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Romance Love in College. दोस्ती प्यार में बदल गई❣️ (completed)

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Last edited:

sunoanuj

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Bhaut hee jabardast story and update…. 👏🏻👏🏻👏🏻
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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DEVIL MAXIMUM

"सर्वेभ्यः सर्वभावेभ्यः सर्वात्मना नमः।"
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मोहब्बत कोई खेल नहीं होता. मोहब्बत की राहो में, अफ़साने हज़ार मिलते हैं,
दिल से मोहब्बत करने वाले, सच्चे दीवाने कहाँ मिलते हैं।
याद करके आँसू बहाने वाले, सच्चे आशिक नहीं होते।
सच्चे महबूब रोते नहीं है, महबूबा की याद में ताजमहल बनवाते हैं।
और धड़कती सांसों का कोई मोल नहीं होता, मोहब्बत कोई खेल नहीं होता.
WWWWWWWOOOOOOOOWWWWW
"नजर से दूर है फिर भी फिजा में शामिल है कि तेरे प्यार की खुशबू हवा में शामिल है, हम चाह कर भी तेरे पास आ नहीं सकते कि दूर रहना भी, मेरी वफा में शामिल है"


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Update 9

"इस बात से लगा लेना मेरी साखियत का अंदाज़ा, वो लोग भी मुझे ही सलाम करते हैं, जिन्हे तू सलाम करता हो"

ये बोलकर वो लोग निकल जाते हैं
वहां सेऔर क्लास में जाकर बैठ जाते हैं! बस और कुछ खास नहीं होता उस दिन, ऐसे ही दिन बीते हैं,
एक दिन वीर और सनी क्लास में आज कुछ जल्दी आते हैं और अपनी डेस्क पर बैठ के बातें कर रहे होते हैं तभी...


अब आगे:

सामने से दो लड़कियां क्लास में आती हैं जिन्हें वीर और सनी एक टक देखते ही रह जाते हैं, वो दोनों धीरे-धीरे चलकर उन दोनों के पास आती हैं!

वो कोई और नहीं बल्कि अपनी सुप्रिया और कंचन ही थी! दोनो का ध्यान उनकी तरफ केवल एक बार ही गया था
और फिर अपनी बातों में लग गई थी, इधर ये दोनो भी अपनी बातों को भूल कर उनको देखने में ही लगे रहे!
अचानक सुप्रिया को कुछ एहसास हुआ तो उसने अपनी बेंच से नज़र घुमाके देखा, तो दोनो उनकी तरफ ही देख रहे थे!

सुप्रिया की नजरों का पिछा कंचन ने भी किया तो यहीं पाया, जैसे उसने उसकी नजर सनी से टकराई,

उसने अपनी नजर झुका ली पर सुप्रिया ने ऐसा नहीं किया वो सवालिया नजरों से और चेहरे पर मुस्कुराहट लिए हुए!

सुप्रिया: क्या बात है वीर! ऐसे क्या देख रहे हो? कुछ गड़बड़ है क्या?

वीर: नहीं प्रिया बस ऐसे ही!

प्रिया: ऐसे ही क्या? तुम बताओ सनी!

सनी: क.क... कुछ नहीं प्रिया बस ऐसे ही, मुझे तो बात ही नहीं पता क्या है?

प्रिया: कुछ नहीं ?? जब से क्लास में आये हो तुम दोनों ऐसे घूर रहे हो हमें, कुछ तो गड़बड़ है!!

सनी चुप हो कर अपनी नजरें झुका लेता है तो प्रिया वीर की और सवालिया नजरों से देखती है जबकी कंचन भी चोरी-चोरी देख ले रही थी!

वीर: क्या? मैने क्या किया है प्रिया जो अब ऐसे घूर रही हो?

प्रिया: ????? कुछ बताओगे? या फिर आज के बाद बात नहीं करूंगी सोच लेना फिर मुंह मांगोड़ी (अजीब सा) सा करके घूमोगे !!.

वीर: अरे यार तू भी ना अब तक वैसी ही है!
वो क्या है ना तुम पहले सिंपल रहती थी, मेरा मतलब है कि आजकल...थोड़ा अलग लगती है..
मेरा मतलब.. कुछ अलग दिख रही हो..
अब क्या हाी बोलू कैसे समझाऊं , तुम खुद ही समझ जाओ यार,
पहले तुम लिपस्टिक बहुत कम... मेरा मतलब सजना संवर....समझ जा ना चिकुड़ी। :D

प्रिया : एक मारूंगी तोते अगर यहां पे चिकुड़ी बोला तो!
और मैं समझ गई क्या खुन्नक है तुझे (बोलके हंसने लगती है)

ये सुनकर वीर भी राहत की सांस लेता है और सनी भी (मन मैं बच गया बेन... नहीं तो ये पीछा नहीं छोड़ती)

तभी क्लास में और भी स्टूडेंट्स आने लगते हैं और ये लोग भी चुप होकर बैठ जाते हैं और आपस में ही खुश होकर फुसर करने लगते हैं

सनी: वैसे एक बात तो बता वीरा ये माजरा क्या है मैंने भी नोट किया है कि तू आजकल प्रिया को कुछ अलग नजरों से ही देख रहा है? कहि...वो वाला तो चक्कर नहीं है?

वीर: क्या भाई कोन सा वो चक्कर है? कोई चक्कर नहीं है! बस थोड़ा अलग लग रही थी तो बार-2 नजर जा रही थी उधर!!

सनी: (मुस्कान के साथ) साले कितने दिनों से जानता हूँ तुझे! मुझे बेवकूफ बनाना आसान नहीं है।

वीर: अरे यार बचपन की दोस्त है वो मेरी, और मैंने कभी उसको उन नजरों से नहीं देखा।

सनी: तो क्या हुआ अब देख ले :D यार कितनी सुंदर है देख तो सही, काश ये मुझ पर लाइन मारे!

वीर: साले मुझे गुस्सा मत दिला तू दुनिया की किसी भी लड़की के लिए कुछ भी बोल पर मेरे भाई उसके लिए कुछ मत बोलना मैं हाथ जोड़ता हूं तेरे तू भाई है मेरा, और मैं नहीं चाहता कि अपने बीच में कुछ भी गलत फहमी हो या कोई बात हो.

सनी: जली ना? बस कमीने तेरे मुंह से यहीं सुनना चाहता था मैं, ईसी लिए बोला, मुझे जो जानना था (मुस्कुराते हुए) मैं जान चुका हूं।

वीर: क्या जाना तुमने? मुझे भी बताओ जरा!

सनी: यही कि तू उसको चाहता है, पर मन ही मन!

और जहां तक मुझे लगता है कि वो भी तुझे चाहती होगी।

वीर: चाहता है...! अरे भाई अगर मैं किसी को चाहूँगा तो मुझे तो पता होगा ना, हम बस बचपन के दोस्त हैं और कुछ नहीं!

सनी: यही तो बात है मेरे दोस्त बचपन को जब जवानी के पंख लगते हैं तो मन और दिल पता नहीं किन वादियों में और किन हवाओं में उड़ता रहता है!

वीर:
मोहब्बत कोई खेल नहीं होता. मोहब्बत की राहो में, अफ़साने हज़ार मिलते हैं,
दिल से मोहब्बत करने वाले, सच्चे दीवाने कहाँ मिलते हैं।
याद करके आँसू बहाने वाले, सच्चे आशिक नहीं होते।
सच्चे महबूब रोते नहीं है, महबूबा की याद में ताजमहल बनवाते हैं।
और धड़कती सांसों का कोई मोल नहीं होता, मोहब्बत कोई खेल नहीं होता.


ये प्यार मोहब्बत फिल्मो या किताबों में ही अच्छा लगता है भाई। हकीकत में ऐसा नहीं होता!

सनी: क्यों नहीं होता भाई, होता भी है, और देखा भी है हमने। अभी तुमको खुद को नहीं पता कि हकीकत क्या है! जब-कभी वो दिखाई नहीं देती, या कोई दूसरे गांव जाती है तो तुम्हारा दिल बेचैन रहता है? उसकी याद आती है? सोच के बता?

वीर: हा वो तो होता ही है इसमे सोचना क्या है वो मेरे बचपन की दोस्त है।
रही बात गांव जाने की तो वो भी सही है, उस समय मन काफी उदास रहता है।

सनी: तो सुन मेरे भाई यही प्यार है, बस तुझे ये दोस्ती वाला लगता है और मुझे ये प्यार वाला लगता है(मुस्कान)।

वीर: अबे जा ऐसा थोड़ी होता है? मुझे प्यार होता तो पता तो लगता ना?

"नजर से दूर है फिर भी फिजा में शामिल है कि तेरे प्यार की खुशबू हवा में शामिल है, हम चाह कर भी तेरे पास आ नहीं सकते कि दूर रहना भी, मेरी वफा में शामिल है"


सनी: साले प्यार होगा तो वायलिन थोड़ी बजेगा? बस तुझे एहसास नहीं हुआ है।

वीर: देखते हैं भाई थोड़े दिन रुक जा पता लग जाएगा(मुस्कान)।

ये लोग ऐसे ही बात करते रहते हैं, फिर क्लास शुरू हो जाती है, लंच में सब लोग पहले कैंटीन में जाते हैं। लेकिन आज कुछ भी प्रिय घटना नहीं घटी। ऐसे ही एक-एक करके दिन गुजर रहे थे की एक दिन...!

जारी है.....:writing:
SUPER SE BHI UPER
EXCELLENT UPDATE
Raj_sharma bhai
Maja aagaya
 

Rekha rani

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Awesome update, Dono dost ke दूसरे की कॉपी लग रहे है और एक दूसरे के मन की बात को अच्छे से समझ रहे है,
सनी ने आराम से मालूम कर लिया की वीर सुप्रिया को चाहता है, अब बारी वीर की है वो भी सनी के मन की बात जाने
 

dhparikh

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Update 9

"इस बात से लगा लेना मेरी साखियत का अंदाज़ा, वो लोग भी मुझे ही सलाम करते हैं, जिन्हे तू सलाम करता हो"

ये बोलकर वो लोग निकल जाते हैं
वहां सेऔर क्लास में जाकर बैठ जाते हैं! बस और कुछ खास नहीं होता उस दिन, ऐसे ही दिन बीते हैं,
एक दिन वीर और सनी क्लास में आज कुछ जल्दी आते हैं और अपनी डेस्क पर बैठ के बातें कर रहे होते हैं तभी...


अब आगे:

सामने से दो लड़कियां क्लास में आती हैं जिन्हें वीर और सनी एक टक देखते ही रह जाते हैं, वो दोनों धीरे-धीरे चलकर उन दोनों के पास आती हैं!

वो कोई और नहीं बल्कि अपनी सुप्रिया और कंचन ही थी! दोनो का ध्यान उनकी तरफ केवल एक बार ही गया था
और फिर अपनी बातों में लग गई थी, इधर ये दोनो भी अपनी बातों को भूल कर उनको देखने में ही लगे रहे!
अचानक सुप्रिया को कुछ एहसास हुआ तो उसने अपनी बेंच से नज़र घुमाके देखा, तो दोनो उनकी तरफ ही देख रहे थे!

सुप्रिया की नजरों का पिछा कंचन ने भी किया तो यहीं पाया, जैसे उसने उसकी नजर सनी से टकराई,

उसने अपनी नजर झुका ली पर सुप्रिया ने ऐसा नहीं किया वो सवालिया नजरों से और चेहरे पर मुस्कुराहट लिए हुए!

सुप्रिया: क्या बात है वीर! ऐसे क्या देख रहे हो? कुछ गड़बड़ है क्या?

वीर: नहीं प्रिया बस ऐसे ही!

प्रिया: ऐसे ही क्या? तुम बताओ सनी!

सनी: क.क... कुछ नहीं प्रिया बस ऐसे ही, मुझे तो बात ही नहीं पता क्या है?

प्रिया: कुछ नहीं ?? जब से क्लास में आये हो तुम दोनों ऐसे घूर रहे हो हमें, कुछ तो गड़बड़ है!!

सनी चुप हो कर अपनी नजरें झुका लेता है तो प्रिया वीर की और सवालिया नजरों से देखती है जबकी कंचन भी चोरी-चोरी देख ले रही थी!

वीर: क्या? मैने क्या किया है प्रिया जो अब ऐसे घूर रही हो?

प्रिया: ????? कुछ बताओगे? या फिर आज के बाद बात नहीं करूंगी सोच लेना फिर मुंह मांगोड़ी (अजीब सा) सा करके घूमोगे !!.

वीर: अरे यार तू भी ना अब तक वैसी ही है!
वो क्या है ना तुम पहले सिंपल रहती थी, मेरा मतलब है कि आजकल...थोड़ा अलग लगती है..
मेरा मतलब.. कुछ अलग दिख रही हो..
अब क्या हाी बोलू कैसे समझाऊं , तुम खुद ही समझ जाओ यार,
पहले तुम लिपस्टिक बहुत कम... मेरा मतलब सजना संवर....समझ जा ना चिकुड़ी। :D

प्रिया : एक मारूंगी तोते अगर यहां पे चिकुड़ी बोला तो!
और मैं समझ गई क्या खुन्नक है तुझे (बोलके हंसने लगती है)

ये सुनकर वीर भी राहत की सांस लेता है और सनी भी (मन मैं बच गया बेन... नहीं तो ये पीछा नहीं छोड़ती)

तभी क्लास में और भी स्टूडेंट्स आने लगते हैं और ये लोग भी चुप होकर बैठ जाते हैं और आपस में ही खुश होकर फुसर करने लगते हैं

सनी: वैसे एक बात तो बता वीरा ये माजरा क्या है मैंने भी नोट किया है कि तू आजकल प्रिया को कुछ अलग नजरों से ही देख रहा है? कहि...वो वाला तो चक्कर नहीं है?

वीर: क्या भाई कोन सा वो चक्कर है? कोई चक्कर नहीं है! बस थोड़ा अलग लग रही थी तो बार-2 नजर जा रही थी उधर!!

सनी: (मुस्कान के साथ) साले कितने दिनों से जानता हूँ तुझे! मुझे बेवकूफ बनाना आसान नहीं है।

वीर: अरे यार बचपन की दोस्त है वो मेरी, और मैंने कभी उसको उन नजरों से नहीं देखा।

सनी: तो क्या हुआ अब देख ले :D यार कितनी सुंदर है देख तो सही, काश ये मुझ पर लाइन मारे!

वीर: साले मुझे गुस्सा मत दिला तू दुनिया की किसी भी लड़की के लिए कुछ भी बोल पर मेरे भाई उसके लिए कुछ मत बोलना मैं हाथ जोड़ता हूं तेरे तू भाई है मेरा, और मैं नहीं चाहता कि अपने बीच में कुछ भी गलत फहमी हो या कोई बात हो.

सनी: जली ना? बस कमीने तेरे मुंह से यहीं सुनना चाहता था मैं, ईसी लिए बोला, मुझे जो जानना था (मुस्कुराते हुए) मैं जान चुका हूं।

वीर: क्या जाना तुमने? मुझे भी बताओ जरा!

सनी: यही कि तू उसको चाहता है, पर मन ही मन!

और जहां तक मुझे लगता है कि वो भी तुझे चाहती होगी।

वीर: चाहता है...! अरे भाई अगर मैं किसी को चाहूँगा तो मुझे तो पता होगा ना, हम बस बचपन के दोस्त हैं और कुछ नहीं!

सनी: यही तो बात है मेरे दोस्त बचपन को जब जवानी के पंख लगते हैं तो मन और दिल पता नहीं किन वादियों में और किन हवाओं में उड़ता रहता है!

वीर:
मोहब्बत कोई खेल नहीं होता. मोहब्बत की राहो में, अफ़साने हज़ार मिलते हैं,
दिल से मोहब्बत करने वाले, सच्चे दीवाने कहाँ मिलते हैं।
याद करके आँसू बहाने वाले, सच्चे आशिक नहीं होते।
सच्चे महबूब रोते नहीं है, महबूबा की याद में ताजमहल बनवाते हैं।
और धड़कती सांसों का कोई मोल नहीं होता, मोहब्बत कोई खेल नहीं होता.


ये प्यार मोहब्बत फिल्मो या किताबों में ही अच्छा लगता है भाई। हकीकत में ऐसा नहीं होता!

सनी: क्यों नहीं होता भाई, होता भी है, और देखा भी है हमने। अभी तुमको खुद को नहीं पता कि हकीकत क्या है! जब-कभी वो दिखाई नहीं देती, या कोई दूसरे गांव जाती है तो तुम्हारा दिल बेचैन रहता है? उसकी याद आती है? सोच के बता?

वीर: हा वो तो होता ही है इसमे सोचना क्या है वो मेरे बचपन की दोस्त है।
रही बात गांव जाने की तो वो भी सही है, उस समय मन काफी उदास रहता है।

सनी: तो सुन मेरे भाई यही प्यार है, बस तुझे ये दोस्ती वाला लगता है और मुझे ये प्यार वाला लगता है(मुस्कान)।

वीर: अबे जा ऐसा थोड़ी होता है? मुझे प्यार होता तो पता तो लगता ना?

"नजर से दूर है फिर भी फिजा में शामिल है कि तेरे प्यार की खुशबू हवा में शामिल है, हम चाह कर भी तेरे पास आ नहीं सकते कि दूर रहना भी, मेरी वफा में शामिल है"


सनी: साले प्यार होगा तो वायलिन थोड़ी बजेगा? बस तुझे एहसास नहीं हुआ है।

वीर: देखते हैं भाई थोड़े दिन रुक जा पता लग जाएगा(मुस्कान)।

ये लोग ऐसे ही बात करते रहते हैं, फिर क्लास शुरू हो जाती है, लंच में सब लोग पहले कैंटीन में जाते हैं। लेकिन आज कुछ भी प्रिय घटना नहीं घटी। ऐसे ही एक-एक करके दिन गुजर रहे थे की एक दिन...!

जारी है.....:writing:
Nice update....
 

Raj_sharma

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Raj_sharma

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Awesome update, Dono dost ke दूसरे की कॉपी लग रहे है और एक दूसरे के मन की बात को अच्छे से समझ रहे है,
सनी ने आराम से मालूम कर लिया की वीर सुप्रिया को चाहता है, अब बारी वीर की है वो भी सनी के मन की बात जाने
Thank you very much Rekha ji, for your wonderful support and review, isme koi shak nahi ki done dost ek dusre ke man ki jante hai.:thanx:
 

Raj_sharma

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