nice update.. लगता है कि प्राची ने पापा की मंशा को भांप लिया हैUpdate: 56 (संयम का बांध टूटा: भाग-२)
पापा: सच में बेटी , तुझे ये नहीं लगता ना कि मैने तेरे साथ कोई गलत काम किया है , तुझे प्रेग्नेंट कर के ।
प्राची : बिल्कुल नहीं पापा। मुझे ऐसा कुछ नहीं लग रहा । मुझे तो आपके दिए हुए , ये मेरे कोख में आपके प्यार की निशानी जैसा लग रहा है।
पापा का दिल प्रज्ञा ने इन मैच्योर बातों से जीत लिया था । पापा ने प्रज्ञा को अपने बांहो में लपेट लिया और सर पे एक हल्की सी चुम्बन कर दिया । प्राची भी पापा के आलिंगन पा के पिघल सी गई । पापा और प्राची एक दूसरे से ऐसे ही गले लग के , आपस में बदन से बदन चिपकाये परे रहे । मगर ये आलिंगन उन दोनों को सुकून से ज़्यादा उनके अंदर की कामाग्नि को भड़कता जा रहा था। दोनों ने ही अंतिम मिलन लगभग १ महीना पहले किया था , और दोनों प्यासे थे । पापा की तो प्राची एक तरह से हर रात की जरूरत ही बन चुकी थी। अब ये दूरी उनसे बर्दाश्त नहीं हो पा रही थी । पापा को प्राची के बदन का छुअन मात्र से ही लिंग में गर्मी आने लगी थी । प्राची को भी पापा का मोटा लौरा जगता हुआ प्रतीत हो गया था और उसे महसूस हो गया था । वो इस बात से भी अनजान नहीं थी कि पापा कितने सेक्स को चाहने वाले इंसान है। पापा की तड़प का अंदेशा प्राची को ही गया था ।
उधर प्राची को भी , उसके योनि को आग तड़पाए जा रही थी । उसकी हालत तो ये हो गई थी कि वो किसी दूसरे इंसान के हाथ जांघो पे रगड़ लगते ही चु जाती थी, भले ही उसकी योनि पे छूअन हुआ भी ना हो। ऐसे ही वो प्रज्ञा के मालिश करते समय चू गई थी।
कुल मिला के आग दिनों तरफ जबरदस्त लगी हुई थी। पापा का लौड़ा बिकराल रूप ले चुका था और उनके पैजामे में एक नुकीला तब्बू सा बना गया था । वो तब्बू, प्राची के पेट पे सट रहा था , जिसे प्राची की आग भड़कती जा रही थी । पापा बिना कुछ बोले , आंखों को बंद किए हुए प्राची को आलिंगन में ले के लेते हुए थे । प्राची भी पापा की ओर देखना नहीं जाह रही थी । अगर उसकी आंखें अभी पापा से मिल जाती तो उसे अपने आप को रोक पाना बहुत ही मुश्किल हो जाता । पापा का हाथ प्राची के नंगे पीठ पे हल्का हल्का हरकत कर रहा था और पापा प्राची का पीट सहलाते जा रहे थे ।
पापा जानते थे कि प्राची की अभी वो चोद नहीं सकते , वो बेचारी प्रेग्नेंट है और डॉक्टर ओर माँ दोनों ने ही उनको मना कर रखा है , कि प्राची के साथ किसी रूप का(धीरे या तेज़) चुदाई से । हालांकि डॉक्टर सुषमा ने ये जरूर कहा था कि अगर संयम बना के धीरे धीरे शॉर्ट लगा के चोदना चाहे तो पापा प्राची को २महीने तक चोद सकते है पर उसके बाद नहीं। पर ये तो दादी ने ही एकदम करे नियम बना दिए थे । अब एक स्त्री ही तो स्त्री की समस्याएं जान पाएगी । दादी को पता था कि कम उमर में प्राची का यूँ माँ बन जाना और 9 महीने के सफ़र के बाद बच्चे को जन्म देना आसान बात नहीं है ।
खैर अभी पापा और प्राची के बेडरूम का माहौल ही कुछ अलग सा था । पापा ने अपने आप को पूरा कंट्रोल करने की कोशिश कर रखी थी , मगर काम वासना ऐसी चीज है कि जिसको आप जितना दबाते है , वो इक्छा उतना ही तीव्र होता जाता है । पापा और प्राची के साथ भी यही हो रहा था । दोनों धर्म संकट में परे थे । चिंगारी बढ़ती ही जा रही थी , और उस शांत अंधेरे बंद कमरे में किसी भी वक़्त आग लगने की संभावना थी । उस कमरे में खिड़की से छन के चाँद की लाली आ रही थी और वो कमरा चांदनी रौशनी से हल्का रोशन हो गया था । प्राची के बदन भी नंगा था क्योंकि वो पापा से मालिश कर रही थी , वही पापा का बदन पे बस एक पैजामा ही था । ऊपर का बदन उनका भी खुला हुआ था और प्राची के बदन से चिपका हुआ था । प्राची की चूची पापा के सीने में धस सी गई थी । कामाग्नि के कारण , चूची भी टाइट हो गई थी और प्राची के चूचक तन के खड़े हो चुके थे । माहौल पूरा मादकता से भर चुका था पर विडंबना यही कि आग बुझाने का पानी निकालना उन दोनों को निषेध था । इस आग को बुझाने का तो एक ही उपाय था ,की पापा अपनी पानी के पाइप का नोजल, प्राची के जलती छेद में घुसाए और पानी का फ़व्वारा उस छेद में मारा जाए । पापा का लौड़ा अब इतना कड़क हो चुका था कि उन्हें हल्का सा दर्द महसूस हो रहा था । पापा का सुपारा फुल के किसी आलू के तरह गोल हो गया था ।
पापा से अब रहा नहीं जा रहा था । प्राची को ये महसूस होता जा रहा था । उधर उसका भी हाल खराब था । पापा का यूँ खड़ा ही जाना उसके दिल के अरमान भी भरका रहे थे । वो क्या करे ? उसके दिल में एक द्वंद्व जैसा चल रहा था । क्या वो पापा के साथ आज रात सारे नियम भूल के ,एक बार ,बस एक बार मिलन कर ले , अच्छे से संभोग कर ले ? या डॉक्टर ओर दादी की बात का मान रखे ? क्या करे वो इस हवस के प्यास का ? कैसी हालात हो गई है उसकी ? पति बगल में सेक्स के लिए तड़प रहा है और वो अपना चुत अपने पति की लिंग सेवा के लिए नहीं परोस पा रही।
पापा को अब दर्द होता जा रहा था । इतना जोश आ गया था उनके लिंग में की वो सह नहीं पा रहे थे
उन्होंने प्राची से पूछ ही लिया: अरे मेरी रानी , देखों ना , तुझे गले लगाने से ये क्या हो गया है इसे । इतना कड़ा हो गया है कि मुझे अब दर्द होने लगा है बेटी । मै क्या करूं मुझे समझ नहीं आ रहा है ?
पापा की इस लाचारी को देख के प्राची का दिल भी पिघल सा गया । उसका पति तड़प रहा है और वो अभागन अपने पति के लिंग की सेवा कर के उस को राहत भी नहीं दे पा रही है ।
प्राची : पापा ,इतना दुख रहा है क्या ? आप तो जानते है , अभी तो मैं किसी प्रकार से चाह के भी आपको संतुष्ट नहीं कर पाऊंगी , भले उसे चूस के थोड़ी राहत जरूर दे सकती हूं पापा। मुझे माफ करियेगा।
पापा : हां बेटी , मै भी अभी तुम्हारे अंदर घुसने का सोच भी नहीं सकता । मगर ये दर्द है कि क्या बोलूं , ऐसा लग रहा है कि मेरी सारी लिंग की नसे फटे जा रही है। शायद मुझे तेरे बदन में इतना सट के नहीं सोना चाहिए । इसी कारण से मेरा अंदर ये लावा फूट पर है ।
पापा ने प्राची को अपने आलिंगन से आजाद के दिया और अपना पजामा नीचे कर के अपने लिंग को थोड़ा सुकून देने के लिए अपने मुठी में भर लिया ।
पापा की बिरह में ये हालत प्राची से देखी नहीं जा रही थी ।
प्राची : पापा, मुझे माफ कर दीजिए । मेरी भी हालत कुछ ऐसी ही है पापा , पता है , एक दिन तो मै प्रज्ञा के सामने ही अपने कामाग्नि पे काबू नहीं कर पाई।
पापा: मतलब बेटी ?
प्राची : अरे पापा, एक दिन प्रज्ञा जब मेरी मालिश कर रही थी , तो बिना योनि में कुछ गए और बिना योनि रगड़े ही मै हिचकोले खा के उसके सामने ही झड़ गई थी । उसके हाथ जब मेरी जांघो को मसल रहे थे तो मुझे इतना जोश आया , ओर आपकी याद इतना ज़ोर से मुझ आई कि मै चू गई पापा। शायद उसने मेरी पैंटी से रिश रहे चुत रस को भी देख लिया होगा । मै तो इतना शर्मिंदा हुई कि मुझे उससे आँख भी मिलने की हिम्मत हुई , इसलिए मैने सोने का नाटक किया , उसके बाद वो चली गई ।
पापा इस बात से चकित हो गए ।
पापा: ओह मेरी रानी , मेरी साली का हाथ इतना नरम है क्या ? जो तुम अपने आप पे काबू नहीं कर पाई ।
प्राची : हां पापा , पता नहीं ऐसा गलती मुझ से कैसे हो गया । उसमें प्रज्ञा की कोई गलती नहीं है । मगर उसका हाथ ने ही तो सारा शरारत किया था मेरी जांघों पे ।
इन बातो का असर उल्टा और पापा के जोश को भड़का दिया था । वो इस जोस में एक गलती कर बैठे।
पापा : सच में क्या ? मेरी साली का हाथ इतना कमाल का है क्या ? काश उसका हाथ अभी मेरे लिंग की मालिश कर देता, तो सारा दर्द , गाढ़ा सफेद पानी बन के बह जाता ।
प्राची को पापा की ये बात बिलकुल भी अच्छी नहीं लगी : पापा , ये आप क्या कह रहे है ? प्रज्ञा हमारी छोटी बेटी है । उसके लिए आप ऐसे बोल रहे है? साली जरूर लगती है रिश्ते में आपकी ,मगर आप ये क्यों भूल गए कि वो आपकी बेटी है। मै तो आपसे ब्याह कर के पत्नी बनी ,तब तो हमारा रिश्ता ऐसा बन पे , मगर आप उसके लिए ऐसा बोल रहे है , जब वो आपकी बेटी के रिश्ते में है?
पापा को तुरंत अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्हें थोड़ी शर्मिंदगी भी हुई, कि प्राची उनके, प्रज्ञा को ले के, किस तरह के विचार है, उसे भाप गई और उसे बिलकुल भी ये बात अच्छी नहीं लगी । मुझे प्रज्ञा के बारे में ऐसी बात नहीं करनी चाहिए थी । मगर इस मादक जोश से भरे माहौल में प्राची ने ही तो प्रज्ञा की बात छेड़ी थी। वो प्रज्ञा के बारे में बात करे तो ठीक मै करूं तो बुरा बन गया । पापा को थोड़ा गुस्सा भी आया । मगर गलती तो हो गई थी । उनके बदलते विचार , उनका ध्यान वासना से अब थोड़ा भटक गया ,मगर ये उनके दर्द के लिए कारगर साबित हुआ और पापा का लिंग थोड़ा ढीला हुआ ।
पापा: अरे मेरा ये मतलब नहीं था बाबू। वो तो सच में मेरी बेटी ही है । और मैं मानता भी ही उसे अपनी बेटी ही । इसी लिए तो मैं साली वाले जायदा मजाक भी उसके साथ नहीं करता। ओर तुम तो जानती हो न मुझे अच्छे से , मै तुमसे ही प्यार करता हु। क्या आज तक तुमने मुझे इस नज़र से प्रज्ञा को देखते हुए भी देखा है? वो तो तुमने ही प्रज्ञा का बात बीच में लाया , और मादकता से भरे दिमाग से मेरे मुंह से ऐसे शब्द निकल गए उसके लिए । मुझे माफ कर दो ।
पापा को जोश अभी थोड़ा ठंडा होने हो लगा था। मगर प्राची का जोश, अपने पापा के मुंह से प्यार का इजहार सुन के दुगना हो गया ।
प्राची : मुझे लगा पापा, की आप प्रज्ञा के बारे में ऐसा तो नहीं बोल सकते । मगर मुझे विश्वास है पापा की आप मेरे से ही प्यार करते है ।
इतना कहते ही प्राची ज़बरदस चुंबन पापा के होंठों पे चस्पा कर दी । पापा का ठंडा परता जोश एकदम से फिर से भड़क गया । प्राची फिर उनके आलिंगन में आ गई थी । और पापा ने भी इसबार अपने आप को रोकने का कोई कोशिश नहीं किया ।वो प्राची को होंठो को चूसने लगे । उन दोनों के चुम्बन के आवाज से कमरा गुलज़ार होने लगा । ऊम्म्ह... चुप्प...ऊम्म्ह...कि आवाज , एक पति पत्नी के बीच का मिलन का आदेश दे रहा था। और इस बार पहल भी प्राची ने की थी । एक मादा जब अपने जोश पे काबू नहीं कर पाती तो उसे जो चाहिए होता है वो ले ही लेती है । जाहे आप उसपे कितनी भी पाबंदी लगा दो । प्राची आज उसी विचार में थी । वो भूल गई कि डॉक्टर ने क्या कहा था , दादी ने क्या कहा था । अब उसकी काम सहन क्षमता खत्म हो चुकी थी । आज वो अपने पापा के लिए तरप उठी थी ।
पापा भी अब उन नियमों को भूल गए थे और प्राची को चूसते और चाटते जा रहे थे । लग रहा था आज उनके संयम का बांध टूटने वाला था।
प्राची पापा से अब अलग नहीं होना चाहती थी । लगभग महीने दिन से वो पापा से अलग रह रह के परेशान हो गई थी और अब ओर नहीं सह सकती थी । पापा ने अचानक ही प्राची के चूची को अपने हाथों से भींचना शुरू कर दिया और उसे मसलना और चाटना भी चालू कर दिया । क्या दृश्य था ये । जोश में होश खाना इसी को कहते है । प्राची का पापा पूरा इस्तेमाल कर रहे थे । मगर थोड़ा ये भी देख रहे ये की प्राची के पेट या गर्व पे वो ज़्यादा जोर न आजमाये या उसपे ज्यादा भार ना दे । पापा को तो इसका अनुभव था । प्राची के जनम के समय तो वो डरे हुए थे और प्राची के मां के साथ पूरा संयम बरता था । मगर जब प्रज्ञा, प्राची के मम्मी के पेट में थी , तब उन्होंने कितनी बार ही प्राची के मां को चोदा था । वो जानते थे कि एक चुदाई ,नियम को तोड़ के , कोई हानि नहीं करेगा ।
प्राची और पापा एक उसे में समा जाना चाहते थे । इतना जोश की कमरे की गर्मी बढ़ चुकी थी । प्राची के बदन पसीने से तर हो गया था । ओर चांद की रोशनी से चमकने लग गया था । पापा भी पसीने से लथ पथ होने लगे थे। उनके अंदर आज आग ही इतनी तेज़ भड़की हुई थी ।
पापा प्राची को ऊपर से नीचे तक चूसते - चाटते जा रहे थे । प्राची का नग्न शरीर अपने पापा की सेवा में बिछ चुका था ।
पापा ने प्राची की चूत चूसाई की और फिर पोजीशन बना के अपना लिंग प्राची के योनि द्वार पे टिका दिया । प्राची अपने जोश से भरे पापा को बड़े गौर से प्यार भरी नजरों से देखी जा रही थी । मगर चुप थी । जैसे की सवाल पूछ रही हो ।
पापा ने लिंग अंदर डालने से पहले प्राची के तरफ देखा , और प्राची का यूँ एक टक से उनको देखना , देख के वो भाप गए कि प्राची के मन में कुछ सवाल है ।
पापा : बेटी , क्या हुआ ? ठीक नहीं लग रहा ?
प्राची : नहीं पापा , मै बस आपको देख रही हूँ।
पापा: हाँ, मगर ये नज़र मुझसे कुछ सवाल के जवाब चाह रहे है , है ना? देख बेटी तू कहती है तो मैं नहीं करता हूं।
प्राची : नहीं पापा। आज मत रुकिए , मुझे तो बस आप पे इतना प्यार आ रहा है आज , की आप का यूँ,नियम तोड़ के भी मुझे प्यार करना, मेरे मन को बहुत भा रहा है पापा। आज मुझे आपकी बहुत जरूरत है पापा। मै बहुत प्यासी हूं।
पापा: मैं भी तो कब से प्यासा ही हु बेटी । मगर क्या ये करना ठीक होगा ? तू प्रेग्नेंट है बाबू, और दादी और डॉक्टर ने मना किया है ना चुदाई से ? ये मै कैसे करूं मुझे समझ नहीं आ रहा है ? मन कर रहा है ,तुम्हे खूब प्यार करूं , तेरी अच्छी चुदाई करूँ , मगर दिमाग कह रहा कि मत कर ऐसा ।
पापा धर्म संकट में पर गए , और पापा ने जो प्राची के चुत चुदाई के लिए पोजीशन बनाई थी , वहाँ से वो हट गए ।
प्राची ने पापा को कस के अपने बांहो में भर लिया : नहीं पापा, मुझे आज मत तड़पाए । मै सह नहीं पाऊंगी , मै चाहती हु आज आप मेरी चुदाई कीजिये ना , प्लीज पापा, मै मर जाऊंगी नहीं तो ।
पापा: पर बेटी , डॉक्टर ने हमे परहेज करने हो बोला था ना?
प्राची : पर उन्होंने तो ये भी कहा था कि २ महीने तक तो के सकते है ना ये आराम आराम से उसके बाद ही तो पेट भी निकलने की बात बताई थी उन्होंने ।
प्राची पापा को धर्म संकट से निकलने की पूरी कोशिश कर रही थी ।
प्राची : प्लीज, प्लीज़ ,प्लीज़ ना पापा, आज करिये ना । मुझे रहा नहीं जाएगा आज ।
प्राची पापा से चुदाई की भीख माँग थी थी । बहुत ज़्यादा तरप रही थी वो एक संभोग के लिए । कहते है स्त्री का जोश मर्दो से कही ज्यादा प्रबल होता है । वही प्राची का भी हाल हो गया था । बेटी की ऐसे , चुदाई की गुहार लगाने के बाद , पापा कैसे न चोदते उसे ? कैसे वो अपनी फुल से प्यारी बेटी को तड़पते छोड़ देते ? यहाँ तक ऋषि मुनि भी , किसी स्त्री की गुहार पे अपना ब्रह्मचर्य तोड़ देते है , फिर पापा तो बस एक मामूली पुरुष है , जो अपनी बेटी को प्यास और तड़पता नहीं छोड़ सकता।
पापा ने भी वही किया : ठीक है मेरी बच्ची, आ तुझे आज जन्नत का सैर करा दूं। वादा करता हु कि ,तुझे आज मै, एकदम आराम आराम से चोदूंगा।
प्राची ने अपने टांगें पापा के सामने फैला दी : ठीक है पापा, आइये ना , घुसा दीजिए , अपना मोटा लौरा , कब से तरफ रही ही मै।
उसका चुत एकदम पनियाया हुआ था । योनि द्वार से चिपचिपा पानी बह रहा था । चूचे तन तन के एकदम कड़े और गोल गोल हो गए थे , चूची का गुड़ी भी एकदम कड़क हो गया था । पापा अब इंतेज़ार नहीं करना चाहते थे । उनका सब्र का बांध अब टूट चुका था । उन्होंने देर ना करते हुए ,प्राची के चुत पे पोजीशन बनाई और एक झटके में आधा लिंग चुत में उतार दिया । उनके योनि में प्रवेश करते ही , वो गिली योनि की , फच्च..... की आवाज कमरे में गूंज गई । प्राची को एक टीस सी उठी और उसके मुंह से एक आह..... की कराहती हुई आवाज भी कमरे को अशांत कर गई।
पापा ने झुक के प्राची की एक चूची को अपने मुंह में भर के चूसने लगे और दूसरे चूची को अपने हाथों से मसलने लगे । प्राची नीचे पड़ी छटपटा रही थी । पापा ने फिर से एक धीमा सा धक्का मारा और पूरा लन्ड अंदर । पापा ने प्राची की माँ को प्रेग्नेंट होने के बाद भी चुदाई की थी , तो इस कारण से उन्हें एक प्रेग्नेंट लड़की को चोदने का अनुभव था । वो जानते थे कि प्राची की चुदाई वो कैसा करेंगे कि प्राची कोर्फोटेबल रहेगी ।
प्राची का शरीर थोड़ा ढीला पर गया , पापा का मोटा लौरा उसके अंदर समाते ही । उसके योनि के दीवाल पे पापा की लन्ड के रगड़ से उसे थोड़ी राहत तो मिली थी । उसका योनि तो ऐसा महसूस हो रहा था , जैसे जल रहा हो , एकदम गरम , और गर्मी के साथ नमी भी पर्याप्त। इस नरम , गरम और गीलापन से पापा का लौरा मोटा होता हुआ भी अपने बेटी का योनि अच्छे से भेद पा रहा था ।
दोनों की चुदाई चालू हो गई । प्राची के मुंह से आह आह... लगातार निकलता जा रहा था। प्रैग्नेंट होने के बाद उसकी ये पहली चुदाई थी । और पापा का हर स्ट्रोक उसे स्वर्ग सा मजा दे रहा था । चुदाई लगभग ३० मिनट तक चलती ही जा रही थी । पापा आज इतने ज्यादा जोश में थे कि झड़ ही नहीं रहे थे । मगर प्राची खुल के अपने अरमान पूरी कर रही थी , और वो ३ बार , हिचकोले खाते हुए झर चुकी थी ।
पापा ने चुदाई जारी रखी हुई थी । आज कोई जल्दी नहीं थी , कोई रगड़ के चोदने की बात नहीं थी , एकदम मध्यम गति से , आराम आराम से , बिना पेट पे बल दिये , पापा प्राची का योनि भोग रहे थे । ऐसा लग रहा था , ये चुदाई आज उन दोनों के लिए बहुत ही आवश्यक था ।
प्राची की धीमी धीमी सिसकारी कमरे में लगातार गूंजे जा रही थी । दोनों हाफ रहे थे । पापा की सांसों की धुन प्राची के सांसों की सरगम से मिल रही थी। माहौल बड़ा ही मादक था । पापा को आज कोई जल्दी नहीं थी । अगले 15 मिनट तक पापा प्राची की ऐसी ही चुदाई करते रहे । उनको अब लगने लगा था कि उनका चरम उद्वेग आने ही वाला है ।
पापा आज प्राची के योनि में अपना पानी नहीं देने वाले थे । उन्होंने एकदम से लिंग को योनि से बाहर निकल लिया और झटके से प्राची के मुंह के सामने आ के बैठ गए । प्राची को जैसे एकदम पता हो कि पापा क्या कहने वाले है , उसने समय नहीं गंवाते हुए इनका लौड़ा अपने मुंह में भर लिया और उसकी चमड़ी हो अपने होंठों से आगे पीछे करने लगी । वो अपना जीभ पापा के बड़े सुपारे पे भी फिरा रही थी । पापा से अब रहा नहीं गया और सारा माल , प्राची के मुंह में ही छोड़ दिया । प्राची ने पापा के लन्ड का सारा पानी, एक घुट में घटक गई ।
आज प्रेगनेंट होने के बाद ये प्राची की पहली चुदाई थी । और वो बहुत ही मजेदार था । पापा चरम सुख पाते ही निढ़ाल हो के प्राची के बगल में बेड पे पड़ गए । प्राची भी पापा के सीने पे अपना सर रख के उनके दिल की तेज़ धड़कन सुनने लगी । प्राची को आज पापा पे बहुत प्यार आ था थे । वो पापा को अपना पति बना के बहुत खुश थी । आज सारे नियम कानून तोड़ के जो उसने पापा की चुदाई की थी । उसे उससे बहुत खुशी हो रही थी ।
दोनों एकदूसरे से लिपटे हुए , थोड़ी देर में ही सो गए । और तब जा के कमरे में आया तूफान अब शांत हो गया ।

। प्लीज़ प्रज्ञा और पापा के सीक्रेट अफ़ेयर के बारे में लिखें—कि कैसे पापा प्रज्ञा को अपनी गर्लफ्रेंड बनाते हैं, वे मज़ा करते हैं और दादी व प्राची से छिपकर सेक्स करते हैं।