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मां के साथ मस्ती करते हुए में कॉलेज के लिए निकल गया... में पड़ने में ठीक ठाक हुआ करता था और यही वजह थी कि सारे टीचर्स में सब से अधिक चहीता था स्टूडेंट था... उन सब ,में थी मेरी मैथ की मैडम सुमित्रा जी...
सुमित्रा मैडम काफी हद तक मेरी मां जैसी ही थी... बस मैडम ज्यादा खुले विचार रखती थी और खुद पर कुछ ज्यादा ही थ्यान देती इस का यह असर पड़ता की उनके लेक्चर में पूरा क्लास भर जाता और कही बार तो दूसरे क्लास वाले बच्चे भी हमारे साथ बैठ जाते बस सुमित्रा मेम की लचकती और नंगी पीठ को उनके बैकलेस ब्लाउज में देखने को....
सुमित्रा मैडम को लेकर कॉलेज में बहुत सी कहानियां प्रचलित थी... वो थी भी बहुत हसी मजाक करने वाली...एक दम चुलबुली सी... उनकी एक मुस्कान देख के पूरा दिन निकल जाय... मैडम की सारी में देखती कमर और उभार के आते कुंवारी लड़की भी पानी कम थी...
में अक्सर उनके साथ देर तक उनके केबिन एम या कही और बैठ के मेरे प्रोजेक्ट को लेकर बाते करते या में उनके कुछ काम भी किया करता...मुझे उनके हर बार उनके गोरे गोरे मोटे चूचे दिख जाते...कही बार मन हो जाता की उनको कस के पकड़ लूं लेकिन अभी तक तो इतनी हिम्मत हुई नई...