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★ INDEX ★
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♡ Family Introduction ♡ |
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♡ Family Introduction ♡ |
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Lakshano ka to aage pata lag hi jayega.लूर लक्षण ठीक नही लग रहे simapatel भाभी के![]()
कहानी तो मुझे इस युग की ही नही लग रही।यह दोनो कलयुगी हरिश्चन्द्र किसी छोटे मोटे आग से नही बल्कि ज्वालामुखी से अपने हाथ सेंकने की कोशिश कर रहे हैं । हाथ की तो छोड़ो पुरा शरीर लावा बनकर बह जायेगा ।
चीफ मिनिस्टर अपने स्टेट का सर्वे सर्वा होता है । पुरा सरकारी महकमा उसके मुठ्ठी मे होता है । पुलिस की सभी डिपार्टमेन्ट उसके आदेश की रहनुमाई होती है । इनके साथ पंगा लेना मतलब तालाब मे रहकर मगरमच्छ से बैर लेना होता है ।
इन्हे सिर्फ जनता की ताकत ही परास्त कर सकती है ।
सेक्रेटरी ने वकील साहब का साक्षात्कार सीधे कातिल से करा दिया लेकिन यह कातिल भी अपने बाॅस के आदेश का पालन मात्र निमित्त था ।
देखते हैं इस धर्मयुद्ध मे किसकी विजय होती है !
खुबसूरत अपडेट शर्मा जी ।
रोमेश ने अपनी रोशनी से विजय को भी रोशन कर दिया।#11.
रोमेश डिनर के बाद फ्लैट पर पहुँचा, तो उसके पास सारी बातचीत का टेप मौजूद था। फिर भी उसने विजय को कुछ नहीं बता या। अगले ही दिन समाचार पत्रों में छपा की, विजय ने वह टैक्सी बरामद कर ली है, जिसे कातिल ने प्रयोग किया था।
टैक्सी के मालिक रूप सुंदर को एक रात हवालात में रखने के बाद सुबह छोड़ दिया गया था। चालक जुम्मन गायब था। रोमेश के होंठों पर मुस्कुराहट उभर आई, इसका मतलब मायादास को पहले से पता था कि टैक्सी का सुराग पुलिस को मिल गया है, और जुम्मन कभी भी आत्मसमर्पण कर सकता है।
जुम्मन के हाथ आते ही बटाला का नकाब भी उतर जायेगा। शाम को रोमेश से विजय खुद मिला।
''तुम्हारी बात सच निकली रोमेश।''
"कुछ मिला ?"
"जुम्मन ने सब बता दिया है।"
"जुम्मन तुम्हारे हाथ आ गया, कब ?"
"वह रात ही हमारे हाथ लग गया था, लेकिन मैंने उसे हवालात में नहीं रखा। बैंडस्टैंड के एक सुनसान बंगले में है।"
"यह तुमने अक्लमंदी की।"
"मगर तुम जुम्मन को कैसे जानते हो?"
"यह छोड़ो, एक बात मैं तुम्हें बताना चाहता था, तुम्हारे थाने का तुम्हारा कोई सहयोगी अपराधियों तक लिंक में है। कौन है, यह तुम पता लगाओगे।''
"मुझे पता लग चुका है। इसलिये तो मैंने जुम्मन से हवालात में पूछताछ नहीं की। बलदेव, सब इंस्पेक्टर बलदेव!
फिलहाल मैंने उसे फील्डवर्क से भी हटा लिया है। जुम्मन ने बटाला का नाम खोल दिया है। स्टेनगन बटाला के पास है, आज रात मैं उसके अड्डे पर धावा बोल दूँगा।"
"वह घाटकोपर में देसी बार चलाता है। मेरे पास उसकी सारी डिटेल आ गई है। चाहो तो रेड पर चल सकते हो।"
''नहीं, यह तुम्हारा काम है और फिर जब तुम बटाला को धर लो, तो जरा मुझसे दूर-दूर ही रहना।"
"क्यों ? क्या उसका भी केस लड़ोगे?''
"नहीं, मैं पेशे के प्रति ईमानदार रहना चाहता हूँ। हालांकि तुम खुद बटाला तक पहुंच गये हो, लेकिन इन लोगों को अगर पता चला कि उस केस के सिलसिले में तुम वहाँ जा रहे हो, तो वे यही समझेंगे कि यह सब मेरा किया धरा है। मैंने तुम्हें लाइन सिर्फ इसलिये दी, क्यों कि तुम गलत दिशा में भटक गये थे। अब सबूत जुटाना तुम्हारा काम है।''
''लेकिन जनाब अगले हफ्ते नया साल शुरू होने वाला है और दस जनवरी को आपकी शादी की वर्षगांठ होती है, याद है।'' इतना कहकर विजय ने सौ-सौ के नोटों की छः गड्डियां रोमेश के हवाले करते हुए कहा, "तुम तो तकाजा भी भूल गये।''
''यार सचमुच तूने याद दिला दिया , मेरे को तो याद भी नहीं था। माय गॉड, सीमा वैसे भी आजकल मुझसे बहुत कम बोलती है। मैरिज एनिवर्सरी पर मैं उसे गिफ्ट दूँगा इस बार।''
घाटकोपर की एक बस्ती में। बटाला का अवैध शराब का बार चलता था । बटाला देसी बार के ऊपर वाले कमरे में बैठा था। उसकी बगल में एक पेशेवर औरत थी, जिसके साथ वह रमी खेल रहा था। पास ही एक बोतल रखी थी। तभी एक चेला अंदर आया।
"मुखबिर का खबर आयेला।''
"क्या?"
"पुलिस का रेड इधर पड़ेला।''
"आने दे कोई नया इंस्पेक्टर होगा। जब आजाये तो बोल देना, ऊपर कू आए, मेरे से बात कर लेने का क्या, अब फुट जा।
'तभी पुलिस का सायरन बजा। बटाला पर कोई असर नहीं पड़ा। वह उसी प्रकार रमी खेलता रहा। खबर देने वाला नीचे चला गया। कुछ ही देर में बार में तोड़फोड़ की आवाजें गूंजने लगी। चेला फिर हाँफता काँपता ऊपर आया।
"इंस्पेक्टर विजय है। तुमको गिरफ्तार करने आया है।'' बटाला ने उठकर एक झन्नाटेदार थप्पड़ चेले के मुँह पर मारा। अपनी रिवॉल्वर हवा में घुमाई और फिर उसे जेब में डालता उठ खड़ा हुआ। उसी वक्त बटाला ने फोन मिलाने के लिए डायल पर उंगली घुमाई, लेकिन वह चौंक पड़ा, टेलीफो न डेड पड़ा था।
''हमारा काम करने का तरीका कुछ पसंद आया।'' अचानक विजय ने उसी कमरे के दरवाजे पर कदम रखा,
''अब तुम किसी नेता को फोन नहीं मारेगा, थाने चलेगा सीधा।''
''साले ! " बटाला ने रिवॉल्वर निकाली। लेकिन फायर करने से पहले विजय ने एक जोरदार ठोकर बटाला पर रसीद कर दी, बटाला लड़खड़ाया, विजय एकदम चीते की तरह उस पर झपटा और फिर विजय की रिवॉल्वर बटाला के सीने पर थी।
''पुलिस पर गोली चलाएगा साले। “
“मैं तेरे को बर्बाद कर दूँगा। अपुन को ठीक से जान लेने का, नहीं तो नौकरी से हाथ धोलेगा।"
"जनार्दन रेड्डी के कुत्ते।" विजय ने उसे एक ठोकर और जड़ दी,
''इधर पूरी बस्ती को घेरा है मैंने। कोई तेरी मदद को नहीं आएगा, मुम्बई के जितने भी तेरे जैसे लोग हैं, मेरा नाम सुनते ही सब का पेशाब निकल जाता है। सावंत का कत्ल किया तूने, चल।" विजय ने बटाला के हाथों में हथकड़ियां डाल दी।
"ऐ चल भाग यहाँ से।'' विजय ने पेशेवर युवती से कहा। बटाला को गिरफ्तार करके विजय गोरेगांव के लिए चल पड़ा। अभी बटाला से कुछ पूछताछ भी करनी थी, इसी लिये वह उसे लेकर सीधा थाने नहीं गया, बैंडस्टैंड के उसी बंगले में गया, जहाँ जुम्मन बंद था।
"यह तो थाना नहीं है।" "बटाला जी पर यह मेरा प्राइवेट थाना है, साले यहाँ भूत भी नाचने लगते हैं मेरी मार से। अभी तो तेरे से स्टेनगन बरामद करना है।" उसके बाद बटाला की ठुकाई शुरू हो गई। बटाला को अधिक देर तक प्राइवेट कस्टडी में नहीं रखा जा सकता था, विजय ने सुबह जब उसे लॉकअप में बन्द किया, तो स्टेनगन भी बरामद कर ली थी।
अब उसने पूरा मामला तैयार कर लिया था। उसे मालूम था, बटाला को गिरफ्तार करते ही हंगामा होगा और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी उससे जवाब तलबी कर सकते थे। हुआ भी यही। मामला सीधा आई.जी. के पास पहुँचा। खुद एस.एस.पी. सीधा थाने पहुंच गया।
"आज तक तुम्हारे खिलाफ कोई शिकायत नहीं आई।" एस.एस.पी. ने कहा,
"इसलिये बटाला को छोड़ दो, तुमने ठाणे जिले में कैसे हाथ डाल दिया, वहाँ की पुलिस…।"
"सर। अगर मैं वहाँ की पुलिस को साथ लेता, तो बटाला हाथ नहीं आता, आखिरी वक्त तक वो यही समझता रहा कि उसी के थाने की पुलिस होगी, अगर उसे जरा भी पता चल जाता कि उसे सावंत मर्डर केस में अरेस्ट किया जा रहा है, तो वह हाथ नहीं आता।"
"सावंत मर्डर केस पहले चंदन, फिर यह बटाला। "
"मैंने स्टेनगन भी बरामद कर ली।"
"देखो इंस्पेक्टर विजय, आई.जी. का दबाव है, घाटकोपर की उस बस्ती में तुम्हारे खिलाफ नारे लगा रहे हैं, कोई ताज्जुब नहीं कि जुलूस निकलने लगे, तुम पुलिस इंस्पेक्टर हो, इसका यह मतलब नहीं कि…।"
"सर प्लीज, आप केवल रिजल्ट देखिये, ये मत देखिये कि मैंने कौन सा काम किस तरह किया है। यही शख्स सावंत का हत्यारा है। मैं इसका रिमांड लूँगा, ताकि असली हत्यारे को भी फंसाया जा सके।"
"इसकी सावंत से क्या दुश्मनी थी ?"
"इसकी नहीं, यह तो मोहरा भी नहीं है, प्यादा भर है। इसने शूट किया, शूट किसी और ने करवाया, मैं मुकदमा दायर कर चुका हूँ, अब रिमांड लूँगा और उस शख्स को गिरफ्तार करूंगा, जिसने कत्ल करवाया है।"
विजय ने एस.एस.पी. की एक न सुनी। बटाला लॉकअप में बन्द था।
"मुझे मालूम है सर, मेरी सर्विस भी जा सकती है, लेकिन इस थाने का चार्ज और सावंत मर्डर केस की तफ्तीश कर रहा हूँ मैं, जब तक मेरी वर्दी मेरे पास है, पुलिस महकमे का बड़े से बड़ा ऑफिसर भी मुझे काम करने से नहीं रोक सकता।"
"ठीक है, आई.जी . के सामने मैंने तुम्हारी बहुत तारीफ की थी, अब अपनी तारीफ खुद कर लेना, लेकिन मेरी व्यक्तिगत सलाह यही है कि…।"
"सॉरी सर।"
और एस.एस.पी. पैर पटकते हुए चला गया।
जारी रहेगा…….![]()
Takreeban 90 ke dashak ki kahani hai bhaiकहानी तो मुझे इस युग की ही नही लग रही।
Raj_sharma किस दशक की कहानी लिख रहे हो आप?
दशक का खुलासा कर दो तो वकील और इंस्पेक्टर की दयनीय स्तिथि भी क्लियर हो जायेगी।
Abhi to update diya bhaiDono dost
रोमेश ने अपनी रोशनी से विजय को भी रोशन कर दिया।
विजय ने बहादुरी और दिमाग़ दोनों का इस्तेमाल करके केस को सही रास्ते पर ले ही आया |
अब दोनों के लिए मुश्किलें शुरू होने वाली है
सीमा को अब आप किस रूप मैं पेश करेंगे वो देखना दिलचस्प होगा । अगले अपडेट की प्रतीक्षा रहेगी![]()


ऐसा ही कुछ एहसास मुझे भी हो रहा है मित्र की रोमेश और विजय दोनों के किए आगे कई तरह की मुसीबतें राह देख रही है।Abhi to update diya bhaiAgle update ke liye kam se kam 2-3 din intzaar karna hoga
waise agley update me halat kharaab hogi
Thank you very much for your wonderful review and support![]()
Awesome super duper thriller#11.
रोमेश डिनर के बाद फ्लैट पर पहुँचा, तो उसके पास सारी बातचीत का टेप मौजूद था। फिर भी उसने विजय को कुछ नहीं बता या। अगले ही दिन समाचार पत्रों में छपा की, विजय ने वह टैक्सी बरामद कर ली है, जिसे कातिल ने प्रयोग किया था।
टैक्सी के मालिक रूप सुंदर को एक रात हवालात में रखने के बाद सुबह छोड़ दिया गया था। चालक जुम्मन गायब था। रोमेश के होंठों पर मुस्कुराहट उभर आई, इसका मतलब मायादास को पहले से पता था कि टैक्सी का सुराग पुलिस को मिल गया है, और जुम्मन कभी भी आत्मसमर्पण कर सकता है।
जुम्मन के हाथ आते ही बटाला का नकाब भी उतर जायेगा। शाम को रोमेश से विजय खुद मिला।
''तुम्हारी बात सच निकली रोमेश।''
"कुछ मिला ?"
"जुम्मन ने सब बता दिया है।"
"जुम्मन तुम्हारे हाथ आ गया, कब ?"
"वह रात ही हमारे हाथ लग गया था, लेकिन मैंने उसे हवालात में नहीं रखा। बैंडस्टैंड के एक सुनसान बंगले में है।"
"यह तुमने अक्लमंदी की।"
"मगर तुम जुम्मन को कैसे जानते हो?"
"यह छोड़ो, एक बात मैं तुम्हें बताना चाहता था, तुम्हारे थाने का तुम्हारा कोई सहयोगी अपराधियों तक लिंक में है। कौन है, यह तुम पता लगाओगे।''
"मुझे पता लग चुका है। इसलिये तो मैंने जुम्मन से हवालात में पूछताछ नहीं की। बलदेव, सब इंस्पेक्टर बलदेव!
फिलहाल मैंने उसे फील्डवर्क से भी हटा लिया है। जुम्मन ने बटाला का नाम खोल दिया है। स्टेनगन बटाला के पास है, आज रात मैं उसके अड्डे पर धावा बोल दूँगा।"
"वह घाटकोपर में देसी बार चलाता है। मेरे पास उसकी सारी डिटेल आ गई है। चाहो तो रेड पर चल सकते हो।"
''नहीं, यह तुम्हारा काम है और फिर जब तुम बटाला को धर लो, तो जरा मुझसे दूर-दूर ही रहना।"
"क्यों ? क्या उसका भी केस लड़ोगे?''
"नहीं, मैं पेशे के प्रति ईमानदार रहना चाहता हूँ। हालांकि तुम खुद बटाला तक पहुंच गये हो, लेकिन इन लोगों को अगर पता चला कि उस केस के सिलसिले में तुम वहाँ जा रहे हो, तो वे यही समझेंगे कि यह सब मेरा किया धरा है। मैंने तुम्हें लाइन सिर्फ इसलिये दी, क्यों कि तुम गलत दिशा में भटक गये थे। अब सबूत जुटाना तुम्हारा काम है।''
''लेकिन जनाब अगले हफ्ते नया साल शुरू होने वाला है और दस जनवरी को आपकी शादी की वर्षगांठ होती है, याद है।'' इतना कहकर विजय ने सौ-सौ के नोटों की छः गड्डियां रोमेश के हवाले करते हुए कहा, "तुम तो तकाजा भी भूल गये।''
''यार सचमुच तूने याद दिला दिया , मेरे को तो याद भी नहीं था। माय गॉड, सीमा वैसे भी आजकल मुझसे बहुत कम बोलती है। मैरिज एनिवर्सरी पर मैं उसे गिफ्ट दूँगा इस बार।''
घाटकोपर की एक बस्ती में। बटाला का अवैध शराब का बार चलता था । बटाला देसी बार के ऊपर वाले कमरे में बैठा था। उसकी बगल में एक पेशेवर औरत थी, जिसके साथ वह रमी खेल रहा था। पास ही एक बोतल रखी थी। तभी एक चेला अंदर आया।
"मुखबिर का खबर आयेला।''
"क्या?"
"पुलिस का रेड इधर पड़ेला।''
"आने दे कोई नया इंस्पेक्टर होगा। जब आजाये तो बोल देना, ऊपर कू आए, मेरे से बात कर लेने का क्या, अब फुट जा।
'तभी पुलिस का सायरन बजा। बटाला पर कोई असर नहीं पड़ा। वह उसी प्रकार रमी खेलता रहा। खबर देने वाला नीचे चला गया। कुछ ही देर में बार में तोड़फोड़ की आवाजें गूंजने लगी। चेला फिर हाँफता काँपता ऊपर आया।
"इंस्पेक्टर विजय है। तुमको गिरफ्तार करने आया है।'' बटाला ने उठकर एक झन्नाटेदार थप्पड़ चेले के मुँह पर मारा। अपनी रिवॉल्वर हवा में घुमाई और फिर उसे जेब में डालता उठ खड़ा हुआ। उसी वक्त बटाला ने फोन मिलाने के लिए डायल पर उंगली घुमाई, लेकिन वह चौंक पड़ा, टेलीफो न डेड पड़ा था।
''हमारा काम करने का तरीका कुछ पसंद आया।'' अचानक विजय ने उसी कमरे के दरवाजे पर कदम रखा,
''अब तुम किसी नेता को फोन नहीं मारेगा, थाने चलेगा सीधा।''
''साले ! " बटाला ने रिवॉल्वर निकाली। लेकिन फायर करने से पहले विजय ने एक जोरदार ठोकर बटाला पर रसीद कर दी, बटाला लड़खड़ाया, विजय एकदम चीते की तरह उस पर झपटा और फिर विजय की रिवॉल्वर बटाला के सीने पर थी।
''पुलिस पर गोली चलाएगा साले। “
“मैं तेरे को बर्बाद कर दूँगा। अपुन को ठीक से जान लेने का, नहीं तो नौकरी से हाथ धोलेगा।"
"जनार्दन रेड्डी के कुत्ते।" विजय ने उसे एक ठोकर और जड़ दी,
''इधर पूरी बस्ती को घेरा है मैंने। कोई तेरी मदद को नहीं आएगा, मुम्बई के जितने भी तेरे जैसे लोग हैं, मेरा नाम सुनते ही सब का पेशाब निकल जाता है। सावंत का कत्ल किया तूने, चल।" विजय ने बटाला के हाथों में हथकड़ियां डाल दी।
"ऐ चल भाग यहाँ से।'' विजय ने पेशेवर युवती से कहा। बटाला को गिरफ्तार करके विजय गोरेगांव के लिए चल पड़ा। अभी बटाला से कुछ पूछताछ भी करनी थी, इसी लिये वह उसे लेकर सीधा थाने नहीं गया, बैंडस्टैंड के उसी बंगले में गया, जहाँ जुम्मन बंद था।
"यह तो थाना नहीं है।" "बटाला जी पर यह मेरा प्राइवेट थाना है, साले यहाँ भूत भी नाचने लगते हैं मेरी मार से। अभी तो तेरे से स्टेनगन बरामद करना है।" उसके बाद बटाला की ठुकाई शुरू हो गई। बटाला को अधिक देर तक प्राइवेट कस्टडी में नहीं रखा जा सकता था, विजय ने सुबह जब उसे लॉकअप में बन्द किया, तो स्टेनगन भी बरामद कर ली थी।
अब उसने पूरा मामला तैयार कर लिया था। उसे मालूम था, बटाला को गिरफ्तार करते ही हंगामा होगा और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी उससे जवाब तलबी कर सकते थे। हुआ भी यही। मामला सीधा आई.जी. के पास पहुँचा। खुद एस.एस.पी. सीधा थाने पहुंच गया।
"आज तक तुम्हारे खिलाफ कोई शिकायत नहीं आई।" एस.एस.पी. ने कहा,
"इसलिये बटाला को छोड़ दो, तुमने ठाणे जिले में कैसे हाथ डाल दिया, वहाँ की पुलिस…।"
"सर। अगर मैं वहाँ की पुलिस को साथ लेता, तो बटाला हाथ नहीं आता, आखिरी वक्त तक वो यही समझता रहा कि उसी के थाने की पुलिस होगी, अगर उसे जरा भी पता चल जाता कि उसे सावंत मर्डर केस में अरेस्ट किया जा रहा है, तो वह हाथ नहीं आता।"
"सावंत मर्डर केस पहले चंदन, फिर यह बटाला। "
"मैंने स्टेनगन भी बरामद कर ली।"
"देखो इंस्पेक्टर विजय, आई.जी. का दबाव है, घाटकोपर की उस बस्ती में तुम्हारे खिलाफ नारे लगा रहे हैं, कोई ताज्जुब नहीं कि जुलूस निकलने लगे, तुम पुलिस इंस्पेक्टर हो, इसका यह मतलब नहीं कि…।"
"सर प्लीज, आप केवल रिजल्ट देखिये, ये मत देखिये कि मैंने कौन सा काम किस तरह किया है। यही शख्स सावंत का हत्यारा है। मैं इसका रिमांड लूँगा, ताकि असली हत्यारे को भी फंसाया जा सके।"
"इसकी सावंत से क्या दुश्मनी थी ?"
"इसकी नहीं, यह तो मोहरा भी नहीं है, प्यादा भर है। इसने शूट किया, शूट किसी और ने करवाया, मैं मुकदमा दायर कर चुका हूँ, अब रिमांड लूँगा और उस शख्स को गिरफ्तार करूंगा, जिसने कत्ल करवाया है।"
विजय ने एस.एस.पी. की एक न सुनी। बटाला लॉकअप में बन्द था।
"मुझे मालूम है सर, मेरी सर्विस भी जा सकती है, लेकिन इस थाने का चार्ज और सावंत मर्डर केस की तफ्तीश कर रहा हूँ मैं, जब तक मेरी वर्दी मेरे पास है, पुलिस महकमे का बड़े से बड़ा ऑफिसर भी मुझे काम करने से नहीं रोक सकता।"
"ठीक है, आई.जी . के सामने मैंने तुम्हारी बहुत तारीफ की थी, अब अपनी तारीफ खुद कर लेना, लेकिन मेरी व्यक्तिगत सलाह यही है कि…।"
"सॉरी सर।"
और एस.एस.पी. पैर पटकते हुए चला गया।
जारी रहेगा…….![]()
Ye raat kab sard hogi