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Fantasy Aryamani:- A Pure Alfa Between Two World's

nain11ster

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Ye acha to nahi huya Jo alfa pack khatam ho gaya ab waqt hi batayega ki kya hone wala h
 
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आर्य के पैक की मौत हो चुकी है और आर्य खुद मौत के दहलीज पर खड़ा है। उसकी नवजात पुत्री अमेया भी निमेशदर्थ के कब्जे मे है।
लेकिन ताज्जुब यह है कि आर्य और उसके पैक का शरीर गायब है। ये लोग न तो एलियन के कब्जे मे है और न ही निमेशदर्थ के कब्जे मे। और शायद न ही मधुमक्खी चींची के कब्जे मे।
फिर ये लोग है कहां ?

लगता है जिन जिन लोगों पर आर्य ने एहसान किया है , उसका पे बैक करने का समय आ गया है। इनमे बहुत से लोग अलौकिक शक्तियों के मालिक थे।
अमेया भले ही अभी नवजात शिशु है लेकिन उसके अंदर भी जरूर कोई ऐसी शक्ति होगी जो आर्य और उसके पैक के लिए संजीवनी का कार्य कर सके !

आर्य अब तक जीवित है लेकिन रूही , अलबेली और इवान के बारे मे ऐसा नही कह सकते। तीनो की हत्या हुई है और मरने वाले लोग जीवित नही होते।
बशर्ते नैन भाई ने कुछ अलग ही सस्पेंस बना रखा हो।

अगर इनकी वास्तव मे मौत हो चुकी है तब यह हम रीडर्स के लिए बहुत ही दुखद बात होगी। अभी अभी तो इन्होने जीवन जीना शुरू किया था। हम चमत्कार की आशा करते है कि ये फिर से हंसते खेलते इस कहानी मे दिखाई दे ।

मुझे विश्वास है नेक्स्ट कुछ अपडेट मे आर्य एक बार फिर से अपने इस प्यारे पैक के साथ नजर आयेगा।
और माया , विवियन , चींची और निमेशदर्थ के शरीर के चिथड़े चिथड़े कर देगा।

आर्य की मौत की खबर सुनने के बाद उसके माता पिता और भूमि ने जिस तरह से बदला लेने का प्रयास किया और उसमे आंशिक रूप से सफलता भी प्राप्त की , वो बहुत ही अच्छा लगा। इतने पावरफुल एलियन को जिंदा जला कर मार देना कोई साधारण बात नही थी।
मुझे और भी अच्छा लगेगा जब जयदेव की मौत भूमि के ही हाथो हो !

इस के पूर्व अध्याय मे एक से बढ़कर एक खुबसूरत अपडेट पढ़ने को मिला। महासागर और जलीय जंतु , शार्क , बच्चो का शहर , नागलोक और वहां की कहानी , अमेया के लिए सबों का विशेष प्रेम , खुबसूरत जलपरी , शानदार आधुनिक शहर , चहकिली , महाति , इत्यादि सबकुछ मनमोहक था। एक तरह से परिकथा जैसा ही महसूस हुआ।

सभी अपडेट्स बेहद ही शानदार और खुबसूरत थे नैन भाई। आउटस्टैंडिंग एंड जगमग जगमग।
 

Samar2154

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Aryamani mar nahi sakta aisa mujhe lagta hai kyunki story ka title holder hi mar jayega toh aage ki story kya ho sakti hai.

Kuch bhi kaho nain bhai mast update hai aage aur bhi rochak hogi.
 
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nain11ster

Prime
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और है अगले अपडेट मे आर्य के बारे मे जरूर बताये कल से आज तक़ जिस चीज का इंतजार कीया वही नहीं पढ़ने को मिला
Suspence to main bachpan se likhta hun... Aryamani ke sath ho Germany me hua story ke shurwat me... Use maine kitna aage clear Kiya....

Arya nagpur kyon aaya tha ... Uska poora jawab to Oshun ko nikalte waqt likha tha...

Khair iske aage hatyakand wale din ki hi kahani hai.... Lekin vishwas maniye jo 2 upadate hai unme bahut kuch tha.... Jab kahani aage badhegi tab aapko Aaj ke 2 update ka arth samajh me aa jayega.... Baki kahiye to ye 2 update hata dun.... Baad me ye mat puchna ki aisa kaise ho gaya ... Kyonki update me tha to bahut kuch bus us bahut kuch ko samajhne ke liye aage ke kayi update intzar karna hoga...
 

Froog

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Suspence to main bachpan se likhta hun... Aryamani ke sath ho Germany me hua story ke shurwat me... Use maine kitna aage clear Kiya....

Arya nagpur kyon aaya tha ... Uska poora jawab to Oshun ko nikalte waqt likha tha...

Khair iske aage hatyakand wale din ki hi kahani hai.... Lekin vishwas maniye jo 2 upadate hai unme bahut kuch tha.... Jab kahani aage badhegi tab aapko Aaj ke 2 update ka arth samajh me aa jayega.... Baki kahiye to ye 2 update hata dun.... Baad me ye mat puchna ki aisa kaise ho gaya ... Kyonki update me tha to bahut kuch bus us bahut kuch ko samajhne ke liye aage ke kayi update intzar karna hoga...
जहाॅ तक बात अल्फा पैक के समाप्त होने की है तो वह समाप्त नहीं हुआ तो उसकेपीछे अमेया के गले में निमेषदर्थ द्वारा जो सम्मोहन पत्थर डाले थे उसके सम्मोहन में सभी ने समझा कि उनहोंने अल्फा पैक को समाप्त कर दिया
निमेषदर्थ के पास जो खून है बह आर्या मणि का नहीं किसी और का ही होगा जिसकी जेनेटिक आर्या मणि से मिलता जुलता होगा
आर्य मणि ने कहा था कि बह एक लम्बी साधना में बैठेगा तो बह साधना में ही होगा
जिसकी जानकारी नैन भाई के अतिरिक्त सिर्फ एक या दो लोगों को ही होगी
यही कारण है कि नैन भाई ने अपडेट को फास्ट फॉरवर्ड कर दिया
 
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Lust_King

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Mujhe bhi pata nahi Mai kaun sa twist Dene wala hun .. par ek baat to tay hai jinki mrityu ho chuki hai wo wapas nahi laut'te...
Yar aise mat karna .. bhram haal hee bana dena yr in characters se pyar ho chuka h aur me nhi chahta k palak hero ki life me aaye so I know Marne Wale nhi aate but Jo marenge hee nhi to 🤣🤣
 

RAJIV SHAW

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Super update hai Bhai
 
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Lust_King

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भाग:–165


लगभग 1 महीने का पूरा वक्त था और सीने में आग भड़क रही थी। शादी की तैयारियों के साथ ही सभी को मारने की तैयारी भी चल रही थी। शादी लोनावाला, महाराष्ट्र, के किसी रिजॉर्ट से हो रही थी। जैसा शुरू से होता चला आया था, सुकेश और उज्जवल भारद्वाज आस–पास ही ठहरे थे, और उन दोनो के आस–पास उनके कुछ सहयोगी। बस एक जयदेव था जिसका कमरा नंबर पता नही चला था। खैर, किसी का कमरा नंबर पता हो की नही हो लेकिन तैयारियां पूरी थी। शादी के एक रात पूर्व भूमि को जयदेव भी दिख गया। दोनो की नजरें एक बार टकराई और दोनो अलग रास्ते पर चल दिये।

रात के 2 बज रहे थे, जब असली खेल शुरू हुआ। कहते है न, आत्मविश्वास और अति आत्मविश्वास में धागे मात्र का फर्क होता है। यहां तो नायजो समुदाय में विश्वास और आत्मविश्वास से कहीं ऊपर सर्वोपरि और सर्वश्रेष्ठ होने की भावना थी। इसी भावना के चलते यह विश्वास पनपा की मेरा कौन क्या बिगड़ लेगा। हालांकि सुरक्षा के सभी कड़े इंतजामात थे, लेकिन एक आईएएस केशव कुलकर्णी का दिमाग और पूर्व के 2 घातक शिकारी, भूमि और जया, शिकार पर निकले थे। सुरक्षा के जितने भी इंतजाम थे वो सब फिर क्या कर लेते...

रिजॉर्ट का वो हिस्सा जहां सुकेश और उज्जवल ठहरे थे, रात भर के जश्न के बाद घोड़े बेचकर सो रहे थे। सुकेश और मीनाक्षी, उज्जवल और अक्षरा के अलावा वहां आस–पास के स्वीट्स में कौन–कौन थे, ये भूमि, जया और केशव को नही पता था। बस एक ही बात पता थी, बदला, बदला और बदला... और इंतकाम की आग ऐसी भड़की थी, उसका नजारा रात के 2 बजे सबको पता चल गया।

न कोई विस्फोट हुआ और न ही कोई गोली चली। एसी के डक्ट से चली तो एक गैस, और फिर जो नजारा सामने आया वह केशव, जया और भूमि को सुकून देने वाला नजारा था। हालांकि गैस की गंध से सोए लोग भी जाग चुके थे, लेकिन जागने में थोड़ी देर हो चुकी थी। जबतक जागकर समझते की भागना था, उस से पहले ही एक छोटी सी चिंगारी और चारो ओर आग ही आग। एसी कमरा यानी पूरा बंद कमरा। ऊपर से बाहर निकलने वाला दरवाजा भी बाहर से बंद। चिंगारी उठते ही मानो रिजॉर्ट के उस हिस्से के हर स्वीट के अंदर एटम बॉम्ब जैसा विस्फोट के साथ आग फैला हो। पलक झपकने के पूर्व सब सही और पलक झपकते ही चारो ओर आग ही आग।

अंदर कई हजार डिग्री के तापमान तक कमरे झुलसने के बाद बाहर धुवां दिखने लगा। एक गार्ड ने जैसे ही किसी तरह एक स्वीट का दरवाजा खोला, धू करके आग का बवंडर दरवाजा के रास्ते इतनी दूर तक गया की वो गार्ड भी उसके चपेट में आ गया। किसी तरह उस गार्ड को बचाकर ले गये और यह नजारा देखकर दूसरे गार्ड की फट गयी। फिर किसी की हिम्मत नही हुई, किसी दरवाजे को खोलने की। कहीं दूर से आग और धुवां का मजा लेते तीनो, केशव, जया और भूमि अंदर से काफी खुश हो रहे थे।

भूमि:– अरे अभी तो धुवां ही नजर आ रहा, तंदूर प्रहरी कब नजर आएंगे.…

केशव:– हां मैं भी उसी के इंतजार में हूं। यादि कोई बच जायेगा तो उसके लिए व्यवस्था टाइट तो रखे हो न...

भूमि:– मौसा पूरी व्यवस्था टाइट है... किसी को बचने तो दो...

जया:– नही जो बचेंगे वो उनकी किस्मत... अब हम दोबारा हमला नही करेंगे, बल्कि यहां से सुरक्षित निकलने की तैयारी करो। अभी अपने बच्चे का पूरा इंतकाम लेना बाकी है। बदला लेने से पहले मैं मर नही सकती...

केशव:– जैसे तुम्हारी मर्जी... चलो फिर पास से इसका नजारा लेते है.…

तीनो आग वाले हिस्से में पहुंच गये। मौके पर अग्निशमन की गाड़ियां पहुंच चुकी थी। फायर फाइटर्स अपने काम में लग चुके थे। ये तीनों भी अब आग बुझने और जले हुये तंदूर प्रहरियों के बाहर आने का इंतजार करने लगे।

"बहुत खूब, तो अब भी तुम लोगों में हिम्मत बाकी है?"… भूमि के करीब खड़ा जयदेव धीरे से कहा...

भूमि:– कहीं मजलूम तो नही समझ रखे थे न जयदेव..

जयदेव:– न ना.. तुझे तो बस जरिया समझ रखा था, लेकिन निकली फालतू। सारा क्रेडिट तो वो माया ले गयी। तुझपर सम्मोहन करने का कोई फायदा नही निकला।

भूमि:– अभी तेरी बातों पर मुझे कोई प्रतिक्रिया देने की जरूरत नही। बस तू जो बोला था वह याद आ गया... तुम लोग आसमान से भी ऊंची रेंज वाले लोग हो ना। शायद खुद को अपेक्स सुपरनैचुरल कहलवाना ज्यादा पसंद करते हो... एक बात बताओ, जिस समुदाय का बिल्ड अप इतना बड़ा था, उन्हे इस आग में कुछ हुआ तो नही होगा ना.…

जयदेव:– तू गलत खेल गई है...

भूमि:– मां बाप कभी मां बाप थे ही नहीं। पति कभी पति नही था। एक प्यारा भाई था वो बचा नही... अब तो ले लिया पंगा जयदेव... गलत सही जो खेलना था, खेल लीया। अब उखाड़ ले जो उखाड़ना है...

जयदेव:– सुबह के उजाला होने से पहले तू क्या, इस जगह पर आर्यमणि के जितने भी चाहनेवाले उसके करीबी है, सब मरेंगे...

भूमि:– पंगा किसी से लो तो उसके परिणाम के लिए भी तैयार रहो, ऐसा ही कुछ तू कहकर गया था न... खुदको क्या भगवान समझता है, जो तेरे पंगे का कोई जवाब नही देगा... साला खुद पर आयी तो बिलबिला रहा है... सुन बे बदबूदार मल… तेरे गांड़ में दम हो तो सुबह होने से पहले हमारी लाश गिरा कर दिखा देना... अब मुझे तेरे भाई बंधु का तंदूर देखने दे... तु तबतक जाकर हमारे मर्डर की तैयारी कर..

जयदेव, अपनी उंगली दिखाते.… "तुझे तो मैं छोडूंगा नही"..

भूमि:– जो भी है करके दिखा चुतिए, बोल बच्चन मत दे। वैसे एक जिज्ञासा है... क्या आग में तुमलोग भी जलते हो, या फिर जो खुद को इतना ऊंचा बताते है, वो अमर बूटी खाकर आया है, जो आग भी उसका कुछ नही बिगाड़ सकती...

जयदेव घूरती नजरो से देखने लगा। इस से पहले की कुछ कहता, अग्निशमको द्वारा आग में फंसे लोगों को बचाकर बाहर निकाला जा रहा था। सबसे पहले सुकेश भारद्वाज ही बाहर आया... पूरा का पूरा जला हुआ... देखने से ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो अगर सुकेश को पकड़ ले तो हाथ में उसका पूरा भुना मांस चला आयेगा...

एक–एक करके कुल 22 लोगों को निकाला गया। 22 में से 17 की हालत गंभीर और 5 लोगों को मृत घोषित कर दिया गया। मरने वालों में से 2 बड़े नाम, अक्षरा भारद्वाज और उज्जवल भारद्वाज थे। लगभग सुबह के 5 बज रहे थे। कौतूहल से भरा माहोल शांत होने को आया था। दूर खड़े तमाशा देख रहे लोग अब धीरे–धीरे छटने लगे, केवल 4 लोगों को छोड़कर…. भूमि, जया, केशव एक टीम और दूसरी ओर जयदेव...

मृत और गंभीर रूप से घायलों का ब्योरा जैसे ही आया, भूमि रौबदार आवाज में.… "हम फलाना है, हम चिलाना है... मासी खुद को तुर्रम खां समझने वालों को परख लिया.. आग में उनके भी मांस ठीक वैसे ही जले, जैसे हमारा दिल जल रहा है। चलो स्कोर बुरा तो नहीं। 5 के नरक लोक का टिकट कट गया।"

जया:– भूमि, कोई तो कह रहा था, सूरज निकलने से पहले हमारी लाश गिरा देगा... घंटे भर में तो सूरज निकल भी आएगा...

केशव:– सुनो बे, तुम्हे जो करना था वो कर चुके... अब हमारी बारी है... शिकार करने वाले खुद भी शिकार हो सकते हैं, यह बात हम तो कभी नही भूले, लेकिन लगता है ये पाठ तुम नीच लोगों ने नही पढ़ा... कोई बात नही अभी साक्षात गुरुदेव केशव कुलकर्णी तुम्हे ये पाठ रटवा देंगे... बस देखते जाओ... चलो सब यहां से...

इतना कहकर वहां से तीनो निकल लिये। उन तीनो को मारने का इरादा रखने वाला जयदेव तुरंत ही अपने लोगो को इकट्ठा किया। बाहर निकला तो था तीनो को मारने, लेकिन हल्के अंधेरे और हल्के उजाले वाले भोर की बेला में जयदेव को काल के दर्शन हो गये। सात्त्विक आश्रम के 6 संन्यासियों के साथ ओजल उनके रास्ते में खड़ी थी।

जयदेव, ओजल को सामने देख, अपना कारवां रोकते.… "ब्लड पैक की एक जिंदा बची अल्फा। अच्छे वक्त पर आयी हो। हम अभी आर्यमणि के सभी चाहने वालों को खत्म करने जा रहे थे। तु अकेली जिंदा रहकर क्या कर लेती... खत्म करो इन सबको जल्दी..."

जयदेव के लिये शायद यह वक्त बुरा चल रहा था। जयदेव ने अपनी बातें समाप्त किया और अगले ही पल निशांत का एक जोड़दार तमाचा पड़ गया। इधर निशांत को तमाचा पड़ा और उधर जयदेव के साथ आये गुर्गों को कब ओजल काटकर जमीन पर उसके टुकड़े बिछा दी, जयदेव को पता भी नही चला। और जब तक पता चला तब तक लाशें गिर चुकी थी।

जयदेव लगातार आंखों से रौशनी निकालता रहा लेकिन वायु विघ्न मंत्र को साधने वालों पर फिर कहां ये नायजो के आंखों की लेजर काम आती है। अगले ही पल वहां चारो ओर धुवां। धुएं के अंदर जयदेव को शुद्ध रूप से लात और घुसे पर रहे थे। इतने कड़क लतों और घुसो की बारिश हो रही थी कि उसका हीलिंग प्रोसेस लुल हो गयी।

किसी आम इंसान की तरह जयदेव भी बेहोशी हो गया और बेहोशी के बाद जब आंखें खुली तब चारो ओर अंधेरा ही अंधेरा था। वह जगह इतनी अंधकार थी कि आंखों के लेजर की रौशनी तक से कुछ नही देखा जा सकता था। जयदेव कई दिनों तक बाहर निकलने की कोशिश करता रहा, पर चारो ओर ऐसी दीवारें बनी थी जो न तो बाहुबल से टूटा और न ही नजरों के लेजर से।

अंत में अहंकारी नायजो समुदाय के घमंडी जयदेव खुद में बेबस सा महसूस करने लगा। जब बेबसी का दौड़ शुरू हुआ उसके पहले दिन जयदेव चींखते चिल्लाते यही कहता रहा की यहां से निकलकर सबसे पहले तुम्हारी लाश गिराऊंगा। फिर कुछ दिन बीते। बेबसी ने उनके जीवन में ऐसा पाऊं पसारा की बाद ने गिड़गिड़ाते हुए कहने लगे... "मुझे जाने दो। क्यों यहां रखे हो। तुम्हे क्या चाहिए कुछ तो बोलो"…

खैर आवाज पहले दिन वाला अहंकारी हो या फिर हिम्मत टूटने के बाद बेबस जैसा, दोनो ही परिस्थिति में जयदेव को बाहर से कहीं कोई जवाब नहीं मिला। मिला तो सिर्फ उसे अंधेरा।... घोर अंधेरा था। उस अंधेरे में खाने के लिये नाक का इस्तमाल करना पड़ता था। किसी तरह सूंघ कर अपने खाने तक पहुंचते थे।

जयदेव गायब हो चुका था। उसकी कोई खबर नहीं मिली। हाई टेबल प्रहरी को चलाने वाले नायजो सब जिंदगी और मौत से जूझ रहे थे। नायज़ो हाई टेबल पर ऐसा हमला हुआ था मानो उनकी कमर टूट गयी हो। आर्यमणि मर चुका था और उसके मरने के बाद भी जब नायजो का शिकर हो गया, इस बात से भिड़ पागल बनी हुई थी। मीटिंग विवियन ले रहा था और सामने लाखों की भिड़।

विवियन:– 12 मई की सुबह काली थी। इस आगजनी को 3 महीने हो गये। हमारे 5 लोग तत्काल मारे गये। इलाज के दौरान 6 लोगों की मौत हो चुकी है। जो 11 लोग अभी बचे है, वो भी पता नही कब तक ठीक होंगे या कभी ठीक होंगे भी या नही.…

भीड़ से एक आवाज:– ये सुनने हम यहां नही आये। जिन कीड़ों ने ये काम किया था, उन्हे जिंदा जलाया की नही..

पलक, अपनी जगह से खड़ी होती... "उन्हे मारने के लिए जयदेव 6 लोगों के साथ गया था, लेकिन पिछले 3 महीने से न तो आग लगाने वालों का पता लगा और न ही जयदेव का"…

भीड़ से कोई... "तुम सब नकारा हो गये हो। क्या अब कोई हमसे भी ऊपर है?

विवियन:– यहां आपस में झगड़ने से कोई फायदा नही है। ये वक्त आपस में लड़ने का नही...

भिड़ से कोई एक:– पहले तो वो आर्यमणि था, जिसने जब चाहा हमारा शिकार कर लिया। वो गया तो उसकी बहन और उसके मां–बाप। न जाने कहां छिपे है। अंधेरे से बाहर निकलते है और सबको जलाकर अंधेरे में फिर गायब। क्या हम उनके लिये इतना आसान शिकार है?

विवियन:– मैं आप सबकी तकलीफ को समझता हूं। हमारे लोग उन सबकी तलाश में जुटे है, तब तक आप लोग धैर्य बनाकर चलिए और जिसे भी वो लोग दिख जाये मारिए पहले सवाल बाद में कीजिए।

विवियन इतना ही बोला था कि पीछे से उसके कंधे पर हाथ पड़ा। मुड़कर देखा तो माया खड़ी थी।। माया पूरे भीड़ को हाथ दिखाती.… "तुम्हारे लीडर्स के घायल होते ही तुम्हारा संगठन ही कमजोर सा लग रहा। सब शांत रहेंगे... पहली बार हम सामने आकर किसी को मारे थे। उसका कुछ तो परिणाम भुगतोगे या नही... जिन्होंने हम पर हमला किया, उन्होंने अपने पूरे क्षमता के साथ हमला किया। हमे भी पता नही था कि आम से दिखने वाले ये लोग कितना नुकसान कर सकते है। लेकिन देखो, तुम्हारे सभी नेताओं को ही लिटा दिया। इसलिए 2 बात हमेशा याद रहे... पहला की खुलकर कभी सामने मत आओ और यदि सामने आते भी हो तो जबतक सभी मुसीबत खत्म न हो जाये, तब तक आंखें खुली और दिमाग हमेशा खतरे को साफ करने के पीछे लगाओ"…

भीड़ से एक... तो क्या ये इंसान इतने ताकतवर हो गये की अब हमारा शिकार करेंगे?

माया:– ताकत की बात कौन कहता है। ताकत से लड़े होते तो क्या कोई मरता भी। शिकार करने की तकनीक हमने किनसे सीखी है, इंसानों से ही। घात लगाकर पूरे धैर्य पूर्वक शिकार करना। मौत कहां से चली आयी किसी को पता नही। तो हां अपनी शारीरिक क्षमता पर इतना विश्वास न जताओ क्योंकि इंसान क्या कर सकते है उसका प्रत्यक्ष उदाहरण सामने है... जिन लोगों ने हमे चोट दिया वो सब शिकारी थे और उन्हें पता था कि किसने उनके प्रियजनों को मारा था। ये बात तो तुम्हारे लीडर्स भी जानते थे कि जिन लोगों ने हमला किया था, उन्हे पहले से तुम्हारे लीडर्स पर शक था। लेकिन कहते है न विनाश काले विपरित बुद्धि... वो लोग हमारा क्या बिगड़ लेंगे ये सोचने वाले कुछ लोग मर गये और कुछ मरने के कगार पर है।

भीड़:– हां समझ गये की शरीर की क्षमता जितनी जरूरी है, उस से कहीं ज्यादा मानसिक क्षमता मायने रखती है। और वो दूसरी बात क्या है माया...

माया:– यह पहली बार नही था जो हमने आग का सामना किया हो। आर्यमणि हमारे कई लोगों को जिंदा जला चुका है। हां लेकिन उस वक्त इतना ध्यान इसलिए नही गया क्योंकि वह केवल जलाता नही था। तुम सब एक ही काम में लग जाओ...ऐसी युक्ति ढूंढो की दोबारा कोई हमे आग से डरा न सके। वैसे एक खुश खबरी भी है। हमारे नए दोस्त निमेषदर्थ ने आर्यमणि के खून से ऐसी हीलिंग पोशन तैयार कर लिया है कि महज 1 घंटे में तुम्हारे बचे हुए लीडर्स तुम लोगों से बात करेंगे। पृथ्वी पर मेरा काम खत्म होता है, इसलिए मैं विषपर प्लैनेट वापस जा रही। आते जाते रहूंगी... और हां पलक एक मेघावी नायजो है, उम्मीद है उसके लीडरशिप में तुम लोग और ऊंचाइयों को छू सकोगे.… अब मैं चलती हूं...

माया सभा समाप्त करके चली गयी और पलक के लिये एक नई राह खोल गयी। कुछ वर्ष पूर्व ही उसे भी पता चला था की वह अपने भाई राजदीप की तरह ही एक पूर्ण नायजो है। बाकी उसका बड़ा भाई कंवल और बड़ी बहन नम्रता में नायजो वाले कोई गुण नही आये थे। पलक जब लीडरशिप की राह में चली फिर उसने पीछे मुड़कर नही देखा। छोटे उम्र के इस लीडर ने चारो ओर से खूब सराहना बटोरी। देखते ही देखते समुदाय में उसका कद और रूतवा इतना ऊंचा हुआ कि वो अब 5 ग्रहों में बैठे लीडर्स के साथ उठा–बैठा करती थी।

वक्त अपने रफ्तार से चलता रहा। दिन बीत रहे थे। सुकेश और मीनाक्षी भी स्वास्थ्य होकर अपना काम देख रहे थे। उस आगजनी में अक्षरा और उज्जवल अपना दम तोड़ चुके थे। इस बात का मलाल सबको था। उस दिन के बाद हर कोई भूमि, केशव और जया की तलाश करते रहे, लेकिन उन्हें एक निशान तक नही मिले। जयदेव भी बिलकुल गायब ही था... सबको जमीन निगल गई या आसमान खा गया कुछ पता नहीं चल पा रहा था.…

अब तो वक्त भी इतना गुजर चुका था कि धीरे–धीरे सब इस बात को भूलते जा रहे थे। प्रहरी के मुखौटा तले नायजो समुदाय फल फूल रहा था। वेयरवुल्फ को अब भी बीस्ट वुल्फ बनाया जा रहा था। प्रहरी में आने वाले इंसानों के दिमाग में अब भी 2 दुनिया के रखवाले होने का भूत घुसाया जा रहा था और इसी काम के दौरान ही, पृथ्वी मानव सभ्यता का मिलन नायजो समुदाय से होता था। कुछ इंसानी बच्चे पैदा होते। उन्हे या तो मार दिया जाता या फिर जय प्रहरी के नारे लगवाए जाते। कुछ पूर्ण अथवा अल्प नायजो बनते, उन सबको अलग सभा में बिठाकर अपनी परम्परा में ढालते। कुल मिलाकर नायजो का सब कुछ चकाचक चल रहा था।
Lagta h hero kuch bada krne k liye gayab huya h aur ameya ki safety fix kar rhe h .. kyuki pack k khatm hone k bas uski safety zAruri h ... Lgta h in future hero k kuch new friends dkhne ko milenge aur hero phle bhut jyada takatwar banke niklega Aisa Mera manna h ... Bhoomi wala new kaand dikha diya ... Waiting for next bro
 
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