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Romance Love in College. दोस्ती प्यार में बदल गई❣️ (completed)

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Super duper poetic update
🌟🌟🌟🌟🌟🌟
💯💯💯💯💯
✔️✔️✔️

Lips gale se lagne to lage hain, agge Manali mein dekh lo hain kya kiske sath lagta hai.
Thank you very much ❣️ Rajizexy
For your valuable review ❣️ ❣️❣️❣️❣️
 

CyccoDraamebaaz

"Paagalpan zaruri hai."
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Update 12.

सीता देवी: बेटा तू ही रघुवीर का ख्याल रख सकती है। तू मेरे रघुवीर से शादी कर ले इस पागल को तेरे अलावा कोई नहीं समझा सकता है।

रघुवीर तेरे अलावा किसी और की नहीं सुनता (रघुवीर की मम्मी सुप्रिया को पसंद करती है)। ये सुनके सुप्रिया को शर्म आ जाती है।

रघुवीर की मम्मी कहती है, पढाई में तो ध्यान देता नहीं सारे दिन इधर-उधर घूमता है! हर रोज रघुवीर के पापा रघुवीर पर गुस्सा करते रहते है। इतना सुनकर के सुप्रिया अपने घर चली जाती है क्योकि रघुवीर घर पर नहीं होता अपने पापा के साथ कही गया होता है।

अब आगे:

इधर दोनों अपने घर पर कहते है टूर पर जाने के लिए पर रघुवीर के पापा नहीं जाने देते रघुवीर को। उसके पापा डांटने लगते हैं, की कोई काम अच्छे से करता है क्या? जो यह कही जाए, पढ़ाई पर ध्यान तो है नहीं।
तभी सुप्रिया आ जाती है और रघुवीर के पापा से कहती है !

प्रिया: अंकल रघुवीर को मैं पढाई में मदद करती हूँ, और रघुवीर पढ़ाई पर अच्छे से ध्यान देने लगा है।
आप रघुवीर को हमारे साथ जाने दो, अब रघुवीर कभी को कभी कम नंबर नहीं आएगा कॉलेज में, इसकी गारंटी मैं देती हूं !! मुझे यकीन है वीर पे.

सुप्रिया की बात सुनने के बाद रघुवीर के पापा राज़ी हो जाते है, और कहते हैं.

दशरथ सिंह: मुझे तुम पर पूरा विश्वास है सुप्रिया बेटे कि तुम जो बोल रही हो वही सच होगा, तुम बोलती हो तो ठीक है! ये जा सकता है!

अगले दिन सुबह-2 घर से बाहर निकलते ही प्रिया अपनी छत पर घुमती हुई दिखाई देती है तो वीर इशारा करता है, जिसे देखकर प्रिया छत के दूसरी तरफ जहां गली थी वहा आती है!

वीर: धन्यवाद प्रिया! तुम्हारी वजह से पापा मान गए वरना पता नहीं कितने पापड़ बेलने पड़ते? प्रिया: क्या यार वीर तुम भी अजीब बातें करते हो? आपस में भी कोई सॉरी और थैंक यू होता है क्या?
और दूसरी बात वहां चलने के लिए तुमने ही हमें तैयार किया और तुम ही ना जा सके तो मैं वाहा जाके क्या करूंगी?

वीर: लव यू "चिकुडी"

प्रिया: (अपनी आँखे सिकोड़ कर) क्या बोला तुमने?

वीर: कुछ नहीं मैं तो बस ऐसे ही...

प्रिया: ना-ना कुछ तो बोला है पर मुझे ठीक से सुना नहीं?

वीर: यार वो क्या है ना पापा ने एक काम बोला था याद आया अभी!
तो मैं बाद में मिलता हूं वरना मुझे डांटेंगे।

प्रिया: अरे-2 सुनो तो सही!!
लेकिन वीर प्रिया की नजर चुरा कर निकल लेता है काम के बहाने से,

और प्रिया मंद-मंद मुस्कुराती हुई:


“कभी तुम आजाओ ख़यालों में और मुस्कुराहट दूं मैं, इसे गर इश्क़ कहते हैं तो हां मुझे इश्क़ है तुमसे.”

प्रिया: उसको लगता है मैंने कुछ नहीं सुना?
लेकिन मेरा बालम जरा नादान है, कुछ भी कहो वीर तू तो मेरी जान है!!

वीर वहां से निकल कर सनी की हवेली पर उससे मिलता है! दोनों दोस्त मिलके मनाली घूमने के बारे में बताते हैं, और सनी बोलता है कि यार हमारे काफी दिन हो गए नदी पर नहाए? तो चलो आज दोनों फिर से एक बार कॉम्पिटिशन हो जाए कि सबसे जल्दी नदी कोन पार करता है।

वीर : बड़ा बादशाह बन रहा है बेटा चलो हो जाये,

सनी: “
बादशाह तो कहीं का भी बन सकता हूँ, पर तेरे दिल की नगरी में हुकूमत करने का मजा ही कुछ अलग है दोस्त”

वीर: चलो भाई !!. फ़िर दोनों दोस्त वहां से नदी पर नहाने चले जाते हैं! ये उन दोनों की आदत थी केवल बरसात के समय को छोड़ के कभी भी नदी में नहाते निकल पड़ते थे।

ऐसा ही एक दो दिन और निकल जाते हैं! और आख़िर टूर जाने का दिन भी नज़दीक आ जाता है,

शाम को प्रिया रघुवीर से मिलती है और कहती है सुबह जल्दी उठ जाना, ठीक है? तुम्हारी देर करने की पुरानी आदत नहीं चलेगी।

फिर दोनों जाने के लिए तैयारी करने लगते है, और अपना -अपना बैग पैक करते हैं।

अगले दिन सुबह सब जाने के लिए तैयार थे। पर रघुवीर को लेट करने की बीमारी होती है। तभी सुप्रिया तैयार हो कर आ जाती है रघुवीर के घर पर,
रघुवीर अभी तक सो रहा होता है।

सुप्रिया -रघुवीर कहा है चाची ?

रघुवीर की मम्मी – रघुवीर सो रहा है

सुप्रिया – अभी तक सो रहा है। इतना कह के सुप्रिया रघुवीर के रूम में चली जाती है। और रघुवीर को उठाने लगती है।

रघुवीर: कुछ देर और सोने दे यार,

सुप्रिया: नहीं हम दोनों लेट हो जाएगें!!

फिर रघुवीर उठ जाता है। और जल्दी से तैयार होने लगता है। क्योकि रघुवीर सुप्रिया का हर कहना मानता है। और जल्दी कॉलेज की और जाते है। दोनों कुछ ही टाइम बाद कॉलेज पहुँच जाते है।

कुछ देर और लेट करते तो सब निकल जाते, सुप्रिया रघुवीर को मारने लगती है क्योकि सब बस में बैठ गए थे सिर्फ रघुवीर और सुप्रिया का ही इंतजार कर रहे थे। वो दोनों भी जल्दी से बस में चले जाते है, जहां सनी, कंचन और बाकी सब भी उनका इंतजार कर रहे थे।

इनके जाते ही बस चल पड़ती है। रघुवीर और सुप्रिया को सब से पीछे की सीट मिलती है। लेट होने की वजह से सुप्रिया रघुवीर पर गुस्सा करती है, आज तेरी वजह से बस छूट जाती ना, तब रघुवीर कहता है यार सॉरी, सुप्रिया मान जाती है। और बातें करने लगती है।

तभी सनी भी वही आत है साथ में कंचन भी होती है! इनको आगे सीट मिलती है क्यों कि ये पहले ही आ गए थे, और साथ में बैठे थे, और वीर आखिरी में।

सनी: भाई यार तुझसे बड़ा चोमू मैंने कभी नहीं देखा! यार इतना भी क्या आलसी होना? तेरे आलस्य की वजह से अभी सब लोग तुझे छोड़ कर जाने वाले थे, मैं भी बस से उतरने वाला ही था।

वीर: अब हो गया ना यार गलती सॉरी प्लीज! ओर वीर एक कविता सुनाता है:

आज भी याद आती है वो स्कूल कॉलेज की दोस्ती, प्यार का जुनून और प्यारे दोस्तों की दोस्ती, आज भी याद आते है वो प्यारे लम्हे, और याद आती है उन प्यारे दोस्तों की दोस्ती। नींद नहीं आती जब तू उदास होता है, अच्छा नहीं लगता जब तू नाराज़ होता है, शायद ये सच्ची दोस्ती ही है हमारे बीच की, दिल खुश होता है जब तू पास होता है। और हमने जब आप जैसा दोस्त पा लिया, तो सारे गम को चन्द लम्हो में भुला दिया।“


सनी: (कविता सुनके मुस्कान के साथ) जा कर दिया माफ तू सुधरने वाला तो है नहीं!

थोड़ी देर में सब मस्ती मजाक कर रहे थे,

सनी: अरे भाई सब लोग मिलके अंताक्षरी खेलते हैं, क्या बोलते हो सब?

सब लोग मिलके गाना गाते है ।.. “ज़िंदगी एक सफ़र है सुहाना यहाँ कल क्या हो किसने जाना…….

ऐसे ही हंसी मजाक चलता रहता है... उधर सुप्रिया को नींद आने लगती है। और रघुवीर अपने फ़ोन से गाने सुन रहा होता है।

सुप्रिया खिड़की के पास ही बैठी होती है । और खिड़की पर सर रख के सो जाती है जैसे-जैसे बस हिलती है वैसे-वैसे बार बार सुप्रिया उठ जाती है। तब रघुवीर देख लेता है और अपने कंधे पर सुप्रिया का सर रख देता है।

प्रिया वीर की तरफ देखती है! वीर प्रिया की तरफ एक पल के लिए दोनों की आंखें चार होती हैं और दोनों खो जाते हैं।

जैसे ही बस को झटका लगता है उनकी तंद्रा टूट जाती है और दोनो मंद -मंद मुस्कुराते हुए इधर उधर देखने लगते हैं!

कुछ देर बाद प्रिया को फिर नींद आने लगती है तो वीर उसका सर अपने कंधे पर रख लेता है। सुप्रिया रघुवीर के कंधे पर ही सो जाती है तभी अचानक बस ब्रेक मारती है तो सुप्रिया रघुवीर को कस के पकड़ लेती है।

रघुवीर को बहुत अच्छा लगता है। रघुवीर भी अपना हाथ सुप्रिया के कमर पर रख लेता है और दोनों एक दूसरे के करीब आ जाते है।

जिंदगी की राह में मिले होंगे हजारों मुसाफिर तुमको, जिंदगी भर ना भुला पाओगे वो मुलाकात हूं मैं…”

सुप्रिया नींद में रघुवीर के गले के पास ही सुप्रिया के लिप्स लगने लगते है तभी रघुवीर को कुछ-कुछ होने लगता है।

रघुवीर सुप्रिया को कस के पकड़ लेता है सुप्रिया भी रघुवीर को पकड़ लेती है ना जाने क्या होता दोनों को। :heart:

वीर: (मन में)

मेरी रूह को अपनी रूह में मिलाकर मुझे गुमनाम कर दो, तुम्हें देख कर लोग मुझे पहचाने यूं खुद को मेरा हमनाम कर दो”


सफर जारी है दोस्तों :writing:

:laughclap:
Ek shaayar jab kahani likhe toh kahani toh ruhaani honi hi hai.

College ke kissae. Yaar, dosti aur mohabbat. Doston befizul baatein, jawaani ki naadaniya.. sab ka ek pehlu dikhai padta hai.

Naujawaan Raghuveer, aise toh aalsi lekin waqt aane par apno ki madat ke liye hamesha haazir.

Pyaari si Supriya. Suljhi hui ladki, lekin apne Veer ke pyaar mei uljhi hui.

Sunny bhaiya. Doston ke liye jaan chidakne waala yaaron ka yaar.

Kanchan.. Priya ki dost. aur Sunny ka crush. Abhi toh sharmili lag rahi.

Mohit... Bigdi baap ki bigdi aulaad.

Characters kaafi ache set kiye hai. Aage ki kahani dischasp lag rahi hai.

Romance ke saath saath action aur thiller ka tadka lagta rahe yehi umeed hai.

🃏
 
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Iron Man

Try and fail. But never give up trying
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Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Ek shaayar jab kahani likhe toh kahani toh ruhaani honi hi hai.

College ke kissae. Yaar, dosti aur mohabbat. Doston befizul baatein, jawaani ki naadaniya.. sab ka ek pehlu dikhai padta hai.

Naujawaan Rajveer, aise toh aalsi lekin waqt aane par apno ki madat ke liye hamesha haazir.

Pyaari si Supriya. Suljhi hui ladki, lekin apne Veer ke pyaar mei uljhi hui.

Sunny bhaiya. Doston ke liye jaan chidakne waala yaaron ka yaar.

Kanchan.. Priya ki dost. aur Sunny ka crush. Abhi toh sharmili lag rahi.

Mohit... Bigdi baap ki bigdi aulaad.

Characters kaafi ache set kiye hai. Aage ki kahani dischasp lag rahi hai.

Romance ke saath saath action aur thiller ka tadka lagta rahe yehi umeed hai.

🃏
Thank you very much bhai for your wonderful review and support :hug: Dekhte hai aage kya ho sakta hai, aapki baato per gaur kiya jayega👍
 

Napster

Well-Known Member
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Update 11.

कंचन: ठीक है प्रिया जब तुम इतना बोल ही रही हो तो मैं भी चलूंगी, आख़िर तू ही तो मेरी एकलौती दोस्त है।

इतना सुनते ही सनी जोश जोश में जोर से चिल्लाता है हुर्रे..... सभी उसकी तरफ देखने लगे, तब उसे एहसास हुआ कि वो क्या कह रहा है। और तुरंत माफ़ी माँगता है।
सॉरी मुझे बस इसी बात की खुशी हो रही है कि हमारा ग्रुप साथ में जा रहा है, इसके लिए...!!


ये देख कर कंचन को भी हंसी आती है जब सनी की नजर कंचन पर पड़ती है तो वो अपनी नजर झुका लेती है।

अब आगे:

सब लोग बेल लगाने के बाद फिर से क्लास में चले जाते हैं, ऐसे ही पढ़ते या बात करते हुए दिन निकल जाता है,

छुट्टी होने पर रघुवीर, सुप्रिया, सनी, कंचन, चारो कॉलेज से निकलते हैं, सब लोग साथ में चलते हुए बातें करते हैं।

सनी: यार वीरे मजा आ जाएगा, इतने सालो बाद हम सब साथ हैं और ये सावन का मौसम हर तरफ हरियाली, और वो मनाली की खूबसूरत वादियां!

वीर: अबे सानिया साले अभी सावन कहां शुरू हुआ है? और तूने टर्र-टर्र करना शुरू कर भी दिया (मुस्कान) 😄 अबे अभी एक हफ्ता है जाने में।

और बरसात आई कहाँ है? हा तब तक हो सकती है वो अलग बात है!
रही बात जाने की तो तू बिल्कुल सही कह रहा है कि लगभाग 12 साल हो गए हम दोनों को साथ में कहीं घूमे!

मुझे आज भी याद है तेरे मामा की शादी में कितने मजे किये थे हमने।

सनी: हां यार वीरे सही कह रहा है तू, अरे मेरा तो और भी रुकने का मन था वाहा पर साले तेरी वजह से ना रुक पाया, वो चौधरी के लड़के का सर फोड़ दिया था तुमने तो तेरे मामा ने मामला रफादफा कर के हमें वाहा से भेज दिया था!

वीर: कमीने इसमें भी तेरी ही गलती थी! साले खुद जा कर हर किसी से लड़ाई कर लेता था, और बाद में मुझे निपटना पड़ता था, साले बचपन में एक बार भी चेन की सांस नहीं लेने दी तुमने जब देखो किसी न किसी से उलझा रहता था।

सनी: यार वीरे सही कह रहा है तू, लेकिन दो चीजें हैं एक तो अपने से गलत कुछ भी बर्दाश्त नहीं होता, ये तू भी जानता है, मेरे पापा ने हमेशा बचपन से ही यही सिखाया है कि गलत के सामने कभी झुकना नहीं! दूसरा मुझे इतना समझ नहीं था उस समय तो हो जाता था ऊपर नीचे। :D

सुप्रिया और कंचन दोनों की बातें सुनकर हस्ती हैं, सुप्रिया बोलती हैं,

सुप्रिया: अरे -अरे रुकोगे या यहीं पर आज कल्कि पुराण सुनने का इरादा है? हम लोग बात करते-करते कॉलेज से कंचन के घर के पास तक पहुंच गए लेकिन तुमलोगो ने अपनी बात ख़तम नहीं की।

वीर: देख ले सनी इसे कहते है जलकुकड़ी! ये चिकुड़ी जलती है हमसे, इसे बर्दाश्त नहीं हुआ कि हम दो बेचारे सीधे साधे लड़के हंसी मजाक करके समय बिता रहे हैं।

प्रिया: देख ले तोते मारूंगी एक तुझे बोला ना मुझे इस नाम से मत बुलाया कर।

वीर: मै तो बुलाऊंगा क्या कर लेगी "चिकुड़ी" (ये बोलके हसने लगता है साथ में सनी और कंचन भी हस्ती है)।
प्रिया: ठीक है फिर मैं भी सबको बोलूंगी कि ये ज्यादा बोलने वाला तोता है! और फिर तू मिल अकेले में तेरी खबर ना ली तो कहना?

सनी: अकेला? हे भगवान ये क्या हो रहा है? ये मैं क्या सुन रहा हूँ!!

प्रिया: ओए तू चुप कर वरना ये तो बच गया पर तू मेरे हाथ से जरूर पिटेगा।(मुस्कुराते हुए) ऐसे ही बाते करते हुए सब लोग कंचन को उसके घर के पास छोड़ कर वहां से अपने घर की और निकल जाते हैं सनी, वीर और सुप्रिया के घर थोड़ी-थोड़ी दूर पर ही थे तो तीनो अपने घर की और निकल जाते हैं ।

(वैसे सनी के) पिता जी पुलिस अधिकारी हैं तो गांव में साल में एक बार चुट्टियों में आते हैं अपना घर और जमीन देखने के लिए, वैसे सनी और वीर की तरह ही उनके पिता जी भी आपस में मित्र ही थे तो उन्हें कोई चिंता नहीं थी अपनी जमीन की)

वीर: यार सानिया टाइम निकाल के आना शाम को हवेली के चोबारे में बैठते हैं!

सनी: चल साले तू भी क्या याद करेगा किस रहीस से पाला पड़ा है! आता हूँ शाम को,

रघुवीर अपने घर चला जाता है जहां उसकी माता जी उसका इंतजार कर रही हैं ।

सीता देवी: आ गया बेटा, चल जल्दी से हाथ मुँह धो कर आजा कुछ खा ले! और रबड़ी (मोठ बाजरा और लस्सी से बनी) रक्खी है निकल के वो पी लेना गरमी बहुत पड़ रही है बेटा और तुम लोग धूप में आते हो!

वीर: ठीक है माँ!

वीर खाना खा कर चोबारे में चला जाता है जहां पर उसने गाने सुन ने के लिए टेप रिकॉर्डर और कैसेट्स रखे हुए थे! काफी खोज-बीन कर एक कैसेट निकला और टेप में लगाकर मध्यम आवाज में गाना चलाया! कूलर चालू कर के बिस्तर पर धड़ाम से कूद पड़ा!

लडकी: तू जब जब मुझको पुकारे मैं दौड़ी आऊं नदिया किनारे.. 🎶🎶

पुरुष: हर पल तेरा रास्ता निहारे.. दिल लागे नहीं तेरे बिना रे... :music:

मुझे सीने से लगा ले मुझे अपना बना ले मेरे भोले साथिया... तुझे दिल दे दिया...........
मेरा दिल ले लिया... :music:

गाना सुनते-सुनते वीर को नींद आ जाती है और वो सपनों में खो जाता है! जहां वो सपने में देखता है :

आज से कुछ साल पहले की यादे जब वीर और प्रिया आपस में नदी किनारे खेल रहे थे: तो वीर उसको कुछ हस्कर बोल रहा है, कुछ देर बाद सीन चेंज हो जाता है और उसमे वीर और सनी क्रिकेट खेल रहे हैं और किसी के साथ बात कर रहे हैं! फिर कुछ देर बाद वीर और प्रिया आपस में बात करते दिखे!

तभी वीर अपने आपको आज की प्रिया के साथ बैठा हुआ दिखायी देता है!

सपने में वीर से प्रिया बोलती है :
वीर ये प्यार क्या होता है?

वीर: प्यार क्या होता है? :

“जानती हो प्यार क्या होता है,
कभी पूछा है खुद से, कोसिस की है जान-ने की,
ये जो तुम्हारी आँखों में अजाती है चमक मेरे आने से,
और तुम्हें देखकर दिल मेरा भी धड़कने लगता है,
हाँ यही तो प्यार होता है!

या जब तुम दूर होती हो मुझसे, तो तड़फ उठता हूं मे,
तुम्हारा भी तो दिल बेचैन होता है,
हाँ यही तो प्यार होता है!

एक दूसरे की बाते याद करके अकेले में हसना, एक दूसरे की तस्वीर देख खिल उठना,
एक दूसरे से मिलने का इंतज़ार होता है,
हाँ यही तो प्यार होता है!

तुम्हारी गौद मैं सोना, तुम्हारा हाथ -हाथो में ले कर घण्टो बातें करना,
उस वक़्त जो एक दूसरे पर ऐतबार होता है,
हाँ यही तो प्यार होता है!”


सपने में अभी दोनों बातें कर रहे हैं कि जोर की आंधी आती है, वीर और प्रिया दोनों वहां से घर की और निकलते हैं पर आंधी इतनी तेज और धूल भरी थी कि दोनों को घेर लेती है जिसमें कुछ भी नहीं दिखता! आँधी की वजह से प्रिया और वीर की आँखों में धूल चली जाती है प्रिया अपने हाथ में जो कि वीर के हाथ में थी उससे छुड़वा के आँख साफ करती है!

वीर आवाज़ लगता है प्रिया....!!
मेरा हाथ पकड़ो लेकिन प्रिया की आवाज़ नहीं आती!

वीर: प्रिया कहाँ हो तुम? वीर बार-बार चिल्लाता है

तभी उसे प्रिया की आवाज सुनाई दी जो कहीं दूर से आ रही थी!


प्रिया: वीर बचाओ मुझे पता नहीं ये आंधी मुझे कहा उड़ाये ले जा रही है? बचाओ....!

वीर: मैने कहा था मेरा हाथ पकड़ो लेकिन तुम सुनती कहा हो! आ रहा हूँ मै! कहते हुए वीर आवाज की दिशा में दौड़ने लगता है,


(वो बहुत देर तक इधर-उधर घूमता रहता है काफी चिल्लाता है लेकिन कोई आवाज नहीं आती! तब तक आँधी भी जा चुकी है पर प्रिया का कोई पता नहीं,)
प्रिया……!!
कोई मेरी प्रिया को मिला दो मुझसे, कोई ढूंढ दो उसे कहते हुए वीर की आँखों में झर-झर आँसू बहने लगते हैं! तभी उसे जानी पहचानी आवाज सुनाई देती है: वीरे… वीरे!!

वीर: सनी मेरे भाई कहा है तू मुझे केवल तेरी आवाज सुना दे रही है!

भाई यार प्रिया कहीं खो गई है हमको ढूंढ़ना पड़ेगा, सनी मेरे दोस्त मुझे तू भी कहीं छोड़ कर मत जाना! सनी की आवाज़ फिर से सुनायी देती है:

वीरे मेरे भाई क्या हुआ है तुझे? आँखे खोल भाई ! तू रो क्यों रहा है बता मुझे क्या बात है आँख खोल भाई!

वीर: सनी कहा है तू भाई मेरे? मेरी प्रिया... तभी वीर की आंख खुल जाती है!

वीर की आंखे लाल हो राखी थी, और आंसू आ रहे थे।

सनी: (वीर को अपने सीने से लगाते हुए) वीरे क्या हुआ तुझे भाई? तेरी आँखे ऐसा लाल क्यों है? और तू रो क्यों रहा था? और तू नींद में प्रिया-प्रिया चिल्ला रहा था, इसका क्या कारण है?

वीर: भाई बहुत बुरा सपना देखा मैंने, मैंने देखा कि मेरी प्रिया मुझसे दूर हो गई कोई मुझे छीन ले गया उसको, कहते हुए वीर की आंखो में आंसू आने लगते हैं।

सनी: हम्म.. तो ये बात है! मैं ना कहता था कि बात कुछ और है!! अब सामने आ ही गया! तू चाहता है उसे ये साबित हो गया।

वीर: हां- हा मैं चाहता हूं उसे ! और उसके लिए कुछ भी कर सकता हूं! लेकिन मेरे भाई मैंने कभी भी अपने दिल की बात जुबान पर नहीं लाई, क्योंकि अगर वो मुझसे नाराज हो गई तो वो मुझसे दोस्ती भी खत्म कर लेगी, और मैं उसके बिना जी नहीं सकता.

Note: (सुप्रिया रघुवीर को बहुत पसंद करती है। बचपन से ही पर कभी कहती नहीं है और रघुवीर भी सुप्रिया को बहुत पसंद करता है। बचपन से दोनों एक दूसरे को पसंद करते है पर कभी एक दूसरे से नहीं कहते, दोनों डरते है कही हमारी दोस्ती खत्म ना हो जाए और एक दूसरे से दूर ना हो जाए)

(दो साल पहले) एक दिन रघुवीर की मम्मी कभी -कभी सुप्रिया को कहती है।

सीता देवी: बेटा तू ही रघुवीर का ख्याल रख सकती है। तू मेरे रघुवीर से शादी कर ले इस पागल को तेरे अलावा कोई नहीं समझा सकता है। रघुवीर तेरे अलावा किसी और की नहीं सुनता (रघुवीर की मम्मी सुप्रिया को पसंद करती है)। सुप्रिया को शर्म आ जाती है।

रघुवीर की मम्मी कहती है, हर रोज रघुवीर के पापा रघुवीर पर गुस्सा करते है। इतना सुनकर के सुप्रिया अपने घर चली जाती है क्योकि रघुवीर घर पर नहीं होता अपने पापा के साथ कही गया होता है।

जारी है...✍️
बहुत ही सुंदर लाजवाब और अद्भुत मनमोहक अपडेट हैं भाई मजा आ गया
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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बहुत ही सुंदर लाजवाब और अद्भुत मनमोहक अपडेट हैं भाई मजा आ गया
Thank you very much bhai :hug:
 

DesiPriyaRai

प्यार मैं मृत्यु है, मुक्ति नहीं..
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Update 11.

कंचन: ठीक है प्रिया जब तुम इतना बोल ही रही हो तो मैं भी चलूंगी, आख़िर तू ही तो मेरी एकलौती दोस्त है।

इतना सुनते ही सनी जोश जोश में जोर से चिल्लाता है हुर्रे..... सभी उसकी तरफ देखने लगे, तब उसे एहसास हुआ कि वो क्या कह रहा है। और तुरंत माफ़ी माँगता है।
सॉरी मुझे बस इसी बात की खुशी हो रही है कि हमारा ग्रुप साथ में जा रहा है, इसके लिए...!!


ये देख कर कंचन को भी हंसी आती है जब सनी की नजर कंचन पर पड़ती है तो वो अपनी नजर झुका लेती है।

अब आगे:

सब लोग बेल लगाने के बाद फिर से क्लास में चले जाते हैं, ऐसे ही पढ़ते या बात करते हुए दिन निकल जाता है,

छुट्टी होने पर रघुवीर, सुप्रिया, सनी, कंचन, चारो कॉलेज से निकलते हैं, सब लोग साथ में चलते हुए बातें करते हैं।

सनी: यार वीरे मजा आ जाएगा, इतने सालो बाद हम सब साथ हैं और ये सावन का मौसम हर तरफ हरियाली, और वो मनाली की खूबसूरत वादियां!

वीर: अबे सानिया साले अभी सावन कहां शुरू हुआ है? और तूने टर्र-टर्र करना शुरू कर भी दिया (मुस्कान) 😄 अबे अभी एक हफ्ता है जाने में।

और बरसात आई कहाँ है? हा तब तक हो सकती है वो अलग बात है!
रही बात जाने की तो तू बिल्कुल सही कह रहा है कि लगभाग 12 साल हो गए हम दोनों को साथ में कहीं घूमे!

मुझे आज भी याद है तेरे मामा की शादी में कितने मजे किये थे हमने।

सनी: हां यार वीरे सही कह रहा है तू, अरे मेरा तो और भी रुकने का मन था वाहा पर साले तेरी वजह से ना रुक पाया, वो चौधरी के लड़के का सर फोड़ दिया था तुमने तो तेरे मामा ने मामला रफादफा कर के हमें वाहा से भेज दिया था!

वीर: कमीने इसमें भी तेरी ही गलती थी! साले खुद जा कर हर किसी से लड़ाई कर लेता था, और बाद में मुझे निपटना पड़ता था, साले बचपन में एक बार भी चेन की सांस नहीं लेने दी तुमने जब देखो किसी न किसी से उलझा रहता था।

सनी: यार वीरे सही कह रहा है तू, लेकिन दो चीजें हैं एक तो अपने से गलत कुछ भी बर्दाश्त नहीं होता, ये तू भी जानता है, मेरे पापा ने हमेशा बचपन से ही यही सिखाया है कि गलत के सामने कभी झुकना नहीं! दूसरा मुझे इतना समझ नहीं था उस समय तो हो जाता था ऊपर नीचे। :D

सुप्रिया और कंचन दोनों की बातें सुनकर हस्ती हैं, सुप्रिया बोलती हैं,

सुप्रिया: अरे -अरे रुकोगे या यहीं पर आज कल्कि पुराण सुनने का इरादा है? हम लोग बात करते-करते कॉलेज से कंचन के घर के पास तक पहुंच गए लेकिन तुमलोगो ने अपनी बात ख़तम नहीं की।

वीर: देख ले सनी इसे कहते है जलकुकड़ी! ये चिकुड़ी जलती है हमसे, इसे बर्दाश्त नहीं हुआ कि हम दो बेचारे सीधे साधे लड़के हंसी मजाक करके समय बिता रहे हैं।

प्रिया: देख ले तोते मारूंगी एक तुझे बोला ना मुझे इस नाम से मत बुलाया कर।

वीर: मै तो बुलाऊंगा क्या कर लेगी "चिकुड़ी" (ये बोलके हसने लगता है साथ में सनी और कंचन भी हस्ती है)।
प्रिया: ठीक है फिर मैं भी सबको बोलूंगी कि ये ज्यादा बोलने वाला तोता है! और फिर तू मिल अकेले में तेरी खबर ना ली तो कहना?

सनी: अकेला? हे भगवान ये क्या हो रहा है? ये मैं क्या सुन रहा हूँ!!

प्रिया: ओए तू चुप कर वरना ये तो बच गया पर तू मेरे हाथ से जरूर पिटेगा।(मुस्कुराते हुए) ऐसे ही बाते करते हुए सब लोग कंचन को उसके घर के पास छोड़ कर वहां से अपने घर की और निकल जाते हैं सनी, वीर और सुप्रिया के घर थोड़ी-थोड़ी दूर पर ही थे तो तीनो अपने घर की और निकल जाते हैं ।

(वैसे सनी के) पिता जी पुलिस अधिकारी हैं तो गांव में साल में एक बार चुट्टियों में आते हैं अपना घर और जमीन देखने के लिए, वैसे सनी और वीर की तरह ही उनके पिता जी भी आपस में मित्र ही थे तो उन्हें कोई चिंता नहीं थी अपनी जमीन की)

वीर: यार सानिया टाइम निकाल के आना शाम को हवेली के चोबारे में बैठते हैं!

सनी: चल साले तू भी क्या याद करेगा किस रहीस से पाला पड़ा है! आता हूँ शाम को,

रघुवीर अपने घर चला जाता है जहां उसकी माता जी उसका इंतजार कर रही हैं ।

सीता देवी: आ गया बेटा, चल जल्दी से हाथ मुँह धो कर आजा कुछ खा ले! और रबड़ी (मोठ बाजरा और लस्सी से बनी) रक्खी है निकल के वो पी लेना गरमी बहुत पड़ रही है बेटा और तुम लोग धूप में आते हो!

वीर: ठीक है माँ!

वीर खाना खा कर चोबारे में चला जाता है जहां पर उसने गाने सुन ने के लिए टेप रिकॉर्डर और कैसेट्स रखे हुए थे! काफी खोज-बीन कर एक कैसेट निकला और टेप में लगाकर मध्यम आवाज में गाना चलाया! कूलर चालू कर के बिस्तर पर धड़ाम से कूद पड़ा!

लडकी: तू जब जब मुझको पुकारे मैं दौड़ी आऊं नदिया किनारे.. 🎶🎶

पुरुष: हर पल तेरा रास्ता निहारे.. दिल लागे नहीं तेरे बिना रे... :music:

मुझे सीने से लगा ले मुझे अपना बना ले मेरे भोले साथिया... तुझे दिल दे दिया...........
मेरा दिल ले लिया... :music:

गाना सुनते-सुनते वीर को नींद आ जाती है और वो सपनों में खो जाता है! जहां वो सपने में देखता है :

आज से कुछ साल पहले की यादे जब वीर और प्रिया आपस में नदी किनारे खेल रहे थे: तो वीर उसको कुछ हस्कर बोल रहा है, कुछ देर बाद सीन चेंज हो जाता है और उसमे वीर और सनी क्रिकेट खेल रहे हैं और किसी के साथ बात कर रहे हैं! फिर कुछ देर बाद वीर और प्रिया आपस में बात करते दिखे!

तभी वीर अपने आपको आज की प्रिया के साथ बैठा हुआ दिखायी देता है!

सपने में वीर से प्रिया बोलती है :
वीर ये प्यार क्या होता है?

वीर: प्यार क्या होता है? :

“जानती हो प्यार क्या होता है,
कभी पूछा है खुद से, कोसिस की है जान-ने की,
ये जो तुम्हारी आँखों में अजाती है चमक मेरे आने से,
और तुम्हें देखकर दिल मेरा भी धड़कने लगता है,
हाँ यही तो प्यार होता है!

या जब तुम दूर होती हो मुझसे, तो तड़फ उठता हूं मे,
तुम्हारा भी तो दिल बेचैन होता है,
हाँ यही तो प्यार होता है!

एक दूसरे की बाते याद करके अकेले में हसना, एक दूसरे की तस्वीर देख खिल उठना,
एक दूसरे से मिलने का इंतज़ार होता है,
हाँ यही तो प्यार होता है!

तुम्हारी गौद मैं सोना, तुम्हारा हाथ -हाथो में ले कर घण्टो बातें करना,
उस वक़्त जो एक दूसरे पर ऐतबार होता है,
हाँ यही तो प्यार होता है!”


सपने में अभी दोनों बातें कर रहे हैं कि जोर की आंधी आती है, वीर और प्रिया दोनों वहां से घर की और निकलते हैं पर आंधी इतनी तेज और धूल भरी थी कि दोनों को घेर लेती है जिसमें कुछ भी नहीं दिखता! आँधी की वजह से प्रिया और वीर की आँखों में धूल चली जाती है प्रिया अपने हाथ में जो कि वीर के हाथ में थी उससे छुड़वा के आँख साफ करती है!

वीर आवाज़ लगता है प्रिया....!!
मेरा हाथ पकड़ो लेकिन प्रिया की आवाज़ नहीं आती!

वीर: प्रिया कहाँ हो तुम? वीर बार-बार चिल्लाता है

तभी उसे प्रिया की आवाज सुनाई दी जो कहीं दूर से आ रही थी!


प्रिया: वीर बचाओ मुझे पता नहीं ये आंधी मुझे कहा उड़ाये ले जा रही है? बचाओ....!

वीर: मैने कहा था मेरा हाथ पकड़ो लेकिन तुम सुनती कहा हो! आ रहा हूँ मै! कहते हुए वीर आवाज की दिशा में दौड़ने लगता है,


(वो बहुत देर तक इधर-उधर घूमता रहता है काफी चिल्लाता है लेकिन कोई आवाज नहीं आती! तब तक आँधी भी जा चुकी है पर प्रिया का कोई पता नहीं,)
प्रिया……!!
कोई मेरी प्रिया को मिला दो मुझसे, कोई ढूंढ दो उसे कहते हुए वीर की आँखों में झर-झर आँसू बहने लगते हैं! तभी उसे जानी पहचानी आवाज सुनाई देती है: वीरे… वीरे!!

वीर: सनी मेरे भाई कहा है तू मुझे केवल तेरी आवाज सुना दे रही है!

भाई यार प्रिया कहीं खो गई है हमको ढूंढ़ना पड़ेगा, सनी मेरे दोस्त मुझे तू भी कहीं छोड़ कर मत जाना! सनी की आवाज़ फिर से सुनायी देती है:

वीरे मेरे भाई क्या हुआ है तुझे? आँखे खोल भाई ! तू रो क्यों रहा है बता मुझे क्या बात है आँख खोल भाई!

वीर: सनी कहा है तू भाई मेरे? मेरी प्रिया... तभी वीर की आंख खुल जाती है!

वीर की आंखे लाल हो राखी थी, और आंसू आ रहे थे।

सनी: (वीर को अपने सीने से लगाते हुए) वीरे क्या हुआ तुझे भाई? तेरी आँखे ऐसा लाल क्यों है? और तू रो क्यों रहा था? और तू नींद में प्रिया-प्रिया चिल्ला रहा था, इसका क्या कारण है?

वीर: भाई बहुत बुरा सपना देखा मैंने, मैंने देखा कि मेरी प्रिया मुझसे दूर हो गई कोई मुझे छीन ले गया उसको, कहते हुए वीर की आंखो में आंसू आने लगते हैं।

सनी: हम्म.. तो ये बात है! मैं ना कहता था कि बात कुछ और है!! अब सामने आ ही गया! तू चाहता है उसे ये साबित हो गया।

वीर: हां- हा मैं चाहता हूं उसे ! और उसके लिए कुछ भी कर सकता हूं! लेकिन मेरे भाई मैंने कभी भी अपने दिल की बात जुबान पर नहीं लाई, क्योंकि अगर वो मुझसे नाराज हो गई तो वो मुझसे दोस्ती भी खत्म कर लेगी, और मैं उसके बिना जी नहीं सकता.

Note: (सुप्रिया रघुवीर को बहुत पसंद करती है। बचपन से ही पर कभी कहती नहीं है और रघुवीर भी सुप्रिया को बहुत पसंद करता है। बचपन से दोनों एक दूसरे को पसंद करते है पर कभी एक दूसरे से नहीं कहते, दोनों डरते है कही हमारी दोस्ती खत्म ना हो जाए और एक दूसरे से दूर ना हो जाए)

(दो साल पहले) एक दिन रघुवीर की मम्मी कभी -कभी सुप्रिया को कहती है।

सीता देवी: बेटा तू ही रघुवीर का ख्याल रख सकती है। तू मेरे रघुवीर से शादी कर ले इस पागल को तेरे अलावा कोई नहीं समझा सकता है। रघुवीर तेरे अलावा किसी और की नहीं सुनता (रघुवीर की मम्मी सुप्रिया को पसंद करती है)। सुप्रिया को शर्म आ जाती है।

रघुवीर की मम्मी कहती है, हर रोज रघुवीर के पापा रघुवीर पर गुस्सा करते है। इतना सुनकर के सुप्रिया अपने घर चली जाती है क्योकि रघुवीर घर पर नहीं होता अपने पापा के साथ कही गया होता है।

जारी है...✍️
Bahut hi mazedaar update tha..


जानती हो प्यार क्या होता है,
कभी पूछा है खुद से, कोसिस की है जान-ने की,
ये जो तुम्हारी आँखों में अजाती है चमक मेरे आने से,
और तुम्हें देखकर दिल मेरा भी धड़कने लगता है,
हाँ यही तो प्यार होता है!

या जब तुम दूर होती हो मुझसे, तो तड़फ उठता हूं मे,
तुम्हारा भी तो दिल बेचैन होता है,
हाँ यही तो प्यार होता है!

एक दूसरे की बाते याद करके अकेले में हसना, एक दूसरे की तस्वीर देख खिल उठना,
एक दूसरे से मिलने का इंतज़ार होता है,
हाँ यही तो प्यार होता है!

तुम्हारी गौद मैं सोना, तुम्हारा हाथ -हाथो में ले कर घण्टो बातें करना,
उस वक़्त जो एक दूसरे पर ऐतबार होता है,
हाँ यही तो प्यार होता है!
Bahut hi khubsurat tarike se likha gya hai ki Pyar kya hota hai!
👌
 

Shetan

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Raj_sharma भाई, आप डिटेक्ट रिव्यू मांग रहे, मगर मुझे अभी तक ऐसा कुछ लगा नही कहानी में कि मैं कुछ कमेंट करूं।

बुरा नही मानिएगा, पर कहानी में अभी तक हीरो हीरोइन की केमेस्ट्री दिखी ही नही। और रोमांस में वो दिखनी जरूरी है।

जैसे हीरो सनी के साथ और हीरोइन कंचन के साथ ज्यादा बिजी हैं, और एक दूसरे से भी बहुत ज्यादा कनेक्टेड भी नही दिखाई देते हैं।

जैसे अभी जो शिमला चलने की बात है, उसमे तो कायदे से दोनो को सनी और कंचन को मनाना चाहिए था चलने के लिए। प्यार को अलग भी रख दे तो पक्के दोस्तों को बस दूसरे से इशारा भर चाहिए होता है किसी भी काम को करने के लिए।

खैर भूल चूक माफ, पब्लिक को पसंद आ रही है कहानी, हो सकता है आगे शिमला में कुछ इंट्रेस्टिंग घटे जिससे मेरा भी कुछ इंट्रेस्ट जगे। 🙏🏽
Bat sahi hai. Par aap purane ho. Panditji ne jyada kahani likhi nahi hai. Aap apne experience se unhe aage kuchh gyan dihiye. Hoshla badhaiye. Tabhi to vo aur dusri kahaniyo me bhi aage aaenge.
 
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