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Erotica नियति से बंधी नीतू

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NeetuDarlingReturns

Neetu Story
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नियति से बंधी नीतू - Part 245
सामने वाले घर की छत पर....

सुम.....अब बोल, क्या सीक्रेट बात बताने के लिए मुझे यहाँ बुलाया है।

रजनी......कल मैं और नीतु दोनों उसके जन्मस्थान जा रही हैं, तू भी आएगी?

सुम....अरे घर में काम होते हैं, यहाँ छोड़कर मैं कैसे आऊँ।

रजनी......हमारे साथ अशोक भी आ रहे हैं।

सुम......उससे....?

रजनी......तेरे और अशोक के बीच चल रही डिंगी-डॉन्ग के बारे में मुझे पता है। कल तू भी आई तो वहाँ तुम दोनों को एकांत में समय बिताने का मौका दिलवा दूँगी।

सुम.....अशोक को मैं भी काफी सताती रहती हूँ, लेकिन तुम दोनों के रहते हुए मैं....

रजनी बीच में ही.....उसकी चिंता तुझे क्यों? तू अशोक को एकांत में समय बिताने का मौका देने की व्यवस्था मैं कर दूँगी।

सुम.....वो सब ठीक है, लेकिन घर में कौन देखेगा? चिन्नू अकेली हो जाएगी। शीला और बच्चे को भी संभालने के लिए कोई तो साथ होना चाहिए ना।

रजनी......कल शनिवार है, हरिश...सविता...सुकन्या...बच्चे सब घर पर ही रहेंगे, साथ में प्रीति...अनुषा भी।

सुम.....तो फिर कोई दिक्कत नहीं, मैं भी आऊँगी।

रजनी चिढ़ाते हुए.....मेरा पति बहुत बड़ा रसिक है, तू कैसे निभाएगी पता नहीं।

सुम.....समय मिलते ही तेरे पति की रसिकता मैं भी देखती आ रही हूँ। मैं अकेली रहूँ तो काफी है, मुझे पकड़ने में आगे-पीछे नहीं देखता। मेरे पति के साथ तेरा कैसे चल रहा है?

रजनी......उसी के लिए समय मिलते ही चलता रहता है। परसों उनके चैंबर में ही हम दोनों ने शुरू कर दिया था।

सुम.....फैक्टरी के चैंबर में? किसी ने देख लिया तो?

रजनी.....तेरे पति का चैंबर देखा नहीं? सिंगल साइड ग्लास लगा है, बाहर से कुछ नहीं दिखता। साथ में रूम लॉक करने जितनी अक्ल मुझमें भी है। तेरे रवि की रासलीला कैसी है?

सुम......दोपहर खाने के समय में इसी घर में कभी-कभी होती रहती है, हफ्ते में 2-3 बार।

रजनी......नीतु इतनी देर में कहाँ गई होगी?

सुम.....बच्चों को चाट सेंटर ले गई होगी।

रजनी......चिन्नू-पूनम दोनों प्रताप-अनुषा के साथ गई हुईं, देखा नहीं? चल, जब आएगी तब बताएगी। कल आने के लिए तैयार है ना? अपने पति को जो कहना हो कह दे।

सुम......उन्हें क्या बताना, तुम्हारे साथ जा रही हूँ कह दिया तो काफी है।

नीतु घर से सीधे ग्लास और प्लाइवुड ऑफिस पहुँची। वहाँ के कर्मचारियों से थोड़ी बात करने के बाद अशोक के चैंबर में आई। फाइल में डूबे हुए दूसरे पति के सामने वाली कुर्सी पर बैठकर नीतु उसे ही देखती रही। तीन-चार मिनट बाद अशोक ने सिर उठाया और हैरान होकर.....

अशोक....तू कब आई, पता ही नहीं चला।

नीतु......तुम फाइल में डूबे हुए थे तभी आई। इतनी चिंता में क्यों हो, कोई समस्या है क्या?

अशोक.......वैसा कुछ नहीं। आज रात चार जगहों पर हमारा प्लाइवुड सप्लाई करना है, लेकिन अभी तक लारियाँ नहीं आईं, वही सोच रहा था।

नीतु......बिजनेस कैसा चल रहा है? ऑर्डर मिल रहे हैं ना?

अशोक.....ऑर्डर हमारी उम्मीद से थोड़े ज्यादा ही आ रहे हैं। फैक्टरी में तीनों शिफ्ट में काम चल रहा है। रवि को बच्चा पैदा होने वाले दिन ही बड़ा ऑर्डर मिला था, वो सब रवि की मेहनत का फल है।

नीतु.....घर में बच्चा आने पर हमेशा अच्छा ही होता है। रात की शिफ्ट मत लगवाना, ऐसा कहा था।

अशोक.......अभी 20-25 दिन तीनों शिफ्ट में काम करना ही पड़ेगा, तभी हमें मिले हुए सारे ऑर्डर पूरे हो पाएँगे। अब उत्तरी कर्नाटक.....बॉम्बे...पुणे इलाकों में हमारे ब्रांड के मटेरियल की अच्छी माँग और मार्केट मिल रही है। गुरुओं ने जैसा कहा था, इस शहर में हमारी फैक्टरी शुरू करके चिन्नू के हाथों उद्घाटन करवाना अच्छा फल दे रहा है।

नीतु.....काम में इतने व्यस्त हो गए कि पत्नी की तरफ ध्यान ही नहीं दे पा रहे हो ना।

अशोक.......एक तरह से हाँ। कल तो हम सब तेरे जन्मस्थान जा रहे हैं ना, वहीं तेरे साथ थोड़े प्यार के पल बिताएँगे, यही सोच रहा हूँ।

नीतु......कल हमारे साथ सुम भाभी भी आ रही हैं। रजनी तुम्हारे लिए उन्हें भी मनाकर ला रही है।

अशोक.....सच में मजाक नहीं कर रही ना?

नीतु......सच ही है, मैं मजाक क्यों करूँ।

अशोक......थैंक यू स्वीटहार्ट..कहकर नीतु के पास आकर गले लगाने को बढ़ा ही था कि किसी ने चैंबर का दरवाजा खटखटाया।

दरवाजा खोला तो मैनेजर...सर, ट्रक आ गए हैं, माल लोड करवा देता हूँ।

अशोक......चलो, मैं भी आता हूँ। नीतु, घर आने में देर हो जाएगी, मेरे खाने का इंतजार मत करना।

नीतु.....ठीक है, जितनी जल्दी हो सके आने की कोशिश करना।

नीतु ऑफिस से निकली और पास ही ऑफिस के कर्मचारियों के लिए बने बिल्डिंग के आखिरी बिल्डिंग में रहने वाले नागेंद्र के घर की तरफ चली गई। नीतु को मुस्कुराते हुए स्वागत करते हुए नागेंद्र ने दरवाजे पर चिलक लगाते ही नीतु को गले लगा लिया और होंठ से होंठ मिलाकर किस करने लगा। नीतु भी होंठ खोलकर उसे मीठे शहद का रस पिलाती रही और खुद भी उसकी बाँहों में कैद हो गई।

नागेंद्र.......शीला और उसका बच्चा स्वस्थ हैं ना?

नीतु......हाँ, माँ-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। तू घर की तरफ क्यों नहीं आया, सिर्फ अस्पताल आया था।

नागेंद्र......कल आऊँगा। मैं मना कर रहा था फिर भी अशोक ने नहीं माना और घूमने के लिए एक बाइक मँगवा दी है।

नीतु.....कल मैं शहर में नहीं रहूँगी, शीला मिलेगी।

नागेंद्र.....अभी जल्दी जाने की जरूरत नहीं ना?

नीतु.....एक घंटे का समय है।

नागेंद्र.........तेरा रस चूसने के लिए इतना समय काफी है।

नीतु को गले लगाए कमरे में ले गया नागेंद्र। अपने कपड़े उतारकर नंगा हो गया और उसे खींचकर कसकर गले लगा लिया। नागेंद्र का खड़ा सख्त लंड चूड़ी और लेगिंग पहने होने के बावजूद उसे पार करके नीतु की चूत में चुभ रहा था। सख्त लंड का स्पर्श चूत को होते ही नीतु की चूत से रस रिसने लगा। नागेंद्र पूरी तरह नंगा होकर लंड को पूरा खड़ा किए खड़ा था, उसकी बाँहों में कैद नीतु के शरीर से चूड़ी का वेल भी नहीं हटा था। नागेंद्र ने वेल हटाकर एक तरफ फेंका तो सफेद रंग की टाइट चूड़ी के टॉप से बाहर निकलने को बेताब उभरे हुए उसके यौवन के कलश जैसे स्तन नागेंद्र की आँखों में चुभने लगे। नीतु को गले लगाए ही उसके गले से कान के पीछे और कान के अंदर तक जीभ फेरकर चाटने लगा। नागेंद्र की जीभ उसके संवेदनशील अंगों पर सरक रही थी तो नीतु की नसों में खून का संचार बढ़ने लगा। नीतु के दाएँ कान के पीछे उसकी जीभ सरक-सरक कर चाट रही थी तो उसकी चूत की पलकें कामुक गर्मी से काँपने लगीं। नीतु की पीठ सहलाते हुए नागेंद्र की हथेली लचकती कमर को सहलाते हुए और नीचे सरक गई और हथेलियों में समा न सकने वाले गोल-मुलायम नितंबों को पकड़ लिया। नागेंद्र अपनी हथेलियों में जितना संभव हो नितंबों की उभार को समेटते हुए पहले धीरे-धीरे दबाने लगा, फिर दबाव बढ़ाते हुए जोर से मसलने लगा। नीतु के मुँह से उसकी कामुक चढ़ाई के जवाब में आह..अम्मा...आह... जैसी कामुक आवाजें निकलने लगीं और वो पानी से बाहर निकली मछली की तरह तड़पने लगी। नीतु के गोल नितंबों के पूरे गोलाकार को सहला-मसलकर नागेंद्र ने चूड़ी का टॉप कमर तक ऊपर उठाया और फिर से नितंबों को हथेलियों में पकड़ लिया। नीतु ने जो लेगिंग पहनी थी वो काफी मोटी होने के बावजूद अंदर पहनी पैंटी की “V” शेप स्ट्रैप उसकी उंगलियों को साफ छू रही थीं। नीतु के गोल नितंबों को मसलते हुए नागेंद्र ने दाएँ हाथ की उंगलियाँ नितंबों की घाटी में घुसाईं और ऊपर से नीचे तक सहलाने लगा तो नीतु उसे गले लगाए कराहने लगी। नीतु की चोटी एक तरफ करके चूड़ी के टॉप का जिप पकड़कर कमर तक नीचे खींच लिया नागेंद्र ने और चूड़ी के पीछे वाले हिस्से को इधर-उधर सरका दिया। सफेद रंग की चूड़ी पहनी होने की वजह से अंदर का ब्रा बाहर न दिखे इसलिए टॉप के अंदर बनियान जैसी लड़कियों वाली अंदरूनी कपड़ा नीतु ने पहना हुआ था। नीतु ने हाथ ऊपर उठाए तो नागेंद्र ने उसके शरीर से चूड़ी का टॉप उतारकर एक तरफ रखा और बनियान जैसी अंदरूनी कपड़ा भी खोलकर फेंक दिया। कामुक इच्छा में और भी उभरे हुए, साँस तेज-धीमी लेते नीतु के यौवन के कलशों को हल्के नीले रंग के ब्रा में समेटे रखना काफी मुश्किल हो रहा था। नीतु के गोल 36 साइज के सफेद स्तन हल्के नीले ब्रा में कैद देखकर ही नागेंद्र का खड़ा लंड डिंग-डॉन्ग बजने लगा। नीतु के स्तनों के बीच की घाटी में मुँह छिपाकर स्तनों की उभार वाले हिस्से को जीभ से चाटते हुए नागेंद्र ने पीठ सहलाते हुए ब्रा के हुक्स खोल दिए। नीतु के कंधे से ब्रा की पट्टियाँ हटाकर उसके शरीर से ब्रा दूर कर स्तनों को आजाद कर दिया नागेंद्र ने। अपने सामने बिना झुके सीधे खड़े दो चाँदी जैसे ऊँचे स्तनों को देखता हुआ वो खुद को ही भूल गया। नीतु के शरीर की गर्मी बेकाबू हो चुकी थी इसलिए स्तनों के निप्पल तनकर खड़े हो गए थे और “आओ हमें चूसो” जैसे नागेंद्र को निमंत्रण दे रहे थे।

नागेंद्र.....नीतु, तेरे रस भरे फलों और निप्पलों को देखता हूँ तो मेरी नसों में वीणा बजने जैसा अनुभव होता है।

नीतु मदहोशी में......ऐसा क्यों?

नागेंद्र......क्यों पूछने पर मन की भावनाओं को कभी-कभी शब्दों में बाँधकर वर्णन करना संभव ही नहीं होता, उसे सिर्फ अनुभव करना पड़ता है, बताया नहीं जा सकता।

नीतु......तू इस तरह तारीफ कर रहा है, मैं अब पुराने कॉलेज की लड़की नहीं रही, मेरी उम्र भी 38 हो गई है।

नागेंद्र......किसने कहा तुझे उम्र हो गई है? मैं यहीं चैलेंज करता हूँ, अभी भी तू टाइट जींस पहनकर कॉलेज में कदम रखे तो कोई तुझे शादीशुदा गृहिणी नहीं समझेगा, बल्कि कॉलेज में कोई नया आइटम माल आया है समझकर खुश होंगे।

नीतु......ये थोड़ा नहीं, बहुत ज्यादा हो गया, ऐसा नहीं लगता तुझे?

नागेंद्र......ज्यादा है या कम, बता रहा हूँ। तू अभी भी कॉलेज में कदम रखे तो वहाँ के लड़के तुझे देखते ही फ्लैट होकर गिर जाएँगे, ये पक्का।

नीतु.......टाइम निकल रहा है नागेंद्र।

नागेंद्र......मैं भी बेकार बातें करके समय बर्बाद कर रहा हूँ।

नीतु के बाएँ स्तन को दबाते हुए दाएँ स्तन को मुँह में ले लिया नागेंद्र ने और चूसते-दबाते रहा। दोनों स्तन बदल-बदलकर चूस रहा था तो नीतु की चूत की गर्मी पल-पल बढ़ रही थी और चार-चार बूँद रस टपकने लगा। नीतु के गोल मुलायम स्तनों को मन भरकर मसलकर दूध पीने की तरह चूसने के बाद नागेंद्र ने उसके पहने सफेद लेगिंग की डोरी ढीली करके नीचे खींच दी। स्किन टाइट लेगिंग नीतु की जाँघों से नीचे सरकती हुई घुटनों को पार करके पैरों के पास पहुँची तो उसने एक-एक पैर उठाकर उसे लेगिंग उतारने में मदद की। नीतु की दूध जैसी सफेद त्वचा पर अब सिर्फ बेबी पिंक रंग की पैंटी ही बची थी और पैंटी का आगे वाला हिस्सा भी उसकी अपनी चूत के रस से थोड़ा गीला हो चुका था। नीतु को बिस्तर पर बैठाया नागेंद्र ने और उसके पैर की उंगलियाँ एक-एक करके मुँह में ले जाकर चूसने लगा तो नीतु को आसमान में तैरने जैसा लगने लगा और वो बिस्तर पर पीछे की तरफ लुढ़क गई। नीतु के पैरों को चाटकर चुंबन देते हुए ऊपर सरका नागेंद्र। केले के तने जैसे मोटे-तगड़े स्तंभ जैसी जाँघों को सहलाते हुए जीभ से चाटने लगा और एंजिलिन में गीला कर दिया। नीतु की जाँघों के मिलन स्थल की तरफ मुँह लाया तो उसकी चूत से निकलती स्त्री गंध उसकी नाक में समा गई। नीतु ने खुद ही पैर फैला दिए तो उसके पहने बेबी पिंक पैंटी के आगे वाले हिस्से पर नाक रखकर यौवन की सुगंधित खुशबू का आनंद लिया नागेंद्र ने और पैंटी के ऊपर ही चूत पर कई चुंबन लगा दिए। नीतु की कमर सहलाते हुए पिंक पैंटी के इलास्टिक के अंदर उंगली घुसाई नागेंद्र ने और नीचे खींचा तो नीतु ने नितंब ऊपर उठाकर पैंटी उतारने में मदद की। नीतु की चिकनी कमर से उसके शरीर पर बची आखिरी पोशाक बेबी पिंक पैंटी लिपटती हुई नीचे सरक गई और उसके पैरों से बाहर निकल गई।

पैंटी को सूँघकर एक तरफ रखा नागेंद्र ने। बिस्तर पर नीतु को ठीक से लिटाकर उसकी जाँघें फैलाते हुए चूत पर मुँह लगा दिया। पहले से ही रस रिसते गीली हो चुकी नीतु की चूत पर नागेंद्र की जीभ सरकते हुए चाटने लगी। नागेंद्र की जीभ चूत चाट रही थी तो नीतु पानी से बाहर निकली मछली की तरह तड़प रही थी और चूत से लगातार रस की धार बहने लगी। नीतु के यौवन के रस को चूसकर अपनी प्यास बुझाई नागेंद्र ने। अब अपने जीवन की एकमात्र प्रेयसी के उमड़ते यौवन को लूटने के लिए तैयार हो गया। नीतु के पैरों को सहलाते हुए अपने कंधे पर रखकर उसकी जाँघों के बीच घुस गया नागेंद्र। खड़ा हुआ अपना मोटा साइज लंड चूत की नाजुक पलकें पर रगड़ने लगा। नागेंद्र का लंड अंदर घुसने के लिए सुविधा हो, इसलिए नीतु ने चूत की पलकें उंगलियों से फैला दीं तो लंड को सही पोजीशन में रखकर नागेंद्र मुर्गे की तरह आगे बढ़ा। मुलायम मक्खन की डली को चीरते चाकू की तरह नीतु की चूत की पलकें चीरते हुए नागेंद्र का लंड कामसुख देने वाली रसभरी गुफा के अंदर घुस गया। लगातार एक के बाद एक प्रहार करते हुए नीतु भी नीचे से नितंब ऊपर-ऊपर उठाकर कामक्रीड़ा में पूरी तरह सहयोग दे रही थी। कई प्रहारों के बाद नागेंद्र का लंड नीतु के यौवन की गुफा के अंदर पूरा घुस गया। नीतु के होंठ चूसते हुए गोल स्तनों को दबा-चूसते हुए नागेंद्र प्यार से नियमित रूप से उसकी चूत के अंदर अपना लंड घुसा-घुसाकर करने लगा।

कॉलेज में पहली बार देखते ही नीतु पर दिल हार चुका था और उसे अपने मन के मंदिर में रखकर रोज प्यार...पूजा...आराधना करता रहता था नागेंद्र, लेकिन तब उसकी प्रीति नहीं मिली थी। लेकिन करीब 18-19 साल बाद आज उसी नीतु की जाँघों के बीच घुसकर उसके यौवन को लूटते हुए मन भरकर अनुभव करके रौंद रहा था। नीतु की रसभरी चूत के अंदर लंड घुस-घुसकर कर रहा था तो उसकी गर्मी ठंडी पड़ रही थी और नागेंद्र को भी पूरा मजा मिल रहा था। तने हुए स्तन के निप्पलों को दाँतों से काट-खींचकर चूसते हुए नागेंद्र कमर को बहुत तेज गति से आगे-पीछे हिलाते हुए नीतु की चूत में लंड ठोक रहा था। नीतु भी ऊपर-ऊपर उठाकर उसके लंड के प्रहार झेलती हुई, कॉलेज से ही सिर्फ उसी को प्यार और आराधना करने वाले नागेंद्र को उसका हिस्सा कामसुख दे रही थी। अब तक चूत से नीतु जो रस बहा रही थी उससे नौ बार अपने लंड को अभिषेक करवा चुका था और पिछले 45 मिनट से बिना रुके कर रहा था नागेंद्र। वो भी कामसुख की पराकाष्ठा पर पहुँचकर वीर्य की पिचकारियाँ नीतु की चूत के अंदर छोड़ दीं। दोनों के शरीर पसीने से भीग चुके थे और उनके लंड-चूत एक-दूसरे के रस से गीले-चिपचिपे हो गए थे। नागेंद्र एक तरफ लुढ़का तो ऊपर उठी नीतु बाथरूम की तरफ चली गई। गोल उभरे सफेद नितंबों को देखकर नागेंद्र में हलचल शुरू हो गई। नीतु ने चूत साफ करके बाहर आई और ब्रा-पैंटी पहनकर बनियान पहनी तो........

नागेंद्र......नीतु, मेरी एक इच्छा पूरी करेगी?

नीतु......अब कौन सी इच्छा बाकी रह गई नागेंद्र। कभी-कभी मैं खुद आकर तुझे सुख दे रही हूँ ना।

नागेंद्र.....तेरे नितंबों को देखता हूँ तो मुझे कुछ-कुछ होता है।

नीतु.....मैं जब भी आती हूँ तू मेरे नितंबों को अपनी तृप्ति होने तक मसलता है।

नागेंद्र.......वो मेरा हक है, मसले बिना कैसे छोड़ूँ? वो नहीं, तेरी गांड के छेद के अंदर लंड घुसाने की इच्छा है।

नीतु......प्रेयसी की चूत कर ली, अब उसकी गांड मारने की इच्छा हुई?

नागेंद्र......तू गलत मत समझ नीतु। अगर तेरा मन नहीं है तो मैं जबरदस्ती नहीं करूँगा।

नीतु......ठीक है। मैं यहीं खड़ी रही तो तू मुझे घर की तरफ जाने नहीं देगा लगता है। अगली बार जब आऊँगी तब तेरी इच्छा पूरी करूँगी। अब टाइम हो गया है।

नागेंद्र खुशी से उसे गले लगाकर होंठ चूसने लगा और पैंटी के अंदर हाथ घुसाकर नितंबों को मसलने लगा। नीतु ने उसे दूर धकेलते हुए कपड़े पहने, तैयार हुई और घर की तरफ निकल गई। शीला के बच्चे के साथ कुछ समय बिताने के बाद नीतु खाने बैठने लगी। बच्चे के जन्म के 15 दिन बाद शीला को घर में पहले की तरह घूमने-फिरने की अनुमति रेवती ने दे दी।

सारे काम खत्म करके नीतु ऊपर आई तो प्यारी बेटी कुछ जोड़ने वाले खिलौने बिस्तर पर बिखेरकर पापा से पूछ-पूछकर जोड़-जोड़कर खेल रही थी। नीतु फ्रेश होकर पति के पास जाकर उसके सहारे बैठ गई और बेटी का खेल देखने लगी......

नीतु......चिन्नू, आज तू छुपन-छुपाई नहीं खेलेगी बेटी?

निशा.....मम्मा, अभी थोड़ी और खेलूँगी, मम्मा प्लीज।

नीतु.......बेटी, कल तू पापा के साथ टाटा जाएगी या मेरे साथ आएगी?

निशा आँखें फाड़कर पापा-मम्मा को देखती हुई.......मम्मा तू कहाँ जा रही है मम्मा।

नीतु......मैं..रजनी मम्मा..सुम भाभी..अशोक अंकल दादी के घर जा रहे हैं बेटी।

निशा तुरंत......मैं भी आऊँगी मम्मा।

नीतु....पापा के साथ नहीं जाएगी?

निशा.....नहीं मम्मा, मैं आऊँगी।

नीतु......पापा के साथ सब दीदी...भैय्या...पूनी जाएँगे।

हरिश के ऊपर चढ़कर बैठी निशा........पापा, पूनी आएगी पापा।

हरिश........हाँ बेटी, कल भैय्या...दीदी के साथ हम सब टूर जा रहे हैं, तू भी मेरे साथ आएगी?

निशा......मम्मा टाटा, मैं नहीं आऊँगी। मैं पापा के साथ टाटा जाऊँगी, मेरी फ्रेंड पूनी आएगी।

नीतु.......जी, फॉल्स पर बच्चों को लेकर जा रहे हो, सावधान रहना। पूनम के साथ उसके दोनों भैय्या भी आएँगे। इन चार छोटे बच्चों को तुम अकेले कैसे संभालोगे जी?

हरिश......बच्चों के साथ मैं अकेला जा रहा हूँ ऐसा किसने कहा? रेवंत—प्रीति........प्रताप—अनु के साथ वेंकट—नंदिनी भी आ रहे हैं।

इतने में निधि—सुरेश कमरे के अंदर आए.......

सुरेश......चिन्नू, कल हम टूर जा रहे हैं, तू दादी के घर मम्मा के साथ जा रही है ना?

निशा......नहीं, मैं पापा के साथ टूर जाऊँगी, नहीं पापा।

नीतु......निधि, मैं नहीं रहूँगी तो ये थोड़ी बंदर की तरह खेलती है, सावधानी से देखना।

निधि.....मम्मा, इसकी चिंता छोड़ो। मेरे साथ छोटी मम्मा...भाभी भी आ रही हैं ना।

हरिश.......निधि, तेरी फ्रेंड्स को फोन किया क्या?

निधि....हाँ पापा। तुम खुद साथ आ रहे हो ऐसा पूछा तो उनके घर में तुरंत सबको परमिशन मिल गई।

नीतु........जी, वहाँ फॉल्स के पास कोई रेस्टोरेंट भी नहीं है, खाने-पीने की व्यवस्था क्या है?

हरिश.......भट्ट घर से ही बनाकर भेज देंगे। मैं मना कर रहा था फिर भी उन्होंने नहीं माना।

सुरेश.....मम्मा, कैमरा कहाँ है मम्मा?

नीतु......उस आखिरी वार्डरोब में है। ऊपर ले जा और अभी चार्ज करके रख ले।

निधि......मम्मा, तुम शहर सुबह जल्दी जाओगे?

नीतु.....तुम जब निकलोगे तब हम भी साथ ही निकलेंगे। चिन्नू, अपने खिलौने समेटकर सो जा। सुबह जल्दी उठना है, पूनी जल्दी आएगी, तैयार होना है ना।

निशा........मम्मा..पापा..दीदी..भैय्या सबको गुड नाइट। मैं छुपन-छुपाई खेलूँगी.......कहकर उल्टी करवट लेटकर सो गई।

निधि........मम्मा, तुम बैठे रहो, ये सब मैं समेट दूँगी....कहते हुए बिस्तर पर बहन ने बिखेरे खिलौने जोड़-जोड़कर समेटने लगी।

सुरेश दीदी की मदद करते हुए....देखो मम्मा, सब बिखेर दिया और अब आराम से सो गई है।

मम्मा...बड़ी बेटी मुस्कुराई तो हरिश.......बेचारी ना, अभी छोटी है, इसे क्या पता।

सुरेश.......पता है या नहीं, लेकिन भैय्या को मारो ऐसा कहना अच्छी तरह जान लिया है।

नीतु हँसते हुए......ठीक है बेटा, जा सो जा। सुबह जल्दी उठकर तैयार होना है ना।

दोनों बच्चों ने पापा-मम्मा को शुभरात्रि कहकर चले गए। उसके बाद बिस्तर पर चढ़ी मम्मा की तरफ लुढ़ककर निशा ने मम्मा को गले लगा लिया और नींद की देवी के हवाले हो गई।

सुबह छह बजे सब तैयार हो रहे थे तो निशा आराम से सोई हुई थी। पापा वेंकट, मम्मा नंदिनी और अपने दोनों छोटे भाइयों के साथ पूनम घर आई।

वेंकट.......सर, यहाँ से निकलते समय हमारे घर चलना सर। गाड़ी में फूड बॉक्स नहीं लाए।

विक्रम.....तू अकेले गाड़ी में पाँच लोगों को लाया ही गलत है, साथ में फूड बॉक्स अलग लाना था क्या? गाड़ी तो तुम्हें पास ही आने वाली थी, वहीं चढ़ लेना चाहिए था।

नंदिनी......छोड़ो भैय्या, आ गए बस। कोई तकलीफ नहीं। लेकिन पाँच लोगों के बैठने की जगह कम पड़ रही थी।

हरिश......वापस आते समय तुझे और बच्चों को घर के पास ही उतार दूँगा। ये आकर गाड़ी ले जाए।

पूनम......अंकल निशी कहाँ है?

हरिश......अभी नहा रही है बेटी। तू खुद ऊपर जाकर देख, वहीं है।

पूनम ऊपर पहुँची तो निशा को नहलाकर तेल मसाज करके कपड़े पहना रही नीतु.......देख, पूनी पहले से तैयार होकर आ गई है, तू सो रही थी।

निशा......पूनी तू आ गई, मैं रेडी हो गई, चलो जाएँ....कहकर सहेली के साथ नीचे भाग गई।

निधि तैयार होकर आई......मम्मा, मैं फ्रेंड्स के घर से उन्हें पिक करके भट्ट के घर जा रही हूँ।

नीतु......तू अकेली? निक्की कहाँ है?

निधि.....वो भी आएगी, नीचे है।

नीतु.....सावधान रहना। पानी में छोटे बच्चों पर थोड़ी नजर रखना।

निधि.....ठीक है मम्मा, मैं जा रही हूँ।

निधि अपनी सफेद रेंज रोवर में निकिता के साथ सहेलियों के घर की तरफ निकली। नीतु के कहे अनुसार काली रेंज रोवर में बच्चों को बैठाकर हरिश खुद आगे बैठा और एक रक्षक ड्राइविंग संभाल रहा था। रेवंत..प्रताप..वेंकट और प्रीति..अनुषा...नंदिनी इनोवा में थे और उसकी ड्राइविंग भी एक रक्षक संभाल रहा था। सबको टाटा कहती हुई मम्मा से प्यार करवाकर निशा भाइयों-बहनों और सहेली पूनम के साथ हल्ला मचाती हुई एक दिन की जॉली ट्रिप के लिए निकल पड़ी।

अशोक......चलो, अब हम भी निकलते हैं। दस बजे तक मीटिंग अटेंड करनी है।

नीतु......डोंट वरी, रॉकेट स्पीड से ले चलूँगी। तुम आराम से पीछे भाभी के साथ बैठो। आ रजनी, आगे बैठ।

भट्ट के घर से नाश्ता-खाना के कैरियर कार में भरने के बाद तीन कारें पास के फॉल्स की तरफ निकलीं। दो जीपों में उनके साथ रक्षक थे। भाइयों-बहनों के साथ निशा और पूनी बातें करती हुई पूरे मजे में थीं। फॉल्स पहुँचे तो वहाँ कुछ ही लोग आए हुए थे। एक सही जगह चुनकर साथ लाए हुए चटाई बिछा दी। पचास-साठ फुट ऊँचाई से गिरते फॉल्स की तरफ हैरानी से देखती निशा और पूनम को नंदिनी नाश्ता खिला रही थी। रेवंत के गले में लटककर निशा फॉल्स के पास ले जाने के लिए जिद करने लगी। रेवंत ने नाश्ता खत्म करके निशा-पूनी दोनों को उठा लिया तो वेंकट अपने भाई-बहन के बच्चों को ले गया। दोनों छोटी लड़कियाँ निक्कर और टीशर्ट पहनकर छोटे गिरते फॉल्स के नीचे रेवंत के साथ खड़ी होकर ऊपर से गिरते पानी का आनंद लेती हुईं चीख-चीख कर शोर मचा रही थीं। इधर बड़ी हो चुकी लड़कियाँ एक तरफ इकट्ठा होकर नाश्ता खाते हुए....

कुसुम........निधि, ये जॉली ट्रिप है ना, यहाँ भी बारह लोगों की सिक्योरिटी चाहिए थी क्या?

रानी......हाँ, निधि इतनी सिक्योरिटी की जरूरत क्यों? हमारे शहर में कोई समस्या नहीं है।

निधि.......देखो, तुम सब मेरी करीबी फ्रेंड्स हो। साथ में पापा के बारे में बहुत सम्मान रखने वाले उनके पुराने छात्र भी हो। तुमसे कोई बात छिपाने का मुझे भी मन नहीं है। कल मम्मा भी यही कह रही थीं कि सहेलियों से सच्चाई छिपाना गलत है। अगर उन पर विश्वास है तो उन्हें सच बता। मुझे भी तुम सब पर बहुत विश्वास है, इसलिए अब सच बताती हूँ।

प्रिया......कुछ ही दिनों की दोस्ती में मैंने तेरा विश्वास जीत लिया, ये हमें बहुत गर्व की बात लग रही है। तूने हम पर जो विश्वास रखा है, उसमें कोई कमी आने वाला काम हम नहीं करेंगे, ये तुझे प्रॉमिस करते हैं।

दीप.......हाँ, प्रिया ने जैसा कहा, हम सब तेरे हम पर रखे विश्वास को बनाए रखेंगे।

निधि.......थैंक्स। तुम्हें सूर्यवंशी ग्रुप ऑफ कंपनीज के बारे में पता है?

दीक्षा.......हम बिजनेस स्टूडेंट्स हैं, इतनी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी के बारे में पता न हो क्या संभव है? अब ये कंपनी का विषय क्यों?

निधि......बिना वजह पूछ रही हूँ क्या? उसके मालिक कौन हैं, ये कुछ पता है?

रानी.....मालिकों के बारे में पता नहीं, लेकिन किसी राजपरिवार की संपत्ति है, ये पढ़ा है।

निधि......सूर्यवंशी राजपरिवार, उस संस्थान के अधीन है वो कंपनी। उस संस्थान की सारी संपत्तियों की वारिस कौन है, पता? उधर देख, चीख-चीख कर कूद रही है ना मेरी चिन्नू, वही निशा सूर्यवंशी है।

पाँचों सहेलियाँ बगल में बम गिरने जैसा हैरान होकर निशा की तरफ देखने लगीं तभी निकिता ने एक और बम फोड़ दिया।

निकिता......वो छोटी राजकुमारी है। बड़ी वाली हमारे साथ बैठकर इडली खा रही हैं।

दीप.....पहला शॉक ही सहन नहीं हो रहा निक्की, ये बड़ी राजकुमारी कौन है?

निकिता........ये मेरी प्यारी दीदी ही सूर्यवंशी ग्रुप ऑफ कंपनीज की मालकिन निधि सूर्यवंशी हैं।

पाँचों सहेलियाँ शॉक पर शॉक अनुभव करती हुई आँख-मुँह खुले निधि की तरफ देखने लगीं।

निधि.......हाँ, निक्की ने जो कहा वो सच है। मैं उसी सूर्यवंशी राजपरिवार की बड़ी राजकुमारी हूँ, निशा छोटी है। मम्मा हमारे दादा-दादी की मानस पुत्री हैं, मेरे पापा की बहन हैं। पापा-मम्मा स्वर्गस्थ होने के बाद हम दोनों को पापा-मम्मा ने ही गोद लेकर यहाँ लाए.......कहकर संक्षेप में अपने बारे में बताया निधि ने। कुछ बातें मम्मा के बताए अनुसार छिपा दीं।

दीप.........अरे तू रियली ग्रेट है। थोड़ा-बहुत पैसा हो तो लोग दूसरों को नीची नजर से देखते हैं। उसमें तू राजपरिवार की युवराणी, लाखों करोड़ की मालकिन होकर भी हम सबके साथ साधारण लड़की की तरह घुलमिलकर रह रही है।

प्रिया.........तुझे अपनी सहेली कहने में मुझे बहुत गर्व हो रहा है।

निधि.......सारी बात तुम्हें बता दी है। लेकिन तुम इसे मन में ही रखना, बाहर कहीं चर्चा मत करना बस।

दीक्षा......बिल्कुल, हम इसके बारे में किसी के सामने जिक्र भी नहीं करेंगे।

सब इसी तरह बातें करते हुए नाश्ता खत्म करके जलप्रपात के नीचे कूद-फाँदकर समय बिताते रहे। निशा तो पूनम और उसके छोटे भाइयों तथा गिरीश भैय्या...सुरेश भैय्या के साथ कूद-फाँद कर रही थी। दोपहर खाने के समय.....

अनुषा......चिन्नू, बस कर आ। सुबह से पानी में है, ज्यादा खेलेगी तो कल बुखार आ जाएगा। आ बेटी।

निशा......आंटी, अभी थोड़ी और खेलूँगी।

प्रीति.......नहीं बेटी, बस कर आ। देख पूरी भीग गई है। पूनी तू भी आ, तुम दोनों को दूसरे कपड़े पहना दूँगी। नंदिनी, तू अपनी भाभियों के बच्चों के कपड़े बदल देना, वो भी छोटे हैं।

नंदिनी......ठीक है अक्का।

शाम तक मजे से समय बिताकर घर की तरफ निकले तो निशा और पूनम खेलने की थकान में रास्ते में ही नींद के हवाले हो गईं।
 
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