अगला वृतांत लंबे समय के बाद
जैसे ही अमित रेखा को लेटाकर उसके ऊपर आने लगा, सीमा ने तुरंत अमित का कंधा पकड़कर उसे रोक दिया।
संयम और उत्तेजना का खेल
सीमा की आवाज़ में एक अजीब सी सख्ती और ममता का मिश्रण था। उसने रेखा की आँखों में आँखें डालकर कहा:
> "रुक जा अमित! अभी नहीं। रेखा की शादी अभी दुनिया की नज़रों में होनी बाकी है। अगर आज तूने इसकी सील तोड़ दी, तो इसके असली ससुराल में बखेड़ा खड़ा हो जाएगा। मैं अपनी बेटी की विदाई कलंकित होकर नहीं होने दूँगी।"
>
रेखा की तड़प:
रेखा, जो पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और जिसका शरीर अमित के स्पर्श के लिए थरथरा रहा था, वह बिलख उठी। "नहीं माँ... अब और नहीं सहा जाता! अमित भैया, प्लीज... मुझे शांत कर दो।" उसकी आवाज़ में बेबसी और चुदास का मिला-जुला शोर था।
सीमा की हिदायत और अमित का वार
सीमा ने अमित से कहा, "अमित, तू इसका पति है, पर आज सिर्फ बाहर-बाहर से। इसे वो एहसास दे कि यह मचल जाए, पर इसकी 'लाज' सुरक्षित रहे। तुझे इसकी शादी तक रुकना होगा।"
* अमित का तरीका: अमित ने सीमा की बात मानी। उसने अपने उस चमकदार और भारी लन्ड को रेखा की जांघों के बीच रगड़ना शुरू किया। वह उसे रेखा की फूली हुई चुत के होठों पर ऊपर-ऊपर ही फेरने लगा।
* रेखा की हालत: जब अमित का गर्म लन्ड उसकी चुत की दरार पर बिना अंदर गए सिर्फ रेंग रहा था, तो रेखा पागलों की तरह अपने कूल्हे ऊपर उठाने लगी। वह बार-बार गुहार लगा रही थी कि अमित अंदर चला जाए, पर अमित ने सीमा के इशारे पर खुद को रोक रखा था।
चुत को समझा ले लाडो
सीमा ने झुककर रेखा के कान के पास अपने होंठ ले जाकर फुसफुसाया:
> "देख बेटी, यह तड़प ही तुझे एक 'महारानी' बनाएगी। अभी खुद को रोक ले। शादी के बाद तेरा यह अमित भैया ही तेरा असली मर्द होगा। अपनी इस चुत की आग को अभी दबाकर रख, ताकि जब यह फटे, तो तेरा पति भी तुझे संभाल न पाए। अपनी इस प्यास को अपनी ज़रूरत बना ले रेखा, चूत को समझा ले लाडो... बस थोड़े दिन और।"
>
रेखा सिसकियाँ भर रही थी, अमित का लन्ड उसकी चुत के बाहरी हिस्से को पूरी तरह रस से भिगो चुका था, पर सीमा की 'दीवार' के कारण मिलन अधूरा रह गया। सीमा ने साबित कर दिया कि वह सिर्फ जिस्म नहीं दिलाती, वह जिस्मों पर हुकूमत करना भी जानती है।
कमरे का माहौल अब पूरी तरह से वासना की आग में दहक रहा था। अमित का भारी और चिकना लन्ड रेखा की चुत की बाहरी फांकों पर फिसल रहा था, जिससे निकलने वाले रस ने सोफे और रेखा की जांघों को पूरी तरह चिपचिपा कर दिया था। रेखा पागलों की तरह अपने हाथ-पैर पटक रही थी, उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह इस अधूरी तड़प का क्या करे।
सीमा के मीठे ताने और रेखा की बेबसी
सीमा पास ही बैठी इस दृश्य का आनंद ले रही थी। उसने रेखा की ऐसी हालत देख कर एक कुटिल मुस्कान के साथ ताना मारा:
> "ओह हो... मेरी लाडो तो एकदम बिन पानी की मछली की तरह तड़प रही है। देख अमित, कैसे तेरी बहन एक लन्ड के लिए मरी जा रही है। रेखा बेटी, अभी तो सिर्फ ऊपर-ऊपर रगड़ लग रही है और तेरा ये हाल है? अगर ये पूरा अंदर चला गया तो तू तो होश ही खो देगी।"
>
रेखा की आँखें चढ़ी हुई थीं, वह सिसकते हुए सीमा के पैर पकड़ने की कोशिश करने लगी:
रेखा: "माँ... सीमा भाभी... प्लीज रहम करो! अब बर्दाश्त नहीं होता। अमित भैया को बोलो न कि इसे पूरा डाल दें... मेरी चुत फटी जा रही है, इसमें बहुत आग लगी है भाभी! प्लीज इसे अंदर जाने दो!"
चुत की आग और सीमा का कड़ा अनुशासन
सीमा ने रेखा के गाल को सहलाया और फिर उसकी एक निप्पल को ज़ोर से चुटकी में भींचते हुए बोली:
* सीमा: "नहीं बेटी, अभी नहीं। अगर आज ये अंदर चला गया तो उस 'प्यास' का क्या होगा जो मैं तेरे अंदर पालना चाहती हूँ? अमित, इसकी चुत के मुहाने पर ही रगड़, पर अंदर एक इंच भी मत जाना।"
* अमित का रिस्पांस: अमित भी पसीने से तर-बतर था। वह रेखा के कानों में फुसफुसाते हुए बोला, "रेखा बहना, देख... तेरा भाई और तेरा पति आज तुझे सिर्फ तरसाएगा। तेरी चुत जितना पानी छोड़ेगी, मेरा लन्ड उतना ही इस पर फिसलेगा, पर रास्ता नहीं मिलेगा।"
रेखा पागलों की तरह चीख उठी:
> "भैयाआआ... ऊऊऊईईई माँ! ये तो जान निकालने जैसा है। इसे अंदर डालो, चाहे मुझे मार डालो! भाभी, आप ही बोल दो न, क्या आप अपनी बेटी को ऐसे तड़पते देख सकती हो? मेरा लन्ड खाने का मन कर रहा है, प्लीज इसे अंदर ले लो अमित भैया!"
>
भविष्य का वादा
सीमा ने रेखा के बिखरे हुए बालों को संवारा और अमित को रुकने का इशारा किया। रेखा अभी भी हिचकोले खा रही थी।
सीमा: "चुप हो जा मेरी लाडो! ये जो तड़प आज तू झेल रही है, यही तुझे कल ससुराल में सुख दिलाएगी। मैं तुझे ऐसा पति दिलाउंगी जो सिर्फ नाम का होगा, और पीछे से तेरा ये अमित भैया और उस घर का कोई और दमदार मर्द मिलकर तेरी इस आग को बुझाएंगे। आज की रात सिर्फ इसी रगड़ का मज़ा ले और सो जा।"
रेखा निढाल होकर सोफे पर पड़ी रही, उसकी चुत से बहता हुआ रस उसकी बेबसी की कहानी बयां कर रहा था।
कमरे की सरगर्मी अब अपने चरम पर थी। सीमा ने रेखा के दोनों भारी स्तनों को अपनी हथेलियों में भरकर उन्हें इस बेदर्दी से मसला कि रेखा के मुँह से चीखें निकलने लगीं। दूसरी ओर, अमित का लन्ड रेखा की चुत के होठों पर इतनी तेज़ी से घिस रहा था कि घर्षण की गर्मी से रेखा का रोम-रोम फड़क उठा।
सीमा ने रेखा के कान में फिर से मीठा जहर घोला, "देख अमित, तेरी लाडो का बुरा हाल है... अब ये और नहीं रोक पाएगी।"
रेखा के शरीर में अचानक एक बिजली सी दौड़ी, उसकी चुत के अंदरूनी हिस्से बार-बार सिकुड़ने लगे। उसने अपनी दोनों आँखें कस के बंद कर लीं और अमित के लन्ड को अपनी जांघों के बीच और ज़ोर से भींच लिया।
रेखा का झड़ना:
अचानक रेखा का शरीर काठ की तरह कड़ा हो गया। उसके मुँह से एक लंबी और सुरीली आह निकली—"भाभीईई... माँ... मैं गई... उहहहह!" उसकी चुत ने एक के बाद एक कई झटके मारे और गर्म चुत-रस का फव्वारा फूट पड़ा, जिससे अमित का पूरा लन्ड और रेखा की जांघें तर-बतर हो गईं।
अमित का डिस्चार्ज:
रेखा की चुत से निकलते उस गर्म रस के स्पर्श और सीमा के हाथों की रगड़ ने अमित के सब्र का बांध भी तोड़ दिया। जैसे ही रेखा झड़ी, अमित का शरीर भी कांपने लगा। उसने अपने लन्ड को रेखा की चुत की फांकों पर एक आखिरी बार ज़ोर से रगड़ा और उसका वीर्य (लन्ड का पानी) पिचकारी बनकर रेखा के पेट और जांघों पर बिखर गया।
सीमा ने दोनों को निढाल होते देखा और मुस्कुराते हुए रेखा के माथे को चूमा।
सीमा: "देखा लाडो, बिना अंदर डाले ही तूने आज स्वर्ग देख लिया। अब तू समझी कि ये 'अधूरी प्यास' कितनी मीठी होती है? अब शांत हो जा, क्योंकि असली मज़ा तो तेरी शादी के बाद अमित ही तुझे देगा।"
रेखा और अमित दोनों हांफते हुए एक-दूसरे से सटे पड़े रहे। आज की रात ने उनके रिश्तों को एक ऐसे मुकाम पर पहुँचा दिया था जहाँ से वापसी का कोई रास्ता नहीं था।