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sexsarkar

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Update 74:

पापा और प्रज्ञा आपस में ऐसे लिपट चिपट गए थे जैसे बरसों के प्रेमी हो , प्रज्ञा अपना सब कुछ पापा में न्योछावर करना चाहती थी मगर पापा के चड्ढी में बने बड़े से तम्बू को देख के उसका दिल डर और उत्सुकता से भरा हुआ था । पापा अपनी छोटी बेटी का चुचि कैसे पी रहे थे जैसे कोई रसीला आम चूस रहे हो । अज्ञेय बड़ा और आलिशान कमरा प्रज्ञा के चीखो से गुलज़ार हो जाने वाला था । प्रज्ञा का दिल अभी भी दुविधा से भरा हुआ था । मगर उसकी बुर कुछ अलग कहानी बयान कर रही थी । प्रज्ञा की बुर से अब एक गाढ़ा,चिपचिपा पानी निकलने और उसकी पैंटी से रिसने लगा था । पापा आज प्रज्ञा के नवयौवन से भरे चुचि को खा जाना चाहते थे ऐसा प्रतित हो रहा था । पापा बहुत प्यासे जान पर रहे थे ,क्योंकि पापा को अपनी काम अग्नि किसी महिला के चुत में अपने लिंग डाल के शांत किए हुए महीनों बीत गए थे । प्राची को तो उन्होंने प्रेग्नेंट कर दिया था । उसे प्रेग्नेंट क्या किया ,पापा की तो किस्मत ही फूट गई । महीनों से बुर का सेवन नहीं किया उनके लन्ड महोदय ने ।


खैर आज उसकी प्रबल उम्मीद थी वो भी एक कच्ची कली बुर का सेवन। प्रज्ञा ,उनके छोटी बेटी का बुर, जो आज पापा के लिंग के टोपे से खुल जाएगा । प्रज्ञा भावविभोर हो चली थी ।
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छटपटा रही थी । क्योंकि पापा उसकी चुचियो को ऐसे जंगली जानवर के तरह चूस रहे थे जैसे आज के बाद कभी उसे मिलने वाला नहीं। प्रज्ञा बस आंखे बंद किए पापा को पुनः तरीके से अपना यौवन से भरा बदन सौंप चुकी थी, जिसका इस्तमाल पापा बखूबी कर रहे थे ।

पापा का हाथ अब प्रज्ञा को अपने बदन पे हरकते करता महसूस हुआ । पहले चुचि दबाये, फिर पेट से सरकता हुआ नीचे की ओर जाने लगा । प्रज्ञा का दिल इस वक्त जोरो से धड़क उठा : ओह मां, पापा तो....बाप रे , पापा मेरा च...च..चुत पे अपना हाथ ले जा रहे है ? अब मै क्या करूं ? पापा क्या करने वाले है ? क्या पापा मुझे अब पूरी तरह से नंगी करना चाहते है ? मै तो पापा से नज़र भी नहीं मिला सकती ।

पापा तभी बोले परे : प्रज्ञा ।

प्रज्ञा एकदम धीरे से बोली : ह्म्म्म...पापा ।

पापा : बेटी , तेरे ये उजोर तो बहुत मखमली और मुलायम है । चूसने से मन ही नहीं भर रहा ।

प्रज्ञा शरमा गई : ओह पापा... प्लीज ऐसे मत बोलिए ना , मुझे कुछ कुछ होता है ।

पापा : क्या होता है ?

प्रज्ञा : दिल धड़कने लगता है पापा , जोर जोर से ।

पापा: आह बेटी ,तेरी अदा मुझे दीवाना बना रही है । आज मन कर रहा है तुमने अपना बना लू । जैसे तेरे दीदी का सैयाँ बना था वैसे ही तेरा बन जाऊं।

पापा का हाथ अब प्रज्ञा के पैंटी तक पहुँच चुका था और पैंटी का रबड़ हटाने की कोशिश कर रहा था जो कि थोड़ा टाइट प्रज्ञा के कमर में चिपका हुआ था । पापा ने थोड़ा जोर लगा के प्रज्ञा के गुप्त अंग तक अपना उँगली पहुंचा दिया ।

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प्रज्ञा सिहर उठी और उसने खुद पापा के होंठो को अपने होंठों में भर लिया । पापा को ये इतना सेक्सी लगा कि उनके लौरा में एक गजब का टनक आया और लिंग छटका खा गया , जो कि प्रज्ञा के जांघों पे साफ महसूस हुआ । प्रज्ञा पापा के झटके खाते लिंग की कल्पना चड्डी में बने तंबू देख के लगा रही थी । काफी मजबूत और मोटा जान पड़ता था । प्रज्ञा का मन कर रहा था कि वो पापा का लौरा अपने हथेली में कस के एक बार देखे या अनुमान लगाए कि कितना बड़ा या मोटा है। क्योंकि तंबू बहुत विकराल दिख रहा था ।

पापा ने पैंटी के रबड़ से जंग जीत के प्रज्ञा का गीला यौवन को छूने लगे ।


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रस बहुत ज़्यादा मात्रा में निकल रहा था । बहुत चिपचिपा ।
पापा ने महसूस किया कि रस बह बह के प्रज्ञा के झांटो पे फैल गई है और उनकी उंगलियों को प्रज्ञा के झांटो पे लगी रस, किसी गीली मखमली चादर के तरह प्रतीत हो रही थी ।


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पापा : बेटी ,बहुत गीली हो गई हो , मन कर रहा है ?

प्रज्ञा : कैसा मन ?

पापा : कि आज मै तेरा कसैला रस पी जाऊं?

प्रज्ञा : पापा कैसी बात कर रहा है । आप वो रस कैसे पीएंगे ? वो तो गन्दी जगह है ना , जहां से मै पेशाब करती हूं।

पापा : तेरे लिए है वो , मेरे लिए तो ये जन्नत जैसा है , देख बेटी ये तेरा गुप्त अंग सिर्फ पेशाब करने के लिए नहीं बना है । इसमें अथाह सुख बसा है , एक मर्द के लिए भी और खुद तेरे लिए भी । आज मै वो सुख तुझे प्राप्त करूंगा ।

प्रज्ञा शरमा गई : पापा, आप भी ना.... बहोत बदमाश है , मुझे नहीं लगा था कि आप दीदी को छोड़ के मेरे साथ भी ये सब करेंगे ।

पापा : दीदी को छोड़ा कहा है डार्लिंग, उसे मैने अपने बीज से गर्भवती कर दिया है ।

प्रज्ञा : हां पापा , दादी ने बोला था कि अपने प्राची दीदी के गुप्तांग में अपना बीज गिराया है , वो बीज कैसा होता है पापा ?

पापा : आह...तेरे इन नादान बातों में मेरा लौरा इतना करड़ को चुका है कि दर्द कर रहा है । जरूर दिखाऊँगा तुझे बेटी की बीज कैसा होता है । बोल तो तुझे भी दीदी की तरह ही चुत के अंदर महसूस करा दूंगा ।

प्रज्ञा : होओ पापा , कितनी बेशर्मी से भरी बाते करते हो आप।

पापा ने प्रज्ञा को फिर चूम लिया और उंगलियों उस गीले झांटो के बीच चुत के मुहाने और दाने की तलाश करने लगी । कुछ पल में ही पापा की अनुभवी उंगलियों ने प्रज्ञा के चुत के दाने का तलाश उस गीले झाटो के बीच के लिया । पापा के हाथ , प्रज्ञा के दाने पे लगते ही वो सिसकारी मार पड़ी : सीईईई... आह्ह्ह्ह...सीईईई...पापा ।


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और पापा से और का के लिपट गई । पापा को जो ये हनीमून स्वीट होटल वालों ने दिया था , उसका इस्तेमाल शायद उसी के लिए हो रहा था । पापा की शादी तो प्राची से हुई थी पर हनीमून वो प्रज्ञा के साथ मानना चाहते थे आज इस होटल के आलीशान कमरे में ।

पापा ने चुत का पूरा अवलोकन अपने अनुभवी हाथों से करना तय किया और अपना हाथ ,चुत के मुहाने की तलाश में और अच्छी तरह से नीचे की ओर सरका दिया । चप...कि आवाज के साथ पापा की ऊंगली प्रज्ञा के चुत के फांकों के बीच जा फंसा । पापा का उंगली प्रज्ञा के ठीक योनि द्वार पे था । जहां से पापा अपना लन्ड का टोपा प्राची के अंदर दाखिल करने वाले थे ।

पापा : आह एकदम सिल पैक , कसी हुई , चुनमुनिया सी , चुत है तेरी बेटी ।


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प्रज्ञा : पापा...ये क्या कह रहे है , मुझे शरम आती है ।

पापा : अब शर्म आने की कोई गुंजाइश नहीं है मेरी बच्ची। पापा अब तेरा सेवा अच्छे से कर ए वाले है । बोल करवाएगी सेवा ?

प्रज्ञा : कैसा सेवा पापा ?

पापा : अपने कसी हुई बुर का सेवा ?

प्रज्ञा का दिल बहुत जोर जोर से धड़कने लगा पापा की इन शरारती बातों को सुन के ।

प्रज्ञा नखरा दिखाती हुई बोली : नहीं पापा , मुझे नहीं करवानी कोई सेवा बेवा।

पापा: बहुत मज़ा आएगा बेटी ,बहुत मज़ा आएगा तुझे ।

प्रज्ञा : पर पापा सेवा आप करेंगे कैसे ?

पापा: उसका एक स्पेशल तरीका है बेटी । उसकी सेवा का तरीका सिर्फ मेरे पास है। जो अभी मेरे चड्डी में कैद है ।

प्रज्ञा को पापा ने अपने चड्डी पे बने तंबू के तरफ इशारा किया , प्रज्ञा ने देखा और आंखे चुरा लिया पापा से ।

प्रज्ञा : बहुत बड़ा है पापा ।

पापा : क्या मेरी बच्ची ?

प्रज्ञा : आपका ।

पापा : मेरा क्या ?

प्रज्ञा लिंग के तरफ इशारा करते हुए : वो ।

पापा : वो का क्या नाम है ?

प्रज्ञा : अरे पापा , आपको पता तो है , वही ।

पापा : मै उसे तेरे मुंह से सुनना चाहता हूं बेटी ।

प्रज्ञा थोड़ी सकपकाई, फिर धीरे से बोली : आपका..ल..ल..लन्ड ।

पापा को प्रज्ञा के मुंह से लन्ड शब्द सुनके अलग जोश आया और लिंग फिर एक बार झटका खा गया ।

पापा: आह मेरी बच्ची, हां , मेरा लन्ड, बड़ा तो है । और तेरी सेवा अच्छे से करेगा ।

प्रज्ञा : नहीं पापा , मुझे डर लगता है ।

पापा : डर कहे का ।

प्रज्ञा : मेरी वो , उसका छेद ,बहुत छोटा है पापा , मुझे नहीं लगता , आप मेरे उसमें डाल पाएंगे अपना ।

पापा : क्या वो ?

प्रज्ञा शर्माते हुए : ओफो पापा , मेरी चुत में आप अपना लन्ड नहीं डाल पाएंगे । वो बहुत छोटी सी है ।

पापा : तुम टेंशन मत लो बेबी । तेरी दीदी का भी इतना सा ही था , एकदम चुनमुनिया चुत। उसे पहले रात में ही भोसड़ा बना दिया था मैने।

प्रज्ञा : हांह...वो क्या होता है , भोसड़ा ?

पापा : जब चुत में लिंग जाता है और वो खुल जाती है तो बुर से भोसड़ा बन जाती है मेरी बच्ची ।

पापा का उंगली अब अपना काम करने लगा था , पापा प्रज्ञा के चुत पे अच्छे से उंगली फिरा रहे थे , झांटो को मसल रहे थे , चुत के दाने को चुटकी में कसने की भी कोशिश बीच बीच में करते थे ।

प्रज्ञा हल्की आवाज में ही सही , आहे भरने लगी थी ।

पापा चुत मिझने लगे अपने छोटी बेटी का ।

प्रज्ञा : पापा , अपने दीदी के साथ भी ऐसे किया था ?

पापा: हां बेटी किया था , उसको भी ऐसे ही तैयार किया था , गरम किया ,फिर उसका चुत मरा।

प्रज्ञा : क्या चुत पे मरा अपने दीदी के ?

पापा: अरे नहीं , चुत मरा मतलब चोदा, चुदाई को ही बुर मारना या चुत मारना कहते है ।

प्रज्ञा : ओह अच्छा ।

पापा: यही भोलापन तो मुझ पागल बना रही है मेरी बेटी ।

प्रज्ञा : पापा....सीईईई,... आह्ह्ह्ह...पा....सीईईई...पापा , अपने तो दीदी के साथ शादी की थी ना ? फिर किया था ना?

पापा : हां बेटी , उससे क्या करना तो सेम काम है ना , शादी के पहले करो या शादी के बाद ।

प्रज्ञा : पापा मगर मै, आपके और दीदी के शादी के बाद, आपसे बहुत ज्यादा आकर्षित हो गई थी ,मुझे भी आपके साथ वो सब करना था ...सीईईई...जो...जो आपने दीदी के साथ किया , शादी फिर सुहागरात।

ये बीच बीच में प्रज्ञा सिसकारियां मर रही थी , क्योंकि बात करते करते पापा उसका बर रगड़ रहे थे ।

पापा: कुछ फ़र्क नहीं है बेटी , आज तू अपना सुहागरात ही मान के अपना । दीदी के साथ भी तो मै ऐसे ही सुहागरात मनाया था ।

प्रज्ञा अचानक सिसकारी मार के झरने लगी , वो पापा के उंगलियों को ज्यादा देर सह ना पाई और चु गई । उसकी आंखे ऊपर चढ़ गई थी और शरीर अकड़ गया था । पैर की उंगलियां भी तन गई थी । और उसके बुर से फलाफल के पानी बाहर आया थोड़ा सा और पापा के उंगलियों को भींगता हुआ , चादर पे गिर गया और उसमें एक दाग छोड़ता हुआ , चादर में समा गया ।

पापा समझ गए बेटी झर गई है ।

पापा : प्रज्ञा , कैसा लगा ?

प्रज्ञा : बहुत अच्छा पापा ।

पापा : अब बोल , सुहागरात मनाएगी ना ।

प्रज्ञा : नहीं पापा , प्लीज़ मेरी बहुत अरमान है कि मैं अपने पति से ही पहला सेक्स का अनुभव करूं । मुझे असली सुहागरात मनानी है पापा , दीदी के जैसा , ओर आपको ही मुझे पति बनाना है । उसी दिन से मेरे दिल में आप बसे हो , जिसदिन आपको दीदी से शादी हुई थी ।

पापा : ओह , ऐसी बात है क्या ?

प्रज्ञा : हां पापा, प्लीज़ मेरी बात मन सकते है क्या आप ? इतना सा...

पापा: ह्म्म्म...तू मेरी प्यारी बेटी है और मै समझ सकता हूं कि तेरे मन में मुझ सम्पूर्ण रूप से पाने की इच्छा है । मगर मै तो पहले से ही तेरे दीदी के साथ शादी शुदा हु ना । तुझ से शादी कैसे करूं।

प्रज्ञा : क्यों पापा , मुझ में कोई कमी है क्या ?

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पापा: नहीं बेटी , मगर मेरी शादी पहले ही हो चुकी है ना , तू मेरी गर्ल फ्रैंड बन जा।

प्रज्ञा थोड़ा नाराज़ हो गई : पापा ,मतलब आप मुझ अपनी रखेल बना के रखना चाहते है , दीदी और आपके रिश्ते का नाम रहेगा हमेशा पति पत्नी का , और मेरे और आपके रिश्ते का क्या नाम होगा ? मालिक और रखेल का ?

पापा : प्रज्ञा , ये तू क्या बोल रही है । इतनी छोटी हो के ये सब बात कहा से सिखा ।

प्रज्ञा : पापा ,मै अब कोई बच्ची नहीं हूं, भले मुझे सेक्स की जानकारी जायदा नहीं था इससे पहले , मगर रिश्तों की समझ है पापा मुझ में । बहुत से लड़के , मेरे जैसे लड़कियों को गर्ल फ्रैंड बनाते है , फिर उनका इस्तेमाल कर के रखेल की तरह Use करते है ,फिर चोर देते है ।

पापा : मै ऐसा कुछ नहीं करूंगा बेटी , तू सच में मेरे दिल में है, और तेरी दीदी भी , दोनों को मै बराबर प्यार करता हूं।

प्रज्ञा : तो ,पापा , बराबर हक क्यों नहीं पापा ?

पापा के सोच से ज्यादा मैच्योर थी प्रज्ञा , भले सेक्स की कच्ची खिलाड़ी थी , मतलब अभी तो सेक्स के मैदान में उतरी भी नहीं थी वो।

पापा : तुझे ऐसा लगता है तो ठीक है ,मै कर लूंगा शादी । अभी मगर मुझे तेरी सिल तोड़ने दे।

प्रज्ञा : नहीं पापा , बिल्कुल नहीं , अगर हमें एक होना है तो शादी के बाद ही ।

पापा : ओह , मगर फिर मै सबको कैसे समझाऊंगा , दो शादी , कैसे मैनेज होगा ये ?

प्रज्ञा : पापा मगर उस मौलवी ने भी तो दो नहीं तीन तीन शादी किया हुआ था ना ?

पापा: अरे उसकी अलग बात है , उसके धर्म में ये आम बात है , मगर हमारे धर्म ने ऐसा नहीं होता ना ?

प्रज्ञा : पर आप ही तो कह रहे थे कि पुराने जमाने में हमारे धर्म में भी लोग एक से ज्यादा ही पत्नी रखते थे , और आज भी बहुत सारे ऐसे लोग है, कोई मनाही थोड़ी है ।

पापा : ह्म्म्म...बात तो सही है । चलो अब तुम्हे पाने के लिए मुझ ये भी करना परे तो ठीक है मै राजी हूं। बस मुझ घर पे बताने देना अपने तरीके से । मै पहले प्राची को बताऊंगा अच्छा समय देख के , फिर तेरी दादी को । उनको मानना भी मुश्किल काम होगा । पर तेरी खातिर मै बना ही लूंगा ।

प्रज्ञा पापा से लिपट गई : ओह पापा , आई लव यू ।

पापा: अच्छा बेटी ,मगर अब सच में तू मुझे चुदाई नहीं करने देगी अभी ?

प्रज्ञा : पापा , बोला ना, सुहागरात में ही , मै ये करना चाहती हूं।

पापा: तो इसका क्या करूं, मेरे चड्डी में तो तंबू बना हुआ है ?

प्रज्ञा : मै क्या कर सकती हु इसका पापा ? हाहाहा..

पापा : अब तेरे शरीर की गर्मी पा के ही ये खड़ा हुआ है बेटी , अब तू ही शांत के ।

प्रज्ञा : मै ,कैसे पापा ?

पापा: अच्छा एक काम कर , मेरी चड्डी उतर ले , और मेरे लिंग को पाकर के बस ऊपर नीचे के दे । मज़ा आ जाएगा तेरे कोमल हाथों का स्पर्श से।

प्रज्ञा : पर कैसे पापा ? मुझसे नहीं होगा ।

पापा: अच्छा , तुझे तो मेरा बीज देखना था ना , एक पुरुष का बीज , जिससे तेरी बहन प्रेग्नेंट हुई थी ?

प्रज्ञा : हां पापा ।

पापा: तो मेरे लिंग को ऊपर नीचे के के वही देख ले ।

प्रज्ञा : पर पापा मुझ डर लगता है ।

पापा : मै हूं ना । मै शिखाउंगा तुझे ।

पापा ने खुद से अपना पैंट नीचे कर के खोल लिया । उनका खड़ा लन्ड छिटक के उछलते हुए बाहर आ गया और प्रज्ञा के नजरों में झलकने लगा ।

प्रज्ञा : बापरे ,पापा , इतना बड़ा ?

पापा: ह्म्म्म...बेटी तेरे लिए ही है , मजे लेना इतने बड़े से । अब देर ना के ,थोड़ा ऊपर नीचे के दे अपने कोमल कोमल हाथों से । रहा नहीं जा रहा ।

प्रज्ञा चुपचाप अपने पापा के लिंग पे अपना हाथ फिराई और उनके लिंग के मोटाई को अपने मुठी में कस के महसूस करने लगी । उसका तो मुट्ठी भी ठीक से बंद नहीं हों पा रहा था । पापा का लिंग सच में विशाल था । और ऐसा था भी , एक आप पुरुष के मुकाबले पापा का लिंग काफी बड़ा था , अगर ना होता तो प्राची की वो हालत ना होती उसके सुहागरात वाले दिन ।

पापा प्रज्ञा को बताए जा रहे थे कि कैसे हाथ चलाना है और प्रज्ञा पापा के बताए अनुसार उनके लिंग के चमरी को ऊपर नीचे करने लगी । पापा एकदम मदहोश होंके मजे लेने लगे । प्रज्ञा के लिए ये सब कुछ नया था । पापा का लिंग का सुपारा प्रज्ञा के हर स्टॉक के साथ खुलता और छिपता जा रहा था । सुपारा भी एक बारे आलू जैसा । किसी चुदी चुदाई चुत में जाए तो वो भी महिला छटपटा जाए ,तो ये कुंवारी बहनों का क्या मजाल इस लिंग के सामने ।

प्रज्ञा ने पापा को शांत करने के लिया अपनी जान लगा के उनकी लिंग की मिट्ठी मरती रही । लगभग थोड़े ही देर में छलछला कर पापा के लिंग से एक गढ़ा सफेद पानी उड़ा और कुछ प्रज्ञा के नंगी चुचियो पे उछला , तो कुछ प्रज्ञा के होंठों पे , कुछ पापा के पेट में जा गिरा । प्रज्ञा घबरा गई कि ये अचानक इस बेग से पापा ने पेशाब का एक धार क्यों मारा ।

प्रज्ञा : पापा , छी ,ये क्या किया आपने, पेशाब के दिया मेरे पे ?

पापा: गौर से देख बेटी वो मूत नहीं , वो बीज़ है । शायद अगर तूने अपने चुत में डालने दिया होता तो प्राची की तरह तू भी पेट से हो जाती ।


प्रज्ञा को विश्वास नहीं हो पा रहा था , कि इस पानी के चुत में जाने से ही बच्चा हो जाता है । वो पापा के वीर्य को अपने उनकी में उठा के देखी, गाढ़ा और चिपचिपा पदार्थ। प्रज्ञा को तो उसकी सुगंध भी पसंद आई ।

पापा : बेटी तू चाहे तो ये चाट ले ।

प्रज्ञा अभी नई नई इस खेल में आई थी ,उसने साफ इंकार के दिया । नहीं पापा , मुझे नहीं चाटना ।

पापा : ठीक है फिर वो तौलिए से साफ कर दे , लेकिन एक ना एक दिन तू देखना , तू इससे चाटेगी ही ।

प्रज्ञा शर्मा गई और पापा का वीर्य तौलिए से साफ कर लिया । पापा का मन शांत हो गया । आह मज़ा आ गया ।

मगर पापा को प्रज्ञा को हासिल करने का मलाल रह गया । प्रज्ञा में तो शादी का

प्रस्ताव रख दिया था । और पापा के लिए ये सच में काफी बड़ी बात थी , उनकी पहले से ही एक बीवी है, जो उनकी बड़ी बेटी है , उसको पापा की दुल्हन बनाने में सबकी रज़ा मंदी थी , पर प्रज्ञा के साथ शादी वो भी बिना दादी या प्राची को बताए । कैसे होगा ये ?
 
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Delta101

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पापा और प्रज्ञा आपस में ऐसे लिपट चिपट गए थे जैसे बरसों के प्रेमी हो , प्रज्ञा अपना सब कुछ पापा में न्योछावर करना चाहती थी मगर पापा के चड्ढी में बने बड़े से तम्बू को देख के उसका दिल डर और उत्सुकता से भरा हुआ था । पापा अपनी छोटी बेटी का चुचि कैसे पी रहे थे जैसे कोई रसीला आम चूस रहे हो । अज्ञेय बड़ा और आलिशान कमरा प्रज्ञा के चीखो से गुलज़ार हो जाने वाला था । प्रज्ञा का दिल अभी भी दुविधा से भरा हुआ था । मगर उसकी बुर कुछ अलग कहानी बयान कर रही थी । प्रज्ञा की बुर से अब एक गाढ़ा,चिपचिपा पानी निकलने और उसकी पैंटी से रिसने लगा था । पापा आज प्रज्ञा के नवयौवन से भरे चुचि को खा जाना चाहते थे ऐसा प्रतित हो रहा था । पापा बहुत प्यासे जान पर रहे थे ,क्योंकि पापा को अपनी काम अग्नि किसी महिला के चुत में अपने लिंग डाल के शांत किए हुए महीनों बीत गए थे । प्राची को तो उन्होंने प्रेग्नेंट कर दिया था । उसे प्रेग्नेंट क्या किया ,पापा की तो किस्मत ही फूट गई । महीनों से बुर का सेवन नहीं किया उनके लन्ड महोदय ने ।


खैर आज उसकी प्रबल उम्मीद थी वो भी एक कच्ची कली बुर का सेवन। प्रज्ञा ,उनके छोटी बेटी का बुर, जो आज पापा के लिंग के टोपे से खुल जाएगा । प्रज्ञा भावविभोर हो चली थी ।
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छटपटा रही थी । क्योंकि पापा उसकी चुचियो को ऐसे जंगली जानवर के तरह चूस रहे थे जैसे आज के बाद कभी उसे मिलने वाला नहीं। प्रज्ञा बस आंखे बंद किए पापा को पुनः तरीके से अपना यौवन से भरा बदन सौंप चुकी थी, जिसका इस्तमाल पापा बखूबी कर रहे थे ।

पापा का हाथ अब प्रज्ञा को अपने बदन पे हरकते करता महसूस हुआ । पहले चुचि दबाये, फिर पेट से सरकता हुआ नीचे की ओर जाने लगा । प्रज्ञा का दिल इस वक्त जोरो से धड़क उठा : ओह मां, पापा तो....बाप रे , पापा मेरा च...च..चुत पे अपना हाथ ले जा रहे है ? अब मै क्या करूं ? पापा क्या करने वाले है ? क्या पापा मुझे अब पूरी तरह से नंगी करना चाहते है ? मै तो पापा से नज़र भी नहीं मिला सकती ।

पापा तभी बोले परे : प्रज्ञा ।

प्रज्ञा एकदम धीरे से बोली : ह्म्म्म...पापा ।

पापा : बेटी , तेरे ये उजोर तो बहुत मखमली और मुलायम है । चूसने से मन ही नहीं भर रहा ।

प्रज्ञा शरमा गई : ओह पापा... प्लीज ऐसे मत बोलिए ना , मुझे कुछ कुछ होता है ।

पापा : क्या होता है ?

प्रज्ञा : दिल धड़कने लगता है पापा , जोर जोर से ।

पापा: आह बेटी ,तेरी अदा मुझे दीवाना बना रही है । आज मन कर रहा है तुमने अपना बना लू । जैसे तेरे दीदी का सैयाँ बना था वैसे ही तेरा बन जाऊं।

पापा का हाथ अब प्रज्ञा के पैंटी तक पहुँच चुका था और पैंटी का रबड़ हटाने की कोशिश कर रहा था जो कि थोड़ा टाइट प्रज्ञा के कमर में चिपका हुआ था । पापा ने थोड़ा जोर लगा के प्रज्ञा के गुप्त अंग तक अपना उँगली पहुंचा दिया ।

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प्रज्ञा सिहर उठी और उसने खुद पापा के होंठो को अपने होंठों में भर लिया । पापा को ये इतना सेक्सी लगा कि उनके लौरा में एक गजब का टनक आया और लिंग छटका खा गया , जो कि प्रज्ञा के जांघों पे साफ महसूस हुआ । प्रज्ञा पापा के झटके खाते लिंग की कल्पना चड्डी में बने तंबू देख के लगा रही थी । काफी मजबूत और मोटा जान पड़ता था । प्रज्ञा का मन कर रहा था कि वो पापा का लौरा अपने हथेली में कस के एक बार देखे या अनुमान लगाए कि कितना बड़ा या मोटा है। क्योंकि तंबू बहुत विकराल दिख रहा था ।

पापा ने पैंटी के रबड़ से जंग जीत के प्रज्ञा का गीला यौवन को छूने लगे ।


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रस बहुत ज़्यादा मात्रा में निकल रहा था । बहुत चिपचिपा ।
पापा ने महसूस किया कि रस बह बह के प्रज्ञा के झांटो पे फैल गई है और उनकी उंगलियों को प्रज्ञा के झांटो पे लगी रस, किसी गीली मखमली चादर के तरह प्रतीत हो रही थी ।


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पापा : बेटी ,बहुत गीली हो गई हो , मन कर रहा है ?

प्रज्ञा : कैसा मन ?

पापा : कि आज मै तेरा कसैला रस पी जाऊं?

प्रज्ञा : पापा कैसी बात कर रहा है । आप वो रस कैसे पीएंगे ? वो तो गन्दी जगह है ना , जहां से मै पेशाब करती हूं।

पापा : तेरे लिए है वो , मेरे लिए तो ये जन्नत जैसा है , देख बेटी ये तेरा गुप्त अंग सिर्फ पेशाब करने के लिए नहीं बना है । इसमें अथाह सुख बसा है , एक मर्द के लिए भी और खुद तेरे लिए भी । आज मै वो सुख तुझे प्राप्त करूंगा ।

प्रज्ञा शरमा गई : पापा, आप भी ना.... बहोत बदमाश है , मुझे नहीं लगा था कि आप दीदी को छोड़ के मेरे साथ भी ये सब करेंगे ।

पापा : दीदी को छोड़ा कहा है डार्लिंग, उसे मैने अपने बीज से गर्भवती कर दिया है ।

प्रज्ञा : हां पापा , दादी ने बोला था कि अपने प्राची दीदी के गुप्तांग में अपना बीज गिराया है , वो बीज कैसा होता है पापा ?

पापा : आह...तेरे इन नादान बातों में मेरा लौरा इतना करड़ को चुका है कि दर्द कर रहा है । जरूर दिखाऊँगा तुझे बेटी की बीज कैसा होता है । बोल तो तुझे भी दीदी की तरह ही चुत के अंदर महसूस करा दूंगा ।

प्रज्ञा : होओ पापा , कितनी बेशर्मी से भरी बाते करते हो आप।

पापा ने प्रज्ञा को फिर चूम लिया और उंगलियों उस गीले झांटो के बीच चुत के मुहाने और दाने की तलाश करने लगी । कुछ पल में ही पापा की अनुभवी उंगलियों ने प्रज्ञा के चुत के दाने का तलाश उस गीले झाटो के बीच के लिया । पापा के हाथ , प्रज्ञा के दाने पे लगते ही वो सिसकारी मार पड़ी : सीईईई... आह्ह्ह्ह...सीईईई...पापा ।


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और पापा से और का के लिपट गई । पापा को जो ये हनीमून स्वीट होटल वालों ने दिया था , उसका इस्तेमाल शायद उसी के लिए हो रहा था । पापा की शादी तो प्राची से हुई थी पर हनीमून वो प्रज्ञा के साथ मानना चाहते थे आज इस होटल के आलीशान कमरे में ।

पापा ने चुत का पूरा अवलोकन अपने अनुभवी हाथों से करना तय किया और अपना हाथ ,चुत के मुहाने की तलाश में और अच्छी तरह से नीचे की ओर सरका दिया । चप...कि आवाज के साथ पापा की ऊंगली प्रज्ञा के चुत के फांकों के बीच जा फंसा । पापा का उंगली प्रज्ञा के ठीक योनि द्वार पे था । जहां से पापा अपना लन्ड का टोपा प्राची के अंदर दाखिल करने वाले थे ।

पापा : आह एकदम सिल पैक , कसी हुई , चुनमुनिया सी , चुत है तेरी बेटी ।


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प्रज्ञा : पापा...ये क्या कह रहे है , मुझे शरम आती है ।

पापा : अब शर्म आने की कोई गुंजाइश नहीं है मेरी बच्ची। पापा अब तेरा सेवा अच्छे से कर ए वाले है । बोल करवाएगी सेवा ?

प्रज्ञा : कैसा सेवा पापा ?

पापा : अपने कसी हुई बुर का सेवा ?

प्रज्ञा का दिल बहुत जोर जोर से धड़कने लगा पापा की इन शरारती बातों को सुन के ।

प्रज्ञा नखरा दिखाती हुई बोली : नहीं पापा , मुझे नहीं करवानी कोई सेवा बेवा।

पापा: बहुत मज़ा आएगा बेटी ,बहुत मज़ा आएगा तुझे ।

प्रज्ञा : पर पापा सेवा आप करेंगे कैसे ?

पापा: उसका एक स्पेशल तरीका है बेटी । उसकी सेवा का तरीका सिर्फ मेरे पास है। जो अभी मेरे चड्डी में कैद है ।

प्रज्ञा को पापा ने अपने चड्डी पे बने तंबू के तरफ इशारा किया , प्रज्ञा ने देखा और आंखे चुरा लिया पापा से ।

प्रज्ञा : बहुत बड़ा है पापा ।

पापा : क्या मेरी बच्ची ?

प्रज्ञा : आपका ।

पापा : मेरा क्या ?

प्रज्ञा लिंग के तरफ इशारा करते हुए : वो ।

पापा : वो का क्या नाम है ?

प्रज्ञा : अरे पापा , आपको पता तो है , वही ।

पापा : मै उसे तेरे मुंह से सुनना चाहता हूं बेटी ।

प्रज्ञा थोड़ी सकपकाई, फिर धीरे से बोली : आपका..ल..ल..लन्ड ।

पापा को प्रज्ञा के मुंह से लन्ड शब्द सुनके अलग जोश आया और लिंग फिर एक बार झटका खा गया ।

पापा: आह मेरी बच्ची, हां , मेरा लन्ड, बड़ा तो है । और तेरी सेवा अच्छे से करेगा ।

प्रज्ञा : नहीं पापा , मुझे डर लगता है ।

पापा : डर कहे का ।

प्रज्ञा : मेरी वो , उसका छेद ,बहुत छोटा है पापा , मुझे नहीं लगता , आप मेरे उसमें डाल पाएंगे अपना ।

पापा : क्या वो ?

प्रज्ञा शर्माते हुए : ओफो पापा , मेरी चुत में आप अपना लन्ड नहीं डाल पाएंगे । वो बहुत छोटी सी है ।

पापा : तुम टेंशन मत लो बेबी । तेरी दीदी का भी इतना सा ही था , एकदम चुनमुनिया चुत। उसे पहले रात में ही भोसड़ा बना दिया था मैने।

प्रज्ञा : हांह...वो क्या होता है , भोसड़ा ?

पापा : जब चुत में लिंग जाता है और वो खुल जाती है तो बुर से भोसड़ा बन जाती है मेरी बच्ची ।

पापा का उंगली अब अपना काम करने लगा था , पापा प्रज्ञा के चुत पे अच्छे से उंगली फिरा रहे थे , झांटो को मसल रहे थे , चुत के दाने को चुटकी में कसने की भी कोशिश बीच बीच में करते थे ।

प्रज्ञा हल्की आवाज में ही सही , आहे भरने लगी थी ।

पापा चुत मिझने लगे अपने छोटी बेटी का ।

प्रज्ञा : पापा , अपने दीदी के साथ भी ऐसे किया था ?

पापा: हां बेटी किया था , उसको भी ऐसे ही तैयार किया था , गरम किया ,फिर उसका चुत मरा।

प्रज्ञा : क्या चुत पे मरा अपने दीदी के ?

पापा: अरे नहीं , चुत मरा मतलब चोदा, चुदाई को ही बुर मारना या चुत मारना कहते है ।

प्रज्ञा : ओह अच्छा ।

पापा: यही भोलापन तो मुझ पागल बना रही है मेरी बेटी ।

प्रज्ञा : पापा....सीईईई,... आह्ह्ह्ह...पा....सीईईई...पापा , अपने तो दीदी के साथ शादी की थी ना ? फिर किया था ना?

पापा : हां बेटी , उससे क्या करना तो सेम काम है ना , शादी के पहले करो या शादी के बाद ।

प्रज्ञा : पापा मगर मै, आपके और दीदी के शादी के बाद, आपसे बहुत ज्यादा आकर्षित हो गई थी ,मुझे भी आपके साथ वो सब करना था ...सीईईई...जो...जो आपने दीदी के साथ किया , शादी फिर सुहागरात।

ये बीच बीच में प्रज्ञा सिसकारियां मर रही थी , क्योंकि बात करते करते पापा उसका बर रगड़ रहे थे ।

पापा: कुछ फ़र्क नहीं है बेटी , आज तू अपना सुहागरात ही मान के अपना । दीदी के साथ भी तो मै ऐसे ही सुहागरात मनाया था ।

प्रज्ञा अचानक सिसकारी मार के झरने लगी , वो पापा के उंगलियों को ज्यादा देर सह ना पाई और चु गई । उसकी आंखे ऊपर चढ़ गई थी और शरीर अकड़ गया था । पैर की उंगलियां भी तन गई थी । और उसके बुर से फलाफल के पानी बाहर आया थोड़ा सा और पापा के उंगलियों को भींगता हुआ , चादर पे गिर गया और उसमें एक दाग छोड़ता हुआ , चादर में समा गया ।

पापा समझ गए बेटी झर गई है ।

पापा : प्रज्ञा , कैसा लगा ?

प्रज्ञा : बहुत अच्छा पापा ।

पापा : अब बोल , सुहागरात मनाएगी ना ।

प्रज्ञा : नहीं पापा , प्लीज़ मेरी बहुत अरमान है कि मैं अपने पति से ही पहला सेक्स का अनुभव करूं । मुझे असली सुहागरात मनानी है पापा , दीदी के जैसा , ओर आपको ही मुझे पति बनाना है । उसी दिन से मेरे दिल में आप बसे हो , जिसदिन आपको दीदी से शादी हुई थी ।

पापा : ओह , ऐसी बात है क्या ?

प्रज्ञा : हां पापा, प्लीज़ मेरी बात मन सकते है क्या आप ? इतना सा...

पापा: ह्म्म्म...तू मेरी प्यारी बेटी है और मै समझ सकता हूं कि तेरे मन में मुझ सम्पूर्ण रूप से पाने की इच्छा है । मगर मै तो पहले से ही तेरे दीदी के साथ शादी शुदा हु ना । तुझ से शादी कैसे करूं।

प्रज्ञा : क्यों पापा , मुझ में कोई कमी है क्या ?

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पापा: नहीं बेटी , मगर मेरी शादी पहले ही हो चुकी है ना , तू मेरी गर्ल फ्रैंड बन जा।

प्रज्ञा थोड़ा नाराज़ हो गई : पापा ,मतलब आप मुझ अपनी रखेल बना के रखना चाहते है , दीदी और आपके रिश्ते का नाम रहेगा हमेशा पति पत्नी का , और मेरे और आपके रिश्ते का क्या नाम होगा ? मालिक और रखेल का ?

पापा : प्रज्ञा , ये तू क्या बोल रही है । इतनी छोटी हो के ये सब बात कहा से सिखा ।

प्रज्ञा : पापा ,मै अब कोई बच्ची नहीं हूं, भले मुझे सेक्स की जानकारी जायदा नहीं था इससे पहले , मगर रिश्तों की समझ है पापा मुझ में । बहुत से लड़के , मेरे जैसे लड़कियों को गर्ल फ्रैंड बनाते है , फिर उनका इस्तेमाल कर के रखेल की तरह Use करते है ,फिर चोर देते है ।

पापा : मै ऐसा कुछ नहीं करूंगा बेटी , तू सच में मेरे दिल में है, और तेरी दीदी भी , दोनों को मै बराबर प्यार करता हूं।

प्रज्ञा : तो ,पापा , बराबर हक क्यों नहीं पापा ?

पापा के सोच से ज्यादा मैच्योर थी प्रज्ञा , भले सेक्स की कच्ची खिलाड़ी थी , मतलब अभी तो सेक्स के मैदान में उतरी भी नहीं थी वो।

पापा : तुझे ऐसा लगता है तो ठीक है ,मै कर लूंगा शादी । अभी मगर मुझे तेरी सिल तोड़ने दे।

प्रज्ञा : नहीं पापा , बिल्कुल नहीं , अगर हमें एक होना है तो शादी के बाद ही ।

पापा : ओह , मगर फिर मै सबको कैसे समझाऊंगा , दो शादी , कैसे मैनेज होगा ये ?

प्रज्ञा : पापा मगर उस मौलवी ने भी तो दो नहीं तीन तीन शादी किया हुआ था ना ?

पापा: अरे उसकी अलग बात है , उसके धर्म में ये आम बात है , मगर हमारे धर्म ने ऐसा नहीं होता ना ?

प्रज्ञा : पर आप ही तो कह रहे थे कि पुराने जमाने में हमारे धर्म में भी लोग एक से ज्यादा ही पत्नी रखते थे , और आज भी बहुत सारे ऐसे लोग है, कोई मनाही थोड़ी है ।

पापा : ह्म्म्म...बात तो सही है । चलो अब तुम्हे पाने के लिए मुझ ये भी करना परे तो ठीक है मै राजी हूं। बस मुझ घर पे बताने देना अपने तरीके से । मै पहले प्राची को बताऊंगा अच्छा समय देख के , फिर तेरी दादी को । उनको मानना भी मुश्किल काम होगा । पर तेरी खातिर मै बना ही लूंगा ।

प्रज्ञा पापा से लिपट गई : ओह पापा , आई लव यू ।

पापा: अच्छा बेटी ,मगर अब सच में तू मुझे चुदाई नहीं करने देगी अभी ?

प्रज्ञा : पापा , बोला ना, सुहागरात में ही , मै ये करना चाहती हूं।

पापा: तो इसका क्या करूं, मेरे चड्डी में तो तंबू बना हुआ है ?

प्रज्ञा : मै क्या कर सकती हु इसका पापा ? हाहाहा..

पापा : अब तेरे शरीर की गर्मी पा के ही ये खड़ा हुआ है बेटी , अब तू ही शांत के ।

प्रज्ञा : मै ,कैसे पापा ?

पापा: अच्छा एक काम कर , मेरी चड्डी उतर ले , और मेरे लिंग को पाकर के बस ऊपर नीचे के दे । मज़ा आ जाएगा तेरे कोमल हाथों का स्पर्श से।

प्रज्ञा : पर कैसे पापा ? मुझसे नहीं होगा ।

पापा: अच्छा , तुझे तो मेरा बीज देखना था ना , एक पुरुष का बीज , जिससे तेरी बहन प्रेग्नेंट हुई थी ?

प्रज्ञा : हां पापा ।

पापा: तो मेरे लिंग को ऊपर नीचे के के वही देख ले ।

प्रज्ञा : पर पापा मुझ डर लगता है ।

पापा : मै हूं ना । मै शिखाउंगा तुझे ।

पापा ने खुद से अपना पैंट नीचे कर के खोल लिया । उनका खड़ा लन्ड छिटक के उछलते हुए बाहर आ गया और प्रज्ञा के नजरों में झलकने लगा ।

प्रज्ञा : बापरे ,पापा , इतना बड़ा ?

पापा: ह्म्म्म...बेटी तेरे लिए ही है , मजे लेना इतने बड़े से । अब देर ना के ,थोड़ा ऊपर नीचे के दे अपने कोमल कोमल हाथों से । रहा नहीं जा रहा ।

प्रज्ञा चुपचाप अपने पापा के लिंग पे अपना हाथ फिराई और उनके लिंग के मोटाई को अपने मुठी में कस के महसूस करने लगी । उसका तो मुट्ठी भी ठीक से बंद नहीं हों पा रहा था । पापा का लिंग सच में विशाल था । और ऐसा था भी , एक आप पुरुष के मुकाबले पापा का लिंग काफी बड़ा था , अगर ना होता तो प्राची की वो हालत ना होती उसके सुहागरात वाले दिन ।

पापा प्रज्ञा को बताए जा रहे थे कि कैसे हाथ चलाना है और प्रज्ञा पापा के बताए अनुसार उनके लिंग के चमरी को ऊपर नीचे करने लगी । पापा एकदम मदहोश होंके मजे लेने लगे । प्रज्ञा के लिए ये सब कुछ नया था । पापा का लिंग का सुपारा प्रज्ञा के हर स्टॉक के साथ खुलता और छिपता जा रहा था । सुपारा भी एक बारे आलू जैसा । किसी चुदी चुदाई चुत में जाए तो वो भी महिला छटपटा जाए ,तो ये कुंवारी बहनों का क्या मजाल इस लिंग के सामने ।

प्रज्ञा ने पापा को शांत करने के लिया अपनी जान लगा के उनकी लिंग की मिट्ठी मरती रही । लगभग थोड़े ही देर में छलछला कर पापा के लिंग से एक गढ़ा सफेद पानी उड़ा और कुछ प्रज्ञा के नंगी चुचियो पे उछला , तो कुछ प्रज्ञा के होंठों पे , कुछ पापा के पेट में जा गिरा । प्रज्ञा घबरा गई कि ये अचानक इस बेग से पापा ने पेशाब का एक धार क्यों मारा ।

प्रज्ञा : पापा , छी ,ये क्या किया आपने, पेशाब के दिया मेरे पे ?

पापा: गौर से देख बेटी वो मूत नहीं , वो बीज़ है । शायद अगर तूने अपने चुत में डालने दिया होता तो प्राची की तरह तू भी पेट से हो जाती ।


प्रज्ञा को विश्वास नहीं हो पा रहा था , कि इस पानी के चुत में जाने से ही बच्चा हो जाता है । वो पापा के वीर्य को अपने उनकी में उठा के देखी, गाढ़ा और चिपचिपा पदार्थ। प्रज्ञा को तो उसकी सुगंध भी पसंद आई ।

पापा : बेटी तू चाहे तो ये चाट ले ।

प्रज्ञा अभी नई नई इस खेल में आई थी ,उसने साफ इंकार के दिया । नहीं पापा , मुझे नहीं चाटना ।

पापा : ठीक है फिर वो तौलिए से साफ कर दे , लेकिन एक ना एक दिन तू देखना , तू इससे चाटेगी ही ।

प्रज्ञा शर्मा गई और पापा का वीर्य तौलिए से साफ कर लिया । पापा का मन शांत हो गया । आह मज़ा आ गया ।

मगर पापा को प्रज्ञा को हासिल करने का मलाल रह गया । प्रज्ञा में तो शादी का

प्रस्ताव रख दिया था । और पापा के लिए ये सच में काफी बड़ी बात थी , उनकी पहले से ही एक बीवी है, जो उनकी बड़ी बेटी है , उसको पापा की दुल्हन बनाने में सबकी रज़ा मंदी थी , पर प्रज्ञा के साथ शादी वो भी बिना दादी या प्राची को बताए । कैसे होगा ये ?
लड़की तेज निकली, नहीं तो पापा उसे आज ही चोदकर सुहागरात मना लेते....अब देखना है कि पापा को और कितना इंतजार करना पड़ता है. waiting for next update....
 
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Update 74:

पापा और प्रज्ञा आपस में ऐसे लिपट चिपट गए थे जैसे बरसों के प्रेमी हो , प्रज्ञा अपना सब कुछ पापा में न्योछावर करना चाहती थी मगर पापा के चड्ढी में बने बड़े से तम्बू को देख के उसका दिल डर और उत्सुकता से भरा हुआ था । पापा अपनी छोटी बेटी का चुचि कैसे पी रहे थे जैसे कोई रसीला आम चूस रहे हो । अज्ञेय बड़ा और आलिशान कमरा प्रज्ञा के चीखो से गुलज़ार हो जाने वाला था । प्रज्ञा का दिल अभी भी दुविधा से भरा हुआ था । मगर उसकी बुर कुछ अलग कहानी बयान कर रही थी । प्रज्ञा की बुर से अब एक गाढ़ा,चिपचिपा पानी निकलने और उसकी पैंटी से रिसने लगा था । पापा आज प्रज्ञा के नवयौवन से भरे चुचि को खा जाना चाहते थे ऐसा प्रतित हो रहा था । पापा बहुत प्यासे जान पर रहे थे ,क्योंकि पापा को अपनी काम अग्नि किसी महिला के चुत में अपने लिंग डाल के शांत किए हुए महीनों बीत गए थे । प्राची को तो उन्होंने प्रेग्नेंट कर दिया था । उसे प्रेग्नेंट क्या किया ,पापा की तो किस्मत ही फूट गई । महीनों से बुर का सेवन नहीं किया उनके लन्ड महोदय ने ।


खैर आज उसकी प्रबल उम्मीद थी वो भी एक कच्ची कली बुर का सेवन। प्रज्ञा ,उनके छोटी बेटी का बुर, जो आज पापा के लिंग के टोपे से खुल जाएगा । प्रज्ञा भावविभोर हो चली थी ।
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छटपटा रही थी । क्योंकि पापा उसकी चुचियो को ऐसे जंगली जानवर के तरह चूस रहे थे जैसे आज के बाद कभी उसे मिलने वाला नहीं। प्रज्ञा बस आंखे बंद किए पापा को पुनः तरीके से अपना यौवन से भरा बदन सौंप चुकी थी, जिसका इस्तमाल पापा बखूबी कर रहे थे ।

पापा का हाथ अब प्रज्ञा को अपने बदन पे हरकते करता महसूस हुआ । पहले चुचि दबाये, फिर पेट से सरकता हुआ नीचे की ओर जाने लगा । प्रज्ञा का दिल इस वक्त जोरो से धड़क उठा : ओह मां, पापा तो....बाप रे , पापा मेरा च...च..चुत पे अपना हाथ ले जा रहे है ? अब मै क्या करूं ? पापा क्या करने वाले है ? क्या पापा मुझे अब पूरी तरह से नंगी करना चाहते है ? मै तो पापा से नज़र भी नहीं मिला सकती ।

पापा तभी बोले परे : प्रज्ञा ।

प्रज्ञा एकदम धीरे से बोली : ह्म्म्म...पापा ।

पापा : बेटी , तेरे ये उजोर तो बहुत मखमली और मुलायम है । चूसने से मन ही नहीं भर रहा ।

प्रज्ञा शरमा गई : ओह पापा... प्लीज ऐसे मत बोलिए ना , मुझे कुछ कुछ होता है ।

पापा : क्या होता है ?

प्रज्ञा : दिल धड़कने लगता है पापा , जोर जोर से ।

पापा: आह बेटी ,तेरी अदा मुझे दीवाना बना रही है । आज मन कर रहा है तुमने अपना बना लू । जैसे तेरे दीदी का सैयाँ बना था वैसे ही तेरा बन जाऊं।

पापा का हाथ अब प्रज्ञा के पैंटी तक पहुँच चुका था और पैंटी का रबड़ हटाने की कोशिश कर रहा था जो कि थोड़ा टाइट प्रज्ञा के कमर में चिपका हुआ था । पापा ने थोड़ा जोर लगा के प्रज्ञा के गुप्त अंग तक अपना उँगली पहुंचा दिया ।

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प्रज्ञा सिहर उठी और उसने खुद पापा के होंठो को अपने होंठों में भर लिया । पापा को ये इतना सेक्सी लगा कि उनके लौरा में एक गजब का टनक आया और लिंग छटका खा गया , जो कि प्रज्ञा के जांघों पे साफ महसूस हुआ । प्रज्ञा पापा के झटके खाते लिंग की कल्पना चड्डी में बने तंबू देख के लगा रही थी । काफी मजबूत और मोटा जान पड़ता था । प्रज्ञा का मन कर रहा था कि वो पापा का लौरा अपने हथेली में कस के एक बार देखे या अनुमान लगाए कि कितना बड़ा या मोटा है। क्योंकि तंबू बहुत विकराल दिख रहा था ।

पापा ने पैंटी के रबड़ से जंग जीत के प्रज्ञा का गीला यौवन को छूने लगे ।


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रस बहुत ज़्यादा मात्रा में निकल रहा था । बहुत चिपचिपा ।
पापा ने महसूस किया कि रस बह बह के प्रज्ञा के झांटो पे फैल गई है और उनकी उंगलियों को प्रज्ञा के झांटो पे लगी रस, किसी गीली मखमली चादर के तरह प्रतीत हो रही थी ।


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पापा : बेटी ,बहुत गीली हो गई हो , मन कर रहा है ?

प्रज्ञा : कैसा मन ?

पापा : कि आज मै तेरा कसैला रस पी जाऊं?

प्रज्ञा : पापा कैसी बात कर रहा है । आप वो रस कैसे पीएंगे ? वो तो गन्दी जगह है ना , जहां से मै पेशाब करती हूं।

पापा : तेरे लिए है वो , मेरे लिए तो ये जन्नत जैसा है , देख बेटी ये तेरा गुप्त अंग सिर्फ पेशाब करने के लिए नहीं बना है । इसमें अथाह सुख बसा है , एक मर्द के लिए भी और खुद तेरे लिए भी । आज मै वो सुख तुझे प्राप्त करूंगा ।

प्रज्ञा शरमा गई : पापा, आप भी ना.... बहोत बदमाश है , मुझे नहीं लगा था कि आप दीदी को छोड़ के मेरे साथ भी ये सब करेंगे ।

पापा : दीदी को छोड़ा कहा है डार्लिंग, उसे मैने अपने बीज से गर्भवती कर दिया है ।

प्रज्ञा : हां पापा , दादी ने बोला था कि अपने प्राची दीदी के गुप्तांग में अपना बीज गिराया है , वो बीज कैसा होता है पापा ?

पापा : आह...तेरे इन नादान बातों में मेरा लौरा इतना करड़ को चुका है कि दर्द कर रहा है । जरूर दिखाऊँगा तुझे बेटी की बीज कैसा होता है । बोल तो तुझे भी दीदी की तरह ही चुत के अंदर महसूस करा दूंगा ।

प्रज्ञा : होओ पापा , कितनी बेशर्मी से भरी बाते करते हो आप।

पापा ने प्रज्ञा को फिर चूम लिया और उंगलियों उस गीले झांटो के बीच चुत के मुहाने और दाने की तलाश करने लगी । कुछ पल में ही पापा की अनुभवी उंगलियों ने प्रज्ञा के चुत के दाने का तलाश उस गीले झाटो के बीच के लिया । पापा के हाथ , प्रज्ञा के दाने पे लगते ही वो सिसकारी मार पड़ी : सीईईई... आह्ह्ह्ह...सीईईई...पापा ।


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और पापा से और का के लिपट गई । पापा को जो ये हनीमून स्वीट होटल वालों ने दिया था , उसका इस्तेमाल शायद उसी के लिए हो रहा था । पापा की शादी तो प्राची से हुई थी पर हनीमून वो प्रज्ञा के साथ मानना चाहते थे आज इस होटल के आलीशान कमरे में ।

पापा ने चुत का पूरा अवलोकन अपने अनुभवी हाथों से करना तय किया और अपना हाथ ,चुत के मुहाने की तलाश में और अच्छी तरह से नीचे की ओर सरका दिया । चप...कि आवाज के साथ पापा की ऊंगली प्रज्ञा के चुत के फांकों के बीच जा फंसा । पापा का उंगली प्रज्ञा के ठीक योनि द्वार पे था । जहां से पापा अपना लन्ड का टोपा प्राची के अंदर दाखिल करने वाले थे ।

पापा : आह एकदम सिल पैक , कसी हुई , चुनमुनिया सी , चुत है तेरी बेटी ।


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प्रज्ञा : पापा...ये क्या कह रहे है , मुझे शरम आती है ।

पापा : अब शर्म आने की कोई गुंजाइश नहीं है मेरी बच्ची। पापा अब तेरा सेवा अच्छे से कर ए वाले है । बोल करवाएगी सेवा ?

प्रज्ञा : कैसा सेवा पापा ?

पापा : अपने कसी हुई बुर का सेवा ?

प्रज्ञा का दिल बहुत जोर जोर से धड़कने लगा पापा की इन शरारती बातों को सुन के ।

प्रज्ञा नखरा दिखाती हुई बोली : नहीं पापा , मुझे नहीं करवानी कोई सेवा बेवा।

पापा: बहुत मज़ा आएगा बेटी ,बहुत मज़ा आएगा तुझे ।

प्रज्ञा : पर पापा सेवा आप करेंगे कैसे ?

पापा: उसका एक स्पेशल तरीका है बेटी । उसकी सेवा का तरीका सिर्फ मेरे पास है। जो अभी मेरे चड्डी में कैद है ।

प्रज्ञा को पापा ने अपने चड्डी पे बने तंबू के तरफ इशारा किया , प्रज्ञा ने देखा और आंखे चुरा लिया पापा से ।

प्रज्ञा : बहुत बड़ा है पापा ।

पापा : क्या मेरी बच्ची ?

प्रज्ञा : आपका ।

पापा : मेरा क्या ?

प्रज्ञा लिंग के तरफ इशारा करते हुए : वो ।

पापा : वो का क्या नाम है ?

प्रज्ञा : अरे पापा , आपको पता तो है , वही ।

पापा : मै उसे तेरे मुंह से सुनना चाहता हूं बेटी ।

प्रज्ञा थोड़ी सकपकाई, फिर धीरे से बोली : आपका..ल..ल..लन्ड ।

पापा को प्रज्ञा के मुंह से लन्ड शब्द सुनके अलग जोश आया और लिंग फिर एक बार झटका खा गया ।

पापा: आह मेरी बच्ची, हां , मेरा लन्ड, बड़ा तो है । और तेरी सेवा अच्छे से करेगा ।

प्रज्ञा : नहीं पापा , मुझे डर लगता है ।

पापा : डर कहे का ।

प्रज्ञा : मेरी वो , उसका छेद ,बहुत छोटा है पापा , मुझे नहीं लगता , आप मेरे उसमें डाल पाएंगे अपना ।

पापा : क्या वो ?

प्रज्ञा शर्माते हुए : ओफो पापा , मेरी चुत में आप अपना लन्ड नहीं डाल पाएंगे । वो बहुत छोटी सी है ।

पापा : तुम टेंशन मत लो बेबी । तेरी दीदी का भी इतना सा ही था , एकदम चुनमुनिया चुत। उसे पहले रात में ही भोसड़ा बना दिया था मैने।

प्रज्ञा : हांह...वो क्या होता है , भोसड़ा ?

पापा : जब चुत में लिंग जाता है और वो खुल जाती है तो बुर से भोसड़ा बन जाती है मेरी बच्ची ।

पापा का उंगली अब अपना काम करने लगा था , पापा प्रज्ञा के चुत पे अच्छे से उंगली फिरा रहे थे , झांटो को मसल रहे थे , चुत के दाने को चुटकी में कसने की भी कोशिश बीच बीच में करते थे ।

प्रज्ञा हल्की आवाज में ही सही , आहे भरने लगी थी ।

पापा चुत मिझने लगे अपने छोटी बेटी का ।

प्रज्ञा : पापा , अपने दीदी के साथ भी ऐसे किया था ?

पापा: हां बेटी किया था , उसको भी ऐसे ही तैयार किया था , गरम किया ,फिर उसका चुत मरा।

प्रज्ञा : क्या चुत पे मरा अपने दीदी के ?

पापा: अरे नहीं , चुत मरा मतलब चोदा, चुदाई को ही बुर मारना या चुत मारना कहते है ।

प्रज्ञा : ओह अच्छा ।

पापा: यही भोलापन तो मुझ पागल बना रही है मेरी बेटी ।

प्रज्ञा : पापा....सीईईई,... आह्ह्ह्ह...पा....सीईईई...पापा , अपने तो दीदी के साथ शादी की थी ना ? फिर किया था ना?

पापा : हां बेटी , उससे क्या करना तो सेम काम है ना , शादी के पहले करो या शादी के बाद ।

प्रज्ञा : पापा मगर मै, आपके और दीदी के शादी के बाद, आपसे बहुत ज्यादा आकर्षित हो गई थी ,मुझे भी आपके साथ वो सब करना था ...सीईईई...जो...जो आपने दीदी के साथ किया , शादी फिर सुहागरात।

ये बीच बीच में प्रज्ञा सिसकारियां मर रही थी , क्योंकि बात करते करते पापा उसका बर रगड़ रहे थे ।

पापा: कुछ फ़र्क नहीं है बेटी , आज तू अपना सुहागरात ही मान के अपना । दीदी के साथ भी तो मै ऐसे ही सुहागरात मनाया था ।

प्रज्ञा अचानक सिसकारी मार के झरने लगी , वो पापा के उंगलियों को ज्यादा देर सह ना पाई और चु गई । उसकी आंखे ऊपर चढ़ गई थी और शरीर अकड़ गया था । पैर की उंगलियां भी तन गई थी । और उसके बुर से फलाफल के पानी बाहर आया थोड़ा सा और पापा के उंगलियों को भींगता हुआ , चादर पे गिर गया और उसमें एक दाग छोड़ता हुआ , चादर में समा गया ।

पापा समझ गए बेटी झर गई है ।

पापा : प्रज्ञा , कैसा लगा ?

प्रज्ञा : बहुत अच्छा पापा ।

पापा : अब बोल , सुहागरात मनाएगी ना ।

प्रज्ञा : नहीं पापा , प्लीज़ मेरी बहुत अरमान है कि मैं अपने पति से ही पहला सेक्स का अनुभव करूं । मुझे असली सुहागरात मनानी है पापा , दीदी के जैसा , ओर आपको ही मुझे पति बनाना है । उसी दिन से मेरे दिल में आप बसे हो , जिसदिन आपको दीदी से शादी हुई थी ।

पापा : ओह , ऐसी बात है क्या ?

प्रज्ञा : हां पापा, प्लीज़ मेरी बात मन सकते है क्या आप ? इतना सा...

पापा: ह्म्म्म...तू मेरी प्यारी बेटी है और मै समझ सकता हूं कि तेरे मन में मुझ सम्पूर्ण रूप से पाने की इच्छा है । मगर मै तो पहले से ही तेरे दीदी के साथ शादी शुदा हु ना । तुझ से शादी कैसे करूं।

प्रज्ञा : क्यों पापा , मुझ में कोई कमी है क्या ?

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पापा: नहीं बेटी , मगर मेरी शादी पहले ही हो चुकी है ना , तू मेरी गर्ल फ्रैंड बन जा।

प्रज्ञा थोड़ा नाराज़ हो गई : पापा ,मतलब आप मुझ अपनी रखेल बना के रखना चाहते है , दीदी और आपके रिश्ते का नाम रहेगा हमेशा पति पत्नी का , और मेरे और आपके रिश्ते का क्या नाम होगा ? मालिक और रखेल का ?

पापा : प्रज्ञा , ये तू क्या बोल रही है । इतनी छोटी हो के ये सब बात कहा से सिखा ।

प्रज्ञा : पापा ,मै अब कोई बच्ची नहीं हूं, भले मुझे सेक्स की जानकारी जायदा नहीं था इससे पहले , मगर रिश्तों की समझ है पापा मुझ में । बहुत से लड़के , मेरे जैसे लड़कियों को गर्ल फ्रैंड बनाते है , फिर उनका इस्तेमाल कर के रखेल की तरह Use करते है ,फिर चोर देते है ।

पापा : मै ऐसा कुछ नहीं करूंगा बेटी , तू सच में मेरे दिल में है, और तेरी दीदी भी , दोनों को मै बराबर प्यार करता हूं।

प्रज्ञा : तो ,पापा , बराबर हक क्यों नहीं पापा ?

पापा के सोच से ज्यादा मैच्योर थी प्रज्ञा , भले सेक्स की कच्ची खिलाड़ी थी , मतलब अभी तो सेक्स के मैदान में उतरी भी नहीं थी वो।

पापा : तुझे ऐसा लगता है तो ठीक है ,मै कर लूंगा शादी । अभी मगर मुझे तेरी सिल तोड़ने दे।

प्रज्ञा : नहीं पापा , बिल्कुल नहीं , अगर हमें एक होना है तो शादी के बाद ही ।

पापा : ओह , मगर फिर मै सबको कैसे समझाऊंगा , दो शादी , कैसे मैनेज होगा ये ?

प्रज्ञा : पापा मगर उस मौलवी ने भी तो दो नहीं तीन तीन शादी किया हुआ था ना ?

पापा: अरे उसकी अलग बात है , उसके धर्म में ये आम बात है , मगर हमारे धर्म ने ऐसा नहीं होता ना ?

प्रज्ञा : पर आप ही तो कह रहे थे कि पुराने जमाने में हमारे धर्म में भी लोग एक से ज्यादा ही पत्नी रखते थे , और आज भी बहुत सारे ऐसे लोग है, कोई मनाही थोड़ी है ।

पापा : ह्म्म्म...बात तो सही है । चलो अब तुम्हे पाने के लिए मुझ ये भी करना परे तो ठीक है मै राजी हूं। बस मुझ घर पे बताने देना अपने तरीके से । मै पहले प्राची को बताऊंगा अच्छा समय देख के , फिर तेरी दादी को । उनको मानना भी मुश्किल काम होगा । पर तेरी खातिर मै बना ही लूंगा ।

प्रज्ञा पापा से लिपट गई : ओह पापा , आई लव यू ।

पापा: अच्छा बेटी ,मगर अब सच में तू मुझे चुदाई नहीं करने देगी अभी ?

प्रज्ञा : पापा , बोला ना, सुहागरात में ही , मै ये करना चाहती हूं।

पापा: तो इसका क्या करूं, मेरे चड्डी में तो तंबू बना हुआ है ?

प्रज्ञा : मै क्या कर सकती हु इसका पापा ? हाहाहा..

पापा : अब तेरे शरीर की गर्मी पा के ही ये खड़ा हुआ है बेटी , अब तू ही शांत के ।

प्रज्ञा : मै ,कैसे पापा ?

पापा: अच्छा एक काम कर , मेरी चड्डी उतर ले , और मेरे लिंग को पाकर के बस ऊपर नीचे के दे । मज़ा आ जाएगा तेरे कोमल हाथों का स्पर्श से।

प्रज्ञा : पर कैसे पापा ? मुझसे नहीं होगा ।

पापा: अच्छा , तुझे तो मेरा बीज देखना था ना , एक पुरुष का बीज , जिससे तेरी बहन प्रेग्नेंट हुई थी ?

प्रज्ञा : हां पापा ।

पापा: तो मेरे लिंग को ऊपर नीचे के के वही देख ले ।

प्रज्ञा : पर पापा मुझ डर लगता है ।

पापा : मै हूं ना । मै शिखाउंगा तुझे ।

पापा ने खुद से अपना पैंट नीचे कर के खोल लिया । उनका खड़ा लन्ड छिटक के उछलते हुए बाहर आ गया और प्रज्ञा के नजरों में झलकने लगा ।

प्रज्ञा : बापरे ,पापा , इतना बड़ा ?

पापा: ह्म्म्म...बेटी तेरे लिए ही है , मजे लेना इतने बड़े से । अब देर ना के ,थोड़ा ऊपर नीचे के दे अपने कोमल कोमल हाथों से । रहा नहीं जा रहा ।

प्रज्ञा चुपचाप अपने पापा के लिंग पे अपना हाथ फिराई और उनके लिंग के मोटाई को अपने मुठी में कस के महसूस करने लगी । उसका तो मुट्ठी भी ठीक से बंद नहीं हों पा रहा था । पापा का लिंग सच में विशाल था । और ऐसा था भी , एक आप पुरुष के मुकाबले पापा का लिंग काफी बड़ा था , अगर ना होता तो प्राची की वो हालत ना होती उसके सुहागरात वाले दिन ।

पापा प्रज्ञा को बताए जा रहे थे कि कैसे हाथ चलाना है और प्रज्ञा पापा के बताए अनुसार उनके लिंग के चमरी को ऊपर नीचे करने लगी । पापा एकदम मदहोश होंके मजे लेने लगे । प्रज्ञा के लिए ये सब कुछ नया था । पापा का लिंग का सुपारा प्रज्ञा के हर स्टॉक के साथ खुलता और छिपता जा रहा था । सुपारा भी एक बारे आलू जैसा । किसी चुदी चुदाई चुत में जाए तो वो भी महिला छटपटा जाए ,तो ये कुंवारी बहनों का क्या मजाल इस लिंग के सामने ।

प्रज्ञा ने पापा को शांत करने के लिया अपनी जान लगा के उनकी लिंग की मिट्ठी मरती रही । लगभग थोड़े ही देर में छलछला कर पापा के लिंग से एक गढ़ा सफेद पानी उड़ा और कुछ प्रज्ञा के नंगी चुचियो पे उछला , तो कुछ प्रज्ञा के होंठों पे , कुछ पापा के पेट में जा गिरा । प्रज्ञा घबरा गई कि ये अचानक इस बेग से पापा ने पेशाब का एक धार क्यों मारा ।

प्रज्ञा : पापा , छी ,ये क्या किया आपने, पेशाब के दिया मेरे पे ?

पापा: गौर से देख बेटी वो मूत नहीं , वो बीज़ है । शायद अगर तूने अपने चुत में डालने दिया होता तो प्राची की तरह तू भी पेट से हो जाती ।


प्रज्ञा को विश्वास नहीं हो पा रहा था , कि इस पानी के चुत में जाने से ही बच्चा हो जाता है । वो पापा के वीर्य को अपने उनकी में उठा के देखी, गाढ़ा और चिपचिपा पदार्थ। प्रज्ञा को तो उसकी सुगंध भी पसंद आई ।

पापा : बेटी तू चाहे तो ये चाट ले ।

प्रज्ञा अभी नई नई इस खेल में आई थी ,उसने साफ इंकार के दिया । नहीं पापा , मुझे नहीं चाटना ।

पापा : ठीक है फिर वो तौलिए से साफ कर दे , लेकिन एक ना एक दिन तू देखना , तू इससे चाटेगी ही ।

प्रज्ञा शर्मा गई और पापा का वीर्य तौलिए से साफ कर लिया । पापा का मन शांत हो गया । आह मज़ा आ गया ।

मगर पापा को प्रज्ञा को हासिल करने का मलाल रह गया । प्रज्ञा में तो शादी का

प्रस्ताव रख दिया था । और पापा के लिए ये सच में काफी बड़ी बात थी , उनकी पहले से ही एक बीवी है, जो उनकी बड़ी बेटी है , उसको पापा की दुल्हन बनाने में सबकी रज़ा मंदी थी , पर प्रज्ञा के साथ शादी वो भी बिना दादी या प्राची को बताए । कैसे होगा ये ?
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Rajizexy

Punjabi Doc💊
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Update 74:

पापा और प्रज्ञा आपस में ऐसे लिपट चिपट गए थे जैसे बरसों के प्रेमी हो , प्रज्ञा अपना सब कुछ पापा में न्योछावर करना चाहती थी मगर पापा के चड्ढी में बने बड़े से तम्बू को देख के उसका दिल डर और उत्सुकता से भरा हुआ था । पापा अपनी छोटी बेटी का चुचि कैसे पी रहे थे जैसे कोई रसीला आम चूस रहे हो । अज्ञेय बड़ा और आलिशान कमरा प्रज्ञा के चीखो से गुलज़ार हो जाने वाला था । प्रज्ञा का दिल अभी भी दुविधा से भरा हुआ था । मगर उसकी बुर कुछ अलग कहानी बयान कर रही थी । प्रज्ञा की बुर से अब एक गाढ़ा,चिपचिपा पानी निकलने और उसकी पैंटी से रिसने लगा था । पापा आज प्रज्ञा के नवयौवन से भरे चुचि को खा जाना चाहते थे ऐसा प्रतित हो रहा था । पापा बहुत प्यासे जान पर रहे थे ,क्योंकि पापा को अपनी काम अग्नि किसी महिला के चुत में अपने लिंग डाल के शांत किए हुए महीनों बीत गए थे । प्राची को तो उन्होंने प्रेग्नेंट कर दिया था । उसे प्रेग्नेंट क्या किया ,पापा की तो किस्मत ही फूट गई । महीनों से बुर का सेवन नहीं किया उनके लन्ड महोदय ने ।


खैर आज उसकी प्रबल उम्मीद थी वो भी एक कच्ची कली बुर का सेवन। प्रज्ञा ,उनके छोटी बेटी का बुर, जो आज पापा के लिंग के टोपे से खुल जाएगा । प्रज्ञा भावविभोर हो चली थी ।
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छटपटा रही थी । क्योंकि पापा उसकी चुचियो को ऐसे जंगली जानवर के तरह चूस रहे थे जैसे आज के बाद कभी उसे मिलने वाला नहीं। प्रज्ञा बस आंखे बंद किए पापा को पुनः तरीके से अपना यौवन से भरा बदन सौंप चुकी थी, जिसका इस्तमाल पापा बखूबी कर रहे थे ।

पापा का हाथ अब प्रज्ञा को अपने बदन पे हरकते करता महसूस हुआ । पहले चुचि दबाये, फिर पेट से सरकता हुआ नीचे की ओर जाने लगा । प्रज्ञा का दिल इस वक्त जोरो से धड़क उठा : ओह मां, पापा तो....बाप रे , पापा मेरा च...च..चुत पे अपना हाथ ले जा रहे है ? अब मै क्या करूं ? पापा क्या करने वाले है ? क्या पापा मुझे अब पूरी तरह से नंगी करना चाहते है ? मै तो पापा से नज़र भी नहीं मिला सकती ।

पापा तभी बोले परे : प्रज्ञा ।

प्रज्ञा एकदम धीरे से बोली : ह्म्म्म...पापा ।

पापा : बेटी , तेरे ये उजोर तो बहुत मखमली और मुलायम है । चूसने से मन ही नहीं भर रहा ।

प्रज्ञा शरमा गई : ओह पापा... प्लीज ऐसे मत बोलिए ना , मुझे कुछ कुछ होता है ।

पापा : क्या होता है ?

प्रज्ञा : दिल धड़कने लगता है पापा , जोर जोर से ।

पापा: आह बेटी ,तेरी अदा मुझे दीवाना बना रही है । आज मन कर रहा है तुमने अपना बना लू । जैसे तेरे दीदी का सैयाँ बना था वैसे ही तेरा बन जाऊं।

पापा का हाथ अब प्रज्ञा के पैंटी तक पहुँच चुका था और पैंटी का रबड़ हटाने की कोशिश कर रहा था जो कि थोड़ा टाइट प्रज्ञा के कमर में चिपका हुआ था । पापा ने थोड़ा जोर लगा के प्रज्ञा के गुप्त अंग तक अपना उँगली पहुंचा दिया ।

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प्रज्ञा सिहर उठी और उसने खुद पापा के होंठो को अपने होंठों में भर लिया । पापा को ये इतना सेक्सी लगा कि उनके लौरा में एक गजब का टनक आया और लिंग छटका खा गया , जो कि प्रज्ञा के जांघों पे साफ महसूस हुआ । प्रज्ञा पापा के झटके खाते लिंग की कल्पना चड्डी में बने तंबू देख के लगा रही थी । काफी मजबूत और मोटा जान पड़ता था । प्रज्ञा का मन कर रहा था कि वो पापा का लौरा अपने हथेली में कस के एक बार देखे या अनुमान लगाए कि कितना बड़ा या मोटा है। क्योंकि तंबू बहुत विकराल दिख रहा था ।

पापा ने पैंटी के रबड़ से जंग जीत के प्रज्ञा का गीला यौवन को छूने लगे ।


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रस बहुत ज़्यादा मात्रा में निकल रहा था । बहुत चिपचिपा ।
पापा ने महसूस किया कि रस बह बह के प्रज्ञा के झांटो पे फैल गई है और उनकी उंगलियों को प्रज्ञा के झांटो पे लगी रस, किसी गीली मखमली चादर के तरह प्रतीत हो रही थी ।


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पापा : बेटी ,बहुत गीली हो गई हो , मन कर रहा है ?

प्रज्ञा : कैसा मन ?

पापा : कि आज मै तेरा कसैला रस पी जाऊं?

प्रज्ञा : पापा कैसी बात कर रहा है । आप वो रस कैसे पीएंगे ? वो तो गन्दी जगह है ना , जहां से मै पेशाब करती हूं।

पापा : तेरे लिए है वो , मेरे लिए तो ये जन्नत जैसा है , देख बेटी ये तेरा गुप्त अंग सिर्फ पेशाब करने के लिए नहीं बना है । इसमें अथाह सुख बसा है , एक मर्द के लिए भी और खुद तेरे लिए भी । आज मै वो सुख तुझे प्राप्त करूंगा ।

प्रज्ञा शरमा गई : पापा, आप भी ना.... बहोत बदमाश है , मुझे नहीं लगा था कि आप दीदी को छोड़ के मेरे साथ भी ये सब करेंगे ।

पापा : दीदी को छोड़ा कहा है डार्लिंग, उसे मैने अपने बीज से गर्भवती कर दिया है ।

प्रज्ञा : हां पापा , दादी ने बोला था कि अपने प्राची दीदी के गुप्तांग में अपना बीज गिराया है , वो बीज कैसा होता है पापा ?

पापा : आह...तेरे इन नादान बातों में मेरा लौरा इतना करड़ को चुका है कि दर्द कर रहा है । जरूर दिखाऊँगा तुझे बेटी की बीज कैसा होता है । बोल तो तुझे भी दीदी की तरह ही चुत के अंदर महसूस करा दूंगा ।

प्रज्ञा : होओ पापा , कितनी बेशर्मी से भरी बाते करते हो आप।

पापा ने प्रज्ञा को फिर चूम लिया और उंगलियों उस गीले झांटो के बीच चुत के मुहाने और दाने की तलाश करने लगी । कुछ पल में ही पापा की अनुभवी उंगलियों ने प्रज्ञा के चुत के दाने का तलाश उस गीले झाटो के बीच के लिया । पापा के हाथ , प्रज्ञा के दाने पे लगते ही वो सिसकारी मार पड़ी : सीईईई... आह्ह्ह्ह...सीईईई...पापा ।


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और पापा से और का के लिपट गई । पापा को जो ये हनीमून स्वीट होटल वालों ने दिया था , उसका इस्तेमाल शायद उसी के लिए हो रहा था । पापा की शादी तो प्राची से हुई थी पर हनीमून वो प्रज्ञा के साथ मानना चाहते थे आज इस होटल के आलीशान कमरे में ।

पापा ने चुत का पूरा अवलोकन अपने अनुभवी हाथों से करना तय किया और अपना हाथ ,चुत के मुहाने की तलाश में और अच्छी तरह से नीचे की ओर सरका दिया । चप...कि आवाज के साथ पापा की ऊंगली प्रज्ञा के चुत के फांकों के बीच जा फंसा । पापा का उंगली प्रज्ञा के ठीक योनि द्वार पे था । जहां से पापा अपना लन्ड का टोपा प्राची के अंदर दाखिल करने वाले थे ।

पापा : आह एकदम सिल पैक , कसी हुई , चुनमुनिया सी , चुत है तेरी बेटी ।


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प्रज्ञा : पापा...ये क्या कह रहे है , मुझे शरम आती है ।

पापा : अब शर्म आने की कोई गुंजाइश नहीं है मेरी बच्ची। पापा अब तेरा सेवा अच्छे से कर ए वाले है । बोल करवाएगी सेवा ?

प्रज्ञा : कैसा सेवा पापा ?

पापा : अपने कसी हुई बुर का सेवा ?

प्रज्ञा का दिल बहुत जोर जोर से धड़कने लगा पापा की इन शरारती बातों को सुन के ।

प्रज्ञा नखरा दिखाती हुई बोली : नहीं पापा , मुझे नहीं करवानी कोई सेवा बेवा।

पापा: बहुत मज़ा आएगा बेटी ,बहुत मज़ा आएगा तुझे ।

प्रज्ञा : पर पापा सेवा आप करेंगे कैसे ?

पापा: उसका एक स्पेशल तरीका है बेटी । उसकी सेवा का तरीका सिर्फ मेरे पास है। जो अभी मेरे चड्डी में कैद है ।

प्रज्ञा को पापा ने अपने चड्डी पे बने तंबू के तरफ इशारा किया , प्रज्ञा ने देखा और आंखे चुरा लिया पापा से ।

प्रज्ञा : बहुत बड़ा है पापा ।

पापा : क्या मेरी बच्ची ?

प्रज्ञा : आपका ।

पापा : मेरा क्या ?

प्रज्ञा लिंग के तरफ इशारा करते हुए : वो ।

पापा : वो का क्या नाम है ?

प्रज्ञा : अरे पापा , आपको पता तो है , वही ।

पापा : मै उसे तेरे मुंह से सुनना चाहता हूं बेटी ।

प्रज्ञा थोड़ी सकपकाई, फिर धीरे से बोली : आपका..ल..ल..लन्ड ।

पापा को प्रज्ञा के मुंह से लन्ड शब्द सुनके अलग जोश आया और लिंग फिर एक बार झटका खा गया ।

पापा: आह मेरी बच्ची, हां , मेरा लन्ड, बड़ा तो है । और तेरी सेवा अच्छे से करेगा ।

प्रज्ञा : नहीं पापा , मुझे डर लगता है ।

पापा : डर कहे का ।

प्रज्ञा : मेरी वो , उसका छेद ,बहुत छोटा है पापा , मुझे नहीं लगता , आप मेरे उसमें डाल पाएंगे अपना ।

पापा : क्या वो ?

प्रज्ञा शर्माते हुए : ओफो पापा , मेरी चुत में आप अपना लन्ड नहीं डाल पाएंगे । वो बहुत छोटी सी है ।

पापा : तुम टेंशन मत लो बेबी । तेरी दीदी का भी इतना सा ही था , एकदम चुनमुनिया चुत। उसे पहले रात में ही भोसड़ा बना दिया था मैने।

प्रज्ञा : हांह...वो क्या होता है , भोसड़ा ?

पापा : जब चुत में लिंग जाता है और वो खुल जाती है तो बुर से भोसड़ा बन जाती है मेरी बच्ची ।

पापा का उंगली अब अपना काम करने लगा था , पापा प्रज्ञा के चुत पे अच्छे से उंगली फिरा रहे थे , झांटो को मसल रहे थे , चुत के दाने को चुटकी में कसने की भी कोशिश बीच बीच में करते थे ।

प्रज्ञा हल्की आवाज में ही सही , आहे भरने लगी थी ।

पापा चुत मिझने लगे अपने छोटी बेटी का ।

प्रज्ञा : पापा , अपने दीदी के साथ भी ऐसे किया था ?

पापा: हां बेटी किया था , उसको भी ऐसे ही तैयार किया था , गरम किया ,फिर उसका चुत मरा।

प्रज्ञा : क्या चुत पे मरा अपने दीदी के ?

पापा: अरे नहीं , चुत मरा मतलब चोदा, चुदाई को ही बुर मारना या चुत मारना कहते है ।

प्रज्ञा : ओह अच्छा ।

पापा: यही भोलापन तो मुझ पागल बना रही है मेरी बेटी ।

प्रज्ञा : पापा....सीईईई,... आह्ह्ह्ह...पा....सीईईई...पापा , अपने तो दीदी के साथ शादी की थी ना ? फिर किया था ना?

पापा : हां बेटी , उससे क्या करना तो सेम काम है ना , शादी के पहले करो या शादी के बाद ।

प्रज्ञा : पापा मगर मै, आपके और दीदी के शादी के बाद, आपसे बहुत ज्यादा आकर्षित हो गई थी ,मुझे भी आपके साथ वो सब करना था ...सीईईई...जो...जो आपने दीदी के साथ किया , शादी फिर सुहागरात।

ये बीच बीच में प्रज्ञा सिसकारियां मर रही थी , क्योंकि बात करते करते पापा उसका बर रगड़ रहे थे ।

पापा: कुछ फ़र्क नहीं है बेटी , आज तू अपना सुहागरात ही मान के अपना । दीदी के साथ भी तो मै ऐसे ही सुहागरात मनाया था ।

प्रज्ञा अचानक सिसकारी मार के झरने लगी , वो पापा के उंगलियों को ज्यादा देर सह ना पाई और चु गई । उसकी आंखे ऊपर चढ़ गई थी और शरीर अकड़ गया था । पैर की उंगलियां भी तन गई थी । और उसके बुर से फलाफल के पानी बाहर आया थोड़ा सा और पापा के उंगलियों को भींगता हुआ , चादर पे गिर गया और उसमें एक दाग छोड़ता हुआ , चादर में समा गया ।

पापा समझ गए बेटी झर गई है ।

पापा : प्रज्ञा , कैसा लगा ?

प्रज्ञा : बहुत अच्छा पापा ।

पापा : अब बोल , सुहागरात मनाएगी ना ।

प्रज्ञा : नहीं पापा , प्लीज़ मेरी बहुत अरमान है कि मैं अपने पति से ही पहला सेक्स का अनुभव करूं । मुझे असली सुहागरात मनानी है पापा , दीदी के जैसा , ओर आपको ही मुझे पति बनाना है । उसी दिन से मेरे दिल में आप बसे हो , जिसदिन आपको दीदी से शादी हुई थी ।

पापा : ओह , ऐसी बात है क्या ?

प्रज्ञा : हां पापा, प्लीज़ मेरी बात मन सकते है क्या आप ? इतना सा...

पापा: ह्म्म्म...तू मेरी प्यारी बेटी है और मै समझ सकता हूं कि तेरे मन में मुझ सम्पूर्ण रूप से पाने की इच्छा है । मगर मै तो पहले से ही तेरे दीदी के साथ शादी शुदा हु ना । तुझ से शादी कैसे करूं।

प्रज्ञा : क्यों पापा , मुझ में कोई कमी है क्या ?

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पापा: नहीं बेटी , मगर मेरी शादी पहले ही हो चुकी है ना , तू मेरी गर्ल फ्रैंड बन जा।

प्रज्ञा थोड़ा नाराज़ हो गई : पापा ,मतलब आप मुझ अपनी रखेल बना के रखना चाहते है , दीदी और आपके रिश्ते का नाम रहेगा हमेशा पति पत्नी का , और मेरे और आपके रिश्ते का क्या नाम होगा ? मालिक और रखेल का ?

पापा : प्रज्ञा , ये तू क्या बोल रही है । इतनी छोटी हो के ये सब बात कहा से सिखा ।

प्रज्ञा : पापा ,मै अब कोई बच्ची नहीं हूं, भले मुझे सेक्स की जानकारी जायदा नहीं था इससे पहले , मगर रिश्तों की समझ है पापा मुझ में । बहुत से लड़के , मेरे जैसे लड़कियों को गर्ल फ्रैंड बनाते है , फिर उनका इस्तेमाल कर के रखेल की तरह Use करते है ,फिर चोर देते है ।

पापा : मै ऐसा कुछ नहीं करूंगा बेटी , तू सच में मेरे दिल में है, और तेरी दीदी भी , दोनों को मै बराबर प्यार करता हूं।

प्रज्ञा : तो ,पापा , बराबर हक क्यों नहीं पापा ?

पापा के सोच से ज्यादा मैच्योर थी प्रज्ञा , भले सेक्स की कच्ची खिलाड़ी थी , मतलब अभी तो सेक्स के मैदान में उतरी भी नहीं थी वो।

पापा : तुझे ऐसा लगता है तो ठीक है ,मै कर लूंगा शादी । अभी मगर मुझे तेरी सिल तोड़ने दे।

प्रज्ञा : नहीं पापा , बिल्कुल नहीं , अगर हमें एक होना है तो शादी के बाद ही ।

पापा : ओह , मगर फिर मै सबको कैसे समझाऊंगा , दो शादी , कैसे मैनेज होगा ये ?

प्रज्ञा : पापा मगर उस मौलवी ने भी तो दो नहीं तीन तीन शादी किया हुआ था ना ?

पापा: अरे उसकी अलग बात है , उसके धर्म में ये आम बात है , मगर हमारे धर्म ने ऐसा नहीं होता ना ?

प्रज्ञा : पर आप ही तो कह रहे थे कि पुराने जमाने में हमारे धर्म में भी लोग एक से ज्यादा ही पत्नी रखते थे , और आज भी बहुत सारे ऐसे लोग है, कोई मनाही थोड़ी है ।

पापा : ह्म्म्म...बात तो सही है । चलो अब तुम्हे पाने के लिए मुझ ये भी करना परे तो ठीक है मै राजी हूं। बस मुझ घर पे बताने देना अपने तरीके से । मै पहले प्राची को बताऊंगा अच्छा समय देख के , फिर तेरी दादी को । उनको मानना भी मुश्किल काम होगा । पर तेरी खातिर मै बना ही लूंगा ।

प्रज्ञा पापा से लिपट गई : ओह पापा , आई लव यू ।

पापा: अच्छा बेटी ,मगर अब सच में तू मुझे चुदाई नहीं करने देगी अभी ?

प्रज्ञा : पापा , बोला ना, सुहागरात में ही , मै ये करना चाहती हूं।

पापा: तो इसका क्या करूं, मेरे चड्डी में तो तंबू बना हुआ है ?

प्रज्ञा : मै क्या कर सकती हु इसका पापा ? हाहाहा..

पापा : अब तेरे शरीर की गर्मी पा के ही ये खड़ा हुआ है बेटी , अब तू ही शांत के ।

प्रज्ञा : मै ,कैसे पापा ?

पापा: अच्छा एक काम कर , मेरी चड्डी उतर ले , और मेरे लिंग को पाकर के बस ऊपर नीचे के दे । मज़ा आ जाएगा तेरे कोमल हाथों का स्पर्श से।

प्रज्ञा : पर कैसे पापा ? मुझसे नहीं होगा ।

पापा: अच्छा , तुझे तो मेरा बीज देखना था ना , एक पुरुष का बीज , जिससे तेरी बहन प्रेग्नेंट हुई थी ?

प्रज्ञा : हां पापा ।

पापा: तो मेरे लिंग को ऊपर नीचे के के वही देख ले ।

प्रज्ञा : पर पापा मुझ डर लगता है ।

पापा : मै हूं ना । मै शिखाउंगा तुझे ।

पापा ने खुद से अपना पैंट नीचे कर के खोल लिया । उनका खड़ा लन्ड छिटक के उछलते हुए बाहर आ गया और प्रज्ञा के नजरों में झलकने लगा ।

प्रज्ञा : बापरे ,पापा , इतना बड़ा ?

पापा: ह्म्म्म...बेटी तेरे लिए ही है , मजे लेना इतने बड़े से । अब देर ना के ,थोड़ा ऊपर नीचे के दे अपने कोमल कोमल हाथों से । रहा नहीं जा रहा ।

प्रज्ञा चुपचाप अपने पापा के लिंग पे अपना हाथ फिराई और उनके लिंग के मोटाई को अपने मुठी में कस के महसूस करने लगी । उसका तो मुट्ठी भी ठीक से बंद नहीं हों पा रहा था । पापा का लिंग सच में विशाल था । और ऐसा था भी , एक आप पुरुष के मुकाबले पापा का लिंग काफी बड़ा था , अगर ना होता तो प्राची की वो हालत ना होती उसके सुहागरात वाले दिन ।

पापा प्रज्ञा को बताए जा रहे थे कि कैसे हाथ चलाना है और प्रज्ञा पापा के बताए अनुसार उनके लिंग के चमरी को ऊपर नीचे करने लगी । पापा एकदम मदहोश होंके मजे लेने लगे । प्रज्ञा के लिए ये सब कुछ नया था । पापा का लिंग का सुपारा प्रज्ञा के हर स्टॉक के साथ खुलता और छिपता जा रहा था । सुपारा भी एक बारे आलू जैसा । किसी चुदी चुदाई चुत में जाए तो वो भी महिला छटपटा जाए ,तो ये कुंवारी बहनों का क्या मजाल इस लिंग के सामने ।

प्रज्ञा ने पापा को शांत करने के लिया अपनी जान लगा के उनकी लिंग की मिट्ठी मरती रही । लगभग थोड़े ही देर में छलछला कर पापा के लिंग से एक गढ़ा सफेद पानी उड़ा और कुछ प्रज्ञा के नंगी चुचियो पे उछला , तो कुछ प्रज्ञा के होंठों पे , कुछ पापा के पेट में जा गिरा । प्रज्ञा घबरा गई कि ये अचानक इस बेग से पापा ने पेशाब का एक धार क्यों मारा ।

प्रज्ञा : पापा , छी ,ये क्या किया आपने, पेशाब के दिया मेरे पे ?

पापा: गौर से देख बेटी वो मूत नहीं , वो बीज़ है । शायद अगर तूने अपने चुत में डालने दिया होता तो प्राची की तरह तू भी पेट से हो जाती ।


प्रज्ञा को विश्वास नहीं हो पा रहा था , कि इस पानी के चुत में जाने से ही बच्चा हो जाता है । वो पापा के वीर्य को अपने उनकी में उठा के देखी, गाढ़ा और चिपचिपा पदार्थ। प्रज्ञा को तो उसकी सुगंध भी पसंद आई ।

पापा : बेटी तू चाहे तो ये चाट ले ।

प्रज्ञा अभी नई नई इस खेल में आई थी ,उसने साफ इंकार के दिया । नहीं पापा , मुझे नहीं चाटना ।

पापा : ठीक है फिर वो तौलिए से साफ कर दे , लेकिन एक ना एक दिन तू देखना , तू इससे चाटेगी ही ।

प्रज्ञा शर्मा गई और पापा का वीर्य तौलिए से साफ कर लिया । पापा का मन शांत हो गया । आह मज़ा आ गया ।

मगर पापा को प्रज्ञा को हासिल करने का मलाल रह गया । प्रज्ञा में तो शादी का

प्रस्ताव रख दिया था । और पापा के लिए ये सच में काफी बड़ी बात थी , उनकी पहले से ही एक बीवी है, जो उनकी बड़ी बेटी है , उसको पापा की दुल्हन बनाने में सबकी रज़ा मंदी थी , पर प्रज्ञा के साथ शादी वो भी बिना दादी या प्राची को बताए । कैसे होगा ये ?
Very sexyyyyyyy 🔥 update Sarkar devar ji hi c cc ji 💋💋👌👌👌💦💦💯
 

rockwin

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Update 74:

पापा और प्रज्ञा आपस में ऐसे लिपट चिपट गए थे जैसे बरसों के प्रेमी हो , प्रज्ञा अपना सब कुछ पापा में न्योछावर करना चाहती थी मगर पापा के चड्ढी में बने बड़े से तम्बू को देख के उसका दिल डर और उत्सुकता से भरा हुआ था । पापा अपनी छोटी बेटी का चुचि कैसे पी रहे थे जैसे कोई रसीला आम चूस रहे हो । अज्ञेय बड़ा और आलिशान कमरा प्रज्ञा के चीखो से गुलज़ार हो जाने वाला था । प्रज्ञा का दिल अभी भी दुविधा से भरा हुआ था । मगर उसकी बुर कुछ अलग कहानी बयान कर रही थी । प्रज्ञा की बुर से अब एक गाढ़ा,चिपचिपा पानी निकलने और उसकी पैंटी से रिसने लगा था । पापा आज प्रज्ञा के नवयौवन से भरे चुचि को खा जाना चाहते थे ऐसा प्रतित हो रहा था । पापा बहुत प्यासे जान पर रहे थे ,क्योंकि पापा को अपनी काम अग्नि किसी महिला के चुत में अपने लिंग डाल के शांत किए हुए महीनों बीत गए थे । प्राची को तो उन्होंने प्रेग्नेंट कर दिया था । उसे प्रेग्नेंट क्या किया ,पापा की तो किस्मत ही फूट गई । महीनों से बुर का सेवन नहीं किया उनके लन्ड महोदय ने ।


खैर आज उसकी प्रबल उम्मीद थी वो भी एक कच्ची कली बुर का सेवन। प्रज्ञा ,उनके छोटी बेटी का बुर, जो आज पापा के लिंग के टोपे से खुल जाएगा । प्रज्ञा भावविभोर हो चली थी ।
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छटपटा रही थी । क्योंकि पापा उसकी चुचियो को ऐसे जंगली जानवर के तरह चूस रहे थे जैसे आज के बाद कभी उसे मिलने वाला नहीं। प्रज्ञा बस आंखे बंद किए पापा को पुनः तरीके से अपना यौवन से भरा बदन सौंप चुकी थी, जिसका इस्तमाल पापा बखूबी कर रहे थे ।

पापा का हाथ अब प्रज्ञा को अपने बदन पे हरकते करता महसूस हुआ । पहले चुचि दबाये, फिर पेट से सरकता हुआ नीचे की ओर जाने लगा । प्रज्ञा का दिल इस वक्त जोरो से धड़क उठा : ओह मां, पापा तो....बाप रे , पापा मेरा च...च..चुत पे अपना हाथ ले जा रहे है ? अब मै क्या करूं ? पापा क्या करने वाले है ? क्या पापा मुझे अब पूरी तरह से नंगी करना चाहते है ? मै तो पापा से नज़र भी नहीं मिला सकती ।

पापा तभी बोले परे : प्रज्ञा ।

प्रज्ञा एकदम धीरे से बोली : ह्म्म्म...पापा ।

पापा : बेटी , तेरे ये उजोर तो बहुत मखमली और मुलायम है । चूसने से मन ही नहीं भर रहा ।

प्रज्ञा शरमा गई : ओह पापा... प्लीज ऐसे मत बोलिए ना , मुझे कुछ कुछ होता है ।

पापा : क्या होता है ?

प्रज्ञा : दिल धड़कने लगता है पापा , जोर जोर से ।

पापा: आह बेटी ,तेरी अदा मुझे दीवाना बना रही है । आज मन कर रहा है तुमने अपना बना लू । जैसे तेरे दीदी का सैयाँ बना था वैसे ही तेरा बन जाऊं।

पापा का हाथ अब प्रज्ञा के पैंटी तक पहुँच चुका था और पैंटी का रबड़ हटाने की कोशिश कर रहा था जो कि थोड़ा टाइट प्रज्ञा के कमर में चिपका हुआ था । पापा ने थोड़ा जोर लगा के प्रज्ञा के गुप्त अंग तक अपना उँगली पहुंचा दिया ।

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प्रज्ञा सिहर उठी और उसने खुद पापा के होंठो को अपने होंठों में भर लिया । पापा को ये इतना सेक्सी लगा कि उनके लौरा में एक गजब का टनक आया और लिंग छटका खा गया , जो कि प्रज्ञा के जांघों पे साफ महसूस हुआ । प्रज्ञा पापा के झटके खाते लिंग की कल्पना चड्डी में बने तंबू देख के लगा रही थी । काफी मजबूत और मोटा जान पड़ता था । प्रज्ञा का मन कर रहा था कि वो पापा का लौरा अपने हथेली में कस के एक बार देखे या अनुमान लगाए कि कितना बड़ा या मोटा है। क्योंकि तंबू बहुत विकराल दिख रहा था ।

पापा ने पैंटी के रबड़ से जंग जीत के प्रज्ञा का गीला यौवन को छूने लगे ।


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रस बहुत ज़्यादा मात्रा में निकल रहा था । बहुत चिपचिपा ।
पापा ने महसूस किया कि रस बह बह के प्रज्ञा के झांटो पे फैल गई है और उनकी उंगलियों को प्रज्ञा के झांटो पे लगी रस, किसी गीली मखमली चादर के तरह प्रतीत हो रही थी ।


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पापा : बेटी ,बहुत गीली हो गई हो , मन कर रहा है ?

प्रज्ञा : कैसा मन ?

पापा : कि आज मै तेरा कसैला रस पी जाऊं?

प्रज्ञा : पापा कैसी बात कर रहा है । आप वो रस कैसे पीएंगे ? वो तो गन्दी जगह है ना , जहां से मै पेशाब करती हूं।

पापा : तेरे लिए है वो , मेरे लिए तो ये जन्नत जैसा है , देख बेटी ये तेरा गुप्त अंग सिर्फ पेशाब करने के लिए नहीं बना है । इसमें अथाह सुख बसा है , एक मर्द के लिए भी और खुद तेरे लिए भी । आज मै वो सुख तुझे प्राप्त करूंगा ।

प्रज्ञा शरमा गई : पापा, आप भी ना.... बहोत बदमाश है , मुझे नहीं लगा था कि आप दीदी को छोड़ के मेरे साथ भी ये सब करेंगे ।

पापा : दीदी को छोड़ा कहा है डार्लिंग, उसे मैने अपने बीज से गर्भवती कर दिया है ।

प्रज्ञा : हां पापा , दादी ने बोला था कि अपने प्राची दीदी के गुप्तांग में अपना बीज गिराया है , वो बीज कैसा होता है पापा ?

पापा : आह...तेरे इन नादान बातों में मेरा लौरा इतना करड़ को चुका है कि दर्द कर रहा है । जरूर दिखाऊँगा तुझे बेटी की बीज कैसा होता है । बोल तो तुझे भी दीदी की तरह ही चुत के अंदर महसूस करा दूंगा ।

प्रज्ञा : होओ पापा , कितनी बेशर्मी से भरी बाते करते हो आप।

पापा ने प्रज्ञा को फिर चूम लिया और उंगलियों उस गीले झांटो के बीच चुत के मुहाने और दाने की तलाश करने लगी । कुछ पल में ही पापा की अनुभवी उंगलियों ने प्रज्ञा के चुत के दाने का तलाश उस गीले झाटो के बीच के लिया । पापा के हाथ , प्रज्ञा के दाने पे लगते ही वो सिसकारी मार पड़ी : सीईईई... आह्ह्ह्ह...सीईईई...पापा ।


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और पापा से और का के लिपट गई । पापा को जो ये हनीमून स्वीट होटल वालों ने दिया था , उसका इस्तेमाल शायद उसी के लिए हो रहा था । पापा की शादी तो प्राची से हुई थी पर हनीमून वो प्रज्ञा के साथ मानना चाहते थे आज इस होटल के आलीशान कमरे में ।

पापा ने चुत का पूरा अवलोकन अपने अनुभवी हाथों से करना तय किया और अपना हाथ ,चुत के मुहाने की तलाश में और अच्छी तरह से नीचे की ओर सरका दिया । चप...कि आवाज के साथ पापा की ऊंगली प्रज्ञा के चुत के फांकों के बीच जा फंसा । पापा का उंगली प्रज्ञा के ठीक योनि द्वार पे था । जहां से पापा अपना लन्ड का टोपा प्राची के अंदर दाखिल करने वाले थे ।

पापा : आह एकदम सिल पैक , कसी हुई , चुनमुनिया सी , चुत है तेरी बेटी ।


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प्रज्ञा : पापा...ये क्या कह रहे है , मुझे शरम आती है ।

पापा : अब शर्म आने की कोई गुंजाइश नहीं है मेरी बच्ची। पापा अब तेरा सेवा अच्छे से कर ए वाले है । बोल करवाएगी सेवा ?

प्रज्ञा : कैसा सेवा पापा ?

पापा : अपने कसी हुई बुर का सेवा ?

प्रज्ञा का दिल बहुत जोर जोर से धड़कने लगा पापा की इन शरारती बातों को सुन के ।

प्रज्ञा नखरा दिखाती हुई बोली : नहीं पापा , मुझे नहीं करवानी कोई सेवा बेवा।

पापा: बहुत मज़ा आएगा बेटी ,बहुत मज़ा आएगा तुझे ।

प्रज्ञा : पर पापा सेवा आप करेंगे कैसे ?

पापा: उसका एक स्पेशल तरीका है बेटी । उसकी सेवा का तरीका सिर्फ मेरे पास है। जो अभी मेरे चड्डी में कैद है ।

प्रज्ञा को पापा ने अपने चड्डी पे बने तंबू के तरफ इशारा किया , प्रज्ञा ने देखा और आंखे चुरा लिया पापा से ।

प्रज्ञा : बहुत बड़ा है पापा ।

पापा : क्या मेरी बच्ची ?

प्रज्ञा : आपका ।

पापा : मेरा क्या ?

प्रज्ञा लिंग के तरफ इशारा करते हुए : वो ।

पापा : वो का क्या नाम है ?

प्रज्ञा : अरे पापा , आपको पता तो है , वही ।

पापा : मै उसे तेरे मुंह से सुनना चाहता हूं बेटी ।

प्रज्ञा थोड़ी सकपकाई, फिर धीरे से बोली : आपका..ल..ल..लन्ड ।

पापा को प्रज्ञा के मुंह से लन्ड शब्द सुनके अलग जोश आया और लिंग फिर एक बार झटका खा गया ।

पापा: आह मेरी बच्ची, हां , मेरा लन्ड, बड़ा तो है । और तेरी सेवा अच्छे से करेगा ।

प्रज्ञा : नहीं पापा , मुझे डर लगता है ।

पापा : डर कहे का ।

प्रज्ञा : मेरी वो , उसका छेद ,बहुत छोटा है पापा , मुझे नहीं लगता , आप मेरे उसमें डाल पाएंगे अपना ।

पापा : क्या वो ?

प्रज्ञा शर्माते हुए : ओफो पापा , मेरी चुत में आप अपना लन्ड नहीं डाल पाएंगे । वो बहुत छोटी सी है ।

पापा : तुम टेंशन मत लो बेबी । तेरी दीदी का भी इतना सा ही था , एकदम चुनमुनिया चुत। उसे पहले रात में ही भोसड़ा बना दिया था मैने।

प्रज्ञा : हांह...वो क्या होता है , भोसड़ा ?

पापा : जब चुत में लिंग जाता है और वो खुल जाती है तो बुर से भोसड़ा बन जाती है मेरी बच्ची ।

पापा का उंगली अब अपना काम करने लगा था , पापा प्रज्ञा के चुत पे अच्छे से उंगली फिरा रहे थे , झांटो को मसल रहे थे , चुत के दाने को चुटकी में कसने की भी कोशिश बीच बीच में करते थे ।

प्रज्ञा हल्की आवाज में ही सही , आहे भरने लगी थी ।

पापा चुत मिझने लगे अपने छोटी बेटी का ।

प्रज्ञा : पापा , अपने दीदी के साथ भी ऐसे किया था ?

पापा: हां बेटी किया था , उसको भी ऐसे ही तैयार किया था , गरम किया ,फिर उसका चुत मरा।

प्रज्ञा : क्या चुत पे मरा अपने दीदी के ?

पापा: अरे नहीं , चुत मरा मतलब चोदा, चुदाई को ही बुर मारना या चुत मारना कहते है ।

प्रज्ञा : ओह अच्छा ।

पापा: यही भोलापन तो मुझ पागल बना रही है मेरी बेटी ।

प्रज्ञा : पापा....सीईईई,... आह्ह्ह्ह...पा....सीईईई...पापा , अपने तो दीदी के साथ शादी की थी ना ? फिर किया था ना?

पापा : हां बेटी , उससे क्या करना तो सेम काम है ना , शादी के पहले करो या शादी के बाद ।

प्रज्ञा : पापा मगर मै, आपके और दीदी के शादी के बाद, आपसे बहुत ज्यादा आकर्षित हो गई थी ,मुझे भी आपके साथ वो सब करना था ...सीईईई...जो...जो आपने दीदी के साथ किया , शादी फिर सुहागरात।

ये बीच बीच में प्रज्ञा सिसकारियां मर रही थी , क्योंकि बात करते करते पापा उसका बर रगड़ रहे थे ।

पापा: कुछ फ़र्क नहीं है बेटी , आज तू अपना सुहागरात ही मान के अपना । दीदी के साथ भी तो मै ऐसे ही सुहागरात मनाया था ।

प्रज्ञा अचानक सिसकारी मार के झरने लगी , वो पापा के उंगलियों को ज्यादा देर सह ना पाई और चु गई । उसकी आंखे ऊपर चढ़ गई थी और शरीर अकड़ गया था । पैर की उंगलियां भी तन गई थी । और उसके बुर से फलाफल के पानी बाहर आया थोड़ा सा और पापा के उंगलियों को भींगता हुआ , चादर पे गिर गया और उसमें एक दाग छोड़ता हुआ , चादर में समा गया ।

पापा समझ गए बेटी झर गई है ।

पापा : प्रज्ञा , कैसा लगा ?

प्रज्ञा : बहुत अच्छा पापा ।

पापा : अब बोल , सुहागरात मनाएगी ना ।

प्रज्ञा : नहीं पापा , प्लीज़ मेरी बहुत अरमान है कि मैं अपने पति से ही पहला सेक्स का अनुभव करूं । मुझे असली सुहागरात मनानी है पापा , दीदी के जैसा , ओर आपको ही मुझे पति बनाना है । उसी दिन से मेरे दिल में आप बसे हो , जिसदिन आपको दीदी से शादी हुई थी ।

पापा : ओह , ऐसी बात है क्या ?

प्रज्ञा : हां पापा, प्लीज़ मेरी बात मन सकते है क्या आप ? इतना सा...

पापा: ह्म्म्म...तू मेरी प्यारी बेटी है और मै समझ सकता हूं कि तेरे मन में मुझ सम्पूर्ण रूप से पाने की इच्छा है । मगर मै तो पहले से ही तेरे दीदी के साथ शादी शुदा हु ना । तुझ से शादी कैसे करूं।

प्रज्ञा : क्यों पापा , मुझ में कोई कमी है क्या ?

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पापा: नहीं बेटी , मगर मेरी शादी पहले ही हो चुकी है ना , तू मेरी गर्ल फ्रैंड बन जा।

प्रज्ञा थोड़ा नाराज़ हो गई : पापा ,मतलब आप मुझ अपनी रखेल बना के रखना चाहते है , दीदी और आपके रिश्ते का नाम रहेगा हमेशा पति पत्नी का , और मेरे और आपके रिश्ते का क्या नाम होगा ? मालिक और रखेल का ?

पापा : प्रज्ञा , ये तू क्या बोल रही है । इतनी छोटी हो के ये सब बात कहा से सिखा ।

प्रज्ञा : पापा ,मै अब कोई बच्ची नहीं हूं, भले मुझे सेक्स की जानकारी जायदा नहीं था इससे पहले , मगर रिश्तों की समझ है पापा मुझ में । बहुत से लड़के , मेरे जैसे लड़कियों को गर्ल फ्रैंड बनाते है , फिर उनका इस्तेमाल कर के रखेल की तरह Use करते है ,फिर चोर देते है ।

पापा : मै ऐसा कुछ नहीं करूंगा बेटी , तू सच में मेरे दिल में है, और तेरी दीदी भी , दोनों को मै बराबर प्यार करता हूं।

प्रज्ञा : तो ,पापा , बराबर हक क्यों नहीं पापा ?

पापा के सोच से ज्यादा मैच्योर थी प्रज्ञा , भले सेक्स की कच्ची खिलाड़ी थी , मतलब अभी तो सेक्स के मैदान में उतरी भी नहीं थी वो।

पापा : तुझे ऐसा लगता है तो ठीक है ,मै कर लूंगा शादी । अभी मगर मुझे तेरी सिल तोड़ने दे।

प्रज्ञा : नहीं पापा , बिल्कुल नहीं , अगर हमें एक होना है तो शादी के बाद ही ।

पापा : ओह , मगर फिर मै सबको कैसे समझाऊंगा , दो शादी , कैसे मैनेज होगा ये ?

प्रज्ञा : पापा मगर उस मौलवी ने भी तो दो नहीं तीन तीन शादी किया हुआ था ना ?

पापा: अरे उसकी अलग बात है , उसके धर्म में ये आम बात है , मगर हमारे धर्म ने ऐसा नहीं होता ना ?

प्रज्ञा : पर आप ही तो कह रहे थे कि पुराने जमाने में हमारे धर्म में भी लोग एक से ज्यादा ही पत्नी रखते थे , और आज भी बहुत सारे ऐसे लोग है, कोई मनाही थोड़ी है ।

पापा : ह्म्म्म...बात तो सही है । चलो अब तुम्हे पाने के लिए मुझ ये भी करना परे तो ठीक है मै राजी हूं। बस मुझ घर पे बताने देना अपने तरीके से । मै पहले प्राची को बताऊंगा अच्छा समय देख के , फिर तेरी दादी को । उनको मानना भी मुश्किल काम होगा । पर तेरी खातिर मै बना ही लूंगा ।

प्रज्ञा पापा से लिपट गई : ओह पापा , आई लव यू ।

पापा: अच्छा बेटी ,मगर अब सच में तू मुझे चुदाई नहीं करने देगी अभी ?

प्रज्ञा : पापा , बोला ना, सुहागरात में ही , मै ये करना चाहती हूं।

पापा: तो इसका क्या करूं, मेरे चड्डी में तो तंबू बना हुआ है ?

प्रज्ञा : मै क्या कर सकती हु इसका पापा ? हाहाहा..

पापा : अब तेरे शरीर की गर्मी पा के ही ये खड़ा हुआ है बेटी , अब तू ही शांत के ।

प्रज्ञा : मै ,कैसे पापा ?

पापा: अच्छा एक काम कर , मेरी चड्डी उतर ले , और मेरे लिंग को पाकर के बस ऊपर नीचे के दे । मज़ा आ जाएगा तेरे कोमल हाथों का स्पर्श से।

प्रज्ञा : पर कैसे पापा ? मुझसे नहीं होगा ।

पापा: अच्छा , तुझे तो मेरा बीज देखना था ना , एक पुरुष का बीज , जिससे तेरी बहन प्रेग्नेंट हुई थी ?

प्रज्ञा : हां पापा ।

पापा: तो मेरे लिंग को ऊपर नीचे के के वही देख ले ।

प्रज्ञा : पर पापा मुझ डर लगता है ।

पापा : मै हूं ना । मै शिखाउंगा तुझे ।

पापा ने खुद से अपना पैंट नीचे कर के खोल लिया । उनका खड़ा लन्ड छिटक के उछलते हुए बाहर आ गया और प्रज्ञा के नजरों में झलकने लगा ।

प्रज्ञा : बापरे ,पापा , इतना बड़ा ?

पापा: ह्म्म्म...बेटी तेरे लिए ही है , मजे लेना इतने बड़े से । अब देर ना के ,थोड़ा ऊपर नीचे के दे अपने कोमल कोमल हाथों से । रहा नहीं जा रहा ।

प्रज्ञा चुपचाप अपने पापा के लिंग पे अपना हाथ फिराई और उनके लिंग के मोटाई को अपने मुठी में कस के महसूस करने लगी । उसका तो मुट्ठी भी ठीक से बंद नहीं हों पा रहा था । पापा का लिंग सच में विशाल था । और ऐसा था भी , एक आप पुरुष के मुकाबले पापा का लिंग काफी बड़ा था , अगर ना होता तो प्राची की वो हालत ना होती उसके सुहागरात वाले दिन ।

पापा प्रज्ञा को बताए जा रहे थे कि कैसे हाथ चलाना है और प्रज्ञा पापा के बताए अनुसार उनके लिंग के चमरी को ऊपर नीचे करने लगी । पापा एकदम मदहोश होंके मजे लेने लगे । प्रज्ञा के लिए ये सब कुछ नया था । पापा का लिंग का सुपारा प्रज्ञा के हर स्टॉक के साथ खुलता और छिपता जा रहा था । सुपारा भी एक बारे आलू जैसा । किसी चुदी चुदाई चुत में जाए तो वो भी महिला छटपटा जाए ,तो ये कुंवारी बहनों का क्या मजाल इस लिंग के सामने ।

प्रज्ञा ने पापा को शांत करने के लिया अपनी जान लगा के उनकी लिंग की मिट्ठी मरती रही । लगभग थोड़े ही देर में छलछला कर पापा के लिंग से एक गढ़ा सफेद पानी उड़ा और कुछ प्रज्ञा के नंगी चुचियो पे उछला , तो कुछ प्रज्ञा के होंठों पे , कुछ पापा के पेट में जा गिरा । प्रज्ञा घबरा गई कि ये अचानक इस बेग से पापा ने पेशाब का एक धार क्यों मारा ।

प्रज्ञा : पापा , छी ,ये क्या किया आपने, पेशाब के दिया मेरे पे ?

पापा: गौर से देख बेटी वो मूत नहीं , वो बीज़ है । शायद अगर तूने अपने चुत में डालने दिया होता तो प्राची की तरह तू भी पेट से हो जाती ।


प्रज्ञा को विश्वास नहीं हो पा रहा था , कि इस पानी के चुत में जाने से ही बच्चा हो जाता है । वो पापा के वीर्य को अपने उनकी में उठा के देखी, गाढ़ा और चिपचिपा पदार्थ। प्रज्ञा को तो उसकी सुगंध भी पसंद आई ।

पापा : बेटी तू चाहे तो ये चाट ले ।

प्रज्ञा अभी नई नई इस खेल में आई थी ,उसने साफ इंकार के दिया । नहीं पापा , मुझे नहीं चाटना ।

पापा : ठीक है फिर वो तौलिए से साफ कर दे , लेकिन एक ना एक दिन तू देखना , तू इससे चाटेगी ही ।

प्रज्ञा शर्मा गई और पापा का वीर्य तौलिए से साफ कर लिया । पापा का मन शांत हो गया । आह मज़ा आ गया ।

मगर पापा को प्रज्ञा को हासिल करने का मलाल रह गया । प्रज्ञा में तो शादी का

प्रस्ताव रख दिया था । और पापा के लिए ये सच में काफी बड़ी बात थी , उनकी पहले से ही एक बीवी है, जो उनकी बड़ी बेटी है , उसको पापा की दुल्हन बनाने में सबकी रज़ा मंदी थी , पर प्रज्ञा के साथ शादी वो भी बिना दादी या प्राची को बताए । कैसे होगा ये ?
Bahut atcha laga...
 

Pratik maurya

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अब ये शादी कब होगी अरे पहले सुहागरात मना लो फिर करती रहना शादी फुर्सत से
 
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