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Incest मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ

aamirhydkhan

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मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ


पेशे खिदमत है वो कहानी जिसके पहले भाग को पढ़ कर मैंने लिखना शुरू किया . जिनकी ये कहानी है अगर वो कभी इसे पढ़े तो अपने कमेंट जरूर दे .

कहानी के सभी भाग कहीं नहीं मिले तो उन्हें पूरा करने का प्रयास किया है



KAJIN4

उम्मीद है मेरा लेखन पसंद आएगा .

आमिर हैदराबाद


मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ

INDEX
UPDATE 01मेरे निकाह मेरी कजिन जीनत के साथ 01
UPDATE 02मेरे निकाह मेरी कजिन जीनत के साथ 02.
UPDATE 03रुकसाना के साथ रिज़वान का निकाह.
UPDATE 04मेरा निकाह मेरी कजिन के साथ- रुकसाना के साथ रिज़वान का निकाह.
UPDATE 05मेरी बहन का निकाह मेरे कजिन के साथ और सुहागरात.
UPDATE 06मेरी बहन सलमा की चुदाई की दास्ताँ.
UPDATE 07मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ - छोटी बीवी जूनि.
UPDATE 08मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ- छोटी बीवी जूनि.
UPDATE 09मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ - सेक्सी छोटी बीवी जूनी.
UPDATE 10चुदाई किसको कहते है.
UPDATE 11छोटी बेगम जूनी. की सुहागरात.
UPDATE 12छोटी बेगम की जूनी. सुहागरात-2
UPDATE 13मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ- छोटी बेगम जूनी. की सुहागरात.
UPDATE 14छोटी बेगम जूनी. की सुहागरात की सुबह
UPDATE 15अल्हड़ छोटी बेगम जूनी. की सुहागरात की चटाकेदार सुबह.
UPDATE 16दोनों कजिन्स जूनी जीनत.चुदासी हुई.
UPDATE 17ज़ीनत आपा के साथ स्नान
UPDATE 18ज़ीनत आपा का स्तनपान
UPDATE 19में ही ऊपर से चोदूंगी फिर लंड चुसाई और चुदाई
UPDATE 20लंड चुत चुदाई और चुदाई
UPDATE 21कमसिन और अल्हड़ जूनि की चुदाई
UPDATE 22तीसरी बेगम कमसिन अर्शी
UPDATE 23तीसरी बेगम कमसिन अर्शी की चुदाई
UPDATE 24तीसरी बेगम अर्शी की चुदाई
UPDATE 25तीसरी बेगम अर्शी की तृप्ति वाली चुदाई
UPDATE 26तीन सौत कजिन जूनी जीनत अर्शी
UPDATE 27मीठा, नमकीन, खट्टा- जीनत जूनी अर्शी
UPDATE 28दुल्हन बनी चौथी कजिन रुखसार
UPDATE 29मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ चौथी दुल्हन रुखसार.
UPDATE 30मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ चौथी दुल्हन रुखसार.
UPDATE 31कुंवारी चौथी कजिन रुखसार.
UPDATE 32तीखा कजिन रुखसार
UPDATE 33लंड चुसाई
UPDATE 34बुलंद चीखे
UPDATE 35चारो बेगमो के साथ प्यार मोहब्बत- जीनत जूनी अर्शी रुखसार
UPDATE 36बेगमो के साथ प्यार मोहब्बत -जीनत जूनी अर्शी रुखसार
UPDATE 37जीनत जूनी अर्शी रुखसार बेगमो के साथ कहानी अभी बाकी है-
UPDATE 38ज़ीनत आपा की मदहोश अदा
UPDATE 39चारो बेगमो ने लंड चूसा और चाटा
UPDATE 40चलो अब एक साथ नहाते हैं
UPDATE 41नहाते हुए चुदाई
UPDATE 42खूबसूरती
UPDATE 43मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ मस्ती करने दो
 
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मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ

खानदानी निकाह

अपडेट 181

तड़पती जवानी

फलक ने भी अपनी योनि पर उतनी ही व्यस्तता से ऊँगली फिराते हुए कहा, जिस पर शैंपेन के रंग का हल्का रोएँदार आवरण था, लेकिन राफिया की योनि से ज़्यादा संवेदनशील नहीं थी। "यह लगभग कोल्ड क्रीम जैसा लग रहा है!" शबनम ने उन्हें याद दिलाया कि किसी भी कोल्ड क्रीम या किसी भी अन्य मानव निर्मित द्रव में पुरुष के वीर्य जैसा जोशीला गुण नहीं होता।फलक और राफिया ने मेरे उत्साही स्खलन के बारे में सब कुछ देख और सुन लिया था और फलक ने राफिया को हस्तमैथुन कराया था क्योंकि उसने मुझे अपना लिंग नफीसा की योनि में अंदर बाहर करते हुए देखा था ;

फिर शबनम ने कहा आज रात के भोजन के लिए वो सबके पसंदीदा व्यंजन और क्षीर कोरमा बनेगी और उसे कुछ खरीदारी करने दिन में बाजार जाना है और फलक को भी साथ चलने के लिए कहा और अपने कमरे में चली गयी . उसके जाने के बाद फलक और राफिया आपस में लिपट गयी और एक दूसरी की चूत में ऊँगली करने लगी . ठरक के पागल राफिया कुछ भी करवाने के लिये राजी थी. फलक ने रफिया की चूत में उंगली करते करते रफिया के कड़े निप्पल पर कपड़े सुखाने बाली चुटकियाँ लगा दी, तो रफिया की खुशी के मारे सुरीली किलकारियाँ निकल गयी . दिल में लड्डू फूटने लगे और चूत में चींटियाँ सी रेंगने लगी. रफिया अपनी बुलबुल का पटाका बजवाने को आतुर हो उठी.

दिन में फूफी, नफीसा और फलक बाजार चले गए और मेरी देखभाल के लिए राफिया रुक गयी .
उस दिन घर पर मेरे और राफिया के इलावा कोई भी नहीं था. राफिया नहाती हुई बाथटब में पानी में आग लगाने में मग्न थी. मल-मल कर नहाती राफिया मेरे ही बारे में सोच रही थी और मेरा लम्बा कद, चौड़ा सीना और मांसपेशियों से भरपूर बदन, और मेरा बड़ा मोटा लंड जिसे उसने कल करामाते करते हुए सभम और नफीसा आपा की चुदाई करते हुए देख था , उस दृश्य को याद कर रफिया पानी में पनिया गई. तीर सी तीखे शॉवर की तेज धार चूत पर पड़ने से चूत और भी गुदगुदा गई. बदन में तनाव व कसाव बढ़ने से जवानी की दुखन और टीस भी बढ़ गई.

आज ताजी़ ताजी नहाई रफिया मुझे पटाने की कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती थी. शरारती रफिया ने अपनी चार साल पुरानी स्कूल ड्रेस की काली शॉर्ट स्कर्ट और सफ़ेद शर्ट फंसा कर पैरों में ऊँची ऐड़ी के सैंडल पहन लिए.

फिर अपनी मस्त जानलेवा कामुक जवानी को शीशे में निहारते हुए रफिया पन्जों के बल उचक कर गोरी-गोरी बाहें ऊपर उठा शीशे को तड़का देने वाली अंगड़ाई तोड़ी तो चटाक चटाक की आवाज सेकी तंग टैरालीन की शर्ट के टिच्च बटन खुलते चले गये.

उफ़्फ़! क्या नजारा था! जवान ठोस गोलाइयाँ बगावत पर उतर आई थी और दोनों शरारती कुंवारे कबूतर शर्ट से दाएं-बाएं बाहर झांकने लगे. उसके बड़े चुच्चों ने शर्ट को चौड़ा कर ‘वी’ गले को ‘यू’ बना दिया था.

दूधिया चूचों के गुलाबी शिखर ऐसा लगते थे जैसे संगमरमर के चबूतरों पर कचनार की कच्ची गुलाबी कली चिपकी हो.

हाय! अम्मी कित्ता मजा आया था जब सलमान भाई ने मेरे अंगो क सहलाया था और अपनी गुलाबी-गुलाबी छोटी छोटी निप्पलों को अपनी थूक से सनी उंगली और अंगूठे में घुमाने से कमसिन बदन झनझना उठा और चूत पिनपिना उठी. रफिया की सैक्सी सुडौल लम्बी व चिकनी टांगों में आग लगी हुई थी. हाई हील से गोरी गुदाज चिकनी जांघें और सुडौल पिंडलियाँ और भी उभर आई और चुदाई का निमत्रण दे रही थी.

गदराहट से मांसल घुटनों पर मादक बल पड़े हुए थे, बेहद पतली और पिचकी हुई कमर के नीचे मस्त गोल गोल चूतड़ और चूतड़ों में दबी फंसी कुंवारी गाण्ड कुलबुला रही थी और चूत में चुदाई की चाहत में कामुक तरंगे बह रही थी . बेचारी नाम मात्र की नन्ही स्कर्ट रफिया की उफनती व उबलती शोला जवानी को रोकने में नाकाम थी.

अपनी स्कूल स्कर्ट ऊपर उठा कर सुर्ख लाल नाईलोन की कच्छी में अपने कसमसाते यौवन को निहारते ही उसकी आँखों में लाल डोरे खिंच गये और गाल तमतमा उठे. पूरा बदन आग था जल रहा था और आग में गुलाबी हो रहा था ! तौबा तौबा! क्या हुस्न था, क्या शवाब था , बिल्कुल ताजा ताजा खुली सोडे की बोतल अपने ज्वालामुखी से सुलगते और फट पड़ने को तैयार यौवन को देखते हुऐ अपने निचले होंट के कोने को दाँतों में दबा कर स्वयं को आँख मार दी और फिर अपनी ही बेशर्मी पर स्वयं ही लज्जा गई.

डोर जैसी नाम-मात्र कसी कच्छी राफिया की रोम-विहीन मलाई सी गोरी गदराई फुद्दी और गुदाज चूतड़ों में धंसी हुई थी और चलते समय बुरी तरह गुदगुदा देती थी.

एकदम शीशे सी चिकनी और नादान चूत की गुलाबी फांकें कच्छी से बाहर झांक रही थी और चूत एकदम से पच्च-पच्च गीली थी.

रफिया ने अपनी ठोस स्तन की गोलाइयों को बेरहमी से मसल और रगड़ कर लाल कर लिया. मधुर ईस्सऽऽऽऽऽ ईस्सऽऽऽ सिसकारियाँ और बहकी बहकी बेतरतीब साँसें कमरे के वातावरण को रंगीन बनाने लगी. प्यासी रफिया का मादक यौवन, वासना के समुन्दर में हिचकोले खाने लगा.

ठरक के मारे कच्ची कुंवारी फ़ुद्दी छोटी फूल गई थी , चीरा झिलमिला उठा और रफिया का लशलश करता बदमाश किशमिश सा दाना हौले हौले बड़ा हो अकड़ता चला गया. अब राफिया का भगनासा किसी छोटे शरारती बच्चे की लुल्ली के समान चूत की बालकोनी से बाहर झांकने लगा.

अपनी मरमरी टांगों को भींच कर रफिया ने चूत को शाँत करने की नाकाम कोशिश की, पर अब जवानी की आग से उफनता पानी सर के ऊपर से निकल चुका था. उसकी हालत खराब होती जा रही थी.

रफिया की चूत की दीवारें बुरी तरह से कस गई बह बुदबुदा उठी- आह अम्मी ! सीऽऽऽ! बहुत सताती है ऽऽऽऽ! चूत की फांकें आपस ने चिपक गई. इस हालत में नाजुक चूत किसी के लण्ड का कचूमर बना कर उसका रस निचोड़ने के बेकरार थी . आज रफिया किसी भी पहलवान के लौड़े को अपनी चूत की नींबू नीचौड़नी में निचौड़ सकती थी. फिर उसे याद आया फलक उससे बड़ी आज फलक की बारी है अपनी पहली चुदाई करवाने की और पता नहीं उसकी बारी कब आएगी .हाय सलमान भाई का गर्म और मोटा लण्ड तो आज इस मुई फलक को दिन में तारे दिखा देगा.

उत्तेजना के मारे रफिया की आँखें ऊपर को लुढ़क गई और पेट अंदर को पिचक गया.सांस के साथ चुच्चे उठक-बैठक लगाने लगे. हर एक झटके पर रफिया चूच्चे ऐसे थरथराते जैसे उनमें पारा भरा हो. अपने ही चुच्चों को फूलते पिचकते देख कर रफिया की काम पीपासा दावानल सी भड़क उठी. एक हाथ से अपना चुच्चे को ऊपर उठा और मुँह झुका कर होंटों में लेकर चुमला दिया. वाह, क्या कयामत नज़ारा था.

‘हायऽऽऽ पता नहीं कब चुदेगी यह निगौडी मां की लौड़ी मेरी चूत!’ बुदबुदा उठी रफिया - काश, आज कोई मादरचोद मेरी कमरतोड़ चुदाई कर दे और मेरी मखमल सी रेशमी गाण्ड फाड़ कर मेरी चकाचक जवानी के कस-बल निकाल दे. कोई मतवाला अपना मस्त फनफनाता हुआ लण्ड दोनों ट्टटों समेत मेरी अनचुदी चूत में पेल कर फाड़ डाले और भौंसडा बना दे. मुझे चौपाया बना कर मेरी पौनी-टेल को पकड़ कर सड़क छाप कामुक कुतिया की तरह सड़क के चौराहे पर चोद दे. मेरी न न करने के बावाजूद भी मुझे पकड़ कर पीट पीट कर बेरहमी से गाण्ड के चीथड़े उड़ा दे और चूत की चिन्दी चिन्दी कर दे, मेरा पोर-पोर चटका दे और मेरे कोमल बदन को रोडरोलर की तरह रौंद कर रख दे.

काश मेरे रसभरे होंठों में किसी बहनचोद का मोटा फौलादी लन हो गले तक सटक के, आँखों में आँखे डाल कर चुसड़ चुसड़ कर मैं उसके लण्ड की झड़न के साथ, चूस कर ट्टटे भी पी जाऊँ. लौड़े पर दंदियाँ मार मार कर लण्ड की ऐसी की तैसी कर दूँ. रफिया को अब एक मूसल सा लण्ड चाहिए, जो रफिया की सुलगती जवानी की ईंट से ईंट बजा दे और अपनी जवानी के झन्डे गाड़ के रख दे.


हाय आज अम्मी कैसे चुद रही थी सलमान से और फिर नफीसा आपा ने कैसे झंडा गढ़वा लिया था अपनी निगोड़ी चूत में और आज शाम फलक बाजी उस मस्त लंड से चुदाई के मजे लेगी उफ्फ्फ फिर हाय मेरी बारी आएगी सलमान से अपने बदन के सब कस बल निकलवाने की और यह सोच कर वह जोर जोर से अ सांस लेने लगी और गोरी चूत गुलाबी से लाल हो चली थी.

तभी बाहर आहट हुई , रफिया में उधर झाँका मैं बगीचे से टहल रहा था , मेरी झलक पाते ही रफिया के बदन में सिरहन दौड़ गई, चूत फड़फड़ा और गाण्ड गुदगुदा उठी. चूत मरवाने को बेताब रफिया के मन में फटाफट एक योजना बन गयी .

रफिया ने झटपट से अपनी कच्छी को घुटनों से कमर पर खींच लिया पर फिर कुछ सका और उसे निकाल दिया और छोटी सी स्कूल स्कर्ट नीचे कर और चूचों को शर्ट के वापिस अंदर ठोस कर चार बटन जैसे तैसे बंद कर दिये. रसोई में जा कर जल्दी से चाय बनायीं , इस बीच जल्दी से चूत की फांकों को गुलावी लिपस्टिक से पोत लिआ. फिर कुछ सोच कर शरारती लड़की ने अपनी कच्छी बेपरवाह हो नीचे फ़ेंक दी और .दरवाजा खोल मुझे देखा, और मुझे देखते, उस बेकर्रार हसीना की आँखों में चमक आ गई और बांछे खिल उठी.

"भाई आईये चाय त्यार है " , दरवाजा खोल कर दरवाजे पर खड़ी रफिया ने मुझे पुकारा ,

मैं रफिया की सेक्सी पोशाक को देखते ही पहले तो सकपका गया. ताजी ताजी नहाई रफिया के गीले गीले बालों के बीच अति मासूम चेहरा. रफिया की तीन चौथाई गोल गोल गोलाइयाँ तंग शर्ट के खुले गले से बाहर उबल पड़ रही थी और मेरी तरफ तनी हुई थी. मिज़ाइलों से खड़े हुए निप्पल शर्ट को चीरफाड़ कर बाहर आने को बेताब लग रहे थे. काली स्कर्ट से बाहर झांकती नंगी संगमरमरी गोरी चिट्टी गदराई आपस में चिपकी रानें, खूबसूरत गुदाज पैरों में हाई हील. हाथ-पैरों पर लाल लाल नेलपालिश, प्यारे से नाक में नथ, कानों में टाप्स,पैरों में पाजेब और कलाइयों में गोल्डन कंगन.

मैंने पूछा " फूफी जान , नफीसा और फलक ?

बिजली गिराती मस्ताई हुई रफिया टेढ़ी दिलकश मुस्कान के साथ चहकती हुई सुरीली आवाज में बोली- हैल्लौ सलमान भाई ! सब बाजार गयी है , आप आईये चाय त्यार है ? जैसी ही मैं उसके पास आया रफिया ने मेरा हाथ पकड़ कर अंदर खींच लिया.

जारी रहेगी


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Note- आमिर का यूजर लॉक हो गया है .आमिर ने साइट एडमिन से सम्पर्क कर पासवर्ड बदलने की प्राथना की है , यूजर एक्टिव होने तक आमिर ने मुझे कुछ कहानीयो के अगले भाग भेजे हैं जिन्हे मैंने उनकी कहानी पर अपडेट किये है , आमिर आगे भी मुझे जो भी अपडेट भेजेंगे उन्हें यहाँ अपडेट करनेमे मुझे प्रसन्ता होगी .


दीपप्रीती

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मेरा निकाह मेरी कजिन के साथ

भाग 06

सलमा के साथ रिज़वान का निकाह



रिज़वान ने हमे मेरी बहन सलमा की सुहागरात में हुई चुदाई की दास्ताँ सुनानी शुरू की l
रिज़वान बोला मैंने अब सलमा के पेटीकोट को ऊपर उठा दिया और उसके पेटीकोट के नाड़े में उसका पेंटीकोट मोड़कर फैंसा दिया। फिर मैंने सलमा की पैटी के ऊपर से उसकी चूत को हल्का सा सहलाया। उसकी टांगों की कंपन में साफ देख रहा था। मैंने उसकी दोनों जांघों को अपने हाथ से पकड़कर घुमा दिया। अब अत की गाण्ड मेरे सामने थी। उसकी लाल रंग की कच्छी में उसके गोरे-गोरे चूतड़ बड़े प्यारे लग रहे थे। फिर मैंने उसकी कच्छी के इलास्टिक में उंगली डालकर कच्छी को आधा नीचे किया। उसके चूतड़ों की दरार में मैंने अपनी उंगली फिरानी शुरू कर दी। चिकने चूतड़ों में उंगली फिसली जा रही थी।

रिज़वान बोला मैंने अब उसकी पेंटी को थोड़ा और उत्तार दिया उसके चूतड़ों को कच्छी से बाहर निकाल दिया और उसके चूतड़ों पर किस करा। फिर मैंने पी से ही उसकी चत के मुँह पर उंगली रख दी। उसकी चूत में जैसे आग निकल रही थी। मैंने अपनी उंगली को जरा सा अंदर डाला, तो वो सीईईईll कर उठी, मैंने अब उसकी पूरी पैंटी उतार दी।

रिज़वान बोला मैंने सलमा से कहा- "सलमा अब तुम मेरे लण्ड को अपने मुँह में लेकर चूसाl"

सलमा ने अपनी जीभ से मेरे लौड़े को चाटना शुरू कर दिया। मैं पलंग पर लेट गया और मैंने सलमा का अपने पेट पर बैठा लिया। फिर मैंने सलमा की चूत अपने मुँह के पास कर ली। अब हम दोनों 69 पोज में थे। सलमा की चूत आज बिल्कुल चिकनी थी। मैंने उसकी चूत पर अपनी जीभ रख दी। बड़ी मस्त सी महक मेरी सांसों में समा गई। सलमा मेरा लौड़ा अब अपने मुँह में लेकर चूस रही थी। मैं उसकी चूत को अपनी जीभ से रगड़ रहा था। थोड़ी देर बाद मैंने ऋत को सीधा लिटा दिया और उसकी टांगों के बीच में बैठ गया। मेरा लौड़ा अब पूरी तरह टाइट था और चूत में जाने को बेकरार था।

रिज़वान बोला मैंने अपने लण्ड का सुपाड़ा सलमा की कुँवारी चूत के छोटे से छेद पर रख दिया। सलमा अब लंबी-लंबी साँसे लेने लगी थी। मैंने अपने लौड़े को जरा सा जोर से दबाया तो थोड़ा सा लण्ड उसकी चूत में घुसा। सलमा के चेहरे पर दर्द दिखाई दे रहा था। मैं उसको अभी और तड़पा के चोदना चाहता था। मैंने उसकी चूत में अपना लण्ड थोड़ा सा और घुसा दिया, तो उसकी चीख निकल गईं। और लगभग उसी समय मुझे ज़ीनत की भी चीख सुनाई दी l जिसे सुन मेरा जोश बढ़ गया l


ZEENAT4

अब सलमा की आँखों में आँसू आने लगे। रिज़वान बोला मैंने अबकी बार अपना लौड़ा चूत से सटाकर कसकर शाट मारा, तो मेरा लण्ड उसकी कुँवारी चूत की झिल्ली को चीरता हुआ आधा अंदर चला गया। सलमा ने जोर से एक चीख मारी। मैंने भी उसको रोका नहीं। क्योंकी में यही चाहता था की सलमा की चीख उसके भाई सलमान को भी को सुनाई देनी चाहिए। मैं जानता था की वो साथ वाले रूम में मेरी बहन की चीखे निकलवा रहा था । मुझे महसूस हुआ कि मेरे लिंग को सलमा ने अपनी योनी रस ने भिगो दिया था, जिसकी वजह से लिंग आसानी से अन्दर और बाहर हो पा रहा था. और अगली बार के धक्के में मैंने थोडा दवाब बड़ा दिया. मेरी साँसे जल्दी जल्दी आ रही थीं. सलमा ने अपनी टंगे मेरे चूतड़ों से और बाहें मेरे कंधे पर लपेट दी थीं और अपने नितम्बो को ऊपर कि ओर उठा दिया. अन्दर अवरोध महसूस होने लगा था.


SALMA5

रिज़वान बोला मैंने अपना लण्ड थोड़ा सा बाहर निकाला और अब मैंने कस के शाट मारा, तो मेरा पूरा लण्ड अब सलमा की चूत में घुस गया था। सलमा की आवाज में दर्द था और वो रोने लगी। मैंने पूरी ताकत के एक धका लगा दिया “ आप की टांगो ने भी मेरे चूतड़ों की नीचे की और कस लिया ओह अम्मी ” आपा के मुह से निकला. सलमा के स्तन ऊपर की ओर उठ गए और शरीर एंठन में आ गया जैसे ही मेरा १० इंची गर्म, आकार में बड़ा लिंग पूरी तरह से गीली हो चुकी योनी में घुस गया. अन्दर, और अन्दर वो चलता गया, चूत के लिप्स को खुला रखते हुए क्लिटोरिस को छूता हुआ वो पूरा १० इंच अन्दर तक चला गया था. आपा की योनी मेरे लिंग के सम्पूर्ण स्पर्श को पाकर व्याकुलता से पगला गयी थी. उधर मेरे हिप्स भी कड़े होकर दवाब दे रहे थे और लिंग अन्दर जा चूका था . सलमा भी दर्द के मारे चिलाने लगी जो पूरी हवेली में गूँज उठी होंगी आहहहहह रिज़वान आएीी


SALMA6

सलमा बोली- "प्लीज रिज़वान बाहर निकाल लीजिए। मैं मर जाऊँगी, बड़ा दर्द हो रहा हैl" और वो ऊऊऊll आईईईll की आवाजें निकालने लगी।

उउउउउइइइइइइ ओह्ह्ह्हह बहुत दर्द हो रहा है प्लीज इसे बाहर निकल लो मुझे नहीं चुदना तुमसे तुम बहुत जालिम हो यह क्या लोहे की गर्म रॉड घुसा डाली है तुमने मुझ में निकालो इसे न्यूऊओ प्लीज बहुत दर्द हो रहा है मैं दर्द से मर जाऊँगी प्लीज निकालो इसे और सलमा की से आँखों से आंसू की धरा बाह निकली मैं उन आंसूओं को पि गया .. बोला मेरी रानी बस इस बार बर्दाश्त कर लो आगे मजा ही मजा हैl

रिज़वान बोला सलमा की चूत बहुत टाइट थी मुझे लगा मेरा लैंड उसमे जैसे फस गया और छील गया है मेरी भी चीखे निकल गयीl हम दोनों एक साथ चिल्ला रहे थे ऊह्ह्हह्ह मर गएl मैंने एक बार फिर पूरी ताकत लगा कर पीठ उठा कर लैंड को बाहर खींचने की कोशिश की लेकिन लण्ड टस से मस नहीं हुआ सलमा की चूत ने मेरा लण्ड जकड लिया था. मैंने बहुत आगे पीछे होने की कोशिश की लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा फिर मैंने पूरी ताकत से एक और धक्का लगाया और लण्ड पूरा अंदर समां गया और मैं सलमा के ऊपर गिर गया फिर में कुछ देर के लिए उसके ऊपर ही पड़ा रहा तो कुछ देर के बाद वो शांत हुईl



SALMA12

फिर सलमा की चूत संचुकन करने लगी और लंड चूसने लगी और मैं झड़ गया और चूत ने जैसे मेरे लंड को चूस चूस का निचोड़ दिया .. ये अनोखा अनुभव मुझे पहली किसी चुदाई में नहीं हुआ था ....

भाई उसके बाद तो मेरा मन कर रहा था बस ऐसे ही लंड सलमा के अंदर डाले पडा रहू और मजे लेता रहू ..

रिज़वान बोला मेरा लंड सलमा की चूत के अंदर ही था l मैंने चूत पर हाथ लगाया तो वह सूज चुकी थी एक दम सुर्ख लाल हो गयी थी सलमा कहने लगी क्या हुआ, मैंने कहा झड़ने के बाद भी लण्ड बहार नहीं निकल रहा है. सलमा की चूत ने मेरे लंड को जैसे जकड लिया था. सलमा रोने लगी है मर गयी मेरी चूत फाड़ डाली और लण्ड फसा डाला जालिम ने मुझे बर्बाद कर दिया अब तो मैं मर जाऊँगी अब मैं क्या कर्रूँगी .. कुछ देर बाद जब मुझे लगा झड़ने के बाद भी मेरा लंड खड़ा है सलमा सुबक रही थी . मैंने उसके होंठों से अपने होंठ सटा कर एक जोरदार धक्का मारा और मेरा लंबा और मोटा लंड पूरा अन्दर चला गया था। इस बार के झटके से उसकी चीख उसके गले में ही रह गई और उसकी आँखों से तेजी से आँसू बहने लगे। उसने चेहरे से ही लग रहा था कि उसे बहुत दर्द हो रहा है। मैंने सलमा को धीरे धीरे चूमना सहलाना और पुचकारना शुरू कर दिया, मैं बोला मेरी रानी डर मत कुछ नहीं होगा थोड़ा देर में सब ठीक हो जाएगा.


SALMA7

रिज़वान बोला मैंने उसे लिप किश किया मैं उसे लिप किश करता ही रहा वह भी कभी मेरा उप्पर लिप तो कभी लोअर लिप चूसती रही मैंने उसके लिप्स पर काटा उसने मेरे लिप्स को काट कर जवाब दिया,फिर मैं उसके होंठो को चूमने लगा और वह भी मेरा साथ देने लगी फिर मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी और वह मेरी जीभ को चूसने लगी. फिर मैंने भी उसकी जीभ को चूसा. सलमा मुझे बेकरारी से चूमने चाटने लगी और चूमते चूमते हमारें मुंह खुले हुये थे जिसके कारण हम दोनों की जीभ आपस में टकरा रही थी और हमारे मुंह में एक दूसरे का स्वाद घुल रहा था। फिर मैंने उसकी चूची सहलानी और दबानी शुरू कर दी वह सिसकारियां ले मजे लेने लगी मैंने धीरे धीरे उसकी चूत पर अपने दूसरी ऊँगली से से उसके क्लाइटोरिस तो सहलाना शुरू कर दिया सलमा गर्म होने लगी धीरे धीरे चूत ढीली और गीली होनी शुरू हो गयी फिर मेरे लण्ड पर चूत की कसवत भी कुछ ढीली पड़ गयी इक मिनट रुकने के बाद मैंने धक्का लगाना शुरू किया.. फिर कुछ देर में ही वो भी मेरा साथ देने लगी। मुझे जैसे जन्नत का मज़ा आ रहा था। सलमा ने ढेर सारा पानी मेरे लंड पर छोड़ दिया. मैं झड़ने के बाद भी लिप्स किस करता रहा . करीब 30 मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों ही साथ में झड़ गए। दो-तीन झटकों बाद मैंने लण्ड निकाल लिया ।

हां रिज़वान मैंने कहा - तुम दोनों की ये चीख तो मैंने भी सुनी थी पर उस समय मेरा लंड भी ज़ीनत की चूत में थाl

रिज़वान बोला मैंने अब उसकी चूची को मुँह में ले लिया और हल्के-हल्के धक्के मारने लगा। सलमा को अब जरा सा आराम मिला था जैसे। मैंने उसके होंठों को चसते हुए कहा- "अब कैसा लग रहा है?"

सलमा ने कोई जवाब नहीं दिया।


SALMA13

रिज़वान बोला मैंने उसको कहा- "अपनी जीभ मेरे मुँह में दोl' उसने दे दी। मैं उसकी जीभ को चूसने लगा। फिर मैंने उसको कहा- "अपने दोनों हाथ मेरी कमर पे रख दोll"

रिज़वान बोला उसकी चूड़ियों की खनक सेक्स का मजा दोगुना कर रही थी। उसका नाजुक बदन मेरे जिम से चिपका हुआ था। मैंने उसकी टांगों को थोड़ा और फैला दिया। मैंने अब धक्कों की स्पीड बढ़ा दी। सलमा की अब जोर-जोर से सिसकियां निकल रही थी। उसकी चूड़ियां में हर धक्के पर खनक उठती थी। उसकी पायजेब और चूड़ियां मेरे हर धक्के के साथ लय बना रही थी। फिर मैंने उसके होंठों पे होंठ रख दिए और कस-कस के धक्के मारे। 20-25 धक्कों में मेरा सारा वीर्य उसकी चूत में भर गया। मैं उसके ऊपर ही लेट गया मेरा। लौड़ा झड़ने के बाद भी सलमा की चूत में चिपक कर फंसा हुआ था। फिर धीरे-धीरे लण्ड सिकुड़कर बाहर आने लगा।

रिज़वान बोला सलमा तेज-तेज सांसें ले रही थी। उसकी चूचियां अब ऊपर-नीचे हो रही थी। मैंने उसकी टांगों को अपनी टांगों में फंसा लिया था। मेरे हाथ जब उसकी गाण्ड पर लगे तो कुछ गीला-गीला सा लगा। मैंने देखा तो उसके सफेद चादर पर खून के धब्बे साफ दिख रहे थे। वो मुस्कुराने लगी और मुझसे चिपक गई।


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रिज़वान बोला मैंने उसको कहा- "अपने पेटीकोट से मेरा लण्ड पॉछ दो, और अपनी चूत भी इसी से साफ कर लोl" उसने ऐसा ही किया। हम दोनों लिपटकर लेटे रहे।

रिज़वान बोला लगभग पांच मिनट बाद हम उठे फिर हम दोनों से साथ में बाथ लिया और मैंने सलमा को उठा कर गोद में बिठा लिया और थोड़ी देर में ही दूसरा राउंड भी स्टार्ट हो गया।

रिज़वान बोलता रहा मैं सलमा से बोला - अपनी चूचियों से मेरे चेहरे पर मसाज करl सलमा ने अपनी चूचियाँ पकड़ कर मेरे क्लीन शेव चेहरे पर रगड़ना शुरू कर दिया। मेरा लण्ड ठीक मेरी चूत के नीचे था, तभी मैंने सलमा की कमर पकड़ कर एक जोरदार धक्का माराl वो उछल पड़ीl तब तक मगर मेरा टोपा चूत में फंस चुका था।

मेरा लंड इस समय लोहे की सलाख जैसा सख्त और गर्म था और सलमा उस पर पर बैठी हुई थी। मैंने जोर लगाया तो सलमा चिल्ला पड़ी। मैंने उसे खिलौने की तरह उठाया और खड़े हो कर एक और झटका दिया।

सलमा बोली प्लीज आराम से करो नहीं तो मैं मर जाऊँगी, इतना अधिक दर्द मुझे कभी नहीं हुआ था, सलमा बेहोश सी होने लगी। पता नाहीउ मुझे क्या हुआ था एक तो सलमा का हुस्न गोरा रंग खूबसूरती और फिर तुम्हारे कमरे से आ रही आवाज़े मेरे जोश को बढ़ा रही थी l

फिर मैं सलमा को गोद मे ले कर बैठ गया और वो मेरे होंठ चूसने लगी , लगभग दो मिनट तक हम ऐसे ही बैठे रहे, दो मिनट बाद सलमा को थोड़ा आराम मिलाl तो मैं फिर बोला - सलमा बेगम अपनी चूत को ऊपर-नीचे करोl

सलमा रोते-रोते अपनी चूत को ऊपर-नीचे करने लगी, बीस-पच्चीस बार ऊपर-नीचे करने के बाद मुझे अच्छा लगने लगा। मैं सलमा को ही देख रहे था और बोला - जब दर्द ख़त्म हो जाए तो बताना।
सलमा बोली- अब दर्द हल्का हो गया है।

बस यह सुनते ही मैंने सलमा कमर पकड़ कर उसे थोड़ा ऊपर उठाया और नीचे से जोर-जोर से धक्के लगाने लगा ।

सलमा के बड़े-बड़े कोमल मम्मे किसी फुटबॉल की तरह उछाल मार रहे थे और मेरे ,मुँह से टकरा कर मुँह की मालिश लकर रहे थे । और उसकी चूत भी अब गीली हो गई थी।

फिर मैं बोला - चल सलमा अब पहले अपनी चूत पूँछ और फिर कुतिया बन जा।

सलमा उठी तो मैंने एक रूमाल से उसकी चूत पूँछी और बोलै अब जब रगड़ कर अंदर जाएगा तो देख कितना मजा आएगा और मेरे ऊपर से उठ कर हाथ-पैरों के बल झुक गई। मैंने पीछे आकर लण्ड को चूत पर रख कर जोर से झटका मारा और एक ही बार में पूरा लण्ड अन्दर डाल दिया।

सलमा अब किसी कुतिया की तरह चुद रही थी। और लंड जब शुकी हुई चूत को रगड़ता हुआ अंदर बाहर हो रहा था तो सच बहुत मजा आया और फिर सलमा जल्द ही झड़ गयी ।

उस रात मैंने सलमा को ऐसे ही दो बार और चोदा और उस सूखी चुदाई से चूत बिलकुल सूज गयी थीl

रिज़वान बोला अगले दिन जब बड़ो ने हमे बुला कर डांटा और कहा कल रात जो चीखने चिल्लाने की आवाज़ आयी थी जो भी करो नज़ाकत को देख कर करो l तो मेरा मन किया कह दू ये सब शुरू तो सलमान ने किया था l ज़ीनत आपा के कमरे से आ रही आवाज़ों और चीखे ने ही मेरा जोश बढ़ाया था l कई बार तो जब ज़ीनत आपा सलमान से कहती थी और जोर से तो मुझे लगता था सलमा मुझे जोर से करने को कह रही है और मैं शुरू हो जाता थाl

रिज़वान बोला मैं जानता था की हम जो भी कर रहे हैं, वो सलमान तुम्हे और ज़ीनत आपा दोनों को सब पता चल रहा है क्योंकि हमारे सुहागरात वाले रूम बिलकुल एकदूसरे के साथ जुड़े हुए थे और मुझे भी तुम्हारी आवाज़े साफ़ सुनाई दे रही थी । मैंने रूम में जाकर पहली सलमा को किस किया उसके कपडे निकाले और सलमा को लण्ड पकड़ा दिया और कहा- "अब चूसोl"

सलमा मेरे लौड़े को चूसने लगी। दो मिनट में मेरा लौड़ा टनटना का पूरा तैयार हो गया। सलमा पलंग पर जाकर लेट गई, और अपनी दोनों टांगों को फैला दिया। मुझे देखकर हँसी आ गई।

मैंने उसको कहा- "मैं अब तुमको आगे से नहीं पीछे से चोदूंगाl"


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सलमा सुनकर घबरा गई। हाथ जोड़कर बाली- "प्लीज ! आप वहां मत करिए मैंने सुना है वह बड़ा दर्द होता है l"

मैंने कहा- "सुनो। मैं तमको जैसा कहें वैसा करोl मेरा मूड खराब मत करो समझी?"

मैंने जब गुस्से से कहा तो वो डर गईं।

मैंने उसको कहा- "चलो एक काम करो, कोई तेल लेकर आओl"

उसने कहा- "सामने खिड़की के पास से उठा लीजिएl"

मैंने सलमा को कहा- "तुम घोड़ी बन जाओl"

मुझे याद आया मेरे दोस्तों ने कहा था बीवी अपनी ही है आराम से करना l तभी दोनों को पूरा मजा आएगा मैंने उसकी पीठ को चूमाl


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उसने एक बार फिर मिन्नत की तो मुझे तरस आ गया और मैंने कहा अच्छा फिर लेट गया और बोला चलो मेरा लंड चूसो l और मैं उसका सर पकड़ कर अपने लन्ड पर रगड़ने लगा ।

सलमा ने जोर लगाने की कोशिश कीl मगर मेरे आगे उसकी एक न चली उसके होंठ न चाहते हुए भी मेरे लन्ड पर फिर रहे थे। मुझे अच्छा लगा रहा था और मेरा लंड अकड़ रहा थाl

एक मिनट बाद सलमा को भी अच्छा लगने लगा,और उसने भी जोर लगाना बंद कर दिया।

तभी मैंने उसके बाल जोर से खींचे तो उसका मुँह खुल गया। जैसे ही मुँह खुला वैसे ही मैंने अपना लण्ड अन्दर करके उसका सर अपने लण्ड पर दबा लिया।

मेरे लण्ड ने मुँह में अपना आकार बढ़ाना शुरू कर दियाl सलमा छटपटा उठीl गूँ गूँ करती हुई हाथ-पांव पटकने लगीl मगर मैंने उसे नहीं छोड़ा!

मेरा लण्ड मुँह से होते हुए गले तक चला गया है।सलमा की आँखों से आंसुओं की धार निकल पड़ी। वो मेरी जाँघों पर पंजे मार रही थीl नाखून गड़ा रही थीl मगर मुझ पर इसका कोई असर न हुआ। उल्टा मैंने उसका सर जोर से दबा दिया ।

सलमा ने हाथ जोड़ लिए और मुझे लण्ड निकालने के लिए विनती वाली नजरों से देखा।

मैं सलमा से बोला l जैसे बोलूँगाl वैसे ही करेगी न?

सलमा ने तुरंत आँखों से हामी भरी। मैंने सलमा का सर छोड़ दियाl

सलमा बिस्तर पर गिर पड़ी, और एक दमे के मरीज की तरह हांफ रही थी।

इतने में मैं बोला हाँl अब सलमा पूरी कुतिया लग रही है।

फिर मैं उसके दोनों हाथ फैला कर उनके ऊपर अपने घुटने रख कर सलमा के सीने पर बैठ गया और कहा- अब इस लण्ड को चाटो ।

मेरा हलब्बी लण्ड देख कर सलमा की आँखें फ़ैल गईं।

मेरा करीब आठ इंच लंबा और तीन इंच मोटा कालाl लौकी जैसा लण्ड, सलमा मुँह पर रखा हुआ था।

सलमा लण्ड देख के हक्की-बक्की थी।

मैं बोला - चाट इसे जल्दी नहीं तो फिर मुँह में डालू क्या ।

सलमा ने जल्दी से जीभ निकाल कर लण्ड चाटना शुरू कर दिया।

मैं बोला - हाँl अब पूरी कुतिया बनी।

सलमा रोती जा रही थी और लंड चाटती जा रही थी, उसके दोनों हाथ मेरे पैरों के नीचे दबे हुए थे।

बीच बीच में मैं लण्ड को पकड़ कर सलमा के चेहरे पर मार देता था , उसके गोरे गालों पर मेरा भारी लण्ड मुक्के की तरह पड़ रहा था।

फिर मैंने कहा अब खड़ी हो जाओ और अपने पैरो को ढीला कर दिया और उसे पकड़ कर किश किया और उसके स्तनों को मसल दिया l

फिर मैंने सलमा को कहा- "अब तुम मेरे ऊपर आ जाओ और मेरे लण्ड पर अपनी चूत रखकर बैठ जाओl" ये सोच कर के गांड बची लाखो पाए सलमा फट से मेरे ऊपर आ गई। उसने अपने नाजुक हाथ से मेरा लौड़ा पकड़ा और अपनी चूत के मुंह पर लगा दियाl

और हल्का सा दबाया। मैं तो इसी माके की इंतजार में था। जैसी ही सलमा ने अपनी चूत को मेरे लण्ड पर दबाया, मैंने नीचे से जोर का धक्का मारा।

सलमा को शायद इसकी उम्मीद नहीं थी, इसलिए उसने एक जार की चौख मारी- "उईईई मर गईl" मैंने उसकी कमर को कस के पकड़ रखा था। वो उठ नहीं पाई। एक मिनट तक लण्ड पूरा उसकी चूत में घुसा रहा।

फिर मैंने उसकी गाण्ड के नीचे हाथ रखकर उसको ऊपर उठाया और कहा- "अब मेरे लौड़े पर उछल-उछलकर इसको अपनी चूत में अंदर-बाहर करती रहोll

सलमा ने हल्के-हल्के ऊपर-नीचे होना शुरू कर दिया।



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मैंने सलमा में कहा- "अगर हर बार में पूरा लण्ड अंदर नहीं लिया तो मैं नीचे से फिर धक्का मारूंगाl"

सुनते ही सलमा ने कहा- “नहीं नहीं प्लीजll आप मत करनाl"

में मुश्कुरा पड़ा। मैं जानता था अब वो सही से लौड़ा खायेगी। फिर मैंने सलमा से कहा- "मेरे मुँह में अपने हाथ से पकड़कर अपनी चूची चुसवाओl"

उसने मेरे मुँह में अपनी चूची लगा दी। मैं उसकी चूची चूसने लगा। अब मेरा लण्ड सलमा की चूत में फिसल फिसल के जा रहा था। क्योंकी सलमा की चूत अब पानी छोड़ रही थी। फिर सलमा की चूत संचुकन करने लगी . ये अनोखा अनुभव मुझे पहली किसी चुदाई में नहीं हुआ था ..

सलमा ने कहा- "अब आप मेरे ऊपर आ जाइएl"

मैंने कहा- "ऐसे नहीं, पहले तुम मुझे कहाँ की- 'प्लीज मेरे ऊपर आकर मेरी चूत मारोl"

सुनकर सलमा शर्मा गईं। मैंने जरा जोर से खा सलमा !

सलमा ने हल्के से कहा- "मेरी जान मेरे ऊपर चढ़ कर मुझे चोदोl"

मैंने कहा- "ऐसे नहीं,जोर में बोलो साथ वाले कमरे में सलमान को सुनाई देना चाहिए l"

सलमा ने अब जोर से कहा- "मेरी जान मेरे ऊपर चढ़कर मुझे चोदोl"

ये सुनकर मेरा जोश और बढ़ गया। मैंने सलमा को नीचे कर दिया और उसकी चूत में अपना लण्ड अंदर-बाहर करने लगा। मैंने सलमा से कहा- "अब तुम भी नीचे से अपनी चूत को उठा-उठाकर चुदवाओ"l

सलाम को अब मजा आ रहा था। वो अब नीचे से अपनी चूत उठा रही थी। ऐसा करने में उसकी चूत दो बार झड़ गई। उसने अपनी आँखों को बंद कर लिया और उसके चेहरा पर स्माइल दिखने लगी। 5 मिनट ऐसे ही चलता रहा। सलमा ने मेरी पीठ पर अपने नाख़ून गड़ा दिए थे। चुदाई में इसका पता नहीं चला। पर अब इसका एहसास होने लगा था। मैं सलमा के ऊपर से उठने लगा, पर उसने मुझे अपनी बाहों में कसकर दबा लिया।

सलमा की चूत फिर संचुकन करने लगी और लंड चूसने लगी और मैं झड़ गया. फिर मैंने अपना सारा जोर लगाकर 10-15 शाट में सलमा की चूत में माल झाड़ दिया।और चूत ने जैसे मेरे लंड को चूस चूस का निचोड़ दिया ..

मैंने कहा- "क्या हुआ?"

सलमा ने कहा- "प्लीजll ऐसे ही लेटे रहिए ना l"

फिर सलमा ने कहा देखो मेरी चूत की तुमने क्या हालत कर दी है और मुझे अब नींद भी आ रही हैll मैंने अपने मोबाइल में 5 बजे का अलार्म लगा दिया और सलमा से कहा- " अलार्म बजते ही मेरा लौड़ा मुँह में लेकर चसना शुरू कर देना। पांच बजे का अलार्म लगया है अगर पहले उठ जाओ तो चूस कर मेरा लौड़ा खड़ा करोगी तो मैं उठ जाऊँगा समझी या नहीं?"

सलमा ने सिर हिला दिया।

मैं भी रात भर का जगा हुआ था और नींद मुझे भी आ रही थी और मैंने तुम्हारे कमरे से भी कोई आवाज नहीं आ रही थीl मुझे लगा आज तुम भी सो गए हो तो मैंने सोचा थोड़ा आराम कर लेते हैं

मैं सलमा को अपनी बांहों में भरकर लेट गया। फिर मुझे नींद आने लगी। सुबह लगभग 3-4 बजे तुम्हारे कमरे से भी ज़ीनत आपा की आहों की आवाज आनी शुरू हो गयी थीl मैं जाग गया आँख खोली तो पता चल गया की मेरे लौड़े को सलमा चूस रही हैं। पर आँखें बंद करके लेटा रहा। सलमा मुझे हिलते देखा तो जोर से चूसने लगीl ऐसें चुप्पा लगवाने में मुझे बड़ा मजा आ रहा था।

फिर मैंने अपनी आँखों को खोला, और सलमा को कहा- जो काम रात में अधूरा रह गया था उसे अब पूरा करते हैंl

सलमा समझ गयी मेरा इरादा और सुनकर घबरा गई। हाथ जोड़कर बाली- "प्लीजll आप वहां मत करिए बड़ा दर्द होगाl"

मैंने कहा- "सलमा । मैं तमको जैसा कहें वैसा करोl मेरा दिमाग खराब हो जाएगा तो उसकी जिम्मेदार तुम होगी ?"

मैंने जब गुस्से से कहा तो वो डर गईं।

मैंने उसको कहा- "चलो तेल पकड़ाओ l"

उसने चुपचाप तेल की शीशी मुझे दे दी l

मैंने तेल की शीशी ली और सलमा को कहा- "तुम घोड़ी बन जाओl"

वो घोड़ी बन गई। मैंने खूब सारा तेल उसके चूतड़ों पर डाल दिया। तेल की धार उसके चूतड़ों की दशा में होती हुई उसकी गाण्ड तक जा रही थी। मैंने अपनी उंगली उसकी गाण्ड में घुसा दी। सलमा ने अपनी गाण्ड आगे कर दी।

मैंने उसको कहा- "अगर अब तेरी गाण्ड एक इंच भी हिली तो मैं बिना तेल के ही गाण्ड मार दूँगा l"

सुनकर सलमा बोली- "नहीं-नहीं अब नहीं हिलाऊँगीll"

फिर मैंने उसकी गाण्ड में उंगली पेल दी। अब उसकी गाण्ड हिल नहीं रही थी, बस वो अपनी गाण्ड को सिकोड़ रही थी। दो-तीन मिनट मैं उसकी गाण्ड में उंगली चलाता रहा। फिर मैंने अपनी दूसरी उंगली भी उसकी गाण्ड में पेल दी। अब सलमा को दर्द होने लगा और वो रोने लगी। मैंने उसको कुछ कहा नहीं, अपना काम करता रहा। जब मैंने देखा इसकी गाण्ड अब लौड़ा लेने को तैयार हैं तब मैंने उसको पलंग के कार्जर में घोड़ी बना दिया, और मैं नीचे खड़ा होकर उसकी गाण्ड पर अपना लौड़ा अइजस्ट करने लगा।

फिर मैंने उसकी गाण्ड में उंगली पेल दी। अब उसकी गाण्ड हिल नहीं रही थी, बस वो अपनी गाण्ड को सिकोड़ रही थी। दो-तीन मिनट मैं उसकी गाण्ड में उंगली चलाता रहा। फिर मैंने अपनी दूसरी उंगली भी उसकी गाण्ड में पेल दी। अब सलमा को दर्द होने लगा और वो रोने लगी। मैंने उसको कुछ कहा नहीं, अपना काम करता रहा। जब मैंने देखा इसकी गाण्ड अब लौड़ा लेने को तैयार हैं तब मैंने उसको पलंग के कोने में घोड़ी बना दिया, और मैं नीचे खड़ा होकर उसकी गाण्ड पर अपना लौड़ा अइजस्ट करने लगा।

सही कोन बनाकर मैंने उसको कहा- "में अब लौड़ा पेलने जा रहा हैl"

उसने फिर से रोना शरू कर दिया और बोली- "प्लीज मान जाइए नाl"
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मैंने कहा- "चुपचाप घोड़ी बनी रह, नहीं तो कुतिया बनाकर चोदूंगाl"

फिर मैंने अपना लण्ड उसकी गाण्ड में जैसी ही डाला वो उछल पड़ी और मेरे पैरों में गिर के रोने लगी। मैंने उसको गुस्स से कहा- "प्यार से गाण्ड मरवा लें, नहीं तो तेरी अम्मी और भाई को अभी यही बुलाता है। उनके सामने ही तेरी गाण्ड मार्रूंगा ll"

से सुनकर वो सिहर कर रह गई, और चुपके से फिर से घोड़ी बन गई।
फिर मैंने सलमा के पेट के नीचे एक तकिये लगाए र उसके दोनों पैरों को फैलाया और अपना लंड उसकी गांड में डाल दिया। मेरा सुपाड़ा अब उसकी गाण्ड के छेद में चला गया था।

मैंने उसको कहा- "तू अपनी गाण्ड को पीछे की तरफ जोर लगाकर धकेलl" मैं जानता था वो ऐसा नहीं कर पाएगी पर में देखना चाहता था की वो करती है या नहीं?

उसने करने की कोशिश की। और फच की आवाज हुई और खून निकला और एक ही धक्के अब मेरा पूरा लण्ड उसकी गाण्ड में था। l बेचारी पाऊँ पटकती रही और मैंने उसे अपने हांथो से जकड रखा था l मेरी हर चोट पर उसकी एक जोर की चीख निकल रही थी। मैं उसकी चीखों की परवाह करें बिना उसकी गाण्ड में अपना लण्ड पेले जा रहा था। में उसे लगातार धक्के देकर चोदता रहा ।

सलमा इस बीच - "उईईई माँ उईईई माँl बस करो , मर गयी l" करती जा रही थी।

करीब 20-25 मिनट बाद मुझे लगा की मैं अब झड़ने वाला हूँ, तो मैंने कस के धक्के मारने शुरू कर दिए। उसकी- चीखें और तेज हो गई। मैंने कस के एक शाट मारा और मैं उसकी गाण्ड में झड़ गया। उसकी गाण्ड में मैंने अपना लण्ड ऐसे ही पड़ा रहने दिया। मेरे लण्ड को उसकी गाण्ड ने अभी तक कस के दबाया हुआ था। सलमा अभी तक अपनी गाण्ड को आगे पीछे किये जा रही थी। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरे लण्ड की मालिश हो रही हो। अब मैंने अपना लण्ड बाहर खींचा तो फुच्च की आवाज के साथ मेरा लौड़ा बाहर आ गया और खून की धारा बह निकलीl

मैं पलंग पर लेट गया । सलमा भी पेंट के बल पलंग पर लेट गई फिर बोली- "आपने मुझे इतना दर्द दिया है, आप बड़े खराब होll"

मैंने सलमा के गाल को चूमते हुए कहा- "जान अब इस दर्द की आदत डाल लोl" बोली मैं बाथरूम हो कर आती हूँl

मैं समझ गया उसकी गाण्ड में मेरा माल चिपचिप कर रहा होगा, मैंने कहा- "जाओ। लेकिन जल्दी से आ जाना ll"
वो उठकर चली गई। थोड़ी देर में सलमा आ गई। तो मैंने उसे कहा अब तोड़ी देर आराम कर लो पर वो बेतहाशा रो रही थी बोल रही थी बहुत दर्द हो रहा हैl तुम आराम से नहीं कर सकते क्या? कल तुमने तुमने मेरी चूत फाड़ी और आज गांड दोनों फाड़ डालीl मैं तुमसे नहीं बोलती और मेरे सीने पर सर रख कर लेट गयीl

पर मेरा लंड अभी भी शांत नहीं हुआ था और मैंने सलमा को थोड़ा सा पुचकारा और बोलै पहली बार थोड़ी तकलीफ तो होती ही है तुम्हे रुकसाना आपा ने बताया तो था आगे तो मजे ही मजे हैं और फिर तुम इतनी प्यारी हो की मैं तुमसे दूर रह ही नहीं पा रहा हूँlउसे पाय से चूमा और सहलाया एक दर्द की गोली दी और और दो बारी और उसकी चूत सुबह सुबह चोद डालीlआगे तो तुम्हे पता ही है क्या हुआ डॉक्टर ने सुबह क्या कहा.

फिर रिजवान मुस्कुराते हुए बोला सलमान भाई मेरे कमरे के ही साथ मेरे और तुम्हारे अब्बू का भी कमरे हैl रात भर वहां से भी आवाजे आ रही थीl लगता है, पिछली दो रातो से मेरे और तुम्हारे अब्बू अम्मी भी सोये नहीं हैंl ये सुन कर रुखसाना बोली धत आप दोनों भी बहुत बदमाश हो और बाकी लड़किया रुखसाना के साथ शर्मा कर उठ कर चली गयी l
रिजवान बोला सलमान भाई lजब मैं ज़ीनत की चीख सुनता था तो जोर से झटका मारता था जिससे सलमा और जोर से चिलाती थी और फिर उसे सुन कर उतने ही जोर की आवाज ज़ीनत आपा की भी आती थीl

मैं ज्यादा कुछ नहीं बोला बस मुस्कुरा कर हम्म्म बोल कर रह गयाl

तभी अब्बू वहाँ आ गए और छड़ी लहराते हुए बोले बर्खुदारो तुम्हे कितना समझाया था आराम से करना l अपनी तहजीब का ख्याल रखना, पर दोनों में एक तरह का कम्पटीशन चल रहा था कौन कितना कस कर चुदाई करता है और अपनी बीवी की ज्यादा चीखे निकलवाता हैl तुम दोनों ने तो आपस के कम्पटीशन में अपने खानदान की माँ चुदवा लीl हम दोनों वहां से अपनी गांड बचाकर भाग गए l

जारी रहेगी



 
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deeppreeti

DEEP PREET
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मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ

खानदानी निकाह

अपडेट 182

बिजली गिरी

बिजली गिराती मस्ताई हुई रफिया टेढ़ी दिलकश मुस्कान के साथ चहकती हुई सुरीली आवाज में बोली- हैल्लौ सलमान भाई ! सब बाजार गयी है , आप आईये चाय त्यार है ? जैसी ही मैं उसके पास आया रफिया ने मेरा हाथ पकड़ कर अंदर खींच लिया।

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रफिया ने मेरा हाथ पकड़ कर अंदर खींच लिया।

जैसे ही मैं अंदर घुसने लगा, शरारती रफिया ने अपनी अधनंगी व अकड़ी हुई छातियाँ भिड़ाती हुई बोली- आऊचऽऽऽ, आई एम सारी आआह ! सलमान भाई ।


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बस मुझ पर सीधी बिजली गिरी । इतने में ही मेरे लण्ड ने बगावत दी और एकदम तन गया । मेरा कत्छा फटने वाला हो गया ।

फिर शरारती रफिया ने घूम कर और उचक कर सिटकनी लगाने की असफल कोशिश करती बोली- भाई प्लीज़ हैल्प मी, मुझे थोड़ा ऊपर उठाआ नाऽऽऽ! मुझे ऊपर वाली सिटकनी लगानी है।

मैं अब थोडा सम्भल चुका था और समझ गया तह की कौन सी च्यी पक रही है , फिर मैंने झट से मौके का फायदा उठाते हुऐ रफिया को उठाते हुए उस की कमर में हाथ डाल कर अपने लण्ड से रफिया की प्यारी की गाण्ड को गुदगुदा दिया। जब रफिया को नीचे उतारा तो मैंने रफिया के दो सूखे घस्से मार दिये। मैं की सख्ती महसूस कर बदमाश रफिया के होंटो पर छुपी छुपी मुस्कूराहट आ गई।

मैं रफिया के नंगपने को देख कर मजाक में फुसफुसा कर बोला- रफ़ि यह क्या? कहीं तुम मॉडलिंग वाडलिंग करने लगी हो?


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घर के लोग रफिया को प्यार से रफ़ि कहा करते थे।

रफिया बहुत ही मासूमियत से मुँह फुला अपने चुच्चों को उचकाती हुई बोली- ओह नो भाई , मैं तो अपने पुराने कपड़े ट्राई कर रही थी। पर देखो ना! ये कपड़े ईत्ते टाईट और छोटे हो गये हैं!

मैं रफिया की कमर सहला कर और चूतड़ को मसल कर, चूचों को देख कर अथर्पूण स्वर में बोला- रफ़ि कपड़े छोटे नहीं हुए, तुम्हारे ये बड़े हो गये हैं।


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‘धत्त , मैं बहुत मारूँगी!’ रफिया ने झेंपते हुए बनावटी गुस्सा करते हुए मेरा हाथ झटक दिया।

‘बट भाई आई लाईक दि स्टफ वैरी मच!’ गुन्ड़ी रफिया शर्ट के कपड़े की तरफ इशारा कर अपने चुच्चे हवा में मैं की तरफ उछालती बोली- भाई , फील करके देखो, बहुत ही मजेदार और साफ्ट साफ्ट है।

‘देखूँ तो!’ यह कह कर मैंने रफिया के शर्ट के कपड़े को फील करके उसके गिरेबान में हाथ डाल कर चुच्चा टटोल सा दिया और मुस्कुरा कर बोला- सचमुच बहुत साफ्ट साफ्ट है।

रफिया किलकारी मार कर छिटक कर पीछे हट कर बोली- आऊचऽऽऽ! ऊईऽऽ! गुदगुदी मत करो नाऽऽऽऽ, हटो भाई , आप तो बहुत ही बेशरम हो!

मैं रफिया की हर बात के पीछे नाऽऽऽ लगाने की अदा पर फिदा था।


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‘भाई बस पाँच मिनट रूको, मैं नेलपालिश लगा लूँ, फिर चाय लाती हूँ !’ यह कह कर रफिया अपने सिल्की बालों को अदा से पीछे झटकती हुई घूमी और चूतड़ों को जोर जोर से दायें बायें मटकाती चल दी।

रफिया की इठलाती बल खाती भरी भरी मटकती गाण्ड देख कर मुझे लगा के उसका लौड़ा पानी छोड़ देगा। ऐसा लग रहा था जैसे बड़े-बड़े पानी से भरे गुब्बारे थरथरा रहे हों।

हाई हील के कारण रफिया की कुछ ज्यादा ही उचकी हुई बुण्ड बहुत ही मस्त लग रही थी।

मुझे सोफे पर बैठा कर नेलपालिश की शीशी ढूंढती हुई बोली- कहाँ मर गई मेरी नेलपालिश की शीशी? मंमऽऽऽ वो रही!

यह कह कर रफिया सहारा लेकर झुकने के बहाने लापरवाही से मेरे अकड़े लण्ड को पकड़ लिया और बिना घुटने मोड़े ही नेलपालिश की शीशी उठाने को झुक गई।

पीछे से काली स्कर्ट रफिया की लम्बी टांगों से ऊपर उठती चली गई और लाल कच्छी में फंसे संगमरमरी सफेद चूतड़ मेरे सीने पर बिजली से गिरे।

बेरहम बेहया रफिया ने अपनी गाण्ड और भी पीछे को उचका दी तो चिकने चूतड़ों के बीच से भिंची भिंची चूत भी नुमाया हो आई। साथ ही झुकने से रफिया के चुच्चे कुछ पलों के लिये निप्पलों समेत शर्ट से बाहर आकर मुझे जीभ दिखा कर छका गये।


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रफिया ने मेरे अकड़े लण्ड को जोर से दबा कर छोड़ दिया मेरे लण्ड की सख्ती भांप कर रफिया की सांसें भी तेज़ हो बेतरतीब हो गई।

मेरे सामने बैठकर छिनाल रफिया ने अपनी तिरछी निगाहों से देखकर टेढ़ी सी सैक्सी स्माईल उछाल दी और आखिरी तीर चला दिया।

बड़ी अदा से रफिया ने बहुत लाहपरवाही से अपनी सुडौल टांग को सुकौड़ कर मासूमीयत से पैर के नाखूनों पर नेलपालिश लगाने लगी। काली स्कर्ट शीशे से गौरे चिकने पट्टों से सरकती चली गई और टयूब लाईट में रफिया की लाल पेंटी की ओट में से रफिया की बच्ची सी लरजाती चूत कच्छी के पीछे से मुझे निहारने लगी। रफिया की टाईट पेंटी चलने की वजह से और ठरक के जूस से इकट्ठी हो कर चूत और चूतड़ों में घुस कर दुबक सी गई थी। गुलाबी चूत की अकड़ी मक्खन सी उजली फांकों का हुस्न देख मेरे फड़फड़ाते हुए लंड ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था। मैं पास पड़ी गद्दी से लण्ड को छुपा कर हाथ से लण्ड को रगड़ कर शान्त करने लगा।

ऊपर से रफिया नेलपालिश की टचिंग करती हुई अश्लील गाना गाने लगी- हाय जागी बदन में ज्वाला, हाय ....... ( भाई) तूने ये क्या कर डाला!

रफिया की चूत का चीरा एकदम चकुंदर सा सुर्ख और झिलमिला रहा था। बेशर्म रफिया अपनी फुद्दी की फांकों को भींचने खोलने लगी, तो रफिया चूत के अंदर की नरम व नाजुक पत्तियाँ तितली के पंखों सी बन्द और खुलने लगी। चूत ऐसे लग रही थी जैसे नन्ही सी मछली जुगाली कर रही हो। लाल लाल चूत मुझे कच्छी के पीछे से छोटी शरारती लड़की की तरह लुका छिपी का खेल सा खेल रही थी।

भाई मेरी लाल लाल अच्छी लग रही है नाऽऽऽ?’ मेरी आँखों को अपने नंगे शवाब पर चिपकी देख रफिया शरारत से थोड़ा ठहर कर बोली- नेलपालिश!’

और खिलखिला कर हंस दी।


run-walk
मैंने कल रफिया को नंगी देखा था पर आज पहली बार रफिया की चूत को इतने करीब से देखा तो मुझे जैसे लकवा ही मार गया। मैं हड़बड़ा कर रफिया के पैर पर नजर टिकाता थूक निगलता बोला- ओह, हाँ! हाँ, अच्छी है, लाल लाल वो वो!’

छीनाल रफिया मेरी पतली हालत देख फिर खिलखिला पड़ी। तभी नेलपालिश लगाने के बाद रफिया ने अपने पन्जों के बल उचक कर शानदार दिल दहला देने वाली अंगड़ाई तोड़ी। चटाक चटाक की आवाज से रफिया की कसी शर्ट के बटन खुलते चले गये। यह देख मेरी आँखें लाल हो गई और लण्ड ने कच्छे में धमाल मचा दी। मेरे माथे पर पसीने की बुँदे छलक आयी।

मेरी हालत पर मन मन मुस्कूराती मासूमीयत से बोली- भाई , आप की तबीयत तो ठीक है नाऽऽऽ?

यह कह कर रफिया मेरे माथे पर हाथ लगा कर बायाँ चुच्चा मेरी छाती में चुभोती धम से मेरी गोद में बैठ गई। मेरा खूंटे जैसा लण्ड रफिया के चूतड़ों के नीचे दबता चला गया। रफिया अपने चूतड़ों को दायें बायें हिला कर मेरे अकड़े लण्ड को ठीक से चूतडों को बीचो-बीच रख कर मेरे लण्ड की सख्ती का मजा लेने लगी।

अब रफिया मेरे लण्ड की गरमी से अपनी गाण्ड को सेक कर दीवानी सी होने लगी। मेरी हालत अब बद से बदतर हो गई। मैं बात बना कर सिर को पकड़ कर बोला ‘हाँ रफ़ि , वो वो, बस यूँ ही थोड़ा-थोड़ा सर में दर्द है, चल थोड़ी चाय पीला दे । ’


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‘अरे नहीं भाई आप ने अभी तो देखी कि मेरी अभी बिल्कुल गीली है सब खरब - हरामी रफिया हल्के से आँख दबा मुस्कुरा कर बोली।

‘क्याऽऽऽ?’ मैं लगभग हाँफता सा बोला।

‘भाई मेरी नेलपालिश और क्या! आपने क्या समझा?’ कमीनी रफिया तिरछी निगाहों के बाण चलाती बोली और मेरी हालत पर खिलखला कर हंस पड़ी। लौड़े के तनाव से मज़बूर मैं ने कसमसा कर गोदी में बैठी रफिया के खींच के सूखा घस्सा मार दिया।

रफिया अपनीभाई नेलपालिश को सुखाने के बहाने अपनी सैक्सी गोरी गुदाज़ टाँगों को हिलाने लगी। इस हरकत से रफिया की रसभरी गाण्ड मेरे केले को बुरी तरह से गुदगुदाने लगी। लण्ड अब पूरा बड़ा हो गया ह और अकड़ चुका था और पत्थर सा सख्त हो गया जिससे मेरे कच्चे का कपड़ा चरमरा उठा। हरामज़ादी रफिया भी मेरे जैसे ठरकी लौडियाबाज़ के लौड़े की मीठी मीठी चुभन का स्वर्गीय सुख ले रही थी।

जारी रहेगी
 
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मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ

खानदानी निकाह

अपडेट 183


जवानी का खेल

रफिया अपनी नेलपालिश को सुखाने के बहाने अपनी सैक्सी गोरी गुदाज़ टाँगों को हिलाने लगी. इस हरकत से रफिया की रसभरी गाण्ड मेरे केले को बुरी तरह से गुदगुदाने लगी. लण्ड अब पूरा बड़ा हो गया ह और अकड़ चुका था और पत्थर सा सख्त हो गया जिससे मेरे कच्चे का कपड़ा चरमरा उठा. हरामज़ादी रफिया भी मेरे जैसे ठरकी लौडियाबाज़ के लौड़े की मीठी मीठी चुभन का स्वर्गीय सुख ले रही थी.

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रफिया को पता था किअब वह जवान हो चुकी थी जब से राफिया ने मुझे शबनम और नफीसा के साथ सेक्स करते हुए देखा तब से वह कुछ भी करने को तैयार थी, और तब से वह अत्यधिक उत्तेजित अवस्था में थी । उसे मालूम था जल्द ही इसे पूरी शानो शौकत के साथ उसकी नफीसा आपा, फलक बाजी और अम्मी के सामने कस कर चौदने वाला था , उसे ये भी पता था की शायद उसकी चुदाई की रात आज नहीं तो कल पक्की होने वाली है , पर कहते हैं ना की बिल्ली के सिरहाने दूध कहा जमता है ,, बस उसका अब यही हाल था , उससे अब इंतजार नहीं हो रहा था .
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इसके साथ ही रफिया सोफे से उठी और मेरे पास आ गई, पूरी तरह से जानती थी कि मेरी आँखें उसकी लगभग नग्न आकृति पर घूम रही थीं। जब मैं कमरे में आया था तो मैं अर्ध। उत्तेजित था, निस्संदेह, रफ़ीअ के साथ मेरी मुलाकात की प्रत्याशा का परिणाम था की मैं पहले से ही उत्तेजित था , और रफिया ने साहसपूर्वक मेरी पतलून के सामने के उभार को देखा। मैंने अनिश्चितता से गला साफ किया, जैसे कि मैं जो देख रहा था उस पर विश्वास नहीं कर सकता था, लेकिन मेरे जैसे अनुभवी स्टड लड़की की आंखों में मापने, गणना करने वाली नज़र को समझने में विफल नहीं हो सकता था।

मैंने कंधे उचका दिए और मुस्कुरा दिया, अपरिहार्य को स्वीकार करते हुए। रफिया ने मेरी आँखों में स्वीकृति पढ़ ली।

रफिया बात आगे बढ़ाती हुई मेरे कान में फुसफुसा कर बोली। ऐऽऽऽ भाई जब तक मैं गीली हूँ, तब तक कुछ खेलते हैं!

‘क्या खेलें रफ़ि ‘? मैं जवान रफिया को बाहों में भींचता सा ठरक में कांपता सा बोला.


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‘कोई भी मजेदार और मस्त खेल जो मुझे ना आता हो और आपको अच्छा लगता हो!’ रफिया भी अपनी शानदार फूले हुऐ गुब्बरों को मेरी छाती से रगड़ती आँखों में आँखों डाल कर बोली. अब रफिया सरेआम बेशमर हो अपने चूतड़ मेरे खड़े लण्ड पर आगे पीछे घिसने लगी.

‘कौन सा खेल रफ़ि ?’ मैं रफिया की उसे बाहों में और जोर से भींचता अलबेली रफिया की मखमली रानों को सहलाता बोला.

रफिया शर्माती संकुचाती बोली। भाई , मुझे आपसे बहुत ज्यादा गुण्डी गुण्डी बातें करनी हैं?

‘रफ़ि, मैं समझा नहीं!’ मैं अनजान बनता और रफिया के चूतड़ मसलता हुआ बोला.

रफिया और भी शर्माती बोली। भाई , जैसा पिक्चरों में होता है, ब्ल्यू लालीपाप लालीपाप टाइप!



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‘क्याऽऽऽ मतलब, तुमने ब्ल्यू पिक्चर देखी हुई है?’ मेरे दिमाग में जैसे किसी ने हथोड़ा मार दिया हो.

रफिया और भी जोर से शर्माती सकुचाती बोली। ‘येसऽऽ भाई , अपनी सहेली के घर पर, पर भाई आप किसी को बताना नहीं प्लीज़ऽऽऽ.

रफिया का आग्रह सुन कर मेरा ठरक के मारे बुरा हाल हो गया. छछौरी रफिया के इरादे से बेखबर मैं तो ऊपर ऊपर से ही ठरक पूरा करने के चक्कर में था। रफ़ि , अगर किसी को हमारी गुण्डी गेम के बारे पता लग गया तो?

मैं रफिया के मन को टटोलता बोला.

रफिया मेरे गाल पर गाल रगड़ती हुई फुसफुसाती और शर्माती बोली। भाई , मैं किसी को नहीं बताऊँगी और हम घर पर बिल्कुल अकेले हैं और दरवाजे और खिड़कियाँ भी तो बन्द हैं और भाई , वैसे भी अब मैं बच्ची थोड़े ही हूँ.

यह सुनते ही मेरा लण्ड बुरी तरह से फड़फड़ा उठा. मतलब लौडिया जवानी का खेल खेलने के लिए तड़प रही है


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रफिया बड़े ही भोलेपन से बोली। पता है, अब मम्मी मुझे स्कर्ट के नीचे पेंटी ना पहनने पर डांटती है और कहती हैं कि अब मैं बड़ी हो गई हूँ. भाई क्या अब मैं सचमुच बड़ी हो गई हूँ?

‘अच्छा देखें तो तुम कित्ती बड़ी हो गई हो?’ मैंने अब फुरि हिम्मत के साथ हाथ रफिया की रेशमी जांघों को सहलाते सहलाते ऊपर सरकाने लगा, किन्तु हरामी रफिया ने अपनी जांघों को भींच कर हाथ को मंजिल तक पहुंचने से रोक दिया. रफिया को मुझे सता कर खूब मजा आ रहा था पर रफिया की सांसें भी अब तेज हो गई थी.

‘क्यों क्या हुआ?’ मैं चिकनी रफिया की सुडौल जांघों की गदराहट का आनन्द लेता हुआ बोला.

‘भाई ऽऽऽ! कुछ कुछ होता है!’ हाँफती रफिया अपनी गोरी बांहों का हार मेरे गले में डाल कर मदभरी निगाहों से मुझे ताकती और मदहोशी में सरसराती अवाज़ में बोली.

‘हां हां होता है ! देखें कहाँ होती है ये कुछ कुछ?’ मैं बोला.


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‘यहाँ!’ रफिया अपने उठते। गिरते चुच्चों की तरफ इशारा कर बुरी तरह शरमा कर हाँफती हुई झटके से मैं से लिपटती हुई बोली. अब रफिया का दिल सीने के अंदर बुरी तरह से धक धक कर के धड़क रहा था.

‘ज़रा देखें तो!’ यह कह मैं ने रफिया की गले से बाहर उबल पड़ रहे मम्मे को पकड कर जोश में आकर जोर से दबा कर रफिया की लावारिस जवानी की कठोरता का मजा लेने लगा.

‘ऊई माऽऽ भऽऽ ईऽऽ याऽऽऽ आहऽऽऽ कित्त्ती जोर से दबाया है, आप बड़े छुपे रुस्तम हो!’ रफिया के होंठों पर दबी दबी आनन्द भरी चीख सी उगल पड़ी.


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मैं रफिया के प्यासे मम्मों को बराबर मसलता रहा और प्यासी मस्ताई हुई रफिया मेरी आँखों में आँखों डाले होंटों में उंगली दबाये शर्माती सी चुच्चे खिंचवाती और दबवाती चली गई.

‘सीऽऽऽ छोड़ो दो भाई ! आऊचऽऽऽ मैं तो आपकी बहन आपकी आपा जैसी हूँ, ऊईऽऽ क्या करते हो भाई मैं तो जाती हूँ, हायऽऽ मम्मीऽऽऽ ओह आपा हायऽऽऽ उफऽऽऽ बहुत मजा आ रहा है, दबाईये सीऽऽऽ और जोर से आहऽऽऽ भाई मत करो यह सब आऽऽऽ ओहऽऽऽ उफऽऽऽऽऽ!’ ऊपर ऊपर से रफिया मेरा हल्का हल्का विरोध कर हाथ हटाने की कोशिश कर रही थी. मेरे लण्ड के इश्क में बावली हुई रफिया की हाँ हाँ और ना ना ने मुझे पागल सा कर दिया था. रफिया के स्तन अब पत्थर से कठोर हो कर अकड़ गये थे.


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रफिया ने आज मर्द की गोदी में बैठ कर अपने मम्मे दववाये थे. कल मैंने सिर्फ इन्हे हल्का हल्का सहलाया था , तब से उसके ममे मचल रही थे . उसे रफिया का ठरक सातवें आसमान पर थी और अब मेरे ऐसे दबाने से मुँह लाल और सिर घूम सा रहा था. मैं भी अपने से कई साल छोटी कमसिन लौडिया को पाकर हाल बेहाल हो उठा था.

‘रफ़ि पहले कभी किसी से ऐसा करवाया है क्या?’ मैं ने रफिया के पत्थर से कठोर निप्पल को चुटकी में मसला तो रफिया मज़े से दोहरी हो कर चिंहुक के मैं से बुरी तरह से लिपटती और लज्जाती हुई बोली। सीऽऽऽ नहीं भाई पहली बार करवा रही हूँ ये सब! हायऽऽ ये आप क्या कर रहे हो?

‘मजा आ रहा है ना?’ मैं चूचों को पीसता बोला.

‘जी भाई , बहुत अच्छा लग रहा है और बहुत मजा आ रहा है. करिये और करते रहिये, मैं किसी को नहीं बताऊँगी.’ रफिया नींद में फुसफुसाती सी बोली.

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रफिया ने मस्ती में आकर मुझे अपनी सुडौल चिकनी टांगों और गोरी गोरी बाहों में दबोच लिया और अपने कोमल अंगों को जोर खरोश से मेरे जिस्म से रगड़ने लगी.

चल अब रफ़ि एक नया खेल खेलते है

कौन सा भाई ?

जिसे तूने आज तक नहीं खेला है

काया करना है ? भाई ?

‘रफिया तुम मुझे अपनी चिड़िया दिखाऔ ?’ मैं रफिया की स्कर्ट में हाथ डालता हुआ बोला.

‘हाऽऽ भाई ! आप तो बहुत गुण्डे हो?’ रफिया मुँह पर हाथ रख कर बोली। हायऽऽ, भला मैं आपको अपनी क्यों आज दिखाऊँ? अभी आपने कल ही तो देखि थी . फिर आज फिर से यहाँ कोई नुमायश लगी हुई है क्या?’

‘अरे, कल सबके सामने ठीक से नहीं देखि थी और फिर आज मुझे तो सिर्फ यह देखना है कि तुम कितनी जवान हो गई हो?’ मेरे हाथ रफिया स्कर्ट के नीचे घुस कर रफिया के अधनंगे मलाई से मुलायम चूतड़ों पर ढक्कन की तरह चिपक गये.

रफिया की कमर सहलाते सहलाते मैं ने झटके से रफिया की पेंटी को केले के तनों सी चिकनी रानों से नीचे सरका कर घुटनों तक खींच दी और फड़फड़ाती रफिया को जबरदस्ती स्कर्ट के नीचे से जन्मजात नन्गी कर दिया.

रफिया शर्म से पानी पानी हो गई और अनमाने स्वर में ना। नुकर करती बोली। प्लीज़ भाई छोड़िये, मुझे नन्गी मत करो नाऽऽऽऽ! बहुत शर्म आयेगी!


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‘रफिया , बस एक बार देख लेने दो अपनी प्लीज!’ पगलाया सा मैं रफिया की स्कर्ट में हाथ डालता कर फरियाद सी करता बोला.

‘अच्छा, आप जिद्द करते हो तो मैं आपको अपनी दिखा देती हूँ, पर कोई ज्यादा गुण्डी बात मत करना,

ओके’? नन्ही रफिया ने पलकों को फड़फड़ाते हुए बहुत ही भोलेपन से कहा.

रफिया ने गोदी में बैठे बैठे ही बड़ी ही मासूमीयत से एक एक टांग को सुकोड़ कर बारी बारी अपनी पेंटी में से नजाकत से निकाला तो मेरी प्यासी आँखों को रफिया की एकदम नन्गी चूत की झलकी देखने को मिली.


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चूत को अच्छी तरह से देखने के लिये मैं ने रफिया के घुटने को पकड़ कर जबरदस्ती रफिया की कन्धों से लगा कर कुकड़ी सा बना दिया तो रफिया ने झट से अपने छोटे छोटे फूल से हाथों की कटोरियाँ बना कर अपनी टाँगों के बीच चिपका कर नाचीज़ चूत के चीरे और बुण्ड के गुलाबी सुराख को छुपाती बोली। आहऽ! नोऽऽऽ! भाई , बहुत शर्म आ रही है.

पर मेरे सिर पर चूत का भूत सवार था। देखो बेबी, अगर तुम मुझे अपनी चिड़िया दिखाओगी, तो मैं तुम्हें अपना तोता दिखाऊँगा.

रफिया शक भरी निगाहों से मुझे देखती बोली। सच्चीऽऽऽऽऽ भाई ?

‘सच्ची रफ़ि, तुम्हारी कसम! और चाहे तुम उससे लॉलीपोप। लॉलीपोप भी खेल लेना और मैं किसी को नहीं बताऊँगा.’ मैं हाँफता सा रफिया के चुच्चे को सहलाता बोला.

लॉलीपोप सुन कर सुन्दरी रफिया की आँखों में चमक आ गई और उसने नीचे से हाथ हटा कर शर्मा कर अपना मुंह हाथों में छुपा लिया.

क्या अदा थी उस कमसिन कली की, चूत भी दिखा रही थी और शरमा भी रही थी.

मैं तर्क में सम्मोहित हुआ फ़ैली हुई गोरी चिट्टी रफिया की बला सी खूबसूरत लबालब रस से भरी नन्ही सी सुडौल आमन्त्रण देती फुद्दी और रबड़ बैंड सी कसी गुलाबी गाण्ड का आँखों ही आँखों में चोदने लगा.

रोमविहीन चिकनी और प्यारी फुद्दी के रक्तिम चीरे से रफिया का कंपकपाता छोटा सा कागजी बादाम सा दाना मुझे ललचाता हुए ललकार दे रहा था. मुझे लगा कि मैं अब बिना हाथ लगाये ही झड़ जाऊंगा ऐसा कामुक दृश्य देख कर मेरे बिफरे हुआ लण्ड ने पानी के कई टुपके छोड़ दिये। ओहऽऽ रफ़ि ! यू आर सो ब्यूटीफ़ुल!


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जैसे ही मेरा हाथ शरारत करने के लिये आगे आया, रफिया ने झटपट फुद्दी और गाण्ड को वापिस अपनी टांगो में भींच ली और बोली। नो नो भाई ! दिस ईज़ नाट अलाउड. अब आप अपना तोता

‘दिखाओ, नहीं तो ये गेम यहीं खत्म!’ रफिया मुझे प्यार से धमकाती हुई बोली.

‘ओके ओके, तुम खुद ही देख लो और जो जी में आये कर लो!’ मैंने बात बिगड़ने के डर से सबर से काम लेना ठीक समझा.

‘ओह भाई आई लव यू एन्ड यू आर सो क्यूट!’.

जारी रहेगी
 
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मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ

खानदानी निकाह

अपडेट 184


उद्घाटन समारोह हुआ भी और नहीं भी


क्या अदा थी उस कमसिन कली की, चूत भी दिखा रही थी और शरमा भी रही थी।हाय रब्बाऽऽऽ!


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मैं तर्क में सम्मोहित हुआ फ़ैली हुई गोरी चिट्टी रफिया की बला सी खूबसूरत लबालब रस से भरी नन्ही सी सुडौल आमन्त्रण देती फुद्दी और रबड़ बैंड सी कसी गुलाबी गाण्ड का आँखों ही आँखों में चोदने लगा।

रोमविहीन चिकनी और प्यारी फुद्दी के रक्तिम चीरे से रफिया का कंपकपाता छोटा सा कागजी बादाम सा दाना मुझे ललचाता हुए ललकार दे रहा था। मुझे लगा कि मैं अब बिना हाथ लगाये ही झड़ जाऊंगा ऐसा कामुक दृश्य देख कर मेरे बिफरे हुआ लण्ड ने पानी के कई टुपके छोड़ दिये। ओहऽऽ रफ़ि ! यू आर सो ब्यूटीफ़ुल!



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heads or tails toss
जैसे ही मेरा हाथ शरारत करने के लिये आगे आया, रफिया ने झटपट फुद्दी और गाण्ड को वापिस अपनी टांगो में भींच ली और बोली। नो नो भाई ! दिस ईज़ नाट अलाउड। अब आप अपना तोता ‘दिखाओ, नहीं तो ये गेम यहीं खत्म!’ रफिया मुझे प्यार से धमकाती हुई बोली।

‘ओके ओके, तुम खुद ही देख लो और जो जी में आये कर लो!’ मैंने बात बिगड़ने के डर से सबर से काम लेना ठीक समझा।

‘ओह भाई आई लव यू एन्ड यू आर सो क्यूट!’ रफिया मेरी बात सुन कर खुशी के मारे चिल्ला सी पड़ी और मेरी गाल पे पटाक से एक चुम्मा ठोक दिया।


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रफिया घुटने मोड़े मेरे आगे कारपेट पर बैठ गई और चरर्ऽऽऽऽ की अवाज़ से हसीन रफिया ने कांपते नाजुक हाथों से मेरी पैंट की जिप खींच दी। मेरा कच्छा नीचे खिचंते ही मेरा आठ इंच लंबा लण्ड फटाक से रफिया के मुँह पर लगा तो रफिया की डर के मारे चीख निकल गई। ऊईऽऽऽऽमांऽऽऽ! ईत्ता बड़ा? हाय रब्बाऽऽऽ मैं मर जाऊँऽऽऽ!’

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खुली हवा में आठ इन्च लण्ड झटकों के साथ ऊपर उठता चला गया और बुरी तरह से लोहे सा टना टन छत की तरफ अकड़ गया। मोटे लण्ड का गीली गीली जामुनी गुलाबी टोपी के ऊपर खूब बड़ा सुराख था। खून की तेज़ी से मजबूत लन की नसें फूल गई और लन हवा में ही झटके खाने लगा। लण्ड के नीचे खूब बड़े। बड़े सांवले सलौने ट्टटों की रेशमी थैलियाँ।

रफिया के जीवन का आज सबसे महत्वपूर्ण दिन था। अंगूठे चूसने की उमर में रफिया को शानदार और जानदार लण्ड चूसने को मिल गया था। सम्मोहित सी रफिया ने झटके खाते लण्ड को लपक के अपने छोटे छोटे मखमली हाथों में लेकर लौड़े की ऊपरी चमड़ी को नीचे सरका दी, तो मेरी सिसकारी ही निकल गई। सख्त और सुलगते लौड़े के सुपाड़े से निकली सुगंधित हवा का झोंका रफिया के नथुनों में घुस कर रफिया का दिल बाग बाग कर गया। रफिया के फूल से नादान हाथों की गरमी और नरमी पा कर मैं को लण्ड ने कम्पकपा कर झरझरा कर थोड़ा सा पानी छोड़ दिया।



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मदहोशी में मेरी आँखें बंद सी हो गई। रफिया ने लन पर अपनी छोटी सी मुट्ठी कस कर ऊपर नीचे करने लगी। अब रफिया की मंजिल करीब थी, लण्ड की खूबसूरती के आगे अब रफिया मैं को भूल चुकी थी। रफिया अपने होंटों पर भूखी बिल्ली की तरह जीभ फेर रही थी और रफिया की हल्की भूरी आँखों में बला की चमक थी।

तभी रफिया ने अचानक झटके से मेरे लण्ड की टोपी पर अपने लाल लाल रसीले होंट चिपका दिये और मेरी आँखों में आँखें डाल कर चुसड़ चुसड़ कर लॉलीपॉप की तरह चुस्सा मारने लगी। रफिया ने अपना छोटा सा मुँह पूरा खोल कर मेरा लण्ड अपने गले तक अंदर ले लिया तो मेरे मजे की सीमा न रही और मैं चीख पड़ा।

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मेरी चीख सुन कर उत्तेजित रफिया ने लण्ड पर अपना मुँह आगे पीछे करने लगी, तो मैं ने घस्से मार मार का रफिया के सुन्दर मुख को चोदना शुरू कर दिया। मैं ने लण्ड को रफिया के गले तक ठोक दिया। रफिया की जीभ रह रह कर मैं को लण्ड पे वार पे वार कर रही थी। कभी कभी रफिया नीचे से ऊपर तक मेरे औजार को प्यार से दाँतों से रगड़ देती। अब रफिया खुलकर और बुन्ड तक जोर लगा कर मेरा लण्ड चुसड़ चुसड़ करके चूसने लगी। रफिया ने अपनी जीभ से लण्ड की गरारी को छेड़ कर पूरे जोर से चुस्सा मारा तो लण्ड ने भरभरा कर सारा रस रफिया के मुँह में छोड़ दिया। प्यासी रफिया लण्ड की झड़न का कतरा कतरा पीने में मस्त हो गई।


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हाँफते और करहाते हुए बड़ी ही मुश्किल से ज़बरदस्ती जोर लगा कर मैं ने रफिया के मुँह से अपना लण्ड को झटके से ‘प्लापऽऽ!’ की ऊँची आवाज़ के साथ बाहर खींचा। ऐसा लगा की जैसे शैम्पेन की बोतल से कार्क हटाने से आवाज आई हो। लण्ड का सुपाड़ रफिया के मुखचोदन से गुलाबी से जामुनी हो गया और रह रह कर झटके खा रहा था। दम तोड़ते लण्ड ने आखिरी दो पिचकारियाँ रफिया के सुन्दर सलोने चेहरे पर पड़ी। वासना से अन्धी हुई रफिया हाँफती सी अपनी सांप सी लम्बी और गुलाबी जबान को बाहर निकाल कर सड़प सड़प की आवाज़ से मेरे लण्ड की सफेद मलाई को भूखी बिल्ली की तरह चाट गई।

मेरे लण्ड के कस बल निकाल रफिया की आँखों में अज़ीब सी सन्तुष्टि थी। पर रफिया की चूत की हालत बद से बदतर हो गई थी।

रफिया की जाघें घुटनों तक तरबतर थी और पनीयाई हुई चूत से पानी अब बह सा रहा था। रफिया अपना सिर पकड़ कर कारपेट पर ढेर होती बोली। हायऽऽऽ भाई ! अब मैं क्या करूँ?



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रफिया अपने चुच्चे मसलती और चूत को रगड़ती और कसमसाने लगी।


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रफिया वासना में, खुमार में अपनी कंदली जांघें रगड़ती सिसकती सी बोली। सीऽऽऽऽ भाई ! ऐसे तो मैं पागल हो जाऊँगी!

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हाँफने से रफिया की नंगी लौहार की धौंकनी सी फैलती सुकड़ती छातियाँ छत को छूने को बेताब लग रही थी। याकूत से सुर्ख लाल निप्पल अकड़ कर एक एक इंच लम्बे हो चुके थे। रफिया ने अपने घुटनों को ऊपर उठ कर बेशर्मी से चौड़ा किया तो गजब की खूबसूरत चूत और चूत की पड़ौसन ने सारे कमरे में जैसे रौशनी सी फैला दी। चूत एकदम सफाचट, जुगनू सी जगमग करती चिकनी चूत पर रौयों का नामोनिशान न था। भला खेलने के मैदान में घास का क्या काम।


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मैं ने रफिया की दहकती और जलती जवानी को खींच कर अपने आगोश में ले लिया, गोदी में बैठाने से पहले ही समझदार रफिया ने खुद ही अपना स्कर्ट ऊपर उठा कर अपनी नंगे रेशमी अंगों से मेरा लण्ड मसल सा डाला। रफिया ने अपनी गोरे बाजू मेरे गले में डाल कर सीऽऽऽ सीऽऽऽ करती जोर जोर से अपना जलता और गीला यौवन रगड़ कर मेरे लण्ड खडा करने लगी|

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मैं ने धधकती सुलगती जवानी को बाहो में ले कर ताबड़तोड़ पटाक पटाक से चुम्बन रफिया के गुलाबी गालों पर जड़ दिये। रफिया ने भी मैं पर जवाबी चुम्मियों की बौछार सी कर दी। रफिया को अपनी गाल चुसवा कर बहुत ही मजा आ रहा था। पुच्च पुच की लम्बी लम्बी गीली गीली आवाजों से और गीली फुद्दी की रगड़ से लण्ड का ठरक बुलंदियों पर पहुंच गया। निहाल और बलिहारी हुई रफिया अब मुझे अगं प्रत्यंग पर गीली मुहरें ठुकवा रही थी।

मैं अब रफिया के नीचे वाले होंट को चूसने और काटने लगा तो रफिया ने अपनी गुलाबी जुबान बाहर निकाल दी। मैं भी झट से रफिया की जुबान को अपने मुँह में सटक कर बुरी तरह चूसने लगा, बीच बीच में रफिया भी मेरी ज़बान को अपने मुँह में खींच कर जवाब दे देती, तो कभी कभी दोनों की जुबानें मिल कर डांस सा करने लगती।

रफिया बुरी तरह मेरी जुबान को बहुत बुरी तरह वहशी होकर चूस रही थी। एक बार मैं को लगा कि अगर उसने जुबान को ढीला छोड़ा तो शायद रफिया मेरी जुबान को पी ही ना जाये।

रफिया की मलाई सी गुदगुदी गाण्ड और गीली भाम्प छोड़ती चूत की घिसन से मेरा लण्ड फिर से तुनके लगा कर खड़ा होने लगा। रफिया मेरा सरसराते लण्ड अपनी रेशमी मुलायम जांघों में दबोच कर मसलने और पीसने लगी तो मैं हाय हाय कर उठा।

बावली रफिया पटाक की अवाज़ से चुम्बन तोड़ती और हाँफते हुई मेरे कान में फुसफुसाती बोली। भाई आपको छोटी। छोटी स्कूल गर्ल्स से ऐसी बाते करते शर्म नहीं आती?



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रफि बेबी अब तुम जवान और समझदार हो गई हो!’ मैं रफिया के नंगे मम्मों पर चुम्बन ठोकता और स्कर्ट के नीचे हाथ आगे बढ़ाता बोला।

रफिया मेरे आगे अपने मम्मे नचाती और सताती सी बोली। पर भाई , मैं तो आपकी छोटी बहन जैसी हूँ।

‘अच्छा, तो मैं यह सब नहीं करता!’ यह कह मैं ने अपना हाथ वापिस खींच लिया तो रफिया झट से ठुनक कर झूठे गुस्से से बोली। अरेऽऽऽ मैंने ऐसा तो नहीं कहा था।

अब तो मैं ने अपनी हथेली रज़ामंद रफिया की पानी पानी हुई चूत से चिपका दी और ऊपर से रफिया का एक चुच्चे की टौंटी को होंठों में ले जोर से पीने लगा। अब तो रफिया अपने आप को भूल चुकी थी रफिया ने अपना पूरा का पूरा मम्मा मेरे मुँह में ठोक दिया। रफिया का सारा बदन कमान की तरह अकड़ गया और झनझना उठा।

अनजाने में ही चुदास मस्ती में आई रफिया के मुँह से निकल गया। ऊफऽऽऽ बाबा रेऽऽऽऽ! बाबा भाई ऽऽऽ! आप तो बड़े बहनचोद निकले। बहनचोद भाई अगली बार मैं राखी तेरे पप्पू पर ही बांधूगी। फिर मेरी उंगली नीचे सरकती हुई रफिया की फूल सी तूफानी जवानी की नरमी, गरमी और गहराई भांपने लगी।


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रफिया ने पूरी उंगली गपकने के लिये अपनी चूत को ढीला दिया और कमर को आगे और ऊपर को उछालने लगी। उंगली जड़ तक अन्दर लेने को बाद रफिया ने अपनी कसी चूत की मखमली फांकों से भींच कर टाँगों को बंद करके मेरे हाथ को जैसे हमेशा के लिये कैद कर लिया। जब मैं ने रफिया के जी स्पॉट को गुदगुदाया तो स्वाद से रफिया का पौर पौर पिनपिना उठा। रफिया जोर से सिसकारा मार मेरी उंगली को अपनी जानदार फांकों में भींचती। खोलती और चूतड़ों पर मेरे डण्डे से लण्ड की सख्ती का मजा लेती बोली। सीऽऽऽ भाई , उफ! आप बहुत ज़ालिम हो, सीऽऽऽ हाय हाय भाई , मैं तो ऐसे मर जाऊँगीऽऽऽ सीऽऽऽ कुछ करिये नाऽऽऽ!


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मजे की ज्यादती से रफिया बड़ी अदा से अपने नीचे वाले होंट के कोने को दांतों में दबा दोनों हाथों को ढीला कर जोर जोर से झटकने लगी।

मैं वासना के ज्वालामुखी में धधकती रफिया की हालत ताड़ गया, अब मैं खुद भी रफिया को छोड़ने वाली हालत में नहीं था। रफिया को घुमा कर रफिया की पीठ अपनी तरफ करके रफिया के शर्ट से बाहर आये आज़ाद चूचों में अपनी अंगुलियाँ धंसा दी और पौं पौं करने लगा। इस हालत में तो यह चिकनी चिड़िया की गाण्ड तो दे ही देगी, ये सोच मैं ने रीट की गाण्ड को ऊपर उठा कर चूतड़ों को दाँतों से कौंचने लगा। मेरी दंदियाँ तो उलटी हुई रफिया पे कहर बन कर गिरीं। साथ में ही मैं ने रफिया की गाण्ड को अपनी जबान से गुदगुदा कर ठेर सारा थूक से गीला कर दिया और अपने लण्ड का गरम सुपाड़ा रफिया की चूत के पानी से तर गाण्ड पर टिका दिया तो नादान रफिया सिहर कर अपनी कुंवारी गाण्ड को जोर से भींच कर लौड़ का रास्ता रोक बोली। भाई , मैं तो बहुत छोटी हूँ!


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मैं रफिया की गाण्ड के सुराख पर दबाव बढ़ाता हुआ बोला। चिन्त्ता मत करो रफि बेबी, इस हालत में तुम्हारी शदाई चूत या गाण्ड किसी गधे का लण्ड सटक सकती है और फिर थूक से मैंने तुम्हारी एकदम गीली कर दी है।

रफिया पीछे मुड़ कर मेरी तरफ देखती मासूमीयत से बोली। पर भाई कहीं मेरी फट गई तो?

वैसे तो इस समय मैं उसकी चूत की पहली चुदाई करने के लिए और रफिया भी अपनी पहली चुदाई के लिए त्यार थी पर ये सोच कर की उसका कौमार्य उसकी बहनो और फूफी के सामने लेना ही ठीक रहेगा मैंने अपने निशाना साध लिया, मैं बोला। बेबी, बहुत प्यार से मारूँगा और फिर मैं तो कुछ कर भी नहीं रहा। जो भी करना हे वो तुम्हीं को करना है।


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मेरी झूठी तसल्ली से रफिया ने अपनी गाण्ड को आहिस्ता आहिस्ता ढीला छोड़ दिया। रफिया की चूत थूक और मेरी अपनी लेस से लिबड़े लण्ड की टोपी ‘पक्क’ की आवाज़ से रफिया की गाण्ड में घुस गया।

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‘आईऽऽऽऽऽ’ हल्की सी मीठी दर्द की लहर और मजे से रफिया चीख सी उठी और गाण्ड को दुबारा से भींच लिया। इतनी छोटी, टाईट और बच्ची गाण्ड में मेरा लण्ड पिनपिना उठा।

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परन्तु तुरन्त ही रफिया ने चुदास मस्ती में अपनी गाण्ड को ढीला छोड़ अपने दांत भींच कर मेरे लोह। लण्ड पर बैठती सी चली गई। मेरा दहकता सरिये सा लौडा़ रफिया की बेहद कसी गाण्ड की मखमली दीवारों को रगड़ता शनै शनै अन्दर घुसता चला गया। गाण्ड के रेशमी चंगुल में फंसा लौड़ा हिनहिना कर बिफर उठा। बार बार रफिया मेरे लौडे को अपनी गाण्ड को भींच कर चूस सा देती थी तो मैं को अपनी नानी याद आ जाती थी।

जैसे तैसे खुद रफिया ने लगभग तीन चौथाई लौड़े को अपनी गाण्ड में सटक ही लिया और हाँफती बोली। आहऽऽऽ! बस भाई , और नहीं ले सकती मैं। आपका तो बहुत ही मोटा और लम्बा है।

A03

रफिया पीछे मुड़ कर मेरी तरफ देखती बोली, तो शैतान मैं मौका देख रफिया के होंटो अपने होंटो में प्यार से दबा कर चूसने लगा और साथ ही रफिया की पतली कमर पकड़ कर नीचे दबा कर और नीचे से लगातार एक के बाद एक तीन जबरदस्त धक्के लगा कर रफिया की गाण्ड में पूरा का पूरा मुगदर सा लण्ड पेल दिया। मेरी मजबूत बांहों में रफिया किसी घायल चिड़िया सी फड़फडा़ के रह गई। बेचारी बेबस बिलबिलाती रफिया की चीख चुम्बन में ही घुट के रह गई। पीड़ा से नन्ही रफिया की आँखों में मोटे मोटे आंसू गुलाबी गालों पर लुढ़कते चले गये।


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मेरे लण्ड पर रफिया की गाण्ड टाईट रबडबैंड की तरह चढ़ी हुई थी। रफिया करहाती और रोती हुई बोली। आहऽऽ ईऽऽऽऽ! मेरी फट गई! आहऽऽऽऽ! मुझे नहीं करवाना यह सब! भाई छोड़ दो मुझे!

गिड़गिड़ाती रोती रफिया ने दर्द की वजह से अपने दोनों होटों को दाँतों में दबा कर चीखों को रोकने की असफल कोशिश कर रही थी।

परन्तु ठरक से अन्धा मैं अड़ियल सांड की तरह काबू में आई हुई नई कबूतरी रफिया को बालों से पकड़ रफिया का मुँह कारपेट पर लगा दिया तो रफिया की गाण्ड अब छत की तरफ उठ गई और मैं ने चीखती चिल्लाती रफिया के अन्दर अपने लण्ड को थौड़ा सा बाहर खींच कर दुबारा पूरा का पूरा ठोक दिया।



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रफिया की स्कर्ट अब उलट चुकी थी और उसकी कसमसाती गोरी गोरी मखमली गाण्ड बाहर झाँक रही थी। स्कूल ड्रैस और कुतिया स्टाईल में रफिया और भी सैक्सी लगने लगी थी। मैं बेरहमी से शैतान लौंडिया की गाण्ड मारने लगा। रफिया गाण्ड को टाईट कर मेरे लण्ड को रोकने की असफल कोशिश करने लगी तो मैं तैश में आकर रफिया के उचके हुऐ चूतड़ों पर खींच कर पूरे जोर से पाँच छ: थप्पड़ जमाते हुए बोला। साली, फाड़ के रख दूंगा अगर अपनी गाण्ड को टाईट किया तो!

मेरे हाथ रफिया की मलाई सी गोरी गाण्ड पर छपते चले गये साथ में मैं ने ढेर सारा थूक रफिया गाण्ड पर थूक दिया। जल्दी ही मेरा आगे पीछे होता मस्त थूक से सना लण्ड रफिया को मस्ती देने लगा।


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आखिर मुकाबला करने को तैयार रफिया ने दाँत भींच कर जैसे तैसे मेज का पाया पकड़ और पोजीशन सम्भाल कर अपनी शानदार गाण्ड और ऊपर उठा दिया। मेरे ठप्पों की वजह से मेज और सौफे की चरर्ऽऽऽ चरर्ऽऽऽ की चरमराहट होने लगी। अब नन्ही रफिया भी अपनी गाण्ड की लौड़े की ताल से ताल मिलाने लगी। मैं भी अब रफिया की गाण्ड से पूरा का पूरा लण्ड खींच कर धक्के पर धक्के मारने लगा तो रफिया मजे के मारे चिल्ला उठी।

सुन्दर रफिया की उछलती सिल्की गाण्ड को देख मैं उत्तेजित हो निगोड़ी छोकरी की गाण्ड को और जोर से मारने लगा।

अब तक बदमाश रफिया ने मेरे शैतान लौड़े पर पूरी तरह काबू पा लिया था। रफिया लौड़े को अपनी गाण्ड में भींच भींच कर पीसने लगी। जब मैं धक्के मारता तो रफिया अपनी गाण्ड को बिल्कुल ठीला छोड़ कर गाण्ड पीछे ओर ऊपर उछाल देती और जब मैं लौड़े को बाहर खींचता तो रफिया अपनी टाईट गाण्ड को जोर से सुकोड़ कर लौड़े को भींच सा लेती। लण्ड व गाण्ड की लड़ाई की घचर पचर और रफिया की गाण्ड पर मेरे मन्ज़ी तोड़ घस्सों की धपाधप की आवाज ने रफिया के बचे खुचे होश उड़ा दिये। जंगली चुदाई से चूत डबडबा गई और सुराख से टप टप पानी बहने लगा। मेरा खम्बे सा लम्बा लौड़ा अपनी नन्ही सी गाण्ड में गपक कर रफिया का चूत मरवाने का आत्मविश्वास बुलंद हो गया था।



मैं ने पूरे आधे धण्टे तक मेज की चरमराहट को बनाये रखी। चुदास से पगलाई और मस्ताई हुई रफिया गाने लगी।

ऽऽऽऽ आऽऽऽऽआह भाई ऊईऽऽऽ
ऊँऽऽऽऽ... आऽऽऽ ऊँऽऽऽ

हवस में अन्धी रफिया अपने आप को भूल कर अश्लील हो गई और बकबक करने लगी। भाई , और जोर से धक्के मारिये! ईऽऽऽऽ आहऽऽऽ आह भाई ऊईऽऽऽ मांऽऽऽ! हायऽऽऽ रेऽऽऽ मैं चुद गई रे! मेरी मम्मीऽऽऽऽ सीऽऽऽ बडा मजा आ रहा है। भाई अच्छी तरह से चौदिये, फाड़ दीजिये मेरी निगोड़ी गाण्ड को ऊफऽऽ ईसऽऽऽ ईसऽऽऽ बहुत सताती है साली, मां की लौड़ी, आह मेरे गाण्डू भाई लूट लो मेरी जवानी, और जोर से, येस ओर जोर से वाहऽऽऽ फाड डालोऽऽऽ चौदू, चौद अपनी बहन की चूत कोऽऽऽ, कैरी आन डौन्ट स्टाप यू फकर बास्टर्ड!

रफिया जैसी मासूम स्कूल गर्ल के मुँह से शानदार गालियाँ सुन कर मेरा ठरक चरम सीमा तक पहुँच गया।

‘लेऽऽऽ माँ की लौड़ी, हाय मेरी जलेबी, हाय मेरी रसमलाई, ये ले भौंसड़ी की, चोद के रख दूंगा, फाड़ के रख दूंगा, साली रंडी कुतिया, तेरी चूत पर बहुत चर्बी चढ़ गई है, ले हरामजादी ले!’

मैं ने रफिया की गुदाज और गदराई हुई कमर में ऊँगलियाँ धंसा दी और लौंडिया उछल उछल कर जानलेवा चोदा मारने लगा। ज़ालिम मैं ने आखिरी कमरा हिला देने वाले आटोमिक धक्के रफिया सम्भाल ना पाई और दोनों चूदाई करते करते कारपेट पर ढेर हो गए।


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गिरने से मेरे लण्ड रफिया की गाण्ड में जड़ तक धंस गया और दोनों ठरक की चरम सीमा पर पँहुच गये। मेरे लण्ड ने फव्वारे छोड़ने शुरू किए तो रफिया की चूत ने भी झरझरा कर बिना चुदे ही पानी छोड़ दिया। मजे से मैं ने रफिया को इस कदर बाहों में दबाया, तो रफिया को लगा कि उसके ऊपर से बुलड़ोज़र निकल गया हो और हड्डियाँ जैसे चरमरा सी उठी।

इस ताबड़तोड़ चुदाई से रफिया का रोम। रोम पुलकित हो गया और उसकी आँखों में खुशी के आँसू छलछला पड़े। रफिया कुतिया की तरह मेरे लण्ड को अपनी नन्ही सी गाण्ड को सुकोड़ कर लण्ड को निचोड़ने लगी। थोड़ी देर बाद मैं ने पटाक की आवाज से अपना लण्ड बाहर खींचा तो गुलाबी गाण्ड हुच हुच कर लौड़े का झाग वाला पानी उगलने लगी।


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वासना का तूफान खत्म होने पर मेरे नीचे दबी हाँफती और अपनी गाण्ड सहलाती बोली। आहऽऽऽ भाई , आप तो बड़े ही कसाई निकले! उफऽऽऽ सारा बदन तोड़ मरोड के रख दिया! हायऽऽऽ कितनी जोरो के मारी है मेरी उफऽऽ!’


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मैं रफिया की गाण्ड पर चटाक से चपत जमाते बोला।रफि बेबी, तुम भी तो ये उछल उछल कर मेरे लण्ड के परखच्चे उड़ने पर तुली हुई थी। चूसी और चुदी हुई रफिया बुरी तरह शरमा कर अपना चेहरा अपने हाथों में ढांप कर मेरी छाती में छिपने की कोशिश करने लगी।

जारी रहेगी

 
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दूसरा अध्याय

खाला की चुदाई के बाद आपा का हलाला


भाग 2


मैंने कहा- जल्द ही यह काम भी कर दूंगा, ये तो क़िस्मत की बात होती है, तुम्हारी शादी हो गयी ... फिर भी तुम कुंवारी रही और मेरी सुहागरात तुम्हारे साथ मन रही है. कसम से तुम्हारे साथ बहुत मजा आ रहा है. शायद किस्मत हमें मिलाना चाहती है.

फिर हम कुछ देर इधर उधर की बातें करते रहे. इस दौरान में उसके मोटे मोटे चूतड़ों पे हाथ फेरता रहा, जिससे वो आहिस्ता आहिस्ता फिर से मस्त होने लगी और उसने उठ कर फिर से मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया, जो अब तक खड़ा हो चुका था. उसने चूस चूस कर मेरा लंड सुजा दिया था. चूसने से लंड बिल्कुल लोहे की रॉड की तरह कड़क हो गया था. जब वो लंड चूस रही थी, उस वक़्त वो अपनी चूत को मेरे पांव के अंगूठे से रगड़ रही थी.


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फिर वो एकदम से उठी और बोली- आमिर, अब बस करो ... मुझे आज भर दो.

मैं उठा और मैंने उसकी दोनों टांगों को फैलाया तो हैरान रह गया कि इतना भरा हुआ जिस्म होने के बावजूद भी इतनी लचक थी कि टांगें बिल्कुल बेड के साथ लग गईं और उसकी मोटी और सूजी हुई चूत खुल कर मेरे सामने आ गयी.

मैंने देखा कि उसकी खुली छाती पर तने हुए उरोज अपने सिरे पर गुलाबी छतरी ताने मुझे ललचा रहे थे. मैंने एक तरफ के गुलाबी चुचूक को अपने मुँह में रखा और दूसरे को उंगलियों के बीच फंसाकर हल्के से दबाने लगा. थोड़ी देर बाद दूसरे निप्पल को मुँह में भरा व इधर के निप्पल को उंगलियों से दबाने लगा.

मैंने चूत के सुराख़ पर लंड की टोपी रख दी और हल्का हल्का रगड़ने लगा. फिर मैं अपने लंड को उसकी चूत पर लगा कर अन्दर बाहर करने की कोशिश करने लगा लेकिन आधी टोपी तक कभी मैं लंड अन्दर करने की बजाए उसके दाने पे रगड़ देता, तो वह तो किसी कुतिया की तरह गुर्राने लगती. फिर तुंरत ही अपने चूतड़ों और घुटनों को ऊपर नीचे करके लंड को अपनी चूत पर टक्कर दिलवाने लगी.


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फिर वो हाथ जोड़ कर बोली- आमिर प्लीज़ पेल दो ना ... क्या मुझे मारने का इरादा?

सारा मेरे लिंग को अपनी चूत के प्रवेश पर बार बार रगड़ रही थी और शायद जैसे ही वो सही सीध में आया, मैंने धीरे धीरे नीचे होना शुरू किया ... पर या तो चिकनाई ज्यादा थी ... या सारा का छेद सही नहीं बैठ पा रहा था ... जिस वजह से मेरा लंड फ़िसल गया.

सारा ने अपना हाथ बढ़ाया और अपने हाथ से मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर फिर से रख कर फिर से नीचे दबाने को कहा. पर इस बार फिर से लंड नाभि की तरफ़ चला गया. तब मैंने ख़ुद ही अपने लिंग को पकड़ा और सारा की चूत में डालने की कोशिश की. जैसे ही मैंने एक हल्का सा धक्का लगाया, तो शायद वो थोड़ा अन्दर गया. क्योंकि सारा के हाथ और पाँव एकदम हवा में उठ गए और मुँह से सिसकारी निकल गई.

सारा के मुँह से हल्की सी चीख निकल गई- उम्म्ह... अहह... हय... याह... आहह अब लंड डाल दो ... अब और इंतज़ार नहीं होता ... प्लीज जल्दी करो ना ... प्लीज आहहह ...
अब मैं टोपी से लगातार उसकी चूत को छेड़ रहा था और वो ज़ोर से सिसकारियाँ भर रही थी- आमिर ये तूने क्या कर दिया? अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है, जल्दी से चोद दो, मेरी चूत में आग लग रही है.

वो ज़ोर-जोर से हाँफ रही थी और 'आहह ... एम्म ... ओह ... आआअ ... डालो ना अन्दर ...' जैसी आवाजें निकाल रही थी.

अभी मैंने दो तीन ही धक्के मारे थे कि सारा ने दर्द से तड़फ कर मुझे रोक दिया, वो बोली- दर्द हो रहा है ... आपका तो बहुत बड़ा है ... मेरी चूत बहुत छोटी है फट जाएगी.

मैंने कहा- घबराओ मत आराम से करेंगे.


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हम दोनों एक दूसरे को 'आई लव यू...' बोले जा रहे थे. मैंने टोपी एडजस्ट करके एक इतने ज़ोर का धक्का लगाया कि मेरा लंड चूत में सैट हो गया. मैंने अपने लंड के बाहर निकले हिस्से पर थूक लगाया और उसके दोनों पैरों को फैला दिया.

अब मैंने दबाव बनाते हुए अपने लंड को उसकी चूत में और अन्दर डाल दिया. वो मछली की तरह तड़फ उठी. तभी मैंने सारा की कमर पकड़ कर एक और जोरदार धक्का दे मारा. वो उछल पड़ी. मगर तब तक मेरे लंड का काफी हिस्सा उसकी चूत में फंस चुका था. मैंने फिर एक जोरदार धक्का मारा. पूरा कमरा सारा की चीख से भर गया. उसकी सील टूट गई थी. मैंने सारा की चुची को दबाना चालू कर दिया. मैंने सारा के दर्द की परवाह किए बगैर अगला झटका लगा दिया और अपना मूसल लंड चूत में घुसेड़ दिया.

इस बार सारा पहले से ज्यादा तेज़ चिल्लाई, सारा के आंसू निकल आये थे, पर मैं कहां मानने वाला था. मैंने फिर एक और जोर से धक्का मारा. इस बार करीब आधा लंड अन्दर घुस गया था. जैसे ही लंड घुसा ... वो बहुत जोर से चिल्लाने लगी- आह ... फट गई ... आहह आआअह ... प्लीज़ इसे बाहर निकालो ... मैं मर जाऊंगी ... उफ़फ्फ़ आहह आआहह ...

उसकी आँखों से आँसू निकलने लगे थे लेकिन मैं नहीं रुका. मुझे लगा मेरा लंड उसकी झिल्ली से जा टकराया था क्योंकि इस बार मैंने कोई अवरोध महसूस किया था. मैंने हल्का ज़ोर लगाया लेकिन लंड अन्दर नहीं जा रहा था.

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एक बार फिर मैं थोड़ा सा पीछे हटा और फिर अन्दर की ओर दबाव दिया. उसको दर्द हुआ तो मैंने थोड़ा सा लंड फिर से पीछे किया और कमर उठा कर फिर से धक्का मार दिया. मेरा लंड ज्यादा गहरायी तक अन्दर चला गया था. मुझे महसूस हुआ कि मेरे लिंग को सारा ने अपनी योनि रस ने भिगो दिया था, जिसकी वजह से लिंग आसानी से अन्दर और बाहर हो पा रहा था.

अगली बार के धक्के में मैंने थोड़ा दवाब बढ़ा दिया. मेरी साँसें जल्दी जल्दी आ रही थीं. सारा आपा ने अपनी टांगें मेरे चूतड़ों से और बाहें मेरे कंधे पर लपेट दी थीं और अपने नितम्बों को ऊपर की ओर उठा दिया था. अन्दर अवरोध महसूस होने लगा था. लंड झिल्ली तक पहुँच चुका था. मेरा लंड सारा आपा की हायमन से टकरा रहा था और जब लंड ने उसे भेदकर आगे बढ़ना चाहा तो सारा चिल्लाने लगी कि दर्द के मारे मैं मर जाऊँगी.

मैंने पूरी ताकत के एक धक्का लगा दिया. सारा की टांगों ने भी मेरे चूतड़ों की नीचे की ओर से कस लिया. 'ओह अम्मी ...' सारा के मुँह से निकला.

जैसे ही मेरा मोटा मजबूत गर्म, आकार में बड़ा लिंग पूरी तरह से गीली हो चुकी योनि में घुस गया, तो सारा आपा के बड़े बड़े स्तन ऊपर की ओर उठ गए और शरीर एंठन में आ गया. लंड अन्दर और अन्दर चलता चला गया, चूत के होंठों को खुला रखते हुए क्लिटोरिस को छूता हुआ लंड पूरा का पूरा अन्दर तक चला गया था. सारा आपा की योनि मेरे लिंग के सम्पूर्ण स्पर्श को पाकर व्याकुलता से पगला गयी थी.


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उधर मेरे हिप्स भी कड़े होकर दबाव दे रहे थे और लिंग अन्दर जा चुका था. पूरा लंड उसकी चूत में समा गया और उसकी चीख निकल गयी. सारा की चीख इतनी बुलंद थी कि एक बार को तो मैं भी डर गया कि कोई पूछने ही न आ जाए ... लेकिन तब भी मुझे सारा आपा की सील तोड़ने में बहुत मज़ा आया.

आपा भी दर्द के मारे चिल्लाने लगी ... जो इर्द गिर्द गूँज उठी थी- आहहह आय मर गई ... उउउइइ ओहह ... बहुत दर्द हो रहा है ... प्लीज इसे बाहर निकाल लो ... मुझे नहीं चुदवाना तुमसे ... तुम बहुत जालिम हो ... यह क्या लोहे की गर्म रॉड घुसा डाली है तुमने मुझमें ... निकालो इसे ... नो प्लीज बहुत दर्द हो रहा है ... मैं दर्द से मर जाऊंगी प्लीज निकालो इसे!

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सारा आपा की आँखों से आंसू की धारा बह निकली. मैं उन आंसुओं को पी गया. मैं बोला- मेरी रानी ... बस इस बार बर्दाश्त कर लो ... आगे मजा ही मजा है.

सारा आपा चुप हो गई.


कुछ ही देर की कोशिशों के बाद लंड सैट हो गया और दर्द भी काफूर सा होने लगा था. अब सारा चीखने चिल्लाने लगी- हाआअ ... राआआजा ... आईसीईई और जोर से और जोर से चोदो. आज मेरी चूत को फाड़ दो, आज कुछ भी हो जाए लेकिन मेरी चूत फाड़े बगैर मत झड़ना ... आआह और ज़ोर से ... उउउईईई अम्मी ... आहह..

फिर तो झटकों का सिलसिला शुरू हो गया. अब मैं उसके ऊपर लेट कर उसे किस भी कर रहा था और एक हाथ से उसके मम्मों को सहला भी रहा था.

कभी कभी 2 उंगलियों में उसकी निप्पल को भी ले कर मसलता और कभी बहुत ज़ोर से खींचता, उसके निप्पल तने हुए थे. मैं भी मज़े से लंड को चूत के अन्दर बाहर कर रहा था. दस मिनट में वो 2 बार छूटी, कमरे में मेरे झटकों की आवाज़ बहुत बुलंद थी.


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अब मैं उसकी चिल्लपों से कतई नहीं डर रहा था और न ही उसके बोलने की आवाज़ आ रही थी. खैर झटकों के एक लम्बे सिलसिले के बाद मैंने उससे बोला कि मैं झड़ने वाला हूँ.

तो उसने बोला- अन्दर ही डालो ... मुझे तुमसे एक बच्चा चाहिए.


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मैंने कहा- जो हुकम सारा बेगम!

मैं ज़ोर ज़ोर से झटके मारने लगा. अब सारा भी भरपूर साथ दे रही थी. फिर एक दर्दनाक झटके के साथ मेरा लंड उसकी बच्चेदानी से जा टकराया और वहीं रुक कर पानी छोड़ने लगा. मैंने महसूस किया कि वो भी फारिग हो गयी थी. मैं सारा के ऊपर गिर गया.

मैं कुछ देर के लिए उसके ऊपर ही पड़ा रहा ... कुछ देर के बाद वो भी शांत हो गई. मैं ऐसे ही उसके ऊपर ही लेटा हांफता रहा और वो मेरी कमर और मेरे बालों को सहलाती रही. इतना खुमार था कि मेरी आंखें मजे के कारण बन्द हो रही थीं, मगर दिल करता था कि मैं यूं ही इसी हालत में ही सो जाऊं.

लेकिन ... अभी तो बहुत मज़े लेने थे.


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कुछ देर बाद मैं उसके ऊपर से लुढ़क कर साइड पे बेड पे सीधा गिर गया और मेरा लंड भी बाहर आ गया. मेरे लंड पे खून लगा हुआ था. सारा की चूत से खून मेरा स्पर्म और उसका पानी बह रहा था. चादर लाल हो गयी थी. मैं साइड टेबल से सिगरेट का पैकेट उठा कर सिगरेट पीने ही लगा था कि उसने मुझे फ्लास्क से दूध निकाल कर गिलास को भर कर दिया ... जो नीम गरम था. उसने खुद भी एक गिलास दूध पिया.

दूध पीने के बाद हम दोनों वाशरूम में पहुंचे. गर्म पानी का शावर लिया और फिर से बेड पर आ गए.

उसके बाद अगला राउंड शुरू हो गया. मैंने कहा- सारा इस बार तुम ऊपर आओ.

मैं सीधा लेट गया और सारा मेरे ऊपर आ गयी और मुझे लिप किस करने लगी. कुछ ही देर में सारा ने मेरा लंड अपनी चूत में डाल लिया और हम लिप किस करते हुए चुदाई करने लगे.
कुछ देर बाद सारा सीधी हो गयी और उसने अपने हाथ मेरी छाती पर रख दिए. मैं उसके गोल सुडौल मम्मे चूसने दबाने लगा, तो वो खुद ब खुद मेरे लंड पर ऊपर नीचे होने लगी. मेरे भी चूतड़ चलने लगे थे. हर धक्के के साथ सारा के मुँह से आह निकल जाती थी. सचमुच वो काफी मादक लग रही थी.

लगभग आधे घंटे बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए.


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अगले राउंड में हमने पोज़ बदल दिया और मैंने सारा को घोड़ी बना दिया और लंड उसकी चूत में डाल दिया. मुझे लगा जैसे मेरा लंड इस बार कुछ ज्यादा अन्दर गया. फिर हम रिदम में चुदाई करने लगे. मैं उसके गोल मम्मे दबाने लगा और खुद आगे पीछे होने लगी. हर धक्के के साथ सारा के आह निकल जाती थी. सचमुच वो काफी प्यासी थी. फिर पन्द्रह बीस धक्कों के बाद पीछे से अन्दर डाले हुए ही मैंने उसे खड़ा कर किया और कस कस कर धक्के लगाने शुरू कर दिए.

लगभग बीस मिनट बाद हम दोनों एक साथ फिर से झड़ गए.

उस रात मैंने सारा आपा या सारा बेगम, जो भी कह लो, लगातार 4 बार चोदा, जब मैं आखरी बार उसकी गांड में लंड डाल कर चोद रहा था तो फजर का टाइम हो गया और मामू ने डोर नॉक कर के हमें आवाज़ दी. मैं ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा ताकि मामू भी चुदाई की आवाज़ सुन लें और समझ जाएं कि हम जाग रहे हैं.


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खैर फिर मैं फारिग हुआ. हमने एक बहुत लम्बी जफी लगाई और किस भी की.

फिर हम फ्रेश होने चले गए.

कहानी आगे जारी रहेगी.

 
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पहला अध्याय

खाला को चोदा

भाग 1



मेरे नाम आमिर है. मैं हैदराबाद का रहने वाला हूँ, मेरी उम्र 21 साल है. मैं अपने अम्मी अब्बा की इकलौती संतान हूँ. मैंने विदेश से पढ़ाई की है और पढ़ाई पूरी कर कुछ दिन पहले ही घर वापिस आया हूँ.

कुछ दिन पहले सब लोग एक शादी में दिल्ली गए हुए थे. वहां पर मेरे अम्मी के चाचा के बेटी यानि मेरी खाला नूरी भी आयी हुई थी. अम्मा ने मुझे उनसे मिलवाया. नूरी खाला बहुत सुन्दर हैं, एकदम गोरा रंग, गोल चेहरा बड़ी बड़ी काली आँखें सुन्दर तीखे नैन नक्श मीठी आवाज ... खाला बहुत हंसमुख हैं.




मुझे पता चला कि खाला शादी के कुछ ही साल बाद ही जवानी में ही बेवा हो गयी थी. मेरी खाला से अच्छी बन गयी और बातचीत में पता चला कि खाला की चार बेटियाँ हैं और उनमें से एक की शादी हो चुकी है.




जब सगाई हो रही थी तो खाला मेरे साथ ही बैठी थी. शादी के दौरान खाला ने मेरे साथ खूब अपनी सेल्फ़ियाँ ली और मुझसे पूछा कि मेरी कितनी गर्लफ्रेंड हैं.

मैंने बताया- अभी तीन साल बाद विदेश से घर वापिस आया हूँ, कोई गर्लफ्रेंड नहीं है.

तो खाला ने पूछा- विदेश में कितनी गर्लफ्रेंड थी?

मैंने कहा- बहुत सारी.

तो खाला ने मुस्कुरा के पूछा- फिर तो बहुत मजे किये होंगे?

इससे पहले मैं जवाब देता, खाला का फ़ोन आ गया और खाला उठ कर चली गयी.

उसके बाद खाला मेरी अम्मी से मिली और फिर कहीं नज़र नहीं आयी. मैंने पता किया तो पता चला किसी कारण से खाला को इमरजेंसी में वापिस अपने घर कश्मीर अर्जेंट जाना पड़ा है इसीलिए वे चली गयी.





मैं सगाई में बोर होता रहा क्योंकि मेरे वहां कोई परिचित या दोस्त नहीं थे.

सगाई हो गयी तो अम्मी अब्बू ने बुलाया और कहा- बेटा आमिर, नूरी खाला से तो तुम मिल ही चुके हो, एक जरूरी काम से तुम्हें नूरी खाला के पास कश्मीर जाना होगा, उनका बहुत जरूरी काम है हम शादी बीच में छोड़ कर जा नहीं सकते और वहाँ जो खाला कहें, वह हमारा हुक्म मान कर पूरा करना.

मैंने सर झुका कर आदाब बजाया और अगली फ्लाइट से कश्मीर श्रीनगर निकल गया.

कश्मीर मैंने देखा भी नहीं था और नूरी खाला का साथ मुझे अच्छा लगा था.




वहाँ जाकर जो कुछ मालूम हुआ, उससे मेरे कान सुर्ख हो गए, मेरी 1 कजिन जिसका नाम सारा था और उम्र लगभग १९ साल थी की शादी हमारे कजिन इमरान से हुई थी और उनका आपस में बहुत प्यार मोहब्बत था, पता नहीं क्या हुआ कि उसने ग़ुस्से में आकर मेरी कजिन सिस्टर को तलाक़ दे दिया और इसी कारण से वह शादी में भी नहीं आयी थी.

इस तलाक देने के बाद मेरे कजिन को बहुत पछतावा हुआ और इमरान ने दोबारा सारा से शादी करने की ख्वाहिश की, मौलवी साहेब बोले- शरीयत के रूल से सारा को हलाला से गुजरना होगा और कम से कम एक रात के लिए किसी और की बीवी बनना पड़ेगा, तब ही इन दोनों की शादी हो सकती है.

नूरी खाला ने मुझे बताया कि वो एक रात की शादी मुझको सारा से करनी होगी. जब मुझे यह बात मालूम हुई तो मैंने मन ही मन कहा- चलो एक रात की ही बात है, मज़े कर लो आमिर साहब!
मैंने हामी भर ली और कहा- खाला, आपकी बेटी का घर बस जाए, मुझे उससे ज्यादा कुछ नहीं चाहिए.

नूरी खाला बहुत खुश हुई और मुझे गले लगा कर प्यार किया और बोली- बेटा, कभी कुछ भी चाहिए हो तो बेझिझक मांग लेना.

अगले दिन निकाह होने की बात तय हो गयी. खाला का घर काफी बड़ा था, मुझे रात में अलग कमरा सोने के लिए दिया और मैं सोने के तैयारी करने लगा.

कुछ देर बाद मेरा मोबाइल बजा और खाला का फ़ोन था, उन्होंने कहा- सो गए थे क्या?

तो मैंने कहा- सोने की तैयारी कर रहा था.

खाला बोली- तुम मेरे कमरे में आओ! और फ़ोन कट गया.

मैं खाला के कमरे में गया तो देखा कि मोहतरमा लाल कपड़ों में दुल्हन बन घूंघट ओढ़े मेरा बिस्तर पर इंतजार कर रही थी. फिर मैं उनके पास गया और पूछा- खाला, ये सब क्या है?




खाला बोली- आमिर, आज तुम्हारा इम्तेहान है. तुम्हें सारा से सिर्फ शादी ही नहीं करनी, उसके साथ सोना भी है और शौहर बीवी की तरह चोदना भी है. मैं पक्का करना चाहती हूँ कि तुम उसे चोद पाओगे या नहीं.

मैंने कहा- आपको ऐसा क्यों लगता है?

तो खाला ने सारा की पूरी कहानी बताई, खाला बोली- इमरान मेरे भाई का बेटा है, उसी ने जिद कर के सारा से शादी की थी लेकिन शादी के बाद पता चला उसका लंड बहुत छोटा था और वह सारा को चोद ही नहीं पाता था. इसी कारण दोनों में झगड़ा हुआ और इमरान ने गुस्से में सारा को तलाक दे दिया. अब मैं चाहती हूँ हलाला के जरिये ही सही, कम से कम एक बार तो सारा को चुदाई का पूरा सुख मुझ से मिल जाए.

अब वे यह देखना चाहती थी मेरा लंड कितना बड़ा है और क्या मैं ठीक से चोद पाता हूँ या नहीं! इसीलिए उन्होंने ये सारा इंतज़ाम किया था.

फिर नूरी खाला बोली- आमिर, मेरे साथ आराम से करना क्योंकि मैं भी कुंवारी हूँ!

मैं फिर चौंका- ये कैसे?

तो खाला बोली- मेरी चारों बेटियाँ मेरी बड़ी आपा की औलाद हैं. बिमारी से आपा के इन्तकाल के बाद तुम्हारे खालू भी बीमार रहने लगे तो बच्चों की देखभाल के लिए मेरा निकाह आपा के शौहर से कर दिया गया. और बिमारी के कारण सुहागरात भी नहीं मनी और निकाह के कुछ दिन बाद ही वे चल बसे और तुम्हारी ये नूरी खाला शादी कर के भी कुंवारी रह गयी. आज इसी बहाने तुम्हारी खाला की हसरतें भी पूरी हो जाएंगी.

तो मैं खाला को गले लगा कर बोला- खाला, मुझसे एक बार चुदने के बाद मुझसे चुदे बिना रह नहीं पाओगी.




खाला ने लाल लहंगा, चोली चुनरी और ढेर सारे गहने पहने हुए थे और साथ में गजरा और फूलों से शृंगार किये हुए स्वर्ग से आयी हुई अप्सरा लग रही थी. मेरा तो लंड उसे देख कर बेकाबू हो गया और मेरी हालत काम रोग से ग्रस्त हो गयी.

खाला बिस्तर के पास शर्मायी हुई अपने पैरों की तरफ देख रही थी. उसने हल्का सा घूंघट किया हुआ था. उसका चेहरा शर्म और आगे जो होने वाला था, सोच कर लाल हो रहा था, वह थोड़ी सी घबराई हुई थी.
मैं थोड़ा सा आगे होकर और उनका हाथ अपने हाथ में ले लिया और उनको बेड पर ले गया.

या खुदा!! उनका नर्म गर्म हाथ पकड़ते ही मेरे तनबदन की आग और भड़क गयी और मेरा लंड सनसनाता हुआ पूरा 8 इंची बड़ा हो गया और सलामी देने लगा.

मैंने नूरी खाला की तारीफ करना शुरू कर दिया. मैंने कहा- खाला, बहुत सुन्दर हो आप, आप मेरे सपनों की रानी हो, जबसे आपको देखा है, तब से आपसे बहुत प्यार करता हूँ मैं और आपको पाना चाहता था. आज अल्लाह के करम से आप मेरी हो गयी हैं.




वह और भी शर्माने लगी और मेरे बहुत कहने पर मीठी आवाज़ में बोली- मैं भी आप को प्यार करती हूँ.

दूध जैसी गोरी चिट्टी लाल गुलाबी होंठ नाज़ुक होटों के नीचे काला तिल! नाक पर बड़ी नथ, मांग में टिका बालों में गजरा, उनका चेहरा नीचे को झुका हुआ था इतनी सुन्दर दुल्हन देख मेरे मुँह से निकला वाह!! तुम तो क़यामत हो मेरी जान!

मेरा लंड फुफकारने लगा. मैंने धीरे से उनके चेहरे को ऊपर किया, नूरी खाला की आँखें बंद थी. इतनी सुन्दर नूरी खाला मुझे अता फरमाने के लिए मैंने अल्लाह का शुक्रिया अदा किया और बोला- मेरी जान, अपनी आँखें खोलो और मुझे देखो!

उन्होंने आँखें खोली और हल्की से मुस्करायी मैंने उनके ओंठों पर एक नर्म सा चुम्बन ले लिया. यह उनका पहला चुम्बन था, वह फिर शर्मा कर सिमट कर मुझ से लिपट गयी.

मैंने खाला को अपने गले लगाया और पीठ पर हाथ फिराया, उनकी पीठ बहुत चिकनी थी, मैंने पूछा- क्या आपको मालूम है सुहागरात में क्या करते हैं?

उन्होंने अपना सर हाँ में हिलाया और मुझसे और कस का लिपट गयी.




मेरे हाथ ने महसूस किया उन्होंने बैकलेस चोली पहनी हुई थी जो सिर्फ दो डोरियों से बंधी हुई थी और ब्रा नहीं पहनी हुई थी फिर मेरे फिसल हाथ की कमर तक पहुँच गए थे ... क्या चिकनी नरम और नाजुक कमर थी.
मेरे हाथ फिसल कर उनकी गांड पर पहुँच गए थे. उन्होंने लहंगा अपनी नाभि की नीचे और चूत के ऊपर पहना हुआ था. उनकी गांड की दरार को मैंने महसूस किया. 'आअह्ह्ह...' उनकी सिसकी निकल गयी.

मैंने फिर पूछा- खाला, क्या आप तैयार हो?

उन्होंने हाँ में सर हिलाया और धीरे से बोली- इस रात का इंतज़ार तो हर लड़की करती है.

मेरे सपनों की रानी मेरे साथ थी दुल्हन बन मेरे से चुदने को तैयार!

मैंने फिर से कहा- आप सबसे सुन्दर, गोरी मस्त माल हो. आपको देखकर मैं तो दीवाना हो गया हूँ!

मैंने हल्की सी आवाज में बोला- आई लव यू खाला! आपको मालूम नहीं है मेरी क्या हालत है. मेरे मन आपको देखते ही बेकाबू हो जाता है, तुम तो मेरे दिल की मलिका हो!

मैं आगे बोला- आपके गुलाबी नर्म गुलाब के पंखुरियों जैसे होठों का रस चूसना शुरू करे तो रूकने का नाम ही न ले। मैंने आज तक तुम जैसी सेक्सी लड़की नहीं देखी!

मैंने फिर उनको अपने से हल्का सा दूर किया, हाथों से उनका चेहरा ऊपर किया और होंठों पर एक लम्बी किस की. उनकी आँखें बंद थी, मैंने उनके होंठों को छोड़ कर चेहरा ऊपर किया तो खाला ने आँखें खोली और मुस्करायी.



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मैं फिर मैं उनके ओंठों को चूमने लगा और वह भी मेरा साथ देने लगी. फिर मैंने अपनी जीभ उनके मुँह में डाल दी और वह मेरी जीभ को चूसने लगी. फिर मैंने भी उनकी जीभ को चूसा. मेरी जीभ जब उनकी जीभ से मिली तो उनका शरीर सिहरने लगा.

फिर मैंने अपने होंठ उनके ओंठों से अलग किये हम दोनों मुस्कराये और फिर बेकरारी से लिप किस करने लगे और चूमते चूमते हमारे मुंह खुले हुये थे जिसके कारण हम दोनों की जीभ आपस में टकरा रही थी और हमारे मुंह में एक दूसरे का स्वाद घुल रहा था।

कम से कम 15 मिनट तक लिप किस करता रहा, वह मेरा लिप किस में भरपूर साथ दे रही थी. खाला को दर्द हो रहा था मगर खाला मुझ से भी ज्यादा प्यासी थी, उने दर्द में भी मज़ा आ रहा था।

हम लोग एक दूसरे को किस करने लगे थे. मैंने खाला की पीठ, कमर पर अपनी उंगलियाँ फेरनी शुरू कर दी थीं. मेरे हाथ उनके कन्धों पर थे और वह मुझको अपनी ओर खींच रही थी और उसी बीच मेरे हाथ उनके चोली पर से होते हुए खाला की पीठ कमर पर होते हुए उनके स्तनों पर पहुँच गये. मेरा हाथ चोली के ऊपर से स्तनों को दबा रहा था. खाला की आँखें पूरी तरह से बंद थी. वह मेरे हर प्रयास को अनुभव कर रही थी और उसका पूरा मजा ले रही थी.





फिर मैंने धीरे से उन्हें अपनी बांहों में लिया और उनके ओंठों पर चूमना जारी रखा. अब नूरी खाला सिहरकर मुझसे लिपट गयी थी और उनकी 38 साईज की चूचियां मेरे सीने से दब गयी थी. मैंने उत्तेजना में उन्हें जकड़कर अपनी बांहों में मसल डाला.

तो नूरी खाला ने कहा- आमिर, मेरे दूल्हे, धीरे करो, बहुत दर्द होता है.

कहानी जारी रहेगी.
 
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Mass

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Bhai, 2 stories kyun mix kar rahe ho??

मजे - लूट लो जितने मिले & मेरा निकाह मेरी कजिन के साथ

dono alag stories hai...dono ko milaao mat..

deeppreeti
 
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