अपडेट 127 पर कुछ ऑब्ज़र्वेशन्स :
अंततः दोनों पक्षों की लड़ाई मानस युद्ध से उतर कर धरातल पर आ ही गई!
एक पक्ष की तरफ़ से बिसातें बिछ गई हैं, लेकिन फिलहाल ऐसा नहीं लग रहा है कि दूसरे पक्ष को इस साजिश का अंदेशा भी है। विश्व एंड कं. का ध्यान फिलहाल भैरव एंड कं. की घोटालेबाजी पर ही केंद्रित दिख रहा है। ऐसा नहीं है कि वो उनकी नीचता के बारे में नहीं समझते, लेकिन फिलहाल उसका संज्ञान नहीं लगता उनको।
अपना काम साधने के लिए दंगेबाज़ी करवाना आज कल की राजनीति का ऐसा घिनौना पहलू है, जिसको जानते सभी हैं, लेकिन फिर भी स्वीकारते नहीं। लेकिन यहाँ तो अपना उल्लू सीधा करने के लिए ही दंगे करवाने की साजिश चल रही है। भैरव एंड कं. को वैदेही के चरित्र के बारे में अच्छी तरह से पता है। उनको मालूम है कि थोड़ा भी बदतमीज़ी करने से वो स्वयं पर नियंत्रण नहीं रख सकेगी - और उसी कारण से विश्व भी उनके जाल में फंस सकता है। अच्छा समीकरण बैठाया है। देखते हैं, कि विश्व को कब इस साजिश का पता चलता है, और वो कैसे इसका तोड़ निकालता है।
वीर और अनु की प्रेम कहानी बेहद नाज़ुक मोड़ पर है। हम पाठक जानते हैं कि अनु की जान को खतरा है - वो भी उसकी होने वाली ससुराल से ही! उधर वीर उसको दस दिनों के भीतर ही अपना बना लेने का संकल्प लिए हुए है, जो इस समय खटाई में पड़ता दिख रहा है। मेरे ख़याल से उसको अपने पाँवों पर खड़ा हो जाना चाहिए, और उससे शादी कर लेनी चाहिए। लेकिन, वो अनु के लिए अपने परिवार से जिस तरह की स्वीकारोक्ति चाहता है, वो ऐसे गन्धर्व विवाह से संभव नहीं। मतलब, बड़ी कठिन डगर है।
विक्रम का अभी भी कुछ समझ नहीं आता। कुछ लोग काम को ले कर अपने परिवार से कुछ इस तरह से पलायन करते हैं कि समझ नहीं आता कि वो चाहते क्या हैं! शायद विक्रम अपने बाप को अपनी योग्यता दिखाना चाहता हो; शायद उसको भैरव से कोई अप्रूवल चाहिए हो। क्या पता। उसकी मनःस्थिति समझ नहीं आती। भाई - पत्नी - बहन - ऐसा लगता ही नहीं कि वो उनको ले कर अपनी जिम्मेदारी के लिए गंभीर है! सबसे कमज़ोर यही लगता है चरित्र में। कम से कम बाकी सभी के अपने अपने खूँटे हैं, विभिन्न विषयों को ले कर। बस, इसी का नहीं समझ आता। एक समय आएगा, जब ये कोई पक्ष पकड़ने को मजबूर हो ही जाएगा। तब इसका होगा क्या?
रोणा की उछल कूद और तड़प देख कर ऐसा लगता है कि उसका अंत निकट है। शायद यही वो व्यक्ति है, जिसकी मृत्यु होनी है। भैरव जैसों के लिए आजीवन कारावास, सामाजिक बेइज़्ज़ती, भर्त्सना इत्यादि अच्छा दण्ड है, लेकिन रोणा - जो कहने के लिए क़ानून का रक्षक है - जैसों के लिए मृत्यु दण्ड ही उचित है। पर मैं शायद गलत भी हो सकता हूँ।
अंततः - बहुत ही उम्दा अपडेट है
Kala Nag भाई! आप वापस आ गए, और भी अच्छी बात है!
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