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Incest कैसे कैसे परिवार

prkin

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Can not say for sure. Been awfully busy.
understand your situation..hopefully you'll give a good and long & sexy update soon. I look forward to reading your story. Thanks.
 
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prkin

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understand your situation..hopefully you'll give a good and long & sexy update soon. I look forward to reading your story. Thanks.


Thanks for the understanding. Festival season has a lot of additional work both at work and home. Some work already done on update. Will try ASAP. But after Diwali, things will be better and updates more regular. And exciting.
 

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Thanks for the understanding. Festival season has a lot of additional work both at work and home. Some work already done on update. Will try ASAP. But after Diwali, things will be better and updates more regular. And exciting.
Thank you so much. Take care and stay safe!!
 

prkin

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आज काफी कुछ लिखा है. अगर कल भी ऐसे ही समय मिला तो कल रात पोस्ट कर दूंगा।
 

prkin

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prkin

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अपडेट किया है.

समय न मिल पाने के कारण इसे भी दो भागों में बाँटना पड़ा है.
भाग दो जल्दी ही पोस्ट कर दूंगा।
 

ABHISHEK TRIPATHI

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कैसे कैसे परिवार
पहला घर: अदिति और अजीत बजाज.
अध्याय १.३
भाग १

************

नए दिन का आरम्भ

जब सब लौट कर बैठक में आये तो घर में एक अलग ही वातावरण का अनुभव किया. अनन्या अजीत की ओर ऑंखें चुराकर देख रही थी. और गौतम शालिनी को ताक रहा था. अजीत और अदिति ने इस बदले हुए समीकरण को समझ लिया और सब कुछ वापिस पहले जैसा करने का प्रयत्न करने लगे. शालिनी ने इसे समझ लिया. घर में अब कोई असहजता नहीं होनी चाहिए थी.

शालिनी: “अदिति, राधा कहाँ है.”
अदिति: “अपना काम करने के बाद अपने कमरे में गई है. अब बारह बजे ही लौटेगी. कुछ काम है क्या?”

शालिनी ने कोई उत्तर नहीं दिया, उसके मन में एक विचार आया था और वो उठी और किचन और घर के दरवाजे अंदर से लॉक कर दिए.

शालिनी: “नहीं, कोई काम नहीं है, पर हम सब जो बातें अब करने वाले हैं उसका सुनना उचित नहीं होगा.”

ये कहते हुए वो गौतम की बगल में बैठ गयी.

शालिनी: “कल हम सब ने एक नए जीवन का आरम्भ क्या है. सच ये भी है कि आज जो हमारे बीच में कुछ असहजता है, मानो सब एक दूसरे से डरे हुए हैं. पर मेरे विचार में ये सही नहीं है.”

सब चौंक गए.

शालिनी: “हमने पारिवारिक प्रेम को बढ़ावा ही दिया है. और अपने जीवन में एक नया उन्माद और रोमांच होना चाहिए. अब मेरे विचार से गौतम और अनन्या ही एक दूसरे से अंतरंग नहीं हुए हैं. पर इसमें अधिक समय नहीं लगेगा. जब हम एक दूसरे से इतने अच्छे से परिचित हो चुके हैं तो शर्म किस बात की है? वर्षों पहले जब मैंने अजीत को अपने बिस्तर में बुलाया था, न मुझे तब इस बात की कोई ग्लानि हुई थी और न ही मुझे कल अपने प्यारे पोते गौतम से चुदवाने के बाद हुई है.” ये कहकर शालिनी ने गौतम के होतीं पर अपने होंठ रखे और उसे एक प्रगाढ़ चुम्बन दिया.

“जब हम सब एक दूसरे से हर प्रकार से प्रेम कर सकते हैं, तो अपने आप को क्यों रोकना. मैं शेष जीवन इस प्यार और सहवास के बिना नहीं बिताना चाहती.” शालिनी ने अजीत को पास बुलाया और उसे भी एक चुम्बन दिया. “क्या तुम सबको मेरे इस व्यहवार में किसी भी प्रकार से प्रेम के सिवाय कुछ और दिखा?”

सबने न में सिर हिलाया.

“और इसीलिए, अब मैं चाहूंगी कि हम जब भी चाहें जहां भी चाहें और जिसके साथ भी चाहें चुदाई कर सकें. राधा इसमें बाधक बन सकती है और हमें इसका उपाय ढूँढना ही होगा. पर उसे जब तक कोई समाधान नहीं मिलता किसी भी प्रकार से कोई शक नहीं होना चाहिए. ठीक है?”

सबने इस बार हाँ में सर हिलाया.

“तो घर की सबसे बड़ी होने के नाते मैं इस उन्मुक्त जीवन शैली का शुभारम्भ करती हूँ.” ये कहते हुए शालिनी खड़ी हुई और अपने कपड़े उतारने लगी. पल भर में ही वो सबके सामने नंगी खड़ी थी. और उसके चेहरे पर किसी प्रकार की शर्म नहीं थी. बल्कि आँखों में एक नयी चमक थी.

“दादी, आप कितनी सुन्दर हो!” अनन्या के मुंह से निकल पड़ा.
“क्यों न हो, दादी जो है मेरी.” अब तक गौतम सम्भल चुका था और उसने शालिनी के नितम्ब पकड़कर उन्हें दबाते हुए अधिकार भरे शब्दों में कहा.

अजीत भी कहाँ पीछे रह सकता था. “ये मत भूलो कि ये मेरी माँ है.” शालिनी के पीछे से उसके स्तन दबाते हुए उसने भी अपना अधिकार जमाया.

“उँह” शालिनी ने अपने स्तन दबते हुए एक दबी हुई आह भरी.

अजीत: “और ये मत भूलो कि इस चूत और गांड में गौतम से पहले मेरा लंड गया था.”
गौतम: “पर डैड, मैंने अभी तक दादी की गांड नहीं मारी है. इसीलिए इस में आप इकलौते ही हैं.”
अजीत: “क्यों माँ, अपने पोते को आधा ही सुख दिया क्या?”
शालिनी: “मेरी बूढी हड्डियां चटका दीं इसने रात में. मेरी तो हिम्मत ही नहीं हुई आगे कुछ करने की. पर आज की रात गांड भी मरवा लूंगी अपने पोते से.”

अनन्या: “दादी वो सब ठीक है. पर मैं पापा और आपकी चुदाई देखना चाहती हूँ. क्योंकि इस पूरे नए समीकरण का आरम्भ वहीँ से हुआ था.

गौतम ने भी अनन्या के स्वर में स्वर जोड़ा.

अदिति: “अब लगता है कि आप दोनों को बच्चों की बात माननी ही पड़ेगी.”

अदिति: “अनन्या, बिटिया इधर आ और अपने पापा के लंड को थोड़ा अच्छे से कसकर खड़ा कर. फिर हम उधर बैठकर इस खेल को देखेंगे.”

अनन्या को इससे अधिक निमंत्रण की आवश्यकता नहीं थी. वो तपाक से उठी और अजीत के सामने खड़ी हो गयी. फिर उसने अजीत की पैंट खोली और उसे नीचे सरका दिया.

अजीत: “रुक थोड़ा.” ये कहकर अजीत ने पूरी पैंट निकली और फिर अपनी टी-शर्ट और अंडरवियर भी उतार फेंका. अब वो भी अपनी माँ के समान नंगा खड़ा था.

अनन्या घुटनो के बल बैठी और लंड मुंह में लेने ही लगी थी कि अदिति बोल उठी, “कपड़े पहनकर चूसेगी? इन्हें निकाल ही दे तो अच्छा है. तेरे भाई को भी तो तेरी सुंदरता का दर्शन करना चाहिए.”

अनन्या ने गौतम की ओर देखा और कुछ शर्माई फिर उसे अपनी माँ की कल रात की बात याद आ गयी और उसने तुरंत अपनी शर्म छोड़ी और गौतम की आँखों में देखते हुए कपड़े निकालने लगी. गौतम उसके शनैः शनैः अनावृत होते संगमरमरी शरीर को ललचाई आँखों से देख रहा था.

अदिति: “हम्म्म, ये ठीक है. पर तू क्यों बैठा टुकुर टुकुर देख रहा है. तेरी दादी की चूत तेरे सामने है. अपने पापा के लिए उसे भी अच्छे से तैयार कर दे. पर मेरे विचार से हमें शयनकक्ष में चलना चाहिए.”

गौतम ने अनन्या के ऊपर से हटाकर शालिनी की ओर देखा. “चलो, मेरी नयी गर्लफ्रेंड।”

ये कहते हुए गौतम ने शालिनी को थामा और अदिति के कमरे को ओर बढ़ चला. पीछे पीछे अनन्या और अजीत भी आ गए. अदिति ने बैठक से बिखरे पड़े कपड़े समेटे और वो भी कमरे में आ गयी और कमरा लॉक कर दिया. अनन्या ने समय व्यर्थ नहीं किया था, पर अब वो बिस्तर पर बैठी हुई अजीत के लंड को चूस रही थी. गौतम को कुछ समय लगा क्योंकि उसने भी अपने कपड़े उतारे थे. और अदिति की ऑंखें उसके लंड पर पड़ीं और उसे अपने बेटे पर गर्व हो उठा. शालिनी तो पहले से ही उत्तेजित थी, सो वो बिस्तर पर टाँगे फैलाये लेटी थी और अपनी चूत में ऊँगली कर रही थी. गौतम ने उसकी उँगलियों को हटाया और अपने मुंह को उसकी चूत पर मलने लगा.

*****

ये सब इस बात से अनिभिज्ञ थे की राधा अभी तक घर में ही थी. वो किसी काम से ऊपर छत पर गयी थी, परन्तु सब ये माने हुए थे कि वो अपने घर गयी है. राधा जब नीचे उतरी तो वो सीधी पर ही रुक गयी थी, और उनकी बातें सुन रही थी. उसका शक सही सिद्ध हुआ था. बाप बेटे शालिनी को चोद रहे थे. हालाँकि गौरव ने कल रात ही पहली बार चोदा था शालिनी को. जब अजीत के लंड को चूसने के लिए अदिति ने कहा तो राधा अपने आप को रोक नहीं पायी और छुपकर झाँका. अजीत के लंड को देखकर उसका मन मचल गया. उसके पति के लंड से दुगना रहा होगा अजीत. उसकी चूत पनिया गयी.

जैसे ही सब कमरे में गए और दरवाजे को लॉक किये, राधा दबे पांव अपने घर की ओर चली गयी. वो ये भूल गयी कि शालिनी ने दरवाजा अंदर से बंद किया था राधा को अंदर न आने देने के लिए. उसने तो इसे सामान्य दिनों के समान ही समझा और क्योंकि कई बार दरवाजा खुला भी रहता था तो इस पर ध्यान नहीं दिया. अपने कमरे में जाकर वो बिस्तर पर लेट गयी और जो घर में चल रहा था उसकी कल्पना में लीन हो गयी. जब उससे सहन नहीं हुआ तो उसने अपने कपड़े उतारे और किचन से एक बैंगन लेकर अपनी चूत में डालकर उसे शांत करने लगी. उसकी आँखों के सामने अजीत का मोटा लम्बा लंड घूम रहा था. वो किसी प्रकार उससे चुदवाने की कल्पना करने लगी. पर उसके पति को इसका आभास नहीं होना चाहिए था.

*****

अदिति एक ओर सोफे पर बैठ गयी. वो अपने सेक्स से वंचित दो और सप्ताह के बारे में सोच रही थी. इतने समय तक वो कभी चुदे बिना नहीं रही थी. पर ये दिन भी कट जायेंगे. और तो और इस बार उसे भी अपने बेटे के लंड का अनुभव होगा. उसकी सास तो वर्षों से ये सुख ले रही थी. अदिति ने स्वप्निल आँखों से सामने चल रहे कुकर्म पर दृष्टि डाली. अनन्या जिस प्रेम से अजीत के लंड को चाटने, चूमने और चूसने में व्यस्त थी उससे उसका अजीत की ओर प्रेम का आभास हो रहा था. अजीत भी अनन्या के बाल सहलाकर उसे प्रोत्साहित कर रहा था. इस कली को फूल बने अभी २४ घंटे भी नहीं हुए थे. और उसके लंड चूसने में कला कम और प्रेम अधिक दिख रहा था. अदिति ने इस कमी को पूरा करने की प्रतिज्ञा की.

फिर उसकी दृष्टि शालिनी की चूत में मुंह डाले अपने बेटे की ओर पड़ी. इस पूरे कार्यकलाप से गौतम का लंड भी अब तन चुका था. वो तो अदिति के बैठने का स्थान और कोण ऐसा था कि वो उस खड़े लंड को अच्छे से देख पा रही थी.

“इससे तो चुदना ही है. बस मैं ठीक हो जाऊं।” अदिति ने विचार किया.

अजीत ने कहा कि अब वो समुचित रूप से चुदाई के लिए तैयार है. अदिति ने एक बार और चाटकर लंड को प्रेम से देखा और फिर अपनी दादी की ओर मुड़ी जो अपनी कमर उछाल उछाल कर गौतम की योग्य जीभ के सञ्चालन से झड़ने की निकट थी. अजीत ने गौतम के सिर पर हाथ लगाया और गौतम ने अपने पिता को खड़ा देखा और समझ गया की अब खिलाडी से दर्शक बनने का समय आ चुका है. वो अपने स्थान से उठा और अदिति की ओर बढ़ गया. अनन्या उसके लगभग साथ ही गयी और भाई बहन अपनी माँ को दोनों ओर बैठ गए.

अजीत आगे बढ़ा और शालिनी के होंठ चूमने लगा. दोनों जैसे एक दूसरे में समा जाने का प्रयास कर रहे थे. फिर अजीत ने चुम्बन तोड़ा और शालिनी के मम्मों पर अपना ध्यान केंद्रित किया. वो एक स्तन को चूसता तो दूसरे को दबाता. बदल बदल कर न जाने वो कितनी ही देर तक यही करता रहा. शालिनी कुनमुना रही थी और अपने कूल्हे हिला रही थी.

“दोनों एक दूसरे के साथ कितने सुन्दर लग रहे हैं न मॉम?” अनन्या बोल उठी.

अदिति जो इस संसर्ग को पहले भी देख चुकी थी आज भी इसकी अलौकिकता से प्रभावित हुए न रह सकी. उसका हाथ बेध्यानी से गौतम के लंड को सहलाने लगा. फिर वो गौतम के लंड को हाथ में लेकर उसकी मुठ मारने लगी. सामने के दृश्य में खोई हुई अदिति को इस बात का आभास नहीं था कि वो क्या कर रही थी.

“हाँ, मॉम, थोड़ा तेज करो.” गौतम की गुहार सुनकर उसने आश्चर्य से उसे देखा फिर अपने हाथ में गौतम के तने लंड को देखा तो जैसे वो नींद से जाग गयी.

“तुझे अच्छा लग रहा है?” अदिति ने मुस्कुराकर पूछा.
“इसमें पूछने की क्या बात है. बहुत अच्छा लग रहा है. मैं भी बस अब आपके ठीक होने की राह देख रहा हूँ.”
“तुझे कैसे पता कि मुझे कुछ हुआ है?”

गौतम को अपनी गलती का आभास हो गया. उसने तो ये उन वीडियो के द्वारा जाना था. उसने तुरंत बात को संभाला.

“कल दादी ने बताया था कि अभी आपको सेक्स से मना किया हुआ है.”
“तेरी दादी के पेट में कोई बात नहीं पचती. हाँ, अभी लगभग दो सप्ताह और हैं. उसके बाद ही डॉक्टर बताएँगे कि मैं सेक्स कर सकती हूँ या नहीं. मैं भी अब बहुत बेचैन हो रही हूँ. ठीक होने के बाद तेरे पापा के बाद तेरा ही नंबर लगने वाला है.”

“क्यों मॉम, पहले क्यों नहीं? पापा के पास तो दादी और अनन्या भी हैं.”
“नहीं. वो मेरे पति हैं. पहला भोग उन्हें ही चढ़ेगा. पर मुझे नहीं लगता कि अनन्या तुझे इतने दिन मना करेगी. क्यों अनन्या?”
“मॉम, मुझे तो अच्छा ही लगेगा। मेरा अपने कौमार्य के लिए पापा का चयन था पर मुझे तो गौतम भी उतना ही प्यारा है. और उसके लंड को देखकर तो लगता है कि वो भी मस्त चुदाई करेगा.”

अनन्या की भाषा सुनकर अदिति और गौतम के मुंह खुले रह गए. अनन्या खिलखिलाने लगी.

“क्या मॉम, अपने ही तो बोला था न कि चुदाई में संकोच नहीं करना चाहिए. और मुझे तो अब इस तरह की भाषा में बड़ा मजा आ रहा है.”

अदिति: “ये लड़की तो एक ही दिन में विशेषज्ञ बन गयी.” इस बात पर तीनों हंस पड़े और सामने चल रहे सहवास को देखने लगे.

अजीत अब अपने दोनों हाथों से अपनी माँ के मम्मे निचोड़ रहा था और उसका मुंह शालिनी की चूत में घुसा हुआ था. और जिस प्रकार से वो उसे चाट रहा था उसे देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे वो रसमलाई खा रहा हो. उसने अपने हाथ मम्मों से हटाए और शालिनी की चूत की पंखुड़ियों को फैलाकर अपनी जीभ अंदर डाल दी. शालिनी की कसमसाहट अब बहुत बढ़ चुकी थी. उससे अब ये दूरी सहन नहीं हो रही थी, पर वो ये जानती थी कि जब तक उसका बेटा उसके रस को पी नहीं लेगा उसे चोदने का कोई प्रश्न ही नहीं था. उसकी चूत अब इस रहस्य से भली भाँति परिचित थी और वो अब तेजी से अजीत के मुंह में पानी बहा रही थी.

फिर शालिनी का बांध टूट ही गया. उसकी आनंदभरी चीख कमरे के अन्यथा शांत वातावरण को चीरती हुई दीवारों को हिला गयी. तीनों दर्शक मूक बने इस उत्सर्ग को देख रहे थे. उन्होंने जीवन में ऐसा उन्माद कभी नहीं देखा था. चीखती शालिनी के नितम्ब और शरीर बिना किसी लय के मानो झूम रहा था. उसके छटपटाते शरीर को देखकर किसी मिर्गी के रोगी का ध्यान आ रहा था. उसकी चूत अविरल गति से अजीत के मुंह और चेहरे को जलमग्न कर रही थी. पर अजीत था की हटने का नाम भी नहीं ले रहा था. वो इस पावन जल की एक एक बूँद को अमृत के समान ग्रहण कर रहा था. शालिनी धीरे धीरे शांत हो गयी और उसका शरीर भी शिथिल पड़ गया. अजीत ने उसकी चूत को पूरा सूखने के पश्चात् ही अपना भीगा हुआ चेहरा ऊपर किया.

शालिनी उसे देखकर मुस्कुरा उठी.
“जानता है? तेरा बेटा भी तुझसे कम नहीं है, इस कला में. पर आज तो तूने सच में सारे आयाम ही तोड़ दिए.”

शालिनी में फिर अदिति की ओर देखकर बोली, “ अदिति, पर एक ही बात का मुझे खेद है कि इसने ये सब तुमसे नहीं कहीं और सीखा है. मुझे इस बात का गर्व भी है कि अजीत को ये सब सीखने वाली मैं थी.”

अदिति: “माँ जी, अब समय बदल गया है. आजकल के बच्चे समय से पहले ही सब कुछ करने लगते हैं. मुझे तो अनन्या पर गर्व है कि उसने अपना कौमार्य कल तक सुरक्षित रखा था.” फिर उसने गौतम के लंड की मुठ मारते हुए उससे ही पूछा, “कहाँ से सीखा तूने ये सब जो दादी कह रही हैं. अगर सच में तू इतना अनुभवी है तो तेरी आयु की लड़की तो नहीं सीखा सकती. कौन है तेरी शिक्षिका?”

गौतम थोड़ा असहज हो गया. अजीत ने बात संभाली, “गौतम, हम सब अब किसी भी प्रकार की बातें गुप्त नहीं रखेंगे. हमें तुम्हारे इस ज्ञान से कोई आपत्ति नहीं है. न ही हम ये कहेंगे कि तुम बाहर अपने सम्बन्ध समाप्त करो. हाँ, परन्तु ध्यान अवश्य रहे कि किसी प्रकार का रोग या समस्या घर न लाना.”

गौतम को समझ नहीं आया. इस बार अदिति ने उसे समझाया, “तेरे पापा का कहना है कि ऐसा कुछ मत करना कि कोई लड़की माँ बन जाये और हमें उसे मजबूरी में बहू बनाना पड़े.”

गौतम सोचने लगा कि कितना बताये. उसने देखा कि सब उसकी ही ओर देख रहे हैं. अदिति का भी हाथ अब ठहरा हुआ था.

“मेरी दो प्रोफ़ेसर हैं, पहले तो उन्होंने ही मुझे इस सब में पारंगत किया, पर बाद में मेरे कुछ दोस्तों की मम्मियाँ भी मुझ पर आसक्त हो गयीं. ये समझो कोई पांच स्त्रियों ने सिखाया.”

सब उसके इस कथन से प्रभावित हो गए. पर गौतम अब सब बता देना चाहता था.

“फिर मेरे एक दोस्त की बहन भी है, अनन्या भी उसे जानती है. कोई दो महीने पहले से मैं उसे भी चोद रहा हूँ. पर मैं उसके साथ कंडोम प्रयोग में लाता हूँ, क्योंकि वो भी अभी किसी प्रकार के स्थायी सम्बन्ध में रूचि नहीं रखती.” गौतम रुका और फिर बोलने लगा, “तो कुल मिलकर छह अन्य स्त्रियों को मैंने चोदा है, दादी को छोड़कर.”

अनन्या उस लड़की का नाम जानने को उत्सुक थी, पर वो इसके लिए प्रतीक्षा कर सकती थी.

अजीत: “ ये कुछ सीमा तक अच्छा भी है कि तुम्हें पांच स्त्रियों से सीखने का अवसर मिला. मेरे विचार से ये तीनों इस ज्ञान और अनुभव का भरपूर उपयोग करने वाली हैं. पर अब मुझे तुम सबकी इच्छा पूरी करनी है जो मुझे तुम्हारी दादी की चुदाई करते देखने के लिए उत्सुक थे.”

अनन्या ने ताली बजाकर अपनी सहमति दिखाई और अजीत खड़ा होकर अपने लंड को शालिनी के मुंह से लगते हुए बोला, “थोड़ा इसे अपनी चूत में जाने के लायक बना दो.”

शालिनी तुरंत उठकर उसके लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी और कुछ ही क्षणों में उसे लोहे के समान कड़ा कर दिया. अजीत ने अपने लंड को शालिनी की प्यासी चूत पर लगाया और एक ही बार में पूरा पेल दिया.

शालिनी के मुंह से एक हल्की से आह निकली, पर अनन्या की आह उससे अधिक तेज थी. अब कल तक की कुंवारी कली जिसकी चूत में इंच इंच करके लंड जाने में भी दर्द हुआ हो ऐसी एक बार की ठुकाई से तो आश्चर्यचकित होना ही थी. अदिति भी तेजी से गौतम के लौड़े पर हाथ चलने लगी. अजीत बस कुछ ही क्षण के लिए रुका और फिर वो अपनी माँ को एक सही और सधी गति से छोड़ने लगा. शालिनी भी गांड उछाल कर उसका साथ से रही थी.

“ये दोनों सच में चुदाई करते हुए कितने सुंदर लग रहे हैं न, मॉम। “ अनन्या ने प्रतिक्रिया दी.
“हाँ, और मुझे उन्हें साथ देखने का कई बार सुअवसर मिला है. अधिक तो नहीं पर इतना अवश्य समझती हूँ कि इनके प्रेम का कोई सानी नहीं है. और मुझे इसमें कोई आपत्ति भी नहीं है, क्योंकि इनका और मेरा प्यार एक मजबूत नींव पर रखा है.”

“वैसे मॉम, आपकी सच में प्रशंसा करनी चाहिए, कि आपको जलन नहीं होती.”
“होनी भी नहीं चाहिए. कल जब गौतम ने दादी की चुदाई की तो इनको थोड़ी भी ईर्ष्या नहीं हुई. और जब गौतम कुछ दिन बाद मुझे छोड़ेगा तब भी ये किसी भी प्रकार से दुखी या चिंतित नहीं होंगे.”

अजीत ने अपनी गति अब काफी तेज कर दी थी और शालिनी भी उसका पूरा साथ दे रही थी. दोनों हाँफते हुए एक दूसरे में समाने की चेष्टा कर रहे थे.

“माँ, आज तो बड़ी उछलकर चुदवा रही हो, पहले तो जल्दी रुक जाती थीं.” अजीत ठहरते हुए स्वर में बोला।
“सब मेरे पोते का किया धरा है, कल इसने ऐसी चुदाई की थी की मेरी सारे जोड़ खोल दिए. बूढ़ी हड्डियों में नयी शक्ति आ गयी इसकी चुदाई से.”

अजीत ये सुनकर और भी तेज चुदाई करने लगा. वो शालिनी को दर्शना चाहता था कि वो गौतम से कुछ कम नहीं है. शालिनी उसका जोर जोर चिल्ला कर उत्साह बढ़ा रही थी. दोनों के मिलन में एक ऐसा सौहार्द्य था जैसे वे दो शरीर नहीं बल्कि एक ही हों. पर शालिनी इस आयु में कितना और भुगत पाती। उसकी चूत हाथ डालने के लिए तैयार हुई और शालिनी की चिल्लाहट में एक नयापन आ गया. उसकी चीखें अब ठहर कर आ रही थीं और शरीर भी अब थरथरा रहा था. काँपते हुए शरीर ने अंततः सुख के शिखर पर अपने आपको समर्पित कर दिया और उसकी चूत ने अपनी धार खोल दी.

अजीत का लंड अब छप छप की आवाज से मानो एक नदी में चप्पू चला रहा था. पर इतनी चिकनाई और अपनी गति से वो भी हार ही गया और उसने अपना गाढ़ा सफ़ेद वीर्य से शालिनी की चूत को भर दिया. उसके बाद वो अपनी माँ पर ढह गया और कुछ देर दोनों माँ बेटे एक दूसरे को चूमते रहे. इस पूरे समय अजीत अपने लंड को शालिनी की चूत में हल्के से चलता रहा. फिर जब वो बिलकुल सिकुड़ गया तो उसने चुम्बन तोड़ा और शालिनी के शरीर पर से उठ गया. अनन्या खड़ी होकर ताली पीटने लगी.

अदिति: “अनन्या, अब तुम्हारा ये नया पाठ है. जाकर अपने पापा के लंड को चाटकर साफ करो. मैं तुम्हारी दादी की चूत साफ करती हूँ.”

ये कहते हुए अदिति ने अनन्या को उठाया और दोनों अपने अपने लक्ष्य की ओर चल दिए. गौतम जिसका लंड खड़ा था उसकी ओर किसी ने देखा भी नहीं और वो बेचारा मन मसोस कर ही रह गया.

*****

कुछ देर बाद सब उठे और साफ सफाई के बाद बैठक में लौट आये. अदिति चाय बनाने के लिए किचन में चली गई. शालिनी भी उसके पीछे गई और किचन के दरवाजे का लॉक खोला. पर ये क्या? ये तो पहले से ही खुला था. अब शालिनी को काटो तो खून नहीं. इसका मतलब कि राधा घर में थी! क्या देखा उसने? इस चिंता में डूबी वो बैठक में जाकर बैठ गयी. अदिति को कुछ पता नहीं था, न ही उसको शालिनी ने कुछ बताया ही. वो इस नयी समस्या को सुलझाने का रास्ता ढूंढ रही थी. वो अभी कुछ कह नहीं सकती थी. राधा के आने और उसके व्यवहार से ज्ञात होगा कि उसने क्या देखा. अगर वे सब कमरे में जा चुके थे तो उसे कुछ भी नहीं दिखा होगा.

पर शालिनी को इस बात पर शक था. उसे अपनी इस गलती पर बहुत ही शर्म आयी. क्योंकि राधा हमेशा बता कर जाती थी. आज उसने कुछ नहीं बोला था, अर्थात वो घर में ही थी. जो भी हो, उसे ही इस बात को संभालना होगा. गौतम भी उसे चोदने के लिए उतावला है, तो हो सकता है कि लंड की रिश्वत से उसका मुंह बंद हो जाये. शालिनी को अपनी इस बात पर हंसी आ गयी. “हाँ, मैं गौतम के लंड से उसका मुंह बंद करवा दूंगी.” उसने मन में सोचा.

“क्यों हंस रही हो दादी?” गौतम ने पूछा.
“कुछ अच्छी बात ध्यान में आयी है, जिससे तेरा भी मन खुश हो जायेगा। पर बताउंगी कल, पहले निश्चिंत हो जाऊं.”
“ओह दादी. कुछ हिंट दे दो?”
“नहीं. या आज रात जब तू मेरी गांड मारने आएगा.”
“ओह हो, मैं तो भूल ही गया. मेरी तो आज लॉटरी जो लगी है.

इतने में अदिति चाय ले आयी और सब चाय पीने में व्यस्त हो गए. हर व्यक्ति एक अलग सोच में था. पर एक विचार सब के मन में था. कि हम सब अब अधिक निकट आ चुके हैं.

कुछ ही देर में राधा भी आ गयी. शालिनी उसे कनखियों से ताक रही थी. पर उसे देखकर लगता नहीं था कि उसने कुछ देखा था.

“हम्म्म, कैसे उगलवाऊं इससे.”
जब राधा चाय के कप लेकर किचन में गई और उन्हें धोने लगी तो शालिनी भी किचन में चली गई.

“अरे आज तू बोल कर नहीं गई कि जा रही है. कब गई थी?”

राधा सकपका गई.
“माँ जी, बैठक में कोई दिखा नहीं तो मैं बिना बोले ही चली गई आज. मैंने सोचा सब नहा धो रहे होंगे.”
“और कब गई थी? शालिनी इतनी सरलता से उसे छोड़ने वाली नहीं थी.

राधा ने समय बताया. उस समय तो हम सब कमरे में थे. हो सकता है इसने कुछ न देखा हो.

“मैं कमरे में जा रही हूँ. आज कुछ देर हो गई. काम समाप्त करके आ जाना.” ये कहकर शालिनी अपने कमरे में चली गई.

राधा ने लम्बी साँस ली. फिर उसके मन में ये विचार आया कि आज तो साहेब के लंड का स्वाद मिलेगा माँ जी की चूत से. यही सोचते हुए वो उत्साह से अपने काम को जल्दी समाप्त करने में व्यस्त हो गई.

*****

राधा जब काम समाप्त करके शालिनी के कमरे में आयी तो शालिनी सोफे पर ही बैठी हुई थी.

“क्या हुआ माँ जी, आज मालिश नहीं करवानी क्या?”
“नहीं, आज बस तू अपना दूसरा काम कर.”
“जैसा आप कहो. कपड़े तो उतार लीजिये.”
शालिनी ने कपड़े उतार कर एक ओर रखे, वहीँ राधा ने भी अपने कपड़े निकले और एक ओर रख दिए. शालिनी वहीँ सोफे पर ही बैठकर अपने पांव फैला ली. ताजी ताजी चुदाई के कारण उसकी चूत कुछ फूली हुई थी और लालिमा लिए हुई थी. राधा को ये समझते देर नहीं लगी कि इनकी अच्छी चुदाई हुई है, पर वो कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं थी. तभी शालिनी की चूत में से कुछ सफेद सा द्रव्य बाहर निकला. इससे पहले कि शालिनी कुछ भी कर पाती राधा ने जीभ बढाकर उसकी चूत पर से उस रस को चाट लिया. और ये तय हो गया की ये वीर्य ही है.

राधा ने अपना मुंह शालिनी की चूत में डाल दिया और एक भूखी भिखारिन के समान उसे सड़प सड़प कर चाटने और चूसने लगी. अजीत का रस उसके इस पराक्रम से उसके मुंह में बहे जा रहा था. शालिनी को लगा कि उसने सफाई न करके बहुत बड़ी गलती कर दी थी. पर अब तीर कमान से निकल चुका था. शालिनी ने राधा का सिर पकड़ कर उसे अपनी चूत पर दबा लिया. राधा पूरी तन्मयता से उनकी चूत पिए जा रही थी. अब वो समय था जब शालिनी उससे सच्चाई उगलवा सकती थी.

“कहाँ थी तू जाने के पहले?”
चूत पर से मुंह हटाकर राधा बोली, “माँ जी छत पर टहल रही थी.”
“गोकुल के क्या हाल हैं, आजकल दिखता ही नहीं?”
“बाबूजी ने काम पर लगाया हुआ है.”
“अच्छे से चुदाई करता है तेरी?”
इस बार राधा सोचने लगी. उसे अपनी आँखों के सामने अजीत का मोटा लम्बा लंड झूलते हुए दिखने लगा.
“जी माँ जी. बहुत अच्छे से.”
“हम्म्म, लगता है तेरी गर्मी नहीं निकाल पाता है वो. तेरी जैसी जवान औरत को कैसे संभालता होगा?”

गोकुल राधा से आयु में कोई ७-८ साल अधिक था. शालिनी ने इसी बात का लाभ उठाया. और राधा उसके बिछाये इस जाल में आ फंसी.
“माँ जी, जितनी निकाल पाता उतनी बहुत है. अब और कौन करेगा ये?” कहते ही राधा को अपनी गलती का आभास हो गया.

“मेरी चूत का स्वाद कैसा लग रहा है?”
“हमेशा के समान मीठा और कसैला।” पर अब राधा समझ चुकी थी कि उसे सच्चाई बतानी ही होगी. “माँ जी, मुझे क्षमा करना. मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गयी.”
“हुंह, क्या कर बैठी अब?”

“माँ जी, मैंने छत से नीचे आकर बैठक में चल रहे खेल को देख लिया था. पर कसम से माँ जी, में किसी को नहीं कहूँगी, इनको भी नहीं.”

“ठीक है, तू तो मेरी बेटी के समान है, मैं जानती हूँ तू मुझसे विश्वासघात नहीं करेगी. सुन, मैं अजीत से कहकर गोकुल को ५-६ दिन के लिए बाहर भिजवाती हूँ. तू रात को मेरे ही कमरे में रहना कल से. फिर देखेंगे कि तेरी इस जवानी की आग को कैसे बुझाएं. पर ये तय है, कि अगर ये बात बाहर निकली तो चाहे मैं फांसी चढ़ जाऊं, पर तुझे नहीं छोडूंगी. मैं किसी को अपना घर तोड़ने नहीं दूंगी.”

शालिनी की शब्दों के तरीके ने राधा को चेता दिया कि वो अत्यधिक गंभीर हैं.

“माँ जी, आप जानती हो. मैं झूठी कसम नहीं कहती. ये बात मेरे मुंह से मरते दम तक नहीं निकलेगी.”

“ठीक है, चल आज के लिए इतना ही रहने दे. मैं अजीत से कहती हूँ गोकुल को बाहर भेजने के लिए. और तू चिंता न कर, तेरा भी ये राज कभी इस घर से बाहर नहीं जायेगा.”

राधा माँ जी को प्रणाम करके अपने काम के लिए निकल गयी. शालिनी ने भी कपडे पहने और अजीत से बात करने के लिए चल पड़ी.

*****

शालिनी तेजी के साथ अजीत के पास पहुंची और उसे बोला कि कुछ आवश्यक बात करनी है इसीलिए वो उसके कमरे में चले. अजीत को साथ लेकर वो कमरे में गयी और दरवाजा बंद कर लिया.

“क्या हुआ माँ, ऐसी क्या बात है जो अदिति के सामने नहीं हो सकती थी.”
“वो कहीं घबरा न जाये, बात ये है कि जब आज हम सब बैठक में थे तो राधा ने सब कुछ देख लिया है.”
“ओह, शिट! अब क्या होगा.”
“पहली बात ये है कि उसने चुप रहने का वचन दिया है. और मुझे नहीं लगता कि वो कहीं कुछ कहेगी. गोकुल से भी नहीं.”
“चलो, ये समस्या तो दूर हो गयी.”
“हाँ, और उसकी बातों से ये भी पता चल गया कि गोकुल उसे पूरी संतुष्टि नहीं दे पाता है.”
“ओके.”
“मैं चाहती हूँ, की गोकुल को कल से ५-६ दिन या अधिक के लिए किसी काम से बाहर भेज दो. इसके बाद हम राधा को ठीक से समझा देंगे.”
“पर आप तो कह रही हैं कि वो समझ चुकी है.”
“हाँ, पर कल वो पलट न जाये किसी कारण इसका भी हमें कोई सही न कोई प्रयोजन करना होगा.”
“ऐसा हम क्या कर सकते हैं?”
“तुमने सुना नहीं, गोकुल उसे संतुष्ट नहीं कर पाता है.”
“ओह, तो आप चाहती हो की मैं उसकी चुदाई करूँ ?”
“सही समझे. पर कल रात से मैंने उसे मेरे कमरे में ही सोने के लिए कहा है. और कल तो गौतम उसकी चुदाई करेगा. वो भी बहुत उत्सुक है उसकी चूत के लिए.”

“जवान लड़का है, तो चूत के लिए तो तत्पर ही रहेगा. ठीक है, तो मेरी जब भी आवश्यकता हो मुझे बता देना.”
“ठीक है. अभी तुम पहले गोकुल को भेजने का प्रबंध करो.”

अजीत चला गया और फिर उसने अपने दूसरे शहर के एक मित्र से बात की जो उसे कई दिन से किसी विश्वासपात्र आदमी के लिए कह रहा था, हालाँकि काम कुछ ही दिन का था पर गोपनीयता आवश्यक थी. समय निर्धारित करने के बाद उसने ऑफिस फोन किया और गोकुल को घर आने की आज्ञा दी. गोकुल के आने पर अजीत ने उसे अपने मित्र के कार्य के बारे में समझाया और ये भी बताया की ये किसी को भी न कहे. न घर में, न बाहर. अजीत ने कहा कि ये नियम वो स्वयं भी मान रहा है. इसके बाद उसे जाने की तैयारी करने के लिए कहा.

गोकुल अपने कमरे पर गया और उसने राधा को बताया कि उसे कल से सप्ताह भर के लिए बाहर जाना है. राधा जानती तो थी, पर उसके मन में फिर भी एक टीस सी उठी कि वो अपने पति को धोखा देने वाली है. पर वो ये भी जानती थी कि उन्हें इतने आराम की नौकरी और सुविधाएँ कोई और नहीं देगा. और न ही कोई इतना वेतन ही देगा. तो इसके लिए वो जो भी होगा, वहां करेगी. पति पत्नी एक दूसरे की बाँहों में कुछ देर तक बंधे रहे फिर बिस्तर पर चुदाई में व्यस्त हो गए. आज न जाने क्यों राधा को गोकुल की चुदाई बहुत सुखदाई लगी. चुदाई के बाद दोनों सो गए और फिर एक घंटे के बाद उठे. राधा अपने काम पर बंगले में चली गयी और गोकुल अपना सामान बांधने लगा.

*****

शाम के सात बजने को थे. अजीत दोपहर में ऑफिस गया था और कुछ देर पहले ही लौटा था. अदिति ने उसे मुंह हाथ धोने और कपड़े बदलने के बाद उसकी ड्रिंक दी. शालिनी ने भी अदिति से उसके लिए एक ड्रिंक बनाने को कहा. अदिति उसे भी ड्रिंक बना कर लाई और फिर उनके साथ बैठ गयी.

अनन्या और गौतम अभी लौटे नहीं थे. पर आने ही वाले थे. राधा किचन में काम कर रही थी, उसे आज जल्दी जाना था. वो ये समय गोकुल के साथ बिताना चाहती थी क्योंकि वो बाहर जा रहा था. उसके रहते किसी भी प्रकार का प्रेमालाप नहीं हो सकता था. पर सांकेतिक वार्तालाप तो संभव था.

“क्या हुआ माँ जी, आपका ड्रिंक लेने का मन कैसे हो गया आज?”
“मन तो हर दिन करता है, पर लेती नहीं थी बच्चों के कारण. पर अब जब बच्चे बड़े हो गए हैं तो अब अपने आप को रोकने का कोई अर्थ नहीं है.”
सभी बच्चों के बड़े होने का अर्थ समझ गए और उससे सहमति जताई. गौतम और अनन्या भी लौट आये और अपने कमरे में जाकर कपड़े बदलकर लौटे. राधा ने भी आकर बताया कि उसने खाना बना दिया है और वो शेष कार्य कल कर देगी. अदिति ने उसे जाने के लिए कहा. अब कवल परिवार वाले ही थे अकेले।

शालिनी ने अदिति को सीमित बात बताने का निश्चय किया. उसने अजीत की ओर देखा और फिर अदिति से बोली, “मुझे तुमसे कुछ बात करनी है, थोड़ा किचन में चलो.”

शालिनी ने किचन में जाकर ये बात न बता कर कि राधा ने उन्हें देख लिया है, उसे बताया कि गौतम राधा की चुदाई करना चाहता था तो उसने राधा को मना लिया है और इसीलिए गोकुल को बाहर भेजा है.

अदिति: ‘अगर उसे बाहर भेजा है तो अवश्य ही आप उसे अजीत से भी चुदवाने का संकल्प ले चुकी हैं. है न?”

शालिनी: “मुझे तो राधा की बात से उसकी इच्छा केवल अजीत के ही लिए लगी थी. इसीलिए मैं कल रात गौतम से चुदवा दूंगी. इससे हो सकता है कि अजीत से उसका मन कम हो जाये. पर ये सोच, इतनी भरोसे की कोई और मिलेगी नहीं. तो उसकी आग मुझाने में ही हमारी भलाई है. और गौतम गर्म लड़का है, आसानी से हम सबको चोद सकता है. हाँ उसकी बाहर की चुदाई पर कुछ अंकुश अवश्य लग जायेगा.”

“ठीक है, माँ जी. अपने सोचा है तो सही ही होगा. पर ये बात अलग से बताने की क्या आन पड़ी थी.”
“मैं ये बात दोनों बच्चों से नहीं करना चाहती और न ही उन्हें कल रात से पहले कुछ भी भनक पड़नी चाहिए.”

“ओके.”

ये कहकर दोनों बैठक में आ गयीं.

*****

जब दोनों वापिस सोफे पर बैठीं तो अनन्या चहकते हुए बोली, “मॉम, मैं आज भी आपके साथ सो जाऊं?”
सभी उसकी इस बात पर हंसने लगे.
अदिति हँसते हुए, “अब तुझे मैं कैसे मना करूँ पर ये बता कि मुझे क्या मिलेगा.”
अनन्या सोच में पड़ गयी फिर बड़ी धीमे स्वर में बोली, “मैं आपकी चूत चाटूँगी. पर आपको मुझे सीखना पड़ेगा.”
अदिति: “हाँ हाँ क्यों नहीं, तुझे तो मैं सिखाऊंगी और फिर दादी तेरी परीक्षा लेंगी कि क्या और कितना सीखा.”

शालिनी: “हाँ ये सही है. तो चलो अब खाना खा लिया जाये नहीं तो ठंडा हो जायेगा.”

अजीत: “कुछ देर और रुको, मैं एक ड्रिंक और लूंगा.”

अदिति उठी और अजीत के गिलास को ले जाने लगी. फिर वो शालिनी के सामने रुकी और पूछा क्या वो भी लेना चाहेगी? शालिनी ने अपना गिलास उसे देते हुए हामी भर दी. अदिति जाने लगी और उसके पीछे गौतम भी चला गया.

गौतम: “मॉम, क्या मुझे भी एक ड्रिंक मिल सकती है. मैं दोस्तों के साथ पीटा हूँ कभी कभी.”

अदिति सोच में पड़ गई, फिर सोचा कि अगर ये चोद सकता हैं तो पीने से रोकना व्यर्थ है. उसने गौतम को एक ग्लास लाने के लिए कहा और ड्रिंक बनाने में लग गई. गौतम ग्लास लाया तो उसके लिए भी अदिति ने ड्रिंक बनाई.

फिर धीरे से बोली, “ये वाला यहीं पी ले, और फिर दूसरा वहां ले चलेंगे.”
गौतम खुश हो गया और दो ही घूँट में अपनी ड्रिंक समाप्त की और अदिति ने उसे नयी ड्रिंक बनाकर दी और फिर दोनों बैठक में चले गए. गौतम के हाथ में ग्लास देखकर सब चौंक गए. फिर अजीत ने अपनी ड्रिंक ली और गौतम को चियर्स कहकर उसके घूँट लेने लगा.

“आपको बुरा तो नहीं लगा कि मैंने गौतम को ड्रिंक दे दी?” अदिति ने अजीत से पूछा.
“मुझे पता है कि ये कभी कभार पीता है. और अब जब हम सब हर चीज़ खुल क्र कर रहे हैं तो ये भी ठीक ही है. कम से कम ये सीमा में रहेगा.”

“थैंक यू, पापा.”
“फिर मैं? “ अनन्या ने पूछा.
“जब तेरा मन करेगा तब पी लेना. पर अभी तो तुझे इसका अनुभव नहीं है तो जितना हो सके इससे दूर ही रह.”
“ओके, पापा. मैं समझ सकती हूँ.”

ड्रिंक के बाद सब खाने के लिए गए और फिर बर्तन रखने के बाद नए प्रबंध के अनुसार अपने कमरों में चले गए. अनन्या अदिति के साथ उसके कमरे में और गौतम शालिनी के साथ उसके कमरे में.


शेष भाग दो में
Fantastic jabardast update... bhai
 

Mass

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अपडेट किया है.

समय न मिल पाने के कारण इसे भी दो भागों में बाँटना पड़ा है.
भाग दो जल्दी ही पोस्ट कर दूंगा।
Update kaa intezaar hain sir...
 

prkin

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Update kaa intezaar hain sir...

आजकल समय बहुत कम मिल पा रहा है. थोड़ा धैर्य रखो. फ्रेम तैयार है कहानी का. रंग भर रहा हूँ, जब भी समय मिलता है १७-१८ के बाद कुछ आराम मिलेगा। उसके पहले ये वाला अपडेट पूरा हो जायेगा।
 

prkin

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आज एक अपडेट देने का प्रयास है.
 
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