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Fantasy लुइ के पन्ने!

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Ashiq Baba

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KViyon
ओह्ह मैं भी ना ज्यादा कोमेंट्स की उम्मीद रखती हूँ...........जो बिलकुल गलत है और खास कर इस प्रकार की कहानी पर....................

Ohhhh shit main bhi naa jyada comments ki ummide lagaye baithti jati hun...................jo ki bilkul hi galat hai........Khas kar is prakaar ki kahaani par........
कवियों और लेखकों को तालियाँ और कहकहे की बहुत सख्त जरूरत होती है । पाठको का रिएक्शन उन्हें नई ऊर्जा से भर देता है । आपको उम्मीद अवश्य करनी चाहिए आखिर उम्मीद अंधेरे में जलने वाला वो चिराग या कहे कि चिमनी है जिसकी रोशनी में काली अंधेरी रात काटी जा सकती है और वह चिमनी लालटेन या चिराग सुबह को निकलने वाले सूरज का द्योतक या सूचक होता है ।
यहाँ और परम सुन्दरी में कब अपडेट आया यह पता ही नही चला इस बार । वहाँ कुछ समय पहले ही पढ़ कर कमैंट्स डाले है और यहाँ भी अभी नजर डाल कर पढ़ कर फिर कमैंट्स करते है । निराश मत हो जाय करे आप बस जब लगे कि मेरे कमैंट्स नही आये है तो बस हल्का सा मैसेज कर दिया करे । धन्यवाद ।
 

Ashiq Baba

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शादी समारोह में बहुत कार्यक्रम और मस्ती होती है । अच्छे अच्छे पाकवान स्वादिष्ट व्यंजन के साथ सजी धजी औरतें लड़कियां, नए कपड़ो में हैंडसम पुरुष लड़के नौजवान । अब यहाँ ठेठ गांव का माहौल है तो वहाँ की रीति रिवाज । स्तनपान समारोह में दूध दुहाने के साथ साथ नर और मादा का स्वयं का आकर्षण में बंध कर शरीर से खेलना रीति रिवाज से परे का खेल भी स्वाभाविक है । सासु माँ ने देखा कि जानकी और गौरा लुई बस दुह रहा और दुहा रहे है ऐसे दोनो का मिलन नही होने वाला तो आगे बढ़ कर दोनो को निर्देशित कर रही है । जानकी की सासु सिर्फ सासु नही बल्कि उसकी सौतन भी है और सहेली भी यह बात गौर करने लायक है । वह पहले भी कई बार रमेश की इच्छा और खुद के मन की बात जानकी को गौरे लुई के साथ मिलन के लिये समझा चुकी है । और जानकी की हालत अब नर के साथ शारीरिक सम्पर्क में आई हुई मादा की सी हो गई है आखिर सब्र का बांध टूटने को है कब तक अपने आप को रोक कर रख सकती है । आगे क्या होगा ये सिर्फ आप ही जानते है । तो अगले अपडेट के इंतजार में है । अच्छे अप्डेट्स के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ।
 

Funlover

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कवियों और लेखकों को तालियाँ और कहकहे की बहुत सख्त जरूरत होती है । पाठको का रिएक्शन उन्हें नई ऊर्जा से भर देता है । आपको उम्मीद अवश्य करनी चाहिए आखिर उम्मीद अंधेरे में जलने वाला वो चिराग या कहे कि चिमनी है जिसकी रोशनी में काली अंधेरी रात काटी जा सकती है और वह चिमनी लालटेन या चिराग सुबह को निकलने वाले सूरज का द्योतक या सूचक होता है ।
यहाँ और परम सुन्दरी में कब अपडेट आया यह पता ही नही चला इस बार । वहाँ कुछ समय पहले ही पढ़ कर कमैंट्स डाले है और यहाँ भी अभी नजर डाल कर पढ़ कर फिर कमैंट्स करते है । निराश मत हो जाय करे आप बस जब लगे कि मेरे कमैंट्स नही आये है तो बस हल्का सा मैसेज कर दिया करे । धन्यवाद ।
जी आपकी बात बिलकुल सही है


आपकी यह टिप्पणी पढ़कर मन सचमुच भावुक हो गई। ️

आपने लेखक के मन को जिन शब्दों में समझाया है, वह केवल एक पाठक ही नहीं, बल्कि साहित्य का सच्चा साधक ही कह सकता है। सच है, लेखक शब्द तो अकेले लिखता है, लेकिन उन शब्दों को साँसें पाठकों की प्रतिक्रियाएँ देती हैं। कभी एक छोटी-सी टिप्पणी, कभी दो प्रशंसा के शब्द, तो कभी एक सच्ची आलोचना, यही सब मिलकर उसकी कलम में फिर से स्याही भर देते हैं।

"उम्मीद अँधेरे में जलने वाली चिमनी है", आपकी यह बात दिल को छू गई। वास्तव में, हर रचनाकार इसी छोटी-सी लौ के सहारे अगला पन्ना लिखता है, इस विश्वास के साथ कि कहीं न कहीं कोई पाठक उन शब्दों का इंतज़ार कर रहा है।

यह जानकर बहुत अच्छा लगा कि आपने वहाँ भी पढ़ा, अपनी प्रतिक्रिया दी और यहाँ भी समय निकालकर पढ़ने आए। आपके जैसे पाठक किसी भी लेखक की सबसे बड़ी पूँजी होते हैं। रचनाएँ लिखी तो कलम से जाती हैं, लेकिन उन्हें जीवंत पाठकों का अपनापन ही बनाता है।

और हाँ, आपकी बात गाँठ बाँध ली है। आगे से यदि कभी लगेगा कि आपकी प्रतिक्रिया नहीं आई है, तो संकोच नहीं करुँगी। एक छोटा-सा संदेश अवश्य कर दूंगी। क्योंकि अब यह केवल लेखक और पाठक का रिश्ता नहीं रहा, बल्कि साहित्य के माध्यम से बने एक आत्मीय विश्वास का संबंध है।

आपके स्नेह, विश्वास और निरंतर साथ के लिए हृदय की गहराइयों से धन्यवाद। ईश्वर करे यह अपनापन और यह साहित्यिक यात्रा यूँ ही लंबे समय तक साथ-साथ चलती रहे।

 

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शादी समारोह में बहुत कार्यक्रम और मस्ती होती है । अच्छे अच्छे पाकवान स्वादिष्ट व्यंजन के साथ सजी धजी औरतें लड़कियां, नए कपड़ो में हैंडसम पुरुष लड़के नौजवान । अब यहाँ ठेठ गांव का माहौल है तो वहाँ की रीति रिवाज । स्तनपान समारोह में दूध दुहाने के साथ साथ नर और मादा का स्वयं का आकर्षण में बंध कर शरीर से खेलना रीति रिवाज से परे का खेल भी स्वाभाविक है । सासु माँ ने देखा कि जानकी और गौरा लुई बस दुह रहा और दुहा रहे है ऐसे दोनो का मिलन नही होने वाला तो आगे बढ़ कर दोनो को निर्देशित कर रही है । जानकी की सासु सिर्फ सासु नही बल्कि उसकी सौतन भी है और सहेली भी यह बात गौर करने लायक है । वह पहले भी कई बार रमेश की इच्छा और खुद के मन की बात जानकी को गौरे लुई के साथ मिलन के लिये समझा चुकी है । और जानकी की हालत अब नर के साथ शारीरिक सम्पर्क में आई हुई मादा की सी हो गई है आखिर सब्र का बांध टूटने को है कब तक अपने आप को रोक कर रख सकती है । आगे क्या होगा ये सिर्फ आप ही जानते है । तो अगले अपडेट के इंतजार में है । अच्छे अप्डेट्स के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ।
आपकी इतनी गहन और बारीकी से की गई टिप्पणी के लिए हृदय से धन्यवाद दोस्त।

सबसे अच्छी बात यह लगी कि आपने केवल घटनाएँ नहीं पढ़ीं, बल्कि पात्रों की मनःस्थिति, उनके आपसी संबंधों और गाँव की परंपराओं के संदर्भ को भी समझने का प्रयास किया। एक लेखक के लिए इससे बड़ी खुशी क्या हो सकती है कि पाठक कहानी की सतह से आगे जाकर उसके भावों और परतों को भी महसूस करे।

आपने जानकी, उसकी सास और गौरा लुई के बीच के जटिल रिश्तों पर जो अपने विचार साझा किए, वे पढ़कर लगा कि कहानी अपने उद्देश्य में सफल हो रही है। रिश्तों की उलझनें, मन की इच्छाएँ, सामाजिक मर्यादाएँ और परिस्थितियों का दबाव, इन्हीं सबके बीच आगे की कथा अपना रास्ता बनाएगी।

फिलहाल इतना ही कहूँगी कि हर मोड़ वैसा नहीं होगा जैसा पहली नज़र में दिखाई देता है। कुछ निर्णय पात्र स्वयं लेंगे, कुछ परिस्थितियाँ उनसे निर्णय करवाएँगी, और कुछ ऐसे रहस्य भी सामने आएँगे जो अभी केवल संकेतों में छिपे हैं।

आपका यह विश्वास कि "आगे क्या होगा, यह सिर्फ आप ही जानते हैं" मेरे लिए बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी है। पूरी कोशिश रहेगी कि आने वाले अपडेट आपकी उत्सुकता को बनाए रखें और कहानी हर नए मोड़ पर आपको कुछ नया सोचने पर मजबूर करे।

आपके स्नेह, विश्वास और लगातार मिल रहे प्रोत्साहन के लिए दिल से आभार। ऐसे ही अपने विचार साझा करते रहिए, क्योंकि पाठकों की प्रतिक्रियाएँ ही लेखक की कलम को आगे बढ़ने की सबसे बड़ी ताकत देती हैं।


शुक्रिया दोस्त..............
 

Funlover

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चलिए दोस्तों आगे बढ़ते है


Chaliye dosto kahaani me aage badhte hai.
 
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Funlover

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सासुमा कुछ देर तक चुपचाप दोनों को देखती रहीं। उनके चेहरे पर एक संतुष्ट लेकिन शरारती मुस्कान थी। फिर उन्होंने पास आकर लूई के कंधे पर हाथ रखा और थोड़ी भारी, अश्लील स्वर में कहा:

“अरे गोरे बाबा… बस थन चूसने से काम नहीं चलेगा। इसे और अच्छे से दुहो। देखो, मेरी बहू की गांड कितनी मोटी और नरम है। इसे सहलाते हुए अंदर तक उँगली डालो।”
फनलवर की रचना।

जानकी चौंककर सासुमा की तरफ़ देखने लगी। उसके गाल शर्म से लाल हो गए।

सासुमा ने जानकी की तरफ़ देखकर मुस्कुराते हुए और ज़्यादा स्पष्ट, अश्लील भाषा में कहा,

“शर्मा मत बेटी। आज तेरा गोरा मेहमान है। लूई, अपनी उँगली को थूक से गीला कर और मेरी बहू की गांड के छेद में डाल दो। धीरे-धीरे अंदर-बाहर करो। गाय को भी दुहते समय अंदर वाली जगह सहलाते हैं ना? वैसे ही इसे भी सहलाओ। इससे इसका दूध और अच्छा निकलेगा।”

लूई ने सासुमा की बात सुनकर जानकी की आँखों में देखा। जानकी शर्म से आँखें नीचे कर ली थीं, लेकिन उसका शरीर उत्तेजना से काँप रहा था।

सासुमा ने आगे कहा,

“जानकी, तू भी अपने हाथ से इसके लंड को अच्छे से दबाकर दुह। ऊपर-नीचे कर, मलाई निकाल। और लूई, अपनी उँगली को और अंदर डालो। मेरी बहू की गांड टाइट है, लेकिन आज इसे खुला कर दो। बस उँगली से ही चोदो, पूरा मत डालना। बस अंदर-बाहर करके इसे मस्त कर दो।”

लूई ने जानकी की गांड पर अपनी उँगली को थूक से गीला किया और धीरे से उसके गांड के छेद पर रख दिया। फिर हल्का दबाव देकर उँगली का सिरा अंदर डाल दिया।

“आह्ह्ह्ह…” जानकी के मुँह से एक लंबी, दबी हुई सिसकारी निकली। उसकी कमर झटके से आगे की तरफ़ झुक गई।

सासुमा ने मुस्कुराते हुए कहा,

“हाँ… इसी तरह… धीरे-धीरे अंदर-बाहर करो। देख रही हूँ, मेरी बहू कितनी गीली हो रही है। लूई, थन भी मत छोड़ना। दोनों थनों को चूसते हुए अपनी उँगली से इसकी गांड को चोदो। आज इसे पूरा मजा दे दो।”

जानकी के मन में शर्म और उत्तेजना दोनों एक साथ उफान मार रहे थे। वह सासुमा की अश्लील बातों से और ज़्यादा गीली हो रही थी। लूई अब एक थन चूस रहा था, दूसरा हाथ से मसल रहा था, और उसकी उँगली जानकी की गांड में धीरे-धीरे अंदर-बाहर हो रही थी।

सासुमा ने जानकी के बालों को सहलाते हुए आखिरी निर्देश दिया,

“बहू, तू भी इसके लंड को तेज़ी से दुह। देख, कितना सख्त और गरम हो रहा है। आज इस गोरे की सारी मलाई निकाल दे। रात भर इसे खाली मत रखना। समझ गई?”

जानकी ने बस “जी…” कहकर सिर हिला दिया। उसकी साँसें अब पूरी तरह बेकाबू हो चुकी थीं। लूई की उँगली उसकी गांड में आधी अंदर जा रही थी और निकल रही थी, जबकि वह लूई के लंड को दोनों हाथों से तेज़ी से सहला रही थी।
प्रस्तुतकर्ता फनलवर।

सासुमा संतुष्ट होकर थोड़ा पीछे हट गईं, लेकिन उनकी नज़र अभी भी दोनों पर बनी हुई थी।


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जुड़े रहिये दोस्तों।



Funlover.


 

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सासुमा (जानकी की सास) इस समय जो कुछ कर रही थीं, उसके पीछे सिर्फ़ एक ही कारण नहीं था। उनके मन में कई परतें थीं, जो गाँव की परंपरा, व्यक्तिगत अनुभव और गहरी कामुकता से भरी हुई थीं।

सासुमा की आंतरिक सोच:

“यह गोरा मेहमान सिर्फ़ एक मेहमान नहीं है। यह हमारे परिवार के लिए एक अवसर है।”

सासुमा को गहराई से विश्वास था कि बाहरी मेहमान, खासकर विदेशी या गोरे व्यक्ति, को पूरी तरह संतुष्ट करना परिवार की प्रतिष्ठा और समृद्धि का प्रतीक है। उनके अनुसार, अगर मेहमान खुश होकर गया तो “लक्ष्मी” घर में बनी रहती है। इसलिए वे जानकी को पूरी तरह खोलकर, बिना किसी संकोच के लूई को समर्पित करना चाहती थीं।

दूसरा बड़ा कारण था- जानकी को पूरी तरह तैयार करना।
फनलवर रचित कहानी।

सासुमा जानती थीं कि जानकी अभी भी अंदर से शर्मीली है। हालाँकि वह रमेश, सुंदरकाका और देवरों के साथ संबंध बना चुकी थी, लेकिन एक विदेशी के सामने खुद को पूरी तरह नंगा करके, गांड तक सहलवाने में अभी भी हिचकिचाहट थी। सासुमा चाहती थीं कि जानकी यह शर्म हमेशा के लिए छोड़ दे।

उनकी नजर में, “एक अच्छी बहू वह होती है जो किसी भी पुरुष के सामने बिना झिझके अपना शरीर समर्पित कर सके।”

तीसरा कारण था- उर्वरता और दूध बढ़ाना।

सासुमा मानती थीं कि जब बहू को पूरी तरह उत्तेजित किया जाए — थन चूसवाए जाएँ, गांड सहलाई जाए, चूत गीली की जाए, तो दूध की मात्रा और गुणवत्ता दोनों बढ़ जाती है। वे चाहती थीं कि जानकी का दूध और मीठा, गाढ़ा और पौष्टिक बने, ताकि पूरे परिवार और मेहमानों को फायदा हो।

चौथा और सबसे गहरा कारण था- स्वयं की कामुकता।

सासुमा खुद भी बहुत कामुक स्वभाव की थीं। उम्र के साथ उनका शरीर अब पहले जैसा नहीं रहा था, लेकिन बहू के शरीर के माध्यम से वे vicarious pleasure (दूसरो के अनुभव से मिलनेवाला आनंद) ले रही थीं। जब वे जानकी को इस तरह खुला देखती थीं, लूई की उँगली जानकी की गांड में जाती देखती थीं, तो उन्हें खुद को युवा महसूस होता था। यह उनके लिए एक तरह का अप्रत्यक्ष सुख था।

वे जानती थीं कि लूई जैसा विदेशी लंड और उत्तेजना जानकी को पूरी तरह बदल देगा। और वे यही चाहती थीं।


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बने रहिये दोस्तों।


Funlover.


 

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सासुमा का एक आंतरिक सोच (monologue):

“चल बेटी जानकी… शर्मा मत। यह गोरा तुझे आज रात पूरी तरह चोदने वाला है, चाहे लंड से या उँगलियों से। मैं तुझे देखकर खुश होती हूँ। जब तू काँपती है, सिसकारती है, तो मुझे लगता है जैसे मैं फिर से जवाँ हो गई हूँ। तू जितना खुल जाएगी, उतना ही तेरा भविष्य मजबूत होगा। आज तू इस गोरे की गांड वाली रखैल बन जा… कल पूरे गाँव की बहू बनेगी।”

संक्षेप में, सासुमा की प्रेरणा परंपरा + परिवार की प्रतिष्ठा + बहू का प्रशिक्षण + अपनी छिपी कामुकता का मिश्रण थी। वे नहीं चाहती थीं कि जानकी कोई भी मौका गँवाए, खासकर लूई जैसे दुर्लभ मेहमान के साथ।
फनलवर लिखित रचना है।

सासुमा अब और करीब आ गईं। उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, आंशिक रूप से माँ का प्यार, आंशिक रूप से कामुकता, और आंशिक रूप से गाँव की परंपरा का गर्व। उन्होंने जानकी की कमर पर हाथ रखा और धीमी लेकिन स्पष्ट आवाज़ में कहा:

“क्या हुआ बेटी? शर्मा रही है? देख, तेरा गोरा मेहमान कितनी भूख से तुझे चूस रहा है।”

जानकी ने शर्म से आँखें नीचे कर लीं, लेकिन उसकी साँसें तेज़ थीं। सासुमा ने मुस्कुराते हुए जानकी के कान के पास मुँह ले जाकर फुसफुसाया,

“शर्म छोड़ दे जानकी। आज तू सिर्फ़ मेरी बहू नहीं, इस गोरे की रखैल भी है। देख कैसे तेरी गांड काँप रही है। लूई, उँगली और अंदर डालो… हाँ… इसी तरह।”

लूई ने अपनी उँगली को और गीला करके जानकी की गांड के छेद में धीरे-धीरे अंदर डालना शुरू कर दिया। जानकी के शरीर में एक झटका लगा।

“आह्ह्ह्… सासुमा…” जानकी काँपती हुई बोली।

सासुमा ने जानकी के बालों को पीछे से सहलाते हुए कहा,

“क्या आह्ह्? मजा आ रहा है ना? बोल साफ़-साफ़। तेरी गांड में उँगली घुस रही है और तू चुप है? बोल, तुझे अच्छा लग रहा है या नहीं?”

जानकी ने शर्म और उत्तेजना के मिश्रण में काँपते हुए जवाब दिया,

“जी… सासुमा… बहुत अच्छा लग रहा है… लेकिन… सब देख रहे हैं…”
निर्मात्री फनलवर है।

सासुमा हँसी और जानकी की गांड पर हाथ फेरते हुए बोलीं,

“देखने दो। यही तो रिवाज है। तू समझ ले, यह गोरा तुझे आज रात पूरी तरह अपना बना लेगा। तू बस खुलकर दे। तेरी गांड को सहलवाना, उँगली डलवाना… यह सब तेरी ट्रेनिंग है।”

लूई अब जानकी के दोनों थनों को बारी-बारी चूस रहा था और उसकी उँगली जानकी की गांड में धीरे-धीरे अंदर-बाहर हो रही थी। जानकी की जाँघें काँप रही थीं।

सासुमा ने जानकी की ठोड़ी उठाई और उसकी आँखों में देखते हुए कामुक स्वर में कहा,

“देख बेटी, कितना सुख मिल रहा है तुझे। तेरी चूत कितनी गीली हो गई है। लूई, और तेज़ करो उँगली। मेरी बहू की गांड को अच्छे से फाड़ो… उँगली से ही।”

जानकी ने सिसकते हुए कहा,

“सासुमा… आप… आप बहुत अश्लील बोल रही हैं… मुझे शर्म आ रही है…आप जाईए।”

सासुमा ने हँसकर जानकी के थन पर हाथ रखा और दबाते हुए बोलीं,

“शर्म? अरे पगली, शर्म तो तभी छोड़नी पड़ती है जब कोई विदेशी तुझे इस तरह दुह रहा हो। आज तू इस गोरे की गाय बन गई है। चूसवा, गांड खिलवा, और मलाई निकलवा। रात भर इसे अपना दूध और अपना शरीर दो। समझ गई?”

जानकी ने आँखें बंद कर लीं और काँपती आवाज़ में बोली,

“जी सासुमा… जैसी आपकी आज्ञा…” जानकी अब ससुमा से पीछा छुड़वाना चाहती थी।
फनलवर का निर्माण।


***************************************.


यही तक दोस्तों।


बाकि आपके कोमेंट्स आने के बाद।



पढने के लिए शुक्रिया दोस्तों।


Funlover के जय भारत।।



 

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Dosto upar ke update kaa HINGLISH version main aap ko kal likh dungi.


Dhairya rakhne ke liye agrim shukriyaa.

 
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Chaliye dosto HINGLISH me padhte hai..............
 
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