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Adultery शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)

Ajju Landwalia

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पौने आठ बज चुके थे.. और आठ बजे तो सबको डाइनिंग रूम में इकठ्ठा होना था.. सब से पहले मौसम और फाल्गुनी पहुँच गए.. मौसम के चेहरे पर उत्तेजना का नशा अब भी दिख रहा था.. एक के बाद एक.. सब समय पर डाइनिंग हॉल में आने लगे..कविता और पीयूष भी अलग अलग आए थे.. कविता का ड्रेसिंग देखकर सबकी सांस गले में ही अटक गई..

सबसे पहले रेणुका ने कविता की तारीफ की "Wow..!! Kavita, you are looking absolutely gorgeous..!!कितनी जवान और खूबसूरत लग रही है तू इस ड्रेस में.. कौन कहेगा की तू शादी शुदा है !! अठारह से ऊपर एक साल की नही लग रही तू.. " उसकी कमर पर चिमटी काटते हुए उसने कहा .. अपनी तारीफ सुनकर कविता खुश हो गई

मौसम और फाल्गुनी भी कविता का ड्रेसिंग देखकर चकित रह गए "दीदी, गजब लग रही हो आप इस ड्रेस में.. एकदम कयामत!!" फाल्गुनी ने शरमाते हुए कहा "दीदी आप तो नोरा फतेही से भी ज्यादा हॉट लग रही हो!!" फिर नजदीक जाकर फाल्गुनी ने कविता के कान में कहा "अरे दीदी, आपने ब्रा क्यों नही पहनी?? आप जब चलती हो तो सब उछलता है"

फाल्गुनी की बात सुनकर कविता ने हँसकर उसे प्यार से गाल पर हल्की चपत लगाई और कहा "उछलने दे.. उछलने से क्या होता है.. !! बाहर तो नही निकल रहे है ना.. !!" कहते हुए वह बिंदास पीयूष के पास जाकर खड़ी हो गई.. पीयूष वैशाली के साथ बातों में उलझा हुआ था.. कविता को देखकर वैशाली के होश उड़ गए.. पीयूष ने एक नजर कविता की तरफ देखा.. और उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे कविता ने ऐसे कपड़े पहनकर खानदान की इज्जत की माँ चोद दी हो..

गुस्से में पीयूष ने कहा "इससे अच्छा तो तू बिना कपड़ों के ही चली आती.. !!! लोगों को दिखाने का शौक हो तो पूरा ही दिखा दे एक बार में .. !! इतना भी छुपाकर क्यों रखा? मेरी इज्जत को डुबोने बैठी है तू.. !!"

"कोई कपड़ों से अपनी इज्जत की धज्जियां उड़ाता है तो कोई अपने बर्ताव से.. !!" कविता ने बेफिक्री से जवाब दिया..

लंबे डाइनिंग टेबल पर सब बैठने लगे.. कविता के साथ बैठने के बजाए पीयूष, पिंटू के साथ जाकर बैठा.. यह बात राजेश ने नोटिस की.. राजेश भी कविता के पिंक टॉप में से बिना ब्रा की दिख रही गोलाइयों को ताड़ रहा था.. सिर्फ राजेश ही नही.. हॉल में बैठे सभी मर्दों की नजर बार बार कविता पर चली जाती थी.. गुलाबी रंग के स्लीवलेस पतले टॉप के अंदर परफेक्ट साइज़ के स्तनों ने हाहाकार मचा दिया था..

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खाना परोसा जाने लगा.. एक के बाद एक नई नई डिश आने लगी.. कविता तीरछी नज़रों से पीयूष का निरीक्षण कर रही थी.. की वो कितनी बार वैशाली की तरफ देखता है..

सब के सामने राजेश ने पीयूष से कहा "पीयूष, तेरे जितना मूर्ख आदमी इस पार्टी में और कोई नही है"

"क्यों? क्या हुआ सर?"

राजेश: "अरे भई, इतनी सुंदर.. मोम की पुतली जैसी पत्नी को छोड़कर तू पिंटू के साथ बैठ गया.. !!! ये तो अच्छा हुआ की कविता के बगल में मौसम बैठी है.. वरना उसके पास बैठने वालों की लाइन लग जाती.. "

कविता गर्व से पीयूष की ओर देख रही थी.. पीयूष नीचे देखने लगा.. मन ही मन वो कविता को.. इस स्थिति के लिए कोस रहा था..

राजेश: "जाओ पीयूष.. अपनी पत्नी के पास जाकर बैठो"

पीयूष: "नहीं.. मैं यहीं ठीक हूँ.. " राजेश की राय को ठुकराते हुए उसने कहा

"कोई बात नही सर.. अगर वो मेरे पास आकर नही बैठता.. तो मैं ही उसके पास चली जाती हूँ" कहते हुए कविता खड़ी हुई.. हाई हील के सैन्डल पहनकर अपने स्तनों को मटकाते हुए वो पिंटू और पीयूष के पास आई और बोली "पिंटू सर.. आप प्लीज जरा बगल वाली कुर्सी में शिफ्ट हो जाएंगे.. ??

पिंटू की तो जैसे लॉटरी ही लग गई.. "स्योर मैडम.. " कहते हुए एक कुर्सी छोड़कर बैठ गया.. और कविता, पीयूष और पिंटू के बीच में बैठ गई.. कविता के मन की मुराद भी पूरी हो गई.. एक तरफ पति था और दूसरी तरफ उसका प्रेमी.. बीच में कविता.. बैठते वक्त उसने पीयूष के पैरों पर जान बूझकर लात मारी और सब सुन सके ऐसी आवाज में कहा "हाई पीयूष.. कैसे हो? "जैसे वह किसी अनजान से बात कर रही हो.. हद तो तब हुई जब कविता ने बाउल से सब से पहले पिंटू की थाली में परोसा और फिर बची कूची सब्जी पीयूष के प्लेट में डाली.. पीयूष की इज्जत का कचरा कर दिया कविता ने.. डाइनिंग टेबल पर बैठे सब को यकीन हो गया की कविता और पीयूष के बीच कुछ अनबन थी..

मौसम को कविता का पीयूष के प्रति ये कठोर बर्ताव बिल्कुल अच्छा नही लगा.. पीयूष के लिए उसे बुरा लग रहा था.. पर वो कुछ कर नही सकती थी..इसलिए उसने अपना ध्यान खाना खाने पर केंद्रित किया.. सिल्क की भारी साड़ी में सजी हुई रेणुका खाना खाते हुए बार बार पीयूष की ओर देख रही थी और सोच रही थी की आखिर कविता ऐसा क्यों कर रही है ?? कविता ने खुद ही उसे अपने और पिंटू के प्रेम प्रकरण के बारे में बताया था.. अपने प्रेमी के संग डिनर कर रही कविता को देखकर रेणुका को भी पीयूष के साथ बैठने का दिल करने लगा था..

काफी देर तक डिनर चलता रहा.. उसके बाद राजेश अपने स्थान से उठा और सबको संबोधित करते हुए कहा

राजेश: "सबका डिनर हो चुका है.. हम सब एक घंटे के लिए रीलैक्स होंगे और फिर ग्रांड पार्टी के लिए दस बजे यहीं मिलेंगे.. आप सभी के रेणुका मैडम की बर्थडे मनाने.. !!" सब ने तालियों से इस बात का स्वागत किया.. धीरे धीरे सब खड़े होकर अपने कमरे की ओर जाने लगे.. मौसम और फाल्गुनी कोने में बैठकर बातें कर रही थी.. रेणुका और वैशाली.. पीयूष की दोनों प्रेमिकाएं आपस में कुछ गुफ्तगू कर रही थी.. पीयूष मौसम के खयालों में खोया हुआ था.. कविता और पिंटू बातें कर रहे थे.. राजेश ने जाते जाते कविता के पिंक टॉप से दिख रही गोलाइयों पर एक कामुक नजर डाली..

संबंधों की जटिलता बड़ी ही संकीर्ण होती है.. माउंट आबू की एक वैभवशाली आलीशान होटल के तीसरे माले पर बने विशाल डाइनिंग हॉल में खड़े पच्चीस लोग अपने दिल और दिमाग से सोच रहे थे.. वैशाली को अपने पति संजय की याद नही आ रही थी और पीयूष कविता को भूल चुका था.. सब को दूसरे की थाली में घी ज्यादा नजर आ रहा था.. कविता पिंटू में अपने जीवन का सुख ढूंढ रही थी.. और रेणुका पीयूष में.. ऐसा क्यों होता है की अपने सुख के लिए इंसान हमेशा दूसरों पर ही निर्भर होता है?? क्या हम अकेले ही सुखी नही हो सकते??.. जवाब है.. नही हो सकते.. हकीकत में इंसान अकेले रहने के लिए बना ही नही है.. उसका सुख और दुख.. दूसरे इंसानों की बदौलत ही होता है.. यही सब से बड़ी मुसीबत है..

अपनी तरफ देख रहे राजेश सर की ओर कविता ने पहली बार ध्यान से देखा.. राजेश की आँखों की हवस को उसने परख लिया.. राजेश रेणुका से बात करते हुए बार बार कविता की छातियों की ओर देख रहा था.. लेकिन कविता को इस बात का जरा भी बुरा नही लग रहा था.. उल्टा वो तो इस बात से खुश हो रही थी

पीयूष मौसम को पटाने और चोदने की तरकीबें सोच रहा था.. पर फाल्गुनी हमेशा मौसम के साथ ही होती थी.. ऐसी सूरत में मौसम से अकेले मिल पाना मुमकिन नही था.. अनजाने में ही फाल्गुनी कबाब में हड्डी बनी हुई थी.. शायद इसीलिए यह अंग्रेजी कहावत बनी होगी Two is a company but three is a crowd...

डेढ़ घंटे पहले पीयूष के साथ शॉर्ट इनिंग्स खेलकर फ्रेश हो चुकी वैशाली अकेले बैठी थी फिर भी उसके चेहरे पर अनोखा नूर था.. चुदाई की तृप्तता की चमक थी.. पीयूष की किस्मत बड़ी ही तगड़ी थी.. उसके पीछे वैशाली, रेणुका और मौसम.. तीन तीन चूतें पड़ी हुई थी.. और कविता पिंटू के पीछे पड़ी हुई थी.. कविता ये सोच रही थी की पीयूष के साथ ऐसा कब तक चलेगा? छोटी सी बात का उसने बतंगड बना दिया..?? क्या कभी समझौता होगा? पिंटू की तरफ देखकर उसने एक भारी सांस ली.. वो चलकर पिंटू के पास आई और बोली "क्यों अकेला खड़ा है? क्या सोच रहा है?"

"अकेला हूँ इसलिए अकेला खड़ा हूँ.. सब कपल में हैं और में सिंगल हूँ.. बिना कंपनी के बोर हो रहा हूँ.. और तुझे तो पता है.. मुझे भीड़भाड़ ज्यादा पसंद नही है.. वैसे इस ड्रेस में तू ग़ज़ब लग रही है कविता.. यार.. ऐसे दिखा दिखाकर क्यों तड़पा रही है!! मेरा हाल उस भक्त जैसा है जो भगवान को चढ़ाएं प्रसाद को सिर्फ देख सकता है.. चख नही सकता.. " पीयूष ने कहा

"तो चख ले ना.. रोक कौन रहा है तुझे.. और ये मंदिर का प्रसाद नही है.. तेरी थाली में परोसे जाने के लिए तैयार भोजन है" कविता ने झुककर अपने स्तनों के बीच की खाई दिखाकर पिंटू को उकसाया की इस खाई में कूदकर अपनी जान दे दें.. "पिंटू, तुझे मेरे स्तन बहोत पसंद है ना.. इसीलिए तो मैंने ऐसे कपड़े पहने है.. और खास तेरा पसंदीदा पिंक टॉप भी इसीलिए पहना आज.. आई लव यू पिंटू.. " पिंटू के कान में फुसफुसाई कविता

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"आई लव यू टू कवि.. सच कहा तूने तेरे बबले मुझे बहोत पसंद है.. देखकर ही उन्हे मसलने का मन कर रहा है मुझे.. पिछली बार जब हम मिले थे तब याद है तुझे.. कितने दबाए थे मैंने!!!"

"हाँ यार.. मुझे भी अपनी आखिरी मीटिंग बहोत याद आ रही है.. यार पिंटू.. ऐसी जगह पर हम दोनों अकेले आए तो कितना मज़ा आएगा.. हैं ना.. !!" कविता खुली आँखों से सपना देख रही थी..

प्रेमिओ की दुनिया सपने में ही जन्म लेती है और सपनों में ही बिखर जाती है..

"कविता, हम दोनों नदी के दो किनारे है.. जो साथ साथ हजारों किलोमीटर तक सफर करते है.. सदियों तक साथ रहते है.. पर कभी एक नही हो सकते.. तू तेरे ससुराल में पीयूष के साथ खुश हो तो मैं तुझे देखकर ही खुश हो जाऊंगा.. मैं तो बस दूर बैठे तुझे देखता रहूँगा.. और तेरा ध्यान रखूँगा.. मरते दम तक.. !!" पिंटू भावुक हो गया

"उदास मत हो यार.. मैं शीला भाभी को बोलूँगी तो वो हम दोनों का यहाँ अकेले आने का कुछ न कुछ सेटिंग जरूर कर देगी.. शीला भाभी पर मुझे पूरा भरोसा है.. वो कोई तरकीब लगाकर हमारी ये ख्वाहिश पूरी करेगी.. शीला भाभी कुछ भी कर सकती है.. तुझे याद है न पिंटू.. कितनी चालाकी से उन्होंने उस दिन मूवी देखते वक्त हम दोनों का सेटिंग करवाया था??" कविता ने कहा

"हाँ कविता.. वो भी पीयूष की मौजूदगी में.. " उस यादगार लम्हे को याद करते हुए पिंटू खुश हो गया.. उसका उदास चेहरा खिल उठा..

अपने प्रेमी को खुश देखकर कविता धीमे से बोली "देख पिंटू.. आशा अमर है.. निराश मत हो.. अभी हम आबू में ही है.. तू पीयूष से मिलकर बात कर.. वो कहीं बाहर जाने वाला हो.. तो हम मिल सकते है.. मुझसे तो वो बात करता नही है.. पर मैं भी अपनी तरफ से कोशिश करती हूँ.. "

"लेकिन में पीयूष को ऐसा कैसे पूछूँ की वो कहाँ जाने वाला है और क्या करने वाला है?? उसे शक नही होगा?" पिंटू ने कहा

"देख पिंटू.. तुझे अगर मेरे बॉल दबाने है तो जोखिम उठाना पड़ेगा.. " कविता ने पिंटू के अंदर के मर्द को जगाने की कोशिश की

"ठीक है.. मैं कुछ करता हूँ.. " पिंटू वहाँ से चला गया..

कविता भी चलते चलते राजेश सर और रेणुका मैडम के पास गई..

मौसम से बात कर रहे पीयूष ने कहा "मौसम, देख तो.. कविता कैसे अपनी ब्रेस्ट सब को दिखाती फिर रही है??"

मौसम: "सब को दिखाने के लिए नही जीजू.. आपको दिखाने के लिए दीदी ने ऐसा ड्रेस पहना है.. नजदीक जाकर देखिए तो सही!!"

पीयूष: "मुझे उस में कुछ नही देखना.. मुझे जो देखना है वो तो मैं देख ही रहा हूँ.. " मौसम के उन्नत स्तनों की तरफ देखते हुए पीयूष बोला.. मौसम शरमाकर नीचे देखने लगी..

पीयूष: "जब तू शरमाती है तब और भी सेक्सी लगती है "

फाल्गुनी: "मर्दों को तो हर स्त्री या लड़की सेक्सी ही लगती है.. " फाल्गुनी ने पीयूष की पतंग हाथ में ही काट दी..

पीयूष: "ऐसा नही है फाल्गुनी.. सब का देखने का नजरिया अलग अलग लगता है.. पर हाँ.. वैसे तू भी मुझे बड़ी सेक्सी लगती है" पीयूष ने फाल्गुनी को भी दाने डाले

"जीजू, आपको मैं सेक्सी लगती हूँ या मौसम?" फाल्गुनी ने पूछा

"मुझे तो दोनों सेक्सी लगती हो" पीयूष ने कहा

मौसम: "ज्यादा सेक्सी कौन लगता है?" कठिन सवाल था पीयूष के लिए.. पीयूष उलझ गया

"मुझे तो दोनों सेक्सी लगती हो.. ज्यादा कम का मुझे पता नही है.. आप दोनों ऐसे सवाल करके मुझे कन्फ्यूज़ मत करो.. फाल्गुनी, तू मेरे साथ डेट पर चलेगी?" पीयूष ने सीधे सीधे पूछ लिया..

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पीयूष के इस अचानक सवाल से एक पल के लिए तो स्तब्ध रह गई फाल्गुनी.. "आप पागल हो गए हो क्या, जीजू? मैं आपके साथ डेट पर गई तो कविता दीदी जान से मार देगी मुझे.. कितना प्यार करती है वो आपसे.. पता है!!"

फाल्गुनी ने अनजाने में कहे इस वाक्य ने मौसम के अंदर से हिला कर रख दिया.. कांप उठी मौसम.. मन ही मन वो सोच रही थी की ऐसा क्या कारण था जो उसे पीयूष की ओर खींचा जा रहा था?? मौसम के चेहरे का नूर उड़ गया.. अकथ्य पीड़ा से उसका मुख मुरझा गया.. कहीं उसके इस आकर्षण का पता कविता दीदी को चल गया तो क्या होगा.. इस बात की कल्पना करने से भी डर रही थी मौसम.. उसने निश्चय किया.. कुछ भी हो जाए.. अब जीजू से ज्यादा क्लोज नही होना है.. अपनी पसंदीदा व्यक्ति से दूर भागने की कोशिश करनी थी उसे.. पर प्रेम और आकर्षण ऐसी चीज है जो कभी किसी को चैन से जीने ही नही देती

पीयूष: "अरे, मैं तो मज़ाक कर रहा था फाल्गुनी.. चलो मैं चलता हूँ अपने दोस्तों के पास.. बाद में पार्टी में मिलेंगे" कहते हुए पीयूष ने मौसम की पीठ को सहलाया और चल दिया

अब मौसम और फाल्गुनी अकेले थे.. फाल्गुनी मौसम को चिढ़ने लगी

"मौसम, देख न.. दीदी ने आज कैसी ड्रेस पहनी है.. कितनी मस्त लग रही है वो!! मैं तो कहती हूँ तू भी ऐसा ड्रेस ट्राय कर एक बार"

मौसम: "क्या तू भी.. मैं ऐसा ड्रेस पहनूँगी तो सब टूट पड़ेंगे मेरे ऊपर.. रेप हो जाएगा मेरा!!"

फाल्गुनी: "बकवास मत कर.. ऐसे कोई कैसे रेप कर देगा.. !! पर हाँ.. कविता दीदी का ड्रेस कुछ ज्यादा ही एक्सपोज कर रहा है.. शायद जीजू को भी ये बात पसंद नही आई"

मौसम: "हाँ थोड़ा बोल्ड तो जरूर है.. पर दीदी बेचारी घर पर ऐसा ड्रेस पहन नही सकती.. ऐसे मौकों पर ही ट्राय कर सकती है.. लेकिन तेरे बात से मैं सहमत हूँ.. ड्रेस में से कुछ ज्यादा ही नजर आ रहा है.. फाल्गुनी, तूने एक बात नोटिस की? राजेश सर बार बार दीदी की छाती को ही देख रहे थे.. उनकी पत्नी बगल में खड़ी थी फिर भी वह देखते ही जा रहे थे.. उनको शर्म नही आती होगी ऐसा देखने में ?? अपनी पत्नी की मौजूदगी में कोई कैसे किसी ओर को गंदी नजर से देख सकता है!!"


फाल्गुनी: "सही बात है तेरी.. इन सारे मर्दों को बस एक ही चीज में इन्टरेस्ट होता है"

Gazab ki update he vakharia Bhai,

Party me sabki nazar kavita par hi jam gayi.................lag bhi itni gazab ki rahi he kavita

Piyush aur kavita ke jhagde ka fayda lagta he pintu se pehle rajesh na utha le

Gazab bhai.......simply outstanding

Keep rocking Bro
 

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शीला के मन मस्तिष्क और जिस्म पर हवस का सुरूर चढ़ रहा था लेकिन दामाद के साथ होने से कंट्रोल रखना भी जरूरी था.. संजय के अंदर, शीला को दामाद नही.. पर एक जवान लंड नजर आने लगा.. वैसे भी संजय दामाद की तरह कहाँ पेश आ रहा था.. उसके हाव भाव और बोलने से तो यही लग रहा था जैसे वो शीला को चोदने के लिए गोवा ले जा रहा हो..

संजय के पेंट में लंड वाला हिस्सा फूलकर कचौड़ी जैसा हो गया था.. जिस पर शीला की नजर बार बार चली जाती थी.. पेंट और अंडरवेर के आरपार शीला ने संजय के तने हुए सख्त लंड की मन में कल्पना भी कर ली थी..

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शीला की हवस अब तूफान का स्वरूप धारण कर चुकी थी.. एलसीडी के छोटे से स्क्रीन पर चल रहे द्रश्य इस तूफान को ओर हवा दे रहे थे.. और इस तूफान में, सास और दामाद के संबंधों की पवित्रता धीरे धीरे हवा बनकर उड़ जा रही थी.. जोर जोर से भारी सांसें लेने के कारण सील की छातियाँ ऊपर नीचे हो रही थी.. संजय की नजरें स्तनों की हलचल का रसपान कर रहे थे और अपने दामाद की कामुक नज़रों से शीला के संयम का बांध टूटता जा रहा था..

संजय ने धीरे से शीला की जांघ पर हाथ रख दिया.. शीला कांप गई.. ये जो कुछ भी हो रहा था वो गलत था ये जानते हुए भी शीला उसे रोक नही पाई.. वासना ने उसके हाथ बांध दिए थे.. उसका मन तो कर रहा था की संजय का हाथ हटा दे और गाड़ी से उतर जाए पर उसका शरीर उसे ऐसा करने से रोक रहा था..

थोड़ी देर तक जांघ पर हाथ रखने पर भी जब शीला ने कोई विरोध नही किया तब संजय को जैसे ग्रीन सिग्नल मिल गया.. हिम्मत करके उसने शीला का हाथ पकड़ लिया और उसे चूम लिया.. शीला के पूरे शरीर में सिहरन दौड़ गई.. बेबस होकर वो संजय की हरकतों को देखती ही रही.. शीला की छोटी उंगली को संजय अपने मुंह में लेकर चूसने लगा.. उसकी जीभ के गरम स्पर्श से शीला ने कामुक होकर अपनी आँखें बंद कर दी.. और बंद आँखों में उसे आगे होने वाले द्रश्य दिखाई देने लगे..

काफी देर तक संजय शीला के हाथों से खेलता रहा.. कोई जल्दी तो थी नही क्योंकि सफर लंबा था.. शीला की गोरी नाजुक कोमल हथेली के बीच अपनी जीभ ऐसे फेरने लगा जैसे शीला का भोसड़ा चाट रहा हो.. शीला मन ही मन सोच रही थी.. ये आदमी कितना खतरनाक है.. कितनी कामुक हरकतें कर रहा है.. !! कोई भी औरत चाहे कितनी भी चारित्रवान क्यों न हो.. ऐसे स्पर्श का आगे कितनी देर तक संयम रख सकती थी.. !! शीला की चुत में जबरदस्त झटके लग रहे थे.. सिर्फ उसकी हथेली से खेलते हुए संजय ने उसे बेहद गरम कर दिया था.. शीला तब चोंक गई जब संजय ने उसकी हथेली अपने लंड पर रख दी..

शीला के शरीर में हाहाकार मच गया.. दोनों के बीच जो पतली सी रेखा बची थी वो भी जैसे मिट चुकी थी.. शीला का पल्लू अपनेआप सरक कर नीचे गिर गया.. क्या उत्तेजना के कारण पल्लू गिर गया? शीला के स्तन इतने कडक हो गए की उसे डर लगने लगा.. कहीं ब्रा के हुक टूट न जाए.. !! शीला के अंग अंग में उत्तेजना का जहर फैलने लगा था.. अपने सगे दामाद के लंड पर रखा हुआ हाथ.. पेंट के अंदर छुपे हुए उस विकराल लंड के झटकों के साथ ऊपर नीचे हो रहा था.. लंड की गर्मी शीला की हथेली से होते हुए उसकी चूत तक पहुँच रही थी..

हथेली में महसूस हो रही गर्मी को अपनी भोस के वर्टीकल होंठों के अंदर अनुभवित करने के लिए ऊपर नीचे हो रही थी शीला.. अनजाने में उसने संजय के लंड के उभार को दबा दिया.. संजय की आँखों में जोरदार चमक आ गई.. पल्लू सरकने के बाद, हिमालय के उत्तुंग शिखरों जैसे उसके बड़े बड़े स्तनों की गोलाइओ को छूने का बड़ा मन कर रहा था संजय को.. लेकिन वह जल्दबाजी करना नही चाहता था.. इस तरफ शीला सोच रही थी की लंड पकड़ लिया है.. पर अब तक संजय उसके स्तनों को क्यों नही छु रहा है !!

संजय के लंड पर शीला की पकड़ धीरे धीरे मजबूत होती जा रही थी.. शरीर की आग इतनी भड़क गई की शीला ने खुद ही संजय का हाथ पकड़कर अपने स्तनों पर रख दिया.. पुरुष के हाथों का स्पर्श.. स्तनों पर कितना अच्छा लगता है यह केवल स्त्री ही जानती है..

फट.. एक आवाज हुई और शीला के ब्लाउस का एक हुक टूट गया.. टाइट स्तनों के कारण ही हुक टूट गया था.. हुक टूट जाने से स्तनों पर दबाव थोड़ा सा कम हो गया.. संजय ने शीला की ओर देखा.. और वो शरमा गई.. शर्म आनी स्वाभाविक भी थी.. सास का हाथ दामाद के लंड पर हो और उसका हाथ सास के स्तनों पर.. संजय थोड़ा सा करीब आ गया शीला के.. ड्राइवर और पेसेन्जर के बीच एक काला पर्दा था.. जो संजय ने खींचकर आधा बंद कर दिया

पर्दा थोड़ा सा बंद होते ही पता नही शीला को क्या हो गया.. उसने संजय के लंड को अपनी मुठ्ठी में मसल दिया.. और उतने ही जोर से संजय ने शीला के स्तनों को ब्लाउस के ऊपर से दबा दिया.. दोनों सीट के कोने में, परदे के पीछे ऐसे सट गए थे की ड्राइवर को कुछ भी नजर न आए.. संजय ने शीला के चेहरे को पकड़कर अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए.. शीला संजय से भी अधिक आक्रामक होकर उसे चूमने लगी..

संजय: "मम्मी जी, प्लीज जल्दी जल्दी अपने ब्लाउस के हुक खोलकर आपके स्तन बाहर निकालो.. कितने सालों से अपने मन में ही उन्हे नंगे देख रहा हूँ.. आज मेरा वो सपना साकार कर ही दो.. प्लीज.. !!"

शीला: "यहाँ नही.. ड्राइवर देख लेगा तो ??"

संजय: "अरे मम्मी जी.. ड्राइवर रोड देखेगा या पीछे देखेगा..!! जल्दी करो मम्मीजी.. मुझसे रहा नही जा रहा" कहते हुए संजय ने बेरहमी से शीला की चूचियाँ मसल दी.. शीला के कंठ से धीमी चीख निकल गई..

शीला: "क्या कर रहे हो? मुझे दर्द होने लगा.. ऐसे भी कोई करता है क्या !!!"

संजय: "मम्मी जी प्लीज.. अभी के अभी अगर आपने हुक नही खोले तो मेरी जान निकल जाएगी.. मैं अब एक पल के लिए भी सब्र नही कर सकता.. "

उस दौरान शीला ने पेंट की चैन खोलकर अंदर हाथ डाल दिया था.. पेंट की मोटी परत दूर होते ही शीला बस एक कदम दूर थी उस नंगे लंड को अपने हाथों में पकड़ने के.. संजय ने फिर से शीला को खींचकर उसके होंठों को चूस लिया.. जवाबी हमले में शीला ने संजय के अंडरवेर में हाथ डालकर उसका लंड पकड़ लिया और बोली "आह्ह संजय बेटा.. कितना टाइट हो गया है !!"

दोनों उत्तेजना की नई सीमाएं पार करते जा रहे थे.. संजय ने शीला के ब्लाउस के दो हुक जबरदस्त खुलवा दिए.. उसके दूध जैसे गोरे मदमस्त स्तन की आधे से ज्यादा गोलाई बाहर झलकने लगी.. ऐसा लग रहा था जैसे बादलों से चाँद बाहर झांक रहा हो.. संजय के लंड पर शीला की पकड़ मजबूत होती जा रही थी.. शीला की सारी शर्म, वासना की आग में जलकर खाक हो चुकी थी..

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शीला के आदर्श भारतीय नारी के चोले के नीचे एक अति कामुक और थोड़ी सी विकृत स्त्री छुपी हुई थी.. जो बेहद वासना युक्त.. बार बार उत्तेजित होने वाली निम्फोमैनीऐक थी.. हमेशा चुदने के लिए तैयार.. दिन में न जाने कितनी बार उसकी चूत उत्तेजित हो जाती थी.. वासना के कारण शीला को इतने गंदे गंदे विचार आते थे की बात ही मत पूछो

संजय के कठोर लंड को बाहर निकालकर शीला ने मन भरकर देखा.. गोरा गुलाबी लंड था उसके दामाद का.. लाल लाल सुपाड़ा और लंड पर उभरी हुई मोटी नसें.. शीला के हाथों में थिरक रहा था संजय का लंड.. रसिक या जीवा के मुकाबले कद में छोटा पर अच्छा खासा मोटा था उसका लंड.. ऐसे कड़े लंड को देखते ही शीला बेकाबू हो गई.. मुठ्ठी में पकड़कर उत्तेजनापूर्वक वह लंड की त्वचा को आगे पीछे करने लगी.. और ड्राइवर न सुन सके ऐसी धीमी आवाज में संजय के कान में बोली.. "देखने के बाद अब रहा नही जा रहा.. चूसने का मन कर रहा है बेटा"

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"तो देर किस बात की है मम्मी जी.. ले लीजिए मुंह में और मेरी बरसों की तमन्ना को आज पूरा कर दीजिए.. वैसे कैसा लगा ये आपको?"

"अरे मस्त है बेटा.. थोड़ा सा छोटा है पर मोटा है.. मज़ा आएगा.. अभी इतनी छोटी सी जगह में चूसने में मज़ा नही आएगा.. फिर मौका मिलें तब देखेंगे"

आधे बाहर लटक रहे स्तनों को संजय पूरी उत्तेजना से मसल रहा था.. शीला की छाती.. उफ्फ़ उसके मदमस्त चूचियाँ.. कितना तड़प रहा था वो इन्हे नंगा देखने के लिए.. सासुमाँ के नग्न स्तनों को देखने के लिए उसने एक बार बाथरूम में झाँकने की कोशिश की थी पर वैशाली ने उसे पकड़ लिया था.. उसके बाद कितने दिनों तक वैशाली ने उससे बात तक नही की थी..

शीला: "संजय बेटा.. तेरा हाथ बहोत गरम लग रहा है मुझे.. उफ्फ़.. मुझे कुछ कुछ हो रहा है.. आह्ह !!"

संजय: "मम्मी जी, आप बहोत मस्त हो.. आपको देखकर मेरा लंड झटके खा रहा है.. आपके हाथ में ये जितना सख्त हो गया है उतना तो आज से पहले कभी नही हुआ.. क्या कयामत है आपकी चूचियाँ.. वाह !!! दिल करता है की पूरा दिन बस इनसे खेलता ही रहूँ.. उफ्फ़ मम्मी जी.. मुझे इन्हें चूसने का बहोत मन कर रहा है.. आप पूरे बाहर निकाल दीजिए.. दोनों बाहर न निकले तो न सही.. एक तरफ का ही निकाल दो.. मैं एक को चूस लूँगा.. बस थोड़ी ही देर के लिए मम्मीजी.. प्लीज.. !!"

शीला: "ओह्ह संजय बेटा.. खुले रोड पर ऐसा करना खतरनाक हो सकता है.. कोई देख लेगा तो मुसीबत हो जाएगी"

संजय: "इतनी तेज चल रही है कार.. कौन देख लेगा.. चलती हुई गाड़ी में ऐसा करने में बहोत मज़ा आएगा आपको भी.. देखो तो मेरा लंड पागल सा हो रहा है.. एक तरफ मुझे बेटा बेटा कहकर बुलाती हो.. और आपका दूध तो चूसने नही दे रही.. ऐसा कैसे चलेगा!!" शीला के स्तनों को दोनों हाथों से दबाते हुए संजय ने कहा

शीला ने चारों तरफ देखकर सब-सलामत की तसल्ली कर ली.. और ब्लाउस की एक तरफ की कटोरी को ऊंचा कर के.. अपनी ४८ के साइज़ की एक चुची बाहर निकाली.. पूर्णिमा के चाँद जैसा उसका स्तन चमकने लगा.. संजय के दिल की धड़कने जैसे रुक सी गई.. थोड़ी देर के लिए वह शीला के अनमोल स्तन को देखता ही रह गया.. शीला और मजबूती से संजय का लंड हिलाने लगी..

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"ओह्ह बेटा.. अब ईसे देखता ही रहेगा या कुछ करेगा भी.. !!! देख ना.. मेरी निप्पल कितनी सख्त हो गई है.. चूस ले जल्दी जल्दी"

शीला के इतना कहते ही "ओह्ह मम्मी जी" कहते हुए संजय ने अपने वीर्य की पिचकारी छोड़ दी.. उसकी उत्तेजना देखकर हतप्रभ हो गई शीला.. बिना चूसे या चूत में घुसे ही लंड पिचकारी छोड़ देगा ऐसा अंदाजा नहीं था शीला को.. अपने लंड की इस हरकत से संजय शरमाकर रह गया.. जैसे उसकी मर्दानगी पर दाग लग गया हो.. वो भी क्या करता.. शीला के नंगे चुचे का जादू ही कुछ ऐसा था.. अच्छे अच्छों का देखते ही पानी निकाल दे !!


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शीला संजय की परिस्थिति समझ रही थी.. उसने संजय का हाथ अपने खुले स्तन पर रखते हुए कहा "संजय, तेरे लंड में कितना वीर्य भरा हुआ है?? अभी से छलकने लगा "

संजय झुककर शीला की गोद में सर रखकर लेट गया.. और छोटे बच्चे की तरह बच-बच आवाज करते हुए शीला की निप्पल चूसने लगा.. जितना वो चूसता गया उतना उसका लंड खड़ा होता गया.. जैसे वो शीला की निप्पल से एनर्जी ड्रिंक चूस रहा हो.. लंड फिर से खड़ा हो गया.. नए सिरे से सख्त हुए लंड को देखकर शीला के भोसड़े को चुदने की आशा जगी..

फिर से टाइट होकर उछल रहे लंड को पकड़ कर शीला झुकी और एक किस कर दिया उसने लाल टोपे पर.. शीला के होंठों का स्पर्श होते ही संजय का लंड ओर खिल उठा.. और ज्यादा सख्त होकर अप-डाउन करने लगा.. शीला के स्तन भी टाइट होकर लाल हो चुके थे.. वह झुककर लंड को चूस रही थी और उसका बाहर लटक रहा स्तन संजय की जांघ पर रगड़ रहा था.. नरम नरम स्तन को अपनी जांघ पर घिसता देख संजय सातवे आसमान पर उड़ने लगा.. हाथ नीचे डालकर वह शीला के स्तन को मींजने लगा॥

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शीला आँखें बंद कर अपने दामाद का लंड कुल्फी की तरह चूस रही थी.. मुंह से ढेर सारी लार निकालते हुए जब काफी देर तक चूसने के बाद उसने लंड को मुंह से बाहर निकाला तब उसका गोरा लंड ऐसा लग रहा था जैसे अभी नहाकर बच्चा बाथरूम से बाहर भीगा हुआ निकला हो.. इतना सुंदर लग रहा था वह टाइट लंड.. शीला को देखते ही प्यार आ गया.. वह फिर से चूसने लगी.. आधा घंटा होने को आया लेकिन शीला लंड को छोड़ने का नाम ही नही ले रही थी.. संजय बड़े ही ताज्जुब से अपनी सास की हवस को देखता रहा.. उसे आश्चर्य हो रहा था.. कितनी देर से मम्मी जी लंड चूस रही है? थक ही नही रही.. !!! गज़क की पागल है ये तो मेरे लोडे के लिए.. बाकी सारी लड़कियां और औरतें तो एक मिनट के लिए मुंह में लेने में भी कितने नखरे करती है!!! पर ये तो बिना कहे बस चूसती ही जा रही है..

आखिर शीला थक गई पर फिर भी उसने लंड मुंह से बाहर नही निकला.. मुंह में लंड रखकर ही वह पड़ी रही.. थोड़ी मिनटों के लिए रीलैक्स होकर वह वापिस चूसना चालू कर देती.. दोनों में से कोई कुछ भी नही बोल रहा था.. क्या बोलते? और क्यों बोलते? जब लंड और चूत बात कर रहे हो तब शब्दों की जरूरत ही कहाँ पड़ती है.. !!

अपनी उत्तेजना को किसी भी किंमत पर शांत करने के मनसूबे से शीला लंड को थन की तरह चूस रही थी.. संजय नीचे हाथ डालकर शीला के बाएं स्तन को जोर जोर से दबा रहा था.. शीला अपनी जीभ का ऐसा कमाल दिखा रही थी की संजय कराह उठता और जोर से शीला का स्तन दबा देता.. संजय को आश्चर्य इस बात का था की इतनी जोर जोर से चुची दबाने पर भी शीला के मुंह से एक उफ्फ़ तक नही निकलती थी.. क्या मम्मी जी को दर्द नही होता??

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शीला को दर्द हो रहा हो या ना हो.. पर संजय का लंड अब दुखने लगा था.. एक बार झड़ने के बाद फिर से सख्त हुए लंड को अब ४५ मिनट से शीला चूसे जा रही थी.. थकने का नाम ही नहीं ले रही थी.. संजय अब तक शीला की चूत तक पहुँच नही पाया था.. उसने एक दो बार घाघरे में हाथ डालने की कोशिश तो की थी पर शीला ने उसे रोकते हुए समझाया था की अभी फिलहाल गाड़ी के अंदर वह उसका लंड चूत में नही ले पाएगी.. शीला इसलिए भी मना कर रही थी क्योंकि उसे पता था की एक बार अगर संजय ने उसके भोसड़े को छु लिया.. फिर वह आपे से बाहर हो जाएगी..

शीला को इतनी कामुकता से लंड चूसते देखकर संजय हतप्रभ था.. कौन किसको इस्तेमाल कर रहा है इसका पता ही नही चल रहा था.. सामान्यतः पुरुष ही स्त्री को अपनी इच्छा अनुसार भोगता है.. पर यहाँ तो शीला ही संजय के लंड के भोग का मज़ा ले रही थी.. मस्ती में चूस रही शीला कभी कभी इतनी उत्तेजित हो जाती की अपने दांतों से संजय के सुपाड़े को हल्के से काट लेती.. संजय डर गया.. कहीं हवस के मारे वह उसका लंड खा न जाए.. अगर ऐसा हुआ तो अखबार में कैसी हेडलाइन्स छपेगी.. !! "हवस में अंध सास ने अपने दामाद का ही गुप्तांग काट खाया"

संजय: "मम्मी जी, प्लीज.. अब बस भी कीजिए.. मेरा फिर से निकल जाएगा॥" पर संजय की यह बात शीला के कानों पर जैसे पड़ी ही नही थी.. उसने संजय की तरफ देखा तक नही.. ऊपर से अपनी मुठ्ठी में आँड़ों को ऐसे दबा दिया की संजय दर्द के मारे सीट के ऊपर १ फुट उछल गया.. संजय के ऊपर होते ही शीला ने एक हाथ नीचे डाला और संजय की गांड में अपना अंगूठा घोंप दिया..

"मम्मी जी.. ओह्ह गॉड.. " कहते हुए संजय के लंड से गरम चिपचिपा वीर्य शीला के मुंह में रिसने लगा.. शीला इतनी जोश में थी की पिचकारी निकलते ही पी जाती.. लंड ने तीन से चार पिचकारियाँ छोड़ी और शीला ने एक बूंद भी नही छोड़ी.. लाल टोपे को चाट चाट कर शीला ने साफ कर दिया.. बिना मुंह बिगाड़े या किसी घिन के वीर्य को चाट रही अपनी सास को देखकर संजय हक्का-बक्का रह गया.. उसने आज तक कितनी लड़कियों और औरतों के साथ बिस्तर गरम किया था.. लेकिन इतनी कामुक औरत का सामना आज तक उसे कभी नही हुआ था..

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आखिर जब शीला ने लंड को मुंह से निकाला तब वह बेजान मुर्दे की तरह गिर गया.. शीला के चेहरे पर विजय की मुस्कान थी.. और संजय के चेहरे पर तृप्तता के भाव थे.. दोनों कुछ देर तक वैसे ही बैठे रहे.. शीला का बायाँ स्तन अभी भी बाहर था.. और संजय का लंड बेजान होकर सो रहा था.. शीला ने झुककर एक आखिरी बार उस निर्जीव लंड को चूमा.. और उसे पेंट के अंदर डालकर चैन बंद कर दी.. संजय ने अपने शर्ट के बटन बंद कीये और अपने बाल भी ठीक कर लिये.. शीला ने भी अपना घाघरा ठीक करते हुए अपनी चुत को सहलाया.. कामरस से गीली चुत में दो उँगलियाँ डालकर वह उँगलियाँ संजय के नाक के पास ले गई.. अपने भोसड़े की गंध सुँघाते हुए वह धीमे से बोली "सूंघ कर बताओ बेटा.. किसके जैसी गंध आ रही है? वैशाली जैसी या फिर.... चेतना जैसी ???"

चेतना का नाम सुनते ही संजय के होश उड़ गए.. साला ये NEET की तरह मेरा पेपर किसने लीक कर दिया? जरूर चेतना ने ही बताया होगा.. संजय को सोच में पड़ा हुआ देख.. शीला ने अपनी गीली उंगलियों को संजय के गालों पर और होंठों पर रगड़कर उसके मुंह में डाल दिया.. और बोली "अभी तुम चाट तो नही पाओगे.. पर स्वाद तो चख लो.. "

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बहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजना से भरपूर कामोत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गया
गोवा में गाडी से जाते समय शीला और उसका दामाद संजय की रासलीला शुरु हो गई वही शीला की कामुकता देखकर संजय तो दंग ही रह गया शीला ने उसे अपना दुध पिलाया और उसका लंड चुसकर उसे खल्लास कर दिया पर अपनी चुद पर हाथ नहीं लगाने दिया उसने खुद चुद में उंगली घुसाकर उसे सुंघने लगाया और चेतना का नाम लेकर संजय पर एक हथौडा चला दिया
खैर देखते हैं आगे क्या होता है
 
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