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Sab hoga bhai, bs sath bane rho aur maje lo.Sheelu ki chudai uska bhai hi kare aisa rakhana
Time ke sath sab hogaShilu ke chut aur boobs par tattoo banvaiye
Behtareen kahani hai bhai is jaldi pura karne ki koshish karein(अपडेट 15)
वह बेतहाशा कांपने लगी, उसकी जांघें आवारा के लठ को और भी कसकर जकड़ने लगीं और उसका पूरा जिस्म उस असीम लज्जत में पिघलकर बहने लगा। उसे महसूस हुआ जैसे वह इस दुनिया से बाहर निकलकर किसी और ही आयाम में पहुँच गई है, जहाँ केवल सुख की लहरें थीं और आवारा का वह खूंखार मर्दाना प्रहार। वह बस एक बेबस, तृप्त रांड की तरह उसके नीचे पड़ी रही, उसकी सांसें उखड़ी हुई थीं और उसका रोम-रोम उस चरम सुख की सिहरन से कांप रहा था।
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बगीचे के उस एकांत कोने में जहाँ नीलू और आवारा वासना के चरम पर थे, वहाँ से कुछ दूरी पर अभय अपने खेत की मेड़ पर खड़ा था। वह अपनी फसलों की रखवाली कर रहा था, लेकिन उसकी नजरें बार-बार उस घने बगीचे की ओर जा रही थीं जहाँ से अजीब और मदहोश कर देने वाली आवाजें आ रही थीं। हवा के झोंकों के साथ उन चीखों और मांस के टकराने की 'धपा-धप' जैसी आवाजें उसके कानों तक पहुँच रही थीं, जिसने उसके भीतर एक अनजानी बेचैनी और उत्तेजना पैदा कर दी थी।
अभय का मन अब अपने खेतों में नहीं लग रहा था। उसने अपने कंधे पर रखे गमछे को ठीक किया और धीरे-धीरे बगीचे की ओर अपने कदम बढ़ा दिए। जैसे-जैसे वह पास आ रहा था, उन सिसकियों की तीव्रता बढ़ती जा रही थी। उसके पैरों के नीचे सूखी पत्तियों के चरमराने की आवाज आ रही थी, लेकिन उसका ध्यान केवल उस दिशा में था जहाँ कामुकता का यह खेल चल रहा था। उसके मन में एक उत्सुकता थी कि आखिर इस सन्नाटे को कौन तोड़ रहा है।
जैसे ही वह बगीचे के उस घने हिस्से के करीब पहुँचा जहाँ आम के पुराने पेड़ अपनी शाखाओं से आसमान को ढके हुए थे, उसे पसीने और काम-रस की एक तीखी गंध महसूस हुई। अभय ने झाड़ियों के पीछे से झाँककर देखा, और जो नजारा उसकी आँखों के सामने था, उसने उसके शरीर में बिजली सी दौड़ दी। उसने देखा कि आवारा अपनी पूरी मर्दानगी के साथ नीलू को रौंद रहा है, और नीलू पूरी तरह से मदहोश होकर उसके नीचे तड़प रही है। यह दृश्य देखकर अभय के भीतर का पुरुष जाग उठा और उसकी अपनी वासना अब उबलने लगी थी।
आवारा ने देखा कि नीलू चरम सुख के झटकों से कांप रही है और उसकी आँखें अभी भी मदहोशी में आधी खुली और आधी बंद हैं। लेकिन आवारा का मन अभी भरा नहीं था; उसकी रगों में दौड़ता हुआ खून अब भी उबाल मार रहा था। उसने एक क्रूर मुस्कान के साथ नीलू को अपनी बाहों से ढीला किया और उसे झटके से पीछे की ओर खेतों की गीली मिट्टी पर लिटा दिया। नीलू के शरीर और मिट्टी का वह संगम उसे और भी अधिक हिंसक बना रहा था।
बिना एक पल गंवाए, आवारा उसके ऊपर किसी भूखे भेड़िये की तरह सवार हो गया। उसने अपनी जांघों से नीलू की कमर को मजबूती से दबाया ताकि वह हिल न सके। जैसे ही उसने अपने विशाल, हाहाकारी लंड को एक बार फिर नीलू की उस भीगी और अब भी सिकुड़ती हुई चूत के द्वार पर रखा, उसे एक तीव्र गर्माहट महसूस हुई। आवारा ने एक गहरी सांस ली और पूरी ताकत के साथ एक जोरदार प्रहार किया, जिससे उसका वह भीमकाय लठ दोबारा नीलू की गहराईयों को चीरता हुआ अंदर उतर गया।
"तूने क्या सोचा था कि एक बार के चरम सुख से मैं रुक जाऊंगा?" आवारा ने उसकी गर्दन को दबाते हुए गुर्राकर कहा। उसने अपनी कमर को एक लय में झटकना शुरू किया, हर एक प्रहार इतना गहरा और सख्त था कि नीलू के शरीर का ऊपरी हिस्सा मिट्टी पर रगड़ रहा था। आवारा अब किसी मशीन की तरह चल रहा था, जिसका एकमात्र लक्ष्य नीलू के शरीर के हर एक रोम को अपनी मर्दानगी से रौंदना और उसे इस बात का एहसास दिलाना था कि वह अब पूरी तरह उसकी दासी बन चुकी है।
आवारा का वह भीमकाय लठ जब दोबारा मेरी गहराईयों को चीरता हुआ अंदर उतरा, तो मेरी रूह तक कांप गई। अभी पिछले चरम सुख की लहरें मेरे शरीर में शांत भी नहीं हुई थीं कि उसने फिर से मुझे अपनी मर्दानगी के बोझ तले दबा दिया। जब उसकी कमर ने एक मशीन की तरह लय पकड़ी और वह हर प्रहार के साथ मेरी चूत की दीवारों को बेरहमी से रौंदने लगा, तो मैं बेबस होकर केवल कराह उठी। उसकी जांघों का दबाव मेरी कमर को मिट्टी में धंसा रहा था, और हर एक झटके के साथ मुझे महसूस हो रहा था कि वह मुझे पूरी तरह से तोड़ देना चाहता है।
"ओह्हह... आआह्ह्ह... आवारा... तू... तू मुझे पागल कर देगा... ईईई... इतनी गहराई... इतनी बेरहमी... मैं... मैं अब और नहीं सह पाऊँगी... आआह्ह्ह!" मेरी सिसकियाँ अब शब्दों में बदल रही थीं, लेकिन उनमें दर्द कम और एक ऐसी प्यास थी जो केवल आवारा की यह हिंसक मर्दानगी ही बुझा सकती थी। मेरी चूचियां मिट्टी और पसीने से सन चुकी थीं, और मेरा पूरा शरीर उसकी हर एक धपा-धप के साथ ऊपर की ओर उछल रहा था, जैसे मैं उसके इस खूंखार हमले के आगे पूरी तरह आत्मसमर्पण कर चुकी होऊँ।
आवारा अब पूरी तरह से अपनी कामुकता के जुनून में अंधा हो चुका था। उसने नीलू की कमर को अपनी मजबूत पकड़ में जकड़ा हुआ था और उसके शरीर को किसी खिलौने की तरह झटक रहा था। उसकी कमर की हर एक धपा-धप नीलू के शरीर को मिट्टी में गाड़ रही थी, और वह इस बात से बेखबर था कि इस अंधेरी रात के सन्नाटे में कोई और भी है जो उनकी इस रतिक्रीड़ा का गवाह बन रहा है। आवारा का विशाल लठ नीलू की चूत के भीतर किसी ड्रिल की तरह चल रहा था, और वह नीलू की सिसकियों को संगीत की तरह सुनकर अपनी रफ्तार को और भी हिंसक बना रहा था।
उधर, झाड़ियों के पीछे छिपा अभय इस नजारे को देख पूरी तरह दंग रह गया। काली अमावस्या की रात थी, चारों तरफ घना अंधेरा था, लेकिन चांदनी की हल्की रोशनी में उसे दो जिस्म एक-दूसरे में समाये हुए साफ दिख रहे थे। वह देख रहा था कि कैसे आवारा की मर्दानगी नीलू को पूरी तरह रौंद रही है। अभय की सांसें तेज हो गई थीं और उसकी नजरें उस कामुक दृश्य से हट ही नहीं रही थीं। लेकिन तभी उसकी नजर कुछ और दूरी पर पड़ी, जहाँ एक और लड़की खड़ी थी।
वह लड़की, जो कोई और नहीं बल्कि शीलू थी, इस दृश्य को देखकर इतनी उत्तेजित हो चुकी थी कि उसने अपना हाथ अपनी चूत पर रख लिया था। अंधेरे में अभय यह तो नहीं पहचान पाया कि वह लड़की कौन है, लेकिन उसकी उंगलियों की हरकत और उसके चेहरे पर छाई कामुकता ने अभय के भीतर एक शिकारी को जगा दिया। उसे लगा कि जब यहाँ पहले से ही एक 'जुगाड़' चल रहा है, तो वह क्यों पीछे रहे। उसने अपनी नजरें उस लड़की पर टिकाईं और दबे पाँव, बिना कोई आहट किए, धीरे-धीरे उसके पीछे की ओर बढ़ने लगा। उसके दिमाग में अब केवल उस अनजान लड़की को दबोचने का विचार था।
अमावस्या की उस घनी काली रात ने बगीचे को एक रहस्यमयी चादर से ढंक दिया था। चांदनी की हल्की किरणें पेड़ों की घनी टहनियों से छनकर जमीन पर गिर रही थीं, जिससे सब कुछ धुंधला और परछाइयों जैसा नजर आ रहा था। अभय ने अपनी सांसों को नियंत्रित किया और किसी शिकारी की तरह दबे पाँव शीलू की ओर बढ़ा। वह इतना करीब आ चुका था कि वह शीलू की उखड़ती हुई सांसों की आवाज सुन सकता था, लेकिन अंधेरे की वजह से वह यह नहीं देख पा रहा था कि वह कौन है। उसके लिए वह बस एक कामुक शरीर था जो इस समय अपनी वासना के चरम पर था।
दूसरी ओर, शीलू पूरी तरह से नीलू और आवारा के मिलन के दृश्य में खोई हुई थी। उसकी दुनिया सिमट कर केवल उन 'धपा-धप' की आवाजों और नीलू की सिसकियों तक रह गई थी। वह इस बात से पूरी तरह बेखबर थी कि उसके ठीक पीछे कोई उसकी हर हरकत पर नजर रखे हुए है। उसकी अपनी उत्तेजना इतनी तीव्र थी कि उसे अपने आसपास की आहटों का आभास ही नहीं हुआ। वह बस अपनी उंगलियों से अपनी भीगी हुई चूत को सहला रही थी, यह सोचे बिना कि अंधेरे में उसकी यह बेबसी किसी और को आमंत्रित कर रही है।
जैसे ही अभय ने महसूस किया कि वह बिल्कुल शीलू के करीब है, उसने एक झटके से अपना मजबूत हाथ शीलू की कमर पर मारा और उसे अपनी ओर खींच लिया। अंधेरा इतना घना था कि शीलू को समझ ही नहीं आया कि वह कौन है, लेकिन उसके शरीर ने एक अनजान और ताकतवर मर्दानगी की मौजूदगी को महसूस किया। शीलू के मुंह से एक दबी हुई चीख निकली, लेकिन डर से ज्यादा उसमें एक अजीब सी सिहरन थी। अभय ने बिना एक शब्द बोले, उसकी गर्दन को अपने कंधे से सटाया और अपनी भारी सांसें उसके कान के पास छोड़ने लगा। दोनों एक-दूसरे के लिए अजनबी थे, लेकिन उस काली रात के सन्नाटे में उनकी शारीरिक भूख ने उन्हें एक-दूसरे के करीब ला खड़ा किया था।
नीलू ____
आह्ह्ह... आवारा... बस कर... मैं... मैं अब और नहीं सह पाऊँगी!" मेरी चीखें अब बगीचे की खामोशी को चीर रही थीं। आवारा का वह विशाल लठ मेरी गहराईयों को इस कदर रौंद रहा था कि मुझे लगा मेरा शरीर दो हिस्सों में बंट जाएगा। पसीने से तरबतर होकर मैं मिट्टी में धंसती जा रही थी और उसकी हर एक धपा-धप मुझे एक नए चरम की ओर ले जा रही थी।
मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और अपने नाखून आवारा की पीठ पर गड़ा दिए, जैसे मैं उसे अपने अंदर और गहराई से उतारना चाहती होऊँ। उसकी मर्दानगी का बोझ और वह बेरहम रफ़्तार मुझे मदहोश कर रही थी। मैं अब कोई लड़की नहीं, बल्कि केवल एक प्यासी रांड बन चुकी थी, जिसे सिर्फ और सिर्फ आवारा के उस भीमकाय हथियार की भूख थी। "और जोर से... साले... और जोर से चोद मुझे... उफ़्फ़्फ़!"
आवारा ने नीलू की कमर को और भी मजबूती से जकड़ लिया, जैसे वह उसे अपने शरीर में समा लेना चाहता हो। उसके चेहरे पर एक हिंसक संतोष था और उसकी आँखों में वासना का सैलाब उमड़ रहा था। उसने नीलू के कानों के पास अपना मुँह लाकर, उसकी उत्तेजित सांसों के बीच अपनी भारी और कड़क आवाज में दहाड़ते हुए कहा, "अरे मादरचोद रांड... तेरे जैसे ही प्यासी रांडों के लिए मेरे जैसे मर्द को बनाया गया है! ये ले साली... अब देख मेरी मर्दानगी का असली जलवा!"
इतना कहते ही आवारा ने अपनी कमर को एक आखिरी और सबसे शक्तिशाली झटके के साथ आगे बढ़ाया, जिससे उसका वह भीमकाय लठ नीलू की गहराईयों के सबसे आखिरी छोर तक जा पहुँचा। वह प्रहार इतना गहरा और ताकतवर था कि नीलू का पूरा शरीर बिजली की तरह कांप उठा और उसकी चीख पूरे बगीचे में गूँज उठी। आवारा ने उसे अपनी गिरफ्त में कसते हुए उसकी रूह तक को झकझोर दिया।
वह रुकने का नाम नहीं ले रहा था, बल्कि उसकी रफ्तार अब और भी हिंसक हो गई थी। उसने नीलू की आँखों में देखते हुए कड़कते हुए कहा, "याद रख रांड, आज के बाद तू चाहे दुनिया के किसी भी कोने में रहे, या किसी भी बिस्तर पर सोए, लेकिन जब तेरी यह चूत तड़पेगी, तो तू चुदने के लिए सिर्फ और सिर्फ अपने आवारा के पास ही आएगी। तू अब मेरी गुलाम है, समझी?"
बगीचे के उस अंधेरे कोने में, जहाँ आवारा और नीलू का मिलन अपने चरम पर था, वहीं दूसरी तरफ अभय और शीलू के बीच एक अलग ही खेल शुरू हो चुका था। अभय ने शीलू को अपनी ओर इतनी मजबूती से खींचा था कि उसकी पीठ अभय के सख्त सीने से जा टकराई। शीलू, जो अब तक सिर्फ एक दर्शक थी, अचानक इस खेल का हिस्सा बन चुकी थी। उसने महसूस किया कि उसके पीछे खड़ा मर्द आवारा से कम खूंखार नहीं था। उसकी भारी सांसें शीलू की गर्दन पर किसी गर्म लावा की तरह गिर रही थीं, जिससे उसके शरीर का रोम-रोम उत्तेजना से कांप उठा।
शीलू ने घबराकर पीछे मुड़ने की कोशिश की, लेकिन अभय के एक हाथ ने उसकी कमर को इतनी कसकर जकड़ रखा था कि वह चाहकर भी हिल नहीं पा रही थी। अभय ने अपना दूसरा हाथ धीरे से शीलू की ड्रेस के अंदर डाला और उसकी जांघों को सहलाते हुए ऊपर की ओर बढ़ने लगा। शीलू के मुंह से एक धीमी सिसकी निकली, "आह्ह... कौन हो तुम? मुझे... मुझे छोड़ो..." लेकिन उसकी आवाज़ में कोई सख्ती नहीं थी, बल्कि एक ऐसी पुकार थी जो उसे और करीब आने का निमंत्रण दे रही थी। अभय ने उसकी गर्दन पर अपने होंठ टिकाए और एक गहरी चुंबन लेते हुए फुसफुसाया, "चुप रह रांड... तूने देखा नहीं कि तेरी सहेली कैसे मजे ले रही है? अब तेरी बारी है।"
दोनों भाई बहन को एक दूसरे की आवाजे सुनी सुनी सी लगी लेकिन वासना से वशीभूत दोनों ने इस बात को इग्नोर किया,उन्हें लगा यह मात्र एक संजोग है
"आह्ह्ह्ह... उफ़्फ़्फ़!" मेरी चीखें अब किसी दर्द की नहीं, बल्कि उस चरम सुख की थीं जो आवारा के हर प्रहार के साथ बढ़ता जा रहा था। मेरा पूरा शरीर पसीने से तरबतर था और मेरी जांघें कांप रही थीं। जैसे ही आवारा ने मुझे और जोर से अपनी ओर खींचा, मुझे महसूस हुआ कि मैं अब पूरी तरह से उसके वश में हूँ। उसकी वह भीमकाय मर्दानगी मेरे अंदर इस कदर गहराई तक जा रही थी कि मुझे लगा मैं अब इस दुनिया से बाहर निकल जाऊंगी।
मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और उसके कंधों को कसकर जकड़ लिया। मुझे इस बात की कोई परवाह नहीं थी कि हम कहाँ हैं या कौन हमें देख रहा है। बस एक ही इच्छा थी कि यह पल कभी खत्म न हो। "साले... तूने तो सच में मुझे अपनी रांड बना लिया... और जोर से... और गहराई से चोद मुझे!" मेरी आवाज़ अब पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी और मैं बस उसकी रफ़्तार के साथ खुद को झूलने दे रही थी।
बगीचे के उस सन्नाटे में, जहाँ चाँद की रोशनी भी पेड़ों की घनी शाखाओं के पीछे छिप गई थी, अब केवल एक ही शोर गूँज रहा था। आवारा और नीलू के मिलन से पैदा होने वाली वह निरंतर 'थप-थप' की आवाज़ें अब पूरे वातावरण में एक लय की तरह फैल गई थीं। यह आवाज़ इतनी तीव्र और स्पष्ट थी कि दूर खड़े अभय और शीलू के कानों में किसी संगीत की तरह नहीं, बल्कि एक निमंत्रण की तरह गूँज रही थी। शीलू का शरीर उस आवाज़ के साथ तालमेल बिठाकर कांप रहा था, जैसे वह आवाज़ उसके भीतर की दबी हुई वासना को जगा रही हो।
अभय ने इस मौके का पूरा फायदा उठाया और अपनी पकड़ और भी मजबूत कर ली। उसने अपने भारी और खुरदरे हाथों को शीलू की ड्रेस के अंदर उतारा और उसकी नरम, उभार लेती हुई चूचियों को अपनी गिरफ्त में ले लिया। उसने बहुत ही धीमी और सधी हुई रफ़्तार से उन गद्देदार वक्रतलों को दबाना शुरू किया, जैसे वह उनकी कोमलता को नाप रहा हो। शीलू के मुँह से एक गहरी सिसकी निकली और उसकी आँखें बंद हो गईं।
अभय ने उसकी गर्दन के पास अपने होंठ लाकर, एक भारी और अधिकारपूर्ण आवाज में फुसफुसाते हुए कहा, "वाह रांड... क्या गजब की चूचियां हैं तेरी! इतनी भरी हुई कि मेरे जैसे मर्द के हाथों में भी पूरी तरह नहीं समा रहीं। तू तो सच में किसी की रांड बनने के लिए ही पैदा हुई है।" उसके हाथों का दबाव अब और बढ़ गया था, जिससे शीलू का पूरा शरीर बिजली के झटके की तरह कांप उठा और वह पूरी तरह अभय की मर्दानगी के आगे पिघलने लगी।
आवारा के भीमकाय लठ के प्रहार अब नीलू के शरीर की सहनशक्ति की सीमाओं को पार कर रहे थे। हर एक झटके के साथ वह ऊपर की ओर उछल रही थी और उसकी कमर एक धनुष की तरह तन जाती। वह चरम सुख और तीव्र संवेदनशीलता के उस मोड़ पर पहुँच चुकी थी जहाँ शब्द खत्म हो जाते हैं और केवल शरीर की भाषा बचती है।
उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे, लेकिन यह दर्द के नहीं बल्कि उस असीम लज्जत के थे जिसने उसके दिमाग को सुन्न कर दिया था। वह बस अपनी सिसकियों के सहारे उस तूफान को झेल रही थी जो उसके भीतर चल रहा था।
नीलू ____ आआह... उफ्फ... आरामममममम... से... मम्मीइई... आआह... आईईईई... मममममममीीईईई... बचालोओप्ओओ... ओ... आआआआअहुहह्हः!
आवारा ने नीलू की उन चरम सीमा वाली चीखों को सुना, तो उसके अंदर का जानवर और भी ज्यादा उत्तेजित हो गया। उसने अपनी कमर की रफ्तार को अब किसी मशीन की तरह तेज कर दिया, जिससे हर प्रहार नीलू के गर्भाशय के मुहाने से टकरा रहा था। उसके चेहरे पर एक क्रूर और विजयी मुस्कान थी, और उसकी सांसें अब भारी और उखड़ी हुई थीं।
उसने नीलू की गर्दन को एक हाथ से पीछे की ओर झुकाया और उसकी आंखों में देखते हुए, अपनी भारी और कड़कती हुई आवाज में दहाड़ा, "आह्ह्ह... मेरीीीीईई राअन्नन्न्नड! ऐसे ही चिल्ला... और जोर से चीख ताकि इस पूरे बगीचे को पता चले कि तू आज किसके हाथों लूटी जा रही है! उफ्फफ... तू सचचचचच में मेरीीीईईई पर्सनल रॉडआआआ कहलानेीईईई केईईई काबिल हैयेएएय! आआह!"
उसने एक आखिरी, सबसे भीषण और गहरा झटका दिया, जिससे नीलू का पूरा शरीर लगभग हवा में उछल गया और वह पूरी तरह से उसके वजन के नीचे दब गई। आवारा की मर्दानगी ने उसे अंदर से पूरी तरह झकझोर दिया था।
बगीचे के उस घने अंधेरे में, जहाँ आवारा और नीलू के मिलन की चरम सीमा अपनी चरम पर थी, वहाँ से उठने वाली चीखें और शब्दों का प्रहार केवल हवा में नहीं घुल रहा था, बल्कि वह एक अदृश्य लहर बनकर दूर खड़े अभय और शीलू के जिस्मों से टकरा रहा था। आवारा की वह कड़कती हुई आवाज़ और नीलू की मदहोश कर देने वाली सिसकारियाँ शीलू के कानों में किसी उत्तेजक मंत्र की तरह गूँज रही थीं, जिसने उसके भीतर की सारी हिचक और शर्म को जलाकर राख कर दिया था। वह अब केवल एक दर्शक नहीं रही थी; उसके अंदर की प्यास अब एक भूखे जानवर की तरह बाहर आने के लिए तड़प रही थी।
अभय ने महसूस किया कि शीलू का शरीर अब पूरी तरह से उसके हवाले हो चुका है। उसने अपनी पकड़ को और अधिक आक्रामक बना दिया और अपने भारी, खुरदरे हाथों को शीलू की ड्रेस के अंदर और गहराई तक ले गया। उसने शीलू की कोमल और उभार लेती हुई चूचियों को अपनी मजबूत गिरफ्त में जकड़ लिया। बिना किसी नरमी के, उसने उन गद्देदार वक्रतलों को बेदर्दी से मसलना शुरू किया, जैसे वह उसकी आत्मा को अपनी उंगलियों से निचोड़ लेना चाहता हो।
जैसे ही अभय के हाथों का दबाव बढ़ा, शीलू के मुँह से एक दबी हुई, भारी सिसकी निकली। उसे महसूस हुआ कि अभय के हाथों में वही खूंखार ताकत थी जो आवारा की आवाज़ में थी। उसकी चूचियों पर होने वाला वह बेदर्दी भरा प्रहार उसे दर्द तो दे रहा था, लेकिन वह दर्द उसे एक ऐसे सुख की ओर ले जा रहा था जिसे उसने पहले कभी महसूस नहीं किया था। वह अपनी जगह पर कांप उठी, उसकी सांसें अब उखड़ने लगी थीं और उसका पूरा शरीर उस मर्दाना ताकत के सामने पूरी तरह समर्पित हो गया।
बगीचे के उस सन्नाटे में, जहाँ नीलू और आवारा का मिलन अपनी चरम सीमा पर था, शीलू अब केवल एक मूक दर्शक बनकर नहीं रह सकती थी। अभय के उन भारी और खुरदरे हाथों ने जब उसकी चूचियों को बेरहमी से निचोड़ना शुरू किया, तो शीलू के भीतर का सारा संकोच एक पल में जलकर राख हो गया। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं और एक झटके में खुद को अभय के कठोर सीने से चिपका लिया, जैसे वह उसकी मर्दानगी की गर्मी में पूरी तरह पिघल जाना चाहती हो।
उसका शरीर अब किसी बिजली के तार की तरह कांप रहा था, और उसकी सांसें अब उखड़ी हुई, भारी सिसकियों में बदल चुकी थीं। उसने अपना चेहरा अभय के कंधे में छिपा लिया और उसकी पकड़ को और मजबूत होते महसूस करते हुए, उसने अपने भीतर के उस भूखे जानवर को बाहर आने दिया। उसके होंठों से अब केवल दबी हुई सिसकारियां नहीं, बल्कि बेकाबू चीखें निकलने लगी थीं, जो आवारा की आवाज़ के साथ मिलकर पूरे बगीचे में गूँज रही थीं।
शीलू _____ आआह... आईईईई... मम्मीइईई... उफ्फ... ऐसे ही... मेरे राजा... मुझे भी एक सख्त मर्द की जरूरत है... आआआआीईईई... ऐसे ही निचोड़ना... आआआआह्ह्ह्हः... उफ्फफ मम्मीईईई!
उसने अपनी कमर को अभय के शरीर से रगड़ना शुरू कर दिया, उसकी जांघें अब उत्तेजना से आपस में रगड़ रही थीं और उसकी चूचियाँ अभय के खुरदरे हाथों के नीचे पूरी तरह से कुचली जा रही थीं। वह अब इस दर्द और लज्जत के बीच के संतुलन को महसूस कर रही थी, और उसे यह एहसास हो रहा था कि वह भी अब उसी रास्ते पर चल पड़ी है जहाँ से कोई वापस नहीं आता—एक ऐसी रांड बनने का रास्ता, जिसकी पूरी दुनिया अब केवल एक सख्त मर्द की मर्दानगी के इर्द-गिर्द सिमट गई थी।
शीलू की उन बेकाबू चीखों और उसके शब्दों में छिपी उस बेतहाशा भूख ने अभय के अंदर के जानवर को पूरी तरह जगा दिया। जब उसने शीलू के मुंह से "मेरे राजा" जैसे शब्द सुने, तो उसके चेहरे पर एक विजयी और कुटिल मुस्कान फैल गई। उसे अहसास हो गया कि यह लड़की अब पूरी तरह उसके वश में है और उसकी मर्दानगी का स्वाद चखने के
लिए तड़प रही है।
अभय ने अपना एक हाथ शीलू की उन उभारती हुई चूचियों पर बनाए रखा, उन्हें किसी गीली मिट्टी की तरह बेरहमी से मसलते हुए, जिससे शीलू के शरीर में एक बार फिर बिजली सी दौड़ गई। लेकिन उसका दूसरा हाथ अब और नीचे की ओर बढ़ा। उसने बिना किसी देरी के अपनी पैंट की ज़िप खोली और अपने उस भीमकाय, पत्थर की तरह सख्त 10 इंच के लठ को बाहर आजाद कर दिया, जो अब उत्तेजना से लाल हो चुका था और बाहर निकलते ही उसकी गर्माहट ने आसपास की हवा को जैसे भारी कर दिया।
उसने अपनी कमर को थोड़ा झुकाया और उस विशाल हथियार को सीधे शीलू के छोटे और नरम हाथों में थमा दिया। जैसे ही शीलू की उंगलियों ने उस धमनियों से भरे, सख्त और गर्म लठ को छुआ, उसकी आँखों के सामने अंधेरा छा गया। उसने आज तक ऐसी ताकत और ऐसा आकार नहीं देखा था। अभय ने उसके कान के पास झुककर अपनी भारी आवाज में फुसफुसाया, "देख रांड... ये है वो हथियार जो आज तेरी रूह तक को झकझोर देगा। अब बता, क्या तू इस भारी वजन को झेलने के काबिल है?"
बगीचे के उस गहरे सन्नाटे में, जहाँ वासना का नंगा नाच चल रहा था, दूर से आती हुई 'थप-थप' की वह लयबद्ध आवाज़ अब शीलू के लिए किसी साधारण शोर की तरह नहीं, बल्कि एक कामुक संगीत की तरह काम कर रही थी। वह आवाज़, जो नीलू और आवारा के शरीर के आपस में टकराने से पैदा हो रही थी, शीलू के भीतर की उत्तेजना को और अधिक भड़का रही थी। उसे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे वह संगीत उसे पुकार रहा हो, उसे यह बताने के लिए कि वह भी अब इसी सुख के सागर में गोता लगाने वाली है।
तभी, जैसे ही शीलू की उंगलियों ने अभय के उस भीमकाय और पत्थर जैसा सख्त लौड़े को छुआ, उसके शरीर में एक ऐसा करंट दौड़ा कि उसकी रीढ़ की हड्डी तक कांप उठी। उस गर्म और धमनियों से भरे विशाल हथियार की छुअन ने उसकी सारी सोचने-समझने की शक्ति छीन ली। उसके मुँह से अपने आप एक गहरी और मदहोश कर देने वाली सिसकी निकली, "आआआह्ह्ह...!" उसकी आँखों के सामने तारे नाचने लगे और उसकी जांघें उत्तेजना के मारे आपस में कस गईं।
उसने एक पल के लिए अपनी सहेली नीलू के बारे में सोचा, जो कुछ ही दूरी पर आवारा के नीचे दबकर चरम सुख पा रही थी। शीलू के चेहरे पर एक कुटिल और विजयी मुस्कान तैर गई। उसने मन ही मन सोचा, "वाह! देख मेरी रण्डी दोस्त नीलू... तूने तो सोचा होगा कि सिर्फ तू ही इस बगीचे में लूटी जाएगी, लेकिन देख... मुझे भी एक ऐसा दमदार और खूंखार मर्द मिल गया है जो मेरी प्यास बुझाने के साथ-साथ मुझे आसमान की सैर कराएगा।" अब शीलू के अंदर की प्यास एक ऐसी आग बन चुकी थी, जिसे केवल अभय का वह विशाल लठ ही शांत कर सकता था।
शीलू की उंगलियों ने जब अभय के उस भीमकाय और धमनियों से भरे सख्त लठ को छुआ, तो वह बस उसे छूकर नहीं रुक पाई। वासना के उस उन्माद में, उसने अपने छोटे और नरम हाथों से उस गर्म और कठोर हथियार को कसकर जकड़ लिया और उसे किसी गीली मिट्टी की तरह मसलने लगी। वह उस मर्दाना ताकत को अपने हाथों में महसूस कर रही थी, और हर रगड़ के साथ उसके शरीर के भीतर एक नया ज्वालामुखी फट रहा था। वह इतनी उत्तेजित हो चुकी थी कि अब उसे किसी बात की परवाह नहीं थी; बस वह उस विशाल लठ को अपनी गिरफ्त में महसूस करना चाहती थी।
उधर, रात अपने चौथे पहर में पैर रख चुकी थी। आसमान का स्याह रंग अब धीरे-धीरे हल्का होने लगा था और सुबह की पहली किरणें इस बगीचे के अंधेरे को चीरने की तैयारी कर रही थीं। लेकिन इस खामोश होती रात में, नीलू और आवारा का मिलन अपने सबसे हिंसक और चरम बिंदु पर पहुँच चुका था। दोनों के शरीरों के बीच का टकराव अब एक पागलपन की हद तक पहुँच गया था। तभी, एक आखिरी और सबसे शक्तिशाली प्रहार के साथ, आवारा की एक गूँजती हुई दहाड़ और नीलू की एक तीखी चीख एक साथ पूरे बगीचे के सन्नाटे को चीरते हुए गूंजी। दोनों एक साथ चरम सुख के उस शिखर पर पहुँचे और झड़ गए। आवारा ने अपनी पूरी मर्दानगी के साथ अपना सारा गाढ़ा और गर्म द्रव नीलू की गहराइयों में छोड़ दिया, जिससे नीलू का शरीर एक आखिरी बार बुरी तरह कांप उठा।
दूर खड़ी शीलू ने जब नीलू और आवारा की उन अंतिम और असीम सुखद चीखों को सुना, तो वह समझ गई कि इस कामुक खेल का समय अब समाप्त होने वाला है। उसने धीरे से अपनी पकड़ ढीली की और अभय के बाहों से खुद को आजाद करते हुए, एक शरारती और मदहोश मुस्कान के साथ उसकी आँखों में देखा। उसने अपनी आवाज़ में एक अलग ही कशिश लाते हुए कहा, "अभी के लिए तुम जाओ... लेकिन याद रखना, मैं वादा करती हूँ कि अगली बार जब हमारी मुलाकात इसी बगीचे में होगी, तो वह इससे भी कहीं ज्यादा दमदार और खूंखार होगी।"
जैसे ही आवारा का वह भीमकाय लठ नीलू के भीतर अपनी पूरी गहराई तक पहुँचा और उसने अपना गरम द्रव उसके शरीर में छोड़ा, नीलू की रूह जैसे कांप उठी। वह कुछ पलों के लिए बिल्कुल निढाल हो गई, उसकी सांसें उखड़ी हुई थीं और पूरा शरीर पसीने से लथपथ था। लेकिन उस चरम सुख की लहर ने उसे एक ऐसी मानसिक गुलामी में बांध दिया था, जिससे अब बाहर निकलना उसके लिए नामुमकिन था। उसने महसूस किया कि आवारा ने केवल उसके शरीर को नहीं, बल्कि उसकी पूरी हस्ती को अपनी मर्दानगी के नीचे कुचल दिया है।
नीलू ने धीरे से अपनी आँखें खोलीं और आवारा के चेहरे की उस विजयी मुस्कान को देखा। उसकी आवाज़ अब भी कामुकता और संतुष्टि से भारी थी, जब उसने सिसकते हुए कहा, "वाह मेरे राजा... तूने तो आज मुझे सचमुच का गुलाम बना दिया। तेरे इस पत्थर जैसे सख्त डंडे ने मेरे भीतर अपनी ऐसी छाप छोड़ी है कि अब मैं तेरे बिना एक पल भी नहीं रह सकती। तूने मुझे पूरी तरह से अपना बना लिया है..."
इतना कहते ही, नीलू ने अपनी बाहें आवारा के गले में डाल दीं और अपनी पूरी चाहत के साथ उसके होठों को अपने होठों में कैद कर लिया। उसने एक गहरा और लंबा किस दिया, जैसे वह अपनी आत्मा को उसके हवाले कर रही हो। उस चुंबन में समर्पण भी था और एक ऐसी भूख भी, जो अब ताउम्र केवल आवारा की मर्दानगी से ही शांत होने वाली थी।
बगीचे की उस मदहोश कर देने वाली रात का शोर अब धीरे-धीरे शांत हो चुका था, लेकिन उसकी निशानियां नीलू के शरीर पर गहराई से छपी हुई थीं। कुछ ही समय बाद, गांव की कच्ची पगडंडियों पर एक स्कूटी तेज़ी से दौड़ती हुई नज़र आई, जिसे शीलू चला रही थी। शीलू के चेहरे पर अभी भी उस कामुक उत्तेजना की चमक बाकी थी, जबकि उसके पीछे बैठी नीलू की हालत कुछ और ही थी।
नीलू ने अपनी चुन्नी को बड़ी चतुराई से अपने शरीर के चारों ओर लपेट रखा था ताकि बाहर से सब कुछ सामान्य दिखे, लेकिन उस पतले कपड़े के नीचे वह पूर्ण रूप से नग्न थी। आवारा के उस भीमकाय और खूंखार लठ के प्रहारों ने उसे चरम सुख तो दिया था, लेकिन अब वासना की वह लहर शांत हो चुकी थी और उसकी जगह एक असहनीय शारीरिक पीड़ा ने ले ली थी। उसके निचले हिस्से में एक भारीपन और ऐसा दर्द महसूस हो रहा था जैसे उसके भीतर का हर कोना सूज गया हो।
स्कूटी के हर एक झटके के साथ नीलू के चेहरे पर दर्द की एक नई शिकन उभर आती। वह अपनी जांघों को सिकोड़ती और धीरे से सिसकती, क्योंकि आवारा की मर्दानगी ने उसे अंदर से पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया था। वह इतनी निढाल हो चुकी थी कि स्कूटी चलाने की ताकत उसमें बची ही नहीं थी, इसलिए वह चुपचाप पीछे बैठी अपने उस दर्द और संतुष्टि के मिश्रण को महसूस कर रही थी, जो उसे बार-बार उस अंधेरी रात की याद दिला रहा था।
वही दूसरी तरफ आवारा ने अपनी पैंट को ऊपर खींचकर सही किया और एक गहरी, संतोषजनक सांस ली, और अपने घर को चल दिया।
Sheelu ki chudai uska bhai hi kare aisa rakhana
Shilu ke chut aur boobs par tattoo banvaiye
बहुत ही शानदार कहानी अपडेट कब आएगा
Behtareen kahani hai bhai is jaldi pura karne ki koshish karein
wow awesome .......
Jald hi update pesh kr rha hu aap sab ke samneAap kaha se ho