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Incest मा का दीवाना बेटा। (Completed)

Harshit

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शादाब एक बार फिर से अपनी अम्मी की हालत देख कर मुस्कुरा उठा। आज शहनाज़ का अंग अंग निखर कर चमक रहा हैं और उसका हुस्नों शबाब पूरे उफान पर था। शादाब ने एक योजना बनाते अपनी अम्मी का हाथ पकड़ लिया और आगे की तरफ बढ़ गया तो शहनाज़ की आंखे डर के मारे अपने आप खुल गई। सब लोग आंखे खोल फाड़ फाड़ कर उसकी तरफ देख रहे थे, ये सब देख कर जहां एक और उसे शर्म महसूस हुई वहीं शहनाज़ थोड़ा खुश हुई कि आज भी उसके हुस्न और बलखाते जिस्म में वो जादू हैं कि लोगो की निगाहें उस पर ठहर रही हैं। उसने थोड़ा सा मजा लेने के लिए अपने बेटे को छेड़ा और बोली:"

" राजा ये सब लोग मुझे ऐसे घूर घूर कर क्यों देख रहे हैं ?

शादाब अपनी अम्मी का हाथ जो कि उसके हाथ में था उसे हल्का दबाते हुए बोला:"

" अम्मी क्योंकि आपसे खूबसूरत इन्हे यहां कोई लग नहीं रही है इसलिए आपको देख कर अपनी आंखे ठंडी कर रहे है।

शहनाज़ के होंठ हल्की सी मुस्कान के साथ खुले और वो अपने बेटे से बोली:"

" लेकिन बेटा यहां तो एक से बढ़कर एक जवान लड़कियां हैं, मैं तो इनके सामने कुछ भी नहीं हु

शादाब अपनी अम्मी का हाथ सहलाते हुए उसकी आंखो में देखते हुए बोला:"

" अम्मी सिर्फ उम्र कम होने से कोई जवान नहीं होता, आपकी दिलफरेब खूबसूरती और कसे हुए शरीर के आगे ये आज कल की तितलियां पनाह मांगती है,और सबसे बड़ी बात अम्मी कच्चे फल की जगह लोग पके हुए मीठे फल खाने से ज्यादा खुश होते हैं !

इतना कहकर उसने एक बार बड़ी हसरत भरी निगाहों से अपनी अम्मी की गोल गोल चूचियो की तरफ देखा तो उसकी नजरो का आभास होते ही शहनाज़ शर्म के मारे फिर से लाल ही गई और अपने बेटे के हाथ में हल्का सा नाखून चुभाते हुए बोली:

" बेशर्म कहीं का, कुछ भी बोल देता है। तुझे घर जाकर ठीक करती हूं।

शादाब उसे छेड़ते हुए:"घर जाकर क्या आप मेरे साथ मसाला कुटोगी ?

शहनाज़ ने उसे एक बार घूर कर देखा और आगे बढ़ गई। वो दोनो एक साथ मॉल के अंदर घुस गए तो एस्केलेटर सीढ़ियां देख कर शहनाज़ के चेहरे पर हैरानी फैल गई और बोली:" बेटे ये सब क्या हैं ये कैसी सीढ़ियां है?

शादाब जानता था कि उसकी अम्मी ने ये सब पहली बार देखा हैं तो उसने समझाया:

" अम्मी ये अब ऑटोमैटिक सीढ़ियां होती हैं जो अपने आप उपर नीचे जाती रहती हैं।

इतना कहकर शादाब शहनाज़ का हाथ पकडकर जैसे ही एस्केलेटर पर पैर रखने लगा तो शहनाज़ डर गई और उसने अपना पैर वापिस खींच लिया। शादाब ये सब देखकर मुस्कुरा उठा और बोला:

" अम्मी आप डरों मत, जैसे ही मैं अपना पैर रखू, आप भी एकदम से अपना पैर रख देना।

शहनाज़ ने अपने बेटे की बात मानते हुए शादाब के पैर के साथ ही पैर रख दिया और उसके साथ ही एस्केलेटर पर सवार हो गई। लेकिन पैर रखते ही उसे एक झटका लगा और वो डर के मारे अपने बेटे से लिपट गई और देखने लगी कि एस्केलेटर में सीढ़ियां बन गई और दोनो उपर जाने लगे तो शादाब ने अपनी अम्मी को समझाया कि उसके साथ ही पैर हटाए तो दोनो ने एक एक साथ पैर हटा दिया तो एक हल्का सा झटका शहनाज़ को लगा लेकिन उसके बेटे ने उसका हाथ पकड़ रखा था इसलिए कोई दिक्कत नहीं अाई। शादाब और शहनाज़ उपर पहुंच गए थे लेकिन शादाब अपनी अम्मी के दिल से पूरी तरह से एस्केलेटर का डर निकालना चाहता था इसलिए उसे समझाते हुए वो एक बार फिर नीचे की तरफ जा रहे एस्केलेटर पर सवार हो हुए। इस बार पहले के मुकाबले शहनाज़ का आत्म विश्वास गजब का था और जल्दी ही वो दोनो नीचे पहुंच गए।

शादाब ने इस बार अपनी अम्मी को खुद अकेले ही जाने के लिए कहा तो उसने मना कर दिया तो शादाब उसके साथ चल पड़ा लेकिन उसने इस बार शहनाज़ का हाथ नहीं पकड़ा और वो अपने आप ही आराम से एस्केलेटर पर चढ़ गई। शहनाज मुस्कराई और अपने बेटे की तरफ देखा तो शादाब ने भी मुस्करा कर अपनी अम्मी का साथ दिया क्योंकि वो जानता था कि अब शहनाज़ का डर निकल चुका हैं। दूसरी तरफ शहनाज़ ऐसा महसूस कर रही थी मानो उसने बहुत बड़ी जंग जीत ली है। जल्दी ही वो एक कॉटन की दुकान में घुस गए और दादा दादी के लिए कपडे पसंद करने लगें। शहनाज़ ने अपने सास ससुर के लिए बहुत ही अच्छे डिजाइन के कॉटन के दो दो जोड़ी कपड़े लिए और कुछ चादर भी ले ली क्योंकि आगे गर्मियां आने वाली थी।

उसके बस शादाब अपनी अम्मी को एक लेडीज शॉप के सामने ले गया जहां बाहर ही एक से बढ़कर एक बेहतरीन ड्रेस लगी हुई जिन्हे देख कर शहनाज़ खुश हुई और बोली:"

" बेटा ड्रेस तो अच्छी हैं, लेकिन मेरे पास तो पहले से ही काफी कपडे हैं इसलिए रहने देते हैं।

शादाब :" अम्मी आपको ड्रेस मुझ पर उधार हैं क्योंकि उस दिन मसाला कूटते हुए आपका सूट फट गया था।

अपने बेटे की बात सुनते ही शहनाज़ की आंखों के आगे एक बार फिर से वो नजारा घूम गया और वो शर्म से गड़ गई। हिम्मत करके वो बोली:"
" नहीं बेटा कोई बात नहीं, मुझे नहीं चाहिए बस आदत सी नहीं रही नए कपड़ों की अब !

शादाब अपनी अम्मी का हाथ पकड़ कर सहलाते हुए बोला:

" इसका मतलब ये है कि आपको उस दिन अच्छा नहीं लगा और अब आप आगे से मेरे साथ मसाला नहीं कूटना चाहती ?

शहनाज़ की पलके एक बार फिर से हया से झुक गई और उसने अपने बेटे का दबाते हुए कहा:"

" नहीं बेटा, मैंने ऐसा तो कुछ नहीं कहा मेरे राजा !

शादाब खुश हो गया और अपनी अम्मी को लेकर अंदर स्टोर में घुस गया। अंदर एक से बढ़कर एक मॉडर्न ड्रेस लगी हुई थी जो कि जिनमें से कुछ घुटनो तक अा रही थी तो कुछ में कंधे बिल्कुल नंगे नजर अा रहे थे। शहनाज़ ने ऐसी ड्रेस पहली बार देखी थी इसलिए उसे बड़ी शर्म महसूस हुई। शहनाज़ मुंह नीचे किए हुए खड़ी थी और चोरी चोरी बीच बीच में ड्रेस की तरफ देख रही थी। ये देखकर सेल्स गर्ल को हंसी अा गई और बोली:"

" मैडम अगर इतनी शर्म करोगी तो ड्रेस कैसे खरीद पाओगी आप, देखिए ना आपकी गर्ल फ्रेंड कैसे शर्मा रही हैं?

सेल्स गर्ल ने अपने आखिरी शब्द शादाब के खूबसूरत चेहरे पर अपनी नजरे टिका कर कहे। शहनाज़ खुद को अपने बेटे की गर्ल फ्रेंड कहे जाने से हैरान हुई और बोली :"

" देखिए आपको गलतफहमी हो रही है, मैं इनकी गर्ल फ्रेंड नहीं हूं, मैं तो इसकी .....

इससे पहले की शहनाज़ की बात पूरी होती सेल्स उसकी बात काटते हुए बीच में ही बोल पड़ी :

" मैडम यहां आने वाली हर औरत कोई अपने आपको लडको की आंटी तो कोई भाभी कहती है, उफ्फ जब बेटे की उम्र के लड़के फसाने में शर्म नहीं करती तो फिर बताने मा कैसी शर्म ?

सेल्स गर्ल की बात सुनकर दोनो मा बेटे अवाक से खड़े रह गए, शहनाज की गुस्से से आंखे लाल होने लगी तो शादाब ने सेल्स गर्ल से बोला:"

" आप फालतू बात बंद कीजिए और ड्रेस दिखा दीजिए, अपने काम पर ध्यान दो

शादाब को भड़कते देख कर सेल्स गर्ल की फट गई क्योंकि उसे लग रहा था ये दोनो कपल हैं और रोमांस पर निकले हैं।

सेल्स गर्ल:" सोरी सर, माफ कीजिए, मैं आगे से ध्यान दूंगी, मैडम ये देखिए हमारे पास नए डिजाइन के एक से बढकर एक सूट हैं!!

शहनाज़ ने एक बार फिर से गुस्से से सेल्स गर्ल को घूरा तो शादाब ने उसे इशारे से मना कर दिया और शहनाज़ सूट देखने लगी। उसने दो सूट पसंद कर लिए। शादाब की नजर एक नई काले रंग की ड्रेस पर पड़ी जिसमे गले पर हल्की सी स्ट्रिप थी और कंधे पर बिल्कुल नंगी थी। शादाब ने शहनाज को वो ड्रेस दिखाते हुए कहा "

" अम्मी वो ड्रेस देखिए आप पर बहुत खूबसूरत लगेगी, ऐसा लग रहा हैं जैसे वो ड्रेस बनी ही आपके लिए हैं।

शादाब के मुंह से अम्मी शब्द सुनकर सेल्स गर्ल के होश उड़ गए। उफ्फ उससे सच में बहुत बड़ी गलती हो गई। उसने एक बार शहनाज की तरफ देखते हुए स्माइल दी और अपने दोनो कान पकड़ कर उठक बैठक करने लगी और बोली:"

" आंटी जी मैं सच में बहुत शर्मिंदा हू, मुझे नहीं पता था कि ये आपके बेटे हैं, अपनी बेटी समझ कर माफ कर दीजिए।

शहनाज उसे उठक बैठक करते देख कर हल्की सी मुस्कुराई तो सेल्स गर्ल को थोड़ा सुकून मिला और उसने वो काले रंग की ड्रेस शहनाज़ के सामने रख दी तो शहनाज़ उसे देखने लगी और शादाब से बोली:"

" बेटे ये कुछ ज्यादा छोटी लग रही हैं, मुझे बहुत शर्म आएगी क्योंकि मैंने कभी ऐसे कपड़े नहीं पहने हैं।

शादाब:" अम्मी अभी गर्मियां आने वाली हैं, आप इन्हे घर में पहन सकती हैं, बाहर मत पहनना और वैसे भी आज कल इनका ही फैशन चल रहा है।

शहनाज अपने बेटे की बात मान तो गई लेकिन ये सोच कर शर्मा रही थी कि इसे कैसे पहन पायेगी अपने बेटे के आगे। खैर उसने वो ड्रेस पसंद कर ली।

सेल्स गर्ल बोली:" मैडम हमारे पास गर्मियों के लिए कुछ स्पेशल नाइटी अाई हैं, रुकिए मैं आपको दिखाती हू।

सेल्स गर्ल ने कुछ नाइटी निकाल कर शहनाज के सामने रख दी तो शहनाज़ उन्हें देखते ही शर्मा गई। शादाब अपनी अम्मी को समझाते हुए बोला:

" अम्मी ये ड्रेस रात में सोते हुए पहनी जाती हैं, इसे आप अपने कमरे में सोते टाइम पहन सकती है और ये बिल्कुल कॉटन से बनी हुई हैं इसलिए गर्मी में सही रहेगी।


शहनाज़ ने बड़ी मुश्किल से नाइटी की तरफ देखा और बोली:"

" ठीक हैं बेटा, रात में पहन लिया करूंगी बस।

शादाब ने अपनी अम्मी के लिए अपनी पसंद से एक गहरे गुलाबी रंग की नाइटी खरीद ली क्योंकि वो जानता था कि उसकी अम्मी को गुलाबी रंग बहुत पसंद हैं।

शहनाज जैसे ही पैसे देने लगी तो शादाब ने मना कर दिया और अपना एटीएम आगे सेल्स गर्ल की तरफ बढ़ा दिया।

सारा सामान पैक हो गया और वो दोनो उस दुकान से बाहर निकल गए। शहनाज़ बोली:"

" बेटे तेरे पास कहां से इतने पैसे आए ? बता मुझे?

शादाब अपनी अम्मी की तरफ देख कर बोला:" अम्मी में ट्यूशन पढ़ाता था बस उससे ही पैसा बचाया था।

शहनाज़ खुश हो गई और बोली:

" वाह मेरा बेटा तो सचमुच बड़ा समझदार हो गया हैं।

शादाब अपनी अम्मी के गाल को हल्का सा सहलाते हुए बोला:"

" और अम्मी वैसे ही आपका सूट मेरी वजह से फटा था इसलिए एक दोस्त होने के नाते मेरा फर्ज़ बनता था।

शहनाज़ अपने बेटी की चालाकी पर शर्मा गई और दोनो आगे बढ़ गए। वो दोनो एक मल्टी प्लेक्स के सामने से गुजरे तो शहनाज़ बोली :"
" बेटा यहां क्या होता है? इतनी भीड़ क्यों है यहां पर?

शादाब:" अम्मी ये सिनेमा हॉल हैं और अंदर मूवी चलती हैं, ये सब लोग उसके लिए ही टिकट खरीद रहे हैं ।

शहनाज़ थोड़ा सा उदासीन अंदाज़ में बोली :" अच्छा बेटा ठीक हैं,

शादाब ने अपनी अम्मी से पूछा :"

" अम्मी क्या आप फिल्म देखना चाहती हो, आज तक मैने भी हॉल में नहीं देखी ?

शहनाज़ अपने बेटे की बात सुनकर खुश हो गई और फिल्म देखने के लिए हान कर दी। दोनो मा बेटा टिकट लेकर सिनेमा हाल में घुस गए और पीछे की सीट पर बैठ गए। थोड़ी देर बाद फिल्म शुरू हो गई जो कि एक बी ग्रेड फिल्म थी जिसके बारे में दोनो मा बेटे को कोई अंदाजा नहीं था।

थोड़ी देर बाद मूवी शुरू हो गई और बड़े पर्दे पर स्क्रीन आने लगी तो शहनाज पूरी तरह से हैरान हो गई ये देखकर।

शहनाज़:" बेटा यहां इतने बड़े दिखते हैं सब, देखो कितना बड़ी दीवार पर फिल्म चल रही हैं?

शादाब:" हां अम्मी , आज कल ऐसा हो होता हैं, इसलिए सब लोग यहां देखने आते हैं।

शहनाज़ अपने बेटे की बात सुनकर खुश हुई कि उसका बेटा कितना समझदार हैं, हर बात का हैं इसे। मूवी शुरू हुए अभी कुछ मिनट बीत गए थे। बी ग्रेड मूवी थी और एक ऐसी औरत की कहानी थी जिसका पति पैसे कमाने के लिए बाहर चला गया था और वो अकेली बहुत प्यासी थी। एक दिन उसके घर में एक लड़का जिसने अभी कॉलेज में एडमिशन लिया था किराए पर रहने लगा। लड़का एकदम जवान और खूबसूरत था और देखते ही देखते वो औरत जिसका नाम सविता था उस लड़के पर डोरे डालने लगीं। शहनाज़ बड़ी हैरानी से उस मूवी को देख रही थी और साथ ही साथ उसकी नजर आगे बैठे हुए लोगो पर भी जा रही थी।
एक दिन जब वो उस औरत ने लड़के को पटा लिया और दोनो के बीच रोमांस शुरू हो गया।

लड़का बहुत समझदार था और सेक्स के बारे में काफी जानता था इसलिए उसने रात को सविता को अपनी बांहों में भर लिया तो सविता भी मस्ती से उससे चिपक गई और उन दोनों के होंठ एक दूसरे से जुड़ गए। ये सब देख कर शहनाज़ की भी आंखे गुलाबी हो गई। उसने एक बार अपने बेटे की तरफ जो कि बहुत ध्यान से मूवी देख रहा था। शहनाज भी मूवी देखने लगी और अब लड़के ने अपनी जीभ सविता के मुंह में घुसा दी और चूसने लगा तो शहनाज़ को अजीब लगा, तभी उसकी नज़र अपने सामने बैठे हुए लोगो पर जाने लगी तो उसने देखा कि उसकी ही उम्र की कई औरतें अपने साथ बैठे कम उम्र के लड़के को किस कर रही हैं और लड़का जोश में आकर उसकी ब्रा में हाथ डाल कर उसकी चूची सहला रहा था, ये सब देखकर शहनाज़ के जिस्म ने एक आग भर गई और उसकी सांसे भारी होने लगीं। उसके मुंह से सांसों के साथ आग की लपटे सी निकलने लगी और उसका गला सूखता चला गया। उसकी। आग एक कदर भड़क चुकी थी कि एसी में बैठे होने के बाद भी उसके माथे पर पसीना साफ दिखाई दे रहा था। तभी सामने स्क्रीन का रंग बदल रहा था जिससे उसकी नजर उस औरत पर पड़ी तो उसे याद आया कि मैंने इसे कहीं देखा है। दिमाग पर जोर दिया तो याद अा गया कि ये कमीनी तो उस दिन पार्टी में अाई थी और मेरे बेटे के बारे में गंदी गंदी बाते कर रही थी और शादाब का नंबर भी लेकर गई थी।

अब तक वो औरत जिसका नाम गुलशन था लड़के के लंड को पेंट के उपर से ही सहला रही थी। शहनाज़ सामने चलती हुई मूवी को भूलकर उस औरत को देखने लगी तो शादाब की नजरे अपनी अम्मी की नजरो का पीछा करने लगी तो उसे एहसास हो गया कि उसकी अम्मी क्या देख रही है।

उस औरत ने लड़के की पेंट की जिप खोलकर उसका लंड बाहर निकाल लिया और हाथ में लेकर सहलाने लगी। शहनाज़ ने शर्म के मारे नजरे हटा ली लेकिन फिर से उसकी नजरे अपने आप लंड पर चली गई। आज शहनाज अपनी ज़िन्दगी में दूसरा लंड देख रही थी। कोई 5 इंच के आस पास की लंबाई, मोटाई बहुत कम और एक दम काला मरियल सा लंड जो ठीक से खड़ा भी नहीं हो रहा था उसे देखकर आज शहनाज़ को एहसास हुआ कि अगर ये लंड हैं तो को उसके बेटे के पास हैं वो क्या हैं?

उफ्फ इससे तो दोगुने से भी ज्यादा मोटा हैं, लंबा भी बहुत ज्यादा है और कठोर तो एकदम मूसल की तरह से हैं। अपने बेटे के बारे में सोचते ही शहनाज़ पूरी तरह से सुलग उठी और उसकी चूत भीगना शुरू हो गई। शहनाज़ ने अपने बेटे को एक नजर देखने के लिए जैसे ही नजरे उठाई तो उसकी नजर स्क्रीन पर पड़ी जहां वो लड़का सविता की चूची नंगी कर चुका था और कभी दबा रहा था तो कभी चूस रहा था। शहनाज़ से बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने अपनी जाघो को आपस में रगड़ना शुरू कर दिया और एक हाथ अपने बेटे के हाथ पर रख दिया। शादाब ने एक दम अपनी अम्मी के हाथ को अपने हाथ में भर लिया और हल्का हल्का दबाने लगा तो शहनाज़ का पूरा जिस्म कांपने लगा और उसने अपने भारी हो चले सिर को अपने बेटे के कंधे पर टिका दिया। शहनाज़ ने देखा कि उस औरत गुलशन ने लड़के की गोद में झुकते हुए अपने मुंह में उसका लंड भर लिया और मस्ती से चूसने लगीं। शहनाज़ को ये सब देखकर बहुत अजीब लगा और उसने आंखे बंद कर ली और अपनी जांघो को और तेजी से रगड़ने लगीं। तभी उसे शादाब का हाथ अपने बालो में घूमता हुआ महसूस हुआ तो उसकी आंखे एक बार फिर से खुल गई। उसने देखा कि वो औरत बार बार इस लड़के के लंड को चूस चूस कर खड़ा करने की कोशिश कर रही थी लेकिन लंड इतना कमजोर था कि खड़ा नहीं हो पाया और उस औरत को गुस्सा अा गया तो उसने जोर से एक थप्पड़ उस लड़के को जड़ दिया तो लड़का दर्द से कराह उठा और उसकी आह निकल गई

" आह अम्मी , थप्पड़ क्यों मारा मुझे आपने?

गुलशन गुस्से से फुफकारती हुई:"

" कमीने के लंड में दम नहीं है और सपने देखता है अपनी मा चोदने के, मेरा दूध पीकर भी उसका कर्ज नहीं चुका पाया साले!

वो औरत उस लड़के को गंदी गंदी गाली देने लगी और तभी इंटरवल हो गया। सब लोग बाहर की तरफ जाने लगे तो शहनाज़ भी जल्दी से अपने बेटे का हाथ पकड़कर बाहर की तरफ चल पड़ी क्योंकि वो उस रण्डी औरत का साया भी अपने बेटे पर नहीं पड़ने देना चाहती थी। दोनो बाहर अा गए और शहनाज़ ने को कुछ अंदर देखा था वो उस पर अब तक यकीन नहीं कर पा रही थी।

एक एक बज गया और दोनो को भूख लगने लगी थी इसलिए शहनाज़ बोली:"
" बेटा अब मुझे भूख लगी हैं, खाना कहां खाएंगे ?

शादाब अपनी अम्मी को लेकर एक फ्लोर और ऊपर चला गया जहां पर एक शानदार होटल था। शादाब ने वहां जाकर अपनी अम्मी के पसंद से खाने का आर्डर दिया और जल्दी ही खाना लग गया तो दोनो मा बेटे खाना खाने लगे। शहनाज़ को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी उसे इतने शानदार होटल में खाना खाने के लिए मिलेगा। सब सब्जी एक से बढ़कर एक, आज शहनाज़ के बोले बिना ही उसकी हर खुशी का ख्याल उसका बेटा रख दिया था। खाना खाने के बाद शहनाज़ ने अपना कपडे का बैग खोल कर उसमें से एक टिफिन निकाल लिया जो वो घर से लेकर अाई थी। शादाब उत्सुकतावश उसकी तरफ देखने लगा और शहनाज़ ने प्यार से वो टिफिन खोला तो देशी घी की खुशबू फैल गई।

शादाब ये देखकर अपनी अम्मी की तरफ स्माइल दिया और बोला:
" ओह मेरी प्यारी अम्मी मेरे ए देशी घी का हलवा चोरी से छिपा कर लाई है। लव यू अम्मी ।

शहनाज़ अपने बेटे की खुशी देखकर खुश हुई और अपने बेटे को सरप्राइज देने के लिए ही तो वो हलवा छुपा कर लाई थी।

शहनाज़ अपने बेटे को हलवे का टिफिन देने के लिए थोड़ा आगे को हुई तो उसके पैर शादाब के पैरो पर जा लगे। टिफिन उसे देकर वो पीछे हो गई लेकिन पैर उसके बेटे के पैरो पर ही रखे रहे।
शादाब ने एक चम्मच हलवा खाया और अपनी जीभ से चम्मच चाटते हुए बोला:"

" अम्मी सचमुच बहुत टेस्टी बना हैं और घी तो कुछ ज्यादा ही डाल रखा हैं आपने इसमें, अपने बेटे को क्यों इतना ताकतवर बनाना चाहती हो?

शहनाज़ अपने पैर से उसका पैर सहलाते हुए बोली:"

" मैं चाहती हूं कि मेरा बेटा दुनिया का सबसे ताकतवर बेटा बने, और घर के हर काम ने मेरी मदद करे ?

शादाब अपनी अम्मी के पैर को अपने पैर की उंगलियों से सहलाते हुए बोला:" अम्मी सब काम में तो मसाला कूटना भी अा जाएगा ?

अपने बेटे की बात सुनकर शहनाज़ के गाल फिर से लाल होने लगे और उसके पैर में नाखून दबाते हुए बोली:"

" ठीक हैं, मसाला भी कूट देना, लेकिन ध्यान रखना अगर पिछली बार की तरह मेरी कमर कूट दी तो तेरी खैर नहीं ?

शादाब अपनी अम्मी की बात सुनकर खुश हो गया और अपने पैर से अब थोड़ा उपर आते हुए उसके घुटने सहलाने लगा और बोला:" फिक्र मत करो आप अम्मी, अगर कमर कूट भी गई तो आपका बेटा फिर मालिश कर देगा आपकी।

शहनाज़ ने उसे जोर से घूरकर देखा तो शादाब ने अपने कान पकड़ लिए। उसने देखा कि शादाब हलवा धीरे धीरे खा रहा है इसलिए उसे मौका मिल गया और शहनाज़ उसे डांटने के लिए बोली :"

" जल्दी से खा लिया तू देशी घी से बनी चीज़े नहीं तो बाद में थप्पड़ खाने पड़ेंगे।

शहनाज के मुंह जल्दी से ये बात निकल तो गई लेकिन जैसे ही उसे
सब याद आया तो शर्म के मारे उसकी पलके झुक गई और मुंह नीचे करके हल्की सी मुस्कुरा उठी। शादाब ने जैसे ही अपनी अम्मी की बात उसने बचे हुए हलवे को एक चम्मच में भरते हुए खा लिया और खड़ा होते हुए शहनाज़ के पीछे आकर उसके दोनो कंधे थाम लिए। शहनाज़ की तो जैसे सांसे रुक सी गई और जिस्म कांप उठा क्योंकि सभी लोग इधर ही देख रहे थे।

शादाब अपने चेहरे को थोड़ा नीचे करते हुए अपनी अम्मी के कान के बिल्कुल करीब ले आया और उसके कंधो पर दबाव दबाते हुए धीरे से बोला:"

" अम्मी थप्पड़ की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि मूसल और केले में बहुत फर्क होता हैं।

शादाब की बात सुनते ही शहनाज़ का रोम रोम सुलग उठा क्योंकि वो जानती थी कि इसके बेटे का लंड सच में मूसल ही तो हैं। थोड़ी देर वो गहरी गहरी सांस लेती रही और बोली:"

"बेटा सब देख रहे हैं, हाथ हटा ले अपने मुझे बहुत शर्म अा रही है।

शादाब ने अपनी अम्मी की बात मानते हुए हाथ हटा लिए और दोनो होटल से बाहर निकल गए। वो मॉल में घूम ही रहे थे कि तभी शादाब की नजर एक ब्यूटी पार्लर पर पड़ी तो अपनी अम्मी को लेकर अंदर चला गया और उसे समझाने लगा।

शहनाज़:"ना राजा मुझे नहीं मेक उप करवाना, मैं तो जैसी हूं ऐसे ही ठीक हूं।

शादाब अपनी अम्मी को समझाते हुए बोला:" प्लीज़ एक बार बस, उसके बाद आप खुद को आईने में देखकर खुद ही शर्मा जाओगी! प्लीज़ मान जाओ।

शहनाज़ आखिरकार अपने बेटे की जिद के आगे झुक गई और एक लड़की शहनाज़ को अंदर ले गई। ब्यूटी पार्लर वाली लेडी ये सब देख रही थी और बोली:

"मैडम आप बहुत खुश नसीब हैं जो इतना प्यार करने वाला पति मिला हैं, यहां तो अक्सर ये ही होता है कि औरत जिद करती हैं और पति मना कर देता है।

शहनाज़ ने एक बार उसकी तरफ देखा और मुंह नीचे कर लिया तो लेडी आगे बोली :"

" लगता हैं मैडम आपका और आपके पति का झगड़ा चल रहा है, उफ्फ इतने खूबसूरत पति से नहीं लड़ना चाहिए क्योंकि औरतें ऐसे लोगो पर जान छिड़कती हैं। आपके तो एकदम चॉकलेटी हीरो जैसे हैं।

शहनाज़ इस बार उस औरत की तरफ देख कर मुस्कुरा उठी तो उस औरत ने अपना काम शुरू कर दिया। उसने सबसे पहले शहनाज़ की थ्रेडिंग करी और उसके सिर के बालो को पूरे उपर की तरफ फोल्ड करते हुए शानदार कट किया । फिर उसके चेहरे को अच्छे से साफ किया और एक 3डी क्रीम से उसका फेसियल किया जो कि बहुत महंगी थी और इसकी सबसे बड़ी खास बात ये थी कि एक एक हफ्ते एक रोज लड़की पहले से ज्यादा ग्लो करती थी। उसकी आंखो में गहरा काला काजल लगाया। फिर उसने शहनाज़ के पर जिस्म को अच्छे से साफ किया और परफ्यूम लगाया तो शहनाज़ एक फूल की तरह खिल उठीं। उसका हर एक अंग महक रहा था। फिर उसने शहनाज़ के होंठो पर लिपस्टिक लगाई जो कि डार्क महरूम रंग की थी तो शहनाज़ के होठ खिल उठे।


उसके बाद उसने शहनाज को शीशा दिखाया तो सच में खुद को देखते ही शहनाज़ यकीन ही नहीं कर पाई कि वो अपना चेहरे देख रही हैं।एक दम खूबसूरत किसी ताजे खुले हुए गुलाब की तरह। अपने चमचमाते रूप सौंदर्य पर शहनाज खुद ही मोहित हो गई और ब्यूटी पार्लर वाली लेडी का शुक्रिया अदा किया। लेडी ने उसे एक शानदार मेक अप किट जिसमे कई तरह की क्रीम और एक से बढ़कर एक लिपस्टिक थी। उसके बाद उसने घंटी बजा दी जो कि शादाब के लिए थी तो शादाब अंदर घुस गया। उसने देखा ही शहनाज़ को देखा तो बस देखते ही रह गया।

लेडी:" लीजिए सर आपकी मैडम तैयार हो गई है।


जब शादाब लगातार अपनी अम्मी को देखता रहा तो शहनाज को खुशी के साथ साथ शर्म भी महसूस हुई और वो शादाब की आंखो के आगे चुटकी बजाते हुए बोली:"

" कहां खो गए मेरे राजा ?

शादाब ने खुद पर से काबू खो दिया दोनो फिर से एक दूसरे की आंखो में खो गए। शादाब ने उस लेडी के सामने ही शहनाज को को पीछे से उसके गले में हाथ डाल कर अपनी तरफ खींच लिया। उसका दूसरा हाथ जो कि शहनाज़ के पेट पर था उस पर शहनाज़ ने अपन हाथ रख दिया।


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शादाब ने थोड़ा नीचे झुकते हुए शहनाज़ के सेब की लाल सुर्ख हो चुके गाल को चूम लिया तो मस्ती से शहनाज की आंखे बंद हो गई और अपने पेट पर रखे बेटे के हाथ को सहलाना शुरू कर दिया।


" अरे कुछ तो शर्म करो तुम दोनो , अगर तुम्हारी मैडम सुंदर हैं तो इसका ये मतलब नहीं कि उसे सबके सामने ही प्यार करना शुरू कर दो, घर जाकर जी भर कर प्यार कर लेना।

जैसे ही दोनो के कानों में उस लेडी की बार पड़ी तो दोनो जैसे होश में आए और लगा हो गए। शहनाज़ को अब बहुत शर्म लग रही थी लेकिन कहीं ना कहीं उसका आत्म विश्वास बढ़ता जा रहा था।

दोनो बिल चुका कर मॉल से बाहर अा गए और खरीदा हुआ सब सामान गाड़ी के अंदर रख दिया। उसके बाद वो गाड़ी लेकर आगे बढ़ गया और एक मिठाई की दुकान के सामने गाड़ी रोक दी और अपने दादा दादी जी के लिए काफी सारी बेहतरीन मिठाई लेने के लिए बाहर अा गया। शहनाज़ कार में लगे शीशे में अपने चांद की तरह खिले हुए हुस्न को बार बार देख रही थीं। शहनाज़ जानती थी कि उसके बेटे ने आज उसे एक नया जीवन सा दे दिया हैं बिल्कुल उसके सपनो के राजकुमार की तरह। वो अपने बेटे पर फिदा होती चली गई और आज पहली बार उसके दिल में अपने लिए के लिए प्यार जाग उठा जो एक मा का प्यार तो बिल्कुल भी नहीं था।

शादाब मिठाई लेकर अा गया और घर की तरफ दिया। गाड़ी सड़क पर दौड़ रही थी और शहनाज़ ने अपने बेटे का हाथ चूम लिया और उसकी आंखो में देखते हुए बोली:"

" थैंक्स राजा, तुमने सचमुच मुझे एक ही दिन में बदल दिया, ऐसा लग रहा हैं कि मैं एक सपना देख रही हूं।

शादाब ने अपनी अम्मी की तरफ देखते हुए कहा:"

" अम्मी वो तो एक दोस्त होने के नाते मेरा फर्ज़ था कि आपका खूब ध्यान रखूं।

शहनाज पहली बार उसकी आंखो में पूरे आत्म विश्वास के साथ देख रही थी और बोली :"

" जब तू मुझे अपनी सच्ची दोस्त मानता हैं तो आज के बाद तू मुझे अम्मी नहीं बल्कि नाज़ कहकर बुलाएगा। वैसे ही ब्यूटी पार्लर वाली भी मुझे तेरी मैडम ही समझ रही थी गलती से ।

इतना कहकर उसने अपने बेटे का गाल सहला दिया। शादाब सचमुच बहुत खुश था क्योंकि उसकी अम्मी आज खुल कर ज़िदंगी जी रही थी। उसने एक हाथ आगे बढ़ा कर शहनाज़ का हाथ थाम लिया और चूमते हुए बोला:"

" ठीक है नाज मुझे मंजूर हैं। लेकिन सबके सामने मैं आपको अम्मी ही बुलाऊंगा।

शहनाज़ ने जैसे ही अपने बेटे के मुंह से नाज़ सुना तो उसके दिल में घंटियां सी बजने लगी और उसकी सांसे तेज हो गई। उसे लगा जैसे उसके बेटे ने नहीं बल्कि उसके सपने के राजकुमार ने उसका नाम लिया हैं। शहनाज़ अपने बेटी की समझदारी पर बहुत खुश हुई और उसे एक स्माइल दी।

थोड़ा आगे जाकर एक बहुत बड़ा पार्क था जिसमें लोग घूमने के लिए आते थे इसलिए शादाब ने गाड़ी उस पार्क के बाहर रोक दी और अपनी अम्मी को लेकर अंदर चला गया। दोनो आज एक मा बेटे की तरह नहीं बल्कि एक लवर किर तरह घूम रहे थे।

पार्क के साइड में एक झूला लगा हुआ तो शादाब ने अपनी अम्मी को उसमे बैठने का इशारा किया तो शहनाज़ किसी छोटे बच्चे की तरह खुश होती हुई उसमें बैठ गई और शादाब ने अपनी अम्मी के पीछे आते हुए उसे झटके देना शुरू कर दिया तो झूला आगे पीछे जाने लगा और शहनाज की खुशी देखते ही बनती थी। जैसे ही झूला शादाब के पास आता तो शहनाज़ उसे एक स्माइल देती और शादाब उसकी कमर पकड़ कर फिर से आगे झटका देता जिससे झूला आगे चला जाता। शहनाज़ को अपनी कमर पर अपने बेटे के हाथ बहुत अच्छे महसूस हो रहे थे। धीरे धीरे झूले की ऊंचाई बढ़ने लगी तो शहनाज़ की नजर दूर दूर तक जाने लगी और उसने देखा कि एक झाड़ी के दूसरी तरफ एक लड़की पड़ी हुई थी जिसके उपर के लड़का चढ़ कर उसके नंगे बूब्स दबा रहा था। ये सब देख कर शहनाज़ की सांसे तेज होने लगी और उसका चेहरा शर्म से लाल होने लगा । वो उन्हें ठीक से देखने के लिए हलका सा पीछे को हुई जिससे उसका बेटा उसे जोर से धक्के दे सके और इस चक्कर में उसकी गांड़ आधे से ज्यादा झूले से बाहर अा गई। शादाब ने जैसे ही उसे धक्का देने के लिए पकड़ा तो उसके हाथ मे शहनाज़ की थोड़ी सी गांड़ अा गई और दोनों मा के इस एहसास से तड़प उठे। जैसे ही शहनाज़ आगे की तरफ गई तो उसे लड़की की चूची चूसता वो लड़का दिखाई दिया। शहनाज़ की हालत एक बार फिर से खराब होने लगी और मस्ती में उसकी गांड़ थोड़ा सा और ज्यादा पीछे को निकल गई जिससे उसके आधे से ज्यादा गांड़ शादाब के हाथो में जाने लगी। शहनाज़ की चूत एक बार फिर से गीली होने लगी तभी झूले की रस्सी ढीली होने लगी तो शादाब ने एक दम तेजी से अपनी अम्मी को उतार लिया और एक झटके के साथ झूला टूट कर दूर जा गिरा। ये सब देख कर शहनाज़ बुरी तरह से डर गई और शादाब से चिपक गई तो शादाब उसकी कमर सहलाते हुए उसे तसल्ली देने लगा और बोला "

।" नाज जब तक आपका ये दोस्त ज़िंदा हैं आपका बाल भी बांका नहीं होने देगा। शहनाज़ खुशी होते उसे उससे लिपट गई।


उसके बाद गाड़ी चल पड़ी और जल्दी ही दोनो घर पहुंच गए। रास्ते में ही शहनाज़ ने बुर्का पहन लिया था। घर जाकर शहनाज़ ने बिना बुर्का हटाए सास ससुर को सलाम किया और उन्हें कपडे उन्हें दिखाने लगीं। दोनो बहुत खुश हुए और शहनाज़ उपर चली गई क्योंकि अगर गलती से भी वो उसका मुंह देख लेते तो सजी धजी देख कर पता नहि क्या सोचते। शादाब अपने दादा दादी जी के पास बैठ गया और उन्हें मिठाई खिलाने लगा जी उन्हें भूटी पसंद अा रही थी।


शहनाज़ ने उपर जाते ही अपना बुर्का उतार फेंका और जैसे ही अपने आपको शीशे में देखा तो फिर से खुश हो गई। उसने आज के खरीदे हुए कपडे निकाले और अलमारी में रखने लगीं। तभी उसकी नजर पिंक रंग की नाइटी पर पड़ी तो उसने सोचा ये तो रात में पहनी जाती हैं इसलिए उसने अपना सूट सलवार उतार दिया और मिट्टी पहन ली। ये एक बहुत बारीक धागे से बनी हुई थी और काफी बाद तक पारदर्शी थी जिसमे उसके जिस्म का एक एक कटाव साफ नजर आ रहा था।


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अपने आपको इस सेक्सी नाइटी में देखकर उसकी आंखो में लाल डोरे तैरने लगे और उसकी सांस फिर से तेज होने लगी। आज सुबह से उसके बेटे की वजह से उसका जिस्म सुलग रहा था और उसकी आंखो के आगे एक के बाद फिल्म के सीन घूमने लगे तो उसकी सांस एक बार फिर से तेज होने लगी। उसने अपनी चुचियों का हल्का हल्का सहलाना शुरू कर दिया और एक हाथ अपने आप उसकी टांगो के बीच में चला गया। उसकी चूत पुरी तरह से भीगी हुई थी और वो अपनी चूत को सहलाने लगी। मस्ती से उसकी आंखे बंद हो गई, लेकिन आज उसे उस दिन जितना मजा नहीं आया जब वो अपने बेटे के साथ मसाला कूटते हुए अपनी चूत सहला रही थी। क्या मुझे आज फिर से अपने बेटे के साथ मसाला कूटना चाहिए ये सोचते ही शर्मा गई और चूचियां सांसे तेज होने से उपर नीचे होने लगी। उफ्फ कमीने ने कहीं अगर आज भी मेरी कमर को कूट दिया तो, लेकिन उस दिन मालिश करके सब ठीक कर दिया था और जैसे ही उसके नजर उसकी नाइटी के ढीले गए पर गई तो उसे यकीन हो गया कि आज उसके कपड़े भी फटने से बच जाएंगे। शहनाज़ अपने आपको पूरी तरह दिमागी और शारीरिक तौर पर मसाला कूूटने के लिए तैयार कर चुकी थी। उसकी चूत तो जैसे आज सुबह से ही तैयार थी और अब पूरी तरह से गीली हो गई थी। मेरे बेटे ने मेरे लिए इतना कुछ किया हैं तो मुझे उसके साथ मसाला जरूर कूटना चाहिए। लेकिन नाइटी की तरफ देखते हुए उसे शर्म आने लगी तो उसने कमरे में सिर्फ एक लाल रंग का नाइट बल्ब जला छोड़ दिया और औखली लेने के लिए चली गई। उसने किचेन से कुछ बहुत ज्यादा टाईट और मजबूत सूखे मसाले निकाले और उन्हें औखली में डाल कर अपने बेटे का इंतजार करने लगी।

जैसे ही शादाब उपर आया तो शहनाज़ के दिल की धड़कन अपने आप बढ़ने लगी और चूचियों के निपल्ल टाइट होने लगे। वो अपने रूम में गया और अपने कपड़े उतार कर एक इलास्टिक वाला पायजामा पहना और अपनी अम्मी के कमरे की तरफ चल पड़ा। जैसे वो कमरे में घुसा तो उसे शहनाज़ नीचे फर्श पर बिछी कालीन पर मसाला कूटती हुई नजर आईं।

शहनाज़ उसे देखते ही बोली:"

" अा गया मेरा राजा , देख ना मुझसे ये मसाला नही कूट रहा हैं इसलिए तू अपनी नाज़ की मदद कर दे।

शादाब ने ध्यान से देखा तो उसकी अम्मी उसे नाइटी में नजर आईं लेकिन कमरे में हल्की रोशनी होने के बाद भी उसे सब साफ नजर आ रहा है। वो जोश में अा गया और अपनी अम्मी के पीछे बैठ गया और बोला :"

" अम्मी आज आप फिर से बड़ा मूसल ले अाई, आपको बड़े मूसल ज्यादा पसंद हैं क्या?

शहनाज़ की हालत खराब हो गई और बोली:"
" बेटा मोटे मूसल से मसाला अच्छे से बारीक कूट जाता हैं लेकिन देख ना राजा ये कितना ज्यादा सूखा हुआ और ज़िद्दी मसाला है जो कूट ही नहीं रहा था। तू ही देशी घी की ताकत दिखा दे आज !!

शहनाज ने उसे खुला इशारा कर दिया कि वो पूरी ताकत के साथ आज उसके मजे ले सकता हैं।

शादाब उसकी गरदन पर गर्म सांसे छोड़ता हुआ बोला:"

" अगर मसाले के साथ साथ कमर भी कूट गई तो फिर मुझे मत कहना!

शहनाज बोली:" अगर गलती से कमर कूट भी गई तो मालिश कर देना मेरे राजा, ठीक हो जाएगी।


शादाब समझ गया कि आज की रात उसकी अम्मी को कोई ऐतराज़ नहीं है तो उसने अपना एक हाथ शहनाज़ के नंगे कंधे पर टिका दिया तो शहनाज़ के जिस्म में एक तेज झंकार सी दौड़ गई। शादाब ने थोड़ा और आगे होते हुए उसके कंधे पर अपना सिर रखते हुए उसका हाथ पकड़ लिया जिसने मूसल था। शादाब का लंड जो कि पूरी तरह से खड़ा हो चुका था शहनाज़ की कमर से सट गया तो शहनाज़ का जिस्म इस एहसास से कांप उठा। शादाब ने शहनाज के हाथ को पुरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया और उसने एक झटके के साथ मूसल को उपर उठाया और जोर से औखली में दे मारा। जैसे ही मूसल घुसा शादाब का लंड उसकी अम्मी की कमर पर जोर से लगा और शहनाज़ के मुंह से एक मस्ती भरी आह निकल पड़ी। झीनी नाइटी होने के कारण आज लंड का एहसास बिल्कुल सही तरह से हुआ और शादाब ने अपनी अपनी नजरे उसकी चूचियों पर टिका दी और तेज़ी से मूसल ठोकने लगा जिससे शहनाज़ की चूचियां पूरी तरह से उछलने लगी और ढीला गला होने के कारण आधे से ज्यादा बाहर आने लगी। शादाब की आंखे खुशी से चमक उठी और उसने अपना मुंह थोड़ा और नीचे झुका दिया और तगड़ा मूसल औखली में ठोकने लगा जिससे शहनाज़ की एक चूची पूरी तरह से उछल कर बाहर आ गई और शादाब ने निप्पल पर अपनी जीभ फेरते हुए एक लंड का तगड़ा धक्का उसकी कमर में लगा दिया। जैसे ही शहनाज़ के निप्पल पर शादाब के होंठ लगे तो उसके मुंह से एक जोरदार मस्ती भरी सिसकी निकल पड़ी और लंड के झटके के कारण वो आगे को होते हुए पेट के बल कालीन पर जा गिरी जिसका नतीजा ये हुआ कि नाइटी उपर आप उपर खिसक गई और उसकी गांड़ बस अब पेंटी में थी। शादाब भी उसके उपर गिर गया और लंड का झटका अब उसकी गांड़ पर लगा जिससे दोनो मा बेटे की आंखे मस्ती से बंद हो गई। औखली वहीं गिर गई थी और मूसल पास में ही पड़ा हुआ था। शहनाज़ ने हाथ बढ़ा कर मूसल को उठा लिया अपने बेटे की तरफ उसकी आंखो में देखते हुए मूसल को औखली में घुसा दिया तो शादाब ने अब अपनी अम्मी के उपर पूरी तरह से कब्जा जमा लिया और उसकी गर्दन के पास मुंह रखते हुए जोर जोर से मूसल मारने लगा। शहनाज को उसके नंगे चूतड़ों पर धक्के मारता हुआ उसके बेटे का लंड उसे बहुत मजा दे रहा था। इसलिए उसने अपनी गांड़ हल्का सा उपर की तरफ उभार दी।

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शहनाज़ अपने बेटे की तरफ देख कर बोली:"
उफ्फ बेटा देख ना कितना जिद्दी मसाला हैं, कूट ही नहीं रहा, आज तो जो मन करे कूट दे लेकिन ये मसाला जरूर कूटना चाहिए आह

शादाब ने अपनी अम्मी की तरफ से पूरी सहमति पाकर उसकी गान्ड को पूरी तरह से ठोकना शुरू कर दिया हर झटके पर शहनाज़ की गांड़ अपने आप उछलने लगी। मूसल तो बस कभी कभी औखली में घुस रहा था, और शहनाज़ मसाले के बहाने अपनी गांड़ कुटवा रही थी। शहनाज़ की चूत पुरी तरह से पानी पानी हो गई थी और उसकी खुजली पूरी तरह से बढ़ गई थी। शहनाज़ ने अपनी गांड़ को थोड़ा सा ऊपर उठा दिया और एक हाथ को अपनी चूत पर ले गई जिससे अब शादाब का बिल्कुल उसकी के छेद पर धक्के मार रहा था। अपनी अम्मी को अपनी चूत सहलाते देखकर शादाब की भी हिम्मत बढ़ गई और उसने एक झटके के साथ लंड को बाहर निकाल लिया। शादाब ने अपने होंठ शहनाज़ की गरदन पर रख दिए और चाटने लगा। शहनाज़ अब पूरी तरह से मस्त हों गई और जोर जोर से सिसकी लेने लगी। मूसल उसके हाथ में जरूर था लेकिन अब तो बस औखली के अंदर पड़ा हुआ था। शादाब ने अपने नंगे लंड पहला का जोरदार धक्का शहनाज़ के चूतड़ों पर मारा शहनाज़ नंगे लंड को महसूस करते ही कांप उठी।

" हाय मेरे राजा , ऐसे ही कूट उफ्फ कितना मोटा मसाला है देख ना?

शादाब:"हाय मेरी नाज़, मैं सारा मसाला कूट दूंगा क्योंकि मुझे आपसे थप्पड़ नहीं खाना है

शादाब की ये थप्पड़ वाली बात सुनते ही शहनाज़ का जिस्म पूरी तरह से उछलने लगा और शादाब भी अपनी अम्मी की गांड़ को अब पूरी ताकत से कूट रहा था। शादाब ने शहनाज़ को थोड़ा सा कमर से उठा दिया तो उसकी गांड़ के साथ साथ चूत भी उभर कर खुल गई। शहनाज की पेंटी पूरी तरह से भीग चुकी थी और रस बहकर उसकी जांघो तक अा रहा था।

जैसे ही शादाब ने अगला धक्का मारा तो लंड सीधे पेंटी के उपर से ही चूत से जा टकराया। शहनाज़ को आज 18 साल के बाद अपनी चूत पर लंड का एहसास हुआ था इसलिए वो जोर से सिसक उठी।

" आह मेरे राजा, सब कुछ क्या आज ही कूट देगा मेरा? उफ्फ तेरा मूसल कितना ख़तरनाक है, उफ्फ तो कभी थप्पड़ नहीं खाएगा मेरे हाथो।

शादाब तो लंड चूत पर लगते ही कांप उठा और एक मस्त एहसास को फिर से महसूस करने के लिए उसने एक और जोरदार धक्का मारा तो शहनाज़ की गीली चूत में पेंटी थोड़ा सा अन्दर सरक गई और शहनाज़ का पूरा जिस्म एक झटके के साथ अकड़ता चला गया

" आह मेरे राजा, उफ्फ हाय मर गई तेरी नाज, हाय अल्लाह

अपनी अम्मी की सिसकी सुनकर शादाब ने अगला धक्का मारा और लंड पहली बार चूत से जा टकराया और शादाब ने एहसास के साथ ही शहनाज़ की चूत के मुंह पर अपनी वीर्य की बौछार कर दी और अपनी अम्मी की कमर पर जा गिरा और उसे पूरी ताकत से कस लिया। थोड़ी देर जैसे ही दोनो होश में आए तो शहनाज़ उठकर बाथरूम में भाग गई और जब फ्रेश होकर आई तो देखा कि शादाब मसाला कूट रहा हैं तो में ही मन मुस्कुरा दी और बेड पर चढ़ते हुए अपनी बांहे फैला कर बोली

" आ जा मेरे राजा, सोना नहीं हैं क्या ?
मसाला तो कल दिन में भी कूट जाएगा।

शादाब अपनी अम्मी की बात सुनकर दौड़ता हुए उसकी बाहों में समा गया और दोनो मा बेटे के दूसरे की बाहों में सो गए
Bahut mast gajab ka update diya bhai
 

rajan2907

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ये कल क्यों आ गया बीच में मसाला पूरा कूटने के बाद सोना था
 
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