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Bahut khoob,,,,,,जी चाहता है गले से लगाऊँ तुम्हें
पास बैठूँ तेरे कविता सुनाऊँ तुम्हें।
नाम मशहूर हो जायेगा दोनों का,
तुम बुलाओ मुझे मैं बुलाऊँ तुम्हें..
Shukriya bahut aapka Shubham bhai

Shukriya bhai,,,,,Oh ho zhereela

Na bhai,,,,Shubham bhai lagta he ik bar aur ishq ki raha pakad li he![]()

Hmm katl karne wala

Waaah bahut khoob,,,,,सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ
ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
~ ख़्वाजा मीर दर्द
Waaah bahut hi umda bhai,,,,,धर्मग्रन्थ सब जला चुकी है, जिसके अंतर की ज्वाला,
मंदिर, मस्जिद, गिरिजे, सब को तोड़ चुका जो मतवाला,
पंडित, मोमिन, पादिरयों के फंदों को जो काट चुका,
कर सकती है आज उसी का स्वागत मेरी मधुशाला।।
~ हरिवंशराय बच्चन