• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Incest तू लौट के आजा मेरे लाल

Naik

Well-Known Member
22,383
79,186
258
chapter 23

अभय के घर

मिनिता आसा कमरे मे बैठे बाते कर रहे तो वही अदिति दिशा से बाते कर रही थी

मिनिता - अभय के गये अभी आधे घंटे हुवे है लेकिन अभी से बोर वाली फीलिंग आ रही है अभय के होने से मस्ती चहल पेहल बनी रहती थी सभी को हसाते रेहता था

आसा मिनिता को देख - हा तुम्हारी बात सही है मेरा लाला मस्ती बाज है ही मस्ती किये बगैर रेह नही सकता लेकिन किया करू मर्द है घर का अब बरा भी हो गया है तो उसे हमेसा सीने से लगा के रख तो नही सकती ना

मिनिता - हा आपने सही कहा दीदी अब तो उसकी शादी भी हो रही है जल्दी ही पापा और आप दादी बन जायेगी
आसा मुस्कुराते हुवे - मुझे तो उस दिन का बेसबरी से इंतज़ार है जब घर मे नन्हे बच्चे की किलकारी गुजेगी और लाला के बेटे या बेटी को मे अपने गोद मे लुगी
मिनिता मुस्कुराते हुवे - दीदी जरूर वो पल जल्दी ही आयेगा कियुंकी आपका लाडला फास्ट जो है
आसा हस्ते हुवे - ये बात भी तुमने सही कही


अदिति - भाभी आपके बिना मजा नही आ रहा भइया भी चले गये
दिशा हस्ते हुवे - अच्छा जी मेने उनसे बात की है आधे रास्ते पहुँच गये है
अदिति - हा लेकिन तीन दिन उनके बिना देखे रेहना परेगा वैसे किया किया बाते होती है भईया आपके बीच बताइये ना
दिशा शर्मा के - जो एक पति पत्नी मे होता है और आपको कियु जाननी है
अदिति हस्ते हुवे - मेने तो बस ऐसे ही पूछ लिया

अंदर बाते चल रही थी तभी एक गारी अभय के घर की बाहर आके रुकती है उस गारी से एक लरकी उतर अभय के घर को देखते हुवे - अच्छा तो ये घर है मेरे राजा का

लरकी अंदर आँगन मे जाके - कोई है किया

लरकी की आवाज सुन आसा मिनिता अदिति आँगन मे आते है तो सभी एक खूबसूरत सी लरकी को देख हैरान हो जाते है


Gwg1si9b-EAEJf-E0
आसा लरकी को देख - तुम कोन हो बेटा किससे मिलना है
लरकी आसा को देख -मे अपने राजा से मिलने आई हु वैसे आप कोन है
आसा हैरानी कंफ्यूज से - कोन राजा
लरकी - ये घर अभय का हि है ना
आसा अजीब नजरो से लरकी को घूर के देख - हा
लरकी मुस्कुराते हुवे - वही तो है मेरे राजा बाबू सोना

लरकी की बात सुन मिनिता आसा अदिति को बहोत जोर का झटका लगता है वही अदिति हाथ मे फोन लिये हुवे थी फोन चालू था और दिशा ने सब सुन लिया था
दिशा गुस्से से लाल जोर से चिल्लाते हुवे - ये कमीनी है कोन जो मेरे पति को राजा बाबू सोना केह रही है मे जान से मार दुगी इस कमीनी को

दिशा की गुस्से वाली आवाज सुन पूजा तारा भागते हुवे दिशा के कमरे मे आके
पूजा - किया हुवा दीदी
तारा - तुम इतने गुस्से मे कियु हो
दिशा पूजा तारा को देख - कुछ नही कहती तभी दोनो को फोन से किसी लरकी की आवाज सुनाई देती है तो पूजा तारा हैरान हो जाते है

लरकी आसा मिनिता अदिति को देख - आप सब मेरे राजा के लिये लगते है

लरकी की बात सुन सभी होस मे आते है

आसा अजीब थोरा गुस्से से- मे उसकी मा हु
मिनिता अजीब नजर से घूर के - मे उसकी ऑन्टी हु
अदिति गुस्से वाली नजर से - मे उनकी छोटी गुरिया हु

लरकी सभी के परिचय जानने के बाद लरकी जल्दी से जाके आसा के पैर छुटे हुवे - पाई लागू सासु मा

ले एक और धमाका और आसा मिनिता अदिति पुरे सॉक से आखे फ़ारे लरकी को देखने लगते है

लेकिन दिशा लरकी को अपने सासु मा को सासु मा कहते सुन अपनी मुठी कस्टे हुवे पागलो की तरह चिल्लाते हुवे - ये कमीनी मेरी मम्मी जी को कियु सासु मा केह रही मे उसको जान से मार दूंगी (दिशा गुस्से से लाल खरी होके) जा रही हु वहा कमीनी के बाल पकर इतना मरुगी की की साली कभी मेरे पति को राजा और मेरी मम्मी जी को सासु मा केहना भूल जायेगी

पूजा तारा को सारी बात सुनने के बाद समझ मे आता है सारा मामला
पूजा जल्दी से दिशा को पकर - दीदी आप वहा मत जाइये अभी
दिशा गुस्से से - छोर मुझे आज उस चुड़ैल की जान ले लुगी
तारा - बेटा सांत हो जाओ पेहले मामला किया है समझ जान लेते है ना फिर जो करना है कर लेना

तारा की बात सुन दिशा रुक कर गुस्से से बिस्तर पे बैठ जाती है पूजा गहरी सास लेते हुवे मन मे - पागल जीजा आपने क्या गुल खिलाये है इतना गुस्सा तो दीदी पेहले कभी नही हुई

वही आसा होस मे आते हुवे - देखो बेटी पेहले ये बताओ तुम हो कोन अभय से तुम्हारा किया रिस्ता है

लरकी - अरे हा माफ करना मेरा नाम है पायल और आपके बेटे से मे प्यार करती हु

एक और झटका अब तो आसा मिनिता अदिति पथर् बने पायल को देखते रेह जाते है

वही दिशा तारा पूजा भी सब सुन जान उन्हें भी बरा झटका लगता है

दिशा का गुस्सा फिर हाई हो जाता है पेहले से दिशा खरी होते हुवे - अब तो पक्का मे उस कमीनी को मार कर ही आउंगी

लेकिन फिर पूजा दिशा को पकर - प्लेस दीदी रुक जाइये पेहले पूरी बात सुन लेते है ना फिर मे भी आपके साथ चलुंगी पक्का
दिशा पूजा को देख फिर गुस्से से बिस्तर पे बैठ जाती है
पूजा अपने पसीने साफ करते हुवे मन मे - थरकी जीजा दीदी उस कमीनी पायल को मारेगी मे आपको मार दुगी
तारा हैरान मन मे - ये क्या हो रहा है अचनाक् ये लरकी कहा से आ गई

आसा होस मे आते हुवे - लेकिन मेने तुम्हे कभी देखा नही ना मेरे लाला ने तुम्हारे बारे मे बताया तुम दोनो कैसे मिले किया चक्कर है सब अच्छे से बताओ

पायल मन मे - क्या मेरे राजा ने मेरे बारे मे घर वालो को नही बताया

अदिति पायल को देख - अब बताइये भी सब कुछ भाई का कहा मिली सब कुछ

पायल सभी को देख फिर ट्रेन के 24 घंटे सफर मे जो हुवा बता देती हो बस बाथरूम किस वाला सीन नही बताती

पायल की बात सुन आसा मिनिता अदिति और दिशा पूजा तारा जो फोन मे सब सुन रही थी तीनो भी हैरान हो जाते है

आसा अपने मे लरकी को देख - इसने वो कहा सब सुनने के बाद सीधा बता चल रहा है मेरा लाला इस लरकी से प्यार नही करता बल्कि ये हि मेरे लाला के पीछे परी है

सेम बात सभी भी सोच रहे थे

आसा गहरी सास लेते हुवे - देखो बेटा मेरे लाला तुम्हारे बीच जो हो तुम दोनो ही देख लेना दूसरी मेरे लाला की शादी फिक्स हो चुकी है तो उसे भूल जाओ

पायल आके सब को झटके दिये जा रही थी अब आसा की बात सुन पायल को बहोत बरा झटका लगता है

पायल हैरानी से - किया मेरे राजा की शादी फिक्स हो गई है लेकिन कब कैसे

( अभय काजल की तरफ चलते है )

अभय खरा चारों को गुस्से से देख रहा था अभय अपना हाथ नीचे ले जाने लगता है तभी अभय मन मे - नही उसकी जरूरत नही परेगी ये तो मामूली चूहे है

तभी एक लरका चिलाते हुवे अभय के सर पे डंडे से वार करता है लेकिन अभय डंडे को अपने हाथो से आराम से पकर जोर स अपनी तरफ खिचता है झटका खाके लरका लरखराते हुवे अभय के नजदिक आ जाता है अभय लरके के बाल पकर न जोरदार मुक्का पेट मे मारता है लरका बहोत जोर की चीख मारता है एक और लरका फिर तेजी से अभय पे अटैक करने आता है अभय घूर के उस लरके को देखता है और जो लरका दर्द मे पेट पकरे था उसके कंधे पे हाथ रख अभय एक छलांग मार दूसरे लरके के सीने पे आपका पैर दे मारता है लरका सीधा जाके दूर गिरता है और दर्द से चिलाने लगता अभय फिर पेहले वाले लरके हो पीछे एक किक मार उसे भी दूर फेक देता है अब अभय बचे दोनो लरको को घूर के देखता है दोनो लरके अभय की फाइट देख डर गये थे लेकिन फिर भी हिम्मत कर एक साथ अभय पे डंडे से हमला करते है अभय दोनो के डंडे को हाथो से पकर जोर से खिचता है दोनो लरके के हाथो से डंडा छुट जाता है लेकिन अभय ने ताकत से डंडे को अपनी तरफ खिचा था तो दोनो लरके उस फोर्स से अभय कि तरफ झुक जाते है अभय दोनो डंडे को पकर डंडे पे अपना वजन डाल एक जम्प मार दोनो के चेहरे पे अपना किक दे मारता है दोनो पीछे जाके गिरते है अभय एक डंडे को लेकर खरा सभी लरके को देखता है इतना हि सब के लिये काफी था

अभय गुस्से से तेज आवाज मे - सब सब जल्दी से मेरे सामने घुटनों पे आओ अभी तो मेने धीरे से मारा है ना तुम लोगो की हड्डी तोरी है लेकिन मेरी बात नही मानी तो

अभय ने इतना कहा हि था कि सभी दर्द मे जैसे तैसी चल के अभय के सामने घुटनों पे बैठ जाते है

अभय सभी को देख - तुम सब ये आते जाते लरकी औरतो को कब से छेररते आ रहे हो

लरका अभय को देख डरते हुवे 1 साल से
अभय गुस्से से - क्या तुम सभी ने किसी का रेप जैसा कुछ क्या है

सभी लरके - नही नही हमने ऐसा नही किया
अभय गुस्से से - सच बोल रहे हो
सभी लरके - मा कसम हम तो सिर्फ लरकी औरतो को देख उसपे कोमेंट करते थे

अभय सभी को घूर के देखता है और फिर - आगे से फिर ऐसा करोगे
सभी लरके अभय के पैर पे गिरते हुवे - नही आज के बाद हम गलती से भी ऐसा कुछ नही करेगे

अभय डंडे को फेकते हुवे - याद रखना मे इस रास्ते से आता जाता रहुंगा फिर मेने देखा तो अगली बार तुम सब कि हड्डी तोर दूंगा अब जाओ यहा से

अभय के कहते हि सब लरके भाग निकलते है

अभय फिर काजल के आप आ जाता है

काजल अभय को घूर के देख - तुमने ये फाइट करना कहा से सिखा
अभय काजल को देख - अच्छा ये फाइट मेने तो फिल्मो मे देखा वैसे हि किया तो बस हो गया
काजल तिरची नजर से अभय को देख - हलवा है क्या देख कर इस तरह की फाइट करना

अभय मन मे - ये तो पीछे हि पर गई जबकि मेने तो नॉर्मल फाइट कि

अभय बात बदलते हुवे जाके काजल को बाहों मे लेके - ये छोरिये मेरी सेक्सी बुआ एक किसी दे दीजिये ताकि मुंड फरेस् हो जाये
काजल शर्मा के - छोर मुझे हम रास्ते पे है कोई देखेगा तो किया कहेगा
अभय - क्या कहेगा

तभी अभय का फोन बजता है अभय काजल को छोर फोन देखते हुवे ये तो मा का फोन है
काजल- इस्पिकर् पे रखो

अभय - हा मा बोलिये
आसा गुस्से से - लाला ये पायल नाम की लरकी से आई थी क्या चल रहा है तुम दोनो का

आसा की बात सुन अभय को झटका लगता है सेम काजल को भी काजल तो अजीब नजर से अभय को देखने लगती है

अभय काजल को देख - इतनी अजीब नजर सी मुझे मत देखिये ( अभय आसा से) मा आप गलत समझ नही है मेरे उसके बीच कुछ नही है वो मेरे पीछे परी है लेकिन मे सब देख लूंगा

आसा - मेरी कसम खाके बोल तेरे उसके बीच कुछ नही है
अभय - आपकी कसम मा
आसा - तब ठीक है तुझे पता भी उसने आके हमे कितने झटके दिये है
अभय गहरी सास लेते हुवे - ऐसा कुछ नही है अब मे रखता हु

फोन कट
अभय काजल को देखता है काजल अभी भी अभय को अजीब नजर से देखे जा रही थी

अभय - बुआ ऐसे अजीब नजर से कियु देख रही है मुझे
काजल - कियुंकी तु तो ठरकी निकला
अभय आके कुछ बोलता तभी दिशा का फोन आता है जिसे देख अभय की फट के हाथ मे आ जाती है काजल अभय को डरता देख मुस्कुराते हुवे - लगता है तेरी बीवी का फोन है तेरे तो लग गये बेटे

अभय डरते हुवे - हा जान
दिशा गुस्से से - जान गई तेल लेने पेहले ये बताइये आपका और उस कमीनी का किया चक्कर चल रहा है ( दिशा रोते हुवे ) हे उपर वाले मेरा पति तो ठरकी धोकेबाज़ निकला अब मे किया करू बाहर मुह काला करते है और हमे पता भी नही चलने दिया आप बहोत गंदे बुरे है मे लूट गई बर्बाद हो गई अब मेरा किया होगा मुझे एक ठरकी के साथ पूरी जिंदगी गुजरानी होगी छोर भी नही सकती प्यार जो करती हु क्या क्या सपने सजाये थे क्या क्या आपको माना आपके लिये सोचती थी और आप तो ठरकी निकले ठरकी लरकी बाज
अभय बेचारा सर पकर पसीने से भीगे बस दिशा के गुस्से का सामना किये जा रहा था डाट सुने जा रहा था वही काजल पेट पकर जोर जोर से हसे जा रही थी

अभय अपना सर पकर - बस करो नाटक और ये ठरकी ठरकी किया लगा रखा है मे तो उस लरकी को भूल भी गया था बस सफर मे साथ थे मुझे क्या पता था वो घर आ जायेगी तुम्हारी कसम तुम ही हो मेरे दिल मे और मेरा किसी से चक्कर नही है

दिशा - सच केह रहे है आप
अभय - बोला तो सच्ची अब मे रखता हु
अभय गहरी सास लेते हुवे - मुझे अंदाज़ा नही था वो पागल लरकी घर आके बवाल मचा कर चली जायेगी

काजल अभय को देख हस्ते हुवे - क्या सच मे तेरा उस लरकी से
अभय काजल को देख - हा कुछ नही है उसे मे अच्छा लगा मेने उसे भाव नही दिया वो अमीर घर कि लरकी है उसके दिल मे मेरे लिये प्यार नही अट्रेक्संन है बस कियुंकी वो खूबसूरत थी कई लरके उसके पीछे परे रहते थे लेकिन मेने कोई भाव नही दिया मेरा इस लिये मुझे नही लगता उसे प्यार का असली मतलब पता भी है हा दिल की अच्छी है

काजल - तुम्हे कैसे पता उसका तुम्हारे लिये प्यार नही अट्रेक्संन है
अभय काजल को देख - बस फीलिंग आई उसकी आखो मे भी जो प्यार नजर नही आया जो मे मा गुरिया मधु सिला मा दिशा पूजा सासु मा विजय आपकी आखो मे देखता हु चाहे लोव वाला प्यार हो या कोई और प्यार हो आखे सब पता देती है

काजल अभय को देख मुस्कुरा देती है

अभय काजल को बाहों मे लेके - मेरा किस
काजल शर्मा के अभय के होठो पे किस करते हुवे - अब चले
अभय मुस्कुराते हुवे - हा

अभय फिर बाइक पे बैठ जाता है काजल फिर अभय से पूरा चिपक बैठ जाती है अभय फिर निकल परता है

( अभय के घर )

एक कमरे आसा मिनिता अदिति तोनो बैठे थे

मिनिता हस्ते हुवे - मुझे तो लगा था अभय ने पेहले भी किसी के साथ ( मिनिता अदिति को देख बात बदल के) लेकिन ऐसा कुछ नही था लरकी ही पीछे परी हुई है और ऐसा हो भी कियु ना अभय बेटा बहोत हैंडसम जो है

अदिति गुस्से से - मेरे भाई हैंडसम है तो क्या कोई ऐरी गैरी लरकी मेरे भाई के पीछे पर जायेगी दिल तो कर रहा था उसके मुह तोर दु
आसा - लगा तो मुझे भी था लेकिन बाद मे पता चला मेरा लाल का उस लरकी से कोई चक्कर नही है

अदिति मुस्कुराते हुवे - भाभी ने फोन से सब सुन लिया था मे भूल गई थी फोन चालू है भाभी बहोत गुस्से में थी वो तो यहा आके पायल को मारने वाली थी लेकिन पूजा ने रोक दिया

मिनिता हस्ते हुवे - गुस्सा तो होगी ही ना उसके पति पे कोई डोरे डालेगी तो
अदिति मुस्कुराते हुवे - पता नही भाभी मे भाई को कितना सुनाया होगा
आसा मुस्कुराते हुवे - अब भाई ये तो मिया बीवी ही जाने

( आरोही बंगलो )


आरोही के भाई मा पापा सब बंगलो पे सिफ्ट हो गये थे इतना बरा खूबसूरत बंगलो को देख सब हैरान और खुश भी थे

हॉल मे सभी बैठे थे

उदय भारती जगमोहन को देख - सास ससुर जी भले ही मे आपसे उमर मे बरा हु आपकी बेटी से भी लेकिन यकीन मानिये मे आपकी बेटी को बहोत खुश रखुंगा बाकी मेरे जाने के बाद ( उदय आरोही टीनू को देख) सब कुछ इन दोनो का ही होगा

जगमोहन - हमे कोई दिकत नही है दमाद जी
भारती - हा हमारी बेटी खुश है तो हम भी खुश है
उदय - आप का सुक्रिया अब से ये घर आपका अपना ही है आराम से रहिये बाकी मे किसी चीज की कमी नही होने दूंगा

( अभय काजल )

अभय काजल के घर आ चुका था और अभय काजल के साथ घर के बाहर खरा था

काजल अभय को देख - यही घर है तेरे बुवा का
अभय घर को देखते हुवे - अच्छा है

काजल के घर की हालत ठीक ठाक थी दीवार ईट की थी उपर कर्कट डाला हुवा था कमरे 5 पाच थे

काजल - उमर 40 साल - दो बच्चो कि मा
पति - गगन - उमर 42 साल
बेटी - रूमा - उमर 21 साल - एक बेटा है
बेटा - बिनोद - उमर 20 साल
बहु - ममता - उमर 19 साल - एक बेटी है

काजल -अभय को देख चलो अंदर
अभय - जी

काजल अभय को लेकर अंदर जाती है तो आगन मे ममता अपने बच्चे को गोद मे लेके बैठी हुई थी अचनाक् अभय को देख जल्दी से घूघट डाल लेती है और फिर काजल को देखती है

ममता - मम्मी जी आप आ गई
काजल - हा आ गई ( काजल अभय को देख) इससे मिलो ये है वो लरका जिसकी वजह से विजय आज जिंदा हमारे साथ है

अभय जाके ममता के पैर छुके - भाभी देवर को आशीर्वाद दीजिये
ममता - देवर खुश रहिये हमेसा और मेरे विजय देवर को बचाने के लिये आपका सुक्रिया
अभय - अरे इसकी कोई जरूरत नही है भाभी
काजल - अच्छा बाते बाद मे अभय बेटा जाके फ्रेस् हो जाओ
अभय - जी

काजल ममता को देख - मेरे तेरे वाले कहा है
ममता हस्ते हुवे -आपके मेरे वाले काम पे गये है
काजल हस्ते हुवे - अच्छा तो साम को हि आयेगे फिर

अभय फ्रेस् होता है और ममता खाना निकालती है काजल अभय को खाना देती है अभय बैठ खाने लगता है और खाते हुवे ममता को देख - भाभी खाना तो आप बहोत अच्छा बनाती
ममता - आपको पसंद आया खुशी हुई जान कर
काजल - मेरी बहु खाना बहोत अच्छा बनाती है
अभय मुस्कुराते हुवे - हा ये तो सही कहा आप ने

खाना पीना होने के बाद काजल को केह अभय गाव घूमने निकल परता है लेकिन अभय 10 मिनट मे ही वापस लौट आता है कियुंकी दोपहर का समय था घूमने का मजा साम को ही आता है

अभय अंदर जाता है काजल अभय को दिखाई नही देती तो अभय ममता के कमरे के पास जाके - भाभी मे अंदर आ सकता हु

ममता - आ जाइये देवर जी
अभय अंदर जाता है ममता बिस्तर पे बैठी हुई थी बच्ची सो रही थी
अभय ममता के पास बैठते हुवे - मे अपनी भाभी का खूबसूरत चेहरा देखने आया हु
ममता मुस्कुराते हुवे - अच्छा जी देख दीजिये फिर मना थोरि है
ममता के कहने के के बाद अभय घुघट उठा के ममता के चेहरे को देखते हुवे

अभय - भाभी आप सच मे बहोत खूबसूरत है चाँद की तरह भइया के तो रोज मजे ही मजे ले रहे होगे
ममता सर्म से लाल अभय को प्यार से गाल पे मारते हुवे - अच्छा जी आप बहोत नटखट लगते है मुझे
अभय मुस्कुराते हुवे - सही पहचाना
अभय अपने पॉकेट से एक डब्बा निकाल ममता तो देते हुवे - ये आपके देवर की तरफ से मुह दिखाई है
ममता उस धब्बे को लेकर खोल के देखती है एक खूबसूरत लेक्लेस् था

ममता अभय को देख - देवर जी इसकी क्या जरूरत थी ये मेहगा भी लग रहा है
अभय मुस्कुराते हुवे - ये बताइये आपको पसंद आया गिफ्ट
ममता -हा बहोत खूबसूरत है मुझे पसंद आया
अभय - तो फिर जायदा मत सोचिये
काजल अंदर आते हुवे मुस्कुरा के - हा बहु जायदा मत सोच देवर कुछ दे तो रख लेना चुप चाप
ममता मुस्कुराते हुवे - ठीक है फिर
अभय खरा होते हुवे काजल को देख - कहा गई थी आप
काजल - परोसी से मिलने गई थी


( साम 3 बजे )

काजल अभय को खेत दिखाने लेकर जाती है अभय काजल बाते करते हुवे खेतो मे घुम रहे थे खूबसूरत नजारे को देख रहे थे

अभय - बुआ गाव मे जो सुकून सांत और खेतो मे लहराते फसल को देखने मे जो सुकून मिलता है वो सेहरो मे नही मिलता अच्छा हुवा मे गाव मे पैदा हुवा मेरा घर गाव मे है

काजल मुस्कुराते हुवे - तेरी बात सही है बेटा गाव की बात ही अलग है
अभय पीछे मुर काजल को बाहों मे लेके आखो मे देख - और आपकी भी
काजल शर्मा के - चल छोर मुझे
अभय काजल को छोर देता है दोनो घूमते है बाते कर घर आ जाते है


( साम 5 बजे )

गगन बिनोद दोनो आ चुके थे आँगन मे बैठ बाते हो रही थी

गगन - बेटा तुम सच मे बहादुर हो तेरी वजह से आज कई बच्चे अपने परिवार के पास है और मेरे साले साहब के बेटे भी

अभय - फूफा जी मेने कुछ नही क्या मुझे तो बस अपनी मा गुरिया भाई के पास जाना था तो अब हो गया
बिनोद - हो नही गया छोटे उसके लिये भी बहोत हिम्मत और दिमाग चाहिये जो तेरे अंदर थी
काजल - बात तो तुमने सही कही बेटा खैर जितनी भी मा के बच्चे आज उसके पास है सब अभय बेटे के कर्ज दार होगे
गगन - ये भी के कहने की बात है

ऐसे ही इनके बीच बाते होती रहती है

( रात 9 बजे )

खाना खाने के बाद अभय अपने कमरे मे आके बिस्तर पे लेत मा को फोन लगा देता है

अभय - मेरी सेक्सी मा खाना खा लिया आपने
आसा बिस्तर पे लेती - हा खा लिया तु बता वहा सब कैसे है
अभय अपनी मा को सब बता देता है
आसा - अच्छा है आज तु नही है मेरे पास तो आज होता तो
अभय मुस्कुराते हुवे - आपके उपर लेता बाते कर रहा होता
आसा हस्ते हुवे - हा सही कहा
अभय - आज कोन की कलर की नाइटी पहनी है आपने
आसा थोरा शर्मा के - रेड
अभय - तब तो बहोत सेक्सी लग रही होगी
आसा शर्मा के - अच्छा जी
अभय - हा जी अब मुझे किस्सी दो ना मा
आसा शर्मा के - पागल फोन पे कोई किस्सी कैसे देगा
अभय उम्मा - ऐसे
आसा जोर जोर से हस्ते हुवे - आज कल के किस्सी ऐसे भी दी जाती है अच्छा ये ले उम्मा अब खुश
अभय - हा बहोत खुश गुड नाइट मा अब मे गुरिया से बात कर लेता हु
आसा - गुड नाइट लाला

फोन कट

आसा बिस्तर पे लेती अपने पेट को देखते हुवे - लाला होता हो बच्चो कि तरह मेरे उपर लेता होता आज नही है तो दिल मेरा उदास है

अभय - मेरी गुरिया क्या कर रही है
अदिति - आपको याद कर रही थी की मेरा भाई मुझे भूल तो नही गया
अभय हस्ते हुवे - मे भला अपनी खूबसूरत गुरिया को कियु भूल जाऊ
अदिति - मुझे पता है आप कभी भूल नही सकते आपने खाना खा लिया
अभय - हा खा लिया
अदिति - मा से बात भी कर ली होगी
अभय मुस्कुराते हुवे - सही कहा
अदिति - भाभी कैसी लगी
अभय - खूबसूरत है
अदिति - मुझसे जायदा
अभय मुस्कुराते हुवे - मेरी गुरिया से जायदा नही
अदिति - खुश होते हुवे हा सही कहा आप ने
अभय - अच्छा गुरिया सो जाओ गुड नाइट मधु से बात करनी है
अदिति - जी भाई लेकिन मेरी किस्सी
अभय मुस्कुराते हुवे - उम्मा अब सो जाओ
अदिति - आई लोव यू भाई
अभय - आई लोव यू तु गुरिया

फोन कट

मधु - भाई आपको ही याद कर रही थी आपने फोन कर दिया
अभय मुस्कुराते हुवे - मेरी गुरिया याद करे मे कैसे ना करू किया कर रही हो
मधु - क्या करुगी भाई फिल्म देख रही थी
अभय - अच्छा और मा
मधु - मा पापा तो सो गये होगे
अभय - अच्छा तुम रात को क्या पेहन कर सोती हो
मधु थोरा शर्मा के - नाइट गाउन कियु भाई
अभय हस्ते हुवे - कभी देखा नही ना रात को सोते हुवे इस लिये
मधु शर्मा के - अच्छा
अभय - नाइट गाउन मे तुम उस दिन से जुयाद अच्छी लग रही होगी
मधु की सासे तेज दिल की धरकन तेज हो जाती है
मधु शर्मा के - भाई कब तक आप मुझे परेसान करेगे
अभय - नही करुगा बाबा अच्छा सो जाओ तेरी भाभी से बात भी करनी है गुड नाइट
मधु - गुड नाइट भाई

फोन कट

मधु फोन रख मन मे - उस दिन से आज नाइट आउन मे मै कैसे अच्छी लग रही होगी भाई भी ना बस मेरे मजे लेते रहते है

दिशा - आ गई याद सब से बाते करने के बाद ही मेरे पास फोन आया है
अभय मुस्कुराते हुवे - मेरी जान सब हम से छोटे बरे है हम बीच के है तो करना परेगा ना
दिशा - हा जानती हु वहा के बारे मे बताइये
अभय सब बता देता है
दिशा - अच्छा
अभय - तुम बताओ किया पेहना है
दिशा - नाइटी पहनी है कियु
अभय मुस्कुराते हुवे - अंदर मे कुछ नही पेहना
दिशा शर्मा के - छी गंदे मुझे पता था आप गंदी बाते करेगे
अभय - लो बीवी से हि तो कर रहा हु गंदी बात
दिशा शर्मा के - अच्छा बाबा ठीक है
अभय - जान मन कर रहा है तुम्हारी चूत मे डालने का
अभय की बात दिशा कि चूत गीली कर देती है
दिशा शर्मा के - ऐसी बाते मत करो ना फिर रात को नींद नही आयेगी
अभय -ये बात भी सही कहा अच्छा मेरी जान सो जाओ गुड नाइट
दिशा - आई लोव यू गुड नाइट

फोन कट

( आरोही बंगलो )

उदय नँगा लेता हुवा था आरोही उदय के ऊपर उदय का लंड अपनी चूत मे लिये चुद रही थी सवारी करते हुवे मजे अपनी गांड उपर नीचे कर घपा घप लंड अपनी चूत की गहराई मे लेते हुवे उदय को देख - आह आपका लंड लिये बगैर मेरी चूत जलती रहती है


U4-Azj-E6-GRTy-Ls-B1a-Trim
uउदय -मेरी जान तेरी चूत पे बहोत गर्मी है धीरे धीरे जायेगी ( आरोही मजे से लंड लेते हुवे - आह मा हा सही कहा आपने मेरे राजा
उदय फिर आरोही को बिस्तर पे लेता के - धना धन जोर जोर से धक्का मारने लगता है


nefy-P0-TOH6-Hf-ULES-Trim
आरोही दर्द मे आखो मे आसु लिये - माई रे मर गई मेरी चूत आह बहोत दर्द कर रहा है धीरे मेरी जान ( उदय धक्का मारते हुवे - मेरी जान मुझे तो तेज चुदाई हि पसंद है ( आरोही - आह मा अच्छा मुझे भी पसंद आ गई आह लेकिन आह ये दर्द आह आपका लंड मेरी चूत मे जाके आह लग रहा है आह लेकिन अब मे झरने वाली हु

चुदाई के बाद दोनो चिपके हुवे थे

उदय - मेरी जान तेरी गर्म चूत का जवाब नही मजा आ जाता है
आरोबि उदय को देख मुस्कुराते हुवे - मुझे भी मजा आता है जब आपका लंड मेरी चूत को फैलाते हुवे अंदर जाता है
उदय - सास सासु मा मान गये लेकिन दोनो को हमे अपने इस माहौल मे डालना और अपने जैसा बनाना होगा
आरोही - समझ रही हु ताकि मा पापा हम जो करे हमे रोके नही बल्कि हमारा साथ दे और
उदय मुस्कुराते हुवे - हा नही तो एक दिन उन्हें सच पता चल ही जायेगा
आरोही - ठीक है फिर

( काजल के घर )

अभय गहरी सास लेते हुवे - चलो सब से बात कर ली अब सो जाते है
लेकिन तभी काजल कमरे मे आते हुवे - सो गये क्या

अभय काजल को देख मुस्कुराते हुवे - आइये सोया नही सोने जा रहा था
काजल अभय के पास आके बिस्तर पे लेत - तो कल सुबह चले जाओगे
अभय - जाना तो परेगा आप छोर दिया कार्ड भी दे दिया अब मेरे दोस्तो से मिलने के बाद घर पे भी बहोत काम है
काजल अभय की तरफ पलट अभय को देख - हा जानती हु शादी का घर है तो बहोत काम तैयारी करनी होती है

अभय भी पलट कर काजल के बिल्कुल चेहरे के पास अपना चेहरा करते हुवे - आपने सही कहा

अभय फिर काजल के होठो को देखने लगता है
काजल शर्मा के - किया देख रहे हो
अभय - आपके होठ मुझे गीली वाली किस्सी चाहिये
अभय ये केहना नही चाहता था लेकिन काजल के होठ देख अभय के मुह से निकल जाता है

काजल हैरान गुस्से से अभय को देख - क्या बोला मुझे आज तक तेरे फूफा ने छोटा किस नही किया लेकिन मेने तुझे दी करने दिया आज तक किसी की हिम्मत नही हुई मुझे सेक्सी हॉट कहने कि मेरे बेटे को भी नही लेकिन तुझे कहने दिया कियुंकी मुझे तुम दिल के अच्छे लगे लेकिन आज तुम मुझसे वैसे वाले किस मांग रहे हो तेरा दिमाग ठिकाने पे तो है ना ( काजल बहोत गुस्से मे थी लेकिन धीरे ही बोल रही थी ताकि कोई आवाज सुन ना ले)

अभय को अब एहसास होता है उसने क्या बोल दिया जो बोलना नही चाहिये था

अभय डरते हुवे काजल को देख - बुआ मेरी
काजल गुस्से से - बस बंद करो अपना नाटक मुझे लगा नही था तेरे भोले चेहरे के पीछे एक गंदा चेहरा छिपा है

काजल उठ कर बैठते हुवे - मेरी ही गलती थी जो तुझे इतनी छुट देदी और आज अपना रंग तूने दिखा दिया दिल तो कर रहा है मेरा तेरे गाल लाल कर दु लेकिन छोर दे रही हु दुबारा मेरे नजदिक भी मत आना

काजल ये केह चली जाती

अभय पथर कि तरह जैसे के तैसे परा रेहता है लेकिन आखो से आसु निकल परते है अभय अपना पैर मोर सिकुर् कर सिसक सिसक कर रोने लगता है अभय आधे घंटे तक बहोत रोता है कपड़े बिस्तर अभय के आसु से गीले हो जाते है

नोट - अभय जितना ताकतवर है उतना ही दिल का कमजोर भी है अभय मधु को नँगा देखा उसके बाद से अभय मधु के मजे लेता लेकिन अभय के दिल मे मधु के लिये कोई गंदी फीलिंग नही है अभय मिनिता सिला तारा पूजा यहा तक की अपनी मा को वाइल्ड किस करते वक़्त भी अभय का दिल मन साफ था अगर नही होता तो अभय आसा के ऊपर था लंड खरा होता और आसा को पता चल जाता लेकिन ऐसा था अभय के मजाक बाते भले हि अजीब लगे लेकिन अभय सिर्फ मस्ती मजाक मे ही करता था हा हो सकता है आगे कभी किसी के साथ दिशा अभय का जो मोमेंट बना फिर दोनो के बीच सब हुवा वैसे मे आगे अभय का किसी के साथ हो जाये एक और बात थी अभय किसी के साथ कब कुछ कर दे उसे भी नही पता था
लेकिन फिल्हाल अभय का दिल सब के लिये साफ हि था
अब यही वजह से अभय को बहोत बुरा लगा उससे जायदा बुरा काजल मे अभय को एक बात सफाई भी नही देने दिया और गुस्सा करती रही यही बात अभय को रूला रही थी अभय ने काजल को अपनी सगी बुआ माना था अभय की भी एक गलती थी वो कर किसी को मा की तरह हि सोच देख लेता है जबकि मा का प्यार बाकी सब का प्यार सोच अलग होती है लेकिन ये सीन अभय को एक सबक सिखा गई थी


आज के लिये इतना ही 🙏🙏🙏
Badhiya shaandar update
Payal ne tow seedha aakar dhamal macha dia tha Lekin Abhay ki Shaadi ki BAAT jaankar Thandi pad gayi
4 laundo ko achcha sabak Mila ab dubara koyi Galat harkat nahi karenge
Bua tow seedha aag babula ho gayi apni suna daali Lekin Abhay ki suni hi nahi
Lekin yeh bhi hona zaroori tha ek sabak mil gaya ki sab log ek jaise nahi hote
Baherhal dekhte h aage kia hota h
 

ajay bhai

Member
306
2,277
124
chapter 24

सुबह 9 बज चुके थे लेकिन अभय सोया हुआ था काजल अभय के कमरे मे आके देखती है अभय को सोता देख फिर चली जाती है

फोन की रिंग बजती है तो अभय जी नींद खुलती है अभय उठ कर बैठते हुवे नंबर देखता है और फोन उठा कर

अभय - गुड मोर्निंग प्यारी मा
आसा - लाला अभी सो कर उठा है किया
अभय - हा मा रात को देर तक बाते कर सोया इस लिये
आसा - अच्छा ये बात है
अभय - मा किस्सी
आसा मुस्कुराते हुवे - उम्मा पहोच गई किस्सी मेरी तेरे पास
अभय हस्ते हुवे - हा बहोत मोठा किस्सी था
आसा हस्ते हुवे - शैतान
अभय - अच्छा मा बाद मे बात करते है
आसा - हा ठीक है बाय

फोन कट

अभय बाहर आता है तो तो देखता है ममता अपनी बेटी को दूध पिला रही है ममता अपनी सारी से अपनी बेटी चुचे को धक रखा था

ममता की नजर अभय पे जाती - अरे देवर जी उठ गये क्या आप हमेसा इतनी लेत उठते है

अभय ममता के पास जाके चेहरे मे इस्माइल् लाते हुवे - अरे नही भाभी मे रोज सुबह उठ जाता हु लेकिन क्या है ना रात को सब से बात करते हुवे देर से सोया इस लिये

ममता अभय को देख मुस्कुराते हुवे - गर्लफ्रेंड तो जरूर होगी आप इतने हैंडसम जो है मुझे लगता है रात को गर्लफ्रेंड से ही देर तक बाते की होगी इस लिये लेत उठे

अभय हस्ते हुवे - अरे नही भाभी मेरी कोई गर्लफ्रेंड नही है वैसे भी मेरी सादी फिक्स हो गई है ऐसे मे बाहर चक्कर चलाता हु तो मेरी बीवी को बता चला तो वो मुझे डोरा डोरा कर मरेगी

अभय की बात सुन ममता जोर जोर से हस्ते हुवे - हा ये बात आपने सही कही है

अभय हस्ते हुवे - इसी लिये मुझे मार नहीं खानी अच्छा भाभी मे आता हु
ममता - जी

काजल कमरे के दरवाजे पे खरी अभय ममता जो बाते करते देख सुन रही थी लेकिन काजल आगे नही आती अभय से बात करने

अभय काजल के साथ घूमने गया था तो अभय को पता था कहा जाना है हल्का होने अभय थोरि दूर एक पोखर था वही जाके हल्का होता है और वापस घर जाने लगता है लेकिन रात की घटना काजल की कही बात अभय की याद आ रही थी

अभय घर आके नहा कर रेडी होता है खाना रेडी था अभय बैठ खाना खा रहा था ममता अभय के पास ही बैठी हुई थी अभय खाना खाते हुवे ममता को देख

अभय - भाभी मेरी प्यारी भतीजी का नाम क्या रखा है आपने
अभय की बात सुन ममता अपनी बेटी को प्यार से देखते हुवे - आपकी प्यारी भतीजी का नाम - पूनम है
अभय - बहोत प्यारा नाम है पूनम
ममता - हु

खाना पीना होने के बाद अभय कमरे मे आके अपना बैग लेके बाहर आता है आगन मे ममता काजल खरे थे अभय एक नज़र भी काजल को नही देखता लेकिन काजल देख रही थी

ममता अभय को देख - देवर जी आप जा रहे है इतनी जल्दी क्या है साम को चले जाइये गा
अभय मुस्कुराते हुवे - अरे नही भाभी मुझे जाना होगा रुक नही सकता
ममता काजल को देख - मम्मी जी आप कुछ बोलिये ना

काजल अभय को देखती है अभय नजरे दूसरी तरफ किये था
काजल - बहु अभय बेटे को और भी जगह जाने है इस लिये जाने दो

अभय जल्दी से काजल ममता के पैर चुके - बाय बुआ भाभी

अभय फिर बाहर आके बाइक पे बैठ घर को देख एक गहरी सास लेते हुवे - चलो चलते है

अभय फिर बाइक चालू कर निकल परता अभय जब जा रहा था तो काजल देख रही थी अभय जब काजल की नज़र से दूर चला जाता है तब काजल अंदर चली जाती है

अंदर काजल जब जाती है तो ममता - मम्मी जी देवर जी कितने अच्छे थे ना कितनी अच्छी बाते मस्ती मजाक करने वाले लगे मुझे

काजल ममता को देख - हा सही कहा

( जीतू जीतू फोन पे )

जीत - बॉस आ रहे है
जीतू - मे तो बॉस से मिलने के लिये बेकरार हु
जीत - मे भी मेरे घर वाले भी
जीतू - सेम भाई और बॉस कि सादी मे नाचने के लिये भी
जीत - हा यार बात तो तूने सही कही
जीतू - यार क्या कभी हम बॉस को फिर वही shadow वाले रूप मे देख पायेंगे
जीत - कमीने तुमने किया बोल दिया
जीतू - अबे गढ़े किसी को पता नही चलेगा बता है ना हम कैसे बाते करते है
जीत - कमीने मे उसकी बात नही कर रहा मे बॉस के shadow वाले रूप की बात कर रहा हु जब बॉस shadow बनते है तो सिर्फ खून कि होली खेली जाती है बॉस shadow के रूप मे तभी आते है जब बॉस किसी को मारने का सोच लेते है
जीतू - हा जानता हु लेकिन बॉस को shadow रूप मे फिर से देखने के लिये मेरा दिल मचल रहा है
जीत - सच कहु तो मेरा भी
जीतू - अच्छा सुन खाने बॉस आने वाले है तो पार्टी का इंतज़ाम करना होगा
जीत - जानता हु चिंता मत कर हो जायेगा
जीतू - चल ठीक है बॉस जल्दी ही आने वाले होगे रेडी रेहना
जीत - ठीक है

फोन कट

( उदय बंगलो )

सुहाना जिस बंगलो मे रेह रही है वो टीनू का था जो अब सुहाना का हो गया है अब सुहाना अपनी मा पापा भाई के साथ रेह रही है
वही उदय का भी अपना एक बंगला है यहा उदय मौज करता है आज उदय जगमोहन को लेके आया था दोनो बैठे बाते कर रहे थे

जगमोहन - दमाद जी ये बंगला भी बहोत बरा खूबसूरत है
उदय - ससुर जी आपको पसंद आया तो आप रख लीजिये
जगमोहन हैरानी से - अरे नही नही आपने हमे पेहले ही बहोत कुछ दे दिया है
उदय - ससुर जी अब हम एक परिवार है आपका मेरा कुछ नही
उदय फिर रेड वाइन निकाल जगमोहन को देता है - लीजिये
जगमोहन वाइन लेते हुवे - बहोत मेहगी लग रही है
उदय - आपकी बात सही है लेकिन आप इसके बारे मे कियु सोच रहे है अब तो रोज पीने मिलेगी
जगमोहन उदय को देख - हा आपकी वजह से अब हम एक अच्छी लाइफ जी पायेंगे
उदय ग्लास आगे करते हुवे - तो इसी बात पे हो जाये
जगमोहन उदय मुस्कुराते हुवे दोनो अपना ग्लास तकराते है फिर वाइन गटक जाते है

उदय एक बंदे को इसारा करता है बंदा समझ जाता है और ठोरी देर बाद बंदा एक खूबसूरत जवान लरकी को लेकर आता है

जगमोहन लरकी को देख - दमाद जी ये लरकी कोन है
उसय मुस्कुराते हुवे - ससुर जी ये आपको मजे के लिये है सिल पैक
जगमोहन थोरे नशे मे जरूर था लेकिन पुरे होस मे था
जगमोहन गुस्से से उदय को देख - दमाद जी ये क्या घटिया हरकत है मुझे लगा नही था आप इतने गिरे इंसान होगे और आपको लगता है मे इतना गिरा हुवा हु जो अपनी बीवी को धोका देकर एक अपनी बेटी के उमर की लरकी के साथ छी आपने ये सोच भी कैसे लिया

उदय सांत रेहता है और लरकी को देख इसारा करता है लरकी इशारा समझ अपने एक एक कपड़े निकाल पुरा नँगा होके खरी हो जाती है
जगमोहन जैसे ही लरकी को पुरा नँगा देखता है जगमोहन का मन फिसलने लगता है


Gtds2h-Qbo-AA-C3-H
जगमोहन आखे फ़ारे अपनी बेटी के उमर की लरकी के पुरे नंगे अंग को देखे जा रहा था लरकी सच मे खूबसूरत के साथ उसकी बॉडी भी कमाल की थी जगमोहन लरकी के बरे चुचे चूत को देखता रेहता है जगमोहन का लंड अब खरा हो जाता है

उदय जगमोहन को ऐसे आखे फ़ारे लरकी को देख समझ जाता है उसके ससुर का मन ढोल गया है

उसय कमरे से जाते हुवे - ससुर जी अब आप अमीर है और टॉप बिजनसमैंन के दमाद भी तो लाइफ अच्छे से मजे से जीने कि आदत दाल लीजिये मे बाहर हु मजे लीजिये

उदय दरवाजा बंद कर बाहर हॉल मे आके मुस्कुराते हुवे बैठ वाइन पीते हुवे - मे कमीना तो आपको भी कमीना बनना होगा ससुर जी तभी तो जोरि हमारी जमेगी

उदय एक घुट पीने के बाद सुफे पे टेक लगाते हुवे - दुनिया मे पता नही कितने लोग अपने आप को अच्छा इमानदार मानते है या अपने आप को समझते है लेकिन जब फायदा कही से मिलता है तो तुरंत गिरगिट की तरह बदल जाते है बस एक मोक्का मिलते ही अपनी इमानदारी खुदारि ईमान मान मर्यादा लार्ज सर्म सब छोर देते है हम इंसान ऐसे हि होते है

कमरे मे जगमोहन लरकी को ही देखे जा रहा था लरकी जगमोहन के पास आके जगमोहन के हाथ पकर अपने चुचे पे रख देती है जगमोहन लरकी के चुचे को नजदिक से देख पागल हो जाता है जगमोहन लरकी के चुचे को कापते हाथो दबाने लगता है लरकी आह उह्ह् करती है लरकी की आह उह्ह् वाली आवाज सुन जगमोहन पुरे जोस से भर जाता है


tumblr-m3gn40-HOh-L1ruej7xo1-250
और जोर जोर से लरकी के चुचे दबाने लगता है लरकी आह उह्ह् करती रहती है जगमोहन मन मे - आह मेरी बेटी की उमर की है लेकिन आह क्या कयामत है उसके चुचे दबाने मे मजा आ रहा है आह

लरकी फिर धीरे से लीचे बैठ जगमोहन का लंड बाहर निकाल जगमोहन को प्यार से देखती है और जगमोहन का लंड हाथ से पकर जिब से चाटती है फिर मुह मे लेके मजे से चूसने लगती है


blowjob-001-7
जगमोहन का पेहली बार था जब कोई उसके लंड को मुह मे लेके चूस रहा था जगमोहन को ये नया एहसास पागल और नई मजे कि दुनिया पे ले जा रहा था जगमोहन लरकी के बाल का पकर आखे बंद किये मजे से - आह करती रहो मजा आ रहा है आह क्या आज तो मजा आ गया लंड चुसा भी जाता है आज पता चला आह उफ्फ 1 मिनट बाद

जगमोहन रुक जाओ

लरकी रुक जाती है औद् जगमोहन को देखती है फिर बिस्तर पे जाके टांगे फैला के लेत जाती है और उदय को देखने लगती है


Gbd7-Vpha-AAAis01
उदय लरकी को ऐसा करता देख सामने का सीन देख जगमोहन के लंड से पानी टपक परता है जगमोहन अपना लंड पकर लरकी के पास जाके लरकी के ऊपर लेत जाता है


Gy-ZYF65-Wc-AE0-GUG
उदय लरकी के चूत पे लंड रख लरकी को देखता है लरकी बस मुस्कुराते हुवे जगमोहन को देखते हुवे - दाल दीजिये

लरकी के केहते ही जगमोहन एक जोर का धक्का मारता है जगमोहन का 7 इंच का लंड लरकी के सील को तोरते हुवे पुरा अंदर घुस जाता है लरकी दर्द मे जोर से चिल्लाते हुवे रोने लगती है आखो से आसु निकल आते है लरकी अपने पैर दर्द से मारने लगती है


Z5-Ppt-Cco68-VX849m-Trim
जगमोहन को फिल होता है टाइट गर्म चूत जिसके अंदर उसका लंड है जगमोहन बिना रुके धक्का मारना सुरु कर देता है लरकी बिस्तर पकरे रोये जा रही थी लेकिन जगमोहन को रुक नही नही थी 3 मिनट बाद

जगमोहन कपड़े पेहन बाहर निकल आता है लरकी आखो मे आसु लिये बरी मुश्किल से उठती है और अपने कपड़े पेहन रेडी हो जाती है उदय का एक बंदा आता है और लरकी को लेके चला जाता है

( अभय ) दोपहर 12 बजे

अभय एक रोड साइड होटल मे आके बैठ नास्ता करने मे लगा हुआ था साथ मे दिशा से बाते भी कर रहा था

दिशा - कितने गंदे है आप खुद बैठ कर समोसे मिठाई खाके मजे ले रहे है और मुझे पता रहे है
अभय हस्ते हुवे - अरे बाबा तो साली जी से मगा के खा लो ना
दिशा मुह फुलाते हुवे - अब तो खाना ही परेगा आपके मुह मे पानी जो ला दिया है
अभय धीरे से मुस्कुराते हुवे - नीचे से तो पानी नही निकल आया ना
दिशा सर्म से लाल - छी छी गंदे फिर सुरु हो गये बिना गंदी बाते किये आपको रहा नही जाता
अभय हस्ते हुवे - ये बताओ मेरी प्यारी साली साहिबा क्या कर रही है
दिशा - क्या करेगी फोन मे गेम सीरियल देखती रहती है
अभय - अच्छा सुनो वापस आते वक़्त मिलने आयुगा तब थोरा मजे लेकर ही घर जाउंगा
दिशा शर्मा के - आप भी ना
अभय - अच्छा सुनो मे रखता हु
दिशा - जी ठीक है

फोन कट

अभय नास्ता कर बाइक लेके फिर निकल परता है 1.30 मिनट बाद अभय आखिर कार जीतू के पास पहोच ही जाता है अभय जीतू के गाव के छोटे चोक मे था और जीतू अभय को लेने आया था

जीतू अभय को देख बहोत खुश हो जाता है अभय बाइक से नीचे उतर जाता है जीतू अभय दोनो गले मिलते है

अभय जीतू को देख - कैसा है
जीतू खुश होते हुवे - बॉस आपकी कृपा से सब अच्छा है
अभय - जीत कहा है
जीतू - बॉस वो घर पे है
अभय - ठीक है चलो चलते है
जीतू - जी बॉस

जीतू अपने बाइक पे बैठ आगे जाने लगता है अभय जीतू के पीछे 2 मिनट मे ही अभय जीतू के घर के बाहर था

जीतू का घर भी घास फुस का था लेकिन ठोरी दूर जीतू का नया घर बन रहा था यानी काम चालू हो चुका था

जीतू - बॉस नया घर बनवा रहा हु
अभय देखते हुवे - बहोत खूब मेरी किस्मत अच्छी थी गाव मे ही बंगलो मिल गया
जीतू - चलिये बॉस अंदर
अभय - चलो

जीतू - उमर 19 साल -


8d0511c9ff5e3840fec2dc3d54905810
मा -कमला - उमर 40 साल


F-E-KSUW0-AAh3-Bz
पिता - जोगी - उमर 41 sal
बेहन - रूबी - उमर 18 साल


Gy-Wza32aw-AAGh-W
अभय जब अंदर जाता है तो कमला रूबी अभय को देख बहोत खुश हो जाते है हो भी कियु ना अभय की वजह से आज जीतू उनके पास है कमला अभय के गले लगते लग रोते हुवे
कमला - बेटा तु आ गया आज तेरी वजह से मेरा बेटा हमारे पास है हम सब तेरे कर्ज दार रहेगे बेटा सुक्रिया तूने एक मा को बेटा एक बेहन को भाई एक पिता को बेटा खोने से बचा लिया
अभय कमला के पीट सेहलाते हुवे - ऑन्टी रोना बंद कीजिये अकेले मेने कुछ नही क्या जीतू जीत सब ने मेरा साथ दिया
कमला अभय से अलग होते हुवे अभय को देख - जो भी हो सच ये है तुम ही हो जिसकी वजह से कई बच्चे आज अपने परिवार के साथ है

रूबी अभय के गले गलते हुवे रोते हुवे - आपका सुक्रिया भइया मेरे भाई को बचाने के लिये
अभय रूबी के सर पे प्यार से हाथ फेरते हुवे - रोना बंद करो रोते हुवे तुम अच्छी नही लगती हो
रूबी अभय से अलग होके आसु साफ करते हुवे - सच मे क्या
अभय हस्ते हुवे - हा

जीतू भी सब सीन देख बहोत खुश इमोसनल भी हो गया था

जीत का घर जीतू के घर से 1 घंटे के दूरी पे था और दोनो का घर अभय के घर से 3 घंटे की दूरी पे था

अभय सभी के साथ बैठ कर बहोत सारी बाते करने लगता है

कमला - बेटा वैसे तो जीत जीतू ने मुझे सब पता दिया है वहा किया कैसे हुआ किसने सोचा था कोई कमीना बच्चो को इस तरह से किडनैप करता होगा
अभय - ऑन्टी इस दुनिया हर बुरे काम होते है कुछ ऐसे भी इंसान होते है जो अपनी लालच और अपनी खोवाइस पुरी करने के किये कुछ भी कर जाते है
कमला - हा बेटा तूने सही कहा जब जीतू गायब हुआ बहोत ढूढने के बाद नही मिला तो क्या बताऊ ( केहते हुवे कमला रो देती है)
जीतू - मा रोना बंद करो अब तो मे हु ना आपके पास
कमला आसु साफ करते हुवे - हा लेकिन वो मनहुस पल याद आते ही रोना आ जाता है
अभय - ऑन्टी जिंदगी ऐसी ही होती है कब क्या हो जाये कहा नही जा सकता सब भूल जाइये

ठोरी देर अभय कमला रूबी से बाते कर जीतू के साथ बाहर आता है

जीतू - बॉस ये कमीना जीत आया नही जबकि उसको पता था आप आ चुके है
अभय - अरे आ जायेगा

तभी जीत बाइक लेके आ जाता है
जीतू - कमीने अब आ रहा है
जीत जल्दी से बाइक लगा के अभय को गले मिलते हुवे - बॉस माफ करना थोरा लेट हो गया
जीत अभय को देख - बॉस मेरी आखे तरस गई थी आपको देखने के लिये
अभय जीत के सर पे मारते हुवे - मे कोई लरकी हु जिसे देखने के लिये तेरी आखे तरस रही थी
जीत अपना सर सेहलाते हुवे - नही बॉस आपके सामने लरकिया भी कुछ नही है
जीतू - बस कर चल बॉस को गाव घुमा देते है
जीत - हा कियु नही

फिर अभय जीत जीतू गाव घूमते हुवे बहोत सारी बाते करते है आगे क्या कैसे करना है उसको लेकर भी बाते होती है

साम 7 बजे

आँगन मे रूबी खाना बना रही होती है और अभय कमला जोगी जीतू बैठे बाते करने लगते है जीत नही था अभय ने जाने के लिये केह दिया था कियुंकी अभय सुबह जीत के घर जाने ही वाला था

जोगी - बेटा अभय तुमहारा हम बहोत बेसबरी से इंतज़ार कर रहे थे आज आये भी तो अपनी सादी के कार्ड लेके बहोत अच्छे
अभय मुस्कुराते हुवे - क्या करू अंकल मा पीछे पर गई सादी के लिये
कमला हस्ते हुवे जीतू को देख - मे भी जीतू के पीछे परने वाली हु इसकी भी सादी जल्दी ही करानी होगी ताकि मे हमे प्यारा पोता पोती दे दे जल्दी से
जीतू थोरा शर्मा के - मा आप भी ना
कमला हस्ते हुवे - मे मजाक नही कर रही एक बार घर बन जाये फिर देखना कैसे तेरी सादी करवाती हु
अभय मुस्कुराते हुवे - जरूर करवाना ऑन्टी मे भी आपके साथ हु
रूबी हस्ते हुवे - मे भी आपके साथ हु मुझे भी भाभी चाहिये जल्दी से
जीतू - तुम सब क्या बाते लेके बैठ गये
जोगी - वो बाते हो रही है सही है समझा और अभय बेटा तुमने हमपे एहसास किया है कभी नही भुलेगे हमारा एक हि बेटा घर का चिराग था लेकिन तुम से उस चिराग को बुझने से बचा लिया सुर्किया बेटा
कमला - हा आपने सही कहा नही तो हमारा क्या होता
अभय - बस भी करिये अब जीतू है यहा
ऐसे ही बाते सभी के बीच होती रहती है फिर खाना रेडी होता है सब मिल कर खाना खाते है फिर ठोरी बाते होती उसके बाद सब अपने कमरे मे चले जाते है

अभय कमरे मे

अभय अपनी मा अदिति से बाते करने के बाद दिशा पूजा सासु से बात करने मे लगा हुआ था

अभय - साली जी अपने जीजा पे भी थोरा ध्यान दिया कीजिये
पूजा मुस्कुराते हुवे - मे भला आपके उपर कियु ध्यान दु
अभय मुस्कुराते हुवे - सासु मा सुन रही है आपकी छोटकी किया केह रही है
तारा हस्ते हुवे - हा सुन रही हु दमाद जी
अभय - मेने सोचा था अपनी प्यारी साली जी को जब हम शोपिंग करने जायेंगे तो सोने का कुछ दिला

इतने मे पूजा जल्दी से प्यार से - जीजा जी दुगी ना आप पे ध्यान आप तो मेरे प्यारे दुलारे एक लोटे जा जीजा जी है
दिशा अपनी मा को देखती है तारा दिशा को और जोर जोर से हसने लगती है
दिशा पूजा को देख - छोटकी तुझसे तेज गिरगिट भी रंग नही बदलता होगा
पूजा हस्ते हुवे - जब मुझे जीजा जी प्यार से कुछ देगे तो साली का फर्ज़ है इज़त से लेले मे वही कर रही हु
तारा पूजा के गाल पे मारते हुवे - बेसर्म
अभय हस्ते हुवे - मेरी साली साहिबा मोक्के का फायदा अच्छे से उठाना जानती है
पूजा - एकदम सही कहा जीजा जी
अभय पूजा तारा से बात करने के बाद दिशा फोन लेके कमरे मे आके बात करने लगती है

अभय - मेरी जान रात को नींद नही आती तुम्हारे बारे मे सोच कर
दिशा बिस्तर पे लेती शर्मा के - अच्छा वो भला कैसे
अभय - तुम्हारी मुनिया को मेरा मुना बहोत याद करता है इस किये
दिशा की सासे तेज हो जाती है छाती उपर हो जाती है दिशा शर्मा के - ऐसी बाते करेगे तो मुझे भी नींद नही आयेगी
अभय - याद रखना सुहागरात की दिन पुरा कोटा फुल करुगा
दिशा मचल उठती है सासे तेज और तेज हो जाती है दिशा तकिये को बाहों मे कस के पकर नासिलि आवाज मे - कर लीजियेगा मेरे पति देव मे आपकी ही तो हु
अभय मुस्कुराते हुवे - मुझे किस्सी लेनी है
दिशा - ले लीजिये
अभय मुस्कुराते हुवे - तुम्हारी मुनिया पे
दिशा सर्म से लाल - आप कैसी बातें कर रहे है
अभय - फोन को मुनिया के पास रखो ना मे किस करने वाला हु
दिशा सर्म से लाल अभय की बात कैसे ताल सकती है दिशा धीरे से - ठीक है करती हु


Gbd7-Vpha-AAAis01
photo uploader
दिशा टांगे फैला के चूत के पास फोन करते हुवे सर्म से - हा कर लीजिये किस्सी
अभय मुस्कुराते हुवे - उम्मा उम्मा
दिशा को ऐसा फिल होता है जैसे सच मे अभय उसकी चूत को चूम रहा है ये सोच दिशा की सिसकिया निकल जाती है

दिशा फोन हटाते हुवे सर्म से - आप अब खुश कुछ ना कुछ गंदा आपके दिमाग मे चलते रेहता है
अभय - आई लोव यू मेरी जान
दिशा मुस्कुराते हुवे - आई लोव यू तु मेरे राजा
अभय - अब सो जाओ गुड नाइट
दिशा - गुड नाइट

फोन कट

दिशा अपनी टांगे फैला चूत को छुटे हुवे मन मे शर्म से - गीली हो गई

जीतू के घर - सुबह 10 बजे

अभय खाना पीना खाके रेडी था जीत भी आ गया था अभय को लेने अभय फिर जीत के साथ पहोच जाता है जीत के घर

जीत - 19 साल


images-8
मा - जोती - उमर 41 साल


Gz-H7ewmb-QAAj-Wcq
पिता - चमन - उमर 42 साल
बेहन - गुलाबी - उमर 20 साल


Gy-QOw-QCXg-AEGTJ2
जीत - बॉस चलिये सब आपका बेसबरी से इंतज़ार कर रहे है
अभय जीत को देख - सबके सामने बॉस मत केह देना
जीत - जानता हु बॉस आप चिंता मत कीजिये

अभय जीत के साथ अंदर जाता है सभी अभय का ही इंतज़ार कर रहे थे सही अभय को देख बहोत खुश हो जाते है फिर वही अभय को सब इमोसनल होके सुर्किया करते है अभय सब को सांत करवाता है फिर आराम से बैठ बाते करने लगता है

जोती - बेटा तो तुम सादी कर रहे हो ये हुई ना बात आते ही सादी और मेरा एक है ( जोती जीत को देख) जल्दी ही उसके लिये लरकी देख लुगी
अभय हस्ते हुवे - हा कराओ कराओ जरूर ऑन्टी छोरना मत
चमन - बेटा आज हम खुश है मेरा घर का चिराग हमारे साथ है ये एहसान हम चुका नही पायेंगे
अभय - बस अंकल मेरे वही क्या जो मुझे करना चाहिये
गुलाबी - तुम नही जानते अभय जीत के जाने के बाद हम एक एक दिन कैसे जी रहे थे ( गुलाबी वो पल याद कर इमोसनल हो जाती है
अभय - दीदी मे समझ सकता हु फिल कर सकता हु मेरी मा बेहन सब मेरे बिना कैसे एक एक दिन गुजारे होगे हमे भी कैद मे रेह सभी की बहोत याद आती थी
जीत - मा पापा दीदी अभय वहा रोज सब को याद करता था लेकिन एक दिन सब बदल गया उसी के बाद मे जीत बाकी बच्चे अपने घर है
जोती - समझ सकती हु कितना प्यार होगा सब के बीच
अभय गुलाबी को देख - वैसे दीदी कितना इंतज़ार करना होगा मुझे अपने भतीजे भतीजी को देखने के लिये
गुलाबी शर्मा के - 4 महीने
अभय - अच्छा कोई ना इंतज़ार कर लुगा
जोती हस्ते हुवे - करना ही पड़ेगा

साम - 5 बजे

एक बार मे अभय जीत जीतू बैठे चिकन दारू का मजा ले रहे थे हा अभय जीत जीतू विजय सब दारू पीते है dp devil के कैद मे सब को दारू पिलाया जाता था

अभय एक घुट पीते हुवे - याद रखना घर वालो को पता चला तो तो तुम दोनो की टांगे तोर दूंगा
जीत जीतू डरते हुवे - नही बॉस ऐसा नही होगा
अभय - हा जायदा मत पीना नही तो घर मे सब को पता चल जायेगा
जीत जीतू - जी बॉस
बस किया बाते करते हुवे मस्ती मजाक करते हुवे पीते है फिर घर आ जाते है

अगली सुबह 10 बजे

अभय रेडी था अपने घर जाने के लिये एक रात काजल के यहा एक रात जीतू के यहा एक रात जीत के यहा रुक चुका था अब सादी की तैयारी करनी बाकी थी

अभय बाहर बाइक पे बैठा था जीत जोती गुलाबी सभी खरे थे
अभय सभी को देख - ऑन्टी तीन दिन पेहले ही आप सभी को आ जाना है याद रखियेगा कोई एक भी नही झुटना चाहिये सब को आना है
जोती हस्ते हुवे - समझ गई बाबा हम सब तीन दिन पेहले आ जायेंगे
अभय मुस्कुराते हुवे - ये हुई ना बात अच्छा अब मे चलता हु
जोती - अच्छे से जाना बेटा
अभय - जी ऑन्टी ( अभय जीत को देख) टिक है जीत मे चलता हु
जीत - ठीक है अभय अच्छे से जाना
अभय सब को बाय बोल जीतू के घर आता है और फिर सभी से मिलता है बाय बोल सीधा घर की तरफ निकल परता है

अभय - चलो जीत जीतू काजल बुआ सभी से मिल कार्ड दे दिया अब सादी की तैयारी करनी बाकी है बहोत काम बाकी है यार अभय के निकले 1 घंटे हो गये थे

अभय तेजी से बाइक लेकर रास्ते से होते हुवे जा रहा था 20 मिनट के बाद फिर खेतो वाले रास्ते से होकर जा रहा था आगे 10 मिनट बाद मैन रोड आने वाला था अभय को घर पहुँचने मे 2 घंटे और लगने वाले थे

अभय नॉर्मल स्पीड से बाइक लिये जा ही रहा था की अभय की नज़र दूर सामने परती है अभय देखता है एक वैन उसके आगे है उस वैन के आगे दो लरकी बाते करते हुवे रोड साइड से जा रहे है तभी जो वैन थी लरकी के पास रुक जाती है ये देख अभय की दिल की धरकन तेज हो जाती है अभय का दिमाग तेजी से कई बाते सोचने लगता है वैसा होता भी है

वैन से दो बंदे निकल कर दोनो लरकी के मुह बंद कर वैन के अंदर ले जाते है फिर वैन तेजी से भागने लगती है

अभय सब देख अभय का दिमाग घूम जाता है अभय बिना देरी किये तेजी से वैन का पीछा करने लगता है

अभय मन मे - दिन दहारे किडनैप लरकियो का रीजन तो बहोत है लरकियो के किडनैप करने के देखते है

अभय वैन के पीछे थोरा दूरी बनाये पीछा करता रेहता है 10 मिनट बाद मैन रोड आ जाता है कई गारिया छोटी से बरी तेजी से डोर रही थी लेकिन अभय की नजर सिर्फ उस वैन पे थी

वैन मे 3 लरकिया और थी यानी पुरे पाच लरकिया थी लेकिन सभी बेहोस थे 40 मिनट तक अभय वैन का पीछा करता रेहता है आखिर कार वैन फिर मैन रोड छोर कर एक पतली कच्ची रास्ते को लेकर जाने लगती है जो सीधा जंगल की तरफ जाता था


अभय पूरी सावधानी से पीछा कर रहा था ताकि वैन वालो कि नजर मे ना आये अभय एक असेसन था तो अभय को चोरी छुपे कैसे किसी का पीछा करना है मारना है अच्छे से पता था 1 घंटे अंदर जाने के बाद वैन एक बहोत पुरानी बंद परी कंपनी थी वही वैन रुक जाती है

अभय बाइक जंगल मे एक जगह लगा के झारियो मे छुप कर देखने लगता है अंदर से 6 लोग और आते है और वैन से लरकियो को उठा के अंदर लेके जाने लगते है

अभय सब देखते हुवे मन मे - ये कोई छोटा मोटा मामला नही यहा लरकियो के सप्लाये किया जा रहा है अभय अपने बैग को खोलता है और अंदर देख मन मे - लगता है मुझे आज फिर शैडो बनना परेगा आह यार मेने सोचा था घर आने के बाद कोई खून खराबा नही लेकिन ये साले सब माफी के लायक नही है


images-5
अभय रेडी होमर एक असेसन के रूप मे आ जाता है अभय का चेहरा धक्का हुआ था आगे पीछे हथियार थे अभय के दोनो हाथो मे भी (shadow assassin) अभय किसने सोचा था आज मुझे इस रूप मे आना परेगा तो चलो खूनी खेल सुरु करते है

आज के लिये इतना ही 🙏🙏🙏🙏
 
Top