





























रात भर गांड मराने के बाद सुगंधा की नींद खुल गई सुबह के 6:00 बजे रहे थे वैसे भी कोई काम नहीं था इसलिए जल्दी उठने का कोई मतलब नहीं था 6:00 बजे आंख खुलने के बावजूद भी वह कुछ देर तक यूं ही बिस्तर पर लेटी रही,,, अंकित अभी भी उसकी बाहों में गहरी नींद में सो रहा था। रात भर जमकर मेहनत जो उसने किया था,,, सुगंधा स्नेह भरी नजरों से अपने बेटे को देख रही थी,,, कुछ महीने पहले उसने कभी सोचा भी नहीं थी कि उसका रिश्ता अपने ही बेटे के साथ इस तरह से गहरा हो जाएगा,,, इस बात को वह भी मानती थी कि वह पूरी तरह से बेशर्म हो चुकी थी शर्म का उसकी आंखों में अब नामोनिशान नहीं था क्योंकि वह जानती थी शर्म करने से कोई फायदा नहीं है बेशर्म बनने के बाद ही उसे जीवन का असली सुख प्राप्त हुआ था और इस सुख को वह खोने नहीं देना चाहती थी। रात के बारे में वह सोच रही थी उसका बेटा कितना शैतान हो चुका था उसे जीवन का हर सुख दे भी रहा था और ले भी रहा था,,, वह सोची नहीं थी कि उसके बदन का अनमोल अंग का लेने के बावजूद भी वह इस कदर से उसकी गांड मारेगा,,, उसे उम्मीद नहीं थी कि उसका बेटा है उसके गांड के छेद के लिए जिद करेगा क्योंकि अक्सर मर्द औरत की बुर के लिए ही पागल होते हैं लेकिन अब उसे एहसास होने लगा था कि मर्द की प्यास केवल औरत की बुर से नहीं मिटती,, बल्कि उसे एहसास होने लगा था कि औरत के बदन का हर एक छेद मर्दों के लिए प्यास बुझाने का साधन होता है,,,, अपने बेटे की जीद को देखकर वह इस समय मुस्कुरा रही थी।
देखते ही देखते घड़ी में 6:30 बज चुके थे अभी भी अंकित गहरी नींद में सो रहा था चादर के अंदर मां बेटे दोनों पूरी तरह से निर्वस्त्र अवस्था में थे,,,, सुगंधा को अपनी गांड के छेद में हल्का-हल्का दर्द महसूस हो रहा था इसका कारण वह अच्छी तरह से जानती थी वह जानती थी उसके बेटे का लंड कोई साधारण लंड नहीं था जिसकी वजह से उसे अपनी गांड के छेद में दर्द महसूस हो रहा था इतना तो बुरे में डलवाने पर भी दर्द नहीं हुआ था। वह धीरे से बिस्तर पर से नीचे उतरी और आईने में अपने आप को देखने लगी नग्न अवस्था में वह रूप की रानी लग रही थी अपनी कमर पर हाथ रखकर अपने बदन को इधर-उधर घूमाकर अच्छी तरह से देख लेने के बाद वह बाथरूम के अंदर घुस गई,,,, और सौच करने लगी अब उसे एहसास हो रहा था कि वाकई में गांड मराने में कितना दर्द होता है रात को तो उसे भी बहुत मजा आ रहा था लेकिन इस समय सौच करते समय उसके गांड में कुछ ज्यादा ही दर्द हो रहा था,,,, जैसे तैसे करके वह काम निपटा ली,,, लेकिन अब उसे दर्द ज्यादा कर रहा था चलने में भी तकलीफ हो रही थी। वह नहा कर अपने नंगे बदन पर टावर लपेटकर बाहर आ गई तब तक अंकित भी जा चुका था अपनी मां को टावल में देखकर वह मुस्कुराते हुए बोला,,,।
गुड मॉर्निंग मम्मी,,,, कैसी गुजरी रात मजा आ गया ना,,,।
हरामजादे मजा तो आ गया लेकिन तूने मेरी गांड की हालत खराब कर दिया है।
क्यों क्याहो गया,,,,?
गांड में बहुत जोर का दर्द हो रहा है चला भी नहीं जा रहा है,,,,।
कोई बात नहीं शुरू शुरू में ऐसा होता है दो-चार घंटे में एकदम सही हो जाएगा रात को फिर गांड मरवाने लायक हो जाओगी,,,।
इस बारे में अब सोचना भी मत,,,, अब तो तुझे गांड के छेद पर हाथ भी लगाने नहीं दूंगी,,,,
यह बात है,,, चेहरे से मत करना नहीं तो अभी फिर से पटक कर गांड मार लूंगा,,,,।
तुझे क्या मैं मजाक कर रही हूं सच में बहुत दर्द कर रहा है,,,,।
अच्छा कोई बात नहीं मेरी जान कुछ दिन तक उस छेंद के बारे में सोचूंगा भी नहीं।
चल जाकर तु भी नहा ले,,
ठीक है,,, (इतना कहकर हुआ अभी बाथरुम में चला गया और थोड़ी देर में नहा कर बाहर आ गया,,,, फोन करके दोनों ने नाश्ता मंगवाया,,,, नाश्ता करने के बाद सुगंधा फिर से बिस्तर पर लेट कर आराम करने लगी,,,, उसे सच में बहुत दर्द कर रहा था ठीक से चला नहीं जा रहा था,,, जिसकी वजह से अभी उसे कहीं जाने की इच्छा नहीं हो रही थी अंकित भी वहीं बैठ रहा और अपनी मां से बातचीत करता है देखते ही देखते फिर से दोनों सो गए तकरीबन 11:00 बजे फिर से अंकित की आंख खुली तो वह देखा उसकी मां गहरी नींद में सो रही थी,,,, वह धीरे से उठाकर अपनी मां को बिना बताए तैयार होकर कमरे से बाहर निकल गया क्योंकि आज उसे उसे अनजान औरतों से मिलना था जिसने उसे लंच के लिए बलाई अपने होटल से निकाल कर वह सड़क पर चहल कदमी करता हुआ आगे बढ़ गया,,, प्रचंड गर्मी के महीने में भी यहां पर मौसम खुशनुमा था या देखकर अंकित को भी हैरानी हो रही थी लेकिन उसे बहुत अच्छा लग रहा था इस तरह का मौसम उसके शहर में बहुत कम ही देखने को मिलता है,,, आते जाते लोगों से अच्छे लग रहे थे ज्यादातर लोग बाहर के ही थे,,, अंकित की नजर खूबसूरत लड़की हो पर काम खूबसूरत औरतों पर ज्यादा चली जा रही थी क्योंकि उसका मां अक्सर औरतों पर ज्यादा जाता था खास करके अंकित को औरतों की बड़ी-बड़ी गांड आकर्षित करती थी साड़ी में उभार ली हुई बड़ी-बड़ी चूचियां उसके मुंह में पानी ला देती थी और यही हाल था जब वह चाय पीते हुए उसे अंजान औरत को देखा था पल भर में ही उस औरत को भोगने का ख्याल उसके मन में आ गया था,,, और उसकी किस्मत भी इतनी तेज थी कि आज उसके साथ खाना खाने के लिए जा रहा था वैसे तो उसे पक्का यकीन नहीं था कि खाना खाने के बाद उसे औरत के साथ उसका कोई रिश्ता बन पाएगा या नहीं लेकिन फिर भी मन में उम्मीद की किरण बनी हुई थी और यही उम्मीद की किरण लिए हुए वह उसे औरत से मिलने के लिए चला जा रहा था।
उसे औरत ने जिस होटल के बारे में बताया था उसे होटल के सामने अंकित खड़ा हो चुका था पहले इधर-उधर देखने के बाद जब उसे वह औरत कहीं दिखाई नहीं दी तो वह होटल के अंदर प्रवेश करने लगा और उसकी किस्मत अच्छी थी कि सामने ही टेबल पर बैठकर चाय पीते हुए वह औरत उसे दिखाई दे गई और उसे औरत को देखते ही उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और यही हाल उसे औरत का भी था अंकित को देखते ही उसके चेहरे पर मुस्कान करने लगी थी शायद वह अंकित का ही इंतजार कर रही थी,,,, वह और जल्दी से अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और हाथ दिखा कर उसे अपनी तरफ बुलाने लगी अंकित को पक्का यकीन हो गया कि वह भी उसका इंतजार कर रही थी उसके पास जाते ही वह उसे नमस्ते किया और पास में पड़ी कुर्सी पर बैठ गया,, होटल के रेस्टोरेंट में काफी भीड़ थी क्योंकि यह खाने का समय था और सब लोग अपने-अपने पसंद का खाना खा रहे थे,,,, मुस्कुराते हुए उसे अंजान औरत ने अंकित से बोली।
मुझे तो उम्मीद नहीं था कि तुम इधर आओगे,,,
आटा कैसे नहीं आपने खाने के लिए बुलाई थी और मुझे भूख लगी और आपकी याद आ गई,,,।
(अंकित की हाजिर जवाबी सुनकर वह औरत मुस्कुराने लगे और बोली)
बड़े हाजिर जवाबी हो,,
ऐसा कुछ भी नहीं है बस आपको देखकर इस तरह के जवाब निकल जा रहे हैं।
यह बात है,,,, चलो अच्छा बताओ क्या खाओगे तुम्हारी पसंद का खाना मंगाते हैं,,,,
नहीं नहीं ऐसा कैसे चलेगा आखिरकार अपने आमंत्रित दिया है तो आपके ही पसंद का मैं खाऊंगा मैं अपनी तरफ से कुछ भी नहीं बताने वाला कि मैं क्या खाना चाहता हूं आप जो कुछ भी खिलाओगी मैं खा लूंगा,,।
बात करने में तो उस्ताद हो,,,, बातों में कोई तुम्हें हर नहीं सकता,,,। अच्छा चलो मुझे जो अच्छा लगता है वही मंगा लेती हूं लेकिन यहां नहीं,,,(कुर्सी पर दोनों हाथ रखकर इधर-उधर देखते हुए वह बोली)
फिर कहां,,,,?
यहां काफी भी है मेरे कमरे में ही चलते हैं वहां आराम से बात करते हुए खाना खाएंगे यहां पर ठीक से बात नहीं कर सकते देख नहीं रहे हो शोर शराब कितना हो रहा है,,,।
आप बात तो सही कह रही हो तो चलिए फिर आपके कमरे पर ही चलते हैं,,,,।
(इतना कहकर दोनों उठकर खड़े हो गए वह अनजान औरतों जल्दी से काउंटर पर गई और अपना आर्डर बोलकर अंकित को साथ लेकर अपने कमरे की तरफ जाने लगी वह सीढ़ियां चढ़ रही थी कई हुई साड़ी में उसकी मस्त भराव दार गांड अंकित के होश उड़ा रही थी अंकित उसकी बड़ी-बड़ी गांड को देखा ही रह गया था जैसे-जैसे वह कदम उठाकर सीडीओ पर रख रही थी वैसे-वैसे उसकी भारी भरकम गांड का कटाव उसके लंड की अकड़ को बढ़ाना शुरू कर दिया था,,,, अंकित के मुंह में पानी आ रहा था देखते ही देखते दोनों होटल के कमरे के पास पहुंच चुके थे। अंकित के मन में लहर उठ रही थी,, उसे अंजान औरत ने कमरे का दरवाजा खोली और कमरे में प्रवेश करने लगी पीछे-पीछे अंकित भी कमरे में प्रवेश कर गया,,, उसने दरवाजा बंद कर दी,,,, अंकित को इस होटल का कमरा भी काफी खूबसूरत लग रहा था हर एक समान बड़े सलीके से रखी हुई थी किंग साइज बेड था दो कुर्सियां थी एक मैज रखी हुई थी और एक खूबसूरत खिड़की थी जिस पर परदे लगे हुए थे और उसे औरत ने पर्दे को खोलकर कुदरत धूप को कमरे में आने का आमंत्रण दे दी और कुर्सी पर बैठ गई खाली पड़ी कुर्सी पर अंकित भी बैठ गया और दोनों आपस में बातचीत करने लगे,,,, अंकित और वह अनजान औरत दोनों आमने-सामने बैठे हुए थे,,, मैज पर एक छोटा सा गुलदस्ता रखा हुआ था,,,।
बातचीत के दौरान उस औरत ने बताया कि वह बैंक में काम करती है कल वह अपने बारे में पूरी जानकारी नहीं दि थी लेकिन आज सब कुछ बताने लगी थी,,,, अंकित उसकी बातों को कम उसके खूबसूरत चेहरे पर ज्यादा ध्यान दे रहा था लाल-लाल भरे हुए होंठ देखकर ही अंकित के मुंह में पानी आ रहा था और वह उसके लाल-लाल होठों को अपने मुंह में भरकर उसके होठों का रसपान करने के लिए तड़प रहा था,,, आसमानी रंग की साड़ी में वह आसमान से उतरी हुई अप्सरा लग रही थी,,, लॉ कट ब्लाउज में इसकी भारी भरकम चूचियों की गहरी लकीर किसी झरने की घाटी से काम नहीं लग रही थी जिसमें अंकित का मन डूब जाने को कर रहा था। अंकित की नजर बार-बार उसकी चूचियों पर चली जा रही थी जिसका एहसास उसे अंजान औरत को हो रहा था और वह बार-बार अपनी साड़ी को दुरुस्त करने की कोशिश भी कर रही थी लेकिन पारदर्शी साड़ी में वह ज्यादा कुछ दुरुस्त करने में सामर्थ नहीं थी और उसे इस बात से हैरानी भी हो रही थी कि उसके बेटे की उम्र का लड़का उसकी चूचियों की तरफ प्यासी नजरों से देख रहा था। लेकिन इस हैरानी के साथ-साथ उसे अपनी जवानी पर गर्व भी महसूस हो रहा था क्योंकि वह तीन बच्चों की मां थी और तीनों जवानी की दहाने पर कदम रख चुके थे उनमें से एक का तो दो-तीन महीने बाद विवाह तय करना था मतलब की 3 महीने बाद वह सास बन जानी थी और इसके बावजूद भी एक जवान लड़का उसे प्यासी नजरों से घर रहा था भला इससे बड़ी गर्व की बात उसके लिए क्या हो सकती थी
Anjan auratki nangi jawani
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अंकित भी अपने बारे में सब कुछ उसे बताता चला गया लेकिन सच्चाई कम झूठ ज्यादा था वह अपने बारे में कुछ भी सच नहीं बोल रहा था क्योंकि वह अपने चरित्र को परदे मे हीं रखना चाहता था उसने उसे औरत को अभी नहीं बताया था कि यहां पर वह अपनी मां के साथ घूमने आया है क्योंकि,, वह नहीं चाहता था कि वह औरत उसे शंका की नजर से देखें,,,, बातचीत का दौर चल ही रहा था कि तभी दरवाजे पर दस्तक होने लगी और दस्तक की आवाज सुनकर वह औरत अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और मुस्कुराते हुए बोली,,,)
लगता है खाना आ गया,,,,,(और इतना कहकर वह दरवाजे की तरफ कदम आगे बढ़ा दी,,, दरवाजा खोली तो सामने बैटरी था जो खाना लेकर खड़ा था और मुस्कुरा था वह कमरे में दाखिल हुआ मैच पर खान की प्लेट रखकर औपचारिकता निभा कर वहां से चला गया,,,,, खाना काफी मसालेदार दिखाई दे रहा था साथ में चपाती थी सलाद था और लस्सी का बड़ा-बड़ा गिलास भी था लेकिन साथ में,,, बियर की बोतल भी थी जिसे देखकर अंकित को हैरानी हुई और वह बियर की बोतल की तरफ देखकर उसे औरत की तरफ देखने लगा जो की कुर्सी पर बैठते हुए मुस्कुराते हुए बोली,,,)
चिंता मत करो यार ज्यादा कुछ नहीं ठंडी बीयर है कभी कबार जब मैं इस तरह से घूमने जाती हूं तो अकेले रहती हूं तो पी लेती हूं बड़ा अच्छा लगता है।
कोई तुम्हें खत नहीं,,,।
किसी को पता ही नहीं है तो रहेगा क्या मैं तुमसे कहीं तो घर पर कभी नहीं पीती बाहर कहीं जाती हूं तभी और अकेले रहती हूं तभी अपना यह शौक पूरा कर लेती हूं,,,,
नशा होता होगा।
ज्यादा खास नहीं बस हल्की सी खुमारी छाने लगती है,,,,।
तुम भी ले सकते हो थोड़ा सा,,,।
नहीं नहीं बिल्कुल नहीं,,,,,।
चलो कोई बात नहीं तो तुम लस्सी पी लेना,,,।
(और इतना कहकर दोनों खाना ,खाना शुरू कर दिए,,, साथ में बातचीत का दौर भी शुरू हो चुका था अंकित को उसे औरत से बातचीत करने में बड़ा मजा आ रहा था वह औरत भी बड़ी खुश मिजाज थी,,, बात करते हुए बीच-बीच में वह बियर के केन को मुंह से लगाकर घूंट भर भर कर बियर भी पी रही थी वैसे तो अंकित को बड़ा अजीब लग रहा था लेकिन वह औरत जिस अंदाज से पी रही थी कुछ पल के लिए तो उसका भी मन मचल उठा कि वह भी एक बार टेस्ट करके देखे लेकिन फिर अपने मन को उसने मना लिया,,,,,, अंकित धीरे-धीरे लस्सी पी रहा था खाना खा रहा था,,,,, उस औरत ने तो लस्सी नहीं पी लेकिन जब देखी थी अंकित की लस्सी खत्म हो चुका है तो वह खुद अपनी लस्सी उसकी तरफ आगे बढ़ा दी,,,, पहले तो अंकित इनकार करता रहा क्योंकि वह उसके हिस्से की लस्सी थी वह उसे बार-बार उसे पीने के लिए कहता था लेकिन वह मना कर रही थी और वह अपने हिस्से की लस्सी अंकित को पिलाना चाहती थी और अंकित का मान रखते हुए वह लस्सी के गिलास को अपने होठों से लगाकर बस एक घूंट लस्सी पीकर वह अंकित की तरफ ग्लास बढ़ाते हुए बोली,,,)
लो बस तुम्हारी बात मान ली लेकिन अब तुम्हें भी मेरी बात माननी नहीं होगी लोग यह भी लस्सी पी जाओ क्योंकि मैं बियर पी रही हूं ना इसलिए लस्सी नहीं पी पाऊंगी,,,,।
(उस औरत का अंदाज देखकर और उसकी झूठी लस्सी को खुद पीने के बारे में सोचकर अंकित का लंड खड़ा होने लगा था वह मदहोश हो रहा था वाकई में वह औरत काफी दिलचस्प खूबसूरती के साथ-साथ काफी सुलझी हुई भी थी अंकित को इस तरह की औरतें काफी पसंद थी,,,, उस औरत की बात मानते हुए मुस्कुरा कर अंकित उसके हाथ से लस्सी का क्लास ले लिया लेकिन इस दौरान उसकी उंगली उसे औरत की उंगली से स्पर्श हो गई जिससे अंकित के बदन में हलचल सी मच गई और यह ऐसा शायद उसे औरत के तन बदन में भी हो गया वह भी शर्म के मारे अपनी नजरों को नीचे झुका ली,,,, अंकित उसकी झूठी लस्सी को पीने लगा इस बात का अहसास होते ही उसे अनजान औरतों के तन बदन में हलचल सी होने लगी,,,,, क्योंकि वह सोची नहीं थी कि उसकी झूठी लस्सी वह पिएगा लेकिन बियर की खुमारी उसकी आंखों में उसके दिलों दिमाग पर छाने लगी थी और न जाने क्यों उसे इस समय एक जवान लड़के के सामने उत्तेजना महसूस होने लगी थी। बातचीत के दौरान उसने अपना नाम भी बताइ अनामिका,,,, जिसे सुनकर अंकित बोला,,,)
वह आपका नाम तो बेहद खूबसूरत है अनामिका मैं पहली बार इस तरह का नाम सुन रहा हूं मुझे बहुत अच्छा लगा आपका नाम और मेरा नाम अंकित है,,,।
अंकित,,,,, वाकई में तुम्हारा नाम में काफी गहराई है तुमसे मिलने के बाद किसी के मन में भी तुम अंकित हो जाओगे ऐसा तुम्हारा चरित्र है,,, मुझे भी तुम्हारा नाम बहुत अच्छा लगा,,,।
(खाना खत्म हो चुका था दोनों ने पेट भर के खाना खाया था लेकिन इस समय अंकित से ज्यादा खुमारी उसे अंजान औरत की आंखों में और उसके बदन में छाई हुई थी वह धीरे से अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और अंकित से बोली,,,)
तुम यही बैठो मैं पेशाब करके आती हूं,,,,।(बेझिझक बिना शर्माए उसऔरत ने पेशाब करने वाली बात बोली थी जिसकी अंकित को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी लेकिन उसके मुझे पेशाब करने वाली बात सुनकर उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा हो गया था बाथरूम भी ठीक कुर्सी के पीछे ही था जैसा कि उसके होटल के कमरे में था वह औरत बाथरूम का दरवाजा खोले और बाथरूम के अंदर घुस गई दरवाजा तो उसने बंद की लेकिन दरवाजे की कड़ी नहीं लगे जो की दरवाजा अपने आप ही हल्का सा फिर से खुल गया अंकित सो रहा था कि दरवाजा बंद हो गया इसलिए दरवाजे की तरफ अपने सर घूमाकर देखने लगा था लेकिन उसकी हालत तब खराब हो गई जब देखा कि दरवाजा तकरीबन आधा फीट जितना खुल चुका था,,, और वह औरत उसे साफ दिखाई दे रही थी,,, अब अंकित के मन में गुदगुदी होने लगी वह औरत अपने ही आप में मस्त थी उसे यह पता भी था कि नहीं के दरवाजा खुला है या बंद है वह अपनी साड़ी दोनों हाथों से पकड़ कर ऊपर की तरफ उठाने लगी थी,,, अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि उसे यह नजारा देखना चाहिए कि नहीं देखना चाहिए बड़े कशमकश में उसका मन भरा पड़ा था,,,, क्योंकि उसे औरत के मन में क्या चल रहा है इस बात को अंकित नहीं जानता था,,,, लेकिन अंकित तो अंकित था औरतों के मन में जगह बनाना उसे अच्छी तरह से आता था,,,, अगले पल के खूबसूरत नजारे को देखे बिना उसका मन मानने वाला भी नहीं था। बाथरूम के अंदर वह औरत का मुंह अभी दरवाजे की तरफ था,,,,, अंकित जानता था कि ईस अवस्था में अगर वह बैठेगी तो उसे ज्यादा कुछ खास दिखाई नहीं देगा,,,, क्योंकि वह कुर्सी पर बैठा हुआ था और वह पेशाब करने के लिए नीचे बैठेगी, साड़ी की वजह से दोनों टांगों के बीच की उसकी पतली दरार दिखाई देने वाली नहीं थी लेकिन फिर भी अंकित के लिए इतना ही बहुत था कि वह उसकी आंखों के सामने बैठकर पेशाब करने जा रही थी।
अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था,,, उम्र दराज होने के बावजूद भी पल की खूबसूरती लिए हुए थी वह, मर्दों को अपनी तरफ आकर्षित करने का हर एक अंग लाजवाब और उठाव लिए हुए था। वह साड़ी अपने हाथों में लेकर धीरे-धीरे उठा रही थी आंखों में अजीब सी खुमारी छाई हुई थी,,, तभी अचानक वह नजर उठाकर अंकित की तरफ देखने लगी अंकित की नजर उसकी नजर से मिल गई दोनों की नजरे आपस में टकराई अंकित तो घबरा गया लेकिन वह मुस्कुरा दी,,,, उसकी मुस्कुराहट अंकित के लिए हरी बत्ती का संकेत था अंकित मन ही मन एकदम से प्रसन्न हो गया क्योंकि उसकी मुस्कुराहट साफ बता रही थी कि वह क्या चाहती है और मुस्कुराने के बाद वह तुरंत दूसरी तरफ घूम गई साड़ी को इस तरह से पकड़े हुए और उनकी समझ गया कि आप उसे क्या दिखाने वाला है उसकी हालत है तुमसे खराब हो गई उसका मन एकदम से मदहोश होने लगा तकरीबन तीन फीट की दूरी पर ही बाथरूम के अंदर एक जवान खूबसूरत औरत हालांकि जवान तो नहीं कह सकते लेकिन जिस तरह से उसकी कद काठी और बदन की बनावट थी जवान औरतों को पानी पिला दे इस तरह की उसकी जवानी निखरी हुई थी,,,, वह अब पेशाब करनेवाली थी,,,, अंकित की जगह कोई भी होता तो उसका भी मन मदहोश हो जाता उसे औरत को पाने के लिए उसका मन मचल उठता और यही अंकित का भी हाल हो रहा था,,,, अंकित का दिल जोरो से धड़कने लगा पहले उसे औरत का मुंह उसकी तरफ था लेकिन अब उसकी पीठ उसकी तरफ हो चुकी थी,,, अंकित समझ गया था कि बियर का नशा उसकी आंखों में पूरी तरह से मदहोशी का रस घोल रहा था वह इस बात से अनजान बिल्कुल भी नहीं है कि बाथरूम का दरवाजा खुला हुआ है वरना उसे देखकर मुस्कुराती नहीं।
Anjaan aurat peaab karti huyi
साड़ी धीरे-धीरे उठने लगी थी ऐसा लग रहा था कि जैसे खूबसूरत नजारे के ऊपर से पर्दा उठ रहा हूं ताकि दर्शक गण उसे अच्छी तरह से देख सके देखते ही देखते उसकी मोटी मोटी जांघें उजागर हो गई,,,, मक्खन जैसी मोटी मोटी केले के तने की जैसी जांघों को देखकर अंकित का मन मचाने लगा उसका ईमान डोलने लगा,,, सांसों की गति उसके काबू में बिल्कुल भी नहीं थी यही हालत उस औरत की भी हो रही थी उसकी सांसों की गति भी भारी चल रही थी,,, देखते देखते वह अपनी साड़ी को अपनी कमर तक उठाती और कमर तक साड़ी उठते ही उसकी भारी भरकम गोलाई लिए हुए गांड मरुन रंग की पेंटी में कैद नजर आने लगी,,,, और वह अपनी मरुन रंग की पेंटी को दोनों हाथों से पकड़ कर नीचे की तरफ सरकाने लगी,,, अंकित का मन कर रहा था किसी समय बाथरूम में घुस जाए और अपनी मनमानी कर ले लेकिन अभी भी वह अपने आप को संभाले हुए था अपने मां पर काबू किए हुए था क्योंकि उसे पक्का यकीन नहीं था कि वह क्या चाहती है उसे ऐसा लग रहा था कि शायद हो सकता है कि बियर के नशे में हुआ ऐसा कर रही हो और अगर वह अंदर जाएगा तो अगर उसे ऐसा कुछ महसूस ना हो और वह शोर मचा दे तब तो लेने के देने पड़ जाएंगे इसलिए वह अपने मन को नियंत्रण में रखकर वहीं बैठे रहकर उस नजारे को देखने लगा,,, पेंटी धीरे-धीरे उतर रही थी,,,, घुटनों तक आने के बजाय वह पूरी तरह से अपनी टांगों में से पेंटी को उतार कर एक तरफ रख दी थी साड़ी के अंदर वह पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी,,,, यह सब अंकित को पूरी तरह से हैरान कर दे रहा था कि आखिरकार उसने अपनी पैंटी पूरी तरह से निकल क्यों दी,,,,। फिर देखते ही देखते हो नीचे बैठ गई पेशाब करने के लिए उसकी गोल-गोल नंगी गांड मक्खन जैसी गोराई लिए हुए पूरे बाथरुम में अपनी आप अभी कह रही थी और अंकित की आंखों की चमक के साथ-साथ उसकी वासना को भी बढ़ा रही थी।
Anjan aurat ko pesaab karta hua dekhkar ankitki haalat
अगले ही पल उसकी बुर से सिटी की मधुर आवाज सुनाई देने लगी जिसका मतलब साथ था कि उसके बुरे से पेशाब की धार फूट रही थी अंकित यह मधुर ध्वनि सुनकर पूरी तरह से मचल उठा मदहोश हो गया उसका लंड इस कदर कड़क हो गया कि मानो जैसे पेंट फाड़ कर बाहर आ जाएगा,,, अंकित का दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था,,,,, और वह औरत अपने हाथ को अपनी नंगी गांड पर रखकर हल्के हल्के सहलाने लगी और नजर घूमर अंकित की तरफ देखने लगी एक बार फिर से दोनों की नजर आपस में टकराई लेकिन इस बार दोनों की आंखों में वासना दिखाई दे रहा था शर्म बिल्कुल भी नहीं थी,,, दोनों की आंखों में मदहोशी का नशा छाया हुआ था दोनों एक दूसरे की आंखों में डुब जाना चाहते थे,,,, वह अपनी गांड को सहलाते हुए पेशाब कर रही थी और अंकित को अपनी निगाहों से घायल कर रही थी,,, उसकी इस अदाकारी मदहोशी भरी हरकत से अंकित चारों खाने चित हो गया था,,, उसे अब समझ में आ गया था कि वह औरत क्या चाहती है,,, फिर भी वह पहला मौका उस औरत को ही देना चाहता था। दोनों के बीच नैन मटक्का का पूरी तरह से जारी था,,,, देखते ही देखते वह औरत पेशाब कर चुकी थी,, वह धीरे से उठकर खड़ी हो गई,,,, और फिर बाथरूम से बाहर आ गई,,,, वह मुस्कुरा रही थी उसकी आंखों में चमक दिखाई दे रही थी और यह चमक कोई आम चमक रही थी बल्कि वासना की चमक थी मदहोशी की चमक थी ,किसी को पाने की लालसा थी।
अंकित उसको आजमाना चाहता था देखना चाहता था कि वह क्या करती है इसलिए अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया और बोला,,,।
खाना खिलाने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया अब मुझे चलना चाहिए,,,,,।
बेवकूफ हो क्या,,,,?
बेवकूफ मैं कुछ समझा नहीं,,,!(आश्चर्य जताते हुए अंकित बोला,,,)
इसमें तुम्हारा कोई दोस्त नहीं है तुम्हारी उम्र का दोस्त है कि तुम कुछ समझ नहीं पा रहे हो अगर थोड़े और बड़े होते तो शायद समझ गए होते,,,।
(अंकीत समझ गया था कि वह किस बारे में बात कर रही है,,, लेकिन फिर भी वह कुछ बोला नहीं,,, और शायद उसने अच्छा ही किया कुछ ना बोलकर क्योंकि वह एकदम से अंकित के कार्यवाही और उसकी कमर में हाथ डालकर अपनी तरफ खींच कर उसके होठों पर अपने होंठ रख दी और एकदम से मस्त हो गई,,,, अंकित तो पहले से ही एकदम उत्तेजित होता वाला था उसे औरत की हरकत को देखा करो अभी कहां पीछे हटने वाला था वह भी तुरंत अपना एक हाथ उसकी कमर में डाला उसे भी कस के अपनी तरफ खींच लिया पेट में बना तंबू साड़ी के ऊपर से ही उसकी बुर पर दस्तक देने लगा जिसका एहसास उसे पागल बनाने लगा और साथ ही अंकित उसके लाल-लाल होठों को अपने होठों में भरकर उसके होठों का रसपान करने लगा और उसकी चिकनी कमर को दोनों हाथों से कस के पड़कर मसलने लगा,,,,, अपनी बुर पर साड़ी के ऊपर से ही लंड की ठोकर को महसूस करके वह एकदम से मदहोश होने लगी और अपनी कमर को गोल-गोल घूमाकर उस एहसास को और ज्यादा बढ़ाने लगी। अंकित पागलों की तरह उसके होठों का रस पीते हुए,,, अपने दोनों हाथों को उसके गोलाकार नितंबों पर लाकर जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया उसकी हरकत से वह औरत और ज्यादा मदहोश होने लगी,,,,, वह तुरंत अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर पेंट के ऊपर से उसके लंड को पकड़ के और उसकी मोटाई और लंबाई के एहसास को महसूस करके वह बोली,,,)
बाप रे तुम तो पहले से ही तैयार हो गए हो,,,,।
क्या करूं तुम्हारी बड़ी-बड़ी गांड देखकर मेरा लंड बेकाबू हो गया,,,,(अंकित एकदम से अश्लील शब्दों में बात करते हुए बोला,,,)
मेरा नाम अनामिका है मुझे नाम लेकर बुलाओ,,,,।
ओहहह अनामिका मेरी जान,,,,,।
तुम तो बहुत चालाक हो मैं तो तुम्हें बुद्धू समझ रही थी,,,,।
तुम्हारी गांड देखकर जो बुद्धू बना रहेगा वह सच में बुद्धू ही होगा,,,, तुम्हारा नखरा देखकर ही नहीं समझ गया था कि तुम्हारी बेलगाम जवान को लगाम की जरूरत है,,,,।
और वह लगाम तुम्हारे पास है,,,(इतना कहने के साथ ही हुआ औरत एकदम से घुटनों के बल बैठ गई और अंकित के पेंट का बटन खोलने लगी अंकीत पूरी तरह से मस्त हुआ जा रहा था। वह औरत खेली खाई थी कब क्या करना है उसे अच्छी तरह से मालूम था इसलिए वह पल भर में ही उसकी पेंट को खोलकर एकदम घुटनों तक नीचे खींच दी और उसके दमदार लंड को देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई और वह हैरान होते हुए बोली,,,)
बाप रे इतना मोटा और लंबा मैं तो पहली बार देख रही हूं,,,,। यह तो मेरी बुर फाड़ देगा,,,,।
पहली बार देख रही हो क्या ऐसा,,,।
मैं झूठ नहीं बोलूंगी कसम से अपनी जिंदगी में मैं पहली बार इतना दमदार लंड देख रही हूं आज तो मजा ही आ जाएगा,,,(इतना कहने के साथ ही वह बिना कुछ सोचे समझे एकदम से लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी अंकित एकदम से मत हो गया अंकित को समझते देर नहीं लगी कि यह औरत कितनी तेज है वह पूरी तरह से बेहतर में बन चुकी थी कल तक वह जिसे सीधी शादी औरत समझ रहा था वह अंदर से पूरी तरह से रंडी थी और सही मायने में देखा जाए तो एक औरत रंडी बनने के बाद ही मर्द को असली मजा देती है,,,, आइसक्रीम कौन की तरह वह गपा गप अपने गले तक अंकित के लंड को लेकर चूस रही थी,,, उसकी चुसाई से अंकित मदहोश हुआ रहा था,,, आंखें बंद हो चुकी थी वह छत की तरफ देखते हुए अपनी कमर को होले होले से आगे पीछे कर रहा था,,,, इस तरह से वह उसे औरत के मुंह को छोड़ रहा था और वह औरत भी अपने लाल-लाल होठों का छल्ला बनाकर होठों का कसाव लंड पर बढ़ा रही थी जिससे अंकित का मजा बढ़ता जा रहा था,,,।
सहहहहह आहहहहह,,,,, अनामिका तुम तो बहुत मस्त हो आज तक ऐसा किसी ने नहीं चूसा तुम तो पूरी खिलाड़ी हो आज बिस्तर पर मजा आएगा आज कोई टक्कर की खिलाड़ी मिली है,,,,ऊममममम आहहहहह पूरा गले तक ले लो,,,आहहहहह बस ऐसे ही मेरी जान,,,,ऊमममममममम,,आहहहहह,,,,,सहहहहहह कसम से तुम बहुत मस्त हो,,,,,ऊमममममममम,,,,
इसी तरह से अंकित मजा लेते रहा पूरे कमरे में सिर्फ इस समय अंकित किसी शिसकारी गुजारी थी वह औरत उसे पूरी तरह से मदहोशी के कगार पर ले आई थी,,,,,, लंड इतना मोटा और लंबा था कि गले तक लेकर उसे औरत की भी हालत खराब हो जा रही थी उसकी आंखों से भी पानी टपक जा रहा था लेकिन फिर भी वह छोड़ने को तैयार नहीं थी शायद वह सच ही कह रही थी कि इतना दमदार लंड उसने अपने जीवन में आज तक नहीं देखी थी इसलिए इतना खेल रही थी,,,, कुछ देर तक यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहा फिर वह खुद ही धीरे से लंड को अपने मुंह से बाहर निकाल दी,,, दोनों की हालत खराब थी दोनों की सांस ऊपर नीचे हो रही थी अंकित उसके दोनों हाथ पकड़ कर उसे कड़ी किया और फिर उसे एक बार फिर से कसके अपनी बाहों में भरकर उसके होठों को चूसना शुरू कर दिया। और धीरे से उसके ब्लाउज का बटन खोलने लगा देखते ही देखते उसे औरत के ब्लाउज के सारे बटन खोलकर वह ब्लाउज को अलग कर दिया जिस रंग की वह चड्डी पहनी थी उसी रंग की ब्रा भी पहनी थी ब्रा के ऊपर से ही अंकित उसकी दोनों चूचियों को जोर जोर से दबा रहा था मसल रहा था उस औरत को बहुत मजा आ रहा था,, बरसों के बाद उसे इंसानियत प्राप्त हो रहा था,,,, कुछ देर इसी तरह से दबाने के बाद अंकित एकदम से उसकी बाहों को पकड़ कर उसे दूसरी तरफ घुमा दिया और उसकी पीठ को अपनी छाती से लगाकर कैस के दोनों चूचियों को दबा दबा कर फिर से उसे मजा लेने लगा और फिर ब्रा का होकर खोलकर उसकी ब्रा भी उसके बदन से अलग कर दिया कमर के ऊपर से वह पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी उसकी नंगी चूचियां खरबूजे की तरह बड़ी-बड़ी थी लेकिन उम्र के हिसाब से हल्की सी लड़की हुई थी फिर भी इस उम्र में इस तरह की कड़क चूचियां वाकई में एक औरत के लिए गर्व की बात थी।
अनामिका मेरी रानी तुम्हारी चूचिया कितनी बड़ी-बड़ी है इसे दबाने में तो बहुत मजा आ रहा है,,,।
मुंह में लेकर पियोगे तो और ज्यादा मजा आएगा,,(मदहोशी भरी आवाज में वह बोली तो अंकित से रहने क्या वह तुरंत फिर से उसे दूसरी तरफ घूमा लिया, जिससे उसकी चूचीया उसकी आंखों के सामने हो गई और अंकित बिना देर किए उसकी दोनों चूचियों को बारी बारी से अपने मुंह में भरकर पीना शुरू कर दिया,,,,, अब सिसकारी लेने की बड़ी उसे औरत की थी,,,, अंकित की हरकत से स्तन मर्दन से स्तनपान से हो पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी।)
सहहहहह आहहहहह,,,,,ऊमममममममम,ओहहहहह मेरे राजा और जोर-जोर से दबा दबा कर पी,,,ऊमममममम,,,,,, बहुत मजा आ रहा है,,,,आहहहहहहहह,,,,,,(अंकित के बालों को सहलाते हुए उसका हौसला बढ़ाते हुए वह बोल रही थी और अंकित दोनों चूचियों पर टूट पड़ा था,,,,, खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी चूचियों को पीकर वह पूरी तरह से मस्त हो चुका था मदहोश हो चुका था,,,,, कुछ देर तक अंकित इसी तरह से उसकी दोनों चूचियों की सेवा करता रहा और अपने हाथ से उसके कमर में बड़ी साड़ी को खोलना रहा देखते-देखते वह उसकी साड़ी को खोल कर साड़ी को नीचे फर्श पर फेंक दिया था,,,, इस समय कमरे के अंदर वह केवल पेटीकोट में थी और अंकित जानता था कि पेटिकोट के अंदर उसने पेंटिं भी नहीं पहन रखी है,,,, अंकित खुद अपने पैरों के सहारे से अपनी पेंट निकाल दिया था,,,,, कमर के नीचे वह भी नंगा हो चुका था और वह औरत एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर के अंकित के नंगे लंड को पकड़ कर हिला रही थी उसकी गर्मी उसकी बुर को बार-बार पिघला रही थी,,,, अंकित से रहा नहीं जा रहा था उसकी चूचियों से खेलते खेलते अब वह उसे पुरी तरह से नंगी कर देना चाहता था,, उसकी ईच्छा अब उसे नंगी देखने को कर रही थी, इसलिए वह पेटिकोट की डोरी को पकड़कर खींच दिया,, जिससे उसकी कमर पर कसी हुई पेटिकोट की गिठान खुल गई लेकिन कमर से नीचे सरकी नहीं,, उसे नीचे सरकाने के लिए अंकीत को खुद ही अपनी ऊंगलियो का सहारा लेकर उसे कमर से ढीला कर दिया और फिर अपने हाथों से ही उसे नीचे की तरफ सरकारी लगा क्योंकि अपने आप पेटिकोट सरक कर उसके कदमों में गिरने वाला नहीं थी कारण था उसका उठाव लिया हुआ नितंब,, उसका उभारदार नितंब उसके पेटीकोट को एक खुंटे की तरह अटकाया हुआ था,,,, लेकिन अगले ही पल अंकित ने उसके पेटीकोट को भी उसके कदमों में गिरा दिया और वह पूरी तरह से नंगी हो गई,,,,।
बंद चारदिवारी के अंदर नग्नता औरत का प्रमुख गहना होता है,,, क्योंकि चारदीवारी के अंदर मर्द औरत के पहने हुए गहने नहीं बल्कि नग्नता का गहना देखना पसंद करता है,,, इसलिए पूरी तरह से उसे औरत को नंगी कर देने के बाद अंकित दो कदम पीछे हट गया और ऊपर से नीचे तक उसकी नंगी जवान को देखने लगा और देख के उसके मुंह से आह निकल गया क्योंकि तीन-तीन जवान बच्चों की मां होने के बावजूद भी उसके बदन की बनावट 30 साल की औरत को भी पानी भरवा दे इस तरह की थी,,,, अंकित उसकी नंगी जवान देखकर उसकी तारीफ किए बिना नहीं रह पाया।
ओहहहहह क्या बात है मैं आज तक तुमसे ज्यादा खूबसूरत औरत नहीं देखा नंगी होने के बाद तो तुम आसमान से उतरी हुई परी लग रही हो,,, कसम से आज तो मजा ही आ जाएगा,,,,।(अपने खड़े लंड को एक हाथ से पकड़ कर हिलाते हुए अंकित बोल तो उसकी हरकत और उसकी अश्लील बातों को सुनकर उसे औरत की बुर से पानी की बूंद अमृत की धार की तरह नीचे टपक गई,,,, यह देखकर अंकित के मुंह में पानी आ गया और वह उस औरत को धक्का देकर नरम नरम गद्दे पर गिरा दिया,,,,,, उस औरत को लग रहा था कि अब उसकी चुदाई होगी,,, इसलिए वह बेशर्मी दिखाते हुए अपनी दोनों टांगों को अपने आप ही खोल दी थी और उसका जी भर कर स्वागत कर रही थी लेकिन अंकित अपने बाकी के भी कपड़े को निकाल कर पूरी तरह से नंगा हो गया और घुटनों के बाल बिस्तर पर चढ़कर उसकी दोनों टांगों के बीच पहुंच गया उत्तेजना और मदहोशी के कारण उसे औरत का गला सूख रहा था जिसे वह अपने थुक से गिला करने की कोशिश कर रही थी,,,, सांसों की गति बढ़ती जा रही थी उसके पपैया जैसी बड़ी-बड़ी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह उसकी छाती पर लौट रही थी,,,, जिसे देखकर अंकित की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ रही थी,,,, माहौल पूरी तरह से गर्म हो चुका था,, अंकित की किस्मत बड़ी तेज थी उसे यहां आने से पहले नहीं मालूम था कि तो अनजान औरतों के साथ उसकी तरह से मुलाकात होगी उन्हें भोगने का सुख प्राप्त होगा,,, इसलिए अंकित अपनी किस्मत पर इतरा भी रहा था। अपनी आंखों से वह जी भर कर उसे औरत की नंगी जवान को देख लेना चाहता था इसलिए इस अवस्था में भी ऊपर से नीचे तक उसे घुर रहा था वैसे तो होगा औरत पूरी तरह से बेशर्म हो चुकी थी लेकिन जिस तरह से अंकित उसे निहार रहा था उसकी आंखों में शर्म दिखाई दे रहा था और अपनी आंखों को बंद कर ली थी अपनी ही बेटे के उम्र के लड़के के साथ वह अपनी नजर नहीं मिला पा रही थी।
खुली खिड़की से शीतल हवा पूरे कमरे को ठंडक प्रदान करने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसे औरत की गर्म कर देने वाली जवानी वातावरण की ठंडक को ऊष्मा में बदल दे रही थी,,, अंकित धीरे से उसकी दोनों टांगों के बीच से अपने दोनों हाथ को लेकर और उसकी कमर को पकड़ कर थोड़ा आगे की तरफ खींच लिया और दोनों हाथों के सहारे से उसके नितंबों को पड़कर उसे हल्का सा ऊपर की तरफ उठा लिया ताकि अपनी क्रिया को वह बड़े आराम से अंजाम तक ले जा सके और देखते ही देखते अपने प्यास होठों को उसकी कचोरी जैसी पूरी हुई बुर पर रख दिया वह औरत एकदम से मचल उठी और अपने आप ही उसकी कमर हल्के से ऊपर की तरफ उठ गई,, उसकी हरकत से साफ पता चल रहा था कि उसे कितना मजा आया था कितना मदहोशी उसके बदन पर छाई थी और अंकित पागलों की तरह उसकी गुलाबी बुर को चाटना शुरू कर दिया,,,, बुर की पतली दरार से बाहर जाती हुई गुलाबी पत्तियों को वह अपनी होठों के बीच लेकर पागलों की तरह चाट रहा था चूस रहा था और वह पत्तियां उसे औरत को अत्यधिक आनंद दे रही थी वह मचल रही थी तड़प रही थी दोनों हाथों से बिस्तर पर बिजी चादर को पड़कर अपनी उद्देश्य न को काबू में करने की कोशिश कर रही थी लेकिन वह तो बेलगाम घोड़ी थी बेलगाम जवानी की मालकिन थी,,, लाख कोशिश करने के बावजूद भी वह अपनी मदहोशी औरत देखने को काबू में नहीं कर पा रही थी जिसकी वजह से पूरे कमरे में उसकी सिसकारी की आवाज गुंज रही थी और अंकित थकी उसकी तड़प और सिसकारी की आवाज को सुनकर अपनी हरकतों को और ज्यादा बढ़ा दे रहा था जितना हो सकता था उतनी जीभ अंदर की तरफ डालकर उसकी मलाई को चाटने की कोशिश कर रहा था,,,। उसे औरत का बदन सुगंधा से थोड़ा सा ज्यादा था,,, उसकी चूचियों के साथ-साथ उसकी गांड भी थोड़ी सी बड़ी थी जिसका भोग लेने में अंकित को ज्यादा मजा आ रहा था।
सहहहहह आहहहहह ऊमममममममम,,,,ओहहहहह मेरे राजा तूने तो मुझे पागल कर दिया रे,,,,आहहहहहह कितना मजा आ रहा है बुर चटवाने में,,,,आहहहहहह और अंदर जीभ डाल दे मैं कभी सोचा नहीं थी कि इस उम्र में भी कोई मेरी बुर इस तरह से चाटेगा,,,,,आहहहहहहहह आजीवन का असली मजा ले रही हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही वह अपना हाथ आगे बढ़कर अंकित के सर पर रख दिया और उसके चेहरे का दबाव अपनी बुर पर बढ़ाने लगी उसकी हरकत से मस्त होकर अंकित पागलों की तरह उसकी बुर की चटाई करना शुरू कर दिया चाट चाट कर उसके गुलाबी बुर को लाल कर दिया था,,, उसका मदन रस अंकित के होठों से टपक रहा था उसकी नाक पर लग चुका था उसका चेहरा उसके बदन से भेज चुका था लेकिन फिर भी अंकित पीछे हटने का नाम नहीं ले रहा था शायद इस क्रिया में अंकित को भी ज्यादा मजा आ रहा था और उसे औरत को भी वह औरत रहने कर अपनी कमर को ऊपर की तरफ उछाल दे रही थी,,,, भारी भरकम शरीर होने के बावजूद भी उसे औरत की स्फूर्ति और ताकत को देखकर अंकित का जोश और ज्यादा बढ़ रहा था। और देखते ही देखते हो उसने अपनी तो उंगली को उसकी बुर में डालकर अंदर बाहर करके हिलना चालू कर दिया और साथ में उसकी चटाई भी जारी रखा। बिस्तर पर घमासान मचा हुआ था। शायद इस औरत ने इस तरह का सुख कभी प्राप्त नहीं की थी ,इसलिए तो अपनी मोटी मोटी जांघों को खोलकर पागल हुई जा रही थी,,,, अंकित उसकी कचोरी जैसी खुली हुई बुर को इसलिए भी पागलों की तरह चाट रहा था क्योंकि उसे पर बल का रेशा तक नहीं था शायद आज ही उसने क्रीम लगाकर अपनी बुर के बाल को साफ की थी,,,, इस उम्र में भी वह सफाई का इतना ध्यान रखती है यह जानकर अंकित का दिल अंदर ही अंदर बहुत खुश हो रहा था। अंकीत की हरकत के कारण उस औरत का सब्र खोता चला जा रहा था, अपनी जवानी की गर्मी को वह जल्द से जल्द शांत करना चाहती थी इसलिए वह अंकित से मिन्नतें करते हुए बोली।
Ankit k samne anjan aurat
सहहहहह आहहहहह मेरे राजा मुझसे बर्दाश्त नहीं होता जल्दी से अपना लंड मेरी बुर में डाल दे मेरी बुर की गर्मी बढ़ती जा रही है अब यह तेरी उंगली से शांत होने वाली नहीं है,,,,ऊमममममम,आहहहहहह जल्दी से चोद मुझे,,,,,,,आहहहहहहहह,,,,.
(उस औरत की तडप देखकर अंकित की भी हालत खराब हो रही थी वह भी जल्द से जल्द अपने मोटे तगड़े लंड को औरत की गुलाबी बुर में डाल देना चाहता था,,,,, और वैसे भी लोहा गर्म हो चुका था बस हथौड़ा मारने की देरी थी,,,,, अंकित भी धीरे से उसके बुर के मदन रस से सने हुए अपने चेहरे को उसकी बुर से अलग किया,,,और उस औरत की तरफ प्यासी नजरों से देखने लगा उसके चेहरे पर अपनी बुर की मलाई लगी हुई देखकर वह शर्म से पानी पानी हो गई उसके होठों पर मुस्कान तैरने लगी और अंकित भी उसके लाल-लाल होठों को देखकर एक बार फिर से उसकी तरफ झुका और उसकी ही मलाई से सने अपने होठों को उसके होठों पर रखकर उसके होठों का रसपान करने लगा,,,, उसे औरत ने भी अपनी बुर की मलाई को चाटना शुरू कर दी उसके होठों को पीना शुरू कर दी अंकित का लंड बार-बार उसकी बुर पर फिसल रहा था,,, जिससे अंकित को तो मजा आ रहा था लेकिन वह औरत तड़प जा रही थी क्योंकि उसके लंड का मोटा सुपाड़ा उसकी गुलाबी पत्तियों से रगड़कर दूसरी तरफ फिसल जा रहा था जबकि वह जाती थी कि उसका लंड उसकी बुर में घुस जाए चार-पांच बार जब इस तरह से उसका लंड अपने आप फिसल कर इधर-उधर भागने लगा तो उसे रहा नहीं गया और वह अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर अपने हाथ से उसके लंड को पकड़ कर उसके बैगनी सुपाड़े को अपनी गुलाबी गली का रास्ता दिखा दी,,, उम्र के इस पड़ाव पर पहुंचने के बाद भी अंकित को उसकी बुर का कसाव एकदम साफ महसूस हो रहा था,,, और शायद ऐसा भी हो सकता था की पहली बार इतना मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर में प्रवेश कर रहा था,,, लेकिन अंकित को मजा आ रहा था। लंड बुर की अंदरूनी दीवारों में रगड़ता हुआ अंदर की तरफ जा रहा था और यह रगड़ अंकित और उस औरत को दोनों को बेहद आनंदित कर दे रही थी,,, औरत तो जीवन में पहली बार इतनी मोटी और लंबे लंड को अपनी बुर में लेकर मदहोश सी हो गई थी पहली बार उसे ऐसा लग रहा था कि वाकई में कोई मर्दाना लंड उसकी बुर में जा रहा था,,,,।
आंखों को बंद करके हुआ इस पल का मजा लूट रही थी इस एहसास को अपने अंदर बटोर रही थी और अंकित उसकी मदहोश कर देने वाली पपैया जैसी बड़ी-बड़ी चूचियों पर लेटे हुए अपने लंड को उसकी बुर की गहराई में उतार चुका था और फिर धीरे से अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठकर फिर से धप्प से नीचे मार दिया था एक बार फिर से अंकित का लंड उसकी बुर में घुस गया था ऐसी क्रिया वह बार-बार लेकिन धीरे-धीरे कर रहा था उसे औरत की तड़प और ज्यादा बढ़ती चली जा रही थी उसकी गुलाबी पतली दरार छल्ला नुमा हो चुकी थी,,,, ऐसा प्रतीत हो रहा था कि आज उम्र के इस पड़ाव पर उसके गुलाबी बुर का द्वारा पूरी तरह से खुल चुका था,,,, उसकी गर्दन पर चुंबनों की बारिश करता हुआ धीरे-धीरे अपनी रफ्तार बढ़ा रहा था और वह औरत अपनी मोटी मोटी जांघों को फैलाए हुए उसके हर एक धक्के को सह रही थी। धीरे-धीरे कमरे में फचार फचार की आवाज गूंजने लगी यह आवाज उसे औरत की ओर से निकले हुए मदन रस और अंकित के लंड के गुत्थमगुत्था होने से निकल रही थी। इस तरह की आवाज काफी हद तक दोनों को मदहोश कर रही थी। अंकित उसकी आंखों में देखते हुए धीरे से बोला।
अब कैसा लग रहा है मेरी जान,,,,(अपने बेटे की उम्र से अपने लिए जान शब्द सुनकर वह पूरी तरह से शर्म से पानी पानी हो जा रही थी लेकिन जिस एहसास में वह डूबी हुई थी उसे एहसास को बताना भी जरूरी था इसलिए वह जवाब देते हुए बोली)
मैं कभी सोची भी नहीं थी कि किसी का लंड इतना लंबा और मोटा भी हो सकता है,,, मैं तो सच में धन्य हो गई तेरे लंड को अपनी बुर में लेकर,,,आहहहह आहहहहह ,,,(उसकी ऐसी मदहोशी भरी बात को सुनकर अंकित से रहा नहीं जा रहा था और वह जल्दी-जल्दी धक्का मारना शुरू कर दिया जिससे उसकी आह निकल जा रही थी,, उसकी बात सुनकर अंकित भी बोला,,,)
सच कहूं तो मैं भी कभी सोचा नहीं था कि तीन-तीन बच्चों की मां का बदन इतना खूबसूरत हो सकता है सच में तुम्हें कोई देख ले तो उसका लंड खड़ा हो जाए नंगी होने के बाद तो तुम और भी ज्यादा खूबसूरत लगती हो तभी तो आज मेरी हालत खराब हो गई और तुम्हारी बुर किस उम्र में भी अंदर से कितनी गर्म है ऐसा लग रहा है कि जैसे मैं बुर में नहीं बल्कि किसी भट्टी में अपना लंड डाल रहा हूं,,,, मेरी जगह कोई और होता तो अह तक उसका पानी निकल गया होता,,,,
Ankit k samne apni gaand parosti huyi
तू बिल्कुल सच कह रहा है मैं भी हैरान हूं कि तेरा तक पानी नहीं निकला कसम से तू ही असली मर्द है जिसकी भी तेरी शादी होगी वह तो तुझे पाकर एकदम धन्य हो जाएगी,,,।
तुम धन्य हुई क्या मेरी जान,,,।
पूछ मत मेरे राजा की आज मैं कितनी खुश हूं अच्छा हुआ तेरे से मुलाकात होगी वरना असली सुख में कभी अपने जीवन में भोग ही नहीं पाती,,,,,आहहहहह आहहहहह ऊमममममम आहहहहहह मेरे राजा,,,,,
यह बात है तब तो तुम आज की चुदाई जिंदगी भर याद रखोगी,,,(और इतना कहने के साथ ही अंकित उसे करके अपनी बाहों में भरकर जोर-जोर से धक्के पर धक्का लगना शुरू कर दिया अब तो उसे औरत की हालत और ज्यादा खराब हो रही थी उसके तेज धकको को वह सह नहीं पा रही थी उसके मुंह से आह आहहह की आवाज निकल रही थी और इस तरह की आवाज इस बात का सबूत था कि उसे बहुत मजा आ रहा था भले ही वह अंकित के धक्को को सह नहीं पा रही थी लेकिन जो आनंद उसे प्राप्त हो रहा था वह उसे पूरी तरह से मदहोश कर रहा था। यह चुदाई अंकित को भी जिंदगी भर याद रहने वाली थी वह कभी सोचा नहीं था किस तरह से किसी औरत को छोड़ने का सबसे प्राप्त होगा और वह भी बैंक कर्मचारी की,,,बुर का कसाव अंकित को भी मदहोश बना रहा था अंकित बिना रुके धक्के पर धक्के लगा रहा था मोटी मोटी जांघों से उसकी जांघें टकरा रही थी,,। कुछ देर तक किसी अवस्था में चुदाई करने के बाद धीरे से अंकित घुटनों के बल बैठ गया हालांकि अभी भी उसका लंड उसकी बुर में घुसा हुआ था वह अपने लंड को बिल्कुल भी उसकी बुर से निकल नहीं रहा था और फिर आने पर रखा हुआ तकिया उठाकर वह उसकी गांड के नीचे लगाने लगा तो वह भी अपनी गांड को ऊपर उठा ले उसकी गांड थोड़ी सी ऊपर आ गई और इस अवस्था में अंकित उसकी दोनों टांगों को अपनी कमर से लपेटकर उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया,,,, वह औरत अंकित के अद्भुत काम शैली को देखकर मंत्र मुग्ध हो गई थी,,, आज तक उसे ऐसा ही लग रहा था कि वह अच्छे-अच्छे का पानी निकाल देती है लेकिन आज उसके ही बेटे के उम्र का लड़का उसका पानी नीचोड़ रहा था। खिड़की से ठंडी ठंडी हवा कमरे में बराबर आ रही थी लेकिन फिर भी दोनों के बदन से पसीना टपक रहा था।
Anjan aurat ki chudai karta hua Ankit
अंकित खेल में अच्छी तरह से माहिर हो चुका था इसलिए वह जानता था कि औरत को कैसे सुख दिया जाता है बिना थके बिना हारे,,,, तभी तो एक औरत मर्द की दीवानी हो जाती है,,,, तभी अंकित के धक्को को अपनी बुर की गहराई में महसूस करके उसका बदन मचलने लगा,,,,, उसकी आंखें बड़ी-बड़ी होने लगी और उसके चेहरे का रंग एकदम लाल होने लगा और वह बोली,,,,।
आहहहह आहहहहहह और जोर से जोर-जोर से धक्के लगा मेरे राजा मेरा निकलने वाला है मेरा होने वाला है मैं कभी सोचा नहीं था कि कोई जवान लड़का इस तरह से मेरी चुदाई करेगा मैं तो पागल हो जाऊंगी मेरा पानी निकलने वाला है,,,,,आहहहहहहहह जोर-जोर से मेरे राजा और जोर-जोर से फाड़ दे मेरी बुर को ,,भोसड़ा बना दे,,,आहहहहहहहह,,,
(अंकित समझ गया था किसका पानी निकलने वाला है यह झड़ने वाली है इसलिए उसका साथ देते हुए वह फिर से अपने दोनों हाथों को उसकी पीठ के नीचे लेकर और उसे करके अपनी बाहों में भरकर अपनी कमर को जोर-जोर से उसकी बुर पर पटकने लगा और देखते ही देखे उसका बदन अंकीत की बाहों में अकड़ने लगा,,, और वह झड़ने लगी,,,,,, झड़ते समय वहां बेहद मासूम लग रही थी अंकित को उसे पर और ज्यादा प्यार आ रहा था वह उसके होठों पर अपने होठकर उसके फोटो का रसपान करते हुए उसके स्खलन का मजा ले रहा था,,,, हालांकि अंकित अपने धक्कों की गति को बिल्कुल भी कम नहीं किया था,,,, थोड़ी देर में उसका बदन एकदम तुमसे ढीला पड़ने लगा,,,, वह पूरी तरह से झड़ चुकी थी उसके बटन में दम नहीं रह गया,,, और झड़ने की वजह से उसकी बुर की चिकनाहट बढ़ चुकी थी और रगड़ का एहसास थोड़ा काम हो रहा था इसलिए अंकित भी कुछ पल के लिए अपने लंड को उसकी बुर से बाहर निकाला और उसके ही पेटीकोट से उसकी बुर की मलाई को साफ करने लगा ताकि दोबारा लंड जाए तो रगड़ महसूस हो,,,, वह औरत अंकित की काबिलियत को देखकर मंत्र मुग्ध हो गई थी एक औरत को खुश करने का तरीका वह अच्छी तरह से जानता था,,, इससे ज्यादा भला एक औरत मर्द से क्या चाहत रख सकती है,,, जो मर्द खुद ही एक औरत को अच्छी तरह से खुश करना जानता हो हर सुख देना जानता हो। अंकित पेटीकोट से अच्छे से उसकी बुर की मलाई साफ करने के बाद मुस्कुराता हुआ उसकी तरफ देख कर बोला।)
बस मेरी रानी अब पलट जाओ पीछे से तुम्हारी चुदाई करूंगा,,,,।
(अंकित की बात सुनकर उसे औरत को थोड़ा शंका हुआ कि वह पीछे से उसे अच्छी तरह से नहीं चोद पाएगा क्योंकि पीछे से उसकी गांड बड़ी-बड़ी होने के कारण लंड पूरी तरह से उसकी बुर की गहराई तक नहीं पहुंच पाता था अब तक तो उसके साथ ऐसा ही हो रहा था लेकिन वह कुछ बोली नहीं वह भी देखना चाहती थी कि अंकित क्या कर लेता है क्योंकि पीछे से करवाने में उसे भी बहुत मजा आता था लेकिन वह आज तक पीछे से असली सुख प्राप्त नहीं कर पाई थी और अंकित के कहते ही वह बिस्तर पर पलट गई और घोड़ी बन गई बिस्तर के किनारे अपनी दोनों टांग नीचे लटका कर वह अपनी बड़ी-बड़ी गांड को हवा में ऊपर उठा दी थी ,,,, इसकी भारी भरकम गोल-गोल गांड को तोप की तरह उठी हुई देखकर अंकित से रहा नहीं गया और वह उसकी गोरी गोरी गांड पर दो-चार शपथ लगाकर उसे टमाटर की तरह लाल कर दिया,,,, वह औरत अंकित की हरकत पर कुछ बोल नहीं पाई और अंकित अपने लंड पर अपना थूक लगाकर उसे गीला कर लिया और थोड़ा सा थुक उसके गुलाबी छेद पर भी लगा दिया,,,, और एक नए अनुभव के लिए पीछे से वह अपने लंड को उसकी गुलाबी बुर में डालने लगा लंड फिर से धीरे-धीरे अंदर की तरफ सड़क गया और अंकित उसकी बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर फिर से धक्का लगना शुरू कर दिया वह औरत एकदम से हैरान हो गई क्योंकि पीछे से भी बड़े आराम से उसका लंड उसकी बुर की गहराई नाप रहा था बल्कि हर एक धक्का उसके बच्चेदानी से टकरा रहा था,,,, उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे क्योंकि आज उसके बरसों की अभिलाषा भी पूरी होने वाली थी वह फिर से मदहोश और उत्तेजित होने लगी,,,,।
उसे खुश करने में अंकित कोई भी कसर बाकी नहीं रख रहा था उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर चउत लगाता हुआ वह आगे बढ़ रहा था,,,, वह रह रहकर धीरे से अपने दोनों हाथों को आगे की तरफ लाकर उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को थाम कर जोर-जोर से धक्के लगा रहा था और इस समय इस अवस्था में उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां लगाम का काम कर रही थी और उसे औरत को भी मजा आ रहा था,,,,, देखते ही देखते घड़ी में तीन का समय हो चुका था समय इतनी जल्दी कैसे गुजर गया दोनों को पता ही नहीं चल रहा था वाकई में चुदाई का जो आनंद है वह किसी और चीज में नहीं मिलता जिसमें इंसान अपना पूरा वक्त भूल जाता है और बस सुख प्राप्त करने में लगा रहता है और यही इस समय अंकित और वह औरत कर रही थी। अंकित पीछे से पूरी तरह से उस औरत पर छा चुका था दोनों को देखने पर ऐसा लग रहा था कि जैसे घोड़ी के ऊपर घोड़ा चढ़ गया हो,,, गरमा गरम शिसकारी की आवाज फिर से कमरे में गुंजने लगी,,,, तकरीबन इस अवस्था में 25 मिनट की और जमकर चुदाई करने के बाद अंकित और वह औरत एक साथ झड़ने लगे,,,,, झड़ने के बाद अंकित भी पस्त हो चुका था और उसके ऊपर ही पसर गया,,,,,,,, उसे औरत ने तो जिंदगी में आज अद्भुत सुख की प्राप्ति की थी वह कभी सोचा नहीं थी कि चुदवाने में वाकई में इतना अत्यधिक आनंद मिलता है आज कुछ ज्यादा ही उसे मजा मिल गया था,,,,,।
थोड़ी देर बाद अंकित अपने लंड को उसकी बुर में से बाहर निकाला जो कि अभी भी खड़ा ही था ज्यादा लचक पन उसमें नहीं आया था यह देखकर तो वह और भी ज्यादा हैरान हो गई थी,,, अंकित धीरे से बाथरूम में चला गया और पेशाब करने लगा तब तक वह सीधी हुई और पीठ के बल लेट कर गहरी गहरी सांस लेने लगी,,,, पेशाब करने के बाद अंकित बाथरूम के दरवाजे तक आया और दीवार का सहारा लेकर मुस्कुरा कर उसे औरत की तरफ देखने लगा वह भी अंकित की तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी,,, अंकित अपने लंड को पकड़ कर हिलाने लगा और बोला।
बताओ ऐसा मजा कभी मिला था?
बिल्कुल भी नहीं,,, मैं तो कभी सोचा भी नहीं थी कि इसमें इतना ज्यादा मजा भी आता होगा जितना मजा आता था बस उसने ही लेती थी लेकिन आज शायद मेरी औकात से ज्यादा मुझे आनंद मिल रहा है,,,।
समय नहीं है नहीं तो आज एक ही दिन में तुम्हें चांद तारे सब दिखा देता,,,(ऐसा कहते हुए वह बिस्तर के पास आया और पीठ के बल लेट गया,,, मौका देखकर उसे औरत ने भी हाथ आगे बढ़कर अंकित के लंड को पकड़ ली और उसे हल्के हल्के हिलाते हुए बोली,,,)
तुम सच कह रहे हो हमें थोड़ा और पहले मिलना चाहिए था 5:00 बजे तो मैं यहां से चली जाऊंगी और 3:30 बज चुके हैं,,,।
तुम ही सोचो में 11:00 बजे यहां पर आया हूं और 3:30 बज चुके हैं इस बीच सिर्फ तुम्हारी एक ही बार चुदाई हुई है,,, और एक ही बार में तुम पूरी तरह से मस्त हो गई हो अगर पूरा दिन मिले तो सोचो क्या हो जाएगा,,,,।
मैं भी यही सोच रही हूं। और पछता भी रही हूं इतना अच्छा मौका मिला है और आज ही मुझे जाना भी है,,,।
आज रात तक नहीं रुक सकती,,,
बिल्कुल भी नहीं,,,(लंड को हल्के हल्के हिलाने से वह पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा हो गया था एकदम कड़क हो गया था,,,, उसकी गर्मी और उसके कडप्पन को अपनी हथेली में महसूस करके एक बार फिर से वह मदहोश होने लगी और इससे आगे कुछ बोले बिना ही वह एकदम से उठकर बैठ गई और झुक कर लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,, अंकित फिर से मस्त होने लगा और वह हाथ आगे बढ़ाकर उसकी चूची को पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया,,, दोनों फिर से मदहोश होने लगे लेकिन इस बार वह औरत पूरी तरह से कमान संभाल लेना चाहती थी,,, और वह खुद अंकित के लंड पर सवार होके और उसके कंधे पर हाथ रखकर अपनी गांड को जोर-जोर से उसके लंड पर पटकना शुरू कर दी,,, अंकित को इससे बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ता था तरबूज चाकू पर गिरे या चाकू की तरबूज पर,कटने वाला तो तरबूज ही था और इसके बाद मजा ही मजा उसे औरत की इस क्रिया से भी अंकित को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी अंकित उसकी कमर पकड़ लेता था तो कभी उसकी चूची दबा देता था तो कभी उसे अपनी तरफ झुक कर उसके होठों को चूमने लगता था और यह सिलसिला तकरीबन 15 मिनट तक और चला और दोनों एक बार फिर से झड़ गए,,, समय भी काफी हो चुका था अंकित को अपने होटल पहुंचना था वरना उसकी मां परेशान हो जाती क्योंकि वह तीन-चार घंटे से अपने होटल से गायब था बिना बताए,,,।
वह औरत बाथरूम में चली गई और पेशाब करने लगी उसकी बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज अंकित को साफ सुनाई दे रही थी जिसे सुनकर वह मुस्कुरा रहा था इसके बाद वह बाहर निकली और कपड़े पहने लगी अंकित तब तक कपड़े पहन चुका था,,,, अंकित बात ही बात में उससे पूछा,,,।
यहां पर कोई अच्छी जगह है घूमने लायक,,,,।
हां जरूर है यहां से तकरीबन पांच छः किलोमीटर की दूरी पर एक झरना है जिसे देखने के लिए लोग ऊपर तक जाते हैं वहां से खूबसूरत नजारा दिखाते हैं बहुत खूबसूरत जगह भी है तुम घूमना चाहो तो वहां घूम सकते हो मुझे तो आज जाना है वरना मैं तुम्हें घुमा देती,,,।
कोई बात नहीं,,,, तुमने तो मुझे स्वर्ग का सुख प्रदान की हो,,,,।
(यह सुनकर वह मुस्कुराने लगी अंकित गई मुस्कुरा दिया और फिर जाते-जाते उसे एक बार फिर से अपनी बाहों में भरकर उसके होठों का चुंबन किया और वहां से निकल गया,,, जब अपने होटल के कमरे में पहुंचा तो उसकी मां बड़ी बेसब्री से उसका इंतजार कर रही थी उसे देखते ही सवालों की झड़ी लगा दी अंकित एकदम शांत होकर जवाब देते हुए बोला,,,)
तुम सो रही थी इसलिए मैं तुम्हें जगाना ठीक नहीं समझा और इधर-उधर घूमता रहा मुझे एक नहीं बताया कि यहां से 5 से 6 किमी की दूरी पर एक खूबसूरत चलना है वहां पर लोग घूमने के लिए जाते हैं हम लोगों को भी वही चलना चाहिए घूमने के लिए,,,।
अब आज तो नहीं हो पाएगा कल चलते हैं,,,।
कोई बात नहीं चल चलेंगे,,, तुम खाना खाई कि नहीं,,,।
खाना नहीं खाए बस चाय नाश्ता की हुं,,,।
अभी खाना है तो मंगवा लो,,,।
नहीं नहीं ऐसे भी मुझे अभी भूख नहीं है अब रात को ही खाएंगे,,,,।
(इतना कहकर बा बालकनी में आकर कुर्सी पर बैठकर बाहर का नजारा देखने लगी और अंकित भी पास में ही पड़ी कुर्सी पर जाकर बैठ गया उसकी मां को सख्त नहीं हुआ कि यह तीन-चार घंटे से कहां था किसके साथ था,)
ड्राइवर की भी हालत पतली हो गई दोनों का जलवा देख कर !उस बैंक कर्मचारी महिला से मिलकर अंकित बहुत खुश था। पुरूष औरत को अंकित ने जी भर कर खुश भी किया था। अंकित ने उसे औरत को उम्मीद से कहीं ज्यादा गुना खुशी किया था वरना इस उम्र में वह कभी सोच भी नहीं सकती थी कि उसे एक जवान लड़के से इतना सुख मिलेगा और वह भी अनजाने में ही। अंकित ने जी भरकर उसे बैंक कर्मचारी औरत की चुदाई किया था इस उम्र में भी वह इतनी लाजवाब और हुस्न की मल्लिका थी कि अंकित अपने आप को रोक नहीं पाया था। उसे इस बात की उम्मीद नहीं थी कि वह औरत इतनी जल्दी उसके साथ हम बिस्तर होने को तैयार हो जाएगी वैसे शारीरिक सुख प्राप्त करने की पहले उसने ही की थी जिससे अंकित का काम आसान हो गया था।
होटल पहुंचकर उसने अपनी मां को यही बताया कि वह थोड़ा घूमने के लिए चला गया था । रात भर अंकित ने जिस तरह से अपनी मां की गांड मरा था उसके बदले में दर्द होने लगा था खास करके गांड के छेद में और उसे चलने में थोड़ी तकलीफ हो रही थी इसलिए वह ज्यादा कुछ करी नहीं बस होटल के कमरे में ही दिनभर आराम करती रही। शाम ढल चुकी थी अंधेरा हो रहा था तब मां बेटे दोनों की नींद खुली दोनों को भूख भी बहुत ही जोरों की लगी थी थोड़ा फ्रेश होकर वह दोनों नीचे आए और अपने होटल के रेस्टोरेंट में खाना ना खाकर वालों को अपने होटल से बाहर निकल गए और अंकित अपनी मां को इस होटल में लेकर आया जहां पर वहां दिन में आया था और बैंक कर्मचारी की जमकर चुदाई किया था यहीं पर उसने खाना भी खाया था और यहां का खाना उसे अच्छा लगा था इसलिए वह अपनी मां को यहां लेकर आया था। रेस्टोरेंट में बैठकर दिन में जो कुछ भी अंकित ने खाया था वही फिर से आर्डर कर दिया और थोड़ी ही देर में दोनों के टेबल पर ऑर्डर का खाना आ गया सुगंधा को भी यहां का खाना अच्छा लग रहा था। पेट भरकर खाने के बाद दोनों भुगतान करके रेस्टोरेंट से बाहर निकल गए और कुछ देर तक इधर-उधर चहल कदमी करके घूमते रहे। देखते देखते रात के 9:30 बज चुके थे वैसे भी यहां पर रात का नजारा कुछ ज्यादा ही खूबसूरत दिखता है इसलिए समय कभी दिया उन दोनों को पता ही नहीं चला। थोड़ी ही देर में दोनों अपने कमरे में पहुंच गए।
Madhosh hoti huyi Sugandha
दोनों बालकनी में बैठे हुए थे अंकित अपनी मां से बोला,,।
बस अब दो दिन और रह गए हैं दो दिन जी भर कर मजा ले लो फिर ना जाने कब यहां आना होगा।
मुझे तो नहीं लगता कि अब यहां पर कभी आना होगा।
ऐसा क्यों कह रही हो।
अरे हम दोनों ही थोड़ी ना घर पर हैं तृप्ति भी तो है और उसे लेकर यहां पर तो आ नहीं सकते।
अरे जब उसकी शादी हो जाएगी अपने घर चली जाएगी तब तो हम दोनों यहां पर खुलकर मजा ले सकेंगे।
तब तो यहां आने की क्या जरूरत है घर पर ही खुलकर मजा लेंगे वैसे भी अब एक-दो साल में तृप्ति की शादी करनी पड़ेगी उसके बाद तो मजा ही मजा है और वैसे भी इसी जगह पर दोबारा आओगे तो इन लोगों को शक नहीं होगा क्योंकि होटल वालों को तो यही लगता है कि मैं धंधे वाली हूं।
(अपनी मां की बात सुनकर अंकित मुस्कुराने लगा और मुस्कुरातेहुए बोला)
सच में अगर तुम धंधे वाली होती तो तुम्हारा एक रात का सबसे ज्यादा चार्ज होता।
कितना होता मेरा चार्ज,,,?(सुगंधा भी अपने बेटे की बात सुनकर मुस्कुराते हुए बोली)
कम से कम 8 से 10000 के बीच तो रहता ही एक रात की लेकिन जो भी इतना पैसा चुका था जी भर कर तुम्हारी जवानी का रस निचोड़ भी लेता रात भर में,,,,।
तू तो बिना पैसे खर्च किए मेरी जवानी का रस निचोड़ रहा है।
मैं तुम्हारा ग्राहक थोड़ी ना हूं और वैसे भी तुम्हारी जैसी छिनार पर चढ़ने के लिए मुझे पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं है।
छिनार,,,,(झूठ मुठ का गुस्सा दिखाते हुए सुगंधा अपने बेटे की तरफ देख कर बोली।)
तो क्या छिनार ही तो हो और तुम्हें चोदने के लिए मुझे पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं है मेरा मोटा तगड़ा लंबा लंड देखकर तुम्हारी बुर पानी छोड़ देती है।
(अपने बेटे की आवाज सुनकर सुगंधा जोर-जोर से हंसने लगी क्योंकि वह जानती थी कि उसके बेटे का कहना बिल्कुल सही था वैसे उसका ईमान कभी नहीं डगमगाता लेकिन अपने बेटे का मोटा तुम्हारा लंड देखकर उसे न जाने क्या हो जाता है,,, फिर भी अपने बेटे की बात सुनकर धीरे से वह बोली,,)
पता नहीं तेरे मुंह से छिनार शब्द सुनकर मुझे क्या होने लगता है।
क्या होने लगता है गुस्सा आने लगता है क्या?
गुस्सा तो नहीं आने लगता लेकिन तेरे पर प्यार आने लगताहै।
तो चलो प्यार करते हैं बिस्तर खाली है।
ना बाबा ना आज की रात तो कुछ भी नहीं कल जो तूने रात भर मेरी गांड मरा है तब से अभी तक मेरी गांड दर्द कर रही है।
गांड नहीं मारूंगा तुम्हारी बुर मारूंगा।
आज तो तुझे छूने भी नहीं दूंगी। आज कुछ नहीं आज आराम करते हैं,,,,।
क्या मम्मी आराम करने के लिए जिंदगी पड़ी है यहां जो काम करने के लिए आए हैं उसे तो करना हीहोगा ना।
यह तुझे गांड मारने से पहले सोचना चाहिए था।
क्या मम्मी तुम भी इतनी मस्त जवानी की मालकिन हो फिर भी छोटे से छेद में लेकर इतना तड़प रही हो। तुम्हारी जगह में औरत होता तो कब से घोड़ी बनकर फिर से तैयार हो जाता गांड मरवाने के लिए।
अच्छा बच्चु यह तो तुम इसलिए कह रहा है ना कि तू औरत नहीं है इसलिए औरत होता ना तो तुझे पता चलता है कि मर्द मजा भी देता है और दर्द भी देता है। मेरे पास भी लंड होता तो यह बात तुझे अच्छे से समझा देती।(इतना कहकर सुगंधा हंसने लगी और उसकी बात सुनकर अंकित भी हंसने लगा वह भी अपनी मां की बात को मानते हुए आज की रात कुछ न करने का फैसला कर लिया वह भी आराम करना चाहता था क्योंकि दिन भर उसने दूसरी औरत की शिव जो किया था वह दोनों बालकनी से कमरे में आ गए सोने से पहले सुगंध अपने कपड़े उतारने लगी कपड़े उतारने के बाद अपनी मां को ब्रा और पेटी में देखकर अंकित की आंखों में वासना का तूफान नजर आने लगा इस समय उसकी मां का गदराया बदन ब्रा और पेंटि में और भी ज्यादा आकर्षक लग रहा था। जिसे देखकर अंकित का मन देखने लगा और वह पीछे से अपनी मां को अपनी बाहों में कस लिया।
यह क्या कर रहा है आज आराम करना है और कुछ नहीं करना है,,,।
Sugandha bra or panty me
यह कैसे हो सकता है ,,,मेरी आंखों के सामने तुम कपड़े उतार रही हो और कहती हो कि मैं कुछ ना करूं यह तो यही हो गया कि बिल्ली को दूध की रखवाली करने के लिए बोल रही हो।
ना तुम्हें दूध हूं और ना ही तो बिल्ली है समझ गया ना इसलिए अपना दिमाग ज्यादा मत लगा,,,(सुगंधा अपने आप को अपने बेटे की बाहों के कैद से छुड़ाने की कोशिश कर रही थी अंकित अपनी मां को पीछे से अपनी बाहों में पड़े हुए था और इस दौरान अपनी पेट में बना हुआ तंबू लगातार अपनी मां की गांड पर धंसा रहा था जिससे सुगंधा के भी तन बदन में लहर उठने लगी थी वह ऊपर से तो इंकार कर रही थी लेकिन अंदर से उसकी भी कामाग्नि भड़कने लगी थी लेकिन वह अपने बेटे को आगे बढ़ने नहीं देना चाहती थी क्योंकि वह उसे आज ऐसा कुछ भी न करने के लिए पहले से ही बोल रखी थी और अगर इस समय वह अपनी बेटी को कुछ करने देगी तो वह खुद ही अपने बेटे की आंखों के सामने छिनार साबित हो जाएगी। उसे शर्म महसूस हो रही थी वह बार-बार अपने बेटे की कैसे आजाद होना चाहती थी लेकिन इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा उसे अपनी बाहों की कैद से आजाद होने नहीं देगा। सुगंध को इस बात का एहसास हो गया था कि उसका बेटा अपनी मनमानी करके ही मानेगा क्योंकि वह जानती थी कि जब उसकी बेटी का लंड खड़ा हो जाता है तब बिना पानी निकाले शांत नहीं होता लेकिन फिर भी इस दौरान वह अपने आप को पूरी कोशिश कर रही थी छुड़ाने को लेकिन अंकित की भुजाओं का बोल कुछ ज्यादा ही था वह ब्रा के ऊपर से उसकी चुचियों को पदकर दबाना शुरू कर दिया था। वैसे भी अंकित औरत को खुश करने का उनमें कामाग्नि भड़काने का होना अच्छी तरह से जानता था और इस समय वह अपनी मां के साथ वही कर रहा था। जब अंकित को एहसास होने लगा कि उसकी मां की पकड़ ढीली पड़ रही थी और उसके मुंह से हल्की-हल्की गर्म शिसकारी की आवाज निकलने लगी है तो अंकित के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे। वह समझ गया कि अब उसका काम बन गया है, वह अपनी मां की पीठ पर अपनी हथेली रखकर दबाव बनाते हुए उसे एकदम से बिस्तर पर झुका दिया और सुगंधा भी जानती थी कि इस समय अंकित अपनी मनमानी किए बिना मानने वाला नहीं है इसलिए वह भी विवश होकर बिस्तर पर झुक गई वैसे भी उसके बदन में भी उत्तेजना के चिंगारी भड़कने लगी थी। उसे सिर्फ इस बात का डर था कि कहीं इस बार भी उसका बेटा उसके गुलाबी छेद की जगह उसके भूरे रंग के छेद में अपना लंड ना डाल दे।
मौके की नजाकत को देखते हुए अंकित एकदम से अपनी मां की पेंटिं को पकड़कर नीचे खींच दिया और उसके घुटनों तक लाकर छोड़ दिया,,, और खुद अपनी पेंट का बटन खोलकर पेट को भी घुटनो तक लाकर अटका दिया क्योंकि अब अंकित के पास बिल्कुल भी समय नहीं था वह जल्द से जल्द अपने लंड को अपनी मां की बुर में डाल देना चाहता था और ढेर सारा थुक अपने सुपाड़े पर लगाकर धीरे से अपनी मां के गुलाबी छेद में सरकाना शुरू कर दिया तब जाकर सुगंधा की जान में जान आई कि उसका बेटा उसे चोदने के लिए लंड उसकी बुर में डाला है ना की उसकी गांड के छेद में,,, अपनी मां के इनकार करने के बावजूद भी अंकित अपनी मां को चोदना शुरू कर दिया था वैसे उसका भी मन आराम करने कोई था लेकिन अपनी मां को ब्रा और पेटी में देख कर और उसकी कई हुई जवान को देखकर एक बार फिर से उसकी मन बहक गया था,,, अंकित तब तक अपनी कमर हिलता रहा जब तक कि वह अपनी मां को संतुष्ट करके अपना पानी उसकी बुर में डाल नहीं दिया। मां बेटे दोनों फिर से संतुष्ट हो चुके थे। अपनी पैंटी को दोनों हाथों से पकड़ कर ऊपर की तरफ खींचते हुए सुगंधा शरारत भरे स्वर में अपने बेटे से बोली।
सच में तू एकदम मादरचोद हो गया है।
इसमें कोई शक है क्या? तुम्हारे जैसी मां हो तो बेटे को मादरचोद बनने से कोई नहीं रोक सकता। (ऐसा कहते हुए अंकित भी अपनी पेंट को ऊपर की तरफ खींचा और उसका बटन बंद करने लगा इसके बाद मां बेटे दोनों एक दूसरे को बाहों में भरकर गहरी नींद में सो गए सुबह दोनों के लिए जल्दी खुल गई नहा धोकर तैयार होने के बाद अंकित उसे जगह पर जाने के लिए जहां के बारे में उसे बैंक वाली औरत में बताई थी वह पूछताछ करने के लिए नीचे रेस्टोरेंट में आ गया था थोड़ी देर में उसकी मां भी नीचे आ गई थी अंकित इस वेटर से उसे जगह के बारे में पूछ रहा था जिसे अपनी मां की नंगी जवानी का दर्शन कराया था और उसके एहसान के बदले में वह वेटर पूरी तरह से अंकित का खास हो गया था। क्योंकि होटल से जाते-जाते अंकित उसे इस बात का दिलासा दिया था कि उसके जाने के बाद वह उस औरत को उसके हाथों सौंप देगा जिसके साथ वह एक दिन के लिए पूरा मजा ले सकेगा। और इस बात का लालच उस वेटर के मन में बस गया था। सुगंधा की खूबसूरत बदन को याद करके ना जाने कितनी बार वह अपने हाथ से हिला कर काम चला लिया था। अपनी मां के साथ बैठकर वह उस वेटर से नाश्ता मंगवाया और उस जगह के बारे में पूछने लगा,,, उस वेटर को उसे जगह के बारे में अच्छी तरह से मालूम था इसलिए उसने जल्द ही एक गाड़ी का बंदोबस्त भी कर दिया था उन लोगों के नाश्ता करते-करते कार आकर होटल के सामने रुक गई थी। मां बेटे दोनों वेटर के कार्य को देखकर मन ही मन बहुत खुश हो रहे थे। इस बात से सुगंधा खुश होते हुए अपने बेटे से बोली।
वेटर तो बहुत काम का इंसान निकला।
काम का इंसान तो है ही हम दोनों का काम कुछ ज्यादा ही कर रहा है पता है किस लिए।
किसलिए,,,!(सुगंधा आश्चर्य से अपने बेटे की तरफ देखते हुए बोली)
वह इसलिए की मैंने उस वेटर से बात किया हूं कि जब मैं इस होटल से जाऊंगा तब मैं उसे औरत को मतलब कि तुम्हें उसे सौंप दूंगा एक रात के लिए खूब मजा करना लेकिन खर्चा भी ज्यादा होगा जिसके लिए बहुत तैयार हो गया था।
हरामजादा वह भी और तू भी,,,।
(अपनी मां की बात सुनकर अंकित हंसने लगा दोनों ने नाश्ता खत्म कर चुके थे। सुगंधा अपना पर्स अपने हाथ में लेकर उठकर खड़ी हो गई अंकित भी अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया,,,, और दोनों होटल से बाहर आ गए कार की तरफ कार का ड्राइवर दोनों को नष्ट करता हुआ देखकर खुद भी नष्ट करने के लिए रेस्टोरेंट में बैठ गया था और वह इशारे से दोनों को कर में बैठ जाने के लिए कह रहा था सुगंधा अपनी भारी भरकम गांड लेकर कर का दरवाजा खोलकर अंदर बैठने को हुई तो झुकाने की वजह से उसकी भारी भरकम गांड का उभार को ज्यादा ही बाहर की तरफ निकल आया जिसे देखकर कार का ड्राइवर एकदम से मत हो गया और नजर भरकर सुगंधा की गांड को भी देखता रह गया,,, यह सब करते हुए अंकित की नजर उसे कर ड्राइवर पर चली गई थी और उसका ड्राइवर की हरकत को देखकर वह मन ही मन मुस्कुरा रहा था। थोड़ी देर में मां बेटे के कार में बैठने के बाद वह ड्राइवर भी अपनी सीट पर आकर बैठ गया और आते ही उसने बातचीत की शुरुआत करते हुए बोला।)
तुम दोनों पहली बार आए हो क्या यहां पर,,,(ऐसा कहते हुए उसने कार को स्टार्ट कर दिया,,,, जवाब में अंकित बोला,,,)
जी हां,,,, हम दोनों पहली बार इधर आए हैं,,,
वैसे तुम दोनों की जोड़ी काफी अच्छी लग रही है।
जी शुक्रिया,,,( अंकित मुस्कुराते हुए बोला तो सुगंधा भी कोई ड्राइवर की बात पर मुस्कुराने लगी थी,,, क्योंकि उसे भी इस बात का एहसास हो गया था कि वह ड्राइवर भी उसे वही समझ रहा है जो वेटर ने दोनों को समझा था,,,, उसे इस बात की खुशी थी कि कोई भी उन दोनों को मां बेटा नहीं समझ रहा था वरना दिक्कत आ जाती,,, अंकित जानता था कि उसे ड्राइवर की मन में क्या चल रहा है इसलिए वह पहले ही सब कुछ साफ करते हुए उस ड्राइवर से बोला)
यह मेरी कॉलेज की मैडम है लेकिन इन्हें देखकर कोई कह नहीं सकता कि तो बच्चों की मां है आज भी एकदम जवान और कैसे हुए बदन की मालकिन है।
बात तो तुम यार एकदम सही कह रहे हो,,, मैं भी देख कर हैरान रह गया,,,,।
खूबसूरत है ना,,,,।
खूबसूरत,,,, सच कहूं तो महीनों बाद में इतनी खूबसूरत औरत देख रहा हूं यह तो तुमने बताया कि तो बच्चों की मां है तब मुझे पता चल वरना तो मुझे लगी नहीं रहा था,,,,।
(उसे ड्राइवर की बात सुनकर सुगंधा के तन-बदन में गुदगुदी होने लगी थी उसे इस बात का डर हो रहा था कि उसे देखकर कोई बोल नहीं सकता था कि वह दो बच्चों की मां है,,,,,, कार के मिरर में वह ड्राइवर बार-बार सुगंधा कोई देख रहा था सुगंधा शर्म के मारी अपनी नज़रें नीचे झुका ली थी,,,,, उसके मन में भी कई सवाल घूम रहे थे इसीलिए थोड़ी देर बाद कुछ सोच विचार करके वह बोला,,,)
अगर बुरा ना मानो तो मैं एक बात पूछूं,,,।
हां हां पूछो पूछो इसमें कौन सी बात है,,,,।
क्या उनके पति को तुम दोनों के बीच क्या चल रहा है इस बात का पता नहीं है ।
बिल्कुल भी नहीं,,,, ईनके पति बैंक कर्मचारी हैं दिनभर ऑफिस के काम में लगे रहते हैं उनके लिए समय ही नहीं निकलने और तुम तो देख ही रहे हो अपनी आंख से की जवानी से भरी हुई औरत को पैसे से ज्यादा किस चीज की जरूरत ज्यादा रहती है और वही जरूरत इनके पति पूरा नहीं कर पा रहे हैं,,,,(अंकित अपनी मां की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोला तो उसकी मां गुस्से से उसे आंख दिखाने लगी,,,, अंकित की बात सुनकर वह ड्राइवर भी एकदम से खुश होता हुआ बोला)
तुम बिल्कुल सही कह रहे हो औरत को इस उम्र में सबसे ज्यादा प्यार की जरूरत होती है ना कि पैसे की इसीलिए तो औरतों के कदम बहक जाते हैं,,,, अब देखो ना मेरी उम्र 40 साल होने को आ गई लेकिन मैंने एक भी दिन अपनी पत्नी को छोड़कर कहीं गया नहीं हूं क्योंकि मैं जानता हूं कि ऐसे में कोई दूसरा फायदा उठा सकता है,,,,।
तो तुम्हें क्या लगता है कि मैं फायदा उठा रहा हूं,,,।
नहीं नहीं मैं यह बात नहीं कह रहा हूं सर जी मैं तो अपना तजुर्बा बता रहा हूं उनके पति को हमेशा इनका साथ रहना चाहिए उनकी जरूरत को पूरी करना चाहिए अगर ऐसा होता तो शायद यह भी तुम्हारे साथ यहां ना आती।
ऐसा मत कहो मैं तुमसे इतना प्यार करता हूं कि उनके बिना रह नहीं सकता और यहां पर इन्हें प्यार करने के लिए ही तो लाया हूं,,,।
पर इन्होंने अपने पति से बहाना कौन सा मारा।
औरतों के पास बहानों की कमी होती है क्या,,,, इन्होंने कह दी की कॉलेज का काम है तीन-चार प्रोफेसर लोग दूसरे कॉलेज में जा रहे हैं बस यही कहकर घर से निकल गई है तीन दिन हो गया है जी भर कर मजा ले रही है,,,,(ऐसा कहते हुए अंकित एकदम से बेशर्म बनता हुआ यह जानते हुए भी कि वह ड्राइवर कर की मिरर में उन दोनों को देख रहा है वह एकदम से अपनी मां की चूची पर हाथ रख कर दबा दिया सुगंधा एकदम से चौंक गई और अंकित का हाथ हटाने लगी लेकिन ड्राइवर नहीं अंकित की हरकत को देख लिया था और एकदम से मस्त हो गया था,,, ड्राइवर की हालत खराब हो गई थी उसे इस समय अंकित से बहुत जलन हो रही थी कि इतनी खूबसूरत औरत उसके हाथ में थी जिसके साथ वह जब चाहे तब मजा ले सकता था मिरर में देखकर ड्राइवर ने सुगंधा की चूचियों के आकार का अंदाजा लगा लिया था और मन ही मन गर्म आहे भर रहा था,,,, सुगंधा के हाथ हटाने से अंकित फिर से अपने हाथ को उसकी चूची पर रखकर दबाने लगा सुगंधा बार-बार ऐसा कर रही थीऔर अंकित बार-बार अपनी हरकत को दोहरा रहा था,,,,, ड्राइवर की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी,,,, सुगंधा शर्मा रही थी उसे उस ड्राइवर के सामने अंकित किस तरह की हरकतें अच्छी नहीं लग रही थी। अंकित के बताएं अनुसार वह दोनों यहां पर 3 दिन से थे और 3 दिन से मजा ले रहे थे इसका मतलब साफ था कि वह औरत भी मजा लेने के उद्देश्य से ही यहां पर आई थी लेकिन इस समय कर के अंदर उसके सामने वह शर्मा रही थी इसीलिए वह उसकी शर्म दूर करने के लिए बोला।)
Ankit car me apni ma ki chuchiyo se khelta hua
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कोई बात नहीं तुम दोनों कुछ भी कर सकते हो यहां कोई बोलने वाला नहीं है और वैसे भी कार के अंदर किसी को कुछ दिखाई नहीं देगा,,,,।
लो सुन ली कार के अंदर हम दोनों कुछ भी कर सकते हैं,,,, इन्हें बिल्कुल भी ऐतराज नहीं होगा और वैसे भी कर के अंदर शीशा चढ़ा हुआ है बाहर से किसी को कुछ दिखाई नहीं देगा,,,,।
नहीं यहां कुछ भी नहीं मुझे शर्म आती है,,,।
शर्माइए नहीं मैडम,,, बाहर से आने वाले लोग अक्सर कर के अंदर यह सब करते ही रहते हैं और हम लोगों को इस बात का बुरा भी नहीं लगता क्योंकि यहां पर आते ही इंजॉय करने के लिए इसलिए तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो जब तक हम उसे जगह पर पहुंचेंगे तब तक तुम दोनों जन का काम खत्म हो जाएगा,,,।
अरे वह ड्राइवर साहब ड्राइवर हो तो आपके जैसा,,,(ऐसा कहने के साथ ही अंकित एकदम से अपनी मां की खूबसूरत चेहरे को अपने दोनों हाथों में पकड़ लिया उसके लाल-लाल होठों पर अपने हाथ रखकर उसके होठों का रसपान करने लगा सुगंधा शर्म के मारे पानी पानी हो रही थी वह अनजान ड्राइवर के सामने यह सब नहीं करना चाहती थी लेकिन अंकित मान ही नहीं रहा था,,, जब अंकित को भी लगने लगा की सुगंधा मानने वाली नहीं है इसलिए वह उस ड्राइवर के सामने ही बोला,,)
क्या करती हो मेरी जान ड्राइवर साहब से शर्माने की जरूरत नहीं है हम कहां अपने शहर के अंदर यह सब कर रहे हैं कि कोई देख लेगा यह शहर यह जगह हम दोनों के लिए अनजान है यहां पर हम दोनों को कोई नहीं जानता इसलिए तो यहां खुलकर मजा लेने के लिए आए हैं,,,।
यह बिल्कुल ठीक कह रहे हैं यहां परआने वाले लोग इसीलिए खुलकर यहां मजा लेते हैं क्योंकि यहां पर उन्हें कोई पहचानता नहीं है कोई जानता नहीं है तुम पहले नहीं हो पहले भी कई लोग मेरी कार के अंदर मजा ले चुके हैं बस जाते समय 50 100 ज्यादा दे देते हैं,,,, वह लोग भी खुश हो जाते हैं और हम लोग भी खुश हो जाते हैं,,,,,।
इन्हें भी ₹100 दे देंगे,,,,।(इतना कहने के साथ ही फिर से वह ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां की चूची दबाना शुरू कर दिया)
क्या कर रहे हो अंकित,,,,,,,,।
वही जो हमें करना चाहिए थोड़ी देर में हम लोग वहां पर पहुंच जाएंगे लेकिन कर के अंदर चुदाई करने का जो मजा है वह नहीं ले पाएंगे क्यों ड्राइवर साहब सही कह रहा हूं ना,,,।
बिल्कुल सही कह रहे हो कार के अंदर चुदाई करने का अपना अलग ही मजा है मैं भी कभी खबर अपनी बीवी को कार में बिठाकर ऐसे ही निकल पड़ता हूं और एक अच्छी सी जगह देखकर खड़ी कर देता हूं और फिर हम दोनों शुरू हो जाते हैं क्योंकि काले रंग के शीशे के अंदर किसी को कुछ दिखाई नहीं देता अक्सर हम लोग ऐसी जगह पर कर खड़ी करते हैं जहां पर लोगों का आना-जाना कुछ ज्यादा ही रहता है जैसे सब्जी मार्केट किसी कपड़े की दुकान के सामने ऐसी जगह पर कुछ ज्यादा ही मजा आता है तुम्हें भी इस तरह का मजा लेना चाहिए इसमें कोई हैरत नहीं है। (कार का ड्राइवर जानबूझकर उन दोनों को इस तरह की बातें करते हो गुस्सा आ रहा था ताकि वह दोनों उसकी आंखों के सामने ही चुदाई का खेल शुरू कर दे और वह अपनी आंखों से देख कर मस्त हो जाए। उसके तन बदन में खुद गुदगुदी हो रही थी उत्तेजना से उसका भजन कंपन कर रहा था,,, वह तो चाहता था कि कब वह उस औरत की नंगी चूचियों के दर्शन करें उसकी नंगी जवान को अपनी आंखों से देखें,, जबकि उसकी कार में आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ था,,,,, उसे ड्राइवर की बात को सुनकर अंकित भी अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अपनी मां से बोला,,,)
तुम ही सोचो जरा इसमें कितना मजा आता है,,,, भूल गई दर्जी और होटल का वेटर उन दोनों की हालत क्या हो गई है बस वैसा ही मजा हमें इस मोटर गाड़ी में लेना है,,,,,।
(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा गहरी सांस लेते हुए कुछ देर तक सोचने लगी वह भी जानती थी कि अनजान लोगों के सामने मजा लेने में अत्यधिक उत्तेजना और संतुष्टि का एहसास होता है क्योंकि दो बार इसका एहसास उसे हो चुका था दो बार वह अनजान लोगों के साथ मजा ले चुकी थी और उन पर अपनी जवानी का जलवा बिखेर चुकी थी अब शायद बारी था ड्राइवर का उसकी हालत देखकर ही पता चल रहा था कि वह कितना ज्यादा उत्सुक था आगे का नजारा देखने के लिए,,,, ऐसा नहीं था कि अपने बेटे की हरकत से उसे मजा नहीं आ रहा था उसे भी अत्यधिक आनंद की अनुभुति हो रही थी,,, उसकी बुर भी पानी छोड़ रही थी। कुछ देर सोचने के बाद सुगंधा खुद एकदम से अपने बेटे के चेहरे को अपने दोनों हाथों में ले ली और उसके होठों पर अपने होंठ रखकर चुंबन करने लगी,,,,, मिरर में यह सब एकदम साफ दिखाई दे रहा था और ड्राइवर ने मिरर को थोड़ा व्यवस्थित भी कर लिया था ताकि पिछले सीट का सारा नजारा उसे बड़े आराम से दिखाई दे सके सुगंधा की हरकत से तो ड्राइवर की हालत एकदम से खराब हो गई, उसकी ईस हरकत से ड्राइवर समझ गया था कि वाकई में यह औरत कितनी प्यासी है तभी तो अपना शहर छोड़ कर इधर मजा लेने आई है,,,,, ड्राइवर की हालत खराब हो रही थी वह एक किनारे से धीरे-धीरे गाड़ी आगे बढ़ा रहा था क्योंकि वह जानता था कि जिस तरह का नजारा उसकी पिछली सीट पर दर्शाया जा रहा है उसे देखते हुए कभी भी उसका एक्सीडेंट हो सकता है इसलिए वह एहतियात के तौर पर गाड़ी धीरे चल रहा था।
अंकित मौके की नजाकत को समझते हुए एकदम से ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां की चूचियों पर अपने दोनों हाथ रखकर उसे दबाना शुरू कर दिया और अपनी मां के लाल लाल होठों पर रस पीना शुरू कर दिया,,,, मां बेटे दोनों मोटर गाड़ी की पिछली सीट पर बैठकर मस्त हो गए थे,,, इस शहर का नजारा बेहद खूबसूरत था अक्सर लोग मोटर गाड़ी में बैठकर बाहर की तरफ देखते हुए खूबसूरत नजारे का आनंद लेते हैं लेकिन इस समय मां बेटे के पास बिल्कुल भी समय नहीं था क्योंकि बाहर के खूबसूरत नजारे से थी अत्यधिक आनंदित कर देने वाला नजारा अंदर खुद दोनों दर्शा रहे थे। ड्राइवर बार-बार मिरर में पीछे का नजारा देखकर मस्त हुआ जा रहा था। उससे जब रहा नहीं जाता था तो खुद पीछे मुड़कर देख लेता था,,,, वह अच्छी तरह से जानता था कि औरत की उम्र थोड़ा ज्यादा थी और लड़के की उम्र कम थी,,,, ड्राइवर दोनों की उम्र के अंदर कोई अच्छी तरह से समझता था दोनों मां बेटे की उम्र की थी लेकिन वह जानता था की मां बेटे इस तरह की हरकत कभी नहीं कर सकते और वह जमाने को देख चुका था उसे मालूम था कि मर्द से ज्यादा औरत इस कदर प्यासी होती है कि वह अपनी मनमानी करने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार हो जाती है जिसका नमूना वह अपनी ही कार में देख रहा था,,,,, उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि इस उम्र में भी यह जवान लड़का कितना तेज है एक औरत के अंगों से खेलना अच्छी तरह से जानता है इसलिए तो लगातार उसके होठों का रसपान करते हुए अपने दोनों हाथ की उंगलियों को उलझा दिया था सुगंधा के ब्लाउज के बटन खोलने के लिए और जैसे-जैसे ब्लाउज का बटन खोल रहा था वैसे वैसे ड्राइवर की हालत एकदम खस्ता होते चली जा रही थी।
मोटर कार में अद्भुत आनंदित कर देने वाला वासना से भरा हुआ दृश्य दर्शाया जा रहा था ड्राइवर की हालत पतली होती चली जा रही थी घर से निकलते समय वह कभी सोचा भी नहीं था कि उसकी मोटर गाड़ी के अंदर एक खूबसूरत जवान औरत और एक जवान लड़का पूरी तरह से बेशर्म होकर एक दूसरे से मजा लेंगे,,, इस समय उसके खुद के आनंद की कोई सीमा नहीं थी वैसे तो ड्राइवर एकदम शरीफ इंसान था लेकिन इस समय जो कुछ भी उसकी कार के अंदर हो रहा था वह उसे पूरी तरह से उत्तेजित कर दिया था,,,,, अंकित देखते-देखते अपनी मां के ब्लाउज के सारे बटन खोलकर उसकी ब्रा को दोनों हाथों से पकड़ कर ऊपर की तरफ खींच दिया और उसके दोनों कबूतर एकदम से आजाद होकर हवा में उड़ने लगे,,, ड्राइवर की तो आंखें फटी की फटी रह गई मिरर में सुगंधा की नंगी चूचियों को देखकर उसके होश उड़ गए,,,, मिरर में देखकर उसकी उत्तेजना शांत नहीं हो रही थी उसका मन बेकाबू हुआ जा रहा था। इसलिए वह गाड़ी को एकदम धीमे चलते हुए बार-बार पीछे की तरफ देख ले रहा था पीछे देखने में से कुछ ज्यादा ही मजा आ रहा था उसने आज तक इतनी गोलाकार लिए हुए मदमस्त कर देने वाली चुचियी नहीं देखा था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि इस उम्र में दो बच्चों की मां होने के बावजूद ईस औरत की चूची में इतना कसाव और तनाव कैसे बरकरार रह सकता है,,,,, वह भी अपने मन में यह सोच ही रहा था कि अंकित तुरंत अपने मुंह को अपनी मां की चूची पर रखकर उसे पीना शुरू कर दिया और दूसरे हाथ से उसकी चूची पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया यह सब ड्राइवर के लिए अनदेखा अनजाना सा था आज उसकी आंखों के सामने ऐसा लग रहा था कि कोई ब्लू फिल्म चल रही थी।
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ड्राइवर उत्तेजना से ग्रस्त हुआ जा रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह धीरे-धीरे मोटर गाड़ी को आगे बढ़ा रहा था ताकि उसे मोटर गाड़ी की कहानी किसी से टक्कर ना हो जाए क्योंकि हालात जिस तरह से बने हुए थे निश्चित तौर पर ऐसे में एक्सीडेंट होने का अनुपात बढ़ जाता है और ड्राइवर नहीं चाहता था कि उसका एक्सीडेंट हो। सामान्य तौर पर यह ड्राइवर पैसेंजर के बैठने पर गाड़ी का शिशा खोल देता था, लेकिन आज वह ऐसा नहीं कर पाया था क्योंकि शीशा नीचे करने का मतलब था एक खूबसूरत दृश्य पर पर्दा पर जाना और वह ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहता था उसकी खुशी सेक्स लाइफ नीरस थी जिसमें कभी कबार ही वह अपनी बीवी के साथ संबंध बना पाता था क्योंकि दिन भर इतनी थकान हो जाती थी कि वह घर जाकर एकदम से थक कर कर हो जाता था और खाना खाकर बिस्तर पर लेट जाता था उसकी ईस हरकत से उसकी बीवी भी परेशान थी,,,, उन दोनों को देखकर कर वह अपने मन में एक तरह का कल्पना भी कर रहा था कि वह जिस तरह से अपने बीवी के साथ पेश आ रहा था उसकी जरूरत को पूरी नहीं कर रहा था हो सकता है कि उसकी बीवी भी किसी जवान लड़के के साथ यह सब करती हो,,, क्योंकि सुगंधा की उम्र लगभग लगभग उसकी बीवी की उम्र जितनी ही थी या हो सकता है दो-चार साल आगे पीछे लेकिन फिर भी दोनों की चाहत एक थी। इसलिए वह देखना भी चाहता था कि अपने पति से प्यार न पाकर एक घरेलू औरत की सहायता तक एक जवान लड़की के साथ मजा लेने के लिए तड़प पड़ती है और वही तड़प इस समय सुगंधा में दिखाई दे रही थी।
कर की सीट पर पीछे कर आराम से टिकाकर वह अपने बेटे से अपनी चूची मर्दन और स्तनपान का भरपूर मजा ले रही थी और यह सब वह ड्राइवर देखकर मस्त हुआ जा रहा था। वह अंकित को देख कर कुछ सीखने की कोशिश कर रहा था अंकित किस तरह से औरत को खुश कर रहा था यह उसके लिए अध्ययन का विषय था।
उसे साफ दिखाई दे रहा था कि एक जवान लड़का अपनी से बड़ी उम्र की औरत या यूं कह लो कि अपनी मां की उम्र की औरत के साथ बिल्कुल भी जल्दबाजी नहीं दिख रहा था सब कुछ बड़े आराम से कर रहा था उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों से बड़े प्यार से खेल रहा था उसे मुंह में लेकर चूस रहा था दबा रहा था ऐसा सब कुछ कर रहा था जिससे एक औरत को अत्यधिक आनंद की प्राप्ति होती है जबकि वह खुद अपनी बीवी के साथ आज तक ऐसा नहीं कर पाया था बस जब भी उसका मन करता था चढ़कर उतर जाता था कभी मन हुआ तो ब्लाउज के ऊपर से दबा देता था क्या नंगी चूची को दोनों हाथ में लेकर बस हल्का सा दबा दबा कर मजा लेता था,,,, उसे इस बात का ज्ञान नहीं था कि औरतों की चुची से जी भर कर खेलने पर औरत को अत्यधिक आनंद की प्राप्ति होती है,,,, कार को धीरे-धीरे चलते हुए वह बार-बार मिरर की तरफ तो कभी नजर पीछे घूमा कर देख ले रहा था,,,, उसे यह भी दिखाई दे रहा था की चूचियों से प्यार से खेलते खेलते, जोर से दबा दे रहा था जिससे सुगंधा की चीज तो निकल जा रही थी लेकिन उसे आनंद भी बहुत आ रहा था जो कि उसके चेहरे के भाव को देखकर पता चल रहा था,,,,।
मां बेटे दोनों कभी सोचा भी नहीं थी कि इस तरह से चलती कर के अंदर वह दोनों जवानी का मजा लूटेंगे सुगंध को एहसास हो रहा था कि उसका बेटा जहां मौका देखा है शुरू हो जाता है यह भी नहीं दिखता है कि कभी कुछ गड़बड़ हो गई तो लेने के देने पड़ जाएंगे चलती बस में तो ठीक था कि दोनों का केबिन अलग था जिसमें वह दोनों खुलकर मजा लूट रहे लेकिन करा के अंदर कब कैसे इंसान मिल जाए क्या भरोसा,,,, लेकिन यह भी उसे मालूम था कि अपनी हरकतों से उसका बेटा उसे पूरी तरह से मस्त भी कर देता है जाने अनजाने में ऐसा सुख प्रदान करता है कि इसके बारे में उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी। और इस समय भी उसका बेटा ही वही कर रहा था जिसमें सुगंधा को भी मजा आ रहा था,, मदहोशी के इस आलम में बार-बार सुगंधा की नजर और ड्राइवर की नजरों से टकरा जा रही थी पहले शुरू शुरू में तो सुगंधा शर्म के मारे अपनी नजरों को नीचे झुका ले रही थी लेकिन इस बात का एहसास उसे भी हो रहा था कि यह जगह उसके लिए बिल्कुल नहीं थी यहां पर उसे कोई जाने वाला नहीं था पहचान वाला नहीं था ना कोई रोकने वाला था ना रोकने वाला था इसलिए वह भी थोड़ी हिम्मत दिखा कर जब से कुछ ड्राइवर से नजर मिलती तो वह ड्राइवर को देखने लग जाती थी इसका असर यह हो रहा था कि ड्राइवर शर्मा कर अपनी नजर को वापस दूसरी तरफ घुमा ले रहा था,,,,, कुछ देर तक इसी तरह से मजा लेने के बाद अंकित अपने पेट की बटन खोलने लगा यह देखकर सुगंधा हैरान होने लगी वह अपनी आंखों को बड़ी करके अंकित की तरफ देखकर उसे इशारा भी कर रही थी कि यह सब यहां पर मत कर लेकिन वह मुस्कुराता हुआ अपनी मां की एक नहीं सुना होती अपने पेंट की बटन खोलकर पेंट को घुटने तक नीचे खींच दिया मिरर में यह सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था,,,,, अभी भी अंकित का लंड उसके अंडरवियर के अंदर केद था जो कि अच्छा खासा उभार बनाया हुआ था,,,, ड्राइवर की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि करा चलाए या कहीं पर रोक दे और यह सब कुछ अपनी आंखों से इत्मीनान से देखें,,,, लेकिन यह हाईवे काफी छोटा था कार कहीं पर भी रोका नहीं जा सकता था इसलिए मजबूरी में उसे चलाना ही था।
सड़क के दोनों तरफ बड़े-बड़े पेड़ लगे हुए थे जो आपस में ऊपर जाकर मिल जाते थे और एक अद्भुत खूबसूरत दृश्य को उपसाते थे जिसे देखकर वातावरण की खूबसूरती को देखकर मन प्रफुल्लित हो जाता था। वैसे तो मां बेटे को यहां के खूबसूरत नजारे को देखकर एक अद्भुत और अविस्मरणीय प्रवास का आनंद लेना चाहिए था लेकिन इस समय दोनों अपनी जवानी की प्यास बुझाने में लगे हुए थे,,,,, अंडरवियर के ऊपर अपने लंड पर हाथ रखते हुए अपनी मां की तरफ देखकर अंकित बोला,,,,,
देखो जान तुम्हारी जवानी देखकर कैसे खड़ा हो गया है,,,,,(अपनी मां की उम्र को जान कहकर संबोधन करना अंकित को तो बहुत अच्छा लगता था लेकिन ड्राइवर एकदम हैरान था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि एक जवान लड़का अपनी बड़ी उम्र की औरत के साथ इतना खुलकर कैसे मजा ले सकते हैं ऐसा लग ही नहीं रहा था कि दोनों की उम्र में काफी अंतर है ऐसा लग रहा था कि दोनों हम उम्र ही हैं,,,, ड्राइवर को एहसास हो रहा था कि वाकई में दोनों कितने बेशर्म है लेकिन उनकी बेशर्मी से ड्राइवर को भी कुछ सीखने को मिल रहा था कुछ देखने को मिल रहा था जिसका उपयोग अपने जीवन में करके अपनी नीरस जिंदगी को रंगीन बना सकता था। अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा की बेशरम बन चुकी थी उसे यह सब करने में भी अच्छा लगने लगा था इसलिए बिना कुछ सोचे समझे अपना हाथ अपने बेटे के अंडरवियर के उभार पर रखकर हल्के हल्के सेहराने लगी हालांकि वह कुछ बोल नहीं रही थी लेकिन उसकी निगाहें सब कुछ बयां कर रही थी मिरर में यह सब देखकर ड्राइवर की सांस ऊपर नीचे हो रही थी वह धीरे से मिरर को थोड़ा सा और नीचे की तरफ कर दिया ताकि पिछली सीट का पूरा नज़ारा वह देख सके,,, उसे साफ दिखाई दे रहा था की सुगंधा अपनी हथेली को उसके अंडरवियर पर रखकर हल्के-हल्के सहला रही थी और अंकित एकदम मदहोश हुआ जा रहा था,,,,, यह सब देखकर ड्राइवर हैरान भी था और देखते ही देखते सुगंधा दोनों हाथों से उसके अंडरवियर को पकड़ कर खींचने लगी,,, अंकित भी मौके की नजाकत को समझते हुए अपनी गांड को सीट पर से थोड़ा सा ऊपर उठा लिया और सुगंधा अंडरवियर को तुरंत नीचे की तरफ खींचकर उसके घुटनों तक लाकर छोड़ दी,,,, अंडरवियर की कैद से आजाद होते ही अंकित का मोटा तगड़ा लंड एकदम से हवा में लहराने लगा जिसे देखकर सुगंधा की आंखों की चमक एकदम से बढ़ गई उसके चेहरे की प्रसन्नता और उत्तेजना ड्राइवर को एकदम साफ दिखाई दे रही थी उसकी उत्तेजना और आंखों की चमक देखकर ड्राइवर को हैरानी हो रही थी और अंदर ही अंदर उसे एक दुख भी हो रहा था। यह दुख उसे अपनी बीवी को लेकर था।
तभी मिरर में उसने देखा की सुगंधा अपने हाथ को आगे बढ़ाकर अंकित के लंड को पकड़ कर हीलाना शुरू कर दी थी और मुस्कुरा रही थी,,,,,, उसकी मुस्कुराहट देखकर अंकित ड्राइवर से बोला,,,,।
देख रहे हो ड्राइवर साहब यही फर्क होता है जवान लड़कियों से और दो बच्चों की मां से मजा लेने में अभी उनकी जगह कोई जवान लड़की होती तो इस तरह की हरकत नहीं करती हाथ से नहीं पकड़ती लेकिन देख रही हो तो बच्चों की मां को मेरे बिना कुछ बोल ही वह अपने हाथ में लेकर कैसे खेल रही है मेरे लंड से,,,,,,(अंकित की बात सुनकर ड्राइवर पीछे मुड़कर देखे बिना नहीं रह सका और जैसे ही पीछे मुड़कर देखा तो सुगंधा के हाथ में उसका लंड देखकर उसकी भी आंखें फटी की फटी रह गई उसे एहसास होने लगा था कि वाकई में अंकित का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था वह कुछ पल के लिए अपनी नजर अंकित के लंड से हटा ही नहीं पा रहा था,,,, वह उसे देखता ही रह गया था,,, तभी सुगंधा की बात उसके कान में पड़ी जो उसकी शंका को हकीकत का स्वरूप दे रही थी वह अपनी कल्पनाओं के घोड़े को बड़ी तेजी से भगा भी रहा था वह सुगंधा के मुंह से सुना वह अपने बेटे के लंड को हाथ में पकड़ कर हिलाते हुए बोल रही थी।
ऐसा मोटा तगड़ा लंड हो तो कौन सी औरत दीवानी नहीं हो जाएगी कौन सी औरत इसे पकड़ कर खेलेगी नहीं,,,,।
(सुगंधा की बात उसके दिल पर हथौड़े की तरह चल रही थी वह अपनी बीवी को लेकर कल्पना कर रहा था और उसके मन में चल रही शंका को एक हवा से मिल गई थी सुगंधा की बात सुनकर वह अपने मन में यही सोच रहा था कि वाकई में वह अपनी बीवी को सुख नहीं दे पा रहा है तो उसकी बीवी भी किसी जवान लड़की को ढूंढ कर इस तरह से मजा लेती होगी वह तो दिन भर इस तरह से गाड़ी चलाता है अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिए लेकिन इस बीच उसे यही गलती हो जाती है कि वह अपनी बीवी को सुख नहीं दे पाता और हो सकता है कि उसकी बीवी भी इस औरत की तरह जवान लड़के में अपना सुख ढूंढ़ रही हो और अगर एक बार जवान लड़के का चस्का लग गया तो वह उसे कभी भाव भी नहीं देगी,,,, यह सब सोच कर उसका दिल बैठ जा रहा था वह अपनी बीवी के बर्ताव के बारे में सोचने लगा कि वाकई में जब वह अपने घर पहुंचता है तो उसकी बीवी भी ऐसा कुछ पहन नहीं करती कि जैसे उसका मनु उत्तेजित हो जाए और वह अपनी बीवी से शारीरिक संबंध बनाने के लिए तड़प उठे वह उसे खाना पर उसका आराम से करवट लेकर सो जाती है यह सब सोच कर उसके शंका के बदले गिरने लगे थे वह अपने मन में यही सोचने लगा था कि उसकी बीवी भी इसी तरह से जवान लड़की के साथ मजा लूट रही होगी। वह अपने मन में यह सब सो रहा था कि इसी बीच मिरर के अंदर सुगंधा नीचे झुकती हुई दिखाई दी और अगले ही पल माध्यम से झुक गई ड्राइवर को एहसास हो गया कि वह क्या करने के लिए नीचे झुकी है और वह मिरर में ना देख कर पीछे की तरफ नजर घुमा कर देखने लगा तो हैरान रह गया। वह पूरा का पूरा लंड अपने मुंह में लेकर चूस रही थी।
Car me driver k samne maja lete huye
ड्राइवर हैरान परेशान हो गया उसके माथे पर से तो पसीना टपकने लगा उत्तेजना और शंका में उसका दिल बैठ जा रहा था पिछली सीट पर जो कुछ भी हो रहा था वह उसे पूरी तरह से मदहोश और मस्त कर दिया था लेकिन उसे नजारे से वह अपनी बीवी के बारे में कल्पना करने लगा था,,,, वह अपने मन में सोच रहा था किस तरह की हरकत तो उसकी बीवी ने आज तक उसके साथ नहीं की थी,,,,, अभी वह यह सब सो ही रहा था कि तभी अंकित ड्राइवर से बोला,,,)
देख रहे हो ड्राइवर साहब इस उम्र की औरत की प्यास बुझती नहीं है इन्होंने अपने पति के साथ इस तरह की हरकत कभी नहीं की कभी भी उसके लंड को हाथ में लेकर हिलाई नहीं है ना तो मुंह में लेकर चूसी लेकिन यहां देखो बिना कुछ बोले हाथ में लेकर खेल भी रही थी और मुंह में लेकर चुस भी रही है,,,।(अंकित की बात सुनकर अपने माथे से रुमाल से पसीना साफ करते हुए ड्राइवर बोला)
देख रहा हूं,,,।
और हां मैंने तो कभी देखा नहीं लेकिन इन्होंने ही खुद बताया कि उनके पति का लंड मेरे लंड से आधा भी नहीं है और पतला है,,,, और अब आप ही सोचो भला पतले और छोटे लंड से इस औरत की प्यास बुझ पाएगी कभी,,,, बड़ी-बड़ी चूचियां बड़ी-बड़ी गांड गुलाबी बर मुझे नहीं लगता कि इनका पति ने खुश कर पाता था तभी तो यह मेरे पास आई है,,,, और हां ड्राइवर साहब इस उम्र की औरतें मोटे और लंबे लंड को ज्यादा पसंद करती है और खास करके जवान लंड को जो इनकी बुर में जाकर बुर का भोसड़ा बना दे देख रहे हो कैसे चूस रही है मलाई कोन की तरह,,,,,आहहहहह मैं तो पागल हो जाऊंगा वाकई में इस उम्र की औरत कुछ ज्यादा ही मजा देती है बिल्कुल भी नखरे नहीं करती,,,ऊमममममम पूरा गले तक लेकर चूसो मेरी जान,,,,,आहहहहहहहह ,,,,,,आहहहहहह बहुत मजाआ रहा है,,,,,।
(अंकित कि ईस तरह की बातें ड्राइवर को एकदम से परेशान कर रही थी मजा तो उसे भी आ रहा था लेकिन अपनी बीवी के बारे में कल्पना करके वह हैरान हो गया था,,,,, वाकई में दो बच्चों की मां यह औरत उसे पागलों की तरह प्यार कर रही थी इस तरह का मजा तो आज तक उसकी बीवी ने उसे कभी भी नहीं दी,,, ड्राइवर इस बारे में बहुत कुछ सोच रहा था वह अपने मन में यही सोच रहा था कि दुनिया के हर मर्द कोई इसी तरह का सुख चाहिए भले ही वह किसी भी उम्र का हो लेकिन खुद की बीवी इस तरह का सुख अपने पति को क्यों नहीं दे पाती बल्कि दूसरे मर्द को जी जान लगाकर हर एक सुख देती है जिससे वह पागल की तरह उसके आगे पीछे घूमता रहता है अब इसमें गलती किसकी है दुनिया की मर्दों की जो घर की जवाबदारी निभाने के लिए घर से बाहर निकाल कर मजदूरी करते हैं या फिर इस तरह की औरतों को जो पति को तो इस तरह का सुख नहीं देती लेकिन अपने आशिकों को खुलकर मजा देती है अगर अपने पति को किस तरह का आनंद दे तो भला पति घर पर पहुंच कर बीवी से प्यार क्यों ना करें। बीवी इस तरह का प्यार नहीं करती तभी वह घर जाकर खाना खाकर सो जाता है उसे एहसास तक नहीं होता कि उसके बिस्तर पर एक खूबसूरत औरत सोई है जिसे प्यार चाहिए और जिसका फर्ज बनता है कि अपने पति को प्यार देना चाहिए लेकिन ऐसा दोनों के बीच कुछ भी नहीं होता। ड्राइवर के दिमाग में यही बातें चल रही थी कि इन सब में गलती किसकी है मर्द की है या औरत की,,,,,, उसे सबसे ज्यादा गलती औरत की दिखाई दे रही थी क्योंकि पिछली सीट पर वही औरत थी जो घर पर अपने पति से प्यासी थी अपने घर पर अपने पति से प्यार नहीं पाती लेकिन बाहर अपने आशिक के साथ खुलकर मजा लूट रही थी और उसका आशिकों से मजा भी दे रहा था शायद इसका कारण भी यही था कि वह औरत खुद खुलकर उस मर्द को आनंद कर रही थी जो कि अपने पति के साथ वह ऐसा कुछ भी नहीं करती थी वह इस तक में रहती थी कि उसका पति सिर्फ उससे प्यार करें उसे संतुष्ट करें शायद वह औरत इस बात को भूल जाती है कि शारीरिक संबंध मर्द और औरत के बीच आपसी एहसास को दर्शाता है ना कि किसी एक की जिम्मेदारी को दर्शाता है दोनों को चाहिए कि दोनों आपस में खुलकर प्यार करें ताकि दोनों में किसी बात की कमी दिखाई ना दे लेकिन मामला पूरी तरह से उल्टा हो चुका था।
गाड़ी को धीरे चलते हुए ड्राइवर बार-बार पीछे की तरफ देख ले रहा था अंकित के चेहरे पर बदलते भाव को देख ले रहा था और उसे औरत की बेशर्मी को देख ले रहा था जो इस समय अपने बेटे की उम्र के लड़के को संपूर्ण सुख देने के इरादे से उस पर टूट पड़ी थी,,,, आधा सफर पूरा हो चुका था आधा सफर बाकी था और दोनों का भी आधा सफर बाकी रह गया था जिसे पूरा करने के लिए सुगंधा धीरे से अपने मुंह से अपने बेटे के लंड को बाहर निकाल दी और गहरी गहरी सांस लेने लगी अंकित बिना शर्माए अपनी मां को सिर पर थोड़ा सा पीछे की तरफ झुका दिया जिसे सिर्फ अपनी मां की साड़ी को ऊपर की तरफ उठने लगा लेकिन भारी भरकम गांड के नीचे दबे होने की वजह से उसकी साड़ी ऊपर की तरफ उठ नहीं पा रही थी जिसे सुगंधा खुदाई अपने हाथों से ऊपर की तरफ खींच मिलेगी यह सब ड्राइवर को मिरर में दिख रहा था उसकी गोरी गोरी चिकनी टांगों को देखकर ड्राइवर कमाई गया था और जैसे ही साड़ी जांघों तक आई तो उसके होश उड़ गए,,,, शायद वह पहली बार किसी गोरी औरत को इस अवस्था में देख रहा था और अपने मन में बोल भी रहा था कि बाप रे अपनी खूबसूरत और गोरी औरत को तो आज वह पहली बार देख रहा है घर में उसकी बीवी थोड़ा सा दबे रंग की थी इसलिए उसे नहीं मालूम था की गोरी औरत नंगी होने के बाद कैसी दिखती है वह सिर्फ कल्पना किया करता था लेकिन आज अपनी आंखों के सामने उसकी कल्पना साकार हो रही थी देखते-देखते सुगंध अपनी साड़ी को कमर तक उठा रही थी और साड़ी के अंदर उसकी ब्लू रंग की चड्डी साफ दिखाई दे रही थी,,,,, सुगंधा की ब्लू रंग की चड्डी ड्राइवर की आंखों की चमक को बढ़ा रही थी क्योंकि उसकी बीवी साड़ी के अंदर चड्डी नहीं पहनती थी साड़ी के अंदर वह नंगी ही रहती थी,,, पहले तो खुद ड्राइवर को भी यह सब सामान्य लगता था लेकिन आज अपनी पिछली सीट पर एक औरत को ब्लू रंग की चड्डी पहने हुए देखकर उसे एहसास होने लगा कि उसके जीवन में कितनी बड़ी कमी है वह भी अपनी बीवी को इसी अवस्था में देखना चाहता है,,, क्या हो सकता है कि अपने आशिक के पास जाने से पहले वह भी इस तरह की चड्डी पहन लेती हो जिसे उतार कर उसका आशिक एकदम मस्त हो जाता होगा यह सब ख्याल ड्राइवर को उत्तेजना के साथ-साथ परेशानी भी दे रही थी।
सुगंधा सीट पर लेट चुकी थी और अंकित अपने दोनों हाथ को आगे बढ़कर अपनी मां की चड्डी को पकड़ कर नीचे की तरफ खींचने लगा था एक बार फिर से सुगंध अपने बेटे का साथ देते हुए अपनी गांड को ऊपर उठा दी और अंकित बिना देर की अपनी मां की चड्डी को उसके बदन से अलग कर दिया,,, अपनी मां की चड्डी को बगल में रखते हुए वह बोला,,,।
ड्राइवर साहब एक बात मानना पड़े इस उम्र की औरत की चड्डी अपने हाथों से उतारने में जो मजा मिलता है वाकई में वह मजा किसी और चीज में नहीं है,,, तुम भी कभी ऐसा मजा लेना बाहर की औरत के साथ दिल खुश हो जाएगा,,,,(अपने बेटे की इस तरह की बात सुनकर सुगंधा के तन बदन में आग लगी हुई थी वह उत्तेजना की जान शिखर पर पहुंच चुकी थी अब उसे ड्राइवर से बिल्कुल भी शर्म नहीं लग रही थी इसलिए वह अपनी एक टांग को एकदम से फैला कर ड्राइवर की सीट के बगल में कर दी एकदम उसके चेहरे के पास ड्राइवर की तो हालत खराब होने लगी एक खूबसूरत औरत की टांग अपने सर के पास महसूस करके वह नजर पीछे घूम करके देखा तो सुगंध अपनी हथेली से अपनी बुर को मसल रही थी,,,, ड्राइवर की हालत और ज्यादा खराब होने लगी ड्राइवर नजर पीछे घूम कर आश्चर्य से फटी आंखों से इस खूबसूरत नजारे को देख रहा था और सुगंध भी अपनी हथेली को अपनी बुर पर रगड़ते हुए अपनी उंगलियों को खोल दे रही थी ताकि उंगलियों के बीच से वह ड्राइवर उसकी बुर के दर्शन कर सके ड्राइवर को एहसास हो रहा था कि उसकी पूरे दिन चिकनी थी बाल का रेशा तक नहीं था ऐसा लग रहा था कि जैसे अभी-अभी क्रीम लगाकर साफ की हो,,,,,,, सूरज एकदम से अपनी मां का हाथ पकड़ कर उसकी हथेली को उसकी बुर से हटाते हुए उसकी चिकनी बुर को देखकर उसकी तारीफ करते हुए बोला,,,।
आहहहहह क्या मस्त बुर है एकदम कचोरी की तरह खुली हुई एक जवान लड़के को और क्या चाहिए,,,,, देख रहे हो ड्राइवर साहब ऐसी चिकनी बुर देख कर तो मुर्दे का भी लंड खड़ा हो जाए,,,,(अंकित की बात सुनकर ड्राइवर नजर पीछे घूमाकर नजर भरकर सुगंधा की बुर को देखने लगा,,,, ड्राइवर की आंखों की चमक बता रही थी कि वह कितना ज्यादा उत्तेजित हो चुका था उसकी उत्तेजना को देखकर अंकित बोला,,,)
मुझसे मिलने के पहले यह अपनी बर के सारे बाल साफ करने की क्रीम लगाकर और घर पर बालों वाली बुर लेकर घूमती रहती है,,,,, हम लड़कों को अपना गुलाम बनाने के लिए औरतों को ढेर सारा होना रहता है मैं तो पागल हो जाता हूं इसकी चिकनी बुर देखकर,,,(अंकित कि ईस तरह की बात सुनकर ड्राइवर एकदम हैरान हो जाता है यह सोचकर मजबूर होने के लिए की यह सब वाकई में क्या है उसने तो अपनी बीवी की बुर को चिकनी होते हुए कभी नहीं देखा था हमेशा उसके बाल के गुच्छे बुर पर दिखाई देते हैं वह कभी क्रीम लगाकर अपनी बुर को साफ नहीं की थी या ऐसा भी हो सकता है कि अपने आशिक से मिलने से पहले वह भी क्रीम लगाकर अपनी बर के बाल साफ कर देती हो अगर ऐसा करती भी होगी तो उसे कहां पता चलने वाला है दो-तीन महीने में एकाद बार तो वह अपनी बीवी की बुर को देखता है,,, ऐसा कभी नहीं हुआ कि वह अपनी बीवी की चिकनी बुर को देखा हो उस पर हल्के हल्के बाल रहते हैं,,,, अपने मन में ऐसा सोच ही रहा था कि कभी उसे ख्याल आया कि एक बार वह अपनी बीवी की बुर पर हल्के हल्के बाल देखा था लेकिन उस समय उसे कुछ समझ में नहीं आया वह सामान्य बना रहा लेकिन आज अपनी आंखों से यह सब देखकर उसे विश्वास होने लगा था कि उसकी बीवी का भी चक्कर किसी जवान लड़के के साथ है वह भी उससे मिलने से पहले अपनी बुर के बाल साफ कर लेती होगी,,,, यह सब सोच कर उसका दिमाग खराब हुआ जा रहा था और इसी बीच, अंकित अपनी मां की टांगों के बीच झुकता हुआ उसकी बुर पर अपने होठ रख दिया और उसे चाटना शुरू कर दिया,,, ड्राइवर सामने देखने में व्यवस्था लेकिन अंकित की हरकत से उसकी मां के मुंह से एकदम से सिसकारी की आवाज फूट पड़ी।
सहहहहह आबहहहहह मेरेराजा,,,,
(इतना सुनते ही ड्राइवर अपनी नजर पीछे घूमा कर देखा तो उसके होश उड़ गए अंकित उसे औरत की बुर को चाट रहा था पागलों की तरह जीभ डालकर उसकी मलाई को चाट रहा था ड्राइवर यह सब देखकर एकदम से हैरान हो गया उसे तो अपनी आंखों पर यकीन ही नहीं हो रहा था उसने सिर्फ सुन रखा था कि यह सब भी होता है लेकिन आज अपनी आंखों से यह सब देख रहा था और इस बात से और ज्यादा हैरान हो रहा था कि उसे लड़के की हरकत से पिछली सीट पर टांगे फैलाए औरत को अत्यधिक आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,,, यह देखकर ड्राइवर हैरान था यह कैसा खेल है भला एक जवान लड़का एक औरत की बुर को कैसे चाट सकता है जहां से वह पेशाब करती है क्योंकि आज तक ऐसा उसने कभी नहीं किया था,,,, और नहीं कभी इस बारे में सोचा था क्योंकि उसे भी बड़ा अजीब लगता था सोचकर ही लेकिन आज अपनी आंखों से देखकर उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह यह सब क्या देख रहा है। जिस कार्य को करने में उसे घिन्न आता था और उसने आज तक ऐसा काम किया भी नहीं था इस कर को यह जवान लड़का पागलों की तरह कर रहा था और उसकी हरकत से वह औरत मदहोशी के सागर में डुबकी लगा रही थी,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि भला इस तरह की हरकत से एक औरत इतना आनंदीत कैसे हो सकती है,,,, तभी ड्राइवर के कानों में फिर से सुगंधा के आनंदित होने की सरकारी की आवाज सुनाई देने लगी,,,)
सहहहहहह आहहहहहहहह,,,,ऊमममममममम ओहहहहह मेरे राजा और जोर-जोर से चाटो,,,,ऊममममम पूरी मलाई चाट जाओ,,ओहहहहह मेरे राजा तू तो मुझे पागल कर देगा,,,,,,।
(सुगंधा की गरमा गरम सिसकारी और उसकी मदहोशी भरी बातें सुनकर ड्राइवर हैरान था उसे यकीन तो नहीं हो रहा था लेकिन अपनी आंखों के सामने जो कुछ भी हो रहा था उसे देखकर इस कार्य को करने में औरत को कितना मजा आता है,,, उसने तो आज तक अपनी औरत के साथ ऐसी कोई हरकत किया नहीं था लेकिन उसे हल्का-हल्का याद आ रहा था कि एक बार शुरू शुरू में जब उसके कोई औलाद नहीं थे तब उसकी औरत उसके ऊपर चढ़ने की कोशिश की थी अपनी भारी भरकम गांड को उसके चेहरे पर रखने की कोशिश की थी लेकिन उसने उसे धक्का देकर हटा दिया था क्योंकि उसकी हरकत उसे पसंद नहीं थी उसे समय तो वह अपनी बीवी की तरफ से इसे सामान्य हरकत ही समझ रहा था लेकिन आज सुगंधा की हरकत और उसकी हालत को देखकर उसे एहसास होने लगा था कि उसकी औरत भी उसके साथ शायद इसी तरह का सुख लेना चाहती थी इसी तरह का मजा लेना चाहती थी और वह मुझे नहीं बोल पा रही थी तो खुद ही अपनी बुर को उसके होठों पर रखना चाहती थी जिसे वह हटा दिया था,,,,, बरसों पहले हुई इस हरकत के बारे में आज सोचकर ड्राइवर हैरान को जा रहा था उसे एहसास हो रहा था कि उसकी औरत भी इस तरह का सुख भोगने चाहती थी और उसने कभी ऐसी हरकत को अंजाम नहीं दिया था तो ऐसा भी हो सकता है कि इस तरह का सुख वह अपने आशिक से प्राप्त करती हो और और अपनी पिछली सीट पर जवान लड़के की हरकत को देखकर उसे यकीन हो गया था कि लड़के इस तरह की हरकत करने से बिल्कुल भी बाज नहीं आते उन्हें भी शायद यह सब करने में मजा आता है,,,, उसकी बीवी की भी बुरे कोई आशिक चाट रहा होगा उसे सुख दे रहा होगा तभी तो उसके बाद से उसने कभी भी अपने मन की इच्छा जाहिर नहीं होने दी थी। यह सब सो कर ड्राइवर के माथे से पसीना टपकने लगा था और पिछली सीट पर घमासान मचा हुआ था अंकित पागलों की तरह अपनी मां की बुर चाट रहा था और सुगंधा दोनों हाथ से अपने बेटे के सर को पकड़ कर अपनी बुर पर दबाई हुई थी,,,, तभी सुगंधा की आवाज बड़ी जोर से आने लगी,,,)
ओहहह मेरे राजा मेरे को गई मेरा होने वाला है मेरा निकलने वाला है मैं जा रही हूं मेरे राजा जोर-जोर से चाट,,,,(उसका इतना कहना था कि ड्राइवर पीछे नजर घुमा कर देखा तो उसके होश उड़ गए सुगंधा की बुर से मदन रस के पिचकारी फूट पड़ी थी जो अंकित के चेहरे को पूरी तरह से भिगोने लगी थी ड्राइवर पहली बार किसी औरत को इस तरह से झड़ते हुए देख रहा था उसे तो समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह पूरी तरह से उत्तेजना से मदहोश हो चुका था मस्त हो चुका था उसका लंड भी खड़ा हो चुका था इस तरह के कड़कपन का एहसास उसे कभी पहले नहीं हुआ था जैसा आज हो रहा था)
बाप रे तुमने तो मेरे चेहरे को गीला कर दी,,,,(अपने मुंह को अपनी मां की बुर से हटाते हुए अंकित बोल तो ड्राइवर उसके चेहरे को देखने लगा और मुस्कुरा दिया वाकई में सुगंधा के बुरे से निकलने वाली पिचकारी उसे भिगो दी थी अंकित अपनी मां के पेटीकोट से ही अपने चेहरे को साफ करने लगा,,,,, ड्राइवर को लग रहा था कि झड़ने के बाद दोनों का काम खत्म हो चुका था लेकिन तभी सुगंधा अपनी बर को फिर से अपनी हथेली से मसलते हुए बोली)
चला जा मेरे राजा डाल दे अपने लंड को मेरी बुर में बुझा दे मेरी प्यास,,,,आहहहह बिल्कुल भी देर मत कर तू सच कह रहा था कार के अंदर कुछ ज्यादा ही मजा आता है,,,,,,।
(सुगंधा की बात सुनकर ड्राइवर हैरान था उसे अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा था कि दो बच्चों की मां अपनी प्यास बुझाने के लिए अपने बेटे की उम्र के लड़के से मिन्नते कर रही थी,,,, और घर पर अपने पति को ऐसा सुख कभी नहीं देती होगी जो एक जवान लड़के को दे रही थी,,,,, ड्राइवर के मन में दुख हो रहा था कि एक औरत इस उम्र मे पहुंचकर अपनी खुशियों का अपनी जरूरत का कितना ख्याल रखती है कि अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए अपने पति से बेवफाई करके अपने बेटे की उम्र के लड़के के साथ इस कारण आती है अपनी जरूरत को पूरा करती है अपनी इज्जत उसे देती है और एक मर्द जो अपने घर की जरूरत को पूरा करते-करते मर जाता है वह कभी भी अपने सुख को इस तरह से बाहर की औरतों में नहीं ढूंढता,,,, और अगर ढूंढता भी होगा तो इस तरह से बेशर्म तो नहीं बन जाता जिस तरह से यह औरत अनजान मर्द के सामने खुलकर मजा लूट रही है और वह भी अपने बेटे की उम्र के लड़के के साथ। अपनी मां की प्यास को बुझाने का चुम्मा अपने कंधे पर लेकर अंकित अपनी पेंट को पूरी तरह से कार के अंदर ही निकाल दिया और कमर के नीचे से नंगा हो गया,,,, ड्राइवर लगातार अपनी नजर को पीछे बनाया हुआ था कभी मिरर में तो कभी खुद पीछे नजर घूमाकर सब कुछ देख रहा था अंकित के लंड को देखकर उसके मन में भी इस बात का एहसास होने लगा कि काश उसका लैंड कितना मोटा और लंबा होता तो वह भी अपनी पत्नी को शरीर सुख अच्छी तरह से दे सकता था और देखते-देखते उसकी आंखों के सामने अंकित अपनी मां की बुर में अपना लंड डाल दिया और उसे अपनी कमर को जोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया।
ड्राइवर को ऐसा था कि काफी देर से लंड खड़ा होने की वजह से और चुसाई करवाने के बाद दो-तीन मिनट में ही उसका पानी निकल जाएगा लेकिन वह हैरान होता चला गया जब धीरे-धीरे समय गुजरने लगा वह अपनी मां की चुदाई बड़े जोरों से कर रहा था उसकी रफ्तार बिल्कुल भी काम नहीं हो रही थी यहां तक कि उसे अपनी गाड़ी के अंदर फच्च फच्च की आवाज बड़ी तेजी से सुनाई दे रही थी,,,और वह ईस बात को जानता था कि ईस तरह की आवाज उस औरत की बुर से ही आ रही थी,,,, इस तरह की आवाज को सुनकर ड्राइवर मदहोश हो रहा था उसे भी एहसास हो रहा था कि वाकई में उसने अब तक अपने जीवन में कितना अच्छा समय सिर्फ थकान के मारे गंवा दिया था अपनी जरूरत को पूरा करने में अपने परिवार की जरूरत को पूरा करने में गवा दिया था जबकि अपनी शारीरीक जरूरत को अनदेखा कर दिया था। अंकित पागलों की तरह अपनी मां की चुदाई कर रहा था उसका मोटा तगड़ा लंड बड़ी आराम से उसके गुलाबी छेंद में अंदर तक जाता था और बाहर आ रहा था,,, हर धक्के के साथ सुगंधा के मुंह से आहहहहह आहहहहह की आवाज निकल रही थी यह देखकर ड्राइवर अंदर ही अंदर दुखी हो रहा था कि अपने पति को छोड़कर एक जवान लड़के के साथ मजा लेते हुए कैसी-कैसी आवाज निकाल रही है यह औरत,,,,, काफी देर तक इसी अवस्था में अंकित अपनी मां की चुदाई करता रहा और गाड़ी धीरे-धीरे आगे बढ़ती रही,,,, अंकित को एहसास हो रहा था कि अब आसन बदलने का समय आ चुका था,,, इसलिए वह धीरे से अपने लंड को अपनी मां की बुर से बाहर निकाला,,,, और खुद सीट पर बैठ गया अपनी टांगें फैला कर,,,।
Car me chudai ka maja lete huye
ड्राइवर यह सब अपनी आंखों से देख रहा था वह देखना चाहता था कि अब क्या होने वाला है उसे लग रहा था कि शायद अंकित का पानी निकल चुका है लेकिन ऐसा नहीं था शायद अंकित के इशारे को उसकी मां समझ गई थी और वह धीरे से अपनी जगह से उठकर बैठ गई और फिर अपने बेटे की तरफ मुंह करके घूम गई और घुटनों के बाल उसके घुटनों के इर्द-गिर्द अपने घुटनों को रखकर अपनी भारी भरकम गांड को अपने बेटे के लंड पर रखने लगी,,, और देखते ही देखते ड्राइवर की आंखों के सामने अंकित का मोटा तगड़ा लंड सुगंधा के गुलाबी बुर के अंदर खो गया,,,, और सुगंधा अपने बेटे के कंधों को पकड़ कर अपनी गांड को पटकना शुरू कर दी,,,, और तब तक पटकती रही जब तक की दोनों का पानी नहीं निकल गया,,,, मां बेटे पूरी तरह से फिर से प्राप्त हो चुके थे एक अनजान इंसान के सामने और वह भी चलती गाड़ी के अंदर और यह सब देखकर ड्राइवर भी मत हो चुका था उसे एहसास हो रहा था कि उसने अपने जीवन में कितनी बड़ी गलती कर दिया है अपनी पत्नी की प्यास को ना बुझा कर,,, मां बेटे दोनों अपने कपड़े को दुरुस्त करके बैठ चुके थे और थोड़ी देर में वह स्थान आ चुका था जहां पर आने के लिए उन्होंने कार कों किराए पर लिया था।
दोनों कर से उतर चुके थे और निश्चित की गई रकम के अलावा ₹100 का नोट भी उस ड्राइवर को देने लगे लेकिन ड्राइवर ने लेने से इनकार कर दिया,,, तो अंकित बोला।
क्यों क्या हुआ यह तो आपने पहले ही बता दिया था कि 50 100 लोग ज्यादा देकर जाते हैं तो हम भी ₹100 दे रहे हैं ले लो,,,।
नहीं नहीं मुफ्त में इतना खूबसूरत नजार तुम दोनों जलने दिखाया है वह कभी जिंदगी भर में बोलने वाला नहीं और मुझे यह सब देखकर कुछ सीखने को भी मिला है इसलिए मैं यह ₹100 नहीं ले सकता,,,,,(इतना कहकर वह फिर से अपनी कार में बैठ गया वैसे तो वह रुकना चाह रहा था लेकिन यहां पर कितना समय लगता है इस बारे में मां बेटे दोनों नहीं जानते थे इसलिए उसे जाने के लिए कह दिए थे और वैसे भी उसे ड्राइवर की आंखों के सामने जो काम लीला दोनों ने दिखाया था उसे ड्राइवर को वह दोनों ज्यादा देर तक साथ में नहीं रख सकते थे,,, वह ड्राइवर मुस्कुराता हुआ चला गया था।
वाह अंकित के फिर से मज़े आ गए बिंदिया भी मिल गई लगती है अब तो !मोटर गाड़ी में एक अनजान ड्राइवर के सामने मजा लेने के बाद मां बेटे दोनों अपने गंतव्य स्थान पर पहुंच चुके थे। सुगंधा को धीरे-धीरे महसूस हो रहा था कि वह कितनी बड़ी बेशर्म हो चुकी है,,, अनजान लोगों के सामने संभोग सुख प्राप्त करने का जो आनंद होता है वह तो पूरी तरह से मस्त कर देता है लेकिन इस मजे के पीछे जो खतरा रहता है उसे बात से सुगंधा बिल्कुल भी अनजान नहीं थी वह जानती थी कि इस तरह की हरकत करते हुए अगर सामने वाला इंसान दुष्ट प्रवृत्ति का हुआ तो लेने के देने पड़ सकते हैं लेकिन अभी तक उसकी किस्मत इतनी तेज थी कि, अभी तक उसके साथ ऐसी कोई घटना नहीं हुई थी इसलिए तो उसकी हिम्मत दिन ब दिन बढ़ती जा रही थी। लेकिन इस तरह की हरकत करने में जो सुख से मिल रहा था उसे बारे में उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी उसे इस बात का एहसास था कि उसके बेटे ने धीरे-धीरे उसे पूरी तरह से रंडी बना दिया था जो किसी के भी सामने अपनी टांगें खोलकर अपने देश कीमती खजाने को दिखाने से बिल्कुल भी कतराती नहीं थी। दर्जी के सामने होटल में वेटर के सामने, और फिर कार में ड्राइवर के सामने, धीरे-धीरे सुगंधा का अनुभव बढ़ता जा रहा था।
मां बेटे दोनों गंतव्य स्थान पर पहुंच चुके थे यहां पर पहुंचते ही लोगों की भीड़ दिखाई दे रही थी। भीड़ देखकर करो ना इस बात का एहसास हो रहा था कि वाकई में पर्यटक के लिए यह स्थल कितना मायने रखता है,,,, मोटर गाड़ी के अंदर जिस तरह का व्यायाम मां बेटे ने किया था उससे उन्हें थोड़ी बहुत थकान महसूस हो रही थी और उन्हें ताजगी की जरूरत थी, और सामने ही एक छोटी सी चाय की दुकान थी जिस पर ईक्का दुक्का लोग ही बैठे थे मां बेटे को यही जगह उचित लगी चाय पीने के लिए। और दोनों चाय की छोटी सी दुकान पर पहुंच कर चाय पीने के लिए,, दुकानदार ने चाय को गर्म करके दो कप चाय निकाल कर दे दिया साथ में दो पाव भी दिया खाने के लिए वैसे पांव के लिए सुगंधा नहीं बोली थी क्योंकि उसे थोड़ी बहुत भूख लगी हुई थी। मौसम बहुत सुहाना था दिन के 11:00 बज रहे थे लेकिन फिर भी बादल की वजह से धूप बिल्कुल भी नहीं थी और ठंडी ठंडी हवा बह रही थी यही मौसम तो सही होता है कहीं भी घूमने के लिए,, मौसम का आनंद लेते हुए मां बेटे दोनों चाय की चुस्की लेने लगे और साथ में पाव का स्वाद भी। चाय पीने के बाद कुछ देर तक दोनों मां बेटे वहीं पर बैठे रहे लोगों को देखते रहे थोड़ी ही दूर पर झरना बह रहा था उसके नीचे गिरने का शोर दोनों के कान में सुनाई दे रहा था तेज चलती हवाओं के साथ पानी की बौछारें भी हवा में खुलकर वातावरण को और भी ज्यादा ठंडक प्रदान कर रही थी झरना देखने के लिए थोड़ी ऊंचाई पर जाना पड़ता था और लोग धीरे-धीरे पहाड़ी भी चढ़ रहे थे यह देखकर अंकित अपनी मां से बोला।
चढ़ने के लिए तैयार तो होना थोड़ी चढ़ाई ज्यादा है,,, ज्यादा ऊंचाई पर पहुंचोगी तो ज्यादा मजा आएगा देखने में,,,,।
कोई दिक्कत नहीं है तेरे पर जब चढ़ाई कर ली तो यह क्या है,,, (सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली,,, तो अपनी मां की बात सुनकर अंकित भी मुस्कुराते हुए बोला)
बात तो तुम सही कह रही हो जब तुम मेरे लंड पर चढ़ाई कर सकती हो तो कहीं भी चढ़ सकती हो वैसे कहो तो मैं तुम्हें लंड पर बिठाकर ही ऊंचाई पर पहुंचा दुं,,,,।
नहीं नहीं इसकी जरूरत नहीं है,,,, फिलहाल मुझे किसी और चीज की जरूरत है,,, (अपनी नजर को इधर-उधर घूमाते हुए वह बोली तो अंकित पूछा )
किसकी जरूरत है मेरे होते हुए,,?
किसी अच्छी जगह की झाड़ियां से घिरी हुई जगह जहां पर मैं बैठकर ईत्मिनान से पेशाब कर सकूं,,,।
ओहहह यह बात है मुझे तो लगा किसी और का लेने का विचार है।
बच्चु अगर किसी और का लेने लग गई ना तो देख कर हिलाने के सिवा और कुछ नहीं रह जाएगा तेरे पास,,,, (अपनी आंखों को नचाते हुए सुगंधा बोली और अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और इधर-उधर देखने लगी, यह देखकर अंकित अपनी मां से बोला,,)
वह देखो पान की दुकान के पीछे घनी झाड़ियां है वहीं पर जाकर कर लो वहां कोई है भी नहीं,,,,।
हां तु ठीक कह रहा है मुझे वही जाना चाहिए,,, (इतना कहकर वह अपने बेटे के द्वारा बताए गए पान की दुकान की तरफ जाने लगी अंकित वहीं पर बैठा रह गया और देखते-देखते सुगंधा अपनी गांड मटकाते हुए पान की दुकान के पास पहुंच चुकी थी,,,, सुगंधा इधर-उधर बराबर नजर रख रही थी कि कहीं कोई देख ना ले और वैसे भी पान की दुकान के पास कोई खड़ा नहीं था इसलिए वह निश्चिंत थी और जल्द ही पान की दुकान के पीछे पहुंच गई, पान की दुकान लकड़ी के बड़े-बड़े पाटी से बनी हुई लकड़ी की ही दुकान थी,,, जो जगह-जगह से थोड़ी टूटी हुई थी,,,, जल्द ही सुगंधा पान की दुकान के पीछे पहुंच चुकी थी घनी झाड़ियां के पास लेकिन अंकित को उसकी मां दिखाई नहीं दे रही थी क्योंकि घनी झाड़ियां बड़ी-बड़ी थी लेकिन पान की दुकान वाले की हरकत उसे एकदम साफ दिखाई दे रही थी उसे इस बात का एहसास हो गया था कि उसकी दुकान के पीछे एक खूबसूरत औरत गई थी और क्या करने गई थी यही देखने के लिए अपनी दुकान में से पीछे की तरफ देख रहा था यह देखकर अंकित की आंखों की चमक बढ़ गई और अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ और सीधा पान की दुकान के पास पहुंच गया,,,, दुकानदार अभी भी दुकान में बैठे-बैठे ही लकड़ी की टूटी हुई पाटी में से पीछे की तरफ देख रहा था। वह नहीं जानता था कि अंकित वहीं खड़ा है वह पीछे देखने में ही मशगुल था। अंकित को बड़ा अजीब लग रहा था कि वह पीछे देख क्या रहा है क्योंकि वह तो दुकान में बैठा हुआ था और उसकी मां ठीक दुकान के पीछे पेशाब करने के लिए गई थी लेकिन तभी अंकित ने ध्यान दिया और वह भी इस दिशा में देखने लगा जहां से वह पान की दुकान वाला देख रहा था।
जब थोड़ा बहुत अपनी नजर को स्थिर करने के बाद उसे जो नजारा दिखाई दिया उसे देखकर तो उसके होश उड़ गए क्योंकि पान की दुकान में बैठे-बैठे वह दुकान वाला उसकी मां को पेशाब करते हुए देख रहा था जिस जगह को उसकी मां और वह सुरक्षित समझ रहे थे वह जगह पूरी तरह से असुरक्षित थी क्योंकि दुकानदार की दुकान की लकड़ी की पाटीयां टूटी हुई थी और उस पाटी में से सब कुछ दिखाई दे रहा था,,,, अंकित ने देखा कि उसकी मां दूसरी तरफ मुंह करके पेशाब कर रही थी और उसके दाएं और घनी घनी झाड़ियां थी,,, वह इस बात से निश्चिंत थी की घनी झाड़ियों के सहारे बैठे होने की वजह से उसे कोई देख नहीं पाएगा,,, लेकिन वह कहां जानती थी कि जिस पान की दुकान का सहारा लेकर घनी झाड़ियों में बैठकर पेशाब कर रही थी ताकि कोई देख ना ले वही पान की दुकान वाला ही उसे नजर भर कर देख रहा था अंकित को भी उसकी मां की जवानी से भरी हुई नंगी गांड दिखाई दे रही थी और पान की दुकान वाला प्यासी नजरों से उसकी मां को देखा हुआ पेंट के ऊपर से अपने लंड को मसल रहा था,,, वैसे तो किसी गैर इंसान के सामने अपनी मां के साथ मजे लेने में उसे बिल्कुल भी दिक्कत महसूस नहीं होती थी लेकिन इस समय न जाने क्यों पान की दुकान वाले पर उसे गुस्सा आने लगा और वह एकदम से जोर से बोला।
यह क्या हो रहा है,,,?
(इतना सुनते ही वह दुकानदार एकदम से चौंक गया और एकदम से अंकित की तरफ देखने लगा वह घबरा गया था वह कुछ बोल पाता इससे पहले ही अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला)
तुम्हें शर्म नहीं आती एक औरत को पेशाब करते हुए देख रहे हो तो मैं यह सोचना चाहिए कि वह औरत शर्म के मारे तुम्हारी दुकान के पीछे झाड़ियो के बीच जाकर पेशाब कर रही है ताकि कोई देखने नहीं और तुम उसके इसी मजबूरी का फायदा उठाकर उसे देख रहे हो,,,, अगर लोगों को पता चलेगा कि तुम इस तरह की हरकत करते हो तो तुम्हारा क्या हाल होगा पता है,,,।
अरे नहीं नहीं बेटा ऐसा बिल्कुल भी मत करना मैं तो अनजाने में देख लिया था मुझे क्या मालूम की कोई औरत मेरे दुकान के पीछे पेशाब करने के लिए बैठी है,,,,,।(अंकित की बात सुनकर वह दुकान वाला घबरा गया था)
चलो कोई बात नहीं अब इस तरह से गलती मत करना,,,।
नहीं नहीं बेटा बिल्कुल भी नहीं,,,,,।
ठीक है,,,, मुझे कुछ चिंगम दे दो मैं वही लेने आया था और देखा तो तुम कुछ ओर ही काम में लगे हुए हो,,,।
(इतना सुनते ही वह दुकान वाला एकदम से बोतल में से चिंगम निकाल कर देने लगा तब तक वहां पर दो-तीन ग्रह और भी आ चुके थे लेकिन ईस बीच सुगंधा पेशाब कर चुकी थी और उठकर खड़ी हो गई थी,,,,, अंकित नहीं चाहता था कि उसे दुकान वाले को पता चले कि उसका और औरत के बीच मां बेटे का रिश्ता है या किसी प्रकार का रिश्ता है इसलिए वह तुरंत चिंगम लेकर वहां से थोड़ा दूर चला गया था,,,, और थोड़ी देर में उसकी मां भी इधर-उधर नजर घुमा कर देखते हुए उसके पास पहुंच चुकी थी,,,, अपनी मां को देखकर अंकित बोला,,,)
बहुत देर लगा दी मुतने में,,,,।
क्यों क्या हुआ जब तक निकलेगा नहीं तब तक तो करना ही पड़ेगा ना,,,,।
बात तो सही है लेकिन जिसका सहारा लेकर पीछे बैठी थी वही तुम्हें नजर भर कर देख रहा था,,,।
कौन ,,,?(एकदम से चौंकते हुए सुगंधा बोली)
वो पान की दुकान वाला,,,, (पान की दुकान की तरफ देखते हुए अंकित बोला तो सुगंध भी उसी तरफ देखने लगी और आश्चर्य जताते हुए बोली)
लेकिन,,,,, वह तो दुकान में है,,,।
वह तो दुकान में है लेकिन जिस दुकान में है उसकी लकड़ी की पाटी टूटी हुई है और वहां से उसे तुम्हारी गांड एकदम बराबर दिखाई दे रही थी,,, (अंकित मुस्कुराते हुए बोला तो सुगंधा के चेहरे पर शर्म की लाली छा गई) चलो कोई बात नहीं मैंने उसे समझा दिया हूं कि इस तरह की हरकत दोबारा मत करना वरना लेने के देने पड़ जाएंगे,,,,।
बाप रे मुझे तो लगा था कि कोई देखे ही नहीं रहा है,,,।
सबको ऐसा ही लगता है कि वह लोग सुरक्षित है लेकिन उन्हें देखने वाले कहीं ना कहीं से मिल ही जाते हैं,,,।
अच्छा है कि यहां पर हम लोगों को कोई नहीं जानता,,,।
तभी तो इतनी दूर आए हैं मजा लेने के लिए,,, अब चलो 11:30 यही बज गए हैं अब हमें चलना चाहिए,,,।
ठीक है,,,,।
(और इतना कहकर मां बेटे दोनों पहाड़ी पर संभल कर ऊपर की तरफ आगे बढ़ने लगे,,, जगह-जगह पर छोटी-छोटी सीढ़ियां बनी हुई थी जिस पर चढ़ते समय सुगंधा की भारी भरकम गांड और भी ज्यादा उभार लिए नजर आती थी,, वैसे तो अंकित हो जाएगी अपनी मां को नंगी देखा था लेकिन हर वक्त उसकी हर एक अदा एक नई सी उमंग अंकित के तन बदन में जगा देती थी,, और उसे ऐसा ही लगता था कि जो कुछ भी वह देख रहा है वह पहली बार देख रहा है। सुगंधा आगे आगे चल रही थी और अंकित पीछे-पीछे चल रहा था,,,। मौसम सुहाना होने की वजह से गर्मी के मौसम भी ठंडक महसूस हो रही थी और यही यहां की खासियत थी और यही मौसम मां बेटे के लिए उचित भी था वरना गर्मी में पहाड़ी पर चढ़ना कितनी मुसीबत खड़ी कर देता है लेकिन इस समय दोनों को कोई भी दिक्कत नहीं आ रही थी। ठंडी ठंडी हवा चल रही थी मौसम का साथ बराबर मिल रहा था साथ में और भी लोग थे जो ऊपर की तरफ जा रहे थे और कुछ लोग नीचे की तरफ आ रहे थे। आने वालों के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव साफ दिखाई दे रहे थे जिससे साफ पता चल रहा था कि वाकई में ऊपर से नजारा देखने में ज्यादा आनंद आता है। इसलिए तो मां बेटे दोनों खुशी-खुशी ऊपर की तरफ चढ़ रहे थे। कुछ लोग और भी थे जो अंकित के साथ-साथ ऊपर चढ़ रहे थे और अंकित उन लोगों को देख रहा था उन लोगों की नजर उसकी मां की भारी भरकम गोलाकार गांड पर ही टीकी हुई थी जिसे देखकर वह अलग वापस में धीरे-धीरे बात कर ले रहे थे,,,,।
कुछ देर तक और कुछ दूरी तक यह सिलसिला चलता रहा हालांकि अंकित को इन सब बातों का बिल्कुल भी बुरा नहीं लग रहा था बल्कि उसे तो अच्छा लग रहा था। कि उसकी मां की जवानी देखकर ना जाने कितनों का खड़ा हो जाता है,,,, कुछ देर बाद वह लोग आगे निकल गए क्योंकि सुगंधा को थोड़ी सी थकान महसूस हो रही थी और वह धीरे-धीरे ऊपर की तरफ चढ़ रही थी। रास्ते में थोड़ी-थोड़ी दूर पर झुग्गी वाली नाश्ते की दुकान भी थी। जिसमें कुछ लोग बैठकर रेस्ट कर रहे थे और नाश्ता भी कर रहे थे। यह सब देखकर सुगंधा और उसके बेटे को अच्छा ही लग रहा था। लेकिन चढ़ते चढ़ते काफी थकान महसूस हो रही थी जगह-जगह पर पत्थर की कुर्सियां भी रखी हुई थी जिस पर लोग बैठ कर आराम भी कर ले रहे थे पहाड़ी पर चढ़ते समय छोटे-बड़े पेड़ जंगली झाड़ियां सब कुछ था जिससे यहां का नजारा बेहद खूबसूरत लग रहा था और वैसे भी आसमान में धीरे-धीरे बादल छा रहे थे हवाएं चल रही थी थकान होने के बावजूद भी गर्मी का एहसास नहीं हो रहा था। गहरी सांस लेते हुए सुगंधा एक जगह पर खड़ी हो गई और कमर पर अपने दोनों हाथ रखते हुए अंकित से बोली।
बाप रे मुझसे तो चढ़ा नहीं जा रहा है,,,, मैं तो थक गई।
इतनी जल्दी थक गई तुम तो बहुत सवारी की हो फिर इतनी जल्दी कैसे थक गई,,,।
(सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा किस बारे में बात कर रहा है इसलिए उसकी तरफ आंख दिखाते हुए बोली,,)
ज्यादा बातें मत बना,,,,, देख रहा है तो मेरी हालत खराब हो रही है और तुझे कुछ और ही सुझ रहा है।
अब इसमें मेरी गलती थोड़ी ना है तुम्हारी जैसी खूबसूरत औरत साथ में रहेगी तो कोई भी इंसान वही सोचेगा जो मैं सोच रहा हूं,,,,।
चल अपनी बकवास बंद कर और कुछ देर तक यहीं पर मुझे आराम करने दे,,, (इतना कहने के साथ ही पेड़ के नीचे रख बड़े से पत्थर वाली कुर्सी पर सुगंधा का टीका कर बैठ गई और अपनी सांसों को दुरुस्त करने लगी,,,,, अंकित क्या करता है भाभी अपनी मां के साथ वही बैठ गया देखते देखते घड़ी में 2:00 बज चुके थे नीचे से तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं लग रहा था कि इस पर चढ़ने में इतना ज्यादा समय लग जाएगा ऐसा लग रहा था कि यह रहा लेकिन वाकई में ऊंचाई कही थी और ऊंचाई काफी होने पर ही तो अच्छा नजारा दिखाई देगा,,,, अंकित भी अपनी मां के पास बैठकर आराम करने लगा कुछ लोग नीचे उतर रहे थे उनमें एक वृद्ध महिला भी थी जिसकी तरफ देख कर अंकित बोला।)
देख लो मम्मी दादी की उम्र की है लेकिन कितनी तेजी से नीचे उतर रही है और एक तुम हो की जवानी से भरी हुई हो तो भी थक गई।
इसमें क्या है मैं भी जल्दी से चढ़कर उतर सकती हूं लेकिन पहले अंदाजा नहीं था ना कि इतनी चढ़ाई चढनी पड़ेगी,,,,,।
हां बात तो तुम सही कह रही हो मुझे भी पहले ऐसे ही लग रहा था लेकिन मुझे भी लगने लगा है कि कुछ ज्यादा ही ऊंचाई पर है। चलो कोई बात नहीं कुछ देर नहीं बैठकर आराम कर लेते हैं वैसे भी अभी हमारे पास बहुत समय है,।
(इतना कहकर अंकित और उसकी मां कुछ देर तक वहीं पर आराम करने लगे तकरीबन 20 मिनट के बाद सुगंध अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और बोली)
चल अब हमें चलना चाहिए वैसे भी देख रहा है मौसम बेईमान हो रहा है। (आसमान में काले काले बादल की तरह देखते हुए सुगंधा बोली)
तुम्हें देखकर तो कोई भी बेईमान हो जाए मौसम की क्या बात है।
बड़ा शायरी करने लगा है।
तुम जैसी हसीना साथ में हो तो कोई भी शायर बन जाए।
अच्छा चल शायरी बाद में करना पहले ऊपर चलते हैं। हम लोग थोड़ा देर कर दिए चढ़ने वालों की संख्या बहुत कम है और उतरने वाले की संख्या देख ज्यादा है।
इस बारे में हमें मालूम नहीं था वरना हम लोग भी इस समय उतर रहे होते लेकिन चलो देखा जाएगा।
(इतना कहकर मां बेटे फिर से ऊपर की तरफ चढ़ने लगे तकरीबन 1 घंटे की ओर चढ़ाई के बाद मां बेटे दोनों एकदम ऊंचाई पर पहुंच चुके थे ऊंचाई पर पहुंचते ही मालूम एकदम खुश नजर आने लगे क्योंकि यहां से वातावरण और भी ज्यादा खूबसूरत दिखाई दे रहा था काले काले बादल ऐसे लग रही थी कि जैसे ठीक उनके सर के ऊपर ही है और हाथ ऊपर करके वह कभी भी बदल को पकड़ सकते हैं,,, अभी भी काफी लोग ऊंचाई पर थे और झरने की खूबसूरती का मजा ले रहे थे चारों तरफ रेलिंग बनाई हुई थी ताकि कोई गिरना सके रेलिंग पकड़ कर बहुत से लोग झरने को देख रहे थे मां बेटे भी खुश होते हुए झरने की खूबसूरती को देख रहे थे उनसे उठ रहा शोर वातावरण में एक अद्भुत संगीत पैदा कर रहा था तेज चलती हवाओं के साथ पानी की बूंदे मां बेटे के बदन को ठंडक दे रही थी। ऊंचाई पर थोड़ा बगीचा जैसा बना हुआ था लोग झरना देखने के बाद बैठकर आपस में बातें कर रहे थे और अपने समय व्यतीत कर रहे थे काफी खूबसूरत नजारा था कुछ देर तक झरने को देखने के बाद मां बेटे दोनों एक जगह पर बैठ गई और ठंडी ठंडी हवाओं का मजा लेने लगी कुछ लोग अपने साथ नाश्ता लेकर आए थे और बैठकर नाश्ता कर रहे थे। इतनी चढ़ाई करने के बाद मां बेटे दोनों को भी भूख का एहसास हो रहा था लेकिन इतने ऊपर कुछ खाने के लिए मिलने वाला था नहीं इसलिए अपने मन को मना कर वह लोग वातावरण का ही मजा ले रहे थे।
देखते देखते 2 घंटे का समय बीत चुका था और शाम के 5:30 बजने लगे थे और लोगों की भीड़ कम होती चली जा रही थी धीरे-धीरे सभी लोग नीचे उतर चुके थे लेकिन मां बेटे अभी भी ऊंचाई पर वातावरण की खूबसूरती का मजा ले रहे थे,,,,, हल्का-हल्का अंधेरा होने लगा था क्योंकि शाम ढल रही थी। अभी भी दोनों कुर्सी पर बैठे हुए थे अंकित अपनी मां से बोला।)
अब हमें भी चलना चाहिए सब लोग जा चुके हैं केवल हम दो ही ऊपर रह गए हैं और अब कोई ऊपर आने वाला नहीं है।
मैं भी तो इसी पल का इंतजार कर रही थी मैं देखना चाहती हूं कि इस समय झरने का नजारा कैसा दिखता है,,,, (और इतना कहने के साथ ही सुगंधा अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और चेहरे का आदमी करते हुए वापस रेलिंग के पास आ गई और वहां से झरने का नजारा देखने लगी जो की काफी खूबसूरत दिखाई दे रहा था क्योंकि ठीक सामने ही सूरज डूब रहा था एकदम चमकता हुआ और डूबते समय उसकी खूबसूरती झरने की वजह से और भी ज्यादा बढ़ गई थी,,,, यह देखकर अंकित अपनी मां से बोला)
तुम सही कह रही हो मम्मी कितना खूबसूरत नजारा दिख रहा है,,,, लोगों को इस समय का नजारा देखना चाहिए,,,,, मेरे पास कैमरा नहीं है नहीं तो फोटो ले लेता,,,।
हां तो सही कह रहा है अगर अपने साथ कैमरा होता तो जगह-जगह पर हम लोग फोटो खींच लेते जो हमारी यादों को संयोजने में काफी काम आता।
हां लेकिन एक बात की मुसीबत हो जाती है अगर तिरुपति यह सब देखते तो उसे ऐसा ही लगता कि उसकी गैर हाजिरी में मां बेटे मजा लूट रहे हैं।
हां तो यह सच ही तो है हम दोनों मजा ही तो लूट रहे हैं और क्या कर रहे हैं यहां पर इतनी दूर,,,, अपनी जिंदगी के इस पल को यादगार बनाने जिंदगी का हर वह सूख लेने जो केवल एक पति पत्नी ले सकते हैं,,, (ऐसा कहते हुए सुगंधा अपने होठों को अपने बेटे की होठ की तरफ ले गई और उसके होठों पर अपने हाथ रखकर चुंबन करने लगे लेकिन इस सामान्य चुंबन को मदहोशी के आलम में डूबोते हुए अंकित अपना एक हाथ अपनी मां की कमर पर डालकर उसे अपनी तरफ खींच लिया और उसके होठों को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया दोनों मदहोश होने लगे इस समय कैसे भी ऊंचाई पर कोई भी नहीं था केवल मां बेटे के सिवा दोनों चुंबन का मजा लेते हुए डूबते सूरज के नजारे को देखकर और भी ज्यादा उत्तेजित हो रहे थे अंकित का लंड पेंट में खड़ा होने लगा था,,,, किसी के न होने का फायदा उठाते हुए अंकित एकदम से अपनी मां को घुमा दिया और उसकी पीठ अपनी तरफ करके पीछे से उसे अपनी बाहों में भर लिया और तुरंत उसके ब्लाउज के ऊपर से उसकी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया। ऐसे खूबसूरत वातावरण मां बेटे दोनों मदहोश हुए जा रहे थे ब्लाउज में कसी हुई चूचियां ब्लाउज फाड़ कर बाहर आने को आतुर नजर आ रही थी सुगंधा अपनी मां की चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही जी भरकर रगड़ रहा था मसल रहा था और सुगंधा उत्तेजना के मारे अपनी गोलाकार गांड को अपने बेटे के लंड से सटाकर रगड़ रही थी जो कि इस समय पेंट में तंबू बनाया हुआ था और साड़ी के ऊपर से ही उसे अपनी गांड पर उसकी चुभन साफ महसूस हो रही थी।
मां बेटे दोनों मदहोश हुए जा रहे थे अंधेरा धीरे-धीरे बढ़ रहा था इतनी ऊंचाई पर झरने की खूबसूरती देखने के लिए इस समय मां बेटे के सिवा दूसरा और कोई वहां पर नहीं था क्योंकि सब लोग नीचे जा चुके थे लेकिन मां बेटे एक अलग ही दुनिया में अपने लिए खुशी ढूंढ रहे थे देखते ही देखते दोनों मदहोशी के आलम में पूरी तरह से डूबने लगे थे और मौके का फायदा उठाते हुए अंकित अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलने शुरू कर दिया था सुगंधा भी निश्चिंत थी क्योंकि दोनों एकांत में यह सब कर रहे थे वैसे तो यह जगह एकांत बिल्कुल भी नहीं थे लेकिन शाम ढलते ही यह जगह पूरी तरह से सुनसान हो जाती थी यहां पर कोई भी ठहरता नहीं था। इसलिए किसी की गैर हाजिरी में सुगंधा भी निश्चिंत होकर अपने बेटे से मजा लूट रही थी,,,, अंकित की सांस भारी हो चली थी अपनी मां की गर्दन पर चुंबनों की बारिश करते हुए वह लगातार अपनी मां की चूचियों को दबाता हुआ उसके ब्लाउज का बटन खोल रहा था और देखते ही देखते वह अपनी मां के ब्लाउज का आखिरी बटन भी खोल दिया था,,, लाल रंग की ब्रा में उसके दोनों कबूतर फड़फड़ा रहे थे और अंकित उन दोनों कबूतर के फड़फड़ाते हुए पंखों को अपनी हथेली में दबोच कर उन्हें काबू में कर लिया था,,, मां बेटे दोनों अब नजारे का नहीं बल्कि समय की नजाकत का आनंद लूट रहे थे क्योंकि मौका भी था और दस्तूर भी था। सुगंधा भी कुछ काम नहीं थी वह अपने बेटे की संगत में पूरी तरह से छिनार बन चुकी थी,,, और अपना छिनर पन दिखाते हुए अपना हाथ पीछे की तरफ लाकर पेंट के ऊपर से ही अपने बेटे के लंड को दबाना शुरू कर दी।
एक दूसरे की जवानी की मदहोशी में मां बेटे पूरी तरह से खो चुके थे,,, उन्हें इस बात का भी एहसास नहीं था कि आसमान में काले बादल मंडराने लगे थे किसी भी वक्त बारिश पड़ सकती थी,,,,, इस बात से बेखबर अंकित अपनी मां की ब्रा को नीचे से पकड़ कर एकदम से ऊपर उठा दिया जिससे उसके दोनों कबूतर एकदम से आजाद हो गए और अगले ही पल वह उन कबूतरों को अपनी हथेली में दबोच लिया और उन्हें दबाने लगा,, अंकित पूरी तरह से मस्त हो चुका था अपनी मां की मदहोश कर देने वाली जवानी को आसमान के नीचे खुली पहाड़ी पर निचोड़ते हुए वह एकदम से मदहोश हो गया था अपनी मां की गर्दन पर चुंबनों की बारिश करते हुए और लगातार उसकी चूचियों को जोर-जोर से दबाते हुए वह मादक स्वर में बोला,,,।
सहहहह मम्मी तुम्हारी जवानी लाजवाब है मेरा लंड तुरंत खड़ा हो जाता है,,,, आज तुम्हें इस पहाड़ी पर ही चोदूंगा ताकि जिंदगी भर तुम्हें याद रहे,,,,।(इतना कहने के साथी अंकित एकदम से उसे पड़कर अपनी तरफ घूम लिया और उसकी कमर में एक हाथ डालकर उसे संभाल लिया क्योंकि वह गिरने जैसी हो गई थी उसकी नंगी बड़ी-बड़ी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह लहराने लगी थी जिसे देखकर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था और तुरंत बिल्कुल भी देर के लिए बिना अपनी मां की चुची को मुंह में लेकर पीना शुरू करदिया,,,,, अपने बेटे की हरकत से सुगंधा पूरी तरह से उत्तेजना के परम शिखर पर विराजमान होने लगी उसकी आंखें बंद होने लगी और वह अपने बेटे के स्तन मर्दन और स्तन चुसाई से आनंदित होने लगी,,,, लेकिन तभी अचानक बादल की गड़गड़ाहट की आवाज सुनाई दी और सुगंधा ने अपनी आंखों को खोल दी,,, सुगंधा कुछ समझ पाती ईससे पहले ही पानी की बूंदें गिरने लगी,,, तब जाकर मां बेटे दोनों को इस बात का एहसास हुआ कि बड़े जोर की बारिश आने वाली है क्योंकि चारों तरफ घने बदल छाए हुए थे और बादलों की गड़गड़ाहट शुरू हो गई थी। मौके की नजाकत को समझते हुए अंकित अपनी मां की चूची पर से अपना मुंह हटा लिया और चारों तरफ नजर घुमा कर देखने लगा चारों तरफ बादल ही बादल थे और बारिश पड़ना शुरू हो गई थी,,, सुगंधा जल्दी से अपनी ब्रा को नीचे करके अपने ब्लाउज का बटन बंद करते हुए बोली।
बाप रे तो बारिश पड़ने लगी अब क्या करें,,,।
करना क्या है जल्दी से यहां से चलना होगा कहीं तूफानी बारिश में हम लोग फंस ना जाए,,,(ऐसा कहते हुए अंकित अपनी मां का हाथ पकड़ लिया और पहाड़ी से नीचे उतरने लगा लेकिन नीचे उतरने में खतरा बहुत था क्योंकि बारिश बड़ी तेज हो चुकी थी और अपनी बहन शुरू हो गया था ऐसे में पैर फिसलने का डर था इसलिए अंकित अपनी मां से बोला,,,) आराम आराम से पैर रखना कहीं पैर फिसल गया तो लेने के देने पड़ जाएंगे,,,,।
हम लोगों को भी नीचे उतर जाना चाहिए था,,,(सुगंधा घबराहट भरे स्वर में बोली)
उधर तो जाना चाहिए था लेकिन ऐसा खूबसूरत नजारा और ऊपर से तुम्हारी जवानी का मजा जो लेना था,,,,, कोई बात नहीं किनारे किनारे से धीरे-धीरे आगे बढ़ती रहो,,,,(अंकित अपनी मां का हाथ थाम है किनारे से धीरे-धीरे नीचे उतर रहा था बारिश पल भर में ही बड़े जोर से होने लगी थी और पहाड़ी से नीचे पानी बहने लगा था,,, बादलों की गड़गड़ाहट से माहौल पूरी तरह से डरावना होता जा रहा था मां बेटे दोनों को इस बात का एहसास हो रहा था कि वाकई में वह दोनों खतरे में पढ़ चुके थे यह उन दोनों के लिए कोई बड़ी मुसीबत से काम नहीं थी क्योंकि यहां के मौसम के बारे में वह दोनों बिल्कुल भी नहीं जानते थे,,,, और यहां पहाड़ी पर वह लोग रुक भी नहीं सकते थे क्योंकि रुकने के लिए कोई जगह ही नहीं थी नीचे उतरना जरूरी था फिसलने का डर भी बराबर बना हुआ था लेकिन अंकित धीरे-धीरे अपनी मां को संभालता हुआ नीचे उतर रहा था,,, तेज चलती हवाओं के साथ-साथ बात को की गड़गड़ाहट सुगंधा के तन बदन न में डर भर दे रही थी। पल भर में ही सुगंधा की जवानी की गर्मी शांत हो चुकी थी। अब उसे डर लग रहा था वह जल्द से जल्द पहाड़ी से नीचे उतर जाना चाहती थी,,,,, 1 घंटे जैसा समय गुजर चुका था लेकिन अभी भी वह लोग पहाड़ी के ऊपर ही थे,,, इतनी तेज हवा चल रही थी कि दूर-दूर तक कुछ दिखाई नहीं दे रहा था लेकिन तभी अंकित को झुग्गी दिखाई दी जिसमें लालटेन जल रही थी उसे देखकर अंकित को थोड़ी हिम्मत हुई और अपनी मां से बोला,,,)
वह देखो झुकी दिखाई दे रही है और उसमें लालटेन भी जल रही है क्योंकि उसकी रोशनी दिखाई दे रही है जरूर वहां कोई ना कोई होगा।
हां होना तो चाहिए क्योंकि ऊपर चढ़ते समय दो-तीन झुग्गीया मिली थी जिसमें नाश्ता बिक रहा था,,,, हो सकता है कोई रुक गया हो।
चलो चलकर देखते हैं,,,,,।(अपनी मां का हाथ थामे हुए अंकित धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था और थोड़ी ही देर में वह झुग्गी के पास पहुंच चुका था। ताड़पत्री की बनी झुग्गी में दरवाजे जैसा कुछ भी नहीं था बस दरवाजे के लिए तड़पत्री का ही उपयोग करके आगे पर्दा जैसा लटका दिया गया था जो की हवा की झोंके से बार-बार उड़ रहा था,,,, पहले तो अंकित झुग्गी के पास में ही खड़ा होकर आवाज लगाते हुए बोला,,)
कोई,है क्या,,,?
(इतना कहकर अंकित खामोश हो गया लेकिन चार-पांच सेकेंड बाद ही वह दोबारा बोल पाता इससे पहले ही झुग्गी के पर्दे के पास एक औरत आकर खड़ी हो गई और बोली,,,)
आप लोग इतनी तेज बारिश में यहां,,,, आप लोगों को तो चले जाना चाहिए था।
जी,,, अब क्या बोलूं कुछ समझ में नहीं आ रहा है।
आप लोग बाहर से आए हैं,,,।
जी हां,,,।
तभी यहां के मौसम के बारे में तुम्हें अंदाजा नहीं है लेकिन फिर भी तो सब लोग जब नीचे उतर रहे थे तुम्हें उतर जाना चाहिए था।
अब क्या कहूं ऊपर का नजारा इतना खूबसूरत था की पहली बार इधर आए हैं तो देखे बिना मन नहीं माना और यहां के मौसम के बारे में कुछ मालूम नहीं था इसलिए फस गए।
(अंकित की बात सुनकर वह सुगंधा की तरफ देखी जो पानी में पूरी तरह से भेज चुकी थी उसके कपड़े उसके बदन से चिपक गए थे उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां ब्लाउज में इस कदर से उलझ गई थी कि उसका आकार एकदम साफ झलक रहा था ब्रा के अंदर के धोने के बावजूद भी उसके निप्पल एकदम कठोर होकर साड़ी के बाहर तक नजर आ रहे थे यह देखकर मुस्कुराते हुए वह बोली)
चलो कोई बात नहीं अंदर आ जाओ,,,।
(उसका इतना कहना था कि अंकित और उसकी मां दोनों उसे झुग्गी के अंदर प्रवेश कर चुके थे,,,,, वैसे तो यह जगह रहने लायक बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन इस तरह के तूफानी बारिश में यही समय उन दोनों के लिए महल के समान था,,,, दोनों बुरी तरह से भीगे हुए थे यह देखकर वह औरत बोली,,,)
आप दोनों तो पूरी तरह से भीग चुके हो और आप लोगों के पास सूखे कपड़े भी नहीं है।
जी हां अब कर भी क्या सकते हैं,,,।(सुगंधा शरमाते हुए बोली)
लेकिन इस तरह से तो आप दोनों की तबीयत खराब हो जाएगी,,, वैसे तो कहना नहीं चाहिए लेकिन हालात को देखते हुए मुझे कहना पड़ रहा है कि,,, आप मेरी साड़ी पहन लो,,, गीले कपड़े में कब तक रहोगी वैसे भी यह भारी सब सुबह तक बंद होने वाली नहीं है क्योंकि यह रोज का काम है,,,,(उसकी बात सुनकर सुगंधा उसकी तरफ देखने लगी और फिर अपने बेटे की तरफ देखने लगी तो अंकित बोला )
यह बिल्कुल ठीक कह रही है गीले कपड़ों में तबीयत खराब हो जाएगी,,,, तुम जल्दी से कपड़े बदल लो,,,।
और आप भी वैसे तो आपके लिए मर्दों वाले कपड़े तो मेरे पास नहीं है लेकिन टावल लपेट सकते हो।
जी शुक्रिया,,,,।
(उसका इतना कहना था कि उस औरत ने जल्दी से रस्सी पर से उतार कर अपनी साड़ी और पेटिकोट दे दी उसके पास ब्लाउज नहीं था लेकिन फिर भी साड़ी से वह अपनी चूचियों को ढक सकती थी इसलिए वह बोली,,,)
ये आपके लिए काफी रहेगा, लेकिन माफी चाहूंगी कि इसका ब्लाउज मेरे पास नहीं है।
कोई बात नहीं इतना मेरे लिए काफी है,,,,,(इतना कहकर वह उसे औरत के हाथ से साड़ी और पेटीकोट ले ली उसे औरत ने अंकित को एक छोटा सा टॉवेल दी और बोली,,)
मैं पीछे वाले गांव में रहती हूं और यहां पर समोसे चाय बेचकर थोड़े बहुत पैसे कमा लेती हूं वैसे तो मुझे भी यहां से चले जाना चाहिए था लेकिन आज थोड़ा देर हो गई और बारिश तेजी से शुरू हो गई तो मुझे भी यहां रुकना पड़ रहा है,,,,।
तुम्हारे घर पर कोई नहीं है जो तुम्हें यहां से लेकर जा सके,,।
पति है दो बच्चे हैं पति बिल्कुल नकारा है सर आपके नशे में हमेशा डूबा रहता है इसलिए तो मुझे यह काम करना पड़ता है। घर का खर्चा चलाने के लिए,,,।
इसका मतलब तुम्हें यहां लेने कोई नहीं आएगा,,,।
नहीं,,,,।
तो घर कैसे जाओगी,,,।
वह तो अब सुबह ही जाना पड़ेगा क्योंकि बारिश बंद होने वाली नहीं है और मुझे छोटी सी नहर से होकर गुजरना पड़ता है जो इस तरह की बारिश से एकदम भर जाती है,,,,,।
ओहहह,,, तो तुम्हारे बच्चों को खाना पानी कौन देगा,,,,,।
मेरी छोटी बहन साथ में रहती है वह संभाल लेती है बच्चों को,,,।
चलो तब तो ठीक है,,,,(इतना कहकर वह दूसरी तरफ मुंह करके खड़ी हो गई और अपनी साड़ी को उतारने लगी,,,,, वह औरत अंगीठी के पास बैठकर सुगंधा कोई देख रही थी उसका गोरा खूबसूरत बदन उसे भी अच्छा लग रहा था,,,, लेकिन एक बात उसे समझ में नहीं आ रही थी कि वह निश्चिंत होकर एक जवान लड़के के सामने अपने कपड़े उतार रही थी और वह लड़का भी उसे देखकर मन ही मन मुस्कुरा रहा था और अपने कपड़े भी उतार रहा था। उस औरत का दिमाग घूम रहा था क्योंकि वह दोनों को मां बेटा समझ रही थी लेकिन जिस तरह से दोनों अपने कपड़े उतार रहे थे और वह भी एक दूसरे के इतने करीब खड़े होकर उसे एहसास होने लगा कि वह दोनों मां बेटे बिल्कुल भी नहीं है,,,, दोनों के बीच का रिश्ता कुछ और ही कहानी कह रहा था। उस औरत को दोनों की उम्र में अंतर साफ दिखाई दे रहा था और बाकी अंतर मां बेटे की उम्र का ही था लेकिन दोनों को निश्चिंत होकर एक दूसरे के सामने कपड़े उतारते हुए देखकर उसे समझते देर नहीं लगेगी दोनों के बीच प्रेमी प्रेमिका का रिश्ता है लेकिन उम्र के बीच की दूरी कुछ ज्यादा ही थी फिर अपने मन में उसे सवाल का जवाब देते हुए खुद ही बोली प्यार कहा उम्र देखता है,,, वह अभी इतना सोच ही रही थी कि सुगंधा अपनी साड़ी उतार कर एक तरफ रख दी थी और इस समय ब्लाउज और पेटीकोट में थी पानी में भीगा हुआ उसका ब्लाउज और पेटीकोट उसके बदन से एकदम चिपक सा गया था,, जिसकी वजह से उसकी भारी भरकम गांड एकदम साफ आकार लिए हुए नजर आ रही थी,,,। तब तक अंकित अपनी टीशर्ट निकाल कर एक तरफ रख दिया था और इसकी चौड़ी चिकनी छाती को देखकर उस औरत के तन बदन में एक अजीब सी लहर उठने लगी।
(जो कुछ भी यहां चल रहा था उसके चलते अंकित के दिमाग में फिर से खुरापात चलने लगी थी,,,, और जैसे ही उसे औरत ने अपना ध्यान दूसरी तरफ की अंकित धीरे से अपनी मां को बोल दिया कि क्या करना है अपने बेटे की बात सुनकर वह थोड़ा गुस्से में उसकी तरफ देखने लगी लेकिन अब तक का अनुभव उसका बेहद यादगार था इसलिए वह अपने बेटे की बात मानने में कोई हर्ज नहीं समझ रही थी इसलिए वह अपने ब्लाउज का बटन खोलने लगी। वह जानती थी कि यहां पर उसे कोई नहीं जानता इस औरत से उसका कोई संबंध नहीं था कोई लेना-देना नहीं था तो उसके सामने कपड़े उतार कर नंगी होने में कोई हर्ज नहीं था। बल्कि अपनी हरकत से वह उसे भी एक अद्भुत एहसास और उत्तेजना का अनुभव देना चाहती थी। इसलिए वह अपना ब्लाउज का बटन धीरे-धीरे खोलना शुरू कर दी थी दूसरी तरफ उसे औरत को अंकित के पेंट में अच्छा खासा उभार दिखाई दे रहा था जिसे देखकर वह शर्म के मारे अपनी नजर को नीचे झुका ली थी,,, मां बेटे दोनों की हरकत को देखकर उसे औरत की हालत खराब हो रही थी दोनों के बीच के उम्र के अंदर को देखकर वह अपने मन में यही सोच रही थी कि यह दोनों कितने बेशर्म है कि एक दूसरे के सामने कपड़े बदल रहे हैं,,, अभी वह यही सोच रही थी कि तब तक सुगंधा अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल चुकी थी और ब्लाउज को अपने हाथों से उतार रही थी,,, झुग्गी के अंदर एक लालटेन जल रही थी जिसकी पीली रोशनी में सबकुछ साफ दिखाई दे रहा था,,,, और देखते ही देखते सुगंधा अपने ब्लाउस को अपने बदन से अलग करके उसे भी अपनी साड़ी के ऊपर फेंक दी इस समय वह उसे औरत की आंखों के सामने केवल पेटिकोट और लाल रंग की ब्रा में खड़ी थी उसका गोरा बदन लालटेन की पीली रोशनी में चमक रहा था,,, एक तरह से सुगंधा के गोरे बदन के प्रति उस औरत का भी आकर्षण बढ़ता जा रहा था उसके मन में ऐसा ही हो रहा था कि बड़े घर की औरतें कितनी खूबसूरत और सुंदर होती है इनका बदन कितना मक्खन मलाई की तरह होता है।
सुगंधा के बदन से टपकती हुई पानी की बूंदे उसकी सुंदरता और मादकता को और भी ज्यादा बढ़ा दे रहा था।
तीनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी सिर्फ हवा और बारिश का शोर सुनाई दे रहा था वातावरण भयानक जरूर हो जा रहा था लेकिन झुग्गी के अंदर पूरी तरह से मदहोशी छाई हुई थी, अंकित के पेंट में बना हुआ अच्छा खासा उभार झुग्गी वाली औरत के तन बदन में अजीब सा हलचल पैदा कर रही थी और अंकित जानबूझकर अपनी पेंट उतार नहीं रहा था क्योंकि वह जानता था कि चोर नजरों से वह औरत उसकी तरफ ही देख रही थी और उसकी नजर उसके मर्दाना अंग पर ही टिकी हुई थी यह एहसास अंकित के बदन में उत्तेजना की लहर पैदा कर रही थी,,,, सुगंधा के पीठ उस औरत की तरफ थी,, अंगीठी जल रही थी और वह कुछ देर पहले रोटियां सेक रही थी लेकिन दोनों के आने के बाद वह रोटी नहीं बना पाई थी और जब सो रही थी की रोटी बनाएं तभी उन दोनों धीरे-धीरे अपने बदन से वस्त्र को उतार रहे थे और यह देखने में उसके खुद के बदन में मदहोशी का नशा घुल रहा था। साड़ी और ब्लाउज करने के बाद अब बारी थी ब्रा की,,,, एक अनजान औरतों के सामने एक जवान लड़के के पास खड़े होकर अपनी ब्रा को उतार देने में खुद कितनी बेशरम है इस बात का एहसास उस औरत को जल्द ही होने वाला था और सुगंधा जल्द ही यह एहसास उस औरत को दिलाने वाली थी,,,, उसे पूरा विश्वास था कि यह औरत भी अब उन दोनों को मां बेटा तो बिल्कुल भी नहीं समझेगी और यही तो वह चाहती थी। यही सोच कर अपने दोनों हाथ को पीछे की तरफ लेकर आई और अपनी ब्रा का हुक खोलने लगी वैसे तो सुगंधा बड़े आराम से अपनी ब्रा का हुक खोल देती थी लेकिन इस समय उस औरत के सामने वह नाटक कर रही थी,,, कुछ देर इधर-उधर करने के बाद वह अपने बेटे से बोली ।
मुझसे तो खुल ही नहीं रहा है तू ही खोल दे,,,।
(सुगंधा के मुंह से इतना सुनते ही उस औरत की हालत एकदम से खराब हो गई क्योंकि वह कभी सोची नहीं थी कि इस तरह से कोई औरत अपने बेटे के उम्र के लड़के से इस तरह की हरकत करने को कहेगी और अभी किसी और के सामने इतने से ही वह औरत समझ गई थी कि यह कितनी बेशरम औरत है जो मजा लेने के लिए अपना घर बार छोड़कर एक जवान लड़की के साथ इधर आई है। अपनी मां की बात सुनकर अंकित मुस्कुराता हुआ बोला।)
कोई बात नहीं अभी खोल देता हूं यह तो मेरे बाएं हाथ का काम है,,,,,(अंकित भी बेशर्मी की सारी हत्या पर करता हुआ उसे अनजान औरत के सामने बोला वह भी उसे औरत को जताना चाहता था कि वह दोनों आपस में कितना खुल चुके हैं और अंकित की यह बात को सुनकर वह औरत कल्पना कर रही थी कि यह दोनों आपस में कितना मजा लूटने होंगे और यह जवान लड़का ना जाने कितनी बार अपनी मां की उम्र की औरत के कपड़े उतार कर नंगी किया होगा तभी तो बोल रहा है कि यह तो मेरे बाएं हाथ का काम है वह अभी इतना सोच ही रही थी कि तब तक अंकित अपनी मां की ब्रा कहो खोल दिया और दोनों पट्टी को पकड़ कर उसके कंधे से ब्रा को आगे की तरफ हल्का सा खींच कर छोड़ दिया यह देखकर उसे अनजान औरतों के तन बदन में उत्तेजना की लहर रोकने लगी लालटेन की पीली रोशनी में सुगंध की नंगी चिकनी पीठ एकदम साफ दिखाई दे रही थी एकदम खूबसूरत आकर्षक जिस पर बिल्कुल भी दाग धब्बे नहीं थे और सुगंध अपने हाथ से ब्रा को उतार कर उसे भी अपने साड़ी के ऊपर फेंक दी कमर के ऊपर वह पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी,,,, उस औरत के मन में सुगंधा की नंगी चूचियों को देखने की जिज्ञासा जाग रही थी लेकिन वह अपने मुंह से बोल नहीं पा रही थी और देखते-देखते सुगंध अपनी पेटिकोट की डोरी को अपने हाथों से टालने लगी तो यह देखकर उस अंजान औरत की सांसे थमने लगी,,,
अब तक मां बेटे इस तरह का अद्भुत क्रियाकलाप अंजन मर्द के सामने ही करते आ रहे थे लेकिन आज उन्हें मौका मिला था एक औरत के सामने इस तरह की हरकत करने का, क्योंकि यहां उन दोनों को कोई बोलने वाला था और ना हीं कोई टोकने वाला था और वैसे भी तूफानी बारिश में जो की के अंदर उसे औरत के सिवा और कोई नहीं था और इस समय वह उस औरत के सामने अपनी मनमानी कर सकते थे। क्योंकि अभी तक उसने उन दोनों को एक बात के लिए भी टोकी नहीं थी। और देखते ही देखते सुगंधा अपनी पेटिकोट की डोरी को खींचकर अपनी पेटीकोट को अपनी कमर से ढीली कर दी थी लेकिन पानी में गीली होने की वजह से उसके बदन से चिपकी हुई थी। उसे अंजान औरत का दिल जोरो से तड़प रहा था और अंकित के पेंट में तंबू का आकार बढ़ता जा रहा था,,,, सुगंधा अपनी पेटिकोट उतारती ईससे पहले ही अंकित अपनी पेंट को उतारने लगा अपने पेंट का बटन खोलते समय वह मुस्कुरा कर उस अंजान औरत की तरफ देखा भी था लेकिन वह अनजान औरत उससे नजर मिलते ही वह शर्म के मारे अपनी नजर नीचे झुका ली थी। उस औरत की आंखों में शर्म थी लेकिन मां बेटे की आंखों में शर्म बिल्कुल भी नहीं थी वह दोनों बेशर्म हो चुके थे। देखते ही देखते अंकित अपनी पेंट उतार दिया था उसके बदन पर केवल उसका अंडरवियर ही रह गया था और वह भी अच्छा खासा तंबू बनाया हुआ। अंडरवियर में बने तंबू को देखकर उस अंजान औरत की आंखों में चमक आ गई क्योंकि वह भी दो बच्चों की मां थी उसे भी एक मर जाना अंदर की सरकार का कितनी लंबाई का होता है इसका एहसास था लेकिन आज उसकी आंखों ने जो देखा था शायद वह कभी सोचा भी नहीं थी कि किसी मर्द का लंड इतना मोटा और लंबा भी हो सकता है हालांकि अभी तक उसने सिर्फ उसे अंडरवियर में देखी थी उसके संपूर्ण आकार को अपनी आंखों से नहीं देखी थी लेकिन फिर भी वह अंदाजा लगा रही थी और उसका अंदाजा ही उसके बदन में हलचल मचा रहा था,,,, कुछ देर से कुछ स्थिति में रहने के बाद अंकित छोटी सी टावर को अपनी कमर पर लपेटकर अपनी अंडरवियर को भी अपने हाथों से नीचे की तरफ खींचने लगा था यहां पर अंकित ने थोड़ी बहुत मर्यादा दिखाया था कि अंजान औरत के सामने पूरी तरह से नंगा नहीं हुआ था। लेकिन फिर भी अंडरवियर उतारने के बाद जिस तरह का तंबू उसके तोलिया में बना हुआ था,,, उसे देखकर उस औरत की बुर गीली हो रही थी।
और सुगंधा अपनी पेटीकोट को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे नीचे की तरफ खींच रही थी क्योंकि गिरी पेटिकोट उसकी मोटी मोटी गांड से चिपक गई थी फिर भी जैसे तैसे करके वह अपनी पेटीकोट को अपने बदन से अलग कर रही थी और देखते ही देखते हो अपनी पेटीकोट को अपने बदन से अलग कर चुकी थी। उस अंजान औरत की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी लाल रंग की ब्रा के साथ-साथ उसकी लाल रंग की चड्डी अंजान औरत के तन बदन में आग लग रही थी गोरे बदन पर लाल रंग कुछ ज्यादा ही जंच रहा था वह अनजान औरतों सुगंधा की खूबसूरती से आकर्षित हो चुकी थी क्योंकि पहली बार अपनी आंखों के सामने बेहद खूबसूरत औरत को कपड़े उतारते हुए देख रही थी। सुगंधा उसकी आंखों के सामने केवल चड्डी में खड़ी थी उसकी पीठ उस औरत की तरफ थी उस औरत को लग रहा था कि अब यह अपनी चड्डी भी ऐसे ही उतार देगी लेकिन उसने ऐसा नहीं की वह अपने बेटे से बोली।
जरा मुझे पेटिकोट देना तो,,,।
(अपनी मां की बात सुनकर अंकित पेटिकोट उठाकर अपनी मां को देने लगा जो कि इस समय चड्डी में ही थी। और अपने बेटे से पेटिकोट लेकर वह अपने सर के ऊपर से डालकर उसे धीरे-धीरे अपनी कमर तक लाई और अपनी मदमस्त कर देने वाली बड़ी-बड़ी गांड को रखने के बाद अपना एक हाथ अंदर डालकर धीरे-धीरे अपनी चड्डी को भी नीचे सरकाने लगी और वह औरत अंगीठी के पास बैठकर सुगंधा की इस क्रियाकलाप को देखकर मदहोश हो रही थी उसके लिए यह सब कुछ बिल्कुल नया था उसकी ब्रा नई थी उसकी चड्डी नई थी क्योंकि यह सब वह नहीं पहनती थी वह औरत गांव कस्बे की रहने वाली थी जहां पर साधारण कपड़े ही पहने जाते थे क्योंकि इतने पैसे होते नहीं थे कि वह लोग इस तरह की सुख सुविधा में जीवन व्यतीत करें,,, साड़ी के नीचे वह केवल पेटिकोट और ब्लाउज ही पहनती थी इसलिए अपनी आंखों के सामने एक खूबसूरत औरत को इन वस्त्रो में देखकर उसकी आंखों में भी एक अजीब सी चमक नजर आ रही थी,,, देखते ही देखते सुगंधा अपनी चड्डी को अपने घुटनों के नीचे तक सरकारी थी और उसके बाद पैर से ही वह अपनी चड्डी अपने पैर से अलग कर दी थी,,,, और यह सब हुआ एकदम सहज होकर कर रही थी यह सब देखकर उसे औरत के मन में यही चल रहा था कि यह दोनों आपस में कितना मजा लूटे होंगे दोनों को एक दूसरे की उम्र से भी कोई समस्या नहीं है तभी तो दोनों आपस में इतने खुल चुके हैं कि एक दूसरे के सामने कपड़े बदलकर निर्वस्त्र होना उन दोनों के लिए कोई बड़ी बात नहीं थी। थोड़ी ही देर सुगंधा भी उसे औरत के दिए हुए वस्त्र पहन चुकी थी केवल ऊपर ब्लाउज नहीं था जिससे साड़ी के ऊपर से उसकी दोनों चूचियां एकदम साफ झलक रही थी लेकिन अभी तक उसे औरत ने सुगंधा की मदहोश कर देने वाली दोनों गोलाइयों को नहीं देखी थी।
झुग्गी में लकड़ी का तक्खता रखा हुआ था,,, जिस पर बैठ भी सकते थे और आराम से दो लोग सो भी सकते थे उसी पर अंकित बैठ चुका था उसे अच्छी तरह से मालूम था कि उसके मर जाना अंग को देखने की लालच उसे औरत में साफ दिखाई दे रही थी। सुगंधा की औपचारिकता दिखाते हुए जाकर उसके पास बैठ गई थी क्योंकि वह खाना ही बना रही थी और उससे मुस्कुराते हुए बोली।
आपको तकलीफ देना तो नहीं चाहते थे लेकिन क्या करें हम लोग इस मुसीबत में पड़ गए और खामखां तुम्हें तकलीफ दे रहे हैं।
ऐसी कोई बात नहीं है अगर आप लोग नहीं आते तो मुझे अकेले ही रात गुजारना पड़ता लेकिन अब आप लोग हैं तो एक सहारा मिल गया है।
(उस औरत की बात सुनकर सुगंधा मुस्कुराने लगी और बोली)
खाना बना रही थी क्या,,,?
हां,,,, और आप लोगों को भी तो भूख लगी होगी।
बहुत जोरों की,,,,।
चिंता मत करो मैं आप लोगों के लिए भी बना देती हूं,,,,।
आप बहुत अच्छी हैं इतना कोई दूसरों के लिए नहीं सोचता सुबह जाने से पहले,,,, हम लोग एक रात का पैसा भी दे देंगे जिससे तुम्हारी थोड़ी मदद हो जाएगी।
अरे नहीं दीदी,,,, मैं तो इंसानियत के लिए ये सब कर रही हूं,,,,।
(उस औरत ने अपनेपन में सुगंधा को दीदी कहकर संबोधन करने लगी,,,, जिसे सुनकर सुगंधा बहुत खुश हो रही थी और खुश होते हुए बोली।)
देखा तुमने मुझे दीदी कहकर बुलाई हो तो बड़ी दीदी होने के नाते जाते समय जो कुछ भी मैं दूं उसे रख लेना प्यार समझ कर।
क्या दीदी आप भी,,,,।
वैसे तुम्हारा नाम क्या है,,,,?
बिंदिया,,,,,,।
बहुत प्यारा नाम है,,,, लाओ में तब तक सब्जी काट देती हूं,,,,,(इतना कहकर पास में ही पड़े आलू और प्याज को अपनी तरफ खींचकर वह एक चाकू ले ली और उसे काटना शुरु कर दी सुगंधा के प्यार भरे बर्ताव से उसे औरत को भी अपनापन महसूस हो रहा था और उसे औरत की नजर लालटेन की रोशनी सुगंधा की छाती पर चली जा रही थी क्योंकि उसे एहसास हो रहा था कि उसकी छाती कुछ ज्यादा ही बड़ी थी उसकी चुचियों का आकार एकदम गोलाकार था जो की साड़ी के ऊपर से अच्छा खासा एहसास हो रहा था)
सुगंधा और बिंदिया की लेस्बियन चूदाई करवाओ बाद में अंकित की एंट्री दोनों की तूफ़ानी बारिश में जबरदस्त चूदाई।मोटर गाड़ी में एक अनजान ड्राइवर के सामने मजा लेने के बाद मां बेटे दोनों अपने गंतव्य स्थान पर पहुंच चुके थे। सुगंधा को धीरे-धीरे महसूस हो रहा था कि वह कितनी बड़ी बेशर्म हो चुकी है,,, अनजान लोगों के सामने संभोग सुख प्राप्त करने का जो आनंद होता है वह तो पूरी तरह से मस्त कर देता है लेकिन इस मजे के पीछे जो खतरा रहता है उसे बात से सुगंधा बिल्कुल भी अनजान नहीं थी वह जानती थी कि इस तरह की हरकत करते हुए अगर सामने वाला इंसान दुष्ट प्रवृत्ति का हुआ तो लेने के देने पड़ सकते हैं लेकिन अभी तक उसकी किस्मत इतनी तेज थी कि, अभी तक उसके साथ ऐसी कोई घटना नहीं हुई थी इसलिए तो उसकी हिम्मत दिन ब दिन बढ़ती जा रही थी। लेकिन इस तरह की हरकत करने में जो सुख से मिल रहा था उसे बारे में उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी उसे इस बात का एहसास था कि उसके बेटे ने धीरे-धीरे उसे पूरी तरह से रंडी बना दिया था जो किसी के भी सामने अपनी टांगें खोलकर अपने देश कीमती खजाने को दिखाने से बिल्कुल भी कतराती नहीं थी। दर्जी के सामने होटल में वेटर के सामने, और फिर कार में ड्राइवर के सामने, धीरे-धीरे सुगंधा का अनुभव बढ़ता जा रहा था।
मां बेटे दोनों गंतव्य स्थान पर पहुंच चुके थे यहां पर पहुंचते ही लोगों की भीड़ दिखाई दे रही थी। भीड़ देखकर करो ना इस बात का एहसास हो रहा था कि वाकई में पर्यटक के लिए यह स्थल कितना मायने रखता है,,,, मोटर गाड़ी के अंदर जिस तरह का व्यायाम मां बेटे ने किया था उससे उन्हें थोड़ी बहुत थकान महसूस हो रही थी और उन्हें ताजगी की जरूरत थी, और सामने ही एक छोटी सी चाय की दुकान थी जिस पर ईक्का दुक्का लोग ही बैठे थे मां बेटे को यही जगह उचित लगी चाय पीने के लिए। और दोनों चाय की छोटी सी दुकान पर पहुंच कर चाय पीने के लिए,, दुकानदार ने चाय को गर्म करके दो कप चाय निकाल कर दे दिया साथ में दो पाव भी दिया खाने के लिए वैसे पांव के लिए सुगंधा नहीं बोली थी क्योंकि उसे थोड़ी बहुत भूख लगी हुई थी। मौसम बहुत सुहाना था दिन के 11:00 बज रहे थे लेकिन फिर भी बादल की वजह से धूप बिल्कुल भी नहीं थी और ठंडी ठंडी हवा बह रही थी यही मौसम तो सही होता है कहीं भी घूमने के लिए,, मौसम का आनंद लेते हुए मां बेटे दोनों चाय की चुस्की लेने लगे और साथ में पाव का स्वाद भी। चाय पीने के बाद कुछ देर तक दोनों मां बेटे वहीं पर बैठे रहे लोगों को देखते रहे थोड़ी ही दूर पर झरना बह रहा था उसके नीचे गिरने का शोर दोनों के कान में सुनाई दे रहा था तेज चलती हवाओं के साथ पानी की बौछारें भी हवा में खुलकर वातावरण को और भी ज्यादा ठंडक प्रदान कर रही थी झरना देखने के लिए थोड़ी ऊंचाई पर जाना पड़ता था और लोग धीरे-धीरे पहाड़ी भी चढ़ रहे थे यह देखकर अंकित अपनी मां से बोला।
चढ़ने के लिए तैयार तो होना थोड़ी चढ़ाई ज्यादा है,,, ज्यादा ऊंचाई पर पहुंचोगी तो ज्यादा मजा आएगा देखने में,,,,।
कोई दिक्कत नहीं है तेरे पर जब चढ़ाई कर ली तो यह क्या है,,, (सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली,,, तो अपनी मां की बात सुनकर अंकित भी मुस्कुराते हुए बोला)
बात तो तुम सही कह रही हो जब तुम मेरे लंड पर चढ़ाई कर सकती हो तो कहीं भी चढ़ सकती हो वैसे कहो तो मैं तुम्हें लंड पर बिठाकर ही ऊंचाई पर पहुंचा दुं,,,,।
नहीं नहीं इसकी जरूरत नहीं है,,,, फिलहाल मुझे किसी और चीज की जरूरत है,,, (अपनी नजर को इधर-उधर घूमाते हुए वह बोली तो अंकित पूछा )
किसकी जरूरत है मेरे होते हुए,,?
किसी अच्छी जगह की झाड़ियां से घिरी हुई जगह जहां पर मैं बैठकर ईत्मिनान से पेशाब कर सकूं,,,।
ओहहह यह बात है मुझे तो लगा किसी और का लेने का विचार है।
बच्चु अगर किसी और का लेने लग गई ना तो देख कर हिलाने के सिवा और कुछ नहीं रह जाएगा तेरे पास,,,, (अपनी आंखों को नचाते हुए सुगंधा बोली और अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और इधर-उधर देखने लगी, यह देखकर अंकित अपनी मां से बोला,,)
वह देखो पान की दुकान के पीछे घनी झाड़ियां है वहीं पर जाकर कर लो वहां कोई है भी नहीं,,,,।
हां तु ठीक कह रहा है मुझे वही जाना चाहिए,,, (इतना कहकर वह अपने बेटे के द्वारा बताए गए पान की दुकान की तरफ जाने लगी अंकित वहीं पर बैठा रह गया और देखते-देखते सुगंधा अपनी गांड मटकाते हुए पान की दुकान के पास पहुंच चुकी थी,,,, सुगंधा इधर-उधर बराबर नजर रख रही थी कि कहीं कोई देख ना ले और वैसे भी पान की दुकान के पास कोई खड़ा नहीं था इसलिए वह निश्चिंत थी और जल्द ही पान की दुकान के पीछे पहुंच गई, पान की दुकान लकड़ी के बड़े-बड़े पाटी से बनी हुई लकड़ी की ही दुकान थी,,, जो जगह-जगह से थोड़ी टूटी हुई थी,,,, जल्द ही सुगंधा पान की दुकान के पीछे पहुंच चुकी थी घनी झाड़ियां के पास लेकिन अंकित को उसकी मां दिखाई नहीं दे रही थी क्योंकि घनी झाड़ियां बड़ी-बड़ी थी लेकिन पान की दुकान वाले की हरकत उसे एकदम साफ दिखाई दे रही थी उसे इस बात का एहसास हो गया था कि उसकी दुकान के पीछे एक खूबसूरत औरत गई थी और क्या करने गई थी यही देखने के लिए अपनी दुकान में से पीछे की तरफ देख रहा था यह देखकर अंकित की आंखों की चमक बढ़ गई और अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ और सीधा पान की दुकान के पास पहुंच गया,,,, दुकानदार अभी भी दुकान में बैठे-बैठे ही लकड़ी की टूटी हुई पाटी में से पीछे की तरफ देख रहा था। वह नहीं जानता था कि अंकित वहीं खड़ा है वह पीछे देखने में ही मशगुल था। अंकित को बड़ा अजीब लग रहा था कि वह पीछे देख क्या रहा है क्योंकि वह तो दुकान में बैठा हुआ था और उसकी मां ठीक दुकान के पीछे पेशाब करने के लिए गई थी लेकिन तभी अंकित ने ध्यान दिया और वह भी इस दिशा में देखने लगा जहां से वह पान की दुकान वाला देख रहा था।
जब थोड़ा बहुत अपनी नजर को स्थिर करने के बाद उसे जो नजारा दिखाई दिया उसे देखकर तो उसके होश उड़ गए क्योंकि पान की दुकान में बैठे-बैठे वह दुकान वाला उसकी मां को पेशाब करते हुए देख रहा था जिस जगह को उसकी मां और वह सुरक्षित समझ रहे थे वह जगह पूरी तरह से असुरक्षित थी क्योंकि दुकानदार की दुकान की लकड़ी की पाटीयां टूटी हुई थी और उस पाटी में से सब कुछ दिखाई दे रहा था,,,, अंकित ने देखा कि उसकी मां दूसरी तरफ मुंह करके पेशाब कर रही थी और उसके दाएं और घनी घनी झाड़ियां थी,,, वह इस बात से निश्चिंत थी की घनी झाड़ियों के सहारे बैठे होने की वजह से उसे कोई देख नहीं पाएगा,,, लेकिन वह कहां जानती थी कि जिस पान की दुकान का सहारा लेकर घनी झाड़ियों में बैठकर पेशाब कर रही थी ताकि कोई देख ना ले वही पान की दुकान वाला ही उसे नजर भर कर देख रहा था अंकित को भी उसकी मां की जवानी से भरी हुई नंगी गांड दिखाई दे रही थी और पान की दुकान वाला प्यासी नजरों से उसकी मां को देखा हुआ पेंट के ऊपर से अपने लंड को मसल रहा था,,, वैसे तो किसी गैर इंसान के सामने अपनी मां के साथ मजे लेने में उसे बिल्कुल भी दिक्कत महसूस नहीं होती थी लेकिन इस समय न जाने क्यों पान की दुकान वाले पर उसे गुस्सा आने लगा और वह एकदम से जोर से बोला।
यह क्या हो रहा है,,,?
(इतना सुनते ही वह दुकानदार एकदम से चौंक गया और एकदम से अंकित की तरफ देखने लगा वह घबरा गया था वह कुछ बोल पाता इससे पहले ही अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला)
तुम्हें शर्म नहीं आती एक औरत को पेशाब करते हुए देख रहे हो तो मैं यह सोचना चाहिए कि वह औरत शर्म के मारे तुम्हारी दुकान के पीछे झाड़ियो के बीच जाकर पेशाब कर रही है ताकि कोई देखने नहीं और तुम उसके इसी मजबूरी का फायदा उठाकर उसे देख रहे हो,,,, अगर लोगों को पता चलेगा कि तुम इस तरह की हरकत करते हो तो तुम्हारा क्या हाल होगा पता है,,,।
अरे नहीं नहीं बेटा ऐसा बिल्कुल भी मत करना मैं तो अनजाने में देख लिया था मुझे क्या मालूम की कोई औरत मेरे दुकान के पीछे पेशाब करने के लिए बैठी है,,,,,।(अंकित की बात सुनकर वह दुकान वाला घबरा गया था)
चलो कोई बात नहीं अब इस तरह से गलती मत करना,,,।
नहीं नहीं बेटा बिल्कुल भी नहीं,,,,,।
ठीक है,,,, मुझे कुछ चिंगम दे दो मैं वही लेने आया था और देखा तो तुम कुछ ओर ही काम में लगे हुए हो,,,।
(इतना सुनते ही वह दुकान वाला एकदम से बोतल में से चिंगम निकाल कर देने लगा तब तक वहां पर दो-तीन ग्रह और भी आ चुके थे लेकिन ईस बीच सुगंधा पेशाब कर चुकी थी और उठकर खड़ी हो गई थी,,,,, अंकित नहीं चाहता था कि उसे दुकान वाले को पता चले कि उसका और औरत के बीच मां बेटे का रिश्ता है या किसी प्रकार का रिश्ता है इसलिए वह तुरंत चिंगम लेकर वहां से थोड़ा दूर चला गया था,,,, और थोड़ी देर में उसकी मां भी इधर-उधर नजर घुमा कर देखते हुए उसके पास पहुंच चुकी थी,,,, अपनी मां को देखकर अंकित बोला,,,)
बहुत देर लगा दी मुतने में,,,,।
क्यों क्या हुआ जब तक निकलेगा नहीं तब तक तो करना ही पड़ेगा ना,,,,।
बात तो सही है लेकिन जिसका सहारा लेकर पीछे बैठी थी वही तुम्हें नजर भर कर देख रहा था,,,।
कौन ,,,?(एकदम से चौंकते हुए सुगंधा बोली)
वो पान की दुकान वाला,,,, (पान की दुकान की तरफ देखते हुए अंकित बोला तो सुगंध भी उसी तरफ देखने लगी और आश्चर्य जताते हुए बोली)
लेकिन,,,,, वह तो दुकान में है,,,।
वह तो दुकान में है लेकिन जिस दुकान में है उसकी लकड़ी की पाटी टूटी हुई है और वहां से उसे तुम्हारी गांड एकदम बराबर दिखाई दे रही थी,,, (अंकित मुस्कुराते हुए बोला तो सुगंधा के चेहरे पर शर्म की लाली छा गई) चलो कोई बात नहीं मैंने उसे समझा दिया हूं कि इस तरह की हरकत दोबारा मत करना वरना लेने के देने पड़ जाएंगे,,,,।
बाप रे मुझे तो लगा था कि कोई देखे ही नहीं रहा है,,,।
सबको ऐसा ही लगता है कि वह लोग सुरक्षित है लेकिन उन्हें देखने वाले कहीं ना कहीं से मिल ही जाते हैं,,,।
अच्छा है कि यहां पर हम लोगों को कोई नहीं जानता,,,।
तभी तो इतनी दूर आए हैं मजा लेने के लिए,,, अब चलो 11:30 यही बज गए हैं अब हमें चलना चाहिए,,,।
ठीक है,,,,।
(और इतना कहकर मां बेटे दोनों पहाड़ी पर संभल कर ऊपर की तरफ आगे बढ़ने लगे,,, जगह-जगह पर छोटी-छोटी सीढ़ियां बनी हुई थी जिस पर चढ़ते समय सुगंधा की भारी भरकम गांड और भी ज्यादा उभार लिए नजर आती थी,, वैसे तो अंकित हो जाएगी अपनी मां को नंगी देखा था लेकिन हर वक्त उसकी हर एक अदा एक नई सी उमंग अंकित के तन बदन में जगा देती थी,, और उसे ऐसा ही लगता था कि जो कुछ भी वह देख रहा है वह पहली बार देख रहा है। सुगंधा आगे आगे चल रही थी और अंकित पीछे-पीछे चल रहा था,,,। मौसम सुहाना होने की वजह से गर्मी के मौसम भी ठंडक महसूस हो रही थी और यही यहां की खासियत थी और यही मौसम मां बेटे के लिए उचित भी था वरना गर्मी में पहाड़ी पर चढ़ना कितनी मुसीबत खड़ी कर देता है लेकिन इस समय दोनों को कोई भी दिक्कत नहीं आ रही थी। ठंडी ठंडी हवा चल रही थी मौसम का साथ बराबर मिल रहा था साथ में और भी लोग थे जो ऊपर की तरफ जा रहे थे और कुछ लोग नीचे की तरफ आ रहे थे। आने वालों के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव साफ दिखाई दे रहे थे जिससे साफ पता चल रहा था कि वाकई में ऊपर से नजारा देखने में ज्यादा आनंद आता है। इसलिए तो मां बेटे दोनों खुशी-खुशी ऊपर की तरफ चढ़ रहे थे। कुछ लोग और भी थे जो अंकित के साथ-साथ ऊपर चढ़ रहे थे और अंकित उन लोगों को देख रहा था उन लोगों की नजर उसकी मां की भारी भरकम गोलाकार गांड पर ही टीकी हुई थी जिसे देखकर वह अलग वापस में धीरे-धीरे बात कर ले रहे थे,,,,।
कुछ देर तक और कुछ दूरी तक यह सिलसिला चलता रहा हालांकि अंकित को इन सब बातों का बिल्कुल भी बुरा नहीं लग रहा था बल्कि उसे तो अच्छा लग रहा था। कि उसकी मां की जवानी देखकर ना जाने कितनों का खड़ा हो जाता है,,,, कुछ देर बाद वह लोग आगे निकल गए क्योंकि सुगंधा को थोड़ी सी थकान महसूस हो रही थी और वह धीरे-धीरे ऊपर की तरफ चढ़ रही थी। रास्ते में थोड़ी-थोड़ी दूर पर झुग्गी वाली नाश्ते की दुकान भी थी। जिसमें कुछ लोग बैठकर रेस्ट कर रहे थे और नाश्ता भी कर रहे थे। यह सब देखकर सुगंधा और उसके बेटे को अच्छा ही लग रहा था। लेकिन चढ़ते चढ़ते काफी थकान महसूस हो रही थी जगह-जगह पर पत्थर की कुर्सियां भी रखी हुई थी जिस पर लोग बैठ कर आराम भी कर ले रहे थे पहाड़ी पर चढ़ते समय छोटे-बड़े पेड़ जंगली झाड़ियां सब कुछ था जिससे यहां का नजारा बेहद खूबसूरत लग रहा था और वैसे भी आसमान में धीरे-धीरे बादल छा रहे थे हवाएं चल रही थी थकान होने के बावजूद भी गर्मी का एहसास नहीं हो रहा था। गहरी सांस लेते हुए सुगंधा एक जगह पर खड़ी हो गई और कमर पर अपने दोनों हाथ रखते हुए अंकित से बोली।
बाप रे मुझसे तो चढ़ा नहीं जा रहा है,,,, मैं तो थक गई।
इतनी जल्दी थक गई तुम तो बहुत सवारी की हो फिर इतनी जल्दी कैसे थक गई,,,।
(सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा किस बारे में बात कर रहा है इसलिए उसकी तरफ आंख दिखाते हुए बोली,,)
ज्यादा बातें मत बना,,,,, देख रहा है तो मेरी हालत खराब हो रही है और तुझे कुछ और ही सुझ रहा है।
अब इसमें मेरी गलती थोड़ी ना है तुम्हारी जैसी खूबसूरत औरत साथ में रहेगी तो कोई भी इंसान वही सोचेगा जो मैं सोच रहा हूं,,,,।
चल अपनी बकवास बंद कर और कुछ देर तक यहीं पर मुझे आराम करने दे,,, (इतना कहने के साथ ही पेड़ के नीचे रख बड़े से पत्थर वाली कुर्सी पर सुगंधा का टीका कर बैठ गई और अपनी सांसों को दुरुस्त करने लगी,,,,, अंकित क्या करता है भाभी अपनी मां के साथ वही बैठ गया देखते देखते घड़ी में 2:00 बज चुके थे नीचे से तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं लग रहा था कि इस पर चढ़ने में इतना ज्यादा समय लग जाएगा ऐसा लग रहा था कि यह रहा लेकिन वाकई में ऊंचाई कही थी और ऊंचाई काफी होने पर ही तो अच्छा नजारा दिखाई देगा,,,, अंकित भी अपनी मां के पास बैठकर आराम करने लगा कुछ लोग नीचे उतर रहे थे उनमें एक वृद्ध महिला भी थी जिसकी तरफ देख कर अंकित बोला।)
देख लो मम्मी दादी की उम्र की है लेकिन कितनी तेजी से नीचे उतर रही है और एक तुम हो की जवानी से भरी हुई हो तो भी थक गई।
इसमें क्या है मैं भी जल्दी से चढ़कर उतर सकती हूं लेकिन पहले अंदाजा नहीं था ना कि इतनी चढ़ाई चढनी पड़ेगी,,,,,।
हां बात तो तुम सही कह रही हो मुझे भी पहले ऐसे ही लग रहा था लेकिन मुझे भी लगने लगा है कि कुछ ज्यादा ही ऊंचाई पर है। चलो कोई बात नहीं कुछ देर नहीं बैठकर आराम कर लेते हैं वैसे भी अभी हमारे पास बहुत समय है,।
(इतना कहकर अंकित और उसकी मां कुछ देर तक वहीं पर आराम करने लगे तकरीबन 20 मिनट के बाद सुगंध अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और बोली)
चल अब हमें चलना चाहिए वैसे भी देख रहा है मौसम बेईमान हो रहा है। (आसमान में काले काले बादल की तरह देखते हुए सुगंधा बोली)
तुम्हें देखकर तो कोई भी बेईमान हो जाए मौसम की क्या बात है।
बड़ा शायरी करने लगा है।
तुम जैसी हसीना साथ में हो तो कोई भी शायर बन जाए।
अच्छा चल शायरी बाद में करना पहले ऊपर चलते हैं। हम लोग थोड़ा देर कर दिए चढ़ने वालों की संख्या बहुत कम है और उतरने वाले की संख्या देख ज्यादा है।
इस बारे में हमें मालूम नहीं था वरना हम लोग भी इस समय उतर रहे होते लेकिन चलो देखा जाएगा।
(इतना कहकर मां बेटे फिर से ऊपर की तरफ चढ़ने लगे तकरीबन 1 घंटे की ओर चढ़ाई के बाद मां बेटे दोनों एकदम ऊंचाई पर पहुंच चुके थे ऊंचाई पर पहुंचते ही मालूम एकदम खुश नजर आने लगे क्योंकि यहां से वातावरण और भी ज्यादा खूबसूरत दिखाई दे रहा था काले काले बादल ऐसे लग रही थी कि जैसे ठीक उनके सर के ऊपर ही है और हाथ ऊपर करके वह कभी भी बदल को पकड़ सकते हैं,,, अभी भी काफी लोग ऊंचाई पर थे और झरने की खूबसूरती का मजा ले रहे थे चारों तरफ रेलिंग बनाई हुई थी ताकि कोई गिरना सके रेलिंग पकड़ कर बहुत से लोग झरने को देख रहे थे मां बेटे भी खुश होते हुए झरने की खूबसूरती को देख रहे थे उनसे उठ रहा शोर वातावरण में एक अद्भुत संगीत पैदा कर रहा था तेज चलती हवाओं के साथ पानी की बूंदे मां बेटे के बदन को ठंडक दे रही थी। ऊंचाई पर थोड़ा बगीचा जैसा बना हुआ था लोग झरना देखने के बाद बैठकर आपस में बातें कर रहे थे और अपने समय व्यतीत कर रहे थे काफी खूबसूरत नजारा था कुछ देर तक झरने को देखने के बाद मां बेटे दोनों एक जगह पर बैठ गई और ठंडी ठंडी हवाओं का मजा लेने लगी कुछ लोग अपने साथ नाश्ता लेकर आए थे और बैठकर नाश्ता कर रहे थे। इतनी चढ़ाई करने के बाद मां बेटे दोनों को भी भूख का एहसास हो रहा था लेकिन इतने ऊपर कुछ खाने के लिए मिलने वाला था नहीं इसलिए अपने मन को मना कर वह लोग वातावरण का ही मजा ले रहे थे।
देखते देखते 2 घंटे का समय बीत चुका था और शाम के 5:30 बजने लगे थे और लोगों की भीड़ कम होती चली जा रही थी धीरे-धीरे सभी लोग नीचे उतर चुके थे लेकिन मां बेटे अभी भी ऊंचाई पर वातावरण की खूबसूरती का मजा ले रहे थे,,,,, हल्का-हल्का अंधेरा होने लगा था क्योंकि शाम ढल रही थी। अभी भी दोनों कुर्सी पर बैठे हुए थे अंकित अपनी मां से बोला।)
अब हमें भी चलना चाहिए सब लोग जा चुके हैं केवल हम दो ही ऊपर रह गए हैं और अब कोई ऊपर आने वाला नहीं है।
मैं भी तो इसी पल का इंतजार कर रही थी मैं देखना चाहती हूं कि इस समय झरने का नजारा कैसा दिखता है,,,, (और इतना कहने के साथ ही सुगंधा अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और चेहरे का आदमी करते हुए वापस रेलिंग के पास आ गई और वहां से झरने का नजारा देखने लगी जो की काफी खूबसूरत दिखाई दे रहा था क्योंकि ठीक सामने ही सूरज डूब रहा था एकदम चमकता हुआ और डूबते समय उसकी खूबसूरती झरने की वजह से और भी ज्यादा बढ़ गई थी,,,, यह देखकर अंकित अपनी मां से बोला)
तुम सही कह रही हो मम्मी कितना खूबसूरत नजारा दिख रहा है,,,, लोगों को इस समय का नजारा देखना चाहिए,,,,, मेरे पास कैमरा नहीं है नहीं तो फोटो ले लेता,,,।
हां तो सही कह रहा है अगर अपने साथ कैमरा होता तो जगह-जगह पर हम लोग फोटो खींच लेते जो हमारी यादों को संयोजने में काफी काम आता।
हां लेकिन एक बात की मुसीबत हो जाती है अगर तिरुपति यह सब देखते तो उसे ऐसा ही लगता कि उसकी गैर हाजिरी में मां बेटे मजा लूट रहे हैं।
हां तो यह सच ही तो है हम दोनों मजा ही तो लूट रहे हैं और क्या कर रहे हैं यहां पर इतनी दूर,,,, अपनी जिंदगी के इस पल को यादगार बनाने जिंदगी का हर वह सूख लेने जो केवल एक पति पत्नी ले सकते हैं,,, (ऐसा कहते हुए सुगंधा अपने होठों को अपने बेटे की होठ की तरफ ले गई और उसके होठों पर अपने हाथ रखकर चुंबन करने लगे लेकिन इस सामान्य चुंबन को मदहोशी के आलम में डूबोते हुए अंकित अपना एक हाथ अपनी मां की कमर पर डालकर उसे अपनी तरफ खींच लिया और उसके होठों को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया दोनों मदहोश होने लगे इस समय कैसे भी ऊंचाई पर कोई भी नहीं था केवल मां बेटे के सिवा दोनों चुंबन का मजा लेते हुए डूबते सूरज के नजारे को देखकर और भी ज्यादा उत्तेजित हो रहे थे अंकित का लंड पेंट में खड़ा होने लगा था,,,, किसी के न होने का फायदा उठाते हुए अंकित एकदम से अपनी मां को घुमा दिया और उसकी पीठ अपनी तरफ करके पीछे से उसे अपनी बाहों में भर लिया और तुरंत उसके ब्लाउज के ऊपर से उसकी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया। ऐसे खूबसूरत वातावरण मां बेटे दोनों मदहोश हुए जा रहे थे ब्लाउज में कसी हुई चूचियां ब्लाउज फाड़ कर बाहर आने को आतुर नजर आ रही थी सुगंधा अपनी मां की चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही जी भरकर रगड़ रहा था मसल रहा था और सुगंधा उत्तेजना के मारे अपनी गोलाकार गांड को अपने बेटे के लंड से सटाकर रगड़ रही थी जो कि इस समय पेंट में तंबू बनाया हुआ था और साड़ी के ऊपर से ही उसे अपनी गांड पर उसकी चुभन साफ महसूस हो रही थी।
मां बेटे दोनों मदहोश हुए जा रहे थे अंधेरा धीरे-धीरे बढ़ रहा था इतनी ऊंचाई पर झरने की खूबसूरती देखने के लिए इस समय मां बेटे के सिवा दूसरा और कोई वहां पर नहीं था क्योंकि सब लोग नीचे जा चुके थे लेकिन मां बेटे एक अलग ही दुनिया में अपने लिए खुशी ढूंढ रहे थे देखते ही देखते दोनों मदहोशी के आलम में पूरी तरह से डूबने लगे थे और मौके का फायदा उठाते हुए अंकित अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलने शुरू कर दिया था सुगंधा भी निश्चिंत थी क्योंकि दोनों एकांत में यह सब कर रहे थे वैसे तो यह जगह एकांत बिल्कुल भी नहीं थे लेकिन शाम ढलते ही यह जगह पूरी तरह से सुनसान हो जाती थी यहां पर कोई भी ठहरता नहीं था। इसलिए किसी की गैर हाजिरी में सुगंधा भी निश्चिंत होकर अपने बेटे से मजा लूट रही थी,,,, अंकित की सांस भारी हो चली थी अपनी मां की गर्दन पर चुंबनों की बारिश करते हुए वह लगातार अपनी मां की चूचियों को दबाता हुआ उसके ब्लाउज का बटन खोल रहा था और देखते ही देखते वह अपनी मां के ब्लाउज का आखिरी बटन भी खोल दिया था,,, लाल रंग की ब्रा में उसके दोनों कबूतर फड़फड़ा रहे थे और अंकित उन दोनों कबूतर के फड़फड़ाते हुए पंखों को अपनी हथेली में दबोच कर उन्हें काबू में कर लिया था,,, मां बेटे दोनों अब नजारे का नहीं बल्कि समय की नजाकत का आनंद लूट रहे थे क्योंकि मौका भी था और दस्तूर भी था। सुगंधा भी कुछ काम नहीं थी वह अपने बेटे की संगत में पूरी तरह से छिनार बन चुकी थी,,, और अपना छिनर पन दिखाते हुए अपना हाथ पीछे की तरफ लाकर पेंट के ऊपर से ही अपने बेटे के लंड को दबाना शुरू कर दी।
एक दूसरे की जवानी की मदहोशी में मां बेटे पूरी तरह से खो चुके थे,,, उन्हें इस बात का भी एहसास नहीं था कि आसमान में काले बादल मंडराने लगे थे किसी भी वक्त बारिश पड़ सकती थी,,,,, इस बात से बेखबर अंकित अपनी मां की ब्रा को नीचे से पकड़ कर एकदम से ऊपर उठा दिया जिससे उसके दोनों कबूतर एकदम से आजाद हो गए और अगले ही पल वह उन कबूतरों को अपनी हथेली में दबोच लिया और उन्हें दबाने लगा,, अंकित पूरी तरह से मस्त हो चुका था अपनी मां की मदहोश कर देने वाली जवानी को आसमान के नीचे खुली पहाड़ी पर निचोड़ते हुए वह एकदम से मदहोश हो गया था अपनी मां की गर्दन पर चुंबनों की बारिश करते हुए और लगातार उसकी चूचियों को जोर-जोर से दबाते हुए वह मादक स्वर में बोला,,,।
सहहहह मम्मी तुम्हारी जवानी लाजवाब है मेरा लंड तुरंत खड़ा हो जाता है,,,, आज तुम्हें इस पहाड़ी पर ही चोदूंगा ताकि जिंदगी भर तुम्हें याद रहे,,,,।(इतना कहने के साथी अंकित एकदम से उसे पड़कर अपनी तरफ घूम लिया और उसकी कमर में एक हाथ डालकर उसे संभाल लिया क्योंकि वह गिरने जैसी हो गई थी उसकी नंगी बड़ी-बड़ी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह लहराने लगी थी जिसे देखकर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था और तुरंत बिल्कुल भी देर के लिए बिना अपनी मां की चुची को मुंह में लेकर पीना शुरू करदिया,,,,, अपने बेटे की हरकत से सुगंधा पूरी तरह से उत्तेजना के परम शिखर पर विराजमान होने लगी उसकी आंखें बंद होने लगी और वह अपने बेटे के स्तन मर्दन और स्तन चुसाई से आनंदित होने लगी,,,, लेकिन तभी अचानक बादल की गड़गड़ाहट की आवाज सुनाई दी और सुगंधा ने अपनी आंखों को खोल दी,,, सुगंधा कुछ समझ पाती ईससे पहले ही पानी की बूंदें गिरने लगी,,, तब जाकर मां बेटे दोनों को इस बात का एहसास हुआ कि बड़े जोर की बारिश आने वाली है क्योंकि चारों तरफ घने बदल छाए हुए थे और बादलों की गड़गड़ाहट शुरू हो गई थी। मौके की नजाकत को समझते हुए अंकित अपनी मां की चूची पर से अपना मुंह हटा लिया और चारों तरफ नजर घुमा कर देखने लगा चारों तरफ बादल ही बादल थे और बारिश पड़ना शुरू हो गई थी,,, सुगंधा जल्दी से अपनी ब्रा को नीचे करके अपने ब्लाउज का बटन बंद करते हुए बोली।
बाप रे तो बारिश पड़ने लगी अब क्या करें,,,।
करना क्या है जल्दी से यहां से चलना होगा कहीं तूफानी बारिश में हम लोग फंस ना जाए,,,(ऐसा कहते हुए अंकित अपनी मां का हाथ पकड़ लिया और पहाड़ी से नीचे उतरने लगा लेकिन नीचे उतरने में खतरा बहुत था क्योंकि बारिश बड़ी तेज हो चुकी थी और अपनी बहन शुरू हो गया था ऐसे में पैर फिसलने का डर था इसलिए अंकित अपनी मां से बोला,,,) आराम आराम से पैर रखना कहीं पैर फिसल गया तो लेने के देने पड़ जाएंगे,,,,।
हम लोगों को भी नीचे उतर जाना चाहिए था,,,(सुगंधा घबराहट भरे स्वर में बोली)
उधर तो जाना चाहिए था लेकिन ऐसा खूबसूरत नजारा और ऊपर से तुम्हारी जवानी का मजा जो लेना था,,,,, कोई बात नहीं किनारे किनारे से धीरे-धीरे आगे बढ़ती रहो,,,,(अंकित अपनी मां का हाथ थाम है किनारे से धीरे-धीरे नीचे उतर रहा था बारिश पल भर में ही बड़े जोर से होने लगी थी और पहाड़ी से नीचे पानी बहने लगा था,,, बादलों की गड़गड़ाहट से माहौल पूरी तरह से डरावना होता जा रहा था मां बेटे दोनों को इस बात का एहसास हो रहा था कि वाकई में वह दोनों खतरे में पढ़ चुके थे यह उन दोनों के लिए कोई बड़ी मुसीबत से काम नहीं थी क्योंकि यहां के मौसम के बारे में वह दोनों बिल्कुल भी नहीं जानते थे,,,, और यहां पहाड़ी पर वह लोग रुक भी नहीं सकते थे क्योंकि रुकने के लिए कोई जगह ही नहीं थी नीचे उतरना जरूरी था फिसलने का डर भी बराबर बना हुआ था लेकिन अंकित धीरे-धीरे अपनी मां को संभालता हुआ नीचे उतर रहा था,,, तेज चलती हवाओं के साथ-साथ बात को की गड़गड़ाहट सुगंधा के तन बदन न में डर भर दे रही थी। पल भर में ही सुगंधा की जवानी की गर्मी शांत हो चुकी थी। अब उसे डर लग रहा था वह जल्द से जल्द पहाड़ी से नीचे उतर जाना चाहती थी,,,,, 1 घंटे जैसा समय गुजर चुका था लेकिन अभी भी वह लोग पहाड़ी के ऊपर ही थे,,, इतनी तेज हवा चल रही थी कि दूर-दूर तक कुछ दिखाई नहीं दे रहा था लेकिन तभी अंकित को झुग्गी दिखाई दी जिसमें लालटेन जल रही थी उसे देखकर अंकित को थोड़ी हिम्मत हुई और अपनी मां से बोला,,,)
वह देखो झुकी दिखाई दे रही है और उसमें लालटेन भी जल रही है क्योंकि उसकी रोशनी दिखाई दे रही है जरूर वहां कोई ना कोई होगा।
हां होना तो चाहिए क्योंकि ऊपर चढ़ते समय दो-तीन झुग्गीया मिली थी जिसमें नाश्ता बिक रहा था,,,, हो सकता है कोई रुक गया हो।
चलो चलकर देखते हैं,,,,,।(अपनी मां का हाथ थामे हुए अंकित धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था और थोड़ी ही देर में वह झुग्गी के पास पहुंच चुका था। ताड़पत्री की बनी झुग्गी में दरवाजे जैसा कुछ भी नहीं था बस दरवाजे के लिए तड़पत्री का ही उपयोग करके आगे पर्दा जैसा लटका दिया गया था जो की हवा की झोंके से बार-बार उड़ रहा था,,,, पहले तो अंकित झुग्गी के पास में ही खड़ा होकर आवाज लगाते हुए बोला,,)
कोई,है क्या,,,?
(इतना कहकर अंकित खामोश हो गया लेकिन चार-पांच सेकेंड बाद ही वह दोबारा बोल पाता इससे पहले ही झुग्गी के पर्दे के पास एक औरत आकर खड़ी हो गई और बोली,,,)
आप लोग इतनी तेज बारिश में यहां,,,, आप लोगों को तो चले जाना चाहिए था।
जी,,, अब क्या बोलूं कुछ समझ में नहीं आ रहा है।
आप लोग बाहर से आए हैं,,,।
जी हां,,,।
तभी यहां के मौसम के बारे में तुम्हें अंदाजा नहीं है लेकिन फिर भी तो सब लोग जब नीचे उतर रहे थे तुम्हें उतर जाना चाहिए था।
अब क्या कहूं ऊपर का नजारा इतना खूबसूरत था की पहली बार इधर आए हैं तो देखे बिना मन नहीं माना और यहां के मौसम के बारे में कुछ मालूम नहीं था इसलिए फस गए।
(अंकित की बात सुनकर वह सुगंधा की तरफ देखी जो पानी में पूरी तरह से भेज चुकी थी उसके कपड़े उसके बदन से चिपक गए थे उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां ब्लाउज में इस कदर से उलझ गई थी कि उसका आकार एकदम साफ झलक रहा था ब्रा के अंदर के धोने के बावजूद भी उसके निप्पल एकदम कठोर होकर साड़ी के बाहर तक नजर आ रहे थे यह देखकर मुस्कुराते हुए वह बोली)
चलो कोई बात नहीं अंदर आ जाओ,,,।
(उसका इतना कहना था कि अंकित और उसकी मां दोनों उसे झुग्गी के अंदर प्रवेश कर चुके थे,,,,, वैसे तो यह जगह रहने लायक बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन इस तरह के तूफानी बारिश में यही समय उन दोनों के लिए महल के समान था,,,, दोनों बुरी तरह से भीगे हुए थे यह देखकर वह औरत बोली,,,)
आप दोनों तो पूरी तरह से भीग चुके हो और आप लोगों के पास सूखे कपड़े भी नहीं है।
जी हां अब कर भी क्या सकते हैं,,,।(सुगंधा शरमाते हुए बोली)
लेकिन इस तरह से तो आप दोनों की तबीयत खराब हो जाएगी,,, वैसे तो कहना नहीं चाहिए लेकिन हालात को देखते हुए मुझे कहना पड़ रहा है कि,,, आप मेरी साड़ी पहन लो,,, गीले कपड़े में कब तक रहोगी वैसे भी यह भारी सब सुबह तक बंद होने वाली नहीं है क्योंकि यह रोज का काम है,,,,(उसकी बात सुनकर सुगंधा उसकी तरफ देखने लगी और फिर अपने बेटे की तरफ देखने लगी तो अंकित बोला )
यह बिल्कुल ठीक कह रही है गीले कपड़ों में तबीयत खराब हो जाएगी,,,, तुम जल्दी से कपड़े बदल लो,,,।
और आप भी वैसे तो आपके लिए मर्दों वाले कपड़े तो मेरे पास नहीं है लेकिन टावल लपेट सकते हो।
जी शुक्रिया,,,,।
(उसका इतना कहना था कि उस औरत ने जल्दी से रस्सी पर से उतार कर अपनी साड़ी और पेटिकोट दे दी उसके पास ब्लाउज नहीं था लेकिन फिर भी साड़ी से वह अपनी चूचियों को ढक सकती थी इसलिए वह बोली,,,)
ये आपके लिए काफी रहेगा, लेकिन माफी चाहूंगी कि इसका ब्लाउज मेरे पास नहीं है।
कोई बात नहीं इतना मेरे लिए काफी है,,,,,(इतना कहकर वह उसे औरत के हाथ से साड़ी और पेटीकोट ले ली उसे औरत ने अंकित को एक छोटा सा टॉवेल दी और बोली,,)
मैं पीछे वाले गांव में रहती हूं और यहां पर समोसे चाय बेचकर थोड़े बहुत पैसे कमा लेती हूं वैसे तो मुझे भी यहां से चले जाना चाहिए था लेकिन आज थोड़ा देर हो गई और बारिश तेजी से शुरू हो गई तो मुझे भी यहां रुकना पड़ रहा है,,,,।
तुम्हारे घर पर कोई नहीं है जो तुम्हें यहां से लेकर जा सके,,।
पति है दो बच्चे हैं पति बिल्कुल नकारा है सर आपके नशे में हमेशा डूबा रहता है इसलिए तो मुझे यह काम करना पड़ता है। घर का खर्चा चलाने के लिए,,,।
इसका मतलब तुम्हें यहां लेने कोई नहीं आएगा,,,।
नहीं,,,,।
तो घर कैसे जाओगी,,,।
वह तो अब सुबह ही जाना पड़ेगा क्योंकि बारिश बंद होने वाली नहीं है और मुझे छोटी सी नहर से होकर गुजरना पड़ता है जो इस तरह की बारिश से एकदम भर जाती है,,,,,।
ओहहह,,, तो तुम्हारे बच्चों को खाना पानी कौन देगा,,,,,।
मेरी छोटी बहन साथ में रहती है वह संभाल लेती है बच्चों को,,,।
चलो तब तो ठीक है,,,,(इतना कहकर वह दूसरी तरफ मुंह करके खड़ी हो गई और अपनी साड़ी को उतारने लगी,,,,, वह औरत अंगीठी के पास बैठकर सुगंधा कोई देख रही थी उसका गोरा खूबसूरत बदन उसे भी अच्छा लग रहा था,,,, लेकिन एक बात उसे समझ में नहीं आ रही थी कि वह निश्चिंत होकर एक जवान लड़के के सामने अपने कपड़े उतार रही थी और वह लड़का भी उसे देखकर मन ही मन मुस्कुरा रहा था और अपने कपड़े भी उतार रहा था। उस औरत का दिमाग घूम रहा था क्योंकि वह दोनों को मां बेटा समझ रही थी लेकिन जिस तरह से दोनों अपने कपड़े उतार रहे थे और वह भी एक दूसरे के इतने करीब खड़े होकर उसे एहसास होने लगा कि वह दोनों मां बेटे बिल्कुल भी नहीं है,,,, दोनों के बीच का रिश्ता कुछ और ही कहानी कह रहा था। उस औरत को दोनों की उम्र में अंतर साफ दिखाई दे रहा था और बाकी अंतर मां बेटे की उम्र का ही था लेकिन दोनों को निश्चिंत होकर एक दूसरे के सामने कपड़े उतारते हुए देखकर उसे समझते देर नहीं लगेगी दोनों के बीच प्रेमी प्रेमिका का रिश्ता है लेकिन उम्र के बीच की दूरी कुछ ज्यादा ही थी फिर अपने मन में उसे सवाल का जवाब देते हुए खुद ही बोली प्यार कहा उम्र देखता है,,, वह अभी इतना सोच ही रही थी कि सुगंधा अपनी साड़ी उतार कर एक तरफ रख दी थी और इस समय ब्लाउज और पेटीकोट में थी पानी में भीगा हुआ उसका ब्लाउज और पेटीकोट उसके बदन से एकदम चिपक सा गया था,, जिसकी वजह से उसकी भारी भरकम गांड एकदम साफ आकार लिए हुए नजर आ रही थी,,,। तब तक अंकित अपनी टीशर्ट निकाल कर एक तरफ रख दिया था और इसकी चौड़ी चिकनी छाती को देखकर उस औरत के तन बदन में एक अजीब सी लहर उठने लगी।
(जो कुछ भी यहां चल रहा था उसके चलते अंकित के दिमाग में फिर से खुरापात चलने लगी थी,,,, और जैसे ही उसे औरत ने अपना ध्यान दूसरी तरफ की अंकित धीरे से अपनी मां को बोल दिया कि क्या करना है अपने बेटे की बात सुनकर वह थोड़ा गुस्से में उसकी तरफ देखने लगी लेकिन अब तक का अनुभव उसका बेहद यादगार था इसलिए वह अपने बेटे की बात मानने में कोई हर्ज नहीं समझ रही थी इसलिए वह अपने ब्लाउज का बटन खोलने लगी। वह जानती थी कि यहां पर उसे कोई नहीं जानता इस औरत से उसका कोई संबंध नहीं था कोई लेना-देना नहीं था तो उसके सामने कपड़े उतार कर नंगी होने में कोई हर्ज नहीं था। बल्कि अपनी हरकत से वह उसे भी एक अद्भुत एहसास और उत्तेजना का अनुभव देना चाहती थी। इसलिए वह अपना ब्लाउज का बटन धीरे-धीरे खोलना शुरू कर दी थी दूसरी तरफ उसे औरत को अंकित के पेंट में अच्छा खासा उभार दिखाई दे रहा था जिसे देखकर वह शर्म के मारे अपनी नजर को नीचे झुका ली थी,,, मां बेटे दोनों की हरकत को देखकर उसे औरत की हालत खराब हो रही थी दोनों के बीच के उम्र के अंदर को देखकर वह अपने मन में यही सोच रही थी कि यह दोनों कितने बेशर्म है कि एक दूसरे के सामने कपड़े बदल रहे हैं,,, अभी वह यही सोच रही थी कि तब तक सुगंधा अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल चुकी थी और ब्लाउज को अपने हाथों से उतार रही थी,,, झुग्गी के अंदर एक लालटेन जल रही थी जिसकी पीली रोशनी में सबकुछ साफ दिखाई दे रहा था,,,, और देखते ही देखते सुगंधा अपने ब्लाउस को अपने बदन से अलग करके उसे भी अपनी साड़ी के ऊपर फेंक दी इस समय वह उसे औरत की आंखों के सामने केवल पेटिकोट और लाल रंग की ब्रा में खड़ी थी उसका गोरा बदन लालटेन की पीली रोशनी में चमक रहा था,,, एक तरह से सुगंधा के गोरे बदन के प्रति उस औरत का भी आकर्षण बढ़ता जा रहा था उसके मन में ऐसा ही हो रहा था कि बड़े घर की औरतें कितनी खूबसूरत और सुंदर होती है इनका बदन कितना मक्खन मलाई की तरह होता है।
सुगंधा के बदन से टपकती हुई पानी की बूंदे उसकी सुंदरता और मादकता को और भी ज्यादा बढ़ा दे रहा था।
तीनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी सिर्फ हवा और बारिश का शोर सुनाई दे रहा था वातावरण भयानक जरूर हो जा रहा था लेकिन झुग्गी के अंदर पूरी तरह से मदहोशी छाई हुई थी, अंकित के पेंट में बना हुआ अच्छा खासा उभार झुग्गी वाली औरत के तन बदन में अजीब सा हलचल पैदा कर रही थी और अंकित जानबूझकर अपनी पेंट उतार नहीं रहा था क्योंकि वह जानता था कि चोर नजरों से वह औरत उसकी तरफ ही देख रही थी और उसकी नजर उसके मर्दाना अंग पर ही टिकी हुई थी यह एहसास अंकित के बदन में उत्तेजना की लहर पैदा कर रही थी,,,, सुगंधा के पीठ उस औरत की तरफ थी,, अंगीठी जल रही थी और वह कुछ देर पहले रोटियां सेक रही थी लेकिन दोनों के आने के बाद वह रोटी नहीं बना पाई थी और जब सो रही थी की रोटी बनाएं तभी उन दोनों धीरे-धीरे अपने बदन से वस्त्र को उतार रहे थे और यह देखने में उसके खुद के बदन में मदहोशी का नशा घुल रहा था। साड़ी और ब्लाउज करने के बाद अब बारी थी ब्रा की,,,, एक अनजान औरतों के सामने एक जवान लड़के के पास खड़े होकर अपनी ब्रा को उतार देने में खुद कितनी बेशरम है इस बात का एहसास उस औरत को जल्द ही होने वाला था और सुगंधा जल्द ही यह एहसास उस औरत को दिलाने वाली थी,,,, उसे पूरा विश्वास था कि यह औरत भी अब उन दोनों को मां बेटा तो बिल्कुल भी नहीं समझेगी और यही तो वह चाहती थी। यही सोच कर अपने दोनों हाथ को पीछे की तरफ लेकर आई और अपनी ब्रा का हुक खोलने लगी वैसे तो सुगंधा बड़े आराम से अपनी ब्रा का हुक खोल देती थी लेकिन इस समय उस औरत के सामने वह नाटक कर रही थी,,, कुछ देर इधर-उधर करने के बाद वह अपने बेटे से बोली ।
मुझसे तो खुल ही नहीं रहा है तू ही खोल दे,,,।
(सुगंधा के मुंह से इतना सुनते ही उस औरत की हालत एकदम से खराब हो गई क्योंकि वह कभी सोची नहीं थी कि इस तरह से कोई औरत अपने बेटे के उम्र के लड़के से इस तरह की हरकत करने को कहेगी और अभी किसी और के सामने इतने से ही वह औरत समझ गई थी कि यह कितनी बेशरम औरत है जो मजा लेने के लिए अपना घर बार छोड़कर एक जवान लड़की के साथ इधर आई है। अपनी मां की बात सुनकर अंकित मुस्कुराता हुआ बोला।)
कोई बात नहीं अभी खोल देता हूं यह तो मेरे बाएं हाथ का काम है,,,,,(अंकित भी बेशर्मी की सारी हत्या पर करता हुआ उसे अनजान औरत के सामने बोला वह भी उसे औरत को जताना चाहता था कि वह दोनों आपस में कितना खुल चुके हैं और अंकित की यह बात को सुनकर वह औरत कल्पना कर रही थी कि यह दोनों आपस में कितना मजा लूटने होंगे और यह जवान लड़का ना जाने कितनी बार अपनी मां की उम्र की औरत के कपड़े उतार कर नंगी किया होगा तभी तो बोल रहा है कि यह तो मेरे बाएं हाथ का काम है वह अभी इतना सोच ही रही थी कि तब तक अंकित अपनी मां की ब्रा कहो खोल दिया और दोनों पट्टी को पकड़ कर उसके कंधे से ब्रा को आगे की तरफ हल्का सा खींच कर छोड़ दिया यह देखकर उसे अनजान औरतों के तन बदन में उत्तेजना की लहर रोकने लगी लालटेन की पीली रोशनी में सुगंध की नंगी चिकनी पीठ एकदम साफ दिखाई दे रही थी एकदम खूबसूरत आकर्षक जिस पर बिल्कुल भी दाग धब्बे नहीं थे और सुगंध अपने हाथ से ब्रा को उतार कर उसे भी अपने साड़ी के ऊपर फेंक दी कमर के ऊपर वह पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी,,,, उस औरत के मन में सुगंधा की नंगी चूचियों को देखने की जिज्ञासा जाग रही थी लेकिन वह अपने मुंह से बोल नहीं पा रही थी और देखते-देखते सुगंध अपनी पेटिकोट की डोरी को अपने हाथों से टालने लगी तो यह देखकर उस अंजान औरत की सांसे थमने लगी,,,
अब तक मां बेटे इस तरह का अद्भुत क्रियाकलाप अंजन मर्द के सामने ही करते आ रहे थे लेकिन आज उन्हें मौका मिला था एक औरत के सामने इस तरह की हरकत करने का, क्योंकि यहां उन दोनों को कोई बोलने वाला था और ना हीं कोई टोकने वाला था और वैसे भी तूफानी बारिश में जो की के अंदर उसे औरत के सिवा और कोई नहीं था और इस समय वह उस औरत के सामने अपनी मनमानी कर सकते थे। क्योंकि अभी तक उसने उन दोनों को एक बात के लिए भी टोकी नहीं थी। और देखते ही देखते सुगंधा अपनी पेटिकोट की डोरी को खींचकर अपनी पेटीकोट को अपनी कमर से ढीली कर दी थी लेकिन पानी में गीली होने की वजह से उसके बदन से चिपकी हुई थी। उसे अंजान औरत का दिल जोरो से तड़प रहा था और अंकित के पेंट में तंबू का आकार बढ़ता जा रहा था,,,, सुगंधा अपनी पेटिकोट उतारती ईससे पहले ही अंकित अपनी पेंट को उतारने लगा अपने पेंट का बटन खोलते समय वह मुस्कुरा कर उस अंजान औरत की तरफ देखा भी था लेकिन वह अनजान औरत उससे नजर मिलते ही वह शर्म के मारे अपनी नजर नीचे झुका ली थी। उस औरत की आंखों में शर्म थी लेकिन मां बेटे की आंखों में शर्म बिल्कुल भी नहीं थी वह दोनों बेशर्म हो चुके थे। देखते ही देखते अंकित अपनी पेंट उतार दिया था उसके बदन पर केवल उसका अंडरवियर ही रह गया था और वह भी अच्छा खासा तंबू बनाया हुआ। अंडरवियर में बने तंबू को देखकर उस अंजान औरत की आंखों में चमक आ गई क्योंकि वह भी दो बच्चों की मां थी उसे भी एक मर जाना अंदर की सरकार का कितनी लंबाई का होता है इसका एहसास था लेकिन आज उसकी आंखों ने जो देखा था शायद वह कभी सोचा भी नहीं थी कि किसी मर्द का लंड इतना मोटा और लंबा भी हो सकता है हालांकि अभी तक उसने सिर्फ उसे अंडरवियर में देखी थी उसके संपूर्ण आकार को अपनी आंखों से नहीं देखी थी लेकिन फिर भी वह अंदाजा लगा रही थी और उसका अंदाजा ही उसके बदन में हलचल मचा रहा था,,,, कुछ देर से कुछ स्थिति में रहने के बाद अंकित छोटी सी टावर को अपनी कमर पर लपेटकर अपनी अंडरवियर को भी अपने हाथों से नीचे की तरफ खींचने लगा था यहां पर अंकित ने थोड़ी बहुत मर्यादा दिखाया था कि अंजान औरत के सामने पूरी तरह से नंगा नहीं हुआ था। लेकिन फिर भी अंडरवियर उतारने के बाद जिस तरह का तंबू उसके तोलिया में बना हुआ था,,, उसे देखकर उस औरत की बुर गीली हो रही थी।
और सुगंधा अपनी पेटीकोट को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे नीचे की तरफ खींच रही थी क्योंकि गिरी पेटिकोट उसकी मोटी मोटी गांड से चिपक गई थी फिर भी जैसे तैसे करके वह अपनी पेटीकोट को अपने बदन से अलग कर रही थी और देखते ही देखते हो अपनी पेटीकोट को अपने बदन से अलग कर चुकी थी। उस अंजान औरत की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी लाल रंग की ब्रा के साथ-साथ उसकी लाल रंग की चड्डी अंजान औरत के तन बदन में आग लग रही थी गोरे बदन पर लाल रंग कुछ ज्यादा ही जंच रहा था वह अनजान औरतों सुगंधा की खूबसूरती से आकर्षित हो चुकी थी क्योंकि पहली बार अपनी आंखों के सामने बेहद खूबसूरत औरत को कपड़े उतारते हुए देख रही थी। सुगंधा उसकी आंखों के सामने केवल चड्डी में खड़ी थी उसकी पीठ उस औरत की तरफ थी उस औरत को लग रहा था कि अब यह अपनी चड्डी भी ऐसे ही उतार देगी लेकिन उसने ऐसा नहीं की वह अपने बेटे से बोली।
जरा मुझे पेटिकोट देना तो,,,।
(अपनी मां की बात सुनकर अंकित पेटिकोट उठाकर अपनी मां को देने लगा जो कि इस समय चड्डी में ही थी। और अपने बेटे से पेटिकोट लेकर वह अपने सर के ऊपर से डालकर उसे धीरे-धीरे अपनी कमर तक लाई और अपनी मदमस्त कर देने वाली बड़ी-बड़ी गांड को रखने के बाद अपना एक हाथ अंदर डालकर धीरे-धीरे अपनी चड्डी को भी नीचे सरकाने लगी और वह औरत अंगीठी के पास बैठकर सुगंधा की इस क्रियाकलाप को देखकर मदहोश हो रही थी उसके लिए यह सब कुछ बिल्कुल नया था उसकी ब्रा नई थी उसकी चड्डी नई थी क्योंकि यह सब वह नहीं पहनती थी वह औरत गांव कस्बे की रहने वाली थी जहां पर साधारण कपड़े ही पहने जाते थे क्योंकि इतने पैसे होते नहीं थे कि वह लोग इस तरह की सुख सुविधा में जीवन व्यतीत करें,,, साड़ी के नीचे वह केवल पेटिकोट और ब्लाउज ही पहनती थी इसलिए अपनी आंखों के सामने एक खूबसूरत औरत को इन वस्त्रो में देखकर उसकी आंखों में भी एक अजीब सी चमक नजर आ रही थी,,, देखते ही देखते सुगंधा अपनी चड्डी को अपने घुटनों के नीचे तक सरकारी थी और उसके बाद पैर से ही वह अपनी चड्डी अपने पैर से अलग कर दी थी,,,, और यह सब हुआ एकदम सहज होकर कर रही थी यह सब देखकर उसे औरत के मन में यही चल रहा था कि यह दोनों आपस में कितना मजा लूटे होंगे दोनों को एक दूसरे की उम्र से भी कोई समस्या नहीं है तभी तो दोनों आपस में इतने खुल चुके हैं कि एक दूसरे के सामने कपड़े बदलकर निर्वस्त्र होना उन दोनों के लिए कोई बड़ी बात नहीं थी। थोड़ी ही देर सुगंधा भी उसे औरत के दिए हुए वस्त्र पहन चुकी थी केवल ऊपर ब्लाउज नहीं था जिससे साड़ी के ऊपर से उसकी दोनों चूचियां एकदम साफ झलक रही थी लेकिन अभी तक उसे औरत ने सुगंधा की मदहोश कर देने वाली दोनों गोलाइयों को नहीं देखी थी।
झुग्गी में लकड़ी का तक्खता रखा हुआ था,,, जिस पर बैठ भी सकते थे और आराम से दो लोग सो भी सकते थे उसी पर अंकित बैठ चुका था उसे अच्छी तरह से मालूम था कि उसके मर जाना अंग को देखने की लालच उसे औरत में साफ दिखाई दे रही थी। सुगंधा की औपचारिकता दिखाते हुए जाकर उसके पास बैठ गई थी क्योंकि वह खाना ही बना रही थी और उससे मुस्कुराते हुए बोली।
आपको तकलीफ देना तो नहीं चाहते थे लेकिन क्या करें हम लोग इस मुसीबत में पड़ गए और खामखां तुम्हें तकलीफ दे रहे हैं।
ऐसी कोई बात नहीं है अगर आप लोग नहीं आते तो मुझे अकेले ही रात गुजारना पड़ता लेकिन अब आप लोग हैं तो एक सहारा मिल गया है।
(उस औरत की बात सुनकर सुगंधा मुस्कुराने लगी और बोली)
खाना बना रही थी क्या,,,?
हां,,,, और आप लोगों को भी तो भूख लगी होगी।
बहुत जोरों की,,,,।
चिंता मत करो मैं आप लोगों के लिए भी बना देती हूं,,,,।
आप बहुत अच्छी हैं इतना कोई दूसरों के लिए नहीं सोचता सुबह जाने से पहले,,,, हम लोग एक रात का पैसा भी दे देंगे जिससे तुम्हारी थोड़ी मदद हो जाएगी।
अरे नहीं दीदी,,,, मैं तो इंसानियत के लिए ये सब कर रही हूं,,,,।
(उस औरत ने अपनेपन में सुगंधा को दीदी कहकर संबोधन करने लगी,,,, जिसे सुनकर सुगंधा बहुत खुश हो रही थी और खुश होते हुए बोली।)
देखा तुमने मुझे दीदी कहकर बुलाई हो तो बड़ी दीदी होने के नाते जाते समय जो कुछ भी मैं दूं उसे रख लेना प्यार समझ कर।
क्या दीदी आप भी,,,,।
वैसे तुम्हारा नाम क्या है,,,,?
बिंदिया,,,,,,।
बहुत प्यारा नाम है,,,, लाओ में तब तक सब्जी काट देती हूं,,,,,(इतना कहकर पास में ही पड़े आलू और प्याज को अपनी तरफ खींचकर वह एक चाकू ले ली और उसे काटना शुरु कर दी सुगंधा के प्यार भरे बर्ताव से उसे औरत को भी अपनापन महसूस हो रहा था और उसे औरत की नजर लालटेन की रोशनी सुगंधा की छाती पर चली जा रही थी क्योंकि उसे एहसास हो रहा था कि उसकी छाती कुछ ज्यादा ही बड़ी थी उसकी चुचियों का आकार एकदम गोलाकार था जो की साड़ी के ऊपर से अच्छा खासा एहसास हो रहा था)