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आप सभी ko jaise maine kaha tha 05 Oct 2025 ke baad update de paunga main hajir hu aur jaldi hi agla update aane wala hai.
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Wah Ramesh Babu, Apni bahu chanchal ko nichod rahe ho.अध्याय - 10
अपने कमरे में पहुँच कर कमल अनिमेष से मिलता है और उसे पूछता है “तू कब आया कॉलेज से”
अपने बिस्तर पर लेटे हुए अनिमेष बोलता है “आपके निकलने के आधे घंटे बाद मैं भी जो पैसे माँ ने मंगाए थे वो लेके सीधे दुकान के लिए निकल आया था”
कमल “अच्छा हम भी अपना काम करके आ गए चल नीचे चाय पीने चल रहा”
अनिमेष “हम्म आप चलो मैं आ रहा हूँ”
दोनों भाई हाथ मुंह धोके नीचे पहुँच गए और लेखा ने दोनों को चाय देने लगी, रिंकी भी अब नीचे आके ख़ुद चाय लेने रसोई में चली गई,
थोड़े देर में पंकज भी ड्यूटी से आ गया और हाथ मुंह धोके वो भी चाय पीने लगा,
पंकज “आज घर में लोग कम है तो कितना शांति छाया है”
लेखा “हा भैया घर में बच्चों की आवाजों से घर सुना लगता है”
चंचल “किसी ने फ़ोन किया था क्या उनको कहा पहुँचे है वो लोग”
लेखा “मैंने अनी के पापा से बात किया था दीदी, दोपहर में तब तो वो लोग खाने के लिए एक जगह रुके है ऐसा बोले”
पंकज “रात के खाने के बाद वीडियो कॉल कर लेंगे तब तक तो वो लोग भी वहाँ पहुँच के कमरे ले चुके होंगे”
चंचल “सही कह रहे है चल लेखा रात के खाने के लिए तैयारी कर जल्दी अपना काम करके उनको कॉल करेंगे”
लेखा “ठीक है दीदी और रिंकी आज हमारा हाथ बटायेगी या तुझे कॉलेज का कुछ काम बाक़ी है”
रिंकी “नहीं बड़ी माँ कल छुट्टी है मैं कल कॉलेज का काम कर लूँगी मैं आज आप लोगो की मदद करूँगी” फिर अपने कमरे में चली गई,
कमल और अनिमेष घूम आने का बोल बाहर चले गए, पंकज भी सीडियों के रास्ते छत में पहुँच कुछ काम करने लग गया, नीचे अकेले बैठे रमेश की नजर अपने बहुओं पर थी,
उसका लंड कुछ घंटे पहले हुए दृश्य को याद कर फिर से अकड़ने लगा था रमेश वही सोफे में लेट गया और आगे का सोचते सोचते फिर उसकी आँख लग गई,
रिंकी अपने कमरे में पहुँच चुकी थी बिस्तर पर लेटे उसे आज कमल के साथ बिताए पल याद आने लगे, उसके दिल में एक अजीब सी बेचैनी के साथ ख़ुशी भी हो रही थी,
वो सोचने लगी मैं इतना सब सोच रही हूँ अगर कमल भैया को मेरे हरकते कहीं बुरी लगी और घर में किसी को बता दीये तो, ये सोचकर रिंकी को डर सताए जा रहा था,
वो उस किताब को लेके बिस्तर में लेट गई और उसको देखते हुए उसने एक हाथ अपने लेगिस से होते हुए चड्डी के अंदर डाल ली, नंगी तस्वीरो को देख उसकी चूत हल्की गीली होने लगी,
लेकिन वो अभी ये सब नहीं कर सकती थी उसने अपना हाथ वहाँ से हटा लिया और ख़ुद पर काबू करते हुए रात के इंतज़ार में लेटी रही,
तभी उसके पास पूजा का कॉल आया जिसे देख उसका मन बदल गया और वो उससे बात करते करते छत पे पहुँच गई जहाँ उसने देखा उसके बड़े पापा लुंगी और बनयान में कुछ साफ़ करने में लगे है, पंकज की नज़र भी उसपे पड़ी पर वो अपने काम में लगा रहा,
वो पूजा और पिंकी से बात करते हुए अपनी नज़र को अपने बड़े पापा पर हमेशा की तरह ही रखी थी, अब उसकी आँखे उनके काम करते शरीर पे जा रही थी, आज ये पहली बार था जब रिंकी की नज़र अपने बड़े पापा के हट्टे कट्टे शरीर को इस तरह देख रही थी,
उसके शरीर में कुछ अजीब लगा जिसे उसने पहले कभी अनुभव ना किया हो ये अहसास अनजाना सा था वो बस एक टक बात करते देखे जा रही थी,
सामने से पूजा उसको जो भी बता रही थी वो बस सुन रही थी पर उसकी नजर तो अपने बड़े पापा के गठीले हाथो और जांघो पर थी, बात खत्म होने बाद पूजा ने फ़ोन रख दिया, रिंकी अब नीचे जा रही थी पर नज़र अब भी पंकज पर थी,
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शाम हो चला था चंचल, लेखा और रिंकी ने रात का खाना तैयार कर लिया था इंतज़ार था तो बस बाक़ी लोगो के साथ आने का धीरे धीरे सभी ने रात का खाना ख़त्म किया जैसे बाक़ी घरों में होता है बाद का काम निपटा के लेखा ने चंचल से वीडियो कॉल की बात छेड़ी फिर घर के सभी सदस्यों ने थोड़ी थोड़ी देर बात करके अपने अपने कमरे की ओर सोने के लिए प्रस्थान किया,
चंचल का मन दोपहर से ही किसी उधेड़ बुन में था हर थोड़े पल मे उसे आज दोपहर की घटना याद आ जाती थी यही हाल लेखा का भी था वो भी दोपहर में हुए अपने बेटे के साथ घटित हुई घटना से बिचलित थी,
पीताम्बर के ना होने से लेखा आज बिस्तर में अकेली लेटी हुई थी उसकी आँखे बंद थी वो अपने फ़ोन में कुछ देखना चाहती तो उसे वो पल याद आ जाता की किस तरह उसने आज अपने इन्ही हाथों से अपने बेटे के कड़क लंड का पानी निकाला था,
दूसरी तरफ़ अनिमेष कमरे में कमल के होते हुए कहीं खोया हुआ था जैसे उसके दिमाग़ में कुछ चल रहा हो और अचानक से कमल को आ रहा हूँ बोलके कमरे से बाहर निकल जाता है,
अपने कदमों को दरवाज़े के बाहर रोक फिर से कुछ सोचता है और आसपास नजरे घुमा के अपनी माँ लेखा के कमरे की ओर चल पड़ता है, जहाँ उसे दरवाज़ा बंद दिखता है और उसे धीरे से खटखटाने लगता है,
लेखा जो किसी सोच में डूबी थी अचानक दरवाज़े के आवाज से उठ बैठती है और वहाँ पहुँच के पूछती है “कौन है” दूसरी तरफ़ से आवाज़ आता है “माँ मैं हूँ अनी” और लेखा दरवाजा खोल देती है साथ ही अनी से सवाल करती है “बेटा तू इस समय यहाँ क्या कर रहा है तुझे कुछ चाहिए क्या”
अनी “माँ मुझे बेचैनी सी हो रही थी तो आपसे मिलने आ गया क्या मैं अंदर आ जाऊ” अनी ने जवाब देते हुए कहा, लेखा ने हा कहते हुए दरवाज़ा बंद किया,
लेखा “क्या हुआ अनी सब ठीक तो है ना बेटा”
अनी “हा माँ सब ठीक है बस मुझे आपकी याद आ रही थी तो मैं आपसे मिलने चला आ गया”
लेखा “अच्छा पहले तो कभी नहीं आया इस तरफ़ अपनी माँ से मिलने फिर आज कैसे याद आ गई मेरी” बिस्तर को थोड़ा ठीक करते हुए बोली,
अनी “क्या माँ आप भी आज पापा नहीं और आप अकेले हो तो मुझे लगा आपसे मिलना चाहिए इसलिए मैं आ गया”
लेखा “अच्छा किया तू आ गया मैं भी बोर हो रही थी” और उसने बिस्तर में लेटते हुए अपने बेटे को लेटने का इशारा करने लगी,
अनी अपनी माँ को लेटे हुए देख रहा था वो एक नाइटी पहनी थी जिसको देख के ही लग रहा था लेखा ने शायद अंदर ब्रा और पेटीकोट नहीं पहनी थी अनिमेष भी अपनी माँ के बगल में लेट गया और उसकी तरफ़ करवट ले लिया,
लेखा ने उसके बालों में हाथ फेरा और उससे पूछा अनी “सब ठीक तो है ना बेटा”
अनी “हा माँ सब ठीक है पर क्या आप अभी मेरी एक मदद कर सकती है”
लेखा “इसमें बोलने वाली क्या बात है तू बता क्या करना मैं सब करूँगी तू मेरा बेटा है” लेखा ने उसकी मासूमियत को समझा और कहा,
अनी “क्या आप वो क्रीम लेके आई है दुकान से मुझे लगता है आज भी वो लगाना पड़ेगा”
लेखा “नहीं वो तो वही रह गया है और मुझे नहीं पता था तुझे जरूरत पड़ सकता है वरना मैं लेके आ जाती”
अनी “अच्छा कोई बात नहीं मैं बस लगा के थोड़ा आराम देना चाह रहा था”
थोड़ी देर दोनों माँ बेटे के बीच शांति छायी रही फिर लेखा ने अचानक ही अनी से कहा “मुझे दिखा तुझे वहाँ क्या हुआ है ज़्यादा दिक्कत तो नहीं है” और बिस्तर में बैठ के अपने बेटे के पजामे को अपने दोनों हाथों से नीचे खिसकाने लगी,
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रात के ११ बज चुके थे और रिंकी आज सुबह से कुछ ज़्यादा थक चुकी थी इसलिए जल्दी आराम करने बिस्तर में लेटते ही उसे नींद आ गई, वही हाल कमल का भी था वो अपने फ़ोन में किसी से बात करके और अनी का इंतज़ार करते करते जल्दी ही सो गया,
चंचल और उसके पति के बीच चुदाई पूरी होने के बाद पंकज ने चंचल से कहा “आज तुमको ज़्यादा मजा नहीं आया क्या तुम कुछ शांत थी”
चंचल कपड़े ठीक करके बाथरूम से वापस आ चुकी थी जिसके मन में दोपहर को लेके एक असमंजस भरा था और वो अपने मन को शांत रखना चाह रही थी लेकिन पंकज ने उसे फिर कुरेद दिया,
“मैं…शांत…नहीं तो” अपने चेहरे पे क्रीम लगाते हुए बोली,
“ठीक है हो सकता है मेरा वहम हो” और उसे शुभ रात्रि बोलके एक चुम्मा देके एक करवट लेके सो जाता है,
चंचल जो एक बार अपने ससुर से मिलके आना चाह रही थी और अपने पति के करवट लेते ही पानी लेने रसोई के तरफ़ चल पड़ती है फिर एक बॉटल पानी अपने कमरे के लिए निकाल वही रख अपने ससुर के कमरे के तरफ़ जाने से पहले,
एक नज़र नीचे के बाक़ी कमरों में मारने चल पड़ती है जहाँ उसे कमल के कमरे का बल्ब बंद दिखता है जिससे वो समझ जाती है दोनों भाई सो चुके है पर लेखा के कमरे का बल्ब चालू होता है और वो उसके कमरे से आती रोशनी का पीछा करते हुए आगे बड़ने लगती है,
इससे अनजान की कमरे के अंदर लेखा अपने बेटे अनि के साथ अंदर क्या कर रही है, दरवाजे के पास पहुँच चंचल लेखा को आवाज लगाती है,
“लेखा मैं हूँ तू अभी तक जाग रही है क्या”
अंदर थोड़ी देर खामोशी के बाद बिना दरवाज़ा खोले लेखा ने कहा “हा दीदी बस सोने ही वाली थी कुछ काम है क्या”
चंचल “नहीं कुछ काम नहीं है बस रोशनी देख के आ गई थी, ठीक है तू आराम कर मैं बस पानी लेने आई थी अब जा रही हूँ,
और चंचल के आगे बड़ते ही लेखा के कमरे का बल्ब बंद हो गया, चंचल को थोड़ा अजीब लगा पर उसके दिमाग़ में पहले से ही ससुर का ख्याल था तो वो ज़्यादा ध्यान ना देते हुए अपने ससुर के कमरे की तरफ़ चल पड़ी,
अंदर अँधेरा साफ़ दिख रहा था दरवाज़े पर खड़ी चंचल ने मन में सोचा “लगता है बाबू जी सो गए” और वापस मुड़ के जाने को हुई पर जैसे ही उसकी नज़र खिड़की के अंदर से आते फ़ोन की रोशनी पर पड़ी वो फिर रुक गई और वही खड़ी कुछ सोचकर रसोई के तरफ़ मुड़ गई,
वहाँ पहुँच उसने अगले पाँच मिनट में झट से एक गिलास दूध गर्म किया और अपने ससुर के कमरे के पास पहुँच दरवाज़ा खटखटाया,
लगभग एक मिन बाद बल्ब जला और दरवाज़ा खुला, रमेश अपनी बहू से कुछ पूछ पाते उससे पहले ही चंचल अंदर जाते हुए कहने लगी “बाबू जी जैसा की मैंने कहा था आपको अब अपने सेहत पर ध्यान रखना है तो मैं ये दूध आपके लिए गर्म करके ले आई हूँ आप इसे पी लीजिएगा” और उसे बिस्तर के बगल में रख बाहर की तरफ़ जाने लगी,
रमेश अभी भी दरवाज़े के पास ही खड़ा था उसने दरवाजा बंद करते हुए अपनी बहू को रोका और कहा “बहू एक मिन रुको, तुम अचानक आज दूध लेके आई और तुमको पता है ना मुझे ऐसे दूध पीना पसंद नहीं”
चंचल को कुछ समझ नहीं आया “मुझे कुछ नहीं पता आज से आपको पीना है वो भी रोज़ एक गिलास”
रमेश “पर बहू”
चंचल “पर वर कुछ नहीं पता मुझे”
रमेश “अच्छा ठीक है मैं पी लूँगा पर तुम्हें जल्दी ना हो तो थोड़े देर मुझसे बात कर सकती हो”
चंचल तो ख़ुद रुकने का बहाना चाह रही थी जिसे ख़ुद उसके ससुर ने दे दिया “ठीक है बाबू जी जबतक आप दूध पीते है तब तक मैं रुक जाती हूँ”
चंचल जैसे ही बिस्तर की तरफ़ बड़ी पीछे से उसके ससुर ने गले से लगाते हुए कहा “धन्यवाद मेरी बहू मेरी बेटी मेरा इतना ध्यान रहने के लिए”
चंचल ने तुरत अलग होते हुए कहा “बाबू जी आप ठीक तो हो यहाँ इस तरह रहना ग़लत होगा किसी ने देख लिया जो मेरी शामत आ जाएगी”
रमेश ने फिर उसे सामने से गले लगाया और उसके कान के पास जाकर धीरे से कहा “तुम्हें अच्छे से पता है बहू मुझे हर काम सावधानी से करना पसंद है”
चंचल ने अब कुछ नहीं कहा अपने ससुर के आवाज को इतने नजदीक से सुनके उसकी आंखे बंद हो गई उसके शरीर में एक मदहोशी सी छाने लगी और उसने भी उसे गले से लगा लिया,
रमेश ने खड़े खड़े ही अपनी बहू के गर्दन को चूमना शुरू कर दिया था जिसका मतलब है अब उसकी बहू को भी इस समय ये अच्छा लग रहा है, उसने तेजी दिखाते हुए चंचल के होठों को चूमना शुरू कर दिया,
दोनों ससुर बहू एक दूसरे के होठों को खा जाना चाह रहे थे रमेश ने अलग होते हुए कहा “बहू मुझे तो आज से ये दूध ज़्यादा अच्छा लग रहा है” और उसके दोनों चूचो को नाइटी से बाहर निकाल चूसने लगा,
चंचल की आँखे बंद थी चेहरा छत की तरफ़ थी मुँह खुली हुई बस “आह बाबू जी और ज़ोर से दबा के चूसिये…. खा जाइये पूरा इसे” की आवाज़ आ रही थी, नीचे उसका ससुर उसके दोनों चूचो को दबा दबा कर चूस रहा था,
“बहू अब तो लगता है रोज़ बिना इसे चूसे मुझे नींद नहीं आएगी”
चूसने से चंचल को कुछ याद आया और अपने एक हाथ से ससुर के लण्ड को पजामे के ऊपर से ही सहलाने लगी ये पल रमेश के लिए उत्तेजना भरा रहा, उसकी एक आह निकल गई उसने तुरंत अपनी बहू को नीचे बैठने का इशारा किया,
अब तक दोनों की कामवासना जागृत हो चुकी थी बिना कुछ कहे एक दूसरे को समझाने लगे, चंचल नीचे बैठते ही पजामे से लण्ड बाहर निकाल ली, बिना देरी किए उसने अपने ससुर का लंड अपने गुलाबी होठों से अंदर ले जाने लगी,
अब रमेश की बारी थी आँखे बंद कर छत की तरफ़ देखने की, नीचे उसकी बहू लंड से खेलना शुरू कर चुकी थी, वो एक अच्छे खिलाड़ी के जैसे अपने ससुर को मज़ा दे रही थी,
चंचल ने एक हाथ को लंड पे रख उसे गले तक लेके चूसने लगी और दूसरे हाथ की दो उँगली को लगातार अपनी चुत के अंदर बाहर कर रही थी, उसकी चुत लगातार अब पानी छोड़ने लगी, वो अब जल्दी से अपनी चूत को शांत करना चाह रही जिसके लिए उसे पहले ससुर का पानी निकालना था,
रमेश चंचल की तेजी से पागल हो रहा था वो कभी भी झड़ सकता था और सोच रहा था बहू कितनी कमाल की चूसती है इसका हुनर देख मेरा पानी कभी भी निकल सकता है,
अगले कुछ देर में एक आह भरते हुए बहुत तेज़ी से रमेश ने अपना पानी चंचल के मुँह में छोड़ने लगा और चंचल उसे बस पीते चली गई, रमेश थक के बिस्तर में आँखे बंद कर पैर नीचे रख लेट गया,
चंचल बिना देरी किए तुरंत ही नाइटी ऊपर कर अपने चुत को सीधे ससुर के मुंह में रख दी और ये रमेश के लिए एक और झटका था पर उसने भी बिना हार माने अपने दोनों हाथों को बहू की गांड पे रख उसकी चूत को चूसने लग जाता है,
चंचल को यही तो चाहिए था किसी तरह उसका भी पानी चूत से निकले और उसकी ये चाहत अब उसका ससुर पूरा करने वाला था, उसने आह भरते हुए अपनी चूत को ससुर के मुँह में रगड़ने लगी, उसकी चूत ने आज के दिन में इतनी बार पानी छोड़ा था उसे ख़ुद पता नहीं था,
क़रीब दस मिन की चटाई और चुसाई ने आख़िरकार चंचल को झड़ने में मजबूर कर ही दिया था, एक दर्द भरी आह ने उसे झाड़ दिया और सुकून से थोड़ी देर के वही बगल में लेट गई,
Yahi to bat h bhai write sahab bas ate h story padne lag rha h sayad ab story continue nhi hogiKahani vale hi ek ho har kirdar ka alag importance hai, wo hai chidai. Koi bahan ko, koi maa ko chodega, sasur ne to ek Bahu chod hi Diya. Sath jo log ghumne gaye udhar v Naya khel suru ho sakta hai.
Bas writer sahab, regularly update dete rahiyega. Hum sab aap ke sath hai.