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Fantasy Aryamani:- A Pure Alfa Between Two World's

nain11ster

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भाग:–179


ओर्जा:– मैं उन सबको देख सकती हूं। नायजो एक खतरनाक समुदाय है। गुरियन प्लेनेट पर आर्य के मौत की योजना बन रही है। निमेष माया से कह रहा है कि कैदियों की फौज को अकेला वो सम्मोहित कर लेगा।....... नही आर्यमणि नही... तुम मेरे सेंसेज कैसे ब्लॉक कर सकते हो?

दरअसल बातों के दौरान ही ओर्जा अपने दिमागी तरंगों को पूरे फैलाते माया के उस विमान तक पहुंच गयी, जहां उसकी बात विषपर के वास्तविक राजा मसेदश क्वॉस से चल रही थी। उन्ही दोनो के वार्तालाप से पता चला था कि दरअसल विवियन असली राजकुमार है, जो खुद को छिपा कर रखे हुये था। ओर्जा अपनी दिमागी तरंगों से एक साथ सभी सभी जगह पर पहुंच चुकी थी और वो सबकी बातें सुन रही थी। ओर्जा ने जब आर्यमणि की बात नही मानी तब आर्यमणि ने उसके तरंगों को ही ब्लॉक कर दिया।

ओर्जा के गुस्से भरे भाव को आर्यमणि शांत करते..... “ओर्जा तुम्हारी दिमागी तरंगे कमाल की है। किंतु तुम जिस महल में रहती थी, वह जगह तुम्हारे दिमाग को उस नुकसान से बचाए रखती थी, जो तरंगों को ब्रह्मांड में फैलाने के कारण होती। लेकिन महल के बाहर तुम्हारे दिमाग पर इसका काफी असरदार प्रभाव पड़ता है। याद रहे बहुत ज्यादा जरूरी हो तभी अपनी टेलीपैथी की शक्ति का इस्तमाल करो। यदि टेलीपैथी इतनी ही आसान होती तो हम सब हर पल अपने दुश्मनों के दिमाग में ही रहते।

ओर्जा:– समझ गयी। लेकिन क्या मेरी मेहनत बरबाद गयी। क्या मैने एक भी काम की सूचना नही दी।

आर्यमणि:– ये सूचना तो काफी कमाल की थी। और जैसा की मुझे अंदेसा था, शायद वही होने वाला है।

ओर्जा:– क्या होने वाला है...

आर्यमणि:– अल्फा पैक एक पूरे प्लेनेट के विरुद्ध लड़ेगी। नायजो से लड़ना इतना आसान नहीं होगा और ये तिलिस्मी लोग बहुत जानकार होते है। खासकर इनका पत्थर और जड़ी–बूटियों का ज्ञान कमाल का है। मेरी जब भी इनसे टक्कर हुई है, पुराने हमलों के साथ–साथ कुछ नया और घातक हमला करते है।

ओजल:– हम जिंदा रहेंगे तभी हमारा बदला भी जिंदा रहेगा। चंद लोग कितने भी ताकतवर क्यों न हो, एक पूरे प्लेनेट से नही जीत सकते। जबकि 5 लोगों ने मिलकर हमारे 3 लोगों की जान पहले ले चुके है। बॉस आपकी भी जान लगभग जा ही चुकी थी।

महा:– उन्हे ऐसे तो नही छोड़ सकते है। अब जो होगा सो देखा जायेगा... यदि कोई नही भी गया तो भी मैं निमेष और हिमा के पीछे गुरियन प्लेनेट तक जाऊंगी।

ओजल:– सब पागल है यहां... पर लगता है, इस पागलपन में मजा आने वाला है।

आर्यमणि:– खतरा ज्यादा है और जीत की उम्मीद कम। जो छोड़कर जाना चाहते है वो अभी चले जाये। खासकर ओर्जा और निशांत तुम दोनो... अभी–अभी दोनो में प्यार हुआ है।

ओर्जा:– अभी–अभी प्यार हुआ से क्या मतलब है। निशांत साथ आना न चाहे तो भी मैं आऊंगी। वैसे भी विगो कभी पीछे हटते नही।

निशांत:– अरे आर्य ताने मार रहा था बस। उसे भी पता था कि हम साथ चल रहे है।

आर्यमणि:– नही मै सीरियस था। तुझे कितनी मेहनत के बाद एक कड़क लड़की मिली है, उसके साथ अभी दिन ही कितने बिताए होंगे।

निशांत:– ज्यादा मजा मत ले, पलक इंतजार में होगी। उसे बताएगा की कैसे नायजो को पृथ्वी से भेजेगा...

आर्यमणि:– शिवम सर आप महा के साथ पलक के पास जाइए। महा तुम्हे पता है ना क्या करना है?

महा:– बिलकुल पतिदेव, मुझे पता है।

ऋषि शिवम्:– लेकिन मुझे पता नही की मुझे क्या करना है?

आर्यमणि:– माफ कीजिए ऋषिवर, आप ही कहिए। आप जो कहेंगे वही होगा।

ऋषि शिवम्:– मैं पूरी अल्फा टीम को लिये जा रहा हूं। बाकी आप देख लीजिए..

आर्यमणि:– हम्मम ठीक है लिये जाइए... बाकी मैं देख लूंगा... ये भी सही है..

ऋषि शिवम सबको लेकर सीधा नागपुर अंतर्ध्यान हो गये। सभी लोगों को छोड़कर वह वापस क्रूज पर आये। आर्यमणि, ऋषि शिवम के देख मंद–मंद मुस्कुरा रहा था। ऋषि शिवम भी जवाब में मंद–मंद मुस्कुरा रहे थे।

ऋषि शिवम्:– आपके जीवन में 4 साल का बड़ा महत्व है ना। जब भी गायब हुये इतने ही वक्त के लिये गायब हुये और पीछे कई राज छोड़ गये।

आर्यमणि:– ऋषिवर विश्वास कीजिए इस बार नियति अपना खेल खेल गयी और जितनी बातें आपको राज दिख रही, इस समय वह मेरे लिये किसी घोर षड्यंत्र कम नही। सामने से तो निमेष, माया, और मधुमक्खी रानी चिची ही अल्फा पैक का शिकर कर रहे थे। साजिश भी इन्ही लोगों की थी। लेकिन अल्फा पैक का शिकर मात्र इनके मामूली सी साजिश में हो जाये असंभव था। साजिश के पीछे साजिश चल रही थी और अल्फा पैक गहरी षड्यंत्र का शिकर हो गया।

ऋषि शिवम्:– क्या था वह गहरा षड्यंत्र, और किसने रची थी ये षड्यंत्र?

आर्यमणि:– कभी “सम्पूर्ण मायाजाल सिद्धि द्वार” का नाम सुना है?

ऋषि शिवम्:– नाम से तो किसी प्रकार के भ्रम जाल फैलाने की पद्धति लगती है। अंदाजा ही लगाया है, बाकी इसके बारे में मुझे कोई जानकारी नही।

आर्यमणि:– सम्पूर्ण मायाजाल सिद्धि द्वार, को मैं भी आपके जितना ही मानता, लेकिन मेरे पास जादूगर महान की यादें थी और उन यादों में सम्पूर्ण मायाजाल सिद्धि द्वार का उल्लेख था। संपूर्ण मायाजाल सिद्धि द्वार क्या है और इसका प्रयोग कौन कर रहा था, उस पर चर्चा करने पहले मैं बता दूं कि यदि निमेष ने सबको नागलोक के भू–भाग पर सेफ पैसेज नही दिया होता, तो आज मेरा पूरा पैक मेरे साथ होता। नाग लोग की भूमि पर उसका आना पूर्ण प्रतिबंधित था।

ऋषि शिवम्:– गुरुदेव अब विषय पर आ भी जाइए। साजिश के पीछे षड्यंत्र करने वाला कौन था, और क्या था ये सम्पूर्ण मायाजाल सिद्धि द्वार, जिसने आप जैसे सशक्त योजना बनाने वाले को मात दे दिया?

आर्यमणि:– यह पूरा षड्यंत्र रीछ स्त्री महाजनिका और उसके सेवक तांत्रिक आध्यात ने रचा था। सम्पूर्ण मायाजाल, भ्रम और मायावी दृष्टि की वह मायाजाल है, जिसमे किसी जगह विशेष को ही पूरा का पूरा मायावी बना देता है। संपूर्ण मायाजाल के क्षेत्र में जैसे ही कोई कदम रखता है, उसकी पूरी जानकारी मायाजाल के रचना करने वाले तक पहुंचती है। वह मायाजाल में फसे जानवर तक के मन की बात को पढ़ सकता है और मन के भीतर कोई भी ख्याल डाल सकता है। यूं समझिए की बिना आपकी जानकारी के, बिना आपको किसी भी प्रकार से भ्रमित किये वह आपकी आत्मा तक पर काबू पा लेता है।

ऋषि शिवम्:– गुरुदेव तो क्या आत्मा योजन या फिर संपूर्ण चेतना से इसे काटा नही जा सकता था?

आर्यमणि:– सम्पूर्ण मायाजाल की रचना यदि हो गयी हो तो आप अपने पहले कदम रखते ही मायावी दुनिया में पहुंच जाते हैं। वहीं जब तक आप मायाजाल के क्षेत्र में पहला कदम नहीं डालेंगे, बाहर से देखने पर कुछ पता ही नही चलेगा। अब बताइए की इसका काट भी किसी के पास हो तो क्या वो इस सम्पूर्ण मायाजाल के सम्मोहन से खुद को बचा सकता है क्या?

ऋषि शिवम्:– फिर इस सम्पूर्ण मायाजाल से निकलने का तरीका? क्योंकि इस से निकलने का तरीका न मिला तो हमारे दुश्मन हम पर सदा हावी रहेंगे...

आर्यमणि:– जादूगर महान की याद से मुझे संपूर्ण मायाजाल सिद्ध द्वार का पता चला तो वहीं योगियों की सभा से मुझे इस मायाजाल से निकलने का तरीका मिला। योगियों के गुरु पशुपतिनाथ जी ने जब संसार का त्याग किया था, तब जाते–जाते मुझे अपना सारा ज्ञान देकर गये थे। उनका अपना एक विशेष सुरक्षा तकनीक थी जिसके अनुसार.... “आत्मा योजन की सिद्धि से आत्म के छोटे से टुकड़े को विभाजित कर चारो ओर का सुरक्षा जायजा करने खुला छोड़ दे। यह युक्ति तब भी करने है, जब कहीं अंतर्ध्यान हो रहे हो। जब आत्मा के छोटे से हिस्से पर काली तथा बुरी शक्तियां हावी होगी, तब उसके काट का उपाय सोचने तथा उन शक्तियों से बचने के उपाय पहले से होंगे।”

ऋषि शिवम्:– गुरुवर तो क्या ये उपाय आप अपने तक ही सीमित रखने वाले थे?

आर्यमणि:– अरे... आप तो आरोप लगा रहे है।

ऋषि शिवम्:– आरोप क्यों न लगाऊं गुरुदेव। सात्विक आश्रम एक तो पहले से ही सबके निशाने पर है। ऐसे में हमारे किसी भी पूर्व गुरु के दिमाग में सुरक्षा का ऐसा बेहतरीन उपाय दिमाग में नही आया। आपके पास न जाने कितने दिनों से यह जानकारी थी, फिर भी आपने साझा नही किया।

आर्यमणि अपने दोनो हाथ जोड़ते..... “ऋषिवर, अब माफ भी कर दीजिए। क्या आपको पता है अंतरिक्ष के ब्लैक होल में भी एक सम्पूर्ण मायाजाल सिद्ध द्वार की रचना की गयी थी। इसी की वजह से ब्लैक होल में फसा विमान सीधा महासागर के कैदियों के प्रदेश में पहुंच जाता है।”

ऋषि शिवम्:– गुरुदेव बात को घुमाने की बेकार कोशिश थी। जाने दीजिए अब तो बता दिये सुरक्षा उपाय। आपकी नियत पर फिर कभी सवाल उठा लेंगे। वैसे अभी हम केवल सम्पूर्ण मायाजाल की बात कर रहे थे न? सिद्ध द्वार बाद में जुड़ेगा न?

आर्यमणि:– “हां एक बार सम्पूर्ण मायाजाल को समझा देता हूं, सिद्धि द्वार तो उसका मात्र एक परिणाम है, जिसके लिये सम्पूर्ण मायाजाल की रचना की जाती है। दरअसल आम भ्रम जाल या मायाजाल के पड़े सम्पूर्ण मायाजाल किसी द्वार को सिद्ध करने के लिये ही बनाया जाता है। 21 जीव बलि, जिसमें एक पुरुष और एक महिला की स्वेक्षा बलि अनिवार्य है। 21 पुष्प, 21 साधना पर बैठे लोग 21 क्षण के मंत्र जाप से संपूर्ण मायाजाल को सिद्ध करके, किसी जगह पर उसकी रचना करते है।”

“संपूर्ण मायाजाल की रचना के बाद आत्मा जागृत की जाती है। मृत्युलोक और मायालोक के बीच फंसी आत्मा को बुलाया जाता है। ऐसी आत्मा मायाजाल के अंदर कोई भी सुरक्षित मार्ग खोल सकती है जिसका स्वामित्व मायाजाल के मालिक के पास होगा, और वो अपने एक या एक से अधिक उत्तराधिकारी को सौंप सकते हैं। एक नर और एक मादा जिसकी स्वेक्षा से बलि दी गयी होगी, उन्ही शरीर मे वो आत्म प्रवेश करती है और उस शरीर को अपनाकर अपनी अधूरी इच्छाएं पूर्ण करती है।”

ऋषि शिवम्:– गुरुवर समूर्ण मायाजाल सिद्ध द्वार तो निजी कारणों से बनाया जाता है, फिर वहां अल्फा पैक क्यों फंसी? एमुलेट वापस नही आया, तो क्या रूही, इवान और अलबेली कहीं जिंदा है?

आर्यमणि:– “हां ऋषिवर आपने सही कहा की सम्पूर्ण मायाजाल निजी कारणों से बनाई जाती है। यह भी सही है कि इतना बड़ा योजन कोई अल्फा पैक को फसाने के लिये क्यों करेगा? यहीं तो सबसे बड़ा षड्यंत्र छिपा था। संपूर्ण मायाजाल सिद्ध द्वार का जो उल्लेख था, वह बस एक दुनिया के बीच के रास्ते को सिद्ध करने के लिये विधि थी। परंतु नाग लोक के भू–भाग पर दो दुनिया के बीच रास्ता खोला जाना था। षड्यंत्र महाजनिका रचा हुआ था। उसे धरातल पर लाया उसका सेवक तांत्रिक आध्यात।”

“महाजनिका का यदि इतिहास उलटेंगे तब पता चलेगा की वह मूल दुनिया से विपरीत दुनिया में टेलीपोर्ट कर सकती थी। किसी को ये नहीं पता था कि वह एकमात्र ऐसी साधिका थी जिसने सम्पूर्ण मायाजाल सिद्ध द्वार का निर्माण किया था। उसने अपने मंत्रो की शक्ति से वह कारनामा कर दिखाया, जिसे पाने के लिये काली शक्ति के उपासक कुछ भी कर सकते थे। उसने न सिर्फ सम्पूर्ण मायाजाल सिद्ध द्वार का निर्माण किया अपितु उसका सफलतापूर्वक परीक्षण भी कर चुकी थी।”

“महाजनिका को दो दुनिया के बीच रास्ता खोलने के लिये 4 खास इक्छाधारियों के बलि की जरूरत थी, जिनकी आत्माओं को दो दुनिया के द्वार के बीच फसाया जाता। पहले भी महाजनिका को श्राप जगाने के लिये जब 2 दुनिया का रस्ता खोला गया था, वहां भी खास इच्छाधारी मादा लोमड़ी का इस्तमाल किया गया था, ओशून। मैक्सिको में ओशुन की आत्मा को 2 दुनिया के बीच फसाकर एक बहुत ही छोटा सा द्वार खोला गया था, जहां से महाजनिका की आत्मा विपरीत दुनिया से उसके शरीर तक पहुंची थी।”

“महाजनिका जब हमसे बचकर भागी थी, तब किसी तरह वह विपरीत दुनिया तो पहुंच गयी। लेकिन वापस इस दुनिया में कहर बरसाने और अपने विनाश का एक मात्र हथियार नष्ट करने उसे मूल दुनिया में किसी तरह तो आना ही था। इसलिए उसने सम्पूर्ण मायाजाल सिद्ध द्वार की रचना की। कोई भी इच्छाधारी की आत्मा विपरीत दुनिया को नही खोल सकती इसलिए उसे खास इक्छाधारि की तलाश थी। चार खास इक्छाधारि। एक तो ओशुन ही हो जाती, लेकिन ओशुन को मारकर उसके शरीर पर मधुमक्खी की रानी ने कब्जा कर लिया। बचे थे अल्फा पैक के हम खास 5 वुल्फ जिसमे से ओजल तो आश्रम के साथ हो गयी। अब बचे थे हम 4। मै, रूही, इवान और अलबेली। मायाजाल में फसाकर वह 3 को निगल गयी। लेकिन महाजानिका को यदि दो दुनिया के द्वार खोलना है, तो वह या तो मेरे लिये एक बार फिर मायाजाल की रचना करेगी या फिर किसी अन्य खास इक्छाधारी की तलाश कर रही होगी।

ऋषि शिवम्:– जब उस दिन रूही, इवान और अलबेली की हत्या हो गयी, फिर उनका एमुलेट वापस क्यों नही आया?

आर्यमणि:– “क्योंकि वो तीनो अब भी जिंदा है। बस फर्क सिर्फ इतना है कि जिस रूही अलबेली और इवान को हम जानते थे, उनकी आत्मा तो कबकी उनके शरीर से निकल चुकी है। मरणोपरांत उनका शव कहीं नही मिला था, क्योंकि जिस वक्त उनकी लाश गिरी थी, ठीक उसी वक्त उनका शरीर विपरीत दुनिया में जा चुका था और उस पहाड़ी पर जो दिख रहा था, वह बस मायावी दृश्य थी। यदि मैं भी मर गया होता, तो मेरी भी लाश विपरीत दुनिया में खींच जाती और फिर महाजनिका दो दुनिया के बीच एक बार फिर अपने लिये सुरक्षित द्वार खोल चुकी होती।

“उन तीनो का शरीर विपरीत दुनिया में फसा है जिसमे किसी और की आत्मा बसती है। या तो चौथा लाश गिरेगी और सम्पूर्ण मायाजाल सिद्ध द्वार खुलने के बाद वो लोग (रूही, एवं और अलबेली का शरीर) विपरीत दुनिया से मूल दुनिया में आयेंगे। या फिर उनके शरीर को वापस लाने मुझे खुद विपरीत दुनिया में जाऊंगा। विकल्प चाहे जो भी हो लेकिन जब तक तीनो के अंतिम संस्कार नही हो जाते, मेरी आत्मा को चैन नहीं मिलेगा।”

ऋषि शिवम्:– बहते आंसू को रोक लीजिए गुरुदेव। कुछ नवसिखियों के साजिश के पीछे जब इतना बड़ा षड्यंत्र चल रहा हो, फिर आप खुद को क्यों दोषी मानते है?

आर्यमणि:– “जो भी हुआ उसमे मेरे अनदेखापन को नजरंदाज नहीं किया जा सकता। वो तांत्रिक आध्यत मेरे सारे सुरक्षा मंत्र को तोड़कर वहां अपना सम्पूर्ण योजन पूर्ण कर गया और मैं महासागर में गोते लगा रहा था।”

“यदि मैं महासागर के अंदर इतना समय न बीताता तो यह नतीजा नही होता। तांत्रिक आध्यात इतने इत्मीनान से मेरे सुरक्षा मंत्र को तोड़ न रहा होता। वह अपनी मालकिन के इशारे पर हमारे लिये जाल न बुन रहा होता। आज मेरी रूही मेरे पास होती। अलबेली और इवान मेरे पास होते। जरूर मेरे ही किसी बुरे कर्मों का फल उन तीनो ने भुगता है।”

 

Surya_021

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Lovely update 😍
 
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Devilrudra

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भाग:–178


स्क्रीन के सामने सभी कातिल लाइन लगाकर हाई करने लगे। माया उन सबका चेहरा दिखाने के बाद.... “हम सब विषपर आइलैंड जा रहे। अब मेरे बाप को मार दे या कैद में रख घंटा फर्क नही पड़ता। वैसे भी अपने परिवार में मैं अकेली बची इसलिए जा रही हूं अपना देश संभालने। तू रोज रात को अपनी नई बीवी के साथ घंटा हिलाकर सोचते रहना की मैं अपना बदला कैसे लूं।”

इतना कहकर माया ने लाइन डिस्कनेक्ट कर दिया और आर्यमणि सोच में.... "ये एलियन पहले इतने चालाक तो नही थे, कोई इन्हे चालाकी की ट्रेनिंग दे रहा है क्या?”....

निशांत:– ये क्या था रे.... इसने तो पूरे प्लान की वाट लगा दी। क्यों बे चुतिया राजा, ऐसी बेगैरत औलाद...

राजा बोजाज्स:– एक बार मुझे विषपर की सीमा तक पहुंचा दो, उसके बाद तुम्हारे सारे दोषियों को मै तुन्हे सौंप दूंगा और वादा करता हूं पृथ्वी पर फिर कोई नायजो नही बसेगा...

निशांत:– चल इसे लेकर, अब ये जगह बोरिंग लगने लगी है।

आर्यमणि:– ओजल आग लगाओ सबको और यहां की कहानी सामेटो। 8 घंटों तक इन्हे देखने का धैर्य न रहा।

बिना वक्त गवाए ओजल पूरे मैदान में आग लगा चुकी थी। पूरा कारवां निकला। आर्यमणि अपने साथ उन लोगों को भी लेता गया जो इस शादी में आमंत्रित तो थे, लेकिन उन्हें ज्ञान नही था की वो किसी एलियन की शादी में शरीक हो रहे है। थे तो इंसान ही और उन सब के लिये ये सब पचा पाना काफी मुश्किल था। बाहर ही संन्यासियों के साथ परिवार के लोग भी थे, जो अंदर की भीषण हिंसा को देख नही पाए और बाहर आ गये थे।

आर्यमणि ने ओजल को इशारा किया और वह सबको लेकर बीच के ओर बढ़ने लगी। इधर आर्यमणि करीब 30 इंसानों को रोक हुये था। वो लोग कुछ हिम्मत करके आर्यमणि से खुलने की कोशिश कर रहे थे। थे तो सभी बड़े ओहदे वाले और पहुंच वाले लोग, लेकिन बिना बॉडीगार्ड और अपनी सुरक्षा के थर–थर कांप रहे थे।

आर्यमणि:– सुनो तुम सब... मुझे ये बताने की कोई जरूरत नहीं की कौन क्या है? और न ही दिमाग पर जोर डालो की यहां क्या हुआ? चुपचाप मेरे साथ चलो, तुम सबको मैं भारत छोड़ आऊंगा। कोई भारत के बाहर का है क्या यहां?

एक हाथ उठा और कांपते होटों से कहा.... “सर मैं साउथ कोरिया से हूं।”...

आर्यमणि:– ठीक है तुम्हे साउथ कोरिया छोड़ दूंगा। अब सब मुंह बंद करके चुपचाप चलेंगे...

सब बीच तक पहुंचे। बीच पर पहले से गहमा–गहमी। अचानक वहां क्रूज कहां से आ गया। गायब होकर जाने के बदले क्रूज से क्यों जाना। वैगराह वैगरह... आखिरकार सब क्रूज पर सवार हुये। जो 30 इंसान को आर्यमणि निकाला था, उन सबको ट्रेनिंग एरिया में पैक करके, सबको बेहोश कर दिया और उनकी यादें में फेर बदल कर दिया। दक्षिण कोरिया वाले को उसके बेडरूम तक छोड़ भी आया।

सारा काम समाप्त करने के बाद आर्य डेक पर आया, जहां सभी लोग बैठे हुये थे। आर्यमणि को सबसे पहले भूमि, केशव और जया ने ही पकड़ा। अब तक जिन बातों पर चर्चा नही हुई थी, उन्ही बातों पर चर्चा होने लगी। आर्यमणि जिंदा कैसे बचा और वो 4 साल तक कर क्या रहा था। आर्यमणि ने विस्तारपूर्वक सबके दुविधा को दूर किया।

आक्रोशित तो सभी थे, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना की कैसे माया, निमेषदर्थ और हिमा को लेकर दूर भाग गयी? उन्हे इतनी आसानी जाने कैसे दिया? जब यह चर्चा चल रही थी तब चौथे साथी का भी नाम आया... योजना मे तो चार लोग थे, यहां भागे केवल 3 लोग है, ये चौथा कौन है?

आर्यमणि कुछ देर मौन रहकर बोलना शुरू किया..... “मैं निमेषदर्थ की यादों में था और वहां इनका चौथा साथी बी–वूमेन थी। बी–विमेन अपने मधुमक्खी के स्वरूप में नही थी बल्कि एक होस्ट बॉडी उसके पास थी।”..

सभी एक साथ.... “किसकी होस्ट बॉडी?”..

आर्यमणि:– ओशुन...

सब चौंकते हुये.... “क्या ओशुन?”..

आर्यमणि:– हां ओशुन... जिस दिन मैंने ओशुन को मैक्सिको में कैद से छुड़ाया था, वह बी–विमेन भी उसी दिन शायद ओशुन के शरीर में घुसी थी। वह लगातार हमारे आस–पास रही और मेरे खिलाफ साजिश रचती रही। आखिरकार वो कामयाब भी रही। वो पृथ्वी छोड़कर कहीं जा नही सकती। उसे हम बाद में देखते है। उसके पास मेरा एक साथी भी है... उसे भी तो सही सलामत वापस लाना है।

भूमि:– और अभी जो ये माया भागी है, उसका क्या? कल से तो पृथ्वी भी खाली हो जायेगी, फिर क्या कर लोगे। ये तुम्हारे मुंह पर नही बल्कि हमारे पूरे समाज के मुंह पर तमाचा मारकर भागे है।..

“दीदी बातें होती रहेगी, पहले आप लोग खाना खा लीजिए। ओजल बेटा तू साकाहारी वालों को अलग बिठाकर परोस।”... महा, खाना की थाली डॉक पर लगवाती हुई कहने लगी।

भूमि:– अरे कहां से इसे पकड़कर लाया है, हर वक्त खाने के पीछे पड़ी रहती है। महा, बस करो हम यहां कुछ जरूरी डिस्कस कर रहे।

महा:– सुनो जी आप ही मुखिया हो ना... चलो उठो और आपके खाने की व्यवस्था दूसरी तरफ की हूं, उधर जाकर बैठ जाओ। दीदी, आपको भूख लगी है इसलिए आप इतनी चिढ़ी हुई है। पहले खाना खा लो, फिर इत्मीनान से बात होगी। मां आप नॉन वेज लेती है या नही।

जया:– हां लेती हूं महा.. और तुम्हारे पापा भी लेते है।

महा:– और कोई है क्या नॉन–वेज वाले...

जया:– तुम हमारे साथ बैठ रही या आर्य के साथ।

महा:– पहले आप सबको खिला दूं, फिर मैं खा लूंगी। जबसे विवाह हुआ है मैं भी वेज हो गयी हूं।

भूमि:– वेज होकर नॉन–वेज परोस रही हो?

महा:– कोई आपत्ति नहीं है दीदी। आप खाओ न...

केशव:– सुन आर्य..

आर्यमणि:– हां पापा..

केशव:– तूने बेटा 3 गर्लफ्रेंड बनाई। 2 शादी भी रचाई लेकिन इस निशांत को क्या हुआ... अब भी सैंडल ही खा रहा है क्या?

निशांत:– सब आपकी मेहरबानी है अंकल... आपके ही गुरु ज्ञान ने मुझे अब तक अकेला रखा है।

ओर्जा:– ज्ञान के कारण अकेले रह गये, भला ये किस प्रकार का ज्ञान था?

“ये कौन”... “ये कौन”... “ये कौन”... केशव, जाया और भूमि तीनो ने ऋषि शिवम के साथ प्रकट हुई लड़की के विषय में पूछने लगे।

आर्यमणि:– सात्विक गांव के स्थापना के समय तो तीनो वहीं थे। फिर भी किसी को नही पता की ये कौन है?

तीनो ने एक जैसा प्रतिक्रिया और एक जैसा जवाब.... “नही पता।”..

आर्यमणि:– ओर्जा तुम ही अपना परिचय दो।

ओर्जा:– बाकी की लंबी कहानी है। संछिप्त में कहूं तो मैं निशांत की गर्लफ्रेंड हूं।

केशव:– गर्लफ्रेंड मतलब टाइम पास वाली गर्लफ्रेंड या कोई सीरियस कमिटमेंट है?

ओर्जा:– टाइम पास और सीरियस का मतलब मैं समझी नहीं। निशांत मेरी सच्ची चाहत है। उसी ने बताया की जबतक गठबंधन नहीं होता तब तक मैं इसकी गर्लफ्रेंड रहूंगी। और जब गठबंधन हो जायेगा तब पत्नी। लेकिन ये सीरियस और टाइम पास के बारे में कुछ नही बोला। बताओ ना निशांत...

महा:– खाते समय ज्यादा बोलते नही। इसलिए वो चुप है। वो पृथ्वी पर ऐसे ही लोग सीरियस और टाइम पास पूछ लेते है। तुम निशांत जी की भी सच्ची मोहब्बत हो, यकीन न हो तो उसके दिमाग में झांक लो...

ओर्जा:– सच्ची चाहत को कभी परखते नही वरना हमेशा अन–बन लगा रहता है। छोड़ो ये सब। मुझे भी कुछ खिलाओ... खाने की बड़ी अच्छी खुशबू आ रही...

महा, ओर्जा को अपने साथ ले गयी और दोनो साथ बैठकर आराम से खाने लगे। इधर जबतक दिमाग में झांकने के ऊपर चर्चा चलने लगी। ओर्जा, अल्फा पैक की आखरी सदस्य थी।

यदि ओर्जा के ओरिजिन की बात करे तो वो ब्रह्मांड के एक विलुप्त पराक्रमी समुदाय विगो समुदाय की थी। अपने उन्नत टेक्नोलॉजी और विकास ने इस कदर इस समुदाय को घमंड से चूर किया की स्वयं ही अपना विनाश कर बैठे। ब्रह्मांड में विगो का खौफ इतना था कि दूसरे ग्रह वासियों ने इनका क्लासिफिकेशन तक कर दिया था। विगो सेकंड क्लास, फर्स्ट क्लास, विगो फर्स्ट क्लास अल्फा, और सबसे आखरी में था विगो सिग्मा।

खैर जब विगो के ग्रह का विनाश हुआ तब कुछ विगो जीवित बच गये जो ब्रह्मांड के विभिन्न ग्रह पर किसी सरनार्थी की तरह रहते थे। बात करे यदि ओर्जा की तो वो डार्क यूनिवर्स के कोर प्लेनेट से आयी थी। ओर्जा किन हालातों में भागी और भागने के दौरान क्या उत्पात मचाकर भागी थी यह तो सब जानते थे। लेकिन ऐसा तो था नहीं की अष्टक चुप बैठता।

ओर्जा वैसे पृथ्वी पर तो पहुंच चुकी थी, लेकिन उसके पीछे 2 आफत हाथ धो कर पीछे पड़ी थी, जो डार्क यूनिवर्स से ओर्जा की तलाश में निकले थे... मेसा और हेला... यूं तो दोनो ओर्जा के सौतेले भाई बहन थे। एक ही मां से जन्मे पर पिता अलग–अलग। हेला और मेसा, अस्टक के वंशजों में 2 ऐसा नाम थे जो अस्टक के बाद साम्राज्य चलाने के लिये सक्षम थे।

हेला के अंदर विशेष प्रकार की शक्ति थी जिस वजह से उसका पूरा शरीर, शारीरिक संरचना के मूलभूत आधार यानी की कोशिकाओं में टूट जाती थी। असंख्य कोसिका हवा में विलीन होकर अपनी मर्जी से किसी भी दिशा में जा सकती थी। उसकी हर कोशिकाओं में हेला का पूर्ण दिमाग बसता था और कोई एक कोशिका भी किसी के शरीर में घुस गया फिर वह महज एक मिनट में अंदर, शरीर के पूरे सिस्टम को ही निगल कर बाहर निकलता था।

हेला के साथ आया मेसा भ्रम का स्वामी माना जाता था। वह एक ही वक्त में अपने 1000 शरीर को दिखा सकता था और उसका हर भ्रमित शरीर उतना ही क्षमतावान था, जितना मेसा। इसके अलावा मेसा का शरीर भी कोशिकाओं में टूट सकता था, किंतु वह हेला जितनी क्षमतावान नही थी। इसका ये अर्थ नही था कि उसकी कोशिकाएं तांडव नही मचा सकती थी।

2 जहरीले फन हेला और मेसा, अपने साथ अनोखी और विध्वंसक शक्तियों वाले 10 लाख वंशज फौज के साथ, ओर्जा को ढूंढने के लिये निकले थे। इन सभी पर ओर्जा को पकड़कर कोर प्लेनेट तक पहुंचाने की जिम्मेदारी थी और कोई बीच में आया तो उसके प्लेनेट को उजाड़कर ओर्जा को ले जाने का दम–खम रखते थे।

यात्रा के दौरान निश्चल और ओर्जा की दोस्ती भी हुई। वहीं निश्चल को पता भी चला की ओर्जा उसी की तरह एक विगो है। बस ओर्जा एक क्लासीफाइड विगो थी, जिसकी शक्तियों के बारे में सबको पहले से पता था। जबकि निश्चल एक अनक्लासिफाइड विगो था, जिसकी शक्तियों का पूर्ण आकलन किसी के पास नही था। वैसे विगो क्लासीफाइड हो या अनक्लासिफाइड, ब्रह्मांड के दूसरे ग्रह वाले विगो नाम सुनकर ही अपने कदम पीछे हटा लिया करते थे।

2 विगो एक साथ पृथ्वी तक तो पहुंचे लेकिन ओर्जा, निश्चल के समस्या और समाधान के बीच से खुद को किनारे कर ली और जा टकराई अपस्यु से। अपस्यु फिर उसे लेकर कैलाश मार्ग मठ पहुंचा। जहां उसकी टेलीपैथी की शक्तियों को ही नही निखारा गया, बल्कि उसकी शारीरिक और मानसिक शक्ति को पूर्ण विकसित भी किया गया।

ओर्जा इस से पहले कभी सांसारिक जीवन को देखी ही नही थी, इसलिए हर मजेदार चीज को समझने के लिये उतनी ही जिज्ञासु रहती थी। अल्फा पैक जब यात्रा पर निकल रही थी तब ओर्जा को आर्यमणि ने ही रोका था। ओर्जा कैसे खुद को छिपाकर रखे उसपर मंथन और टेस्ट दोनो ही चल रहा था।

जैसे ही ओर्जा का टेस्ट समाप्त हुआ, अपस्यु ने ऋषि शिवम् को बुला लिया। ऋषि शिवम को समझा दिया गया की क्यों ओर्जा को छिपाकर रखना है। पूरी कहानी और चल रहा माहौल की बारीकियां आर्यमणि तक पहुंच चुकी थी।

ओर्जा, अपस्यु के साथ रहती तो वहां न सिर्फ अपस्यु के साथ खतरा बना रहता, बल्कि जिस काम को पूरा करने के लिये कई खतरों को उठाया गया था, जीविषा और निश्चल की खोई यदास्त को दुरुस्त करना, वह काम बीच में ही अटक जाता। और यदि कहीं ये काम बीच में अटकता, फिर तो समस्त ब्रह्माण्ड विनाश की नई कहानी को उदय होते हुये देखता।

यही एक वजह भी रही थी कि जब ओर्जा और निश्चल एक साथ पृथ्वी पहुंचे, तब ओर्जा को निश्चल से अलग कर दिया गया था। एक तो निश्चल और जीविषा पहले से ही दुश्मनों के नजर में थे, ऊपर से अभी एक और नए दुश्मन को अपस्यु नही संभालना चाह रहा था, इसलिए निश्चल से दूर करने के बाद पहले 3 माह तक ओर्जा को कैलाश मठ में प्रशिक्षित किया गया। उसके बाद सात्विक गांव में छिपकर रहने कहा गया था।

आर्यमणि की झलक देखकर सबसे ज्यादा अपस्यु ही खुश हुआ था। जो वर्तमान परिस्थिति थी, उसमे अपस्यु को एक मजबूत और भरोसेमंद साथी की अति आवश्यकता थी। और आर्यमणि तो इन पैमानों से कहीं ज्यादा ऊपर था।

खैर क्रूज पर माहौल ही पूरा उबासी ले रहा था। महा के हाथ का मजेदार खाना खाने के बाद सबको बिस्तर की ही याद आयी। हर कोई महा की तारीफ करते नही थक रहे थे। खाना खाने के अल्प विराम के बाद एक बार फिर महफिल सजी और आगे की रणनीति तय होने लगी। भगोड़े दोषियों का क्या किया जाये और उसे कैसे पृथ्वी पर वापस लाकर सजा दी जाये, इसपर विस्तृत चर्चा शुरू हुई।

महा:– आप सबके बीच मैं सबसे नई हूं, फिर भी कुछ कहना चाहती हूं...

ओर्जा:– देखा जाये तो मैं सबसे ज्यादा नई हूं पर मुझे कुछ नही कहना...

निशांत:– क्यों नही कुछ कहना... जो भी ख्याल आ रहा हो, बेझिझक कहो...

ओर्जा:– मुझे तो बस सच्ची मोहब्बत की छाप चाहिए। जानू मुझसे कब गठबंधन कर रहे हो?

आर्यमणि:– निशांत एक काम क्यों नही करते, किसी कोपचे में जाकर तुम दोनो गठबंधन क्यूं नही कर लेते, जब तक हम अपना काम करते हैं।

निशांत:– चलो ओर्जा, यहां हमारी जोड़ी से बहुत लोग जल रहे है।

ओर्जा:– मैं क्यूं जाऊं, मुझे यहां बैठकर रणनीति सुननी है।

आर्यमणि:– जल्दी भाग फिर मैं काम की बात करूं। फालतू की बात में सबको उलझा रखा है।

निशांत:– हां मैं तो फालतू की बात कर रहा हूं, काम की बात तो तेरी बीवी करने वाली है ना... चलो ओर्जा यहां नही रुकना..

ओर्जा:– ना ना निशांत यहां रुकते है। महा तुम कहो...

महा:– गलती मेरी ही है जो मैं नए पुराने में फंसी। मै तो बस यह कहना चाह रही थी कि विषपर प्लेनेट का राजा इतनी आसानी से अपने चंगुल में कैसे आ गया? एक पूरे ग्रह का राजा इतना कमजोर...

आर्यमणि:– सारी बातें ध्यान में है महा। न सिर्फ विषपर प्लेनेट के राजा पर शक है, बल्कि करेनाराय पर भी शक है।

ओर्जा:– विषपर प्लेनेट का राजा मसेदश क्वॉस है। वह अपनी सेना तैयार कर रहा है। माया अभी रास्ते में है लेकिन वह विषपर प्लेनेट नही जा रही, बल्कि गुरियन प्लेनेट जा रही है। माया के साथ निमेष और हिमा दोनो है। मुख्य साजिशकर्ता विवियन एक राजकुमार है, जो मुख्य योजनाकर्ता था और हमेशा खुद को छिपा कर रखता है। विवियन इस वक्त पृथ्वी पर ही है, रानी मधुमक्खी चीची के साथ। वो खंजर जिस से सबकी हत्या हुई थी वह विवियन के पास ही है और वह किसी से खंजर के विषय में बात कर रहा है।

आर्यमणि:– ओर्जा क्या तुम अभी टेलीपैथी करना बंद करोगी...

ओर्जा:– मैं उन सबको देख सकती हूं। नायजो एक खतरनाक समुदाय है। गुरियन प्लेनेट पर आर्य के मौत की योजना बन रही है। निमेष माया से कह रहा है कि कैदियों की फौज को अकेला वो सम्मोहित कर लेगा।....... नही आर्यमणि नही... तुम मेरे सेंसेज कैसे ब्लॉक कर सकते हो?
Mast 👍👍👍
 
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Sushilnkt

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क्या क्या होगा रे

बहुत रोचक
 
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CFL7897

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Oh to yah Sara Khel Mahajanika dwara racha gaya tha....
Alpha pack ka las na milane ka Karan bhi samajh mein a Gaya Unki mrutyu Sharir Kisi dusri Duniya Mein Hai yah bahut hi dukhdaai hai...

Dekhte hain aryamani is purn Mayajaal ko kaise todta hai aur apne Sathiyo Ki Lash dusri Duniya Se Kaise Lata hai Mahajanika ko harakar..
 

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I love Fantasy and Sci-fiction story.
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N
भाग:–179


ओर्जा:– मैं उन सबको देख सकती हूं। नायजो एक खतरनाक समुदाय है। गुरियन प्लेनेट पर आर्य के मौत की योजना बन रही है। निमेष माया से कह रहा है कि कैदियों की फौज को अकेला वो सम्मोहित कर लेगा।....... नही आर्यमणि नही... तुम मेरे सेंसेज कैसे ब्लॉक कर सकते हो?

दरअसल बातों के दौरान ही ओर्जा अपने दिमागी तरंगों को पूरे फैलाते माया के उस विमान तक पहुंच गयी, जहां उसकी बात विषपर के वास्तविक राजा मसेदश क्वॉस से चल रही थी। उन्ही दोनो के वार्तालाप से पता चला था कि दरअसल विवियन असली राजकुमार है, जो खुद को छिपा कर रखे हुये था। ओर्जा अपनी दिमागी तरंगों से एक साथ सभी सभी जगह पर पहुंच चुकी थी और वो सबकी बातें सुन रही थी। ओर्जा ने जब आर्यमणि की बात नही मानी तब आर्यमणि ने उसके तरंगों को ही ब्लॉक कर दिया।

ओर्जा के गुस्से भरे भाव को आर्यमणि शांत करते..... “ओर्जा तुम्हारी दिमागी तरंगे कमाल की है। किंतु तुम जिस महल में रहती थी, वह जगह तुम्हारे दिमाग को उस नुकसान से बचाए रखती थी, जो तरंगों को ब्रह्मांड में फैलाने के कारण होती। लेकिन महल के बाहर तुम्हारे दिमाग पर इसका काफी असरदार प्रभाव पड़ता है। याद रहे बहुत ज्यादा जरूरी हो तभी अपनी टेलीपैथी की शक्ति का इस्तमाल करो। यदि टेलीपैथी इतनी ही आसान होती तो हम सब हर पल अपने दुश्मनों के दिमाग में ही रहते।

ओर्जा:– समझ गयी। लेकिन क्या मेरी मेहनत बरबाद गयी। क्या मैने एक भी काम की सूचना नही दी।

आर्यमणि:– ये सूचना तो काफी कमाल की थी। और जैसा की मुझे अंदेसा था, शायद वही होने वाला है।

ओर्जा:– क्या होने वाला है...

आर्यमणि:– अल्फा पैक एक पूरे प्लेनेट के विरुद्ध लड़ेगी। नायजो से लड़ना इतना आसान नहीं होगा और ये तिलिस्मी लोग बहुत जानकार होते है। खासकर इनका पत्थर और जड़ी–बूटियों का ज्ञान कमाल का है। मेरी जब भी इनसे टक्कर हुई है, पुराने हमलों के साथ–साथ कुछ नया और घातक हमला करते है।

ओजल:– हम जिंदा रहेंगे तभी हमारा बदला भी जिंदा रहेगा। चंद लोग कितने भी ताकतवर क्यों न हो, एक पूरे प्लेनेट से नही जीत सकते। जबकि 5 लोगों ने मिलकर हमारे 3 लोगों की जान पहले ले चुके है। बॉस आपकी भी जान लगभग जा ही चुकी थी।

महा:– उन्हे ऐसे तो नही छोड़ सकते है। अब जो होगा सो देखा जायेगा... यदि कोई नही भी गया तो भी मैं निमेष और हिमा के पीछे गुरियन प्लेनेट तक जाऊंगी।

ओजल:– सब पागल है यहां... पर लगता है, इस पागलपन में मजा आने वाला है।

आर्यमणि:– खतरा ज्यादा है और जीत की उम्मीद कम। जो छोड़कर जाना चाहते है वो अभी चले जाये। खासकर ओर्जा और निशांत तुम दोनो... अभी–अभी दोनो में प्यार हुआ है।

ओर्जा:– अभी–अभी प्यार हुआ से क्या मतलब है। निशांत साथ आना न चाहे तो भी मैं आऊंगी। वैसे भी विगो कभी पीछे हटते नही।

निशांत:– अरे आर्य ताने मार रहा था बस। उसे भी पता था कि हम साथ चल रहे है।

आर्यमणि:– नही मै सीरियस था। तुझे कितनी मेहनत के बाद एक कड़क लड़की मिली है, उसके साथ अभी दिन ही कितने बिताए होंगे।

निशांत:– ज्यादा मजा मत ले, पलक इंतजार में होगी। उसे बताएगा की कैसे नायजो को पृथ्वी से भेजेगा...

आर्यमणि:– शिवम सर आप महा के साथ पलक के पास जाइए। महा तुम्हे पता है ना क्या करना है?

महा:– बिलकुल पतिदेव, मुझे पता है।

ऋषि शिवम्:– लेकिन मुझे पता नही की मुझे क्या करना है?

आर्यमणि:– माफ कीजिए ऋषिवर, आप ही कहिए। आप जो कहेंगे वही होगा।

ऋषि शिवम्:– मैं पूरी अल्फा टीम को लिये जा रहा हूं। बाकी आप देख लीजिए..

आर्यमणि:– हम्मम ठीक है लिये जाइए... बाकी मैं देख लूंगा... ये भी सही है..

ऋषि शिवम सबको लेकर सीधा नागपुर अंतर्ध्यान हो गये। सभी लोगों को छोड़कर वह वापस क्रूज पर आये। आर्यमणि, ऋषि शिवम के देख मंद–मंद मुस्कुरा रहा था। ऋषि शिवम भी जवाब में मंद–मंद मुस्कुरा रहे थे।

ऋषि शिवम्:– आपके जीवन में 4 साल का बड़ा महत्व है ना। जब भी गायब हुये इतने ही वक्त के लिये गायब हुये और पीछे कई राज छोड़ गये।

आर्यमणि:– ऋषिवर विश्वास कीजिए इस बार नियति अपना खेल खेल गयी और जितनी बातें आपको राज दिख रही, इस समय वह मेरे लिये किसी घोर षड्यंत्र कम नही। सामने से तो निमेष, माया, और मधुमक्खी रानी चिची ही अल्फा पैक का शिकर कर रहे थे। साजिश भी इन्ही लोगों की थी। लेकिन अल्फा पैक का शिकर मात्र इनके मामूली सी साजिश में हो जाये असंभव था। साजिश के पीछे साजिश चल रही थी और अल्फा पैक गहरी षड्यंत्र का शिकर हो गया।

ऋषि शिवम्:– क्या था वह गहरा षड्यंत्र, और किसने रची थी ये षड्यंत्र?

आर्यमणि:– कभी “सम्पूर्ण मायाजाल सिद्धि द्वार” का नाम सुना है?

ऋषि शिवम्:– नाम से तो किसी प्रकार के भ्रम जाल फैलाने की पद्धति लगती है। अंदाजा ही लगाया है, बाकी इसके बारे में मुझे कोई जानकारी नही।

आर्यमणि:– सम्पूर्ण मायाजाल सिद्धि द्वार, को मैं भी आपके जितना ही मानता, लेकिन मेरे पास जादूगर महान की यादें थी और उन यादों में सम्पूर्ण मायाजाल सिद्धि द्वार का उल्लेख था। संपूर्ण मायाजाल सिद्धि द्वार क्या है और इसका प्रयोग कौन कर रहा था, उस पर चर्चा करने पहले मैं बता दूं कि यदि निमेष ने सबको नागलोक के भू–भाग पर सेफ पैसेज नही दिया होता, तो आज मेरा पूरा पैक मेरे साथ होता। नाग लोग की भूमि पर उसका आना पूर्ण प्रतिबंधित था।

ऋषि शिवम्:– गुरुदेव अब विषय पर आ भी जाइए। साजिश के पीछे षड्यंत्र करने वाला कौन था, और क्या था ये सम्पूर्ण मायाजाल सिद्धि द्वार, जिसने आप जैसे सशक्त योजना बनाने वाले को मात दे दिया?

आर्यमणि:– यह पूरा षड्यंत्र रीछ स्त्री महाजनिका और उसके सेवक तांत्रिक आध्यात ने रचा था। सम्पूर्ण मायाजाल, भ्रम और मायावी दृष्टि की वह मायाजाल है, जिसमे किसी जगह विशेष को ही पूरा का पूरा मायावी बना देता है। संपूर्ण मायाजाल के क्षेत्र में जैसे ही कोई कदम रखता है, उसकी पूरी जानकारी मायाजाल के रचना करने वाले तक पहुंचती है। वह मायाजाल में फसे जानवर तक के मन की बात को पढ़ सकता है और मन के भीतर कोई भी ख्याल डाल सकता है। यूं समझिए की बिना आपकी जानकारी के, बिना आपको किसी भी प्रकार से भ्रमित किये वह आपकी आत्मा तक पर काबू पा लेता है।

ऋषि शिवम्:– गुरुदेव तो क्या आत्मा योजन या फिर संपूर्ण चेतना से इसे काटा नही जा सकता था?

आर्यमणि:– सम्पूर्ण मायाजाल की रचना यदि हो गयी हो तो आप अपने पहले कदम रखते ही मायावी दुनिया में पहुंच जाते हैं। वहीं जब तक आप मायाजाल के क्षेत्र में पहला कदम नहीं डालेंगे, बाहर से देखने पर कुछ पता ही नही चलेगा। अब बताइए की इसका काट भी किसी के पास हो तो क्या वो इस सम्पूर्ण मायाजाल के सम्मोहन से खुद को बचा सकता है क्या?

ऋषि शिवम्:– फिर इस सम्पूर्ण मायाजाल से निकलने का तरीका? क्योंकि इस से निकलने का तरीका न मिला तो हमारे दुश्मन हम पर सदा हावी रहेंगे...

आर्यमणि:– जादूगर महान की याद से मुझे संपूर्ण मायाजाल सिद्ध द्वार का पता चला तो वहीं योगियों की सभा से मुझे इस मायाजाल से निकलने का तरीका मिला। योगियों के गुरु पशुपतिनाथ जी ने जब संसार का त्याग किया था, तब जाते–जाते मुझे अपना सारा ज्ञान देकर गये थे। उनका अपना एक विशेष सुरक्षा तकनीक थी जिसके अनुसार.... “आत्मा योजन की सिद्धि से आत्म के छोटे से टुकड़े को विभाजित कर चारो ओर का सुरक्षा जायजा करने खुला छोड़ दे। यह युक्ति तब भी करने है, जब कहीं अंतर्ध्यान हो रहे हो। जब आत्मा के छोटे से हिस्से पर काली तथा बुरी शक्तियां हावी होगी, तब उसके काट का उपाय सोचने तथा उन शक्तियों से बचने के उपाय पहले से होंगे।”

ऋषि शिवम्:– गुरुवर तो क्या ये उपाय आप अपने तक ही सीमित रखने वाले थे?

आर्यमणि:– अरे... आप तो आरोप लगा रहे है।

ऋषि शिवम्:– आरोप क्यों न लगाऊं गुरुदेव। सात्विक आश्रम एक तो पहले से ही सबके निशाने पर है। ऐसे में हमारे किसी भी पूर्व गुरु के दिमाग में सुरक्षा का ऐसा बेहतरीन उपाय दिमाग में नही आया। आपके पास न जाने कितने दिनों से यह जानकारी थी, फिर भी आपने साझा नही किया।

आर्यमणि अपने दोनो हाथ जोड़ते..... “ऋषिवर, अब माफ भी कर दीजिए। क्या आपको पता है अंतरिक्ष के ब्लैक होल में भी एक सम्पूर्ण मायाजाल सिद्ध द्वार की रचना की गयी थी। इसी की वजह से ब्लैक होल में फसा विमान सीधा महासागर के कैदियों के प्रदेश में पहुंच जाता है।”

ऋषि शिवम्:– गुरुदेव बात को घुमाने की बेकार कोशिश थी। जाने दीजिए अब तो बता दिये सुरक्षा उपाय। आपकी नियत पर फिर कभी सवाल उठा लेंगे। वैसे अभी हम केवल सम्पूर्ण मायाजाल की बात कर रहे थे न? सिद्ध द्वार बाद में जुड़ेगा न?

आर्यमणि:– “हां एक बार सम्पूर्ण मायाजाल को समझा देता हूं, सिद्धि द्वार तो उसका मात्र एक परिणाम है, जिसके लिये सम्पूर्ण मायाजाल की रचना की जाती है। दरअसल आम भ्रम जाल या मायाजाल के पड़े सम्पूर्ण मायाजाल किसी द्वार को सिद्ध करने के लिये ही बनाया जाता है। 21 जीव बलि, जिसमें एक पुरुष और एक महिला की स्वेक्षा बलि अनिवार्य है। 21 पुष्प, 21 साधना पर बैठे लोग 21 क्षण के मंत्र जाप से संपूर्ण मायाजाल को सिद्ध करके, किसी जगह पर उसकी रचना करते है।”

“संपूर्ण मायाजाल की रचना के बाद आत्मा जागृत की जाती है। मृत्युलोक और मायालोक के बीच फंसी आत्मा को बुलाया जाता है। ऐसी आत्मा मायाजाल के अंदर कोई भी सुरक्षित मार्ग खोल सकती है जिसका स्वामित्व मायाजाल के मालिक के पास होगा, और वो अपने एक या एक से अधिक उत्तराधिकारी को सौंप सकते हैं। एक नर और एक मादा जिसकी स्वेक्षा से बलि दी गयी होगी, उन्ही शरीर मे वो आत्म प्रवेश करती है और उस शरीर को अपनाकर अपनी अधूरी इच्छाएं पूर्ण करती है।”

ऋषि शिवम्:– गुरुवर समूर्ण मायाजाल सिद्ध द्वार तो निजी कारणों से बनाया जाता है, फिर वहां अल्फा पैक क्यों फंसी? एमुलेट वापस नही आया, तो क्या रूही, इवान और अलबेली कहीं जिंदा है?

आर्यमणि:– “हां ऋषिवर आपने सही कहा की सम्पूर्ण मायाजाल निजी कारणों से बनाई जाती है। यह भी सही है कि इतना बड़ा योजन कोई अल्फा पैक को फसाने के लिये क्यों करेगा? यहीं तो सबसे बड़ा षड्यंत्र छिपा था। संपूर्ण मायाजाल सिद्ध द्वार का जो उल्लेख था, वह बस एक दुनिया के बीच के रास्ते को सिद्ध करने के लिये विधि थी। परंतु नाग लोक के भू–भाग पर दो दुनिया के बीच रास्ता खोला जाना था। षड्यंत्र महाजनिका रचा हुआ था। उसे धरातल पर लाया उसका सेवक तांत्रिक आध्यात।”

“महाजनिका का यदि इतिहास उलटेंगे तब पता चलेगा की वह मूल दुनिया से विपरीत दुनिया में टेलीपोर्ट कर सकती थी। किसी को ये नहीं पता था कि वह एकमात्र ऐसी साधिका थी जिसने सम्पूर्ण मायाजाल सिद्ध द्वार का निर्माण किया था। उसने अपने मंत्रो की शक्ति से वह कारनामा कर दिखाया, जिसे पाने के लिये काली शक्ति के उपासक कुछ भी कर सकते थे। उसने न सिर्फ सम्पूर्ण मायाजाल सिद्ध द्वार का निर्माण किया अपितु उसका सफलतापूर्वक परीक्षण भी कर चुकी थी।”

“महाजनिका को दो दुनिया के बीच रास्ता खोलने के लिये 4 खास इक्छाधारियों के बलि की जरूरत थी, जिनकी आत्माओं को दो दुनिया के द्वार के बीच फसाया जाता। पहले भी महाजनिका को श्राप जगाने के लिये जब 2 दुनिया का रस्ता खोला गया था, वहां भी खास इच्छाधारी मादा लोमड़ी का इस्तमाल किया गया था, ओशून। मैक्सिको में ओशुन की आत्मा को 2 दुनिया के बीच फसाकर एक बहुत ही छोटा सा द्वार खोला गया था, जहां से महाजनिका की आत्मा विपरीत दुनिया से उसके शरीर तक पहुंची थी।”

“महाजनिका जब हमसे बचकर भागी थी, तब किसी तरह वह विपरीत दुनिया तो पहुंच गयी। लेकिन वापस इस दुनिया में कहर बरसाने और अपने विनाश का एक मात्र हथियार नष्ट करने उसे मूल दुनिया में किसी तरह तो आना ही था। इसलिए उसने सम्पूर्ण मायाजाल सिद्ध द्वार की रचना की। कोई भी इच्छाधारी की आत्मा विपरीत दुनिया को नही खोल सकती इसलिए उसे खास इक्छाधारि की तलाश थी। चार खास इक्छाधारि। एक तो ओशुन ही हो जाती, लेकिन ओशुन को मारकर उसके शरीर पर मधुमक्खी की रानी ने कब्जा कर लिया। बचे थे अल्फा पैक के हम खास 5 वुल्फ जिसमे से ओजल तो आश्रम के साथ हो गयी। अब बचे थे हम 4। मै, रूही, इवान और अलबेली। मायाजाल में फसाकर वह 3 को निगल गयी। लेकिन महाजानिका को यदि दो दुनिया के द्वार खोलना है, तो वह या तो मेरे लिये एक बार फिर मायाजाल की रचना करेगी या फिर किसी अन्य खास इक्छाधारी की तलाश कर रही होगी।

ऋषि शिवम्:– जब उस दिन रूही, इवान और अलबेली की हत्या हो गयी, फिर उनका एमुलेट वापस क्यों नही आया?

आर्यमणि:– “क्योंकि वो तीनो अब भी जिंदा है। बस फर्क सिर्फ इतना है कि जिस रूही अलबेली और इवान को हम जानते थे, उनकी आत्मा तो कबकी उनके शरीर से निकल चुकी है। मरणोपरांत उनका शव कहीं नही मिला था, क्योंकि जिस वक्त उनकी लाश गिरी थी, ठीक उसी वक्त उनका शरीर विपरीत दुनिया में जा चुका था और उस पहाड़ी पर जो दिख रहा था, वह बस मायावी दृश्य थी। यदि मैं भी मर गया होता, तो मेरी भी लाश विपरीत दुनिया में खींच जाती और फिर महाजनिका दो दुनिया के बीच एक बार फिर अपने लिये सुरक्षित द्वार खोल चुकी होती।

“उन तीनो का शरीर विपरीत दुनिया में फसा है जिसमे किसी और की आत्मा बसती है। या तो चौथा लाश गिरेगी और सम्पूर्ण मायाजाल सिद्ध द्वार खुलने के बाद वो लोग (रूही, एवं और अलबेली का शरीर) विपरीत दुनिया से मूल दुनिया में आयेंगे। या फिर उनके शरीर को वापस लाने मुझे खुद विपरीत दुनिया में जाऊंगा। विकल्प चाहे जो भी हो लेकिन जब तक तीनो के अंतिम संस्कार नही हो जाते, मेरी आत्मा को चैन नहीं मिलेगा।”

ऋषि शिवम्:– बहते आंसू को रोक लीजिए गुरुदेव। कुछ नवसिखियों के साजिश के पीछे जब इतना बड़ा षड्यंत्र चल रहा हो, फिर आप खुद को क्यों दोषी मानते है?

आर्यमणि:– “जो भी हुआ उसमे मेरे अनदेखापन को नजरंदाज नहीं किया जा सकता। वो तांत्रिक आध्यत मेरे सारे सुरक्षा मंत्र को तोड़कर वहां अपना सम्पूर्ण योजन पूर्ण कर गया और मैं महासागर में गोते लगा रहा था।”

“यदि मैं महासागर के अंदर इतना समय न बीताता तो यह नतीजा नही होता। तांत्रिक आध्यात इतने इत्मीनान से मेरे सुरक्षा मंत्र को तोड़ न रहा होता। वह अपनी मालकिन के इशारे पर हमारे लिये जाल न बुन रहा होता। आज मेरी रूही मेरे पास होती। अलबेली और इवान मेरे पास होते। जरूर मेरे ही किसी बुरे कर्मों का फल उन तीनो ने भुगता है।”

Nice updates👍🎉
 

Devilrudra

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भाग:–179


ओर्जा:– मैं उन सबको देख सकती हूं। नायजो एक खतरनाक समुदाय है। गुरियन प्लेनेट पर आर्य के मौत की योजना बन रही है। निमेष माया से कह रहा है कि कैदियों की फौज को अकेला वो सम्मोहित कर लेगा।....... नही आर्यमणि नही... तुम मेरे सेंसेज कैसे ब्लॉक कर सकते हो?

दरअसल बातों के दौरान ही ओर्जा अपने दिमागी तरंगों को पूरे फैलाते माया के उस विमान तक पहुंच गयी, जहां उसकी बात विषपर के वास्तविक राजा मसेदश क्वॉस से चल रही थी। उन्ही दोनो के वार्तालाप से पता चला था कि दरअसल विवियन असली राजकुमार है, जो खुद को छिपा कर रखे हुये था। ओर्जा अपनी दिमागी तरंगों से एक साथ सभी सभी जगह पर पहुंच चुकी थी और वो सबकी बातें सुन रही थी। ओर्जा ने जब आर्यमणि की बात नही मानी तब आर्यमणि ने उसके तरंगों को ही ब्लॉक कर दिया।

ओर्जा के गुस्से भरे भाव को आर्यमणि शांत करते..... “ओर्जा तुम्हारी दिमागी तरंगे कमाल की है। किंतु तुम जिस महल में रहती थी, वह जगह तुम्हारे दिमाग को उस नुकसान से बचाए रखती थी, जो तरंगों को ब्रह्मांड में फैलाने के कारण होती। लेकिन महल के बाहर तुम्हारे दिमाग पर इसका काफी असरदार प्रभाव पड़ता है। याद रहे बहुत ज्यादा जरूरी हो तभी अपनी टेलीपैथी की शक्ति का इस्तमाल करो। यदि टेलीपैथी इतनी ही आसान होती तो हम सब हर पल अपने दुश्मनों के दिमाग में ही रहते।

ओर्जा:– समझ गयी। लेकिन क्या मेरी मेहनत बरबाद गयी। क्या मैने एक भी काम की सूचना नही दी।

आर्यमणि:– ये सूचना तो काफी कमाल की थी। और जैसा की मुझे अंदेसा था, शायद वही होने वाला है।

ओर्जा:– क्या होने वाला है...

आर्यमणि:– अल्फा पैक एक पूरे प्लेनेट के विरुद्ध लड़ेगी। नायजो से लड़ना इतना आसान नहीं होगा और ये तिलिस्मी लोग बहुत जानकार होते है। खासकर इनका पत्थर और जड़ी–बूटियों का ज्ञान कमाल का है। मेरी जब भी इनसे टक्कर हुई है, पुराने हमलों के साथ–साथ कुछ नया और घातक हमला करते है।

ओजल:– हम जिंदा रहेंगे तभी हमारा बदला भी जिंदा रहेगा। चंद लोग कितने भी ताकतवर क्यों न हो, एक पूरे प्लेनेट से नही जीत सकते। जबकि 5 लोगों ने मिलकर हमारे 3 लोगों की जान पहले ले चुके है। बॉस आपकी भी जान लगभग जा ही चुकी थी।

महा:– उन्हे ऐसे तो नही छोड़ सकते है। अब जो होगा सो देखा जायेगा... यदि कोई नही भी गया तो भी मैं निमेष और हिमा के पीछे गुरियन प्लेनेट तक जाऊंगी।

ओजल:– सब पागल है यहां... पर लगता है, इस पागलपन में मजा आने वाला है।

आर्यमणि:– खतरा ज्यादा है और जीत की उम्मीद कम। जो छोड़कर जाना चाहते है वो अभी चले जाये। खासकर ओर्जा और निशांत तुम दोनो... अभी–अभी दोनो में प्यार हुआ है।

ओर्जा:– अभी–अभी प्यार हुआ से क्या मतलब है। निशांत साथ आना न चाहे तो भी मैं आऊंगी। वैसे भी विगो कभी पीछे हटते नही।

निशांत:– अरे आर्य ताने मार रहा था बस। उसे भी पता था कि हम साथ चल रहे है।

आर्यमणि:– नही मै सीरियस था। तुझे कितनी मेहनत के बाद एक कड़क लड़की मिली है, उसके साथ अभी दिन ही कितने बिताए होंगे।

निशांत:– ज्यादा मजा मत ले, पलक इंतजार में होगी। उसे बताएगा की कैसे नायजो को पृथ्वी से भेजेगा...

आर्यमणि:– शिवम सर आप महा के साथ पलक के पास जाइए। महा तुम्हे पता है ना क्या करना है?

महा:– बिलकुल पतिदेव, मुझे पता है।

ऋषि शिवम्:– लेकिन मुझे पता नही की मुझे क्या करना है?

आर्यमणि:– माफ कीजिए ऋषिवर, आप ही कहिए। आप जो कहेंगे वही होगा।

ऋषि शिवम्:– मैं पूरी अल्फा टीम को लिये जा रहा हूं। बाकी आप देख लीजिए..

आर्यमणि:– हम्मम ठीक है लिये जाइए... बाकी मैं देख लूंगा... ये भी सही है..

ऋषि शिवम सबको लेकर सीधा नागपुर अंतर्ध्यान हो गये। सभी लोगों को छोड़कर वह वापस क्रूज पर आये। आर्यमणि, ऋषि शिवम के देख मंद–मंद मुस्कुरा रहा था। ऋषि शिवम भी जवाब में मंद–मंद मुस्कुरा रहे थे।

ऋषि शिवम्:– आपके जीवन में 4 साल का बड़ा महत्व है ना। जब भी गायब हुये इतने ही वक्त के लिये गायब हुये और पीछे कई राज छोड़ गये।

आर्यमणि:– ऋषिवर विश्वास कीजिए इस बार नियति अपना खेल खेल गयी और जितनी बातें आपको राज दिख रही, इस समय वह मेरे लिये किसी घोर षड्यंत्र कम नही। सामने से तो निमेष, माया, और मधुमक्खी रानी चिची ही अल्फा पैक का शिकर कर रहे थे। साजिश भी इन्ही लोगों की थी। लेकिन अल्फा पैक का शिकर मात्र इनके मामूली सी साजिश में हो जाये असंभव था। साजिश के पीछे साजिश चल रही थी और अल्फा पैक गहरी षड्यंत्र का शिकर हो गया।

ऋषि शिवम्:– क्या था वह गहरा षड्यंत्र, और किसने रची थी ये षड्यंत्र?

आर्यमणि:– कभी “सम्पूर्ण मायाजाल सिद्धि द्वार” का नाम सुना है?

ऋषि शिवम्:– नाम से तो किसी प्रकार के भ्रम जाल फैलाने की पद्धति लगती है। अंदाजा ही लगाया है, बाकी इसके बारे में मुझे कोई जानकारी नही।

आर्यमणि:– सम्पूर्ण मायाजाल सिद्धि द्वार, को मैं भी आपके जितना ही मानता, लेकिन मेरे पास जादूगर महान की यादें थी और उन यादों में सम्पूर्ण मायाजाल सिद्धि द्वार का उल्लेख था। संपूर्ण मायाजाल सिद्धि द्वार क्या है और इसका प्रयोग कौन कर रहा था, उस पर चर्चा करने पहले मैं बता दूं कि यदि निमेष ने सबको नागलोक के भू–भाग पर सेफ पैसेज नही दिया होता, तो आज मेरा पूरा पैक मेरे साथ होता। नाग लोग की भूमि पर उसका आना पूर्ण प्रतिबंधित था।

ऋषि शिवम्:– गुरुदेव अब विषय पर आ भी जाइए। साजिश के पीछे षड्यंत्र करने वाला कौन था, और क्या था ये सम्पूर्ण मायाजाल सिद्धि द्वार, जिसने आप जैसे सशक्त योजना बनाने वाले को मात दे दिया?

आर्यमणि:– यह पूरा षड्यंत्र रीछ स्त्री महाजनिका और उसके सेवक तांत्रिक आध्यात ने रचा था। सम्पूर्ण मायाजाल, भ्रम और मायावी दृष्टि की वह मायाजाल है, जिसमे किसी जगह विशेष को ही पूरा का पूरा मायावी बना देता है। संपूर्ण मायाजाल के क्षेत्र में जैसे ही कोई कदम रखता है, उसकी पूरी जानकारी मायाजाल के रचना करने वाले तक पहुंचती है। वह मायाजाल में फसे जानवर तक के मन की बात को पढ़ सकता है और मन के भीतर कोई भी ख्याल डाल सकता है। यूं समझिए की बिना आपकी जानकारी के, बिना आपको किसी भी प्रकार से भ्रमित किये वह आपकी आत्मा तक पर काबू पा लेता है।

ऋषि शिवम्:– गुरुदेव तो क्या आत्मा योजन या फिर संपूर्ण चेतना से इसे काटा नही जा सकता था?

आर्यमणि:– सम्पूर्ण मायाजाल की रचना यदि हो गयी हो तो आप अपने पहले कदम रखते ही मायावी दुनिया में पहुंच जाते हैं। वहीं जब तक आप मायाजाल के क्षेत्र में पहला कदम नहीं डालेंगे, बाहर से देखने पर कुछ पता ही नही चलेगा। अब बताइए की इसका काट भी किसी के पास हो तो क्या वो इस सम्पूर्ण मायाजाल के सम्मोहन से खुद को बचा सकता है क्या?

ऋषि शिवम्:– फिर इस सम्पूर्ण मायाजाल से निकलने का तरीका? क्योंकि इस से निकलने का तरीका न मिला तो हमारे दुश्मन हम पर सदा हावी रहेंगे...

आर्यमणि:– जादूगर महान की याद से मुझे संपूर्ण मायाजाल सिद्ध द्वार का पता चला तो वहीं योगियों की सभा से मुझे इस मायाजाल से निकलने का तरीका मिला। योगियों के गुरु पशुपतिनाथ जी ने जब संसार का त्याग किया था, तब जाते–जाते मुझे अपना सारा ज्ञान देकर गये थे। उनका अपना एक विशेष सुरक्षा तकनीक थी जिसके अनुसार.... “आत्मा योजन की सिद्धि से आत्म के छोटे से टुकड़े को विभाजित कर चारो ओर का सुरक्षा जायजा करने खुला छोड़ दे। यह युक्ति तब भी करने है, जब कहीं अंतर्ध्यान हो रहे हो। जब आत्मा के छोटे से हिस्से पर काली तथा बुरी शक्तियां हावी होगी, तब उसके काट का उपाय सोचने तथा उन शक्तियों से बचने के उपाय पहले से होंगे।”

ऋषि शिवम्:– गुरुवर तो क्या ये उपाय आप अपने तक ही सीमित रखने वाले थे?

आर्यमणि:– अरे... आप तो आरोप लगा रहे है।

ऋषि शिवम्:– आरोप क्यों न लगाऊं गुरुदेव। सात्विक आश्रम एक तो पहले से ही सबके निशाने पर है। ऐसे में हमारे किसी भी पूर्व गुरु के दिमाग में सुरक्षा का ऐसा बेहतरीन उपाय दिमाग में नही आया। आपके पास न जाने कितने दिनों से यह जानकारी थी, फिर भी आपने साझा नही किया।

आर्यमणि अपने दोनो हाथ जोड़ते..... “ऋषिवर, अब माफ भी कर दीजिए। क्या आपको पता है अंतरिक्ष के ब्लैक होल में भी एक सम्पूर्ण मायाजाल सिद्ध द्वार की रचना की गयी थी। इसी की वजह से ब्लैक होल में फसा विमान सीधा महासागर के कैदियों के प्रदेश में पहुंच जाता है।”

ऋषि शिवम्:– गुरुदेव बात को घुमाने की बेकार कोशिश थी। जाने दीजिए अब तो बता दिये सुरक्षा उपाय। आपकी नियत पर फिर कभी सवाल उठा लेंगे। वैसे अभी हम केवल सम्पूर्ण मायाजाल की बात कर रहे थे न? सिद्ध द्वार बाद में जुड़ेगा न?

आर्यमणि:– “हां एक बार सम्पूर्ण मायाजाल को समझा देता हूं, सिद्धि द्वार तो उसका मात्र एक परिणाम है, जिसके लिये सम्पूर्ण मायाजाल की रचना की जाती है। दरअसल आम भ्रम जाल या मायाजाल के पड़े सम्पूर्ण मायाजाल किसी द्वार को सिद्ध करने के लिये ही बनाया जाता है। 21 जीव बलि, जिसमें एक पुरुष और एक महिला की स्वेक्षा बलि अनिवार्य है। 21 पुष्प, 21 साधना पर बैठे लोग 21 क्षण के मंत्र जाप से संपूर्ण मायाजाल को सिद्ध करके, किसी जगह पर उसकी रचना करते है।”

“संपूर्ण मायाजाल की रचना के बाद आत्मा जागृत की जाती है। मृत्युलोक और मायालोक के बीच फंसी आत्मा को बुलाया जाता है। ऐसी आत्मा मायाजाल के अंदर कोई भी सुरक्षित मार्ग खोल सकती है जिसका स्वामित्व मायाजाल के मालिक के पास होगा, और वो अपने एक या एक से अधिक उत्तराधिकारी को सौंप सकते हैं। एक नर और एक मादा जिसकी स्वेक्षा से बलि दी गयी होगी, उन्ही शरीर मे वो आत्म प्रवेश करती है और उस शरीर को अपनाकर अपनी अधूरी इच्छाएं पूर्ण करती है।”

ऋषि शिवम्:– गुरुवर समूर्ण मायाजाल सिद्ध द्वार तो निजी कारणों से बनाया जाता है, फिर वहां अल्फा पैक क्यों फंसी? एमुलेट वापस नही आया, तो क्या रूही, इवान और अलबेली कहीं जिंदा है?

आर्यमणि:– “हां ऋषिवर आपने सही कहा की सम्पूर्ण मायाजाल निजी कारणों से बनाई जाती है। यह भी सही है कि इतना बड़ा योजन कोई अल्फा पैक को फसाने के लिये क्यों करेगा? यहीं तो सबसे बड़ा षड्यंत्र छिपा था। संपूर्ण मायाजाल सिद्ध द्वार का जो उल्लेख था, वह बस एक दुनिया के बीच के रास्ते को सिद्ध करने के लिये विधि थी। परंतु नाग लोक के भू–भाग पर दो दुनिया के बीच रास्ता खोला जाना था। षड्यंत्र महाजनिका रचा हुआ था। उसे धरातल पर लाया उसका सेवक तांत्रिक आध्यात।”

“महाजनिका का यदि इतिहास उलटेंगे तब पता चलेगा की वह मूल दुनिया से विपरीत दुनिया में टेलीपोर्ट कर सकती थी। किसी को ये नहीं पता था कि वह एकमात्र ऐसी साधिका थी जिसने सम्पूर्ण मायाजाल सिद्ध द्वार का निर्माण किया था। उसने अपने मंत्रो की शक्ति से वह कारनामा कर दिखाया, जिसे पाने के लिये काली शक्ति के उपासक कुछ भी कर सकते थे। उसने न सिर्फ सम्पूर्ण मायाजाल सिद्ध द्वार का निर्माण किया अपितु उसका सफलतापूर्वक परीक्षण भी कर चुकी थी।”

“महाजनिका को दो दुनिया के बीच रास्ता खोलने के लिये 4 खास इक्छाधारियों के बलि की जरूरत थी, जिनकी आत्माओं को दो दुनिया के द्वार के बीच फसाया जाता। पहले भी महाजनिका को श्राप जगाने के लिये जब 2 दुनिया का रस्ता खोला गया था, वहां भी खास इच्छाधारी मादा लोमड़ी का इस्तमाल किया गया था, ओशून। मैक्सिको में ओशुन की आत्मा को 2 दुनिया के बीच फसाकर एक बहुत ही छोटा सा द्वार खोला गया था, जहां से महाजनिका की आत्मा विपरीत दुनिया से उसके शरीर तक पहुंची थी।”

“महाजनिका जब हमसे बचकर भागी थी, तब किसी तरह वह विपरीत दुनिया तो पहुंच गयी। लेकिन वापस इस दुनिया में कहर बरसाने और अपने विनाश का एक मात्र हथियार नष्ट करने उसे मूल दुनिया में किसी तरह तो आना ही था। इसलिए उसने सम्पूर्ण मायाजाल सिद्ध द्वार की रचना की। कोई भी इच्छाधारी की आत्मा विपरीत दुनिया को नही खोल सकती इसलिए उसे खास इक्छाधारि की तलाश थी। चार खास इक्छाधारि। एक तो ओशुन ही हो जाती, लेकिन ओशुन को मारकर उसके शरीर पर मधुमक्खी की रानी ने कब्जा कर लिया। बचे थे अल्फा पैक के हम खास 5 वुल्फ जिसमे से ओजल तो आश्रम के साथ हो गयी। अब बचे थे हम 4। मै, रूही, इवान और अलबेली। मायाजाल में फसाकर वह 3 को निगल गयी। लेकिन महाजानिका को यदि दो दुनिया के द्वार खोलना है, तो वह या तो मेरे लिये एक बार फिर मायाजाल की रचना करेगी या फिर किसी अन्य खास इक्छाधारी की तलाश कर रही होगी।

ऋषि शिवम्:– जब उस दिन रूही, इवान और अलबेली की हत्या हो गयी, फिर उनका एमुलेट वापस क्यों नही आया?

आर्यमणि:– “क्योंकि वो तीनो अब भी जिंदा है। बस फर्क सिर्फ इतना है कि जिस रूही अलबेली और इवान को हम जानते थे, उनकी आत्मा तो कबकी उनके शरीर से निकल चुकी है। मरणोपरांत उनका शव कहीं नही मिला था, क्योंकि जिस वक्त उनकी लाश गिरी थी, ठीक उसी वक्त उनका शरीर विपरीत दुनिया में जा चुका था और उस पहाड़ी पर जो दिख रहा था, वह बस मायावी दृश्य थी। यदि मैं भी मर गया होता, तो मेरी भी लाश विपरीत दुनिया में खींच जाती और फिर महाजनिका दो दुनिया के बीच एक बार फिर अपने लिये सुरक्षित द्वार खोल चुकी होती।

“उन तीनो का शरीर विपरीत दुनिया में फसा है जिसमे किसी और की आत्मा बसती है। या तो चौथा लाश गिरेगी और सम्पूर्ण मायाजाल सिद्ध द्वार खुलने के बाद वो लोग (रूही, एवं और अलबेली का शरीर) विपरीत दुनिया से मूल दुनिया में आयेंगे। या फिर उनके शरीर को वापस लाने मुझे खुद विपरीत दुनिया में जाऊंगा। विकल्प चाहे जो भी हो लेकिन जब तक तीनो के अंतिम संस्कार नही हो जाते, मेरी आत्मा को चैन नहीं मिलेगा।”

ऋषि शिवम्:– बहते आंसू को रोक लीजिए गुरुदेव। कुछ नवसिखियों के साजिश के पीछे जब इतना बड़ा षड्यंत्र चल रहा हो, फिर आप खुद को क्यों दोषी मानते है?

आर्यमणि:– “जो भी हुआ उसमे मेरे अनदेखापन को नजरंदाज नहीं किया जा सकता। वो तांत्रिक आध्यत मेरे सारे सुरक्षा मंत्र को तोड़कर वहां अपना सम्पूर्ण योजन पूर्ण कर गया और मैं महासागर में गोते लगा रहा था।”

“यदि मैं महासागर के अंदर इतना समय न बीताता तो यह नतीजा नही होता। तांत्रिक आध्यात इतने इत्मीनान से मेरे सुरक्षा मंत्र को तोड़ न रहा होता। वह अपनी मालकिन के इशारे पर हमारे लिये जाल न बुन रहा होता। आज मेरी रूही मेरे पास होती। अलबेली और इवान मेरे पास होते। जरूर मेरे ही किसी बुरे कर्मों का फल उन तीनो ने भुगता है।”
Amazing👍👍👍
 

Parthh123

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Kamal ke update dher sari nayi aur anokhi jankariyo ke sath. Bipreet duniya wah maza ayega aage bhi new story me. Sch me ekdm kadak update bhai.
 

monty1203

13 मेरा 7 रहें 🙏🙏🙏🙏
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Koi na pahle kabhi mere kisi kahani ki ending ke waqt hote to aisi gudgudi kayi baar mehsus kar chuke hote :D
लेकिन अब से आपके हर कहानी के अंत मे और सुरु मे दोनों मे हमें पाएंगे गुरु देव नेनेश्वर जी 😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁😁🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
 
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