आज गणेश पुर का मेला है। मेला का उद्घाटन मुख्यमंत्री जी के हाथ से होना है। मेले के उद्घाटन कार्यक्रम में धरम पुर जिले के सभी सत्ता पक्ष के विधायको सांसद और अन्य नेताओं का पहुंचना, जरूरी था। चूंकि सामने चुनाव था, यह इस क्षेत्र का सबसे प्रसिद्ध मेला था, जिसमे दूर दूर से लोग आते है अतः नेताओ को अपने एवम पार्टी का प्रचार प्रसार का एक मौका था।
इधर मेले में गीता और ठाकुर बालेंद्र सिंह भी जाने वाले थे। ठाकुर साहब ने आई जी साहब से कड़ी सुरक्षा की मांग की थी। आई जी साहब ने पूरा आश्वासन दिया था।
इधर भूरा ने नेताओ के काफिले पर हमला करने की पूरी योजना बना ली थीं।
उसने गणेश पुर घाटी के उस जगह को हमले के लिए चुना था। जहा पर सड़क के दोनो ओर जंगल और थोड़ा कम ऊंचाई का पहाड़ था।
वह काफिले पर चारो ओर से हमला करने का योजना बनाया था।
अपनी योजना को इतना गुप्त रखा था की। पुलिस वालो के मुखबिरों तक को इसकी भनक नहीं हो पाई। साथ ही दूसरे गुट के नक्सलियों को भी इसकी कोई सूचना नहीं थी।
उद्घाटन कार्यक्रम दोपहर 2बजे आयोजित था।
गीता और ठाकुर दोनो जाने के लिए तैयारी कर रहे थे।
दिव्या ने राजेश को फ़ोन किया,,
राजेश ने फ़ोन उठाया।
दिव्या _राजेश, कैसे हो?
राजेश _मै ठीक हू दिव्या जी आप कैसी है?
दिव्या _मै भी ठीक हूं। वैसे अभी कर क्या रहे हो?
राजेश _ कुछ नहीं घर में हूं, थोड़ा पढ़ाई कर रहा था।
कुछ काम था क्या?
दिव्या _, तुम्हे तो पता ही होगा आज से गणेश पुर में तीन दिनों का मेला प्रारंभ हो रहा है।
राजेश _हां, भुवन भईया बता रहा था।
दिव्या _आज संडे है, तो मैं कह रही थीं क्यू न हम मेला देखने चलें।
मेरा बडा मन है देखने का।
राजेश _ठीक है दिव्या जी, दोस्त की मन का ख्याल तो रखना पड़ेगा ही।
कितना समय चलना है?
दिव्या _मै 10बजे स्वास्थ्य केंद्र जाऊंगी, वहा से हम गणेश पुर के लिए निकल जायेंगे।
तुम घर आ जाओ , हम यही से मेरे कार से निकलेंगे।
राजेश _ठीक है दिव्या जी।
राजेश तैयार होकर, हवेली पहुंचा।
जब राजेश हवेली पहुंचा,सभी नाश्ता कर रहे थे।
वह हाल में बैठ गया।
नौकरानी ने दिव्या को जाकर बताया कि, राजेश बाबू आया है।
ठाकुर _राजेश, वो क्यू आया है?
दिव्या _पिता जी मैंने उसे बुलाया था। आज संडे है तो मैं भी मेला देखने के लिए जाना चाहती हूं।
रत्नवती _बेटी, वो क्षेत्र सेफ नहीं है। तुम्हरा जाना ठीक नहीं है, तुम मत जाओ।
ठाकुर _दिव्या बेटी तुम्हारी मां ठीक कह रही है। तुम्हरा जाना उचित नहीं।
दिव्या _मां, मेरे साथ राजेश जा रहा है न, मेरा बडा मन है, मेरा बडा मन है मेला देखने का। प्लीज
ठाकुर _,, ठीक है, अगर चलना है तो तुम हमारे साथ चलो, हमारी सुरक्षा के लिए, जवान भी होंगे।
गीता _हा, दिव्या पिता जी ठीक कह रहे हैं, तुम हमारे साथ चलो।
दिव्या _दीदी, आप लोगो के साथ जाऊंगी तो मेला में घूम नही पाऊंगी।
मुझे मेला घूमना है।
मां प्लीज मुझे जाने दो न राजेश के साथ।
रत्नवती _अच्छा ठीक है कर लो अपनी इच्छा पूरी।
रत्नवती ने नौकरानी से राजेश को बुलाने कहा, ताकि वह भी नाश्ता कर सके।
नौकरानी ने राजेश से कहा,
नौकरानी _राजेश बाबू, रानी मां आपको बुला रही है।
राजेश अन्दर डायनिंग हाल में गया।
राजेश _नमस्ते, मां जी।
रत्नवती _नमस्ते, राजेश।
ठाकुर _नमस्ते, ठाकुर साहब।
ठाकुर ने कुछ नहीं कहा,,,
नमस्ते, गीता दीदी _नमस्ते राजेश आओ बैठो हमारे साथ लंच करो।
रत्नवती _हा बेटा, आओ बैठो। साथ में लंच करो।
राजेश चेयर पर बैठ गया।
दिव्या _राजेश लो न,
राजेश _दिव्या जी, मै घर से लंच करके आया हूं।
रत्नवती _अरे थोड़ा सा ले लो।
राजेश न चाहते हुए भी, थोड़ा सा लंच लिया।
इधर ठाकुर, लंच करके वहा से चला गया।
रत्नवती _बेटा, गणेश पुर क्षेत्र, नक्सलियों का गड़ है। मै तो दिव्या को जानें से मना कर रही थीं, पर वो जाने के लिए जिद कर रही है। तुम्हे उसकी सुरक्षा का ख्याल रखना होगा।
राजेश _मां जी, आप चिंता बिलकुल न करे। दिव्या जी की जवाबदारी मेरी है।
वैसे गीता दीदी, सुना है आप भी जा रही हो, मेले में,,,
गीता _हा राजेश, वैसे मुझे तो मेला पसंद नही है, उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री जी आ रहे है तो मुझे भी जाना होगा।
पिता जी और मैं साथ ही निकलेंगे।
सुरक्षा के लिए, कुछ जवान भी हमारे साथ रहेंगे।
राजेश _ओह, ये तो अच्छी बात है।
लंच करने के बाद,,,
दिव्या _राजेश, मै जल्दी आती हूं तैयार होकर, फिर निकलेंगे।
राजेश _ठीक है, दिव्या जी।
दिव्या अपने कमरे में चली गई।
राजेश _गीता दीदी, आप लोग कितना समय निकल रहे हो।
गीता _हम लोग 12बजे यहां से निकल जायेंगे, राजेश।
2बजे तक वहां हमे पहुंचना है।
कुछ देर में ही दिव्या तैयार होकर आई, वह सलवार सूट में बहुत ही खूबसूरत लग रही थी।
दिव्या _अच्छा राजेश, चलो चलते है।
दोनो हवेली से बाहर आए,
दिव्या _राजेश, तुम गाड़ी ड्राइव करोगे न की, ड्राइवर को लेकर चलें।
राजेश _दिव्या जी मै कार ड्राइव कर लूंगा।
राजेश और दिव्या कार से निकल गए।
दोनो पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र गए।
दिव्या ने वहा भर्ती हुवे पेसेन्ट का पहले हाल चाल जाना, नर्सों को आवश्यक दिशा निर्देश दिया।
फिर वहा से दोनो। ग्यारह बजे
गणेश पुर के लिए निकल गए।
रास्ते में घने जंगल, पहाड़ एवम घांटी पड़ा, प्रकृति के मनोरम दृश्य का आनद लेते हुए दोनो कब मेला स्थल पहुंचे, समय का पता ही नहीं चला।
करीब दो घंटे मेंवे दोनो मेला स्थल पहुंच गए।
मेला में लोगो की काफी भीड़ थी।
दिव्या _राजेश चलो पहले गणेश मंदिर चलते है वहा, भगवान गणेश जी का दर्शन करते हैं फिर मेला घूमेंगे।
राजेश _ठीक हैं दिव्या जी,,
मंदिर में दर्शन करने के लिए लोगो की कतार लगी थीं।
वे दोनो भी कतार में खड़े हो गए। करीब आधा घंटा के बाद वे उन्हें भगवान गणेश का दर्शन हुवे।
जब वे मंदिर से दर्शन कर निकले,,,
दिव्या _राजेश, तुमने भगवान से क्या मांगा?
राजेश,_इस क्षेत्र के लोगो की सुख शांति और तरक्की।
और आपने क्या मांगा?
दिव्या _मैंने मांगा, हम ऐसे ही दोस्त बनकर रहे कभी हमारा साथ न छूटे।
राजेश दिव्या की ओर देखने लगा,,,
राजेश _दिव्या जी ये आपने क्या मांग लिया।
दिव्या _, क्यू, कुछ गलत मांग लिया क्या?
राजेश _नही दिव्या जी बात ऐसी नही है, तुम्हारी शादी हो जायेगी, फिर तुम चले जावोगी, अपने पति के संग, फिर हमारा साथ कहा रहेगा।
दिव्या _ये सब तो मैंने सोचा ही नहीं,,,
मतलब मेरी प्रार्थना अधूरी रहेगी,,,
राजेश _आपको भगवान से ऐसी प्रार्थना नही करनी चाहिए थी, जो पूरी न हो सके।
आप एक काम करो! भगवान गणेश से क्षमा मांग कर, कोई दूसरा मुरादे मांग लो,,
दिव्या _, शायद तुम ठीक कह रहे हो, मुझे भगवान से क्षमा मांग कर दूसरी प्रार्थना करनी चाहिए।
दिव्या ने अपनी आंखे बंद कर ली।
जब उसने अपनी आंखे बंद की, और भगवान गणेश से फिर प्रार्थना की।
हे भगवान, राजेश और मेरी दोस्ती कभी न टूटे बस यहीं प्रार्थना है मेरी।
दिव्या ने अपनी आंखे खोली,,,
राजेश _अब आपने भगवान से क्या मांगा?
दिव्या _यही की हमारी दोस्ती हमेशा बनी रहें।
राजेश _हा, ये आपने भगवान से सही मांगा।
मैं आपसे वादा करता हूं, दिव्या जी, हमारी दोस्ती हमेशा बनी रहेगी। चाहे इसके लिए मुझे कितना बडा त्याग भले ही क्यूं न करना पड़े?
दिव्या _शुक्रिया, राजेश।
चलो अब मेला घूमते है।
दोनो मीना बाजार पहुंचे,,,
दिव्या _राजेश, चलो न आकाश झूला में बैठते हैं।
राजेश _न बाबा मुझे डर लगता है आकाश झूले से।
दिव्या, हसने लगी,,,
राजेश तुम्हे डर लगता है?
राजेश _हां, क्या मैं इंसान नही हूं।
दिव्या _, क्या तुम मेरे शौक पूरा करने साथ नही बैठ सकते।
राजेश _दिव्या जी कही ऐसा न हो की आपकी शौंक पूरा करने के चक्कर में मेरे प्राण निकल जाए।
दिव्या _ठीक है, मत बैठो, मै घर जा रही, मुझे नहीं घूमना है मेला।
राजेश _ओ हो, दिव्या जी, तुम भी न, कितनी जिद्दी हो,,, अच्छा चलो, तुम्हारे साथ,, झूले से गिर भी जायेंगे तो कोई डर नहीं,,,
दिव्या खुश हो गई,,,
दोनो झूले पर बैठे,,,
राजेश _दिव्या जी मुझे डर लग रहा है?
दिव्या _राजेश कुछ नही होगा। अच्छा तुम अपनी आंखे बंद कर लो।
राजेश ने अपनी आंखे बंद कर दिया।
झूला घूमना प्रारंभ हुआ।
दो तीन चक्कर के बाद, राजेश का डर जाता रहा। उसने अपनी आंखे खोल दिया।
दिव्या _राजेश बोलो कैसा लग रहा है?
राजेश _दिव्या जी आकाश झूले में तो बहुत मजा आ रहा है? मै बेकार ही अब तक इसमें बैठने से डरता था। शुक्रिया आपका।
दोनो आकाश झूले का मजा लिए। उसके बाद,,,
दिव्या _राजेश चलो, वहा जल परी का शो ढिखाया जा रहा है, चलो न देखते हैं।
दोनो जलपरी देखने लगे।
वहा से निकलने के बाद,
दिव्या _राजेश मुझे भेल पूरी खाना है।
राजेश ने दो प्लेट भेलपुरी ऑर्डर किया।
दिव्या _राजेश यहां तो सर्कस भी आया huwa है, चलो न सर्कस देखते है?
राजेश _, दिव्या जी ये सर्कस तो 3घंटे का शो है। इसे देखेंगे तो मेला पूरा घूम नही पाएंगे।
इधर 12बजते ही गीता और ठाकुर अपने अपने जीप पर बैठ गए। साथ में उसके बॉडी गार्ड।
ठाकुर के साथ, माखन बैठा था। साथ में एक उसके कुछ आदमी भी बैठे थे सुरक्षा के लिए।
जब वे लक्षमण पुर पहुंचे। जवानों की एक टुकड़ी भी उसके आगे और पीछे चलने लगे। जो आई जी के आदेश से ठाकुर की सुरक्षा के लिए लगाया गया था।
वे 2बजे गणेश पुर मेला स्थल पहुंचे गए। सभी विधायक और सांसद वहा पहुंच चुके थे। अब मुख्यमंत्री के आने का इंतजार कर रहे थे।
मेले में एक मंच बनाया गया था। जहां पर तीन दिनों तक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाने थे।
कुछ देर बाद मुख्यमंत्री जी हेलीकाफ्तर से मेला स्थल पहुंचे।
वहा मेले के समिति द्वारा सभी अतिथियों का स्वागत किया गया।
मुख्यमंत्री द्वारा मेला का उद्घाटन किया गया।
माइक संचालक ने सभी नेताओ को एक एक कर सभा को संबोधित करने के लिए बुलाया।
विधायको ने एवम मंत्री ने अपने सरकार के द्वारा किए गए कामों के बारे में लोगो को बताया। चलाए जा रहे योजनाओं की जानकारी दिया गया, और भविष्य में क्या योजनाएं है इससे भी लोगो को अवगत कराया।
आने वाले चुनाव में अपनी पार्टी को सपोर्ट करने के लिए लोगो से अपील की।
इधर भूरा ने अपने साथियों को भेस बदलकर मेला में भेजा था ताकि वहा क्या चल रहा है कि पल पल की खबर उन्हे मिलता रहे।
फ़ोन के माध्यम से भूरा के साथी, भूरा को पल पल की जानकारी दे रहे थे।
इन सब से बेखबर, दिव्या और राजेश दोनो मेले का आनंद ले रहे थे।
मेले में एक खेल आया था। 6गिलास को एक के ऊपर एक रखा था। एक गेंद से जो 6गिलास को नीचे गिरा देगा। उसे टीवी इनाम पर दिया जायेगा।
बहुत से लोग प्रयास कर रहे थे, पर कोई सफल नही हो पा रहे थे।
दिव्या _राजेश मुझे भी, वह गिलास गिराना है।
राजेश _, भईया जी, हमारी राजकुमारी को भी गिलास गिरानी है बॉल दो,,
दिव्या, ने कई बार प्रयास किया पर वह सफल नही हुई।
दुकानदार मुस्कुराने लगा,,,
दिव्या को बहुत गुस्सा आया,,
दिव्या _राजेश मुझे वो टीवी चाहिए।
राजेश _भईया जी आपका टीवी, मैम को पसंद आ गया है। उसे लाओ हमे दे दो। बदले में इसकी कीमत ले लो।
दुकानदार हसने लगा,,
बाबू जी ये टीवी बिकाऊ नहीं है। ये गिलास गिराओ और इनाम ले जाओ।
दुकानदार हसने लगा।
दिव्या को गुस्सा आया।
दिव्या _राजेश मुझे ये टीवी चाहिए।
राजेश _पर दिव्या जी दुकानदार तो गिलास देने तैयार नहीं,,
कहता है गिलास गिराओ।
दिव्या _तो गिलास गिरा दो,,
राजेश _क्या? ये इतना आसान है क्या? जिसे सुबह से कोई नहीं गिरा पाया है उसे,,
दिव्या _मै कुछ नही जानती, गिलास को गिराओ तभी मैं यहां से जाऊंगी।
राजेश _दिव्या जी ये आपको लगता है मुझसे हो पाएगा।
दिव्या _हां,,
राजेश _और नही huwa तो,,
दिव्या _मै घर नहीं जाऊंगी। जब तक गिलास नही गिरेंगी।
राजेश _दिव्या जी आप तो बिलकुल बच्ची बन गई है?
अब तो कोशिश करनी ही पड़ेगी,,
दो भईया बाल दो,,,
दुकानदार _लो बाबू ये 6बाल लो, अगर तुमने ये छै बालो में भी ये सभी गिलास गिरा दिए तो भी ये टीवी आपकी।
दुकानदार हसने लगा।
राजेश,_ये तो बड़ी अच्छी बात है भाई।
राजेश ने बाल लिया,,
निशाना लगाया,,,
दिव्या हाथ जोड़कर भगवान से प्रार्थना करने लगी।
राजेश ने निशाना लगाकर तेजी से गिलास को फेका।
एक ही बाल में सभी गिलास हवा में उड़ गए।
एक गिलास तो दुकानदार के मुंह पे लगा। वह अपना मुंह पकड़ कर बैठ गया। सभी दंग रह गए।
लोग ताली बजाने लगे।
दिव्या ने खुशी के मारे राजेश की गालों को चूम लिया।
राजेश दंग रह गया।
दिव्या, ने दुकानदार से ईनाम मांगा।
दुकानदार का मुंह लटक गया था।
उसने टीवी के बदले पैसे देने की बात कही।
दिव्या नही मानी,
हमे टीवी ही चाहिए। ये जो लगाए हो।
आखिर मजबूर होकर दुकानदार को टीवी देना ही पड़ा।
दिव्या ने वह टीवी, वहा पर भीख मांग रहे भिखारी को दे दिया।
दोनो वहा से चले गए,,
राजेश _दिव्या जी ये नही करना था, सबके सामने,,
दिव्या _सॉरी, खुशी में एक्साइटटेट हो गई,,,
अब तो मुझे भी बड़ी शर्म आ रही है, आखिर ये मूझसे कैसे हो गया।
इधर सभी नेता के संबोधन के बाद अंतिम संबोधन मुख्य मंत्री जी का चल रहा था।
संबोधन समाप्त होने के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू हो गया।
मुख्यमंत्री जी कुछ देर रुकने के बाद, हेलीकाफ्टर राजधानी के लिए निकल गए।
उसके बाद सभी विधायक और धरमपुर के सांसद भी अपने गंतव्य की और प्रस्थान करने के लिए। निकल पड़े। उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए।
उन सभी को एक साथ वहां से निकलने के लिए कहा गया। आगे पीछे जवानों से वाहन उनकी सुरक्षा में चलने लगे।
इधर भूरा के साथी इस बात की जानकारी। भूरा को दे दिया की नेताओ का काफिला यहां से रवाना हो गया है। आधे घण्टे में वे निर्धारित स्थल पर पहुंच जायेंगे।
भुरा ने अपने साथियों से तैयार रहने के लिए कहा।
वे काफिला का आने का इंतजार करने लगे।
वे सड़क के दोनो ओर पहाड़ पे उगे घने पेड़ में छुपे थे। पहाड़ को काटकर सड़क बनाया गया था।
जैसे ही नेताओ का काफिला यहां पहुंचा।
सड़क पर टिफिन बम लगा दिया था।
उसमे बड़ा धमाका हुआ। जवानों को वाहन पलट गया।
नक्सलियों ने गोली बरसाना सुरू कर दिया।
इधर जवानों ने भी मोर्चा सम्हाला।
ठाकुर के आदमियों ने भी नक्सलियों पर गोली बरसाना सुरु किया।
नक्सलियों ने चारो तरफ से काफिला को घेर कर गोली बरसाना सुरू कर दिया।
नक्सली पेड़ में छुप कर हमला कर रहे थे।
उन्हे ज्यादा नुकसान नहीं हो रहा था। इधर जवान और ठाकुर के आदमी एक एक कर शहीद होने लगे।
क़रीब आधा घंटे तक जवानों और नक्सलियों के बीच फायरिंग चला, सभी जवान और ठाकुर के आदमी शहीद हो गए।
माखन अंत तक हिम्मत नही हारा, वह लड़ता रहा। फिर भूरा ने उस पर निशाना साधा, और वह भी मारा गया।
गीता का बॉडीगार्ड ने बडा बहादुरी दिखाया पर अंत में वह भी शहीद हो गया।
जब जवानों के तरफ से फायरिंग बंद हो गया। तब भुरा और उसके साथी, सड़क पर आ गए और वाहनों को घेर लिए।
वे वाहनों पर बैठे नेताओ से पूछने लगे तुम कौन हो।
कल्लू _ये तो यहा का सांसद है इसका क्या करना है?
भुरा _ये शाला हमारा विरोधी है, उड़ा दो इसे।
नक्सलियों ने उसे गोली से उड़ा दिया।
उसके बाद विधायको को भी उड़ाने लगे।
गणेश पुर के विधायक को छोड़ दिया, ये हमारा आदमी है। इसे छोड़ दो।
भुरा _ठाकुर किसमे बैठा है ढूंढो?
एक नक्सली ने कहा _भुरा भईया ठाकुर यहां बैठा है।
भुरा उसके पास गया।
भूरा _ठाकुर, अपने हाथ ऊपर कर दो और चुप चाप हमारे साथ चलो।
कल्लू _भईया, इसमें एक लङकी बैठी है, इसका क्या करे। गीता जिला अध्यक्ष,
भुरा वहा आया,,,
वह गीता को देखने लगा,,,
भुरा _बड़ी खूबसूरत है,,,
इसे भी ले चलो, ये हमारा मन बहलाएगी,, हा हा हा हा,,
ठाकुर _नही मेरी बेटी को छोड़ दो,, मै तुम्हारे साथ चलने तैयार हूं, पर मेरी बेटी को छोड़ दो,,
भुरा _छोड़ देंगे, तुम्हारी बेटी को, पर इस पर हमारा दिल आ गया। बड़ी खूबसूरत है तुम्हारी बेटी। कुछ दिन हमारे मन बहलाएगी फिर छोड़ देंगे।
गीता को नीचे उतरने कहा,,
भुरा ने गीता की गालों को हाथ से छुना चाहा।
गीता ने भुरा की गाल पर एक तमाचा जड़ दिया। बदतमीज मुझे हाथ मत लगाओ।
भुरा _साली, अकड़ दिखाती हैं, मुझ पर हाथ उठाती है भुरा पर, तुझे तो ऐसे रगडूंगा। जिंदगी भर किसी और से रगड़ने लायक नहीं रहेगी।
ले चलो साली को।
नक्सली ठाकुर और गीता को अपने साथ जंगल में ले गए साथ में जो साथी उसके घायल हो गए थे उसे भाई अपने साथ ले गए।
इधर दिव्या ने राजेश का चुम्मन लेने के बाद से शर्म से गड़ी जा रही थीं। उसे अब मेले में मन नहीं लग रहा था।
दिव्या _राजेश चलो अब घर चलते है। घर पहुंचते शाम हो जायेगा।
राजेश और दिव्या, वहा से घर के लिए निकल पड़े थे।
जब वे घटना स्थल के पास पहुंचे।
उसने वहा मौजूद लोगो से पूछा क्या हुआ है यहां?
लोगो ने बताया की नेताओ पर नक्सलियों ने हमला कर दिया।
दिव्या पागलों की तरह गीता और ठाकुर को ढूंढने लगीं।
माखन वहा सड़क पर पड़ा huwa था।
वह अंतिम सांस ले रहा था।
दिव्या _माखन, दीदी और पिता जी कहा है? रोते हुए बोली।
माखन आंखे खोला।
माखन लड़खड़ाते जुबाने से बोला, नक्सली दोनो को जंगल में ले गए।
राजेश _किधर ले गए,,
माखन ने उंगली से इशारा कर बताया,, और उसकी सांसे चली गई।
राजेश ने ठाकुर के जीप से हथियार ढूढा, उसे गन और चाकू मिला। वह उसे लें लिया।
राजेश _दिव्या जी, तुम यहीं रुको। पुलिस वाले यहां आएंगे। वो तुम्हे घर तक छोड़ देंगे। मै गीता को लेकर लौटूंगा।
दिव्या _नही, मै भी तुम्हारे साथ चलूंगी।
राजेश _नही आपकी जान को वहा खतरा हो सकता है, तुम यहीं रुको।
दिव्या _नही, मै साथ चलूंगी। चाहे जो हो जाए।
राजेश, दिव्या को समझाने की कोशिश किया पर वह नही माना।
वह भी राजेश के पीछे पीछे जाने लगीं।
दिव्या _राजेश, यहां देखो। खून के निशान,,,
राजेश _लगता है नक्सली इधर ही गए है,,,
जो नक्सली जख्मी हुए थे उनके खून जमीन पे गिरे हुवे थे। खून के निशान देखकर दोनो जंगल में आगे बढ़ते गए।
वे जंगल में काफी अन्दर तक चले गए।
कही कोई नजर नहीं आ रहा था।
कुछ देर सुस्ताने के बाद वे फिर आगे बढ़े।
घने जंगलों के बीच पहाड़ के नीचे उन्हें टेंट नजर आया।
दिव्या _राजेश वो देखो।
वे दोनो, नक्सलियों के ठिकाने तक पहुंच चुके थे।
राजेश ने देखा टेंट के चारो ओर 500मीटर के सर्कल में कुछ नक्सली पहरा दे रहे थे।
दिव्या _,, राजेश अब क्या करे।
राजेश _अभी हम कुछ नही कर सकते।
हमे रात होने का इंतजार करना होगा।
तब तक हमे यहां से निकलने का रास्ता ढूंढना होगा।
राजेश जंगल में नक्सली के ठिकाने के चारो ओर भागने के लिए रास्ते तलासने लगा।
तभी उसने देखा की ठिकाने से करीब एक km दूर एक नदी बह रही है।
राजेश को भागने का रास्ता मील चुका था।
राजेश _,, हम इस नदी के रास्ते से जायेंगे।
वे दोनो नदी के किनारे पहुंचे।
दिव्या _पर हम नदी से जायेंगे कैसे?
राजेश ने आसपास के पेड़ के डालियों को तोड़ना शुरू कर दिया फिर पेड़ की डालियों को लताओं से बांध कर गठ्ठा बना दिया।
राजेश हम इस गट्ठे पर बैठ कर नदी के रास्ते निकल जायेंगे।
धीरे धीरे रात हो गई।
इधर नक्सली लोग। जो साथी जख्मी हो गए थे। उनका उपचार कर रहे थे। तो कुछ लोग भोजन बना रहें थे।
कुछ लोग पहरा दे रहें थे।
ठाकुर और गीता के दोनों हाथ बांध दिए गए थे।
दोनो को एक टैंट में रखे थे।
टैंट में भुरा आया।
ठाकुर _देखो, भुरा मेरी और तेरी कोई दुश्मनी नहीं है। तुम मुझे और मेरी बेटी को छोड़ दो। बदले में जितना धन कहोगे उतना मेरा साथी तुम्हारे पास छोड़ दिया करेंगे।
भुरा _ठाकुर, मुझे पता नहीं लाखन काका की तुमसे क्या दुश्मनी है। पर उसने मुझे चैलेंज किया था, अपनी ताकत दिखाने। तुम्हे अगवा कर उसके सामने पेस करने।
मुझे कमांडर का विश्वास जीतना था। मै तुम्हे लाखन के हवाले कर दूंगा। फिर लाखन तुम्हे छोड़े या मारे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।
वैसे मैं तुम्हे मै छोड़ सकता हूं, अगर तुम्हारी बेटी मेरे साथ खुशी खुशी जंगल में रहने तैयार हो जाए।
भुरा _बोलो दिलरुबा क्या कहती हो।
भुरा ने फिर से गीता को छूने की कोशिश किया।
गीता _कुत्ते मुझे हाथ मत लगाओ। मेरे पास भी आया तो ठीक नहीं होगा।
ठाकुर _, भुरा मेरी बेटी को कुछ मत करो, मै तेरी पैर पड़ता हूं।
भुरा _ठाकुर, भुरा को जो चीज पसंद आ जाती है, उसे हर हाल में पाकर रहता है।
कुछ देर और फड़ फड़ा ले मेरी रानी फिर जंगल में तुम्हारी चीखे निकलेगी।
इधर भोजन बन जाने के बाद, सभी नक्सली भोजन करने लगे।
ठाकुर और गीता को भी भोजन करने के लिए दिया। पर वे नही किए।
इधर भूरा और कल्लू मुर्गा पार्टी करने लगा।
कल्लू _भुरा भईया, शराब के बाद, उन लड़कियों को बुलाऊं क्या जो गांवों से उठा कर लाए थे।
नशा चढ़ने के बाद chut मारने का मजा ही कुछ और है।
भुरा _सच कहा तुमने, लेकिन उन लड़कियों के साथ तुम मजा करो। आज तो मैं उस गीता का सिल तोडूंगा। साली ने भुरा पे हाथ उठाया है न, जाओ उसे यहां लेकर आओ।
कल्लू ने टैंट के आस पास के पहरे दारो से गीता को लाने को कहा।
पहरे दार, गीता को टैंट से घसीटते हुवे। भुरा के टैंट पे ले आया।
कल्लू _लो भईया तुम्हारी बुलबुल तो आ गई। अब तुम मजे करो, मै भी चलता हूं मजे करने।
कल्लू वहा से चला गया।
इधर राजेश ने पहरेदारों को एक एक कर मारना सुरू कर दिया।
एह पहरेदारों पर अचानक से हमला करता और उसका मुंह बंद कर उसका गर्दन घुमा कर तोड़ देता। बिना चीखे उसके प्राण पखेरू उड़ जाते।
उसने अपना कपड़ाउतार कर नक्सली यो का कपड़ा पहन लियाऔर दिव्या को भी पहनने बोल दिया ताकि नक्सलीउसे अपना साथी समझे।
एक एक कर बाहर सर्कलके पहरेदारों को खत्म करने के बाद।
वे अन्दर गए और छुपकर मुआइना करने लगे की ठाकुर और गीता को कहा रखे है।
तभी ठाकुर टैंट से बाहर आया, वह गीता को छोड़ देने गिड़गिड़ा रहा था।
पहरेदार _तेरी बेटी के साथ तो भूरा भईया, सुहागरात मना रहा है , हा हा हा हा,,
पहरेदार उसे धकियाते हुवे अन्दर ले गया।
राजेश को पता चल गया की ठाकुर किस टैंट में है।
इधर सभी नक्सली अपने अपने टैंट में सोने लगे सभी थके हुए थे।
सिर्फ पहरेदार ही बाहर पहरा दे रहें थे।
राजेश एक एक कर सबको खत्म करता गया।
वे दोनो ठाकुर के टैंट में गए।
दिव्या _पिता जी,,,
ठाकुर _, बेटी तुम यहां।
दिव्या _हा हम तुम लोगो को बचाने आए है।
दीदी कहा है।
ठाकुर _बेटी, गीता को भूरा के पास ले गए हैं, वो उसके इज्जत के साथ खेलना चाहता है, उसे बचा लो।
राजेश _दिव्या जी तुम ठाकुर को लेकर नदी किनारे पहुंचो मैं गीता दीदी को लेकर आता हूं।
ठाकुर और दिव्या दोनों वहा से छुपतेछूपाते चले गए।
इधर राजेश टैंट के सामने पहरेदार बनकर खड़ा हो गया।
इधर भूरा गीता के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहा था।
गीता उसका विरोध कर रही थी।
भुरा _अरे आजा मेरी जान क्यू तडफा रही है। यहां तुझे बचाने वाला कोई नहीं है, हा हा हा हा,,
गीता की चीख सुनकर राजेश को पता चल गया, की गीता कहा है।
राजेश उस टैंट की ओर गया। कुछ नक्सली उसे देखे पर राजेश को सपना साथी समझने लगे।
राजेश ने देखा टैंट के बाहर, कुछ पहरेदार है।
जो गीता की सोर सराबे पर हस रहे थे।
राजेश ने मोबाइल की टार्च ऑन किया। झाड़ी में और छिप गया।
पहरेदार _अबे वहां किसी ने टार्च मारी देखो कौन है?
एक पहरे दार वहा गया, राजेश ने उसे खत्म कर दिया।
जब वहां मौजूद पहरेदार को लगा की उसका साथी अब तक आया नही है। एक एक कर उस ओर जाने लगे, राजेश एक एक कर सबको खत्म करता गया।
अंत में सिर्फ एक पहरे दार बच गया, राजेश उसके पास जाकर उसे खत्म कर दिया।
इधर भूरा गीता की साड़ी खींचकर अलग कर दिया था।उसे खाट में लिटा कर हाथ खाट से बांध कर, उसकी ब्लाउज को फाड़ने केलिए पकड़ लिया था।
वह उसकी ब्लाउज फाड़ने ही वाला था की राजेश टैंट में घुस गया।
भुरा राजेश की ओर मुड़ कर देखा।
राजेश ने फुर्ती दिखाते हुए, एक भुजा से गर्दन पकड़कर उसका मुंह बंद किया, और दूसरे हाथ से चाकू से उसका गला काट दिया।
भुरा वही ढेर हो गया,,,
उसने गीता के हाथ खोले जो खाट से बंधा था।
गीता राजेश को पहचान नहीं पा रही थीं,,
राजेश _गीता दीदी, मै राजेश हूं
गीता _, राजेश तुम यहां,,
वह राजेश से लिपटकर रोने लगी,,
राजेश _, दीदी, चुप हो जाओ,,, उसके मुंह को बंद कर दिया, हमे यहां से निकलना है।
गीता _पर पिता जी इनके कब्जे में है।
राजेश _,, तुम उसकी चिंता मत करो, ,,
उसे छुड़ा लिए है।
राजेश ने गीता को मरे पड़े पहरेदार का कपड़ा उतार कर गीता को दे दिया।
दीदी इसे पहन लो,,,
राजेश टैंट के बाहर खड़ा हो गया।
गीता अपनी पेटीकोट उतार कर नक्सली ड्रेस पहन ली।
फिर दोनों वहा से छिपते छिपाते नदी की ओर जाने लगे।