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Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

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komaalrani

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छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

भाग 219 -- बुच्ची और लीला -दोनों ने लीला, ----खेला चोर सिपाही का पृष्ठ १२४३

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छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

भाग 219 -- बुच्ची और लीला -दोनों ने लीला
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खेला चोर सिपाही का

३३,७४, ३६६
इमरतिया ने बोला था कि मटमंगरा में सब औरतें, लड़कियाँ सिर्फ साड़ी-ब्लाउज़ पहनकर आएंगी।

अब शहर वाली तो सब टॉप-स्कर्ट में थीं, और गाँव में भी आधी लड़कियाँ या तो फ्रॉक या शलवार-कुरता पहनती थीं, तो साड़ी-ब्लाउज़ कैसे?

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रमा, शीतल मौसी की लड़की, जो बम्बई से आयी थी और अंग्रेजी स्कूल में इंटर में पढ़ती थी, स्कर्ट-टॉप, तरह-तरह के ड्रेस और एक-दो शलवार-कुर्ती लायी थी, वही सबसे पहले चिल्लाई,


"अरे, साड़ी तो चलिए मम्मी, मौसी, मामी, भाभी किसी की ले लेंगे, लेकिन ब्लाउज़, वो भी मेरे नाप का कहाँ से मिलेगा?"



"अरे तो मत पहनना ब्लाउज़, बिन्नो, मेरे देवरों का भला हो जाएगा," मंजू भाभी ने अपनी ननद को चिढ़ाया।

"और तेरे भाइयों के साथ तेरी भाभी के भाइयों का भी; बस साड़ी उठायी, झलक दिखला दी, लौंडों को भी आराम। आँचल हटाया, मसल दिया।"

रामपुर वाली को तो हरदम अपने भाइयों के फायदे की चिंता रहती थी—गप्पू और उसके दोस्तों की, तो वो और जोर से खुश होकर बोलीं।

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लेकिन बड़ी ठकुराइन ने मामला सुलझा दिया, और बहुओं को डांटके बोलीं,

"तुम सब ना मेरी प्यारी-प्या प्यारी बेटियों को चिढ़ा रही हो। तुम सब अपने मायके में उघारे घूमती होगी? अरे, कल से दरजी लगेंगे, दुल्हन के और बाकी लोगों के कपड़े सिलने आएँगी दर्जिने, तो तुम सब भी अपने-अपने ब्लाउज़ सिलवा लेना, एकदम लेटेस्ट फैशन का, अपनी-अपनी नाप के कम से कम तीन-चार।"

लेकिन भाभियों का चिढ़ाना कम नहीं हो रहा था,


"अरे, दरजी का लड़का तो हमारी ननद का यार है। उसको जोबन का उभार, नाप सब याद है, बिना नाप लिए बना देगा। हाँ-हाँ, चूँची के लिए सिलवाई में गुलाबो ले लेगा ।"



और उसी झांय-झांय के बीच पीछे की ओर से पता नहीं कहाँ से एक पुलिस का दरोगा पूरी वर्दी में, मोटा तेल पिलाया डंडा लेकर और साथ में दो-तीन कांस्टेबल आ गए और जोर से बोले,

"हमको चोरी की रपट मिली है। बड़े महंगे गहने चोरी हुए हैं और खबर है कि चोर सब यहीं छिपे हैं। सब की तलाशी होगी।"

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सब औरतें-लड़कियाँ दुबककर बैठ गईं एक-दूसरे से चिपककर। जो लड़कियाँ गाँव में रतजगा देख चुकी थीं, उन्हें तो अंदाज था, लेकिन जो शहर से आयीं थीं, उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा था।

रीना दुलारी से चिपकके बैठी थी, सुधा भाभी कहीं निकल गयी थीं।

दरोगा गाली देकर बात कर रहा था, और बार-बार अपने हाथ का डंडा घुमाता, सबको हड़काता,

"जो चोर हो कबूल कर ले, वरना सबकी नंगा झोरी होगी। और जिसके पास से गहने पकड़े जाएंगे, जेल तो बाद में जाएगा, यहीं मार-मारके चूतड़ लाल कर दूंगा।"

उसके पुलिस वाले भी साथ-साथ घूम रहे थे—कभी किसी औरत को पकड़के उठा देते, उसके ब्लाउज़ में हाथ डाल देते और फिर बोलते,

"नहीं, कुछ नहीं मिला, ये सब छिनार जबरदस्त चोर हैं।"



तब तक एक कांस्टेबल की निगाह रीना पर पड़ी जो एकदम दुबकी दुलारी के पीछे छिपी थी, और उस कांस्टेबल ने कसके कलाई पकड़कर एक झटके में खड़ा किया।
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रीना सहमके खड़ी हो गयी, सर झुकाये, पैरों से जमीन खुरचते हुए। दरोगा ने उसकी ठुड्डी पकड़कर सर ऊपर किया और एक कांस्टेबल ने टॉर्च से उसके चेहरे पे रौशनी डाली और बोला,

"साहब, यही लगती है, यही बताया था। चेहरे से चुदवासी और छिनार लगती है और खूब गोरी है, जबरदस्त नमक है।"

"बोल साली, माल कहाँ रखा है? साली, गाँड़ में भी रखा होगा तो ये डंडा डालकर निकाल लूंगा, दे दे सीधे से," दरोगा ने हड़काया और एक सिपाही से बोला,

"अबे, ये छिनार ऐसे नहीं बोलेगी। इसके टॉप में हाथ डालकर देख, ये सब चोरनी बड़ी-बड़ी चूँची के बीच में ही सब रखती हैं।"



और एक सिपाही ने टॉप के अंदर हाथ डाल दिया, और मन भरकर जोबन दबाए-मसले।


बाकी के दो सिपाहियों ने रीना के हाथ कसकर पकड़ रखे थे। और जिसने टॉप में हाथ डाला था, उस सिपाही ने हाथ बाहर निकाला तो उसके हाथ में एक अंगूठी थी, जो पहले उसने दरोगा को दिखाया, फिर सब औरतों को।

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दरोगा ने स्कर्ट उठाकर उसके चूतड़ पर एक हाथ कसकर मारा और गरजा, "बोल, कितनों से चुदी है?"

"नहीं, नहीं, किसी से नहीं," रीना ने कबूला।



"तो इतना चौड़ा भोंसड़ा कैसे हो गया कि चोरी का सब माल अपने भोंसड़े में रखा है?" दरोगा चीखा, "चल, टाँगे फैला।"

और दरोगा ने अपना हाथ उस अंग्रेजी स्कूल वाली लड़की की स्कर्ट में डाल दिया। कुछ देर जाँघें सहलाईं, और एक फिर झटके में रीना की चुनमुनिया दबोच लिया, और सोचा



" साला, बड़ी किस्मत वाला होगा जो इसकी बुर चोदेगा। कैसे फूली-फूली फांकें हैं, एकदम चिपकी, कसी; साली लौंडे को दबोच लेगी।

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बड़की ठकुराइन सही कह रही थी, जब खुले खेत में इसे अहिराने वाले रगड़ेंगे ना और इसके चूतड़ से रगड़-रगड़कर ढेले टूटेंगे, तब इसकी चूत का पानी निकलेगा और फिर ये लंड की दीवानी हो जायेगी, खुद लौंडों के पीछे-पीछे भागेगी।"

"ये देख, मैं कह रही थी ना तेरी चूत नहीं भोंसड़ा है, देख क्या निकला!"

सबकी आँखें फटी रह गईं—एक बड़ी सी चूड़ी, बल्कि चूड़ा। पूरे पौने तीन इंच का व्यास होगा।



"ये तो साली चार बच्चों की माँ के भी भोंसड़े में नहीं आता, जरूर तू नम्बरी चुदक्कड़ है," दरोगा ने हड़काया।



तब तक एक सिपाही बोल पड़ा, "अरे, इस साली ने अपनी गाँड़ में भी छुपाया होगा चोरी का माल।"

"निहुर साली!" दरोगा गरजा, और जबरदस्ती पकड़कर झुका दिया,
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और उस सिपाही ने स्कर्ट उठा दिया। गोरे-गोरे, गोल-गोल, खूब भरे हुए चूतड़ एकदम मस्त लग रहे थे, बीच का कसा छेद एकदम दुबदुबा रहा था। सब भाभियों की निगाहें कुँवारी ननद के चिकने चूतड़ों पर और एकदम टाइट गाँड़ पे अटकी थीं।

"बोल, और कौन था चोरी में तेरे साथ? और इतनी बड़ी चोरी तू अकेले तो कर नहीं सकती," दरोगा ने ललकारा और अपनी बेंत रीना के पिछवाड़े के छेद पर सटाकर गरजा,

"साली, तेरी गाँड़ को तेरे भोंसड़े से भी चौड़ा कर दूंगा। ये दरोगा का डंडा है, गाँड़ में से जाएगा और मुंह में से निकलेगा। बोल साली, कौन थी तेरे साथ?"

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अब अपनी ननद को बचाने दुलारी आगे आयी—वही जिसने लाइट जाने पर, सुलाकी के आने पर रीना का टॉप उतरवाकर सुधा भाभी के साथ खुलकर गुब्बारों का मजा लिया था, और दरोगा जी से बोली,

"हुजूर के गोड़ पड़ती हूँ, हमको मार लीजिए। ये हमारी ननद गऊ है गऊ। ये तो खराब संगत में पड़कर... और चोरनी के साथ, और सबसे बड़ा तो चोर का सरदार है, बहुत बड़ी-बड़ी चोरी करता है।"

और तब तक रीना समझ गयी थी कि ये सब भाभियों की बदमाशी है, क्योंकि बजाय घबराने के सब भाभियाँ मुस्करा रही थीं; और यहाँ तक कि उसकी मम्मी भी, उनके चेहरे पे भी कोई परेशानी नहीं थी।

और जिस तरह से उस पुलिस वाले ने मजे ले-लेकर रीना के उभार दबाये थे, वो छुअन रीना पहचान गयी थी—सुधा भाभी, जिन्होंने बत्ती जाने पर भी दुलारी के साथ खुलकर उसका जोबन मर्दन किया था।

जब जबरदस्ती दरोगा ने रीना को पकड़कर झुकाया, तो रीना ने दरोगा के पैरों में लगे सुहागिन औरतों वाले महावर को देख लिया और पायल भी चौड़ी सी, और बाकी पुलिस वाले भी उसी तरह थे; और उसने अंदाज लगा लिया था कि रमुआ बहू दरोगा बनी है।

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"अरे बता दो ना, नहीं तो दरोगा साहेब बहुत सख्त हैं, अपनी बहन-मह्तारी भी नहीं छोड़ते, तुम्हारे भैया की तरह,

" दुलारी ने झुकी हुई रीना को समझाया और पकड़कर खड़ा कर दिया।



"जो दरोगा जी मेरे साथ थीं, वो मीना थी और लीला और वो जो देखने में छोटी है लेकिन सेंध उसी ने लगाई थी—इमली।"

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रीना भी अब ऐक्टिंग कर रही थी और अपनी उम्र वाली सब लड़कियों को उसने लपेट लिया, "और असली सरदार वो हैं," दुलारी ने दूल्हे की माँ की ओर इशारा किया।



लेकिन दरोगा के मन में कुछ और चल रहा था, रीना से उसने पूछा,


"साली, अगर तू चुदी नहीं है, तो इतनी मोटी चूड़ी तेरे भोंसड़े से कैसे निकली?"

पुलिस कांस्टेबल बनी सुधा भाभी ने एक हाथ रीना के चूतड़ पे दिया और हड़काया, "चल बता सब लौंडों के नाम जो आजकल घर में हैं, जिनको झुक-झुककर जोबना दिखा-दिखाकर खिला रही थी।"

और रीना ने सब नाम एक साथ सुना दिए—"गप्पू भैया, बिट्टू भैया, रवि भैया, नंदू भैया, चंदू भैया..." पूरे दर्जन भर लड़कों का नाम रीनू ने सुना दिया।
"साली, एक-एक लड़के का नाम मालूम है और लंड का तुझे अकाल पड़ा है! चल बोल, किसका-किसका लंड घोंटेगी?"

दुलारी ने कान में बोला, "जल्दी से हाँ बोल दे, वरना और रगड़ाई होगी।"

रीना ने बोला, लेकिन कांस्टेबल ने एक-एक लड़के का नाम ले-लेकर रीना से कहलवाया और तीन-तीन बार जोर से।

और उसके बाद हमला दूल्हे की माँ पर हुआ।

और क्या न हुआ, दूल्हे की महतारी के साथ।
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तलाशी के नाम पर दरोगा बनी रमुआ बहू ने दूल्हे की माई की बुरिया में पूरी तीन ऊँगली घुसाई और सब भौजाई कने लगी, " अरे जब तीन तीन ऊँगली बिना तेल के जा रहा था तो हमरे देवर क लौंड़ा लेने में सासु जी काहें इतना छिनरपन कर रही हो "

" बोलो लेगी दूल्हे का गपागप, वरना पूरी मुट्ठी पेलूँगी अभी कोहनी तक ," रमुआ बहू बोली।

" अरे पेल दो, ....बचपन क छिनार हैं हमार ननद " बड़ी मामी बोलीं।


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अब दरोगा और सिपाहियों के बाकी औरतें लड़कियां भी आ गयी थी, दोनों सिपाहियों ने पकड़ के दूल्हे की माँ की टांग फैला रही थी।


मंजू भाभी साथ में अपनी ननदो, मीना, रूपा , रमा को लेकर बैठीं जो पहली बार ये सब देख रही थीं, मंजू भाभी और रामपुर वाली दोनों एक साथ अपनी सास से बोलीं

" अरे मान जाइये न, हमार देवर बहुत अच्छा है, बहुत प्यार से ठेलेगा, मजा आ जाएगा "

" अरे भौजी, माना पचासों मरद का घोंटा होगा, गदहा घोडा कुल लिया होगा लेकिन एक बार मेरे भतीजे का ले लीजिये न अंदर, सब को भूल जायेगीं "

चिढ़ाते, उकसाते नीतू ननद बोली जो सूरजु से मुश्किल से डेढ़ दो साल बड़ी थी और जिसके मरद का आज खूब मजे लेकर बड़की ठकुराईन ने दो बार घोंटा था

पूरे दस बार बड़की ठकुराइन से सब उनकी बहुओं, ननदों, भाभियों ने कबुलवाया तब जाकर मुन्ना बहू ने उँगलियाँ बाहर निकाली,



उसके बाद तो चार पांच स्वांग और हुए, फुलवा पर भूत चढ़ा और उसी के बहाने जितनी कुँवारी ननदियाँ चाहे गाँव की हो या शहर की सब की खुल के उस ने रगड़ाई की,

शीतल मौसी धोबन बन के आयी और वो तो खुल के आज मीना के पीछे पड़ी थी, पूनम और चननिया भी चुड़िहारिन और बिसाती बन के आयीं और भाभियों के साथ खूब मस्ती की।



आज तय हुआ था की गाना जल्दी खत्म हो, रात में ' और भी बहुत से काम ' थे लेकिन तब भी एक बज गया, धीरे धीरे सब लोग छत से उतर कर चले गए, आज इमरतिया के घर पर भी कुछ काम था तो वो भी चली गयी , मंजू भाभी, मुन्ना बहू और पूनम कोहबर की ओर चले गए, उसके पहले मंजू भाभी ने दूल्हे के कमरे का ताला खोल दिया था, छत के एक कोने पे लीला से बुच्ची कुछ खुसुर फुसुर कर रही थी और लीला खिलखिला रही थी, और सर हिला के हाँ हाँ का इशारा कर रही थी।



सूरजु की माई ने हल्के से खुले दरवाजे से अपने बेटे को देखा और उसकी छाती गज भर हो गई।

लेकिन वो जोर से मुस्करायीं,


" स्साला, इसकी बुआ को गदहे से चुदवाउ, हमी से नौटंकी।"
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"बोल, कितनों से चुदी है?"

"नहीं, नहीं, किसी से नहीं," रीना ने कबूला।



"तो इतना चौड़ा भोंसड़ा कैसे हो गया कि चोरी का सब माल अपने भोंसड़े में रखा है?" दरोगा चीखा, "चल, टाँगे फैला।"



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खेला चोर सिपाही का

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इमरतिया ने बोला था कि मटमंगरा में सब औरतें, लड़कियाँ सिर्फ साड़ी-ब्लाउज़ पहनकर आएंगी।

अब शहर वाली तो सब टॉप-स्कर्ट में थीं, और गाँव में भी आधी लड़कियाँ या तो फ्रॉक या शलवार-कुरता पहनती थीं, तो साड़ी-ब्लाउज़ कैसे?

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रमा, शीतल मौसी की लड़की, जो बम्बई से आयी थी और अंग्रेजी स्कूल में इंटर में पढ़ती थी, स्कर्ट-टॉप, तरह-तरह के ड्रेस और एक-दो शलवार-कुर्ती लायी थी, वही सबसे पहले चिल्लाई,


"अरे, साड़ी तो चलिए मम्मी, मौसी, मामी, भाभी किसी की ले लेंगे, लेकिन ब्लाउज़, वो भी मेरे नाप का कहाँ से मिलेगा?"



"अरे तो मत पहनना ब्लाउज़, बिन्नो, मेरे देवरों का भला हो जाएगा," मंजू भाभी ने अपनी ननद को चिढ़ाया।

"और तेरे भाइयों के साथ तेरी भाभी के भाइयों का भी; बस साड़ी उठायी, झलक दिखला दी, लौंडों को भी आराम। आँचल हटाया, मसल दिया।"

रामपुर वाली को तो हरदम अपने भाइयों के फायदे की चिंता रहती थी—गप्पू और उसके दोस्तों की, तो वो और जोर से खुश होकर बोलीं।

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लेकिन बड़ी ठकुराइन ने मामला सुलझा दिया, और बहुओं को डांटके बोलीं,

"तुम सब ना मेरी प्यारी-प्या प्यारी बेटियों को चिढ़ा रही हो। तुम सब अपने मायके में उघारे घूमती होगी? अरे, कल से दरजी लगेंगे, दुल्हन के और बाकी लोगों के कपड़े सिलने आएँगी दर्जिने, तो तुम सब भी अपने-अपने ब्लाउज़ सिलवा लेना, एकदम लेटेस्ट फैशन का, अपनी-अपनी नाप के कम से कम तीन-चार।"

लेकिन भाभियों का चिढ़ाना कम नहीं हो रहा था,


"अरे, दरजी का लड़का तो हमारी ननद का यार है। उसको जोबन का उभार, नाप सब याद है, बिना नाप लिए बना देगा। हाँ-हाँ, चूँची के लिए सिलवाई में गुलाबो ले लेगा ।"



और उसी झांय-झांय के बीच पीछे की ओर से पता नहीं कहाँ से एक पुलिस का दरोगा पूरी वर्दी में, मोटा तेल पिलाया डंडा लेकर और साथ में दो-तीन कांस्टेबल आ गए और जोर से बोले,

"हमको चोरी की रपट मिली है। बड़े महंगे गहने चोरी हुए हैं और खबर है कि चोर सब यहीं छिपे हैं। सब की तलाशी होगी।"

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सब औरतें-लड़कियाँ दुबककर बैठ गईं एक-दूसरे से चिपककर। जो लड़कियाँ गाँव में रतजगा देख चुकी थीं, उन्हें तो अंदाज था, लेकिन जो शहर से आयीं थीं, उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा था।

रीना दुलारी से चिपकके बैठी थी, सुधा भाभी कहीं निकल गयी थीं।

दरोगा गाली देकर बात कर रहा था, और बार-बार अपने हाथ का डंडा घुमाता, सबको हड़काता,

"जो चोर हो कबूल कर ले, वरना सबकी नंगा झोरी होगी। और जिसके पास से गहने पकड़े जाएंगे, जेल तो बाद में जाएगा, यहीं मार-मारके चूतड़ लाल कर दूंगा।"

उसके पुलिस वाले भी साथ-साथ घूम रहे थे—कभी किसी औरत को पकड़के उठा देते, उसके ब्लाउज़ में हाथ डाल देते और फिर बोलते,

"नहीं, कुछ नहीं मिला, ये सब छिनार जबरदस्त चोर हैं।"



तब तक एक कांस्टेबल की निगाह रीना पर पड़ी जो एकदम दुबकी दुलारी के पीछे छिपी थी, और उस कांस्टेबल ने कसके कलाई पकड़कर एक झटके में खड़ा किया।
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रीना सहमके खड़ी हो गयी, सर झुकाये, पैरों से जमीन खुरचते हुए। दरोगा ने उसकी ठुड्डी पकड़कर सर ऊपर किया और एक कांस्टेबल ने टॉर्च से उसके चेहरे पे रौशनी डाली और बोला,

"साहब, यही लगती है, यही बताया था। चेहरे से चुदवासी और छिनार लगती है और खूब गोरी है, जबरदस्त नमक है।"

"बोल साली, माल कहाँ रखा है? साली, गाँड़ में भी रखा होगा तो ये डंडा डालकर निकाल लूंगा, दे दे सीधे से," दरोगा ने हड़काया और एक सिपाही से बोला,

"अबे, ये छिनार ऐसे नहीं बोलेगी। इसके टॉप में हाथ डालकर देख, ये सब चोरनी बड़ी-बड़ी चूँची के बीच में ही सब रखती हैं।"



और एक सिपाही ने टॉप के अंदर हाथ डाल दिया, और मन भरकर जोबन दबाए-मसले।


बाकी के दो सिपाहियों ने रीना के हाथ कसकर पकड़ रखे थे। और जिसने टॉप में हाथ डाला था, उस सिपाही ने हाथ बाहर निकाला तो उसके हाथ में एक अंगूठी थी, जो पहले उसने दरोगा को दिखाया, फिर सब औरतों को।

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दरोगा ने स्कर्ट उठाकर उसके चूतड़ पर एक हाथ कसकर मारा और गरजा, "बोल, कितनों से चुदी है?"

"नहीं, नहीं, किसी से नहीं," रीना ने कबूला।



"तो इतना चौड़ा भोंसड़ा कैसे हो गया कि चोरी का सब माल अपने भोंसड़े में रखा है?" दरोगा चीखा, "चल, टाँगे फैला।"

और दरोगा ने अपना हाथ उस अंग्रेजी स्कूल वाली लड़की की स्कर्ट में डाल दिया। कुछ देर जाँघें सहलाईं, और एक फिर झटके में रीना की चुनमुनिया दबोच लिया, और सोचा



" साला, बड़ी किस्मत वाला होगा जो इसकी बुर चोदेगा। कैसे फूली-फूली फांकें हैं, एकदम चिपकी, कसी; साली लौंडे को दबोच लेगी।

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बड़की ठकुराइन सही कह रही थी, जब खुले खेत में इसे अहिराने वाले रगड़ेंगे ना और इसके चूतड़ से रगड़-रगड़कर ढेले टूटेंगे, तब इसकी चूत का पानी निकलेगा और फिर ये लंड की दीवानी हो जायेगी, खुद लौंडों के पीछे-पीछे भागेगी।"

"ये देख, मैं कह रही थी ना तेरी चूत नहीं भोंसड़ा है, देख क्या निकला!"

सबकी आँखें फटी रह गईं—एक बड़ी सी चूड़ी, बल्कि चूड़ा। पूरे पौने तीन इंच का व्यास होगा।



"ये तो साली चार बच्चों की माँ के भी भोंसड़े में नहीं आता, जरूर तू नम्बरी चुदक्कड़ है," दरोगा ने हड़काया।



तब तक एक सिपाही बोल पड़ा, "अरे, इस साली ने अपनी गाँड़ में भी छुपाया होगा चोरी का माल।"

"निहुर साली!" दरोगा गरजा, और जबरदस्ती पकड़कर झुका दिया,
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और उस सिपाही ने स्कर्ट उठा दिया। गोरे-गोरे, गोल-गोल, खूब भरे हुए चूतड़ एकदम मस्त लग रहे थे, बीच का कसा छेद एकदम दुबदुबा रहा था। सब भाभियों की निगाहें कुँवारी ननद के चिकने चूतड़ों पर और एकदम टाइट गाँड़ पे अटकी थीं।

"बोल, और कौन था चोरी में तेरे साथ? और इतनी बड़ी चोरी तू अकेले तो कर नहीं सकती," दरोगा ने ललकारा और अपनी बेंत रीना के पिछवाड़े के छेद पर सटाकर गरजा,

"साली, तेरी गाँड़ को तेरे भोंसड़े से भी चौड़ा कर दूंगा। ये दरोगा का डंडा है, गाँड़ में से जाएगा और मुंह में से निकलेगा। बोल साली, कौन थी तेरे साथ?"

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अब अपनी ननद को बचाने दुलारी आगे आयी—वही जिसने लाइट जाने पर, सुलाकी के आने पर रीना का टॉप उतरवाकर सुधा भाभी के साथ खुलकर गुब्बारों का मजा लिया था, और दरोगा जी से बोली,

"हुजूर के गोड़ पड़ती हूँ, हमको मार लीजिए। ये हमारी ननद गऊ है गऊ। ये तो खराब संगत में पड़कर... और चोरनी के साथ, और सबसे बड़ा तो चोर का सरदार है, बहुत बड़ी-बड़ी चोरी करता है।"

और तब तक रीना समझ गयी थी कि ये सब भाभियों की बदमाशी है, क्योंकि बजाय घबराने के सब भाभियाँ मुस्करा रही थीं; और यहाँ तक कि उसकी मम्मी भी, उनके चेहरे पे भी कोई परेशानी नहीं थी।

और जिस तरह से उस पुलिस वाले ने मजे ले-लेकर रीना के उभार दबाये थे, वो छुअन रीना पहचान गयी थी—सुधा भाभी, जिन्होंने बत्ती जाने पर भी दुलारी के साथ खुलकर उसका जोबन मर्दन किया था।

जब जबरदस्ती दरोगा ने रीना को पकड़कर झुकाया, तो रीना ने दरोगा के पैरों में लगे सुहागिन औरतों वाले महावर को देख लिया और पायल भी चौड़ी सी, और बाकी पुलिस वाले भी उसी तरह थे; और उसने अंदाज लगा लिया था कि रमुआ बहू दरोगा बनी है।

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"अरे बता दो ना, नहीं तो दरोगा साहेब बहुत सख्त हैं, अपनी बहन-मह्तारी भी नहीं छोड़ते, तुम्हारे भैया की तरह,

" दुलारी ने झुकी हुई रीना को समझाया और पकड़कर खड़ा कर दिया।



"जो दरोगा जी मेरे साथ थीं, वो मीना थी और लीला और वो जो देखने में छोटी है लेकिन सेंध उसी ने लगाई थी—इमली।"

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रीना भी अब ऐक्टिंग कर रही थी और अपनी उम्र वाली सब लड़कियों को उसने लपेट लिया, "और असली सरदार वो हैं," दुलारी ने दूल्हे की माँ की ओर इशारा किया।



लेकिन दरोगा के मन में कुछ और चल रहा था, रीना से उसने पूछा,


"साली, अगर तू चुदी नहीं है, तो इतनी मोटी चूड़ी तेरे भोंसड़े से कैसे निकली?"

पुलिस कांस्टेबल बनी सुधा भाभी ने एक हाथ रीना के चूतड़ पे दिया और हड़काया, "चल बता सब लौंडों के नाम जो आजकल घर में हैं, जिनको झुक-झुककर जोबना दिखा-दिखाकर खिला रही थी।"

और रीना ने सब नाम एक साथ सुना दिए—"गप्पू भैया, बिट्टू भैया, रवि भैया, नंदू भैया, चंदू भैया..." पूरे दर्जन भर लड़कों का नाम रीनू ने सुना दिया।
"साली, एक-एक लड़के का नाम मालूम है और लंड का तुझे अकाल पड़ा है! चल बोल, किसका-किसका लंड घोंटेगी?"

दुलारी ने कान में बोला, "जल्दी से हाँ बोल दे, वरना और रगड़ाई होगी।"

रीना ने बोला, लेकिन कांस्टेबल ने एक-एक लड़के का नाम ले-लेकर रीना से कहलवाया और तीन-तीन बार जोर से।

और उसके बाद हमला दूल्हे की माँ पर हुआ।

और क्या न हुआ, दूल्हे की महतारी के साथ।
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तलाशी के नाम पर दरोगा बनी रमुआ बहू ने दूल्हे की माई की बुरिया में पूरी तीन ऊँगली घुसाई और सब भौजाई कने लगी, " अरे जब तीन तीन ऊँगली बिना तेल के जा रहा था तो हमरे देवर क लौंड़ा लेने में सासु जी काहें इतना छिनरपन कर रही हो "

" बोलो लेगी दूल्हे का गपागप, वरना पूरी मुट्ठी पेलूँगी अभी कोहनी तक ," रमुआ बहू बोली।

" अरे पेल दो, ....बचपन क छिनार हैं हमार ननद " बड़ी मामी बोलीं।


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अब दरोगा और सिपाहियों के बाकी औरतें लड़कियां भी आ गयी थी, दोनों सिपाहियों ने पकड़ के दूल्हे की माँ की टांग फैला रही थी।


मंजू भाभी साथ में अपनी ननदो, मीना, रूपा , रमा को लेकर बैठीं जो पहली बार ये सब देख रही थीं, मंजू भाभी और रामपुर वाली दोनों एक साथ अपनी सास से बोलीं

" अरे मान जाइये न, हमार देवर बहुत अच्छा है, बहुत प्यार से ठेलेगा, मजा आ जाएगा "

" अरे भौजी, माना पचासों मरद का घोंटा होगा, गदहा घोडा कुल लिया होगा लेकिन एक बार मेरे भतीजे का ले लीजिये न अंदर, सब को भूल जायेगीं "

चिढ़ाते, उकसाते नीतू ननद बोली जो सूरजु से मुश्किल से डेढ़ दो साल बड़ी थी और जिसके मरद का आज खूब मजे लेकर बड़की ठकुराईन ने दो बार घोंटा था

पूरे दस बार बड़की ठकुराइन से सब उनकी बहुओं, ननदों, भाभियों ने कबुलवाया तब जाकर मुन्ना बहू ने उँगलियाँ बाहर निकाली,



उसके बाद तो चार पांच स्वांग और हुए, फुलवा पर भूत चढ़ा और उसी के बहाने जितनी कुँवारी ननदियाँ चाहे गाँव की हो या शहर की सब की खुल के उस ने रगड़ाई की,

शीतल मौसी धोबन बन के आयी और वो तो खुल के आज मीना के पीछे पड़ी थी, पूनम और चननिया भी चुड़िहारिन और बिसाती बन के आयीं और भाभियों के साथ खूब मस्ती की।



आज तय हुआ था की गाना जल्दी खत्म हो, रात में ' और भी बहुत से काम ' थे लेकिन तब भी एक बज गया, धीरे धीरे सब लोग छत से उतर कर चले गए, आज इमरतिया के घर पर भी कुछ काम था तो वो भी चली गयी , मंजू भाभी, मुन्ना बहू और पूनम कोहबर की ओर चले गए, उसके पहले मंजू भाभी ने दूल्हे के कमरे का ताला खोल दिया था, छत के एक कोने पे लीला से बुच्ची कुछ खुसुर फुसुर कर रही थी और लीला खिलखिला रही थी, और सर हिला के हाँ हाँ का इशारा कर रही थी।



सूरजु की माई ने हल्के से खुले दरवाजे से अपने बेटे को देखा और उसकी छाती गज भर हो गई।

लेकिन वो जोर से मुस्करायीं,


" स्साला, इसकी बुआ को गदहे से चुदवाउ, हमी से नौटंकी।"
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छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

भाग 219 -- बुच्ची और लीला -दोनों ने लीला
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खेला चोर सिपाही का

३३,७४, ३६६
इमरतिया ने बोला था कि मटमंगरा में सब औरतें, लड़कियाँ सिर्फ साड़ी-ब्लाउज़ पहनकर आएंगी।

अब शहर वाली तो सब टॉप-स्कर्ट में थीं, और गाँव में भी आधी लड़कियाँ या तो फ्रॉक या शलवार-कुरता पहनती थीं, तो साड़ी-ब्लाउज़ कैसे?

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रमा, शीतल मौसी की लड़की, जो बम्बई से आयी थी और अंग्रेजी स्कूल में इंटर में पढ़ती थी, स्कर्ट-टॉप, तरह-तरह के ड्रेस और एक-दो शलवार-कुर्ती लायी थी, वही सबसे पहले चिल्लाई,


"अरे, साड़ी तो चलिए मम्मी, मौसी, मामी, भाभी किसी की ले लेंगे, लेकिन ब्लाउज़, वो भी मेरे नाप का कहाँ से मिलेगा?"



"अरे तो मत पहनना ब्लाउज़, बिन्नो, मेरे देवरों का भला हो जाएगा," मंजू भाभी ने अपनी ननद को चिढ़ाया।

"और तेरे भाइयों के साथ तेरी भाभी के भाइयों का भी; बस साड़ी उठायी, झलक दिखला दी, लौंडों को भी आराम। आँचल हटाया, मसल दिया।"

रामपुर वाली को तो हरदम अपने भाइयों के फायदे की चिंता रहती थी—गप्पू और उसके दोस्तों की, तो वो और जोर से खुश होकर बोलीं।

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लेकिन बड़ी ठकुराइन ने मामला सुलझा दिया, और बहुओं को डांटके बोलीं,

"तुम सब ना मेरी प्यारी-प्या प्यारी बेटियों को चिढ़ा रही हो। तुम सब अपने मायके में उघारे घूमती होगी? अरे, कल से दरजी लगेंगे, दुल्हन के और बाकी लोगों के कपड़े सिलने आएँगी दर्जिने, तो तुम सब भी अपने-अपने ब्लाउज़ सिलवा लेना, एकदम लेटेस्ट फैशन का, अपनी-अपनी नाप के कम से कम तीन-चार।"

लेकिन भाभियों का चिढ़ाना कम नहीं हो रहा था,


"अरे, दरजी का लड़का तो हमारी ननद का यार है। उसको जोबन का उभार, नाप सब याद है, बिना नाप लिए बना देगा। हाँ-हाँ, चूँची के लिए सिलवाई में गुलाबो ले लेगा ।"



और उसी झांय-झांय के बीच पीछे की ओर से पता नहीं कहाँ से एक पुलिस का दरोगा पूरी वर्दी में, मोटा तेल पिलाया डंडा लेकर और साथ में दो-तीन कांस्टेबल आ गए और जोर से बोले,

"हमको चोरी की रपट मिली है। बड़े महंगे गहने चोरी हुए हैं और खबर है कि चोर सब यहीं छिपे हैं। सब की तलाशी होगी।"

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सब औरतें-लड़कियाँ दुबककर बैठ गईं एक-दूसरे से चिपककर। जो लड़कियाँ गाँव में रतजगा देख चुकी थीं, उन्हें तो अंदाज था, लेकिन जो शहर से आयीं थीं, उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा था।

रीना दुलारी से चिपकके बैठी थी, सुधा भाभी कहीं निकल गयी थीं।

दरोगा गाली देकर बात कर रहा था, और बार-बार अपने हाथ का डंडा घुमाता, सबको हड़काता,

"जो चोर हो कबूल कर ले, वरना सबकी नंगा झोरी होगी। और जिसके पास से गहने पकड़े जाएंगे, जेल तो बाद में जाएगा, यहीं मार-मारके चूतड़ लाल कर दूंगा।"

उसके पुलिस वाले भी साथ-साथ घूम रहे थे—कभी किसी औरत को पकड़के उठा देते, उसके ब्लाउज़ में हाथ डाल देते और फिर बोलते,

"नहीं, कुछ नहीं मिला, ये सब छिनार जबरदस्त चोर हैं।"



तब तक एक कांस्टेबल की निगाह रीना पर पड़ी जो एकदम दुबकी दुलारी के पीछे छिपी थी, और उस कांस्टेबल ने कसके कलाई पकड़कर एक झटके में खड़ा किया।
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रीना सहमके खड़ी हो गयी, सर झुकाये, पैरों से जमीन खुरचते हुए। दरोगा ने उसकी ठुड्डी पकड़कर सर ऊपर किया और एक कांस्टेबल ने टॉर्च से उसके चेहरे पे रौशनी डाली और बोला,

"साहब, यही लगती है, यही बताया था। चेहरे से चुदवासी और छिनार लगती है और खूब गोरी है, जबरदस्त नमक है।"

"बोल साली, माल कहाँ रखा है? साली, गाँड़ में भी रखा होगा तो ये डंडा डालकर निकाल लूंगा, दे दे सीधे से," दरोगा ने हड़काया और एक सिपाही से बोला,

"अबे, ये छिनार ऐसे नहीं बोलेगी। इसके टॉप में हाथ डालकर देख, ये सब चोरनी बड़ी-बड़ी चूँची के बीच में ही सब रखती हैं।"



और एक सिपाही ने टॉप के अंदर हाथ डाल दिया, और मन भरकर जोबन दबाए-मसले।


बाकी के दो सिपाहियों ने रीना के हाथ कसकर पकड़ रखे थे। और जिसने टॉप में हाथ डाला था, उस सिपाही ने हाथ बाहर निकाला तो उसके हाथ में एक अंगूठी थी, जो पहले उसने दरोगा को दिखाया, फिर सब औरतों को।

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दरोगा ने स्कर्ट उठाकर उसके चूतड़ पर एक हाथ कसकर मारा और गरजा, "बोल, कितनों से चुदी है?"

"नहीं, नहीं, किसी से नहीं," रीना ने कबूला।



"तो इतना चौड़ा भोंसड़ा कैसे हो गया कि चोरी का सब माल अपने भोंसड़े में रखा है?" दरोगा चीखा, "चल, टाँगे फैला।"

और दरोगा ने अपना हाथ उस अंग्रेजी स्कूल वाली लड़की की स्कर्ट में डाल दिया। कुछ देर जाँघें सहलाईं, और एक फिर झटके में रीना की चुनमुनिया दबोच लिया, और सोचा



" साला, बड़ी किस्मत वाला होगा जो इसकी बुर चोदेगा। कैसे फूली-फूली फांकें हैं, एकदम चिपकी, कसी; साली लौंडे को दबोच लेगी।

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बड़की ठकुराइन सही कह रही थी, जब खुले खेत में इसे अहिराने वाले रगड़ेंगे ना और इसके चूतड़ से रगड़-रगड़कर ढेले टूटेंगे, तब इसकी चूत का पानी निकलेगा और फिर ये लंड की दीवानी हो जायेगी, खुद लौंडों के पीछे-पीछे भागेगी।"

"ये देख, मैं कह रही थी ना तेरी चूत नहीं भोंसड़ा है, देख क्या निकला!"

सबकी आँखें फटी रह गईं—एक बड़ी सी चूड़ी, बल्कि चूड़ा। पूरे पौने तीन इंच का व्यास होगा।



"ये तो साली चार बच्चों की माँ के भी भोंसड़े में नहीं आता, जरूर तू नम्बरी चुदक्कड़ है," दरोगा ने हड़काया।



तब तक एक सिपाही बोल पड़ा, "अरे, इस साली ने अपनी गाँड़ में भी छुपाया होगा चोरी का माल।"

"निहुर साली!" दरोगा गरजा, और जबरदस्ती पकड़कर झुका दिया,
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और उस सिपाही ने स्कर्ट उठा दिया। गोरे-गोरे, गोल-गोल, खूब भरे हुए चूतड़ एकदम मस्त लग रहे थे, बीच का कसा छेद एकदम दुबदुबा रहा था। सब भाभियों की निगाहें कुँवारी ननद के चिकने चूतड़ों पर और एकदम टाइट गाँड़ पे अटकी थीं।

"बोल, और कौन था चोरी में तेरे साथ? और इतनी बड़ी चोरी तू अकेले तो कर नहीं सकती," दरोगा ने ललकारा और अपनी बेंत रीना के पिछवाड़े के छेद पर सटाकर गरजा,

"साली, तेरी गाँड़ को तेरे भोंसड़े से भी चौड़ा कर दूंगा। ये दरोगा का डंडा है, गाँड़ में से जाएगा और मुंह में से निकलेगा। बोल साली, कौन थी तेरे साथ?"

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अब अपनी ननद को बचाने दुलारी आगे आयी—वही जिसने लाइट जाने पर, सुलाकी के आने पर रीना का टॉप उतरवाकर सुधा भाभी के साथ खुलकर गुब्बारों का मजा लिया था, और दरोगा जी से बोली,

"हुजूर के गोड़ पड़ती हूँ, हमको मार लीजिए। ये हमारी ननद गऊ है गऊ। ये तो खराब संगत में पड़कर... और चोरनी के साथ, और सबसे बड़ा तो चोर का सरदार है, बहुत बड़ी-बड़ी चोरी करता है।"

और तब तक रीना समझ गयी थी कि ये सब भाभियों की बदमाशी है, क्योंकि बजाय घबराने के सब भाभियाँ मुस्करा रही थीं; और यहाँ तक कि उसकी मम्मी भी, उनके चेहरे पे भी कोई परेशानी नहीं थी।

और जिस तरह से उस पुलिस वाले ने मजे ले-लेकर रीना के उभार दबाये थे, वो छुअन रीना पहचान गयी थी—सुधा भाभी, जिन्होंने बत्ती जाने पर भी दुलारी के साथ खुलकर उसका जोबन मर्दन किया था।

जब जबरदस्ती दरोगा ने रीना को पकड़कर झुकाया, तो रीना ने दरोगा के पैरों में लगे सुहागिन औरतों वाले महावर को देख लिया और पायल भी चौड़ी सी, और बाकी पुलिस वाले भी उसी तरह थे; और उसने अंदाज लगा लिया था कि रमुआ बहू दरोगा बनी है।

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"अरे बता दो ना, नहीं तो दरोगा साहेब बहुत सख्त हैं, अपनी बहन-मह्तारी भी नहीं छोड़ते, तुम्हारे भैया की तरह,

" दुलारी ने झुकी हुई रीना को समझाया और पकड़कर खड़ा कर दिया।



"जो दरोगा जी मेरे साथ थीं, वो मीना थी और लीला और वो जो देखने में छोटी है लेकिन सेंध उसी ने लगाई थी—इमली।"

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रीना भी अब ऐक्टिंग कर रही थी और अपनी उम्र वाली सब लड़कियों को उसने लपेट लिया, "और असली सरदार वो हैं," दुलारी ने दूल्हे की माँ की ओर इशारा किया।



लेकिन दरोगा के मन में कुछ और चल रहा था, रीना से उसने पूछा,


"साली, अगर तू चुदी नहीं है, तो इतनी मोटी चूड़ी तेरे भोंसड़े से कैसे निकली?"

पुलिस कांस्टेबल बनी सुधा भाभी ने एक हाथ रीना के चूतड़ पे दिया और हड़काया, "चल बता सब लौंडों के नाम जो आजकल घर में हैं, जिनको झुक-झुककर जोबना दिखा-दिखाकर खिला रही थी।"

और रीना ने सब नाम एक साथ सुना दिए—"गप्पू भैया, बिट्टू भैया, रवि भैया, नंदू भैया, चंदू भैया..." पूरे दर्जन भर लड़कों का नाम रीनू ने सुना दिया।
"साली, एक-एक लड़के का नाम मालूम है और लंड का तुझे अकाल पड़ा है! चल बोल, किसका-किसका लंड घोंटेगी?"

दुलारी ने कान में बोला, "जल्दी से हाँ बोल दे, वरना और रगड़ाई होगी।"

रीना ने बोला, लेकिन कांस्टेबल ने एक-एक लड़के का नाम ले-लेकर रीना से कहलवाया और तीन-तीन बार जोर से।

और उसके बाद हमला दूल्हे की माँ पर हुआ।

और क्या न हुआ, दूल्हे की महतारी के साथ।
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तलाशी के नाम पर दरोगा बनी रमुआ बहू ने दूल्हे की माई की बुरिया में पूरी तीन ऊँगली घुसाई और सब भौजाई कने लगी, " अरे जब तीन तीन ऊँगली बिना तेल के जा रहा था तो हमरे देवर क लौंड़ा लेने में सासु जी काहें इतना छिनरपन कर रही हो "

" बोलो लेगी दूल्हे का गपागप, वरना पूरी मुट्ठी पेलूँगी अभी कोहनी तक ," रमुआ बहू बोली।

" अरे पेल दो, ....बचपन क छिनार हैं हमार ननद " बड़ी मामी बोलीं।


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अब दरोगा और सिपाहियों के बाकी औरतें लड़कियां भी आ गयी थी, दोनों सिपाहियों ने पकड़ के दूल्हे की माँ की टांग फैला रही थी।


मंजू भाभी साथ में अपनी ननदो, मीना, रूपा , रमा को लेकर बैठीं जो पहली बार ये सब देख रही थीं, मंजू भाभी और रामपुर वाली दोनों एक साथ अपनी सास से बोलीं

" अरे मान जाइये न, हमार देवर बहुत अच्छा है, बहुत प्यार से ठेलेगा, मजा आ जाएगा "

" अरे भौजी, माना पचासों मरद का घोंटा होगा, गदहा घोडा कुल लिया होगा लेकिन एक बार मेरे भतीजे का ले लीजिये न अंदर, सब को भूल जायेगीं "

चिढ़ाते, उकसाते नीतू ननद बोली जो सूरजु से मुश्किल से डेढ़ दो साल बड़ी थी और जिसके मरद का आज खूब मजे लेकर बड़की ठकुराईन ने दो बार घोंटा था

पूरे दस बार बड़की ठकुराइन से सब उनकी बहुओं, ननदों, भाभियों ने कबुलवाया तब जाकर मुन्ना बहू ने उँगलियाँ बाहर निकाली,



उसके बाद तो चार पांच स्वांग और हुए, फुलवा पर भूत चढ़ा और उसी के बहाने जितनी कुँवारी ननदियाँ चाहे गाँव की हो या शहर की सब की खुल के उस ने रगड़ाई की,

शीतल मौसी धोबन बन के आयी और वो तो खुल के आज मीना के पीछे पड़ी थी, पूनम और चननिया भी चुड़िहारिन और बिसाती बन के आयीं और भाभियों के साथ खूब मस्ती की।



आज तय हुआ था की गाना जल्दी खत्म हो, रात में ' और भी बहुत से काम ' थे लेकिन तब भी एक बज गया, धीरे धीरे सब लोग छत से उतर कर चले गए, आज इमरतिया के घर पर भी कुछ काम था तो वो भी चली गयी , मंजू भाभी, मुन्ना बहू और पूनम कोहबर की ओर चले गए, उसके पहले मंजू भाभी ने दूल्हे के कमरे का ताला खोल दिया था, छत के एक कोने पे लीला से बुच्ची कुछ खुसुर फुसुर कर रही थी और लीला खिलखिला रही थी, और सर हिला के हाँ हाँ का इशारा कर रही थी।



सूरजु की माई ने हल्के से खुले दरवाजे से अपने बेटे को देखा और उसकी छाती गज भर हो गई।

लेकिन वो जोर से मुस्करायीं,


" स्साला, इसकी बुआ को गदहे से चुदवाउ, हमी से नौटंकी।"
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"बोल, कितनों से चुदी है?"

"नहीं, नहीं, किसी से नहीं," रीना ने कबूला।



"तो इतना चौड़ा भोंसड़ा कैसे हो गया कि चोरी का सब माल अपने भोंसड़े में रखा है?" दरोगा चीखा, "चल, टाँगे फैला।"

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भाग 219 -- बुच्ची और लीला -दोनों ने लीला
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खेला चोर सिपाही का

३३,७४, ३६६
इमरतिया ने बोला था कि मटमंगरा में सब औरतें, लड़कियाँ सिर्फ साड़ी-ब्लाउज़ पहनकर आएंगी।

अब शहर वाली तो सब टॉप-स्कर्ट में थीं, और गाँव में भी आधी लड़कियाँ या तो फ्रॉक या शलवार-कुरता पहनती थीं, तो साड़ी-ब्लाउज़ कैसे?

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रमा, शीतल मौसी की लड़की, जो बम्बई से आयी थी और अंग्रेजी स्कूल में इंटर में पढ़ती थी, स्कर्ट-टॉप, तरह-तरह के ड्रेस और एक-दो शलवार-कुर्ती लायी थी, वही सबसे पहले चिल्लाई,


"अरे, साड़ी तो चलिए मम्मी, मौसी, मामी, भाभी किसी की ले लेंगे, लेकिन ब्लाउज़, वो भी मेरे नाप का कहाँ से मिलेगा?"



"अरे तो मत पहनना ब्लाउज़, बिन्नो, मेरे देवरों का भला हो जाएगा," मंजू भाभी ने अपनी ननद को चिढ़ाया।

"और तेरे भाइयों के साथ तेरी भाभी के भाइयों का भी; बस साड़ी उठायी, झलक दिखला दी, लौंडों को भी आराम। आँचल हटाया, मसल दिया।"

रामपुर वाली को तो हरदम अपने भाइयों के फायदे की चिंता रहती थी—गप्पू और उसके दोस्तों की, तो वो और जोर से खुश होकर बोलीं।

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लेकिन बड़ी ठकुराइन ने मामला सुलझा दिया, और बहुओं को डांटके बोलीं,

"तुम सब ना मेरी प्यारी-प्या प्यारी बेटियों को चिढ़ा रही हो। तुम सब अपने मायके में उघारे घूमती होगी? अरे, कल से दरजी लगेंगे, दुल्हन के और बाकी लोगों के कपड़े सिलने आएँगी दर्जिने, तो तुम सब भी अपने-अपने ब्लाउज़ सिलवा लेना, एकदम लेटेस्ट फैशन का, अपनी-अपनी नाप के कम से कम तीन-चार।"

लेकिन भाभियों का चिढ़ाना कम नहीं हो रहा था,


"अरे, दरजी का लड़का तो हमारी ननद का यार है। उसको जोबन का उभार, नाप सब याद है, बिना नाप लिए बना देगा। हाँ-हाँ, चूँची के लिए सिलवाई में गुलाबो ले लेगा ।"



और उसी झांय-झांय के बीच पीछे की ओर से पता नहीं कहाँ से एक पुलिस का दरोगा पूरी वर्दी में, मोटा तेल पिलाया डंडा लेकर और साथ में दो-तीन कांस्टेबल आ गए और जोर से बोले,

"हमको चोरी की रपट मिली है। बड़े महंगे गहने चोरी हुए हैं और खबर है कि चोर सब यहीं छिपे हैं। सब की तलाशी होगी।"

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सब औरतें-लड़कियाँ दुबककर बैठ गईं एक-दूसरे से चिपककर। जो लड़कियाँ गाँव में रतजगा देख चुकी थीं, उन्हें तो अंदाज था, लेकिन जो शहर से आयीं थीं, उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा था।

रीना दुलारी से चिपकके बैठी थी, सुधा भाभी कहीं निकल गयी थीं।

दरोगा गाली देकर बात कर रहा था, और बार-बार अपने हाथ का डंडा घुमाता, सबको हड़काता,

"जो चोर हो कबूल कर ले, वरना सबकी नंगा झोरी होगी। और जिसके पास से गहने पकड़े जाएंगे, जेल तो बाद में जाएगा, यहीं मार-मारके चूतड़ लाल कर दूंगा।"

उसके पुलिस वाले भी साथ-साथ घूम रहे थे—कभी किसी औरत को पकड़के उठा देते, उसके ब्लाउज़ में हाथ डाल देते और फिर बोलते,

"नहीं, कुछ नहीं मिला, ये सब छिनार जबरदस्त चोर हैं।"



तब तक एक कांस्टेबल की निगाह रीना पर पड़ी जो एकदम दुबकी दुलारी के पीछे छिपी थी, और उस कांस्टेबल ने कसके कलाई पकड़कर एक झटके में खड़ा किया।
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रीना सहमके खड़ी हो गयी, सर झुकाये, पैरों से जमीन खुरचते हुए। दरोगा ने उसकी ठुड्डी पकड़कर सर ऊपर किया और एक कांस्टेबल ने टॉर्च से उसके चेहरे पे रौशनी डाली और बोला,

"साहब, यही लगती है, यही बताया था। चेहरे से चुदवासी और छिनार लगती है और खूब गोरी है, जबरदस्त नमक है।"

"बोल साली, माल कहाँ रखा है? साली, गाँड़ में भी रखा होगा तो ये डंडा डालकर निकाल लूंगा, दे दे सीधे से," दरोगा ने हड़काया और एक सिपाही से बोला,

"अबे, ये छिनार ऐसे नहीं बोलेगी। इसके टॉप में हाथ डालकर देख, ये सब चोरनी बड़ी-बड़ी चूँची के बीच में ही सब रखती हैं।"



और एक सिपाही ने टॉप के अंदर हाथ डाल दिया, और मन भरकर जोबन दबाए-मसले।


बाकी के दो सिपाहियों ने रीना के हाथ कसकर पकड़ रखे थे। और जिसने टॉप में हाथ डाला था, उस सिपाही ने हाथ बाहर निकाला तो उसके हाथ में एक अंगूठी थी, जो पहले उसने दरोगा को दिखाया, फिर सब औरतों को।

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दरोगा ने स्कर्ट उठाकर उसके चूतड़ पर एक हाथ कसकर मारा और गरजा, "बोल, कितनों से चुदी है?"

"नहीं, नहीं, किसी से नहीं," रीना ने कबूला।



"तो इतना चौड़ा भोंसड़ा कैसे हो गया कि चोरी का सब माल अपने भोंसड़े में रखा है?" दरोगा चीखा, "चल, टाँगे फैला।"

और दरोगा ने अपना हाथ उस अंग्रेजी स्कूल वाली लड़की की स्कर्ट में डाल दिया। कुछ देर जाँघें सहलाईं, और एक फिर झटके में रीना की चुनमुनिया दबोच लिया, और सोचा



" साला, बड़ी किस्मत वाला होगा जो इसकी बुर चोदेगा। कैसे फूली-फूली फांकें हैं, एकदम चिपकी, कसी; साली लौंडे को दबोच लेगी।

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बड़की ठकुराइन सही कह रही थी, जब खुले खेत में इसे अहिराने वाले रगड़ेंगे ना और इसके चूतड़ से रगड़-रगड़कर ढेले टूटेंगे, तब इसकी चूत का पानी निकलेगा और फिर ये लंड की दीवानी हो जायेगी, खुद लौंडों के पीछे-पीछे भागेगी।"

"ये देख, मैं कह रही थी ना तेरी चूत नहीं भोंसड़ा है, देख क्या निकला!"

सबकी आँखें फटी रह गईं—एक बड़ी सी चूड़ी, बल्कि चूड़ा। पूरे पौने तीन इंच का व्यास होगा।



"ये तो साली चार बच्चों की माँ के भी भोंसड़े में नहीं आता, जरूर तू नम्बरी चुदक्कड़ है," दरोगा ने हड़काया।



तब तक एक सिपाही बोल पड़ा, "अरे, इस साली ने अपनी गाँड़ में भी छुपाया होगा चोरी का माल।"

"निहुर साली!" दरोगा गरजा, और जबरदस्ती पकड़कर झुका दिया,
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और उस सिपाही ने स्कर्ट उठा दिया। गोरे-गोरे, गोल-गोल, खूब भरे हुए चूतड़ एकदम मस्त लग रहे थे, बीच का कसा छेद एकदम दुबदुबा रहा था। सब भाभियों की निगाहें कुँवारी ननद के चिकने चूतड़ों पर और एकदम टाइट गाँड़ पे अटकी थीं।

"बोल, और कौन था चोरी में तेरे साथ? और इतनी बड़ी चोरी तू अकेले तो कर नहीं सकती," दरोगा ने ललकारा और अपनी बेंत रीना के पिछवाड़े के छेद पर सटाकर गरजा,

"साली, तेरी गाँड़ को तेरे भोंसड़े से भी चौड़ा कर दूंगा। ये दरोगा का डंडा है, गाँड़ में से जाएगा और मुंह में से निकलेगा। बोल साली, कौन थी तेरे साथ?"

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अब अपनी ननद को बचाने दुलारी आगे आयी—वही जिसने लाइट जाने पर, सुलाकी के आने पर रीना का टॉप उतरवाकर सुधा भाभी के साथ खुलकर गुब्बारों का मजा लिया था, और दरोगा जी से बोली,

"हुजूर के गोड़ पड़ती हूँ, हमको मार लीजिए। ये हमारी ननद गऊ है गऊ। ये तो खराब संगत में पड़कर... और चोरनी के साथ, और सबसे बड़ा तो चोर का सरदार है, बहुत बड़ी-बड़ी चोरी करता है।"

और तब तक रीना समझ गयी थी कि ये सब भाभियों की बदमाशी है, क्योंकि बजाय घबराने के सब भाभियाँ मुस्करा रही थीं; और यहाँ तक कि उसकी मम्मी भी, उनके चेहरे पे भी कोई परेशानी नहीं थी।

और जिस तरह से उस पुलिस वाले ने मजे ले-लेकर रीना के उभार दबाये थे, वो छुअन रीना पहचान गयी थी—सुधा भाभी, जिन्होंने बत्ती जाने पर भी दुलारी के साथ खुलकर उसका जोबन मर्दन किया था।

जब जबरदस्ती दरोगा ने रीना को पकड़कर झुकाया, तो रीना ने दरोगा के पैरों में लगे सुहागिन औरतों वाले महावर को देख लिया और पायल भी चौड़ी सी, और बाकी पुलिस वाले भी उसी तरह थे; और उसने अंदाज लगा लिया था कि रमुआ बहू दरोगा बनी है।

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"अरे बता दो ना, नहीं तो दरोगा साहेब बहुत सख्त हैं, अपनी बहन-मह्तारी भी नहीं छोड़ते, तुम्हारे भैया की तरह,

" दुलारी ने झुकी हुई रीना को समझाया और पकड़कर खड़ा कर दिया।



"जो दरोगा जी मेरे साथ थीं, वो मीना थी और लीला और वो जो देखने में छोटी है लेकिन सेंध उसी ने लगाई थी—इमली।"

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रीना भी अब ऐक्टिंग कर रही थी और अपनी उम्र वाली सब लड़कियों को उसने लपेट लिया, "और असली सरदार वो हैं," दुलारी ने दूल्हे की माँ की ओर इशारा किया।



लेकिन दरोगा के मन में कुछ और चल रहा था, रीना से उसने पूछा,


"साली, अगर तू चुदी नहीं है, तो इतनी मोटी चूड़ी तेरे भोंसड़े से कैसे निकली?"

पुलिस कांस्टेबल बनी सुधा भाभी ने एक हाथ रीना के चूतड़ पे दिया और हड़काया, "चल बता सब लौंडों के नाम जो आजकल घर में हैं, जिनको झुक-झुककर जोबना दिखा-दिखाकर खिला रही थी।"

और रीना ने सब नाम एक साथ सुना दिए—"गप्पू भैया, बिट्टू भैया, रवि भैया, नंदू भैया, चंदू भैया..." पूरे दर्जन भर लड़कों का नाम रीनू ने सुना दिया।
"साली, एक-एक लड़के का नाम मालूम है और लंड का तुझे अकाल पड़ा है! चल बोल, किसका-किसका लंड घोंटेगी?"

दुलारी ने कान में बोला, "जल्दी से हाँ बोल दे, वरना और रगड़ाई होगी।"

रीना ने बोला, लेकिन कांस्टेबल ने एक-एक लड़के का नाम ले-लेकर रीना से कहलवाया और तीन-तीन बार जोर से।

और उसके बाद हमला दूल्हे की माँ पर हुआ।

और क्या न हुआ, दूल्हे की महतारी के साथ।
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तलाशी के नाम पर दरोगा बनी रमुआ बहू ने दूल्हे की माई की बुरिया में पूरी तीन ऊँगली घुसाई और सब भौजाई कने लगी, " अरे जब तीन तीन ऊँगली बिना तेल के जा रहा था तो हमरे देवर क लौंड़ा लेने में सासु जी काहें इतना छिनरपन कर रही हो "

" बोलो लेगी दूल्हे का गपागप, वरना पूरी मुट्ठी पेलूँगी अभी कोहनी तक ," रमुआ बहू बोली।

" अरे पेल दो, ....बचपन क छिनार हैं हमार ननद " बड़ी मामी बोलीं।


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अब दरोगा और सिपाहियों के बाकी औरतें लड़कियां भी आ गयी थी, दोनों सिपाहियों ने पकड़ के दूल्हे की माँ की टांग फैला रही थी।


मंजू भाभी साथ में अपनी ननदो, मीना, रूपा , रमा को लेकर बैठीं जो पहली बार ये सब देख रही थीं, मंजू भाभी और रामपुर वाली दोनों एक साथ अपनी सास से बोलीं

" अरे मान जाइये न, हमार देवर बहुत अच्छा है, बहुत प्यार से ठेलेगा, मजा आ जाएगा "

" अरे भौजी, माना पचासों मरद का घोंटा होगा, गदहा घोडा कुल लिया होगा लेकिन एक बार मेरे भतीजे का ले लीजिये न अंदर, सब को भूल जायेगीं "

चिढ़ाते, उकसाते नीतू ननद बोली जो सूरजु से मुश्किल से डेढ़ दो साल बड़ी थी और जिसके मरद का आज खूब मजे लेकर बड़की ठकुराईन ने दो बार घोंटा था

पूरे दस बार बड़की ठकुराइन से सब उनकी बहुओं, ननदों, भाभियों ने कबुलवाया तब जाकर मुन्ना बहू ने उँगलियाँ बाहर निकाली,



उसके बाद तो चार पांच स्वांग और हुए, फुलवा पर भूत चढ़ा और उसी के बहाने जितनी कुँवारी ननदियाँ चाहे गाँव की हो या शहर की सब की खुल के उस ने रगड़ाई की,

शीतल मौसी धोबन बन के आयी और वो तो खुल के आज मीना के पीछे पड़ी थी, पूनम और चननिया भी चुड़िहारिन और बिसाती बन के आयीं और भाभियों के साथ खूब मस्ती की।



आज तय हुआ था की गाना जल्दी खत्म हो, रात में ' और भी बहुत से काम ' थे लेकिन तब भी एक बज गया, धीरे धीरे सब लोग छत से उतर कर चले गए, आज इमरतिया के घर पर भी कुछ काम था तो वो भी चली गयी , मंजू भाभी, मुन्ना बहू और पूनम कोहबर की ओर चले गए, उसके पहले मंजू भाभी ने दूल्हे के कमरे का ताला खोल दिया था, छत के एक कोने पे लीला से बुच्ची कुछ खुसुर फुसुर कर रही थी और लीला खिलखिला रही थी, और सर हिला के हाँ हाँ का इशारा कर रही थी।



सूरजु की माई ने हल्के से खुले दरवाजे से अपने बेटे को देखा और उसकी छाती गज भर हो गई।

लेकिन वो जोर से मुस्करायीं,


" स्साला, इसकी बुआ को गदहे से चुदवाउ, हमी से नौटंकी।"
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और जिस तरह से उस पुलिस वाले ने मजे ले-लेकर रीना के उभार दबाये थे, वो छुअन रीना पहचान गयी थी—सुधा भाभी, जिन्होंने बत्ती जाने पर भी दुलारी के साथ खुलकर उसका जोबन मर्दन किया था।

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छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

भाग 219 -- बुच्ची और लीला -दोनों ने लीला
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खेला चोर सिपाही का

३३,७४, ३६६
इमरतिया ने बोला था कि मटमंगरा में सब औरतें, लड़कियाँ सिर्फ साड़ी-ब्लाउज़ पहनकर आएंगी।

अब शहर वाली तो सब टॉप-स्कर्ट में थीं, और गाँव में भी आधी लड़कियाँ या तो फ्रॉक या शलवार-कुरता पहनती थीं, तो साड़ी-ब्लाउज़ कैसे?

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रमा, शीतल मौसी की लड़की, जो बम्बई से आयी थी और अंग्रेजी स्कूल में इंटर में पढ़ती थी, स्कर्ट-टॉप, तरह-तरह के ड्रेस और एक-दो शलवार-कुर्ती लायी थी, वही सबसे पहले चिल्लाई,


"अरे, साड़ी तो चलिए मम्मी, मौसी, मामी, भाभी किसी की ले लेंगे, लेकिन ब्लाउज़, वो भी मेरे नाप का कहाँ से मिलेगा?"



"अरे तो मत पहनना ब्लाउज़, बिन्नो, मेरे देवरों का भला हो जाएगा," मंजू भाभी ने अपनी ननद को चिढ़ाया।

"और तेरे भाइयों के साथ तेरी भाभी के भाइयों का भी; बस साड़ी उठायी, झलक दिखला दी, लौंडों को भी आराम। आँचल हटाया, मसल दिया।"

रामपुर वाली को तो हरदम अपने भाइयों के फायदे की चिंता रहती थी—गप्पू और उसके दोस्तों की, तो वो और जोर से खुश होकर बोलीं।

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लेकिन बड़ी ठकुराइन ने मामला सुलझा दिया, और बहुओं को डांटके बोलीं,

"तुम सब ना मेरी प्यारी-प्या प्यारी बेटियों को चिढ़ा रही हो। तुम सब अपने मायके में उघारे घूमती होगी? अरे, कल से दरजी लगेंगे, दुल्हन के और बाकी लोगों के कपड़े सिलने आएँगी दर्जिने, तो तुम सब भी अपने-अपने ब्लाउज़ सिलवा लेना, एकदम लेटेस्ट फैशन का, अपनी-अपनी नाप के कम से कम तीन-चार।"

लेकिन भाभियों का चिढ़ाना कम नहीं हो रहा था,


"अरे, दरजी का लड़का तो हमारी ननद का यार है। उसको जोबन का उभार, नाप सब याद है, बिना नाप लिए बना देगा। हाँ-हाँ, चूँची के लिए सिलवाई में गुलाबो ले लेगा ।"



और उसी झांय-झांय के बीच पीछे की ओर से पता नहीं कहाँ से एक पुलिस का दरोगा पूरी वर्दी में, मोटा तेल पिलाया डंडा लेकर और साथ में दो-तीन कांस्टेबल आ गए और जोर से बोले,

"हमको चोरी की रपट मिली है। बड़े महंगे गहने चोरी हुए हैं और खबर है कि चोर सब यहीं छिपे हैं। सब की तलाशी होगी।"

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सब औरतें-लड़कियाँ दुबककर बैठ गईं एक-दूसरे से चिपककर। जो लड़कियाँ गाँव में रतजगा देख चुकी थीं, उन्हें तो अंदाज था, लेकिन जो शहर से आयीं थीं, उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा था।

रीना दुलारी से चिपकके बैठी थी, सुधा भाभी कहीं निकल गयी थीं।

दरोगा गाली देकर बात कर रहा था, और बार-बार अपने हाथ का डंडा घुमाता, सबको हड़काता,

"जो चोर हो कबूल कर ले, वरना सबकी नंगा झोरी होगी। और जिसके पास से गहने पकड़े जाएंगे, जेल तो बाद में जाएगा, यहीं मार-मारके चूतड़ लाल कर दूंगा।"

उसके पुलिस वाले भी साथ-साथ घूम रहे थे—कभी किसी औरत को पकड़के उठा देते, उसके ब्लाउज़ में हाथ डाल देते और फिर बोलते,

"नहीं, कुछ नहीं मिला, ये सब छिनार जबरदस्त चोर हैं।"



तब तक एक कांस्टेबल की निगाह रीना पर पड़ी जो एकदम दुबकी दुलारी के पीछे छिपी थी, और उस कांस्टेबल ने कसके कलाई पकड़कर एक झटके में खड़ा किया।
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रीना सहमके खड़ी हो गयी, सर झुकाये, पैरों से जमीन खुरचते हुए। दरोगा ने उसकी ठुड्डी पकड़कर सर ऊपर किया और एक कांस्टेबल ने टॉर्च से उसके चेहरे पे रौशनी डाली और बोला,

"साहब, यही लगती है, यही बताया था। चेहरे से चुदवासी और छिनार लगती है और खूब गोरी है, जबरदस्त नमक है।"

"बोल साली, माल कहाँ रखा है? साली, गाँड़ में भी रखा होगा तो ये डंडा डालकर निकाल लूंगा, दे दे सीधे से," दरोगा ने हड़काया और एक सिपाही से बोला,

"अबे, ये छिनार ऐसे नहीं बोलेगी। इसके टॉप में हाथ डालकर देख, ये सब चोरनी बड़ी-बड़ी चूँची के बीच में ही सब रखती हैं।"



और एक सिपाही ने टॉप के अंदर हाथ डाल दिया, और मन भरकर जोबन दबाए-मसले।


बाकी के दो सिपाहियों ने रीना के हाथ कसकर पकड़ रखे थे। और जिसने टॉप में हाथ डाला था, उस सिपाही ने हाथ बाहर निकाला तो उसके हाथ में एक अंगूठी थी, जो पहले उसने दरोगा को दिखाया, फिर सब औरतों को।

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दरोगा ने स्कर्ट उठाकर उसके चूतड़ पर एक हाथ कसकर मारा और गरजा, "बोल, कितनों से चुदी है?"

"नहीं, नहीं, किसी से नहीं," रीना ने कबूला।



"तो इतना चौड़ा भोंसड़ा कैसे हो गया कि चोरी का सब माल अपने भोंसड़े में रखा है?" दरोगा चीखा, "चल, टाँगे फैला।"

और दरोगा ने अपना हाथ उस अंग्रेजी स्कूल वाली लड़की की स्कर्ट में डाल दिया। कुछ देर जाँघें सहलाईं, और एक फिर झटके में रीना की चुनमुनिया दबोच लिया, और सोचा



" साला, बड़ी किस्मत वाला होगा जो इसकी बुर चोदेगा। कैसे फूली-फूली फांकें हैं, एकदम चिपकी, कसी; साली लौंडे को दबोच लेगी।

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बड़की ठकुराइन सही कह रही थी, जब खुले खेत में इसे अहिराने वाले रगड़ेंगे ना और इसके चूतड़ से रगड़-रगड़कर ढेले टूटेंगे, तब इसकी चूत का पानी निकलेगा और फिर ये लंड की दीवानी हो जायेगी, खुद लौंडों के पीछे-पीछे भागेगी।"

"ये देख, मैं कह रही थी ना तेरी चूत नहीं भोंसड़ा है, देख क्या निकला!"

सबकी आँखें फटी रह गईं—एक बड़ी सी चूड़ी, बल्कि चूड़ा। पूरे पौने तीन इंच का व्यास होगा।



"ये तो साली चार बच्चों की माँ के भी भोंसड़े में नहीं आता, जरूर तू नम्बरी चुदक्कड़ है," दरोगा ने हड़काया।



तब तक एक सिपाही बोल पड़ा, "अरे, इस साली ने अपनी गाँड़ में भी छुपाया होगा चोरी का माल।"

"निहुर साली!" दरोगा गरजा, और जबरदस्ती पकड़कर झुका दिया,
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और उस सिपाही ने स्कर्ट उठा दिया। गोरे-गोरे, गोल-गोल, खूब भरे हुए चूतड़ एकदम मस्त लग रहे थे, बीच का कसा छेद एकदम दुबदुबा रहा था। सब भाभियों की निगाहें कुँवारी ननद के चिकने चूतड़ों पर और एकदम टाइट गाँड़ पे अटकी थीं।

"बोल, और कौन था चोरी में तेरे साथ? और इतनी बड़ी चोरी तू अकेले तो कर नहीं सकती," दरोगा ने ललकारा और अपनी बेंत रीना के पिछवाड़े के छेद पर सटाकर गरजा,

"साली, तेरी गाँड़ को तेरे भोंसड़े से भी चौड़ा कर दूंगा। ये दरोगा का डंडा है, गाँड़ में से जाएगा और मुंह में से निकलेगा। बोल साली, कौन थी तेरे साथ?"

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अब अपनी ननद को बचाने दुलारी आगे आयी—वही जिसने लाइट जाने पर, सुलाकी के आने पर रीना का टॉप उतरवाकर सुधा भाभी के साथ खुलकर गुब्बारों का मजा लिया था, और दरोगा जी से बोली,

"हुजूर के गोड़ पड़ती हूँ, हमको मार लीजिए। ये हमारी ननद गऊ है गऊ। ये तो खराब संगत में पड़कर... और चोरनी के साथ, और सबसे बड़ा तो चोर का सरदार है, बहुत बड़ी-बड़ी चोरी करता है।"

और तब तक रीना समझ गयी थी कि ये सब भाभियों की बदमाशी है, क्योंकि बजाय घबराने के सब भाभियाँ मुस्करा रही थीं; और यहाँ तक कि उसकी मम्मी भी, उनके चेहरे पे भी कोई परेशानी नहीं थी।

और जिस तरह से उस पुलिस वाले ने मजे ले-लेकर रीना के उभार दबाये थे, वो छुअन रीना पहचान गयी थी—सुधा भाभी, जिन्होंने बत्ती जाने पर भी दुलारी के साथ खुलकर उसका जोबन मर्दन किया था।

जब जबरदस्ती दरोगा ने रीना को पकड़कर झुकाया, तो रीना ने दरोगा के पैरों में लगे सुहागिन औरतों वाले महावर को देख लिया और पायल भी चौड़ी सी, और बाकी पुलिस वाले भी उसी तरह थे; और उसने अंदाज लगा लिया था कि रमुआ बहू दरोगा बनी है।

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"अरे बता दो ना, नहीं तो दरोगा साहेब बहुत सख्त हैं, अपनी बहन-मह्तारी भी नहीं छोड़ते, तुम्हारे भैया की तरह,

" दुलारी ने झुकी हुई रीना को समझाया और पकड़कर खड़ा कर दिया।



"जो दरोगा जी मेरे साथ थीं, वो मीना थी और लीला और वो जो देखने में छोटी है लेकिन सेंध उसी ने लगाई थी—इमली।"

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रीना भी अब ऐक्टिंग कर रही थी और अपनी उम्र वाली सब लड़कियों को उसने लपेट लिया, "और असली सरदार वो हैं," दुलारी ने दूल्हे की माँ की ओर इशारा किया।



लेकिन दरोगा के मन में कुछ और चल रहा था, रीना से उसने पूछा,


"साली, अगर तू चुदी नहीं है, तो इतनी मोटी चूड़ी तेरे भोंसड़े से कैसे निकली?"

पुलिस कांस्टेबल बनी सुधा भाभी ने एक हाथ रीना के चूतड़ पे दिया और हड़काया, "चल बता सब लौंडों के नाम जो आजकल घर में हैं, जिनको झुक-झुककर जोबना दिखा-दिखाकर खिला रही थी।"

और रीना ने सब नाम एक साथ सुना दिए—"गप्पू भैया, बिट्टू भैया, रवि भैया, नंदू भैया, चंदू भैया..." पूरे दर्जन भर लड़कों का नाम रीनू ने सुना दिया।
"साली, एक-एक लड़के का नाम मालूम है और लंड का तुझे अकाल पड़ा है! चल बोल, किसका-किसका लंड घोंटेगी?"

दुलारी ने कान में बोला, "जल्दी से हाँ बोल दे, वरना और रगड़ाई होगी।"

रीना ने बोला, लेकिन कांस्टेबल ने एक-एक लड़के का नाम ले-लेकर रीना से कहलवाया और तीन-तीन बार जोर से।

और उसके बाद हमला दूल्हे की माँ पर हुआ।

और क्या न हुआ, दूल्हे की महतारी के साथ।
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तलाशी के नाम पर दरोगा बनी रमुआ बहू ने दूल्हे की माई की बुरिया में पूरी तीन ऊँगली घुसाई और सब भौजाई कने लगी, " अरे जब तीन तीन ऊँगली बिना तेल के जा रहा था तो हमरे देवर क लौंड़ा लेने में सासु जी काहें इतना छिनरपन कर रही हो "

" बोलो लेगी दूल्हे का गपागप, वरना पूरी मुट्ठी पेलूँगी अभी कोहनी तक ," रमुआ बहू बोली।

" अरे पेल दो, ....बचपन क छिनार हैं हमार ननद " बड़ी मामी बोलीं।


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अब दरोगा और सिपाहियों के बाकी औरतें लड़कियां भी आ गयी थी, दोनों सिपाहियों ने पकड़ के दूल्हे की माँ की टांग फैला रही थी।


मंजू भाभी साथ में अपनी ननदो, मीना, रूपा , रमा को लेकर बैठीं जो पहली बार ये सब देख रही थीं, मंजू भाभी और रामपुर वाली दोनों एक साथ अपनी सास से बोलीं

" अरे मान जाइये न, हमार देवर बहुत अच्छा है, बहुत प्यार से ठेलेगा, मजा आ जाएगा "

" अरे भौजी, माना पचासों मरद का घोंटा होगा, गदहा घोडा कुल लिया होगा लेकिन एक बार मेरे भतीजे का ले लीजिये न अंदर, सब को भूल जायेगीं "

चिढ़ाते, उकसाते नीतू ननद बोली जो सूरजु से मुश्किल से डेढ़ दो साल बड़ी थी और जिसके मरद का आज खूब मजे लेकर बड़की ठकुराईन ने दो बार घोंटा था

पूरे दस बार बड़की ठकुराइन से सब उनकी बहुओं, ननदों, भाभियों ने कबुलवाया तब जाकर मुन्ना बहू ने उँगलियाँ बाहर निकाली,



उसके बाद तो चार पांच स्वांग और हुए, फुलवा पर भूत चढ़ा और उसी के बहाने जितनी कुँवारी ननदियाँ चाहे गाँव की हो या शहर की सब की खुल के उस ने रगड़ाई की,

शीतल मौसी धोबन बन के आयी और वो तो खुल के आज मीना के पीछे पड़ी थी, पूनम और चननिया भी चुड़िहारिन और बिसाती बन के आयीं और भाभियों के साथ खूब मस्ती की।



आज तय हुआ था की गाना जल्दी खत्म हो, रात में ' और भी बहुत से काम ' थे लेकिन तब भी एक बज गया, धीरे धीरे सब लोग छत से उतर कर चले गए, आज इमरतिया के घर पर भी कुछ काम था तो वो भी चली गयी , मंजू भाभी, मुन्ना बहू और पूनम कोहबर की ओर चले गए, उसके पहले मंजू भाभी ने दूल्हे के कमरे का ताला खोल दिया था, छत के एक कोने पे लीला से बुच्ची कुछ खुसुर फुसुर कर रही थी और लीला खिलखिला रही थी, और सर हिला के हाँ हाँ का इशारा कर रही थी।



सूरजु की माई ने हल्के से खुले दरवाजे से अपने बेटे को देखा और उसकी छाती गज भर हो गई।

लेकिन वो जोर से मुस्करायीं,


" स्साला, इसकी बुआ को गदहे से चुदवाउ, हमी से नौटंकी।"
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छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

भाग 219 -- बुच्ची और लीला -दोनों ने लीला
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खेला चोर सिपाही का

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इमरतिया ने बोला था कि मटमंगरा में सब औरतें, लड़कियाँ सिर्फ साड़ी-ब्लाउज़ पहनकर आएंगी।

अब शहर वाली तो सब टॉप-स्कर्ट में थीं, और गाँव में भी आधी लड़कियाँ या तो फ्रॉक या शलवार-कुरता पहनती थीं, तो साड़ी-ब्लाउज़ कैसे?

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रमा, शीतल मौसी की लड़की, जो बम्बई से आयी थी और अंग्रेजी स्कूल में इंटर में पढ़ती थी, स्कर्ट-टॉप, तरह-तरह के ड्रेस और एक-दो शलवार-कुर्ती लायी थी, वही सबसे पहले चिल्लाई,


"अरे, साड़ी तो चलिए मम्मी, मौसी, मामी, भाभी किसी की ले लेंगे, लेकिन ब्लाउज़, वो भी मेरे नाप का कहाँ से मिलेगा?"



"अरे तो मत पहनना ब्लाउज़, बिन्नो, मेरे देवरों का भला हो जाएगा," मंजू भाभी ने अपनी ननद को चिढ़ाया।

"और तेरे भाइयों के साथ तेरी भाभी के भाइयों का भी; बस साड़ी उठायी, झलक दिखला दी, लौंडों को भी आराम। आँचल हटाया, मसल दिया।"

रामपुर वाली को तो हरदम अपने भाइयों के फायदे की चिंता रहती थी—गप्पू और उसके दोस्तों की, तो वो और जोर से खुश होकर बोलीं।

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लेकिन बड़ी ठकुराइन ने मामला सुलझा दिया, और बहुओं को डांटके बोलीं,

"तुम सब ना मेरी प्यारी-प्या प्यारी बेटियों को चिढ़ा रही हो। तुम सब अपने मायके में उघारे घूमती होगी? अरे, कल से दरजी लगेंगे, दुल्हन के और बाकी लोगों के कपड़े सिलने आएँगी दर्जिने, तो तुम सब भी अपने-अपने ब्लाउज़ सिलवा लेना, एकदम लेटेस्ट फैशन का, अपनी-अपनी नाप के कम से कम तीन-चार।"

लेकिन भाभियों का चिढ़ाना कम नहीं हो रहा था,


"अरे, दरजी का लड़का तो हमारी ननद का यार है। उसको जोबन का उभार, नाप सब याद है, बिना नाप लिए बना देगा। हाँ-हाँ, चूँची के लिए सिलवाई में गुलाबो ले लेगा ।"



और उसी झांय-झांय के बीच पीछे की ओर से पता नहीं कहाँ से एक पुलिस का दरोगा पूरी वर्दी में, मोटा तेल पिलाया डंडा लेकर और साथ में दो-तीन कांस्टेबल आ गए और जोर से बोले,

"हमको चोरी की रपट मिली है। बड़े महंगे गहने चोरी हुए हैं और खबर है कि चोर सब यहीं छिपे हैं। सब की तलाशी होगी।"

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सब औरतें-लड़कियाँ दुबककर बैठ गईं एक-दूसरे से चिपककर। जो लड़कियाँ गाँव में रतजगा देख चुकी थीं, उन्हें तो अंदाज था, लेकिन जो शहर से आयीं थीं, उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा था।

रीना दुलारी से चिपकके बैठी थी, सुधा भाभी कहीं निकल गयी थीं।

दरोगा गाली देकर बात कर रहा था, और बार-बार अपने हाथ का डंडा घुमाता, सबको हड़काता,

"जो चोर हो कबूल कर ले, वरना सबकी नंगा झोरी होगी। और जिसके पास से गहने पकड़े जाएंगे, जेल तो बाद में जाएगा, यहीं मार-मारके चूतड़ लाल कर दूंगा।"

उसके पुलिस वाले भी साथ-साथ घूम रहे थे—कभी किसी औरत को पकड़के उठा देते, उसके ब्लाउज़ में हाथ डाल देते और फिर बोलते,

"नहीं, कुछ नहीं मिला, ये सब छिनार जबरदस्त चोर हैं।"



तब तक एक कांस्टेबल की निगाह रीना पर पड़ी जो एकदम दुबकी दुलारी के पीछे छिपी थी, और उस कांस्टेबल ने कसके कलाई पकड़कर एक झटके में खड़ा किया।
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रीना सहमके खड़ी हो गयी, सर झुकाये, पैरों से जमीन खुरचते हुए। दरोगा ने उसकी ठुड्डी पकड़कर सर ऊपर किया और एक कांस्टेबल ने टॉर्च से उसके चेहरे पे रौशनी डाली और बोला,

"साहब, यही लगती है, यही बताया था। चेहरे से चुदवासी और छिनार लगती है और खूब गोरी है, जबरदस्त नमक है।"

"बोल साली, माल कहाँ रखा है? साली, गाँड़ में भी रखा होगा तो ये डंडा डालकर निकाल लूंगा, दे दे सीधे से," दरोगा ने हड़काया और एक सिपाही से बोला,

"अबे, ये छिनार ऐसे नहीं बोलेगी। इसके टॉप में हाथ डालकर देख, ये सब चोरनी बड़ी-बड़ी चूँची के बीच में ही सब रखती हैं।"



और एक सिपाही ने टॉप के अंदर हाथ डाल दिया, और मन भरकर जोबन दबाए-मसले।


बाकी के दो सिपाहियों ने रीना के हाथ कसकर पकड़ रखे थे। और जिसने टॉप में हाथ डाला था, उस सिपाही ने हाथ बाहर निकाला तो उसके हाथ में एक अंगूठी थी, जो पहले उसने दरोगा को दिखाया, फिर सब औरतों को।

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दरोगा ने स्कर्ट उठाकर उसके चूतड़ पर एक हाथ कसकर मारा और गरजा, "बोल, कितनों से चुदी है?"

"नहीं, नहीं, किसी से नहीं," रीना ने कबूला।



"तो इतना चौड़ा भोंसड़ा कैसे हो गया कि चोरी का सब माल अपने भोंसड़े में रखा है?" दरोगा चीखा, "चल, टाँगे फैला।"

और दरोगा ने अपना हाथ उस अंग्रेजी स्कूल वाली लड़की की स्कर्ट में डाल दिया। कुछ देर जाँघें सहलाईं, और एक फिर झटके में रीना की चुनमुनिया दबोच लिया, और सोचा



" साला, बड़ी किस्मत वाला होगा जो इसकी बुर चोदेगा। कैसे फूली-फूली फांकें हैं, एकदम चिपकी, कसी; साली लौंडे को दबोच लेगी।

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बड़की ठकुराइन सही कह रही थी, जब खुले खेत में इसे अहिराने वाले रगड़ेंगे ना और इसके चूतड़ से रगड़-रगड़कर ढेले टूटेंगे, तब इसकी चूत का पानी निकलेगा और फिर ये लंड की दीवानी हो जायेगी, खुद लौंडों के पीछे-पीछे भागेगी।"

"ये देख, मैं कह रही थी ना तेरी चूत नहीं भोंसड़ा है, देख क्या निकला!"

सबकी आँखें फटी रह गईं—एक बड़ी सी चूड़ी, बल्कि चूड़ा। पूरे पौने तीन इंच का व्यास होगा।



"ये तो साली चार बच्चों की माँ के भी भोंसड़े में नहीं आता, जरूर तू नम्बरी चुदक्कड़ है," दरोगा ने हड़काया।



तब तक एक सिपाही बोल पड़ा, "अरे, इस साली ने अपनी गाँड़ में भी छुपाया होगा चोरी का माल।"

"निहुर साली!" दरोगा गरजा, और जबरदस्ती पकड़कर झुका दिया,
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और उस सिपाही ने स्कर्ट उठा दिया। गोरे-गोरे, गोल-गोल, खूब भरे हुए चूतड़ एकदम मस्त लग रहे थे, बीच का कसा छेद एकदम दुबदुबा रहा था। सब भाभियों की निगाहें कुँवारी ननद के चिकने चूतड़ों पर और एकदम टाइट गाँड़ पे अटकी थीं।

"बोल, और कौन था चोरी में तेरे साथ? और इतनी बड़ी चोरी तू अकेले तो कर नहीं सकती," दरोगा ने ललकारा और अपनी बेंत रीना के पिछवाड़े के छेद पर सटाकर गरजा,

"साली, तेरी गाँड़ को तेरे भोंसड़े से भी चौड़ा कर दूंगा। ये दरोगा का डंडा है, गाँड़ में से जाएगा और मुंह में से निकलेगा। बोल साली, कौन थी तेरे साथ?"

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अब अपनी ननद को बचाने दुलारी आगे आयी—वही जिसने लाइट जाने पर, सुलाकी के आने पर रीना का टॉप उतरवाकर सुधा भाभी के साथ खुलकर गुब्बारों का मजा लिया था, और दरोगा जी से बोली,

"हुजूर के गोड़ पड़ती हूँ, हमको मार लीजिए। ये हमारी ननद गऊ है गऊ। ये तो खराब संगत में पड़कर... और चोरनी के साथ, और सबसे बड़ा तो चोर का सरदार है, बहुत बड़ी-बड़ी चोरी करता है।"

और तब तक रीना समझ गयी थी कि ये सब भाभियों की बदमाशी है, क्योंकि बजाय घबराने के सब भाभियाँ मुस्करा रही थीं; और यहाँ तक कि उसकी मम्मी भी, उनके चेहरे पे भी कोई परेशानी नहीं थी।

और जिस तरह से उस पुलिस वाले ने मजे ले-लेकर रीना के उभार दबाये थे, वो छुअन रीना पहचान गयी थी—सुधा भाभी, जिन्होंने बत्ती जाने पर भी दुलारी के साथ खुलकर उसका जोबन मर्दन किया था।

जब जबरदस्ती दरोगा ने रीना को पकड़कर झुकाया, तो रीना ने दरोगा के पैरों में लगे सुहागिन औरतों वाले महावर को देख लिया और पायल भी चौड़ी सी, और बाकी पुलिस वाले भी उसी तरह थे; और उसने अंदाज लगा लिया था कि रमुआ बहू दरोगा बनी है।

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"अरे बता दो ना, नहीं तो दरोगा साहेब बहुत सख्त हैं, अपनी बहन-मह्तारी भी नहीं छोड़ते, तुम्हारे भैया की तरह,

" दुलारी ने झुकी हुई रीना को समझाया और पकड़कर खड़ा कर दिया।



"जो दरोगा जी मेरे साथ थीं, वो मीना थी और लीला और वो जो देखने में छोटी है लेकिन सेंध उसी ने लगाई थी—इमली।"

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रीना भी अब ऐक्टिंग कर रही थी और अपनी उम्र वाली सब लड़कियों को उसने लपेट लिया, "और असली सरदार वो हैं," दुलारी ने दूल्हे की माँ की ओर इशारा किया।



लेकिन दरोगा के मन में कुछ और चल रहा था, रीना से उसने पूछा,


"साली, अगर तू चुदी नहीं है, तो इतनी मोटी चूड़ी तेरे भोंसड़े से कैसे निकली?"

पुलिस कांस्टेबल बनी सुधा भाभी ने एक हाथ रीना के चूतड़ पे दिया और हड़काया, "चल बता सब लौंडों के नाम जो आजकल घर में हैं, जिनको झुक-झुककर जोबना दिखा-दिखाकर खिला रही थी।"

और रीना ने सब नाम एक साथ सुना दिए—"गप्पू भैया, बिट्टू भैया, रवि भैया, नंदू भैया, चंदू भैया..." पूरे दर्जन भर लड़कों का नाम रीनू ने सुना दिया।
"साली, एक-एक लड़के का नाम मालूम है और लंड का तुझे अकाल पड़ा है! चल बोल, किसका-किसका लंड घोंटेगी?"

दुलारी ने कान में बोला, "जल्दी से हाँ बोल दे, वरना और रगड़ाई होगी।"

रीना ने बोला, लेकिन कांस्टेबल ने एक-एक लड़के का नाम ले-लेकर रीना से कहलवाया और तीन-तीन बार जोर से।

और उसके बाद हमला दूल्हे की माँ पर हुआ।

और क्या न हुआ, दूल्हे की महतारी के साथ।
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तलाशी के नाम पर दरोगा बनी रमुआ बहू ने दूल्हे की माई की बुरिया में पूरी तीन ऊँगली घुसाई और सब भौजाई कने लगी, " अरे जब तीन तीन ऊँगली बिना तेल के जा रहा था तो हमरे देवर क लौंड़ा लेने में सासु जी काहें इतना छिनरपन कर रही हो "

" बोलो लेगी दूल्हे का गपागप, वरना पूरी मुट्ठी पेलूँगी अभी कोहनी तक ," रमुआ बहू बोली।

" अरे पेल दो, ....बचपन क छिनार हैं हमार ननद " बड़ी मामी बोलीं।


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अब दरोगा और सिपाहियों के बाकी औरतें लड़कियां भी आ गयी थी, दोनों सिपाहियों ने पकड़ के दूल्हे की माँ की टांग फैला रही थी।


मंजू भाभी साथ में अपनी ननदो, मीना, रूपा , रमा को लेकर बैठीं जो पहली बार ये सब देख रही थीं, मंजू भाभी और रामपुर वाली दोनों एक साथ अपनी सास से बोलीं

" अरे मान जाइये न, हमार देवर बहुत अच्छा है, बहुत प्यार से ठेलेगा, मजा आ जाएगा "

" अरे भौजी, माना पचासों मरद का घोंटा होगा, गदहा घोडा कुल लिया होगा लेकिन एक बार मेरे भतीजे का ले लीजिये न अंदर, सब को भूल जायेगीं "

चिढ़ाते, उकसाते नीतू ननद बोली जो सूरजु से मुश्किल से डेढ़ दो साल बड़ी थी और जिसके मरद का आज खूब मजे लेकर बड़की ठकुराईन ने दो बार घोंटा था

पूरे दस बार बड़की ठकुराइन से सब उनकी बहुओं, ननदों, भाभियों ने कबुलवाया तब जाकर मुन्ना बहू ने उँगलियाँ बाहर निकाली,



उसके बाद तो चार पांच स्वांग और हुए, फुलवा पर भूत चढ़ा और उसी के बहाने जितनी कुँवारी ननदियाँ चाहे गाँव की हो या शहर की सब की खुल के उस ने रगड़ाई की,

शीतल मौसी धोबन बन के आयी और वो तो खुल के आज मीना के पीछे पड़ी थी, पूनम और चननिया भी चुड़िहारिन और बिसाती बन के आयीं और भाभियों के साथ खूब मस्ती की।



आज तय हुआ था की गाना जल्दी खत्म हो, रात में ' और भी बहुत से काम ' थे लेकिन तब भी एक बज गया, धीरे धीरे सब लोग छत से उतर कर चले गए, आज इमरतिया के घर पर भी कुछ काम था तो वो भी चली गयी , मंजू भाभी, मुन्ना बहू और पूनम कोहबर की ओर चले गए, उसके पहले मंजू भाभी ने दूल्हे के कमरे का ताला खोल दिया था, छत के एक कोने पे लीला से बुच्ची कुछ खुसुर फुसुर कर रही थी और लीला खिलखिला रही थी, और सर हिला के हाँ हाँ का इशारा कर रही थी।



सूरजु की माई ने हल्के से खुले दरवाजे से अपने बेटे को देखा और उसकी छाती गज भर हो गई।

लेकिन वो जोर से मुस्करायीं,


" स्साला, इसकी बुआ को गदहे से चुदवाउ, हमी से नौटंकी।"
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और जिस तरह से उस पुलिस वाले ने मजे ले-लेकर रीना के उभार दबाये थे, वो छुअन रीना पहचान गयी थी—सुधा भाभी, जिन्होंने बत्ती जाने पर भी दुलारी के साथ खुलकर उसका जोबन मर्दन किया था।

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छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

भाग 219 -- बुच्ची और लीला -दोनों ने लीला
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खेला चोर सिपाही का

३३,७४, ३६६
इमरतिया ने बोला था कि मटमंगरा में सब औरतें, लड़कियाँ सिर्फ साड़ी-ब्लाउज़ पहनकर आएंगी।

अब शहर वाली तो सब टॉप-स्कर्ट में थीं, और गाँव में भी आधी लड़कियाँ या तो फ्रॉक या शलवार-कुरता पहनती थीं, तो साड़ी-ब्लाउज़ कैसे?

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रमा, शीतल मौसी की लड़की, जो बम्बई से आयी थी और अंग्रेजी स्कूल में इंटर में पढ़ती थी, स्कर्ट-टॉप, तरह-तरह के ड्रेस और एक-दो शलवार-कुर्ती लायी थी, वही सबसे पहले चिल्लाई,


"अरे, साड़ी तो चलिए मम्मी, मौसी, मामी, भाभी किसी की ले लेंगे, लेकिन ब्लाउज़, वो भी मेरे नाप का कहाँ से मिलेगा?"



"अरे तो मत पहनना ब्लाउज़, बिन्नो, मेरे देवरों का भला हो जाएगा," मंजू भाभी ने अपनी ननद को चिढ़ाया।

"और तेरे भाइयों के साथ तेरी भाभी के भाइयों का भी; बस साड़ी उठायी, झलक दिखला दी, लौंडों को भी आराम। आँचल हटाया, मसल दिया।"

रामपुर वाली को तो हरदम अपने भाइयों के फायदे की चिंता रहती थी—गप्पू और उसके दोस्तों की, तो वो और जोर से खुश होकर बोलीं।

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लेकिन बड़ी ठकुराइन ने मामला सुलझा दिया, और बहुओं को डांटके बोलीं,

"तुम सब ना मेरी प्यारी-प्या प्यारी बेटियों को चिढ़ा रही हो। तुम सब अपने मायके में उघारे घूमती होगी? अरे, कल से दरजी लगेंगे, दुल्हन के और बाकी लोगों के कपड़े सिलने आएँगी दर्जिने, तो तुम सब भी अपने-अपने ब्लाउज़ सिलवा लेना, एकदम लेटेस्ट फैशन का, अपनी-अपनी नाप के कम से कम तीन-चार।"

लेकिन भाभियों का चिढ़ाना कम नहीं हो रहा था,


"अरे, दरजी का लड़का तो हमारी ननद का यार है। उसको जोबन का उभार, नाप सब याद है, बिना नाप लिए बना देगा। हाँ-हाँ, चूँची के लिए सिलवाई में गुलाबो ले लेगा ।"



और उसी झांय-झांय के बीच पीछे की ओर से पता नहीं कहाँ से एक पुलिस का दरोगा पूरी वर्दी में, मोटा तेल पिलाया डंडा लेकर और साथ में दो-तीन कांस्टेबल आ गए और जोर से बोले,

"हमको चोरी की रपट मिली है। बड़े महंगे गहने चोरी हुए हैं और खबर है कि चोर सब यहीं छिपे हैं। सब की तलाशी होगी।"

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सब औरतें-लड़कियाँ दुबककर बैठ गईं एक-दूसरे से चिपककर। जो लड़कियाँ गाँव में रतजगा देख चुकी थीं, उन्हें तो अंदाज था, लेकिन जो शहर से आयीं थीं, उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा था।

रीना दुलारी से चिपकके बैठी थी, सुधा भाभी कहीं निकल गयी थीं।

दरोगा गाली देकर बात कर रहा था, और बार-बार अपने हाथ का डंडा घुमाता, सबको हड़काता,

"जो चोर हो कबूल कर ले, वरना सबकी नंगा झोरी होगी। और जिसके पास से गहने पकड़े जाएंगे, जेल तो बाद में जाएगा, यहीं मार-मारके चूतड़ लाल कर दूंगा।"

उसके पुलिस वाले भी साथ-साथ घूम रहे थे—कभी किसी औरत को पकड़के उठा देते, उसके ब्लाउज़ में हाथ डाल देते और फिर बोलते,

"नहीं, कुछ नहीं मिला, ये सब छिनार जबरदस्त चोर हैं।"



तब तक एक कांस्टेबल की निगाह रीना पर पड़ी जो एकदम दुबकी दुलारी के पीछे छिपी थी, और उस कांस्टेबल ने कसके कलाई पकड़कर एक झटके में खड़ा किया।
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रीना सहमके खड़ी हो गयी, सर झुकाये, पैरों से जमीन खुरचते हुए। दरोगा ने उसकी ठुड्डी पकड़कर सर ऊपर किया और एक कांस्टेबल ने टॉर्च से उसके चेहरे पे रौशनी डाली और बोला,

"साहब, यही लगती है, यही बताया था। चेहरे से चुदवासी और छिनार लगती है और खूब गोरी है, जबरदस्त नमक है।"

"बोल साली, माल कहाँ रखा है? साली, गाँड़ में भी रखा होगा तो ये डंडा डालकर निकाल लूंगा, दे दे सीधे से," दरोगा ने हड़काया और एक सिपाही से बोला,

"अबे, ये छिनार ऐसे नहीं बोलेगी। इसके टॉप में हाथ डालकर देख, ये सब चोरनी बड़ी-बड़ी चूँची के बीच में ही सब रखती हैं।"



और एक सिपाही ने टॉप के अंदर हाथ डाल दिया, और मन भरकर जोबन दबाए-मसले।


बाकी के दो सिपाहियों ने रीना के हाथ कसकर पकड़ रखे थे। और जिसने टॉप में हाथ डाला था, उस सिपाही ने हाथ बाहर निकाला तो उसके हाथ में एक अंगूठी थी, जो पहले उसने दरोगा को दिखाया, फिर सब औरतों को।

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दरोगा ने स्कर्ट उठाकर उसके चूतड़ पर एक हाथ कसकर मारा और गरजा, "बोल, कितनों से चुदी है?"

"नहीं, नहीं, किसी से नहीं," रीना ने कबूला।



"तो इतना चौड़ा भोंसड़ा कैसे हो गया कि चोरी का सब माल अपने भोंसड़े में रखा है?" दरोगा चीखा, "चल, टाँगे फैला।"

और दरोगा ने अपना हाथ उस अंग्रेजी स्कूल वाली लड़की की स्कर्ट में डाल दिया। कुछ देर जाँघें सहलाईं, और एक फिर झटके में रीना की चुनमुनिया दबोच लिया, और सोचा



" साला, बड़ी किस्मत वाला होगा जो इसकी बुर चोदेगा। कैसे फूली-फूली फांकें हैं, एकदम चिपकी, कसी; साली लौंडे को दबोच लेगी।

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बड़की ठकुराइन सही कह रही थी, जब खुले खेत में इसे अहिराने वाले रगड़ेंगे ना और इसके चूतड़ से रगड़-रगड़कर ढेले टूटेंगे, तब इसकी चूत का पानी निकलेगा और फिर ये लंड की दीवानी हो जायेगी, खुद लौंडों के पीछे-पीछे भागेगी।"

"ये देख, मैं कह रही थी ना तेरी चूत नहीं भोंसड़ा है, देख क्या निकला!"

सबकी आँखें फटी रह गईं—एक बड़ी सी चूड़ी, बल्कि चूड़ा। पूरे पौने तीन इंच का व्यास होगा।



"ये तो साली चार बच्चों की माँ के भी भोंसड़े में नहीं आता, जरूर तू नम्बरी चुदक्कड़ है," दरोगा ने हड़काया।



तब तक एक सिपाही बोल पड़ा, "अरे, इस साली ने अपनी गाँड़ में भी छुपाया होगा चोरी का माल।"

"निहुर साली!" दरोगा गरजा, और जबरदस्ती पकड़कर झुका दिया,
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और उस सिपाही ने स्कर्ट उठा दिया। गोरे-गोरे, गोल-गोल, खूब भरे हुए चूतड़ एकदम मस्त लग रहे थे, बीच का कसा छेद एकदम दुबदुबा रहा था। सब भाभियों की निगाहें कुँवारी ननद के चिकने चूतड़ों पर और एकदम टाइट गाँड़ पे अटकी थीं।

"बोल, और कौन था चोरी में तेरे साथ? और इतनी बड़ी चोरी तू अकेले तो कर नहीं सकती," दरोगा ने ललकारा और अपनी बेंत रीना के पिछवाड़े के छेद पर सटाकर गरजा,

"साली, तेरी गाँड़ को तेरे भोंसड़े से भी चौड़ा कर दूंगा। ये दरोगा का डंडा है, गाँड़ में से जाएगा और मुंह में से निकलेगा। बोल साली, कौन थी तेरे साथ?"

A-photorealistic-cinematic-sho.jpg


अब अपनी ननद को बचाने दुलारी आगे आयी—वही जिसने लाइट जाने पर, सुलाकी के आने पर रीना का टॉप उतरवाकर सुधा भाभी के साथ खुलकर गुब्बारों का मजा लिया था, और दरोगा जी से बोली,

"हुजूर के गोड़ पड़ती हूँ, हमको मार लीजिए। ये हमारी ननद गऊ है गऊ। ये तो खराब संगत में पड़कर... और चोरनी के साथ, और सबसे बड़ा तो चोर का सरदार है, बहुत बड़ी-बड़ी चोरी करता है।"

और तब तक रीना समझ गयी थी कि ये सब भाभियों की बदमाशी है, क्योंकि बजाय घबराने के सब भाभियाँ मुस्करा रही थीं; और यहाँ तक कि उसकी मम्मी भी, उनके चेहरे पे भी कोई परेशानी नहीं थी।

और जिस तरह से उस पुलिस वाले ने मजे ले-लेकर रीना के उभार दबाये थे, वो छुअन रीना पहचान गयी थी—सुधा भाभी, जिन्होंने बत्ती जाने पर भी दुलारी के साथ खुलकर उसका जोबन मर्दन किया था।

जब जबरदस्ती दरोगा ने रीना को पकड़कर झुकाया, तो रीना ने दरोगा के पैरों में लगे सुहागिन औरतों वाले महावर को देख लिया और पायल भी चौड़ी सी, और बाकी पुलिस वाले भी उसी तरह थे; और उसने अंदाज लगा लिया था कि रमुआ बहू दरोगा बनी है।

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"अरे बता दो ना, नहीं तो दरोगा साहेब बहुत सख्त हैं, अपनी बहन-मह्तारी भी नहीं छोड़ते, तुम्हारे भैया की तरह,

" दुलारी ने झुकी हुई रीना को समझाया और पकड़कर खड़ा कर दिया।



"जो दरोगा जी मेरे साथ थीं, वो मीना थी और लीला और वो जो देखने में छोटी है लेकिन सेंध उसी ने लगाई थी—इमली।"

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रीना भी अब ऐक्टिंग कर रही थी और अपनी उम्र वाली सब लड़कियों को उसने लपेट लिया, "और असली सरदार वो हैं," दुलारी ने दूल्हे की माँ की ओर इशारा किया।



लेकिन दरोगा के मन में कुछ और चल रहा था, रीना से उसने पूछा,


"साली, अगर तू चुदी नहीं है, तो इतनी मोटी चूड़ी तेरे भोंसड़े से कैसे निकली?"

पुलिस कांस्टेबल बनी सुधा भाभी ने एक हाथ रीना के चूतड़ पे दिया और हड़काया, "चल बता सब लौंडों के नाम जो आजकल घर में हैं, जिनको झुक-झुककर जोबना दिखा-दिखाकर खिला रही थी।"

और रीना ने सब नाम एक साथ सुना दिए—"गप्पू भैया, बिट्टू भैया, रवि भैया, नंदू भैया, चंदू भैया..." पूरे दर्जन भर लड़कों का नाम रीनू ने सुना दिया।
"साली, एक-एक लड़के का नाम मालूम है और लंड का तुझे अकाल पड़ा है! चल बोल, किसका-किसका लंड घोंटेगी?"

दुलारी ने कान में बोला, "जल्दी से हाँ बोल दे, वरना और रगड़ाई होगी।"

रीना ने बोला, लेकिन कांस्टेबल ने एक-एक लड़के का नाम ले-लेकर रीना से कहलवाया और तीन-तीन बार जोर से।

और उसके बाद हमला दूल्हे की माँ पर हुआ।

और क्या न हुआ, दूल्हे की महतारी के साथ।
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तलाशी के नाम पर दरोगा बनी रमुआ बहू ने दूल्हे की माई की बुरिया में पूरी तीन ऊँगली घुसाई और सब भौजाई कने लगी, " अरे जब तीन तीन ऊँगली बिना तेल के जा रहा था तो हमरे देवर क लौंड़ा लेने में सासु जी काहें इतना छिनरपन कर रही हो "

" बोलो लेगी दूल्हे का गपागप, वरना पूरी मुट्ठी पेलूँगी अभी कोहनी तक ," रमुआ बहू बोली।

" अरे पेल दो, ....बचपन क छिनार हैं हमार ननद " बड़ी मामी बोलीं।


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अब दरोगा और सिपाहियों के बाकी औरतें लड़कियां भी आ गयी थी, दोनों सिपाहियों ने पकड़ के दूल्हे की माँ की टांग फैला रही थी।


मंजू भाभी साथ में अपनी ननदो, मीना, रूपा , रमा को लेकर बैठीं जो पहली बार ये सब देख रही थीं, मंजू भाभी और रामपुर वाली दोनों एक साथ अपनी सास से बोलीं

" अरे मान जाइये न, हमार देवर बहुत अच्छा है, बहुत प्यार से ठेलेगा, मजा आ जाएगा "

" अरे भौजी, माना पचासों मरद का घोंटा होगा, गदहा घोडा कुल लिया होगा लेकिन एक बार मेरे भतीजे का ले लीजिये न अंदर, सब को भूल जायेगीं "

चिढ़ाते, उकसाते नीतू ननद बोली जो सूरजु से मुश्किल से डेढ़ दो साल बड़ी थी और जिसके मरद का आज खूब मजे लेकर बड़की ठकुराईन ने दो बार घोंटा था

पूरे दस बार बड़की ठकुराइन से सब उनकी बहुओं, ननदों, भाभियों ने कबुलवाया तब जाकर मुन्ना बहू ने उँगलियाँ बाहर निकाली,



उसके बाद तो चार पांच स्वांग और हुए, फुलवा पर भूत चढ़ा और उसी के बहाने जितनी कुँवारी ननदियाँ चाहे गाँव की हो या शहर की सब की खुल के उस ने रगड़ाई की,

शीतल मौसी धोबन बन के आयी और वो तो खुल के आज मीना के पीछे पड़ी थी, पूनम और चननिया भी चुड़िहारिन और बिसाती बन के आयीं और भाभियों के साथ खूब मस्ती की।



आज तय हुआ था की गाना जल्दी खत्म हो, रात में ' और भी बहुत से काम ' थे लेकिन तब भी एक बज गया, धीरे धीरे सब लोग छत से उतर कर चले गए, आज इमरतिया के घर पर भी कुछ काम था तो वो भी चली गयी , मंजू भाभी, मुन्ना बहू और पूनम कोहबर की ओर चले गए, उसके पहले मंजू भाभी ने दूल्हे के कमरे का ताला खोल दिया था, छत के एक कोने पे लीला से बुच्ची कुछ खुसुर फुसुर कर रही थी और लीला खिलखिला रही थी, और सर हिला के हाँ हाँ का इशारा कर रही थी।



सूरजु की माई ने हल्के से खुले दरवाजे से अपने बेटे को देखा और उसकी छाती गज भर हो गई।

लेकिन वो जोर से मुस्करायीं,


" स्साला, इसकी बुआ को गदहे से चुदवाउ, हमी से नौटंकी।"
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और जिस तरह से उस पुलिस वाले ने मजे ले-लेकर रीना के उभार दबाये थे, वो छुअन रीना पहचान गयी थी—सुधा भाभी, जिन्होंने बत्ती जाने पर भी दुलारी के साथ खुलकर उसका जोबन मर्दन किया था।

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छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

भाग 219 -- बुच्ची और लीला -दोनों ने लीला
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खेला चोर सिपाही का

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इमरतिया ने बोला था कि मटमंगरा में सब औरतें, लड़कियाँ सिर्फ साड़ी-ब्लाउज़ पहनकर आएंगी।

अब शहर वाली तो सब टॉप-स्कर्ट में थीं, और गाँव में भी आधी लड़कियाँ या तो फ्रॉक या शलवार-कुरता पहनती थीं, तो साड़ी-ब्लाउज़ कैसे?

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रमा, शीतल मौसी की लड़की, जो बम्बई से आयी थी और अंग्रेजी स्कूल में इंटर में पढ़ती थी, स्कर्ट-टॉप, तरह-तरह के ड्रेस और एक-दो शलवार-कुर्ती लायी थी, वही सबसे पहले चिल्लाई,


"अरे, साड़ी तो चलिए मम्मी, मौसी, मामी, भाभी किसी की ले लेंगे, लेकिन ब्लाउज़, वो भी मेरे नाप का कहाँ से मिलेगा?"



"अरे तो मत पहनना ब्लाउज़, बिन्नो, मेरे देवरों का भला हो जाएगा," मंजू भाभी ने अपनी ननद को चिढ़ाया।

"और तेरे भाइयों के साथ तेरी भाभी के भाइयों का भी; बस साड़ी उठायी, झलक दिखला दी, लौंडों को भी आराम। आँचल हटाया, मसल दिया।"

रामपुर वाली को तो हरदम अपने भाइयों के फायदे की चिंता रहती थी—गप्पू और उसके दोस्तों की, तो वो और जोर से खुश होकर बोलीं।

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लेकिन बड़ी ठकुराइन ने मामला सुलझा दिया, और बहुओं को डांटके बोलीं,

"तुम सब ना मेरी प्यारी-प्या प्यारी बेटियों को चिढ़ा रही हो। तुम सब अपने मायके में उघारे घूमती होगी? अरे, कल से दरजी लगेंगे, दुल्हन के और बाकी लोगों के कपड़े सिलने आएँगी दर्जिने, तो तुम सब भी अपने-अपने ब्लाउज़ सिलवा लेना, एकदम लेटेस्ट फैशन का, अपनी-अपनी नाप के कम से कम तीन-चार।"

लेकिन भाभियों का चिढ़ाना कम नहीं हो रहा था,


"अरे, दरजी का लड़का तो हमारी ननद का यार है। उसको जोबन का उभार, नाप सब याद है, बिना नाप लिए बना देगा। हाँ-हाँ, चूँची के लिए सिलवाई में गुलाबो ले लेगा ।"



और उसी झांय-झांय के बीच पीछे की ओर से पता नहीं कहाँ से एक पुलिस का दरोगा पूरी वर्दी में, मोटा तेल पिलाया डंडा लेकर और साथ में दो-तीन कांस्टेबल आ गए और जोर से बोले,

"हमको चोरी की रपट मिली है। बड़े महंगे गहने चोरी हुए हैं और खबर है कि चोर सब यहीं छिपे हैं। सब की तलाशी होगी।"

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सब औरतें-लड़कियाँ दुबककर बैठ गईं एक-दूसरे से चिपककर। जो लड़कियाँ गाँव में रतजगा देख चुकी थीं, उन्हें तो अंदाज था, लेकिन जो शहर से आयीं थीं, उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा था।

रीना दुलारी से चिपकके बैठी थी, सुधा भाभी कहीं निकल गयी थीं।

दरोगा गाली देकर बात कर रहा था, और बार-बार अपने हाथ का डंडा घुमाता, सबको हड़काता,

"जो चोर हो कबूल कर ले, वरना सबकी नंगा झोरी होगी। और जिसके पास से गहने पकड़े जाएंगे, जेल तो बाद में जाएगा, यहीं मार-मारके चूतड़ लाल कर दूंगा।"

उसके पुलिस वाले भी साथ-साथ घूम रहे थे—कभी किसी औरत को पकड़के उठा देते, उसके ब्लाउज़ में हाथ डाल देते और फिर बोलते,

"नहीं, कुछ नहीं मिला, ये सब छिनार जबरदस्त चोर हैं।"



तब तक एक कांस्टेबल की निगाह रीना पर पड़ी जो एकदम दुबकी दुलारी के पीछे छिपी थी, और उस कांस्टेबल ने कसके कलाई पकड़कर एक झटके में खड़ा किया।
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रीना सहमके खड़ी हो गयी, सर झुकाये, पैरों से जमीन खुरचते हुए। दरोगा ने उसकी ठुड्डी पकड़कर सर ऊपर किया और एक कांस्टेबल ने टॉर्च से उसके चेहरे पे रौशनी डाली और बोला,

"साहब, यही लगती है, यही बताया था। चेहरे से चुदवासी और छिनार लगती है और खूब गोरी है, जबरदस्त नमक है।"

"बोल साली, माल कहाँ रखा है? साली, गाँड़ में भी रखा होगा तो ये डंडा डालकर निकाल लूंगा, दे दे सीधे से," दरोगा ने हड़काया और एक सिपाही से बोला,

"अबे, ये छिनार ऐसे नहीं बोलेगी। इसके टॉप में हाथ डालकर देख, ये सब चोरनी बड़ी-बड़ी चूँची के बीच में ही सब रखती हैं।"



और एक सिपाही ने टॉप के अंदर हाथ डाल दिया, और मन भरकर जोबन दबाए-मसले।


बाकी के दो सिपाहियों ने रीना के हाथ कसकर पकड़ रखे थे। और जिसने टॉप में हाथ डाला था, उस सिपाही ने हाथ बाहर निकाला तो उसके हाथ में एक अंगूठी थी, जो पहले उसने दरोगा को दिखाया, फिर सब औरतों को।

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दरोगा ने स्कर्ट उठाकर उसके चूतड़ पर एक हाथ कसकर मारा और गरजा, "बोल, कितनों से चुदी है?"

"नहीं, नहीं, किसी से नहीं," रीना ने कबूला।



"तो इतना चौड़ा भोंसड़ा कैसे हो गया कि चोरी का सब माल अपने भोंसड़े में रखा है?" दरोगा चीखा, "चल, टाँगे फैला।"

और दरोगा ने अपना हाथ उस अंग्रेजी स्कूल वाली लड़की की स्कर्ट में डाल दिया। कुछ देर जाँघें सहलाईं, और एक फिर झटके में रीना की चुनमुनिया दबोच लिया, और सोचा



" साला, बड़ी किस्मत वाला होगा जो इसकी बुर चोदेगा। कैसे फूली-फूली फांकें हैं, एकदम चिपकी, कसी; साली लौंडे को दबोच लेगी।

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बड़की ठकुराइन सही कह रही थी, जब खुले खेत में इसे अहिराने वाले रगड़ेंगे ना और इसके चूतड़ से रगड़-रगड़कर ढेले टूटेंगे, तब इसकी चूत का पानी निकलेगा और फिर ये लंड की दीवानी हो जायेगी, खुद लौंडों के पीछे-पीछे भागेगी।"

"ये देख, मैं कह रही थी ना तेरी चूत नहीं भोंसड़ा है, देख क्या निकला!"

सबकी आँखें फटी रह गईं—एक बड़ी सी चूड़ी, बल्कि चूड़ा। पूरे पौने तीन इंच का व्यास होगा।



"ये तो साली चार बच्चों की माँ के भी भोंसड़े में नहीं आता, जरूर तू नम्बरी चुदक्कड़ है," दरोगा ने हड़काया।



तब तक एक सिपाही बोल पड़ा, "अरे, इस साली ने अपनी गाँड़ में भी छुपाया होगा चोरी का माल।"

"निहुर साली!" दरोगा गरजा, और जबरदस्ती पकड़कर झुका दिया,
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और उस सिपाही ने स्कर्ट उठा दिया। गोरे-गोरे, गोल-गोल, खूब भरे हुए चूतड़ एकदम मस्त लग रहे थे, बीच का कसा छेद एकदम दुबदुबा रहा था। सब भाभियों की निगाहें कुँवारी ननद के चिकने चूतड़ों पर और एकदम टाइट गाँड़ पे अटकी थीं।

"बोल, और कौन था चोरी में तेरे साथ? और इतनी बड़ी चोरी तू अकेले तो कर नहीं सकती," दरोगा ने ललकारा और अपनी बेंत रीना के पिछवाड़े के छेद पर सटाकर गरजा,

"साली, तेरी गाँड़ को तेरे भोंसड़े से भी चौड़ा कर दूंगा। ये दरोगा का डंडा है, गाँड़ में से जाएगा और मुंह में से निकलेगा। बोल साली, कौन थी तेरे साथ?"

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अब अपनी ननद को बचाने दुलारी आगे आयी—वही जिसने लाइट जाने पर, सुलाकी के आने पर रीना का टॉप उतरवाकर सुधा भाभी के साथ खुलकर गुब्बारों का मजा लिया था, और दरोगा जी से बोली,

"हुजूर के गोड़ पड़ती हूँ, हमको मार लीजिए। ये हमारी ननद गऊ है गऊ। ये तो खराब संगत में पड़कर... और चोरनी के साथ, और सबसे बड़ा तो चोर का सरदार है, बहुत बड़ी-बड़ी चोरी करता है।"

और तब तक रीना समझ गयी थी कि ये सब भाभियों की बदमाशी है, क्योंकि बजाय घबराने के सब भाभियाँ मुस्करा रही थीं; और यहाँ तक कि उसकी मम्मी भी, उनके चेहरे पे भी कोई परेशानी नहीं थी।

और जिस तरह से उस पुलिस वाले ने मजे ले-लेकर रीना के उभार दबाये थे, वो छुअन रीना पहचान गयी थी—सुधा भाभी, जिन्होंने बत्ती जाने पर भी दुलारी के साथ खुलकर उसका जोबन मर्दन किया था।

जब जबरदस्ती दरोगा ने रीना को पकड़कर झुकाया, तो रीना ने दरोगा के पैरों में लगे सुहागिन औरतों वाले महावर को देख लिया और पायल भी चौड़ी सी, और बाकी पुलिस वाले भी उसी तरह थे; और उसने अंदाज लगा लिया था कि रमुआ बहू दरोगा बनी है।

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"अरे बता दो ना, नहीं तो दरोगा साहेब बहुत सख्त हैं, अपनी बहन-मह्तारी भी नहीं छोड़ते, तुम्हारे भैया की तरह,

" दुलारी ने झुकी हुई रीना को समझाया और पकड़कर खड़ा कर दिया।



"जो दरोगा जी मेरे साथ थीं, वो मीना थी और लीला और वो जो देखने में छोटी है लेकिन सेंध उसी ने लगाई थी—इमली।"

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रीना भी अब ऐक्टिंग कर रही थी और अपनी उम्र वाली सब लड़कियों को उसने लपेट लिया, "और असली सरदार वो हैं," दुलारी ने दूल्हे की माँ की ओर इशारा किया।



लेकिन दरोगा के मन में कुछ और चल रहा था, रीना से उसने पूछा,


"साली, अगर तू चुदी नहीं है, तो इतनी मोटी चूड़ी तेरे भोंसड़े से कैसे निकली?"

पुलिस कांस्टेबल बनी सुधा भाभी ने एक हाथ रीना के चूतड़ पे दिया और हड़काया, "चल बता सब लौंडों के नाम जो आजकल घर में हैं, जिनको झुक-झुककर जोबना दिखा-दिखाकर खिला रही थी।"

और रीना ने सब नाम एक साथ सुना दिए—"गप्पू भैया, बिट्टू भैया, रवि भैया, नंदू भैया, चंदू भैया..." पूरे दर्जन भर लड़कों का नाम रीनू ने सुना दिया।
"साली, एक-एक लड़के का नाम मालूम है और लंड का तुझे अकाल पड़ा है! चल बोल, किसका-किसका लंड घोंटेगी?"

दुलारी ने कान में बोला, "जल्दी से हाँ बोल दे, वरना और रगड़ाई होगी।"

रीना ने बोला, लेकिन कांस्टेबल ने एक-एक लड़के का नाम ले-लेकर रीना से कहलवाया और तीन-तीन बार जोर से।

और उसके बाद हमला दूल्हे की माँ पर हुआ।

और क्या न हुआ, दूल्हे की महतारी के साथ।
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तलाशी के नाम पर दरोगा बनी रमुआ बहू ने दूल्हे की माई की बुरिया में पूरी तीन ऊँगली घुसाई और सब भौजाई कने लगी, " अरे जब तीन तीन ऊँगली बिना तेल के जा रहा था तो हमरे देवर क लौंड़ा लेने में सासु जी काहें इतना छिनरपन कर रही हो "

" बोलो लेगी दूल्हे का गपागप, वरना पूरी मुट्ठी पेलूँगी अभी कोहनी तक ," रमुआ बहू बोली।

" अरे पेल दो, ....बचपन क छिनार हैं हमार ननद " बड़ी मामी बोलीं।


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अब दरोगा और सिपाहियों के बाकी औरतें लड़कियां भी आ गयी थी, दोनों सिपाहियों ने पकड़ के दूल्हे की माँ की टांग फैला रही थी।


मंजू भाभी साथ में अपनी ननदो, मीना, रूपा , रमा को लेकर बैठीं जो पहली बार ये सब देख रही थीं, मंजू भाभी और रामपुर वाली दोनों एक साथ अपनी सास से बोलीं

" अरे मान जाइये न, हमार देवर बहुत अच्छा है, बहुत प्यार से ठेलेगा, मजा आ जाएगा "

" अरे भौजी, माना पचासों मरद का घोंटा होगा, गदहा घोडा कुल लिया होगा लेकिन एक बार मेरे भतीजे का ले लीजिये न अंदर, सब को भूल जायेगीं "

चिढ़ाते, उकसाते नीतू ननद बोली जो सूरजु से मुश्किल से डेढ़ दो साल बड़ी थी और जिसके मरद का आज खूब मजे लेकर बड़की ठकुराईन ने दो बार घोंटा था

पूरे दस बार बड़की ठकुराइन से सब उनकी बहुओं, ननदों, भाभियों ने कबुलवाया तब जाकर मुन्ना बहू ने उँगलियाँ बाहर निकाली,



उसके बाद तो चार पांच स्वांग और हुए, फुलवा पर भूत चढ़ा और उसी के बहाने जितनी कुँवारी ननदियाँ चाहे गाँव की हो या शहर की सब की खुल के उस ने रगड़ाई की,

शीतल मौसी धोबन बन के आयी और वो तो खुल के आज मीना के पीछे पड़ी थी, पूनम और चननिया भी चुड़िहारिन और बिसाती बन के आयीं और भाभियों के साथ खूब मस्ती की।



आज तय हुआ था की गाना जल्दी खत्म हो, रात में ' और भी बहुत से काम ' थे लेकिन तब भी एक बज गया, धीरे धीरे सब लोग छत से उतर कर चले गए, आज इमरतिया के घर पर भी कुछ काम था तो वो भी चली गयी , मंजू भाभी, मुन्ना बहू और पूनम कोहबर की ओर चले गए, उसके पहले मंजू भाभी ने दूल्हे के कमरे का ताला खोल दिया था, छत के एक कोने पे लीला से बुच्ची कुछ खुसुर फुसुर कर रही थी और लीला खिलखिला रही थी, और सर हिला के हाँ हाँ का इशारा कर रही थी।



सूरजु की माई ने हल्के से खुले दरवाजे से अपने बेटे को देखा और उसकी छाती गज भर हो गई।

लेकिन वो जोर से मुस्करायीं,


" स्साला, इसकी बुआ को गदहे से चुदवाउ, हमी से नौटंकी।"
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अरे बता दो ना, नहीं तो दरोगा साहेब बहुत सख्त हैं, अपनी बहन-मह्तारी भी नहीं छोड़ते, तुम्हारे भैया की तरह,

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छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

भाग 219 -- बुच्ची और लीला -दोनों ने लीला
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खेला चोर सिपाही का

३३,७४, ३६६
इमरतिया ने बोला था कि मटमंगरा में सब औरतें, लड़कियाँ सिर्फ साड़ी-ब्लाउज़ पहनकर आएंगी।

अब शहर वाली तो सब टॉप-स्कर्ट में थीं, और गाँव में भी आधी लड़कियाँ या तो फ्रॉक या शलवार-कुरता पहनती थीं, तो साड़ी-ब्लाउज़ कैसे?

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रमा, शीतल मौसी की लड़की, जो बम्बई से आयी थी और अंग्रेजी स्कूल में इंटर में पढ़ती थी, स्कर्ट-टॉप, तरह-तरह के ड्रेस और एक-दो शलवार-कुर्ती लायी थी, वही सबसे पहले चिल्लाई,


"अरे, साड़ी तो चलिए मम्मी, मौसी, मामी, भाभी किसी की ले लेंगे, लेकिन ब्लाउज़, वो भी मेरे नाप का कहाँ से मिलेगा?"



"अरे तो मत पहनना ब्लाउज़, बिन्नो, मेरे देवरों का भला हो जाएगा," मंजू भाभी ने अपनी ननद को चिढ़ाया।

"और तेरे भाइयों के साथ तेरी भाभी के भाइयों का भी; बस साड़ी उठायी, झलक दिखला दी, लौंडों को भी आराम। आँचल हटाया, मसल दिया।"

रामपुर वाली को तो हरदम अपने भाइयों के फायदे की चिंता रहती थी—गप्पू और उसके दोस्तों की, तो वो और जोर से खुश होकर बोलीं।

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लेकिन बड़ी ठकुराइन ने मामला सुलझा दिया, और बहुओं को डांटके बोलीं,

"तुम सब ना मेरी प्यारी-प्या प्यारी बेटियों को चिढ़ा रही हो। तुम सब अपने मायके में उघारे घूमती होगी? अरे, कल से दरजी लगेंगे, दुल्हन के और बाकी लोगों के कपड़े सिलने आएँगी दर्जिने, तो तुम सब भी अपने-अपने ब्लाउज़ सिलवा लेना, एकदम लेटेस्ट फैशन का, अपनी-अपनी नाप के कम से कम तीन-चार।"

लेकिन भाभियों का चिढ़ाना कम नहीं हो रहा था,


"अरे, दरजी का लड़का तो हमारी ननद का यार है। उसको जोबन का उभार, नाप सब याद है, बिना नाप लिए बना देगा। हाँ-हाँ, चूँची के लिए सिलवाई में गुलाबो ले लेगा ।"



और उसी झांय-झांय के बीच पीछे की ओर से पता नहीं कहाँ से एक पुलिस का दरोगा पूरी वर्दी में, मोटा तेल पिलाया डंडा लेकर और साथ में दो-तीन कांस्टेबल आ गए और जोर से बोले,

"हमको चोरी की रपट मिली है। बड़े महंगे गहने चोरी हुए हैं और खबर है कि चोर सब यहीं छिपे हैं। सब की तलाशी होगी।"

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सब औरतें-लड़कियाँ दुबककर बैठ गईं एक-दूसरे से चिपककर। जो लड़कियाँ गाँव में रतजगा देख चुकी थीं, उन्हें तो अंदाज था, लेकिन जो शहर से आयीं थीं, उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा था।

रीना दुलारी से चिपकके बैठी थी, सुधा भाभी कहीं निकल गयी थीं।

दरोगा गाली देकर बात कर रहा था, और बार-बार अपने हाथ का डंडा घुमाता, सबको हड़काता,

"जो चोर हो कबूल कर ले, वरना सबकी नंगा झोरी होगी। और जिसके पास से गहने पकड़े जाएंगे, जेल तो बाद में जाएगा, यहीं मार-मारके चूतड़ लाल कर दूंगा।"

उसके पुलिस वाले भी साथ-साथ घूम रहे थे—कभी किसी औरत को पकड़के उठा देते, उसके ब्लाउज़ में हाथ डाल देते और फिर बोलते,

"नहीं, कुछ नहीं मिला, ये सब छिनार जबरदस्त चोर हैं।"



तब तक एक कांस्टेबल की निगाह रीना पर पड़ी जो एकदम दुबकी दुलारी के पीछे छिपी थी, और उस कांस्टेबल ने कसके कलाई पकड़कर एक झटके में खड़ा किया।
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रीना सहमके खड़ी हो गयी, सर झुकाये, पैरों से जमीन खुरचते हुए। दरोगा ने उसकी ठुड्डी पकड़कर सर ऊपर किया और एक कांस्टेबल ने टॉर्च से उसके चेहरे पे रौशनी डाली और बोला,

"साहब, यही लगती है, यही बताया था। चेहरे से चुदवासी और छिनार लगती है और खूब गोरी है, जबरदस्त नमक है।"

"बोल साली, माल कहाँ रखा है? साली, गाँड़ में भी रखा होगा तो ये डंडा डालकर निकाल लूंगा, दे दे सीधे से," दरोगा ने हड़काया और एक सिपाही से बोला,

"अबे, ये छिनार ऐसे नहीं बोलेगी। इसके टॉप में हाथ डालकर देख, ये सब चोरनी बड़ी-बड़ी चूँची के बीच में ही सब रखती हैं।"



और एक सिपाही ने टॉप के अंदर हाथ डाल दिया, और मन भरकर जोबन दबाए-मसले।


बाकी के दो सिपाहियों ने रीना के हाथ कसकर पकड़ रखे थे। और जिसने टॉप में हाथ डाला था, उस सिपाही ने हाथ बाहर निकाला तो उसके हाथ में एक अंगूठी थी, जो पहले उसने दरोगा को दिखाया, फिर सब औरतों को।

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दरोगा ने स्कर्ट उठाकर उसके चूतड़ पर एक हाथ कसकर मारा और गरजा, "बोल, कितनों से चुदी है?"

"नहीं, नहीं, किसी से नहीं," रीना ने कबूला।



"तो इतना चौड़ा भोंसड़ा कैसे हो गया कि चोरी का सब माल अपने भोंसड़े में रखा है?" दरोगा चीखा, "चल, टाँगे फैला।"

और दरोगा ने अपना हाथ उस अंग्रेजी स्कूल वाली लड़की की स्कर्ट में डाल दिया। कुछ देर जाँघें सहलाईं, और एक फिर झटके में रीना की चुनमुनिया दबोच लिया, और सोचा



" साला, बड़ी किस्मत वाला होगा जो इसकी बुर चोदेगा। कैसे फूली-फूली फांकें हैं, एकदम चिपकी, कसी; साली लौंडे को दबोच लेगी।

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बड़की ठकुराइन सही कह रही थी, जब खुले खेत में इसे अहिराने वाले रगड़ेंगे ना और इसके चूतड़ से रगड़-रगड़कर ढेले टूटेंगे, तब इसकी चूत का पानी निकलेगा और फिर ये लंड की दीवानी हो जायेगी, खुद लौंडों के पीछे-पीछे भागेगी।"

"ये देख, मैं कह रही थी ना तेरी चूत नहीं भोंसड़ा है, देख क्या निकला!"

सबकी आँखें फटी रह गईं—एक बड़ी सी चूड़ी, बल्कि चूड़ा। पूरे पौने तीन इंच का व्यास होगा।



"ये तो साली चार बच्चों की माँ के भी भोंसड़े में नहीं आता, जरूर तू नम्बरी चुदक्कड़ है," दरोगा ने हड़काया।



तब तक एक सिपाही बोल पड़ा, "अरे, इस साली ने अपनी गाँड़ में भी छुपाया होगा चोरी का माल।"

"निहुर साली!" दरोगा गरजा, और जबरदस्ती पकड़कर झुका दिया,
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और उस सिपाही ने स्कर्ट उठा दिया। गोरे-गोरे, गोल-गोल, खूब भरे हुए चूतड़ एकदम मस्त लग रहे थे, बीच का कसा छेद एकदम दुबदुबा रहा था। सब भाभियों की निगाहें कुँवारी ननद के चिकने चूतड़ों पर और एकदम टाइट गाँड़ पे अटकी थीं।

"बोल, और कौन था चोरी में तेरे साथ? और इतनी बड़ी चोरी तू अकेले तो कर नहीं सकती," दरोगा ने ललकारा और अपनी बेंत रीना के पिछवाड़े के छेद पर सटाकर गरजा,

"साली, तेरी गाँड़ को तेरे भोंसड़े से भी चौड़ा कर दूंगा। ये दरोगा का डंडा है, गाँड़ में से जाएगा और मुंह में से निकलेगा। बोल साली, कौन थी तेरे साथ?"

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अब अपनी ननद को बचाने दुलारी आगे आयी—वही जिसने लाइट जाने पर, सुलाकी के आने पर रीना का टॉप उतरवाकर सुधा भाभी के साथ खुलकर गुब्बारों का मजा लिया था, और दरोगा जी से बोली,

"हुजूर के गोड़ पड़ती हूँ, हमको मार लीजिए। ये हमारी ननद गऊ है गऊ। ये तो खराब संगत में पड़कर... और चोरनी के साथ, और सबसे बड़ा तो चोर का सरदार है, बहुत बड़ी-बड़ी चोरी करता है।"

और तब तक रीना समझ गयी थी कि ये सब भाभियों की बदमाशी है, क्योंकि बजाय घबराने के सब भाभियाँ मुस्करा रही थीं; और यहाँ तक कि उसकी मम्मी भी, उनके चेहरे पे भी कोई परेशानी नहीं थी।

और जिस तरह से उस पुलिस वाले ने मजे ले-लेकर रीना के उभार दबाये थे, वो छुअन रीना पहचान गयी थी—सुधा भाभी, जिन्होंने बत्ती जाने पर भी दुलारी के साथ खुलकर उसका जोबन मर्दन किया था।

जब जबरदस्ती दरोगा ने रीना को पकड़कर झुकाया, तो रीना ने दरोगा के पैरों में लगे सुहागिन औरतों वाले महावर को देख लिया और पायल भी चौड़ी सी, और बाकी पुलिस वाले भी उसी तरह थे; और उसने अंदाज लगा लिया था कि रमुआ बहू दरोगा बनी है।

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"अरे बता दो ना, नहीं तो दरोगा साहेब बहुत सख्त हैं, अपनी बहन-मह्तारी भी नहीं छोड़ते, तुम्हारे भैया की तरह,

" दुलारी ने झुकी हुई रीना को समझाया और पकड़कर खड़ा कर दिया।



"जो दरोगा जी मेरे साथ थीं, वो मीना थी और लीला और वो जो देखने में छोटी है लेकिन सेंध उसी ने लगाई थी—इमली।"

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रीना भी अब ऐक्टिंग कर रही थी और अपनी उम्र वाली सब लड़कियों को उसने लपेट लिया, "और असली सरदार वो हैं," दुलारी ने दूल्हे की माँ की ओर इशारा किया।



लेकिन दरोगा के मन में कुछ और चल रहा था, रीना से उसने पूछा,


"साली, अगर तू चुदी नहीं है, तो इतनी मोटी चूड़ी तेरे भोंसड़े से कैसे निकली?"

पुलिस कांस्टेबल बनी सुधा भाभी ने एक हाथ रीना के चूतड़ पे दिया और हड़काया, "चल बता सब लौंडों के नाम जो आजकल घर में हैं, जिनको झुक-झुककर जोबना दिखा-दिखाकर खिला रही थी।"

और रीना ने सब नाम एक साथ सुना दिए—"गप्पू भैया, बिट्टू भैया, रवि भैया, नंदू भैया, चंदू भैया..." पूरे दर्जन भर लड़कों का नाम रीनू ने सुना दिया।
"साली, एक-एक लड़के का नाम मालूम है और लंड का तुझे अकाल पड़ा है! चल बोल, किसका-किसका लंड घोंटेगी?"

दुलारी ने कान में बोला, "जल्दी से हाँ बोल दे, वरना और रगड़ाई होगी।"

रीना ने बोला, लेकिन कांस्टेबल ने एक-एक लड़के का नाम ले-लेकर रीना से कहलवाया और तीन-तीन बार जोर से।

और उसके बाद हमला दूल्हे की माँ पर हुआ।

और क्या न हुआ, दूल्हे की महतारी के साथ।
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तलाशी के नाम पर दरोगा बनी रमुआ बहू ने दूल्हे की माई की बुरिया में पूरी तीन ऊँगली घुसाई और सब भौजाई कने लगी, " अरे जब तीन तीन ऊँगली बिना तेल के जा रहा था तो हमरे देवर क लौंड़ा लेने में सासु जी काहें इतना छिनरपन कर रही हो "

" बोलो लेगी दूल्हे का गपागप, वरना पूरी मुट्ठी पेलूँगी अभी कोहनी तक ," रमुआ बहू बोली।

" अरे पेल दो, ....बचपन क छिनार हैं हमार ननद " बड़ी मामी बोलीं।


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अब दरोगा और सिपाहियों के बाकी औरतें लड़कियां भी आ गयी थी, दोनों सिपाहियों ने पकड़ के दूल्हे की माँ की टांग फैला रही थी।


मंजू भाभी साथ में अपनी ननदो, मीना, रूपा , रमा को लेकर बैठीं जो पहली बार ये सब देख रही थीं, मंजू भाभी और रामपुर वाली दोनों एक साथ अपनी सास से बोलीं

" अरे मान जाइये न, हमार देवर बहुत अच्छा है, बहुत प्यार से ठेलेगा, मजा आ जाएगा "

" अरे भौजी, माना पचासों मरद का घोंटा होगा, गदहा घोडा कुल लिया होगा लेकिन एक बार मेरे भतीजे का ले लीजिये न अंदर, सब को भूल जायेगीं "

चिढ़ाते, उकसाते नीतू ननद बोली जो सूरजु से मुश्किल से डेढ़ दो साल बड़ी थी और जिसके मरद का आज खूब मजे लेकर बड़की ठकुराईन ने दो बार घोंटा था

पूरे दस बार बड़की ठकुराइन से सब उनकी बहुओं, ननदों, भाभियों ने कबुलवाया तब जाकर मुन्ना बहू ने उँगलियाँ बाहर निकाली,



उसके बाद तो चार पांच स्वांग और हुए, फुलवा पर भूत चढ़ा और उसी के बहाने जितनी कुँवारी ननदियाँ चाहे गाँव की हो या शहर की सब की खुल के उस ने रगड़ाई की,

शीतल मौसी धोबन बन के आयी और वो तो खुल के आज मीना के पीछे पड़ी थी, पूनम और चननिया भी चुड़िहारिन और बिसाती बन के आयीं और भाभियों के साथ खूब मस्ती की।



आज तय हुआ था की गाना जल्दी खत्म हो, रात में ' और भी बहुत से काम ' थे लेकिन तब भी एक बज गया, धीरे धीरे सब लोग छत से उतर कर चले गए, आज इमरतिया के घर पर भी कुछ काम था तो वो भी चली गयी , मंजू भाभी, मुन्ना बहू और पूनम कोहबर की ओर चले गए, उसके पहले मंजू भाभी ने दूल्हे के कमरे का ताला खोल दिया था, छत के एक कोने पे लीला से बुच्ची कुछ खुसुर फुसुर कर रही थी और लीला खिलखिला रही थी, और सर हिला के हाँ हाँ का इशारा कर रही थी।



सूरजु की माई ने हल्के से खुले दरवाजे से अपने बेटे को देखा और उसकी छाती गज भर हो गई।

लेकिन वो जोर से मुस्करायीं,


" स्साला, इसकी बुआ को गदहे से चुदवाउ, हमी से नौटंकी।"
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" अरे जब तीन तीन ऊँगली बिना तेल के जा रहा था तो हमरे देवर क लौंड़ा लेने में सासु जी काहें इतना छिनरपन कर रही हो "




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