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Shila behaving so erotically at Goa .Story updated
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Thanks bhaiBehtreen update
राजेश: "वैशाली.. माउंट आबू में हमारी इस मुलाकात को यादगार बनाने के लिए.. हमारी दोस्ती के पहले कदम की ओर जाते हुए.. क्या तुम मुझे एक किस दे सकती हो?"
वैसे तो वैशाली को ऐसा कोई परहेज नही था पर राजेश के साथ वह हर कदम फूँक फूँक कर रखना चाहती थी.. बहोत सी बातें जुड़ी थी राजेश के साथ..
वैशाली: "नो सर.. माफ कीजिए पर आप जो चाहते है वो मैं आपको नहीं दे पाऊँगी.. सॉरी"
राजेश: "कोई बात नहीं.. अगर तुम्हारा मन हो तो ही.. जबरदस्ती तो मैंने आज तक रेणुका से नही की.. डॉन्ट वरी.. कब से अकेले पी रही हो.. क्या तुम भूल गई की हम दोनों एक ही ग्लास से पी रहे है?"
वैशाली: "ओह.. सॉरी सर.. बातों बातों में भूल ही गई.. ये लीजिए ग्लास.. " वैशाली ने जब ग्लास देने के लिए अपना हाथ आगे किया.. तब राजेश ने उसकी हथेली को दबाते हुए कहा "बुरा मत मानना वैशाली.. पर अगर शराब का इतना भी असर न हो तो फिर पीना ही बेकार है.. तुम बहोत सेक्सी हो यार.. मैं अपने आप पर कंट्रोल नही रख पा रहा हूँ.. "
वैशाली को जिस बात का डर था वहीं हो रहा था.. राजेश सर उसकी ओर फिसलते जा रहे थे.. क्या करूँ?? खड़ी होकर चली जाऊँ?? तो उन्हे बुरा लगेगा.. उनकी कंपनी की पार्टी में.. उनके खर्चे पर यहाँ आई हूँ.. सिर्फ हाथ ही तो पकड़ा है.. चलता है.. !!
वैशाली: ओह्ह सर.. मेरे खयालात उतने पुराने भी नही है की आप मेरा हाथ न पकड़ सको.. मुझे भी अच्छा लगा"
दोनों के बीच अब तक ४ ग्लास बियर खतम हो चुकी थी.. और सिगरेट का पूरा एक पैकेट खतम हो चुका था.. और उस दरमियान राजेश वैशाली के हाथ तक पहुँच गया था.. वैशाली के गोरे कोमल हाथ को सहलाते हुए राजेश उसकी आँखों में आँखें डालकर देख रहा था.. वैशाली और ज्यादा देर तक उसका सामना नही कर पाई.. बार बार वह अपनी नजरें झुका लेती थी.. एक अजीब प्रकार का आकर्षण दिख रहा था उसे राजेश की आँखों में..
राजेश: "वाकई वैशाली.. तू बहोत सुंदर है.. तेरा फिगर भी जबरदस्त है.. जो भी देखें वो पागल हो जाएँ.. मैं भी आखिर एक मर्द हूँ.. ऊपर से माउंट आबू का ये मदहोश आलम.. साथ में शराब का नशा.. आज अगर रात को तेरा साथ मिल जाएँ तो हम दोनों की रात रंगीन हो जाएगी"
बियर के नशे में धुत होकर राजेश वैशाली को मना रहा था.. कविता पार्टी में अब भी अपने स्तनों की नुमाइश करते हुए यहाँ वहाँ घूम रही थी.. पीयूष और मौसम के नैन लड़ रहे थे.. फाल्गुनी और रेणुका किसी विषय पर गंभीर चर्चा कर रहे थे..
अपने फिगर की तारीफ सुनकर वैशाली फुली न समाई.. और वो भी किसी ऐरे गैरे इंसान से नही.. राजेश जैसे सफल और अमीर व्यक्ति के मुंह से..
पार्टी अपने पूरे रंग में थी.. हर कोई अपने अपने ढंगे से मजे कर रहा था..
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होटल से निकलकर इनोवा में बैठे ही संजय ने शीला को अपनी बाहों में भर लिया.. और उसके अंगों को अपने हाथों से रौंदने लगा.. शीला के मदमस्त स्तनों पर.. उसकी जांघों पर.. वो जगह जगह अपने हाथ फेर रहा था.. जैसे एक ही बार में वो शीला का पूरा जिस्म भोग लेना चाहता हो..
संजय: "मम्मी जी, यू आर सो हॉट.. आई लव योर सेक्सी बूब्स.. बस गोवा पहुँचने की देरी है.. मैं पूरी दुनिया को अपनी सास के उभार दिखाना चाहता हूँ.. "
शीला ने अपने दामाद के लंड को अपनी मुठ्ठी में पकड़ लिया.. और उत्तेजना पूर्वक मसल दिया.. एक ही झटके में उसने पेंट के अंदर से लंड बाहर निकाला और नीचे झुककर चूसने लगी.. संजय के बड़े अंडकोशों को अपनी मुठ्ठी में दबाकर वह उससे खेलती रही और कराहती रही.. ड्राइवर को गाड़ी के करीब आता हुआ देख दोनों ने अपने अंग छुपा लिए और चुपचाप बैठ गए.. और गाड़ी तेजी से गोवा की तरफ जाने लगी
गोवा की सरहद पर पहुंचते ही शीला रोमांचित हो गई.. एक आलीशान होटल में रहने का इंतेजाम किया था संजय ने.. उनके कमरे की बालकनी समंदर के किनारे पर थी.. होटल का अपना प्राइवेट बीच था.. देखती ही शीला का दिल खुश हो गया
संजय: "मम्मी जी, यहाँ हम दोनों अकेले है.. और यहाँ हमे कोई जानता भी नही है.. मैं आपको जबरदस्त आनंद और भरपूर रोमांच का अनुभव करवाना चाहता हूँ.. बस यह सब इन्जॉय करने के लिए आपको थोड़ा सा बिंदास होने की जरूरत है.. तभी आप यहाँ का पूरा आनंद ले पाएगी.. देखिए.. वो सामने खड़ी स्त्री कितनी बिंदास खड़ी है?"
शीला ने उस स्त्री की ओर देखा.. करीब ४० के उम्र की वह स्त्री.. लगभग नंगी सी थी.. उसकी बिकीनी इतनी छोटी थी.. जो केवल उसकी दोनों निप्पल और चूत की लकीर को ही छुपा रही थी.. बाकी सब देखने वालों के लाभ के लिए खुला छोड़ दिया गया था.. उसके हाथ में बियर की बोतल थी.. उसके स्तन की सम्पूर्ण गोलाई खुली नजर आ रही थी.. जैसे पूरी दुनिया को अपने नग्न अंग दिखाने के इरादे से ही उसने वैसी बिकीनी पहनी थी..
शीला बालकनी से जब उस स्त्री को एकटक देख रही थी तभी संजय ने उसे अपने आगोश में खींच लिया और पास की एक कुर्सी पर बैठ गया.. शीला को अपनी गोद में बैठा लिया.. शीला के स्तनों के उभारों पर हाथ फेरते हुए संजय उत्तेजित हो गया.. उसका लंड शीला की गांड पर चुभने लगा.. शीला की काँखों के अंदर से हाथ डालकर संजय ने दोनों स्तनों को मसल दिया.. और शीला का चेहरा मोड कर उसे किस करते हुए कान में कहने लगा "मम्मी जी.. अब तक आपने आपकी रसीली चूत के दर्शन नही करवाए.. खैर अब यहाँ आ ही गए है तो वो भी हो जाएंगे.. मुझे कोई जल्दी नही है.. अभी आप जल्दी से कपड़े चेंज कर लीजिए ताकि हम बीच पर जाकर मजे कर सके.. "
शीला: "पर बेटा.. मैं समंदर पर पहनने लायक कोई कपड़े लेकर ही नही आई हूँ.. मेरे पास तो सारी साड़ियाँ ही है.. मुझे कहाँ पता था की तुम मुझे गोवा ले जा रहे हो.. !! "
संजय: "अगर मैं आपको पहले बता देता की गोवा ले जा रहा हूँ.. तो क्या आप चलते मेरे साथ?" संजय ने अपने पेंट की चैन खोलकर लंड बाहर निकाला.. गोरे सख्त लंड को देखकर शीला के अंदर वासना का बवंडर उठ गया.. शीला संजय की गोद से खड़ी हो गई और बोली
शीला: "अब मैं क्या पहनु? साड़ी ही पहन लेती हूँ.. "
संजय: "साड़ी पहन कर भी कोई कभी बीच पर जाता है क्या!!! चलिए.. पास किसी स्टोर से आपको मस्त कपड़े दिलवाता हूँ"
दोनों बालकनी से चलते चलते समंदर किनारे बने एक छोटे से मार्केट पहुंचे.. चलते हुए शीला संजय से ऐसे चिपकी हुई थी जैसे हनीमून पर आई हो.. ऐसा करने में उसे कोई झिझक भी नही हुई.. आसपास का वातावरण ही कुछ ऐसा था.. अद्भुत और उन्मादक.. कई कपल्स ऐसी ऐसी हरकतें खुले में कर रहे थे.. की शीला काफी खुला खुला महसूस करने लगी.. कोई किस कर रहा था.. तो कोई खुलेआम स्तन दबा रहा था.. एक पेड़ के तने के पीछे खुलेआम लंड चुसाई चल रही थी.. !!!
एक स्टोर से संजय ने शीला के लिए एक मस्त पतला सा लो-कट टॉप और जीन्स की शॉर्ट्स खरीदी.. शॉर्ट्स तो इतनी छोटी थी की शीला की पूरी जांघ ही खुली नजर आयें.. और उसके आधे से ज्यादा चूतड़ बाहर ही लटकते रहे.. इतनी छोटी.. !!
शीला ने कृत्रिम क्रोध के साथ कहा "कैसे कपड़े लिए है बेटा.. ?? मैं क्या ऐसे कपड़े पहनूँगी? शर्म भी नही आती?"
संजय ने हँसते हुए कहा.. "मेरी जान.. तुझे तो मैं पूरे गोवा में नंगा घुमाना चाहता हूँ.. अब तय कर लो.. वैसे घूमना है या ये कपड़े पहनने है??"
शीला के बदन में कामुकता और हवस का बुखार सा चढ़ने लगा.. संजय भी जिस तरह "आप" से "तू" पर आ गया था.. शीला की चूत में अजीब सी चुनचुनी होने लगी थी.. उसके स्तन सख्त होकर तन गए थे.. कान लाल हो गए थे..
संजय: "तू अभी ट्रायलरूम में जाकर ये कपड़े पहन कर आ" उसने शीला को आदेश दिया
थोड़ी सी हिचकिचाहट के बाद शीला को आखिर मानना ही पड़ा.. वह जब ट्रायलरूम के बाहर आई तब देखने लायक द्रश्य था.. गोरा गदराया मांसल चरबीदार जिस्म.. पतला सा टॉप.. जिस में बिना ब्रा के खरबूजे जैसे स्तन साफ साफ दिख रहे थे.. टॉप इतना टाइट था की शीला डर रही थी की उसके स्तन कहीं टॉप को फाड़ न दे.. निप्पल भी उभरकर अपना आकार दिखा रही थी.. स्टोर में और जीतने भी लोग थे सब की नजर शीला पर चुंबक की तरह चिपक गई..
संजय ने काउन्टर पर बिल के पैसे चुकाये और शीला का हाथ पकड़कर बाहर निकला.. इतने उत्तेजक कपड़े पहनकर शीला आज पहली बार बाहर निकली थी.. उसके मदमस्त बड़े बबले बार बार साथ चल रहे संजय की कुहनी से टकराते हुए उसे उत्तेजित कर रहे थे..
किसी भी प्रकार के मेकअप के बगाई शीला अपने दामाद के साथ चलती जा रही थी.. दोनों की उम्र में करीब २५ वर्ष का फरक था.. देखने वाले सब आश्चर्य से इस जोड़ी को देख रहे थे.. सब सोच रहे थे की यह आखिर किस तरह की जोड़ी है?? अब तक शीला ने भी मन में यह तय कर लिया था की वह अपने दामाद के साथ खुल कर जिएगी.. और गोवा में मिली इस स्वतंत्रता का पूरा आनंद लेगी
शीला: "संजय बेटा.. एक सिगरेट जला कर दो मुझे" एक बंद दुकान के बाहर बैठते हुए उसने संजय से कहा.. शीला के उठते या बैठते उसके स्तन उछल-कूद कर रहे थे.. यह देखकर सामने खड़े एक अंग्रेज ने कहा "ओह वाऊ.. अमैज़िंग.. !!" हाथ में सिगार लिए वह शॉर्ट्स और लूज टीशर्ट पहने अपनी गर्लफ्रेंड के साथ खड़ा था.. दोनों के जिस्म काफी कसे हुए थे.. और ६ फिट से ज्यादा की लंबाई थी.. २८ के आसपास की उम्र.. शीला और संजय दोनों उनके तरफ देखने लगे.. उसकी फिरंगी गर्लफ्रेंड भी जबरदस्त सेक्सी थी..
"कितना गोरा है वो फिरंगी.. !!" शीला ने कहा..
"हाँ मम्मी जी.. तुम्हारे उछलते बॉल देखकर पागल हो गया.. साथ में जो लड़की है वो कितनी हॉट है.. देखो तो सही.. एकदम कच्चे कुँवारे स्तन है उसके.. कमर भी कितनी पतली है.. साली की चूत में एक धक्के में लंड डाल दु तो जान निकल जाए उसकी.. "
शीला: "बेटा.. उसके हाथ में जो सिगरेट है वो कितनी अलग है.. !!! मोटी सी"
संजय: "वो सिगरेट नही.. सिगार है.. विदेश में लोग ज्यादातर यही पीते है.. "
शीला: "यहाँ कहीं मिलेगी ऐसी सिगार? मुझे ट्राय करनी है"
संजय: "आपको सिगार ट्राय करनी है.. तो मुझे उस लड़की की चूत ट्राय करनी है.. किसी गोरी को एक बार दबाकर चोदने का बहोत मन है मुझे.. " संजय अपने लंड को दबाने लगा.. वह दोनों भी शीला की ओर देख रहे थे.. संजय का लंड उस गोरी के स्तन देखकर सख्त हो चुका था..
शीला: "लगता है की तुम्हारा खड़ा हो गया है.. इतनी पसंद आ गई तुम्हें? जो ओर किसी को ही देखना था तो मुझे साथ क्यों लाया?" शीला को स्त्री सहज ईर्षा होने लगी..
संजय: "आपको तो मैं होटल में ले जाकर अपने अनोखे अंदाज में चोदूँगा.. वो गोरा तुम्हारी चूचियों को देखकर कैसा पागल हो रहा है"
शीला: "यही तो मेरा मुख्य शस्त्र है बेटा.. मर्दों को इन स्तनों से कैसे पागल बनाना मुझे अच्छी तरह आता है.. तुम्हें उस रांड को देखकर जैसी उत्तेजना हो रही है वैसी ही कुछ उस गोरे को मेरे स्तन देखकर हो रही होगी.. अरे देखो.. वो दोनों हमारी तरफ ही आ रहे है.. कितना हेंडसम है ये लड़का.. इसका लंड कितना गोरा होगा.. हाय.. !!! मुझे तो उससे चुदवाने का मन कर रहा है संजु" शीला ने संजय के कंधे पर अपना सर रख दिया..
शीला और संजय दोनों बातें कर रहे थे तब वह जोड़ा उनके पास आ गया..
उस गोरे ने कहा "Hi.. I am John and this is my baby, Charlie.. We are from France.. You both are a nice looking couple.. and madam you are looking gorgeous" जॉन ने शीला के बॉल को नजदीक से देखते हुए अपने होंठ पर जीभ फेरते हुए कहा..
संजय तो चार्ली की कमर को देखकर बावरा हो गया.. पेड़ की पतली शाख जैसी कमर.. छोटे छोटे कूल्हें.. और पतले शरीर के मुकाबले बड़े स्तन.. बनियान जैसा कुछ पहन रखा था चार्ली ने.. साइड से उसके आधे स्तन तो बिना किसी प्रयत्न के ही दिख रहे थे..
संजय ने चार्ली से हाथ मिलाते हुए कहा "Nice to meet you Charlie.. I am Sanjay and this is Shila..She is neither my wife nor my girlfriend..so please don't ask about our relationship.. We are here to enjoy..Would you like to join us?"
चार्ली अपने दोस्त जॉन के सामने देखने लगी.. जॉन की आँखें तो शीला के स्तनों को देखते ही चकाचौंध हो चुकी थी
चार्ली ने जॉन से कहा "John, you remember? I told you about my fantasy!! I think this is a golden chance for me.. I don't want to miss this..Please help me to fulfill it darling..do something!!"
शीला और संजय स्तब्ध होकर उनकी बातें सुनते रहे.. शीला की चूत तो पानी छोड़ने लगी थी जॉन को देखकर.. वह दोनों किस बारे में बात कर रहे थे यह समझने में देर नही लगी संजय को.. पर उनकी अजीब अंग्रेजी को समझने में दिक्कत आ रही थी..
तभी दुकान के पास खड़ा एक आदमी चलते हुए उनके पास आया "साहब.. इनकी अंग्रेजी समझने में हेल्प करूँ आपकी? १०० रुपये लूँगा"
संजय ने तुरंत अपने वॉलेट से १०० का नोट निकालकर उसके हाथ में थमा दिया..
उस आदमी ने उन दोनों के साथ कुछ बात की और फिर कहा "सर, ये कपल आप लोगों के साथ वक्त गुजारना चाहता है.. और चार्ली मैडम का कहना ही की वह एक बार किसी इंडियन आदमी के साथ डेट पर जाना चाहती है.. अगर आप दोनों को एतराज न हो तो ये दोनों आप के साथ एक रात गुजारना चाहते है!!"
संजय को ऐसा लग रहा था जैसे स्वर्ग उतरकर धरती पर आ गया हो
संजय" मम्मी जी.. आप इस गोरे को लपेटना चाहती हो.. और मैं चार्ली को.. मेरा भी जबरदस्त मन कर रहा है विदेशी चूत को चोदने का.. "
शीला सोचने लगी.. ऐसे किसी अनजान आदमी के साथ कैसे चली जाऊँ?? कुछ ऊपर नीचे हो गया तो? मदन को क्या मुंह दिखाऊँगी? एक साथ कई विचार उसके दिमाग में एक साथ चल रहे थे..
तब जॉन उस आदमी से और कुछ बात करने लगा.. उसकी बात सुनकर वह आदमी संजय और शीला के पास आया और बोल
आदमी: "ये जॉन साहब ने मुझे जो कहा वोही मैं आपको बता रहा हूँ.. आप गुस्सा मत करना.. प्लीज.. ये तो मेरा काम है.. "
संजय: "हम बुरा नही मानेंगे.. "
आदमी ने शीला की ओर देखते हुए कहा "ये साहब कह रहे है की अगर आप उसके साथ एक रात गुजारेगी तो वो आपको १००० डॉलर देने के लिए तैयार है"
स्तब्ध हो गई शीला.. उसने संजय से कहा "बेटा.. तू इस लड़की के साथ जा.. मैं इसके साथ जाती हूँ.. ऐसा मौका दोबारा हमें कभी नही मिलेगा"
खुश होकर संजय ने जॉन के सामने ही चार्ली के गालों को सहलाया.. और उसका हाथ पकड़कर कहा "Let's go baby..!!
जॉन शीला के करीब आया.. अपनी सिगार शीला को देते हुए कहा : "Do you smoke?"
शीला ने मुस्कुराकर सिगार अपने हाथ में ली और एक बड़ा सा कश लगाया.. सिगार के धुएं के साथ दोनों ओजल हो गए.. जाते जाते शीला ने मुड़कर देखा.. उसका दामाद बीच बाजार में उस चिड़िया को चूमते हुए उसके स्तन दबा रहा था.. शीला को थोड़ी बहोत अंग्रेजी आती थी.. जॉन ने शीला का हाथ पकड़कर अपनी बगल में खींच लिया.. और चलने लगा.. शीला की गदराई कमर पर हाथ रखकर वह चल रहा था..
शीला और जॉन बारी बारी सिगार फूँक रहे थे.. जॉन शीला की कमर की चर्बी हाथ में पकड़कर उसे उकसा रहा था.. शीला के जिस्म एक अजीब प्रकार का रोमांच और उत्तेजना दौड़ने लगी.. दोनों केवल संभोग करने के इरादे से ही मिले थे.. इसलिए शीला ने सीधा बोल दिया..
शीला: "I don't want to waste time on the road.. so let's go to your room..I want you to take me there"
जॉन: "Oh really!!! You are so fucking hot bitch..!! Let's go honey.. I want to suck your pussy.. I want to taste Indian cunt too"
शीला: "I also want to taste white lund"
जॉन: "What did you say? Lund? What does it mean?"
शीला: "Lund means this...!!" कहते हुए शीला ने जॉन के लंड पर धीरे से चपत लगाई और हंसने लगी
जॉन: "Ohh you mean my dick..that is great.. Your smile is also fucking killer baby.." सिगार शीला के हाथ में थमाते हुए जॉन ने उसे अपने आगोश में खींचा.. चलते चलते वह दोनों एक खाली सड़क पर पहुँच गए.. आसपास कोई था नही.. जो एकाध थे वो कपल में थे और अपनी दुनिया में मस्त थे..
जॉन ने शीला के कंधों पर हाथ रखकर उसके टॉप के अंडर डाल दिया.. पहली बार उसने शीला की नंगी चूचियों का स्पर्श किया.. अंदर ब्रा तो थी नही.. जॉन के हाथ में शीला का अनमोल स्तन आ गया.. जॉन की आह्ह निकल गई.. स्तनों को दबाते हुए उसने कहा
जॉन: "My god..!! You Indians have such sexy boobies..I like your fucking huge titties..Shila.." अपने टिपिकल अंग्रेजी में वह बोला
शीला खुश हो गई.. सिगार का दम खींचते हुए वह बोली "John.. press my boobs hard..I like your hard touch on my boobs" कहते हुए शीला ने जॉन के अंदर घुसे हाथ को ऊपर से ही दबा दिया.. और बोली "John.. I want to see your cock right now..right here!!"
जॉन: "You mean my lund?"
शीला: "Yes..yes john.. I want to see your lund right here..so please show me now" एक सुमसान गली के कोने में वह जॉन को खींचकर ले गई.. जाते जाते उसने शॉर्ट्स के ऊपर से ही जॉन का लंड पकड़ लिया.. उसने महसूस किया की शॉर्ट्स के अंदर उसने कुछ नही पहना था.. उसका लंड खुला ही लटक रहा था.. शीला के हाथ में सीधा जॉन का डंडा आ गया.. शीला पकड़कर हिलाने लगी
जॉन: "Ohhh Shila.. you fucking bitch.. You are so hot..aahhhh!!"
उसके सख्त फिरंगी लंड को चड्डी के ऊपर से ही हिलाते हुए शीला इतनी उत्तेजित हो गई की वह ये भी भूल गई की वो लोग बाहर खड़े थे.. उसने चड्डी के अंदर हाथ डालकर जॉन के लंड की नोक पकड़ ली.. और उस फुले हुए सुपाड़े को उंगली से दबा दिया..
जॉन ने शीला को अपनी बाहों में दबोच कर एक जबरदस्त फ्रेंच किस कर दी.. उसकी चूमने की स्टाइल पर शीला फ़ीदा हो गई.. उस अंग्रेज ने बड़े ही आराम से शीला के निचले होंठ को चूसना जारी रखा.. शीला का जोबन अब सिहरने लगा था.. ब्लू फिल्मों को देखकर शीला हमेशा यह सपना देखती थी की कभी कोई गोरा उसे दबोच कर नंगी करके धमाधम चोद दे..आज उसका वो सपना साकार हो रहा था.. जॉन का लंड जबरदस्त सख्त हो गया था.. शीला उत्तेजित होकर उसकी चड्डी में हाथ डालकर उससे खेल रही थी.. शीला ने अब उसके अंडकोशों को भी मुठ्ठी में पकड़कर देखा.. मस्त गोलगप्पे जैसे थे उसके आँड..
"प्लीज जॉन.. बाहर निकालकर मुझे दिखा न.. !!" हिन्दी में बोली शीला.. जॉन को कुछ समझ में नही आया
किस तोड़कर जॉन ने पूछा "What??"
शीला को तब एहसास हुआ की उसे अंग्रेजी में बोलना था "Please, show me your big cock!!"
जॉन: "hey..not here..let's go to my room dear..let's go" हाथ पकड़कर उसने शीला को खींचा
"No John, I can wait anymore..Show me here and now" कहते हुए शीला घुटनों के बल बैठ गई और जॉन की चड्डी की मोरी से लंड को बाहर खींचने लगी.. जैसे बिल से चूहा बाहर निकलता है बिल्कुल वैसे ही जॉन के लंड का सुपाड़ा बाहर निकला.. जॉन की जांघों के बालों को चूमते हुए शीला ने उस सुपाड़े पर अपनी जीभ का स्पर्श किया..
"Ohh.. Shila, please don't do it here.. I can't control anymore" चड्डी के नीचे से हाथ डालकर उसके गोटों को मसल रही शीला से जॉन ने कहा.. पर शीला की हवस की आग इतनी तेज थी की वह अब बेकाबू हो चली थी.. उसने जॉन की बातों को इग्नोर करते हुए चड्डी को थोड़ा सा ओर ऊपर किया.. लगभग साढ़े तीन इंच जितना लंड बाहर निकल आया और बिना एक सेकंड गँवाए शीला ने लंड मुंह में ले लिया.. पीछे से हाथ डालकर उसने जॉन के कूल्हों को भी सहलाना शुरू कर दिया.. कूल्हों पर दबाव बनते ही जॉन शीला की ओर करीब आ गया.. और लंड थोड़ा सा और बाहर निकला.. वह हिस्सा भी शीला ने अपने मुंह के आगोश में भर लिया..
"Ohh..you fucking bitch..please stop!! Let's go to my room" पर शीला कहाँ सुनने वाली थी!!! जॉन के गोरे कूल्हों और जांघों पर हाथ फेरते हुए वह बदहवास होकर लंड चूस रही थी.. वह उत्तेजना से इतनी बेकाबू हो गई थी की चूसते चूसते एक बार तो उसने लंड पर आपने दांत गाड़ दिए.. जॉन ने अपने जीवन में आज तक इतनी कामुक स्त्री को नहीं देखा था.. वो बावरा होकर इस हिंसक शेरनी जैसी शीला का शिकार बनता रहा.. दंग रह गया वोह.. भारतीय स्त्री इतनी कामुक और उत्तेजित हो सकती है वो उसने सपने में भी नही सोचा था..
जॉन ने शीला को कंधे से पकड़कर खड़ा किया और अपने लंड को उसके मुंह के चूँगाल से छुड़ाया..शीला ने तुरंत अपना टॉप ऊपर करते हुए अपने अद्भुत स्तनों को जॉन की आँखों के सामने उजागर कर दिया.. और जॉन का चेहरा अपने स्तनों पर दबा दिया..
जॉन शीला के स्तनों की गोलाइयों में ऐसा खो गया की फ्रांस भी भूल गया.. दोनों स्तनों के बीच शीला ने ताकत से जॉन को दबोचे रखा था.. सांस लेने के लिए भी तड़पने लगा जॉन.. उसका लंड शीला के जिस्म की गर्मी के कारण अप-डाउन हो रहा था.. जैसे पानी से बाहर निकाली मछली फुदक रही हो.. शीला ने उसके फुदकते लंड को अपनी मुठ्ठी में पकड़ लिया और लंड की त्वचा को पीछे सरकाया.. उसका लाल गुलाबी सुपाड़ा बाहर दिखाई देने लगा.. शीला उस सुपाड़े को अपनी जांघों पर रगड़ने लगी.. जॉन लगातार शीला की निप्पलों को चूस रहा था.. इतनी मस्ती से चूस रहा था जैसे उनमें से दूध निकल रहा हो.. उसके लंड की सख्ती ये बता रही थी की उसे शीला की हर हरकत बेहद अच्छी लग रही थी.. शीला जो कुछ भी कर रही थी वह उसके अंदाजे और कल्पना के बाहर था..
अब शीला की चूत में जबरदस्त खुजली होने लगी.. उसकी सहनशक्ति जवाब देने लगी.. दोनों इतने उत्तेजित होकर एक दूसरे पर टूट पड़े थे जैसे खा जाना चाहते हो.. जॉन से कई ज्यादा आक्रामक शीला थी.. एक दीवार की आड़ में खड़े दोनों पूरे खुमार पर थे.. दीवार का सहारा लेकर शीला खड़ी हो गई और जॉन का चेहरा अपने जिस्म पर दबाते हुए बोली
शीला: "Ohh John dear..please suck my choot..I can't bear yaar" "चूत" शब्द का अर्थ तो जॉन नही समझ पाया पर उसे इतना पता चल गया की वह क्या कहना चाहती थी.. वह फिरंगी तुरंत अपने घुटनों के बल बैठ गया और शीला की छोटी सी चड्डी जैसी शॉर्ट्स को नीचे उतारकर उसकी चूत पर अपनी जीभ फेरने लगा.. चूत के दोनों होंठों को अपने होंठों के बीच दबाकर चूसने लगा..
शीला ने अपना दायाँ पैर ऊपर किया और जॉन के कंधे पर रख दिया.. जॉन के बालों को पकड़कर उसके चेहरे को अपनी चूत पर रौंद दिया.. दोनों एक दूसरे को आनंद देने में व्यस्त थे.. तभी संजय और चार्ली वहाँ से गुजरे.. शीला और जॉन को देखकर वह दोनों तुरंत उनके पास आ खड़े हुए..
जॉन की चुटकी लेते हुए चार्ली ने कहा "Hey John..what are you doing?" वह हंसने लगी
अपने स्तनों को खुद ही मसल रही शीला के पास जाकर संजय ने उसके एक स्तन को अपने कब्जे में ले लिया..
"मम्मी जी, आप तो सड़क पे ही शुरू हो गई!! क्या बात है.. अंग्रेज पसंद आ गया आपको.. " शीला संजय को बालों से खींचकर अपने करीब लाई और चूमने लगी.. शीला के खरबूजों जैसे स्तनों के बड़े आकार को देखकर चार्ली की आँखें फटी की फटी रह गई.. "Madam, you have got huge melons" शीला के दूसरे स्तनों पर हाथ फेरते हुए उसने कहा.. शीला की हवस गजब की थी.. उसकी दो जांघों के बीच जॉन चुसकियाँ लेते हुए चूत चाट रहा था.. शीला के भोसड़े से कामरस का अविरत प्रवाह बह रहा था.. चाट चाट कर थक गया था जॉन.. लेकिन शीला की चूत सूखने का नाम ही नही ले रही थी..
आखिर थककर जॉन ने "प्रोजेक्ट चूत सकिंग" अधूरा छोड़ दिया और खड़ा हो गया..
चार्ली को एक प्यारी किस देते हुए वह बोला "Honey, she is a real bitch..very hot lady..Let's go to room.. I can't bear anymore.. Sanjay, do you want to join us? Let's enjoy four-some! Charlie, I am damn sure you will have a great time with Shila too.. just try her once baby.. she is amazing!!"
Yeh hoti hai sexy aurat dimag se bhi tezzघड़ी में तीन बज रहे थे.. थकान के उतरते ही वह तीनों फिर से एक दूसरे को छेड़ने लगे.. शीला सिगरेट के कश लगाते हुए धुएं को जीवा और रघु के मुंह पर छोड़ रही थी... सिगरेट की राख को जीवा के लंड पर गिराते हुए उसने कहा "मुझे अब मेरी चुत और गांड में एक साथ लंड डलवाना है.. चलो आ जाओ दोनों.. और लग जाओ काम पर.. अब ज्यादा समय नही है हमारे पास.. जल्दी करो"
पड़ोस में रहती अनु मौसी... रात के इस समय.. शीला के घर की दीवार पर कान रखकर.. सारी बातें सुन रही थी..
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शीला के गले से हल्की सी चीख निकल गई.. "आह्हहहह... !!" पर रघु ने जरा सा भी दयाभाव नही दिखाया.. और एक जोरदार धक्के के साथ अपना पूरा लंड शीला की गांड में घुसा दिया.. शीला की सेन्डविच बन गई.. और वह तीनों बड़ी ही मस्ती से चोदने लगे.. शीला के मुंह से सिसकियाँ निकल रही थी... और अपने दोनों सुराखों में चुदवाते वक्त उसका सारा ध्यान घड़ी के काँटों पर ही था..
दो दो विकराल लंड के भीषण धक्के खा खा कर शीला की गांड और भोस दोनों ही थक चुके थे.. शीला पसीने से तरबतर हो गई थी.. फिर भी उछल उछल कर चुदवा रही थी.. उसकी उछलने की गति बढ़ने के साथ ही जीवा समझ गया की शीला झड़ने की कगार पर थी.. इसलिए.. जिस तरह धोनी ने २०११ की वर्ल्डकप फाइनल की मेच में सिक्सर लगाई थी... वैसे ही जीवा ने अपने लंड से एक जोरदार शॉट लगाया..
शीला को कमर से कसकर पकड़कर जीवा ने अपने ताकतवर हाथों से शीला को हवा में उठा लिया.. लगभग एक फुट ऊपर.. और वैसे ही उसे हवा में पकड़े रख.. नीचे से जबरदस्त धक्का लगाया शीला की भोसड़े में.. "ओह.. ह.. ह.. ह.. ले मेरी शीला रानी.. आहहहहहह..!!" कहते हुए जीवा ने पिचकारी मार दी.. शीला की चुत में गरम गरम वीर्य गिरते ही वह ठंडी होने लगी.. शीला ने अपनी गांड की मांसपेशियों को बेहद कस लिया और उसी के साथ रघु का लंड भी उसकी गांड के अंदर बर्बाद होते हुए झड़ गया...
तीनों ऐसे हांफ रहे थे जैसे मेरेथॉन दौड़कर आयें हों.. शीला की गांड और चुत दोनों में से वीर्य टपक रहा था.. गांड में अभी भी दर्द हो रहा था फिर भी शीला बहुत खुश थी.. आखिरकार उसका दो मर्दों से चुदने का सपना सच हो गया था..
चार बजने में सिर्फ पाँच मिनट की देरी थी.. और तभी शीला के घर की डोरबेल बजी..
"इसकी माँ का.. रसिक ही होगा, जीवा.. अब क्या करेंगे?" शीला डर गई.. पूरे घर की हालत उसके भोसड़े जैसी ही थी.. सब तहस नहस हो रखा था... अब क्या होगा?
शीला ने तुरंत रघु और जीवा को कहा " तुम दोनों किचन में छुप जाओ.. में रसिक को लेकर बेडरूम में जाऊँगी तब तुम लोग धीरे से निकल जाना.. और हाँ.. बाइक को बिना चालू किए थोड़े दूर ले जाना.. और फिर स्टार्ट करना.. नही तो उस रंडवे को पता चल जाएगा.. जाओ जल्दी से.. "
शीला ने बेडरूम से जीवा और रघु को भगाया.. वह दोनों अपने कपड़े काँख में दबाकर किचन की ओर भागे.. उन दोनों के मुरझाए लटकते लंड देखकर शीला की हंसी निकल गई..
कपड़े पहनने का समय नही था.. और वैसे भी रसिक के अंदर आते ही फिर से उतारने थे.. ऐसा सोचकर शीला ने बिना ब्लाउस और घाघरे के.. अपने नंगे जिस्म पर सिर्फ साड़ी लपेट ली.. और अपने बबलों को साड़ी के नीचे दबाते हुए दरवाजा खोला...
"अरे, कविता तू... ??" शीला बोखला गई.. कपड़ों को ठीक करते हुए उसने पूछा
कविता पड़ोस में रहते अनु मौसी के बेटे पीयूष की पत्नी थी.. ४ महीनों पहले ही उनकी शादी हुई थी। अच्छा हुआ की बहुत अंधेरा था.. नही तो शीला को इस तरह देखकर, पता नही कविता क्या सोचती!!
"शीला भाभी, मेरे मामाजी ससुर को हार्ट-अटेक आया है.. और पीयूष मेरे सास ससुर के साथ उनके शहर गए है.. मम्मीजी ने मुझ से कहा था की अगर अकेले में डर लगे तो आपके घर आकर सो जाऊँ.. २ घंटों की ही बात है.. आपको अगर एतराज न हो तो क्या में आपके घर सो जाऊँ??" निर्दोष भाव से कविता ने इजाजत मांगी
शीला मन ही मन कांप उठी.. आज तो इज्जत का जनाज़ा निकल जाएगा.. माँ चुद जाने वाली थी..
"हाँ हाँ.. क्यों नही.. मैं हूँ ना तेरे साथ.. चिंता मत कर!!" शीला का शैतानी दिमाग काम पर लग गया... अब इस समस्या का कोई हल तो निकालना ही पड़ेगा.. वह सोचने लगी... क्या करूँ!!!!
"कविता, एक काम करते है.. " शीला ने अपने पत्ते बिछाना शुरू किया
"हाँ कहिए ना भाभी!!"
"मेरा बिस्तर हम दोनों के लिए छोटा पड़ेगा.. एक साथ सो नही पाएंगे... ऐसा करते है की तेरे ही घर हम दोनों सो जाते है"
"मैं आपको वही कहने वाली थी पर संकोच हो रहा था की कैसे कहूँ... वैसे भी मुझे अपने बिस्तर के बगैर नींद नही आती.. " कविता ने कहा
"तू अपने घर जा... मैं बाथरूम होकर अभी आती हूँ.. "
"जल्दी आना भाभी... मुझे अकेले में बहोत डर लगता है.. " कविता बोली
"हाँ.. हाँ.. तू जा.. मैं तुरंत पहुँचती हूँ.. "
बच गए!! शीला ने राहत की सांस ली.. वह तुरंत किचन में गई.. जीव और रघु को कहा "जल्दी निकलो तुम दोनों... रसिक नही था.. मेरी पड़ोसन थी.. "
"हाँ... वो तो हमने आप दोनों की बातें सुनी.. हम जा रहे है.. फिर किसी दिन.. बुलाते रहना.. भूल मत जाना" जीवा ने कहा
"कैसे भूल सकती हूँ!! जरूर बुलाऊँगी.. आप दोनों निकलों.. और वह देसी दारू की थैलियाँ लेते जाना.."
रघु वो थैलियाँ लेने अंदर गया तब जीवा ने शीला को बाहों में भरकर चूम लिया.. उसके आगोश में शीला दबकर रह गई.. उसने पतलून के ऊपर से जीवा लंड पकड़ लिया... "गजब का लंड है रे तेरा जीवा.. " जीवा ने शीला के साड़ी में लिपटे स्तनों को मसल दिया और उसके गाल पर हल्के से काटते हुए अपने प्रेम से उसे सराबोर कर दिया.. वापिस आए रघु भी शीला को पीछे से लिपट पड़ा.. शीला ने उसके लंड को भी प्यार से सहलाया..
दोनों गए.. शीला की धड़कनें शांत हो गई.. अब दूसरी समस्या यह थी की रसिक का क्या करें!!
तभी रसिक की साइकिल की घंटी बजने की आवाज आई.. हाथ के इशारे से उसे घर के अंदर आने के लिए कहते हुए शीला अंदर आई.. जैसे ही रसिक घर के अंदर आया.. शीला उससे लिपट पड़ी.. और अपने स्तनों को रसिक की छाती पर रगड़ने लगी..
रसिक का लंड तुरंत ही सख्त हो गया. शीला ने घुटनों पर बैठकर उसका लंड पतलून से निकाला और चूसने लग गई.. काले डंडे जैसा उसका पूरा लंड शीला की लार से लसलसित होकर चमकने लगा..
"रसिक, मुझे आज बहोत ही जल्दी है.. बगल वाले अनु मौसी के घर उसके बेटे की बीवी अकेली है.. उन्हे अचानक शहर के बाहर जाना पड़ा.. तू फटाफट मुझे चोदे दे.. और निकल.. फिर में घर बंद कर भागूँ.. वहाँ कविता मेरा इंतज़ार कर रही है"
"ठीक है भाभी, पर बिस्तर पर चलते है ना!! यहाँ कोई देख लेगा!!" रसिक ने कहा
रसिक का लंड मुठ्ठी में भरकर आगे पीछे करते हुए शीला ने कहा "उतना टाइम नही है रसिक.. जल्दी कर.. पेल दे फटाफट" कहते हुए शीला ने दीवार पर अपने हाथ टेक दिए और साड़ी को ऊपर उठा लिया.. रसिक उसके पीछे आ गया और शीला की जांघों को थोड़ा सा चौड़ा कर अपने लंड को उसकी चुत में घुसाकर धक्के लगाने लगा.. उसे मज़ा तो नही आ रहा था पर क्या करता!!
"देख रसिक.. जल्दी कर.. और हाँ.. तुरंत घर मत पहुँच जाना वरना रूखी को शक हो जाएगा" शीला का गणित रसिक समझ नही पाया और वह बिना समझे हाँ हाँ करता जा रहा था.. उसके घर पर उसकी बीवी जीवा और रघु से चुदवा रही होगी.. और यहाँ वह शीला की हाँ में हाँ मिलाते चोदे जा रहा था
अपने कूल्हों को ऊपर उठाते हुए शीला ने कहा "अरे जल्दी कर न रसिक!! कितनी देर लगा रहा है तू? क्या टेस्ट मेच की तरह खेल रहा है!! देख आज तो में फंसी हुई हूँ.. इसलिए जल्दी करना पड़ रहा है.. पर कल तू जल्दी आ जाना.. फिर इत्मीनान से मजे करेंगे.. ठीक है.. कल चार बजे आ जाना"
"ठीक है भाभी.. " शीला की चुत में लंड अंदर बाहर करते हुए रसिक ने कहा
रसिक ने धक्के लगाने की गति बढ़ा दी.. "वाहह... आह्हह.. मज़ा आ रहा है.. घुसा अंदर तक.. ईशश.. " शीला की सिसकियाँ सुनकर रसिक झड़ गया.. शीला ने तुरंत उसका लंड अपनी चुत से बाहर निकाला.. और रसिक के सामने ही ब्लाउस और घाघरा पहनने लगी..
"भाभी आपने कपड़े नही पहने थे?" रसिक के मन में सवाल उठा
"कितनी गर्मी है.. और वैसे भी तू आने वाला था इसलिए कपड़े उतारकर तैयार बैठी थी.. तू बेकार की बातें बंद कर और निकल यहाँ से!!" शीला ने अपने जूठ को छिपाते हुए कहा
रसिक के निकलते ही शीला ने अपने घर को ताला लगाया.. और अनु मौसी के घर की तरफ दौड़ते हुए गई..
पर तब तक बहोत देर हो गई थी.. कविता ने यह सारा द्रश्य देख लिया था.. !! भाभी अब तक क्यों नही आए!! देखने के लिए वह शीला के घर के तरफ आई.. और शीला को खुले दरवाजे के पास रसिक से चुदवाते हुए देख लिया.. और अपने घर में वापिस आकर अचरज से सोचने लगी.. उसने जो देखा था वह अकल्पनीय था.. शीला भाभी?? एक दूधवाले के साथ? बाप रे.. विश्वास ही नही होता..."
Garama garam maal"पिंटू यहाँ पहुंचे तब मुझे फोन कर देना.. और मैं जब कहूँ तभी तू आना.. ठीक है!!"
"ओके भाभी.. पर भाभी.. मुझे डर लग रहा है.. ऐसे ससुराल में अपने प्रेमी को मिलने बुलाना.. कितना रिस्की है!!" कविता थोड़ी सी सहमी हुई थी
"अरे तू फिकर मत कर.. मजे करने हो.. प्रेमी से चुदवाना हो तो थोड़ा जोखिम तो उठाना ही पड़ेगा.." कहते हुए शीला अपने घर की ओर निकल गई
पूरा घर अस्त-व्यस्त पड़ा था.. अभी भी देसी दारू की बदबू आ रही थी.. शीला ने तुरंत ही अगरबत्ती जलाई.. जन्नत-ए-फ़िरदौस का इत्र छिड़का.. पूरा कमरा सुगंधित हो गया..
किचन में जीवा और रघु के कारनामों की निशानी हर जगह दिख रही थी.. शीला ने सफाई करके सब ठीक-ठाक कर दिया.. मेहमानों के लिए नाश्ता भी तैयार कर दिया.. और सब कुछ फिर से चेक कर लिया.. कल रात की कोई निशानी कहीं छूट न गई हो!!
अब तक कविता का फोन क्यों नही आया? शीला सोच रही थी.. काफी देर लगा दी पिंटू ने आने में.. पता नही वो चूतिया कहाँ गांड मरवा रहा होगा? ऐसा मौका जब हाथ लगने वाला हो तब कौन बेवकूफ देर करता है!! लोग कब समय का महत्व समझेंगे!! शीला मन ही मन पिंटू को गालियां दे रही थी..
तभी फोन बजा.. कविता का ही फोन था..
"भाभी, पिंटू आ गया.. में उसे सीधे आपके घर ही भेज रही हूँ" कविता की आवाज में घबराहट थी
"तू चिंता मत कर.. भेज दे उसे.. मैं हूँ ना.. कुछ नही होगा" शीला ने ढाढ़स बांधते हुए कविता से कहा
थोड़ी ही देर में.. एक अठारह उन्नीस साल का.. हल्की हल्की मुछ वाला जवान लड़का, शीला के घर की डोरबेल बजाकर खड़ा रहा.. शीला ने अपने बड़े बोबलों को साड़ी से ठीक से ढंका और दरवाजा खोला.. उसे डर था की कहीं पिंटू ने उसकी शॉपिंग मॉल जैसी उन्नत चूचियाँ देख ली तो कविता के छोटे स्तन उसे रास्ते की रेहड़ी जैसे लगेंगे..
"आ जाओ.. तुम ही हो ना पिंटू?" जानते हुए भी अनजान बन रही थी शीला
"जी हाँ.. मैं ही हूँ पिंटू" शरमाते हुए उस लड़के ने कहा.. वह अंदर आकर सोफ़े के कोने पर बैठ गया
शीला उसके लिए पानी लेकर आई.. थोड़ा सा पानी पीकर उसने ग्लास वापिस दिया.. शरारती शीला ने ग्लास लेटे वक्त पिंटू का हाथ पकड़कर दबा दिया..
"इतना शरमा क्यों रहा है? जरा आराम से बैठ.. मैंने बिस्तर भी सजा दिया है.. तुम दोनों के लिए" अनुभवी रंडी की अदा से साड़ी के पल्लू को छाती में दबाते हुए शीला ने कहा.. सफेद रंग के ब्लाउस के अंदर उसने ब्रा नही पहनी थी.. अरवल्ली की पर्वत शृंखला के दो पहाड़ों जैसे स्तनों को पिंटू हतप्रभ होकर देखता ही रह गया.. उसका गला सूखने लगा
"तू आराम से बैठ.. अपना ही घर समझ इसे.. " कातिल मुस्कान के साथ, भारी कूल्हे मटकाती हुई शीला किचन की ओर चली गई। उसके नितंबों की लचक देखकर पिंटू के होश उड़ गए
किचन में ग्लास रखकर शीला वापिस आई और सामने रखी कुर्सी पर बैठ गई.. उसने अपने हाथों को इस तरह जोड़ रखा था की उसके दोनों स्तन उभरकर बाहर झांक रहे थे..
"आज से पहले तूने कभी ये किया है पिंटू?" शीला ने पूछा
गर्दन घुमाकर पिंटू ने "नही" का इशारा किया
तभी कविता आ गई.. शीला को बात अधूरी छोड़नी पड़ी यह उसे अच्छा नही लगा.. कविता अगर थोड़ी देर से आती तो वह इस शर्मीले लड़के के साथ कुछ गरमागरम बातें कर पाती
कविता और पिंटू को एकांत देने के हेतु से शीला घर के बाहर निकल गई। दूध या सब्जी कुछ लेना तो था नही.. सिर्फ कुछ लेने के बहाने वह घर से बाहर निकल गई.. अब क्या करूँ?? कहाँ जाऊँ? कैसे टाइम पास करूँ?? शीला सोच रही थी... तभी उसके करीब से कोई गुजरा और शीला की कमर पर चिमटी काटते हुए कहा
"किसके खयालों में यहाँ रास्ते के बीच खड़ी हुई है!! मदन भैया के बारे में ज्यादा मत सोच.. वो तो विदेश में किसी गोरी के साथ मजे कर रहे होंगे"
शीला ने चोंककर पीछे देखा.. वह चेतना थी.. उसकी पुरानी पड़ोसन
"अरे चेतना तू ?? कितने साल हो गए तुझे देखे हुए.. कितनी मोटी हो गई है तू.. लगता है तेरा पति बड़ा अच्छे से रोज इंजेक्शन दे रहा है"
चेतन ने हँसते हुए कहा "हाँ.. इंजेक्शन का ही कमाल है ... पर तू बिना इंजेक्शन की इतनी खुश कैसे लग रही है!! कहीं किसी पराये इंजेक्शन का सहारा तो नही ले रही हो ना!! कमीनी हरामखोर.. मैं सालों से जानती हूँ तुझे.. तू इतने लंबे समय तक बिना कुछ किए रह ही नही सकती.. सच सच बता मुझे"
चेतना और शीला पुरानी सहेलियाँ थी.. दोनों बहुत अच्छी मित्रता थी.. उन दोनों के पति भी दोस्त थे.. शीला और चेतन एक दूसरे के साथ बीपी की सी.डी. की लेन-देन भी चलती रहती थी.. और जब दोनों के पति ऑफिस जाते थे तब दोनों एक दूसरे के साथ खूब मस्ती भी किया करती थी। कुछ समय बाद चेतना और उसका पति, नए घर में शिफ्ट हो गए.. फिर मिलना बहुत काम हो गया.. आज काफी सालों के बाद दोनों मिलकर खुश हो गए
चेतना: "अब मुझे यहीं बीच रास्ते खड़ा ही रखेगी या घर ले जाकर चाय भी पिलाएगी!!"
शीला अब फंस गई.. घर में तो कविता और पिंटू.. ना जाने क्या कर रहे होंगे.. पर शीला और चेतना के संबंध काफी घनिष्ठ थे.. शीला उसे कोने में ले गई और कहा
"यार चेतना.. अभी मेरे घर नहीं जा सकते"
चेतना: "क्यों? कीसे घुसाकर रखा है घर पर?"
शीला ने हँसते हँसते कहा "घुसाकर तो रखा है.. पर मेरे लिए नही.. मेरे पड़ोस में एक नवविवाहित लड़की रहती है.. कविता.. उसका प्रेमी उसे मिलने आया है.. वो दोनों बैठकर बातें कर रहे है मेरे घर पर"
चेतना: "साली बहनचोद.. तू अब दल्ली भी बन गई?"
शीला: "नही यार.. अब हालात ही ऐसे थे की मुझे मदद करनी पड़ी"
चेतना: "हम्म.. तब तो जरूर तेरा कोई राज जान लिया होगा उस लड़की ने.. सच सच बता !!"
शीला: "तू थोड़ा इत्मीनान रख.. सब बताती हूँ तुझे"
शीला ने शुरुआत से लेकर अंत तक.. रूखी, जीवा, रघु औ रसिक की सारी कहानी चेतना को विस्तारपूर्वक बताई..
बातें करते करते अचानक शीला की नजर उनकी गली के नाके पर गई.. और उसके पैरों तले से जमीन खिसक गई
"बाप रे.. ये लोग अभी कहाँ से टपक पड़े??!!" सामने से कविता का पति पीयूष और उसके सास ससुर आते दिखाई दिए..
"मुझे अभी के अभी उस कविता को खबर करनी पड़ेगी..वरना लोड़े लग जाएंगे.. चेतना, तू घर चल.. फिर आराम से बाकी की बातें करते है.. "
दोनों सहेलियाँ दौड़कर शीला के घर पहुंची.. अपनी चाबी से लेच-लोक खोलकर शीला ने दरवाजा खोल दिया..
इन दोनों को देखकर, कविता और पीयूष चोंक पड़े.. कविता नंग-धड़ंग पिंटू की गोद में बैठकर ऊपर नीचे करते हुए सोफ़े पर ही चुदवा रही थी। पिंटू की पतलून घुटनों तक उतरी हुई थी.. और कविता के ब्लाउस से उसके सफेद कबूतर जैसे गोरे स्तन बाहर निकले हुए थे।
कविता को शीला भाभी के सामने नग्न होने में कोई शर्म नही थी.. पर पिंटू की हालत खराब हो गई.. वह बिचारा दो अनजान औरतों के सामने नंगे चुदाई करते हुए देख लिया गया था। एक ही पल में उसका लंड मुरझाकर पिचक गया..
शीला ने कविता की तरफ देखकर कहा "तेरे सास ससुर और पीयूष घर पहुँच रहे है.. तू भाग यहाँ से.. जल्दी घर जा"
"अरे बाप रे!! इतनी देर में वापिस भी आ गए!!" कविता ने अपने कपड़े ठीक किए और पीछे के रास्ते बाहर भागी.. पिंटू उल्टा घूम गया और अपनी पतलून पहनने लगा..
शर्मसार होते हुए पिंटू ने कहा "सॉरी भाभी.. आप लोग ऐसे अचानक आ जाएंगे इसका मुझे अंदाजा नही था"
"हम नही.. वो लोग अचानक आ टपके.. इसमें कोई क्या कर सकता है?? कोई बात नही.. तू आराम से बैठ और ये बता.. मज़ा आया की नही?"
"अरे भाभी.. क्या कहूँ आप से!! मेरे लिए तो ये पहली बार था.. और कविता मुझे कुछ सिखाती ही नहीं की कैसे करना है..!! मैं कुंवारा हूँ.. पर वो तो शादीशुदा है ना!! उसे तो मुझे सिखाना चाहिए ना!!"
शीला: "मतलब? तुम लोगों ने ज्यादा कुछ नही किया??"
चेतना: "शीला, बेचारा नादान है.. अभी तो.. उसका छोटा सा है.. नून्नी जैसा.." अपनी उंगली से पिंटू के लंड की साइज़ का इशारा करते हुए चेतन ने कहा
शीला: "तूने देख भी लिया इतनी देर में? मैं ही देख नही पाई.. पिंटू.. तू चिंता मत कर.. मैं तुझे सब सीखा दूँगी.. बता.. सीखेगा मुझसे??"
चेतना: "मैं भी मदद करूंगी सिखाने में.. "
चेतना के स्तन देखकर पिंटू ललचा गया..
शीला: "देख पिंटू.. कविता तुझसे चुदवाने आई.. तो क्या वह अपने पति को बता कर आई थी क्या!! नहीं ना!! बस वैसे ही तू भी कविता को मत बताना.. की तू हमसे सिख रहा है"
पिंटू के चेहरे पर अब भी झिझक थी..
चेतना: "अबे चूतिये.. इतनी दूर से आया है.. और बिना चोदे वापिस लौट जाएगा?? ना तुझे चोदना आता है.. और ना ही तेरी छोटी सी पूपली में कोई दम.. बेटा.. इतनी छोटी नून्नी से किसी लड़की को कैसे खुश कर पाएगा!!"
पिंटू शर्म से लाल लाल हो गया.. उस बेचारे नादान लड़के को ऐसी अभद्र भाषा सुनकर बुरा लग गया.. आँख से आँसू टपकने लगे..
शीला: "चेतना बेवकूफ.. तुझे बात करने का तरीका नही आता क्या!! पिंटू का लंड छोटा है तो क्या हुआ??"
शीला पिंटू के पास आकर बैठ गई.. उसकी जांघ पर हाथ फेरते हुए उसने पिंटू का हाथ अपने गुंबज जैसे स्तनों पर रख दिया और बोली
"चिंता मत कर पिंटू.. चेतना तो पागल है.. देख.. छोटी उम्र में सब के अंग छोटे छोटे ही होते है.. तू कविता के स्तन के मुकाबले मेरे स्तन देख.. कितना फरक है!! ये तो होता ही है.. इसमे चिंता करने लायक कोई बात नही है"
सुनकर पिंटू को थोड़ा अच्छा लगा.. उसने शीला की छातियों से अपना हाथ हटा लिया..
"भाभी, मैं आपसे ये सब सीखूँगा तो कविता बुरा मान जाएगी.. "
पिंटू की दूसरी तरफ चेतना आकर बैठ गई.. और शीला का अनुकरण करते हुए वह भी पिंटू की दूसरी जांघ को सहलाने लगी.. धीरे से उसने अपने ब्लाउस की एक तरफ की कटोरी खोल दी.. पिंटू बेचारा हक्का बक्का रह गया.. !!
शीला: "अरे पिंटू, तुझे कहाँ कुछ गलत करना है.. तुझे तो बस सीखना है.. है ना!! और तू यहाँ कविता की लेने आया है.. तो क्या ये कविता के पति को पसंद आएगा!! नहीं ना!!"
पिंटू: "पर भाभी, कविता के पति को ये कहाँ पता चलने वाला है??"
शीला: "वही तो कह रही हूँ.. तू हम दोनों के पास ट्यूशन ले रहा है.. ये बात कविता को कहाँ पता चलने वाली है!! देख बेटा.. हर कोई ऐसे ही सीखता है.. अगर तुझे भी सीखना हो तो बताया.. हमारी कोई जबरदस्ती नहीं है तुझ पर.."
शीला और पिंटू के बीच इस संवाद के दौरान चेतना ने अपने ब्लाउस के दो हुक खोल दिए.. और अपने स्तनों को बाहर निकाल दिया.. पिंटू तो चेतना के बड़ी निप्पलों वाले स्तन देखकर उत्तेजित हो गया.. और उसके अंदर का किशोर विद्यार्थी जाग उठा..उसकी छोटी सी नुन्नी में जान आने लगी।
चेतना ने पिंटू के लंड पर हाथ सहलाते हुए शीला से कहा "ये तो मस्त हो गया शीला.. देख तो जरा.. पतला है तो क्या हुआ!!"
शीला ने भी पिंटू का लंड हाथ में लेकर दबाकर देखा
"आह आहह भाभी.." कहते हुए पिंटू चेतना के नग्न स्तनों को पकड़कर मसलने लगा.. शीला ने पिंटू की आधी उतरी पतलून को पूरी उतार दी.. और पिंटू का लंड पकड़कर हिलाने लगी.. पिंटू सिसकियाँ भरता गया और चेतना के स्तनों को दबाता गया.. शीला ने भी अपने ब्लाउस के बटन खोल दिए और अपनी गुलाबी निप्पल को पिंटू के मुंह में देते हुए कहा
"थोड़ा चूस ले बेटा.. तो चोदने की ताकत आ जाएगी"
पिंटू छोटे बच्चे की तरह शीला की निप्पल चूसने लगा.. "बच बच" की आवाज करते हुए कभी वह शीला की निप्पल चूसता तो कभी चेतना की.. चेतना ने अपनी निप्पल छुड़वाई.. और उसका लंड चूसना शुरू कर दिया
शीला: "अबे चूतिये.. तुझे चोदना तो नहीं आता.. लेकिन चूसना भी नहीं आता क्या!! चूसते हुए ऐसे काट रहा है जैसे पपीता खा रहा हो.. ठीक से चूस"
पिंटू बेचारा.. नादान था.. ज्यादा देर अखाड़े में इन दोनों पहलवानों के सामने टीक पाने की उसकी हैसियत नहीं थी.. चेतना के मुंह में ही उसका लंड वीर्य-स्त्राव कर बैठा.. चेतना बड़ी मस्ती से.. अनुभवी रांड की तरह.. पिंटू के लंड को चाट चाट कर साफ करने लगी। पिंटू तो शीला के मदमस्त खरबूजे जैसे स्तनों में खो सा गया था.. कविता के छोटे छोटे कबूतर जैसे स्तनों के मुकाबले शीला के उभारों ने उसका दिल जीत लिया था।
चेतना: "छोकरा नादान है.. पर तैयार हो जाएगा.. थोड़ा सा ट्रेन करना पड़ेगा"
शीला: "कितना माल निकला उसके लंड से?"
चेतना: "एक चम्मच जितना.. पर मेरे पति के वीर्य के मुकाबले स्वाद में बड़ा ही रसीला था" अपनी उँगलियाँ चाटते हुए चेतना ने कहा
शीला: "हम्म.. बच्चा बोर्नवीटा पीता होगा तभी उसका माल इतना स्वादिष्ट है!!" कहते हुए शीला हंस दी.. "लंड पतला जरूर है.. पर है मजबूत.. अंबुजा सीमेंट जैसा.. देख देख.. झड़ने के बाद भी पूरी तरह से नरम भी नहीं हुआ"
चेतन ने झुककर पिंटू के अर्ध जागृत लंड की पप्पी ले ली..
"अरे पिंटू, तूने कविता की चुत चाटी है कभी?" अपना घाघरा उतारते हुए शीला ने पिंटू से पूछा.. शीला की गोरी गोरी मदमस्त जांघों को देखकर पिंटू का लंड उछलने लगा..
पिंटू: "एकाध बार किस किया है.. पर अंदर से चाटकर नहीं देखा कभी"
शीला: "देख पिंटू, अगर औरत को खुश करना है तो सब से पहला पाठ यह सिख ले.. चुत को चौड़ी करके अंदर तक जीभ डालते हुए चाटना सीखना पड़ेगा.. "
पिंटू बड़े ही अहोभाव से इन दोनों मादरजात नंगी स्त्रीओं को देखता रहा.. जैसे स्कूल के मैडम से अभ्यास की बातें सिख रहा हो.. शीला और चेतना पिंटू को प्रेम, कामवासना, चुदाई, मुख मैथुन वगैरह के पाठ पढ़ाने लगे.. तीनों एक दूसरे के सामने पूरी तरह नंगी अवस्था में थे.. उत्तेजित होकर शीला और चेतना, पिंटू के जिस्म को जगह जगह पर चूमते हुए उसके शरीर से खेलने लगे। पिंटू का लंड अब सख्त होकर झूलने लगा..
शीला: "देख ले ठीक से पिंटू.. इस तरह चुत को चाटते है" कहते हुए शीला ने चेतना को लिटा दिया और उसकी चुत पर अपनी जीभ फेरने लगी
चेतना: "ओह्ह शीला.. बहोत मज़ा आ रहा है यार.. "
चेतना की निप्पल उत्तेजना के मारे सख्त कंकर जैसी हो गई थी। पिंटू एकटक शीला और चेतना की इन हरकतों को देख रहा था।
चेतना: "ठीक से देख ले पिंटू.. आह्ह.. बिल्कुल इसी तरह कविता की पुच्ची को चाटना.. नहीं तो तेरी कविता किसी और से सेटिंग करके अपनी चटवा लेगी"
काफी देर तक शीला ने चेतना के भोसड़े के हर हिस्से को चाटा.. अब उसने एक साथ चार उँगलियाँ अंदर घुसेड़ दी और चाटती रही
चेतना ने थोड़े गुस्से से कहा "बहनचोद.. क्या देख रहा है!! कम से कम मेरी चूचियाँ तो मसल दे.. ऐसे ही निठल्ले की तरह बैठा रहेगा तो कुछ नहीं होगा तेरा.. !!"
सुनते ही पिंटू ने तुरंत चेतना के स्तनों को पकड़कर दबाना शुरू कर दिया.. शीला की चुत चटाई से आनंदित होते हुए.. अपने चूतड़ों को उछाल उछाल कर चेतना झड गई.. पिंटू सब कुछ बड़े ही ध्यान से देख रहा था।
चेतना की चुत से मुंह हटाते हुए शीला ने कहा "देखा पिंटू!! लंड छोटा हो या बड़ा.. पतला हो या मोटा.. कुछ फरक नहीं पड़ता.. अगर अच्छे से चुत चाटने की कला सिख ली..तो अपनी पत्नी या गर्लफ्रेंड को खुश रख पाएगा"
पिंटू: "पर भाभी.. लड़की को असली मज़ा तो तब ही आता है ना अगर लंड लंबा और मोटा हो!!" बड़ी ही निर्दोषता से पिंटू ने पूछा
चेतना: "बात तो तेरी सही है बेटा.. मुझे यह बता.. की तुझे ५ रुपये वाली कुल्फी पसंद है या १० रुपये वाली?"
पिंटू: "जाहीर सी बात है.. १० रुपये वाली"
शीला: "बिल्कुल वैसे ही.. हम औरतों को भी १० रुपये वाली कुल्फी ज्यादा पसंद है.. पर उसका यह मतलब बिल्कुल भी नहीं है की हमें ५ रुपये वाली कुल्फी से मज़ा नहीं आता.. कुल्फी छोटी हो तो उसे धीरे धीरे चूसकर मज़ा लेना भी आता है.. और कई बिनअनुभवी औरतों को १० रुपये वाली कुल्फी भी ठीक से खाना नहीं आता.. पिघलाकर नीचे गिरा देती है"
पिंटू: "पर भाभी.. अगर मुझे अपना लंड मोटा और तगड़ा बनाना हो तो क्या करू?"
इतना समझाने के बावजूद पिंटू घूम फिर कर वहीं आ गया.. शीला ने अपना सिर पीट लिया..
शीला: "अबे लोडुचंद.. जैसे जैसे तू बड़ा होगा वैसे वैसे तेरा वो भी बड़ा हो जाएगा.. चिंता मत कर.. देख.. अब जिस तरह मैंने चेतना की चुत चाटी थी वैसे ही तू मेरी चाटकर दिखा.. देखूँ तो सही तूने कितना सिख लिया.. समज ले की यह तेरी परीक्षा है.. अगर ठीक से नहीं चाटी तो मैं कविता को सबकुछ बताया दूँगी"
कविता का नाम सुनते ही पिंटू भड़क गया.. और शीला की जांघें चौड़ी करके बीच में बैठ गया.. शीला का फैला हुआ भोसड़ा देखकर पिंटू सोच रहा था.. कहाँ मेरी कविता की मोगरे के फूल जैसी नाजुक चुत.. और कहाँ ये धतूरे के फूल जैसा शीला भाभी का भोसड़ा !!
शीला: "यही सोच रहा है ना की कविता के मुकाबले कितनी बड़ी है मेरी!! जब मैं कविता की उम्र की थी तब मेरी भी कविता की तरह मस्त संकरी सी थी.. पर मेरे पति ने ठोक ठोक कर ऐसे रानीबाई की बावरी जैसा बना दिया.. वो तो कविता की चुत भी उसका पति चोद चोद कर चौड़ी कर ही देगा.. तू चाटना शुरू कर.. जल्दी कर बहनचोद.. इतना गुस्सा आ रहा है की तेरी गांड पर एक लात मारकर तुझे गली के नुक्कड़ पर फेंक दूँ.. " कहते हुए शीला ने अपने गुफा जैसे भोसड़े पर पिंटू को मुंह दबा दिया..
पिंटू भी शीला को खुश करने के इरादे से.. चुत चटाई की नेट-प्रेक्टिस करते हुए.. चब चब चाटने लगा.. शीला के तानों ने अपना काम कर दिया.. पिंटू कोई कसर छोड़ना नहीं चाहता था.. अपनी जीभ को अंदर तक घुसेड़कर उसने शीला के भोसड़े को धन्य कर दिया.. कराहते हुए शीला अपनी गदराई जांघों को आपस में घिसने लगी..
बगल में बैठी चेतना अपने स्तनों को शीला के बबलों से रगड़ने लगी.. और शीला ने उसे खींचकर अपने होंठ चेतना के होंठों पर रखते हुए चूम लिया..
शीला ने अपनी दोनों विशाल जांघों के बीच पिंटू को दबोच लिया.. अपना स्खलन हासिल करने के बाद ही उसने पिंटू को जांघों की मजबूत पकड़ से मुक्त किया.. शीला की पकड़ से छूटते ही पिंटू दूर खड़ा होकर हांफने लगा.. बाप रे!! ये तो औरत है या फांसी का फंदा.. जान निकल जाती अभी.. पिंटू कोने में जाकर बैठ गया..
उसे बैठा हुआ देखकर चेतना उसके पास आई.. और उसे कंधे से पकड़कर खड़ा किया
चेतना: "बेटा.. डरने की जरूरत नहीं है.. देख कितनी मस्त गीली हो गई है शीला की चुत!! जा.. उसके छेद में अपना लंड पेल दे.. और धीरे धीरे अंदर बाहर करना शुरू कर.. और सुन.. पूरा जोर लगाना.. ठीक है.. तुझे बस ऐसा सोचना है की ट्यूशन पहुँचने में देर हो गई है और तू तेज गति से साइकिल के पेडल लगा रहा है.. जा जल्दी कर"