शीला के मन मस्तिष्क और जिस्म पर हवस का सुरूर चढ़ रहा था लेकिन दामाद के साथ होने से कंट्रोल रखना भी जरूरी था.. संजय के अंदर, शीला को दामाद नही.. पर एक जवान लंड नजर आने लगा.. वैसे भी संजय दामाद की तरह कहाँ पेश आ रहा था.. उसके हाव भाव और बोलने से तो यही लग रहा था जैसे वो शीला को चोदने के लिए गोवा ले जा रहा हो..
संजय के पेंट में लंड वाला हिस्सा फूलकर कचौड़ी जैसा हो गया था.. जिस पर शीला की नजर बार बार चली जाती थी.. पेंट और अंडरवेर के आरपार शीला ने संजय के तने हुए सख्त लंड की मन में कल्पना भी कर ली थी..
शीला की हवस अब तूफान का स्वरूप धारण कर चुकी थी.. एलसीडी के छोटे से स्क्रीन पर चल रहे द्रश्य इस तूफान को ओर हवा दे रहे थे.. और इस तूफान में, सास और दामाद के संबंधों की पवित्रता धीरे धीरे हवा बनकर उड़ जा रही थी.. जोर जोर से भारी सांसें लेने के कारण सील की छातियाँ ऊपर नीचे हो रही थी.. संजय की नजरें स्तनों की हलचल का रसपान कर रहे थे और अपने दामाद की कामुक नज़रों से शीला के संयम का बांध टूटता जा रहा था..
संजय ने धीरे से शीला की जांघ पर हाथ रख दिया.. शीला कांप गई.. ये जो कुछ भी हो रहा था वो गलत था ये जानते हुए भी शीला उसे रोक नही पाई.. वासना ने उसके हाथ बांध दिए थे.. उसका मन तो कर रहा था की संजय का हाथ हटा दे और गाड़ी से उतर जाए पर उसका शरीर उसे ऐसा करने से रोक रहा था..
थोड़ी देर तक जांघ पर हाथ रखने पर भी जब शीला ने कोई विरोध नही किया तब संजय को जैसे ग्रीन सिग्नल मिल गया.. हिम्मत करके उसने शीला का हाथ पकड़ लिया और उसे चूम लिया.. शीला के पूरे शरीर में सिहरन दौड़ गई.. बेबस होकर वो संजय की हरकतों को देखती ही रही.. शीला की छोटी उंगली को संजय अपने मुंह में लेकर चूसने लगा.. उसकी जीभ के गरम स्पर्श से शीला ने कामुक होकर अपनी आँखें बंद कर दी.. और बंद आँखों में उसे आगे होने वाले द्रश्य दिखाई देने लगे..
काफी देर तक संजय शीला के हाथों से खेलता रहा.. कोई जल्दी तो थी नही क्योंकि सफर लंबा था.. शीला की गोरी नाजुक कोमल हथेली के बीच अपनी जीभ ऐसे फेरने लगा जैसे शीला का भोसड़ा चाट रहा हो.. शीला मन ही मन सोच रही थी.. ये आदमी कितना खतरनाक है.. कितनी कामुक हरकतें कर रहा है.. !! कोई भी औरत चाहे कितनी भी चारित्रवान क्यों न हो.. ऐसे स्पर्श का आगे कितनी देर तक संयम रख सकती थी.. !! शीला की चुत में जबरदस्त झटके लग रहे थे.. सिर्फ उसकी हथेली से खेलते हुए संजय ने उसे बेहद गरम कर दिया था.. शीला तब चोंक गई जब संजय ने उसकी हथेली अपने लंड पर रख दी..
शीला के शरीर में हाहाकार मच गया.. दोनों के बीच जो पतली सी रेखा बची थी वो भी जैसे मिट चुकी थी.. शीला का पल्लू अपनेआप सरक कर नीचे गिर गया.. क्या उत्तेजना के कारण पल्लू गिर गया? शीला के स्तन इतने कडक हो गए की उसे डर लगने लगा.. कहीं ब्रा के हुक टूट न जाए.. !! शीला के अंग अंग में उत्तेजना का जहर फैलने लगा था.. अपने सगे दामाद के लंड पर रखा हुआ हाथ.. पेंट के अंदर छुपे हुए उस विकराल लंड के झटकों के साथ ऊपर नीचे हो रहा था.. लंड की गर्मी शीला की हथेली से होते हुए उसकी चूत तक पहुँच रही थी..
हथेली में महसूस हो रही गर्मी को अपनी भोस के वर्टीकल होंठों के अंदर अनुभवित करने के लिए ऊपर नीचे हो रही थी शीला.. अनजाने में उसने संजय के लंड के उभार को दबा दिया.. संजय की आँखों में जोरदार चमक आ गई.. पल्लू सरकने के बाद, हिमालय के उत्तुंग शिखरों जैसे उसके बड़े बड़े स्तनों की गोलाइओ को छूने का बड़ा मन कर रहा था संजय को.. लेकिन वह जल्दबाजी करना नही चाहता था.. इस तरफ शीला सोच रही थी की लंड पकड़ लिया है.. पर अब तक संजय उसके स्तनों को क्यों नही छु रहा है !!
संजय के लंड पर शीला की पकड़ धीरे धीरे मजबूत होती जा रही थी.. शरीर की आग इतनी भड़क गई की शीला ने खुद ही संजय का हाथ पकड़कर अपने स्तनों पर रख दिया.. पुरुष के हाथों का स्पर्श.. स्तनों पर कितना अच्छा लगता है यह केवल स्त्री ही जानती है..
फट.. एक आवाज हुई और शीला के ब्लाउस का एक हुक टूट गया.. टाइट स्तनों के कारण ही हुक टूट गया था.. हुक टूट जाने से स्तनों पर दबाव थोड़ा सा कम हो गया.. संजय ने शीला की ओर देखा.. और वो शरमा गई.. शर्म आनी स्वाभाविक भी थी.. सास का हाथ दामाद के लंड पर हो और उसका हाथ सास के स्तनों पर.. संजय थोड़ा सा करीब आ गया शीला के.. ड्राइवर और पेसेन्जर के बीच एक काला पर्दा था.. जो संजय ने खींचकर आधा बंद कर दिया
पर्दा थोड़ा सा बंद होते ही पता नही शीला को क्या हो गया.. उसने संजय के लंड को अपनी मुठ्ठी में मसल दिया.. और उतने ही जोर से संजय ने शीला के स्तनों को ब्लाउस के ऊपर से दबा दिया.. दोनों सीट के कोने में, परदे के पीछे ऐसे सट गए थे की ड्राइवर को कुछ भी नजर न आए.. संजय ने शीला के चेहरे को पकड़कर अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए.. शीला संजय से भी अधिक आक्रामक होकर उसे चूमने लगी..
संजय: "मम्मी जी, प्लीज जल्दी जल्दी अपने ब्लाउस के हुक खोलकर आपके स्तन बाहर निकालो.. कितने सालों से अपने मन में ही उन्हे नंगे देख रहा हूँ.. आज मेरा वो सपना साकार कर ही दो.. प्लीज.. !!"
शीला: "यहाँ नही.. ड्राइवर देख लेगा तो ??"
संजय: "अरे मम्मी जी.. ड्राइवर रोड देखेगा या पीछे देखेगा..!! जल्दी करो मम्मीजी.. मुझसे रहा नही जा रहा" कहते हुए संजय ने बेरहमी से शीला की चूचियाँ मसल दी.. शीला के कंठ से धीमी चीख निकल गई..
शीला: "क्या कर रहे हो? मुझे दर्द होने लगा.. ऐसे भी कोई करता है क्या !!!"
संजय: "मम्मी जी प्लीज.. अभी के अभी अगर आपने हुक नही खोले तो मेरी जान निकल जाएगी.. मैं अब एक पल के लिए भी सब्र नही कर सकता.. "
उस दौरान शीला ने पेंट की चैन खोलकर अंदर हाथ डाल दिया था.. पेंट की मोटी परत दूर होते ही शीला बस एक कदम दूर थी उस नंगे लंड को अपने हाथों में पकड़ने के.. संजय ने फिर से शीला को खींचकर उसके होंठों को चूस लिया.. जवाबी हमले में शीला ने संजय के अंडरवेर में हाथ डालकर उसका लंड पकड़ लिया और बोली "आह्ह संजय बेटा.. कितना टाइट हो गया है !!"
दोनों उत्तेजना की नई सीमाएं पार करते जा रहे थे.. संजय ने शीला के ब्लाउस के दो हुक जबरदस्त खुलवा दिए.. उसके दूध जैसे गोरे मदमस्त स्तन की आधे से ज्यादा गोलाई बाहर झलकने लगी.. ऐसा लग रहा था जैसे बादलों से चाँद बाहर झांक रहा हो.. संजय के लंड पर शीला की पकड़ मजबूत होती जा रही थी.. शीला की सारी शर्म, वासना की आग में जलकर खाक हो चुकी थी..
शीला के आदर्श भारतीय नारी के चोले के नीचे एक अति कामुक और थोड़ी सी विकृत स्त्री छुपी हुई थी.. जो बेहद वासना युक्त.. बार बार उत्तेजित होने वाली निम्फोमैनीऐक थी.. हमेशा चुदने के लिए तैयार.. दिन में न जाने कितनी बार उसकी चूत उत्तेजित हो जाती थी.. वासना के कारण शीला को इतने गंदे गंदे विचार आते थे की बात ही मत पूछो
संजय के कठोर लंड को बाहर निकालकर शीला ने मन भरकर देखा.. गोरा गुलाबी लंड था उसके दामाद का.. लाल लाल सुपाड़ा और लंड पर उभरी हुई मोटी नसें.. शीला के हाथों में थिरक रहा था संजय का लंड.. रसिक या जीवा के मुकाबले कद में छोटा पर अच्छा खासा मोटा था उसका लंड.. ऐसे कड़े लंड को देखते ही शीला बेकाबू हो गई.. मुठ्ठी में पकड़कर उत्तेजनापूर्वक वह लंड की त्वचा को आगे पीछे करने लगी.. और ड्राइवर न सुन सके ऐसी धीमी आवाज में संजय के कान में बोली.. "देखने के बाद अब रहा नही जा रहा.. चूसने का मन कर रहा है बेटा"
"तो देर किस बात की है मम्मी जी.. ले लीजिए मुंह में और मेरी बरसों की तमन्ना को आज पूरा कर दीजिए.. वैसे कैसा लगा ये आपको?"
"अरे मस्त है बेटा.. थोड़ा सा छोटा है पर मोटा है.. मज़ा आएगा.. अभी इतनी छोटी सी जगह में चूसने में मज़ा नही आएगा.. फिर मौका मिलें तब देखेंगे"
आधे बाहर लटक रहे स्तनों को संजय पूरी उत्तेजना से मसल रहा था.. शीला की छाती.. उफ्फ़ उसके मदमस्त चूचियाँ.. कितना तड़प रहा था वो इन्हे नंगा देखने के लिए.. सासुमाँ के नग्न स्तनों को देखने के लिए उसने एक बार बाथरूम में झाँकने की कोशिश की थी पर वैशाली ने उसे पकड़ लिया था.. उसके बाद कितने दिनों तक वैशाली ने उससे बात तक नही की थी..
शीला: "संजय बेटा.. तेरा हाथ बहोत गरम लग रहा है मुझे.. उफ्फ़.. मुझे कुछ कुछ हो रहा है.. आह्ह !!"
संजय: "मम्मी जी, आप बहोत मस्त हो.. आपको देखकर मेरा लंड झटके खा रहा है.. आपके हाथ में ये जितना सख्त हो गया है उतना तो आज से पहले कभी नही हुआ.. क्या कयामत है आपकी चूचियाँ.. वाह !!! दिल करता है की पूरा दिन बस इनसे खेलता ही रहूँ.. उफ्फ़ मम्मी जी.. मुझे इन्हें चूसने का बहोत मन कर रहा है.. आप पूरे बाहर निकाल दीजिए.. दोनों बाहर न निकले तो न सही.. एक तरफ का ही निकाल दो.. मैं एक को चूस लूँगा.. बस थोड़ी ही देर के लिए मम्मीजी.. प्लीज.. !!"
शीला: "ओह्ह संजय बेटा.. खुले रोड पर ऐसा करना खतरनाक हो सकता है.. कोई देख लेगा तो मुसीबत हो जाएगी"
संजय: "इतनी तेज चल रही है कार.. कौन देख लेगा.. चलती हुई गाड़ी में ऐसा करने में बहोत मज़ा आएगा आपको भी.. देखो तो मेरा लंड पागल सा हो रहा है.. एक तरफ मुझे बेटा बेटा कहकर बुलाती हो.. और आपका दूध तो चूसने नही दे रही.. ऐसा कैसे चलेगा!!" शीला के स्तनों को दोनों हाथों से दबाते हुए संजय ने कहा
शीला ने चारों तरफ देखकर सब-सलामत की तसल्ली कर ली.. और ब्लाउस की एक तरफ की कटोरी को ऊंचा कर के.. अपनी ४८ के साइज़ की एक चुची बाहर निकाली.. पूर्णिमा के चाँद जैसा उसका स्तन चमकने लगा.. संजय के दिल की धड़कने जैसे रुक सी गई.. थोड़ी देर के लिए वह शीला के अनमोल स्तन को देखता ही रह गया.. शीला और मजबूती से संजय का लंड हिलाने लगी..
"ओह्ह बेटा.. अब ईसे देखता ही रहेगा या कुछ करेगा भी.. !!! देख ना.. मेरी निप्पल कितनी सख्त हो गई है.. चूस ले जल्दी जल्दी"
शीला के इतना कहते ही "ओह्ह मम्मी जी" कहते हुए संजय ने अपने वीर्य की पिचकारी छोड़ दी.. उसकी उत्तेजना देखकर हतप्रभ हो गई शीला.. बिना चूसे या चूत में घुसे ही लंड पिचकारी छोड़ देगा ऐसा अंदाजा नहीं था शीला को.. अपने लंड की इस हरकत से संजय शरमाकर रह गया.. जैसे उसकी मर्दानगी पर दाग लग गया हो.. वो भी क्या करता.. शीला के नंगे चुचे का जादू ही कुछ ऐसा था.. अच्छे अच्छों का देखते ही पानी निकाल दे !!
शीला संजय की परिस्थिति समझ रही थी.. उसने संजय का हाथ अपने खुले स्तन पर रखते हुए कहा "संजय, तेरे लंड में कितना वीर्य भरा हुआ है?? अभी से छलकने लगा "
संजय झुककर शीला की गोद में सर रखकर लेट गया.. और छोटे बच्चे की तरह बच-बच आवाज करते हुए शीला की निप्पल चूसने लगा.. जितना वो चूसता गया उतना उसका लंड खड़ा होता गया.. जैसे वो शीला की निप्पल से एनर्जी ड्रिंक चूस रहा हो.. लंड फिर से खड़ा हो गया.. नए सिरे से सख्त हुए लंड को देखकर शीला के भोसड़े को चुदने की आशा जगी..
फिर से टाइट होकर उछल रहे लंड को पकड़ कर शीला झुकी और एक किस कर दिया उसने लाल टोपे पर.. शीला के होंठों का स्पर्श होते ही संजय का लंड ओर खिल उठा.. और ज्यादा सख्त होकर अप-डाउन करने लगा.. शीला के स्तन भी टाइट होकर लाल हो चुके थे.. वह झुककर लंड को चूस रही थी और उसका बाहर लटक रहा स्तन संजय की जांघ पर रगड़ रहा था.. नरम नरम स्तन को अपनी जांघ पर घिसता देख संजय सातवे आसमान पर उड़ने लगा.. हाथ नीचे डालकर वह शीला के स्तन को मींजने लगा॥
शीला आँखें बंद कर अपने दामाद का लंड कुल्फी की तरह चूस रही थी.. मुंह से ढेर सारी लार निकालते हुए जब काफी देर तक चूसने के बाद उसने लंड को मुंह से बाहर निकाला तब उसका गोरा लंड ऐसा लग रहा था जैसे अभी नहाकर बच्चा बाथरूम से बाहर भीगा हुआ निकला हो.. इतना सुंदर लग रहा था वह टाइट लंड.. शीला को देखते ही प्यार आ गया.. वह फिर से चूसने लगी.. आधा घंटा होने को आया लेकिन शीला लंड को छोड़ने का नाम ही नही ले रही थी.. संजय बड़े ही ताज्जुब से अपनी सास की हवस को देखता रहा.. उसे आश्चर्य हो रहा था.. कितनी देर से मम्मी जी लंड चूस रही है? थक ही नही रही.. !!! गज़क की पागल है ये तो मेरे लोडे के लिए.. बाकी सारी लड़कियां और औरतें तो एक मिनट के लिए मुंह में लेने में भी कितने नखरे करती है!!! पर ये तो बिना कहे बस चूसती ही जा रही है..
आखिर शीला थक गई पर फिर भी उसने लंड मुंह से बाहर नही निकला.. मुंह में लंड रखकर ही वह पड़ी रही.. थोड़ी मिनटों के लिए रीलैक्स होकर वह वापिस चूसना चालू कर देती.. दोनों में से कोई कुछ भी नही बोल रहा था.. क्या बोलते? और क्यों बोलते? जब लंड और चूत बात कर रहे हो तब शब्दों की जरूरत ही कहाँ पड़ती है.. !!
अपनी उत्तेजना को किसी भी किंमत पर शांत करने के मनसूबे से शीला लंड को थन की तरह चूस रही थी.. संजय नीचे हाथ डालकर शीला के बाएं स्तन को जोर जोर से दबा रहा था.. शीला अपनी जीभ का ऐसा कमाल दिखा रही थी की संजय कराह उठता और जोर से शीला का स्तन दबा देता.. संजय को आश्चर्य इस बात का था की इतनी जोर जोर से चुची दबाने पर भी शीला के मुंह से एक उफ्फ़ तक नही निकलती थी.. क्या मम्मी जी को दर्द नही होता??
शीला को दर्द हो रहा हो या ना हो.. पर संजय का लंड अब दुखने लगा था.. एक बार झड़ने के बाद फिर से सख्त हुए लंड को अब ४५ मिनट से शीला चूसे जा रही थी.. थकने का नाम ही नहीं ले रही थी.. संजय अब तक शीला की चूत तक पहुँच नही पाया था.. उसने एक दो बार घाघरे में हाथ डालने की कोशिश तो की थी पर शीला ने उसे रोकते हुए समझाया था की अभी फिलहाल गाड़ी के अंदर वह उसका लंड चूत में नही ले पाएगी.. शीला इसलिए भी मना कर रही थी क्योंकि उसे पता था की एक बार अगर संजय ने उसके भोसड़े को छु लिया.. फिर वह आपे से बाहर हो जाएगी..
शीला को इतनी कामुकता से लंड चूसते देखकर संजय हतप्रभ था.. कौन किसको इस्तेमाल कर रहा है इसका पता ही नही चल रहा था.. सामान्यतः पुरुष ही स्त्री को अपनी इच्छा अनुसार भोगता है.. पर यहाँ तो शीला ही संजय के लंड के भोग का मज़ा ले रही थी.. मस्ती में चूस रही शीला कभी कभी इतनी उत्तेजित हो जाती की अपने दांतों से संजय के सुपाड़े को हल्के से काट लेती.. संजय डर गया.. कहीं हवस के मारे वह उसका लंड खा न जाए.. अगर ऐसा हुआ तो अखबार में कैसी हेडलाइन्स छपेगी.. !! "हवस में अंध सास ने अपने दामाद का ही गुप्तांग काट खाया"
संजय: "मम्मी जी, प्लीज.. अब बस भी कीजिए.. मेरा फिर से निकल जाएगा॥" पर संजय की यह बात शीला के कानों पर जैसे पड़ी ही नही थी.. उसने संजय की तरफ देखा तक नही.. ऊपर से अपनी मुठ्ठी में आँड़ों को ऐसे दबा दिया की संजय दर्द के मारे सीट के ऊपर १ फुट उछल गया.. संजय के ऊपर होते ही शीला ने एक हाथ नीचे डाला और संजय की गांड में अपना अंगूठा घोंप दिया..
"मम्मी जी.. ओह्ह गॉड.. " कहते हुए संजय के लंड से गरम चिपचिपा वीर्य शीला के मुंह में रिसने लगा.. शीला इतनी जोश में थी की पिचकारी निकलते ही पी जाती.. लंड ने तीन से चार पिचकारियाँ छोड़ी और शीला ने एक बूंद भी नही छोड़ी.. लाल टोपे को चाट चाट कर शीला ने साफ कर दिया.. बिना मुंह बिगाड़े या किसी घिन के वीर्य को चाट रही अपनी सास को देखकर संजय हक्का-बक्का रह गया.. उसने आज तक कितनी लड़कियों और औरतों के साथ बिस्तर गरम किया था.. लेकिन इतनी कामुक औरत का सामना आज तक उसे कभी नही हुआ था..
आखिर जब शीला ने लंड को मुंह से निकाला तब वह बेजान मुर्दे की तरह गिर गया.. शीला के चेहरे पर विजय की मुस्कान थी.. और संजय के चेहरे पर तृप्तता के भाव थे.. दोनों कुछ देर तक वैसे ही बैठे रहे.. शीला का बायाँ स्तन अभी भी बाहर था.. और संजय का लंड बेजान होकर सो रहा था.. शीला ने झुककर एक आखिरी बार उस निर्जीव लंड को चूमा.. और उसे पेंट के अंदर डालकर चैन बंद कर दी.. संजय ने अपने शर्ट के बटन बंद कीये और अपने बाल भी ठीक कर लिये.. शीला ने भी अपना घाघरा ठीक करते हुए अपनी चुत को सहलाया.. कामरस से गीली चुत में दो उँगलियाँ डालकर वह उँगलियाँ संजय के नाक के पास ले गई.. अपने भोसड़े की गंध सुँघाते हुए वह धीमे से बोली "सूंघ कर बताओ बेटा.. किसके जैसी गंध आ रही है? वैशाली जैसी या फिर.... चेतना जैसी ???"
चेतना का नाम सुनते ही संजय के होश उड़ गए.. साला ये NEET की तरह मेरा पेपर किसने लीक कर दिया? जरूर चेतना ने ही बताया होगा.. संजय को सोच में पड़ा हुआ देख.. शीला ने अपनी गीली उंगलियों को संजय के गालों पर और होंठों पर रगड़कर उसके मुंह में डाल दिया.. और बोली "अभी तुम चाट तो नही पाओगे.. पर स्वाद तो चख लो.. "
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