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Incest पहाडी मौसम

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nirmla

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बहुत ही गरमागरम कामुक और शानदार लाजवाब जबरदस्त उत्तेजना से भरपूर कामोत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गया
अगले रोमांचकारी धमाकेदार और चुदाईदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा
Sloww hai
 
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sumedh19

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सूरज सेठ जी की बीवी की मदहोश कर देने वाली जवानी का नशा का सेवन करके मस्त हो चुका था उसने कभी सोचा भी नहीं था कि इतने बड़े सेठ की बीवी भोगने को मिलेगी, सच में यह अनुभव उसे पूरी तरह से अद्भुत एहसास से भर दिया था उसका आत्मविश्वास दिन-दिन बढ़ता चला जा रहा था क्योंकि अब तक जितनी भी औरतें उसके नीचे आई थी उन सभी को उसने जी भरकर उनकी जवानी का रस नहीं छोड़ा था और उन्हें अद्भुत आनंद की अनुभूति भी करवाया था,,, शहर का सफर उसके लिए बेहद यादगार बन चुका था क्योंकि एक साथ दोनों बहनों को चोदने का शुभ अवसर भी उसे प्राप्त हुआ था। गांव लौटते लौटते रात हो चुकी थी रात होने की वजह से सूरज मुखिया के घर पर ही रुक गया था और सुबह होते ही वह अपने घर के लिए निकल गया था।

सुबह जब वह अपने घर पर पहुंचा तो दरवाजा खुला हुआ था और वह धीरे से अपने घर में प्रवेश किया तो देखा उसकी मां आंगन में झाड़ू लगा रही थी। लेकिन झाड़ू लगाते हुए वह अपनी भारी भरकम गाना को ऊपर नीचे उठा ले रही थी जिसे दरवाजे पर खड़े होकर देखते हुए सूरज के पजामे में शिरकत होने लगी वह प्यासी नजरों से अपनी मां का पिछवाड़ा देख रहा था वैसे तो उसकी जिंदगी में बहुत सी औरतें आई थी जिसके साथ वह जिंदगी का असली मजा लूट रहा था और उसे दिन पहले ही वह अपनी मां की जवानी का मजा भी चल चुका था लेकिन उसका मन नहीं भरा था क्योंकि अभी तो उसकी मां के साथ उसकी शुरुआत हुई थी की उसे शहर जाना पड गया था। इसलिए वह जी भर कर अपनी मां की चुदाई नहीं कर पाया था फिर से पूरा यकीन था कि जिस तरह की शुरुआत उसने अपनी मां के साथ किया था उसकी मां भी उसके साथ हम बिस्तर होने के लिए तड़प रही होगी। क्योंकि सूरज औरत की फितरत को अच्छी तरह से समझ गया था वह जानता था कि औरत को क्या चाहिए,,, दरवाजे पर खड़ा होकर वह अपनी मां की मदहोश कर देने वाली क्रियाकलाप को देखकर वैसे तो उसकी क्रियाकलाप सामान्य ही थी लेकिन सूरज की नजरों में वासना भरी हुई थी इसलिए उसे इस समय अपनी मां की सहज क्रियाकलाप भी उत्तेजना से भरी हुई लग रही थी वह अपने मन में यही सोच रहा था की कहानी रानी कमरे के अंदर ना हो वैसे तो अगर वह अपनी बहन की मौजूदगी में भी अपनी मां के साथ मजे ले लेगा तो भी वह जानता था कि कोई फर्क पड़ने वाला नहीं था लेकिन वह नहीं चाहता था कि उसकी मां शर्मिंदा हो जाए इसलिए वह सोच समझकर अपना कदम आगे बढ़ाना चाहता था।

कुछ देर तक सूरज इसी तरह से दरवाजे पर खड़ा होकर अपनी मां को झाड़ू लगाता हुआ देखता रहा और इस बीच कमरे के अंदर से कोई भी हलचल नहीं हुई जिसकी आवाज उसके कानों तक पहुंचती उसे पूरा यकीन हो गया की रानी समय घर पर नहीं है क्योंकि अगर वह घर पर होती तो बर्तनों की आवाज या उसके बात करने की आवाज जरूर उसे सुनाई देती लेकिन घर के अंदर पूरी तरह से खामोशी छाई हुई थी। सूरज का मन प्रसन्न होने लगा वह समझ गया था कि घर में उसकी मां किसी और कोई नहीं है जो काम उसने अधूरा छोड़ कर गया था उसे पूरा करना बेहद जरूरी था वह जानता था कि औरत को जब तक जी भर कर प्यार ना दो तब तक उसे मजा नहीं आता और वह उसे प्यार के लिए तड़पती रहती है और इस समय उसकी मां की भी यही हालत थी क्योंकि वह झाड़ू लगाते हुए अपने बेटे के बारे में सोच रही थी। और ऐसा दो दिन से हो रहा था जब से उसका बेटा शहर गया था तब से वह अपने बेटे के ख्यालों में ही कोई हुई थी किसी काम में उसका मन नहीं लगता था बस दिन रात उसे ऐसा महसूस होता था कि जैसे उसके बेटे का मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर की गहराई में डुबकी लगा रहा हो। सूरत से बर्दाश्त करना मुश्किल हुआ जा रहा था वह धीरे से कमरे के अंदर प्रवेश किया और दरवाजे को बंद करके धीरे से सिटकनी लगा दिया ताकि जरा सा भी आवाज ना हो,,, और दबे पांव वह अपनी मां की तरफ आगे बढ़ने लगा,,,, उसकी मां इस बात से बिल्कुल अनजान थी कि घर में उसका बेटा आ चुका है वह अपनी ही धुन में अपने बेटे के ख्याल में खोई हुई झाड़ू लगा रही थी कि तभी सूरज पीछे से अपना दोनों हाथ आगे बढ़ाकर अपनी मां की छाती पर रख दिया और ब्लाउज के ऊपर से उसकी दोनों चुची को जोर से दबा दिया। इस हरकत से सूरज की मन एकदम से घबरा गई और उसके मुंह से हल्की सी चीज निकल गई लेकिन जैसे ही वह नजर पीछे घूमा कर देखी तो अपने बेटे को देखकर उसका डर एकदम से गायब हो गया और एक हल्की सी मुस्कान उसके होठों पर छा गई,, लेकिन जल्द ही वह अपने आप पर काबू करते हुए जानबूझकर गुस्सा दिखाते हुए बोली।

कहां चला गया था 2 दिन तक,,,, तू तो कहा था जल्दी आ जाऊंगा तो इतनी देर क्यों लगा दिया,,,,।(अपने बेटे के हाथ को अपनी चूची पर से हटाने की कोशिश करते हुए वह बोली लेकिन सूरज अपनी हथेलियों को हटाना नहीं चाहता था,, वह इस तरह से अपनी मां की चुची को दबाते हुए बोला,,)


क्या करूं मां अब मैं पहले कभी शहर तो गया नहीं था पहली बार शहर जा रहा था इसलिए समय का अंदाजा नहीं लगा कि कब आऊंगा कब जाऊंगा कब पहुंचूंगा इसलिए देर हो गई,,,,।
(सूरज मदहोशी भरी स्तन मर्दन से अपनी मां को मदहोश कर रहा था और सूरज की हरकत सुनैना को भी अच्छी लग रही थी लेकिन फिर भी वह जानबूझकर गुस्सा दिखा रही थी और इस बार भी वह दोनों हाथ पकड़ कर अपनी चूची से हटाते हुए बोली)

जा मुझे तुझसे बात नहीं करनी है मुझे काम करने दे,,,।

क्या हुआ तुम भी दो दिन बाद तुम्हारा बेटा घर आया है और तुम हो कि गुस्सा कर रही हो,,,, मुझे प्यार करने दो,,,।

कोई जरूरत नहीं है प्यार करने की,,, 2 दिन तक ख्याल नहीं आया कि प्यार करना है।

2 दिन तुमसे दूर रहा था अभी तो एहसास हो रहा है कि मुझे तो एक पल भी तुमसे दूर नहीं रहना चाहिए और इसीलिए तो हमें 2 दिन की कसर निकाल देना चाहता हूं,,,, (अपनी मां की चूची को कस के दबाते हुए सूरज अपने मन की अभिलाषा को जाहिर करते हुए बोला अपने बेटे की आवाज सुनकर सुनैना भी मन ही मन खुश होने लगी लेकिन फिर भी वह जान बुझ कर अपने बेटे से रूठ रही थी। क्योंकि एक औरत होने के नाते एक मर्द से रूठने की अहमियत सुनैना अच्छी तरह से जानती थी क्योंकि पहले जब सब कुछ सही था उसके और उसके पति के बीच तो वह इसी तरह से अपने पति से रूठ जाती थी और उसका पति उसे प्यार से मानता था और मनाने के साथ ही दोनों हम बिस्तर हो जाते थे जिससे मजा दोगुना हो ज्यादा था इसलिए आज वह अपने बेटे से रूठ रही थी वह देखना चाहती थी कि उसका बेटा उसे किस तरह से मनाता है,,, झाड़ू को एक तरफ रखकर उठकर खड़ी हो गई और कमरे के अंदर जाने लगे तो पीछे-पीछे सूरज भी चल दिया,,,,, और मुस्कुराते हुए बोला।)

गुस्से में तुम और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही हो तुम्हारा गुस्सा देखकर तुम्हारा यह रूठना देखकर मुझे एक गाना याद आ रहा है जो मैं शहर में रेडियो में सुना था,,, अगर इजाजत हो तो सुना दुं,,,,,।

मुझे कोई गाना गाना नहीं सुनना तु मुझे काम करने दे और यहां से चला जा,,,।

हाय तेरी यह अदा,,,,,, तुम रूठा ना करो मेरी जां मेरी जान निकल जाती है तुम हंसती रहती हो तो एक बिजली सी चमक जाती है,,,,,।

(इतना सुनकर सुनैना अपने आप को रोक नहीं पाई और उसके होठों पर मुस्कान आ गई और बोली)

बहुत फिल्मी हीरो बनने का मन कर रहा है तेरा,,,।

आप कर भी कर सकता हूं मेरे सामने अगर फिल्म की हीरोइन होगी तो मुझे भी तो हीरो बनना ही पड़ेगा,,,,, वैसे मां मैं तुम्हारे लिए शहर से रंग बिरंगी चूड़ियां लाया हूं रुको अभी लेकर आता हूं,,,,, (इतना क्यों करवा अपनी मां के कमरे से निकाला और घर के मुख्य दरवाजे के पास पहुंच गया जहां पर उसने धीरे से हाथ में लिया हुआ थैला रख दिया था और वह थैला उठाकर वापस अपनी मां के कमरे में आ गया,,,, और खेलने से रंग बिरंगी चूड़ियां निकाल कर अपनी मां को दिखाते हुए बोला।)

देखो यह मैं तुम्हारे लिए लिया था तुम्हारी गोरी कलाई में बहुत खूबसूरत लगेगी,,,,।
(रंग बिरंगी चूड़ियां देखकर सुनैना एकदम से खुश हो गई फिर एकदम से अपने बेटे की तरफ देखते हुए बोली)

अब ईसे पहनाएगा कौन,,,?

मैं पहनाऊंगा ना अपने हाथों से,,,,, लेकिन फिर सोचता हूं कि कहीं यह चूड़ियां मेरे हाथों से ही टूट न जाए,,,।

ऐसा क्यों,,,?

बिस्तर पर तुम्हारे साथ कुश्ती करते हुए तुम्हारी कलाई पकड़ कर तुम्हारी बुर में धक्का लगाने में जो मजा आता है उसे मजे के साथ तुम्हारी चूड़ियां भी टूट जाएगी,,,।
(अपने बेटे की आवाज सुनकर सुनैना का चेहरा शर्म से लाल हो गया वह कुछ बोल नहीं पाए और वह दूसरी तरफ नजर घुमा ली,,,, अपनी मां के खूबसूरत चेहरे को शर्म से लाल होता हुआ देखकर सूरज की उत्तेजना बढ़ने लगी थी और वह समझ गया था कि उसकी मां के मन में क्या चल रहा है इसलिए वहां अपनी मां का हाथ पकड़ कर बोला,,,)

कोई बात नहीं जितनी बार टूटेगी उतनी बार नया खरीद दूंगा लेकिन मजा पूरा लूंगा,,,,, (पर ऐसा कहते हुए अपनी मां के हाथ में चूड़ी पहनाने लगा,,, चूड़ी सही नाप की थी इसलिए बड़े आराम से सुनैना की कलाई में जाने लगी देखते-देखते सूरज सारी चूड़ियां अपनी मां की दोनों हाथों में पहना दिया और दोनों कलाई को हाथ में पकड़ कर चूड़ियों को आपस में धीरे-धीरे से लड़ने लगा जिससे खनखन की आवाज आने लगी और यह आवाज सुनकर सुनैना फिर से शर्म से पानी पानी होने लगी सूरज खुश होता हुआ बोला,,,)

देखो तुम्हारी गोरी कलाइयों में चूड़ी कितनी खूबसूरत लग रही है,,,,,,।
(अपने बेटे के कहने पर सुनैना नजर उठा कर अपनी कलाइयों की तरफ देखने लगी वाकई में उसकी कलाइयां बेहद खूबसूरत लग रही थी सूरज अपना दोनों हाथ अपनी मां की दोनों कलाइयां से हटा दिया था उसकी मां खुश होते हुए अपनी कलाइयों को देख रही थी और दूसरी तरफ सूरज अपने दोनों हाथों से अपनी मां की साड़ी को ऊपर की तरफ सरकार आया था दोनों चारपाई पर बैठे हुए थे,,,, सूरज की हरकत का एहसास सुनैना को भी अच्छी तरह से था लेकिन वह सूरज को रोक नहीं पा रही थी क्योंकि वह भी यही चाहती थी,,,, देखते देखते सूरज अपनी मां की साड़ी को उसके घुटनों के ऊपर तक सरका दिया था इस बात का अहसास होते ही सुनैना जानबूझकर अपने बेटे को रोकने की कोशिश करते हुए बोली,,,)

अभी रहने दे बहुत कम है रानी किसी भी समय घर पर आ जाएगी,,,,, मुझे जाना है,,, (ऐसा कहते हुए सुनैना चारपाई से उठने की कोशिश कर ही रही थी कि सूरज फिर से उसकी कलाई पकड़ कर खींच दिया और वह फिर से बिस्तर पर बैठ गई और सूरज बोला)

तुम्हारे लिए इतना अच्छा तोहफा लाया हूं मुझे भी तो अपना तोहफा ले लेने दो,,,।

तेरा तोहफा भागा नहीं जा रहा है,,,।

2 दिन से तुम्हारी याद में तड़प रहा था इस समय मुझे बिल्कुल भी रोकने की कोशिश मत करो और ऐसा कहते हुए सूरज फिर से अपनी मां की साड़ी को उसकी मोती मोती जांघों के ऊपर की तरफ सरकार ने लगा उसकी गोरी गोरी मोटी मोटी जांघों को देखकर सूरज की आंखों की चमक बढ़ने लगी,,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी वह फिर भी जानबूझकर अपने बेटे कहां पकड़ कर उसे रोकने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसकी पकड़ में उसे रोकने का प्रभाव बिल्कुल भी दिखाई नहीं दे रहा था और देखते ही देखते सूरज अपनी मां की साड़ी को जांघों के ऊपरी छोर तक सरका दिया था जहां से, सूरज को उसकी मां की गुलाबी पर एकदम साफ नजर आने लगी जिस पर उसकी बूंद की तरह उसका मदन रा मोती की तरह चमक रहा था जिसे देखकर सूरज समझ गया था कि उसकी मां की चुदवासी हो चुकी है,,,,,, सूरज की आंखों में वासना की चमक बढ़ती जा रही थी वह हल्की सी मलिक मुस्कान अपनी होठों पर लाते हुए अपनी मां की गुलाबी बुर को देखते हुए बोला,,,)

देखो तो ऐसा लग रहा है कि आसमान में चांद निकल आया है,,,,,,,।
(पहले तो सुनैना को ऐसा लगा कि उसका बेटा उसके खूबसूरत चेहरे की तारीफ कर रहा है लेकिन जैसे ही उसे एहसास हुआ कि उसका बेटा उसके दोनों टांगों के बीच नजर गडाए बैठा है तब उसे समझ में आ गया कि उसका बेटा उसकी बुर की तारीफ कर रहा है और वह फिर से शर्म से पानी पानी हो गई। अपनी मां को शर्माता हुआ देखकर सूरज अपनी हथेली को अपनी मां की बुर पर रखती और उसे हल्के हल्के सैलानी लगा और ऐसा करते हुए खुद सूरज के मुंह से हल्की-हल्की शिसकारी की आवाज टूट रही थी उसकी आंखें उत्तेजना से बंद होने लगी थी जिसे पता चल रहा था कि सूरज को कितना आनंद आ रहा था और उसकी मां भी मदहोश हो जा रही थी दोनों की आंखें बंद हो चुकी थी सूरज अपनी हरकत को लगातार बढ़ते जा रहा था हल्के हल्के से शुरुआत करता हुआ उसके हथेली की रगड़ सुनैना की बुर पर बढ़ती जा रही थी अब वह जोर-जोर से उसे रगड़ रहा था अपनी मां की गुलाबी पर को एकदम टमाटर की तरह लाल कर दिया था सुनैना की दूरी कचोरी की तरह फूल चुकी थी अगले ही पल कमरे के अंदर उसकी मां की गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकलने लगी,,,, और वह सिसकारी लेते हुए बोली।)

सहहहहहह आहहहहहहहह,,,,,, कहीं रानी ना जाए,,,,।

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो ना मैंने दरवाजे की कड़ी लगा दिया हूं अगर आएगी भी तो दरवाजे पर दस्तक देगी,,,,,।
(अपने बेटे की ईस चालाकी पर सुनैना अंदर ही अंदर प्रसन्न होने लगी उसकी आंखों में मदहोशी का नशा खुल रहा था उसका बदन अब उसका साथ नहीं दे रहा था,,,, देखते ही देखते सूरज अपनी आंखों को खोलकर अपनी मां के खूबसूरत चेहरे को उत्तेजना से तमतमाता हुआ देख रहा था उसकी हरकतें रुकने का नाम नहीं ले रही थी उसकी गहरी चलती सांसों की गति के साथ-साथ ब्लाउज में खेत उसकी दोनों बड़ी-बड़ी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी जिसे देखकर सूरज के अंदर बवंडर सा उठ रहा था। सुनैना की साड़ी का पल्लू पहले उसके कंधे से नीचे गिर चुका था जिससे उसकी भरपूर दोनों जवानी एकदम साफ झलक रही थी सूरज से रहा नहीं गया और वह अपने प्यास होठों को आगे बढ़ाकर अपनी मां के दहकते हुए होंठ पर रख दिया,, सुनैना की आंखें बंद थी लेकिन जैसे ही सूरज के होंठों को अपने होठों पर महसूस की को एकदम से पागलों की तरह अपने बेटे के होठों को अपने होठों के बीच लेकर चूसना शुरू कर दी वह पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी सूरज को भी अपनी मां की हरकत बहुत अच्छी लगी। वह पागलों की तरह अपनी मां की बुर को मसलते हुए उसके होठो का रसपान करने लगा,,, पूरे कमरे में सुनैना की गरमा गरम सिसकारी के साथ-साथ उसकी नई-नई चूड़ियों के खनकने की आवाज भी गूंज रही थी,,, जिससे मां बेटे दोनों की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी,,,,,, कुछ देर तक सूरज इसी तरह से आनंद लेता रहा लेकिन इस बीच वह अपनी मां की बुर में अपनी बीच वाली उंगली को प्रवेश कर चुका था उसे अंदर बाहर करते हुए अपनी मां को चरम सुख के करीब ले जा रहा था अपने होठों को अपनी मां के होठों से अलग करके वहां अपनी नजर को अपनी मां की दोनों टांगों के बीच स्थित कर दिया और अपनी उंगली की करामात को देखने लगा उसकी मां भी दोनों टांगों को फैलाए हुए अपने दोनों हाथों के पीछे की तरफ ले जाकर के चारपाई के तख्ते का सहारा लेकर अपने बेटे की हरकत को देखने लगी थी और चरम सुख के और बढ़ती चली जा रही थी जैसे-जैसे मदहोशी बढ़ती जा रही थी वैसे वैसे उसके चेहरे के हाव-भाव के साथ उसकी शिसकारी की आवाज भी तेज होती चली जा रही थी।

बहुत गर्म है मेरी रानी,,,, सहहहहहह आहहहहह कहीं मेरी उंगली गल ना जाए,,,,, सहहहहहह आहहहहहह बहुत मजा आ रहा है,,,, ऊमममममम ,,,,,, (और इतना कहने के साथ है सूरज अपनी दूसरी उंगली को भी अपनी मां की बुर में डाल दिया और उसे अंदर बाहर करने लगा देखते ही देखते उसकी मां झड़ने लगी उसके चेहरे की रंगत उड़ने लगी थी वह पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी,,,,, सूरज कब तक अपनी मां की बुर में उंगली को अंदर बाहर करता है जब तक कि वह पूरी तरह से अपनी मदन रस को बहा नहीं दी,,, धीरे-धीरे सुनैना की सांसे व्यवस्थित होने लगी,,, सूरज धीरे से अपनी मां के बुर में से अपनी दोनों उंगलियों को बाहर निकाला जो की पूरी तरह से उसकी मदन रस में डूबी हुई थी उंगलियों को निकाल कर वह अपनी मां के सामने उंगलियों को आपस में रगड़ते हुए दिखने लगा और उसमें से मदन रस नीचे टपक रहा था जिसे सूरज अपना होंठ लगाकर चाटने लगा यह देखकर सुनैना शर्म के मारे अपनी आंखों को बंद कर ली। सुनैना झड़ चुकी थी उसका काम हो चुका था। और उसे इस बात का डर भी था कि कहीं रानी वापस ना आ जाए, इसलिए वह उठकर जाने ही वाली थी कि फिर से सूरज ने उसका हाथ पकड़ कर चारपाई पर बैठा दिया और बोला।


कहां चली मेरी जान तुम्हारा तो हो गया लेकिन मेरा तो बाकी है,,,,।

अरे जाने देना बहुत काम बाकी है,,,,।

मेरा भी काम बाकी है वह सब काम तो होता रहेगा लेकिन पहले मेरा काम करो,,,,,(ऐसा कहते हुए सूरज अपनी मां की दोनों टांगों को खोलने लगा और वह कुछ बोल पाती या समझ पाती इससे पहले ही सूरज अपने पैसे होठों को अपनी मां की बुर पर रख दिया और से चाटना शुरू कर दिया,,,,,, अभी-अभी सुनैना झड़ी थी लेकिन अपने बेटे की हरकत से फिर से तैयार हो गई थी और फिर से मदहोश होने लगी पल भर में ही सूरज अपनी मां की जवानी पर छा गया और उसकी गुलाबी पर को अपने होठों से चाट चाट कर लाल करने लगा,,,, एक बार फिर से पूरे कमरे में सुनैना की गरमा गरम सिसकारी गुंजने लगी,,,।

सहहहहह ऊममममम,,,,,आहहहहह दैयाआआआआआ,,,,,सहहहहहह आहहहहहहहह ,,,,,( इस तरह की मादक आवाज निकालते हुए सुनैना अपने दोनों हथेली को अपने बेटे के सर पर रख दी और उसे पर दबाव बनाते हुए नीचे से अपनी बुर को ऊपर की तरफ उचकाने लगी,,, सुनैना फिर से तैयार हो चुकी थी,,, वैसे भी आज चूड़ियों के झांकने की आवाज पूरे कमरे में बार-बार गूंज रही थी क्योंकि पहली बार सुनैना अपनी पूरी कलाई में चूड़ियां पहनी हुई थी वरना दोनों कलाई में केवल दो-दो चूड़ियां होती थी,,,,, ढेर सारी चूड़ियों की वजह से उसकी कलाई की खूबसूरती एकदम से बढ़ गई थी,,,, अपने बेटे की हरकत और ढेर सारा प्यार देखकर सुनैना गदगद हुए जा रही थी, सूरज कुछ देर तक इसी तरह से अपनी मां को मस्त करता है और फिर धीरे से अपना मुंह अपनी मां की टांगों के बीच से ऊपर उठा लिया उसके होठों से सुनैना की बुर का मदन रस टपक रहा था जिसे देखकर सुनैना शर्म से गदगद हुए जा रही थी,,,,।

बहुत नमकीन पानी है तुम्हारा,,,,(ऐसा कहते हुए सूरज अपनी कमीज निकालने लगा,,,, यह देखकर सुनैना जानबूझकर बोली,,,)

जाने देना बाद में कर लेना,,,,, रानी आ जाएगी तो देखेंगी कोई काम नहीं हुआ है तो क्या कहेगी,,,।

कुछ नहीं कहेगी मेरी रानी उसका भी मुंह बंद करने का इंतजार मैं कर लिया हूं उसके लिए भी कपड़े लाया हूं,,,(ऐसा कहते हुए सूरज खटिया पर से नीचे उतर गया और अपनी कमीज एक तरफ रख कर अपने पजामा का नाड़ा खोलने लगा,,,, सुनैना का दिल जोरो से धड़क रहा था क्योंकि यह सब सुनैना के लिए बिल्कुल नया-नया सा था दो-तीन पहले ही अपने बेटे के साथ हम बिस्तर हुई थी और उसे आदत सी पड़ गई थी वह प्यासी नजरों से अपने बेटे के पजामे की तरफ देख रही थी,,, जिसे देखते ही देखते सूरज अपने बदन से अलग कर दिया और अपनी मां के सामने एकदम नंगा खड़ा हो गया अपने बेटे के मर्दाना लंड को देखकर सुनैना का मुंह खुला का खुला रह गया। वह अपने बेटे के लंज को देखती ही रह गई,,, अपने लंड को हाथ में पकड़ कर उसे हिलाता हुआ उसके सुपाडे को अपनी मां के लाल लाल होठों पर रगड़ना शुरू कर दिया,,, बस फिर क्या था सुनैना की तड़प एकदम से बढ़ गई और वह तुरंत अपने बेटे के लंड को अपने मुंह में भर ली और से चूसना शुरू कर दी,,,, सूरज का लंड इतना ज्यादा मोटा था कि सुनैना को अपना पूरा मुंह खोलना पड़ता था फिर भी ठीक तरह से उसके मुंह में समा नही पा रहा था,,,, सूरज मदहोश हुआ जा रहा था क्योंकि सुनैना अपनी जीभ को उसके सुपाड़े पर घूमा रही थी। देखते देखते सुनैना मस्त होते हुए अपने बेटे के लंड को अपने गले के नीचे तक उतार ले रही थी ऐसा करने में उसे सांस लेने में तकलीफ तो हो रही थी लेकिन फिर भी वह मस्ती के सागर में डूब जाना चाहती थी सूरज को भी अपनी मां की हरकत बहुत अच्छी लग रही थी वह अपनी मां के सर पर दोनों हाथ रखकर अपनी कमर को आगे पीछे करके हिलाना शुरू कर दिया था,,,,।

सहहहहह आहहहहहह असली मजा तू इसी में है,,,आहहहह पूरा चूसो मेरी जान,,,आहहहह क्या मस्त तुम चुसती हो मां,,,,आहहहहह इस समय पूरी छिनार लग रही हो,,,,,ऊमममममम सही में गांव की लड़की तुम्हें देखे होंगे तो उनका लंड बिना कहे खड़ा हो जाता होगा इस बात से मैं भी इनकार नहीं कर सकता सच में तुम बहुत मस्त औरत हो,,,,आहहहहह आहहहह बहुत मजा दे रही हो मेरी रानी,,,,सहहहहह आहहहहहहहह ,,,,, बुर से ज्यादा तो तुम्हारा मूंह चोदने में मुझे मजा आ रहा है।सहहहहह आहहहहहह इसी तरह से अंदर को पूरा गले तक उतार लो,,,,ऊममममम यह हुई ना बात,,,, तुम असली छिनार हो,,,,आहहहहहह।

सूरज उत्तेजना से भर चुका था वह अपनी मां को छिनार कहकर संबोधन कर रहा था लेकिन उसकी मां बिल्कुल भी गुस्सा नहीं कर रही थी बल्कि अपने लिए छिनार शब्द सुनकर वह और भी ज्यादा उत्तेजित हो जा रही थी उसे अच्छा लग रहा था अपने बेटे के मुंह से छिनार शब्द सुनना,,,, उसका जोश बढ़ता जा रहा था,,,,, कुछ देर तक सूरज इसी तरह से मजा लेता रहा,,,, वैसे तो वह 2 दिन के सफर की वजह से थक चुका था उसे आराम की जरूरत थी लेकिन फिर भी अपनी मां का भारी भरकम पिछवाड़ा देखकर वह अपने आप को रोक नहीं पाया था और नतीजन इस समय उसका लंड उसकी मां की मुंह में था। कुछ देर तक सूरज इसी तरह से मजा लेता और फिर धीरे से अपने लंड को अपनी मां की बुर में से बाहर निकाल लिया उसकी मां भी जानती थी कि अब सूरज क्या करने वाला है इसलिए उसका दिल जोरो से धड़क रहा था। वैसे तो वह पिछले दो दिन में अपने बेटे के साथ तीन-चार बार चुदवा चुकी थी लेकिन फिर भी सुनैना को अपने बेटे का लंड अपनी बुर में लेने में डर महसूस हो रहा था,,,, फिर भी उसे यह सब करना ही था,,,, अपनी मां के मुंह में से लंड को बाहर निकालने के बाद सूरज अपनी मां से बोला।

लेट जाओ मेरी रानी,,,,।
(अपने बेटे की बात मानते हुए सुनैना पीना कुछ कहे चारपाई पर लेट गई शर्म के बारे में अपनी नजर को दूसरी तरफ कर ली थी यह देखकर सूरज अपने लंड को हाथ में पकड़ कर हीलाता हुआ बोला)

गांड के नीचे तकिया लगा लो मां तब आराम से धक्का सह पाओगी,,,,,,।
(यह सुनकर अपने बेटे की बात मानते हुए अपने सर के नीचे रखे हुए तकीए को अपने हाथ में लेकर वह धीरे से अपनी गांड को ऊपर उठाई और अपनी गांड के नीचे रख ली,,,, यह देखकर सूरज और भी ज्यादा उत्तेजित हो गया क्योंकि उसकी मां उसकी सारी बात मान रही थी और ऐसा वह किस लिए कर रही थी सूरज इस बात को अच्छी तरह से जानता था वह जानता था कि उसकी मां भी उसके लंड को अपनी बुर में लेना चाहती थी और वह तड़प रही थी जल्दी से जल्दी लंड को अपनी बुर में लेने के लिए इसलिए उसकी सारी बात मान रही थी,,,, सुनैना खुद ही अपनी दोनों टांगों को खोल कर अपने बेटे के सामने अपनी बुर को परोस दी थी कचोरी की तरह फुली हुई बुर देखकर सूरज के तन बदन में उत्तेजना का तूफान उठने लगा,,,, और वह अपने लंड की सुपाड़े को अपनी मां की गुलाबी छेद से सटा दिया,,, गर्माहट भरे सुपाड़े को अपनी बुर पर महसूस करके सुनैना एकदम से गदगद हो गई,,, पहले से ही सुनैना की बर सूरज के थूक और मदन रस से गीली और चिकनी हो चुकी थी इसलिए सूरज को ज्यादा मशक्कत नहीं करना पड़ा धीरे-धीरे सूरज अपने लंड कैसे पानी को अपनी मां की बुर के अंदर डालना शुरू कर दिया चिकनाहट पाकर मोटा सुपाड़ा बड़े आराम से बुर के अंदर सरक रहा था। सुनैना एकदम मदहोश हो जा रही थी उसके चेहरे का रंग पल-पल बदल रहा था उसकी सांसों की गति के साथ ब्लाउज में के उसकी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी। 2 दिन बाद फिर से सूरज को अपनी मां चोदने को मिल रही थी इस बात की खुशी सूरज के चेहरे पर एकदम साफ दिखाई दे रही थी‌। सूरज ने 2 दिन में ऐसा बिल्कुल भी नहीं था कि बिना चुदाई के रहा हो पिछले दो दिनों में , वह शालू और नीलू के साथ-साथ शहर में शेठ जी की बीवी की जमकर चुदाई कर चुका था लेकिन फिर भी इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि जब तक वह अपनी मां की चुदाई ना कर ले तब तक उसका मन नहीं भरता था।

धीरे-धीरे करके सूरज अपने मोटे से बड़े लंड को अपनी मां की बुर की गहराई में प्रवेश करा चुका था,,,, पूरा लंड बुर में घुस चुका था सुनैना अपनी आंखों को खोलकर अपनी दोनों टांगों के बीच की स्थिति का जायजा ले रही थी और वह भी काफी अचरज में पड़ जाती थी जब सूरज का मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर की गहराई में घुस जाता था क्योंकि अपने बेटे के लंड को देखकर वह कल्पना भी नहीं कर सकती थी कि उसकी बुर इतने मोटे तगड़े लंड को अपने अंदर ले लेगी,,,,, जिस तरह से आश्चर्य से सुनैना अपने बेटे के लैंड को अपनी बुर में घुसा हुआ देख रही थी यह देखकर सूरज अपनी मां से बोला।

देख रही हो मां मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि ईसी बुर से में बाहर निकला हूं और अब देखो इसी बुर में अपना लंड डालकर मजा ले रहा हूं।
(यह सुनकर सुन ना एकदम से शर्म से पानी पानी हो गई और अपनी आंखों को बंद कर ली लेकिन फिर भी वह अपने बेटे को जवाब देते हुएबोली)

मैं भी कभी नहीं सोचती थी कि जिस बेटे को पैदा कर रही हूं एक दिन उसी से चुदवाना पड़ेगा।

हां यह बात तो है लेकिन देख लो तुमने पूरा मर्द पैदा की हो जो तुम्हें भी पूरा मजा दे रहा है,,(ऐसा कहते हुए सूरज धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया,, सुनैना मदहोश होने लगी सूरज का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था जो की सुनैना की बुर में उसके अंदरुनी दीवारों को रगड़ता हुआ अंदर बाहर हो रहा था जिससे सुनैना का मजा बढ़ता ही जा रहा था। देखते ही देखते सूरज अपनी मां को चोदना शुरू कर दिया था,,,,, अब तक तो सुनैना घर की साफ सफाई कर चुकी होती और नहाने के लिए गुसलखाने में चली गई होती लेकिन सूरज ने पूरी तरह से व्यस्त कर दिया था। जैसे-जैसे कमर हिल रही थी वैसे-वैसे सुनैना का बदन भी हीचकोले खा रहा था,,, सूरज को मजा आ रहा था सूरज धीरे-धीरे अपनी कमर को आगे पीछे करता हुआ अपने लंड को अंदर बाहर कर रहा था क्योंकि लंड के मुकाबले बुर काफी कसी हुई थी जिससे सूरज को भी ज्यादा मजा आ रहा था। गांड के नीचे तकिया लगाए सुनैना अपने बेटे से चुदाई का आनंद लुट रही थी,,,, सूरज भी पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा था तभी उसे कुछ अधूरा सा लग रहा था और वह धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ाया और अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलने लगा,,,, अपने बेटे की हरकत को देखकर सुनैना समझ गई थी कि उसका बेटा बिस्तर में औरत को पूरी तरह से झकझोर कर रख देता है,,,, सुनैना भी उसे इनकार नहीं कर पाई और अगले ही पर सूरज अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलकर उसकी नंगी चूचियों को दोनों हाथ में लेकर दबाना शुरू कर दिया था और धीरे-धीरे अपनी रफ्तार बढ़ाना शुरू कर दिया था।

सुनैना एक बार झड़ चुकी थी,,, लेकिन जल्द ही चुदवाने के लिए तैयार हो गई थी,,, सूरज की कमर अब बड़ी तेजी से आगे पीछे हो रही थी और वहां बड़े जो उसके साथ अपनी मां की चूची को खरबूजे की तरह दबा रहा था,,,,, कमरे में गरमा गरम आनंद भरी शिसकारी की आवाज के साथ-साथ हल्की सी दर्द की कराहने की आवाज भी आ रही थी क्योंकि सूरज रह रहकर बड़ी जोर से धक्के लगना शुरू कर देता था जो कि इस तरह के धक्को को सहना सुनैना के बस का नहीं था,,,,,।

जल्दी कर रानी आ जाएगी,,,,,।

आती है तो आ जाने दो वह भी तो देखी उसकी मां कितनी बड़ी छिनार है,,,,, उसे भी तो पता चलना चाहिए की औरत के लिए सबसे ज्यादा जरूरी मर्द का लंड होता है फिर वह चाहे जिसका भी हो।

हरामजादे तुझे शर्म नहीं आती इस तरह की बात करते हुए अगर वह हम दोनों को इस तरह से देख लेगी तो क्या सोचेंगी।

वही तो मैं कह रहा हूं मेरी जान देखती हैं तो देख जाने दो वह भी तो पूरी तरह से जवान है,,,,,।

अपनी बहन के बारे में ऐसा कहते हुए तुझे शर्म नहीं आ रही है।

क्या कह रही हो मां तुम्हारे बारे में भी तो कभी इस तरह का सोच कर मुझे शर्म आती थी लेकिन आज देखो कैसे हालात बन चुके हैं मेरा लंड पूरा तुम्हारी बुर के अंदर है और तुम मजा ले रही हो। इसीलिए कहता हूं की सबसे ज्यादा जरूरत जिस समय जिस चीज की होती है वह पूरा कर लेना चाहिए इस समय हम दोनों को इसी चीज की जरूरत है और हम यह सब पूरा कर रहे हैं,,,, और अगर तुम्हें चुदवाते हुए रानी देख भी जाती है तो क्या हुआ वह थोड़ी ना किसी को बाहर जाकर रहेगी कि मेरी मां मेरे भैया से चुदवाती है। घर की बात घर में ही रह जाएगी।
(वैसे तो यह सब बातें परिवार के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं थी लेकिन चुदवाते समय सुनैना को न जाने क्यों अपने बेटे की कही बातें अच्छी लग रही थी,,, लेकिन फिर भी वह अपने बेटे से बोली।)

नहीं नहीं अच्छी बात नहीं है रानी ने अगर हम दोनों कोई समझता में देख ली तो गजब हो जाएगा।

कुछ गजब नहीं होगा मां,,, अगर ऐसा होता है तो तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो उसे भी पटक कर चोद दूंगा वैसे भी वह भी अब शादी के लायक हो गई है,,, उसे भी यह सब में मजा आएगा,,,,।

तुझे शर्म नहीं आती अपनी बहन के बारे में इस तरह की बातें करते हुए वह तुझसे छोटी है।

तो क्या हुआ जवान तो है उसके पास भी तुम्हारी तरह खूबसूरत बुर है,,,,।
(सूरज के मुंह से अपनी बहन के लिए इस तरह की बातें सुनकर जहां सुनैना को गुस्सा आना चाहिए था वही ना जाने क्यों उसे मजा आ रहा था क्योंकि इस समय वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी ऐसे हालात में औरत के साथ जितनी गंदी बात की जाए उतना ही उसे मजा आता है और इस समय सुनैना के भी हालत बिलकुल उसी तरह के थे अपनी मां को समझाते हुए सूरज बोला)


तुम ही सोचो अगर रानी ने हम दोनों को रानी हाथ पकड़ ली तो हम दोनों के पास कोई रास्ता रह जाता है बचने का,,,, ऐसी हालत में रानी का मुंह बंद करने का कोई तरीका है,,,,,(सूरज फिर से धीरे-धीरे धक्का लगता हुआ अपनी मां से बोला और इस बीच लगातार उसकी खरबूजे जैसी चुचियों को मसल रहा था,,,,,) नहीं है ना उसे हालत में बदनामी से बचने के लिए एक ही काम करना पड़ेगा की रानी को भी इस खेल में शामिल करना पड़ेगा,,,।

धत्,,,,, पागल हो गया है क्या तु,,, मेरी तो लगी रहे अपनी बहन की भी लेने का विचार है क्या तेरे मन में,,,।

नहीं नहीं ऐसा कोई विचार नहीं है लेकिन अगर तुम ही सोचो उसे तरह के हालात में क्या करना होगा रानी का मुंह बंद करने के लिए तुम्हारे पास कोई जवाब नहीं है लेकिन मैं जानता हूं रानी पूरी तरह से जवान हो चुकी है अपनी सहेलियों के साथ रहकर वह गंदी बातें जरूर करती होगी क्योंकि उम्र ही कुछ ऐसी है अब उसकी भी शादी करना जरूरी हो गया है ऐसे में उसका मन मजा लेने को करता ही होगा बाहर जाकर दूसरों से मजा ले इससे अच्छा तो घर में ही मजा ले सकती है हम लोगों का राज राज ही रह जाएगा किसी को पता भी नहीं चलेगा और रानी भी चुप तुम भी चुप मैं भी चुप बस मजे लूटेंगे,,,,(इस तरह की बातें करके सूरज अपनी लिए रास्ता साफ करना चाहता था क्योंकि वह जानता था कि आज नहीं तो कल रानी को भी इस बारे में पता चल जाएगा और वैसे भी वह रानी को जो कुछ भी हो रहा है इस बारे में पहले ही बता चुका था कि अगर ऐसे हालात बनेंगे तो मां का मुंह बंद करने का एक ही तरीका है कि उसे भी इस खेल में शामिल कर लेंगे और वही युक्ति सूरज अपनी बहन के बारे में भी अपनी मां को बता रहा था वैसे तो सूरज की यह युक्ति सुनैना को अच्छी नहीं लगी और वह कुछ बोली नहीं सूरज भी हालत को समझते हुए कुछ बोला नहीं और जोर-जोर से धक्के लगना शुरू कर दिया और अपनी मां के ऊपर झुक कर उसकी चूची को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया। सुनैना मस्त होने लगी और अपने बेटे के सर पर हाथ रखकर उसका हौसला बढ़ाने लगी,,,, दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे सूरज ने 2 दिन के सफर की थकान उतारने के लिए अच्छा तरीका ढूंढ निकाला था,,,, वह जम कर अपनी मां की चुदाई कर रहा था,,,, सूरज जब रुकने का नाम नहीं ले रहा था क्योंकि वह झड़ने के कगार पर पहुंच चुका था और यही हालत सुनैना के भी थे सुनैना का भजन करने लगा था सूरज उसे अपनी बाहों में भरकर कस के थक्के लगना शुरू कर दिया था और देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ने लगे।

वासना का तूफान शांत हो चुका था सूरज धीरे से अपनी मां के ऊपर से उठा और अपने कपड़े पहनने लगा,,,, और अपनी मां से बोला,,,।

मैं अब काफी थक चुका हूं,,, रानी के लिए और तुम्हारे लिए कपड़े लाया हूं देख लेना,,,,।

अरे नहा तो ले,,,(अपने ब्लाउज का बटन बंद करते हुए सुनैना बोली)

अब बाद में नहाउंगा,,,।

अरे नहाना नहीं है तो कुछ खा तो ले,,,।

तुम्हारा दूध पीकर पेट भर गया है। खाना बना देना उठुंगा तो नहा भी लूंगा और खा भी लूंगा,,,,(इतना कहते हुए अपनी मां के कमरे से बाहर निकल गया और अपने कमरे में चला गया सुनैना धीरे से बिस्तर से उठी और अपने कपड़ों को व्यवस्थित करने लगी और जो कुछ भी उसने रानी के बारे में कहा था उस बारे में सोचने लगी फिर जाकर वह घर की साफ सफाई करने लगी।)
Waah kya update diya hai ❤️❤️❤️❤️❤️

Dil Gurda Fefde Kidney sab Jeet liya Rohnny bhai ❤️‍🔥❤️‍🔥
 
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