• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Fantasy Aryamani:- A Pure Alfa Between Two World's

nain11ster

Prime
23,612
80,684
259
Last edited:

nain11ster

Prime
23,612
80,684
259
भाग:–142


जैसे ही आर्यमणि का मुक्का कोको के कंधे से टकराया वहां का पूरा हिस्सा ही फुहार बनकर हवा में मिल गया। कोको के ऊपरी शरीर के बाएं हिस्से का पूरा परखच्चा उड़ा डाला। एनर्जी पंच इतना खरनाक था कि कोको के मौत की चीख निकलने से पहले ही उसकी मौत आ चुकी थी। सर तो धर पर ही था, लेकिन कमर तक के बाएं हिस्सा गायब होने की वजह से गर्दन बाएं ओर के हिस्से में ऐसे घुसी थी कि धर पर सर नजर ही नहीं आ रहा था।

आर्यमणि अपने हाथों पर लगे खून को साफ करते..... “तुम सब ठीक तो हो ना?”

रूही:– हां हम सब हील हो चुके है। तुम्हारी पीठ का क्या हाल है?

आर्यमणि:– शायद हील हो चुका हूं। दर्द नही अब। चलो चलकर नयोबि और उसकी टीम को ढूंढे। मर भी गये हो तो उनकी लाश को ऊपर सतह तक लेकर जाना जरूरी है।

अभी इनकी इतनी ही बातें हुई थी कि कोको के उस ऑफिस का दरवाजा खुल चुका था। किसी ऑफिसर की ड्रेस में भोसला सबसे आगे खड़ा था और उसके पीछे 100 हिम–मानव सेना की टुकड़ी। आर्यमणि और रूही दोनो भोसला को देखने लगे..... “ऐसे हैरानी से नही देखने का। मैं हूं कमांडर इन चीफ भोसला और जाने–अनजाने में तुमने मेरी मदद कर दी है।”...

आर्यमणि:– हां सो तो मैं इस जेलर और तुम्हारे पोस्ट को देखकर समझ चुका हूं कि तुम किसके पीछे थे। वैसे ये जेलर इतना खतरनाक था कि सेना के इतने बड़े अधिकारी को आना पड़ा?

भोसला:– “अरे मत पूछिए आर्यमणि सर, इसने अब तक मेरे 1200 जवानों को ऐसा निर्बल करके अपने इस फैक्टरी से बाहर भेजा की वो फिर कभी बाप बनने लायक नही रहे। पहुंच तो सीधा सेंट्रल मिनिस्ट्री तक की थी। इसका चाचा काउंसिल मिनिस्टर, हमारे हर मूवमेंट की खबर इसे पहले से होती। यहां सबूत के नाम पर ढेला तक नही मिलता। इसने इतने इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर को नपुंसक बनाकर भेजा की गुस्से में इसे मरवाने के लिये साजिश तक रच डाले।”

“लेकिन पता नही इस कोको ने कितनी शक्ति अर्जित कर रखी थी, कोई इसे छू भी नहीं पाया। ऊपर से अंडर कवर ऑपरेशन में आज तक इसके गुनाहों का कोई भी सबूत नही मिला क्योंकि जब भी कोई टीम इसके ऑफिस में घुसने के बाद सबूत जुटने की कोशिश किये वो फिर अपने अंदर के खोये शक्ति को वापस जुटा नही पाये। खैर अब तुम लोग बाहर आ जाओ, हम जरा इसके खिलाफ सबूत जुटा ले, वरना तुम पर एक सरकारी अधिकारी को मारने का मुकदमा चलेगा।

आर्यमणि:– और मेरे लोग (नयोबि और उसकी टीम) जिसे इसने कहीं गायब कर दिया है?

भोसला:– चिंता मत करो वह सुरक्षित है। उन्हे भी ढूंढकर बाहर लता हूं। मोनेसर, आर्यमणि और उसके साथियों का भव्य स्वागत करो।

एक मुलाजिम को खातिरदारी में लगाकर भोसला कोको के किले में घुस गया। तकरीबन 4 घंटे बाद वह नयोबि और उसके टीम के साथ बाहर आया। नयोबि अपने पैड़ो पर ही आ रहा था लेकिन उसकी हालत लूटी–पीटी हुई थी। आते ही आर्यमणि के ऊपर लद गया.... “दोस्त जैसे गन्ने से उसका सारा रस चूस लेते हैं वैसे ही शरीर से सब कुछ चूस लिया।”...

आर्यमणि हंसते हुये.... “कोई नही दोस्त अल्केमिस्ट जिंदाबाद। अपने शरीर को फिर से मोडिफाई करवा लेना।”...

नयोबि:– जेल प्रशासन ने हमारे लिये खून का इंतजाम किया था। किसी से बोलकर 20–30 लीटर खून का इंतजाम करवा दो, वरना भूख से कहीं जान न निकल जाये।

आर्यमणि:– भोसला सर कोई उपाय है?

भोसला:– हमारी जेल में हर किसी के खाने का इंतजाम रहता है। मानेसर इन्हे लेकर जाओ और इनके प्रिय भोजन का इंतजाम करो। आर्यमणि तुम मेरे साथ आओ।

आर्यमणि, भोसला के साथ वापस से कोको के किले में घुसा। भोसला उसे तहखाने में ले जाकर वहां का नजारा दिखाया। पूरे तहखाने में सिशे के मोटे ट्यूब लगे थे, जिसमे किसी प्रकार का द्रव्य भरा था। हर ट्यूब के नीचे धातु का मोटा गोलाकार चेंबर लगा हुआ था। सभी ट्यूब के नीचे का चेंबर वायर द्वारा एक दूसरे से कनेक्ट था और उसका सबसे आखरी सिरा किसी सर्किट बोर्ड से जुड़ा हुआ था। उस सर्किट बोर्ड के चारो ओर कई सारे पत्थर कनेक्ट थे।

आर्यमणि, वहां का नजारा देखते.... “ये कौन सी जगह है।”...

भोसला:– ये है कोको के खिलाफ सबूत। जितने भी मोटे ट्यूब देख रहे हो। लोग पोर्ट होकर इन्ही ट्यूब में घुसते और उनकी शक्ति बाहर निकलकर कोको के पास। कमाल की इंजीनियरिंग और कमाल का सर्किट बोर्ड है। मुझे एक बात बताओ, तुम्हे भी तो कोको ने पोर्ट किया होगा, फिर तुम क्यों नही पोर्ट हुये?

आर्यमणि:– मेरे आचार्य जी ने कहा था मेरा जन्म बहुत ही खास नक्षत्र में हुआ था। मैं किस्मत लेकर पैदा हुआ हूं। पहले नही मानता था, लेकिन धीरे–धीरे उनकी बात पर यकीन हो गया।

इतना कहने के बाद आर्यमणि अपने एम्यूलेट से एक मोती समान पत्थर निकालकर दिखाते.... “ये पत्थर तुम्हारे यहां के क्रिस्टल से मिला था। इसी की वजह से पोर्ट करने वाली किरणों का असर हम पर नही हुआ था।”

भोसला:– ये तो निष्प्रभावित पत्थर है। इसका प्रयोग हम अपने खेतों में करते है। सूर्य ऊर्जा को फैलाने के क्रम में हीरों के अंदर से कुछ खतरनाक किरणे निकलती है। उन किरणों का असर इंसानी शरीर पर नही होता किंतु पेड़–पौधे और फसल खराब हो जाते है। निष्प्रभावित पत्थर ऐसे सभी जहरीली किरणों का असर समाप्त कर देता है। बहुत ही गुणकारी पत्थर है। इस पत्थर को दोस्त और दुश्मनों की पहचान है। दोस्त को प्रभावित रहने देता है लेकिन दुश्मनों को एक हद तक निष्क्रिय कर देता है।

आर्यमणि:– एक हद तक, मतलब कितनी हद?

भोसला:– 10000⁰ तापमान को निष्क्रिय कर देगा लेकिन उसके ऊपर एक भी डिग्री तापमान बढ़ा तो निष्प्रभावित पत्थर काम नही करेगा। 50000 बुलेट एक साथ हमला करे तो उसका असर नही होने देगा, लेकिन संख्या एक भी ज्यादा हुई तो पत्थर काम नही करेगा। 2 चीजों में हमने हद टेस्ट किया था सो बता दिया। अब चलो वो पत्थर हमे दे दो। पत्थर के मामले में हमारी एक ही पॉलिसी है, कोई समझौता नही। चलो जितने भी पत्थर अपने पास रखे हो सब दे दो।

आर्यमणि:– जितने भी पत्थर से क्या मतलब है तुम्हारा....

भोसला अपने हाथ में एक छोटा सा डिवाइस के 3–4 बटन को दबाने के बाद स्क्रीन आर्यमणि के ओर घुमा दिया... स्क्रीन के ऊपर 80 लिखा आ रहा था। भोसले वो नंबर दिखाते.... “तुम्हारे पास कुल 80 पत्थर है। सब निकालो।”...

आर्यमणि:– ओ भाई 40 तुम्हारे यहां के पत्थर है, 40 मैं पहले से लेकर आया था।

भोसला:– हां ये मुझे अच्छे से पता है। तुम्हारे साथ 3 और लोग है जो अपने गोल से उस एम्यूलेट में पत्थर रखे है। लेकिन यहां जो भी पत्थर आया वो हमारा है। अपने देश की पॉलिसी साफ है।

आर्यमणि:– ठीक है तुम हम सबका एम्यूलेट ले लेना। अब जरा काम की बातें हो जाये।

भोसला:– हां मुझे वो काम की बात पता है। तुम्हे यहां नही रहना। देखो दोस्त हम मजबूर है और किसी को भी अपने देश से बाहर नही जाने दे सकते। इस जगह को देखने के बाद कहीं और जाने देना हमारी पॉलिसी ही नही।

आर्यमणि:– इसका मतलब यहां के लोगों से हमे लंबी लड़ाई लड़नी होगी।

भोसला:– ऐसा करने की सोचना भी मत। मैं अपने रिस्क और गैरेंटी पर तुम्हे जाने दूंगा लेकिन एक छोटी सी शर्त है।

आर्यमणि:– क्या?

भोसला:– आज से 30 वर्ष पूर्व किसी वैज्ञानिक ने गोमेत नदी किनारे कुछ ऐसा एक्सपेरिमेंट किया था जिस वजह से उस इलाके की पूरी आबादी ऐसे बीमारी के चपेट में आ गयी कि वो आज तक बिस्तर से उठे ही नही। मशीनों की मदद से हम 6 करोड़ लोगों को लाइफ सपोर्ट तो दिये है, लेकिन इसका बोझ हमारे आम जनता को उठाना पड़ रहा है। उसी घटना के बाद से हमने अपनी पॉलिसी बदल ली। पहले सतह पर साइंस एक्सपेरिमेंट के लिये बने निर्माण से हमे कोई लेना देना नही था, लेकिन उस घटना के बाद समझ ही सकते हो पॉलिसी में क्या बदलाव हुआ होगा।

आर्यमणि:– 6 करोड़ लोगों को पिछले 30 साल से लाइफ सपोर्ट दिये हो। यहां के प्रतिनिधियों के जज्बे को सलाम। अल्फा पैक सबको हील करने का वादा करती है। उसके बाद तो हमें जाने दोगे न।

भोसला:– न सिर्फ तुम्हे बल्कि यदि हमारी दुनिया के बारे में जो–जो इंसान चर्चा नही करेगा, तुम्हारे भरोसे मैं उन्हे भी जाने दूंगा। यही नहीं, तुम जिस जगह चाहो उस जगह को चुन लो, वहां तुम्हारे साइंस लैब के निर्माण में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आने देंगे। यहां तक की ढांचा यदि गड़बड़ हुआ तो बिना तुम्हारे इंजीनियर की नजरों में आये उस ढांचे तक को सुधार देंगे। बस तुम उन सभी लोगों को पहले की तरह सामान्य कर दो। जिस प्रकार से सबको मारने के एक साथ

आर्यमणि:– ठीक है मैं पूरी कोशिश करूंगा। लेकिन तुम भी अपने बात को याद रखना।

भोसला:– याद रखने की जरूरत नहीं है दोस्त। हमारी बातें ऑन रिकॉर्ड है, एक कॉपी जबतक तुम्हे न मिले अपना काम शुरू मत करना।

आर्यमणि, भोसला से मीटिंग समाप्त करके बाहर आया। उसने पूरी कहानी अल्फा पैक से साझा किया। वेमपायर को छोड़कर अल्फा पैक भोसला के साथ उड़ान भर चुकी थी। गोमेत नदी किनारे के बसा शहर जब आर्यमणि पहुंचा, तब आर्यमणि वहां का नजारा देख एक बार फिर रोलफेल के शासन को सलाम करने लगा। पूरे शहर को ही हॉस्पिटल में तब्दील कर दिया था। 6 करोड़ बीमार लोगों के लिये वहां 10 लाख डॉक्टर नियुक्त किये गये थे। पूरे देश में कहीं भी क्रिटिकल केस होता था तब नागरिकों को मजबूरी में इन्ही इलाकों के ओर रुख करना पड़ता था। सारे स्पेशलिस्ट और अच्छे डॉक्टरों को तो यहीं रखा गया था।

अल्फा पैक वहां पहुंचते ही सबसे पहले चार लोगों को हील किया। अपने शरीर के अंदर पहुंचे टॉक्सिक और वायरस को पचाने की क्षमता को कैलकुलेट किये। जिन चारो को अल्फा पैक ने पहले हील किया उन्हे उठकर खड़े होते देख, भोसला और डॉक्टर की टीम तो खुशी से नाचने लगे।

अल्फा पैक को भी बहुत ज्यादा मुश्किल काम नहीं लगा। वहां मौजूद हर किसी के शरीर में किसी प्रकार का एक्सपेरिमेंटल वायरस था, जिसे हील करने में अल्फा पैक को कोई परेशानी नही थी। फिर तो पूरा का पूरा हॉस्पिटल जड़ों में ढाका होता और अल्फा पैक आबादी के आबादी हील करते रहते। देखते ही देखते हर दिन 8 से 10 लाख लोग हील होकर खड़े होते और उन्हे देश के विभिन्न हिस्सों में भेज दिया जाता।

लगभग 5 महीनो तक सभी 6 करोड़ लोग हील होकर अपने–अपने परिवार अथवा रिश्तेदार के पास पहुंच चुके थे। भोसला तो फूले न समा रहा था। धन्यवाद कह–कह कर वह थका नही। अंत में जैसा की उसने वादा किया था, आर्यमणि जिसे चाहे अपने भरोसे पर ले जा सकता था। आर्यमणि ने उन 1600 लोगों को चुन लिया जो 6 बार निर्माण के लिये पहुंचे और गायब हो चुके थे। साथ में वेमपायर की टीम भी।

सुरक्षा के लिहाज से भोसला ने पूछा की क्या ये इंसान कभी किसी से हमारे दुनिया के बारे में चर्चा नही करेंगे। उसके इस सवाल पर आर्यमणि मुस्कुराया और सभी 1600 लोगों को जड़ में कैद करने के बाद उनकी कुछ वक्त की यादों को मिटाकर सबको सुलाते.... “इनमे से किसी को याद ही नहीं रहेगा की वो यहां आये भी थे। लो हो गया न पूर्ण भरोसा।”...

भोसला वेमपायर के ओर इशारा करते..... “और इनका क्या?”...

आर्यमणि:– इंसानी दुनिया में हमारी तरह ये लोग भी अपने समुदाय के अस्तित्व को छिपाकर रखते हैं, इसलिए ये किसी से कुछ नही बता सकते।

भोसला आर्यमणि के गले लगते.... “मुझे पता नही की तुम सबके पास पत्थर कहां से मिला होगा, लेकिन मिला सही लोगों को। निष्प्रभावित पत्थर मेरे ओर से छोटा सा भेंट है। इसे संभालकर इस्तमाल करना और गलत हाथों में नही आने देना। चलो तुम सबको सतह तक छोड़ आऊं।”

एक बार फिर आर्यमणि उसी छत पर था जहां वह पहली बार फसा था। भोसला ने ऑर्डर दिया और देखते ही देखते वह छत कई किलोमीटर ऊपर तक जाने लगा। सर के ऊपर दिख रहा आसमान धीरे–धीरे हटने लगा था। दरअसल वह आसमान न होकर एक प्रकार का सुरक्षा घेरा था। उसके हटते ही ऊपर धातु की मजबूत चादर दिखने लगी। जैसे ही लिफ्ट ऊपर तक पहुंची वह चादर खुल गया और लिफ्ट उन सबको लेकर सतह तक पहुंच चुकी थी।

3 बार मे वह लिफ्ट सबको ऊपर पहुंचा चुकी थी। 6 बार में जितने भी समान खोये थे वो सब सतह पर आ चुका था। नयोबि, भोसला के लोगों की मदद से तुरंत ही चारो ओर टेंट लगवाया और सभी 1600 इंसानों को गरम टेंट में डाला। भोसला एक आखरी बार अल्फा पैक से मिलकर भूमिगत हो गया और आर्यमणि निर्माण कार्य के जगह के देखने लगा।

नयोबि:– तुम्हारे साथ काम करके अच्छा अनुभव रहा। अब मैं ज्वाइंट डायरेक्टर जूलिया को खबर कर दूं ताकि काम आगे बढ़ सके।

आर्यमणि:– ओ भाई मार्च में निकला था अभी अक्टूबर समाप्त होने को आ गया है। हमे कैलिफोर्निया भिजवाने का भी बंदोबस्त करो।

नयोबि:– हां जूलिया से ही संपर्क कर रहा हूं। वो यहां आ जाये फिर उसके बाद जूलिया और तुम जानो।

नयोबि के पंटर काम पर लग गये। जूलिया 4 दिन बाद वहां पहुंची। सभी लापता लोगों को सुरक्षित देख वह बयान नही कर पायी की वो कितनी खुश है। जूलिया को इतनी बड़ी सफलता की उम्मीद नहीं थी जो आर्यमणि उसकी झोली में डाल चुका था। जूलिया ने पूरी रिपोर्ट वाशिंगटन डीसी तक पहुंचा दी। वॉशिंगटन डीसी से ऑफिशियल प्रेस रिलीज हुआ जहां जूलिया और उसके टीम की जमकर तारीफ हुई। हां लेकिन इस तारीफ में कहीं भी अल्फा पैक नही था।

जूलिया खुद आर्यमणि को कैलिफोर्निया तक छोड़ने पहुंची। जूलिया विदा लेने से पहले अल्फा पैक को एफबीआई एसोसिएट्स का दर्जा दिया। यही नहीं उन लोगों को एफबीआई की आईडी भी दी। जूलिया जाते वक्त इतना ही कही..... “जब भी किसी गैर–कानूनी लोग को मारना हो तो उसे कानूनी तरीके से मरना और पूरा सबूत की फाइल मुझे मेल कर देना, बाकी मैं संभाल लूंगी।” जूलिया अपनी बात कहकर रवाना हो गयी और अल्फा पैक एक बार फिर अपने कॉटेज की साफ सफाई में लग गये।

 

CFL7897

Be lazy
449
947
93
Bhosale to gupt agent nikala....

Uski janta ki dayaniy halat aur waha ki sarkar ka intazam dekhkar aarya ko dukh aur khsi ka abhas hua..

6 karor logo ko heal karna wakiye bahut hi nayab karnama kia pack ne....lekin in sab me 5 mahine lag gaye....itane din me inke dusmano ne bhi kuch na kuch ranniti bana li hogi...

Palak bhi apne KHASH DOSTO se mulakat kar li hogi???

Shdi ka time bhi nazdik aa chuka hai...
Waise Nain bhai sadi kis riwaz karwoge Wolf Ya Insani.....batao... batao.......hahhaha.
Just kidding...

Shandar update...
 

Vk248517

I love Fantasy and Sci-fiction story.
5,797
17,885
189
भाग:–142


जैसे ही आर्यमणि का मुक्का कोको के कंधे से टकराया वहां का पूरा हिस्सा ही फुहार बनकर हवा में मिल गया। कोको के ऊपरी शरीर के बाएं हिस्से का पूरा परखच्चा उड़ा डाला। एनर्जी पंच इतना खरनाक था कि कोको के मौत की चीख निकलने से पहले ही उसकी मौत आ चुकी थी। सर तो धर पर ही था, लेकिन कमर तक के बाएं हिस्सा गायब होने की वजह से गर्दन बाएं ओर के हिस्से में ऐसे घुसी थी कि धर पर सर नजर ही नहीं आ रहा था।

आर्यमणि अपने हाथों पर लगे खून को साफ करते..... “तुम सब ठीक तो हो ना?”

रूही:– हां हम सब हील हो चुके है। तुम्हारी पीठ का क्या हाल है?

आर्यमणि:– शायद हील हो चुका हूं। दर्द नही अब। चलो चलकर नयोबि और उसकी टीम को ढूंढे। मर भी गये हो तो उनकी लाश को ऊपर सतह तक लेकर जाना जरूरी है।

अभी इनकी इतनी ही बातें हुई थी कि कोको के उस ऑफिस का दरवाजा खुल चुका था। किसी ऑफिसर की ड्रेस में भोसला सबसे आगे खड़ा था और उसके पीछे 100 हिम–मानव सेना की टुकड़ी। आर्यमणि और रूही दोनो भोसला को देखने लगे..... “ऐसे हैरानी से नही देखने का। मैं हूं कमांडर इन चीफ भोसला और जाने–अनजाने में तुमने मेरी मदद कर दी है।”...

आर्यमणि:– हां सो तो मैं इस जेलर और तुम्हारे पोस्ट को देखकर समझ चुका हूं कि तुम किसके पीछे थे। वैसे ये जेलर इतना खतरनाक था कि सेना के इतने बड़े अधिकारी को आना पड़ा?

भोसला:– “अरे मत पूछिए आर्यमणि सर, इसने अब तक मेरे 1200 जवानों को ऐसा निर्बल करके अपने इस फैक्टरी से बाहर भेजा की वो फिर कभी बाप बनने लायक नही रहे। पहुंच तो सीधा सेंट्रल मिनिस्ट्री तक की थी। इसका चाचा काउंसिल मिनिस्टर, हमारे हर मूवमेंट की खबर इसे पहले से होती। यहां सबूत के नाम पर ढेला तक नही मिलता। इसने इतने इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर को नपुंसक बनाकर भेजा की गुस्से में इसे मरवाने के लिये साजिश तक रच डाले।”

“लेकिन पता नही इस कोको ने कितनी शक्ति अर्जित कर रखी थी, कोई इसे छू भी नहीं पाया। ऊपर से अंडर कवर ऑपरेशन में आज तक इसके गुनाहों का कोई भी सबूत नही मिला क्योंकि जब भी कोई टीम इसके ऑफिस में घुसने के बाद सबूत जुटने की कोशिश किये वो फिर अपने अंदर के खोये शक्ति को वापस जुटा नही पाये। खैर अब तुम लोग बाहर आ जाओ, हम जरा इसके खिलाफ सबूत जुटा ले, वरना तुम पर एक सरकारी अधिकारी को मारने का मुकदमा चलेगा।

आर्यमणि:– और मेरे लोग (नयोबि और उसकी टीम) जिसे इसने कहीं गायब कर दिया है?

भोसला:– चिंता मत करो वह सुरक्षित है। उन्हे भी ढूंढकर बाहर लता हूं। मोनेसर, आर्यमणि और उसके साथियों का भव्य स्वागत करो।

एक मुलाजिम को खातिरदारी में लगाकर भोसला कोको के किले में घुस गया। तकरीबन 4 घंटे बाद वह नयोबि और उसके टीम के साथ बाहर आया। नयोबि अपने पैड़ो पर ही आ रहा था लेकिन उसकी हालत लूटी–पीटी हुई थी। आते ही आर्यमणि के ऊपर लद गया.... “दोस्त जैसे गन्ने से उसका सारा रस चूस लेते हैं वैसे ही शरीर से सब कुछ चूस लिया।”...

आर्यमणि हंसते हुये.... “कोई नही दोस्त अल्केमिस्ट जिंदाबाद। अपने शरीर को फिर से मोडिफाई करवा लेना।”...

नयोबि:– जेल प्रशासन ने हमारे लिये खून का इंतजाम किया था। किसी से बोलकर 20–30 लीटर खून का इंतजाम करवा दो, वरना भूख से कहीं जान न निकल जाये।

आर्यमणि:– भोसला सर कोई उपाय है?

भोसला:– हमारी जेल में हर किसी के खाने का इंतजाम रहता है। मानेसर इन्हे लेकर जाओ और इनके प्रिय भोजन का इंतजाम करो। आर्यमणि तुम मेरे साथ आओ।

आर्यमणि, भोसला के साथ वापस से कोको के किले में घुसा। भोसला उसे तहखाने में ले जाकर वहां का नजारा दिखाया। पूरे तहखाने में सिशे के मोटे ट्यूब लगे थे, जिसमे किसी प्रकार का द्रव्य भरा था। हर ट्यूब के नीचे धातु का मोटा गोलाकार चेंबर लगा हुआ था। सभी ट्यूब के नीचे का चेंबर वायर द्वारा एक दूसरे से कनेक्ट था और उसका सबसे आखरी सिरा किसी सर्किट बोर्ड से जुड़ा हुआ था। उस सर्किट बोर्ड के चारो ओर कई सारे पत्थर कनेक्ट थे।

आर्यमणि, वहां का नजारा देखते.... “ये कौन सी जगह है।”...

भोसला:– ये है कोको के खिलाफ सबूत। जितने भी मोटे ट्यूब देख रहे हो। लोग पोर्ट होकर इन्ही ट्यूब में घुसते और उनकी शक्ति बाहर निकलकर कोको के पास। कमाल की इंजीनियरिंग और कमाल का सर्किट बोर्ड है। मुझे एक बात बताओ, तुम्हे भी तो कोको ने पोर्ट किया होगा, फिर तुम क्यों नही पोर्ट हुये?

आर्यमणि:– मेरे आचार्य जी ने कहा था मेरा जन्म बहुत ही खास नक्षत्र में हुआ था। मैं किस्मत लेकर पैदा हुआ हूं। पहले नही मानता था, लेकिन धीरे–धीरे उनकी बात पर यकीन हो गया।

इतना कहने के बाद आर्यमणि अपने एम्यूलेट से एक मोती समान पत्थर निकालकर दिखाते.... “ये पत्थर तुम्हारे यहां के क्रिस्टल से मिला था। इसी की वजह से पोर्ट करने वाली किरणों का असर हम पर नही हुआ था।”

भोसला:– ये तो निष्प्रभावित पत्थर है। इसका प्रयोग हम अपने खेतों में करते है। सूर्य ऊर्जा को फैलाने के क्रम में हीरों के अंदर से कुछ खतरनाक किरणे निकलती है। उन किरणों का असर इंसानी शरीर पर नही होता किंतु पेड़–पौधे और फसल खराब हो जाते है। निष्प्रभावित पत्थर ऐसे सभी जहरीली किरणों का असर समाप्त कर देता है। बहुत ही गुणकारी पत्थर है। इस पत्थर को दोस्त और दुश्मनों की पहचान है। दोस्त को प्रभावित रहने देता है लेकिन दुश्मनों को एक हद तक निष्क्रिय कर देता है।

आर्यमणि:– एक हद तक, मतलब कितनी हद?

भोसला:– 10000⁰ तापमान को निष्क्रिय कर देगा लेकिन उसके ऊपर एक भी डिग्री तापमान बढ़ा तो निष्प्रभावित पत्थर काम नही करेगा। 50000 बुलेट एक साथ हमला करे तो उसका असर नही होने देगा, लेकिन संख्या एक भी ज्यादा हुई तो पत्थर काम नही करेगा। 2 चीजों में हमने हद टेस्ट किया था सो बता दिया। अब चलो वो पत्थर हमे दे दो। पत्थर के मामले में हमारी एक ही पॉलिसी है, कोई समझौता नही। चलो जितने भी पत्थर अपने पास रखे हो सब दे दो।

आर्यमणि:– जितने भी पत्थर से क्या मतलब है तुम्हारा....

भोसला अपने हाथ में एक छोटा सा डिवाइस के 3–4 बटन को दबाने के बाद स्क्रीन आर्यमणि के ओर घुमा दिया... स्क्रीन के ऊपर 80 लिखा आ रहा था। भोसले वो नंबर दिखाते.... “तुम्हारे पास कुल 80 पत्थर है। सब निकालो।”...

आर्यमणि:– ओ भाई 40 तुम्हारे यहां के पत्थर है, 40 मैं पहले से लेकर आया था।

भोसला:– हां ये मुझे अच्छे से पता है। तुम्हारे साथ 3 और लोग है जो अपने गोल से उस एम्यूलेट में पत्थर रखे है। लेकिन यहां जो भी पत्थर आया वो हमारा है। अपने देश की पॉलिसी साफ है।

आर्यमणि:– ठीक है तुम हम सबका एम्यूलेट ले लेना। अब जरा काम की बातें हो जाये।

भोसला:– हां मुझे वो काम की बात पता है। तुम्हे यहां नही रहना। देखो दोस्त हम मजबूर है और किसी को भी अपने देश से बाहर नही जाने दे सकते। इस जगह को देखने के बाद कहीं और जाने देना हमारी पॉलिसी ही नही।

आर्यमणि:– इसका मतलब यहां के लोगों से हमे लंबी लड़ाई लड़नी होगी।

भोसला:– ऐसा करने की सोचना भी मत। मैं अपने रिस्क और गैरेंटी पर तुम्हे जाने दूंगा लेकिन एक छोटी सी शर्त है।

आर्यमणि:– क्या?

भोसला:– आज से 30 वर्ष पूर्व किसी वैज्ञानिक ने गोमेत नदी किनारे कुछ ऐसा एक्सपेरिमेंट किया था जिस वजह से उस इलाके की पूरी आबादी ऐसे बीमारी के चपेट में आ गयी कि वो आज तक बिस्तर से उठे ही नही। मशीनों की मदद से हम 6 करोड़ लोगों को लाइफ सपोर्ट तो दिये है, लेकिन इसका बोझ हमारे आम जनता को उठाना पड़ रहा है। उसी घटना के बाद से हमने अपनी पॉलिसी बदल ली। पहले सतह पर साइंस एक्सपेरिमेंट के लिये बने निर्माण से हमे कोई लेना देना नही था, लेकिन उस घटना के बाद समझ ही सकते हो पॉलिसी में क्या बदलाव हुआ होगा।

आर्यमणि:– 6 करोड़ लोगों को पिछले 30 साल से लाइफ सपोर्ट दिये हो। यहां के प्रतिनिधियों के जज्बे को सलाम। अल्फा पैक सबको हील करने का वादा करती है। उसके बाद तो हमें जाने दोगे न।

भोसला:– न सिर्फ तुम्हे बल्कि यदि हमारी दुनिया के बारे में जो–जो इंसान चर्चा नही करेगा, तुम्हारे भरोसे मैं उन्हे भी जाने दूंगा। यही नहीं, तुम जिस जगह चाहो उस जगह को चुन लो, वहां तुम्हारे साइंस लैब के निर्माण में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आने देंगे। यहां तक की ढांचा यदि गड़बड़ हुआ तो बिना तुम्हारे इंजीनियर की नजरों में आये उस ढांचे तक को सुधार देंगे। बस तुम उन सभी लोगों को पहले की तरह सामान्य कर दो। जिस प्रकार से सबको मारने के एक साथ

आर्यमणि:– ठीक है मैं पूरी कोशिश करूंगा। लेकिन तुम भी अपने बात को याद रखना।

भोसला:– याद रखने की जरूरत नहीं है दोस्त। हमारी बातें ऑन रिकॉर्ड है, एक कॉपी जबतक तुम्हे न मिले अपना काम शुरू मत करना।

आर्यमणि, भोसला से मीटिंग समाप्त करके बाहर आया। उसने पूरी कहानी अल्फा पैक से साझा किया। वेमपायर को छोड़कर अल्फा पैक भोसला के साथ उड़ान भर चुकी थी। गोमेत नदी किनारे के बसा शहर जब आर्यमणि पहुंचा, तब आर्यमणि वहां का नजारा देख एक बार फिर रोलफेल के शासन को सलाम करने लगा। पूरे शहर को ही हॉस्पिटल में तब्दील कर दिया था। 6 करोड़ बीमार लोगों के लिये वहां 10 लाख डॉक्टर नियुक्त किये गये थे। पूरे देश में कहीं भी क्रिटिकल केस होता था तब नागरिकों को मजबूरी में इन्ही इलाकों के ओर रुख करना पड़ता था। सारे स्पेशलिस्ट और अच्छे डॉक्टरों को तो यहीं रखा गया था।

अल्फा पैक वहां पहुंचते ही सबसे पहले चार लोगों को हील किया। अपने शरीर के अंदर पहुंचे टॉक्सिक और वायरस को पचाने की क्षमता को कैलकुलेट किये। जिन चारो को अल्फा पैक ने पहले हील किया उन्हे उठकर खड़े होते देख, भोसला और डॉक्टर की टीम तो खुशी से नाचने लगे।

अल्फा पैक को भी बहुत ज्यादा मुश्किल काम नहीं लगा। वहां मौजूद हर किसी के शरीर में किसी प्रकार का एक्सपेरिमेंटल वायरस था, जिसे हील करने में अल्फा पैक को कोई परेशानी नही थी। फिर तो पूरा का पूरा हॉस्पिटल जड़ों में ढाका होता और अल्फा पैक आबादी के आबादी हील करते रहते। देखते ही देखते हर दिन 8 से 10 लाख लोग हील होकर खड़े होते और उन्हे देश के विभिन्न हिस्सों में भेज दिया जाता।

लगभग 5 महीनो तक सभी 6 करोड़ लोग हील होकर अपने–अपने परिवार अथवा रिश्तेदार के पास पहुंच चुके थे। भोसला तो फूले न समा रहा था। धन्यवाद कह–कह कर वह थका नही। अंत में जैसा की उसने वादा किया था, आर्यमणि जिसे चाहे अपने भरोसे पर ले जा सकता था। आर्यमणि ने उन 1600 लोगों को चुन लिया जो 6 बार निर्माण के लिये पहुंचे और गायब हो चुके थे। साथ में वेमपायर की टीम भी।

सुरक्षा के लिहाज से भोसला ने पूछा की क्या ये इंसान कभी किसी से हमारे दुनिया के बारे में चर्चा नही करेंगे। उसके इस सवाल पर आर्यमणि मुस्कुराया और सभी 1600 लोगों को जड़ में कैद करने के बाद उनकी कुछ वक्त की यादों को मिटाकर सबको सुलाते.... “इनमे से किसी को याद ही नहीं रहेगा की वो यहां आये भी थे। लो हो गया न पूर्ण भरोसा।”...

भोसला वेमपायर के ओर इशारा करते..... “और इनका क्या?”...

आर्यमणि:– इंसानी दुनिया में हमारी तरह ये लोग भी अपने समुदाय के अस्तित्व को छिपाकर रखते हैं, इसलिए ये किसी से कुछ नही बता सकते।

भोसला आर्यमणि के गले लगते.... “मुझे पता नही की तुम सबके पास पत्थर कहां से मिला होगा, लेकिन मिला सही लोगों को। निष्प्रभावित पत्थर मेरे ओर से छोटा सा भेंट है। इसे संभालकर इस्तमाल करना और गलत हाथों में नही आने देना। चलो तुम सबको सतह तक छोड़ आऊं।”

एक बार फिर आर्यमणि उसी छत पर था जहां वह पहली बार फसा था। भोसला ने ऑर्डर दिया और देखते ही देखते वह छत कई किलोमीटर ऊपर तक जाने लगा। सर के ऊपर दिख रहा आसमान धीरे–धीरे हटने लगा था। दरअसल वह आसमान न होकर एक प्रकार का सुरक्षा घेरा था। उसके हटते ही ऊपर धातु की मजबूत चादर दिखने लगी। जैसे ही लिफ्ट ऊपर तक पहुंची वह चादर खुल गया और लिफ्ट उन सबको लेकर सतह तक पहुंच चुकी थी।

3 बार मे वह लिफ्ट सबको ऊपर पहुंचा चुकी थी। 6 बार में जितने भी समान खोये थे वो सब सतह पर आ चुका था। नयोबि, भोसला के लोगों की मदद से तुरंत ही चारो ओर टेंट लगवाया और सभी 1600 इंसानों को गरम टेंट में डाला। भोसला एक आखरी बार अल्फा पैक से मिलकर भूमिगत हो गया और आर्यमणि निर्माण कार्य के जगह के देखने लगा।

नयोबि:– तुम्हारे साथ काम करके अच्छा अनुभव रहा। अब मैं ज्वाइंट डायरेक्टर जूलिया को खबर कर दूं ताकि काम आगे बढ़ सके।

आर्यमणि:– ओ भाई मार्च में निकला था अभी अक्टूबर समाप्त होने को आ गया है। हमे कैलिफोर्निया भिजवाने का भी बंदोबस्त करो।

नयोबि:– हां जूलिया से ही संपर्क कर रहा हूं। वो यहां आ जाये फिर उसके बाद जूलिया और तुम जानो।

नयोबि के पंटर काम पर लग गये। जूलिया 4 दिन बाद वहां पहुंची। सभी लापता लोगों को सुरक्षित देख वह बयान नही कर पायी की वो कितनी खुश है। जूलिया को इतनी बड़ी सफलता की उम्मीद नहीं थी जो आर्यमणि उसकी झोली में डाल चुका था। जूलिया ने पूरी रिपोर्ट वाशिंगटन डीसी तक पहुंचा दी। वॉशिंगटन डीसी से ऑफिशियल प्रेस रिलीज हुआ जहां जूलिया और उसके टीम की जमकर तारीफ हुई। हां लेकिन इस तारीफ में कहीं भी अल्फा पैक नही था।

जूलिया खुद आर्यमणि को कैलिफोर्निया तक छोड़ने पहुंची। जूलिया विदा लेने से पहले अल्फा पैक को एफबीआई एसोसिएट्स का दर्जा दिया। यही नहीं उन लोगों को एफबीआई की आईडी भी दी। जूलिया जाते वक्त इतना ही कही..... “जब भी किसी गैर–कानूनी लोग को मारना हो तो उसे कानूनी तरीके से मरना और पूरा सबूत की फाइल मुझे मेल कर देना, बाकी मैं संभाल लूंगी।” जूलिया अपनी बात कहकर रवाना हो गयी और अल्फा पैक एक बार फिर अपने कॉटेज की साफ सफाई में लग गये।
Nice updates👍🎉
 

krish1152

Well-Known Member
5,634
16,407
188
Nice update
 
  • Like
Reactions: Tiger 786

andyking302

Well-Known Member
6,076
14,331
174
Hahaha.... Thik hai fir yahin rahiye mein hi adalat wala sawal bhul jata hun
Ayila aise kaise chalega fir 🤔🤔बडे भाई
 

Surya_021

Active Member
1,277
3,357
158
भाग:–142


जैसे ही आर्यमणि का मुक्का कोको के कंधे से टकराया वहां का पूरा हिस्सा ही फुहार बनकर हवा में मिल गया। कोको के ऊपरी शरीर के बाएं हिस्से का पूरा परखच्चा उड़ा डाला। एनर्जी पंच इतना खरनाक था कि कोको के मौत की चीख निकलने से पहले ही उसकी मौत आ चुकी थी। सर तो धर पर ही था, लेकिन कमर तक के बाएं हिस्सा गायब होने की वजह से गर्दन बाएं ओर के हिस्से में ऐसे घुसी थी कि धर पर सर नजर ही नहीं आ रहा था।

आर्यमणि अपने हाथों पर लगे खून को साफ करते..... “तुम सब ठीक तो हो ना?”

रूही:– हां हम सब हील हो चुके है। तुम्हारी पीठ का क्या हाल है?

आर्यमणि:– शायद हील हो चुका हूं। दर्द नही अब। चलो चलकर नयोबि और उसकी टीम को ढूंढे। मर भी गये हो तो उनकी लाश को ऊपर सतह तक लेकर जाना जरूरी है।

अभी इनकी इतनी ही बातें हुई थी कि कोको के उस ऑफिस का दरवाजा खुल चुका था। किसी ऑफिसर की ड्रेस में भोसला सबसे आगे खड़ा था और उसके पीछे 100 हिम–मानव सेना की टुकड़ी। आर्यमणि और रूही दोनो भोसला को देखने लगे..... “ऐसे हैरानी से नही देखने का। मैं हूं कमांडर इन चीफ भोसला और जाने–अनजाने में तुमने मेरी मदद कर दी है।”...

आर्यमणि:– हां सो तो मैं इस जेलर और तुम्हारे पोस्ट को देखकर समझ चुका हूं कि तुम किसके पीछे थे। वैसे ये जेलर इतना खतरनाक था कि सेना के इतने बड़े अधिकारी को आना पड़ा?

भोसला:– “अरे मत पूछिए आर्यमणि सर, इसने अब तक मेरे 1200 जवानों को ऐसा निर्बल करके अपने इस फैक्टरी से बाहर भेजा की वो फिर कभी बाप बनने लायक नही रहे। पहुंच तो सीधा सेंट्रल मिनिस्ट्री तक की थी। इसका चाचा काउंसिल मिनिस्टर, हमारे हर मूवमेंट की खबर इसे पहले से होती। यहां सबूत के नाम पर ढेला तक नही मिलता। इसने इतने इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर को नपुंसक बनाकर भेजा की गुस्से में इसे मरवाने के लिये साजिश तक रच डाले।”

“लेकिन पता नही इस कोको ने कितनी शक्ति अर्जित कर रखी थी, कोई इसे छू भी नहीं पाया। ऊपर से अंडर कवर ऑपरेशन में आज तक इसके गुनाहों का कोई भी सबूत नही मिला क्योंकि जब भी कोई टीम इसके ऑफिस में घुसने के बाद सबूत जुटने की कोशिश किये वो फिर अपने अंदर के खोये शक्ति को वापस जुटा नही पाये। खैर अब तुम लोग बाहर आ जाओ, हम जरा इसके खिलाफ सबूत जुटा ले, वरना तुम पर एक सरकारी अधिकारी को मारने का मुकदमा चलेगा।

आर्यमणि:– और मेरे लोग (नयोबि और उसकी टीम) जिसे इसने कहीं गायब कर दिया है?

भोसला:– चिंता मत करो वह सुरक्षित है। उन्हे भी ढूंढकर बाहर लता हूं। मोनेसर, आर्यमणि और उसके साथियों का भव्य स्वागत करो।

एक मुलाजिम को खातिरदारी में लगाकर भोसला कोको के किले में घुस गया। तकरीबन 4 घंटे बाद वह नयोबि और उसके टीम के साथ बाहर आया। नयोबि अपने पैड़ो पर ही आ रहा था लेकिन उसकी हालत लूटी–पीटी हुई थी। आते ही आर्यमणि के ऊपर लद गया.... “दोस्त जैसे गन्ने से उसका सारा रस चूस लेते हैं वैसे ही शरीर से सब कुछ चूस लिया।”...

आर्यमणि हंसते हुये.... “कोई नही दोस्त अल्केमिस्ट जिंदाबाद। अपने शरीर को फिर से मोडिफाई करवा लेना।”...

नयोबि:– जेल प्रशासन ने हमारे लिये खून का इंतजाम किया था। किसी से बोलकर 20–30 लीटर खून का इंतजाम करवा दो, वरना भूख से कहीं जान न निकल जाये।

आर्यमणि:– भोसला सर कोई उपाय है?

भोसला:– हमारी जेल में हर किसी के खाने का इंतजाम रहता है। मानेसर इन्हे लेकर जाओ और इनके प्रिय भोजन का इंतजाम करो। आर्यमणि तुम मेरे साथ आओ।

आर्यमणि, भोसला के साथ वापस से कोको के किले में घुसा। भोसला उसे तहखाने में ले जाकर वहां का नजारा दिखाया। पूरे तहखाने में सिशे के मोटे ट्यूब लगे थे, जिसमे किसी प्रकार का द्रव्य भरा था। हर ट्यूब के नीचे धातु का मोटा गोलाकार चेंबर लगा हुआ था। सभी ट्यूब के नीचे का चेंबर वायर द्वारा एक दूसरे से कनेक्ट था और उसका सबसे आखरी सिरा किसी सर्किट बोर्ड से जुड़ा हुआ था। उस सर्किट बोर्ड के चारो ओर कई सारे पत्थर कनेक्ट थे।

आर्यमणि, वहां का नजारा देखते.... “ये कौन सी जगह है।”...

भोसला:– ये है कोको के खिलाफ सबूत। जितने भी मोटे ट्यूब देख रहे हो। लोग पोर्ट होकर इन्ही ट्यूब में घुसते और उनकी शक्ति बाहर निकलकर कोको के पास। कमाल की इंजीनियरिंग और कमाल का सर्किट बोर्ड है। मुझे एक बात बताओ, तुम्हे भी तो कोको ने पोर्ट किया होगा, फिर तुम क्यों नही पोर्ट हुये?

आर्यमणि:– मेरे आचार्य जी ने कहा था मेरा जन्म बहुत ही खास नक्षत्र में हुआ था। मैं किस्मत लेकर पैदा हुआ हूं। पहले नही मानता था, लेकिन धीरे–धीरे उनकी बात पर यकीन हो गया।

इतना कहने के बाद आर्यमणि अपने एम्यूलेट से एक मोती समान पत्थर निकालकर दिखाते.... “ये पत्थर तुम्हारे यहां के क्रिस्टल से मिला था। इसी की वजह से पोर्ट करने वाली किरणों का असर हम पर नही हुआ था।”

भोसला:– ये तो निष्प्रभावित पत्थर है। इसका प्रयोग हम अपने खेतों में करते है। सूर्य ऊर्जा को फैलाने के क्रम में हीरों के अंदर से कुछ खतरनाक किरणे निकलती है। उन किरणों का असर इंसानी शरीर पर नही होता किंतु पेड़–पौधे और फसल खराब हो जाते है। निष्प्रभावित पत्थर ऐसे सभी जहरीली किरणों का असर समाप्त कर देता है। बहुत ही गुणकारी पत्थर है। इस पत्थर को दोस्त और दुश्मनों की पहचान है। दोस्त को प्रभावित रहने देता है लेकिन दुश्मनों को एक हद तक निष्क्रिय कर देता है।

आर्यमणि:– एक हद तक, मतलब कितनी हद?

भोसला:– 10000⁰ तापमान को निष्क्रिय कर देगा लेकिन उसके ऊपर एक भी डिग्री तापमान बढ़ा तो निष्प्रभावित पत्थर काम नही करेगा। 50000 बुलेट एक साथ हमला करे तो उसका असर नही होने देगा, लेकिन संख्या एक भी ज्यादा हुई तो पत्थर काम नही करेगा। 2 चीजों में हमने हद टेस्ट किया था सो बता दिया। अब चलो वो पत्थर हमे दे दो। पत्थर के मामले में हमारी एक ही पॉलिसी है, कोई समझौता नही। चलो जितने भी पत्थर अपने पास रखे हो सब दे दो।

आर्यमणि:– जितने भी पत्थर से क्या मतलब है तुम्हारा....

भोसला अपने हाथ में एक छोटा सा डिवाइस के 3–4 बटन को दबाने के बाद स्क्रीन आर्यमणि के ओर घुमा दिया... स्क्रीन के ऊपर 80 लिखा आ रहा था। भोसले वो नंबर दिखाते.... “तुम्हारे पास कुल 80 पत्थर है। सब निकालो।”...

आर्यमणि:– ओ भाई 40 तुम्हारे यहां के पत्थर है, 40 मैं पहले से लेकर आया था।

भोसला:– हां ये मुझे अच्छे से पता है। तुम्हारे साथ 3 और लोग है जो अपने गोल से उस एम्यूलेट में पत्थर रखे है। लेकिन यहां जो भी पत्थर आया वो हमारा है। अपने देश की पॉलिसी साफ है।

आर्यमणि:– ठीक है तुम हम सबका एम्यूलेट ले लेना। अब जरा काम की बातें हो जाये।

भोसला:– हां मुझे वो काम की बात पता है। तुम्हे यहां नही रहना। देखो दोस्त हम मजबूर है और किसी को भी अपने देश से बाहर नही जाने दे सकते। इस जगह को देखने के बाद कहीं और जाने देना हमारी पॉलिसी ही नही।

आर्यमणि:– इसका मतलब यहां के लोगों से हमे लंबी लड़ाई लड़नी होगी।

भोसला:– ऐसा करने की सोचना भी मत। मैं अपने रिस्क और गैरेंटी पर तुम्हे जाने दूंगा लेकिन एक छोटी सी शर्त है।

आर्यमणि:– क्या?

भोसला:– आज से 30 वर्ष पूर्व किसी वैज्ञानिक ने गोमेत नदी किनारे कुछ ऐसा एक्सपेरिमेंट किया था जिस वजह से उस इलाके की पूरी आबादी ऐसे बीमारी के चपेट में आ गयी कि वो आज तक बिस्तर से उठे ही नही। मशीनों की मदद से हम 6 करोड़ लोगों को लाइफ सपोर्ट तो दिये है, लेकिन इसका बोझ हमारे आम जनता को उठाना पड़ रहा है। उसी घटना के बाद से हमने अपनी पॉलिसी बदल ली। पहले सतह पर साइंस एक्सपेरिमेंट के लिये बने निर्माण से हमे कोई लेना देना नही था, लेकिन उस घटना के बाद समझ ही सकते हो पॉलिसी में क्या बदलाव हुआ होगा।

आर्यमणि:– 6 करोड़ लोगों को पिछले 30 साल से लाइफ सपोर्ट दिये हो। यहां के प्रतिनिधियों के जज्बे को सलाम। अल्फा पैक सबको हील करने का वादा करती है। उसके बाद तो हमें जाने दोगे न।

भोसला:– न सिर्फ तुम्हे बल्कि यदि हमारी दुनिया के बारे में जो–जो इंसान चर्चा नही करेगा, तुम्हारे भरोसे मैं उन्हे भी जाने दूंगा। यही नहीं, तुम जिस जगह चाहो उस जगह को चुन लो, वहां तुम्हारे साइंस लैब के निर्माण में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आने देंगे। यहां तक की ढांचा यदि गड़बड़ हुआ तो बिना तुम्हारे इंजीनियर की नजरों में आये उस ढांचे तक को सुधार देंगे। बस तुम उन सभी लोगों को पहले की तरह सामान्य कर दो। जिस प्रकार से सबको मारने के एक साथ

आर्यमणि:– ठीक है मैं पूरी कोशिश करूंगा। लेकिन तुम भी अपने बात को याद रखना।

भोसला:– याद रखने की जरूरत नहीं है दोस्त। हमारी बातें ऑन रिकॉर्ड है, एक कॉपी जबतक तुम्हे न मिले अपना काम शुरू मत करना।

आर्यमणि, भोसला से मीटिंग समाप्त करके बाहर आया। उसने पूरी कहानी अल्फा पैक से साझा किया। वेमपायर को छोड़कर अल्फा पैक भोसला के साथ उड़ान भर चुकी थी। गोमेत नदी किनारे के बसा शहर जब आर्यमणि पहुंचा, तब आर्यमणि वहां का नजारा देख एक बार फिर रोलफेल के शासन को सलाम करने लगा। पूरे शहर को ही हॉस्पिटल में तब्दील कर दिया था। 6 करोड़ बीमार लोगों के लिये वहां 10 लाख डॉक्टर नियुक्त किये गये थे। पूरे देश में कहीं भी क्रिटिकल केस होता था तब नागरिकों को मजबूरी में इन्ही इलाकों के ओर रुख करना पड़ता था। सारे स्पेशलिस्ट और अच्छे डॉक्टरों को तो यहीं रखा गया था।

अल्फा पैक वहां पहुंचते ही सबसे पहले चार लोगों को हील किया। अपने शरीर के अंदर पहुंचे टॉक्सिक और वायरस को पचाने की क्षमता को कैलकुलेट किये। जिन चारो को अल्फा पैक ने पहले हील किया उन्हे उठकर खड़े होते देख, भोसला और डॉक्टर की टीम तो खुशी से नाचने लगे।

अल्फा पैक को भी बहुत ज्यादा मुश्किल काम नहीं लगा। वहां मौजूद हर किसी के शरीर में किसी प्रकार का एक्सपेरिमेंटल वायरस था, जिसे हील करने में अल्फा पैक को कोई परेशानी नही थी। फिर तो पूरा का पूरा हॉस्पिटल जड़ों में ढाका होता और अल्फा पैक आबादी के आबादी हील करते रहते। देखते ही देखते हर दिन 8 से 10 लाख लोग हील होकर खड़े होते और उन्हे देश के विभिन्न हिस्सों में भेज दिया जाता।

लगभग 5 महीनो तक सभी 6 करोड़ लोग हील होकर अपने–अपने परिवार अथवा रिश्तेदार के पास पहुंच चुके थे। भोसला तो फूले न समा रहा था। धन्यवाद कह–कह कर वह थका नही। अंत में जैसा की उसने वादा किया था, आर्यमणि जिसे चाहे अपने भरोसे पर ले जा सकता था। आर्यमणि ने उन 1600 लोगों को चुन लिया जो 6 बार निर्माण के लिये पहुंचे और गायब हो चुके थे। साथ में वेमपायर की टीम भी।

सुरक्षा के लिहाज से भोसला ने पूछा की क्या ये इंसान कभी किसी से हमारे दुनिया के बारे में चर्चा नही करेंगे। उसके इस सवाल पर आर्यमणि मुस्कुराया और सभी 1600 लोगों को जड़ में कैद करने के बाद उनकी कुछ वक्त की यादों को मिटाकर सबको सुलाते.... “इनमे से किसी को याद ही नहीं रहेगा की वो यहां आये भी थे। लो हो गया न पूर्ण भरोसा।”...

भोसला वेमपायर के ओर इशारा करते..... “और इनका क्या?”...

आर्यमणि:– इंसानी दुनिया में हमारी तरह ये लोग भी अपने समुदाय के अस्तित्व को छिपाकर रखते हैं, इसलिए ये किसी से कुछ नही बता सकते।

भोसला आर्यमणि के गले लगते.... “मुझे पता नही की तुम सबके पास पत्थर कहां से मिला होगा, लेकिन मिला सही लोगों को। निष्प्रभावित पत्थर मेरे ओर से छोटा सा भेंट है। इसे संभालकर इस्तमाल करना और गलत हाथों में नही आने देना। चलो तुम सबको सतह तक छोड़ आऊं।”

एक बार फिर आर्यमणि उसी छत पर था जहां वह पहली बार फसा था। भोसला ने ऑर्डर दिया और देखते ही देखते वह छत कई किलोमीटर ऊपर तक जाने लगा। सर के ऊपर दिख रहा आसमान धीरे–धीरे हटने लगा था। दरअसल वह आसमान न होकर एक प्रकार का सुरक्षा घेरा था। उसके हटते ही ऊपर धातु की मजबूत चादर दिखने लगी। जैसे ही लिफ्ट ऊपर तक पहुंची वह चादर खुल गया और लिफ्ट उन सबको लेकर सतह तक पहुंच चुकी थी।

3 बार मे वह लिफ्ट सबको ऊपर पहुंचा चुकी थी। 6 बार में जितने भी समान खोये थे वो सब सतह पर आ चुका था। नयोबि, भोसला के लोगों की मदद से तुरंत ही चारो ओर टेंट लगवाया और सभी 1600 इंसानों को गरम टेंट में डाला। भोसला एक आखरी बार अल्फा पैक से मिलकर भूमिगत हो गया और आर्यमणि निर्माण कार्य के जगह के देखने लगा।

नयोबि:– तुम्हारे साथ काम करके अच्छा अनुभव रहा। अब मैं ज्वाइंट डायरेक्टर जूलिया को खबर कर दूं ताकि काम आगे बढ़ सके।

आर्यमणि:– ओ भाई मार्च में निकला था अभी अक्टूबर समाप्त होने को आ गया है। हमे कैलिफोर्निया भिजवाने का भी बंदोबस्त करो।

नयोबि:– हां जूलिया से ही संपर्क कर रहा हूं। वो यहां आ जाये फिर उसके बाद जूलिया और तुम जानो।

नयोबि के पंटर काम पर लग गये। जूलिया 4 दिन बाद वहां पहुंची। सभी लापता लोगों को सुरक्षित देख वह बयान नही कर पायी की वो कितनी खुश है। जूलिया को इतनी बड़ी सफलता की उम्मीद नहीं थी जो आर्यमणि उसकी झोली में डाल चुका था। जूलिया ने पूरी रिपोर्ट वाशिंगटन डीसी तक पहुंचा दी। वॉशिंगटन डीसी से ऑफिशियल प्रेस रिलीज हुआ जहां जूलिया और उसके टीम की जमकर तारीफ हुई। हां लेकिन इस तारीफ में कहीं भी अल्फा पैक नही था।

जूलिया खुद आर्यमणि को कैलिफोर्निया तक छोड़ने पहुंची। जूलिया विदा लेने से पहले अल्फा पैक को एफबीआई एसोसिएट्स का दर्जा दिया। यही नहीं उन लोगों को एफबीआई की आईडी भी दी। जूलिया जाते वक्त इतना ही कही..... “जब भी किसी गैर–कानूनी लोग को मारना हो तो उसे कानूनी तरीके से मरना और पूरा सबूत की फाइल मुझे मेल कर देना, बाकी मैं संभाल लूंगी।” जूलिया अपनी बात कहकर रवाना हो गयी और अल्फा पैक एक बार फिर अपने कॉटेज की साफ सफाई में लग गये।

Excellent Update 😍
 
Top