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Adultery शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)

vakharia

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vakharia

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आखिर थककर जॉन ने "प्रोजेक्ट चूत सकिंग" अधूरा छोड़ दिया और खड़ा हो गया..

चार्ली को एक प्यारी किस देते हुए वह बोला "Honey, she is a real bitch..very hot lady..Let's go to room..I can't bear anymore..Sanjay, do you want to join us? Let's enjoy four-some! Charlie, I am damn sure you will have a great time with Shila too..just try her once baby.. she is amazing!!"

चार्ली जबरदस्त उत्तेजित हो गई "Ohh really..!! Hey Sanjay, lets go and join them.."

कार्यक्रम में मध्यांतर की घोषणा होते ही शीला ने अपनी चड्डी ऊपर की उसकी क्लिप बंद कर दी.. फिर वह जॉन का हाथ पकड़कर चलने लगी.. शीला इतनी उतावली होकर चल रही थी जैसे जॉन के लंड को जल्दी से जल्दी अपनी चूत में गटक लेना चाहती हो.. उसका दामाद संजय और चार्ली पीछे पीछे आ रहे थे..

संजय: "Charlie..just look at her huge hips..It is my wish to bang her with John"

"Ohhh...you mean in both the holes? चार्ली ने हँसते हुए कहा

"Yesss...!!" संजय ने जवाब दिया

"I will fuck her ass the whole night, Charlie!!" शीला के कूल्हों पर थप्पड़ लगाते हुए जॉन ने संजय से कहा

शीला को उनकी बातें ज्यादा समझ नही आ रही थी.. और उससे समझने में दिलचस्पी भी नही थी.. बातें करते हुए.. सिगार फूंकते हुए.. चारों लोग, जॉन और चार्ली की होटल पर पहुंचे.. संजय और शीला की होटल से थोड़ी दूरी पर थी इनकी होटल.. चारों कमरे में गए और दरवाजा अंदर से लोक कर लिया.. दरवाजा बंद होते ही सब की वासना के दरवाजे खुल गए.. चार्ली संजय से लिपट गई और संजय ने बिना वक्त गँवाए उसे तुरंत ही नंगा कर दिया.. शीला चार्ली के स्लिम और दाग रहित गोरे जिस्म को देखती ही रही.. बी.पी. में गोरी लड़कियों की जिस तरह की हरकतें उसने देखी थी वह सब उसकी आँखों के आगे तैरने लगी.. ब्लू फिल्मों में लेस्बियन सीन में चूत चटाई के द्रश्य देखकर अक्सर शीला का मन करता था की वह भी किसी गोरी रांड की चूत को चटकारे लेकर चाटे और अपनी भी उससे चटवाएं.. आज आखिर उस सपने को साकार करने का मौका मिलने वाला था.. शीला ने संजय के कान में कुछ कहा..

"अभी नही मम्मी जी, पहले मुझे ईसे मन भर कर चोद लेने दीजिए.. निवाला मुंह तक आ चुका है अब मैं और इंतज़ार करना नही चाहता.. एक बार तसल्ली से चोद लूँ फिर आप जो चाहो कर लेना इसके साथ" संजय ने कहा

हिन्दी में हो रही बातचीत में जॉन और चार्ली को क्या पता चलता ??? लेकिन तब तक चार्ली ने जॉन की चड्डी उतार दी थी.. जॉन की दोनों जांघों के बीच लटक रहे खूबसूरत फिरंगी गोरे लंड को देखकर शीला जैसे होश ही खो बैठी.. उसके लंड को पहली नजर में देखते ही उसे प्यार हो गया.. !! संजय को छोड़कर वह जॉन की तरफ मुड़ी.. वो जॉन के अर्ध-जागृत लंड को पकड़े इससे पहले चार्ली ने उसे पकड़ लिया.. और मुठ्ठी में पकड़कर हिलाने लगी..

जॉन: "Suck it baby...suck it hard like its your dad's cock.." यह सुनते ही चार्ली नीचे झुक गई और जॉन की आँखों में देखते हुए उसका लंड चूसने लगी.. शीला और संजय आश्चर्यचकित होकर इन दोनों को देखते रहे.. चार्ली ने जॉन के हाथ से सिगार लेकर एक लंबा कश लिया.. फिर बिना धुआँ बाहर निकाले वह लंड चूसने लगी.. थोड़ी ही देर में चार्ली के मुंह से अंदर बाहर निकल रहे लंड के साथ साथ धुआँ भी निकलने लगा.. बड़ा ही अनोखा द्रश्य था.. !!

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चार्ली और जॉन की इन कामुक हरकतों को देखकर शीला अपने आपे से बाहर हो रही थी.. वह चार्ली की बगल में बैठ गई और जॉन के अंडकोशों को सहलाने लगी.. गोरे गोरे सुंदर अंडों से खेलते हुए शीला ने चार्ली की ओर देखा.. दोनों की नजरें एक हुई.. चार्ली को शीला की आँखों में एक अजीब सा आमंत्रण नजर आया.. और चुपचाप उस आमंत्रण का स्वीकार करे हुए वह शीला के सुंदर गालों को सहलाने लगी.. उसके बालों में उँगलियाँ फेरते हुए वह जॉन के लंड को चूसती रही.. चार्ली के एक हाथ में सिगार थी और दूसरे हाथ से वह शीला के अंगों को सहला रही थी.. शीला का बहोत मन कर रहा था जॉन का लंड चूसने को.. पर ये चार्ली छोड़े तब न!!

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शीला की इस तकलीफ को संजय समझ गया.. वह धीरे से चलकर चार्ली के पास आया और अपने लंड से चार्ली का गाल सहलाने लगा.. वैसे संजय का लंड काला तो बिल्कुल नही था.. पर जॉन के लंड के गोरेपन के आगे गेहुआँ नजर आ रहा था.. चार्ली ने तुरंत जॉन का गीला लंड छोड़ दिया और संजय का लंड चूसने लगी.. जॉन के तंदूरस्त गोरे लंड को शीला ने हाथ में लेकर बड़े ध्यान से देखा.. उसके सख्ती की जांच की और फिर उस लोड़े को मुंह में लेकर चूसने लगी.. जब चार्ली चूस रही थी तब जॉन चुपचाप खड़ा था पर शीला ने जैसे ही मुंह में लिया उसकी सिसकारी निकल गई..

"Ohhhh yess..Ahhh..nice..Suck it baby.." जॉन सिसकने लगा.. शीला ने पहले तो आधा ही लंड चूसकर उसे थोड़ा तड़पाया.. फिर धीरे से उसने बाकी आधा लंड मुंह में लेते हुए उसके आँड दबा दिए.. शीला ने अभी अपने कपड़े उतारे नही थे.. लेकिन टाइट कपड़ों से उसके जिस्म का शानदार भूगोल आसानी से नजर आ रहा था.. टॉप से आधे बाहर लटक रहे उसके अद्भुत स्तन.. जॉन और चार्ली को पागल कर रहे थे.. चार्ली संजय के लंड को मस्ती से चूस रही थी..

शीला ने जॉन के लंड को पूरा चूसकर लाल कर दिया था.. आखिर उसने अपने मुंह की कैद से उस लंड को मुक्त किया.. नोक से लेकर मूल तक पूरा लंड शीला की लार से भीग चुका था.. शीला अब खड़ी होकर खुद ही अपने कपड़े उतारने लगी.. और मादरजात नंगी होकर फर्श पर लेट गई अपनी जांघों को चौड़ी करते हुए.. कमर को उठाकर वह अपने भोसड़े को जॉन के सामने प्रस्तुत कर रही थी..

शीला: "संजय बेटा.. मम्मी जी की चूत कौन पहले चाटेगा? मेरा दामाद या जॉन?" अपनी चिपचिपी चूत के दोनों होंठों को उंगलियों से अलग करते हुए अंदर के गुलाबी हिस्से को दिखाते हुए वह दोनों मर्दों को ललचाने लगी.. अपनी जिस्म की नुमाइश कैसे करनी वह शीला से बेहतर कोई नही जानता था.. जॉन यह देखते ही चीते की तरह शीला के भोसड़े पर झपट पड़ा.. बरसों से किसी अंग्रेज से अपनी चूत चटवाने की ख्वाहिश आज पूरी हो रही थी.. जॉन को कानों से पकड़कर शीला ने खींचा और उसके मुंह को अपनी चुत के एकदम करीब ले आई..


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जॉन भी कारीगर था.. शीला को खुश करने में उसने कोई कसर नही छोड़ी.. जितनी अंदर घुस सकती थी उतनी अंदर जीभ डालकर उसने शीला की चूत को कुरेद दिया.. कभी वह अपनी हथेली में शीला के सम्पूर्ण भोसड़े को पकड़कर दबाता तो कभी वह उसकी क्लिटोरिस को जीभ और होंठों के बीच दबाकर चूसता.. तरह तरह की आवाज़ें निकालते हुए वह शीला की चिकनी चूत के मजे ले रहा था.. शीला अपनी कमर उठा उठा कर जॉन के मुंह से अपनी चूत रगड़ते जा रही थी.. इतने भारी शरीर वाली शीला की चपलता देखने लायक थी.. बेहद उत्तेजित होकर शीला ने जॉन का हाथ खींचकर उसे अपनी ओर ले लिया.. असंतुलित होकर जॉन शीला के नरम तकिये जैसे स्तनों के ऊपर गिर पड़ा.. शीला ने जॉन को अपनी बाहों में भरकर चूम लिया.. जॉन भी भूखे भेड़िये की तरह शीला पर टूट पड़ा..

शीला ने अपना हाथ नीचे डाला और जॉन का लंड पकड़कर अपनी फड़क रही चुत के सेंटर पर लगा दिया.. जॉन धक्का दे उससे पहले शीला ने ही नीचे से कमर उचक कर जॉन के लंड को अपनी चुत की गहरी गुफा में लापता कर दिया.. और फिर जॉन को अपनी बाहों में भरते हुए उसने पलटी मारी.. अब जॉन नीचे फर्श पर लेट गया और शीला उसपर सवार हो गई.. जॉन पर सवार होकर शीला ऐसे चोदने लगी.. जैसे अंग्रेजों की गुलामी का बदला ले रही हो..

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"Ohh..ohhh..stop it you bitch!!" जॉन चिल्लाने लगा.. पर शीला ने शताब्दी एक्स्प्रेस जैसी स्पीड पकड़ ली थी.. चोदते वक्त शीला खूंखार शेरनी का रूप धारण कर लेती थी.. अपना ऑर्गजम पाने के लिए वह किसी भी हद तक जा सकती थी.. जॉन के चिल्लाने पर ध्यान न देते हुए.. शीला लगातार २० से २५ मिनट तक फूल स्पीड में कूदती ही गई.. जॉन के लंड ने तो कब से इस्तीफा दे दिया था.. क्योंकि जब शीला ठंडी होकर जॉन पर से उतरी तब उसकी गहरी गुफा से जॉन का लंड मरी हुई छिपकली की तरह बाहर निकला.. नीचे उतरते ही शीला जॉन के बगल में लेटकर गहरी सांसें भरते हुए अपनी थकान उतार रही थी.. उसके हांफने से ऊपर नीचे होती हुई उसकी छातियों को देखकर स्तब्ध रह गया जॉन.. उसका दिल तो कर रहा था की वह उसकी चूचियों को मसलें.. पर थोड़ी देर पहले ही शीला ने उसे जिस तरह रीमाँड़ पर लिया था वह देखकर उसे फिर से उत्तेजित करने की हिम्मत नही हो रही थी उसकी..

यह द्रश्य देखकर मन ही मन मुस्कुरा रहा था संजय.. उसे अपनी सेक्सी सास पर गर्व महसूस हो रहा था.. चार्ली को काँखों के नीचे से उठाते हुए संजय ने उसे उठा लिया.. और पूरे कमरे में घूमते हुए उसे किस करने लगा.. जॉन के शॉर्ट्स की जेब से शीला ने किंग एडवर्ड सिगार निकाली और उसे जलाकर एक के ऊपर एक दम लगाने लगी.. नशा सा होने लगा उसे.. अलग ही दुनिया में खो गई वो.. उसकी आँखें बंद हो गई.. उसके हाथ से जब जॉन ने सिगार खींच ली तब उसकी आँखें खुली.. संजय की कमर के इर्दगिर्द अपने पैरों की कुंडली लगाए हुए चार्ली छोटे बच्चे की तरह लटकी हुई थी.. उसकी जांघों के ठीक नीचे.. संजय का आठ इंच लंबा विकराल लंड.. चूत की गंध सूंघते हुए छेद ढूंढ रहा था.. चार्ली के स्तन, संजय की मर्दाना छाती से दबकर समोसे से कचौड़ी बन गए थे..

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संजय के गले में बाहें डालकर चार्ली ऐसे झूल रही थी जैसे डाली पर आम लटक रहा हो.. एक दुसरें को कामुक चुम्बन करते हुए वह अलग अलग अंगों को मसल रहे थे.. चार्ली के सुन्दर गोरे कूल्हें संजय के लंड पर ठोकर मार मारकर यह कह रहे थे की जल्दी करो.. अब और सहा नही जाता!!

संजय ने चार्ली को बिस्तर पर पटक दिया.. डनलॉप के नरम गद्दे पर पटकते ही चार्ली एक फिट जितना ऊपर उछली और साथ में उसके स्तन भी!! नजदीक से देख रही शीला ने जॉन को इशारा किया "Let us join them"

"Not now Shila..I will have to take some rest!!"
जॉन ने अपनी असमर्थता जाहीर की

शीला अंगड़ाई लेते हुए खड़ी हुई.. फर्श पर लेते हुए जॉन ने शीला के भरे भरे कटहल जैसे स्तनों को देखा और देखता ही रह गया.. शीला के अद्भुत संगेमरमरी कूल्हें.. स्तम्भ जैसी जांघें.. चरबीदार लचकती कमर और चिड़िया घोंसला बना सके वैसी गहरी नाभि.. शीला खतरनाक मूड में लग रही थी.. दोनों जंघाए चौड़ी कर वो जॉन की चेहरे पर बैठ गई..अपनी चूत के होंठों को अलग करते हुए उसने जॉन के होंठों पर उसे लगा दिया.. चाटने के अलावा जॉन के पास कोई चारा नही था.. दो तीन मिनट तक चूत चटवाने के बाद शीला ने एक नजर जॉन के लंड पर डाली.. पोस्टमॉर्टम रूम में पड़ी लावारिस लाश की तरह जॉन का लंड पड़ा हुआ था..

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शीला का मुंह बिगड़ गया.. वह उठकर बेड पर चली गई.. जहां चार्ली और संजय दोनों एक दूसरे के संग खेल रहे थे.. चार्ली संजय के लंड को हिला रही थी और संजय चार्ली की संकरी चूत में उंगली डालते हुए उसके मम्मे चूस रहा था.. चूत में उंगली डालकर उसे चौड़ी कर रहा था संजय.. ताकि उसके तगड़े लंड को वो झेल सके.. संकरी चुत में दो उंगली जाते ही चार्ली दर्द से सिसक उठी..

शीला ने पहले दोनों का दूर से ही निरीक्षण किया.. वह जॉइन होना चाहती थी पर मौका देखकर.. धीरे से वह चार्ली की बगल में लेट गई.. और चार्ली के मुंह को अपनी ओर खींचकर और गोरे फिरंगी होंठों पर अपने देसी होंठ लगा दिए.. कामुक चुंबन करते हुए शीला चार्ली के जीभ से अपनी जीभ लड़ा रही थी.. कभी चार्ली की जीभ को लंड की तरह चूस लेती.. तो कभी उसके मुंह के भीतर तक अपनी जीभ घुसा देती.. दोनों अब बेहद गरम हो गई थी.. चार्ली ने अपनी हथेली में शीला के एक स्तन को पकड़ने की नाकाम कोशिश करके देखा.. पर पहाड़ जैसी चुची, हथेली में भला कैसे समाती.. !!! शीला के नरम गुदगुदे मांस के गोलों चार्ली बड़ी ही मस्ती से दबाते हुए दूसरे हाथ से संजय के लंड के साथ खेल रही थी..

"Ohh Shila...suck my cunt, please!!" चार्ली ने शीला से कहा

शीला ने संजय का हाथ चार्ली की चिकनी बालरहित बुर से हटा दिया.. और संजय की उंगली पर लगे चार्ली के चुत के गाढ़े अमृतरस को चाटकर अपने दामाद की उंगलियों को संपूर्णतः सेनीटाइज़ कर दिया.. थोड़ा सा ऊपर उठकर उसने अपने दामाद को होंठों को चूम लिया.. एक गजब की कशिश थी शीला के अंदाज में.. शीला के चुंबन से संजय जबरदस्त गरम हो गया.. और आक्रामकता से चार्ली के स्तनों को आटे की तरह गूँदने लगा..

शीला ने चार्ली की दोनों जांघों को जरूरत के हिसाब से चौड़ा किया.. और इसकी गोरी जांघों को चाटने लगी.. संजय का सख्त लंड देखकर उस खूँटे को अपनी चुत में महसूस करने की अदम्य इच्छा हो रही थी शीला के मन में.. पर संजय के लंड के मजे तो वो जब चाहे ले सकती थी.. उसने चार्ली की चुत का अब करीब से निरीक्षण किया.. उसकी गुलाबी क्लिटोरिस को अपनी उंगली से कुरेदा.. होंठों को अलग किया.. और फिर चार्ली की गांड के नीचे तकिया सटा दिया.. चार्ली की चूत वडापाँव की तरह उभर कर बाहर आ गई..

शीला ने पहले तो चार्ली की पूरी चूत को अपने मुंह में भरकर देखा.. चार्ली की आँखें बंद हो गई और उसकी कमर ऊपर उठ गई..

"Ohhh my...you are sucking so good..suck my cunt very hard, Shila..Ohh yes..ohh no..yeah..right there..yes yess..aaahhh!!" चार्ली की इन आवाजों से पूरा कमरा गूंज उठा.. कमर को उठाकर शीला डोगी स्टाइल में सेट होकर चार्ली की चूत चाटने लगी..

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जब वह चाटने में व्यस्त थी तब संजय उठकर शीला के पीछे से आया और उसके गोलमटोल चूतड़ों को चौड़ा कर शीला की गांड और चूत के छेद का निरीक्षण करने लगा.. अपने चूतड़ों पर मर्दाना हाथ का स्पर्श पाते ही शीला की गांड थिरकने लगी.. गोल गोल क्लॉकवाइज़ घुमाने लगी.. अपनी सास के बादामी रंग के गांड के छेद को देखकर संजय को वैशाली के छेद की याद आ गई.. माँ बेटी दोनों के गांड के छेद बिल्कुल एक जैसे ही थे..

वैशाली के विचारों को अपने दिमाग से निकालकर संजय ने शीला की गांड के उस टाइट छेद में.. अपनी गीली उंगली डालने का प्रयास किया.. बेहद टाइट था वो होल.. !! और क्यों न हो!! मदन के जाने के बाद किसी ने शीला के इस छेद को छेड़ा नही था.. !! अपनी गांड में घुसी दामदजी की उंगली आनंद दे रही थी शीला को.. चार्ली से किस कर रही शीला ने उसे मुक्त किया और बोली

"संजय बेटा.. उंगली छोड़.. अंगूठा डाल.. बड़ी तेज खुजली हो रही है अंदर" शीला की इस बात से उत्साहित होकर संजय ने अंगूठा अंदर डाल दिया.. अंगूठा अंदर घुसते ही शीला बेकाबू हो गई और उसने चार्ली की चूत में एक साथ तीन उँगलियाँ डाल दी..

"Ohh my god...it is paining..please remove the fingers, Shila!!" चार्ली की फट गई.. शीला ने उसकी चूत से एक उंगली निकाली और उसकी गांड में डाल दी.. चार्ली की चुत चाटते हुए शीला उसकी नाभि तक पहुँच गई.. और उसके सपाट पेट के गोरे हिस्सों को चाटने लगी.. वह और ऊपर की तरफ आई.. अब दोनों के स्तन एक के ऊपर एक हो गए थे.. निप्पलों के बीच छेड़खानियाँ हो रही थी.. शीला की वासना ज्वार की लहरों की तरह उछलने लगी.. शीला की भरावदार छाती के तले चार्ली के छोटे स्तन दबकर रह गए.. इतना अद्भुत सीन था की देखते ही किसी का भी पानी छूट जाए..

शीला के तंदूरस्त स्तनों का सौन्दर्य.. और चार्ली के जवान सख्त उरोज जब एक हो जाएँ.. तो कितना अनोखा द्रश्य होगा!! संजय ने अब दूसरे हाथ का अंगूठा भी शीला की गांड में डाल दिया था.. दर्द और आनंद के मिश्रण से शीला की गांड गोल गोल घूम रही थी.. शीला फिर से नीचे की ओर आई और अपनी जीभ से चार्ली की नाजुक चुत को टटोलने लगी.. चार्ली की चुत काफी तंग थी.. ज्यादा इस्तेमाल नही हुई थी शायद.. हाथ ऊपर ले जाकर शीला उसके सख्त उरोजों को मसल रही थी.. चार्ली ने भी उत्तेजना से शीला के हाथों को पकड़कर अपने स्तनों आर दबाए रखा था.. संजय अपनी सासुमा के पीछे के छेद को कुरेदने में व्यस्त था.. अपनी सास के इस खास अंग को बड़ी उत्सुकता और उत्तेजना से देखते हुए संजय का लंड झटके कहा रहा था.. इतना सख्त हो चुका था की संजय से रहा नही जा रहा था..

दोनों अंगूठे बाहर निकालकर संजय ने अपने सुपाड़े पर थोड़ा सा थूक लगाया और टोपे को शीला की गांड के छेद पर टीका दिया.. थोड़ी देर तक सुपाड़े से छेद को रगड़ने के बाद उसने बिल्कुल मध्य में रखकर दबाया..

शीला: "आह्ह बेटा.. नही जाएगा अंदर.. !!" संजय ने फिर से थोड़ा सा दबाव दिया.. बड़ी मुसीबत से केवल उसका आधा सुपाड़ा छेद के अंदर जा पाया.. शीला का पूरा बदन कांपने लगा "ओह बेटा.. निकाल दे बाहर.. और आगे डाल दे.. ज्यादा मज़ा आएगा" शीला कराहने लगी

संजय ने एक न सुनी और थोड़ा सा और दबाया.. इस बार उसका टमाटर जैसा सुपाड़ा टाइट छेद के अंदर चला गया

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शीला: "संजु.. आह्ह.. मर गई बेटा.. बहोत दर्द हो रहा है मुझे.. प्लीज बाहर निकाल ले"

संजय: "ओहह मम्मी जी.. कितनी टाइट और मस्त है आपकी गांड.. मेरे लंड पर जबरदस्त दबाव बना रहा है आपका छेद.. बहोत मज़ा आ रहा है.. प्लीज एक बार मुझे आपकी गांड मार लेने दीजिए.. जब जब आपके गदराए जिस्म की याद आती थी तब तब मैं वैशाली की गांड मारकर अपनी इच्छा को शांत कर लेता था.. प्लीज आज मना मत करना.. आपकी चूत से ज्यादा तो गांड में गर्मी है मम्मी जी.. ओहहह आह्ह.. " काफी दबाने के बाद मुश्किल से आधा ही लंड घुसा पाया अंदर

शीला को अब जबरदस्त दर्द हो रहा था.. ए.सी. कमरे में भी उसके पसीने छूट रहे थे..उसके दोनों लटकते हुए स्तन चार्ली के घुटनों से टकरा रहे थे.. शीला ने चार्ली की चुत चाटना छोड़कर अपनी गांद के दर्द पर ही ध्यान केंद्रित किया.. चार्ली शीला के नीचे से निकल कर बाहर आई और सीधे जॉन के पास पहुँच गई.. जॉन तो केवल दर्शक बनकर यह सारा खेल देख रहा था.. संजय और शीला की इस असाधारण मुहिम को बड़ी ही दिलचस्पी से देख रहा था.. धीरे धीरे उसका लंड हरकत करने लगा.. आधे-सख्त हुए उस लंड को चार्ली ने पकड़कर कहा "John, fuck me now.. Shila sucked my cunt really good..I enjoyed like never before..Now I need a cock deep in my pussy..please fuck me hard" कहते हुए वह जॉन के लंड को चूसकर पूरा सख्त करने में जुट गई.. दो ही मिनट में जॉन का लंड कडा हो गया..

चार्ली अब नीचे लेट गई और बोली "Don't waste time..now climb on me..and fuck the shit out of my pussy"

जॉन ने चार्ली के पास से हटकर खड़ा हो गया और बिस्तर पर आ गया.. संजय अपना आधा लंड शीला की गांड में डालकर दर्द कम होने का इंतज़ार कर रहा था.. घोड़ी बनी शीला के नीचे जॉन संभलकर घुस गया और शीला के नीचे अपने आपको सेट कर लिया.. धीरे से उसने अपने लंड को नीचे से ही शीला की चूत के छेद पर सेट किया.. और अपनी कमर उठाकर एक धक्का लगाया.. शीला की चूत तो कब से बेकरार थी.. लंड को एक पल में ही निगल गई.. !!!

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दो दो लंडों के एक साथ हुए हमले से शीला उत्तेजित हो गई.. सिर्फ ब्लू-फिल्मों में ही देखे इस द्रश्य को आज वह वाकई अनुभावित कर रही थी.. संजय अभी भी स्थिर था.. लेकिन जॉन ने नीचे से हुचक हुचक कर शॉट लगाने शुरू कर दिए थे.. चिपचिपे भोसड़े में लंड का स्पर्श इतना सुहाना लग रहा था की शीला सिहरने लगी.. चार्ली भी अब बेड पर आ गई.. और शीला की पीठ पर सवारी करते हुए वह संजय के बिलकूल सामने आ गई.. और संजय को चूमने लगी.. लिप किस करते हुए संजय चार्ली के स्तनों को भी दबाने लगा था.. दबाते हुए वह इतना गरम हो गया की उसने एक जोरदार धक्का लगाते हुए अपना पूरा लंड शीला की गांड में घुसेड़ दिया !!!

शीला: "ओहह माँ.. मर गई.. फट गई मेरी तो.. बाहर निकाल संजय.. ऊईई माँ.. !!" शीला को एक पल के लिए ऐसा लगा की उसकी जान ही निकल गई थी.. इतना दर्द हो रहा था.. लेकिन संजय और जॉन.. शीला की चीखो को नजर अंदाज करते हुए ऐसे शॉट लगा रहे थे जैसे शीला की इस ट्रिप को यादगार बना देना चाहते हो.. एक साथ दो दो जानदार लंडों से युद्ध खेल रही शीला को शुरुआत में भयंकर दर्द हुआ.. पर धीरे धीरे गांड की मांसपेशियाँ ढीली पड़ने लगी और दर्द काम होते ही उसे मज़ा आने लगा.. नीचे चूत में हो रही अंधाधुन चुदाई से मिल रहे आनंद के कारण भी उसका दर्द कम हो रहा था

दोनों लंड एक साथ अंदर डालना कठिन था.. जब संजय गांड में डालता तब जॉन चूत से बाहर निकालता और जब उसके अंदर डालते ही संजय खींच लेता.. एक अनोखी लय बना ली थी दोनों ने शीला को चोदते हुए.. एक उस्ताद तबलची जैसे दोनों तबलों को लय और सुर में एक साथ बजाता है वैसे ही अनुभवी शीला इन दोनों मर्दों के दमदार हथियारों को अपने दोनों छेदों में लेते हुए मस्त होकर चुद रही थी..

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शीला की गांड मारते हुए संजय.. शीला पर घोड़ी बनकर बैठी हुई चार्ली की निप्पलों को चूस रहा था.. चूसचूसकर उन गुलाबी निप्पलों का रंग लाल हो गया था.. चार्ली के स्तनों पर कई जगह संजय के काटने से निशान भी पड़ गए थे.. शीला के नीचे लेटा हुआ जॉन.. आगे पीछे हो रही शीला के हिल रहे मदमस्त चूचों को बस देखता ही जा रहा था.. दोनों हाथों से उन स्तनों को पकड़ना मुमकिन नही था.. इतने गदराए मांसल बड़े बड़े स्तनों को अपने ऊपर झूलता हुआ देख वह वासना की आग में अपने आप को समर्पित कर रहा था

सासुमाँ की चूत चोदने का ख्वाब देख रहे संजय को चुत से पहले उनकी गांड मिल गई.. अपने आप को खुशकिस्मत समझ रहा था वोह.. वैशाली की जब गांड मारने की वह कोशिश करता तब उसे मनाने में ही एक घंटा निकल जाता.. तकिये पर उसका मुंह दबाकर फिर गांड में डालना पड़ता वरना उसकी चीखें सुनकर पूरा मोहल्ला इकठ्ठा हो जाने का डर रहता.. अंदर डालने के बाद एक मिनट से ज्यादा मारने नही देती थी वैशाली.. और एक बार गांड मारने के बाद तीन से चार दिन तक अपने नजदीक भी नही आने देती थी.. और उसकी माँ को देखो.. खुशी खुशी एक साथ गांड और चूत मरवा रही है.. !!

शीला: "अब दर्द एकदम कम हो गया.. जरा जोर से धक्के मार.. आज तो फाड़ ही दे मेरी.. बहोत मज़ा आ रहा है मुझे.. छील रही है मेरी गांड फिर भी मज़ा आ रहा है.. आह्ह ओहह देख क्या रहा है भड़वे.. चोद मेरी गांड.. लगा ताकत!! इतना जल्दी थक गया क्या साले!!" ऑर्गजम करीब आते ही शीला हिंसक होने लगी.. वह ढीले धक्कों को बर्दाश्त नही कर पा रही थी.. नाव को किनारे पर पहुंचना हो तो पतवार तेज लगानी पड़ती है.. थका हुआ माँजी की नाव को किनारे नही लगा सकता..

"ओहह मम्मी जी.. मेरा निकलने को है.. " संजय ने अपना इस्तीफा तैयार कर लिया.. शीला के कूल्हों से संजय की जांघें टकराकर पक्क पक्क की मस्त आवाज़े आ रही थी.. इतना ही नही.. नीचे से धक्के लगा रहे जॉन और संजय के गीले आँड टकराने से भी आवाज आ रही थी.. शीला की गांड में अचानक गरम गरम लावारस छूटा.. संजय ने धक्के लगाना बंद कर दिया.. और एक आखिरी बार जोर लगाते हुए अपने लंड को शीला की गांड की खाई में गाड़ दिया.. संजय ठंडा हो गया.. लेकिन शीला अभी भी पाँवभाजी के तवे की तरह गरम थी..

एक साथ दो तंदूरस्त जानदार लंड के धक्के खाते हुए शीला की हवस उफान पर चढ़ी हुई थी.. उसने कभी नही सोचा था की बी.पी. में देखी हुई हरकतें उसे वाकई अपने जिस्म के साथ करने का मौका मिलेगा.. शीला के भोसड़े की गर्मी से जॉन का लंड ढीला पड़ने लगा था.. उसके धक्कों में अब जान नही बची थी.. गांड में वीर्यस्त्राव हो जाने के बाद वह छेद एकदम लसलसित हो गया था.. संजय अपने आधे मुरझाए लंड से भी आसानी से धक्के लगाए जा रहा था.. शीला भी अपने दामाद के संग गोवा की इस ट्रिप का पूरा लाभ उठा रही थी..

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एक घंटे के भीषण एनकाउंटर के बाद.. कमरे में सन्नाटा छा गया था.. जॉन और संजय लाश की तरह बिस्तर की एक तरफ पड़े हुए थे.. चार्ली नाम की चिड़िया.. शीला की पुख्त भुजाओं में सिमटकर छोटे बच्चे की तरह आराम से सो रही थी.. शीला की गांड में जलन हो रही थी.. नजदीक पड़े सिगार का पैकेट खोला तो वह खाली था.. शीला ने.. अकेले ही.. अपने बलबूते पर.. जॉन, संजय, चार्ली और सिगार.. सब को खाली कर दिया था.. आराम करते हुए एकाध घंटा और बीत गया..
बहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजना से भरपूर कामोत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गया
ये शीला तो पुरी काम वासना कि आग 🔥 🔥
है एक साथ दो दो लंडों से चुद कर ही थोडे देर के लिये शांत हो गई
ये शांती कोई बडे तुफान के पहले की तो नहीं
खैर देखते हैं आगे
 

Rajpoot MS

I love my family and friends ....
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Bole to mast he boss
Bahut shandar update bhai

कमरा खोलकर हाफ़िज़ ने शीला को सहारा देते हुए बेड पर लैटाया.. शीला को छोटा सा टॉप ऊपर चढ़ गया था.. और स्तनों का निचला हिस्सा टॉप के बाहर झलक रहा था.. शीला की छोटी सी शॉर्ट्स इतनी तंग थी की उसकी दोनों जांघें ऊपर तक खुली हुई थी.. हाफ़िज़ बस उसे देखता ही रहा

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हाफ़िज़ ने अपने होंठों पर जीभ फेरते हुए कहा "क्या गदराया जिस्म है आपका मैडम.. !! आपको ऐसे देखकर मेरा भी मन कर रहा है.. संजय साहब के आने से पहले मुझे भी चांस दीजिए.. " कहते हुए हाफ़िज ने शीला के टॉप के नीचे से हाथ डालकर दोनों स्तनों को दबाकर मसल दिया..

"एयय.. छोड़ मुझे.. रासकल.. छोड़.. साले तेरी औकात ही क्या है मुझे हाथ लगाने की.. !!" शराब का नशा अब शीला के सर चढ़कर बोलने लगा था.. लहराती आवाज में उसने बोलकर हाफ़िज़ के हाथों से खुदको छुड़ाते हुए शीला ने कहा "जा.. जाकर अपनी माँ के दबा.. "

सुनकर हाफ़िज़ गुस्से से तिलमिलाने लगा.. शीला के ऊपर वो सवार हो गया और बोला "भेनचोद.. मेरी औकात की बात करती है.. अभी तुझे दिखाता हूँ मेरी औकात.. तेरी माँ को चोदू, हरामजादी.. अपने दामाद का लोडा गाड़ी में चूसते वक्त तुझे तेरी औकात याद नही आई थी क्या.. साली रांड!!" कहते हुए गुस्से से उसने अपने दोनों हाथों से शीला का टॉप फाड़ दिया.. शीला के गोरे गोरे स्तन खुले हो गए..

हाफ़िज़ शीला के ऊपर अपना सारा वज़न डालकर चढ़ गया और उसके होंठों को चाटने लगा.. शीला छूटने के लिए छटपटाने लगी.. पर हाफ़िज़ की मजबूत पकड़ के आगे वो लाचार थी.. ऊपर से वो नशे में भी थी.. शीला चिल्लाने लगी.. हाफ़िज़ ने उसके गाल पर दो कडक तमाचे रसीद करते हुए उसे चुप करा दिया..

"साली रंडी.. अगर फिर से चिल्लाई तो तेरे घरवालों को सब बता दूंगा..घर तो तेरा मैंने देख ही रखा है.. किसी को मुंह दिखाने के लायक नही छोड़ूँगा तुझे.. याद रखना.. अब चुपचाप मुझे जो करना है वो कर लेने दे.. समझी!!" सुनकर शीला की गांड ही फट गई.. अपने हथियार डालकर उसने आँखें बंद कर ली.. और अपने बदन को ढीला छोड़ दिया..

हाफ़िज़ ने शीला की चड्डी उतारकर उसकी चूत पर हाथ फेरते हुए कहा "साली.. बहोत गरम चीज है तू" कहते हुए हाफ़िज़ ने अपने पेंट की चैन खोल दी.. आँखें बंद कर पड़ी हुई शीला ने चैन खुलने की आवाज सुनी.. अनजाने में ही उससे आँखें खुल गई.. पेंट उतार रहे हाफ़िज़ के लंड को देखने की लालच वह रोक नही पाई.. पेंट उतरते ही उसने देखा की हाफ़िज़ के अंडरवेर में इतना बड़ा उभार था.. डंडे जैसा !!! वह फुला हुआ हिस्सा देखककर शीला मन ही मन हिल गई..

अपने लंड वाला हिस्सा शीला के करीब ले जाकर बोला "ले मादरचोद.. निकाल बाहर अपने बाप का लंड.. और देख.. की यह तेरे भोसड़े के परखच्चे उड़ाने के काबिल है भी या नही.. !!" शीला ने अब विरोध करना छोड़ ही दिया था.. हाफ़िज़ की धमकी सुनने के बाद उस में हिम्मत ही नही बची थी.. कहीं ये कमीना आकर मदन को सब कुछ बता देगा तो क्या हाल होगा!!!

चुपचाप शीला ने हाफ़िज़ के अंडरवेर में बने उभार पर हाथ रख दिया.. "तुरंत बाहर मत निकाल ईसे मेरी जान.. पहले थोड़ा हाथों से सहला.. ताकि ये और भी सख्त हो जाए.. फिर बाहर निकालना.. समझ गई!!" शीला की निप्पलों को खींचते हुए हाफ़िज़ ने कहा "कसम से.. गजब का माल है तू.. " शीला की नाभि के अंदर उंगली करने के बाद उसने झुककर उसके भोसड़े में तीन उँगलियाँ एक साथ डाल दी.. और शीला की काँखों को चाटने लगा..

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४४० वॉल्ट का करंट लगा शीला को.. हाफ़िज़ उसकी काँख को ऐसे चाट रहा था जैसे चूत चाट रहा हो.. उत्तेजित होकर भारी सांसें लेते हुए उसने हाफ़िज़ के लंड को अंडरवेर के ऊपर से ही दबाया..

शीला के मन में ही संवाद चलने लगा.. "तू क्या कर रही है उसका पता भी है तुझे?? "लेकिन वोड्का का नशा और चूत की खुजली.. दोनों ने मिलकर शीला के होश छीन लिए थे.. इच्छा न होने के बावजूद वह हाफ़िज़ के लंड को बाहर से ही सहलाते हुए सिसक रही थी.. जांघिये के अंदर लंड ने तंबू बना दिया था.. उसे उतारकर शीला ने लंड बाहर खींचा.. स्प्रिंग की तरह उछल कर बाहर निकला हाफ़िज़ का लोडा.. एकदम काला.. ब्लेक कोब्रा जैसा.. और इतना मोटा.. शीला को जीवा के लंड की याद आ गई.. हाफ़िज़ ने अपना झूलता हुआ लंड शीला के मुंह के आगे रख दिया.. शीला ने एक आखिरी बार शर्माने का नाटक किया.. और अपनी नजरें फेर ली..

हाफ़िज़ ने खींचकर एक तमाचा लगा दिया शीला के गाल पर.. और उसे धमकाते हुए कहा "मादरचोद.. नजर क्यों फेर ली? टाइम खराब मत कर.. पकड़ ईसे और मुंह में ले चल.. जैसे अपना दामाद का लिया था.. " हाफ़िज़ के मुंह से गालियां सुनकर.. पता नही क्यों पर शीला को अच्छा लगा.. उसकी चूत ने रस की एक धारा छोड़ दी.. हाफ़िज़ नीचे झुककर शीला के गुब्बारों को चूसने लगा..

शीला हाफ़िज़ के विकराल लंड को हाथ में लेकर खेलने लगी.. उसके शरीर में वासना का भूत नाचने लगा.. उसके भोसड़े ने कडक लंड की गंध परख ली थी.. और वो बेसब्र हो रहा था.. हाफ़िज़ ने शीला की काँखों के बीच लंड को दो बार अंदर बाहर किया... गदराई काँखों में लंड घुसते ही उत्तेजना से हाफ़िज़ का थोड़ा सा वीर्य छूट गया और शीला के बबलों पर जा गिरा

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"साली रंडी.. तेरी बगल भी भोसड़े जैसी गरम है.. क्या बात है.. कहाँ से सीखा ये सब.. जरा मुझे भी बता.. !!" शीला ने जवाब नही दिया.. वह उसके आँड़ों को सहलाती रही.. शीला की काँख से लंड निकालकर वापिस अंदर डाला हाफ़िज़ ने.. और उसकी काँख को ही चोदने लगा.. हाफ़िज़ की इस हरकत ने शीला को पागल कर दिया.. अपनी काँख से लंड निकालकर उसने मुंह में ले लिया.. और अपनी लार से गीला करते हुए चूसने लगी.. मुंह के अंदर उसने लंड पर इतना दबाव बनाया की उसे डर लगने लगा की कहीं हाफ़िज़ उसके मुंह में ही वीर्यस्त्राव न कर बैठे.. !!

हाफ़िज़ जोर से चिल्लाया "अरे मादरचोद.. खा जाएगी क्या मेरा लंड?? छोड़ दे भेनचोद.. तेरे बाप का पानी छूट जाएगा" शीला के मुंह से हाफ़िज़ ने लंड बाहर खींच लिया..

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शराब के नशे में शीला ने कहा "साले.. चूसने दे ना.. क्यों मेरा मज़ा खराब कर रहा है? पानी गिरता तो मेरे मुंह में गिरता उसमें तेरे बाप का क्या जा रहा था.. भोसड़ी के चूतिये!!" हाफ़िज़ अब शीला के स्तनों पर अपने लंड से थपकियाँ लगाने लगा.. सख्त लंड की थपकियों से शीला को दर्द हो रहा था.. लंड की मोटाई देखकर शीला मन ही मन रघु और जीवा को याद कर रही थी.. घर जाने के बाद एक बार उन दोनों से चुदवाने का मन बना लिया उसने..


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हाफ़िज़: "शीला तेरी जवानी तो बड़ी ही कातिल है मेरी जान.. चल.. मेरा लंड अपनी चूत में लेने के लिए तैयार हो जा.. कुत्तिया बनाकर चोदूँगा.. चार पैर पर हो जा.. " कहते हुए उसने शीला की जांघ पर काट लिया..

शीला: "आह्ह साले.. क्या कर रहा है? भड़वे अपनी माँ को भी कुत्तिया बनाकर चोदता है क्या? और तमीज़ से बात कर.. मैं तेरी मालकिन हूँ.. कोई रंडी नही.. ड्राइवर है तू.. मेरा शोहर नही.. जो करने आया है वो कर और निकल यहाँ से.. ले डाल अपना लोडा.. और देख.. भूल कर भी पीछे के छेद में डालने की कोशिश मत करना.. वरना चिल्ला चिल्लाकर माँ चोद दूँगी तेरी.. समझा.. !!! आगे के छेद में जितना मर्जी डाल ले.. "

शीला घोड़ी बनकर हाफ़िज़ का लंड अपने भोसड़े में लेने के लिए तैयार हो गई.. उत्तेजना इतनी प्रबल थी की उसके दिलोदिमाग पर सुरूर सा छा गया था.. शराब से कई ज्यादा नशा सेक्स में होता है.. और शीला के सर पर फिलहाल दोनों नशे हावी हो चुके थे.. उसका शरीर वासना से तप रहा था..

लंड का सुपाड़ा अंदर जाते ही शीला ने कहा "जरा धीरे से हाफ़िज़.. दर्द हो रहा है.. " हाफ़िज़ का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा था.. लेकिन शीला का भोसड़ा भी कुछ कम नही था.. दो दमदार धक्कों में ही हाफ़िज़ का लंड निगल लिया उस भोसड़े ने.. इतना मोटा था की शीला का पूरा भोसड़ा भर गया.. मज़ा आ गया शीला को.. खुजली से तिलमिलाती चूत में एक अजीब सी ठंडक मिली..

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हाफ़िज़ आनन-फानन में धक्के लगाने लगा.. शीला गांड उछाल उछाल कर चुदने लगी... इस युद्ध में कौन जीतेगा ये कहना बड़ा ही मुश्किल था..

"ओह्ह भेनचोद.. क्या लोडा है तेरा!! मज़ा आ गया.. चोद दे.. चोद दे अपनी मैया की चूत.. ठोक जोर से.. हाफ़िज़.. हाँ और जोर से.. लगा धक्के साले.. आह्ह आह्ह आह्ह अहह.. ऐसे ही.. यस्स.. क्या ताकत है तुझ में भोसड़ी के.. सच में असली मर्द है तू.. साले.. लगा दम.. दिखा अपना जोर.. कोई कसर मत छोड़ना.. अपने गधे जैसे लंड से फाड़ दे मेरा भोसड़ा..आह्ह.. !!" हाफ़िज़ के पसीने छूट गए.. शीला की कमर और कूल्हों पर तमाचे लगाते हुए वह लगातार धक्के लगा रहा था.. "आह्ह आह्ह ओह्ह ओह्ह" की आवाजों से पूरा कमरा गूंज उठा था.. शीला ने अपनी चूत की मांसपेशियों से कसकर पकड़ रखा था हाफ़िज़ का लंड.. उसके दोनों वर्टिकल होंठों के बीच फंस चुका था हाफ़िज़ का लंड.. धक्के खा खा कर लाल हो गई थी शीला की चूत..


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पूरे पंद्रह मिनट की भीषण चुदाई के बाद शीला का जबरदस्त ऑर्गजम हो गया.. हाफ़िज़ के जानदार लोड़े की वो कायल हो गई.. शीला के कूल्हों को थप्पड़ लगाते हुए हाफ़िज़ ने अपने लंड से पावरफूल पिचकारी दे मारी.. गरम गरम वीर्य की बौछार होते ही शीला का भोसड़ा तृप्त हो रहा था..

थककर हाफ़िज़ ने अपना लंड बाहर निकाला और बिस्तर पर लेट गया.. हाफ़िज़ की विशाल छाती पर शीला भी लाश की तरह ढेर हो गई.. उसके मदमस्त बॉल हाफ़िज़ की छाती से दबकर चपटे हो गए थे.. उसकी दाढ़ी पर अपने कोमल गालों को रगड़ते हुए शीला उसे चूमने लगी.. नशा उसका सर पर इस कदर सवार था की उसे यह भी एहसास नही हो रहा था की वो किसी मामूली से ड्राइवर से चुदकर लेटी हुई थी.. हाफ़िज़ के खुरदरे हाथ शीला की चिकनी गोरी पीठ को सहला रहे थे.. पीठ से होते हुए उसके हाथ शीला के कूल्हों तक जा पहुंचे.. और अपनी उंगली से वो शीला की गांड के छेद को कुरेदने लगा.. गांड पर स्पर्श होते ही शीला को संजय की याद आ गई.. कहाँ गया होगा वो चूतिया? मुझे यूं अकेले छोड़कर न गया होता तो मुझे इस कमबख्त हाफ़िज़ से चुदना न पड़ता.. खैर जो भी हुआ अच्छा ही हुआ.. मज़ा तो बहोत आया.. और संजय को कहाँ पता चलने वाला था की मैंने हाफ़िज़ से चुदवाया है!! लेकिन संजय के आने से पहले मुझे इस भड़वे को रवाना करना होगा.. वैसे भी ये मादरचोद गांड का मुआयना कर रहा है.. उसकी नियत बिगड़े उससे पहले ही इससे छुटकारा पाना होगा.. ये मेरी गांड में डालेगा तो यही गोवा में मेरी लाश गिर जाएगी..

शीला ने तुरंत हाफ़िज़ के गाल को थपथपाकर उसे जगाया "हाफ़िज़.. तू अब निकल.. तेरे साहब आ जाएंगे तो मुसीबत हो जाएगी.. और हाँ.. गलती से भी उन्हे मत बताना.. हमारे बीच जो कुछ भी हुआ उसके बारे में.. "

हाफ़िज़ ने शीला को अपनी बाहों की गिरफ्त से मुक्त किया.. "नही पता चलेगा.. फिकर मत कीजिए.. आप के साथ जो मज़ा आया न मैडम.. वो आज से पहले कभी नही आया.. यहाँ तक की मेरी बीवी के साथ भी इतना मज़ा नही लूटा था मैंने.. वो तो आप से उम्र में भी आधी है.. और उसकी चूत भी आपसे काफी टाइट है.. लेकिन पता नही क्यों आपकी चूत ने जिस तरह मेरा लंड को जकड़ा था.. वो उसकी चूत नही कर पाती.. और आपका सीना भी कितना गजब है.. ये बड़े बड़े है आपके.. मैं तो आज का दिन जिंदगी भर नही भूलूँगा.. दोबारा कभी मौका मिला तो करने दोगी ना.. !!"

"हाँ हाँ.. करने दूँगी.. मगर अब तू यहाँ से निकल मेरे बाप.. " हाफ़िज़ के मुरझाए लंड को प्यार से थपकी लगाते हुए शीला ने कहा

"अरे मैडम.. क्यों फिर से जगाती हो उसे? फिर से करना पड़ेगा !!" हाफ़िज़ ने शीला को अपनी बाहों में दबा लिया.. "ओह्ह आपके ये रसीले होंठ.. ये सेक्सी बदन.. भेनचोद जी करता है की एक बार फिर से पटक कर चोद दूँ"

शीला घबरा गई.. मैंने क्यों इस हरामी के लंड को छेड दिया.. !!! कहीं संजय आ टपका तो गजब हो जाएगा.. कैसे भगाऊ ईसे.. एक बार चोद लिया फिर भी मन नही भरा इस चूतिये का..

शीला: "देख हाफ़िज़.. मुझे भी तेरा तगड़ा लंड बहोत पसंद आया.. मेरे दामाद के लंड से भी बेहतर है तेरा.. मैं भी इससे बार बार चुदवाना चाहती हूँ.. एक बार से तो मेरा मन भी नही भरता.. मगर इस वक्त तू यहाँ से निकल जा.. घर जाने के बाद मैं तुझे बुलाऊँगी.. और तुझे अपनी मनमानी करने दूँगी.. ठीक है.. !!!" कहते हुए शीला ने उसे प्यार से चूमा और रवाना कर दिया

शीला का दिमाग अब कुछ शांत हुआ और विचार चलने लगे.. मैंने एक ड्राइवर के साथ!! शीला तो इतनी गिरी हुई कब से हो गई? कितनी संस्कारी थी तू और अब देखो? तभी उसकी नजर अपने टॉप पर पड़ी.. जो हाफिज ने खींचकर फाड़ दिया था.. बाप रे!! अब क्या करूँ?? साड़ी के अलावा और कोई कपड़े तो है नही.. संजय ये देखकर पूछेगा तो क्या जवाब दूँगी.. ??


तभी डोरबेल बजने की आवाज आई.. शीला ने जल्दी जल्दी बेग से काली नेट वाली ब्रा निकालकर पहन ली.. और नीचे संजय ने दिलाई शॉर्ट्स चढ़ा दी.. फिर दरवाजा खोला.. वो संजय ही था.. उसके हाथ में किंग एडवर्ड सिगार का पैकेट था.. देखते ही शीला खुश हो गई.. जॉन और चार्ली की याद आ गई उसे.. खासकर जॉन का गोरा लंड और गुलाबी सुपाड़ा.. !!

नशे में लहराती आवाज में शीला ने कहा "ये बड़ा अच्छा काम किया तूने बेटा.. ये सिगार मुझे बहोत पसंद आ गई है.. अब खाने का कुछ करें!!! जोरों की भूख लगी है मुझे.. "

"हाँ मम्मी जी.. चलिए बाहर जाकर कुछ खाते है.. यहाँ आने के बाद हम बाहर घूमे ही नही है !! कितने घंटों से हम बस कमरे में ही बंद बैठे है "

"कोई बात नही.. वैसे गोवा हो या गुवाहाटी.. बाजार सब जगह एक जैसा ही होता है.. हमे उन अंग्रेजों से मजे करने का मौका मिल गया वो क्या कम था!!"

"हाँ वो तो है मम्मी जी.. चार्ली की चूत का स्वाद अब भी मेरी जुबान पर है.. क्या चीज थी वो.. !! मम्मी जी उसकी गांड का छेद गुलाब जैसे कोमल और लाल था.. देखकर मन हो रहा था की बस उसे चाटता ही रहूँ.. " शॉर्ट्स के ऊपर से अपने लंड को दबाते हुए संजय ने कहा

शीला समझ गई की उसके दामाद का लंड भी भूखा था.. अगर उसे खिलाने गई तो वह भूखी रह जाएगी..

शीला: "संजय बेटा.. पहले बाहर जाकर खाना खा लेते है.. थोड़ी देर और रुके तो तेरे इसको शांत करने में और एक घंटा निकल जाएगा" हँसकर संजय के लंड की ओर इशारा करते हुए उसने कहा

दोनों आजाद पंछी की तरह हाथ में हाथ डालकर गोवा की गलियों में घूमने लगे.. देखकर किसी को भी अंदाजा न हो की दोनों सास-दामाद थे.. नव-विवाहित कपल की तरह दोनों एक दूसरे से लिपटे हुए चल रहे थे.. चलते चलते एक रेस्टोरेंट पसंद आई.. दोनों अंदर गए और खाना खाते वक्त एक दूसरे को छेड़ते रहे.. शीला अपनी काली ब्रा पहन कर ही बाहर आई थी.. रेस्टोरेंट में बैठे सारे लोग उसे घूर रहे थे.. सब के आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी शीला.. और स्वाभाविक भी था.. इतने बड़े बड़े गदराए स्तनों की मालकिन.. सिर्फ नेट वाली ब्रा पहन कर बाहर निकले तो लोगों की नजर पड़ना जायज थी.. शीला की निप्पल की आकृति भी ब्रा से साफ नजर आ रही थी..

दोनों खाना खाने में मगन थे तभी केमेरे की फ्लेश ने उन्हे चोंका दिया.. एक शख्स उनके बगल वाले टेबल पर बैठकर शीला की तस्वीरे ले रहा था

"अबे ओय.. क्या कर रहा है तू??" संजय उठ खड़ा हुआ..

उस आदमी ने अपनी जेब से आई-कार्ड निकालकर दिखाते हुए कहा "मैं जर्नलिस्ट हूँ सर.. गोवा को कवर करने आया हूँ.. आप फिकर मत कीजिए.. मैं तो फ्रंट पेज पर डालने के लिए किसी आकर्षक सुंदरी की तलाश में था.. आप लोग मुझे परफेक्ट कपल लगे इसलिए तस्वीर ले रहा हूँ.. फ्रंट पेज पर छपेगी.. आप फेमस हो जाओगे"

"अरे हमें नही आना तेरे फ्रंट पेज पर.. समझा.. !! चल डिलीट कर अभी के अभी.. " संजय ने उसे धमकाते हुए कहा.. मन ही मन वो और शीला दोनों डर गए थे.. शीला ने उसके हाथ से केमेरा छिन लिया.. उसे आता नही था फिर भी जो मन में आए वो स्विच दबाने लगी.. संजय से ज्यादा चिंता शीला को थी.. संजय को क्यों ज्यादा फिक्र होती.. नंगा नहाएगा क्या और निचोड़ेगा क्या..!!! लेकिन शीला के लिए ये बड़ा खतरा था.. जब चारित्र की बात आती है तब लोग मर्द से ज्यादा औरत पर ही उंगली उठाते है.. इसी कारण से तो औरतें मर्दों जितनी बिंदास होकर मजे नही करती.. !!

संजय ने उस फोटोग्राफर का गिरहबान पकड़ लिया.. और उसे एक घुसा मारते हुए कहा "बिना इजाजत हमारी तस्वीर लेने की तेरी हिम्मत कैसे हुई बे, मादरचोद?? " संजय इतनी जोर से गाली बोला की मेनेजर दौड़ते हुए उनके पास आ गया..

मेनेजर: "ओ मिस्टर.. अपनी जबान पर लगाम दीजिए.. आप लोगों का जो भी झगड़ा है वो बाहर जाकर निपटाइए.. चलिए.. गेट आउट.. !! वरना मैं अभी पुलिस को फोन करके बुलाता हूँ.. !!"

बात को बिगड़ते देख शीला ने मेनेजर से सॉरी कहा.. अपनी पलकें झपकाकर इतने प्यार से उसने माफी मांगी की मेनेजर भी पिघल गया.. यही तो होता है चूत और स्तनों का प्रभाव.. !! शीला की ब्लेक नेट वाली ब्रा.. उभरते हुए स्तन.. नजर आ रही गुलाबी निप्पल.. गोरा पेट.. सुंदर चेहरा और ऊपर से वोड्का का नशा.. देखने वालों की नजर को एक पल में कैद कर देती थी शीला..

शीला: "देखिए मेनेजर साहब.. आदमी गुस्सा तभी करता है जब उसके साथ कुछ गलत होता है.. आप मेरे पार्टनर को क्यों धमका रहे हो? आप को उस आदमी को धमकाना चाहिए जो बिना इजाजत आपके कस्टमरों की तस्वीरें खींच रहा है.. " शीला के प्रभावशाली आवाज और अद्भुत सुंदरता से खींचकर वहाँ बैठे और मर्द भी इकट्ठा हो गए.. इस अबला नारी के बचाव के लिए.. कुछ तो बस शीला के स्तनों को नजदीक से देखने के लिए ही आए थे..

सब ने साथ में कहा "ऐसे कैसे बिना पर्मिशन के कोई तस्वीर ले सकता है?? और वो भी लेडिज की.. ये तो गलत है.. कम से कम पूछ तो लेना चाहिए था.." संजय कुछ बोलने गया पर शीला ने उसे इशारे से चुप रहने को कहा.. साले संजय तू चुप मर अभी.. एक गाली बक दी तो बीस लोग इकट्ठा हो गए.. और कुछ बोला और पुलिस आ गई तो लेने के देने पड़ जाएंगे.. !! संजय ने सिगरेट जलाई और कोने में खड़े होकर फूंकने लगा.. और बीस लोगों के बीच खड़ी शीला.. ब्रा और छोटी सी शॉर्ट्स पहने अपने जिस्म की नुमाइश करते हुए इस समस्या का समाधान लाने की कोशिश कर रही थी.. किसी भी हाल में वो ऐसा कोई सबूत छोड़ना नही चाहती थी.. आसपास खड़े लोगों के सहयोग से शीला ने केमेरे की सारी तस्वीरें डिलीट करवा दी.. तब जाके उसे तसल्ली हुई..

सारा मामला निपटाकर उसने आवाज देकर संजय को बुलाया.. फटाफट बिल देकर वो दोनों बाहर निकल गए.. और तेजी से चलते हुए अपने रूम पर पहुँच गए.. शीला काफी डर गई थी "संजय.. यहाँ रुकने में भी मुझे तो डर लग रहा है.. हमे अब गोवा छोड़ देना चाहिए.. इससे पहले की कोई ओर मुसीबत आ जाए.. तू चेकआउट करने की तैयारी कर.. "


"ठीक है मम्मी जी.. जैसा आप कहें.. हम चले जाएंगे.. लेकिन जाने से पहले एक जबरदस्त चुदाई तो बनती है " अपनी शॉर्ट्स की साइड से लंड बाहर निकालकर दिखाते हुए संजय ने कहा.. "ईसे आपके स्तनों के बीच रगड़ने की ख्वाहिश भी तो पूरी करनी है.. देखिए ये बेचारा कितना उदास है !!"
 

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एक घंटे के भीषण एनकाउंटर के बाद.. कमरे में सन्नाटा छा गया था.. जॉन और संजय लाश की तरह बिस्तर की एक तरफ पड़े हुए थे.. चार्ली नाम की चिड़िया.. शीला की पुख्त भुजाओं में सिमटकर छोटे बच्चे की तरह आराम से सो रही थी.. शीला की गांड में जलन हो रही थी.. नजदीक पड़े सिगार का पैकेट खोला तो वह खाली था.. शीला ने.. अकेले ही.. अपने बलबूते पर.. जॉन, संजय, चार्ली और सिगार.. सब को खाली कर दिया था.. आराम करते हुए एकाध घंटा और बीत गया..

रात के लगभग साढ़े आठ बज चुके थे.. शीला की सुस्ती अब भी कम नही हो रही थी.. संजय कपड़े पहन कर अपनी पसंद की सिगरेट लेने बाहर गया.. और जॉन बाथरूम में नहाने चला गया था.. चार्ली नंगे बदन सो रही थी.. उसकी साँसों के साथ स्तन ऊपर नीचे हो रहे थे.. देखते ही शीला को अपनी जवानी के दिनों की याद आ गई.. तब उसके स्तन भी ऐसी मध्यम कद के और सख्त थे.. निप्पल तो जैसे थी ही नही.. कुंवारी लड़कियों के स्तन बड़े नाजुक होते है.. मर्द का हाथ पड़ते ही उसका आकार बदलने लगता है..

मदन के साथ जब उसकी सगाई हुई.. उससे पहले शीला के स्तन बिल्कुल अनछुए थे.. जब वह स्कूल में पढ़ती थी तब उसके स्तन सब से बड़े थे.. सारे लड़के टकटकी लगाकर देखते तब उसे बहोत शर्म आती थी.. अपने स्तनों की सुंदरता से आज तक उसने कई मर्दों को अपनी उंगलियों पर नचाया था.. शीला के स्कूल के शिक्षक भी मौका मिलते ही शीला के कुँवारे उरोजों को तांकते रहते.. ये सब बातें याद आते ही मुस्कुराने लगी शीला..

तभी चार्ली ने आँखें खोली.. शीला के नग्न नरम उभारों पर हाथ फेरते हुए उसने शीला की गर्दन पर किस कर दी.. शीला ने भी चार्ली के स्तनों को मसल दिया.. दोनों एक दूसरे के साथ खेलते हुए खड़े हुए.. तभी जॉन बाथरूम से नहाकर नंगा बाहर निकला.. उसके पिचके हुए नरम लंड को तिरस्कार भरी नज़रों से देख रही थी शीला.. शीला को सिर्फ सख्त लंड पसंद थे..

चार्ली ने जॉन से पूछा.. "Honey..did you enjoy it or not? I loved fucking with Sanjay.. I like Indian cocks.. They are quite hard and strong..much harder than your cock..!!"

"Yeah darling.. Indian pussy is also too hot to handle definately.. This has been the most memorable fucking experience, I ever had"

तभी हाथ में सिगरेट का पैकेट लिए हुए संजय कमरे के अंदर आया.. सिगरेट के साथ साथ वह वोड्का की बोतल भी साथ ले आया था.. साथ में बाइटिंग के लिए कुछ सामान भी था.. उसने फोन करके ४ ग्लास मँगवाए.. और सब का लाइट पेग बनाया.. चारों लोग आराम से पीने लगे और उस पेग को खतम किया.. अब अलग होने का समय आ चुका था.. शीला ने अपने कपड़े पहने.. और बड़े प्यार से उसने जॉन और चार्ली को एक किस करते हुए अलविदा कहा..

होटल से बाहर निकलकर चलते चलते वह दोनों अपने होटल के कमरे में पहुंचे.. थककर संजय ने अपना पेंट उतारा और बिस्तर पर बैठ गया और शीला उसकी गोद में..

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शीला: "राजा.. आज तो तेरी सुहागरात है.. अपनी सास के संग इस रात को यादगार बना देना.. मुझे इतना चोद.. इतना चोद की मेरी जन्मों की प्यास बुझ जाएँ.. मैं बहोत तरसी हूँ बेटा..!!"

संजय: "मम्मी जी, आपकी प्यास का तो मुझे उसी दिन पता चल गया था जिस दिन मैंने आपको पेड़ के तने से चूत रगड़ते हुए देखा था.. तभी में समझ गया था की पापा जी की गैर मौजूदगी में आप कितना तड़प रही थी"

शीला ने चोंककर कहा "अच्छा.. !! अब समझी!! तो उस रात वो तुम ही थे.. जिस ने मुझे अंधेरे में पीछे से चोद दिया था.. मुझे शक तो था ही.. की ऐसा काम तुम्हारे अलावा और कोई नही कर सकता.. पर इतना बड़ा रिस्क तूने कैसे लिया संजय? तुझे डर नही लगा था क्या?"

संजय: "अरे मम्मी जी, आपकी हालत तब इतनी खराब थी की पीछे से कोई कुत्ता आकर चोद जाता तो भी आप मना नही करती.. बहोत उत्तेजित थी आप.. इसीलिए तो मैंने मौका देखकर अपना लंड घुसा दिया सीधा.. पर सच बताना.. कैसा लगा था आपको उस रात?"

शीला: "मुझे तो बहोत मज़ा आया था.. लंड के लिए तड़प रही थी तभी चूत में लंड घुस गया.. उससे ज्यादा क्या चाहिए!! संजय.. अच्छा हुआ जो तू मुझे गोवा लेकर आया.. हम साथ में मजे तो करेंगे ही.. पर यहाँ आने से उन दो फिरंगियों के साथ मज़ा करने का जबरदस्त मौका मिल गया "

संजय: "मम्मी जी, उस चार्ली की चूत बड़ी ही टाइट थी.. वैशाली को पहली बार चोदा था उससे भी टाइट.. !! मुझे लगता है की जॉन ने उसे ज्यादा रगड़ा नही होगा अब तक"

शीला: "मुझे तो ऐसा नही लगता.. जॉन के साथ चार्ली यहाँ गोवा तक आई है तो चुदाई में तो कोई कसर नही छोड़ी होगी दोनों ने.. मेरे हिसाब से तो चार्ली भी एक नंबर की चुदक्कड़ ही थी.. हाँ.. उसकी चुत बेशक काफी मुलायम और टाइट थी.." साथ लेकर आए बोतल से संजय को घूंट पिलाते हुए शीला ने नीचे हाथ डालकर संजय के लंड से खेलना शुरू कर दिया था.. संजय का लंड एकदम गन्ने जैसा सख्त हो गया था.. गोद में बैठी शीला के स्तन हल्के हल्के मसल रहा था संजय..

संजय के हाथ में सिगरेट थी.. शीला ने सिगरेट उसके हाथ से लेकर एक कश लगाया.. धुआँ छोड़ते हुए उसने संजय के लंड को पकड़कर उससे पूछा "तैयार हो गया क्या, बेटा..?"

संजय-शीला के रूम की बालकनी से समंदर का किनारा नजर आ रहा था.. वोड्का का हल्का नशा दोनों के जिस्मों को गरम कर रहा था..

संजय: "तुम्हारा हाथ पड़े और ये तैयार न हो ऐसा कभी हो सकता है क्या!!" शीला की मांसल जांघों पर हाथ फेरते हुए उसने उसकी गर्दन को काट लीया "अगर तुम मेरी सास न होती तो तो मैं तुम्हें भगाकर ले जाता.. तुम्हारे जैसा गदराया माल मैंने आज तक नही देखा.. एक दो बार चोद कर मन नही भरेगा मेरा.. दिल करता है की एक हफ्ते तक तुम्हें बिस्तर पर लेकर पड़ा रहूँ तब जाकर मेरे लंड को तसल्ली मिलेगी" कहते हुए संजय ने शीला के दोनों बबलों को रगड़ दिया

शीला: "चार्ली के साथ अनुभव कैसा रहा?"

संजय: " अरे गजब का अनुभव था.. साली इतना कडक माल थी.. मेरा तो जी करता है की आज की पूरी रात अगर उन दोनों के साथ बिताने का मौका मिलता तो मज़ा आ जाता.. सच सच बताना..तुम्हें भी जॉन के गोरे लंड की याद आ रही है ना ??"

शीला: "हाँ बेटा.. जॉन के लंड को याद करते हुए अभी भी मेरे दो पैरों के बीच की परी🧚🏻‍♀️ पागल हो जाती है.. एक बात तो है बेटा.. चुदाई के लिए जब कोई नया साथी मिले तब मज़ा और उत्तेजना दोनों दोगुने हो जाते है.. इसका क्या कारण होगा?"

संजय: "तुम्हारी बात बिल्कुल सही है.. नए साथी के संग चुदाई करने का मज़ा ही कुछ अलग होता है.. चार्ली के छेद में घुसाने का बड़ा मज़ा आया मुझे.. साली फिर से मिल जाएँ तो जीवन सार्थक हो जाए मेरा.. "

शीला संजय के लंड को पकड़कर खींचते हुए बोली "संजय, जॉन और चार्ली को बुला कर ला.. होटल तो उनका नजदीक ही है.. वो लोग वहीं होंगे.. फिर से हम चारों मिलकर चुदाई करते है"

संजय: "अभी तो मैं तुम्हें मन भरकर चोदना चाहता हूँ.. घर लौटने के बाद तो वापिस तुम्हें "आप" कहना पड़ेगा.. इतनी आसानी से तुम मिलोगी भी नही मुझे.. प्लीज.. अब और कोई हम दोनों के बीच नही आएगा.. जो भी करना है हम दोनों ही करेंगे.. " संजय ने शीला को बेड पर लैटा दिया.. बगल में पड़ा वोड्का का खाली ग्लास गिर गया.. जो गिने चुने कपड़े उन दोनों ने पहन रखे थे वो उतार दिए..

संजय के फुँकारते नाग जैसे लंड को शीला ने बड़े ही प्यार से हाथ में पकड़कर चूम लिया "घर लौटने के बाद इसकी बहोत याद आएगी मुझे.. मैंने कभी सपने भी नही सोचा था की अपने दामाद के साथ करने का मौका मिलेगा मुझे.. औरतों को पटाने में तू मास्टर है.. सच सच बता.. चेतना को कितनी बार चोदा है तूने? "शीला का दिमाग पुरानी बातें भुला नही था

शीला की बात सुनकर संजय चोंक पड़ा..

"कौन चेतना, मम्मी जी?"

"भोसड़ी के.. ज्यादा शाणा मत बन.. वही चेतना.. जिसने तुझे उस दिन शाम को पाँच बजे अपने घर बुलाने का मेसेज भेजा था.. मेरे साथ चालाकी मत कर संजय, और सब सच बता दे.. वैसे चेतना ने तो मुझे सब बता ही दिया है.. " संजय के पास अपना बचाव करने के लिए कुछ भी नही बचा था.. मन ही मन वो चेतना को गालियां दे रहा था.. हरामखोर ने शीला को सब बता दिया!!! इन औरतों के पेट में एक बात नही टिकती.. कितना भी समझाओ, वक्त आने पर तोते की तरह बोलने लगती है..

अब शीला के शरण में आए बगैर संजय के पास ओर कोई चारा नही था.. सरेंडर होकर उसने सारी बातें कुबूल कर ली.. उसकी सारे बातें सुनते हुए शीला संजय का लंड सहला रही थी

शीला: "संजु बेटा.. तू कहीं भी मुंह मार.. कितने भी मजे कर.. मुझे कोई आपत्ति नही है.. पर तू मेरी बेटी वैशाली को दुख देगा तो वो मैं नही सहूँगी.. मैं क्या कोई भी माँ ये बर्दाश्त नही करेगी.. अब तू मुझे बता.. वैशाली के साथ आगे की ज़िंदगी बिताने का क्या प्लान है तेरा? मैंने सुना है की प्रमिला के साथ साथ किसी रोजी नाम की लड़की के साथ भी तेरा चक्कर है !! तू उसके साथ दिन रात गेस्टहाउस में पड़ा रहेगा तो मेरी वैशाली का क्या होगा??? अगर वो कहीं किसी ओर की तरफ मुड़ गई तो लेने के देने पड़ जाएंगे तुझे"

संजय सुनते सुनते हौले हौले शीला के स्तनों को मसल रहा था.. वोड्का के हल्के नशे में वह बोला: "मम्मी जी, वैशाली काफी टाइम से मुझे चोदने नही देती.. जब पत्नी ही आपकी इच्छाओं को पूरा ना करे तो पति आखिर क्या करेगा!! मेरे इस लंड को लेकर में कहाँ जाऊ?? आप ही बताइए.. मुझे दिन में कम से कम एक बार तो सेक्स चाहिए ही चाहिए.. जब तक एक बार वीर्य छूट न जाएँ मुझे नींद ही नही आती.. मैं थोड़ा ज्यादा ही एक्टिव हूँ इस बारे में.. ये तुम भी जान गई हो.. वैशाली मुझे जरा सा भी सहयोग नही देती.. मैं उसके स्तन दबाने जाता हूँ तो बोलती है - मुझसे तो ज्यादा रोजी के बड़े है.. जा उसके जाकर दबा - अब तुम ही बताओ.. ये सब बोलकर वो क्या साबित करना चाहती है.. अरे तुम नही दबाने देती तभी तो मुझे रोजी के पास जाना पड़ा.. इसलिए फिर मैंने भी उस पर ध्यान देना छोड़ ही दिया.. "

संजय ने अपना दुखड़ा तो सुना दिया पर ये नही बताया की वह कुछ काम धंधा नही करता और पूरे दिन चोदने की फिराक में ही रहता है इसलिए वैशाली उसे सहयोग नही देती.. शीला का मन तो किया की वह उसे ये भी बताएं पर वह हर कदम फूँक फूँक कर रखना चाहती थी..

शीला: "संजु बेटा.. अगर मैं वैशाली को समझाकर मना लूँ.. तो क्या तुम रोजी को छोड़ दोगे?"

संजय: "मम्मी जी, रोजी को तो मैं अब छोड़ नही सकता!!"

शीला: "क्यों? कहीं तुम दोनों ने छुपकर शादी तो नही कर ली!!"

संजय: "नही मम्मी जी.. बात दरअसल यह है की.. मैंने रोजी के पापा से ४ लाख रुपये ब्याज पर लिए है.. जब तक वो पैसे न लौटा दूँ मैं रोजी को नही छोड़ सकता.. !!"

शीला: "अच्छा?? मतलब ४ लाख के ब्याज के बदले वो तुझसे चुदवा रही है.. पर बेटा तू ये भी तो सोच.. तू रोजी को बाहों में भरकर दिन रात चोदता-चाटता रहेगा तो पैसे कैसे लौटाएगा? पैसे कमाने के लिए बिस्तर से उठकर कोई काम धंधा भी करना पड़ेगा ना.. !!"

संजय: "मम्मी जी, मैं बस इसी जुगाड़ में हूँ.. इसीलिए तो पंद्रह दिनों से यहाँ पड़ा हुआ हूँ.. "

शीला: "यहाँ आने के बाद तूने काम कम किया और चुदाई ज्यादा की है.. ये बहानेबाजी बहोत हुई.. कुछ ढंग का काम करना शुरू कर नही तो तेरे वैवाहिक जीवन को बर्बाद होने से कोई नही बचा पाएगा.. और वहाँ कलकत्ता में बैठकर कुछ नही होने वाला तेरा.. वहाँ तेरे लफंगे दोस्तों की संगत में तू कुछ नही कर पाएगा.. इससे अच्छा यही होगा की तुम लोग यहीं शिफ्ट हो जाओ"

संजय: "शिफ्ट तो मैं अभी हो जाऊँ.. पर फिर मेरे माँ-बाप का ध्यान कौन रखेगा!! इस बुढ़ापे में मैं उन्हे अकेला नही छोड़ सकता"

संजय की गोद में ठीक से बैठते हुए उसके लंड को अपनी चूत के सुराख पर सेट कर दिया.. कडक लोड़े को गरम चिपचिपा छेद मिलते ही वो लपक कर अंदर घुस गया.. जैसे सांप अपने बिल में घुस जाता है.. पूरा लंड हजम करने के बाद शीला अपनी गांड हिलाते और रगड़ते हुए बात को आगे बढ़ाने लगी

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"ये बात तो तेरी सही है बेटा.. लेकिन अगर उनकी इतनी चिंता है तो उन्हे भी यहाँ साथ ले आ.. हम सब मिलकर तेरे और वैशाली के लीये कुछ सोचेंगे और तुम्हारी ज़िंदगी को वापिस पटरी पर लाने की कोशिश करेंगे.. माँ-बाप की चिंता होना स्वाभाविक है.. पर क्या तूने कभी ये सोचा है की इस उम्र में तेरी इस आवारागर्दी के चलते उन्हे तुम्हारी कितनी फिक्र हो रही होगी?? पंद्रह दिनों से तुम और वैशाली यहाँ हो.. तो उनका ध्यान कौन रख रहा होगा? तू महीनों तक बाहर घूमता रहता है.. घर पर फूटी कौड़ी तक नही देता.. तो तेरी सारी कमाई जाती कहाँ है? और ऐसा तू क्या करता है जो लोगों से ब्याज पर उधार पैसे लेने की जरूरत पड़ती है??"

शीला की सीधी बात सुनकर संजय चुप हो गया.. फिलहाल जिस स्थिति में वह दोनों थे.. वह ऐसी गंभीर चर्चा के लिए अनुकूल नही थी.. लेकिन शीला की बात का न जाने क्या असर हुआ संजय पर.. उसने अपना लंड शीला के भोसड़े के बाहर निकाला और शीला को खड़ी करते हुए खुद भी खड़ा हो गया.. अपने कपड़े पहन कर वह बोला "मैं थोड़ी देर में आता हूँ, मम्मी जी" और निकल गया

रात को नौ बज चुके थे.. शीला को बड़ी जोर की भूख लगी थी.. वोड्का का नशा भी काफी चढ़ चुका था.. शीला ने खड़े होने का प्रयास किया लेकिन उसके कदम नशे के कारण डगमगा रहे थे.. वो सोच में पड़ गई.. कहाँ गया होगा संजय? कहीं उसे मेरी बातों का बुरा तो नही लगा होगा? नाराज होकर अगर वो मुझे यहीं छोड़कर चला गया तो मैं वापिस कैसे लौटूँगी? मदन को लौटने में अब ज्यादा दिन नही बचे थे.. उसके आने के बाद संजय कुछ हंगामा न कर दे.. बाप रे.. मैं क्यों इस संजय के साथ इतने दूर चली आई? शीला मन ही मन कांप उठी..

कुछ भी करके संजय को मनाना पड़ेगा.. एक बार घर पहुँच कर भी तो ये सारी बातें की जा सकती थी.. !!

शीला ने खड़ी होकर.. संजय ने दिलाया था वह छोटा सा टॉप पहन लिया.. बिना पेन्टी के उसने वह छोटी सी शॉर्ट्स भी पहन ली..

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वो कमरे से बाहर निकली और सीढ़ियाँ उतरते हुए उसने देखा की संजय ड्राइवर के साथ कुछ बात करके निकल गया..

बहकती चाल से चलते हुए वह गाड़ी तक आई.. बिना ब्रा के उछल रहे उसके स्तनों को लॉबी में खड़े सारे मर्द देख रहे थे.. शीला ड्राइवर के पास आई

शीला: "क्या नाम है तुम्हारा? और कहाँ गए तुम्हारे साहब? "

ड्राइवर: "जी, मेरा नाम हाफ़िज़ है.. और संजय साहब अभी आ रहें है.. जब तक वो न लौटे तब तक आपका खयाल रखने को कहा है मुझे.. मैडम आप अभी नशे में है.. लोग देख रहे है.. चलिए मैं आपको आपके कमरे तक पहुंचा दु.. " शीला को कंधे से सहारा देते हुए हाफ़िज़ उसे कमरे तक जाने में मदद करने लगा.. "आपका कमरा कहाँ है मैडम?"

नशे की हालत में शीला ने कहा "ऊपर के माले पर कोने वाला कमरा है" उसके कदम लड़खड़ा रहे थे.. वह हाफ़िज़ के जिस्म पर लगभग लटक ही रही थी..


कमरा खोलकर हाफ़िज़ ने शीला को सहारा देते हुए बेड पर लैटाया.. शीला को छोटा सा टॉप ऊपर चढ़ गया था.. और स्तनों का निचला हिस्सा टॉप के बाहर झलक रहा था.. शीला की छोटी सी शॉर्ट्स इतनी तंग थी की उसकी दोनों जांघें ऊपर तक खुली हुई थी.. हाफ़िज़ बस उसे देखता ही रहा
बहुत ही सुंदर लाजवाब और मदमस्त अपडेट है भाई मजा आ गया
 

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कमरा खोलकर हाफ़िज़ ने शीला को सहारा देते हुए बेड पर लैटाया.. शीला को छोटा सा टॉप ऊपर चढ़ गया था.. और स्तनों का निचला हिस्सा टॉप के बाहर झलक रहा था.. शीला की छोटी सी शॉर्ट्स इतनी तंग थी की उसकी दोनों जांघें ऊपर तक खुली हुई थी.. हाफ़िज़ बस उसे देखता ही रहा

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हाफ़िज़ ने अपने होंठों पर जीभ फेरते हुए कहा "क्या गदराया जिस्म है आपका मैडम.. !! आपको ऐसे देखकर मेरा भी मन कर रहा है.. संजय साहब के आने से पहले मुझे भी चांस दीजिए.. " कहते हुए हाफ़िज ने शीला के टॉप के नीचे से हाथ डालकर दोनों स्तनों को दबाकर मसल दिया..

"एयय.. छोड़ मुझे.. रासकल.. छोड़.. साले तेरी औकात ही क्या है मुझे हाथ लगाने की.. !!" शराब का नशा अब शीला के सर चढ़कर बोलने लगा था.. लहराती आवाज में उसने बोलकर हाफ़िज़ के हाथों से खुदको छुड़ाते हुए शीला ने कहा "जा.. जाकर अपनी माँ के दबा.. "

सुनकर हाफ़िज़ गुस्से से तिलमिलाने लगा.. शीला के ऊपर वो सवार हो गया और बोला "भेनचोद.. मेरी औकात की बात करती है.. अभी तुझे दिखाता हूँ मेरी औकात.. तेरी माँ को चोदू, हरामजादी.. अपने दामाद का लोडा गाड़ी में चूसते वक्त तुझे तेरी औकात याद नही आई थी क्या.. साली रांड!!" कहते हुए गुस्से से उसने अपने दोनों हाथों से शीला का टॉप फाड़ दिया.. शीला के गोरे गोरे स्तन खुले हो गए..

हाफ़िज़ शीला के ऊपर अपना सारा वज़न डालकर चढ़ गया और उसके होंठों को चाटने लगा.. शीला छूटने के लिए छटपटाने लगी.. पर हाफ़िज़ की मजबूत पकड़ के आगे वो लाचार थी.. ऊपर से वो नशे में भी थी.. शीला चिल्लाने लगी.. हाफ़िज़ ने उसके गाल पर दो कडक तमाचे रसीद करते हुए उसे चुप करा दिया..

"साली रंडी.. अगर फिर से चिल्लाई तो तेरे घरवालों को सब बता दूंगा..घर तो तेरा मैंने देख ही रखा है.. किसी को मुंह दिखाने के लायक नही छोड़ूँगा तुझे.. याद रखना.. अब चुपचाप मुझे जो करना है वो कर लेने दे.. समझी!!" सुनकर शीला की गांड ही फट गई.. अपने हथियार डालकर उसने आँखें बंद कर ली.. और अपने बदन को ढीला छोड़ दिया..

हाफ़िज़ ने शीला की चड्डी उतारकर उसकी चूत पर हाथ फेरते हुए कहा "साली.. बहोत गरम चीज है तू" कहते हुए हाफ़िज़ ने अपने पेंट की चैन खोल दी.. आँखें बंद कर पड़ी हुई शीला ने चैन खुलने की आवाज सुनी.. अनजाने में ही उससे आँखें खुल गई.. पेंट उतार रहे हाफ़िज़ के लंड को देखने की लालच वह रोक नही पाई.. पेंट उतरते ही उसने देखा की हाफ़िज़ के अंडरवेर में इतना बड़ा उभार था.. डंडे जैसा !!! वह फुला हुआ हिस्सा देखककर शीला मन ही मन हिल गई..

अपने लंड वाला हिस्सा शीला के करीब ले जाकर बोला "ले मादरचोद.. निकाल बाहर अपने बाप का लंड.. और देख.. की यह तेरे भोसड़े के परखच्चे उड़ाने के काबिल है भी या नही.. !!" शीला ने अब विरोध करना छोड़ ही दिया था.. हाफ़िज़ की धमकी सुनने के बाद उस में हिम्मत ही नही बची थी.. कहीं ये कमीना आकर मदन को सब कुछ बता देगा तो क्या हाल होगा!!!

चुपचाप शीला ने हाफ़िज़ के अंडरवेर में बने उभार पर हाथ रख दिया.. "तुरंत बाहर मत निकाल ईसे मेरी जान.. पहले थोड़ा हाथों से सहला.. ताकि ये और भी सख्त हो जाए.. फिर बाहर निकालना.. समझ गई!!" शीला की निप्पलों को खींचते हुए हाफ़िज़ ने कहा "कसम से.. गजब का माल है तू.. " शीला की नाभि के अंदर उंगली करने के बाद उसने झुककर उसके भोसड़े में तीन उँगलियाँ एक साथ डाल दी.. और शीला की काँखों को चाटने लगा..

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४४० वॉल्ट का करंट लगा शीला को.. हाफ़िज़ उसकी काँख को ऐसे चाट रहा था जैसे चूत चाट रहा हो.. उत्तेजित होकर भारी सांसें लेते हुए उसने हाफ़िज़ के लंड को अंडरवेर के ऊपर से ही दबाया..

शीला के मन में ही संवाद चलने लगा.. "तू क्या कर रही है उसका पता भी है तुझे?? "लेकिन वोड्का का नशा और चूत की खुजली.. दोनों ने मिलकर शीला के होश छीन लिए थे.. इच्छा न होने के बावजूद वह हाफ़िज़ के लंड को बाहर से ही सहलाते हुए सिसक रही थी.. जांघिये के अंदर लंड ने तंबू बना दिया था.. उसे उतारकर शीला ने लंड बाहर खींचा.. स्प्रिंग की तरह उछल कर बाहर निकला हाफ़िज़ का लोडा.. एकदम काला.. ब्लेक कोब्रा जैसा.. और इतना मोटा.. शीला को जीवा के लंड की याद आ गई.. हाफ़िज़ ने अपना झूलता हुआ लंड शीला के मुंह के आगे रख दिया.. शीला ने एक आखिरी बार शर्माने का नाटक किया.. और अपनी नजरें फेर ली..

हाफ़िज़ ने खींचकर एक तमाचा लगा दिया शीला के गाल पर.. और उसे धमकाते हुए कहा "मादरचोद.. नजर क्यों फेर ली? टाइम खराब मत कर.. पकड़ ईसे और मुंह में ले चल.. जैसे अपना दामाद का लिया था.. " हाफ़िज़ के मुंह से गालियां सुनकर.. पता नही क्यों पर शीला को अच्छा लगा.. उसकी चूत ने रस की एक धारा छोड़ दी.. हाफ़िज़ नीचे झुककर शीला के गुब्बारों को चूसने लगा..

शीला हाफ़िज़ के विकराल लंड को हाथ में लेकर खेलने लगी.. उसके शरीर में वासना का भूत नाचने लगा.. उसके भोसड़े ने कडक लंड की गंध परख ली थी.. और वो बेसब्र हो रहा था.. हाफ़िज़ ने शीला की काँखों के बीच लंड को दो बार अंदर बाहर किया... गदराई काँखों में लंड घुसते ही उत्तेजना से हाफ़िज़ का थोड़ा सा वीर्य छूट गया और शीला के बबलों पर जा गिरा

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"साली रंडी.. तेरी बगल भी भोसड़े जैसी गरम है.. क्या बात है.. कहाँ से सीखा ये सब.. जरा मुझे भी बता.. !!" शीला ने जवाब नही दिया.. वह उसके आँड़ों को सहलाती रही.. शीला की काँख से लंड निकालकर वापिस अंदर डाला हाफ़िज़ ने.. और उसकी काँख को ही चोदने लगा.. हाफ़िज़ की इस हरकत ने शीला को पागल कर दिया.. अपनी काँख से लंड निकालकर उसने मुंह में ले लिया.. और अपनी लार से गीला करते हुए चूसने लगी.. मुंह के अंदर उसने लंड पर इतना दबाव बनाया की उसे डर लगने लगा की कहीं हाफ़िज़ उसके मुंह में ही वीर्यस्त्राव न कर बैठे.. !!

हाफ़िज़ जोर से चिल्लाया "अरे मादरचोद.. खा जाएगी क्या मेरा लंड?? छोड़ दे भेनचोद.. तेरे बाप का पानी छूट जाएगा" शीला के मुंह से हाफ़िज़ ने लंड बाहर खींच लिया..

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शराब के नशे में शीला ने कहा "साले.. चूसने दे ना.. क्यों मेरा मज़ा खराब कर रहा है? पानी गिरता तो मेरे मुंह में गिरता उसमें तेरे बाप का क्या जा रहा था.. भोसड़ी के चूतिये!!" हाफ़िज़ अब शीला के स्तनों पर अपने लंड से थपकियाँ लगाने लगा.. सख्त लंड की थपकियों से शीला को दर्द हो रहा था.. लंड की मोटाई देखकर शीला मन ही मन रघु और जीवा को याद कर रही थी.. घर जाने के बाद एक बार उन दोनों से चुदवाने का मन बना लिया उसने..


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हाफ़िज़: "शीला तेरी जवानी तो बड़ी ही कातिल है मेरी जान.. चल.. मेरा लंड अपनी चूत में लेने के लिए तैयार हो जा.. कुत्तिया बनाकर चोदूँगा.. चार पैर पर हो जा.. " कहते हुए उसने शीला की जांघ पर काट लिया..

शीला: "आह्ह साले.. क्या कर रहा है? भड़वे अपनी माँ को भी कुत्तिया बनाकर चोदता है क्या? और तमीज़ से बात कर.. मैं तेरी मालकिन हूँ.. कोई रंडी नही.. ड्राइवर है तू.. मेरा शोहर नही.. जो करने आया है वो कर और निकल यहाँ से.. ले डाल अपना लोडा.. और देख.. भूल कर भी पीछे के छेद में डालने की कोशिश मत करना.. वरना चिल्ला चिल्लाकर माँ चोद दूँगी तेरी.. समझा.. !!! आगे के छेद में जितना मर्जी डाल ले.. "

शीला घोड़ी बनकर हाफ़िज़ का लंड अपने भोसड़े में लेने के लिए तैयार हो गई.. उत्तेजना इतनी प्रबल थी की उसके दिलोदिमाग पर सुरूर सा छा गया था.. शराब से कई ज्यादा नशा सेक्स में होता है.. और शीला के सर पर फिलहाल दोनों नशे हावी हो चुके थे.. उसका शरीर वासना से तप रहा था..

लंड का सुपाड़ा अंदर जाते ही शीला ने कहा "जरा धीरे से हाफ़िज़.. दर्द हो रहा है.. " हाफ़िज़ का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा था.. लेकिन शीला का भोसड़ा भी कुछ कम नही था.. दो दमदार धक्कों में ही हाफ़िज़ का लंड निगल लिया उस भोसड़े ने.. इतना मोटा था की शीला का पूरा भोसड़ा भर गया.. मज़ा आ गया शीला को.. खुजली से तिलमिलाती चूत में एक अजीब सी ठंडक मिली..

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हाफ़िज़ आनन-फानन में धक्के लगाने लगा.. शीला गांड उछाल उछाल कर चुदने लगी... इस युद्ध में कौन जीतेगा ये कहना बड़ा ही मुश्किल था..

"ओह्ह भेनचोद.. क्या लोडा है तेरा!! मज़ा आ गया.. चोद दे.. चोद दे अपनी मैया की चूत.. ठोक जोर से.. हाफ़िज़.. हाँ और जोर से.. लगा धक्के साले.. आह्ह आह्ह आह्ह अहह.. ऐसे ही.. यस्स.. क्या ताकत है तुझ में भोसड़ी के.. सच में असली मर्द है तू.. साले.. लगा दम.. दिखा अपना जोर.. कोई कसर मत छोड़ना.. अपने गधे जैसे लंड से फाड़ दे मेरा भोसड़ा..आह्ह.. !!" हाफ़िज़ के पसीने छूट गए.. शीला की कमर और कूल्हों पर तमाचे लगाते हुए वह लगातार धक्के लगा रहा था.. "आह्ह आह्ह ओह्ह ओह्ह" की आवाजों से पूरा कमरा गूंज उठा था.. शीला ने अपनी चूत की मांसपेशियों से कसकर पकड़ रखा था हाफ़िज़ का लंड.. उसके दोनों वर्टिकल होंठों के बीच फंस चुका था हाफ़िज़ का लंड.. धक्के खा खा कर लाल हो गई थी शीला की चूत..


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पूरे पंद्रह मिनट की भीषण चुदाई के बाद शीला का जबरदस्त ऑर्गजम हो गया.. हाफ़िज़ के जानदार लोड़े की वो कायल हो गई.. शीला के कूल्हों को थप्पड़ लगाते हुए हाफ़िज़ ने अपने लंड से पावरफूल पिचकारी दे मारी.. गरम गरम वीर्य की बौछार होते ही शीला का भोसड़ा तृप्त हो रहा था..

थककर हाफ़िज़ ने अपना लंड बाहर निकाला और बिस्तर पर लेट गया.. हाफ़िज़ की विशाल छाती पर शीला भी लाश की तरह ढेर हो गई.. उसके मदमस्त बॉल हाफ़िज़ की छाती से दबकर चपटे हो गए थे.. उसकी दाढ़ी पर अपने कोमल गालों को रगड़ते हुए शीला उसे चूमने लगी.. नशा उसका सर पर इस कदर सवार था की उसे यह भी एहसास नही हो रहा था की वो किसी मामूली से ड्राइवर से चुदकर लेटी हुई थी.. हाफ़िज़ के खुरदरे हाथ शीला की चिकनी गोरी पीठ को सहला रहे थे.. पीठ से होते हुए उसके हाथ शीला के कूल्हों तक जा पहुंचे.. और अपनी उंगली से वो शीला की गांड के छेद को कुरेदने लगा.. गांड पर स्पर्श होते ही शीला को संजय की याद आ गई.. कहाँ गया होगा वो चूतिया? मुझे यूं अकेले छोड़कर न गया होता तो मुझे इस कमबख्त हाफ़िज़ से चुदना न पड़ता.. खैर जो भी हुआ अच्छा ही हुआ.. मज़ा तो बहोत आया.. और संजय को कहाँ पता चलने वाला था की मैंने हाफ़िज़ से चुदवाया है!! लेकिन संजय के आने से पहले मुझे इस भड़वे को रवाना करना होगा.. वैसे भी ये मादरचोद गांड का मुआयना कर रहा है.. उसकी नियत बिगड़े उससे पहले ही इससे छुटकारा पाना होगा.. ये मेरी गांड में डालेगा तो यही गोवा में मेरी लाश गिर जाएगी..

शीला ने तुरंत हाफ़िज़ के गाल को थपथपाकर उसे जगाया "हाफ़िज़.. तू अब निकल.. तेरे साहब आ जाएंगे तो मुसीबत हो जाएगी.. और हाँ.. गलती से भी उन्हे मत बताना.. हमारे बीच जो कुछ भी हुआ उसके बारे में.. "

हाफ़िज़ ने शीला को अपनी बाहों की गिरफ्त से मुक्त किया.. "नही पता चलेगा.. फिकर मत कीजिए.. आप के साथ जो मज़ा आया न मैडम.. वो आज से पहले कभी नही आया.. यहाँ तक की मेरी बीवी के साथ भी इतना मज़ा नही लूटा था मैंने.. वो तो आप से उम्र में भी आधी है.. और उसकी चूत भी आपसे काफी टाइट है.. लेकिन पता नही क्यों आपकी चूत ने जिस तरह मेरा लंड को जकड़ा था.. वो उसकी चूत नही कर पाती.. और आपका सीना भी कितना गजब है.. ये बड़े बड़े है आपके.. मैं तो आज का दिन जिंदगी भर नही भूलूँगा.. दोबारा कभी मौका मिला तो करने दोगी ना.. !!"

"हाँ हाँ.. करने दूँगी.. मगर अब तू यहाँ से निकल मेरे बाप.. " हाफ़िज़ के मुरझाए लंड को प्यार से थपकी लगाते हुए शीला ने कहा

"अरे मैडम.. क्यों फिर से जगाती हो उसे? फिर से करना पड़ेगा !!" हाफ़िज़ ने शीला को अपनी बाहों में दबा लिया.. "ओह्ह आपके ये रसीले होंठ.. ये सेक्सी बदन.. भेनचोद जी करता है की एक बार फिर से पटक कर चोद दूँ"

शीला घबरा गई.. मैंने क्यों इस हरामी के लंड को छेड दिया.. !!! कहीं संजय आ टपका तो गजब हो जाएगा.. कैसे भगाऊ ईसे.. एक बार चोद लिया फिर भी मन नही भरा इस चूतिये का..

शीला: "देख हाफ़िज़.. मुझे भी तेरा तगड़ा लंड बहोत पसंद आया.. मेरे दामाद के लंड से भी बेहतर है तेरा.. मैं भी इससे बार बार चुदवाना चाहती हूँ.. एक बार से तो मेरा मन भी नही भरता.. मगर इस वक्त तू यहाँ से निकल जा.. घर जाने के बाद मैं तुझे बुलाऊँगी.. और तुझे अपनी मनमानी करने दूँगी.. ठीक है.. !!!" कहते हुए शीला ने उसे प्यार से चूमा और रवाना कर दिया

शीला का दिमाग अब कुछ शांत हुआ और विचार चलने लगे.. मैंने एक ड्राइवर के साथ!! शीला तो इतनी गिरी हुई कब से हो गई? कितनी संस्कारी थी तू और अब देखो? तभी उसकी नजर अपने टॉप पर पड़ी.. जो हाफिज ने खींचकर फाड़ दिया था.. बाप रे!! अब क्या करूँ?? साड़ी के अलावा और कोई कपड़े तो है नही.. संजय ये देखकर पूछेगा तो क्या जवाब दूँगी.. ??


तभी डोरबेल बजने की आवाज आई.. शीला ने जल्दी जल्दी बेग से काली नेट वाली ब्रा निकालकर पहन ली.. और नीचे संजय ने दिलाई शॉर्ट्स चढ़ा दी.. फिर दरवाजा खोला.. वो संजय ही था.. उसके हाथ में किंग एडवर्ड सिगार का पैकेट था.. देखते ही शीला खुश हो गई.. जॉन और चार्ली की याद आ गई उसे.. खासकर जॉन का गोरा लंड और गुलाबी सुपाड़ा.. !!

नशे में लहराती आवाज में शीला ने कहा "ये बड़ा अच्छा काम किया तूने बेटा.. ये सिगार मुझे बहोत पसंद आ गई है.. अब खाने का कुछ करें!!! जोरों की भूख लगी है मुझे.. "

"हाँ मम्मी जी.. चलिए बाहर जाकर कुछ खाते है.. यहाँ आने के बाद हम बाहर घूमे ही नही है !! कितने घंटों से हम बस कमरे में ही बंद बैठे है "

"कोई बात नही.. वैसे गोवा हो या गुवाहाटी.. बाजार सब जगह एक जैसा ही होता है.. हमे उन अंग्रेजों से मजे करने का मौका मिल गया वो क्या कम था!!"

"हाँ वो तो है मम्मी जी.. चार्ली की चूत का स्वाद अब भी मेरी जुबान पर है.. क्या चीज थी वो.. !! मम्मी जी उसकी गांड का छेद गुलाब जैसे कोमल और लाल था.. देखकर मन हो रहा था की बस उसे चाटता ही रहूँ.. " शॉर्ट्स के ऊपर से अपने लंड को दबाते हुए संजय ने कहा

शीला समझ गई की उसके दामाद का लंड भी भूखा था.. अगर उसे खिलाने गई तो वह भूखी रह जाएगी..

शीला: "संजय बेटा.. पहले बाहर जाकर खाना खा लेते है.. थोड़ी देर और रुके तो तेरे इसको शांत करने में और एक घंटा निकल जाएगा" हँसकर संजय के लंड की ओर इशारा करते हुए उसने कहा

दोनों आजाद पंछी की तरह हाथ में हाथ डालकर गोवा की गलियों में घूमने लगे.. देखकर किसी को भी अंदाजा न हो की दोनों सास-दामाद थे.. नव-विवाहित कपल की तरह दोनों एक दूसरे से लिपटे हुए चल रहे थे.. चलते चलते एक रेस्टोरेंट पसंद आई.. दोनों अंदर गए और खाना खाते वक्त एक दूसरे को छेड़ते रहे.. शीला अपनी काली ब्रा पहन कर ही बाहर आई थी.. रेस्टोरेंट में बैठे सारे लोग उसे घूर रहे थे.. सब के आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी शीला.. और स्वाभाविक भी था.. इतने बड़े बड़े गदराए स्तनों की मालकिन.. सिर्फ नेट वाली ब्रा पहन कर बाहर निकले तो लोगों की नजर पड़ना जायज थी.. शीला की निप्पल की आकृति भी ब्रा से साफ नजर आ रही थी..

दोनों खाना खाने में मगन थे तभी केमेरे की फ्लेश ने उन्हे चोंका दिया.. एक शख्स उनके बगल वाले टेबल पर बैठकर शीला की तस्वीरे ले रहा था

"अबे ओय.. क्या कर रहा है तू??" संजय उठ खड़ा हुआ..

उस आदमी ने अपनी जेब से आई-कार्ड निकालकर दिखाते हुए कहा "मैं जर्नलिस्ट हूँ सर.. गोवा को कवर करने आया हूँ.. आप फिकर मत कीजिए.. मैं तो फ्रंट पेज पर डालने के लिए किसी आकर्षक सुंदरी की तलाश में था.. आप लोग मुझे परफेक्ट कपल लगे इसलिए तस्वीर ले रहा हूँ.. फ्रंट पेज पर छपेगी.. आप फेमस हो जाओगे"

"अरे हमें नही आना तेरे फ्रंट पेज पर.. समझा.. !! चल डिलीट कर अभी के अभी.. " संजय ने उसे धमकाते हुए कहा.. मन ही मन वो और शीला दोनों डर गए थे.. शीला ने उसके हाथ से केमेरा छिन लिया.. उसे आता नही था फिर भी जो मन में आए वो स्विच दबाने लगी.. संजय से ज्यादा चिंता शीला को थी.. संजय को क्यों ज्यादा फिक्र होती.. नंगा नहाएगा क्या और निचोड़ेगा क्या..!!! लेकिन शीला के लिए ये बड़ा खतरा था.. जब चारित्र की बात आती है तब लोग मर्द से ज्यादा औरत पर ही उंगली उठाते है.. इसी कारण से तो औरतें मर्दों जितनी बिंदास होकर मजे नही करती.. !!

संजय ने उस फोटोग्राफर का गिरहबान पकड़ लिया.. और उसे एक घुसा मारते हुए कहा "बिना इजाजत हमारी तस्वीर लेने की तेरी हिम्मत कैसे हुई बे, मादरचोद?? " संजय इतनी जोर से गाली बोला की मेनेजर दौड़ते हुए उनके पास आ गया..

मेनेजर: "ओ मिस्टर.. अपनी जबान पर लगाम दीजिए.. आप लोगों का जो भी झगड़ा है वो बाहर जाकर निपटाइए.. चलिए.. गेट आउट.. !! वरना मैं अभी पुलिस को फोन करके बुलाता हूँ.. !!"

बात को बिगड़ते देख शीला ने मेनेजर से सॉरी कहा.. अपनी पलकें झपकाकर इतने प्यार से उसने माफी मांगी की मेनेजर भी पिघल गया.. यही तो होता है चूत और स्तनों का प्रभाव.. !! शीला की ब्लेक नेट वाली ब्रा.. उभरते हुए स्तन.. नजर आ रही गुलाबी निप्पल.. गोरा पेट.. सुंदर चेहरा और ऊपर से वोड्का का नशा.. देखने वालों की नजर को एक पल में कैद कर देती थी शीला..

शीला: "देखिए मेनेजर साहब.. आदमी गुस्सा तभी करता है जब उसके साथ कुछ गलत होता है.. आप मेरे पार्टनर को क्यों धमका रहे हो? आप को उस आदमी को धमकाना चाहिए जो बिना इजाजत आपके कस्टमरों की तस्वीरें खींच रहा है.. " शीला के प्रभावशाली आवाज और अद्भुत सुंदरता से खींचकर वहाँ बैठे और मर्द भी इकट्ठा हो गए.. इस अबला नारी के बचाव के लिए.. कुछ तो बस शीला के स्तनों को नजदीक से देखने के लिए ही आए थे..

सब ने साथ में कहा "ऐसे कैसे बिना पर्मिशन के कोई तस्वीर ले सकता है?? और वो भी लेडिज की.. ये तो गलत है.. कम से कम पूछ तो लेना चाहिए था.." संजय कुछ बोलने गया पर शीला ने उसे इशारे से चुप रहने को कहा.. साले संजय तू चुप मर अभी.. एक गाली बक दी तो बीस लोग इकट्ठा हो गए.. और कुछ बोला और पुलिस आ गई तो लेने के देने पड़ जाएंगे.. !! संजय ने सिगरेट जलाई और कोने में खड़े होकर फूंकने लगा.. और बीस लोगों के बीच खड़ी शीला.. ब्रा और छोटी सी शॉर्ट्स पहने अपने जिस्म की नुमाइश करते हुए इस समस्या का समाधान लाने की कोशिश कर रही थी.. किसी भी हाल में वो ऐसा कोई सबूत छोड़ना नही चाहती थी.. आसपास खड़े लोगों के सहयोग से शीला ने केमेरे की सारी तस्वीरें डिलीट करवा दी.. तब जाके उसे तसल्ली हुई..

सारा मामला निपटाकर उसने आवाज देकर संजय को बुलाया.. फटाफट बिल देकर वो दोनों बाहर निकल गए.. और तेजी से चलते हुए अपने रूम पर पहुँच गए.. शीला काफी डर गई थी "संजय.. यहाँ रुकने में भी मुझे तो डर लग रहा है.. हमे अब गोवा छोड़ देना चाहिए.. इससे पहले की कोई ओर मुसीबत आ जाए.. तू चेकआउट करने की तैयारी कर.. "


"ठीक है मम्मी जी.. जैसा आप कहें.. हम चले जाएंगे.. लेकिन जाने से पहले एक जबरदस्त चुदाई तो बनती है " अपनी शॉर्ट्स की साइड से लंड बाहर निकालकर दिखाते हुए संजय ने कहा.. "ईसे आपके स्तनों के बीच रगड़ने की ख्वाहिश भी तो पूरी करनी है.. देखिए ये बेचारा कितना उदास है !!"
बहुत ही गरमागरम कामुक और जबरदस्त अपडेट हैं भाई मजा आ गया
 

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सारा मामला निपटाकर उसने आवाज देकर संजय को बुलाया.. फटाफट बिल देकर वो दोनों बाहर निकल गए.. और तेजी से चलते हुए अपने रूम पर पहुँच गए.. शीला काफी डर गई थी "संजय.. यहाँ रुकने में भी मुझे तो डर लग रहा है.. हमे अब गोवा छोड़ देना चाहिए.. इससे पहले की कोई ओर मुसीबत आ जाए.. तू चेकआउट करने की तैयारी कर.. "

"ठीक है मम्मी जी.. जैसा आप कहें.. हम चले जाएंगे.. लेकिन जाने से पहले एक जबरदस्त चुदाई तो बनती है " अपनी शॉर्ट्स की साइड से लंड बाहर निकालकर दिखाते हुए संजय ने कहा.. "ईसे आपके स्तनों के बीच रगड़ने की ख्वाहिश भी तो पूरी करनी है.. देखिए ये बेचारा कितना उदास है !!"

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अपने दामाद का नरम लंड पकड़ते हुए शीला ने कहा "बेटा.. बिना चुदे तो मैं भी जाना नही चाहती.. दिल भरकर तेरे धक्के खाने है.. मेरी चूत को तेरे लंड से पावन करने के बाद ही हम गोवा छोड़ेंगे.. !! अब देर मत कर.. और अपनी मम्मी जी की चूत चाटने की सेवा शुरू कर दे.. "

"आह्ह मम्मी जी.. आपकी तो बातें सुनकर ही मेरा लंड कहीं पिचकारी न छोड़ दे.. " कहते हुए संजय ने शीला को अपनी बाहों में भर लियाया.. छोटे बच्चे की तरह वो शीला के स्तन से चिपक गया.. और नेट वाली ब्रा से एक स्तन को बाहर निकालकर चूसने लगा..

"आह्ह बेटा.. मज़ा आ रहा है.. तेरी जीभ की गर्मी मेरी निप्पल से होते हुए पूरे शरीर में फैल रही है.. देख.. तेरा लंड भी सख्त होकर तैयार हो गया.. इतने सुंदर लंड से चुदने के लिए वैशाली क्यों राजी नही होती ये मुझे समझ में नही आता.. इसे खड़ा हुआ देखकर भी वो कोई रिस्पॉन्स नही देती?"

"रिस्पॉन्स देती है ना.. क्यों नही देती.. मेरे लंड को देखकर ही वो करवट बदल कर सो जाती है"

"पागल है मेरी बेटी.. " कहते हुए शीला घुटनों पर बैठ गई और संजय के गन्ने जैसे सख्त लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी.. शॉर्ट्स की साइड से लंड को चूसने में मज़ा नही आ रहा था.. इसलिए उसने खींचकर संजय की शॉर्ट्स जिस्म से अलग कर दी.. और अपनी ब्रा और चड्डी उतारकर फिर से एक बार स्खलित होने के लिए तैयार हो गई.. उसके चेहरे पर उत्तेजना साफ साफ छलक रही थी..

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दोनों नंगे होकर एक दूसरे को चूमने और चाटने में व्यस्त हो गए.. संजय ने शीला की चूत पर अपना हाथ जमा दिया और शीला ने संजय के लंड को गिरफ्त में ले लिया..

"मम्मी जी.. अब मुझे अपने दोनों स्तनों के बीच में लंड घुसेड़ने दो.. "

"हाँ हाँ.. घुसा दे.. मैंने कब मना किया तुझे!! आज ये आखिरी चुदाई होगी हमारी.. जो मन करे तेरा.. वो कर ले.. मैं कुछ नही बोलूँगी"

"मम्मी जी.. आपके मन में भी ऐसी कोई विकृत इच्छा हो तो बता दीजिए... गोवा की ट्रिप यादगार बनानी है हमें.. !!"

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वैशाली और राजेश सर माउंट आबू में.. रेणुका की बर्थडे पार्टी में बियर की चुसकियाँ लेते हुए सिगरेट पर सिगरेट फूँक रहे थे.. राजेश के स्वभाव और पर्सनैलिटी से वैशाली बेहद आकर्षित हो गई थी.. उसने शारीरिक संबंधों के लिए पहले ही मना कर दिया था पर फिर भी राजेश ने बुरा नही माना था.. वैशाली को ये बात बहोत अच्छी लगी राजेश की..

लगभग ग्यारह बज रहे थे.. हर कोई नशे में चूर होकर ट्रिप के मजे ले रहा था.. वैशाली की आँखें भी बियर के नशे में सुरूर से भर रही थी.. इतनी बियर पीने के बाद उसे बड़ी जोर से पेशाब लगी थी.. आखिर जब बात बर्दाश्त से पार हो गई तब वह उठी और राजेश से कहा "एक्स्क्यूज़ मी.. मुझे जाना होगा.. फ्रेश होकर आती हूँ.. आप मेरा वैट करना.. "

"जाना तो मुझे भी है.. चलो मैं भी साथ चलता हूँ.. कहीं तुम्हारे कदम लड़खड़ा गए तो कोई तो चाहिए सहारा देने वाला.. " राजेश ने कहा.. वैशाली शरमा गई.. और नीचे देखने लगी..

"अरे घबराइए नही.. मैं तो जेन्ट्स टॉइलेट में ही जाऊंगा.. तुम्हारे साथ थोड़े ही आने वाला हूँ" हँसते हँसते राजेश ने कहा

"वो तो मुझे भी पता है सर की आप मेरे साथ टॉइलेट में नही आओगे.. चलिए चलते है" वैशाली आगे चाय और राजेश उसके पीछे पीछे.. वैशाली की मटकती गांड को देखकर राजेश की नियत में खोट आने लगी थी.. राजेश की नशीली आँखों में वैशाली की गांड का नशा अलग से जुड़ गया..

पेसेज के आखिर में लेडिज और जेन्ट्स के टॉइलेट अगल बगल में ही थे.. चलते चलते वैशाली के कदम डगमगा गए.. और उसे संभालने के चक्कर में राजेश भी लड़खड़ा गया.. एक दूसरे को संभालते हुए दोनों दीवार का सहारा लेकर खड़े हो गए.. वैशाली के स्तन एक पल के लिए राजेश के हाथों से दब गए.. दोनों एक दूसरे को सॉरी कहने लगे.. और हंस पड़े..

टॉइलेट के पेसेज में दोनों अकेले थे.. हल्की सी रोशनी थी..

"वैशाली, यू आर सो हॉट.. प्लीज एलाऊ मी टू टच योर बूब्स.. सिर्फ एक बार.. मेरी रीक्वेस्ट है.. प्लीज"

"नही सर.. आई कांट डू धिस.. सॉरी.. " वैशाली ने नशे की हालत में भी अपना संयम नही छोड़ा था.. वह दरवाजा खोलकर लेडिज टॉइलेट में घुस गई.. राजेश भी जेन्ट्स टॉइलेट में चला गया.. वह पेशाब करके बाहर निकला और लेडिज टॉइलेट के दरवाजे के बाहर वैशाली का इंतज़ार करने लगा.. तभी लेडिज टॉइलेट का दरवाजा खुला.. एक हाथ बाहर आया और उसने राजेश को अंदर खींच लिया.. एक सेकंड में ही ये सब हो गया..

राजेश कुछ समझ या सोच सके उससे पहले ही वैशाली ने उसे चूम लिया.. उसके मदमस्त उरोज राजेश की छाती से रगड़ रहे थे.. वैशाली इतनी उत्तेजित हो गई थी की राजेश कुछ करे उससे पहले ही उसने हाथ नीचे डालकर उसका लंड पकड़ लिया और धीमे से कान में बोली

"कुछ मत बोलीये.. किसी को पता नही चलना चाहिए की इस क्यूबिकल में हम दोनों है.. एकदम शांत रहिए" वैशाली ने अपना टीशर्ट ऊपर कर दिया और अपने दोनों खिलौने राजेश को खेलने के लिए दे दिए.. मर्द का हाथ उसके स्तनों को स्पर्शते ही वैशाली के चेहरे पर खुमार छाने लगा.. बियर का नशा अपना काम कर रहा था और राजेश का हाथ भी..

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राजेश का हाथ वैशाली की गीली पुच्ची तक कब पहुँच गया इसका दोनों को पता ही नही चला.. टॉइलेट की संकरी जगह में वैशाली और राजेश सर दोनों को तकलीफ हो रही थी.. पर दोनों इतने उत्तेजित थे.. जैसे एक दूसरे के जिस्मों को नोच खाना चाहते हो.. राजेश को कब से ललचा रहे वैशाली के बड़े बड़े तंदुरुस्त उरोज.. राजेश ने दोनों हाथों से पकड़कर अनगिनत बार चूम, चाट और काट लिए.. वैशाली को दर्द हो रहा था फिर भी वह चुप थी क्यों की जरा सी भी आवाज उनका भांडा फोड़ सकती थी.. दोनों फटाफट अपनी वासना को तृप्त करने की फिराक में एक छोटा पर रसीला प्रोग्राम कर देना चाहते थे.. जल्द से जल्द हॉल में पहुँचना भी जरूरी थी.. वरना लोगों को शक होने की गुंजाइश थी..

वैशाली ने तुरंत ही अपनी पेन्टी को घुटनों तक सरकाते हुए स्कर्ट ऊपर चढ़ा दिया और फिर उलटी होकर बोली "प्लीज सर.. जल्दी कीजिए.. डाल दीजिए फटाफट" हल्की रोशनी में जगमगाते हुए वैशाली के चरबीदार कूल्हों पर थपकी लगाते हुए राजेश ने उन नितंबों को चौड़ा किया..

"सर वक्त बहोत कम है.. वो सब आराम से बाद में देख लेना.. " उत्तेजनावश अपनी गांड को गोल गोल घुमाते हुए राजेश को आमंत्रित कर रही थी.. राजेश ने वैशाली की कमर को पकड़ा और अपने कड़े लंड को दोनों कूल्हों के बीच में लगाया..

"ईशशश.. सर.. वहाँ नही.. थोड़ा सा नीचे" अपने गांड के छेद पर राजेश के लंड के सुपाड़े का स्पर्श होते ही वैशाली ने सहम गई

"अरे यार.. इतना अंधेरा है.. कुछ दिखना भी तो चाहिए.. " राजेश ने परेशान होते हुए कहा

"सर, आप एक बार जीभ से चाटिए ना.. मुझे बिना चटवाए मज़ा ही नही आता" वैशाली की विनती को सन्मान देते हुए राजेश झुककर नीचे बैठ गया और उसके दोनों चूतड़ों को फैलाकर पहेले गांड और फिर चूत को चाटने लगा.. वैशाली उत्तेजित होकर गांड उछालने लगी.. राजेश तुरंत खड़ा हो गया और वैशाली की चूत में एक धक्के में ही अपना पूरा लंड डाल दिया.. वैशाली सिसकने लगी.. राजेश ने धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू किया और फिर स्पीड पकड़ ली..

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वैशाली के कूल्हों से राजेश की जांघों के टकराने की वजह से आवाज आ रही थी.. जब वो आवाज काफी ऊंची हो गई तब दोनों ने घबराकर गति धीमे कर दी.. और फिर से अपनी लय प्राप्त कर ली.. डरते डरते सेक्स करने का मज़ा ही अलग होता है.. करीब दो मिनट तक ऐसे ही धक्के लगाने के बाद राजेश ने अपने सख्त लंड से आखिर के तीन चार धक्के इतने जोर से लगाए की वैशाली की आँखों में पानी आ गया.. उसेके पेट में दर्द होने लगा.. और साथ ही साथ उसकी चूत भी ठंडी हो गई.. राजेश ने भी चूत को अपने वीर्य से सराबोर कर दिया..

अंधेरे माहोल की इस चुदाई के बाद वैशाली घूम गई और राजेश के लंड के प्रति आभार प्रकट करते हुए उसे झुककर चूमने लगी.. राजेश ने उसे बाहों में भर लिया और उसके होंठों को चूम लिया.. राजेश के लंड से खेलते हुए वैशाली ने एकदम धीमी आवाज में उसके कान में कहा "ये रात मुझे ज़िंदगी भर याद रहेगी.. आशा है की आपको भी मज़ा आया होगा.. अगर किस्मत रही तो फिर मिलेंगे.. मैं आपके साथ शांति से समय बिताना चाहती हूँ.. आपका स्वभाव मुझे बहोत पसंद आया.. आशा है की आप मेरी मित्रता का स्वीकार करेंगे.. हमारा शरीर संबंध तो बड़ा ही अनोखा रहा.. लेकिन लौटने के बाद क्या मैं आप से बिना किसी जिस्मानी संबंधों की मित्रता की अपेक्षा रख सकती हूँ ?"

राजेश वैशाली के सुंदर स्तनों को अपने दोनों हाथों से दबाते हुए बोला "वैशाली, हम बड़े अच्छे मित्र बनेंगे.. शरीर का संबंध बने या न बने.. उससे मुझे फरक नही पड़ता.. पर तेरे ये सुंदर स्तनों ने मुझे आज पागल ही कर दिया.. इन्हे दबाने की आशा तो मैं हमेशा रखूँगा ही.. लेकिन ये वादा है मेरा.. की जो भी होगा वो तुम्हारी इच्छा और स्वीकृति से ही होगा.. एक विनती करना चाहूँगा.. तुम्हें कभी भी फिर से ये दोहराने की इच्छा हो तो बेझिझक मेरे पास चली आना.. तुम्हारे जिस्म को पाने के लिए मैं हमेशा बेताब रहूँगा.. और कुछ पाए या न हो पाएं.. एक हल्की सी किस.. थोड़ा सा स्पर्श.. इतना भी मेरे लिए काफी होगा !!"

"ठीक है सर" हँसते हुए वैशाली ने राजेश के होंठों को चूम लिया.. "सर, पहले मैं बाहर देख लूँ.. पेसेज में कोई है तो नही.. मैं इशारा करूँ उसके बाद ही आप निकलना " राजेश अब भी वैशाली के स्तनों को छोड़ नही रहा था.. दबाए ही जा रहा था

"सर अब आप मुझे छोड़ेंगे तो मैं बाहर निकलूँ" वैशाली ने हसनते हुए कहा

"असल में तेरी ब्रेस्ट इतनी आकर्षक है की मुझसे रहा नही जाता.. अब तुमने बिना जिस्मानी संबंधों वाली मित्रता की बात की है.. तो मैं ये सोच रहा हूँ की इन स्तनों दोबारा न जाने कब देखने को मिले.. " राजेश ने कहा

"हम्म.. ओके सर.. ये लीजिए मेरी तरफ से माउंट आबू की ये आखिरी भेंट" कहते हुए उसने राजेश का चेहरा पकड़कर अपने स्तनों पर दबा दिया और उसके लंड को पकड़कर मसल दिया.. फिर वैशाली ने अपने आप को राजेश की गिरफ्त से मुक्त किया और धीरे से दरवाजा खोला.. पेसेज में कोई नही था.. उसने हाथ पकड़कर राजेश को बाहर खींचा.. "सर आप पहले जाइए.. कोई पूछे तो कहना वैशाली टॉइलेट गई है"

"ओह वैशाली.. " कहते हुए राजेश ने एक बार फिर वैशाली के स्तनों को वस्त्रों के ऊपर से ही पकड़कर दबा दिया और फिर न चाहते हुए भी मुड़कर चलने लगा.. वैशाली फिर से अंदर गई.. और नल से पानी लेकर अपनी चूत को धोने लगी.. राजेश के लंड का सारा वीर्य उसने ठीक से साफ किया.. साफ करते करते उसकी मुनिया फिर से चुनमुनाने लगी.. उंगली से क्लिटोरिस को रगड़कर फिर से उसे शांत किया.. अपने स्तनों को ठीक से ब्रा के अंदर दबा दिए.. और अपने बाल ठीक कर दस मिनट बाद बाहर निकली..

जैसे ही वो अपने क्यूबिकल से बाहर निकली.. थोड़े से दूर बने क्यूबिकल का दरवाजा खुला और उसमें से पीयूष बाहर निकला.. पीयूष की नजर वैशाली पर नही थी.. वो तुरंत दरवाजा खोलकर बाहर की ओर भागा.. लेडिज टॉइलेट में पीयूष???? जरूर कुछ खिचड़ी पक रही थी.. पीयूष अंदर किसी के साथ ही घुसा होगा.. साथ जो भी था.. हो सकता है की वो वैशाली के निकलने से पहले ही चला गया हो.. या फिर अभी भए क्यूबिकल के अंदर ही हो? पता करने का बस एक ही तरीका था.. वैशाली बेज़ीन के पीछे लगे बड़े पत्थर के पीछे छुपकर इंतज़ार करने लगी

थोड़ी ही देर में दरवाजा खुलने की आवाज आई.. वैशाली का दिल जोरों से धड़कने लगा.. कौन होगा? कविता? नही नही.. उन दोनों के बीच तो झगड़ा चल रहा है.. जरूर वो रांड मौसम होगी.. वही कब से मेरे और पीयूष के बीच हड्डी बनकर बैठी हुई है.. पीयूष भी कमीना अपनी साली के पीछे लट्टू होकर घूमता रहता है.. उसकी कच्ची कुंवारी चूत को एकबार चोदकर ही दम लेगा वो.. जैसी जिसकी किस्मत.. नुकसान तो कविता को ही होगा.. कविता भी बेवकूफ है.. उसे इतना भी पता नही चलता की जवान कुंवारी बहन को अपने रोमियो पति के साथ घूमने देना ही नही चाहिए उसे.. और मौसम भी एक नंबर की मादरचोद है.. अपने कच्चे बबले दिखा दिखा कर पीयूष को पागल बना देती है.. जैसे स्तन सिर्फ उसके पास ही है.. मेरे मुकाबले में मौसम के छोटे स्तनों की कोई औकात ही नही है..

वैशाली के दिमाग में ये सारे विचार चल रहे थे तभी पेसेज में किसी के आने की चहलकदमी सुनाई दी.. और वो जो भी थी वह फिर से क्यूबिकल के अंदर चली गई और अंदर से दरवाजा बंद कर दिया.. वैशाली के लिए ज्यादा देर तक छुपे रहना मुमकिन नही था.. क्यों की लेडिज टॉइलेट के दरवाजे से अंदर आते हुए वह साफ दिख रही थी..

वैशाली बाहर निकल गई और चलते हुए हॉल में आ पहुंची.. वह आकर राजेश सर के बाजू में बैठ गई.. पर यहाँ से उसे टॉइलेट वाला पेसेज नजर नही आ रहा था.. उसने राजेश से कहा "सर आपको एतराज न हो तो क्या आप मेरी कुर्सी पर आ सकते है.. यहाँ एसी की ठंडी हवा सीधे मेरे सर पर लग रही है"

"ओ स्योर.. " कहते हुए राजेश खड़ा होकर वैशाली की चैर पर बैठ गया और वैशाली राजेश की चैर पर.. अब यहाँ से पेसेज बिल्कुल साफ नजर आ रहा था.. वैशाली थोड़ी थोड़ी देर पर.. राजेश से बातें करते हुए.. नजरें चुराकर पेसेज की ओर देख लेती..

राजेश ने धीमे से वैशाली के कान में कहा "यार वैशाली.. तेरी तो बहोत टाइट थी.. मज़ा आ गया यार.. "

"थेंक यू सर" वैशाली ने शरमाते हुए नजरे झुका ली

वैशाली बेचैन नज़रों से पेसेज की ओर देख रही थी.. उसके यहाँ बैठने के बाद कोई अंदर गया भी नही था और बाहर आया भी नही था.. उसने पीयूष की ओर देखा.. वो तो आराम से म्यूज़िक के ताल पर झूमते हुए बियर पी रहा था.. वैशाली ने ये भी नोटिस किया की पीयूष भी बार बार पेसेज की ओर देख रहा था.. बहोत खुश लग रहा था पीयूष..

ना चाहते हुए भी राजेश की बातों को सुन रही थी वैशाली.. उसका सारा ध्यान पेसेज पर ही था.. वो कौन थी जो उसके पीयूष को अपनी जाल में फंसा रही थी? तभी पेसेज से एक परछाई आती हुई नजर आई.. धीरे धीरे वह परछाई हॉल की तरफ आते देख वैशाली टकटकी लगाकर पहचानने की कोशिश करने लगी..

चेहरा स्पष्ट दिखते ही वैशाली के पैरों तले से जमीन खिसक गई!!! अपनी आँखों पर विश्वास नही हो रहा था उसे.. !!! नालायक पीयूष.. ये क्या किया तूने? कब से लगा हुआ है इनके साथ? रेणुका और पीयूष?? ओह माय गॉड.. ये मैं क्या देख रही हूँ?? साला ये पीयूष तो खिलाड़ी निकला.. हरामी.. मादरचोद.. एक साथ कितनों को लपेटें रखा है उसने!! कभी मेरे साथ.. कभी मौसम के साथ.. और अब रेणुका के साथ भी.. !!!

Fantastic update
 
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