध होकर इस कामुक देवी और उसकी हरकतों को देखता ही रह गया.. शीला को अपने ब्लाउस के हुक बंद करने का समय नहीं मिल इसलिए उसने अपने स्तनों को पल्लू से ढँक दिया था.. शीला ने देखा की पीछे की लाइन में बैठी हुई स्त्री अपने ब्लाउस के हुक बंद कर रही थी.. उसकी नजर शीला से मिली और शीला ने मुस्कुरा दिया.. जैसे उसके राज को पकड़ लिया हो.. उस स्त्री ने अपने होंठ पर उंगली रखकर शीला को इशारा किया.. शीला ने तुरंत अपने होंठ पर चिपके वीर्य को पोंछ लिया.. और उस शरमाते हुए उस स्त्री की तरफ आभार प्रकट करते हुए आगे निकल गई..
रात के १२:३० बज चुके थे.. तीनों रिक्शा में बैठकर घर पहुंचे.. रिक्शा में भी पीयूष, शीला और कविता के बीच में बैठा था.. शीला के स्तन दबाते दबाते कब घर आ गया ये पता ही नहीं चला.. कविता सब देख रही थी.. पर वो क्यों कुछ बोलती?
शुक्रिया भाई..Wow..............superb.............amazing................awesome update
Aag hi laga di vakharia Bhai

शुक्रिया भाईbaht sundr update bhai

ThanksMast update

UpdatedBhai pllzzz update de do
