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Incest एक पाकीजा परिवार

बताओ किस्से ओर कैसा सेक्स पढ़ना चाहोगे ?


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maakaloda

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Kahani ekdum se fast track per daal di,per abhi naye character ki jagah yahan per hi dono maa beti ko kholo,aapas main nangi batain karao.phir yahan chodna tab aagey badho
 
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mkgpkr

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Very exciting
 
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Ass licker

❤️❤️
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Kahani ekdum se fast track per daal di,per abhi naye character ki jagah yahan per hi dono maa beti ko kholo,aapas main nangi batain karao.phir yahan chodna tab aagey badho
कहानी फ़ास्ट नही बस करैक्टर ऐड किये हैं। विस्तार पूर्वक कामुकता परोसी जाएगी सब्र रखे
 
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Manisha queen

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Bhaiya bahut hi kamuk story likh rhe h Kas is story me anjum ki jagah mai hoti
 
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hariom1936

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अब्बू का बहुत दुख हुआ,उनको जन्नत नसीब हो।

शुरुवात गमगीन पर अंत रंगीन ।

बहुत ही शानदार ।

अम्मी भी तरस रही है कुछ सोचो उनके बारे में ।
 

Rudransh120

The Destroyer
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अपडेट 17❤️

उसके बाद हमने नास्ता किया और वही दिनचर्या में दिन गुजर गया।
शाम को मैं किताबे पढ़ते समय मुझे किसी अनजान नंबर से कॉल आया मेने उसे पिक किया।
अनजान आदमी:- हेलो कोंन बोल रहा है ?
मैं:- आप कोंन बोल रहे हैं कहाँ मिलाया है आपने फ़ोन
अनजान:- बेटे में रहीम बोल रहा हूँ तुम्हारे अब्बा के बगल में मेरी दुकान है तुम्हारे अब्बू का एक्सीडेंट हो गया है जल्दी से हॉस्पिटल आ जाओ
इतना सुनते ही मेरे हाथ से फ़ोन छूट गया और में बेहोशी की हालत में फर्श पर बैठ गया इस खबर ने मुझे अंदर तक हिला दिया था कोई 5 मिनट के बाद मुझे कुछ होश आया तो में नीचे भागते हुए आया अम्मी को खबर की जिसे सुनकर अम्मी जोर जोर से रोने लगी और बेहोश हो गयी।
मेने अम्मी को संभाला और गिलास में पानी लेकर छींटे डाले जिससे अम्मी को होश आया और अम्मी दोबारा से बेहोश हो गयी।
मेने बाजी को आवाज लगाई दो तीन बार आवाज देने पर बाजी कमरे से बाहर निकली और अम्मी को जमीन पर पड़ा देख तेज दौड़ती हुई हमारे पास आई अम्मिईईईईई क्याआआ हुआ है तुम्हे
मैं भी इस समय सदमे की हालत में था लेकिन मुझे अम्मी बाजी को संभालना था और हॉस्पिटल पहुंचना था।
बाजी भी अब अम्मी की हालत पर रोने लगी थी जो बार बार अम्मी की बेहोशी की वजह पूछ रही थी तो मैने रोते हुए बाजी को सब बता दिया जिसे सुनकर बाजी भी रोने लगी।
अब्बू के एक्सीडेंट का सदमा हम तीनों को बर्दाश्त नही हो रहा था तो कुछ देर बाद अम्मी को होश आया और मैने एक कैब बुक कर ली हॉस्पिटल जाने के लिए
तब तक मैं अम्मी बाजी को संभालने की कोशिश करता रहा, अम्मी बेहताशा दहाड़े मार मार कर रोये जा रही थी
बाजी ओर मैं अम्मी को संभालने में लगे हुए थे, बाजी हिम्मत से काम ले रही थी तभी कैब आ गयी और हम हॉस्पिटल के लिए निकल गए, मेने उस नम्बर पर दोबारा कॉल की ओर हॉस्पिटल के बारे में पूछा, उधर से रहीम चाचा ने हमे हॉस्पिटल का पता बताया और बोला कि अभी अब्बू ICU में है
कोई 25-30 मिनट के सफर के बाद हम हॉस्पिटल पहुंचे और कैब को किराया दिया और दौड़ते हुए हॉस्पिटल में एंटर हो गए।
अम्मी को बाजी पकड़कर अंदर ला रही थी और में दौड़ता हुआ ICU की तरफ जा रहा था।
ICU के बाहर मुझे एक आदमी मिला जो अब्बू जैसी उम्र का था उसने मेरा नाम पूछा तो मैने बता दिया।
मैं रहीम चाचा से अब्बू के एक्सीडेंट के बारे में पूछना लगा तभी अम्मी बाजी भी आ गयी।
रहीम:- बेटा तुम्हारे अब्बू बाइक से घर जा रहे थे तभी उनका एक्सीडेंट एक ट्रक से हो गया और मैं ऑटो से घर जा रहा था तो मुझे रास्ते मे पता चला कि भीड़ तुम्हारे अब्बू के आसपास इकट्ठा थी, मेने तुम्हारे अब्बू को हॉस्पिटल पहुंचाया ओर फिर तुम्हे खबर की, तुम्हारे अब्बू का फ़ोन ये रहा जिसमे नम्बर देखकर मेने तुमसे राब्ता किया है।
अम्मी बाजी सिसक रही थी और हम वेटिंग एरिया में खड़े होकर डॉक्टर्स का इंतजार कर रहे थे।
थोड़ी देर बाद icu से डॉक्टर निकले और पेशेंट के करीबियों को बुलाया तो हम उनके पास गए तो डॉक्टर बोला सर में चोट लगने की वजह से खून काफी बह गया था जिससे उसकी मौत हो गयी।
इतना सुनकर अम्मी बाजी फर्श पर गिर गयी और बेहोश हो गयी।
सदमे में मेरी हालत भी नाजुक हो गए पर किसी को तो हिम्मत से काम लेना था, अब्बू को घर पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस को प्रबन्द रहीम चाचा ने किया और किसी तरह हम अब्बू को घर ले आये।
मेने सभी रिश्तेदारों को फ़ोन पर घटना को बताया और मिट्टी देने की तैयारी में जुट गए। इन सब चीजों में पड़ोसियों ने काफी हेल्प की ओर रात के 9 बजे अब्बू को दफन किया गया।

【लेडीज किरदारों की फ़ोटो दिमाग मे बैठा ले और याद करले, ताकि कहानी में पढ़ते समय इमेजिनेशन अच्छा हो

कहानी के नए किरदार❤️
नाना:- इनायत खान
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थोड़े बूढ़े हो गए हैं पर जिस्म अभी हट्टा कट्टा है, खेतीबाड़ी करते है गाँव मे, इनकी बीवी गुजर गई है। नेक दिल इंसान ओर हमेशा गरीबों की सेवा करने में हरपल हाजिर। लन्ड का साइज 10 इंच लम्बा ओर 4.5 इंच मोटा।

1st मामा:- सरफराज खान
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मकान मिस्त्री है जो लोगो के घर बनाता है, जिससे घर का गुजारा करते हैं लन्ड का साइज 7 इंच लम्बा 3 इंच मोटा,इसके 3 बच्चे है। 2 लड़के 1 लड़की, लड़की का नाम जीनत है जो बाजी अंजुम से 2 साल छोटी है

जीनत:-
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बाजी अंजुम से 2 साल छोटी है। ये भी उर्दू पढ़ी लिखी है और अब घर पर रहती है।

जीनत की अम्मी:- रिहाना (मेरी बड़ी मामी)
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एक सरीफ ओर इज्जतदार खातून जो अम्मी की तरह उर्दू पढ़ी लिखी तालीम याफ्ता है, हाइट 5.7 है। अपने बच्चों और शौहर से मोहब्बत करती है

2nd मामा:- इमरान खान
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परचूनी की दुकान खोल रखी है गाँव मे ही, लन्ड का साइज 8 इंच लम्बा, 3 इंच मोटा। इसकी एक ही बेटी है आएशा जो मदरसे जाती है और बाजी से 4 साल छोटी है। लगभग कच्ची जवानी में कदम रख दिये है।

इमरान की बेटी:- आएशा❤️ (दूसरी लीड हीरोइन)
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सारे खानदान ओर रिश्तेदारीयों में सबसे खूबसूरत, सबसे ज्यादा तालीम याफ्ता, सबसे ज्यादा पर्दा वाली एक 19 साल की कच्ची राजकुमारी। जब से जवान हुई है घर मे भी किसी ने इसके जिस्म की बनावट नही देखी. बचपन से अब तक मदरसे में पढ़ने वाली एक आपा टाइप लड़की।

आएशा की अम्मी फातिमा:-
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एक मजबूत कद काठी की औरत, जिस्म भरा हुआ है घर के काम सम्भालती है और रात को अपने शौहर को। ये भी उर्दू पढ़ी लिखी है। हमारा सारा खानदान उर्दू पढा लिखा और मजहबी तहजीब हासिल किया हुआ परिवार/रिस्तेदार हैं।


अब्बू की मौत के बाद अम्मी गुमसुम रहने लगी चेहरे पर निराशा के असर दिखने लगे थे ना ढंग से खाती ना पीती। अम्मी 4 महीने की इद्दत में बैठ गयी (इद्दत:- शौहर के मरने पर 4 महीने अकेले गुजरना, कोई गेर से ना बात करना ना देखना)
बाजी सारा काम करती और मैं अब दुकान संभालने लगा
क्योंकि यही एक आमदनी का अच्छा खासा जरिया था।
में सुबह निकलता ओर शाम को घर जाता
इसी तरह 6 महीने निकल गए। मेने मेहनत से काम बढ़ा लिया ओर दो लड़के रख लिए जो मेरी गैरमौजूदगी में कपड़ो की बड़ी दुकान संभालते है जिससे आमदनी भी ज्यादा होने लगी। अम्मी बाजी ओर मैं अब लगभग अब्बू वाले हादसे को लगभग भुला चुके थे ओर आगे बढ़ गए थे


बाजी की जुबानी❤️

अब्बू की मौत के बाद हम अकेले पड़ गए थे हमारा एक मात्र सहारा मेरा भाई दिन में दुकान संभालता ओर मैं अम्मी को उस हादसे को भूलने में काफी हद तक कामयाब हो रही थी।
मैं सुबह मदरसे जाती और 1 बजे तक वापिस आ जाती, मैं अब अम्मी के साथ ही उसके कमरे में सोती, कभी कभी अम्मी को अब्बू याद आते तो हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर रो लेते थे, होनी को कोन टाल सकता है जो हो गया उसे सही तो नही किया जा सकता। 6 महीने बाद फिर से मुझे गन्दी चीजो का अहसास होने लगा और में परिस्थितियों को देखते हुए मन मार कर रह जाती। अम्मी के साथ चिपक कर सोना भी मुझे नसीब नही हो रहा था, अगर होता भी तो ये सही नही था।
लेकिन रात भाई का मैसेज आया
भाई:- बाजी क्या कर रही हो आप
मैं:- कुछ नही भाई अम्मी के साथ लेटी हुई हूँ बताओ क्या काम ह
भाई:- अम्मी सो गई या जग रही है
मैं:- अम्मी तो सो गई है में भी सोने वाली हूँ।
भाई:- बाजी दिल बेचैनी में है अगर आप आओ तो अच्छा लगेगा मुझे, थोड़ी देर में चले जाना
मुझे भाई के साथ बिताए हुए वो पल याद गए ओर मेरे जिस्म में झुरझुरी से उठ गई। मुझे भाई पर गर्व था कि भाई ने घर की जिम्मेदारी संभाली हुई थी। बेचारा अपने सपनो को दफन कर हमारे लिए कमाने रोज दुकान जाता और थक हार कर आता।
आज भाई बेचैन था तो मेरा भी फर्ज बनता है कि मैं भाई के साथ हमेशा कदम से कदम मिला साथ दु।
मेने अम्मी को आवाज दी पर कोई जवाब नही मिला में धीरे से खड़ी हुई और दरवाजे पर पहुंच कर एकबार मुड़के देखा और अम्मी को गहरी नींद में सोता देख बाहर से दरवाजा ढाल दिया
ओर धीरे धीरे ऊपर पहुंच गई जहां भाई दरवाजे पर ही मेरा इंतजार कर रहा था। मेने भाई की आंखों में असीम तड़प ओर मोहोब्बत देखी जो सिर्फ मेरे लिए थी अपनी बाजी अंजुम के लिए। मैं आगे आगे चलती हुई बेड पर पहुंची और एक किनारे बैठ गयी। भाई ही खामोशी से बेड पर बैठ गया और गहन चिंतन के हालात में फर्श पर निगाहें गाड़ दी।
मैं बखूबी समझ रही थी के भाई तप रहे है तड़प रहे हैं उसी अंजुम को पाने के लिए जो उसे शांत करती थी, उसका वीर्या गटकती थी, उसको किस करती थी। सभी चीजें मेरे जेहन में आती गईई और मैं भाई के शब्दों का इंतजार करने लगी।
थोड़ी देर बाद भाई ने निगाहे मेरी तरफ की ओर
भाई:- बाजी क्या मैं आपके गले लग सकता हूँ,
मुझे पता था भाई बात आगे बढ़ाने के लिए कुछ ना कुछ तो करेंगे ही ऐसा ही हुआ और ये सुनकर मुझे थोड़ी हंसी भी आई कि भाई कितनी चाल से मुझे बहका रहे हैं
मैं अपने इकलौते भाई जो अब हमारे घर का मालिक बन गया था उसे निराश नही करना चाहती थी और बाहें फैला दी।
भाई सरक कर मेरे पास आये और मुझे सीने से लगा लिया।
सीने से लगते ही भाई की सिसकी अहहहह बाजी बहुत मिस किया मेने इस अहसास को

मेने भी भाईईई बहुत याद किया, कितना सुकून है ना एक दूसरे की बाहों में
हां बाजीईईई भागदौड़ भरी जिंदगी से गुजरा हूँ सारी थकान कम हो गयी आपकी बाहों में
मैं:- भाई अब मुझे आप कहने की जरूरत नही है क्योंकि तुम ही अब इस घर के जिम्मेदार हो, हां अगर तुम्हारा मन है तो कह सकते हो।
भाई:- बाजी मैं तो आपकी इज्जत करता हूँ कहीं आपको बुरा लगे इसलिए नही कहता
मैं:- मेने कहा ना जो तुम्हारा मन करे वो बोलो,
भाई:- ठीक है तो बाजी आज से मैं तुम कह दिया करूँगा
ओर भाई मेरी पीठ सहलाने लगे।
भाई:- बाजी कितनी सुगंधित महक मिल रही है तुम्हारे गले लगने से अहहहह कोनसा इत्र लगाती हो तुम
मैं:- मैं तो कोई इत्र नही लगाती भाई, पता नही आप ऐसे क्यों कहा रहे हैं
ओर फिर भाई ने मेरी गर्दन पर नाक रगड़ी ओर साँस अंदर ली
अहहह बाजी बड़ी अच्छी महक आ रही है और सुंघाओं ना
मैं कहाँ से सुंघाउ तुम ही कर लो जो करना है।
ओर भाई ने मेरा दुपट्टा उतार कर फेंक दिया, ओर गर्दन पर धीरे धीरे काटने लगे, मेरा जिस्म भी इन हरकतों से गर्म होने लगा और में मुँह ऊपर करके लम्बी लम्बी कामुक सांसे लेने लगी।
भाई ऊपर आये और मेरे मोटे मोटे सुर्ख लाल गालों को चूमने लगे
अहह भाईईई क्या कर रहे हो, यही बेचैनी थी क्या तुम्हें, बहाना बनाकर बुलाया और अब बदमाशी कर रहे हो अहहह मेरा गाल
भाई ने मेरे गाल को मुँह में भर कर काट लिया और फिर चूसने लगे।
अहह बाजी आज बहुत दिनों बाद अच्छा लग रहा है मत रोको मुझे, आज सुकून से जीना चाहता हूँ तुम्हारी बाहों में मरना चाहता हूँ।
चुप हो जाओ भाई, हमने अब्बू को खोया है अब तुम्हे खो देंगे तो हम मर जायेंगे, आज के बाद ऐसी मनहूस बात मत निकलना समझे।
ओर भाई ने मुझे बेड पर लेट दिया
भाई:- बाजी आराम से लेट जाओ और चादर डाल दी मेरे ऊपर
मैं:- तुम कहाँ जा रहे हो, ओर मुझे क्यों लेटा दिया
बाजी तुम आंखे बंद मत करना जो मैं दिखाऊ उसे देखती रहना अगर तुम सच मे मुझे चाहती हो तो
में सोच में पड़ गयी कि भाई क्या दिखाने की बात कर रहा है
क्या दिखाना चाहते हो भाई??
ओर भाई अपने कपड़े निकालने लगा जिससे मुझे शर्म आने लगी
भाई:- बाजी तुझे कसम है अगर तुमने आंखे बंद की या नजर घुमाई तो
मैं:- मुझे बहुत शर्म आ रही है भाई, कपड़े क्यों निकाल रहे हो
भाई:-बाजी आज सिर्फ मेरे हिसाब से काम होगा मतलब मेरी हर बात मानोगी तुम
मैं:- क्या इरादा है आज तुम्हारा,में कुछ नही करने दूंगी समझे और कुछ गलत किया तो मुझसे बुरा कोई नही होगा
भाई:- ऐसा कुछ नही होगा तुम बेफिक्र रहो और अपना कच्छा उतार दिया और नंगा हो गया।

मैं बेड पर करवट लिए लेटी हुई थी और भाई मुझसे 4 फुट दूर अपने लन्ड के साथ खड़े हुए थे।
ये दृश्य शर्मसार करने वाला था पर भाई की कसम के आगे में मजबूर थी ना आंखे बंद कर सकती थी ना नजरें घुमा सकती थी
भाई ने हाथ से लोडा पकड़ा और आगे पीछे करना लगा, अभी भाई का लन्ड इतना सख्त नही था 5-6 बार हिलाने के बाद भाई ने अपना हाथ मेरे मुँह के पास किया और बोले
भाई:- बाजी अपना थूक डालना मेरे हाथ पर, गीला करना है लोडे को
में भाई की बेबाकी पर हैरान थी जो अपनी तहजीब वाली बाजी से थूक मांग रहे थे
मैं:- तुम पागल हो क्या बकवास कर रहे हो, मुझसे नही होगा ये सब काम,
भाई:- बाजी तुम्हे कसम है अगर एक भी काम को मना किया तो
वरना कभी बात नही करूँगा तुमसे।
आज जो मैं करू उसमे मेरा साथ दो, आज में बहुत गर्म हूँ इस गर्मी को निकालने में मदद करो बाजीईईई
चलो डालो अपना गर्म थूक मेरे हाथ पर
मेने झुंझलाते हुए मुँह में थूक इकट्ठा किया और भाई के हाथ पर लार के रूप में थूक गिरा दिया
भाई:- बोलो भाई मेरा थूक लगाकर मुठ मारो
मेने अपने आपको मजबूत किया और भाई को खुश करने के लिए
हां भाई मेरे थूक से हिलाओ उसे
भाई:- नही देसी भाषा मे बोलो, की भाई मेरे थूक लगाकर मूठ मारो हिलाओ अपने लोडे को
हां भाई मेरा थूक लगाकर मुठ मारो जोर जोर से हिलाओ अपने लोडे को
अहहहह बाजी ऐसे ही बोलो देखना कितना मजा आएगा
बोलो की वक़ार भाई अपने लोडे को तेज तेज़ हिलाओ पर पानी निकाल दो इसका
मैं:- वक़ार भाई तेज़ तेज़ हिलाओ इस हलब्बी लोडे को ओर निकाल दो सारा माल ।
भाई:- बाजीईईई अपनी सलवार कमीज निकाल कर नंगी लेट जाओ चादर के अंदर मैं नजर घुमा लेता हूँ जल्दी करो
मैं ताबेदार कनीज की तरह पहले सलवार निकाली और फिर कमीज ओर पैंटी मेने पहनी नही थी
ओर ब्रा समेत चादर के अंदर लेट गयी।
भाई ने पीठ घुमाई हुई थी और लन्ड हिला रहे थे।
कुछ देर के बाद भाई ने मुँह मेरी तरफ किया और लोडा हिलाते हुए बोले
भाई:- हो गयी नंगी मेरी बाजीईईई
मैं:- ह्म्म्म
भाई:- खुल के बोलो बाजी आज मजा लो और मजा दो 6 महीने तड़पा हूँ मैं, तबसे मुठ भी नही मारी है बाजीईईई
हां हो गयी नंगी भाईई
मेरा लोडा कैसा लगता है तुम्हे मेरी गर्म नंगी बाजीईईई
मैं:- सही है
भाई:- तुम्हारे लिए कम तो नही पड़ेगा ना मेरी नंगी जवान बाजीई
अहह प्लीज भाई ऐसा मत बोलो, बहुत शर्म आ रही है मुझे।
भाई:- आज इस शर्म को दूर रखो ओर जो पूछ रहा हूँ उसे खुलकर बताओ प्लीज बाजीईईई
भाई आज बहुत ज्यादा नशे में लाल हुए पड़े थे, ये सायद उसकी इतने दिनों की हवस जमा थी जो आज निकालने की कोशिश कर रहे थे।
बाजीईईई मैने एक तेल इस्तेमाल किया इस लोडे पर जिससे ये बड़ा हो जाये और मेरी गर्म जवान नंगी बाजी के लिए कम ना पड़े
देख कितना मोटा लम्बा हो गया है बाजीईईई
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मैं:- कमीने पहले कम बड़ा था जो ओर बड़ा कर लिया तुमने
मैं नही करने वाली गन्दा काम अभी बता रही हूँ
भाई:- वो तो वक़्त ही बताएगा मेरिई नंगी गर्म चुत की बाजी, तुम एक दिन गपक गपक कर लोडा खाओगी
ओर भाई ने आगे बढ़कर अपना लोडा मेरे मुँह के पास कर दिया
लोडा ठीक मेरी आँखों के सामने था और भाई मेरी आँखों मे देखते हुए
भाई:- बाजीईईई अपने भाई का लोडा चुसोगी अहह देख क्या मोटा है लेगी मुँह में बोल नंगी चुत की बाजी
मैं:- छीईईई, बन्द करो अपनी बकवास
मन तो मेरा भी चाह रहा था कि एक बार मुँह में लेकर देखु की कितना मजा है पर भाई की नजरों में शर्मीली बनी रहना चाहती थी।
भाई रुके ओर मुस्कुराते हुए लाइट बन्द कर दी, जो डिम लाइट थी वो भी बंद कर दी अब कमरे में फूल गुपगाप अंधेरा था और जो जिस्म तप रहे थे।
तभी भाई चलते हुए आये और बेड पर लेटी मेरे ऊपर से चादर खींच ली, अहह भाई क्या कर रहे हो
भाई:- मेरी बाजीईईई देखती जाओ आज तुम्हारा लाडला भाई कैसे मजा देता है तुम्हे मेरी गर्म गांण्ड की बहन
ओर भाई ने मुझे बेड से नीचे उतार दिया और अपने कदमो में बैठा दिया। मे बचाव के मूड में बिल्कुल भी नही थी मैं भी गर्म हो चली थी खासकर जब भाई गन्दी गन्दी बाते करते, इतना मजा आता कि भाई बोलते रहे और में सुनती रहू।
भाई:- बाजीईईई अपना मुँह खोलो जितना खोल सकती हो, तुम्हे अपने भाई का लुल्ला निगलना है
मैं:- नही भाई ऐसा मत करो, इतना बड़ा है तुम्हारा मेरा मुँह फट जाएगा। मैं नाटक करते हुए बोली
भाई:- बाजी कुछ गन्दा बोलू तो गलत समझना में आज खुलकर मजा करना चाहता हूँ बाजीईईई
चलो बाजी मेरे लोडे को चुसो चाटो खाओ इसे
ओर लोडा मेरे तपते हुए होंठो पर रख दिया, लोडे की तपिस से मेरे होंठो को गर्म कर दिया
में आज्ञाकारी कनीज की तरह टोपे पर जीभ फिराने लगी और टोपा गीला करने लगी। में फर्श पर नंगी धड़ंगी घुटनो के बल बैठी हुई अपने भाई का लोडा चूस रही थी
भाई भी सिसकी लेते हुए अनाप शनाप बक रहे थे उसे मेरे टोपा चूसने से बहुत जोश आ रहा था।
भाई:- बाजीईईई और अंदर घुसाओ मुँह में जिस मुँह से तुम दुआ मांगती हो आज उसी मुँह से भाई का लोडा निगलो
मैंने चुपचाप थोड़ा सा मुँह खोला और 3 इंच लोडा मुँह में समा लिया, भाई का लोडा बहुत मोटा था जिससे मेरा मुँह फटने वाला हो गया था।
मैं उतने ही लोडे को चुस्ती रही ओर मर्दाने लोडे की खुसबू लेने लगी, मेरी लार ओर थूक लोडे को गिला कर चुके थे।
भाई:- बाजीईईई जीभ बाहर निकालो अपनी
मेने जीभ बाहर निकाली और भाई ने मेरे मुँह को दोनों हाथों से जकड़ा ओर लोडे को अंदर घुसाते रहे घुसाते रहे जैसे ही लोडा 5 इंच अंदर घुस मेरी सांसे बन्द होने लगी, मेने भाई की जांघो पर हाथ मारा लेकिन भाई पर कोई असर नही हुआ
भाई:- अहहह बाजी तुम्हारा मुँह कितना गर्म है लो लो कोशिस करो आधी मंजिल तुमने पर कर ली है बाजीईईई
अब 6 इंच तक लोडा मेरे उर्दू जाबां पढ़े हुए मुँह में था, ओर भाई अंदर डालने में लगे हुए थे।
भाई:- बाजीईईई में एक झटका देने वाला हूँ तैयार हो जाओ
मैं लाचारी में ऊपर भाई की आंखों में देखने लगी जो हवस में लाल हुई पड़ी थी।

मैं मन ही मन मे लोडा निगलने की हिम्मत रखने की दुआ करने लगी। भाई ने मेरा मुँह कसके पकड़ा और एक करारा झटका मारा और समूचा 12 इंच लम्बा 5 इंच मोटा लोडा मेरे मुँह में उतार दिया। लोडा मेरे हलक से नीचे मेरे पेट तक पहुंच गया
मैं गॉड को याद करने लगी कि आज बचा ले भाई की मार से
सांसे बिल्कुल बन्द हो चली थी आंखे मेरी बाहर को निकली हुई
ओर भाई की तरह बेबशी से टकटकी लगाए देख रही थी।
भाई:- अहहह बाजीईईई मुबारक हो तुमने अपने सगे भाई का एक फुट का लोला निगल लिया ओर मेरी पीठ थपथपाने लगे बधाई के तौर पर।
मैंरी आँखों से आँसू निकल आये और जोर लगाकर छूटने की कोशिश करने लगी पर भाई की पकड़ से नही छूट पाई
भाई ने अब लोडा आगे पीछे करने लगे जेसे मुँह को चोद रहे हो
अहह अंजुम बाजीईईई मान गए तुम्हे पूरा लोडा ही निगल लिया अहह बाजी बहुत इंतजार किया है इस समय का बहुत तड़पा हूँ तुम्हारे लिए देखो कैसे बैठी लोडा निगल कर मेरी सरीफ बाजीईईई
भाई झटके मारने लगे और मेरी नाक भाई की झांटो के बाल से टकराने लगी तभी भाई ने एक झटका मारा जिससे लोडा गला फाड़ता हुआ नीचे पेट मे चला गया और भाई की बड़ी बड़ी झांट मेरे नथुनों में घुस गई। मैं तड़फड़ाने लगी आखरी बार ऊपर वाले को याद करने लगी, मोत मुझसे चन्द लम्हे दूर थी और मैं आंखे में आंसू गले मे लोडा फँसाये इंतजार करने लगी।
d187ab772cda1992eba3aa024309f401
भाई ने कोई 10 सेकंड तक लोडा फसाये रखा और झटके से निकाल दिया।
लोडा निकलते ही मेरे मुँह से बहुत सारी लार थूक निकली और डॉगी पोजीशन में खांसने लगी।

कोई 5 मिनट तक खांसने पर जब सांसे दुरुस्त हुई तो खड़ी हुई और भाई की तरफ आंखे मिलाई जो मुस्कुरा रहे थे।
मुझे गुस्सा तो बहुत आ रहा था कि भाई को थप्पड़ जड़ दु पर किसी अनहोनी की वजह से रुक गयी।
भाई:- बाजी आज मुझे यकीन हो गया कि तुम मुझसे सच्ची मोहब्बत करती हो वरना इतना बड़ा लोडा निगलना उनका काम है
मैं:- किनका काम है बोलो ना रुक क्यों गए कमीने बेशर्म
भाई:- नही बाजी तुम बुरा मान जाओगी
मैं:- जो ये हरकत की है इससे तो मोहल्ले में लड्डू बाटने चाहिए है ना ??
भाई:- अगर तुम्हारा मन है तो बांट दो लड्डू लोडा निगलने की खुशी में
मैं:- बताओ ना क्या कह रहे थे किनका काम है
में सुनना चाहती थी के भाई क्या बोलते है जहां तक मेरा आईडिया था वो वही बोल रहे थे जो में समझ रही थी पर भाई से कन्फर्म करना था
भाई:- रंडियों का काम होता है और बोलकर हँसने लगे
मैं भाई को मारने दौड़ी तो भाई ने मुझे कसके बाहों में भर लिया ओर में भाई की पीठ पर मुक्के मारने लगी
कमीने तुमने मुझे वो समझ है क्या बेशर्म, मैं कितनी पढ़ी लिखी लड़की थी तुमने मुझे बहला फुसलाकर गन्दा बना दिया है और अब गन्दा समझने भी लगे हो
भाई:- भाई ने मुझे कसके जकड़ा जिससे मेरे मम्मे उसकी छाती में धंस गए अहहहह ओर भाई मेरे बालों को सँवारते हुए
भाई:- बाजी सच मे आप बहुत अच्छी बाजी जो मेरे लिए इतना कुछ सह गयी तुम्हे कितनी दिक्कत हुई होगी में समझ सकता हूँ
आसान नही है इतना बड़ा लोडा निगलना, मुझे गर्व है कि मुझे तुम जैसी बाजी मिली और मेरे माथे को चूम लिया भाई ने
मैं:- क्या करती तुमने ही कसम दी थी पर भाई तुम्हे मुझपे रहम नही आया थोड़ा भी, मैं कितनी नाजुक हूँ और तुमने जानवर जैसा रूप दिखाया, में तुमसे सच्ची मोहब्बत करती हूं भाई एक तुम ही तो सहारा हो हमारा, तुम्हे नाराज नही करना चाहती इसलिए सब सह लिया तुम्हारी खातिर,
भाई:- बाजी i love you
मैं:- i love you 2
ओर भाई ने मेरा माथा दोबारा चुम लिया।
भाई:- चलो बाजी बिस्तर पर लेट जाते हैं
मैं:- नही भाई अम्मी कभी भी जाग सकती है बहुत बुरा हो जाएगा अगर अम्मी इधर ढूढ़ते हुए आ गयी तो
भाई:- बाजी में हूँ ना तुम टेंशन ना लो बस आज की रात एन्जॉय करो बाजी ओर मुझे उठा कर बेड पर लेटा दिया और खुद भी लेट गया बराबर में।

दो नंगे जिस्म एक बेड पर थे और गर्म आग फेंक रहे थे
भाई:- बाजी बुरा ना मानो तो में आपकी शर्मगाह को टच कर लूं
मैं:- ओह हो शर्मगाह, आज इतनी इज्जत कैसे आ गयी पहले तो अनाप शनाप बकते थे
भाई:- चलो ऐसी बात है तो क्या में तुम्हारी लम्बी मोटी चुत को छू लू बाजी
मैं:- अहहह कमीने इतनी जल्दी बदल गया, मुझे नही करना कुछ बहुत शर्म आ रही है और मैने भाई के सीने में सिमट गई।
भाई:- बाजी में महसूस करना चाहता हूं तुम्हारी गर्म तपती चुत को, उंगली ही तो करूँगा बाकी आप जो करने दो
मैं:- नही भाईईई मुझे शर्म आएगी तुम मेरे भाई हो, भाई ऐसा नही करते।
भाई:- भाई तो अपनी बाजीयों को लोडा भी नही चुसाते फिर भी तुमने चुसा ना
मैं:- वो तो तुमने जबर्दस्ती मनवा लिया, मुझे कोई शोक नही है ऐसे काम का
भाई:- बाजी प्लीज एक बार छू लेने दो अपनी मादक चुत को, मेरी तमन्ना पूरी कर दो प्लीज बाजी
जब में गांण्ड में उंगली कर सकता हूँ तो चुत में क्यों नही
मैं:- क्या मिल जाएगा तुम्हे वहां हाथ लगाकर, मुझे पहले ही बहुत शर्म आ रही है।
भाई:- बस थोड़ा सा चेक करूँगा की असलियत में केसी होती है ये जगह। मेने आजतक बस पढा है कभी महसूस नही किया।
इतनी गुज़रिशों से मेरा दिल भी पिघल गया और मैने भाई को इजाजत दे दी, देखो ज्यादा बदमाशी मत करना पहले ही बोल दे रही हूँ। मुझे नीचे भी जाना है काफी देर हो गयी यहां

अंजुम❤️
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【रीडर्स बाजी की इस तस्वीर को दिमाग मे बैठा ले】
Bhai Bahot hi badhiya update he.

Kahani fast track par aa gayi he sidha 6 mahine bad ka hi dikha diya ...

Par bhai ek request he ki hero sirf ek hi rakhna ye nanaji ka bada lund dikha diya he to kya Ammi ko usse chidwane to nahi wale ho na ...

Hero sirf ek hi rahe to maja aayega...
 

malikarman

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उसके बाद हमने नास्ता किया और वही दिनचर्या में दिन गुजर गया।
शाम को मैं किताबे पढ़ते समय मुझे किसी अनजान नंबर से कॉल आया मेने उसे पिक किया।
अनजान आदमी:- हेलो कोंन बोल रहा है ?
मैं:- आप कोंन बोल रहे हैं कहाँ मिलाया है आपने फ़ोन
अनजान:- बेटे में रहीम बोल रहा हूँ तुम्हारे अब्बा के बगल में मेरी दुकान है तुम्हारे अब्बू का एक्सीडेंट हो गया है जल्दी से हॉस्पिटल आ जाओ
इतना सुनते ही मेरे हाथ से फ़ोन छूट गया और में बेहोशी की हालत में फर्श पर बैठ गया इस खबर ने मुझे अंदर तक हिला दिया था कोई 5 मिनट के बाद मुझे कुछ होश आया तो में नीचे भागते हुए आया अम्मी को खबर की जिसे सुनकर अम्मी जोर जोर से रोने लगी और बेहोश हो गयी।
मेने अम्मी को संभाला और गिलास में पानी लेकर छींटे डाले जिससे अम्मी को होश आया और अम्मी दोबारा से बेहोश हो गयी।
मेने बाजी को आवाज लगाई दो तीन बार आवाज देने पर बाजी कमरे से बाहर निकली और अम्मी को जमीन पर पड़ा देख तेज दौड़ती हुई हमारे पास आई अम्मिईईईईई क्याआआ हुआ है तुम्हे
मैं भी इस समय सदमे की हालत में था लेकिन मुझे अम्मी बाजी को संभालना था और हॉस्पिटल पहुंचना था।
बाजी भी अब अम्मी की हालत पर रोने लगी थी जो बार बार अम्मी की बेहोशी की वजह पूछ रही थी तो मैने रोते हुए बाजी को सब बता दिया जिसे सुनकर बाजी भी रोने लगी।
अब्बू के एक्सीडेंट का सदमा हम तीनों को बर्दाश्त नही हो रहा था तो कुछ देर बाद अम्मी को होश आया और मैने एक कैब बुक कर ली हॉस्पिटल जाने के लिए
तब तक मैं अम्मी बाजी को संभालने की कोशिश करता रहा, अम्मी बेहताशा दहाड़े मार मार कर रोये जा रही थी
बाजी ओर मैं अम्मी को संभालने में लगे हुए थे, बाजी हिम्मत से काम ले रही थी तभी कैब आ गयी और हम हॉस्पिटल के लिए निकल गए, मेने उस नम्बर पर दोबारा कॉल की ओर हॉस्पिटल के बारे में पूछा, उधर से रहीम चाचा ने हमे हॉस्पिटल का पता बताया और बोला कि अभी अब्बू ICU में है
कोई 25-30 मिनट के सफर के बाद हम हॉस्पिटल पहुंचे और कैब को किराया दिया और दौड़ते हुए हॉस्पिटल में एंटर हो गए।
अम्मी को बाजी पकड़कर अंदर ला रही थी और में दौड़ता हुआ ICU की तरफ जा रहा था।
ICU के बाहर मुझे एक आदमी मिला जो अब्बू जैसी उम्र का था उसने मेरा नाम पूछा तो मैने बता दिया।
मैं रहीम चाचा से अब्बू के एक्सीडेंट के बारे में पूछना लगा तभी अम्मी बाजी भी आ गयी।
रहीम:- बेटा तुम्हारे अब्बू बाइक से घर जा रहे थे तभी उनका एक्सीडेंट एक ट्रक से हो गया और मैं ऑटो से घर जा रहा था तो मुझे रास्ते मे पता चला कि भीड़ तुम्हारे अब्बू के आसपास इकट्ठा थी, मेने तुम्हारे अब्बू को हॉस्पिटल पहुंचाया ओर फिर तुम्हे खबर की, तुम्हारे अब्बू का फ़ोन ये रहा जिसमे नम्बर देखकर मेने तुमसे राब्ता किया है।
अम्मी बाजी सिसक रही थी और हम वेटिंग एरिया में खड़े होकर डॉक्टर्स का इंतजार कर रहे थे।
थोड़ी देर बाद icu से डॉक्टर निकले और पेशेंट के करीबियों को बुलाया तो हम उनके पास गए तो डॉक्टर बोला सर में चोट लगने की वजह से खून काफी बह गया था जिससे उसकी मौत हो गयी।
इतना सुनकर अम्मी बाजी फर्श पर गिर गयी और बेहोश हो गयी।
सदमे में मेरी हालत भी नाजुक हो गए पर किसी को तो हिम्मत से काम लेना था, अब्बू को घर पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस को प्रबन्द रहीम चाचा ने किया और किसी तरह हम अब्बू को घर ले आये।
मेने सभी रिश्तेदारों को फ़ोन पर घटना को बताया और मिट्टी देने की तैयारी में जुट गए। इन सब चीजों में पड़ोसियों ने काफी हेल्प की ओर रात के 9 बजे अब्बू को दफन किया गया।

【लेडीज किरदारों की फ़ोटो दिमाग मे बैठा ले और याद करले, ताकि कहानी में पढ़ते समय इमेजिनेशन अच्छा हो

कहानी के नए किरदार❤️
नाना:- इनायत खान
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थोड़े बूढ़े हो गए हैं पर जिस्म अभी हट्टा कट्टा है, खेतीबाड़ी करते है गाँव मे, इनकी बीवी गुजर गई है। नेक दिल इंसान ओर हमेशा गरीबों की सेवा करने में हरपल हाजिर। लन्ड का साइज 10 इंच लम्बा ओर 4.5 इंच मोटा।

1st मामा:- सरफराज खान
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मकान मिस्त्री है जो लोगो के घर बनाता है, जिससे घर का गुजारा करते हैं लन्ड का साइज 7 इंच लम्बा 3 इंच मोटा,इसके 3 बच्चे है। 2 लड़के 1 लड़की, लड़की का नाम जीनत है जो बाजी अंजुम से 2 साल छोटी है

जीनत:-
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बाजी अंजुम से 2 साल छोटी है। ये भी उर्दू पढ़ी लिखी है और अब घर पर रहती है।

जीनत की अम्मी:- रिहाना (मेरी बड़ी मामी)
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एक सरीफ ओर इज्जतदार खातून जो अम्मी की तरह उर्दू पढ़ी लिखी तालीम याफ्ता है, हाइट 5.7 है। अपने बच्चों और शौहर से मोहब्बत करती है

2nd मामा:- इमरान खान
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परचूनी की दुकान खोल रखी है गाँव मे ही, लन्ड का साइज 8 इंच लम्बा, 3 इंच मोटा। इसकी एक ही बेटी है आएशा जो मदरसे जाती है और बाजी से 4 साल छोटी है। लगभग कच्ची जवानी में कदम रख दिये है।

इमरान की बेटी:- आएशा❤️ (दूसरी लीड हीरोइन)
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सारे खानदान ओर रिश्तेदारीयों में सबसे खूबसूरत, सबसे ज्यादा तालीम याफ्ता, सबसे ज्यादा पर्दा वाली एक 19 साल की कच्ची राजकुमारी। जब से जवान हुई है घर मे भी किसी ने इसके जिस्म की बनावट नही देखी. बचपन से अब तक मदरसे में पढ़ने वाली एक आपा टाइप लड़की।

आएशा की अम्मी फातिमा:-
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एक मजबूत कद काठी की औरत, जिस्म भरा हुआ है घर के काम सम्भालती है और रात को अपने शौहर को। ये भी उर्दू पढ़ी लिखी है। हमारा सारा खानदान उर्दू पढा लिखा और मजहबी तहजीब हासिल किया हुआ परिवार/रिस्तेदार हैं।


अब्बू की मौत के बाद अम्मी गुमसुम रहने लगी चेहरे पर निराशा के असर दिखने लगे थे ना ढंग से खाती ना पीती। अम्मी 4 महीने की इद्दत में बैठ गयी (इद्दत:- शौहर के मरने पर 4 महीने अकेले गुजरना, कोई गेर से ना बात करना ना देखना)
बाजी सारा काम करती और मैं अब दुकान संभालने लगा
क्योंकि यही एक आमदनी का अच्छा खासा जरिया था।
में सुबह निकलता ओर शाम को घर जाता
इसी तरह 6 महीने निकल गए। मेने मेहनत से काम बढ़ा लिया ओर दो लड़के रख लिए जो मेरी गैरमौजूदगी में कपड़ो की बड़ी दुकान संभालते है जिससे आमदनी भी ज्यादा होने लगी। अम्मी बाजी ओर मैं अब लगभग अब्बू वाले हादसे को लगभग भुला चुके थे ओर आगे बढ़ गए थे


बाजी की जुबानी❤️

अब्बू की मौत के बाद हम अकेले पड़ गए थे हमारा एक मात्र सहारा मेरा भाई दिन में दुकान संभालता ओर मैं अम्मी को उस हादसे को भूलने में काफी हद तक कामयाब हो रही थी।
मैं सुबह मदरसे जाती और 1 बजे तक वापिस आ जाती, मैं अब अम्मी के साथ ही उसके कमरे में सोती, कभी कभी अम्मी को अब्बू याद आते तो हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर रो लेते थे, होनी को कोन टाल सकता है जो हो गया उसे सही तो नही किया जा सकता। 6 महीने बाद फिर से मुझे गन्दी चीजो का अहसास होने लगा और में परिस्थितियों को देखते हुए मन मार कर रह जाती। अम्मी के साथ चिपक कर सोना भी मुझे नसीब नही हो रहा था, अगर होता भी तो ये सही नही था।
लेकिन रात भाई का मैसेज आया
भाई:- बाजी क्या कर रही हो आप
मैं:- कुछ नही भाई अम्मी के साथ लेटी हुई हूँ बताओ क्या काम ह
भाई:- अम्मी सो गई या जग रही है
मैं:- अम्मी तो सो गई है में भी सोने वाली हूँ।
भाई:- बाजी दिल बेचैनी में है अगर आप आओ तो अच्छा लगेगा मुझे, थोड़ी देर में चले जाना
मुझे भाई के साथ बिताए हुए वो पल याद गए ओर मेरे जिस्म में झुरझुरी से उठ गई। मुझे भाई पर गर्व था कि भाई ने घर की जिम्मेदारी संभाली हुई थी। बेचारा अपने सपनो को दफन कर हमारे लिए कमाने रोज दुकान जाता और थक हार कर आता।
आज भाई बेचैन था तो मेरा भी फर्ज बनता है कि मैं भाई के साथ हमेशा कदम से कदम मिला साथ दु।
मेने अम्मी को आवाज दी पर कोई जवाब नही मिला में धीरे से खड़ी हुई और दरवाजे पर पहुंच कर एकबार मुड़के देखा और अम्मी को गहरी नींद में सोता देख बाहर से दरवाजा ढाल दिया
ओर धीरे धीरे ऊपर पहुंच गई जहां भाई दरवाजे पर ही मेरा इंतजार कर रहा था। मेने भाई की आंखों में असीम तड़प ओर मोहोब्बत देखी जो सिर्फ मेरे लिए थी अपनी बाजी अंजुम के लिए। मैं आगे आगे चलती हुई बेड पर पहुंची और एक किनारे बैठ गयी। भाई ही खामोशी से बेड पर बैठ गया और गहन चिंतन के हालात में फर्श पर निगाहें गाड़ दी।
मैं बखूबी समझ रही थी के भाई तप रहे है तड़प रहे हैं उसी अंजुम को पाने के लिए जो उसे शांत करती थी, उसका वीर्या गटकती थी, उसको किस करती थी। सभी चीजें मेरे जेहन में आती गईई और मैं भाई के शब्दों का इंतजार करने लगी।
थोड़ी देर बाद भाई ने निगाहे मेरी तरफ की ओर
भाई:- बाजी क्या मैं आपके गले लग सकता हूँ,
मुझे पता था भाई बात आगे बढ़ाने के लिए कुछ ना कुछ तो करेंगे ही ऐसा ही हुआ और ये सुनकर मुझे थोड़ी हंसी भी आई कि भाई कितनी चाल से मुझे बहका रहे हैं
मैं अपने इकलौते भाई जो अब हमारे घर का मालिक बन गया था उसे निराश नही करना चाहती थी और बाहें फैला दी।
भाई सरक कर मेरे पास आये और मुझे सीने से लगा लिया।
सीने से लगते ही भाई की सिसकी अहहहह बाजी बहुत मिस किया मेने इस अहसास को

मेने भी भाईईई बहुत याद किया, कितना सुकून है ना एक दूसरे की बाहों में
हां बाजीईईई भागदौड़ भरी जिंदगी से गुजरा हूँ सारी थकान कम हो गयी आपकी बाहों में
मैं:- भाई अब मुझे आप कहने की जरूरत नही है क्योंकि तुम ही अब इस घर के जिम्मेदार हो, हां अगर तुम्हारा मन है तो कह सकते हो।
भाई:- बाजी मैं तो आपकी इज्जत करता हूँ कहीं आपको बुरा लगे इसलिए नही कहता
मैं:- मेने कहा ना जो तुम्हारा मन करे वो बोलो,
भाई:- ठीक है तो बाजी आज से मैं तुम कह दिया करूँगा
ओर भाई मेरी पीठ सहलाने लगे।
भाई:- बाजी कितनी सुगंधित महक मिल रही है तुम्हारे गले लगने से अहहहह कोनसा इत्र लगाती हो तुम
मैं:- मैं तो कोई इत्र नही लगाती भाई, पता नही आप ऐसे क्यों कहा रहे हैं
ओर फिर भाई ने मेरी गर्दन पर नाक रगड़ी ओर साँस अंदर ली
अहहह बाजी बड़ी अच्छी महक आ रही है और सुंघाओं ना
मैं कहाँ से सुंघाउ तुम ही कर लो जो करना है।
ओर भाई ने मेरा दुपट्टा उतार कर फेंक दिया, ओर गर्दन पर धीरे धीरे काटने लगे, मेरा जिस्म भी इन हरकतों से गर्म होने लगा और में मुँह ऊपर करके लम्बी लम्बी कामुक सांसे लेने लगी।
भाई ऊपर आये और मेरे मोटे मोटे सुर्ख लाल गालों को चूमने लगे
अहह भाईईई क्या कर रहे हो, यही बेचैनी थी क्या तुम्हें, बहाना बनाकर बुलाया और अब बदमाशी कर रहे हो अहहह मेरा गाल
भाई ने मेरे गाल को मुँह में भर कर काट लिया और फिर चूसने लगे।
अहह बाजी आज बहुत दिनों बाद अच्छा लग रहा है मत रोको मुझे, आज सुकून से जीना चाहता हूँ तुम्हारी बाहों में मरना चाहता हूँ।
चुप हो जाओ भाई, हमने अब्बू को खोया है अब तुम्हे खो देंगे तो हम मर जायेंगे, आज के बाद ऐसी मनहूस बात मत निकलना समझे।
ओर भाई ने मुझे बेड पर लेट दिया
भाई:- बाजी आराम से लेट जाओ और चादर डाल दी मेरे ऊपर
मैं:- तुम कहाँ जा रहे हो, ओर मुझे क्यों लेटा दिया
बाजी तुम आंखे बंद मत करना जो मैं दिखाऊ उसे देखती रहना अगर तुम सच मे मुझे चाहती हो तो
में सोच में पड़ गयी कि भाई क्या दिखाने की बात कर रहा है
क्या दिखाना चाहते हो भाई??
ओर भाई अपने कपड़े निकालने लगा जिससे मुझे शर्म आने लगी
भाई:- बाजी तुझे कसम है अगर तुमने आंखे बंद की या नजर घुमाई तो
मैं:- मुझे बहुत शर्म आ रही है भाई, कपड़े क्यों निकाल रहे हो
भाई:-बाजी आज सिर्फ मेरे हिसाब से काम होगा मतलब मेरी हर बात मानोगी तुम
मैं:- क्या इरादा है आज तुम्हारा,में कुछ नही करने दूंगी समझे और कुछ गलत किया तो मुझसे बुरा कोई नही होगा
भाई:- ऐसा कुछ नही होगा तुम बेफिक्र रहो और अपना कच्छा उतार दिया और नंगा हो गया।

मैं बेड पर करवट लिए लेटी हुई थी और भाई मुझसे 4 फुट दूर अपने लन्ड के साथ खड़े हुए थे।
ये दृश्य शर्मसार करने वाला था पर भाई की कसम के आगे में मजबूर थी ना आंखे बंद कर सकती थी ना नजरें घुमा सकती थी
भाई ने हाथ से लोडा पकड़ा और आगे पीछे करना लगा, अभी भाई का लन्ड इतना सख्त नही था 5-6 बार हिलाने के बाद भाई ने अपना हाथ मेरे मुँह के पास किया और बोले
भाई:- बाजी अपना थूक डालना मेरे हाथ पर, गीला करना है लोडे को
में भाई की बेबाकी पर हैरान थी जो अपनी तहजीब वाली बाजी से थूक मांग रहे थे
मैं:- तुम पागल हो क्या बकवास कर रहे हो, मुझसे नही होगा ये सब काम,
भाई:- बाजी तुम्हे कसम है अगर एक भी काम को मना किया तो
वरना कभी बात नही करूँगा तुमसे।
आज जो मैं करू उसमे मेरा साथ दो, आज में बहुत गर्म हूँ इस गर्मी को निकालने में मदद करो बाजीईईई
चलो डालो अपना गर्म थूक मेरे हाथ पर
मेने झुंझलाते हुए मुँह में थूक इकट्ठा किया और भाई के हाथ पर लार के रूप में थूक गिरा दिया
भाई:- बोलो भाई मेरा थूक लगाकर मुठ मारो
मेने अपने आपको मजबूत किया और भाई को खुश करने के लिए
हां भाई मेरे थूक से हिलाओ उसे
भाई:- नही देसी भाषा मे बोलो, की भाई मेरे थूक लगाकर मूठ मारो हिलाओ अपने लोडे को
हां भाई मेरा थूक लगाकर मुठ मारो जोर जोर से हिलाओ अपने लोडे को
अहहहह बाजी ऐसे ही बोलो देखना कितना मजा आएगा
बोलो की वक़ार भाई अपने लोडे को तेज तेज़ हिलाओ पर पानी निकाल दो इसका
मैं:- वक़ार भाई तेज़ तेज़ हिलाओ इस हलब्बी लोडे को ओर निकाल दो सारा माल ।
भाई:- बाजीईईई अपनी सलवार कमीज निकाल कर नंगी लेट जाओ चादर के अंदर मैं नजर घुमा लेता हूँ जल्दी करो
मैं ताबेदार कनीज की तरह पहले सलवार निकाली और फिर कमीज ओर पैंटी मेने पहनी नही थी
ओर ब्रा समेत चादर के अंदर लेट गयी।
भाई ने पीठ घुमाई हुई थी और लन्ड हिला रहे थे।
कुछ देर के बाद भाई ने मुँह मेरी तरफ किया और लोडा हिलाते हुए बोले
भाई:- हो गयी नंगी मेरी बाजीईईई
मैं:- ह्म्म्म
भाई:- खुल के बोलो बाजी आज मजा लो और मजा दो 6 महीने तड़पा हूँ मैं, तबसे मुठ भी नही मारी है बाजीईईई
हां हो गयी नंगी भाईई
मेरा लोडा कैसा लगता है तुम्हे मेरी गर्म नंगी बाजीईईई
मैं:- सही है
भाई:- तुम्हारे लिए कम तो नही पड़ेगा ना मेरी नंगी जवान बाजीई
अहह प्लीज भाई ऐसा मत बोलो, बहुत शर्म आ रही है मुझे।
भाई:- आज इस शर्म को दूर रखो ओर जो पूछ रहा हूँ उसे खुलकर बताओ प्लीज बाजीईईई
भाई आज बहुत ज्यादा नशे में लाल हुए पड़े थे, ये सायद उसकी इतने दिनों की हवस जमा थी जो आज निकालने की कोशिश कर रहे थे।
बाजीईईई मैने एक तेल इस्तेमाल किया इस लोडे पर जिससे ये बड़ा हो जाये और मेरी गर्म जवान नंगी बाजी के लिए कम ना पड़े
देख कितना मोटा लम्बा हो गया है बाजीईईई
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मैं:- कमीने पहले कम बड़ा था जो ओर बड़ा कर लिया तुमने
मैं नही करने वाली गन्दा काम अभी बता रही हूँ
भाई:- वो तो वक़्त ही बताएगा मेरिई नंगी गर्म चुत की बाजी, तुम एक दिन गपक गपक कर लोडा खाओगी
ओर भाई ने आगे बढ़कर अपना लोडा मेरे मुँह के पास कर दिया
लोडा ठीक मेरी आँखों के सामने था और भाई मेरी आँखों मे देखते हुए
भाई:- बाजीईईई अपने भाई का लोडा चुसोगी अहह देख क्या मोटा है लेगी मुँह में बोल नंगी चुत की बाजी
मैं:- छीईईई, बन्द करो अपनी बकवास
मन तो मेरा भी चाह रहा था कि एक बार मुँह में लेकर देखु की कितना मजा है पर भाई की नजरों में शर्मीली बनी रहना चाहती थी।
भाई रुके ओर मुस्कुराते हुए लाइट बन्द कर दी, जो डिम लाइट थी वो भी बंद कर दी अब कमरे में फूल गुपगाप अंधेरा था और जो जिस्म तप रहे थे।
तभी भाई चलते हुए आये और बेड पर लेटी मेरे ऊपर से चादर खींच ली, अहह भाई क्या कर रहे हो
भाई:- मेरी बाजीईईई देखती जाओ आज तुम्हारा लाडला भाई कैसे मजा देता है तुम्हे मेरी गर्म गांण्ड की बहन
ओर भाई ने मुझे बेड से नीचे उतार दिया और अपने कदमो में बैठा दिया। मे बचाव के मूड में बिल्कुल भी नही थी मैं भी गर्म हो चली थी खासकर जब भाई गन्दी गन्दी बाते करते, इतना मजा आता कि भाई बोलते रहे और में सुनती रहू।
भाई:- बाजीईईई अपना मुँह खोलो जितना खोल सकती हो, तुम्हे अपने भाई का लुल्ला निगलना है
मैं:- नही भाई ऐसा मत करो, इतना बड़ा है तुम्हारा मेरा मुँह फट जाएगा। मैं नाटक करते हुए बोली
भाई:- बाजी कुछ गन्दा बोलू तो गलत समझना में आज खुलकर मजा करना चाहता हूँ बाजीईईई
चलो बाजी मेरे लोडे को चुसो चाटो खाओ इसे
ओर लोडा मेरे तपते हुए होंठो पर रख दिया, लोडे की तपिस से मेरे होंठो को गर्म कर दिया
में आज्ञाकारी कनीज की तरह टोपे पर जीभ फिराने लगी और टोपा गीला करने लगी। में फर्श पर नंगी धड़ंगी घुटनो के बल बैठी हुई अपने भाई का लोडा चूस रही थी
भाई भी सिसकी लेते हुए अनाप शनाप बक रहे थे उसे मेरे टोपा चूसने से बहुत जोश आ रहा था।
भाई:- बाजीईईई और अंदर घुसाओ मुँह में जिस मुँह से तुम दुआ मांगती हो आज उसी मुँह से भाई का लोडा निगलो
मैंने चुपचाप थोड़ा सा मुँह खोला और 3 इंच लोडा मुँह में समा लिया, भाई का लोडा बहुत मोटा था जिससे मेरा मुँह फटने वाला हो गया था।
मैं उतने ही लोडे को चुस्ती रही ओर मर्दाने लोडे की खुसबू लेने लगी, मेरी लार ओर थूक लोडे को गिला कर चुके थे।
भाई:- बाजीईईई जीभ बाहर निकालो अपनी
मेने जीभ बाहर निकाली और भाई ने मेरे मुँह को दोनों हाथों से जकड़ा ओर लोडे को अंदर घुसाते रहे घुसाते रहे जैसे ही लोडा 5 इंच अंदर घुस मेरी सांसे बन्द होने लगी, मेने भाई की जांघो पर हाथ मारा लेकिन भाई पर कोई असर नही हुआ
भाई:- अहहह बाजी तुम्हारा मुँह कितना गर्म है लो लो कोशिस करो आधी मंजिल तुमने पर कर ली है बाजीईईई
अब 6 इंच तक लोडा मेरे उर्दू जाबां पढ़े हुए मुँह में था, ओर भाई अंदर डालने में लगे हुए थे।
भाई:- बाजीईईई में एक झटका देने वाला हूँ तैयार हो जाओ
मैं लाचारी में ऊपर भाई की आंखों में देखने लगी जो हवस में लाल हुई पड़ी थी।

मैं मन ही मन मे लोडा निगलने की हिम्मत रखने की दुआ करने लगी। भाई ने मेरा मुँह कसके पकड़ा और एक करारा झटका मारा और समूचा 12 इंच लम्बा 5 इंच मोटा लोडा मेरे मुँह में उतार दिया। लोडा मेरे हलक से नीचे मेरे पेट तक पहुंच गया
मैं गॉड को याद करने लगी कि आज बचा ले भाई की मार से
सांसे बिल्कुल बन्द हो चली थी आंखे मेरी बाहर को निकली हुई
ओर भाई की तरह बेबशी से टकटकी लगाए देख रही थी।
भाई:- अहहह बाजीईईई मुबारक हो तुमने अपने सगे भाई का एक फुट का लोला निगल लिया ओर मेरी पीठ थपथपाने लगे बधाई के तौर पर।
मैंरी आँखों से आँसू निकल आये और जोर लगाकर छूटने की कोशिश करने लगी पर भाई की पकड़ से नही छूट पाई
भाई ने अब लोडा आगे पीछे करने लगे जेसे मुँह को चोद रहे हो
अहह अंजुम बाजीईईई मान गए तुम्हे पूरा लोडा ही निगल लिया अहह बाजी बहुत इंतजार किया है इस समय का बहुत तड़पा हूँ तुम्हारे लिए देखो कैसे बैठी लोडा निगल कर मेरी सरीफ बाजीईईई
भाई झटके मारने लगे और मेरी नाक भाई की झांटो के बाल से टकराने लगी तभी भाई ने एक झटका मारा जिससे लोडा गला फाड़ता हुआ नीचे पेट मे चला गया और भाई की बड़ी बड़ी झांट मेरे नथुनों में घुस गई। मैं तड़फड़ाने लगी आखरी बार ऊपर वाले को याद करने लगी, मोत मुझसे चन्द लम्हे दूर थी और मैं आंखे में आंसू गले मे लोडा फँसाये इंतजार करने लगी।
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भाई ने कोई 10 सेकंड तक लोडा फसाये रखा और झटके से निकाल दिया।
लोडा निकलते ही मेरे मुँह से बहुत सारी लार थूक निकली और डॉगी पोजीशन में खांसने लगी।

कोई 5 मिनट तक खांसने पर जब सांसे दुरुस्त हुई तो खड़ी हुई और भाई की तरफ आंखे मिलाई जो मुस्कुरा रहे थे।
मुझे गुस्सा तो बहुत आ रहा था कि भाई को थप्पड़ जड़ दु पर किसी अनहोनी की वजह से रुक गयी।
भाई:- बाजी आज मुझे यकीन हो गया कि तुम मुझसे सच्ची मोहब्बत करती हो वरना इतना बड़ा लोडा निगलना उनका काम है
मैं:- किनका काम है बोलो ना रुक क्यों गए कमीने बेशर्म
भाई:- नही बाजी तुम बुरा मान जाओगी
मैं:- जो ये हरकत की है इससे तो मोहल्ले में लड्डू बाटने चाहिए है ना ??
भाई:- अगर तुम्हारा मन है तो बांट दो लड्डू लोडा निगलने की खुशी में
मैं:- बताओ ना क्या कह रहे थे किनका काम है
में सुनना चाहती थी के भाई क्या बोलते है जहां तक मेरा आईडिया था वो वही बोल रहे थे जो में समझ रही थी पर भाई से कन्फर्म करना था
भाई:- रंडियों का काम होता है और बोलकर हँसने लगे
मैं भाई को मारने दौड़ी तो भाई ने मुझे कसके बाहों में भर लिया ओर में भाई की पीठ पर मुक्के मारने लगी
कमीने तुमने मुझे वो समझ है क्या बेशर्म, मैं कितनी पढ़ी लिखी लड़की थी तुमने मुझे बहला फुसलाकर गन्दा बना दिया है और अब गन्दा समझने भी लगे हो
भाई:- भाई ने मुझे कसके जकड़ा जिससे मेरे मम्मे उसकी छाती में धंस गए अहहहह ओर भाई मेरे बालों को सँवारते हुए
भाई:- बाजी सच मे आप बहुत अच्छी बाजी जो मेरे लिए इतना कुछ सह गयी तुम्हे कितनी दिक्कत हुई होगी में समझ सकता हूँ
आसान नही है इतना बड़ा लोडा निगलना, मुझे गर्व है कि मुझे तुम जैसी बाजी मिली और मेरे माथे को चूम लिया भाई ने
मैं:- क्या करती तुमने ही कसम दी थी पर भाई तुम्हे मुझपे रहम नही आया थोड़ा भी, मैं कितनी नाजुक हूँ और तुमने जानवर जैसा रूप दिखाया, में तुमसे सच्ची मोहब्बत करती हूं भाई एक तुम ही तो सहारा हो हमारा, तुम्हे नाराज नही करना चाहती इसलिए सब सह लिया तुम्हारी खातिर,
भाई:- बाजी i love you
मैं:- i love you 2
ओर भाई ने मेरा माथा दोबारा चुम लिया।
भाई:- चलो बाजी बिस्तर पर लेट जाते हैं
मैं:- नही भाई अम्मी कभी भी जाग सकती है बहुत बुरा हो जाएगा अगर अम्मी इधर ढूढ़ते हुए आ गयी तो
भाई:- बाजी में हूँ ना तुम टेंशन ना लो बस आज की रात एन्जॉय करो बाजी ओर मुझे उठा कर बेड पर लेटा दिया और खुद भी लेट गया बराबर में।

दो नंगे जिस्म एक बेड पर थे और गर्म आग फेंक रहे थे
भाई:- बाजी बुरा ना मानो तो में आपकी शर्मगाह को टच कर लूं
मैं:- ओह हो शर्मगाह, आज इतनी इज्जत कैसे आ गयी पहले तो अनाप शनाप बकते थे
भाई:- चलो ऐसी बात है तो क्या में तुम्हारी लम्बी मोटी चुत को छू लू बाजी
मैं:- अहहह कमीने इतनी जल्दी बदल गया, मुझे नही करना कुछ बहुत शर्म आ रही है और मैने भाई के सीने में सिमट गई।
भाई:- बाजी में महसूस करना चाहता हूं तुम्हारी गर्म तपती चुत को, उंगली ही तो करूँगा बाकी आप जो करने दो
मैं:- नही भाईईई मुझे शर्म आएगी तुम मेरे भाई हो, भाई ऐसा नही करते।
भाई:- भाई तो अपनी बाजीयों को लोडा भी नही चुसाते फिर भी तुमने चुसा ना
मैं:- वो तो तुमने जबर्दस्ती मनवा लिया, मुझे कोई शोक नही है ऐसे काम का
भाई:- बाजी प्लीज एक बार छू लेने दो अपनी मादक चुत को, मेरी तमन्ना पूरी कर दो प्लीज बाजी
जब में गांण्ड में उंगली कर सकता हूँ तो चुत में क्यों नही
मैं:- क्या मिल जाएगा तुम्हे वहां हाथ लगाकर, मुझे पहले ही बहुत शर्म आ रही है।
भाई:- बस थोड़ा सा चेक करूँगा की असलियत में केसी होती है ये जगह। मेने आजतक बस पढा है कभी महसूस नही किया।
इतनी गुज़रिशों से मेरा दिल भी पिघल गया और मैने भाई को इजाजत दे दी, देखो ज्यादा बदमाशी मत करना पहले ही बोल दे रही हूँ। मुझे नीचे भी जाना है काफी देर हो गयी यहां

अंजुम❤️
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【रीडर्स बाजी की इस तस्वीर को दिमाग मे बैठा ले】
Waah shandar update...maulavi sahab se bhi kuchh baat aage badho
 
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