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नियति से बंधी नीतू - Part 230
निशा जब जागी तो बिस्तर पर सिर्फ सुम और शीला बैठी थीं। मम्मा कहीं नहीं दिखीं तो “मम्मा....मम्मा.....” कहती हुई उठ बैठी।
शीला......चिन्नू, मम्मा कहीं नहीं गई कंद। नहा रही है, अभी आती है। तू लेटी रह कंद।
निशा......मुझे मम्मा चाहिए.....मम्मा चाहिए।
सुम ने बाथरूम का दरवाजा खटखटाया......नीतु, थोड़ी जल्दी आ, चिन्नू जाग गई है और तुझे ही मांग रही है।
नीतु......आ रही हूं आंटी, कपड़े पहन रही हूं।
नीतु बाहर आई तो निशा मम्मा की गोद में समा गई और उसकी गर्दन से चिपक गई। बेटी का बुखार चेक किया नीतु ने। थोड़ा कम हुआ देखकर उसे नीचे ले चली। रेवती ने सब तैयारियां कर रखी थीं। पोती की नजर उतारने के बाद नीतु बेटी को बाहर ले आई तो दोनों कुत्ते.....बंदर.....पक्षी निशा के न होने के कारण जरा भी शोर नहीं कर रहे थे। उन्हें दिया हुआ खाना खाकर पूरी तरह शांत बैठे थे। निशा को देखकर उसके सामने खड़े जानवरों को देखकर मुस्कुराई.....
निशा....मुझे बुखार आया, मैं खेल नहीं सकती। तुम कल आना, जाओ.... कहकर सब जानवरों को विदा कर दिया।
छोटी राजकुमारी को बुखार होने की बात जानकर रक्षक पास आए और तबीयत पूछी। दादा की गोद में बैठी निशा मम्मा कहीं मुझसे दूर तो नहीं चली जाएंगी, यही सोचकर मम्मा पर ही नजर जमाए हुए थी। नीतु बेटी के खेल को देखकर मुस्कुरा रही थी। हरीश स्कूल से लौटा तो साथ में सुकन्या—सविता भी आईं और निशा की तबीयत पूछते हुए यहीं रुक गईं। निशा जब उठी तो बगल में अप्पा को देखकर अप्पा के ऊपर चढ़ बैठी और अपने बुखार के बारे में विस्तार से बताने लगी। बुधवार सुबह तक बुखार पूरी तरह गायब हो गया। चुलबुली होकर उठी निशा मम्मा से नहलाकर अपने पहले वाले हंसमुख किलकारियों के साथ पूरे घर में दौड़ने-भागने लगी। नाश्ता करके ऊपर वाले रूम में गई निधि किसी बात के बारे में बता रही थी, लेकिन निकिता कुछ सोचते हुए अन्यमनस्क बैठी थी। निधि इसे बारीकी से देख रही थी।
निधि......निक्की, क्या बात है?
निकिता घबराते हुए....क्या...क्या....बात दीदी, कुछ नहीं।
निधि......तेरे मन में कोई बात कचोट रही है, यह समझ आ रहा है। लेकिन बताने में हिचक रही है। क्यों, अपनी दीदी से भी न बताई जाने वाली बात है क्या?
निकिता.....दीदी, तुम्हें मेरे जीवन की सारी बातें मैं बता चुकी हूं। लेकिन एक बात छुपा रखी है। दीदी, तुम्हें बताना नहीं चाहिए ऐसा नहीं है। लेकिन बात जानकर कहीं तुम मुझे गलत न समझ लो, यही डर लग रहा है। तुमने मुझ पर जो प्यार और भरोसा रखा है, वह बात सुनने के बाद चला गया तो मुझे सहन नहीं होगा।
निधि......किसी से न कही बात अपनी दीदी के साथ बांटने की इच्छा जब तू कर रही है तो मैं भी तुझे प्रॉमिस करती हूं। बात कैसी भी हो, तुझ पर मेरा प्यार और लगाव जरा भी कम नहीं होगा।
दोनों के बीच करीब पचास मिनट तक सन्नाटा छाया रहा। फिर थोड़ा साहस करके निकिता ने अपने और गिरीश के बीच हुई सारी बातें दीदी को बता दीं। दीदी के सामने आंखें मिलाकर देखने की हिम्मत न होने से निकिता आंखें बंद किए बैठी थी। निधि भी चुपचाप बैठी सोच में डूबी हुई थी। पंद्रह-बीस मिनट बीत गए, दीदी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी तो निकिता को डर सताने लगा। आंखें खोली तो निधि लंबी सोच में डूबी हुई थी।
दीदी को मेरे बारे में गुस्सा आ गया है, यही सोचकर निकिता की आंखों से आंसुओं की लकीर बहने लगी। उसके रोने की आवाज सुनकर अपनी सोच से बाहर आई निधि। रोती छोटी बहन को देखकर खींचकर गले लगा लिया।
निकिता रोते हुए......दीदी प्लीज, मुझसे गलती हो गई, कृपया माफ कर दो। लेकिन तुम्हारा मुझसे बात न करके चुप रहना मुझे सहन नहीं हो रहा।
निधि उसे दिलासा देते हुए........तूने गलती की है ऐसा मैंने कहा ही नहीं। लेकिन तेरे जीवन के भविष्य के बारे में सोचकर मुझे चिंता हो रही है। पहले से ही गिरीश को दो पत्नियां होंगी यह पता है और वे दोनों कौन होंगी यह भी तय हो चुका है। ऐसे में तेरा जीवन अस्त-व्यस्त हो जाएगा, इसे मैं कैसे सहन करूं।
निकिता.....दीदी, तुम्हें मेरे बारे में गुस्सा नहीं है ना? मुझे सिर्फ इतना ही चाहिए, बताओ दीदी।
निधि......नहीं, जरा भी गुस्सा नहीं, नाराजगी भी नहीं। लेकिन तेरा भविष्य....।
निकिता आंसू पोंछते हुए......दीदी, भविष्य की सोच छोड़ो। अभी इस बारे में सिर खपाने की जरूरत नहीं। पहले मुझे डॉक्टर बनना है, वही मेरे जीवन का लक्ष्य है। बाकी सब मेरे लिए तुच्छ है। लेकिन सबसे ज्यादा जरूरी यह है कि तुम्हें मेरे बारे में गुस्सा या नाराजगी न हो। क्योंकि तुमसे दूर रहना मेरे बस की बात नहीं।
निधि.....पागल लड़की, मुझे गुस्सा नहीं है कह दिया ना। फिर क्यों डर रही है।
निकिता.....थैंक्स दीदी। मेरे जीवन में हुई हर घटना तुम्हारे साथ बांटनी चाहिए, यही लगता था। अब मेरा मन हल्का हो गया है।
निधि......वो रहने दो। तू इतनी शांत रहने वाली लड़की है, फिर सेक्स के बारे में इतना ज्ञान कैसे हो गया?
निकिता.....दीदी, तुम यहां आने के बाद ही तुम्हें मोबाइल फोन मिला। उससे पहले आश्रम में तुमने वो सब इस्तेमाल ही नहीं किया था ना।
निधि.....मुझे अभी भी कुछ फीचर्स इस्तेमाल करने नहीं आते। लेकिन मोबाइल और सेक्स का क्या संबंध?
निकिता.....दीदी, मोबाइल हाथ में हो तो पूरा संसार ही हमारे हाथ में होता है। आज रात तुम मेरे साथ रहो, इसमें क्या-क्या देखा जा सकता है, मैं दिखाऊंगी।
निधि.......वैसे ही इस इंस्टाग्राम और फेसबुक में मेरे अकाउंट खोलकर ऑपरेट करना भी सिखा देना। अब चल, फूड यूनिट की तरफ चलते हैं। वहां से तेरे मेडिकल कॉलेज का राउंड लगाकर यूनिवर्सिटी ऑफिस से मेरी आईडी लेकर आते हैं।
निशा जब जागी तो बिस्तर पर सिर्फ सुम और शीला बैठी थीं। मम्मा कहीं नहीं दिखीं तो “मम्मा....मम्मा.....” कहती हुई उठ बैठी।
शीला......चिन्नू, मम्मा कहीं नहीं गई कंद। नहा रही है, अभी आती है। तू लेटी रह कंद।
निशा......मुझे मम्मा चाहिए.....मम्मा चाहिए।
सुम ने बाथरूम का दरवाजा खटखटाया......नीतु, थोड़ी जल्दी आ, चिन्नू जाग गई है और तुझे ही मांग रही है।
नीतु......आ रही हूं आंटी, कपड़े पहन रही हूं।
नीतु बाहर आई तो निशा मम्मा की गोद में समा गई और उसकी गर्दन से चिपक गई। बेटी का बुखार चेक किया नीतु ने। थोड़ा कम हुआ देखकर उसे नीचे ले चली। रेवती ने सब तैयारियां कर रखी थीं। पोती की नजर उतारने के बाद नीतु बेटी को बाहर ले आई तो दोनों कुत्ते.....बंदर.....पक्षी निशा के न होने के कारण जरा भी शोर नहीं कर रहे थे। उन्हें दिया हुआ खाना खाकर पूरी तरह शांत बैठे थे। निशा को देखकर उसके सामने खड़े जानवरों को देखकर मुस्कुराई.....
निशा....मुझे बुखार आया, मैं खेल नहीं सकती। तुम कल आना, जाओ.... कहकर सब जानवरों को विदा कर दिया।
छोटी राजकुमारी को बुखार होने की बात जानकर रक्षक पास आए और तबीयत पूछी। दादा की गोद में बैठी निशा मम्मा कहीं मुझसे दूर तो नहीं चली जाएंगी, यही सोचकर मम्मा पर ही नजर जमाए हुए थी। नीतु बेटी के खेल को देखकर मुस्कुरा रही थी। हरीश स्कूल से लौटा तो साथ में सुकन्या—सविता भी आईं और निशा की तबीयत पूछते हुए यहीं रुक गईं। निशा जब उठी तो बगल में अप्पा को देखकर अप्पा के ऊपर चढ़ बैठी और अपने बुखार के बारे में विस्तार से बताने लगी। बुधवार सुबह तक बुखार पूरी तरह गायब हो गया। चुलबुली होकर उठी निशा मम्मा से नहलाकर अपने पहले वाले हंसमुख किलकारियों के साथ पूरे घर में दौड़ने-भागने लगी। नाश्ता करके ऊपर वाले रूम में गई निधि किसी बात के बारे में बता रही थी, लेकिन निकिता कुछ सोचते हुए अन्यमनस्क बैठी थी। निधि इसे बारीकी से देख रही थी।
निधि......निक्की, क्या बात है?
निकिता घबराते हुए....क्या...क्या....बात दीदी, कुछ नहीं।
निधि......तेरे मन में कोई बात कचोट रही है, यह समझ आ रहा है। लेकिन बताने में हिचक रही है। क्यों, अपनी दीदी से भी न बताई जाने वाली बात है क्या?
निकिता.....दीदी, तुम्हें मेरे जीवन की सारी बातें मैं बता चुकी हूं। लेकिन एक बात छुपा रखी है। दीदी, तुम्हें बताना नहीं चाहिए ऐसा नहीं है। लेकिन बात जानकर कहीं तुम मुझे गलत न समझ लो, यही डर लग रहा है। तुमने मुझ पर जो प्यार और भरोसा रखा है, वह बात सुनने के बाद चला गया तो मुझे सहन नहीं होगा।
निधि......किसी से न कही बात अपनी दीदी के साथ बांटने की इच्छा जब तू कर रही है तो मैं भी तुझे प्रॉमिस करती हूं। बात कैसी भी हो, तुझ पर मेरा प्यार और लगाव जरा भी कम नहीं होगा।
दोनों के बीच करीब पचास मिनट तक सन्नाटा छाया रहा। फिर थोड़ा साहस करके निकिता ने अपने और गिरीश के बीच हुई सारी बातें दीदी को बता दीं। दीदी के सामने आंखें मिलाकर देखने की हिम्मत न होने से निकिता आंखें बंद किए बैठी थी। निधि भी चुपचाप बैठी सोच में डूबी हुई थी। पंद्रह-बीस मिनट बीत गए, दीदी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी तो निकिता को डर सताने लगा। आंखें खोली तो निधि लंबी सोच में डूबी हुई थी।
दीदी को मेरे बारे में गुस्सा आ गया है, यही सोचकर निकिता की आंखों से आंसुओं की लकीर बहने लगी। उसके रोने की आवाज सुनकर अपनी सोच से बाहर आई निधि। रोती छोटी बहन को देखकर खींचकर गले लगा लिया।
निकिता रोते हुए......दीदी प्लीज, मुझसे गलती हो गई, कृपया माफ कर दो। लेकिन तुम्हारा मुझसे बात न करके चुप रहना मुझे सहन नहीं हो रहा।
निधि उसे दिलासा देते हुए........तूने गलती की है ऐसा मैंने कहा ही नहीं। लेकिन तेरे जीवन के भविष्य के बारे में सोचकर मुझे चिंता हो रही है। पहले से ही गिरीश को दो पत्नियां होंगी यह पता है और वे दोनों कौन होंगी यह भी तय हो चुका है। ऐसे में तेरा जीवन अस्त-व्यस्त हो जाएगा, इसे मैं कैसे सहन करूं।
निकिता.....दीदी, तुम्हें मेरे बारे में गुस्सा नहीं है ना? मुझे सिर्फ इतना ही चाहिए, बताओ दीदी।
निधि......नहीं, जरा भी गुस्सा नहीं, नाराजगी भी नहीं। लेकिन तेरा भविष्य....।
निकिता आंसू पोंछते हुए......दीदी, भविष्य की सोच छोड़ो। अभी इस बारे में सिर खपाने की जरूरत नहीं। पहले मुझे डॉक्टर बनना है, वही मेरे जीवन का लक्ष्य है। बाकी सब मेरे लिए तुच्छ है। लेकिन सबसे ज्यादा जरूरी यह है कि तुम्हें मेरे बारे में गुस्सा या नाराजगी न हो। क्योंकि तुमसे दूर रहना मेरे बस की बात नहीं।
निधि.....पागल लड़की, मुझे गुस्सा नहीं है कह दिया ना। फिर क्यों डर रही है।
निकिता.....थैंक्स दीदी। मेरे जीवन में हुई हर घटना तुम्हारे साथ बांटनी चाहिए, यही लगता था। अब मेरा मन हल्का हो गया है।
निधि......वो रहने दो। तू इतनी शांत रहने वाली लड़की है, फिर सेक्स के बारे में इतना ज्ञान कैसे हो गया?
निकिता.....दीदी, तुम यहां आने के बाद ही तुम्हें मोबाइल फोन मिला। उससे पहले आश्रम में तुमने वो सब इस्तेमाल ही नहीं किया था ना।
निधि.....मुझे अभी भी कुछ फीचर्स इस्तेमाल करने नहीं आते। लेकिन मोबाइल और सेक्स का क्या संबंध?
निकिता.....दीदी, मोबाइल हाथ में हो तो पूरा संसार ही हमारे हाथ में होता है। आज रात तुम मेरे साथ रहो, इसमें क्या-क्या देखा जा सकता है, मैं दिखाऊंगी।
निधि.......वैसे ही इस इंस्टाग्राम और फेसबुक में मेरे अकाउंट खोलकर ऑपरेट करना भी सिखा देना। अब चल, फूड यूनिट की तरफ चलते हैं। वहां से तेरे मेडिकल कॉलेज का राउंड लगाकर यूनिवर्सिटी ऑफिस से मेरी आईडी लेकर आते हैं।
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