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chmike

Momswap Sisterswap CousinFuck Screenshared Porn
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Hmmm.. that's some serious responsibility man...I would love to give a defloration show to you ,if you would imagined somthing like that.and want me to be with ur pragya and prachi....🤟

just joking man...😀 But those pics u dropped, are really so hot...

I raved to my daughter about sexsarkar being such an amazing stud, that he should be worshipped

That horny slut went and offered herself to him:




She spits in sexsarkar's face while he is plowing her tight vagina, upon which sexsarkar pulls out and fucks her butthole instead!















mmmm, fuck yes, sluts love being dominated by strong men





her "punishment" (it's just sexplay lol) is over now;

so she worships his cock like a devoted wife






she wants a beautiful facial (because all women look prettier with cum on their face),



so sexsarkar uses her pussy to milk his cock!




SHE LOVES BEING OWNED BY A STRONG MAN!



my daughter Kylie wears the cum PROUDLY!!









what a devoted wife she would make!
 

Premkumar65

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Update :63

प्रज्ञा अपने पापा को मनाने का भरसक प्रयास में लगी थी । मगर पापा मनाने को तैयार ना थे । वो पापा के गोद में बैठी ,उनको रिझाने का कोशिश कर रही थी । उधर पापा की हालत ये थी कि प्रज्ञा के चुत का हिट उन्हें अपने लिंग पे महसूस होने लगा क्यों कि पापा की आदत थी कि ऑफ़िस से घर आने के बाद वो अंडरवियर नहीं पहनते थे। और पजामे ही पहन रखा था । वहीं प्रज्ञा भी आज अपनी पैन्टी नहीं पहनी थी । जिस कारण से उसके चुत गर्मी पापा को साफ पता लग रही थी। और आपको तो पता ही होगा , आप अपने लिंग को तनने का जितना विरोध करते है , आपका लिंग इतना उफान मारता है। यहाँ भी वही हो रहा था । पापा का लौड़ा तनता जा रहा था । वो भी अपने बेटी के लिए । पापा चाह रहे थे कि जितनी जल्दी हो सके प्रज्ञा को गोद से उठा दिया जाए ,नहीं तो प्रज्ञा को उनका जोश में आ जाने का पता लग सकता है ।

पापा : बेटी , तू जा ना , बोला ना आज भूख जैसा लग ही नहीं रहा ।

प्रज्ञा : नहीं पापा , आप गुस्सा हो इसलिए ऐसा बोल रहे हो । आप दादी को माफ के दीजिए पापा , वो रो रही है । उनको अपने गलती का एहसास हो गया है ।

पापा को उधर प्रज्ञा के गुदाज़ चुतरो का एहसास हो रहा था । पापा का लन्ड अब तक पूरी ताव में आने ही वाला था । ओर वो परेशान हो रहे थे । वो अब चाह रहे थे , जितनी जल्दी हो प्रज्ञा को गोद से उठाना ही होगा ,नहीं तो मामला बिगड़ जाएगा । दादी ने उनको जिस बात के लिए कड़वे वचन बोले थे वो सच हो जाएगा ।

पापा: ना मै नहीं जा रहा खाने , तू उठ जा मेरे गोद से अब। भारी हो गई है मेरा पैर दुख रहा है।

प्रज्ञा : नहीं पापा , मै नहीं उठ रही आपके गोद से जब तक आप खाने नहीं चलोगे ।

और इतना कह के प्रज्ञा ने एक दो बार पापा के गोद में कूद के ओर अच्छे से बैठ गई। अब हालात ये हो गई कि पापा का लौड़ा पूरा फ़नफना चुका था । और उनका लन्ड का टिप प्रज्ञा के कूदने से सीधा प्रज्ञा के बिना पैन्टी वाले चुत के पास टच होने लगा । अब पापा सोच रहे थे कि , इसका एहसास प्रज्ञा को अभी तक हुआ नहीं , ऐसा हो नहीं सकता । पर प्रज्ञा उठाने को तैयार नहीं ।


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पापा: प्लीज मेरी प्यारी बेटी , जा खाना खा ले तू , मै आज नहीं जाने वाला ।

प्रज्ञा : ठीक है तो मै ऐसी ही आपके गोद में बैठी रहूंगी ।
पापा मन में : ओह , ये लड़की भी ना । उठ ही नहीं रही और ये कमबख़्त लन्ड भी तभी खड़ा हो जाता है , जब नहीं होना चाहिए ।

इतने में पापा का लिंग रॉड जैसा कड़क हो गया । अब पापा क्या करे, उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था । प्रज्ञा बार बार, बात करने के क्रम में , अपने नितंबो को पापा की गोद में रगड़े जा रही थी । उसे ये पता नहीं था कि, इसका परिणाम क्या हो रहा पापा के पजामे के अंदर।

पापा को जिसका डर था वही हुआ । प्रज्ञा को पापा का खड़ा लौड़ा का एहसास हो गया । वो एक पल को एकदम चुप हो गई और मन में सोचने लगी : अरे ये क्या है जो मेरे योनि में चुभ रहा है? कही ये पापा का.....बाप रे पापा का लिंग !!!!....क्या पापा मेरे बारे में ऐसा सच में सोच रहे है...? नहीं नहीं पापा तो दीदी के पति है मेरे ऊपर तो इनका कभी वैसा ध्यान भी नहीं गया । क्या सच में पापा मेरे साथ...या मेरे गोद में बैठने से ऐसा हुआ है...!

प्रज्ञा अचंभे में पापा से पूछ पड़ी : पापा ये मुझे आपके गोद में कुछ चुभ रहा है ।

पापा समझ गए कि अब ये छुपाना नाकाम हो चुका है कि उनका लन्ड अपने प्यारी बेटी के गोद में बैठने से तन गया है। उनके लिंग में ये सुनते ही और उफान आ गया और लगातार में 3 झटके खा गया । तीनों झटके प्रज्ञा को अपने चुत के इर्द गिर्द साफ महसूस हुआ । झटके लगने के कारण , प्रज्ञा के अनचुदी बुर पे पापा लिंग दस्तक दे गया । अब पापा का सुपारा , प्रज्ञा के एकदम बुर के मुहाने पर था । वो बस आवक सी बैठी थी। ये पहली बार हुआ था , जब किसी पुरुष का सख्त लौड़ा वो अपने योनि पे महसूस कर रही थी । उसका चुलबुल स्वभाव एकदम से गायब हो गया और वो स्तब्ध हो के बस बैठी थी। उधर पापा भी प्यासे थे । अब जा लड़की को मालूम पड़ ही गया था तो पापा का डर गायब हो गया एक पल के लिए । और डर जैसे ही गायब हुआ । पापा ने प्रज्ञा को अपने आलिंगन में भर लिए। प्रज्ञा इस समय एकदम चकित हो गई थी । उसे कुछ सूझ ही नहीं रहा था । ऐसा लग रहा था कि वो एकदम से पापा के गोद में मुरझा सी गई हो । पापा प्रज्ञा के पूरे बदन पे हाथ फिराने लगे और उसके दूध पे अपना हाथ ले जा के रोक दिया ।


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तभी प्रज्ञा ने अपनी पूरी शक्ति लगा के पापा से बोल पाई : पापा , ये क्या कर रहे है ? छोड़िये ना!

अचानक पापा को होश आया कि ये प्राची नहीं प्रज्ञा है। वो जोश ने होश खो बैठे थे ।

उन्होंने सोचा , अरे ये क्या हो रहा है मुझे , मै अपनी बेटी के साथ ऐसा करने लग गया । नहीं नहीं , मै ये नहीं कर सकता । मै अपने मां की बात को सच नहीं बना सकता । मै कोई ठरकी इन्सान नहीं हु । ये मै प्रज्ञा के साथ क्या कर रहा हु?

प्रज्ञा भी उधर सोच में परी थी : पापा को अचानक क्या हो गया । ये मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकते है ? क्या पापा को मै अच्छी लगने लगी हु ? क्या पापा मेरे साथ...नहीं नहीं , पापा शायद बस बहक रहे है।

प्राची के दिल में पाप के लिए एक सॉफ्ट कॉर्नर तब से बन गया था जब से पापा और प्राची के शुहागरात वाले दिन दादी ने उसे पापा और उसकी दीदी बंद कमरे में क्या कर रहे है , उसे बताया था । तो बेशक प्रज्ञा गुस्सा तो नहीं थी मगर , एकदम से स्तब्ध जरूर हो गई थी । और पापा का इस तरह से उसके प्रति प्रेम दिखाना भी उसे थोड़ अटपटा लगा ।

पापा : मम्म...सॉरी बेटी...चल में आता हु खाना खाने। तू जा मै बस आया ।

पापा अभी ये अब यही खत्म कर देना चाहते थे । प्रज्ञा और पापा के बीच फिर कोई बात नहीं हुई । वो चुप चाप उठी और बोली : ठीक है पापा, आप खाने को मान गए, मुझे इसकी खुशी है। मै दादी को खाना लगाने बोलती हु।

इतना बोल के वो धीरे धीरे बाहर चली गई ।

पापा अपने आप से मन में बोल परे : धत्, ये सब क्या हो गया , कहा में गुस्सा था और कहां मै प्रज्ञा के साथ ये सब कर बैठा । वो क्या सोच रही होगी मेरे बारे में ? उसे मेरे गोद में ऐसे बैठना ही नहीं चाहिए था ? ये कमबख़्त लौरा भी ना । जब देखो खड़ा हो जाता है। कही प्रज्ञा मुझे अपनी नजरों से गिरा ना दे , मेरे इस हरकत के लिए ।

पापा के दिमाग से अभी हवस का चुका था और लिंग मुर्झा के छोटा हो चुका था । वो शर्मिंदा थे । मगर वो प्रज्ञा के बुर की गर्मी को भुला नहीं पा रहे थे ।

वो खाना खाने को मान गए थे । और बाहर जाने के लिए तैयार हो गए ।

वही प्रज्ञा कमरे से बाहर आने के बाद नॉर्मल हो गई। वो ऐसा दर्शा रही थी कि अभी कुछ हुआ ही नहीं है।

उसने खुशी से दादी से बोला : दादी खान लगाइये । पापा मान गए है ।

दादी : वाह मेरी बच्ची , तूने तो कमाल के दिया । मेरे बेटा जल्दी गुस्सा होता नहीं है , मगर होता है तो बहुत जल्दी उसका गुस्सा ठंडा नहीं होता । तूने इतनी आसानी से कैसे मना लिया उसे ।

प्रज्ञा : कैसे नहीं माना लेती । पापा है वो मेरे , और बेटी की बात ना माने ये हो सकत है। ऊपर से जीजा को साली की बात तो माननी हो पड़ती है।

पापा कमरे से बाहर आ गए ।

दादी : वह बेटे तू आ गया । अभी खाना लगती ही । अब लोग खाने के टेबल पे बैठो ।

प्राची और प्रज्ञा भी दादी के साथ साथ खाना लगाने में उनकी मदद करने लगी । जल्दी ही अब टेबल पे बैठ चुके थे और खाना खाने लगे ।
Hot update.
 
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Update 64:

खाना स्वादिष्ट बना था ओर पापा का फेवरेट था । दादी ने पापा को मनाने के लिए आज सबकुछ उनके पसंद का बनाया था । कहते है मर्द के दिल का रास्ता पेट से हो कर जाता है। पापा का दिल भी हर निवाले के साथ पिघलता चला गया और दादी से नाराजगी भी कम होती चली गई ।

उधर प्रज्ञा के साथ जो कमरे में घटना हुई, प्रज्ञा उसे भले ही सब के सामने दर्शा नहीं रही थी । मगर उसे उस घटना ने, झकझोर दिया था । उसका दिल अभी भी जोरो से, धड़क रहा था और वो अपने आप को शांत करने की कोशिश कर रही थी । आखिर ये उसके साथ हुआ भी तो पहली बार था । प्रज्ञा बस ये निर्णय नहीं ले पा रही थी, कि ये जो हुआ अभी पापा के कमरे में उसके साथ , वो उसे अच्छा लगा या बुरा , क्योंकि ये एकदम नया सा अनुभव था उस 18 साल की कच्ची कली के लिए ।

उस बेचारी को तो आज से कुछ दिनों पहले तक, ये भी मालूम नहीं था, कि शुहागरात में क्या होता है , चुदाई किसे कहते है , उसमें क्या क्या होता है ? और तो और,जब प्रज्ञा ये सब सुन के परेशान हो गई थी या जोश में आ के बेचैन सी हो जाती थी तो , उसे तो अपने आप को तृप्त करना भी दादी ने हाल में ही सिखाया था । वो एक नादान , कच्ची कली , लड़की ही तो थी ।

वो एक बार को पापा को देख रही थी। वो शांत थे और आराम से खाना खा रहे थे । चेहरे पे बिल्कुल भी कोई बेचैनी का भाव नहीं । अब पापा इतने अनुभवी आदमी तो थे ही, कि उनका चेहरे को देख कर कोई बात नहीं सकता कि ये आदमी अभी कुछ देर पहले ही अपने बेटी को गोद में बिठा के उसकी बुर की गर्मी महसूस की है और बहक रहा था । और पापा तो सच में अनुभवी थे , पहले प्रज्ञा के मां के साथ जीवन का भरपूर आनंद लिया , उन्हें दो बार गर्भवती किया । फिर प्राची के साथ नया जीवन की शुरुआत की और आज वो भी पापा के कृपा से गर्भ से थी ।

सब अपना खाना चुप चाप खा थे । दादी पापा से बोल पड़ी : बेटा , खाना कैसा बना हुआ है?

पापा दादी से अभी भी बोलना नहीं चाहते थे , मगर अब गुस्सा करने का कोई फायदा नहीं था और वैसे भी अपने मां से कब तक गुस्सा किया जा सकता था ।

पापा: ह्म्म्म...अच्छा है।

दादी : मुझे खुशी है कि तुम्हे खाना पसंद आया बेटा । बेटा , मुझे माफ कर दे। मैने गुस्से में तुझे बुरा भला जो बोल दिया, उसके लिए मै बहुत ही शर्मिंदा हूँ। मैने अपने जिम्मेदार बेटे पे इतना गुस्सा किया इसके लिए मुझे बहुत दुख है बेटा । तेरे कारण ही इस घर में खुशियां लौटी है , घर में एक नया मेहमान आने वाला है और तुझे मैने इस तरह से खरीखोटी सुना दिया, बिना पूरे मामले को जाने, उसके लिए मै बच्चों के सामने तुमसे माफी मांगती हूं।

प्राची : हां पापा, दादी को पूरा मामला पता नहीं था, जिसके कारण उसने आपको दोषी मान लिया, मेरे इस हालत का । पापा दादी को माफ कर दीजिए ।

पापा: अब तेरी हालत कैसी है ?

प्राची : अच्छी है पापा।

पापा: ह्म्म्म...बढ़िया ।

पापा दादी से : आपको थोड़ा सोचना चाहिए था माँ, बोलने से पहले ।

दादी : हां बेटा , तुम दोनों के बीच में जो भी हुआ हो , मुझे उस मामले में नहीं पड़ना चाहिए था । शायद मै ही कुछ ज्यादा इंटरफ़ेयर कर रही थी, एक मियां बीवी के रिश्ते के बीच । गलती तो मेरी भी है । इतनी कम उमर में ही प्राची को गर्भ धारण के लिए बार बार बोला मैने । जबकि मुझे ये तो पता ही था कि कम उमर में गर्भ धारण के लिया गर्भाशय पूरा विकसित नहीं होता । मै ही इस सबकी जिम्मेदार हूं। अभी एक तो प्राची की शादी नहीं करनी चाहिए थी । वो भी मेरे कारण ही हुआ , फिर नई नई शादी का प्राची को मजा लेना चाहिए था , तो मैने उसे बच्चे के लिए दबाव बना दिया । ये सब मेरी गलती है ।

प्राची : दादी ये आप क्या कह रही है । मैने पापा के साथ शादी आपके कहने से जरूर की है , मगर मैं ना चाहती तो ये शादी थोड़ी न होती । मुझे तो पापा से प्यार है। इसलिए मैंने पापा से शादी की । और शादी के बाद गर्भवती होना तो एक लड़की को सौभाग्य होता है । महिलायें गर्भ धारण के लिए तो पता नहीं कितने मन्नत करती है । वो तो पापा के कृपा से मुझे इतना जल्दी गर्भ धारण हो पाया। उसके लिए मुझे कोई दिक्कत नहीं। मुझे तो इस बात की बहुत खुशी है दादी की ,इस घर में मै खुशियां ला सकती हूं।

पापा: मां, आपकी कोई गलती नहीं है। अपने आप को कोसना बंद कर दीजिए । जो हो गया , जो बीत गया , उसे सोच के दुखी होने का कोई मतलब नहीं है । जो होना था, वो हो चुका । मेरी और प्राची की शादी हो चुकी, और अब वो मां बनने वाली है । तो बेहतर यही होगा कि हम आने वाले समय की खुशी बनाए । पिछले बातों को याद कर के खुद को कोसना कोई बुद्धिमान काम नहीं है। ऐसा होता तो मै खुद को भी दोषी ही मानता रहता , एक बाप होके मैने अपनी बेटी से शादी की हामी भरी । मेरी तो यही सबसे बड़ी गलती थी । कौन बाप अपने बेटी से ब्याह रचता है। मगर अगर मै उन सब बातों को ही सोचता रहूंगा, तो अपने प्राची के साथ ,मै कभी वैवाहिक जीवन अच्छे से नहीं बिता सकता था । शादी से पहले वो बेटी थी और शादी के बाद मेरी पत्नी है , तो वर्तमान में मेरा जो रिश्ता प्राची के साथ है , मै उसी को भाग्य का लिखा मान के प्राची संग भरपूर आनंद लिया और अब मेरी बेटी मेरे बच्चे की मां बनने वाली है। ये सब होनी का खेल है मां, इसपे किसी का जोर नहीं , तो इन सब बातों को भूल जाए और आगे बढ़िए। और मैने आपको माफ किया । प्राची की हालत का जिम्मेदारी मेरी भी उतनी ही बनती है। मै भी प्राची के साथ तो बहक ही गया था ।

इस बातचीत में सब ये भूल गए थे कि प्रज्ञा भी वहां बैठी है। प्रज्ञा पापा की बाते सुन के पापा से बहुत प्रभावित हो गई थी । उन्होंने दादी को भी माफ कर दिया था । उसे इस बात की भी खुशी थी ।

दादी : बेटा , तुम ठीक कहते हो , हमे आने वाले खुशियों पे ध्यान देना होगा । प्राची की ख्याल रखना होगा अच्छे से । और सुन , अगर तू मुझे अभी भी गार्जियन मानता है तो एक बात कहना चाहती हु ।

पापा : तुम मेरी मां हो , तो इसमें गार्जियन मनाने वाली क्या बात है , तुम तो हो ही ।

दादी : तो ठीक है , बेटा प्लीज अब प्राची से जितनी दूरी बन सके, शारीरिक रूप से, वो बना ले , मानसिक रूप से तो प्राची को तेरी बहुत जरूरत है। मगर शारीरिक रूप से उससे तुझे दूरी बनानी ही होगी ।

पापा: हां ये बात डॉक्टर ने भी बोला है । तो मै आज से इसे अमल में लाउंगा ।

दादी : ठीक है बेटा , मगर अब मै कोई रिस्क नहीं ले सकती । तुम दोनों को साथ बंद कमरे में सोना भी ठीक नहीं , क्योंकि अगर दो लकड़ी आपस में रगड़ खाएगी, तो चिंगारी निकलेगी ही । और आग लगने का भी खतरा बहुत जायदा है। इसलिए आज से मेरा एक फैसला ये है कि , आज से प्राची मेरे साथ ही सोया करेगी । और तू प्राची से दूरी बना के अपने कमरे ने ही सो।

प्रज्ञा : मगर दीदी शादी से पहले तो मेरे साथ सोती थी , उसे मेरे साथ ही सोने दो दादी ।

दादी : नहीं बेटा , तू नहीं जानती , जब चिंगारी भड़कती है तो कदम बहक सकते है । मै प्राची को अपने देख रेख में रखना चाहती हु । ताकि रात को चाह के भी ये पापा के कमरे में ना जा सके ।

पापा ये सब सुन के, उनपे पहाड़ टूटने जैसा महसूस कर रहे थे । मगर दादी बात तो ठीक कह रही थी। मगर अब प्राची से 6-7 महीने की दूरी , कैसे सहेंगे ? पापा का चेहरा मुर्झा गया , मगर ये जरूरी था प्राची के लिए । तो पापा ने अंत में हामी भर दी ।

अब प्राची का नया ठिकाना , दादी का कमरा होने वाला था और पापा अपने अकेलेपन के साथ 6-7 महीने जीने वाले थे । अब ये समय आगे क्या करवट लेता है , वो किसी को पता नहीं था । प्राची अंदर से दुखी भी हुई थी , उसे अब अपने पति से दूर रहना पसंद नहीं था। मगर अब तो पापा भी मान गए थे और दादी की बात भी सही थी । इस कारण से प्राची भी ये त्याग करने के लिए, दुखी मन से ही, मगर मान गई ।

मगर इस फैसले से सब दुखी नहीं थे। प्रज्ञा इस फैसले से खुश थी । पता नहीं आज उसे क्या हुआ था ? पापा के साथ उस कमरे में हुए घटना के कारण उसके नए अरमान जाग रहे थे । उसे आगे आने वाले समय में कुछ नयापन सा लग रहा था । उसे अचानक प्राची सौतन की तरह लगने लगी थी । मगर ऐसा भी नहीं था कि पापा की वो हरकत उसे बहुत अच्छा लगा हो । वो एकदम ही कंफ्यूज की दशा में थी और ये सब बात को समझने के लिए थोड़ा समय तो प्रज्ञा को चाहिए भी था ।

खैर सब लोग खाना खत्म कर अपने अपने कमरे में गए । आज पापा का कमरा प्राची के वहां ना होने से सुना लग रहा था । वही दादी अपने बगल में प्राची का तकिया लगा के उसका सोने का स्थान सुनिश्चित कर चुकी थी । वही आज प्रज्ञा अपने कमरे ने लेट चुकी थी , और आज उसे जल्दी नींद नहीं आने वाली थी । वो सोच में डूबी थी और सारे बातों को प्रोसेस कर रही थी । उसके लिए आज, जो पापा के साथ हुआ, वो झकझोर देने वाला था । भले ही वो पापा के साथ मजाक करती थी एक साली के तौर पे , मगर इस तरह से उसके और पापा के बीच कुछ होगा , उसकी उसे उम्मीद नहीं थी ।

ये रात उस घर में सबकें लिए नई रात थी । पापा से प्राची अलग हो चुकी थी , प्रज्ञा भी पापा के साथ हुए घटना के कारण कंफ्यूज थी और प्राची को भी अब से आगे दादी के साथ सोना पड़ेगा।



अगला अपडेट जल्दी ही.....
Pragya ko ab khuli chhut mil jayegi Papa ke sath.
 
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sexsarkar

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Thanks for lovely comments and putting this much effort to reply with so much fantasy driven idea. If your fantasy is that I should fuck ur daughter than I will do exactly same 1st slowly, with lot of emotions than gradually with lot of wildness and roughly. So I will make sure she will enjoy a great sex with me...I hope my comment with satisfy ur fantasy a little...thanks for comment and beautiful pics.
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