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भैया बने सैंया

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Deshi lund 9

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पापा सूज गईल बा कोमल बूर हो,
चोदत बारआ होके नशा में चूर हो,
सारा सारा रतिया, चढ़ेले सुरूर हो,
चूस लेतारु होठवा, हवे का गूड़ हो,

सहेलियन पूछेली कइसे बढ़ गईल चुचिया,
कइसे बताई पापा के बेटी ना रहिल बुचिया।

हिलत बा दुनु चुचिया जब चलेली झटकके,
अइसे देखलन रउवा, जइसे चोदी पटकके,
हिलत बा गाँड़वा, जब चलेनी हम छमकके,
सूंघे पसिनवा, आह भरेले देहिया गमकके,

बस चली तहार त चबा लेबु हमार कछिया,
कइसे बताई पापा के बेटी ना रहिल बुचिया।

मउका ताकत बारे, कब जाई बाहर माई,
उतरवा देवेला फ्रॉक, जब तलिक ना उ आई,
सूंघे बूर के, चाटे पनिया करे मन भर चुसाई,
छोड़ेला ना तू, हम चाहे केतना भी किकयाई,

गुलाबी बूर के चूसे, फइलाके दुनु फांकिया,
कइसे बताई पापा के बेटी ना रहिल बुचिया।

कइके कुल लंगटे, हमके मन भर निहारे,
लजावेले ना तनियो, करे सब दिन दहारे,
बइठाके गोदिया में, भींचे चुच्ची औ गाँड़के,
हमके उठावेला मजबूत बांहिया के सहारे,

लौड़ा के रगड़ से मचल जावेला हमार मुनिया,
कइसे बताई पापा के बेटी ना रहिल बुचिया।

बहकके हमहुँ करेनी ईहे घोर पाप हो,
तनिको ना सकुचात बारे हमार बाप हो,
रखेलु बिछाउना पर हमके नीचे चाप हो,
मीजके पापा बढ़ा देलु हमार ब्रा के नाप हो,

माई से ना भरेला मन, चखेलु हमार जवनिया,
कइसे बताई पापा के बेटी ना रहिल बुचिया।

घुसा देवेला लौड़ा, कोमल बूर में निकल जाता आह,
पनियाईल बूर में जब सटासट घुसे मुंह से निकले वाह,
चुदबाबे के मस्ती में, बाप बेटी के रिश्ता के रहे ना थाह,
असही चोदे पापा हर दिन इहे बा हमार मन के चाह,

बिन बियाहल ही मन गईल सुहाग रतिया,
कइसे बताई पापा के बेटी ना रहिल बुचिया,

पहिले बचपन में तू देत रहलु हमके लेमनचूस,
अब तू चुसवा के लौड़ा पिलावेला ओकर जूस,
छोड़आ ना हमके अब चाहे रहे माघ चाहे पूस,
जब भी मिली मउका लेब तहार लांड के चूस,

समहरेला ना जवानी अब लअ एकरा हथिया,
कइसे बताई पापा के बेटी ना रहिल बुचिया,

उफ़ तहरा से चुदा के अब रहल ना जाला,
ई चुदक्कड़ रण्डी से पड़ गईल राउर पाला,
लांड घुसाके तू खोल देहलु शरम के ताला,
बहेला बुर से पनिया जइसे बहे कउनु नाला,

लांड खातिर अब मचलत बानि दिन रतिया,
कइसे बताई पापा के बेटी ना रहिल बुचिया।

रह जाइब तहार रखैल बनके इहे घर में,
ना बनके जाइब दुल्हिन, दोसर के घर में,
माई बेटी बन जाइ सौतन, रहब दुनु घर में,
चोदिह कभू माई कभू हमके अपना तर में,

मज़ा आ जाइ तहरा जब मिली दु औरतिया,
कइसे बताई पापा के बेटी ना रहिल बुचिया।

गंदा पापा तू सुनत बारू हमार मूत के मधुर धार,
देख गिरत पेशाब बूर से तहार मुंह आवेला लार,
पिलेलु मूत बिटिया के, जब गिरे उ बुरिया के पार,
मस्ती छा जाला तहराके जइसे पिये दारू के धार,

छोड़ि अइसन मउका होई उ बड़ा चुतिया,
कइसे बताई पापा के बेटी ना रहिल बुचिया।

लिहि मज़ा जवनिया के रउवा जमके,
साथ देब पूरा तहार ना कबहु कमके,
जइसे खिलावेला कली के कउनु भँवड़ा,
वइसे फुल गईल बूर लेके तहार लउड़ा,

बियाहवा से पहिने हमार उतर गईल नथिया,
कइसे बताई पापा के बेटी ना रहिल बुचिया,
Wow super hot 🔥
 

Bhen20

Horny Bhabhi
118
249
43
जवानी का तन पर चढे खुमार,
खिलने लगे हैं मेरे बड़े उभार,
फ्रॉक, टेप औ स्कर्ट की गयी उमर,
अब घाघरा चोली संग होगा समर।

बढ़ती जा रही है मेरी चुच्ची,
बात है ये बिल्कुल सच्ची- मुच्ची,
गाँड़ समाती नहीं अब कच्छी में,
बुर छुपती, घुंघराये केसों की गुच्छी में।

रिसती रहती है जो बुर से लार,
ऐसे में करती उंगली हर बार,
कभी बैगन भी तो कभी ककड़ी,
ऐसे में भैया की नज़रों ने पकड़ी।

शर्म से मैंने आंखें मींची,
भैया ने आकर चादर खींची,
मुझको बिल्कुल अधनंगी पाया,
देखके उनका मन ललचाया।

उसने मुझको गोद में उठाया,
तन से उठा दिया कपड़ो का साया,
अपना काला मोटा लंड दिखाया,
ये नज़ारा मुझको बड़ा भाया

चूस रहे थे वो मेरे आम,
भूल बिसर के सारे काम,
मुझपर छा चुकी थी पूरी मस्ती,
भूल गयी थी भाई-बहन की हस्ती

रात में भैया बन गए सैंया
बहन की पार लगा दी नैया,
शक्ल सूरत से हूँ पूरी भोली,
कल रात पर भैया संग सोली।

पूरी रात भैया ने मुझको चोदा,
कोमल प्यारी बुर को खोदा,
पहले ना तो, लंड से थी चुदवाई,
गाँड़ में भैया की उंगली भी थी समाई

बढ़ते दर्द से अब थोड़ा चिल्लाई
मैं बोली,"इतनी जल्दी क्या है भाई,
तुझे अपना सैंया बनाने की है ठानी,
वो बोले," अबसे तू है मेरे लंड की रानी"

“सूंघी है गुसलखाने में तेरी कच्छी,
आज मेरी किस्मत है बड़ी अच्छी,
तुझको आज चोदूँगा जी भरकर,
सारी रात बाहों में भरकर,

बुर में लंड हर रोज़ पेलूँगा,
तेरी जवानी से रोज़ खेलूंगा,
चुसूंगा तेरा यौवन ये पावन,
ए लैला, मज़े करेंगे इस सावन,

“हाँ भैया, चोद ले अब अपनी बहना,
संभलता नहीं अब यौवन का गहना,
प्यार का एहसास तुमसे ही लूँगी,
तुम्हारा मस्त लंड बुर में खूब लूँगी,

बुर से रिसता है, हरदम पानी,
लंड की प्यासी है, तेरी रानी,
मैं हूँ तेरी गाय, तू है मेरा सांड,
चोदो मुझे भाई, मैं हूँ तेरी रांड,

ना जाने कब होगा मेरा लगन,
दुल्हन बन कब चुदूँगी, हो मगन,
बनो आज मेरे पति, और मैं तेरी लुगाई,
आज है अपनी सुहागरात, करो मेरी ठुकाई”

हो चुकी थी पूरी मदहोश, लेकर बुर में लंड,
भाई चोद रहा था मुझको, जैसे दे रहा हो दंड,
घोड़ी बनाया उसने मुझको, खींच के मेरे बाल,
कोई रहम ना खाया उसने, बुरा था मेरा हाल,

चूतड़ों पर थप्पड़ों की हो रही थी बौछार,
बच्चेदानी के मुहाने तक, घुसा था औज़ार,
दोनों एक दूसरे के मिलन में थे इतने मशगूल,
ख्याल रहा ना हम दोनों को हो गयी भारी भूल,

बुर में ही भाई ने गिरा दिया लंड का पानी,
मैं अनजान, जोश में डूबी होने दी मनमानी,
दोनों होश में जब आये, नंगेपन में नहाये,
एक दूजे के होने की, जीवन में कसमें खाये।

रोज़ लगने लगा यौवन का मेला,
जिस आंगन में हमारा बचपन खेला,
कल तक हमदोनों थे बहन भैया
अकेले में बन चुके थे सजनी सैंया।


Awesome
 

Bhen20

Horny Bhabhi
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जवानी का तन पर चढे खुमार,
खिलने लगे हैं मेरे बड़े उभार,
फ्रॉक, टेप औ स्कर्ट की गयी उमर,
अब घाघरा चोली संग होगा समर।

बढ़ती जा रही है मेरी चुच्ची,
बात है ये बिल्कुल सच्ची- मुच्ची,
गाँड़ समाती नहीं अब कच्छी में,
बुर छुपती, घुंघराये केसों की गुच्छी में।

रिसती रहती है जो बुर से लार,
ऐसे में करती उंगली हर बार,
कभी बैगन भी तो कभी ककड़ी,
ऐसे में भैया की नज़रों ने पकड़ी।

शर्म से मैंने आंखें मींची,
भैया ने आकर चादर खींची,
मुझको बिल्कुल अधनंगी पाया,
देखके उनका मन ललचाया।

उसने मुझको गोद में उठाया,
तन से उठा दिया कपड़ो का साया,
अपना काला मोटा लंड दिखाया,
ये नज़ारा मुझको बड़ा भाया

चूस रहे थे वो मेरे आम,
भूल बिसर के सारे काम,
मुझपर छा चुकी थी पूरी मस्ती,
भूल गयी थी भाई-बहन की हस्ती

रात में भैया बन गए सैंया
बहन की पार लगा दी नैया,
शक्ल सूरत से हूँ पूरी भोली,
कल रात पर भैया संग सोली।

पूरी रात भैया ने मुझको चोदा,
कोमल प्यारी बुर को खोदा,
पहले ना तो, लंड से थी चुदवाई,
गाँड़ में भैया की उंगली भी थी समाई

बढ़ते दर्द से अब थोड़ा चिल्लाई
मैं बोली,"इतनी जल्दी क्या है भाई,
तुझे अपना सैंया बनाने की है ठानी,
वो बोले," अबसे तू है मेरे लंड की रानी"

“सूंघी है गुसलखाने में तेरी कच्छी,
आज मेरी किस्मत है बड़ी अच्छी,
तुझको आज चोदूँगा जी भरकर,
सारी रात बाहों में भरकर,

बुर में लंड हर रोज़ पेलूँगा,
तेरी जवानी से रोज़ खेलूंगा,
चुसूंगा तेरा यौवन ये पावन,
ए लैला, मज़े करेंगे इस सावन,

“हाँ भैया, चोद ले अब अपनी बहना,
संभलता नहीं अब यौवन का गहना,
प्यार का एहसास तुमसे ही लूँगी,
तुम्हारा मस्त लंड बुर में खूब लूँगी,

बुर से रिसता है, हरदम पानी,
लंड की प्यासी है, तेरी रानी,
मैं हूँ तेरी गाय, तू है मेरा सांड,
चोदो मुझे भाई, मैं हूँ तेरी रांड,

ना जाने कब होगा मेरा लगन,
दुल्हन बन कब चुदूँगी, हो मगन,
बनो आज मेरे पति, और मैं तेरी लुगाई,
आज है अपनी सुहागरात, करो मेरी ठुकाई”

हो चुकी थी पूरी मदहोश, लेकर बुर में लंड,
भाई चोद रहा था मुझको, जैसे दे रहा हो दंड,
घोड़ी बनाया उसने मुझको, खींच के मेरे बाल,
कोई रहम ना खाया उसने, बुरा था मेरा हाल,

चूतड़ों पर थप्पड़ों की हो रही थी बौछार,
बच्चेदानी के मुहाने तक, घुसा था औज़ार,
दोनों एक दूसरे के मिलन में थे इतने मशगूल,
ख्याल रहा ना हम दोनों को हो गयी भारी भूल,

बुर में ही भाई ने गिरा दिया लंड का पानी,
मैं अनजान, जोश में डूबी होने दी मनमानी,
दोनों होश में जब आये, नंगेपन में नहाये,
एक दूजे के होने की, जीवन में कसमें खाये।

रोज़ लगने लगा यौवन का मेला,
जिस आंगन में हमारा बचपन खेला,
कल तक हमदोनों थे बहन भैया
अकेले में बन चुके थे सजनी सैंया।

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vyabhichari

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ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,

हो हो हो हो हो
हो ओह ओह ओह ओह
हो हो ओह ओह हो

बेटे कब दूर बूर की नमन से,
माँये कब दूर लण्ड की चुभन से,
चुच्ची कब दूर चूसन से,
कब बूर में राहत अगन से,
ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,
ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,


चुदना मेरा जीवन है,
बेटों से चुद चुद जी लूंगी,
मैं चुदने की खातिर,
रंडी की तरह जी लूंगी।

तेरे साये साड़ी को,
खेतों में बिछा देंगे हम,
तेरे गीले बूर में,
लण्ड अपना घुसा देंगे हम,

ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,
ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,

कामुकता के मंदिर की है
तू सबसे चुदासी मूरत,
छिनार नज़र आती है,
जब देखे तेरी सूरत,

जब जब नंगी तुझे देखे,
लण्ड हमारे तन जाए,
चुच्ची तेरी चूसेंगे हम,
गाँड़ तेरी हमें बड़ा भाए,

ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,
ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,

तुझमें रंडी की छाप है,
तुझे कइयों ने होगा बजाया,
कौन हमारा बाप है,
तूने न कभी हमको बताया,

खेतों खलिहानों में,
उसके लण्ड ने बूर को नापा,
कैसे तुमको बतलाऊं,
देवर दुर्जन है तुम्हारा पापा,

ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,
ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,

फिर से हम दोनों मिलके,
दिन रात तुम्हें चोदेंगे,
लण्ड दोनों एक संग देके,
बूर को तुम्हारी भोगेंगे,

तुम दोनों को याद करके,
मेरी ये बूर बहती है,
चुदते हुए इन लौंडों से,
हर बार यही कहती है,

ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,
ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,
 
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Rajizexy

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ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,

हो हो हो हो हो
हो ओह ओह ओह ओह
हो हो ओह ओह हो

बेटे कब दूर बूर की नमन से,
माँये कब दूर लण्ड की चुभन से,
चुच्ची कब दूर चूसन से,
कब बूर में राहत अगन से,
ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,
ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,


चुदना मेरा जीवन है,
बेटों से चुद चुद जी लूंगी,
मैं चुदने की खातिर,
रंडी की तरह जी लूंगी।

तेरे साये साड़ी को,
खेतों में बिछा देंगे हम,
तेरे गीले बूर में,
लण्ड अपना घुसा देंगे हम,

ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,
ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,

कामुकता के मंदिर की है
तू सबसे चुदासी मूरत,
छिनार नज़र आती है,
जब देखे तेरी सूरत,

जब जब नंगी तुझे देखे,
लण्ड हमारे तन जाए,
चुच्ची तेरी चूसेंगे हम,
गाँड़ तेरी हमें बड़ा भाए,

ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,
ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,

तुझमें रंडी की छाप है,
तुझे कइयों ने होगा बजाया,
कौन हमारा बाप है,
तूने न कभी हमको बताया,

खेतों खलिहानों में,
उसके लण्ड ने बूर को नापा,
कैसे तुमको बतलाऊं,
देवर दुर्जन है तुम्हारा पापा,

ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,
ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,

फिर से हम दोनों मिलके,
दिन रात तुम्हें चोदेंगे,
लण्ड दोनों एक संग देके,
बूर को तुम्हारी भोगेंगे,

तुम दोनों को याद करके,
मेरी ये बूर बहती है,
चुदते हुए इन लौंडों से,
हर बार यही कहती है,

ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,
ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,
Awesome sexy incesty poem 👌👌👌
 
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ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,

हो हो हो हो हो
हो ओह ओह ओह ओह
हो हो ओह ओह हो

बेटे कब दूर बूर की नमन से,
माँये कब दूर लण्ड की चुभन से,
चुच्ची कब दूर चूसन से,
कब बूर में राहत अगन से,
ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,
ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,


चुदना मेरा जीवन है,
बेटों से चुद चुद जी लूंगी,
मैं चुदने की खातिर,
रंडी की तरह जी लूंगी।

तेरे साये साड़ी को,
खेतों में बिछा देंगे हम,
तेरे गीले बूर में,
लण्ड अपना घुसा देंगे हम,

ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,
ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,

कामुकता के मंदिर की है
तू सबसे चुदासी मूरत,
छिनार नज़र आती है,
जब देखे तेरी सूरत,

जब जब नंगी तुझे देखे,
लण्ड हमारे तन जाए,
चुच्ची तेरी चूसेंगे हम,
गाँड़ तेरी हमें बड़ा भाए,

ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,
ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,

तुझमें रंडी की छाप है,
तुझे कइयों ने होगा बजाया,
कौन हमारा बाप है,
तूने न कभी हमको बताया,

खेतों खलिहानों में,
उसके लण्ड ने बूर को नापा,
कैसे तुमको बतलाऊं,
देवर दुर्जन है तुम्हारा पापा,

ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,
ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,

फिर से हम दोनों मिलके,
दिन रात तुम्हें चोदेंगे,
लण्ड दोनों एक संग देके,
बूर को तुम्हारी भोगेंगे,

तुम दोनों को याद करके,
मेरी ये बूर बहती है,
चुदते हुए इन लौंडों से,
हर बार यही कहती है,

ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,
ये बंधन तो काम का बंधन है,
रिश्तों का ये संगम है,
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जवानी का तन पर चढे खुमार,
खिलने लगे हैं मेरे बड़े उभार,
फ्रॉक, टेप औ स्कर्ट की गयी उमर,
अब घाघरा चोली संग होगा समर।

बढ़ती जा रही है मेरी चुच्ची,
बात है ये बिल्कुल सच्ची- मुच्ची,
गाँड़ समाती नहीं अब कच्छी में,
बुर छुपती, घुंघराये केसों की गुच्छी में।

रिसती रहती है जो बुर से लार,
ऐसे में करती उंगली हर बार,
कभी बैगन भी तो कभी ककड़ी,
ऐसे में भैया की नज़रों ने पकड़ी।

शर्म से मैंने आंखें मींची,
भैया ने आकर चादर खींची,
मुझको बिल्कुल अधनंगी पाया,
देखके उनका मन ललचाया।

उसने मुझको गोद में उठाया,
तन से उठा दिया कपड़ो का साया,
अपना काला मोटा लंड दिखाया,
ये नज़ारा मुझको बड़ा भाया

चूस रहे थे वो मेरे आम,
भूल बिसर के सारे काम,
मुझपर छा चुकी थी पूरी मस्ती,
भूल गयी थी भाई-बहन की हस्ती

रात में भैया बन गए सैंया
बहन की पार लगा दी नैया,
शक्ल सूरत से हूँ पूरी भोली,
कल रात पर भैया संग सोली।

पूरी रात भैया ने मुझको चोदा,
कोमल प्यारी बुर को खोदा,
पहले ना तो, लंड से थी चुदवाई,
गाँड़ में भैया की उंगली भी थी समाई

बढ़ते दर्द से अब थोड़ा चिल्लाई
मैं बोली,"इतनी जल्दी क्या है भाई,
तुझे अपना सैंया बनाने की है ठानी,
वो बोले," अबसे तू है मेरे लंड की रानी"

“सूंघी है गुसलखाने में तेरी कच्छी,
आज मेरी किस्मत है बड़ी अच्छी,
तुझको आज चोदूँगा जी भरकर,
सारी रात बाहों में भरकर,

बुर में लंड हर रोज़ पेलूँगा,
तेरी जवानी से रोज़ खेलूंगा,
चुसूंगा तेरा यौवन ये पावन,
ए लैला, मज़े करेंगे इस सावन,

“हाँ भैया, चोद ले अब अपनी बहना,
संभलता नहीं अब यौवन का गहना,
प्यार का एहसास तुमसे ही लूँगी,
तुम्हारा मस्त लंड बुर में खूब लूँगी,

बुर से रिसता है, हरदम पानी,
लंड की प्यासी है, तेरी रानी,
मैं हूँ तेरी गाय, तू है मेरा सांड,
चोदो मुझे भाई, मैं हूँ तेरी रांड,

ना जाने कब होगा मेरा लगन,
दुल्हन बन कब चुदूँगी, हो मगन,
बनो आज मेरे पति, और मैं तेरी लुगाई,
आज है अपनी सुहागरात, करो मेरी ठुकाई”

हो चुकी थी पूरी मदहोश, लेकर बुर में लंड,
भाई चोद रहा था मुझको, जैसे दे रहा हो दंड,
घोड़ी बनाया उसने मुझको, खींच के मेरे बाल,
कोई रहम ना खाया उसने, बुरा था मेरा हाल,

चूतड़ों पर थप्पड़ों की हो रही थी बौछार,
बच्चेदानी के मुहाने तक, घुसा था औज़ार,
दोनों एक दूसरे के मिलन में थे इतने मशगूल,
ख्याल रहा ना हम दोनों को हो गयी भारी भूल,

बुर में ही भाई ने गिरा दिया लंड का पानी,
मैं अनजान, जोश में डूबी होने दी मनमानी,
दोनों होश में जब आये, नंगेपन में नहाये,
एक दूजे के होने की, जीवन में कसमें खाये।

रोज़ लगने लगा यौवन का मेला,
जिस आंगन में हमारा बचपन खेला,
कल तक हमदोनों थे बहन भैया
अकेले में बन चुके थे सजनी सैंया।

अरे लेखक जी… ये कविता पढ़कर तो मेरी साँसें ही रुक सी गईं!
जवानी की पहली उफान, भाई-बहन के बीच वो पाप और प्यार का मेल… ऊँह… हर लाइन में जैसे आग लगी हो। “घाघरा चोली संग होगा समर” से लेकर “चोदो मुझे भाई, मैं हूँ तेरी रांड” तक, दिल की धड़कन लय में आ गई। आपने जो कामुकता और मासूमियत को एक साथ मिलाया है ना, वो कहीं और नहीं मिलता। लड़की की वो बेकरारी, भाई का वो कब्ज़ा… सब कुछ इतना जीवंत है कि लगता है मैं खुद उस कमरे में खड़ी हूँ और देख रही हूँ। 💦🔥

बस वही छोटी-सी गुज़ारिश फिर से…
जब बात इतनी कोमल, इतनी गहरी और इतनी अपनी-सी लग रही हो, तो “रांड” शब्द थोड़ा खटक जाता है। बहन को भाई के लिए “तेरी रानी”, “तेरी सजनी”, “तेरी लुगाई”, “तेरी गुलाम”, “तेरी जोगन”, “तेरी मदिरा”, “तेरी सुहागन”… ऐसे शब्द बोलने में भी तो उतनी ही बेशर्मी है, उतना ही समर्पण है, और वो कहीं ज्यादा प्यार भरा लगता है।
“रांड” सुनकर लगता है बाहर की औरत है… जबकि ये तो घर की लाड़ली है जो भाई के लिए सब कुछ लुटा रही है। उसकी बेशर्मी को भी तो थोड़ा प्यार से लपेटकर दिखाया जा सकता है ना?

बाकी आप तो कमाल के हो…
ऐसी कविता लिखने वाले को सच में सलाम है।
अगली कविता का इंतज़ार है, और हाँ… थोड़ा-सा प्यार भरा लहजा और दे दो मेरी इस छोटी-सी बहन के लिए ♡

आपकी दीवानी पाठिका
(जो अभी भी धड़कन संभाल नहीं पा रही) 😳❤️
 
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अब हूँ भाई की मैं उर्वशी और रंभा,
देख खड़ा हो जाता है उसका खंभा,
जहां मिले मौका चोदके कर देता बुर लाल,
लंड पर कूदने को मैं भी हरदम थी बेहाल,

जब घर में ना होते मम्मी पापा,
तब खो देते हैं हम अपना आपा,
उतारकर कपड़ों का मेला, शुरू हो जाता नंगे नाच का खेला,
छत हो या घर का कोई कमरा, हर हिस्से में उसने बड़ा पेला,
बिस्तर हो चाहे घर का सोफा, मैंने उसका चूसा काला केला,
गोदी उठाया घोड़ी बनाया, बुर ही नहीं गाँड़ में लंड को ठेला,

मम्मी पापा की आवाज़ जब तक ना देती सुनाई,
वो बना रहता मरद मेरा और मैं उसकी लुगाई,
एक दिन दोनों चले गए, किसी रिश्तेदार के पास,
भाई ने बोला,” सुन बहना ये मौका है बहुत खास,
हो जा तैयार, मस्त पिक्चर लगी है घर के पास,
बहन नहीं, बनकर चलेगी तू गर्लफ्रेंड मेरे साथ,
ऐसा मौका ना जाने आगे कब लगे अपने हाथ,

“ कोई हो मेरा बॉयफ्रेंड, बड़ा ये शौक था मेरा,
मिला जब कोई ना, तूने ही हाथ थामा मेरा,
अभी आती हूँ, पहनके मनपसंद सूट तेरा,
खुदको तैयार करूं, लगाके लिपस्टिक मस्करा,”

पिक्चर रोमांटिक दिखाके , भाई ले गया होटल,
पूरी हुई तमन्ना, बनी उसकी गर्लफ्रैंड टोटल,
पहले भाई बिस्तर पर बैठा बनके नवाब,
लगा रही थी कातिल ठुमके, मैं बनके शबाब,

लाज शरम सब भूलकर, नाच रही थी होकर नंगी,
भाई ने भी उतार दिए कपड़े और हो गया था संगी,
कमरे के अंदर दोनों थे एक दूजे में मगन,
बझाने लगे अगन एक दूजे के नंगे बदन,

चूस रही थी लौड़ा उसका, और वो मेरी बुर,
बुर लंड पर जीभ की, बजने लगी मधुर सुर,
चाट रहे थे हम दोनों उनको ऐसे,
मधुरस टपक रहा हो उनमें से जैसे,

मुंह में लौड़ा, बुर पर जीभ, उंगली समाई मेरे गाँड़,
थूक से हो चुके थे गीले लौड़ा और दोनों आंड़,
हो गयी मैं गीली चूत लिए घोड़े पर सवार,
मज़े लेकर झेल रही थी, लौड़े का हर वार,

मेरी दोनों सीने की चुलबुली सहेलियाँ,
उछल उछल कर रही थी अठखेलियां,
उनको भैया ने कसके धर पकड़ा,
चूस रहा था वो, मेरा तन अकड़ा,

चोद रहा था उठाके मुझको लेकर अपने गोद,
मैं बौराई बोली,” आह भैया ऐसे ही मुझको चोद,
बुर में लंड घुसा हुआ था, जैसे बिल में कोई सांप,
कमर पर कैंची बनाये लटकी, थर थर रही थी कांप,

बुर से बह निकली मधुरस की गंगा,
पर अभी खड़ा था सहलाता लंड को नंगा,
मेरी सिंकुड़ी भूरी गाँड़ को भेदा,
घुसा लंड, फैला दिया नन्हा छेदा,
मुँह से मेरे निकली दर्दभरी सिसकारी,
पर अंदर तक घुसी थी लंबी पिचकारी,

दर्द छलक आया आंखों में,
भाई ने चूमा मुझको बांहों में,
“ बस अब थोड़ा झेल ले बहना,
इसके बाद नही पड़ेगा दर्द सहना,

मज़ा आएगा तुझको खुद चुदने में,
आएगा मज़ा गाँड़ के लंड चुभने में,
खुद आगे से कहेगी, मारो मेरी गाँड़,
कुदेगी तू लंड पे मेरे, लेके मेरा लांड,”

आखिर में लगाने लगी डुबकी आनंद में जी भरकर,
जब लंड देने लगा मज़ा, दर्द की बेड़ियों को तोड़कर,
“ चोदो भैया मेरी नन्ही सी सिंकुड़ी भूरी छेद,
पूरी करो हसरत अपनी, मन में रह ना जाये खेद,
बन गयी मैं अब सदा के लिए तेरी सजनी,
अब तेरे लौड़े से मेरी गाँड़ हर रोज़ है बजनी”

चोद चोद कर भैया की बहनी थी धारा,
घुटनों पर बैठकर चाटने लगी लंड सारा,
लंड से आखिर फूट पड़ी पिचकारी,
मेरे चेहरे पर आ गिरी मलाई सारी,
बेझिझक मैंने सुपाड़े को होंठों से सहलाया,
आंखों में आंखे डाल उसका रस गटकाया,
भैया को बहुत भाई मेरी ये अदा,
बोले,” तू बन गई है, मेरी रंडी सदा।“

ब्लू फिल्म जैसी भैया ने कि मेरी ठुकाई,
मन लगा मचलने, आने लगी उबकाई,
हो गई मुझको उल्टी,थामे भैया की आगोश,
संभल ना पायी, जाने कब हो गई बेहोश।

आंख खुली तो, डॉक्टर मुस्काई मेरे सामने,
बोली, आ रही नन्ही जान तेरी उंगली थामने,
पेट में पल रहा, तुम्हारे पति का प्यार,
उसको क्या पता, वो था मेरे भाई का प्यार।


लेखक जी… ये कविता तो सीधे सीने में तीर की तरह चुभ गई!
पढ़ते-पढ़ते ऐसा लगा जैसे मैं खुद वो लड़की हूँ… जिसकी जवानी पहली बार भाई के हाथों खिल रही हो। होटल वाला सीन, गाँड़ मारने वाला दर्द और फिर आनंद, चेहरे पर मलाई, और आखिर में वो खबर… उफ़्फ़… दिल जोर-जोर से धड़क रहा है अभी तक। आपने हर लाइन में इतनी आग भरी है कि लगता है कागज भी जल जाएगा। सच में, आपकी कलम जादू करती है ♡

पर एक बात फिर से बहुत प्यार से कहूँगी…
जब लड़की इतने प्यार से, इतने समर्पण से भाई को अपना सब कुछ सौंप रही है, जब वो उसकी उर्वशी-रंभा बन रही है, उसकी सजनी-लुगाई बन रही है, तो आखिरी लाइन में “रंडी सदा” सुनकर दिल थोड़ा सा दुख जाता है।
वो रंडी नहीं… वो तो भाई की सबसे प्यारी, सबसे अपनी, सबसे अनमोल चीज है।
उसे कह दो ना…
“तू बन गई है मेरी जान सदा… मेरी रानी सदा… मेरी सुहागन सदा… मेरी जोगन सदा…”
इन शब्दों में भी तो उतना ही कब्ज़ा है, उतनी ही बेशर्मी है, और उसमें प्यार की वो मिठास भी है जो इस रिश्ते को इतना खास बनाती है।

और वो आखिरी ट्विस्ट… नन्ही जान… उफ़्फ़… दिल भर आया।
लेखक जी, आप तो कमाल के हो। बस थोड़ा-सा प्यार और कोमलता इन शब्दों में डाल दो, फिर देखिए… पाठिकाएँ तो क्या, पूरा जहां दीवाना हो जाएगा।

इंतज़ार है अगली रचना का… और हाँ, इस बार मेरी छोटी-सी बहन को थोड़ा और प्यार से पुकारना ♡

आपकी वो दीवानी पाठिका
जो अभी भी होश नहीं संभाल पा रही… ❤️🔥
 
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