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ठाकुर रुक्मणि को देख उसकी दिल की धड़कन तेज हो जाती है और लिंग झटके मरने लगता है ।
ठाकुर : मैं हूं ना तुम्हे शांत करने के लिए तुम्हारी जोबन की सारी रस चूस लूंगा मेरी ठकुराइन जी बोल सीधे उसके पास जा कर उसके गुलाबी होंट को जल्दी में जोर से चूस कर पीने लगते है।
आराम से ठाकुर साहब में की भागी नही जा रही हूं।आपके साथ ही सोना है मुझे : ठकुराइन बोलती है।
पहले मुझे एक काम करने दीजिए बोलती है और दरवाजे की तरफ बढ़ती है तो ठाकुर का मुंह सुख जाता है कही ये अब भी तो नाराज नहीं है।
ठकुराइन दरवाजे पर: सुनीता चिलाकर इधर आना।
भागती हुई अति है सुनीता : जी मालकिन बोलिए।
जल्दी जाओ और सरसो तेल भर कर एक कटोरी ले आओ।
सुनीता देखती है ठकुराइन को जो ब्लाउज नही पहनी थी और वह रसोईघर से तुरंत कटोरा भर शरसो का तेल ले अति है ।
सुनीता को भेजने के बाद अंदर अति है और और ठाकुर साहब को देखती है जो सरसो का नाम सुन के जल्दी में थे कुछ।
ठकुराइन: क्या देख रहे है चलिए सोने बिस्तर में बोल पूरी नंगी होकर चादर ओढ़ लेती है
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ठकुराइन मुस्कुराते हुए सोने की नाटक करने लगती है।
ठाकुर से अब रहा नही गया सीधे चादर मैं नंगा हो कर वो भी घुस जाता जाता है और उसे बाहों में समा लेता है।
तभी उसका लिंग उसकी नितंब में चुभाता ही जिसे ठकुराइन की सिसकी निकल जाती बहुत दिन बाद लैंड का स्पर्श ले रही थी जो।
ठकुराइन: आह... क्या चुभ रहा है आपका अनजान बनते हुए !
ठाकुर : पूरे जोश में कहता है धीरे से उसके कान में एक मुसाफिर अपनी मंजिल तलाश रहा है ।अपने हाथों से मंजिल तक पहुंचा दो ठकुराइन बोल ...उसका चेहरा अपनी ओर कर उसके होठों को पीने लगता है और दोनो एक दूसरे का साथ देने लगते है ।
फिर स्तनों को सहलाने लगता है जोरो से ठकुराइन की सिसकी निकल जाती है : आह ह...थोड़ा आराम से जी निचोड़ लोगे क्या जी ।
ठाकुर कहा सुनने वाला एक स्तन सहलाते हुए दूसरे दूध के निप्पल को मुंह में ले चूसने लगता है
ठकुराइन की तो हालत खराब हो जाती ऐसे हरकत उसकी कमर हवा में उठ जाती है और : आ हा आह.... ऐसेसे... ही चूसिए उन्हें पूरी रस निचोड़ दीजिए बहुत तंग करती है ये रस से भरा जोबन मेरी आह ह ह....
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ठाकुर दूसरे स्तन को चूसते हुए : आज तुम्हारी इन आमों की सारी रस निचोड़ लोग चूस कर मेरी ठकुराइन जी। बोल चुरप चुराप की आवाज बस कमरे में गूंज रही थी चूसने की । स्तनों को दबाते हुए ठकुराइन की दूध पीने लगता है।
एक हाथ उसकी बुर को सहलाते हुए कहता है है : नाराज तो नहीं हो ना मुझसे नाटक करते हुए ।
योनि के ऊपर हाथ महसूस करते ही सिहर जाती है। धीरे से कहती है और बर्दास्त नही होता विक्रम जी जल्दी कुछ करिए ।
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ठाकुर अचानक से योनि मै उंगली घुसाने लगता है जो पूरी गीली होने के कारण दिक्कत नही लगती है दूध चूसते हुए पच पच की आवाज के साथ ऊंगली अन्दर बाहर करने लगते है ठकुराइन की सांसे तेज हो गई उंगली करने उसे बहुत आनंद मिल रहा है बहुत दिन योनि में दूसरे की उंगली गई थी आह ह ह कर सिसकारियां पूरे रूम में गूंज रही थी।
ठकुराइन की कमर हिचकोले खा रही थी चरम सीमा की ओर पहुंच रही थी ऐसा सुख पाकर।
ठाकुर तुरंत उसे पलटी करता है अब उसका लिंग में पूरी सारी शरीर की खून आ गई थी सुपारा पूरा फूल के फटने को जैसा हो गया था ।
ठाकुर योनि में लिंग डालने ही वाला होता है की ठकुराइन कटोरे से तेल कर उसके लिंग में अच्छे से लगा देता है ।
ठक्कुराईं : बहुत दिनों से कसी हुई है पूरी अब दर्द nhi होगी...बोल मुस्कुराती है।
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पलटी हो जाती पीठ कर ठाकुर की तरह ।
ठकुराइन तुम्हारी उम्र के साथ नितंब भी बड़े होते जा रहे ठाकुर बोलता है।
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और धीरे से पच की आवाज के साथ 6इंच का लैंड पूरा चूत में घुसा देता है और ठकुराइन और ठाकुर दोनो की आनंद भरी आह ह ह की सिसकी निकल जाती है ।
और धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगते है पूरी कमरे में थप थप की आवाज गूंजने लगती है ।
ठकुराइन : आह ह ह... ऐसे ही चोदिए पूरा घुसा दीजिए अपना लंड सांसे लेते हुए बोलती है।
ठाकुर तेजी से चोदते हुए : तुम्हारी योनी तो भट्टी की तरह गर्म। है ऊपर से तुम काश रही हो मेरे लंड को में पिघल जाऊंगा लग रहा है।
ठकुराइन ; अभी नही विक्रम जी खबरदार जो अभी लंड बाहर निकाला भी तो ।
ठाकुर मन में सोचता है अब क्या बोलूं तुम्हे अब में बूढ़ा हो चुका हु पहले जैसे तुम्हे नही संभाल सकता और अब बिना बाबा के चूर्ण का सम्भोग करना मुस्किल है ।
जोर से चोदिए ठाकुर साहब पूरा लंड घुसाए : आंख बंद कर चरम सीमा की आनंद लेते हुए कहती है।
ठाकुर पूरी कोशिश और संयम रखते हुए तेजी से पेलने लगता है अब बूर में लैंड पिस्टन की तरह जाने लगा था।
ठाकुर जनता था की वो ठकुराइन को चरम सीमा का सुख नही दिला पायेगा ऐसे में इसलिए उसने उसकी कान की निचली भाग को चाटना शुरू कर दिया जिससे ठकुराइन हल्के कमर ऊपर की ओर उठाने लगी थी ।ठाकुर बस दुआ कर रहा था की बस वो झड़ने से पहले उसका पानी निकल जाए।
ठाकुर लंबी सांसे लेते हुए : में झरने वाला हु रुक्मणि मेरा होने वाला है ।
ठकुराइन : थोड़े देर रोक लीजिए विक्रम जी मुझे शांत क्या बिना बीच में नही छोड़ दीजिएगा अनुरोध करती हुई कहती है
ठाकुर जनता था वो बस और दो तीन दखो में पिघल जायेगा रुक्मणि की चुत में।
तुरंत लंड धीरे से योनि से बाहर निकल कर सरसो का तेल लगा कर तेजी से उंगली करने लगता है ।
ठकुराइन : लंड क्यू निकल लिए योनि डालिए जल्दी में भी जल्द झरने वाली हु।
फिर ठाकुर तेजी से उंगली करता है जिसे ठकुराइन को योनि हल्की गुदगुदी सी होने लगी थी ।
डालिए अपना लंड जल्दी गुस्से मैं कहती है जोश के साथ
ठाकुर तुरंत थोड़ा आराम मिलने के बाद तेजी से चोदने लगता और भगनाश को छेरने लगता है तब ।
ठाकुर का शरीर पूरा कड़ा हो जाता है : में गया ठकुराइन ।
आह ह ह बस मेरा भी होने वाला बस कुछ दाखे और विक्रम जी सिसकते हुए बोलती है ।
ठाकुर झरने लगता है पर फिर भी पेलना जारी रखता और ।
अ हा आह आह ही में मार गई बोलते हुए ठकुराइन भी झटके खाते हुए। झाड़ जाति है।उसकी योनि पूरी कमरश से भर जाती ।
ठकुराइन जानती थी ठाकुर ने कितनी मेहनत की है उससे खुश करने के लिए इसलिए उसे चूम के उसकी छाती में सर रखती है
और दोनो थक के उसी हालत में सो जाते है।
Hello guys thoda comment kre or bataye update kais laga hausala milta hai hame

