मेरे निकाह मेरी कजिन के साथ
खानदानी निकाह
अपडेट 184
उद्घाटन समारोह हुआ भी और नहीं भी
क्या अदा थी उस कमसिन कली की, चूत भी दिखा रही थी और शरमा भी रही थी।हाय रब्बाऽऽऽ!
मैं तर्क में सम्मोहित हुआ फ़ैली हुई गोरी चिट्टी रफिया की बला सी खूबसूरत लबालब रस से भरी नन्ही सी सुडौल आमन्त्रण देती फुद्दी और रबड़ बैंड सी कसी गुलाबी गाण्ड का आँखों ही आँखों में चोदने लगा।
रोमविहीन चिकनी और प्यारी फुद्दी के रक्तिम चीरे से रफिया का कंपकपाता छोटा सा कागजी बादाम सा दाना मुझे ललचाता हुए ललकार दे रहा था। मुझे लगा कि मैं अब बिना हाथ लगाये ही झड़ जाऊंगा ऐसा कामुक दृश्य देख कर मेरे बिफरे हुआ लण्ड ने पानी के कई टुपके छोड़ दिये। ओहऽऽ रफ़ि ! यू आर सो ब्यूटीफ़ुल!
heads or tails toss
जैसे ही मेरा हाथ शरारत करने के लिये आगे आया, रफिया ने झटपट फुद्दी और गाण्ड को वापिस अपनी टांगो में भींच ली और बोली। नो नो भाई ! दिस ईज़ नाट अलाउड। अब आप अपना तोता ‘दिखाओ, नहीं तो ये गेम यहीं खत्म!’ रफिया मुझे प्यार से धमकाती हुई बोली।
‘ओके ओके, तुम खुद ही देख लो और जो जी में आये कर लो!’ मैंने बात बिगड़ने के डर से सबर से काम लेना ठीक समझा।
‘ओह भाई आई लव यू एन्ड यू आर सो क्यूट!’ रफिया मेरी बात सुन कर खुशी के मारे चिल्ला सी पड़ी और मेरी गाल पे पटाक से एक चुम्मा ठोक दिया।
रफिया घुटने मोड़े मेरे आगे कारपेट पर बैठ गई और चरर्ऽऽऽऽ की अवाज़ से हसीन रफिया ने कांपते नाजुक हाथों से मेरी पैंट की जिप खींच दी। मेरा कच्छा नीचे खिचंते ही मेरा आठ इंच लंबा लण्ड फटाक से रफिया के मुँह पर लगा तो रफिया की डर के मारे चीख निकल गई। ऊईऽऽऽऽमांऽऽऽ! ईत्ता बड़ा? हाय रब्बाऽऽऽ मैं मर जाऊँऽऽऽ!’
खुली हवा में आठ इन्च लण्ड झटकों के साथ ऊपर उठता चला गया और बुरी तरह से लोहे सा टना टन छत की तरफ अकड़ गया। मोटे लण्ड का गीली गीली जामुनी गुलाबी टोपी के ऊपर खूब बड़ा सुराख था। खून की तेज़ी से मजबूत लन की नसें फूल गई और लन हवा में ही झटके खाने लगा। लण्ड के नीचे खूब बड़े। बड़े सांवले सलौने ट्टटों की रेशमी थैलियाँ।
रफिया के जीवन का आज सबसे महत्वपूर्ण दिन था। अंगूठे चूसने की उमर में रफिया को शानदार और जानदार लण्ड चूसने को मिल गया था। सम्मोहित सी रफिया ने झटके खाते लण्ड को लपक के अपने छोटे छोटे मखमली हाथों में लेकर लौड़े की ऊपरी चमड़ी को नीचे सरका दी, तो मेरी सिसकारी ही निकल गई। सख्त और सुलगते लौड़े के सुपाड़े से निकली सुगंधित हवा का झोंका रफिया के नथुनों में घुस कर रफिया का दिल बाग बाग कर गया। रफिया के फूल से नादान हाथों की गरमी और नरमी पा कर मैं को लण्ड ने कम्पकपा कर झरझरा कर थोड़ा सा पानी छोड़ दिया।
मदहोशी में मेरी आँखें बंद सी हो गई। रफिया ने लन पर अपनी छोटी सी मुट्ठी कस कर ऊपर नीचे करने लगी। अब रफिया की मंजिल करीब थी, लण्ड की खूबसूरती के आगे अब रफिया मैं को भूल चुकी थी। रफिया अपने होंटों पर भूखी बिल्ली की तरह जीभ फेर रही थी और रफिया की हल्की भूरी आँखों में बला की चमक थी।
तभी रफिया ने अचानक झटके से मेरे लण्ड की टोपी पर अपने लाल लाल रसीले होंट चिपका दिये और मेरी आँखों में आँखें डाल कर चुसड़ चुसड़ कर लॉलीपॉप की तरह चुस्सा मारने लगी। रफिया ने अपना छोटा सा मुँह पूरा खोल कर मेरा लण्ड अपने गले तक अंदर ले लिया तो मेरे मजे की सीमा न रही और मैं चीख पड़ा।
मेरी चीख सुन कर उत्तेजित रफिया ने लण्ड पर अपना मुँह आगे पीछे करने लगी, तो मैं ने घस्से मार मार का रफिया के सुन्दर मुख को चोदना शुरू कर दिया। मैं ने लण्ड को रफिया के गले तक ठोक दिया। रफिया की जीभ रह रह कर मैं को लण्ड पे वार पे वार कर रही थी। कभी कभी रफिया नीचे से ऊपर तक मेरे औजार को प्यार से दाँतों से रगड़ देती। अब रफिया खुलकर और बुन्ड तक जोर लगा कर मेरा लण्ड चुसड़ चुसड़ करके चूसने लगी। रफिया ने अपनी जीभ से लण्ड की गरारी को छेड़ कर पूरे जोर से चुस्सा मारा तो लण्ड ने भरभरा कर सारा रस रफिया के मुँह में छोड़ दिया। प्यासी रफिया लण्ड की झड़न का कतरा कतरा पीने में मस्त हो गई।
हाँफते और करहाते हुए बड़ी ही मुश्किल से ज़बरदस्ती जोर लगा कर मैं ने रफिया के मुँह से अपना लण्ड को झटके से ‘प्लापऽऽ!’ की ऊँची आवाज़ के साथ बाहर खींचा। ऐसा लगा की जैसे शैम्पेन की बोतल से कार्क हटाने से आवाज आई हो। लण्ड का सुपाड़ रफिया के मुखचोदन से गुलाबी से जामुनी हो गया और रह रह कर झटके खा रहा था। दम तोड़ते लण्ड ने आखिरी दो पिचकारियाँ रफिया के सुन्दर सलोने चेहरे पर पड़ी। वासना से अन्धी हुई रफिया हाँफती सी अपनी सांप सी लम्बी और गुलाबी जबान को बाहर निकाल कर सड़प सड़प की आवाज़ से मेरे लण्ड की सफेद मलाई को भूखी बिल्ली की तरह चाट गई।
मेरे लण्ड के कस बल निकाल रफिया की आँखों में अज़ीब सी सन्तुष्टि थी। पर रफिया की चूत की हालत बद से बदतर हो गई थी।
रफिया की जाघें घुटनों तक तरबतर थी और पनीयाई हुई चूत से पानी अब बह सा रहा था। रफिया अपना सिर पकड़ कर कारपेट पर ढेर होती बोली। हायऽऽऽ भाई ! अब मैं क्या करूँ?
रफिया अपने चुच्चे मसलती और चूत को रगड़ती और कसमसाने लगी।
रफिया वासना में, खुमार में अपनी कंदली जांघें रगड़ती सिसकती सी बोली। सीऽऽऽऽ भाई ! ऐसे तो मैं पागल हो जाऊँगी!
हाँफने से रफिया की नंगी लौहार की धौंकनी सी फैलती सुकड़ती छातियाँ छत को छूने को बेताब लग रही थी। याकूत से सुर्ख लाल निप्पल अकड़ कर एक एक इंच लम्बे हो चुके थे। रफिया ने अपने घुटनों को ऊपर उठ कर बेशर्मी से चौड़ा किया तो गजब की खूबसूरत चूत और चूत की पड़ौसन ने सारे कमरे में जैसे रौशनी सी फैला दी। चूत एकदम सफाचट, जुगनू सी जगमग करती चिकनी चूत पर रौयों का नामोनिशान न था। भला खेलने के मैदान में घास का क्या काम।
मैं ने रफिया की दहकती और जलती जवानी को खींच कर अपने आगोश में ले लिया, गोदी में बैठाने से पहले ही समझदार रफिया ने खुद ही अपना स्कर्ट ऊपर उठा कर अपनी नंगे रेशमी अंगों से मेरा लण्ड मसल सा डाला। रफिया ने अपनी गोरे बाजू मेरे गले में डाल कर सीऽऽऽ सीऽऽऽ करती जोर जोर से अपना जलता और गीला यौवन रगड़ कर मेरे लण्ड खडा करने लगी|
मैं ने धधकती सुलगती जवानी को बाहो में ले कर ताबड़तोड़ पटाक पटाक से चुम्बन रफिया के गुलाबी गालों पर जड़ दिये। रफिया ने भी मैं पर जवाबी चुम्मियों की बौछार सी कर दी। रफिया को अपनी गाल चुसवा कर बहुत ही मजा आ रहा था। पुच्च पुच की लम्बी लम्बी गीली गीली आवाजों से और गीली फुद्दी की रगड़ से लण्ड का ठरक बुलंदियों पर पहुंच गया। निहाल और बलिहारी हुई रफिया अब मुझे अगं प्रत्यंग पर गीली मुहरें ठुकवा रही थी।
मैं अब रफिया के नीचे वाले होंट को चूसने और काटने लगा तो रफिया ने अपनी गुलाबी जुबान बाहर निकाल दी। मैं भी झट से रफिया की जुबान को अपने मुँह में सटक कर बुरी तरह चूसने लगा, बीच बीच में रफिया भी मेरी ज़बान को अपने मुँह में खींच कर जवाब दे देती, तो कभी कभी दोनों की जुबानें मिल कर डांस सा करने लगती।
रफिया बुरी तरह मेरी जुबान को बहुत बुरी तरह वहशी होकर चूस रही थी। एक बार मैं को लगा कि अगर उसने जुबान को ढीला छोड़ा तो शायद रफिया मेरी जुबान को पी ही ना जाये।
रफिया की मलाई सी गुदगुदी गाण्ड और गीली भाम्प छोड़ती चूत की घिसन से मेरा लण्ड फिर से तुनके लगा कर खड़ा होने लगा। रफिया मेरा सरसराते लण्ड अपनी रेशमी मुलायम जांघों में दबोच कर मसलने और पीसने लगी तो मैं हाय हाय कर उठा।
बावली रफिया पटाक की अवाज़ से चुम्बन तोड़ती और हाँफते हुई मेरे कान में फुसफुसाती बोली। भाई आपको छोटी। छोटी स्कूल गर्ल्स से ऐसी बाते करते शर्म नहीं आती?
‘रफि बेबी अब तुम जवान और समझदार हो गई हो!’ मैं रफिया के नंगे मम्मों पर चुम्बन ठोकता और स्कर्ट के नीचे हाथ आगे बढ़ाता बोला।
रफिया मेरे आगे अपने मम्मे नचाती और सताती सी बोली। पर भाई , मैं तो आपकी छोटी बहन जैसी हूँ।
‘अच्छा, तो मैं यह सब नहीं करता!’ यह कह मैं ने अपना हाथ वापिस खींच लिया तो रफिया झट से ठुनक कर झूठे गुस्से से बोली। अरेऽऽऽ मैंने ऐसा तो नहीं कहा था।
अब तो मैं ने अपनी हथेली रज़ामंद रफिया की पानी पानी हुई चूत से चिपका दी और ऊपर से रफिया का एक चुच्चे की टौंटी को होंठों में ले जोर से पीने लगा। अब तो रफिया अपने आप को भूल चुकी थी रफिया ने अपना पूरा का पूरा मम्मा मेरे मुँह में ठोक दिया। रफिया का सारा बदन कमान की तरह अकड़ गया और झनझना उठा।
अनजाने में ही चुदास मस्ती में आई रफिया के मुँह से निकल गया। ऊफऽऽऽ बाबा रेऽऽऽऽ! बाबा भाई ऽऽऽ! आप तो बड़े बहनचोद निकले। बहनचोद भाई अगली बार मैं राखी तेरे पप्पू पर ही बांधूगी। फिर मेरी उंगली नीचे सरकती हुई रफिया की फूल सी तूफानी जवानी की नरमी, गरमी और गहराई भांपने लगी।
रफिया ने पूरी उंगली गपकने के लिये अपनी चूत को ढीला दिया और कमर को आगे और ऊपर को उछालने लगी। उंगली जड़ तक अन्दर लेने को बाद रफिया ने अपनी कसी चूत की मखमली फांकों से भींच कर टाँगों को बंद करके मेरे हाथ को जैसे हमेशा के लिये कैद कर लिया। जब मैं ने रफिया के जी स्पॉट को गुदगुदाया तो स्वाद से रफिया का पौर पौर पिनपिना उठा। रफिया जोर से सिसकारा मार मेरी उंगली को अपनी जानदार फांकों में भींचती। खोलती और चूतड़ों पर मेरे डण्डे से लण्ड की सख्ती का मजा लेती बोली। सीऽऽऽ भाई , उफ! आप बहुत ज़ालिम हो, सीऽऽऽ हाय हाय भाई , मैं तो ऐसे मर जाऊँगीऽऽऽ सीऽऽऽ कुछ करिये नाऽऽऽ!
मजे की ज्यादती से रफिया बड़ी अदा से अपने नीचे वाले होंट के कोने को दांतों में दबा दोनों हाथों को ढीला कर जोर जोर से झटकने लगी।
मैं वासना के ज्वालामुखी में धधकती रफिया की हालत ताड़ गया, अब मैं खुद भी रफिया को छोड़ने वाली हालत में नहीं था। रफिया को घुमा कर रफिया की पीठ अपनी तरफ करके रफिया के शर्ट से बाहर आये आज़ाद चूचों में अपनी अंगुलियाँ धंसा दी और पौं पौं करने लगा। इस हालत में तो यह चिकनी चिड़िया की गाण्ड तो दे ही देगी, ये सोच मैं ने रीट की गाण्ड को ऊपर उठा कर चूतड़ों को दाँतों से कौंचने लगा। मेरी दंदियाँ तो उलटी हुई रफिया पे कहर बन कर गिरीं। साथ में ही मैं ने रफिया की गाण्ड को अपनी जबान से गुदगुदा कर ठेर सारा थूक से गीला कर दिया और अपने लण्ड का गरम सुपाड़ा रफिया की चूत के पानी से तर गाण्ड पर टिका दिया तो नादान रफिया सिहर कर अपनी कुंवारी गाण्ड को जोर से भींच कर लौड़ का रास्ता रोक बोली। भाई , मैं तो बहुत छोटी हूँ!
मैं रफिया की गाण्ड के सुराख पर दबाव बढ़ाता हुआ बोला। चिन्त्ता मत करो रफि बेबी, इस हालत में तुम्हारी शदाई चूत या गाण्ड किसी गधे का लण्ड सटक सकती है और फिर थूक से मैंने तुम्हारी एकदम गीली कर दी है।
रफिया पीछे मुड़ कर मेरी तरफ देखती मासूमीयत से बोली। पर भाई कहीं मेरी फट गई तो?
वैसे तो इस समय मैं उसकी चूत की पहली चुदाई करने के लिए और रफिया भी अपनी पहली चुदाई के लिए त्यार थी पर ये सोच कर की उसका कौमार्य उसकी बहनो और फूफी के सामने लेना ही ठीक रहेगा मैंने अपने निशाना साध लिया, मैं बोला। बेबी, बहुत प्यार से मारूँगा और फिर मैं तो कुछ कर भी नहीं रहा। जो भी करना हे वो तुम्हीं को करना है।
मेरी झूठी तसल्ली से रफिया ने अपनी गाण्ड को आहिस्ता आहिस्ता ढीला छोड़ दिया। रफिया की चूत थूक और मेरी अपनी लेस से लिबड़े लण्ड की टोपी ‘पक्क’ की आवाज़ से रफिया की गाण्ड में घुस गया।
‘आईऽऽऽऽऽ’ हल्की सी मीठी दर्द की लहर और मजे से रफिया चीख सी उठी और गाण्ड को दुबारा से भींच लिया। इतनी छोटी, टाईट और बच्ची गाण्ड में मेरा लण्ड पिनपिना उठा।
परन्तु तुरन्त ही रफिया ने चुदास मस्ती में अपनी गाण्ड को ढीला छोड़ अपने दांत भींच कर मेरे लोह। लण्ड पर बैठती सी चली गई। मेरा दहकता सरिये सा लौडा़ रफिया की बेहद कसी गाण्ड की मखमली दीवारों को रगड़ता शनै शनै अन्दर घुसता चला गया। गाण्ड के रेशमी चंगुल में फंसा लौड़ा हिनहिना कर बिफर उठा। बार बार रफिया मेरे लौडे को अपनी गाण्ड को भींच कर चूस सा देती थी तो मैं को अपनी नानी याद आ जाती थी।
जैसे तैसे खुद रफिया ने लगभग तीन चौथाई लौड़े को अपनी गाण्ड में सटक ही लिया और हाँफती बोली। आहऽऽऽ! बस भाई , और नहीं ले सकती मैं। आपका तो बहुत ही मोटा और लम्बा है।
रफिया पीछे मुड़ कर मेरी तरफ देखती बोली, तो शैतान मैं मौका देख रफिया के होंटो अपने होंटो में प्यार से दबा कर चूसने लगा और साथ ही रफिया की पतली कमर पकड़ कर नीचे दबा कर और नीचे से लगातार एक के बाद एक तीन जबरदस्त धक्के लगा कर रफिया की गाण्ड में पूरा का पूरा मुगदर सा लण्ड पेल दिया। मेरी मजबूत बांहों में रफिया किसी घायल चिड़िया सी फड़फडा़ के रह गई। बेचारी बेबस बिलबिलाती रफिया की चीख चुम्बन में ही घुट के रह गई। पीड़ा से नन्ही रफिया की आँखों में मोटे मोटे आंसू गुलाबी गालों पर लुढ़कते चले गये।
मेरे लण्ड पर रफिया की गाण्ड टाईट रबडबैंड की तरह चढ़ी हुई थी। रफिया करहाती और रोती हुई बोली। आहऽऽ ईऽऽऽऽ! मेरी फट गई! आहऽऽऽऽ! मुझे नहीं करवाना यह सब! भाई छोड़ दो मुझे!
गिड़गिड़ाती रोती रफिया ने दर्द की वजह से अपने दोनों होटों को दाँतों में दबा कर चीखों को रोकने की असफल कोशिश कर रही थी।
परन्तु ठरक से अन्धा मैं अड़ियल सांड की तरह काबू में आई हुई नई कबूतरी रफिया को बालों से पकड़ रफिया का मुँह कारपेट पर लगा दिया तो रफिया की गाण्ड अब छत की तरफ उठ गई और मैं ने चीखती चिल्लाती रफिया के अन्दर अपने लण्ड को थौड़ा सा बाहर खींच कर दुबारा पूरा का पूरा ठोक दिया।
रफिया की स्कर्ट अब उलट चुकी थी और उसकी कसमसाती गोरी गोरी मखमली गाण्ड बाहर झाँक रही थी। स्कूल ड्रैस और कुतिया स्टाईल में रफिया और भी सैक्सी लगने लगी थी। मैं बेरहमी से शैतान लौंडिया की गाण्ड मारने लगा। रफिया गाण्ड को टाईट कर मेरे लण्ड को रोकने की असफल कोशिश करने लगी तो मैं तैश में आकर रफिया के उचके हुऐ चूतड़ों पर खींच कर पूरे जोर से पाँच छ: थप्पड़ जमाते हुए बोला। साली, फाड़ के रख दूंगा अगर अपनी गाण्ड को टाईट किया तो!
मेरे हाथ रफिया की मलाई सी गोरी गाण्ड पर छपते चले गये साथ में मैं ने ढेर सारा थूक रफिया गाण्ड पर थूक दिया। जल्दी ही मेरा आगे पीछे होता मस्त थूक से सना लण्ड रफिया को मस्ती देने लगा।
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आखिर मुकाबला करने को तैयार रफिया ने दाँत भींच कर जैसे तैसे मेज का पाया पकड़ और पोजीशन सम्भाल कर अपनी शानदार गाण्ड और ऊपर उठा दिया। मेरे ठप्पों की वजह से मेज और सौफे की चरर्ऽऽऽ चरर्ऽऽऽ की चरमराहट होने लगी। अब नन्ही रफिया भी अपनी गाण्ड की लौड़े की ताल से ताल मिलाने लगी। मैं भी अब रफिया की गाण्ड से पूरा का पूरा लण्ड खींच कर धक्के पर धक्के मारने लगा तो रफिया मजे के मारे चिल्ला उठी।
सुन्दर रफिया की उछलती सिल्की गाण्ड को देख मैं उत्तेजित हो निगोड़ी छोकरी की गाण्ड को और जोर से मारने लगा।
अब तक बदमाश रफिया ने मेरे शैतान लौड़े पर पूरी तरह काबू पा लिया था। रफिया लौड़े को अपनी गाण्ड में भींच भींच कर पीसने लगी। जब मैं धक्के मारता तो रफिया अपनी गाण्ड को बिल्कुल ठीला छोड़ कर गाण्ड पीछे ओर ऊपर उछाल देती और जब मैं लौड़े को बाहर खींचता तो रफिया अपनी टाईट गाण्ड को जोर से सुकोड़ कर लौड़े को भींच सा लेती। लण्ड व गाण्ड की लड़ाई की घचर पचर और रफिया की गाण्ड पर मेरे मन्ज़ी तोड़ घस्सों की धपाधप की आवाज ने रफिया के बचे खुचे होश उड़ा दिये। जंगली चुदाई से चूत डबडबा गई और सुराख से टप टप पानी बहने लगा। मेरा खम्बे सा लम्बा लौड़ा अपनी नन्ही सी गाण्ड में गपक कर रफिया का चूत मरवाने का आत्मविश्वास बुलंद हो गया था।
मैं ने पूरे आधे धण्टे तक मेज की चरमराहट को बनाये रखी। चुदास से पगलाई और मस्ताई हुई रफिया गाने लगी।
ऽऽऽऽ आऽऽऽऽआह भाई ऊईऽऽऽ
ऊँऽऽऽऽ... आऽऽऽ ऊँऽऽऽ
हवस में अन्धी रफिया अपने आप को भूल कर अश्लील हो गई और बकबक करने लगी। भाई , और जोर से धक्के मारिये! ईऽऽऽऽ आहऽऽऽ आह भाई ऊईऽऽऽ मांऽऽऽ! हायऽऽऽ रेऽऽऽ मैं चुद गई रे! मेरी मम्मीऽऽऽऽ सीऽऽऽ बडा मजा आ रहा है। भाई अच्छी तरह से चौदिये, फाड़ दीजिये मेरी निगोड़ी गाण्ड को ऊफऽऽ ईसऽऽऽ ईसऽऽऽ बहुत सताती है साली, मां की लौड़ी, आह मेरे गाण्डू भाई लूट लो मेरी जवानी, और जोर से, येस ओर जोर से वाहऽऽऽ फाड डालोऽऽऽ चौदू, चौद अपनी बहन की चूत कोऽऽऽ, कैरी आन डौन्ट स्टाप यू फकर बास्टर्ड!
रफिया जैसी मासूम स्कूल गर्ल के मुँह से शानदार गालियाँ सुन कर मेरा ठरक चरम सीमा तक पहुँच गया।
‘लेऽऽऽ माँ की लौड़ी, हाय मेरी जलेबी, हाय मेरी रसमलाई, ये ले भौंसड़ी की, चोद के रख दूंगा, फाड़ के रख दूंगा, साली रंडी कुतिया, तेरी चूत पर बहुत चर्बी चढ़ गई है, ले हरामजादी ले!’
मैं ने रफिया की गुदाज और गदराई हुई कमर में ऊँगलियाँ धंसा दी और लौंडिया उछल उछल कर जानलेवा चोदा मारने लगा। ज़ालिम मैं ने आखिरी कमरा हिला देने वाले आटोमिक धक्के रफिया सम्भाल ना पाई और दोनों चूदाई करते करते कारपेट पर ढेर हो गए।
roll a number between 1 and 20
गिरने से मेरे लण्ड रफिया की गाण्ड में जड़ तक धंस गया और दोनों ठरक की चरम सीमा पर पँहुच गये। मेरे लण्ड ने फव्वारे छोड़ने शुरू किए तो रफिया की चूत ने भी झरझरा कर बिना चुदे ही पानी छोड़ दिया। मजे से मैं ने रफिया को इस कदर बाहों में दबाया, तो रफिया को लगा कि उसके ऊपर से बुलड़ोज़र निकल गया हो और हड्डियाँ जैसे चरमरा सी उठी।
इस ताबड़तोड़ चुदाई से रफिया का रोम। रोम पुलकित हो गया और उसकी आँखों में खुशी के आँसू छलछला पड़े। रफिया कुतिया की तरह मेरे लण्ड को अपनी नन्ही सी गाण्ड को सुकोड़ कर लण्ड को निचोड़ने लगी। थोड़ी देर बाद मैं ने पटाक की आवाज से अपना लण्ड बाहर खींचा तो गुलाबी गाण्ड हुच हुच कर लौड़े का झाग वाला पानी उगलने लगी।
वासना का तूफान खत्म होने पर मेरे नीचे दबी हाँफती और अपनी गाण्ड सहलाती बोली। आहऽऽऽ भाई , आप तो बड़े ही कसाई निकले! उफऽऽऽ सारा बदन तोड़ मरोड के रख दिया! हायऽऽऽ कितनी जोरो के मारी है मेरी उफऽऽ!’
मैं रफिया की गाण्ड पर चटाक से चपत जमाते बोला।रफि बेबी, तुम भी तो ये उछल उछल कर मेरे लण्ड के परखच्चे उड़ने पर तुली हुई थी। चूसी और चुदी हुई रफिया बुरी तरह शरमा कर अपना चेहरा अपने हाथों में ढांप कर मेरी छाती में छिपने की कोशिश करने लगी।
जारी रहेगी