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Romance Love in College. दोस्ती प्यार में बदल गई❣️ (completed)

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Billkul sahi ja rahe ho. College ke ladko ki nadani bhari bate. Amezing. Muje halat jatana achha laga. Gana bhi bilkul sahi set kiya he. Aap halat bayan karne me aur ek stranger ki soch adate bayan karne me kamyab ho. Lekin meri najar se dekho to story slow ja rahi he. Aap ko ek sath 2 update post karne chahiye. Kyo ki ye kisse to aap vistar se likh kar de rahe ho. Magar kisse he bahot chhote. Sabd jyada hai. Bate jyada he. Par jindgi story ki slow hai.

Sayad aap samaz gae honge me kya kahena chahti hu.
Thank you Shetan aapne jo bhi sath diya hai aur aapke review ke liye bhi aapka aabhari hu :hug: Mujhe bas itna pata hai ki mai bura nahi likh raha hu:writing:Jo bhi likha dil se likha👍 ha isko aur bhi ache se likh sakta tha, story kuch aur bhi baki hai ,
Per jajbaato ko kuch aur ache se bayan kiya ja sakta tha, jo ki ab is mod per mujhe lagta hai ki mai usme kamyab na ho paya:nope: Isi liye maine ye socha hai ki agley update me kahani ko Poorn roop se nipta deta hu,. Maine apni dono story me ye bar bar kaha hai ki mai koi writer nahi hu👍 ha sayari karta hu! Usme kisi se kam nahi hu. Per writer nahi hu.
Bas aapka sath bana rahega jab tak is forum pe hu, jab tak niyati saath banaye rakhe👍 bohot-2 आभार 🙏🏼
 
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Raj_sharma

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Pandit Ji, Sab se pehle toh Nayi Kahani (Aur shayad pehli kahani) ke liye dheero badhiyaaa..:iambest: ...

Kahani ki shuruvat simple and nice hai. Ek ladka :dj1: ek ladki. :mujra:Bachpan ke saathi jawaani ka pyaar.

Aur yeh sirf kahani mei hi ho sakta hai ke Hero aalsi hai, phir bhi usae baithe bithaye sanskari Heroine mil gayi. :love1:.

Lekin kahaniya hoti hi isi liye hai ke apni fantasy ko shabdo mei utaara jaaye. :angel4:

Age ki kahani ke liye utsuk hu.. Ke apna hero kya kya karname karne wala hai. :cowboy2:
Thank you 😊 very much Baawri Raani ji ❣️ for your amazing and superb Review 🥰 Aapne kaha ki kewal kahani me hi aisa hota hai, lekin ye sahi nahi hai:nope: Sayad aapne padha nahi hoga lekin maine likha hai ke ye Sachi Bhatnagar per hai story :declare:Aur Sachi kahani me koi Mirch-Masala nahi hota, apan to bas pal do pal ke sayari hai writer nahi.
Anyway thank you so much for coming 💗
 

Raj_sharma

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Mubarak ho. Ladke valo ki taraf se to rista pakka he. Ladki ki bhi ha he. Bas muh se bayan nahi kiya. Amezing.

Kya bus ka seen create kiya he. Dono sath ek dusre ko jakde hue. Mast romantic seen likha hai.

Muje vo Kavita bhi mast lagi. Aur sayari to kya bat he. Jabardast. Maza aaya.
बोहोत-बोहोत आभार देवी जी, :thanx: आपके प्यार भरे शब्दों के लिए, कविता और शायरी तो अपनी एरिया है, तो उसमे कमी होने ना देंगे।
आपके स्पोर्ट के लिए एक बार फिर से आभार :hug:
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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एक बहुत ही सुंदर कहानी का आरंभ
आज ही १ से ८ तक सब अपडेट पढ़ डाले
बहुत अच्छे
बोहोत-बोहोत धन्यवाद श्रीमान, आपका स्वागत है :thanx:
 

Baawri Raani

👑 Born to Rule the World 🌏
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Thank you 😊 very much Baawri Raani ji ❣️ for your amazing and superb Review 🥰 Aapne kaha ki kewal kahani me hi aisa hota hai, lekin ye sahi nahi hai:nope: Sayad aapne padha nahi hoga lekin maine likha hai ke ye Sachi Bhatnagar per hai story :declare:Aur Sachi kahani me koi Mirch-Masala nahi hota, apan to bas pal do pal ke sayari hai writer nahi.
Anyway thank you so much for coming 💗
Ha ha :cool3:agar yeh sachi ghatnao pe aadharit hai..toh mein shaayad kisi aur duniya mei rehti hu..:angel3: Kyon ki mein toh aalsi ladke ko apna dil kabhi na du.. :nope1:
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Ha ha :cool3:agar yeh sachi ghatnao pe aadharit hai..toh mein shaayad kisi aur duniya mei rehti hu..:angel3: Kyon ki mein toh aalsi ladke ko apna dil kabhi na du.. :nope1:
ये दिल की बात है देवी जी :D लगता है आपने प्यार को अभी समझा ही नही:nope: प्यार दिल से होता है, दिमाग से नही:declare:ओर जहा दिमाग लग जाए वहा प्यार नही सौदा होता है, हमने इश्क जिया है👍 वो दर्द, वो तड़प, वो एहसास. ये सब दिल लगाने वाला ही समझ सकता है।:heart:
 

kas1709

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Update 12.

सीता देवी: बेटा तू ही रघुवीर का ख्याल रख सकती है। तू मेरे रघुवीर से शादी कर ले इस पागल को तेरे अलावा कोई नहीं समझा सकता है।

रघुवीर तेरे अलावा किसी और की नहीं सुनता (रघुवीर की मम्मी सुप्रिया को पसंद करती है)। ये सुनके सुप्रिया को शर्म आ जाती है।

रघुवीर की मम्मी कहती है, पढाई में तो ध्यान देता नहीं सारे दिन इधर-उधर घूमता है! हर रोज रघुवीर के पापा रघुवीर पर गुस्सा करते रहते है। इतना सुनकर के सुप्रिया अपने घर चली जाती है क्योकि रघुवीर घर पर नहीं होता अपने पापा के साथ कही गया होता है।

अब आगे:

इधर दोनों अपने घर पर कहते है टूर पर जाने के लिए पर रघुवीर के पापा नहीं जाने देते रघुवीर को। उसके पापा डांटने लगते हैं, की कोई काम अच्छे से करता है क्या? जो यह कही जाए, पढ़ाई पर ध्यान तो है नहीं।
तभी सुप्रिया आ जाती है और रघुवीर के पापा से कहती है !

प्रिया: अंकल रघुवीर को मैं पढाई में मदद करती हूँ, और रघुवीर पढ़ाई पर अच्छे से ध्यान देने लगा है।
आप रघुवीर को हमारे साथ जाने दो, अब रघुवीर कभी को कभी कम नंबर नहीं आएगा कॉलेज में, इसकी गारंटी मैं देती हूं !! मुझे यकीन है वीर पे.

सुप्रिया की बात सुनने के बाद रघुवीर के पापा राज़ी हो जाते है, और कहते हैं.

दशरथ सिंह: मुझे तुम पर पूरा विश्वास है सुप्रिया बेटे कि तुम जो बोल रही हो वही सच होगा, तुम बोलती हो तो ठीक है! ये जा सकता है!

अगले दिन सुबह-2 घर से बाहर निकलते ही प्रिया अपनी छत पर घुमती हुई दिखाई देती है तो वीर इशारा करता है, जिसे देखकर प्रिया छत के दूसरी तरफ जहां गली थी वहा आती है!

वीर: धन्यवाद प्रिया! तुम्हारी वजह से पापा मान गए वरना पता नहीं कितने पापड़ बेलने पड़ते? प्रिया: क्या यार वीर तुम भी अजीब बातें करते हो? आपस में भी कोई सॉरी और थैंक यू होता है क्या?
और दूसरी बात वहां चलने के लिए तुमने ही हमें तैयार किया और तुम ही ना जा सके तो मैं वाहा जाके क्या करूंगी?

वीर: लव यू "चिकुडी"

प्रिया: (अपनी आँखे सिकोड़ कर) क्या बोला तुमने?

वीर: कुछ नहीं मैं तो बस ऐसे ही...

प्रिया: ना-ना कुछ तो बोला है पर मुझे ठीक से सुना नहीं?

वीर: यार वो क्या है ना पापा ने एक काम बोला था याद आया अभी!
तो मैं बाद में मिलता हूं वरना मुझे डांटेंगे।

प्रिया: अरे-2 सुनो तो सही!!
लेकिन वीर प्रिया की नजर चुरा कर निकल लेता है काम के बहाने से,

और प्रिया मंद-मंद मुस्कुराती हुई:


“कभी तुम आजाओ ख़यालों में और मुस्कुराहट दूं मैं, इसे गर इश्क़ कहते हैं तो हां मुझे इश्क़ है तुमसे.”

प्रिया: उसको लगता है मैंने कुछ नहीं सुना?
लेकिन मेरा बालम जरा नादान है, कुछ भी कहो वीर तू तो मेरी जान है!!

वीर वहां से निकल कर सनी की हवेली पर उससे मिलता है! दोनों दोस्त मिलके मनाली घूमने के बारे में बताते हैं, और सनी बोलता है कि यार हमारे काफी दिन हो गए नदी पर नहाए? तो चलो आज दोनों फिर से एक बार कॉम्पिटिशन हो जाए कि सबसे जल्दी नदी कोन पार करता है।

वीर : बड़ा बादशाह बन रहा है बेटा चलो हो जाये,

सनी: “
बादशाह तो कहीं का भी बन सकता हूँ, पर तेरे दिल की नगरी में हुकूमत करने का मजा ही कुछ अलग है दोस्त”

वीर: चलो भाई !!. फ़िर दोनों दोस्त वहां से नदी पर नहाने चले जाते हैं! ये उन दोनों की आदत थी केवल बरसात के समय को छोड़ के कभी भी नदी में नहाते निकल पड़ते थे।

ऐसा ही एक दो दिन और निकल जाते हैं! और आख़िर टूर जाने का दिन भी नज़दीक आ जाता है,

शाम को प्रिया रघुवीर से मिलती है और कहती है सुबह जल्दी उठ जाना, ठीक है? तुम्हारी देर करने की पुरानी आदत नहीं चलेगी।

फिर दोनों जाने के लिए तैयारी करने लगते है, और अपना -अपना बैग पैक करते हैं।

अगले दिन सुबह सब जाने के लिए तैयार थे। पर रघुवीर को लेट करने की बीमारी होती है। तभी सुप्रिया तैयार हो कर आ जाती है रघुवीर के घर पर,
रघुवीर अभी तक सो रहा होता है।

सुप्रिया -रघुवीर कहा है चाची ?

रघुवीर की मम्मी – रघुवीर सो रहा है

सुप्रिया – अभी तक सो रहा है। इतना कह के सुप्रिया रघुवीर के रूम में चली जाती है। और रघुवीर को उठाने लगती है।

रघुवीर: कुछ देर और सोने दे यार,

सुप्रिया: नहीं हम दोनों लेट हो जाएगें!!

फिर रघुवीर उठ जाता है। और जल्दी से तैयार होने लगता है। क्योकि रघुवीर सुप्रिया का हर कहना मानता है। और जल्दी कॉलेज की और जाते है। दोनों कुछ ही टाइम बाद कॉलेज पहुँच जाते है।

कुछ देर और लेट करते तो सब निकल जाते, सुप्रिया रघुवीर को मारने लगती है क्योकि सब बस में बैठ गए थे सिर्फ रघुवीर और सुप्रिया का ही इंतजार कर रहे थे। वो दोनों भी जल्दी से बस में चले जाते है, जहां सनी, कंचन और बाकी सब भी उनका इंतजार कर रहे थे।

इनके जाते ही बस चल पड़ती है। रघुवीर और सुप्रिया को सब से पीछे की सीट मिलती है। लेट होने की वजह से सुप्रिया रघुवीर पर गुस्सा करती है, आज तेरी वजह से बस छूट जाती ना, तब रघुवीर कहता है यार सॉरी, सुप्रिया मान जाती है। और बातें करने लगती है।

तभी सनी भी वही आत है साथ में कंचन भी होती है! इनको आगे सीट मिलती है क्यों कि ये पहले ही आ गए थे, और साथ में बैठे थे, और वीर आखिरी में।

सनी: भाई यार तुझसे बड़ा चोमू मैंने कभी नहीं देखा! यार इतना भी क्या आलसी होना? तेरे आलस्य की वजह से अभी सब लोग तुझे छोड़ कर जाने वाले थे, मैं भी बस से उतरने वाला ही था।

वीर: अब हो गया ना यार गलती सॉरी प्लीज! ओर वीर एक कविता सुनाता है:

आज भी याद आती है वो स्कूल कॉलेज की दोस्ती, प्यार का जुनून और प्यारे दोस्तों की दोस्ती, आज भी याद आते है वो प्यारे लम्हे, और याद आती है उन प्यारे दोस्तों की दोस्ती। नींद नहीं आती जब तू उदास होता है, अच्छा नहीं लगता जब तू नाराज़ होता है, शायद ये सच्ची दोस्ती ही है हमारे बीच की, दिल खुश होता है जब तू पास होता है। और हमने जब आप जैसा दोस्त पा लिया, तो सारे गम को चन्द लम्हो में भुला दिया।“


सनी: (कविता सुनके मुस्कान के साथ) जा कर दिया माफ तू सुधरने वाला तो है नहीं!

थोड़ी देर में सब मस्ती मजाक कर रहे थे,

सनी: अरे भाई सब लोग मिलके अंताक्षरी खेलते हैं, क्या बोलते हो सब?

सब लोग मिलके गाना गाते है ।.. “ज़िंदगी एक सफ़र है सुहाना यहाँ कल क्या हो किसने जाना…….

ऐसे ही हंसी मजाक चलता रहता है... उधर सुप्रिया को नींद आने लगती है। और रघुवीर अपने फ़ोन से गाने सुन रहा होता है।

सुप्रिया खिड़की के पास ही बैठी होती है । और खिड़की पर सर रख के सो जाती है जैसे-जैसे बस हिलती है वैसे-वैसे बार बार सुप्रिया उठ जाती है। तब रघुवीर देख लेता है और अपने कंधे पर सुप्रिया का सर रख देता है।

प्रिया वीर की तरफ देखती है! वीर प्रिया की तरफ एक पल के लिए दोनों की आंखें चार होती हैं और दोनों खो जाते हैं।

जैसे ही बस को झटका लगता है उनकी तंद्रा टूट जाती है और दोनो मंद -मंद मुस्कुराते हुए इधर उधर देखने लगते हैं!

कुछ देर बाद प्रिया को फिर नींद आने लगती है तो वीर उसका सर अपने कंधे पर रख लेता है। सुप्रिया रघुवीर के कंधे पर ही सो जाती है तभी अचानक बस ब्रेक मारती है तो सुप्रिया रघुवीर को कस के पकड़ लेती है।

रघुवीर को बहुत अच्छा लगता है। रघुवीर भी अपना हाथ सुप्रिया के कमर पर रख लेता है और दोनों एक दूसरे के करीब आ जाते है।

जिंदगी की राह में मिले होंगे हजारों मुसाफिर तुमको, जिंदगी भर ना भुला पाओगे वो मुलाकात हूं मैं…”

सुप्रिया नींद में रघुवीर के गले के पास ही सुप्रिया के लिप्स लगने लगते है तभी रघुवीर को कुछ-कुछ होने लगता है।

रघुवीर सुप्रिया को कस के पकड़ लेता है सुप्रिया भी रघुवीर को पकड़ लेती है ना जाने क्या होता दोनों को। :heart:

वीर: (मन में)

मेरी रूह को अपनी रूह में मिलाकर मुझे गुमनाम कर दो, तुम्हें देख कर लोग मुझे पहचाने यूं खुद को मेरा हमनाम कर दो”


सफर जारी है दोस्तों :writing:
Nice update....
 

Tiger 786

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सुप्रिया को आज भी कॉलेज का पहला दिन याद है उसकी रेगिंग हो रही थी (फ्लैश बैक): सुप्रिया आज वीर के साथ ना जा कर अपनी सहेली के साथ गई थी,
कॉलेज का पहला दिन और पहले दिन क्या हो सकता है कॉलेज में आप सब जानते हो। रेगिंग. कॉलेज के गेट के अंदर घुसते ही तीन लड़के ओर 2 सीनियर लड़किया खड़ी थी.. महेश, सुभाष, मोहित, मीनू, काव्या.
मोहित पास के ही गांव के सरपंच का नेता था। अपने बाप के पैसे का उपयोग करेंके गुंडागर्दी करता रहता था. कुछ ज्यादा ही घमंड था उसे अपने बाप के पैसे का। उसने घुसते ही सुप्रिया ओर उसकी सहेली को रोक लिया।
मोहित: "वाह आज से पहले ऐसा सुंदर और कसा हुआ माल पहले कभी नहीं देखा"

सुप्रिया से ए-लड़की इधर आ! क्या नाम है तेरा?
सुप्रिया: (हाथ जोड़ के नमस्ते) जी मै सुप्रीया और ये मेरी दोस्त कंचन है भैया जी.
मोहित: (हँसते हुए) अबे बाहर गाँव से आई है क्या सैंया को भैया बुला रही है?
सुप्रिया: ये क्या बदतमीजी है? मैं तुम्हारी शिकायत करूंगी।
मोहित: जा कर दे. या चाहे तो अपने बाप को भी बुला ले तेरा उद्धार तो मैं ही करुंगा छमिया। हाये क्या चीज़ है... साला हाथ लगाओ तो हाथ जले या मुँह लगाओ तो मुँह जले ऐसा गरम माल। चल एक डील करते हैं तू मेरी गर्लफ्रेंड बन जा,
दोनों मिल के मजे करेंगे!! और फिर वैसे भी तू इतनी सुंदर है अच्छी लगी तो सादी भी कर लेंगे।
सुप्रिया: बदतमीज.. थप्पड़ मारने को आगे बड़ी..
मोहित: हाथ पकड़ते हुए अरे मेरी रानी इतनी गरमी।
तुझे छेड़ने में मजा आएगा। ये बोलके उसके दोनो हाथ पकड़ लेता है.
तभी वहा उनका एक टीचर आता है त्रिपाठी सर
त्रिपाठी सर : ये क्या हो रहा है? छोड़ो उस लड़की को.
मोहित: निकल ले बहनचोद. भूल गया क्या सेकंड ईयर में मेरे बाप ने क्या हाल किया था तेरा?
त्रिपाठी मुँह झुकाए चुप-चाप निकल जाता है।
मोहित: अब तुझे मुझसे कौन बचाएगा? एक काम करो दोनों लड़की अपना दुपट्टा उतारो या सामने वाली बेंच पर रख दो।
सुप्रिया: और उसकी सहेली दोनों रोने लगती है..
और मोहित उसको चुप कराने के बहाने उसके कंधे पर जबरदस्ती हाथ रखता है।
तभी उसके पीछे... से आवाज आती है.
हाथ हटा ले खजूर वरना उसी हाथ से धोयेगा और उसी हाथ से खाना पड़ेगा।
मोहित
...?????

जारी है :writing:
Wow superb enry karvai hai hero ki
Awesome update
 

Tiger 786

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Update 3
अब आगे:
मोहित घूम के देखा तो सामने एक 6 फिट 2 इंच का हट्टा कट्टा लड़का खड़ा था।
मोहित: कौन है बे तू?

रघुवीर: वैसे तो मेरा नाम रघुवीर है पर तू मुझे अपना बाप भी समझ सकता है।
मोहित: अबे साले जनता भी है किस से बात कर रहा है? ऐसा गायब कर दूंगा जैसे गधे के सिर से सीग.


रघुवीर: “लहजे में बत्तमीजी और चेहरे पर नकाब लिए फिरते है, जिनके खुद के खाते ख़राब हैवो मेरा हिसाब लिए फिरते है”
और सुन: “हाथ में खंजर ही नहीं आँखों में पानी भी चाहिए हमें दुश्मन भी थोड़ा खानदानी चाहिए”

क्यू बे चमन साफ-सफाई का काम करता है क्या? अबे झाड़ू तो साथ में रखा कर ताकि पता रहे सबको। मोहित: साले शिवचरण चौधरी का नाम सुना है क्या? उनका लड़का हू मै रातो रात गायब हो जाएगा और किसी को पता भी नहीं चलेगा। और जिसके लिए तू मुझसे जुबान जोरी कर रहा है उसको तो मैं ही भोगूंगा।

इतना सुनते ही रघुवीर अपना आपा खोने लगता है और गुस्से से उसका आखे लाल हो जाती है।
वो धीरे-धीरे मोहित की तरफ बढ़ने लगता है।
रघुवीर: बस कुत्ते, बहुत बोल लीया तूने, अगर तू मुझे कुछ कहता तो मैं तुझे माफ कर देता लेकिन तुमने जिसे बोला है उसके लिए तुम जैसे 100 को भी मार सकतऻ हू मैं.
इतना बोलके रघुवीर ने मोहित की गर्दन पकड़ के उसे हवा में उठा दिया ओर सामने की दीवार पर जोर से दे मारा. उसने जैसे ही उसने उठने की कोसिस की तभी उसके पेट में जोर की लात पड़ी और मुंह से खून की उल्टी निकली।
मोहित की हालत खराब होने लगी थी या रघुवीर उसे किसी की भी परवाह किए बिना मारे जा रहा था।
तभी किसी ने उसका हाथ पकड़ा! जब रघुवीर ने पलट के देखा तो वो कोई नहीं बल्कि सुप्रिया थी.
सुप्रिया: छोड़ उसे वीर, वो मर जायेगा! दिख नहीं रहा क्या कितना खून बह रहा है उसका?
रघुवीर: ऐसे कैसे छोड़ दु प्रिया? जब तक इसकी गांड नहीं तोड़ता ठीक से तब तक नहीं छोडूंगा आज।
सुप्रिया: छोड़ उसे वीर तुझे मेरी कसम है!!
(वीर गुस्से में) बस प्रिया बस कुछ भी करती पर अपनी कसम तो ना देती। रघुवीर गुस्से से: तुमने मुझे रोक के अच्छा नहीं किया प्रिया। और तू सुन बे लपरझंडिस. आज के बाद अगर इसके आस-पास भी नजर आया तो वो दिन तेरा अंतिम दिन होगा। ये कह के उसकी तरफ़ थूकता हुआ वीर वहाँ से चला जाता है। सुप्रिया और कंचन दोनो भी उसके पीछे क्लास की और निकल जाती है।
क्लास शुरू हुई पहला पीरियड शुरू हुआ टीचर ने सबका इंट्रो लिया।

इसी तरह क्रम से सब शिक्षक आते गए सबका एक दूसरे से परिचय होता रहा ज्यादा कुछ पढ़ाई तो नहीं हुई पर पहला दिन ऐसे ही बीत गया।
अगले दिन जब कॉलेज में गए तो सब शांत थे जब सब वीर को अलग नजर से देख रहे थे कुछ लड़कियां थी जो उसे देख कर मुस्कुरा सकती थी और आपस में खुसर-फुसर कर रही थी।
जो कि सुप्रिया के मन को नहीं भा रहा था। 😀
मोहित कल सुबह की घटना के बाद से कहीं दिखाई नहीं दिया था।
हम लोग क्लास की तरफ जा रहे थे तो रास्ते में त्रिपाठी सर मिले वो रघुवीर को अपनी तरफ आने का इशारा किया और एक और चल दिये।
त्रिपाठी कैंटीन के बाहर बेंच पर बैठ कर: आओ रघुवीर यहां बैठो मेरे पास। रघुवीर: सर, कुछ जरूरी काम था क्या?
त्रिपाठी: कुछ खास नहीं, बस तुमसे कुछ बातें करने का मन किया तो यहां ले आया। रघुवीर: कहिये सर, मैं क्या सेवा कर सकता हूँ आपकी?
त्रिपाठी: देखो रघुवीर सेवा कुछ नहीं है, मैं तो कल की हुई घटना के बारे में बात करना चाहता था। देखो कल जो भी हुआ, वो नहीं होना चाहिए था इसमे कोई शक नहीं, और मेरी व्यक्तिगत राय है कि उसे (मोहित) को जो तुमने पीटा है वो उसको सबक सिखाने के लिए अच्छा भी है।
लेकिन मैं तुमसे ये कहूंगा कि तुम जरा सावधान रहना! वो किसी भी हद तक नीचे गिर सकता है !!

रघुवीर: सर मैं आपकी बात ध्यान रखूंगा, लेकिन एक बात जरूर पूछना चाहूंगा कि आप उससे डरते क्यों हैं? और कृपया मेरी बात का बुरा मत मानना।
त्रिपाठी: इसके पीछे मेरी मजबूरी है बेटे, अगर मैं तुझे बता दूं और तुमने किसी को बता दिया तो मेरी बदनामी हो जाएगी।

जारी है...✍️
Superb update
 

Raj_sharma

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Ha ha :cool3:agar yeh sachi ghatnao pe aadharit hai..toh mein shaayad kisi aur duniya mei rehti hu..:angel3: Kyon ki mein toh aalsi ladke ko apna dil kabhi na du.. :nope1:
Waise aalsi to mai bhi nahi:smarty:
 
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