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rockwin

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Update 59 : ( हृदय छलनी)

एक नया सुबह हो चुका था और दादी आँख खुला , उन्हें रात का सारा दृश्य याद था । इतना सब होने के बाद भी पापा ने अपने सफाई में ज्यादा कुछ कहा नहीं था । खैर प्राची सुरक्षित थी । उसका बच्चा सुरक्षित था। प्राची का गर्भ में अभी भी उसके पापा का बीज पनप रहा था । मगर अगर प्राची या पापा का कदम आगे से थोड़ा भी बहका , तो अंजाम अलग हो सकता था ।
तो इसे रोकने के लिए दादी को अपने परिवार और बच्चों पे कमांड करना बहुत जरूरी था । वो इतना जरूर जानती थी कि उनका बेटा उनकी बात का अभेलना ऐसे ही नहीं कर सकता । जरूर प्राची का सह होगा इस बात के लिए । दादी अपने आप को भी कोश रही थी । काश वो पहले ही पापा को प्राची से अलग कमरे में सुलाती , तो आज ये दिन न देखना पड़ता। अगर पॉजिटिव और नेगेटिव चार्ज को एकसाथ रखेंगे तो शॉर्ट सर्किट तो होगा ही। आग के पास घी रखेंगे तो आग तो लगेगा ही । पापा और प्राची को एक साथ छोड़ देना का मतलब दोनों को अपने पे कंट्रोल करना थोड़ा मुश्किल जरूर होगा ।दादी इन सब बातों को सोची जा रही थी । ऊपर से कल संयम का बांध भी तोड़ दिया इन लोगों ने । पापा नहीं मेरे कहने से ये लोग एक वो दिन माने या नहीं । या हर दिन चोदमपटी मचा ही रहे थे । दादी अपने बेटे से नाखुश थी । प्राची तो न समझ है । वो तो २ बच्चों का बाप पहले भी बना था । उसे तो पता होना चाहिए । क्या पता बहु को भी ना छोड़ा हो , जब प्राची ओर प्रज्ञा उसके पेट में थे । दादी को पापा पे गुस्सा आ रहा था ।

उधर प्रज्ञा अपने रूम में जग गई थी और रात दीदी के साथ हुए दृश्य को याद कर रही थी । उसे भी अपने पापा पे गुस्सा आ रहा था । वो सोच रही थी : हे भगवान, पापा कितने ठरकी इंसान है । दादी और डॉक्टर के मना करने पर भी दीदी को नहीं छोड़ रहे है। कितना गलत है ये , उनका बच्चा दीदी के कोख में पल रहा है, क्या उसका भी खयाल पापा को नहीं आया ।

कुल मिला के सबने दोषी पापा को ही मान लिया था । पापा बहुत शर्मिंदा थे । प्राची रात के दवा के असर के कारण अभी भी सो रही थी और किसी ने भी उसे उठाने की कोशिश नहीं की । पापा को ऑफ़िस जाना था इसलिए दादी ने उनके लिए ब्रेकफास्ट बनाने के लिए फ्रेश होके किचेन में चली गई । पापा भी आज चाह रहे थे , की जितनी जल्दी हो वो आज घर से निकल जाए । क्योंकि ये बात तो तय है कि घर का माहौल सही नहीं है अभी ।

दादी ने पापा का नाश्ता जल्दी ही लगा दिया । पापा भी फ्रेश हो के चुपचाप बैठ के नाश्ता करने लगे ।

दादी : बेटा , नाश्ता कैसा बना है ।

पापा: अच्छा है मां।

दादी : ह्म्म्म....मुझे तुमसे रात के बारे में कुछ बात करनी है ।

पापा: बोलिये माँ।

दादी : तूने मेरा भरोसा क्यों तोड़ दिया ? प्राची के साथ संयम कैसे नहीं बना पाए ? प्राची तेरी बेटी है , पहली बार पेट से हुई है , उसे भोगते हुए तुझे शरम नहीं आई एक बार भी , तब जब डॉक्टर ओर मैने , दोनों ने तुम्हे मन किया था ? रात को ऐसा क्या हुआ कि तू प्राची के साथ इस तरह से सेक्स किये की उसकी ये हालत हो गई ? डॉक्टर ने क्या बोला ? क्यों हुआ ऐसा प्राची के साथ ?

दादी ने एक साथ इतने सवाल के दिए कि पापा जवाब देते देते थक जाते ।

पापा: माँ, मै आपकी गुस्से को अच्छे से समझ रहा हु । मुझ से गलती हुई है और मैं जायदा सफाई नहीं देना चाहता अभी । प्राची से मैं बहुत प्यार करता हु और कभी भी उसको चोट पहुंचने का इरादा नहीं था मेरा । मैने संयम रखने के पूरी कोशिश की थी मगर हालत और परिस्थिति इंशान की कमजोर बना देते है । ये सब क्यों हुआ , कैसे हुआ और कब शुरू हुआ , इसका जवाब अभी मै आपको नहीं देना चाहता । डॉक्टर ने बस प्राची का ध्यान रखने को बोला है। प्राची और बच्चा बिल्कुल ठीक है और आप लोगों को टेंशन लेने की कोई जरूरत नहीं है , प्राची का बस ख्याल रखिए अच्छे से , और मै वो वादा करता हु कि आज से प्राची के साथ हमबिस्तरी नहीं करूंगा । बस इससे ज्यादा मै आपको कुछ नहीं कह सकता मां ।

दादी पापा से जवाब चाहती थी और पापा ने सारे बातो को गोल मोल कर जवाब दिया जो दादी को पसंद नहीं आया। पास बैठी प्रज्ञा भी ये सारी बातें सुन रही थी ।

दादी : अब क्या , अब क्या बोल रहा कि हमबिस्तरी भी करेगा । अब तो प्राची के साथ जो होना था वो तो तूने कर दिया । क्या इस दिन के लिए मैने तेरी शादी प्राची से कराई थी ? माना वो तेरी पत्नी है , मगर इसका मतलब जब जाहे उसके साथ संभोग कर लो ? ऐसा थोड़ी होता है ? क्या स्त्री सिर्फ संभोग करने के लिए होती है और मर्द बस अपना हवस मिटाने के लिए ? कितना हवस था तेरे अंदर की अपनी प्रेग्नेंट बीवी जो तेरी बेटी है उसे भी नहीं छोड़ रहे ? इतना अगर तेरे अंदर हवस है तब तो तू मुझे और प्रज्ञा को भी दबोच के अपनी हवस का प्यास मिटा लेगा ? है ना?

दादी ने गुस्से ने इतनी गलत बात पापा के साथ कर दी थी । उधर पास ही बैठी प्रज्ञा को भी दादी का गुस्सा, कुछ जायदा हो गया , ऐसा लग रहा था । प्रज्ञा को दादी का यू पापा को डांटना अच्छा नहीं लगा । ऊपर से दादी ने पापा को ये बोलना कि पापा मौका मिला तो पापा प्रज्ञा को भी दबोच लेंगे , प्रज्ञा का दिल धड़का गया ।

दादी के ये कटाक्ष सुन के पापा के आंखों से हल्का आंसू सा निकल गया । दादी ने पापा के आंशू देख के अपनी गलती का एहसास हुआ कि उन्होंने कुछ ज्यादा ही बोल दिया । मगर अब तो जो कहना था वो तो कह चुकी । तीर कमान से निकल चुका था और एक बार जो तीर सीने पे चल गई तो वो वापस नहीं आती । पापा ने उदास हो के अपनी थाली सरका दिया और खाना छोड़ के उठ गए । उनका दिल दादी की बातों ने छलनी कर दिया था ।

प्रज्ञा पापा को दोषी तो मान रही थी मगर, दादी का इस तरह का, पापा के साथ बर्ताव, की उम्मीद उसे नहीं थी ।

पापा चुप चाप हाथ धोया , अपने कमरे में गए और अपना बैग लेके घर से बाहर निकल गए । उन्होंने गाड़ी चालू किया और ऑफ़िस के लिए निकल गए ।
भाई बहुत ही सुंदर अपडेट है। एक अनुरोध है, कृपया अपडेट थोड़ा लंबा दीजिए... मूड आने से पहले ही खत्म हो गया, लव यू
 
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sexsarkar

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Apke suggestion ke liye dhyanwaad , maine bhi khahani ki usi disha me morne ka man banaya hai.
बहुत सही ढंग से कहानी आगे बढ़ रही है।कुछ सुझाव भेजे थे tgm पे गौर करियेगा
 

sexsarkar

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Apka bhaut bahut dhanyawad...ab aage is kahani me pragya main character ke roop me ubhar ke aaygi or papa ka sahara banegi. Apka suggestion bahut accha or kahani ko kuch aisa hi roop Dene ka kosis hoga aage. ♥️
यही वह क्षण होगा जब प्रज्ञा पहली बार अपने पिता के दर्द को अपना दर्द समझकर उसके बोझ में शामिल होगी और फिर धीरे-धीरे वह एक ऐसे अनैतिक और कामुक रिश्ते की दलदल में धंसती चली जाएगी, जिसके बारे में न उसकी दादी को कोई आभास होगा और न ही उसकी बड़ी बहन को। यह भयावह सच तब तक पर्दे के पीछे छिपा रहेगा, जब तक उसका उभरता हुआ पेट स्वयं इस छिपे अपराध की गवाही देना न कर दे!

मेरे विचार से कहानी के दृष्टिकोण से यही अधिक प्रभावी होगा कि छोटी और पापा के बीच का रिश्ता सबसे छिपा रहे!
 
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sexsarkar

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Apki bhavnao ka samman karta hu , magar samay jitna allow karta hai , utna hi update de pata hu , dimag me to rahta hi hai story, magar update likhne ne accha khasa samay lg jata hai , or apne vyast kaam se samay nikalna hi bari baat hai. Khair , aage se kosis yahi hogi ki update lamba du , bhale thora time lage. Or regular update deta rahunga. Kahani ki itne utsukata se follow karne ke liye dhyanabaad.
भाई बहुत ही सुंदर अपडेट है। एक अनुरोध है, कृपया अपडेट थोड़ा लंबा दीजिए... मूड आने से पहले ही खत्म हो गया, लव यू
 
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sexsarkar

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Update: 60 (गुस्सा थूक दो )

दादी के बात का आघात गहरा लगा था पापा के दिल पे । उनका ऑफ़िस में भी मन नहीं लग रहा था । ये कैसी विडंबना है कि अपने पत्नी के साथ भी मिलन करने के बाद,अब उनको ऐसे समझ रहा था, जैसे वो कोई रेपिस्ट दरिंदा हो । पापा सोच रहे थे : माँ ने कितने कड़वी बात किया मुझ से ? क्या अपनी पत्नी के साथ हमबिस्तर करना इसलिए पापा हो गया क्योकि वो गर्भवती है ? प्रज्ञा क्या सोच रही होगी मेरे बारे में ? माँ ने कैसी बाते कर दी कि मैं घर की सारे स्त्री को दबोच के सेक्स कर लूंगा ? उन्हें शरम भी नहीं आई कि उन्होंने अपना और प्रज्ञा का नाम लिया? मै ऐसा कभी नहीं कर सकता , माँ के लिये तो मै ऐसा सोच भी नहीं सकता , ओर प्राची के साथ भी मैने तभी ये सब किया जब वो मेरी पत्नी बनी , प्रज्ञा के बारे ने भी माँ ने ऐसा बोला ? प्रज्ञा तो मेरी बेटी है । प्राची पे तो मेरे अधिकार है ,मगर प्रज्ञा के साथ मै ऐसा कुछ करूंगा तो मेरे ही मर्यादा के खिलाफ होगा।

पापा अपने आप को इन सवालों के जरिए तसल्ली देने की कोशिश कर रहे थे। मगर वो कहते है ना । जब हवस की आग लगती है तो लोग सारे मर्यादा भूल जाते है । मर्यादा टूट जाते है और कुछ ऐसा भी आप कर बैठते है जो समाज या घर ने निषेध मना जा सकता है।
उधर प्राची लगभग आज, ११ बजे तक सोती रही , और दावा का असर कम होने के बाद उसे उसके योनि में दर्द का हल्का हल्का अनुभव होने लगा था । वो दर्द से थोड़ा कराह गई । क्या संयोग हो गया था ये । एक बेटी अपने बाप का बच्चा अपने कोख ने पल रही थी और हर दर्द को सहने को तैयार थी अपने पति और पापा को खुश रखने के लिए । प्राची ने बहुत त्याग किया था ।

प्रज्ञा को प्राची का ख्याल रखने को बोला गया था सो उसने प्राची के फ्रेश होने के बात उसे नाश्ता कराया और फिर दवाइयां दी। दादी ने प्राची को आराम करने को बोला और प्रज्ञा भी अपने दीदी के कमरे ने उनसे साथ बैठी , उसकी मालिश करने लगी ।

प्राची रात के बाद अपने आप पे शर्मिंदा महसूस कर रही थी । दादी ने उसे दर्द से तड़पते तब देखा था, जब वो नंगी पापा से चुदाई करवा रही थी । उसे लग रहा था कि दादी उसके ऊपर इस बात को लेके गुस्सा होगी ,क्यों कि उसी ने पाप को मजबूर किया था कि पापा उसकी चुदाई करे । मगर दादी ने तो अपनी खुद की धारणा बना के पापा को दोषी करार दे दिया था । प्राची उस बात से अंजान थी कि पापा को दादी ने दोषी मान के क्या क्या सुना दिया था ।

प्राची ने हिम्मत जुटा के प्रज्ञा से पूछ लिया : छोटी , दादी मुझसे ज्यादा गुस्सा तो नहीं ? उन्होंने मना किया था कि पापा के साथ वो करने से , मगर मैने कर लिया और आज मेरी ये हालत हो गई है । उस बात को लेके तो दादी मुझ से बहुत गुस्सा होगी ना?

प्रज्ञा : अरे आपसे क्यों गुस्सा होगी दादी, आपका तो हालत खराब हो गया था । आप को शायद कल जल्दी हॉस्पिट नहीं ले जाते तब तो बहुत मुश्किल हो जाते ना । दादी तो पापा पे गुस्सा है । उन्होंने आपके प्रेग्नेंट होने के बाद भी आपके साथ ऐसा किया । इस बात से दादी उनसे नाखुश है और सबेरे सबेरे पापा को बहुत सुनाई है ।

प्राची को इस बात से बहुत अश्चर्य हुआ । उसे दादी के इस बात से बहुत गुस्सा आ रहा था । अरे दादी ऐसे कैसे पापा को दोषी मान लिया , जब पहल तो प्राची ने खुद ही किया था । उसी ने तो पापा से चुदवाने की भीख मांगी थी उस दिन ।

प्रज्ञा : दीदी , क्या पापा सच में आपको इस तरह से इस्तेमाल करते है ? क्या पापा आपके मना करने के बाद वो आपको ?

प्राची ने प्रज्ञा के नज़र में पापा की ये छबि देख के उसे बहुत बुरा लगा , ये सब दादी के वजह से था।

प्राची : ये तुझसे किसने कहा? पापा मुझे जबदस्ती करते है ? तेरा दिमाग तो ठीक है ? पापा तो मुझे इतना प्यार करते है कि शायद ही किसी पत्नी को कोई इतना प्यार करे । उनके साथ हर रात एक नया अनुभव, एक नया एहसास होता है मुझे । दादी पापा को दोषी कैसे मान सकती है ? पापा ने तो दादी के कहने के बाद ही मेरे साथ संयम बरतने लगे थे । वो तो मै थी , जो गर्भ ने उनका बच्चा पलने के बाद भी उनसे जुदा नहीं रह पाई ।

प्रज्ञा : ये आप क्या कह रही हो दीदी ? पापा ने आपको अपनी हवस मिटाने की लिए जबदस्ती नहीं किया ?

प्राची : नहीं बाबा, वो तो मै थी जो पापा के प्यार के लिए १५-१६ दिनों से तरप रही थी। मेरा कंट्रोल तो मेरे वासना से 5 दिन में ही खत्म हो गया था । पापा को मैने लगभग 10 दिनों तक रिझाया तब जा के इनका संयम तोड़ पाई । तू तो जानती ही है न मेरा हाल क्या हो गया था ?

प्रज्ञा : अच्छा दीदी , तभी आप उस दिन मेरे मालिश करने से ही बह गई थी ? आप उस दिन हवस का शिकार बन गई थी ना?

प्रज्ञा : बदमाश तुझे ये सब किसने बता दिया, कि मैं उस दिन बह गई थी ? हाँ उस दिन तूने देखा ही होगा मै कितनी प्यासी थी ? तेरे पापा के बिना मेरा क्या हाल था ? उन्होंने तो अपने आप पे काबू रखा हुआ था । वो तो मै थी जिसके अंदर आग लगी हुई थी । फिर दादी पापा पे इतने गलत आरोप कैसे लगा दी? मुझे दादी की इस बात पे बहुत गुस्सा आ था है । पापा को दोषी मान लिया उन्होंने।

प्राची का गुस्सा , जो उसे पापा पे आ रहा था , वो उतर गया , और अब उसे दादी पे गुस्सा आने लगा । दादी ने बिना जाने ,बिना पूछे ही , पापा पे इतना घिनौना आरोप लगा दिया कि प्रज्ञा को भी , एक पल के लिए पापा से नफ़रत सी हो गई थी । मगर पापा ऐसे नहीं थे । ये तो दीदी थी , जिसके हवस को पापा मिटा रहे थे ।

प्रज्ञा : तेरे पापा??? अच्छा जी , कल तक तो आपके भी पापा वही थे ना दीदी। आज वो "तेरे पापा" हो गए ? वो तो आपके भी पापा ही है ना ?

प्राची : अब तो वो मेरे पापा से बढ़ के भी कुछ ओर भी है । वो तेरे जीजा जी और मेरे पति है प्रज्ञा । अब जब मैं उनका बीज अपने कोख ने पाल रही हु तो हमारा रिश्ता बाप बेटी का नहीं , एक पति पत्नी का है । पता है तुझे प्रज्ञा , पापा बहुत प्यार करते है मुझे। उनका प्यार करने का अंदाज सबसे अलग ही है ।

प्रज्ञा : सच दीदी पापा इतना प्यार करते है आपसे ? हां ये बात भी सही है कि अब तो वो आपके पति है तो पापा सिर्फ मेरे ही हुए ना।

प्राची : हां प्रज्ञा , पापा मुझे बहुत प्यार करते है। उनका वो मर्दाना अंदाज । वो प्यार करने तरीका , वो मेरी छोटी छोटी बातों पे इतना ध्यान रखना , हाय... , मै तो उनपे पूरी लट्टू ही हो जाती हु ।

प्रज्ञा प्राची की बाते सुन के गरम होने लगी । उसे अपने पापा के बारे ने उसके दीदी से सुन के बहुत अच्छा लग रहा था । ओर पता नहीं वो थोड़ी शर्मा भी रही थी । सबेरे जो उसे पापा पे गुस्सा चढ़ा था , उसको प्राची ने पूरा ही बदल दिया था । प्राची के बातों से लगता था कि पापा की तो कोई गलती हो नहीं थी इस सब में , और पापा तो इतने स्वीट हसबैंड है कि प्राची उनसे प्यार की भीख मांगती है ।


वो पापा के प्यार करने के अंदाज जानने के लिए उत्सुक हो उठी।

प्रज्ञा : दीदी , सच में पापा , इतने अच्छे है ? क्या क्या करते है वो ओर आपको खुश करने के लिए ?

प्राची अपने पति बने पापा की बरई करते थक नहीं रही थी : हां मेरी छोटी , पापा का प्यार ,मतलब , ओह, आनंद ही आनंद। वो इतनी प्यारी बाते करते है ना मुझ से कि मुझ लगता है मेरी उनसे शादी नहीं भी हुई रहती और वो मेरे पापा ही होते । फिर भी मै इनसे प्यार करती और उनके साथ रात बीतती । इतने अच्छे है वो । ओर पता है प्रज्ञा , जब वो बिस्तर पे मेरे साथ होते है ना । तब तो मैं अपना सारा शुद्ध बुद्ध खो जाती हूं। वो करते ही इतना मस्त है।

प्रज्ञा : क्या मस्त करते है दीदी? आपकी चुदाई ?

प्रज्ञा का यू खुल के सवाल पूछने से प्राची को गुस्सा नहीं आया, वो एकदम से शर्मा गई । और नज़रे नीची कर के , मुस्कुराते हुए बोली: हम्ममम...छोटी मै तुझे बता भी नहीं सकती कि कितना मजा आया है। प्लीज तू ये सब कही बोलेगी तो नहीं ना ?

प्रज्ञा : अरे दीदी मै किसको बोलूंगी , घर में तो अब जानते ही है कि पापा के साथ रात को आप क्या करते थे ।

प्राची बस शर्मा के रह गई ।

प्रज्ञा : दीदी , एक बात पूछू?

प्राची : हां पूछ ना ।

प्रज्ञा : दीदी, क्या इतना मजा आता है सेक्स करने में । पापा क्या क्या करते है आपके साथ ?

प्राची हँसती हुई: हाहा...हां मेरी छोटी बहना, बहुत मज़ा आया है , और पापा तो बस पूछो मत क्या क्या करते है , ये पूछो कि क्या क्या नहीं करते है । जब वो मेरे अंदर अपना मूसल डालते है ना तो बहुत आनंद मिलता है । और पापा का स्पेशल बात ये है कि , वो कच्चे खिलाड़ी नहीं है , गाड़ी बहुत देर तक दौड़ते है ।

प्रज्ञा : मतलब दीदी, पापा आपको बहुत देर तक चोदते है ?

प्राची : हाय शैतान , अपने माँ से ऐसे बात करती है ।

प्रज्ञा : हाहा...ये माँ कभी मेरी दीदी हुआ करती करती थी । जो पापा के मूसल लेने के बाद मेरी माँ बनी है , ये मत भूलिए ।

प्राची : चुप कर शैतान।

प्रज्ञा : दीदी , सच में बताओ ना , पापा का बहुत मोटा है क्या कि कल रात आपकी वो हालत हो गई ? मैने आज तक किसी पुरूष का देख भी नहीं है कि वो होता कैसा है ?

प्राची : नहीं , अब तुझे मै ये सब कुछ नहीं बताने वाली , तुझे शरम नहीं आती , पापा के बारे ने ऐसी बातें करती है । ओर शादी होगी तेरी तो खुद देख लेना कैसा होता है । मै नहीं बता रही तुझे पापा का साइज । शर्म के वो तेरे पापा है ।

प्रज्ञा: अच्छा दीदी, ये सब बातों की शुरुआत किसने की थी ?

प्राची: वो तो तुमलोग पापा के नियत और कैरेक्टर पे सवाल उठा रहे थे , इसलिए मैने ये सब बताया , कि वो मुझ से कितना प्यार करते है । और दादी ने कितना गलत किया उनके साथ ।

प्रज्ञा : हां दीदी , दादी ने तो ऐसी बात बोली पापा को की वो तो खाना छोड़ के ही चल दिये ?

प्राची : अरे , ऐसा क्या कह दिया ?

प्रज्ञा : उन्होंने पापा को बोला , कि वो आपको ऐसे रात रात भर भोगते रहते है , उनका हवस इतना जायदा है कि वो तुम्हे क्या , मौका पा के दादी और मुझे भी दबोच लेंगे ।

प्राची ये बात सुनते ही आग बबूला हो गई । ये क्या बोला दादी ने ? छी...पापा को वो इतना घटिया समझ रही है । प्राची का गुस्सा से मुंह लाल हो गया । वो एकदम तमतमा गई । उसके पति पे किसी ने इतना गंदा आरोप लगा दिया था ।

प्रज्ञा : प्लीज दीदी, इतना गुस्सा मत हो , तुम्हारे सेहत के लिए ठीक नहीं ।

प्राची : गुस्सा ना होय, मेरे पति पे कोई इतना गंदा आरोप लगा दे ओर मुझ गुस्सा ना आए । नहीं प्रज्ञा , पापा ऐसा कभी नहीं कर सकते , क्या दादी को अपने बेटे पे बिस्वास नहीं है। क्या दादी को ये नहीं पता कि मैं उनको पत्नी हूं और वो कही बाहर किसी रण्डी को नहीं पेल के आ रहे । दादी ने ऐसा बोला भी कैसे ।

प्रज्ञा प्राची को शांत करने चाह रही थी : प्लीज दीदी, इतना गुस्सा तेरे हैल्थ के लिए ठीक नहीं , प्लीज गुस्सा थूक दो , दीदी।

प्राची : नहीं प्रज्ञा , दादी को बताना बहुत जरूरी है , तू चल मेरे साथ , अभी मै दादी से बात करती हु । उन्होंने इतनी घिनौने बात कैसे बोली पापा के लिए ।

प्रज्ञा : अरे दीदी ,आप अभी आराम करो , प्लीज।


प्राची: नहीं प्रज्ञा , तू चल ।

प्राची लहराते हुए दादी के कमरे में चल दी । पीछे पीछें प्रज्ञा भी दीदी को सहारा देते हुए साथ चल दी।



अगला अपडेट जल्दी ही।
 

rockwin

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दादी के बात का आघात गहरा लगा था पापा के दिल पे । उनका ऑफ़िस में भी मन नहीं लग रहा था । ये कैसी विडंबना है कि अपने पत्नी के साथ भी मिलन करने के बाद,अब उनको ऐसे समझ रहा था, जैसे वो कोई रेपिस्ट दरिंदा हो । पापा सोच रहे थे : माँ ने कितने कड़वी बात किया मुझ से ? क्या अपनी पत्नी के साथ हमबिस्तर करना इसलिए पापा हो गया क्योकि वो गर्भवती है ? प्रज्ञा क्या सोच रही होगी मेरे बारे में ? माँ ने कैसी बाते कर दी कि मैं घर की सारे स्त्री को दबोच के सेक्स कर लूंगा ? उन्हें शरम भी नहीं आई कि उन्होंने अपना और प्रज्ञा का नाम लिया? मै ऐसा कभी नहीं कर सकता , माँ के लिये तो मै ऐसा सोच भी नहीं सकता , ओर प्राची के साथ भी मैने तभी ये सब किया जब वो मेरी पत्नी बनी , प्रज्ञा के बारे ने भी माँ ने ऐसा बोला ? प्रज्ञा तो मेरी बेटी है । प्राची पे तो मेरे अधिकार है ,मगर प्रज्ञा के साथ मै ऐसा कुछ करूंगा तो मेरे ही मर्यादा के खिलाफ होगा।

पापा अपने आप को इन सवालों के जरिए तसल्ली देने की कोशिश कर रहे थे। मगर वो कहते है ना । जब हवस की आग लगती है तो लोग सारे मर्यादा भूल जाते है । मर्यादा टूट जाते है और कुछ ऐसा भी आप कर बैठते है जो समाज या घर ने निषेध मना जा सकता है।
उधर प्राची लगभग आज, ११ बजे तक सोती रही , और दावा का असर कम होने के बाद उसे उसके योनि में दर्द का हल्का हल्का अनुभव होने लगा था । वो दर्द से थोड़ा कराह गई । क्या संयोग हो गया था ये । एक बेटी अपने बाप का बच्चा अपने कोख ने पल रही थी और हर दर्द को सहने को तैयार थी अपने पति और पापा को खुश रखने के लिए । प्राची ने बहुत त्याग किया था ।

प्रज्ञा को प्राची का ख्याल रखने को बोला गया था सो उसने प्राची के फ्रेश होने के बात उसे नाश्ता कराया और फिर दवाइयां दी। दादी ने प्राची को आराम करने को बोला और प्रज्ञा भी अपने दीदी के कमरे ने उनसे साथ बैठी , उसकी मालिश करने लगी ।

प्राची रात के बाद अपने आप पे शर्मिंदा महसूस कर रही थी । दादी ने उसे दर्द से तड़पते तब देखा था, जब वो नंगी पापा से चुदाई करवा रही थी । उसे लग रहा था कि दादी उसके ऊपर इस बात को लेके गुस्सा होगी ,क्यों कि उसी ने पाप को मजबूर किया था कि पापा उसकी चुदाई करे । मगर दादी ने तो अपनी खुद की धारणा बना के पापा को दोषी करार दे दिया था । प्राची उस बात से अंजान थी कि पापा को दादी ने दोषी मान के क्या क्या सुना दिया था ।

प्राची ने हिम्मत जुटा के प्रज्ञा से पूछ लिया : छोटी , दादी मुझसे ज्यादा गुस्सा तो नहीं ? उन्होंने मना किया था कि पापा के साथ वो करने से , मगर मैने कर लिया और आज मेरी ये हालत हो गई है । उस बात को लेके तो दादी मुझ से बहुत गुस्सा होगी ना?

प्रज्ञा : अरे आपसे क्यों गुस्सा होगी दादी, आपका तो हालत खराब हो गया था । आप को शायद कल जल्दी हॉस्पिट नहीं ले जाते तब तो बहुत मुश्किल हो जाते ना । दादी तो पापा पे गुस्सा है । उन्होंने आपके प्रेग्नेंट होने के बाद भी आपके साथ ऐसा किया । इस बात से दादी उनसे नाखुश है और सबेरे सबेरे पापा को बहुत सुनाई है ।

प्राची को इस बात से बहुत अश्चर्य हुआ । उसे दादी के इस बात से बहुत गुस्सा आ रहा था । अरे दादी ऐसे कैसे पापा को दोषी मान लिया , जब पहल तो प्राची ने खुद ही किया था । उसी ने तो पापा से चुदवाने की भीख मांगी थी उस दिन ।

प्रज्ञा : दीदी , क्या पापा सच में आपको इस तरह से इस्तेमाल करते है ? क्या पापा आपके मना करने के बाद वो आपको ?

प्राची ने प्रज्ञा के नज़र में पापा की ये छबि देख के उसे बहुत बुरा लगा , ये सब दादी के वजह से था।

प्राची : ये तुझसे किसने कहा? पापा मुझे जबदस्ती करते है ? तेरा दिमाग तो ठीक है ? पापा तो मुझे इतना प्यार करते है कि शायद ही किसी पत्नी को कोई इतना प्यार करे । उनके साथ हर रात एक नया अनुभव, एक नया एहसास होता है मुझे । दादी पापा को दोषी कैसे मान सकती है ? पापा ने तो दादी के कहने के बाद ही मेरे साथ संयम बरतने लगे थे । वो तो मै थी , जो गर्भ ने उनका बच्चा पलने के बाद भी उनसे जुदा नहीं रह पाई ।

प्रज्ञा : ये आप क्या कह रही हो दीदी ? पापा ने आपको अपनी हवस मिटाने की लिए जबदस्ती नहीं किया ?

प्राची : नहीं बाबा, वो तो मै थी जो पापा के प्यार के लिए १५-१६ दिनों से तरप रही थी। मेरा कंट्रोल तो मेरे वासना से 5 दिन में ही खत्म हो गया था । पापा को मैने लगभग 10 दिनों तक रिझाया तब जा के इनका संयम तोड़ पाई । तू तो जानती ही है न मेरा हाल क्या हो गया था ?

प्रज्ञा : अच्छा दीदी , तभी आप उस दिन मेरे मालिश करने से ही बह गई थी ? आप उस दिन हवस का शिकार बन गई थी ना?

प्रज्ञा : बदमाश तुझे ये सब किसने बता दिया, कि मैं उस दिन बह गई थी ? हाँ उस दिन तूने देखा ही होगा मै कितनी प्यासी थी ? तेरे पापा के बिना मेरा क्या हाल था ? उन्होंने तो अपने आप पे काबू रखा हुआ था । वो तो मै थी जिसके अंदर आग लगी हुई थी । फिर दादी पापा पे इतने गलत आरोप कैसे लगा दी? मुझे दादी की इस बात पे बहुत गुस्सा आ था है । पापा को दोषी मान लिया उन्होंने।

प्राची का गुस्सा , जो उसे पापा पे आ रहा था , वो उतर गया , और अब उसे दादी पे गुस्सा आने लगा । दादी ने बिना जाने ,बिना पूछे ही , पापा पे इतना घिनौना आरोप लगा दिया कि प्रज्ञा को भी , एक पल के लिए पापा से नफ़रत सी हो गई थी । मगर पापा ऐसे नहीं थे । ये तो दीदी थी , जिसके हवस को पापा मिटा रहे थे ।

प्रज्ञा : तेरे पापा??? अच्छा जी , कल तक तो आपके भी पापा वही थे ना दीदी। आज वो "तेरे पापा" हो गए ? वो तो आपके भी पापा ही है ना ?

प्राची : अब तो वो मेरे पापा से बढ़ के भी कुछ ओर भी है । वो तेरे जीजा जी और मेरे पति है प्रज्ञा । अब जब मैं उनका बीज अपने कोख ने पाल रही हु तो हमारा रिश्ता बाप बेटी का नहीं , एक पति पत्नी का है । पता है तुझे प्रज्ञा , पापा बहुत प्यार करते है मुझे। उनका प्यार करने का अंदाज सबसे अलग ही है ।

प्रज्ञा : सच दीदी पापा इतना प्यार करते है आपसे ? हां ये बात भी सही है कि अब तो वो आपके पति है तो पापा सिर्फ मेरे ही हुए ना।

प्राची : हां प्रज्ञा , पापा मुझे बहुत प्यार करते है। उनका वो मर्दाना अंदाज । वो प्यार करने तरीका , वो मेरी छोटी छोटी बातों पे इतना ध्यान रखना , हाय... , मै तो उनपे पूरी लट्टू ही हो जाती हु ।

प्रज्ञा प्राची की बाते सुन के गरम होने लगी । उसे अपने पापा के बारे ने उसके दीदी से सुन के बहुत अच्छा लग रहा था । ओर पता नहीं वो थोड़ी शर्मा भी रही थी । सबेरे जो उसे पापा पे गुस्सा चढ़ा था , उसको प्राची ने पूरा ही बदल दिया था । प्राची के बातों से लगता था कि पापा की तो कोई गलती हो नहीं थी इस सब में , और पापा तो इतने स्वीट हसबैंड है कि प्राची उनसे प्यार की भीख मांगती है ।


वो पापा के प्यार करने के अंदाज जानने के लिए उत्सुक हो उठी।

प्रज्ञा : दीदी , सच में पापा , इतने अच्छे है ? क्या क्या करते है वो ओर आपको खुश करने के लिए ?

प्राची अपने पति बने पापा की बरई करते थक नहीं रही थी : हां मेरी छोटी , पापा का प्यार ,मतलब , ओह, आनंद ही आनंद। वो इतनी प्यारी बाते करते है ना मुझ से कि मुझ लगता है मेरी उनसे शादी नहीं भी हुई रहती और वो मेरे पापा ही होते । फिर भी मै इनसे प्यार करती और उनके साथ रात बीतती । इतने अच्छे है वो । ओर पता है प्रज्ञा , जब वो बिस्तर पे मेरे साथ होते है ना । तब तो मैं अपना सारा शुद्ध बुद्ध खो जाती हूं। वो करते ही इतना मस्त है।

प्रज्ञा : क्या मस्त करते है दीदी? आपकी चुदाई ?

प्रज्ञा का यू खुल के सवाल पूछने से प्राची को गुस्सा नहीं आया, वो एकदम से शर्मा गई । और नज़रे नीची कर के , मुस्कुराते हुए बोली: हम्ममम...छोटी मै तुझे बता भी नहीं सकती कि कितना मजा आया है। प्लीज तू ये सब कही बोलेगी तो नहीं ना ?

प्रज्ञा : अरे दीदी मै किसको बोलूंगी , घर में तो अब जानते ही है कि पापा के साथ रात को आप क्या करते थे ।

प्राची बस शर्मा के रह गई ।

प्रज्ञा : दीदी , एक बात पूछू?

प्राची : हां पूछ ना ।

प्रज्ञा : दीदी, क्या इतना मजा आता है सेक्स करने में । पापा क्या क्या करते है आपके साथ ?

प्राची हँसती हुई: हाहा...हां मेरी छोटी बहना, बहुत मज़ा आया है , और पापा तो बस पूछो मत क्या क्या करते है , ये पूछो कि क्या क्या नहीं करते है । जब वो मेरे अंदर अपना मूसल डालते है ना तो बहुत आनंद मिलता है । और पापा का स्पेशल बात ये है कि , वो कच्चे खिलाड़ी नहीं है , गाड़ी बहुत देर तक दौड़ते है ।

प्रज्ञा : मतलब दीदी, पापा आपको बहुत देर तक चोदते है ?

प्राची : हाय शैतान , अपने माँ से ऐसे बात करती है ।

प्रज्ञा : हाहा...ये माँ कभी मेरी दीदी हुआ करती करती थी । जो पापा के मूसल लेने के बाद मेरी माँ बनी है , ये मत भूलिए ।

प्राची : चुप कर शैतान।

प्रज्ञा : दीदी , सच में बताओ ना , पापा का बहुत मोटा है क्या कि कल रात आपकी वो हालत हो गई ? मैने आज तक किसी पुरूष का देख भी नहीं है कि वो होता कैसा है ?

प्राची : नहीं , अब तुझे मै ये सब कुछ नहीं बताने वाली , तुझे शरम नहीं आती , पापा के बारे ने ऐसी बातें करती है । ओर शादी होगी तेरी तो खुद देख लेना कैसा होता है । मै नहीं बता रही तुझे पापा का साइज । शर्म के वो तेरे पापा है ।

प्रज्ञा: अच्छा दीदी, ये सब बातों की शुरुआत किसने की थी ?

प्राची: वो तो तुमलोग पापा के नियत और कैरेक्टर पे सवाल उठा रहे थे , इसलिए मैने ये सब बताया , कि वो मुझ से कितना प्यार करते है । और दादी ने कितना गलत किया उनके साथ ।

प्रज्ञा : हां दीदी , दादी ने तो ऐसी बात बोली पापा को की वो तो खाना छोड़ के ही चल दिये ?

प्राची : अरे , ऐसा क्या कह दिया ?

प्रज्ञा : उन्होंने पापा को बोला , कि वो आपको ऐसे रात रात भर भोगते रहते है , उनका हवस इतना जायदा है कि वो तुम्हे क्या , मौका पा के दादी और मुझे भी दबोच लेंगे ।

प्राची ये बात सुनते ही आग बबूला हो गई । ये क्या बोला दादी ने ? छी...पापा को वो इतना घटिया समझ रही है । प्राची का गुस्सा से मुंह लाल हो गया । वो एकदम तमतमा गई । उसके पति पे किसी ने इतना गंदा आरोप लगा दिया था ।

प्रज्ञा : प्लीज दीदी, इतना गुस्सा मत हो , तुम्हारे सेहत के लिए ठीक नहीं ।

प्राची : गुस्सा ना होय, मेरे पति पे कोई इतना गंदा आरोप लगा दे ओर मुझ गुस्सा ना आए । नहीं प्रज्ञा , पापा ऐसा कभी नहीं कर सकते , क्या दादी को अपने बेटे पे बिस्वास नहीं है। क्या दादी को ये नहीं पता कि मैं उनको पत्नी हूं और वो कही बाहर किसी रण्डी को नहीं पेल के आ रहे । दादी ने ऐसा बोला भी कैसे ।

प्रज्ञा प्राची को शांत करने चाह रही थी : प्लीज दीदी, इतना गुस्सा तेरे हैल्थ के लिए ठीक नहीं , प्लीज गुस्सा थूक दो , दीदी।

प्राची : नहीं प्रज्ञा , दादी को बताना बहुत जरूरी है , तू चल मेरे साथ , अभी मै दादी से बात करती हु । उन्होंने इतनी घिनौने बात कैसे बोली पापा के लिए ।

प्रज्ञा : अरे दीदी ,आप अभी आराम करो , प्लीज।


प्राची: नहीं प्रज्ञा , तू चल ।

प्राची लहराते हुए दादी के कमरे में चल दी । पीछे पीछें प्रज्ञा भी दीदी को सहारा देते हुए साथ चल दी।



अगला अपडेट जल्दी ही।
भाई, क्या शानदार अनुभव था! नए अपडेट का इंतज़ार है। प्रज्ञा पापा के लिए अब दीवानी होगी प्यार मैं
 
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