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मैं तुरंत ही उसकी चूत के दाने को अपनी जुबान से छेड़ने लगा
और वो मेरे लण्ड को पकड़ कर खेलने लगी और थोड़ी ही देर में उसने अपनी नरम जुबान मेरे लौड़े पर रखकर सुपाड़े को चाटने लगी.. जिससे मुझे असीम आनन्द की प्राप्ति होने लगी। बेटी मेरे लण्ड के सुपाडे को ऐसे चूस और चाट रही थी जैसे वो लण्ड न हो कर कोई आइसक्रीम हो. सपना को इक हाड मांस का लौड़ा मुँह में लेने का मौका मिला था तो बेटी उस का पूरा फ़ायदा उठाने जा रही थी.
उसकी गीली जुबान की हरकत से मेरे अन्दर ऐसा वासना का सैलाब उमड़ा.. जिसे मैं शब्द देने में असमर्थ हूँ.. फिर मैंने भी प्रतिउत्तर में उसके दाने को अपने मुँह में भर-भर कर चूसना चालू कर दिया.. जिससे उसके मुँह से 'अह्ह्ह ह्ह.. हाआआह... आआआ..' की आवाज स्वतः ही निकलने लगी।
उसके शरीर में एक अजीब सा कम्पन हो रहा था.. जिसे मैं महसूस करने लगा।
चूत चुसवाने के थोड़ी ही देर में वो अपनी टाँगें खुद ही फ़ैलाने लगी और अपने चूतड़ों को उठा कर मेरे मुँह पर रगड़ने लगी।
अब मुझे एहसास हो गया कि बेटी को इस क्रिया में असीम आनन्द की प्राप्ति हो रही है। फिर मैंने उसके जोश को और बढ़ाने के लिए अपनी उँगलियों के माध्यम से उसकी चूत की दरार को थोड़ा फैलाया और देखता ही रह गया.. चूत के अन्दर का बिलकुल ऐसा नज़ारा था.. जैसे किसी ने तरबूज पर हल्का सा चीरा लगा कर फैलाया हो.. उसकी चूत से रिस रहा पानी उसकी और शोभा बढ़ा रहा था।
मैंने बिना कुछ सोचे अपनी जुबान उसकी दरार में डाल दी.. और उसे चाटने लगा।
जिससे उत्तेजित होकर बेटी ने भी मेरे लण्ड के शिश्न-मुण्ड को और अन्दर ले कर चूसते हुए 'ओह.. शिइ... इइइइ.. शीईईई..' की सीत्कार के साथ 'अह्ह्ह.. अह्ह्ह्ह ह्ह..' करने लगी।
तो मैंने वक्त की नज़ाकत देखते हुए अपनी एक ऊँगली उसकी चूत के छेद में घुसेड़ दी.. जिससे उसकी एक और दर्द भरी 'आह्ह्ह्ह ह्ह..' छूट गई और दर्द से तड़पते हुए बोली (वो अभी भी हमारा बाप बेटी का भरम रखते हुए मुझे शुभम यानि अपने पति के नाम से ही बुला रही थी ताकि वो यह दिखा सके कि वो तो अपने पति से सेक्स कर रही है) - "शुभम! ..तुम्हारी ऊँगली मेरे अंदर लग रही है ये.. क्या कर दिया.. अब तो अन्दर जलन सी होने लगी है.".
मैंने बोला- बस थोड़ा रुको.. अभी सही किए देता हूँ।
फिर मैंने उंगली बाहर निकाली और उसकी चूत पर थूक लगाकर.. उसके छेद को चूसते हुए.. धीरे धीरे फिर से ऊँगली को अंदर करने लगा... जिससे उसका दर्द अपने आप ही ठीक होने लगा।
'अह्ह्ह्ह.. अह्ह्ह ह्ह्ह्ह.. शिइइ... शहअह...' की ध्वनि उसके मुँह से निकलने लगी।
सच में उस समय मेरी थूक ने उसके साथ बिल्कुल एंटी बायोटिक वाला काम किया और जब वो मस्ति के फिर से मेरा लण्ड चूसने लगी.. तो मैंने अपनी दूसरी ऊँगली भी अब बेटी की चूत में डाल दी।
इस बार वो थोड़ा कसमसाई तो.. पर कुछ बोली नहीं.. शायद वो और आगे का मज़ा लेना चाहती थी.. या फिर उसे दोबारा में दर्द कम हुआ होगा।
अब मैंने धीरे-धीरे उसकी चूत में उंगली करते हुए उसके दाने को अपनी जुबान से छेड़ने और मुँह से चूसने लगा। मेरी इस हरकत से उसने भी जोश में आकर मेरे लौड़े को अपने मुँह में और अन्दर ले जाते हुए तेज़ी से अन्दर-बाहर करने लगी।
उसके शरीर में हो रहे कम्पन को महसूस करते हुए मैं समझ गया कि अब बेटी झड़ने वाली है.. यही सही मौका है उंगली की स्पीड तेज कर दो.. ये विचार आते ही मेरा भी जोश बढ़ गया और मैं एक सधे हुए खिलाड़ी की तरह उसकी चूत में तेजी से उंगली अन्दर-बाहर करने लगा।
अब बेटी के मुँह से भी 'गु.. गगगग गु.. आह्ह..' की आवाज़ निकलने लगी.. क्योंकि वो भी मेरा लौड़ा फुल मस्ती में चूस रही थी.. जैसे सारा आज ही रस चूस-चूस कर खत्म कर देगी।
मैंने तुरंत ही अपनी उंगली अन्दर-बाहर करते हुए अचानक से पूरी बाहर निकाली और दोबारा तुरंत ही दो उँगलियों को मिलाकर एक ही बार में घुसेड़ दी..
बेटी को शायद थोड़ा दर्द हुआ, जिससे उसके दांत मेरे लौड़े पर भी गड़ गए और उसके साथ-साथ मेरे भी मुँह से भी 'अह्ह ह्ह्ह्ह..' की चीख निकल गई।
सच कहूँ, हम दोनों को इसमें बहुत मज़ा आया था।
आज भी इस बात को याद करते ही मैं एक्साइटेड हो जाता हूँ. मेरा लौड़ा तन कर आसमान छूने लगता है और उसकी चूत कामरस की धार छोड़ने लगती है।
खैर.. जब उसका दर्द कुछ कम हुआ तो फिर से वो लण्ड को चचोर-चचोर कर चूसने लगी और अपनी टांगों को मेरे सर पर बांधते हुए कसने लगी।
वो मेरे लौड़े को बुरी तरह चूसते हुए 'अह्ह्ह्ह ह्ह्ह्ह्ह ह्ह्ह..' के साथ ही झड़ गई। बेटी का पूरा शरीर कांप रहा था, और उसकी चूत से कम्पन मेरी जीभ पर भी अनुभव हो रहा था। बेटी की चूत से उसके काम रस का बाहर आ रहा था जिसे मैं फटाफट चाट रहा था ताकि बेटी के रस का एक भी कटरा बाहर न रह जाये. अपने बेटे से चूत चटवाने का बेटी का यह पहला अनुभव था..
मैंने इस तरह उसके रस को पूरा चाट लिया और छोड़ता भी कैसे.. आखिर मेरी मेहनत का फल था। और आप तो जानते ही हो की मेहनत का फल मीठा होता है। सचमुच बेटी की चूत का रस बहुत मीठा था.
उसकी तेज़ चलती सांसें.. मेरे लौड़े पर ऐसे लग रही थीं.. जैसे मेरे लौड़े में नई जान डाल रही हो.. और मैं भी पूरी मस्ती में उसकी बुर को चाट कर साफ करने लगा।
जब उसकी सांसें थोड़ा सधी.. तो वो एक लम्बी कराह 'अह्ह्ह ह्ह्ह्ह..' के साथ लेट गयी.
उसने बिना कुछ बोले- मेरे लण्ड को पकड़ा और दबा कर मेरे लौड़े को पकड़ कर अपने मुँह में डालकर चूसने लगी।
बीच-बीच में वो अपनी नशीली आँखों से मुझे देख भी लेती थी.. जिससे मुझे भी जोश आने लगा।
और यह क्या.. तभी उसकी बालों की लटें उसके चेहरे को सताने लगी.. जिसे वो अपने हाथों से हटा देती।
तो मैंने खुद ही उसके सर के पीछे हाथ ले जाकर उसके बालों को एक हाथ से पकड़ लिया।
हाय.. क्या सेक्सी सीन लग रहा था.. ओह माय गॉड.. एक सुन्दर परी सी अप्सरा जैसी मेरी बेटी मेरे लण्ड के अधीन हो कर..आपका लण्ड चूसे.. तो आपको कैसा लगे.. बिलकुल मुझे भी ऐसा ही लग रहा था।
फिर मैंने दूसरे हाथ से उसकी ठोड़ी को ऊपर उठाकर उसकी आँखों में झांकते हुए.. उसके मुँह में धक्के देने लगा.. जिससे उसके मुँह से 'उम्म्म.. उम्म्म्म.. गगग.. गूँ.. गूँ..' की आवाजें आने लगीं।
इस तरह कुछ देर और चूसने से मेरा भी काम होने के पास आने लगा. मुझे मालूम था की किसी भी टाइम मेरा माल निकल सकता है तो मैंने बेटी को मुह को जोर जोर से चोदना शुरू कर दिया. फिर एक जोर की आअह्ह के साथ मेरा माल उसके मुँह में ही छूट गया और वो बिना किसी रुकावट के सारा का सारा माल गटक गई।
हम दोनों बाप बेटी अपने सेक्स से बहुत थक गए थे तो हम दोनों एक दुसरे के साथ लेट गए। हम दोनों ही बिलकुल नंगे थे.
तो मैं फुसफुसाते हुए बोला- "तुम्हे मेरा चूत को चूसना और चाटना कैसा लगा.?"
तो वो बोली- जैसे तुम अच्छे से बिना दांत गड़ाए मेरी चूत को अपने मुँह में भर भर कर चूस रहे थे तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, ऐसा लग रहा था कि तुम बस चूसते ही रहो... मुझे सच में बहुत अच्छा लगा और तुम्हारी उँगलियों ने तो कमाल कर दिया, जैसे तुमने अपनी उंगली नहीं बल्कि मेरे अंदर नई जान डाल दी हो! ठीक वैसे ही मैंने भी सोचा कि क्यों न तुम्हें भी तुम्हारी तरह मज़ा दिया जाये! बस मैंने तुम्हारी नक़ल करके वैसे ही किया और मुझे पता है कि तुम्हें भी बहुत मज़ा आया... पर तुमने मेरी हालत ही बिगाड़ दी थी, मेरी तो सांस ही फूल गई थी। तुम्हारा लौड़ा बहुत मोटा है.इसलिए मुझे उसे मुँह में लेने में समस्या हो रही थी। पर कोई बात नहीं। धीरे धीरे आदत हो जाएगी। अगली बार तुम्हे अधिक मजा आएगा. असली चीज है की तुम्हारी जीभ भी बहुत लम्बी है. तुमने तो मुझे स्वर्ग में ही पहुंचा दिया. तुम्हारी जीभ लम्बी होने के कारण इतनी अंदर तक जा रही थी की आज तक कभी इतने आगे तक चुसाई नहीं हुई. यह मेरे लिए एक बहुत ही अलग अनुभव था। मैं तो आज बहुत खुश हूँ. क्योंकि तुमने मुझे इतनी मज़ा दिया था जिसे मैं अपने जीवन में कभी नहीं भुला सकती!
अब मैं उसके होंठों को अपने होंठों में दबा कर उसके होंठों का रसपान करने लगा और वो भी मेरा पूर्ण सहयोग देते हुए मेरे निचले होंठ को पागलों की तरह बेतहाशा चूसे जा रही थी, मुझे तो ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं जन्नत में हूँ,
सबसे ज्यादा ख़ुशी की बात तो यह थी एक अब बेटी की शर्म पूरी तरह दूर हो चुकी थी और वो चूत लण्ड जैसे शब्द खुल कर बोल रही थी और पूरा मजा ले रही थी.
"....ओह्ह्ह्हह...ओह...." बेटी के होंठ धीरे धीरे बुदबुदा रहे थे.
होंठ को अच्छी तरह चूमने के पश्चात मैं जल्द ही अपनी बेटी के स्तन पर पहुँच गया.
यहाँ पर अभी भी बेटी के हाथ थे. मेरा चेहरा जैसे ही बेटी के स्तन के ऊपर रखे हाथों से टकराता है तो वो अपने हाथ हटा लेती है और मुझे अपने स्तन चूमने देती है. मैं फिर से बेटी के निप्पल बदल बदल कर चूस रहा था. बेटी मेरे बालों में उँगलियाँ घुमा रही थी.
अपनी चूत चटवाई के उस जबरदस्त सख्लन के पश्चात बिलकुल सुस्त पड चुकी बेटी अब अपने जिस्म में कुछ हरकत महसूस कर रही थी.
न जाने कितने सालो के बाद बेटी ने यह परम संतुष्टी प्राप्त की थी इतना मजा बेटी को पहली बार मिल रहा था इस आनंद को तो वह भूल ही चुकी थी मगर इतने सालों बाद उनके पिता ने यह सुख उसे दिया.
निप्पलों को चूसते चूसते मैंने अपनी नज़र अपनी बेटी पर डाली जो मेरे बालों में उँगलियाँ फेरते हुए मुझे बेहद प्यार, स्नेह और ममतामई नज़र से देख रही थी.
हम दोनों बाप बेटी की नज़रें मिलती हैं और मैं आगे अपनी बेटी के चेहरे की और बढ़ता हु.
बेटी भी मेरा चेहरा अपने हाथों में थाम अपने मुंह पर खींचती है. मेरा चेहरा सीधा अपनी बेटी के चेहरे पर झुक जाता है
और हम दोनों के होंठ आपस में जुड़ जाते हैं. दोनों प्रेमियों की तरह एक दुसरे को चूम रहे थे. कभी बेटी मेरे तो कभी मैं बेटी के होंठों को चूस रहा था.
उधर बेटी को अपनी जांघों पर मेरा लण्ड ठोकरें मारता महसूस होता है.
बेटे के लण्ड को अपनी योनि के इतने नजदीक पाकर उनके बदन में कामौत्तेजना लौटने लगती है
और उसकी साँसों की गहराई बढ़ने लगती है.
बेटी की जिव्हा मेरे होंठो को चाटने लगती है और वो उसे मेरे मुंह में धकेलती है. मैं अपना मुंह खोल देता हु और बेटी की जिव्हा मेरे मुख में प्रवेश कर जाती है.
बेटी मेरी जीभ को अपनी जीभ से सहलाती है.
मगर मैंने एकदम से उसकी जीभ को अपने होंठो में दबाकर उसे चूसने लगा क्या शहद के जैसा स्वाद था.
और वो मेरे लण्ड को पकड़ कर खेलने लगी और थोड़ी ही देर में उसने अपनी नरम जुबान मेरे लौड़े पर रखकर सुपाड़े को चाटने लगी.. जिससे मुझे असीम आनन्द की प्राप्ति होने लगी। बेटी मेरे लण्ड के सुपाडे को ऐसे चूस और चाट रही थी जैसे वो लण्ड न हो कर कोई आइसक्रीम हो. सपना को इक हाड मांस का लौड़ा मुँह में लेने का मौका मिला था तो बेटी उस का पूरा फ़ायदा उठाने जा रही थी.
उसकी गीली जुबान की हरकत से मेरे अन्दर ऐसा वासना का सैलाब उमड़ा.. जिसे मैं शब्द देने में असमर्थ हूँ.. फिर मैंने भी प्रतिउत्तर में उसके दाने को अपने मुँह में भर-भर कर चूसना चालू कर दिया.. जिससे उसके मुँह से 'अह्ह्ह ह्ह.. हाआआह... आआआ..' की आवाज स्वतः ही निकलने लगी।
उसके शरीर में एक अजीब सा कम्पन हो रहा था.. जिसे मैं महसूस करने लगा।
चूत चुसवाने के थोड़ी ही देर में वो अपनी टाँगें खुद ही फ़ैलाने लगी और अपने चूतड़ों को उठा कर मेरे मुँह पर रगड़ने लगी।
अब मुझे एहसास हो गया कि बेटी को इस क्रिया में असीम आनन्द की प्राप्ति हो रही है। फिर मैंने उसके जोश को और बढ़ाने के लिए अपनी उँगलियों के माध्यम से उसकी चूत की दरार को थोड़ा फैलाया और देखता ही रह गया.. चूत के अन्दर का बिलकुल ऐसा नज़ारा था.. जैसे किसी ने तरबूज पर हल्का सा चीरा लगा कर फैलाया हो.. उसकी चूत से रिस रहा पानी उसकी और शोभा बढ़ा रहा था।
मैंने बिना कुछ सोचे अपनी जुबान उसकी दरार में डाल दी.. और उसे चाटने लगा।
जिससे उत्तेजित होकर बेटी ने भी मेरे लण्ड के शिश्न-मुण्ड को और अन्दर ले कर चूसते हुए 'ओह.. शिइ... इइइइ.. शीईईई..' की सीत्कार के साथ 'अह्ह्ह.. अह्ह्ह्ह ह्ह..' करने लगी।
तो मैंने वक्त की नज़ाकत देखते हुए अपनी एक ऊँगली उसकी चूत के छेद में घुसेड़ दी.. जिससे उसकी एक और दर्द भरी 'आह्ह्ह्ह ह्ह..' छूट गई और दर्द से तड़पते हुए बोली (वो अभी भी हमारा बाप बेटी का भरम रखते हुए मुझे शुभम यानि अपने पति के नाम से ही बुला रही थी ताकि वो यह दिखा सके कि वो तो अपने पति से सेक्स कर रही है) - "शुभम! ..तुम्हारी ऊँगली मेरे अंदर लग रही है ये.. क्या कर दिया.. अब तो अन्दर जलन सी होने लगी है.".
मैंने बोला- बस थोड़ा रुको.. अभी सही किए देता हूँ।
फिर मैंने उंगली बाहर निकाली और उसकी चूत पर थूक लगाकर.. उसके छेद को चूसते हुए.. धीरे धीरे फिर से ऊँगली को अंदर करने लगा... जिससे उसका दर्द अपने आप ही ठीक होने लगा।
'अह्ह्ह्ह.. अह्ह्ह ह्ह्ह्ह.. शिइइ... शहअह...' की ध्वनि उसके मुँह से निकलने लगी।
सच में उस समय मेरी थूक ने उसके साथ बिल्कुल एंटी बायोटिक वाला काम किया और जब वो मस्ति के फिर से मेरा लण्ड चूसने लगी.. तो मैंने अपनी दूसरी ऊँगली भी अब बेटी की चूत में डाल दी।
इस बार वो थोड़ा कसमसाई तो.. पर कुछ बोली नहीं.. शायद वो और आगे का मज़ा लेना चाहती थी.. या फिर उसे दोबारा में दर्द कम हुआ होगा।
अब मैंने धीरे-धीरे उसकी चूत में उंगली करते हुए उसके दाने को अपनी जुबान से छेड़ने और मुँह से चूसने लगा। मेरी इस हरकत से उसने भी जोश में आकर मेरे लौड़े को अपने मुँह में और अन्दर ले जाते हुए तेज़ी से अन्दर-बाहर करने लगी।
उसके शरीर में हो रहे कम्पन को महसूस करते हुए मैं समझ गया कि अब बेटी झड़ने वाली है.. यही सही मौका है उंगली की स्पीड तेज कर दो.. ये विचार आते ही मेरा भी जोश बढ़ गया और मैं एक सधे हुए खिलाड़ी की तरह उसकी चूत में तेजी से उंगली अन्दर-बाहर करने लगा।
अब बेटी के मुँह से भी 'गु.. गगगग गु.. आह्ह..' की आवाज़ निकलने लगी.. क्योंकि वो भी मेरा लौड़ा फुल मस्ती में चूस रही थी.. जैसे सारा आज ही रस चूस-चूस कर खत्म कर देगी।
मैंने तुरंत ही अपनी उंगली अन्दर-बाहर करते हुए अचानक से पूरी बाहर निकाली और दोबारा तुरंत ही दो उँगलियों को मिलाकर एक ही बार में घुसेड़ दी..
बेटी को शायद थोड़ा दर्द हुआ, जिससे उसके दांत मेरे लौड़े पर भी गड़ गए और उसके साथ-साथ मेरे भी मुँह से भी 'अह्ह ह्ह्ह्ह..' की चीख निकल गई।
सच कहूँ, हम दोनों को इसमें बहुत मज़ा आया था।
आज भी इस बात को याद करते ही मैं एक्साइटेड हो जाता हूँ. मेरा लौड़ा तन कर आसमान छूने लगता है और उसकी चूत कामरस की धार छोड़ने लगती है।
खैर.. जब उसका दर्द कुछ कम हुआ तो फिर से वो लण्ड को चचोर-चचोर कर चूसने लगी और अपनी टांगों को मेरे सर पर बांधते हुए कसने लगी।
वो मेरे लौड़े को बुरी तरह चूसते हुए 'अह्ह्ह्ह ह्ह्ह्ह्ह ह्ह्ह..' के साथ ही झड़ गई। बेटी का पूरा शरीर कांप रहा था, और उसकी चूत से कम्पन मेरी जीभ पर भी अनुभव हो रहा था। बेटी की चूत से उसके काम रस का बाहर आ रहा था जिसे मैं फटाफट चाट रहा था ताकि बेटी के रस का एक भी कटरा बाहर न रह जाये. अपने बेटे से चूत चटवाने का बेटी का यह पहला अनुभव था..
मैंने इस तरह उसके रस को पूरा चाट लिया और छोड़ता भी कैसे.. आखिर मेरी मेहनत का फल था। और आप तो जानते ही हो की मेहनत का फल मीठा होता है। सचमुच बेटी की चूत का रस बहुत मीठा था.
उसकी तेज़ चलती सांसें.. मेरे लौड़े पर ऐसे लग रही थीं.. जैसे मेरे लौड़े में नई जान डाल रही हो.. और मैं भी पूरी मस्ती में उसकी बुर को चाट कर साफ करने लगा।
जब उसकी सांसें थोड़ा सधी.. तो वो एक लम्बी कराह 'अह्ह्ह ह्ह्ह्ह..' के साथ लेट गयी.
उसने बिना कुछ बोले- मेरे लण्ड को पकड़ा और दबा कर मेरे लौड़े को पकड़ कर अपने मुँह में डालकर चूसने लगी।
बीच-बीच में वो अपनी नशीली आँखों से मुझे देख भी लेती थी.. जिससे मुझे भी जोश आने लगा।
और यह क्या.. तभी उसकी बालों की लटें उसके चेहरे को सताने लगी.. जिसे वो अपने हाथों से हटा देती।
तो मैंने खुद ही उसके सर के पीछे हाथ ले जाकर उसके बालों को एक हाथ से पकड़ लिया।
हाय.. क्या सेक्सी सीन लग रहा था.. ओह माय गॉड.. एक सुन्दर परी सी अप्सरा जैसी मेरी बेटी मेरे लण्ड के अधीन हो कर..आपका लण्ड चूसे.. तो आपको कैसा लगे.. बिलकुल मुझे भी ऐसा ही लग रहा था।
फिर मैंने दूसरे हाथ से उसकी ठोड़ी को ऊपर उठाकर उसकी आँखों में झांकते हुए.. उसके मुँह में धक्के देने लगा.. जिससे उसके मुँह से 'उम्म्म.. उम्म्म्म.. गगग.. गूँ.. गूँ..' की आवाजें आने लगीं।
इस तरह कुछ देर और चूसने से मेरा भी काम होने के पास आने लगा. मुझे मालूम था की किसी भी टाइम मेरा माल निकल सकता है तो मैंने बेटी को मुह को जोर जोर से चोदना शुरू कर दिया. फिर एक जोर की आअह्ह के साथ मेरा माल उसके मुँह में ही छूट गया और वो बिना किसी रुकावट के सारा का सारा माल गटक गई।
हम दोनों बाप बेटी अपने सेक्स से बहुत थक गए थे तो हम दोनों एक दुसरे के साथ लेट गए। हम दोनों ही बिलकुल नंगे थे.
तो मैं फुसफुसाते हुए बोला- "तुम्हे मेरा चूत को चूसना और चाटना कैसा लगा.?"
तो वो बोली- जैसे तुम अच्छे से बिना दांत गड़ाए मेरी चूत को अपने मुँह में भर भर कर चूस रहे थे तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, ऐसा लग रहा था कि तुम बस चूसते ही रहो... मुझे सच में बहुत अच्छा लगा और तुम्हारी उँगलियों ने तो कमाल कर दिया, जैसे तुमने अपनी उंगली नहीं बल्कि मेरे अंदर नई जान डाल दी हो! ठीक वैसे ही मैंने भी सोचा कि क्यों न तुम्हें भी तुम्हारी तरह मज़ा दिया जाये! बस मैंने तुम्हारी नक़ल करके वैसे ही किया और मुझे पता है कि तुम्हें भी बहुत मज़ा आया... पर तुमने मेरी हालत ही बिगाड़ दी थी, मेरी तो सांस ही फूल गई थी। तुम्हारा लौड़ा बहुत मोटा है.इसलिए मुझे उसे मुँह में लेने में समस्या हो रही थी। पर कोई बात नहीं। धीरे धीरे आदत हो जाएगी। अगली बार तुम्हे अधिक मजा आएगा. असली चीज है की तुम्हारी जीभ भी बहुत लम्बी है. तुमने तो मुझे स्वर्ग में ही पहुंचा दिया. तुम्हारी जीभ लम्बी होने के कारण इतनी अंदर तक जा रही थी की आज तक कभी इतने आगे तक चुसाई नहीं हुई. यह मेरे लिए एक बहुत ही अलग अनुभव था। मैं तो आज बहुत खुश हूँ. क्योंकि तुमने मुझे इतनी मज़ा दिया था जिसे मैं अपने जीवन में कभी नहीं भुला सकती!
अब मैं उसके होंठों को अपने होंठों में दबा कर उसके होंठों का रसपान करने लगा और वो भी मेरा पूर्ण सहयोग देते हुए मेरे निचले होंठ को पागलों की तरह बेतहाशा चूसे जा रही थी, मुझे तो ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं जन्नत में हूँ,
सबसे ज्यादा ख़ुशी की बात तो यह थी एक अब बेटी की शर्म पूरी तरह दूर हो चुकी थी और वो चूत लण्ड जैसे शब्द खुल कर बोल रही थी और पूरा मजा ले रही थी.
"....ओह्ह्ह्हह...ओह...." बेटी के होंठ धीरे धीरे बुदबुदा रहे थे.
होंठ को अच्छी तरह चूमने के पश्चात मैं जल्द ही अपनी बेटी के स्तन पर पहुँच गया.
यहाँ पर अभी भी बेटी के हाथ थे. मेरा चेहरा जैसे ही बेटी के स्तन के ऊपर रखे हाथों से टकराता है तो वो अपने हाथ हटा लेती है और मुझे अपने स्तन चूमने देती है. मैं फिर से बेटी के निप्पल बदल बदल कर चूस रहा था. बेटी मेरे बालों में उँगलियाँ घुमा रही थी.
अपनी चूत चटवाई के उस जबरदस्त सख्लन के पश्चात बिलकुल सुस्त पड चुकी बेटी अब अपने जिस्म में कुछ हरकत महसूस कर रही थी.
न जाने कितने सालो के बाद बेटी ने यह परम संतुष्टी प्राप्त की थी इतना मजा बेटी को पहली बार मिल रहा था इस आनंद को तो वह भूल ही चुकी थी मगर इतने सालों बाद उनके पिता ने यह सुख उसे दिया.
निप्पलों को चूसते चूसते मैंने अपनी नज़र अपनी बेटी पर डाली जो मेरे बालों में उँगलियाँ फेरते हुए मुझे बेहद प्यार, स्नेह और ममतामई नज़र से देख रही थी.
हम दोनों बाप बेटी की नज़रें मिलती हैं और मैं आगे अपनी बेटी के चेहरे की और बढ़ता हु.
बेटी भी मेरा चेहरा अपने हाथों में थाम अपने मुंह पर खींचती है. मेरा चेहरा सीधा अपनी बेटी के चेहरे पर झुक जाता है
और हम दोनों के होंठ आपस में जुड़ जाते हैं. दोनों प्रेमियों की तरह एक दुसरे को चूम रहे थे. कभी बेटी मेरे तो कभी मैं बेटी के होंठों को चूस रहा था.
उधर बेटी को अपनी जांघों पर मेरा लण्ड ठोकरें मारता महसूस होता है.
बेटे के लण्ड को अपनी योनि के इतने नजदीक पाकर उनके बदन में कामौत्तेजना लौटने लगती है
और उसकी साँसों की गहराई बढ़ने लगती है.
बेटी की जिव्हा मेरे होंठो को चाटने लगती है और वो उसे मेरे मुंह में धकेलती है. मैं अपना मुंह खोल देता हु और बेटी की जिव्हा मेरे मुख में प्रवेश कर जाती है.
बेटी मेरी जीभ को अपनी जीभ से सहलाती है.
मगर मैंने एकदम से उसकी जीभ को अपने होंठो में दबाकर उसे चूसने लगा क्या शहद के जैसा स्वाद था.