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Incest मेरा बेटा जरूर आयेगा

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माधव चौधरी: गांव का जमींदार है बहुत ही लालची किस्म का आदमी है ,गरीबों का पैसा खाना इसकी आदत है ठाकुर परिवार से बहुत जलता है। उमर : 58 लिंग:4.5 इंच

निर्मला चौधरी: माधव चौधरी की बीवी है बहुत ही घमंडी है ,गर्मी बहुत इसके अंदर है पर चौधरी साहब इनकी पायस बुझा नही पाने के कारण हवस में जलती रहती है ।दिखने में सावली है लेकिन नैन नक्श अच्छे है 45 साल की है पर लगता नहीं बदन अभी भी काश हुए है दूध बड़े बड़े है 38 के और नितम्ब फैला हुए है मटके की तरह ।

मोहन चौधरी: घर का इकलौता वारिस बिगड़ा गया है पूरी तरह हवास में डूबा रहता है गांव की कमसिन कालियो को भोगना इसकी आदत बन चुकी है । उमर 25 लिंग 5.5

सोनाली: घर की लाडली है सबकी जान बस्ती है इसमें। बहुत सुंदर है दिखने में पर थोड़ी भोली है , उमर 18 शरीर में जवानी दिखने लगी है वक्ष संतरे के आकार के हो चुके है कमसिन कली की तरह है ।



मीना : घर की नौकराइन है थोड़ी भोली भाली है इसका पति अपने गांव मैं काम करता है । दिखने में ठीक है शरीर भी आकर्षक है वक्ष और नितम्ब थोड़े निकले हुए है ।शरीर की जरूरत इसको सताती रहती है ।
 

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Update


ठाकुर जैसे ही रूम पहुंचता देखता है रूम का दरवाजा बस लगा हुए वो सीधे रूम में घुस जाता है । अप


ठकुराइन इसी समय तुरंत नहा कर निकली थी अपनी थकान दूर करते हुए और अभी ऊपर कुछ नही पहनी होती है बस नीचे साड़ी लपेटे हुए आईने में अपने तने हुए वक्ष को देखने लगती है मन में ४० साल की उमर मेरे स्तन अब झूले भी नही देखो तो कैसे सुडौल है इन्हे कोई ....

ठकुराइन इतना सोचते रहती तभी ठाकुर को अंदर आते देख चौंक जाति है की दरवाजा बंद करना ही भूल गई थी। 😮😮

अचानक ठाकुर साहब को देखकर : अप कब आए में बस अभी ....

इतना बोल कर अपने बड़े तने हुए स्तनों को छुपाने की कोशिश करती है क्युकी दोनो ने कई दिनों से संभोग नही किया था ।
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Sari-hatati-hema-bhabhi


कुछ इस तरह से अपने स्तनों को तो नही धक पाती ns निप्पल ही छुपा पति है ।


ठाकुर उसे यूं शरमाते हुए देख थोडा सोचकर कर बोलते है उन्हे थोड़ा अच्छा नही लगता है ।
: माफ कीजिए मैने देखा नही आप अपने कपरे बदल रही थी।

इतना बोलकर कर बाहर जाने लगते है इसका कारण मैं बाद में बतूंगा।


तभी ठकुराइन को भी आज अपने पत्नी होने का कर्म न निभा पाने का पछतावा होता है ।


ठकुराइन : रुकिए और बेड में बैठिए अब हमे ठाकुर ठकुराइन के अलावा पति पत्नी भी बना होगा कबतक ऐसा चलेगा एक एक नौकरानी के वजह से कब तक एक दूसरे से अनजान बनते रहेंगे ।

ठाकुर : माफ कर दे ठकुराइन मैं अपने अहंकार में ना झुकने के आदत के कारण तुमसे कभी माफी
नही मांग पाया उसरत मैं नशे में नौकरानी के साथ कैसे पता नही उसकी जिंदगी बरबाद कर बैठा सर झुका आंखो में आंसू लिए बोलता है ।

<a href="https://gifyu.com/image/Sicwf">saree me sexy bhabhi apne boobs daba rahi haiठकुराइन अपने स्तनों को ना के बराबार छुपाते हुए ठाकुर से बात करने लगती है ।

ठकुराइन थोड़ा सोच कर ; माफ किया हमने अब अपना सर उठाए ठाकुर सर नही झुकाया करते विक्रम जी बोल मुस्कुराने लगती है 😊😊

ठाकुर जैसे ही अपना सर ऊपर उठता उसकी नजर सीधे उसके बड़े बड़े स्तनों पर जाति जो अभी वैसे ही सुडौल और भरे हुए थे भूरी निप्पल देख ठाकुर के मुंह में पानी आ जाता कुछ देर पहले ही सुनीता ने उसके अंदर हवस भर दी थी ।


ठकुराइन जान जाती है ठाकुर साहब सीधे उसके स्तनों को और देख रहे थे जान भुजकर कर तरपाने के लिए : माफ किया है बस अपने मेरे स्तनों को घूरने लगे अभी से कुछ देर पहले तो बाहर जा रहे थे बोल झूठा घुसा दिखाते हुई बोलती है मन में मुस्कराते हुए।

ठाकुर सकपका कर : जी वो तो मैं बस आपको देख रहा ....था ।


ठकुराइन मुस्कुराते हुए खड़ी होती है और कहती है : अब भी झूट बोल रहे है जी अब अप जब चाहे तब मुझे पूरे देख सकते है अप मेरे पति है ।



<a href="https://gifyu.com/image/Sic9N">saree neche girai sexy bhabhi neठकुराइन इतना बोल अपने स्तन ठाकुर को दिखने लगती हैं और कहती : अप तो बाहर अपनी गर्मी निकल लेते है मैं इतने दिन कैसे रही आपके बिना मुझे पता बहुत तंग करती ये जोबन मुझे इस उमर में भी अब आप ही कुछ कर सकते है।
 

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Updated

ठाकुर रुक्मणि को देख उसकी दिल की धड़कन तेज हो जाती है और लिंग झटके मरने लगता है ।

ठाकुर : मैं हूं ना तुम्हे शांत करने के लिए तुम्हारी जोबन की सारी रस चूस लूंगा मेरी ठकुराइन जी बोल सीधे उसके पास जा कर उसके गुलाबी होंट को जल्दी में जोर से चूस कर पीने लगते है।

आराम से ठाकुर साहब में की भागी नही जा रही हूं।आपके साथ ही सोना है मुझे : ठकुराइन बोलती है।

पहले मुझे एक काम करने दीजिए बोलती है और दरवाजे की तरफ बढ़ती है तो ठाकुर का मुंह सुख जाता है कही ये अब भी तो नाराज नहीं है।

ठकुराइन दरवाजे पर: सुनीता चिलाकर इधर आना।

भागती हुई अति है सुनीता : जी मालकिन बोलिए।

जल्दी जाओ और सरसो तेल भर कर एक कटोरी ले आओ।

सुनीता देखती है ठकुराइन को जो ब्लाउज नही पहनी थी और वह रसोईघर से तुरंत कटोरा भर शरसो का तेल ले अति है ।

सुनीता को भेजने के बाद अंदर अति है और और ठाकुर साहब को देखती है जो सरसो का नाम सुन के जल्दी में थे कुछ।

ठकुराइन: क्या देख रहे है चलिए सोने बिस्तर में बोल पूरी नंगी होकर चादर ओढ़ लेती है


<a href="https://gifyu.com/image/SicF8">videoblocks beautiful girl is sleeping under a blanket on a terrace in the jungle bjia7uaif thumbnaiठकुराइन मुस्कुराते हुए सोने की नाटक करने लगती है।


ठाकुर से अब रहा नही गया सीधे चादर मैं नंगा हो कर वो भी घुस जाता जाता है और उसे बाहों में समा लेता है।
तभी उसका लिंग उसकी नितंब में चुभाता ही जिसे ठकुराइन की सिसकी निकल जाती बहुत दिन बाद लैंड का स्पर्श ले रही थी जो।

ठकुराइन: आह... क्या चुभ रहा है आपका अनजान बनते हुए !

ठाकुर : पूरे जोश में कहता है धीरे से उसके कान में एक मुसाफिर अपनी मंजिल तलाश रहा है ।अपने हाथों से मंजिल तक पहुंचा दो ठकुराइन बोल ...उसका चेहरा अपनी ओर कर उसके होठों को पीने लगता है और दोनो एक दूसरे का साथ देने लगते है ।

फिर स्तनों को सहलाने लगता है जोरो से ठकुराइन की सिसकी निकल जाती है : आह ह...थोड़ा आराम से जी निचोड़ लोगे क्या जी ।
ठाकुर कहा सुनने वाला एक स्तन सहलाते हुए दूसरे दूध के निप्पल को मुंह में ले चूसने लगता है

ठकुराइन की तो हालत खराब हो जाती ऐसे हरकत उसकी कमर हवा में उठ जाती है और : आ हा आह.... ऐसेसे... ही चूसिए उन्हें पूरी रस निचोड़ दीजिए बहुत तंग करती है ये रस से भरा जोबन मेरी आह ह ह....

<a href="https://gifyu.com/image/SicVU">Erotic black and white porn of nipples sucking 5ठाकुर दूसरे स्तन को चूसते हुए : आज तुम्हारी इन आमों की सारी रस निचोड़ लोग चूस कर मेरी ठकुराइन जी। बोल चुरप चुराप की आवाज बस कमरे में गूंज रही थी चूसने की । स्तनों को दबाते हुए ठकुराइन की दूध पीने लगता है।

एक हाथ उसकी बुर को सहलाते हुए कहता है है : नाराज तो नहीं हो ना मुझसे नाटक करते हुए ।

योनि के ऊपर हाथ महसूस करते ही सिहर जाती है। धीरे से कहती है और बर्दास्त नही होता विक्रम जी जल्दी कुछ करिए ।

<a href="https://gifyu.com/image/SicZR">tumblr milahdvPAo1run2fvo1 500ठाकुर अचानक से योनि मै उंगली घुसाने लगता है जो पूरी गीली होने के कारण दिक्कत नही लगती है दूध चूसते हुए पच पच की आवाज के साथ ऊंगली अन्दर बाहर करने लगते है ठकुराइन की सांसे तेज हो गई उंगली करने उसे बहुत आनंद मिल रहा है बहुत दिन योनि में दूसरे की उंगली गई थी आह ह ह कर सिसकारियां पूरे रूम में गूंज रही थी।

ठकुराइन की कमर हिचकोले खा रही थी चरम सीमा की ओर पहुंच रही थी ऐसा सुख पाकर।

ठाकुर तुरंत उसे पलटी करता है अब उसका लिंग में पूरी सारी शरीर की खून आ गई थी सुपारा पूरा फूल के फटने को जैसा हो गया था ।
ठाकुर योनि में लिंग डालने ही वाला होता है की ठकुराइन कटोरे से तेल कर उसके लिंग में अच्छे से लगा देता है ।

ठक्कुराईं : बहुत दिनों से कसी हुई है पूरी अब दर्द nhi होगी...बोल मुस्कुराती है।

<a href="https://gifyu.com/image/SicZe">thपलटी हो जाती पीठ कर ठाकुर की तरह ।

ठकुराइन तुम्हारी उम्र के साथ नितंब भी बड़े होते जा रहे ठाकुर बोलता है।
<a href="https://gifyu.com/image/Sicag">a dick go into 3722 और धीरे से पच की आवाज के साथ 6इंच का लैंड पूरा चूत में घुसा देता है और ठकुराइन और ठाकुर दोनो की आनंद भरी आह ह ह की सिसकी निकल जाती है ।
और धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगते है पूरी कमरे में थप थप की आवाज गूंजने लगती है ।

ठकुराइन : आह ह ह... ऐसे ही चोदिए पूरा घुसा दीजिए अपना लंड सांसे लेते हुए बोलती है।

ठाकुर तेजी से चोदते हुए : तुम्हारी योनी तो भट्टी की तरह गर्म। है ऊपर से तुम काश रही हो मेरे लंड को में पिघल जाऊंगा लग रहा है।


ठकुराइन ; अभी नही विक्रम जी खबरदार जो अभी लंड बाहर निकाला भी तो ।

ठाकुर मन में सोचता है अब क्या बोलूं तुम्हे अब में बूढ़ा हो चुका हु पहले जैसे तुम्हे नही संभाल सकता और अब बिना बाबा के चूर्ण का सम्भोग करना मुस्किल है ।

जोर से चोदिए ठाकुर साहब पूरा लंड घुसाए : आंख बंद कर चरम सीमा की आनंद लेते हुए कहती है।

ठाकुर पूरी कोशिश और संयम रखते हुए तेजी से पेलने लगता है अब बूर में लैंड पिस्टन की तरह जाने लगा था।


ठाकुर जनता था की वो ठकुराइन को चरम सीमा का सुख नही दिला पायेगा ऐसे में इसलिए उसने उसकी कान की निचली भाग को चाटना शुरू कर दिया जिससे ठकुराइन हल्के कमर ऊपर की ओर उठाने लगी थी ।ठाकुर बस दुआ कर रहा था की बस वो झड़ने से पहले उसका पानी निकल जाए।

ठाकुर लंबी सांसे लेते हुए : में झरने वाला हु रुक्मणि मेरा होने वाला है ।

ठकुराइन : थोड़े देर रोक लीजिए विक्रम जी मुझे शांत क्या बिना बीच में नही छोड़ दीजिएगा अनुरोध करती हुई कहती है
ठाकुर जनता था वो बस और दो तीन दखो में पिघल जायेगा रुक्मणि की चुत में।

तुरंत लंड धीरे से योनि से बाहर निकल कर सरसो का तेल लगा कर तेजी से उंगली करने लगता है ।

ठकुराइन : लंड क्यू निकल लिए योनि डालिए जल्दी में भी जल्द झरने वाली हु।


फिर ठाकुर तेजी से उंगली करता है जिसे ठकुराइन को योनि हल्की गुदगुदी सी होने लगी थी ।


डालिए अपना लंड जल्दी गुस्से मैं कहती है जोश के साथ

ठाकुर तुरंत थोड़ा आराम मिलने के बाद तेजी से चोदने लगता और भगनाश को छेरने लगता है तब ।


ठाकुर का शरीर पूरा कड़ा हो जाता है : में गया ठकुराइन ।

आह ह ह बस मेरा भी होने वाला बस कुछ दाखे और विक्रम जी सिसकते हुए बोलती है ।


ठाकुर झरने लगता है पर फिर भी पेलना जारी रखता और ।

अ हा आह आह ही में मार गई बोलते हुए ठकुराइन भी झटके खाते हुए। झाड़ जाति है।उसकी योनि पूरी कमरश से भर जाती ।

ठकुराइन जानती थी ठाकुर ने कितनी मेहनत की है उससे खुश करने के लिए इसलिए उसे चूम के उसकी छाती में सर रखती है

और दोनो थक के उसी हालत में सो जाते है।





Hello guys thoda comment kre or bataye update kais laga hausala milta hai hame 🙏🙏
 

Studxyz

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Thakur aur thakurain tagde chodu hain jawani ki tarah chudayi kar rahe hain :D
 

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सुरेश का सबलोग इंतजार कर रहे थे वो उधर शिवगढ़ में शहर से वापसी के दौरान रुके कर जुआ खेल रहा था ।

एक आदमी अरे सुरेश बाबा आज तो आपकी किस्मत बहुत अच्छी है क्या बाजी मारी है अपने तारीफ करते हुए कहा सुरेश से ।

सुरेश : वो तो है पर मुझे धारपुर के लिए निकलना होगा आज जन्मदिन है छोटे भाई का न और एक तुम सब लोग पहुंच जाना भोज में ।

सुरेश उठता है लरखरते हुए क्युकी सब लोगो ने दारू पी रखी थी फिर अपनी गाड़ी में बैठ के अपने एक नौकर के साथ धारपुर के लिए निकल पड़ता है ।

उधर हवेली में सूर्या नए कपड़े पहन कर नीचे पहुंचता है और देखता है की सब लोग उसका इंतजार कर रहे थे थोड़ा डरा हुए सभी को परणाम करता है ।

सभी लोग इसे जन्मदिन की बधाई देते है और सूर्य सबसे पहने अपने पिताजी के चरण छू कर आशीर्वाद लेता है फिर सभी घर वाले के पैर छूता है ।

तभी वहा सुनीता भी खड़ी थी तो सूर्या इसके भी आशीर्वाद लेने वाला था की वो डर के मारे पीछे हट जाती और कहती है : छोटे बाबा ये क्या कर आप हमारे मालिक है आप हमारे पैर मत छुई हम तो ...

सारे लोग सुनीता की ओर देखने लगते है वो डर जाति है

सूर्या तो दिल का सच्चा और भोला था वो बोलता है वो उसकी बात को कटते हुए कहता है : आप मुझे आशीर्वाद नही देंगी मेरे जन्मदिन पर क्या ऊपर की ओर देखते हुए कहता है नीचे बैठे हुए ।

सुनीता सकपकते हुए : छोटे बाबा जरूर दूंगी आशीर्वाद मेरी उमर भी आपको लग जाए और सहमी हुई निगाहों से ठकुराइन को देखती है जैसे क्या करे

ठकुराइन अपनी गर्दन हां में हिलाते हुए मुसकुराती है जैसे सुनीता को इज़ाजत दे रही हो।

, तो दीजिए पैर कहते हुए आशीर्वाद लेता है और खाली सोफे पे बैठ जाता है ।

सभी लोग सूर्या को ही देख रहे थे ।

ठाकुर साहब बोलते है : सूर्या बेटा इधर आओ और मेरे पास बैठो आज मेरा छोटा बेटा पूरे 17 साल के हो गए है ।
बेटा तुमने सुनीता से आशीर्वाद लेके अच्छा किए सांस्कार कहते है इसे जो मैं और तुम्हारी मां तुम्हे छोटे से देते आए है ।एक दिन मेरा बेटे मुझ से बड़ा और सबको न्याय देने वाला गांव का मुखिया बनेगा ।

तभी सुरेश हवेली में परवेष करता है सारा पूजा का सामान गाड़ी में रखवा देते है ।

ठाकुर साहब ,: इतनी देर लगा दी शहर से आने में सुरेश और तुम्हे किसने कहा था हवेली चोरकर शहर जाने को किसी नौकर को भेज देते ।कड़क आवाज में कहते है सबलोग एकदम से शांत हो गए ।

सुरेश जो नशे में फिर भी खुद को संभालते हुए : जी ठाकुर साहब वो हमे भी कुछ कम था बस इसी कारण हम खुद चले गए माफ कर हमे ।

हां ठीक है फिर मत करना ऐसे बेवकूफी चलो मंदिर चलने की तैयारी करो : ठाकुर साहब कहते है।

सभी लोग जल्दी जल्दी तैयारी करने लगते है ।



रीमा : कहा थे आप इतनी देर जी बोलिए?

सुरेश : बहूत सारा काम था रीमा क्या बताओ पिताजी तो बेकार में डांट देते है ।
रीमा : आपकी आंखे लाल क्यो है कही अपने कुछ पी तो नही रखी है न गुस्सा करते हुए बोलती है 😠😠
सुरेश: नही रीमा वो तो आंखों में धूल चली गई होगी इसलिए बात को टालने के लिए बोलता है अरे हमे मंदिर जाने में देर हो जाएगी चलो चलो ।इतना बोलते हुए ऊपर। की और चल देता है।
रीमा भी सोचती है पर कुछ नही बोल पाती ।

सभी काम खतम हो चुके थे बस निकलना बाकी था ।

बाहर तीन सफेद अम्बेसडर खरी थी सबमे ड्राइवर तैयार बैठे थे।

एक कार में ,विक्रम आगे सीट में और पीछे ठाकुर साहब बैठते है ।


दूसरी कार में पीछे ठकुराइन , रीमा और सूर्या बैठते है ।

तीसरी कर में बॉडीगार्ड भीमा और दो हवेली के पहरेदार बैठते है ।

और सभी मंदिर की ओर निकल पड़ते है ।
Bariya update.
 

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Update


धर्मपुर गांव में आज मां भवानी मंदिर के चारो तरफ काफी भीड़ लगी हुई थी गांव के सारे लोग पहुंचे हुए थे ठाकुर साहब ने गांव के सारे घरों में नियोता भेजा था दो दिन पहले ही अपने दौरा ।

बच्चे ,बूढ़े ,औरत ,जवान सभी छोटे बाबा को आशीर्वाद देने के लिए उपस्थित थे।

तीनो गाड़िया मंदिर की ओर बढ़ रही थी तेजी से।

गाड़ी में बैठे हुए ठाकुर साहब ने कुछ सोचते हुए सुरेश से कहा: सुरेश मैं कह रहा था की मंदिर में सारी जीजो का इंतजाम की सारी तैयारी अच्छी तरह हो चुकी है न ।

सुरेश : जी बाबा सारी तैयारी हो चुकी है।

बाते करते हुए कब मंदिर पहुंच गई गाड़ी समय का पता ही न चला न बहु :ठकुराइन जी न कहा ।

सास बहू पूरी रास्ते आपस में बाते करती हुई आ रही थी और सूर्या अपने धुन बैठे था ।

तीनो गाडियां मंदिर के मुख्य दरवाजे पे पहुंच चुकी थी पूरी गांव वालो को नजर इनपर थी ।भीमा जल्दी से उतरकर ठाकुर साहब की गाड़ी की दरवाजा खोलता है और फिर सारे लोग उतरने लगते है ।

पूरी परिवार मंदिर में प्रवेश करने लगती है दोनो तरफ गांव वालो की भीड़ थी और सारे गांव वाले ठाकुर साहब की जयकारा लगा रहे थे ।

पंडित जी को प्रणाम करते है ठाकुर साहब और पंडित भी उनको आशीर्वाद देता है ।

पंडित जी : पूजा की सारी तैयारी हो चुकी है बस अपलोगो का इंतजार था अब पूजा प्रारंभ किया जाए ठाकुर साहब ।
जी बिल्कुल :ठाकुर कहते है

हवन शुरू किया गया पूरे परिवार हाथ जोड़े बैठे थे और सूर्या पंडित के मंत्रो के हवन में घी डाल रहा है था ।

कुछ देर हवन सम्पत हुए पंडित से आशीर्वाद लिए सब लोगो ने ।और सब लोगो ने परसाद खाया ।

ठकुराइन : भीमा भोज की सारी तैयारी करो और गांव वालो को भोज के लिए बैठाओ ।

भीमा : जी ठकुराइन ।

सारे गांव वालो के लिए भोज का प्रबंध किया गया था जन्मदिन के शुभ दिन पर जो हर साल सूर्या अपने हाथो से गांव वाले को खाना परोषता है ।


सारे गांव वाले को सूर्या सभी लोगो के साथ खाना देने लगा सभी लोग सूर्या को आशीर्वाद देने लगे और भोज खाने लगे ।।
तभी मंदिर के दरवाजे पे एक गाड़ी रुकती है ।

माधव जो गांव का जमींदार था वो पहुंचा और सीधे अपने लोगो के साथ ठाकुर की बढ़ता हुए आया और गले मिलते हुए: आपके बेटे की जन्मदिन की बहुत _बहूत मुबारक हो।थोड़ी देरी होगी हमे बुरा न माने आने में ठाकुर साहब।
फिर अपने लोगो इशारा किया वो लोग ढेर सारी मिठाईयां और फल लिए खड़े थे ।

माधव : ये छोटा सा तोहफा हमारी तरफ से छोटे बाबू के लिए ।
इन सबकी क्या जरूरत थी माधव जी मुस्कुराते हुए :ठाकुर कहते है।

चलिए माधव जी भोजन कर लिया जाए और सारे लोग खाने खाने लगते है और इधर सूर्या गांव वालो को खिलाने के बाद खुद भी खाने लगा था ।

इधर मंदिर के सामने वाले पहाड़ में लेता आदमी एक फोन करता है : सुनो माधव जी से बात कराओ वरना कम नही होगा।
आदमी : रुको । और कॉल काट देता है ।
Nice update. Barha bhai sarvagun sampann (jua khelna daru pina) hai aur chota aashirvaad sampann hai. Kya kahani sochi hai. Nice👍👍
 

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ठाकुर साहब और बाकी लोग खाना खा चुके थे और गांव वाले भी खा चुके थे ।

ठाकुर साहब भीमा से : भीमा सूर्या को बुलाओ वस्त्र दान की शुरुवात करनी है।
भीमा : जी मलिक

सूर्या जो अपने दोस्तो के साथ बाते कर रहा था तभी उसे कोई दूर से देख रही थी सायद वह सूर्या को पसंद करती थी पर ये एहसाह से अनजान थी ।

ये लड़की। माधव की बेटी सोनाली थी जो सूर्या के ही स्कूल में पढ़ती थी दोनों दोस्त थे पर सूर्या इतना करीबी दोस्त किसी को नही बनता था उसका बस एक ही जिगरी दोस्त था जिसका नाम कारण था

तभी भीमा सूर्या को ढूंढते हुए सूर्या के पास पहुंचता है : छोटे मालिक जल्दी चलिए ठाकुर साहब बुला रहे है वस्त्र दान के लिए ।

सूर्या: अप चलिए हम आते है।

सूर्या फिर अपने दोस्तो को अलविदा कह कर चल देता है ।

वस्त्र दान जो सूर्या अपने हर जन्मदिन पर पूरे गांव वालो को भेट की रूप में दान करता था औरतों को सारी , बच्चो को कपड़े और जवान , बूढ़े को धोती और कमीज दिया जाता था ।

सूर्या ने सारे गांव वालो को दान देते देते थक चुके और दान पूरा होते वो एक कुर्सी पर बैठ जाते है।

ठकुराइन: बेटा थक गया क्या ?

सूर्या: हम मां थोड़ा थक गया हूं कब घर चलना है।

रुको में तुम्हारे बाबा से पूछती हुं ( ठकुराइन जहा ठाकुर और माधव बात कर रहे थे उधर। बढ़ती है)
माधव :( ठकुराइन को देखते हुए ) प्रणाम ठकुराइन अब जाके आपका दर्शन हुआ ।

ठकुराइन : जी प्रणाम माधव जी ।

जी सुनिए ठाकुर साहब सूर्या थोड़ा थक वस्त्र दान करते हुए कब घर जाना है पूछ रहा है ?

ठाकुर : बस थोड़ी देर इसके बाद निकलेंगे ।

जब ठाकुर और ठकुराइन थोड़ी दूरी बात कर रहे थे माधव ठकुराइन को देख रहा था तिरछी निगाहों से ।
माधव मन में (ठकुराइन का पल्लू जो थोड़ा नीचे हो गया था तो उसकी हल्की स्तनों को घाटी दिखाते हुए ठकुराइन की जवानी अब भी गई नही है क्या तने हुए स्तन है चोली से कितनी कसी हुई है एक बार इसकी रस पीने मिल जाए पूरी निचोड़ लूंगा मन में सोचने लगता है )

ठकुराइन चले जाती है और माधव ठाकुर से अपनी बेटी को मिलते हुए ।

माधव : ठाकुर साहब में अपनी बेटी को आपसे मिला न सके आते वक्त अपने दोस्तो के पास चली गई थी सोनाली ।।

सोनाली : ( ठाकुर साहब को बड़े बाबा बोलती थी शुरू से) पांव छुते हुए प्रणाम बड़े बाबा।

ठाकुर : आशिर्वाद देते हुए खुश रहो मेरी बेटी और काफी बड़ी हो गई है पढ़ाई कैसे चल रही है बेटी ?

सोनाली: जी अच्छी चल रही है ।

माधव : सूर्या और तुम बेटी एक ही क्लास में जो न तो मिलो अपने दोस्त से जन्मदिन दिन की बधाई दी न तुमने ?

सोनाली ( डरते हुए ) : भूल गई पापा वो सूर्या मुझे मिला ही नहीं।

अभी जल बेटी वो रहा सूर्या बैठा है इशारा करते हुए ठाकुर शाहब कहते है ।

सूर्या सोनाली को आते हुए देख लेता है थोड़ा घबरा जाता है क्युकी सोनाली बड़ी तेजी से उसकी तरफ आ रही थी ।

सोनाली धीरे से : जन्मदिन की बहुत _बहुत बधाई हो सूर्या।

सूर्या: धन्यवाद आपका सोनाली।

तोहफा नही लाई अप मेरे लिए सूर्या कहता है थोड़ा मुस्कुराते हुए ।

सोनाली थोड़ी हैरान हो जाती है क्युकी वो तो तोहफा गाड़ी में ही छोड़ आई थी ...

सोनाली : वो में....

बीच में सूर्या बोल पड़ता है : कोई नही फिर कभी दे दीजिएगा ।.... अप स्कूल में दे दीजिएगा ठीक है!

सोनाली : सोचते हुए ठीक है कल स्कूल में अभी चलती हूं


सोनाली इतना कह चले जाति है ।
Wha bhout pyara, pyar hai. Dekhte hai baap havi hota hai ya beti baap pe bhari parhti hai.
 

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ठकुराइन ने अपना पल्लू हटा ली थी क्योंकि उसमे तेल न लग जाए ।


अब आगे...

सूर्या : मेरी मां कितना चंपी करोगी थक जाएगी आप.. आराम लग रहा है अब मुझे ।

ठकुराइन : तू रहने दे चल इधर घूम कहती सूर्या को अपनी तरफ घुमाती है ।



सूर्या: मां अपने .. सारी क्यों हाटा ली अपने चोली से।

बोलकर शर्माने लगता है ठकुराइन देख लेती है उसका बेटा उसकी स्तनों को देख शर्मा रहा है कितना भोला है मेरा बेटा ।
सूर्या की जगह कोई मर्द होता तो शायद पानी छोड़ चुका होता पूरी कसी हुई ब्लाउज में गला भी काफी गहरा था ठकुराइन खास मौके पर डीप ब्लाउज पहनती है दो तनी हुई उरोजा के बीच एक लंबी घाटी बन रही थी कोई भी देख ले तो चाटना का मन करे ।ब्रा भी छोटी पहनी थी आज तो स्तन पूरी ऊपर की ओर निकलने को हो रही थी।

ठकुराइन : क्या हुए बेटा शर्मा क्यों रहा आज तुम्हारा जन्मदिन था इसलिए ऐसी ब्लाउज पहनी है और ब्रा भी छोटी पहनी है इसलिए मेरे स्तन थोड़े ऊपर की ओर हो गए है बेटा क्या करू बहुत कसी हुई है न ब्लाउज बोल अपने बेटा का लाल गाल देख मुस्कुराने लगती है ☺️☺️

सूर्या शर्म को छुपाने की कोशिश करते हुए : में कहा शर्मा रहा हूं पहली बार आपको ऐसे देख रहा हु बस.... इसलिए बोल

ठकुराइन चंपी करके सूर्या को सोने को बोल के कुछ सोचते हुए की मेरा बेटा अब बड़ा हो रहा है शरमाने लगा है ... ठकुराइन अपने कमरे में चली जाती है।

सुनीता उधर ठाकुर साहब की पैरो की मालिश कर रही थी ।

सुनीता का नीचे बैठी थी ठाकुर साहब कुर्सी में बैठे हुए पैर छोटे से मचिया में रखा था ।तेल लगा कर मालिश ही रही थी ।

सुनीता का पल्लू बार बार गिर जा रहा था ठाकुर साहब भी ये बात गौर कर रहे थे पर गलत तरीके से नही अब जब पल्लू गिरता है तेल की कटोरी में गिर जाता है ।

ठाकुर कुछ सोचते है हुए : सुनीता कितना बार पल्लू संभालती रहोगी हमे सोने भी जाना ठीक करो ।थोड़े कड़क आवाज में कहते है।

सुनीता: माफ़ करिए मालिक ।(मन क्या करू जोबन से पल्लू हटा ली चोली का दो हुक बहुत ढीले है कब टूट जाए पता नही)क्या करती और बेचारी पल्लू हटा लेती है कमर में कोस लेती है

ठाकुर आंखे बंद कर मालिश का मजा लेने लगता और इधर सुनीता के उरोजो सांस के साथ ऊपर नीचे होती है ।ठाकुर जैसे ही आंखे खोलता निगाह सीधे सुनीता के स्तनों पर जाति जो आधी बाहर थी और ऊपर नीचे हो रही थी ।वो है तो ठाकुर पर बहुत दिनों से संभोग नहीं किए थे मालिश के साथ आंख सेकने लगते है उमर हो चुकी थी पर हवास खानदानी थी।

सुनीता देख लेती है ठाकुर साहब उसकी उभारों को ही घूर रहे है थोड़ी घबरा और शर्मा जाति है और कहती मालिक दोनो पैरो की मालिश हो गई ।

ठाकुर : अब घुटनों की थोड़ी मिल कर थोड़ा दर्द है।जन बुझ कर बोलता है ठाकुर ताकि थोड़ी देर देख सके।

सुनीता क्या करती मालिश करने लगती है।


ठाकुर का लिंग खड़ा हो गया था उभर सुनीता देख पा रही थी। तभी ठाकुर जैसे सुनीता के सर मैं हाथ से सहलाते हुए कुछ बोलने वाले रहते है की तभी ... सुनीता घबरा कर तेजी से सांस लेने लगती है जिसकी वजह से उसके चोली दो हुक टूट जाती है और छलक कर आधी से अधिक स्तन बाहर हो जाती हल्की निप्पल भी दिखने लगती है।

सुनीता के मुंह से आह निकल जाती शायद हुक टूट कर चोली के अंदर घुस जाती है ।
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