• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Incest बाँझ बेटी की गलतफहमी ने बेटा दिया

🔥 Read Next Hot Story →
Discover more exclusive stories

Ting ting

Ting Ting
835
3,794
139
मैं तुरंत ही उसकी चूत के दाने को अपनी जुबान से छेड़ने लगा
833_097.jpg

और वो मेरे लण्ड को पकड़ कर खेलने लगी और थोड़ी ही देर में उसने अपनी नरम जुबान मेरे लौड़े पर रखकर सुपाड़े को चाटने लगी.. जिससे मुझे असीम आनन्द की प्राप्ति होने लगी। बेटी मेरे लण्ड के सुपाडे को ऐसे चूस और चाट रही थी जैसे वो लण्ड न हो कर कोई आइसक्रीम हो. सपना को इक हाड मांस का लौड़ा मुँह में लेने का मौका मिला था तो बेटी उस का पूरा फ़ायदा उठाने जा रही थी.
91486838_008_111c.jpg

उसकी गीली जुबान की हरकत से मेरे अन्दर ऐसा वासना का सैलाब उमड़ा.. जिसे मैं शब्द देने में असमर्थ हूँ.. फिर मैंने भी प्रतिउत्तर में उसके दाने को अपने मुँह में भर-भर कर चूसना चालू कर दिया.. जिससे उसके मुँह से 'अह्ह्ह ह्ह.. हाआआह... आआआ..' की आवाज स्वतः ही निकलने लगी।

उसके शरीर में एक अजीब सा कम्पन हो रहा था.. जिसे मैं महसूस करने लगा।

चूत चुसवाने के थोड़ी ही देर में वो अपनी टाँगें खुद ही फ़ैलाने लगी और अपने चूतड़ों को उठा कर मेरे मुँह पर रगड़ने लगी।
2562095_02.jpg

अब मुझे एहसास हो गया कि बेटी को इस क्रिया में असीम आनन्द की प्राप्ति हो रही है। फिर मैंने उसके जोश को और बढ़ाने के लिए अपनी उँगलियों के माध्यम से उसकी चूत की दरार को थोड़ा फैलाया और देखता ही रह गया.. चूत के अन्दर का बिलकुल ऐसा नज़ारा था.. जैसे किसी ने तरबूज पर हल्का सा चीरा लगा कर फैलाया हो.. उसकी चूत से रिस रहा पानी उसकी और शोभा बढ़ा रहा था।
e16_141.jpg

मैंने बिना कुछ सोचे अपनी जुबान उसकी दरार में डाल दी.. और उसे चाटने लगा।

जिससे उत्तेजित होकर बेटी ने भी मेरे लण्ड के शिश्न-मुण्ड को और अन्दर ले कर चूसते हुए 'ओह.. शिइ... इइइइ.. शीईईई..' की सीत्कार के साथ 'अह्ह्ह.. अह्ह्ह्ह ह्ह..' करने लगी।
43b_033.jpg

तो मैंने वक्त की नज़ाकत देखते हुए अपनी एक ऊँगली उसकी चूत के छेद में घुसेड़ दी.. जिससे उसकी एक और दर्द भरी 'आह्ह्ह्ह ह्ह..' छूट गई और दर्द से तड़पते हुए बोली (वो अभी भी हमारा बाप बेटी का भरम रखते हुए मुझे शुभम यानि अपने पति के नाम से ही बुला रही थी ताकि वो यह दिखा सके कि वो तो अपने पति से सेक्स कर रही है) - "शुभम! ..तुम्हारी ऊँगली मेरे अंदर लग रही है ये.. क्या कर दिया.. अब तो अन्दर जलन सी होने लगी है.".

मैंने बोला- बस थोड़ा रुको.. अभी सही किए देता हूँ।

फिर मैंने उंगली बाहर निकाली और उसकी चूत पर थूक लगाकर.. उसके छेद को चूसते हुए.. धीरे धीरे फिर से ऊँगली को अंदर करने लगा... जिससे उसका दर्द अपने आप ही ठीक होने लगा।
407_047.jpg

'अह्ह्ह्ह.. अह्ह्ह ह्ह्ह्ह.. शिइइ... शहअह...' की ध्वनि उसके मुँह से निकलने लगी।

सच में उस समय मेरी थूक ने उसके साथ बिल्कुल एंटी बायोटिक वाला काम किया और जब वो मस्ति के फिर से मेरा लण्ड चूसने लगी.. तो मैंने अपनी दूसरी ऊँगली भी अब बेटी की चूत में डाल दी।

इस बार वो थोड़ा कसमसाई तो.. पर कुछ बोली नहीं.. शायद वो और आगे का मज़ा लेना चाहती थी.. या फिर उसे दोबारा में दर्द कम हुआ होगा।
290_161.jpg

अब मैंने धीरे-धीरे उसकी चूत में उंगली करते हुए उसके दाने को अपनी जुबान से छेड़ने और मुँह से चूसने लगा। मेरी इस हरकत से उसने भी जोश में आकर मेरे लौड़े को अपने मुँह में और अन्दर ले जाते हुए तेज़ी से अन्दर-बाहर करने लगी।
29724503_055_d0c5.jpg

उसके शरीर में हो रहे कम्पन को महसूस करते हुए मैं समझ गया कि अब बेटी झड़ने वाली है.. यही सही मौका है उंगली की स्पीड तेज कर दो.. ये विचार आते ही मेरा भी जोश बढ़ गया और मैं एक सधे हुए खिलाड़ी की तरह उसकी चूत में तेजी से उंगली अन्दर-बाहर करने लगा।

अब बेटी के मुँह से भी 'गु.. गगगग गु.. आह्ह..' की आवाज़ निकलने लगी.. क्योंकि वो भी मेरा लौड़ा फुल मस्ती में चूस रही थी.. जैसे सारा आज ही रस चूस-चूस कर खत्म कर देगी।
56474001_010_1842.jpg

मैंने तुरंत ही अपनी उंगली अन्दर-बाहर करते हुए अचानक से पूरी बाहर निकाली और दोबारा तुरंत ही दो उँगलियों को मिलाकर एक ही बार में घुसेड़ दी..

बेटी को शायद थोड़ा दर्द हुआ, जिससे उसके दांत मेरे लौड़े पर भी गड़ गए और उसके साथ-साथ मेरे भी मुँह से भी 'अह्ह ह्ह्ह्ह..' की चीख निकल गई।
71754137_007_b26c.jpg

सच कहूँ, हम दोनों को इसमें बहुत मज़ा आया था।

आज भी इस बात को याद करते ही मैं एक्साइटेड हो जाता हूँ. मेरा लौड़ा तन कर आसमान छूने लगता है और उसकी चूत कामरस की धार छोड़ने लगती है।

खैर.. जब उसका दर्द कुछ कम हुआ तो फिर से वो लण्ड को चचोर-चचोर कर चूसने लगी और अपनी टांगों को मेरे सर पर बांधते हुए कसने लगी।

वो मेरे लौड़े को बुरी तरह चूसते हुए 'अह्ह्ह्ह ह्ह्ह्ह्ह ह्ह्ह..' के साथ ही झड़ गई। बेटी का पूरा शरीर कांप रहा था, और उसकी चूत से कम्पन मेरी जीभ पर भी अनुभव हो रहा था। बेटी की चूत से उसके काम रस का बाहर आ रहा था जिसे मैं फटाफट चाट रहा था ताकि बेटी के रस का एक भी कटरा बाहर न रह जाये. अपने बेटे से चूत चटवाने का बेटी का यह पहला अनुभव था..
66408471_004_b6cd.jpg

मैंने इस तरह उसके रस को पूरा चाट लिया और छोड़ता भी कैसे.. आखिर मेरी मेहनत का फल था। और आप तो जानते ही हो की मेहनत का फल मीठा होता है। सचमुच बेटी की चूत का रस बहुत मीठा था.

उसकी तेज़ चलती सांसें.. मेरे लौड़े पर ऐसे लग रही थीं.. जैसे मेरे लौड़े में नई जान डाल रही हो.. और मैं भी पूरी मस्ती में उसकी बुर को चाट कर साफ करने लगा।

जब उसकी सांसें थोड़ा सधी.. तो वो एक लम्बी कराह 'अह्ह्ह ह्ह्ह्ह..' के साथ लेट गयी.

उसने बिना कुछ बोले- मेरे लण्ड को पकड़ा और दबा कर मेरे लौड़े को पकड़ कर अपने मुँह में डालकर चूसने लगी।
11631371_057_e29c.jpg

बीच-बीच में वो अपनी नशीली आँखों से मुझे देख भी लेती थी.. जिससे मुझे भी जोश आने लगा।

और यह क्या.. तभी उसकी बालों की लटें उसके चेहरे को सताने लगी.. जिसे वो अपने हाथों से हटा देती।

तो मैंने खुद ही उसके सर के पीछे हाथ ले जाकर उसके बालों को एक हाथ से पकड़ लिया।

हाय.. क्या सेक्सी सीन लग रहा था.. ओह माय गॉड.. एक सुन्दर परी सी अप्सरा जैसी मेरी बेटी मेरे लण्ड के अधीन हो कर..आपका लण्ड चूसे.. तो आपको कैसा लगे.. बिलकुल मुझे भी ऐसा ही लग रहा था।

फिर मैंने दूसरे हाथ से उसकी ठोड़ी को ऊपर उठाकर उसकी आँखों में झांकते हुए.. उसके मुँह में धक्के देने लगा.. जिससे उसके मुँह से 'उम्म्म.. उम्म्म्म.. गगग.. गूँ.. गूँ..' की आवाजें आने लगीं।
20924502_013_c8d9.jpg

इस तरह कुछ देर और चूसने से मेरा भी काम होने के पास आने लगा. मुझे मालूम था की किसी भी टाइम मेरा माल निकल सकता है तो मैंने बेटी को मुह को जोर जोर से चोदना शुरू कर दिया. फिर एक जोर की आअह्ह के साथ मेरा माल उसके मुँह में ही छूट गया और वो बिना किसी रुकावट के सारा का सारा माल गटक गई।
56873062_009_16c8.jpg

हम दोनों बाप बेटी अपने सेक्स से बहुत थक गए थे तो हम दोनों एक दुसरे के साथ लेट गए। हम दोनों ही बिलकुल नंगे थे.

तो मैं फुसफुसाते हुए बोला- "तुम्हे मेरा चूत को चूसना और चाटना कैसा लगा.?"

तो वो बोली- जैसे तुम अच्छे से बिना दांत गड़ाए मेरी चूत को अपने मुँह में भर भर कर चूस रहे थे तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, ऐसा लग रहा था कि तुम बस चूसते ही रहो... मुझे सच में बहुत अच्छा लगा और तुम्हारी उँगलियों ने तो कमाल कर दिया, जैसे तुमने अपनी उंगली नहीं बल्कि मेरे अंदर नई जान डाल दी हो! ठीक वैसे ही मैंने भी सोचा कि क्यों न तुम्हें भी तुम्हारी तरह मज़ा दिया जाये! बस मैंने तुम्हारी नक़ल करके वैसे ही किया और मुझे पता है कि तुम्हें भी बहुत मज़ा आया... पर तुमने मेरी हालत ही बिगाड़ दी थी, मेरी तो सांस ही फूल गई थी। तुम्हारा लौड़ा बहुत मोटा है.इसलिए मुझे उसे मुँह में लेने में समस्या हो रही थी। पर कोई बात नहीं। धीरे धीरे आदत हो जाएगी। अगली बार तुम्हे अधिक मजा आएगा. असली चीज है की तुम्हारी जीभ भी बहुत लम्बी है. तुमने तो मुझे स्वर्ग में ही पहुंचा दिया. तुम्हारी जीभ लम्बी होने के कारण इतनी अंदर तक जा रही थी की आज तक कभी इतने आगे तक चुसाई नहीं हुई. यह मेरे लिए एक बहुत ही अलग अनुभव था। मैं तो आज बहुत खुश हूँ. क्योंकि तुमने मुझे इतनी मज़ा दिया था जिसे मैं अपने जीवन में कभी नहीं भुला सकती!
12692212_042_fa80.jpg

अब मैं उसके होंठों को अपने होंठों में दबा कर उसके होंठों का रसपान करने लगा और वो भी मेरा पूर्ण सहयोग देते हुए मेरे निचले होंठ को पागलों की तरह बेतहाशा चूसे जा रही थी, मुझे तो ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं जन्नत में हूँ,

सबसे ज्यादा ख़ुशी की बात तो यह थी एक अब बेटी की शर्म पूरी तरह दूर हो चुकी थी और वो चूत लण्ड जैसे शब्द खुल कर बोल रही थी और पूरा मजा ले रही थी.

"....ओह्ह्ह्हह...ओह...." बेटी के होंठ धीरे धीरे बुदबुदा रहे थे.
89d_078.jpg

होंठ को अच्छी तरह चूमने के पश्चात मैं जल्द ही अपनी बेटी के स्तन पर पहुँच गया.

यहाँ पर अभी भी बेटी के हाथ थे. मेरा चेहरा जैसे ही बेटी के स्तन के ऊपर रखे हाथों से टकराता है तो वो अपने हाथ हटा लेती है और मुझे अपने स्तन चूमने देती है. मैं फिर से बेटी के निप्पल बदल बदल कर चूस रहा था. बेटी मेरे बालों में उँगलियाँ घुमा रही थी.
89f_049.jpg

अपनी चूत चटवाई के उस जबरदस्त सख्लन के पश्चात बिलकुल सुस्त पड चुकी बेटी अब अपने जिस्म में कुछ हरकत महसूस कर रही थी.

न जाने कितने सालो के बाद बेटी ने यह परम संतुष्टी प्राप्त की थी इतना मजा बेटी को पहली बार मिल रहा था इस आनंद को तो वह भूल ही चुकी थी मगर इतने सालों बाद उनके पिता ने यह सुख उसे दिया.

निप्पलों को चूसते चूसते मैंने अपनी नज़र अपनी बेटी पर डाली जो मेरे बालों में उँगलियाँ फेरते हुए मुझे बेहद प्यार, स्नेह और ममतामई नज़र से देख रही थी.
432_083.jpg

हम दोनों बाप बेटी की नज़रें मिलती हैं और मैं आगे अपनी बेटी के चेहरे की और बढ़ता हु.

बेटी भी मेरा चेहरा अपने हाथों में थाम अपने मुंह पर खींचती है. मेरा चेहरा सीधा अपनी बेटी के चेहरे पर झुक जाता है

और हम दोनों के होंठ आपस में जुड़ जाते हैं. दोनों प्रेमियों की तरह एक दुसरे को चूम रहे थे. कभी बेटी मेरे तो कभी मैं बेटी के होंठों को चूस रहा था.
7e3_021.jpg

उधर बेटी को अपनी जांघों पर मेरा लण्ड ठोकरें मारता महसूस होता है.

बेटे के लण्ड को अपनी योनि के इतने नजदीक पाकर उनके बदन में कामौत्तेजना लौटने लगती है

और उसकी साँसों की गहराई बढ़ने लगती है.
599_347.jpg

बेटी की जिव्हा मेरे होंठो को चाटने लगती है और वो उसे मेरे मुंह में धकेलती है. मैं अपना मुंह खोल देता हु और बेटी की जिव्हा मेरे मुख में प्रवेश कर जाती है.

बेटी मेरी जीभ को अपनी जीभ से सहलाती है.

मगर मैंने एकदम से उसकी जीभ को अपने होंठो में दबाकर उसे चूसने लगा क्या शहद के जैसा स्वाद था.
2562386_03.jpg
 

Napster

Well-Known Member
8,955
21,330
188
मैं तुरंत ही उसकी चूत के दाने को अपनी जुबान से छेड़ने लगा
833_097.jpg

और वो मेरे लण्ड को पकड़ कर खेलने लगी और थोड़ी ही देर में उसने अपनी नरम जुबान मेरे लौड़े पर रखकर सुपाड़े को चाटने लगी.. जिससे मुझे असीम आनन्द की प्राप्ति होने लगी। बेटी मेरे लण्ड के सुपाडे को ऐसे चूस और चाट रही थी जैसे वो लण्ड न हो कर कोई आइसक्रीम हो. सपना को इक हाड मांस का लौड़ा मुँह में लेने का मौका मिला था तो बेटी उस का पूरा फ़ायदा उठाने जा रही थी.
91486838_008_111c.jpg

उसकी गीली जुबान की हरकत से मेरे अन्दर ऐसा वासना का सैलाब उमड़ा.. जिसे मैं शब्द देने में असमर्थ हूँ.. फिर मैंने भी प्रतिउत्तर में उसके दाने को अपने मुँह में भर-भर कर चूसना चालू कर दिया.. जिससे उसके मुँह से 'अह्ह्ह ह्ह.. हाआआह... आआआ..' की आवाज स्वतः ही निकलने लगी।

उसके शरीर में एक अजीब सा कम्पन हो रहा था.. जिसे मैं महसूस करने लगा।

चूत चुसवाने के थोड़ी ही देर में वो अपनी टाँगें खुद ही फ़ैलाने लगी और अपने चूतड़ों को उठा कर मेरे मुँह पर रगड़ने लगी।
2562095_02.jpg

अब मुझे एहसास हो गया कि बेटी को इस क्रिया में असीम आनन्द की प्राप्ति हो रही है। फिर मैंने उसके जोश को और बढ़ाने के लिए अपनी उँगलियों के माध्यम से उसकी चूत की दरार को थोड़ा फैलाया और देखता ही रह गया.. चूत के अन्दर का बिलकुल ऐसा नज़ारा था.. जैसे किसी ने तरबूज पर हल्का सा चीरा लगा कर फैलाया हो.. उसकी चूत से रिस रहा पानी उसकी और शोभा बढ़ा रहा था।
e16_141.jpg

मैंने बिना कुछ सोचे अपनी जुबान उसकी दरार में डाल दी.. और उसे चाटने लगा।

जिससे उत्तेजित होकर बेटी ने भी मेरे लण्ड के शिश्न-मुण्ड को और अन्दर ले कर चूसते हुए 'ओह.. शिइ... इइइइ.. शीईईई..' की सीत्कार के साथ 'अह्ह्ह.. अह्ह्ह्ह ह्ह..' करने लगी।
43b_033.jpg

तो मैंने वक्त की नज़ाकत देखते हुए अपनी एक ऊँगली उसकी चूत के छेद में घुसेड़ दी.. जिससे उसकी एक और दर्द भरी 'आह्ह्ह्ह ह्ह..' छूट गई और दर्द से तड़पते हुए बोली (वो अभी भी हमारा बाप बेटी का भरम रखते हुए मुझे शुभम यानि अपने पति के नाम से ही बुला रही थी ताकि वो यह दिखा सके कि वो तो अपने पति से सेक्स कर रही है) - "शुभम! ..तुम्हारी ऊँगली मेरे अंदर लग रही है ये.. क्या कर दिया.. अब तो अन्दर जलन सी होने लगी है.".

मैंने बोला- बस थोड़ा रुको.. अभी सही किए देता हूँ।

फिर मैंने उंगली बाहर निकाली और उसकी चूत पर थूक लगाकर.. उसके छेद को चूसते हुए.. धीरे धीरे फिर से ऊँगली को अंदर करने लगा... जिससे उसका दर्द अपने आप ही ठीक होने लगा।
407_047.jpg

'अह्ह्ह्ह.. अह्ह्ह ह्ह्ह्ह.. शिइइ... शहअह...' की ध्वनि उसके मुँह से निकलने लगी।

सच में उस समय मेरी थूक ने उसके साथ बिल्कुल एंटी बायोटिक वाला काम किया और जब वो मस्ति के फिर से मेरा लण्ड चूसने लगी.. तो मैंने अपनी दूसरी ऊँगली भी अब बेटी की चूत में डाल दी।

इस बार वो थोड़ा कसमसाई तो.. पर कुछ बोली नहीं.. शायद वो और आगे का मज़ा लेना चाहती थी.. या फिर उसे दोबारा में दर्द कम हुआ होगा।
290_161.jpg

अब मैंने धीरे-धीरे उसकी चूत में उंगली करते हुए उसके दाने को अपनी जुबान से छेड़ने और मुँह से चूसने लगा। मेरी इस हरकत से उसने भी जोश में आकर मेरे लौड़े को अपने मुँह में और अन्दर ले जाते हुए तेज़ी से अन्दर-बाहर करने लगी।
29724503_055_d0c5.jpg

उसके शरीर में हो रहे कम्पन को महसूस करते हुए मैं समझ गया कि अब बेटी झड़ने वाली है.. यही सही मौका है उंगली की स्पीड तेज कर दो.. ये विचार आते ही मेरा भी जोश बढ़ गया और मैं एक सधे हुए खिलाड़ी की तरह उसकी चूत में तेजी से उंगली अन्दर-बाहर करने लगा।

अब बेटी के मुँह से भी 'गु.. गगगग गु.. आह्ह..' की आवाज़ निकलने लगी.. क्योंकि वो भी मेरा लौड़ा फुल मस्ती में चूस रही थी.. जैसे सारा आज ही रस चूस-चूस कर खत्म कर देगी।
56474001_010_1842.jpg

मैंने तुरंत ही अपनी उंगली अन्दर-बाहर करते हुए अचानक से पूरी बाहर निकाली और दोबारा तुरंत ही दो उँगलियों को मिलाकर एक ही बार में घुसेड़ दी..

बेटी को शायद थोड़ा दर्द हुआ, जिससे उसके दांत मेरे लौड़े पर भी गड़ गए और उसके साथ-साथ मेरे भी मुँह से भी 'अह्ह ह्ह्ह्ह..' की चीख निकल गई।
71754137_007_b26c.jpg

सच कहूँ, हम दोनों को इसमें बहुत मज़ा आया था।

आज भी इस बात को याद करते ही मैं एक्साइटेड हो जाता हूँ. मेरा लौड़ा तन कर आसमान छूने लगता है और उसकी चूत कामरस की धार छोड़ने लगती है।

खैर.. जब उसका दर्द कुछ कम हुआ तो फिर से वो लण्ड को चचोर-चचोर कर चूसने लगी और अपनी टांगों को मेरे सर पर बांधते हुए कसने लगी।

वो मेरे लौड़े को बुरी तरह चूसते हुए 'अह्ह्ह्ह ह्ह्ह्ह्ह ह्ह्ह..' के साथ ही झड़ गई। बेटी का पूरा शरीर कांप रहा था, और उसकी चूत से कम्पन मेरी जीभ पर भी अनुभव हो रहा था। बेटी की चूत से उसके काम रस का बाहर आ रहा था जिसे मैं फटाफट चाट रहा था ताकि बेटी के रस का एक भी कटरा बाहर न रह जाये. अपने बेटे से चूत चटवाने का बेटी का यह पहला अनुभव था..
66408471_004_b6cd.jpg

मैंने इस तरह उसके रस को पूरा चाट लिया और छोड़ता भी कैसे.. आखिर मेरी मेहनत का फल था। और आप तो जानते ही हो की मेहनत का फल मीठा होता है। सचमुच बेटी की चूत का रस बहुत मीठा था.

उसकी तेज़ चलती सांसें.. मेरे लौड़े पर ऐसे लग रही थीं.. जैसे मेरे लौड़े में नई जान डाल रही हो.. और मैं भी पूरी मस्ती में उसकी बुर को चाट कर साफ करने लगा।

जब उसकी सांसें थोड़ा सधी.. तो वो एक लम्बी कराह 'अह्ह्ह ह्ह्ह्ह..' के साथ लेट गयी.

उसने बिना कुछ बोले- मेरे लण्ड को पकड़ा और दबा कर मेरे लौड़े को पकड़ कर अपने मुँह में डालकर चूसने लगी।
11631371_057_e29c.jpg

बीच-बीच में वो अपनी नशीली आँखों से मुझे देख भी लेती थी.. जिससे मुझे भी जोश आने लगा।

और यह क्या.. तभी उसकी बालों की लटें उसके चेहरे को सताने लगी.. जिसे वो अपने हाथों से हटा देती।

तो मैंने खुद ही उसके सर के पीछे हाथ ले जाकर उसके बालों को एक हाथ से पकड़ लिया।

हाय.. क्या सेक्सी सीन लग रहा था.. ओह माय गॉड.. एक सुन्दर परी सी अप्सरा जैसी मेरी बेटी मेरे लण्ड के अधीन हो कर..आपका लण्ड चूसे.. तो आपको कैसा लगे.. बिलकुल मुझे भी ऐसा ही लग रहा था।

फिर मैंने दूसरे हाथ से उसकी ठोड़ी को ऊपर उठाकर उसकी आँखों में झांकते हुए.. उसके मुँह में धक्के देने लगा.. जिससे उसके मुँह से 'उम्म्म.. उम्म्म्म.. गगग.. गूँ.. गूँ..' की आवाजें आने लगीं।
20924502_013_c8d9.jpg

इस तरह कुछ देर और चूसने से मेरा भी काम होने के पास आने लगा. मुझे मालूम था की किसी भी टाइम मेरा माल निकल सकता है तो मैंने बेटी को मुह को जोर जोर से चोदना शुरू कर दिया. फिर एक जोर की आअह्ह के साथ मेरा माल उसके मुँह में ही छूट गया और वो बिना किसी रुकावट के सारा का सारा माल गटक गई।
56873062_009_16c8.jpg

हम दोनों बाप बेटी अपने सेक्स से बहुत थक गए थे तो हम दोनों एक दुसरे के साथ लेट गए। हम दोनों ही बिलकुल नंगे थे.

तो मैं फुसफुसाते हुए बोला- "तुम्हे मेरा चूत को चूसना और चाटना कैसा लगा.?"

तो वो बोली- जैसे तुम अच्छे से बिना दांत गड़ाए मेरी चूत को अपने मुँह में भर भर कर चूस रहे थे तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, ऐसा लग रहा था कि तुम बस चूसते ही रहो... मुझे सच में बहुत अच्छा लगा और तुम्हारी उँगलियों ने तो कमाल कर दिया, जैसे तुमने अपनी उंगली नहीं बल्कि मेरे अंदर नई जान डाल दी हो! ठीक वैसे ही मैंने भी सोचा कि क्यों न तुम्हें भी तुम्हारी तरह मज़ा दिया जाये! बस मैंने तुम्हारी नक़ल करके वैसे ही किया और मुझे पता है कि तुम्हें भी बहुत मज़ा आया... पर तुमने मेरी हालत ही बिगाड़ दी थी, मेरी तो सांस ही फूल गई थी। तुम्हारा लौड़ा बहुत मोटा है.इसलिए मुझे उसे मुँह में लेने में समस्या हो रही थी। पर कोई बात नहीं। धीरे धीरे आदत हो जाएगी। अगली बार तुम्हे अधिक मजा आएगा. असली चीज है की तुम्हारी जीभ भी बहुत लम्बी है. तुमने तो मुझे स्वर्ग में ही पहुंचा दिया. तुम्हारी जीभ लम्बी होने के कारण इतनी अंदर तक जा रही थी की आज तक कभी इतने आगे तक चुसाई नहीं हुई. यह मेरे लिए एक बहुत ही अलग अनुभव था। मैं तो आज बहुत खुश हूँ. क्योंकि तुमने मुझे इतनी मज़ा दिया था जिसे मैं अपने जीवन में कभी नहीं भुला सकती!
12692212_042_fa80.jpg

अब मैं उसके होंठों को अपने होंठों में दबा कर उसके होंठों का रसपान करने लगा और वो भी मेरा पूर्ण सहयोग देते हुए मेरे निचले होंठ को पागलों की तरह बेतहाशा चूसे जा रही थी, मुझे तो ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं जन्नत में हूँ,

सबसे ज्यादा ख़ुशी की बात तो यह थी एक अब बेटी की शर्म पूरी तरह दूर हो चुकी थी और वो चूत लण्ड जैसे शब्द खुल कर बोल रही थी और पूरा मजा ले रही थी.

"....ओह्ह्ह्हह...ओह...." बेटी के होंठ धीरे धीरे बुदबुदा रहे थे.
89d_078.jpg

होंठ को अच्छी तरह चूमने के पश्चात मैं जल्द ही अपनी बेटी के स्तन पर पहुँच गया.

यहाँ पर अभी भी बेटी के हाथ थे. मेरा चेहरा जैसे ही बेटी के स्तन के ऊपर रखे हाथों से टकराता है तो वो अपने हाथ हटा लेती है और मुझे अपने स्तन चूमने देती है. मैं फिर से बेटी के निप्पल बदल बदल कर चूस रहा था. बेटी मेरे बालों में उँगलियाँ घुमा रही थी.
89f_049.jpg

अपनी चूत चटवाई के उस जबरदस्त सख्लन के पश्चात बिलकुल सुस्त पड चुकी बेटी अब अपने जिस्म में कुछ हरकत महसूस कर रही थी.

न जाने कितने सालो के बाद बेटी ने यह परम संतुष्टी प्राप्त की थी इतना मजा बेटी को पहली बार मिल रहा था इस आनंद को तो वह भूल ही चुकी थी मगर इतने सालों बाद उनके पिता ने यह सुख उसे दिया.

निप्पलों को चूसते चूसते मैंने अपनी नज़र अपनी बेटी पर डाली जो मेरे बालों में उँगलियाँ फेरते हुए मुझे बेहद प्यार, स्नेह और ममतामई नज़र से देख रही थी.
432_083.jpg

हम दोनों बाप बेटी की नज़रें मिलती हैं और मैं आगे अपनी बेटी के चेहरे की और बढ़ता हु.

बेटी भी मेरा चेहरा अपने हाथों में थाम अपने मुंह पर खींचती है. मेरा चेहरा सीधा अपनी बेटी के चेहरे पर झुक जाता है

और हम दोनों के होंठ आपस में जुड़ जाते हैं. दोनों प्रेमियों की तरह एक दुसरे को चूम रहे थे. कभी बेटी मेरे तो कभी मैं बेटी के होंठों को चूस रहा था.
7e3_021.jpg

उधर बेटी को अपनी जांघों पर मेरा लण्ड ठोकरें मारता महसूस होता है.

बेटे के लण्ड को अपनी योनि के इतने नजदीक पाकर उनके बदन में कामौत्तेजना लौटने लगती है

और उसकी साँसों की गहराई बढ़ने लगती है.
599_347.jpg

बेटी की जिव्हा मेरे होंठो को चाटने लगती है और वो उसे मेरे मुंह में धकेलती है. मैं अपना मुंह खोल देता हु और बेटी की जिव्हा मेरे मुख में प्रवेश कर जाती है.

बेटी मेरी जीभ को अपनी जीभ से सहलाती है.


मगर मैंने एकदम से उसकी जीभ को अपने होंठो में दबाकर उसे चूसने लगा क्या शहद के जैसा स्वाद था.
2562386_03.jpg
बडा ही गजब का जबरदस्त शानदार और जानदार मदमस्त अपडेट है मजा आ गया
अगले रोमांचकारी धमाकेदार और चुदाईदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा
 
  • Like
Reactions: Amit20
🔥 Read Next Hot Story →
Discover more exclusive stories

Premkumar65

Don't Miss the Opportunity
10,723
11,661
213
यह हमारे जीवन का एक बहुत ही नाजुक और महत्वपूर्ण क्षण था. उसकी गालें शर्म से लाल हो रही थी. शर्म से उससे कुछ कहा नहीं जा रहा था. बस उसने आगे बढ़ कर मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उन्हें चूमने लगी.
39234547_046_7bf0.jpg

मैंने भी अपने होंठ खोल दिए और सपना के होंठों को अपने होंठों के बीच दबा कर चूसने लगा.
0646d04f365114bf01d9cb04992714d4.jpg

सपना ने शर्म से अपना चेहरा मेरी छाती में छुपा लिया और मुझसे चिपकते हुए धीरे से अपना हाथ नीचे ले जा कर मेरी लुंगी में डाल दिया और मेरे तने हुए लौड़े को अपने हाथ में पकड़ लिया और मेरे लौड़े को अपने हाथ से आगे पीछे करते हुए, जैसे वो मेरा मुठ मार रही हो, मेरे लौड़े को जोर से दबा दिया. कि मेरी तो जैसे चीख ही निकल गयी.

सपना अब मेरे लौड़े पर अपने हाथ को तेज तेज आगे पीछे करते हुए मेरे लण्ड को प्यार से सहला रही थी.

62300074_029_9493.jpg

मैंने अपना हाथ नीचे ले जा कर सपना की मैक्सी मैं घुसेड़ दिया. उसने कोई पैंटी नहीं पहनी थी. मेरा हाथ सीधा सपना की चूत पर पहुंच गया.

बेटी की चूत जिस पर कल तक झांटों का पूरा जंगल ऊगा हुआ था. अब बिलकुल क्लीन शेव थी. लगता था बेटी अपनी आखिरी चूत चुदाई और पहली गांड मरवाई के लिए झांटे साफ करके पूरी तयारी करके आयी थी.

मैंने बेटी की फूली हुई चूत को अपनी मुठी में भर लिया और उसे मुट्ठी में मसलने लगा.
85403163_033_6055.jpg

सपना मेरे से लिपट गयी, पर उसने हाथ में पकड़ा हुआ मेरा लौड़ा नहीं छोड़ा और उसे धीरे धीरे मुठियाती रही. शायद बेटी को एक असली लौड़ा पकड़ने का मौका मिला था तो वो लण्ड को छोड़ना नहीं चाहती थी. मैंने भी बेटी की चूत को अपने हाथ में भरे रखा और धीरे से एक ऊँगली बेटी की चूत, जो की अब उसके बह रहे काम रस से गीली हो गयी थी, में घुसेड़ दी.
66746553_010_5666.jpg

सपना ने एक आह की आवाज करी पर मेरी ऊँगली को अपनी चूत में से निकलने की कोशिश भी न करी . बल्कि आगे को खिसक कर ऊँगली को और पूरा अंदर तक लेने की कोशिश की।

मैं बहुत खुश था. मेरा मन ख़ुशी से झूम उठा.

मैंने बेटी को अपने से चिपकाया और अपनी ऊँगली को बेटी की चूत में आगे को धकेल कर पूरी तरह से उन की चूत में घुसा दिया।
16209754_078_bce4.jpg

मैं समझ गया की बेटी की वासना अब बहुत बढ़ गयी है और वो चुदवाने के लिए पूरी तैयार है.

वो प्यार से मेरे से चिपक गयी पर इस सब में उसने मेरा लौड़ा अपने हाथ से न छोड़ा और उसे प्यार से सहलाती रही. बेटी को एक इतना मोटा हाड़ मांस का लौड़ा हाथ में आया था. लगता था की सपना उसे मन भर के प्यार किये बिना नहीं छोड़ेगी.
91353299_036_d00a.jpg

मैंने उसके चेहरे के भावों को पढ़ते हुए महसूस किया कि वो कुछ ज्यादा ही गर्म होने लगी थी। उसके आँखों में लाल डोरे साफ़ दिखाई दे रहे थे। उसके होंठ कुछ कंपने से लगे थे.

मैंने थोड़ा हौले से फुसफुसाते हुए बोला- "वाह .. क्या महक है तुम्हारी चूत की.. इसे मैं हमेशा अपने जीवन में याद रखूँगा.. आई लव यू "..

तो वो भी मन ही मन में मचल उठी और वो बोली- शुभम! (वो हमारा बाप बेटी का पर्दा रखते हुए और नाटक करते हुए बोल रही थी ) मेरा मज़ाक उड़ा रहे हो न.."

मैं बोला- ऐसा नहीं है.. फिर मैंने उसकी चूत को अपनी गदेली में भरते हुए कामुकता भरे अंदाज में एक और ऊँगली उसकी चूत में डाल दी।
12724722_013_3b03.jpg

मेरी इस हरकत से वो कुछ मदहोश सी हो गई और उसके मुख से 'आआ.. आआआह..' रूपी एक मादक सिसकारी निकल पड़ी।

मैंने उसकी चूत पर से हाथ हटा लिया इससे वो और बेहाल हो गई.. लेकिन वो ऐसा बिल्कुल नहीं चाहती थी कि मैं उसकी चूत को छोड़ दूँ..

लेकिन स्त्री-धर्म.. लाज-धर्म पर चलता है.. इसलिए उस समय वो मुझसे कुछ कह न सकी और मुझसे धीरे से बोली- पतिदेव! .. क्या इतनी अच्छी खुश्बू आती है मेरी चू... से..
13395432_053_78e7.jpg

ये कहती हुई वो 'सॉरी' बोली.. तो मैं तपाक से बोला- " शर्माओ नहीं और खुल कर बोलो. चूत को चूत ही केहते है तो इसमें शर्माना क्या. सेंटेंस पूरा करो.. और वैसे भी अब.. तो अपनी बात खुल कर कहो।

तो बोली- नहीं.. फिर कभी..

शायद वो वासना के नशे में कुछ ज्यादा ही अंधी हो चली थी.. क्योंकि उसके चूचे अब मेरी छाती पर रगड़ खा रहे थे और वो मुझे अपनी बाँहों में जकड़े हुए थी। उसके सीने की धड़कन बता रही थी कि उसे अब क्या चाहिए था।

तो मैंने उसे छेड़ते हुए कहा- तो क्या कहा था.. अब बोल भी दो?

तो वो बोली- क्या मेरी चूत की सुगंध वाकयी में इतनी अच्छी है...

तो मैंने बोला- हाँ मेरी जान.. सच में ये बहुत ही अच्छी है।

मुझे लग रहा था की बेटी अपनी चूत चटवाना चाहती है. पर शायद शर्मा रही है. या तो ये खुद ही मेरे साथ खेल कर रही है.. ताकि मैं ही अपनी तरफ से पहल करूँ।
51007633_010_d98a.jpg

एक जवान लड़की की चूत और एक जवान लड़के के लिंग में कितनी शक्ति होती है। दोनों में ही अपनी-अपनी अलग खुशबू होती है.. जो एक-दूसरे को दीवाना बना देती है।

मैं देरी ना करते हुए बिस्तर से उठा, अब बेटी बेटे का वासना का खेल शुरू होने ही वाला था. बेटी अभी भी थोड़ा शर्मा रही थी. पर मैंने घुटनों के बल बैठकर उसकी मुलायम चिकनी जांघों को अपने हाथों से पकड़ कर खोल दिया.. ताकि उसकी चूत ठीक से देख सकूँ।
40819831_042_87d4.jpg

मैंने उसकी चूत को दो उँगलियों से ऐसे खोला जैसे मोबाइल में फोटो ज़ूम करते हैं.

सपना के मुंह से आह निकल गयी. उसकी चूत अंदर से बिलकुल गुलाबी थी.

मैंने जैसे ही उसकी चूत का दीदार किया तो मुझे तो ऐसा लगा.. जैसे मैं जन्नत में पहुँच गया हूँ.. उसकी चूत बहुत ही प्यारी और कोमल सी दिख रही थी..

मेरी तो जैसे साँसें थम सी गई थीं.

उसकी चूत बिल्कुल कसी हुई थी.. कुछ फूली-फूली सी.. और उसके बीच में एक महीन सी दरार थी.. जो कि उसके छेद को काफ़ी संकरा किए हुए थी।
11964677_069_8355.jpg

इतनी प्यारी संरचना को देखकर मैं तो मंत्रमुग्ध हो गया था.. जिससे मुझे कुछ होश ही नहीं था कि मैं कहाँ हूँ.. कैसा हूँ।

खैर.. जब मैं उसकी चूत को टकटकी लगाए कुछ देर यूँ ही देखता रहा.. तो उसने मेरे हाथ पर एक छोटी सी चिकोटी काटी.. जो कि उसकी जाँघ को मजबूती से कसे हुए था।
31314037_013_0a61.jpg

तो मेरा ध्यान उसकी चूत से टूटा और मैंने 'आउच..' बोलते हुए उसकी ओर देखा.. उसकी नजरों में लाज के साथ-साथ एक अजीब सी चमक भी दिख रही थी।

ऐसी नजरों को कुछ ज्ञानी बंधु.. वासना की लहर की संज्ञा भी देते हैं।

मैं उसकी चूत की कसावट को देखते सोच रहा था .. इसे चाट कर सूँघूं या सूंघ कर चाटूं."।

बेटी तो वासना में जली जा रही थी. वो मेरे लौड़े को पकड़ कर बोली " शुभम! जो भी करना.. जल्दी करो.".

मैंने तुरंत ही उसके नितंबों को पकड़ कर बिस्तर के आगे की ओर खींचा ताकि उसकी चूत पर मुँह आराम से लगा सकूँ।
11723045_008_26e4.jpg

फिर मैंने बिना देर किए हुए उसे बिस्तर के किनारे लाया और सीधा उसकी चूत पर मुँह लगा कर उसके दाने को अपनी जुबान से छेड़ने लगा.. जिससे उसके मुँह से मादक सिसकारियाँ फूट पड़ीं- ओह्ह..शिइई..

मैंने जब उसकी ओर देखा तो वो अपने चेहरे को अपने दोनों हाथों से ढके हुए थी.. पर जब उसने अपनी चूत पर मेरा मुँह नहीं महसूस किया.. तो अपनी आँख खोल कर मुझसे बोली- "शुभम! जल्दी से चाटो ना. .. मुझे बहुत अच्छा लगा.. मुझे नहीं पता था कि इसमें इतना मज़ा आता है।"
81681720_011_f032.jpg

तो मैं मन ही मन बोला- "परेशान मत हो... अभी तो खेल शुरू हुआ है.. देखती जाओ.. मैं क्या-क्या और कितना मजा देता हूँ। वैसे आज तो तुम्हारी गांड मारनी है."

वो बोली- शुभम! मैं चाहती हूँ.. कि जो मज़ा तुम मुझे दे रहे हो.. वो मैं भी दूँ.. क्या ये एक साथ हो सकता है? मेरा मतलब तुम मेरी चूत को मुँह से प्यार करो और मैं तुम्हारे हथिआर को अपने मुँह से प्यार करूँ।
46653073_046_6ec6.jpg

मैंने अपनी ख़ुशी दबाते हुएअपना शरीर गुमा कर उसके मुंह के पास अपना लौड़ा कर दिया।

वो शर्मा कर बोली- ठीक है.. चलो अब जल्दी से अपना ल..लण्ड मेरे मुँह में डालो और अपना मुँह मेरी च..चूत पर लगाओ.. अब मुझसे और इंतज़ार नहीं हो सकता।
48179516_058_1164.jpg

लण्ड-चूत कहने में वो कुछ हिचक रही थी.. बेचारी.. सच में एक बेटी के लिए यह बहुत मुश्किल है की अपने ही पिता के साथ सेक्स करना और फिर इस तरह खुले तौर से गुप्त अंगों के नाम लेना। पर अब यह सब तो करना ही था.

खैर.. मैंने उसे बिस्तर पर सही से लिटाया और हम 69 अवस्था में लेट गए। यह देख कर उसके दिमाग की बत्ती जल उठी और बेटी खुश होते हुए बोली- "शुभम! वाकयी में तुम स्मार्ट के साथ-साथ होशियार भी हो.. क्या जुगाड़ निकाला है.".
30580565_042_2251.jpg

बेटी खुश हो गयी।
Wowww very erotic and sexyyyyy.
 

Premkumar65

Don't Miss the Opportunity
10,723
11,661
213
मैं तुरंत ही उसकी चूत के दाने को अपनी जुबान से छेड़ने लगा
833_097.jpg

और वो मेरे लण्ड को पकड़ कर खेलने लगी और थोड़ी ही देर में उसने अपनी नरम जुबान मेरे लौड़े पर रखकर सुपाड़े को चाटने लगी.. जिससे मुझे असीम आनन्द की प्राप्ति होने लगी। बेटी मेरे लण्ड के सुपाडे को ऐसे चूस और चाट रही थी जैसे वो लण्ड न हो कर कोई आइसक्रीम हो. सपना को इक हाड मांस का लौड़ा मुँह में लेने का मौका मिला था तो बेटी उस का पूरा फ़ायदा उठाने जा रही थी.
91486838_008_111c.jpg

उसकी गीली जुबान की हरकत से मेरे अन्दर ऐसा वासना का सैलाब उमड़ा.. जिसे मैं शब्द देने में असमर्थ हूँ.. फिर मैंने भी प्रतिउत्तर में उसके दाने को अपने मुँह में भर-भर कर चूसना चालू कर दिया.. जिससे उसके मुँह से 'अह्ह्ह ह्ह.. हाआआह... आआआ..' की आवाज स्वतः ही निकलने लगी।

उसके शरीर में एक अजीब सा कम्पन हो रहा था.. जिसे मैं महसूस करने लगा।

चूत चुसवाने के थोड़ी ही देर में वो अपनी टाँगें खुद ही फ़ैलाने लगी और अपने चूतड़ों को उठा कर मेरे मुँह पर रगड़ने लगी।
2562095_02.jpg

अब मुझे एहसास हो गया कि बेटी को इस क्रिया में असीम आनन्द की प्राप्ति हो रही है। फिर मैंने उसके जोश को और बढ़ाने के लिए अपनी उँगलियों के माध्यम से उसकी चूत की दरार को थोड़ा फैलाया और देखता ही रह गया.. चूत के अन्दर का बिलकुल ऐसा नज़ारा था.. जैसे किसी ने तरबूज पर हल्का सा चीरा लगा कर फैलाया हो.. उसकी चूत से रिस रहा पानी उसकी और शोभा बढ़ा रहा था।
e16_141.jpg

मैंने बिना कुछ सोचे अपनी जुबान उसकी दरार में डाल दी.. और उसे चाटने लगा।

जिससे उत्तेजित होकर बेटी ने भी मेरे लण्ड के शिश्न-मुण्ड को और अन्दर ले कर चूसते हुए 'ओह.. शिइ... इइइइ.. शीईईई..' की सीत्कार के साथ 'अह्ह्ह.. अह्ह्ह्ह ह्ह..' करने लगी।
43b_033.jpg

तो मैंने वक्त की नज़ाकत देखते हुए अपनी एक ऊँगली उसकी चूत के छेद में घुसेड़ दी.. जिससे उसकी एक और दर्द भरी 'आह्ह्ह्ह ह्ह..' छूट गई और दर्द से तड़पते हुए बोली (वो अभी भी हमारा बाप बेटी का भरम रखते हुए मुझे शुभम यानि अपने पति के नाम से ही बुला रही थी ताकि वो यह दिखा सके कि वो तो अपने पति से सेक्स कर रही है) - "शुभम! ..तुम्हारी ऊँगली मेरे अंदर लग रही है ये.. क्या कर दिया.. अब तो अन्दर जलन सी होने लगी है.".

मैंने बोला- बस थोड़ा रुको.. अभी सही किए देता हूँ।

फिर मैंने उंगली बाहर निकाली और उसकी चूत पर थूक लगाकर.. उसके छेद को चूसते हुए.. धीरे धीरे फिर से ऊँगली को अंदर करने लगा... जिससे उसका दर्द अपने आप ही ठीक होने लगा।
407_047.jpg

'अह्ह्ह्ह.. अह्ह्ह ह्ह्ह्ह.. शिइइ... शहअह...' की ध्वनि उसके मुँह से निकलने लगी।

सच में उस समय मेरी थूक ने उसके साथ बिल्कुल एंटी बायोटिक वाला काम किया और जब वो मस्ति के फिर से मेरा लण्ड चूसने लगी.. तो मैंने अपनी दूसरी ऊँगली भी अब बेटी की चूत में डाल दी।

इस बार वो थोड़ा कसमसाई तो.. पर कुछ बोली नहीं.. शायद वो और आगे का मज़ा लेना चाहती थी.. या फिर उसे दोबारा में दर्द कम हुआ होगा।
290_161.jpg

अब मैंने धीरे-धीरे उसकी चूत में उंगली करते हुए उसके दाने को अपनी जुबान से छेड़ने और मुँह से चूसने लगा। मेरी इस हरकत से उसने भी जोश में आकर मेरे लौड़े को अपने मुँह में और अन्दर ले जाते हुए तेज़ी से अन्दर-बाहर करने लगी।
29724503_055_d0c5.jpg

उसके शरीर में हो रहे कम्पन को महसूस करते हुए मैं समझ गया कि अब बेटी झड़ने वाली है.. यही सही मौका है उंगली की स्पीड तेज कर दो.. ये विचार आते ही मेरा भी जोश बढ़ गया और मैं एक सधे हुए खिलाड़ी की तरह उसकी चूत में तेजी से उंगली अन्दर-बाहर करने लगा।

अब बेटी के मुँह से भी 'गु.. गगगग गु.. आह्ह..' की आवाज़ निकलने लगी.. क्योंकि वो भी मेरा लौड़ा फुल मस्ती में चूस रही थी.. जैसे सारा आज ही रस चूस-चूस कर खत्म कर देगी।
56474001_010_1842.jpg

मैंने तुरंत ही अपनी उंगली अन्दर-बाहर करते हुए अचानक से पूरी बाहर निकाली और दोबारा तुरंत ही दो उँगलियों को मिलाकर एक ही बार में घुसेड़ दी..

बेटी को शायद थोड़ा दर्द हुआ, जिससे उसके दांत मेरे लौड़े पर भी गड़ गए और उसके साथ-साथ मेरे भी मुँह से भी 'अह्ह ह्ह्ह्ह..' की चीख निकल गई।
71754137_007_b26c.jpg

सच कहूँ, हम दोनों को इसमें बहुत मज़ा आया था।

आज भी इस बात को याद करते ही मैं एक्साइटेड हो जाता हूँ. मेरा लौड़ा तन कर आसमान छूने लगता है और उसकी चूत कामरस की धार छोड़ने लगती है।

खैर.. जब उसका दर्द कुछ कम हुआ तो फिर से वो लण्ड को चचोर-चचोर कर चूसने लगी और अपनी टांगों को मेरे सर पर बांधते हुए कसने लगी।

वो मेरे लौड़े को बुरी तरह चूसते हुए 'अह्ह्ह्ह ह्ह्ह्ह्ह ह्ह्ह..' के साथ ही झड़ गई। बेटी का पूरा शरीर कांप रहा था, और उसकी चूत से कम्पन मेरी जीभ पर भी अनुभव हो रहा था। बेटी की चूत से उसके काम रस का बाहर आ रहा था जिसे मैं फटाफट चाट रहा था ताकि बेटी के रस का एक भी कटरा बाहर न रह जाये. अपने बेटे से चूत चटवाने का बेटी का यह पहला अनुभव था..
66408471_004_b6cd.jpg

मैंने इस तरह उसके रस को पूरा चाट लिया और छोड़ता भी कैसे.. आखिर मेरी मेहनत का फल था। और आप तो जानते ही हो की मेहनत का फल मीठा होता है। सचमुच बेटी की चूत का रस बहुत मीठा था.

उसकी तेज़ चलती सांसें.. मेरे लौड़े पर ऐसे लग रही थीं.. जैसे मेरे लौड़े में नई जान डाल रही हो.. और मैं भी पूरी मस्ती में उसकी बुर को चाट कर साफ करने लगा।

जब उसकी सांसें थोड़ा सधी.. तो वो एक लम्बी कराह 'अह्ह्ह ह्ह्ह्ह..' के साथ लेट गयी.

उसने बिना कुछ बोले- मेरे लण्ड को पकड़ा और दबा कर मेरे लौड़े को पकड़ कर अपने मुँह में डालकर चूसने लगी।
11631371_057_e29c.jpg

बीच-बीच में वो अपनी नशीली आँखों से मुझे देख भी लेती थी.. जिससे मुझे भी जोश आने लगा।

और यह क्या.. तभी उसकी बालों की लटें उसके चेहरे को सताने लगी.. जिसे वो अपने हाथों से हटा देती।

तो मैंने खुद ही उसके सर के पीछे हाथ ले जाकर उसके बालों को एक हाथ से पकड़ लिया।

हाय.. क्या सेक्सी सीन लग रहा था.. ओह माय गॉड.. एक सुन्दर परी सी अप्सरा जैसी मेरी बेटी मेरे लण्ड के अधीन हो कर..आपका लण्ड चूसे.. तो आपको कैसा लगे.. बिलकुल मुझे भी ऐसा ही लग रहा था।

फिर मैंने दूसरे हाथ से उसकी ठोड़ी को ऊपर उठाकर उसकी आँखों में झांकते हुए.. उसके मुँह में धक्के देने लगा.. जिससे उसके मुँह से 'उम्म्म.. उम्म्म्म.. गगग.. गूँ.. गूँ..' की आवाजें आने लगीं।
20924502_013_c8d9.jpg

इस तरह कुछ देर और चूसने से मेरा भी काम होने के पास आने लगा. मुझे मालूम था की किसी भी टाइम मेरा माल निकल सकता है तो मैंने बेटी को मुह को जोर जोर से चोदना शुरू कर दिया. फिर एक जोर की आअह्ह के साथ मेरा माल उसके मुँह में ही छूट गया और वो बिना किसी रुकावट के सारा का सारा माल गटक गई।
56873062_009_16c8.jpg

हम दोनों बाप बेटी अपने सेक्स से बहुत थक गए थे तो हम दोनों एक दुसरे के साथ लेट गए। हम दोनों ही बिलकुल नंगे थे.

तो मैं फुसफुसाते हुए बोला- "तुम्हे मेरा चूत को चूसना और चाटना कैसा लगा.?"

तो वो बोली- जैसे तुम अच्छे से बिना दांत गड़ाए मेरी चूत को अपने मुँह में भर भर कर चूस रहे थे तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, ऐसा लग रहा था कि तुम बस चूसते ही रहो... मुझे सच में बहुत अच्छा लगा और तुम्हारी उँगलियों ने तो कमाल कर दिया, जैसे तुमने अपनी उंगली नहीं बल्कि मेरे अंदर नई जान डाल दी हो! ठीक वैसे ही मैंने भी सोचा कि क्यों न तुम्हें भी तुम्हारी तरह मज़ा दिया जाये! बस मैंने तुम्हारी नक़ल करके वैसे ही किया और मुझे पता है कि तुम्हें भी बहुत मज़ा आया... पर तुमने मेरी हालत ही बिगाड़ दी थी, मेरी तो सांस ही फूल गई थी। तुम्हारा लौड़ा बहुत मोटा है.इसलिए मुझे उसे मुँह में लेने में समस्या हो रही थी। पर कोई बात नहीं। धीरे धीरे आदत हो जाएगी। अगली बार तुम्हे अधिक मजा आएगा. असली चीज है की तुम्हारी जीभ भी बहुत लम्बी है. तुमने तो मुझे स्वर्ग में ही पहुंचा दिया. तुम्हारी जीभ लम्बी होने के कारण इतनी अंदर तक जा रही थी की आज तक कभी इतने आगे तक चुसाई नहीं हुई. यह मेरे लिए एक बहुत ही अलग अनुभव था। मैं तो आज बहुत खुश हूँ. क्योंकि तुमने मुझे इतनी मज़ा दिया था जिसे मैं अपने जीवन में कभी नहीं भुला सकती!
12692212_042_fa80.jpg

अब मैं उसके होंठों को अपने होंठों में दबा कर उसके होंठों का रसपान करने लगा और वो भी मेरा पूर्ण सहयोग देते हुए मेरे निचले होंठ को पागलों की तरह बेतहाशा चूसे जा रही थी, मुझे तो ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं जन्नत में हूँ,

सबसे ज्यादा ख़ुशी की बात तो यह थी एक अब बेटी की शर्म पूरी तरह दूर हो चुकी थी और वो चूत लण्ड जैसे शब्द खुल कर बोल रही थी और पूरा मजा ले रही थी.

"....ओह्ह्ह्हह...ओह...." बेटी के होंठ धीरे धीरे बुदबुदा रहे थे.
89d_078.jpg

होंठ को अच्छी तरह चूमने के पश्चात मैं जल्द ही अपनी बेटी के स्तन पर पहुँच गया.

यहाँ पर अभी भी बेटी के हाथ थे. मेरा चेहरा जैसे ही बेटी के स्तन के ऊपर रखे हाथों से टकराता है तो वो अपने हाथ हटा लेती है और मुझे अपने स्तन चूमने देती है. मैं फिर से बेटी के निप्पल बदल बदल कर चूस रहा था. बेटी मेरे बालों में उँगलियाँ घुमा रही थी.
89f_049.jpg

अपनी चूत चटवाई के उस जबरदस्त सख्लन के पश्चात बिलकुल सुस्त पड चुकी बेटी अब अपने जिस्म में कुछ हरकत महसूस कर रही थी.

न जाने कितने सालो के बाद बेटी ने यह परम संतुष्टी प्राप्त की थी इतना मजा बेटी को पहली बार मिल रहा था इस आनंद को तो वह भूल ही चुकी थी मगर इतने सालों बाद उनके पिता ने यह सुख उसे दिया.

निप्पलों को चूसते चूसते मैंने अपनी नज़र अपनी बेटी पर डाली जो मेरे बालों में उँगलियाँ फेरते हुए मुझे बेहद प्यार, स्नेह और ममतामई नज़र से देख रही थी.
432_083.jpg

हम दोनों बाप बेटी की नज़रें मिलती हैं और मैं आगे अपनी बेटी के चेहरे की और बढ़ता हु.

बेटी भी मेरा चेहरा अपने हाथों में थाम अपने मुंह पर खींचती है. मेरा चेहरा सीधा अपनी बेटी के चेहरे पर झुक जाता है

और हम दोनों के होंठ आपस में जुड़ जाते हैं. दोनों प्रेमियों की तरह एक दुसरे को चूम रहे थे. कभी बेटी मेरे तो कभी मैं बेटी के होंठों को चूस रहा था.
7e3_021.jpg

उधर बेटी को अपनी जांघों पर मेरा लण्ड ठोकरें मारता महसूस होता है.

बेटे के लण्ड को अपनी योनि के इतने नजदीक पाकर उनके बदन में कामौत्तेजना लौटने लगती है

और उसकी साँसों की गहराई बढ़ने लगती है.
599_347.jpg

बेटी की जिव्हा मेरे होंठो को चाटने लगती है और वो उसे मेरे मुंह में धकेलती है. मैं अपना मुंह खोल देता हु और बेटी की जिव्हा मेरे मुख में प्रवेश कर जाती है.

बेटी मेरी जीभ को अपनी जीभ से सहलाती है.


मगर मैंने एकदम से उसकी जीभ को अपने होंठो में दबाकर उसे चूसने लगा क्या शहद के जैसा स्वाद था.
2562386_03.jpg
Uffffff Bahut kamuk update hai.
 
  • Like
Reactions: Napster
🔥 Read Next Hot Story →
Discover more exclusive stories
Top