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यामिनी ने पापा को बाय कहा । और पापा ने भी उसे बाय कहने के बजाए , एक हग कर लिया और फिर उसके लिए कब का गेट खोल दिए : थैंक्यू यामिनी , फोर एवरीथिंग , जो अपने आज प्रज्ञा के लिए किया । आशा करता हु कि हमारे बीच हुए घटना का ज़िक्र आप प्रज्ञा से नहीं करेगी । वो जो मेरी गलती से आपको मेरा वो दिख गया था । सच में मै उसके लिए शर्मिंदा हूं, मुझे माफ कर दीजिएगा ।
यामिनी : please जीजी जी , इतना मत सोचिए , गलती सबसे होती है । वैसे मुझे बुरा नहीं लगा आपका वो । हाहाहा...
पापा : हाहाहा...लग रहा है , आपको बहुत पसंद आया है ।
यामिनी : ह्म्म्म...मुझे पसंद आया कि मेरे दोस्त को एक तगड़ा मर्द मिल रहा है ।
पापा : ह्म्म्म...ओके। चलिए जान के खुशी हुई । बस दोस्त के लिए ही खुश है या आपको भी ये मिल जाए तो खुश होंगी ।
यामिनी बस मुस्कुराई।
पापा: आपकी मनोदशा बता रही है कि आपको भी पसंद आया है मेरा लिंग ।
यामिनी ने हल्के से बोला : किस लड़की को पसंद नहीं आयेगा आपका वाला ।
पापा समझ गए कि इस ट्रिप में उन्हें एक और कच्ची कली मिलने वाली है । फिलहाल तो प्रज्ञा का यौवन उन्हें अपनी ओर ऊपर बुला रहा था ।
पापा: ओके यामिनी , घर पहुंच के एक मैसेज डाल दीजिएगा या कॉल के दीजिएगा ।
यामिनी : मै कॉल कर के आप दोनों को डिस्टर्ब नहीं करूंगी । मैसेज डाल दूंगी । ओर प्रज्ञा का ख्याल रखियेगा । और थोड़ा आराम से ।
पापा: घबराओ मत , सब अच्छा होगा । और कल सबेरे भी आप हमारे ब्रेकफास्ट पे ज्वाइन कर रही है । ठीक है ।
यामिनी : अच्छा देखती हूं।
कार का गेट बंद करते हुए पापा ड्राइवर से बोले : आराम से जाना भाई , सही से पहुंचना इनको घर तक।
और पापा ने यामिनी को बाय कहा ड्राइवर: जी सर ।
यामिनी को ये सब बहुत अच्छा लगा । कार चल पड़ी और पापा अपने दुल्हन के पास चल दिए । अब बस प्रज्ञा और वो , और आज रात का सुहाना तन्हा सफर।
पापा ऊपर जाने के लिए लिफ्ट में चढ़ गए । ऊपर कमरे में उनकी छुटकी प्रज्ञा उनका इंतजार कर रही थी । सुहागरात वो भी बिना शादी । ये पापा को अलग उत्तेजना दे रहा था । लिफ्ट में चढ़ते ही पापा को ये आभास हुआ कि वो ऊपर जा रहे है , वहां उनकी कच्ची कली बेटी अपना बुर उनके लन्ड के चोट से खुलवाने को तैयार बैठी है । उनका लौड़ा टनटना गया । खैर मनाइए लिफ्ट में कोई था नहीं , नहीं तो पापा के सलवार में बने तम्बू कोई भी नोटिस कर लेता । बड़ा सुखद एहसास था ये । बड़ी बेटी का चुत चोद के बच्चा लोड तो उन्होंने पहले ही कर दिया था , आज अपने छुटकी प्रज्ञा का भी छोटी सी बिल में अपना फनफ़नाता नाग का ठिकाना बनाने वाले थे पापा। जो भी हो आज रात चुदाई तो जबरदस्त होने वाली हो थी ।
पापा ऊपर पहुंच गए । उनका लिंग तन के एकदम 120° का एंगल, उनके शेरवानी के ढीले सलवार में बना दिया था । पापा ने हनीमून स्वीट के दरवाजे पे "Do Not Disturb" का एक टैग टांग दिए । वो उनके रूम में ही उपलब्ध था । इसका मतलब था कि अंदर चुदाई चल रही है , कोई भी डिस्टर्ब ना करे उन दोनों बाप बेटी को ।
पापा अंदर से दरवाज़ा अच्छे से बंद कर लिया । अब ये दरवाजा उनकी बेटी के सिल तोड़ चुदाई के बाद सुबह ही खुलने वाला था ।
उधर 18 साल की चढ़ती यौवन वाली नवयौवना , प्रज्ञा, सहमी बेड पे बैठी थी । पापा का इंतजार उसे भी बेसब्री से था । एक नया एहसास जीवन का उसे आज मिलने वाला था । एक जवान लड़की से आज महिला बनने का सफर रात भर तय करना था उसे । वो बस पापा का साथ खुल के देना चाहती थी ।
पापा रूम में दाखिल हो गए , और सीधे बालकनी की और गए । प्रज्ञा को ज़रा हैरानी हुई कि पापा उधर क्यों जा रहे है । बालकनी के पास जा के पापा ने सबसे पहले बालकनी का दरवाजा बंद किया , फिर उसके ऊपर पर्दा चढ़ा दिया । पापा प्रज्ञा को एकदम एकान्त में प्यार करना चाहते थे । प्रज्ञा का दिल ये देख के जोर से धड़कने लगा । उसे पता चल गया कि अब इस बंद कमरे में पापा को उसे प्यार करने से वो खुद भी रोक नहीं पाएगी ।
पापा बेड की ओर बढ़ चले । हाय रामा , प्रज्ञा क्या बला की खूबसूरत लड़की थी । एकदम मखमली बदन , संगमरमर सा तरसा हुआ यौवन , एकदम दमकती गोरी माल जैसे कोई रशियन लड़की हो । चुत भी एकदम गुलाबी , और चुत के अंदर से गुलाबी और लाल सी चुत की चमरी बाहर की ओर निकला हुआ था , जो पापा ने दिन में ही चख लिया था । क्या कसैला स्वाद था उस अनचुदी बुर का। पापा वो स्वाद फिर से चखना चाह रहे थे ।
पापा बेड पे आ के आराम से प्रज्ञा के सामने बैठ गए ।
पापा: प्रज्ञा ।
प्रज्ञा : जी पापा।
पापा: आज तुझे अपना बना लूंगा बेटी , बोल तैयार है ?
प्रज्ञा : हां पापा।
प्रज्ञा की आवाज थरथरा रही थी । उसे पापा का लिंग बहुत ज्यादा उत्तेजित कर रहा था । जिस लौड़े ने उसकी दीदी का चुत खोला था आज वही लौड़ा उसकी चुत के किस्मत में लिखा था ।
पापा: प्रज्ञा , आज बहुत ज़बरदस प्यास लगी है मुझे , तेरे बदन की प्यास , आज जी भर के तेरा चुचि चूसने का मन है , आज मन भर के तेरे चुत चाटने का मन है बेटी , आज मन भर के तुझे चोदने का मन है , नॉन स्टॉप , सटासट , निर्विरोध चुदाई । करने देगी ना।
प्रज्ञा शरम से पानी पानी हो चुकी थी । उसके होंठ थरथरा रहे थे । पहली बार ही प्रज्ञा को इतना फौलादी मर्द मिल गया था । जो आज उसके चुत के चिथरे उड़ा के रख देने वाला था अपने मोटे लौडे से ।
प्रज्ञा कुछ बोल नहीं पाई । पापा फिर से : बोल ना बेटी ।
प्रज्ञा बारी मुश्किल से बस इतना बोल पाई : जी पापा, अब तो आपकी हो चुकी हु मै।
पापा इतना सुनते ही : आजा मेरी छुटकी जानेमन , होठों से रसपान कर दे ज़रा।
इतना कहते हुए पापा ने प्रज्ञा को अपने अलिंगन में कस के गोद में बिठा लिया और उस के होंठो से होंठों का मिलन करा दिया । प्रज्ञा सहमी हुई , दुल्हन का जोड़ा पहने , पापा के गोद में बैठ थी , और पापा उसके थरथराती होंठ का कब्ज़ा ले चुके थे । चुप चुप चूं चुप... सरप्प सरूप.... की आवाज से कमरा गुलज़ार हो गया । प्रज्ञा खुश थी । कुछ समय तक पापा को ,अपनी नशीली निगाहों से , उनके आंखों में आंखें डाल के देखती रही , फिर उसकी आंखे बंद हो गई। पापा उसके होठों को किसी आम के जैसे चूसते रहे , और प्रज्ञा भी पापा को किस करती रही ।
पापा ने अपने मुंह के दवाब से प्रज्ञा का मुंह खोल दिया और उसके मुंह में अपना जीभ घुसा दिया । प्रज्ञा उनके जीभ को चूसने का नाकाम कोशिश करने लगी , जैसे कोई अनाड़ी लड़की हो। पापा को ये ओर जोश दिला रहा था । पापा लौडे का तान शायद आज से पहले इतना कड़क बस प्राची को पहली बार चोदने वाले दिन ही आया था ।
होठों से होठों का मिलन शायद 10-15 मिनट चलता रहा । प्रज्ञा का पूरा बदन पापा की गोद में थरथरा रहा था । शायद उसे भी पहली बार इतना जोश चढ़ा था ।
इसी बीच पापा ने हल्के हाथों से प्रज्ञा का पेट सहलाने लगे । कभी प्रज्ञा के गले पे तो कभी प्रज्ञा के कान के पास भी किस कर रहे थे । प्रज्ञा के उजोड़ तन चुके थे और स्तन का छोटा सा गुडी एकदम तन के मटर के दाने जैसा कड़ा हो गया था । पापा ने हाथ पेट से सरकते हुए उसकी चुचियो पे लाए और हल्के हाथो से ही प्रज्ञा के यौवन का जायज़ा लेने लगे । प्रज्ञा के मुंह से अनायास ही एक आवाज निकली : उह्हू...सीईईई.............।
पापा समझ गए, बेटी का यौवन ऊफान मार रहा है ।
पापा ने एक बार कस के प्रज्ञा का चुचि कपड़े के ऊपर से ही मसल दिया ।
प्रज्ञा : सीईईईई........आआह.......पापा.......।
पापा: उफ़....मेरी बेटी.....तेरी ये बेहतरीन जवानी.....।
प्रज्ञा उसे चुचि के दबाने से पूरी तरह गिनगिना उठी । और उसने लहंगे के नीचे से चुत को फड़कते महसूस किया ।
पापा अब उस जवान गोरी स्तनो का पान करना चाहते थे । झट झट वो प्रज्ञा का चोली खोलने लगे । प्रज्ञा मदहोश हो चुकी थी और पापा के साथ इस काम क्रीड़ा में रम गई थी । पापा ने प्रज्ञा की चोली जल्दी ही उतार के फर्स पे फेक दिया ।
प्रज्ञा की खरबूजा जैसी चुचिया अब बस ब्रा के पतले स्ट्रैप में कैद थी । प्रज्ञा ने एक चीत्कार भरी: सीईईई....पापा....आज पूरी नंगी कर दोगे क्या मुझे ?
पापा: पूरी की पूरी नंगी बेटी । पूड़ी तरह से नंगी ।
प्रज्ञा : आह पापा...मै सह नहीं पाई आपका मोटा मूसल तो ....
पापा: एकदम सह लोगी मेरी बच्ची । एकदम सह लोगी । इतना आराम से अंदर डालूंगा कि मक्खन की तरह आराम से जायेगा अंदर ।
प्रज्ञा : ओह...पापा...सीईईई...कितना झूठ बोलोगे । आपका लिंग तो मेरी कही मेरी चुत ना चिर के रख दे ।
पापा: ये सब मत सोच , अंदर जाने के बाद पहली बार जो तुझे मर्द का सुख भोगने को मिलेगा उसका सोच ।
प्रज्ञा भावबिभोर हो गई थी । पापा ने प्रज्ञा का स्तनो को अपने दोनों हाथों से थमा और एक बार धीरे से दबा दिया । प्रज्ञा की आंखें बंद हो गई । मदहोशी चरम पे थी ।
पापा ने प्रज्ञा के स्ट्रैप को सरकाया और एक चुचि को बाहर निकल दिया , गोरी गोलाई, गुलाबी निप्पल, एकदम मस्त । प्रज्ञा शर्मशार थी । पापा ने पूछा : चूम लूं तेरी यौवन मेरी बच्ची?
प्रज्ञा : आपका दिल करता है तो चूम लीजिए पापा ।
पापा: ओह मेरी बच्ची , दिल तो आज बहुत कुछ करने करने को करता है ।
प्रज्ञा : तो सब कर लो पापा ।
पापा ने प्रज्ञा के उस चुचि को मुंह पे भर लिया और लगे चुप चुप कर के चूसने । प्रज्ञा इस अनुभव से छटपटा सी गई ।
बस प्रज्ञा , पापा और तन्हाई में हो रहा उनका प्यार , कमरे में यही हो रहा था ।
पापा एक चुचि को मुंह पे भरे हुए ही ब्रा का हुक खोल , दोनों चुचियो को ब्रा के गिरफ्त से आजाद कर दिया । अब पापा को दोनों चुचियो का कब्जा मिल चुका था । पापा ने प्रज्ञा को अपने गोद से अब बेड पे लिटा दिया । और अपना शेरवानी का कुर्ता खोल प्रज्ञा के ऊपर छा गए । प्रज्ञा को ये सब बहुत जोश दिला रहा था । पापा अब बारी बारी प्रज्ञा के दोनों चुचियो को अपने होंठ लगा लगा के आराम आराम से चूसते रहे , जैसे आम चूस रहे हो।
पापा बिल्कुल नहीं रुक रहे थे । प्रज्ञा का कमर, पापा के इस जबर्दस्त चूसाई से , हवा में उठ के तैरने लगा । पापा प्रज्ञा के जोश देख के , प्रज्ञा के बूब्ज अब ज़ोर ज़ोर से दबाने और भींचने लगे । हर प्रेसिंग के बाद प्रज्ञा की आह निकल जाती थी : पापा.....सीईईई....आह्ह्ह्ह...धीरे धीरे करिए पापा ।
पापा कहां मनाने वाले थे । वो अब बेदर्दी से पापा का बूब्ज दबा रहे थे । प्रज्ञा अब चीत्कार मार मार के छटपटाने लगी । और उसके बुर से एक जल का बहाव छलछला के बह गई । प्रज्ञा पहली बार पापा के चूसाई से ही बह गई थी ।इस रात में चरम सुख पहली बार । और जब इतने में ही प्रज्ञा चु गई थी । तो अब आने वाले पलों में वो कितने बार झाड़ेगी उसका अंदेशा आप लगा सकते है ।
प्रज्ञा का बदन थोड़ा शांत हो गया ,मगर पापा स्तन पान करते ही रहे । चुपाचुप चूसाई।
लगभग पापा और प्रज्ञा का ये रसाकसी अगले 15-20 मिनट चलता रहा । प्रज्ञा की दोनों चूचियाँ लाल हो गई थी । पापा ने चूस चूस के दोनों गुडी भी फूला दिया था । साथ पापा का लिंग झटके मार रहा था । और प्रज्ञा को पेट पे पापा का लन्ड चुभ भी रहा था ।
आज सारी हदे पार होने वाली थी ।
पापा ने अब धीरे धीरे प्रज्ञा की सारी ज्वेलरी उतार दिया और अपना कब्ज़ा उसके होठों से ले कर चुचि और पेट तक कर दिया । कभी पागलो के तरह चूमते तो कभी जीभ निकल के चाटते। बेचारी 18 साल की नवयौवना पापा पे सर्वस्व लूटना चाहती थी आज और लुटा भी रही थी । पापा उसकी इज्जत के साथ अच्छे से खिलवाड़ कर रहे थे ।
पापा ने अब अपना हाथ प्रज्ञा के लहंगे पे फिराने लगे और नीचे जाके प्रज्ञा के कोमल गोरी पैरों को चूम लिया । प्रज्ञा झरने के बाद एकबार फिर जोशियाने लगी थी । प्रज्ञा के पांव में पायल झनझन कर रही थी । पापा प्रज्ञा के पैरों से सहलाते हुए प्रज्ञा का लहंगा अपने हाथों से सरकने लगे ऊपर की ओर। और जांघों तक उठा दिया ।ओफो प्रज्ञा का वो मखमली , कोमल , दूध सा सफेद जांघ। पापा उसपे हाथ फिराने लगे । उन्हें ऐसा लग रहा था जैसे बटर या मक्खन पे अपना हाथ चला रहे हो ।
पापा: मेरी बच्ची, बड़ी कोमल है तू तो।
प्रज्ञा: पापा , जैसी भी हू, बस अब आपकी ही हूँ।
पापा : उफ़ मेरी जान , आजा जरा चुत के दर्शन करा ।
पापा ने प्रज्ञा के लहंगे का नाड़ा खोल ,उसे खींज के कमर से सरकाते हुए पैरों तक ले गए और अलग कर दिया। प्रज्ञा जैसे पिघल सी गई , पापा के प्यार में । अब वो बस चड्डी में पापा के पास लेटी थी । पापा ने उसे भी सरका के निकल दिया । चुत के दर्शन हो गए ।दर्शन मात्र से ही पापा मदहोश हो गए ।
पापा: प्रज्ञा , तेरा अब कुछ सुंदर है , देख ना, कैसा तरसा हुआ चुत है तेरा । मन कर रहा है ,बस स्वाद चखाता रहू ।
प्रज्ञा कुछ बोलती उसे पहले ही पापा ने अपना जीभ निकल के मुंह प्रज्ञा के चुत पे लगा दिया । चुत से कसैला पानी निकल रहा था , सरप्प....कि आवाज के साथ पापा ने चुत का पानी अपनी मुंह में खींचा उसके बाद एक घुट मार लिया । उसके बाद पापा के होंठ प्रज्ञा के चुत के होठ पे जम गए । प्रज्ञा उतेजना से छटपटा पड़ी।
पापा अपने दोनों हाथों से प्रज्ञा का जांघों को पैर के नीचे से पकड़ लिया और पैरों को थोड़ा खोल दिया ,जिसे चुत खुल के पापा के सामने आ गई । बेटी की चुत । उनके छोटी बेटी प्रज्ञा की टेस्टी ,बटर जैसी मुलायम चुत । पापा ने मुंह में भर के चूसने लगे । कभी जीभ से चुत के दाने को झरते , तो कभी होंठो से चुत की पंखुड़ियों दबा देते , तो कभी जीभ से प्रेशर लगा के चुत के अंदर डाल के प्रज्ञा की सील यानी अंदरूनी झिल्ली को टच कर देते ।प्रज्ञा को पापा अपना हुनर दिखा रहे थे । पहली बार प्रज्ञा को ये आभास हुआ कि चुत किसी मर्द द्वारा चूस जाने पे इतना मजा दे सकता है।
पापा धीरे धीरे पागलो की तरह चुत पे अपना करतब दिखाने लगे । कभी कभी तो वो प्रज्ञा के झिल्ली में अपने जीभ से चोट के देते जिसे उसे हल्का दर्द भी उठ जाता । प्रज्ञा को पता नहीं नहीं चला कि कब उसका कमर हवा में उछलने लगा था । और हवा में लहराना बढ़ता ही गया । जब जब वो फोर्स लगा के अपना गांड उठाती , उसका चुत पापा के मुंह पे रगड़ जाता और वो आहे भरने लगती और सीसीया भी जाती । प्रज्ञा स्वर में तैर रही थी । पापा भी मक्खन में अपना मुंह डुबोए मजा ले रहे थे । ये सिलसिला अगले 10मिनट तक चलता रहा । अचानक प्रज्ञा का आवाज तेज से तेज होने लगा , आहे दीवारों को चीरने जैसा था । प्रज्ञा अह्ह्ह... आह्ह्ह्ह....कमरे में चारों तरफ की दीवार से टकरा के गूंज रहा था । अचानक से प्रज्ञा को एक बार फिर से जोर का उद्वेग आया, शरीर अकड़ने लगा और उसके चुत ने छलछला के पानी बह दिया । पापा को एक प्रज्ञा के चुत से एक धार आ निकलता महसूस हुआ और वो बिना देरी के प्रज्ञा का रसपान के लिए । चुत रस का रसपान। प्रज्ञा का जैसे सर दम चुत के ही निकल गया हो उस धारा के साथ ।
पापा ने जब मुंह हटाया प्रज्ञा के चुत से तो चुत के आजू बाजू का एरिया सुर्ख लाल हो गया था । वो थी ही इतनी गोरी की एक चाटा भी उसे मार दो तो लाल लाल दाग उभर आए ।
पापा ने प्रज्ञा से कहा : कैसा लगा मेरी बच्ची ?
प्रज्ञा : मत पूछिए पापा , आप का अंदाज मुझे पागल कर रहा था । मै तो अलग दुनिया में थी पापा।
पापा: मुझे भी तेरा ये कसैले स्वाद वाले चुत का अब बुरी आदत लगने वाली है । एकदम मक्खन है ।
प्रज्ञा शर्मा गई ।
पापा : प्रज्ञा ।
प्रज्ञा आंखे मूंदे : ह्म्म्म...पापा।
पापा: लॉलीपॉप चूसेंगी?
प्रज्ञा : इस प्यार के बीच लॉलीपॉप पापा ?
पापा: अरे अपने पापा का लॉलीपॉप?
प्रज्ञा : मै कुछ समझी नहीं पापा।
पापा ने अपने ढीले सालवार में बने तम्बू दिखाते हुए अपने लौडे के तरफ इशारा किया ।
प्रज्ञा अभी समझ गई : अच्छा पापा वो । मैने कभी नहीं किया है पापा।
पापा: आज तक चुदाई की है ?
प्रज्ञा : नहीं पापा।
पापा: तो आज हो रही है ना, फिर ये भी पहली बार कर रही हो ना।
प्रज्ञा: हां
पापा: तो फिर , आओ और ज़रा मेरी लॉलीपॉप का स्वाद चखो मेरी बच्ची । आगे आने वाले पलों में और आज के बाद तुझे ये लॉलीपॉप बड़ा सुख देने वाला है । इससे निकला बीज तेरे बुर को सींच के बच्चा भी देने वाला है बेटी । अब जब मुझे पति मान चुकी हो तो शादी तो होगा ही हमारा , उसके बाद बच्चा तो होगा। क्योंकि मै तो तेरे साथ जम के प्यार और चुदाई करने वाला हु मेरी बच्ची । इसी लॉलीपॉप से।
प्रज्ञा को पापा ने पकड़ के उठाया और खुद चित लेट गए ।
पापा: आ बेटी , जरा चूस दे , जितना गीला इसे करेगी , उतना दर्द कम होगा घुसने में तेरे चुत में ।
प्रज्ञा : अच्छा पापा, मै आपका पजामा खोल दूं फिर।
पापा: खोलेगी नहीं तो लॉलीपॉप का स्वाद कैसे लेगी बेटी ।
प्रज्ञा पापा का सलवार का नाड़ा खोलने लगी । ये नाडा यामिनी ने बांधी थी और प्रज्ञा खोल रही थी ।
पापा के टांगों से निकल के प्रज्ञा ने पापा को बस चड्डी में ला दिया था । पापा के जांघिया में ऐसा बड़ा सा तम्बू बना था और लग रहा था कि अभी कच्चा चीर के निकल जाएगा बाहर । प्रज्ञा शर्म के साथ सहम भी गई । अपने छोटे छोटे हाथों की उंगलियों से एकबार उस तम्बू को टच किया । बमपिलाठ था पापा का लिंग।
पापा: खोल बेटी पूरा खोल , जरा आजाद कर इसे , चड्डी में कैद कैद दर्द करने लगा है दबाव से ।
प्रज्ञा : ओह पापा , रुकिए तुरत खोलती हूं।
प्रज्ञा ने जैसे ही चड्डी नीचे खींचा । लन्ड झटका खाता , उछल के बाहर आ गया । एकदम 180° का एंगल । लिंग में जोश के कारण नसे उभर आई थी । लिंग का सुपारा लाल हो चुका था और एक बड़े से आलू जैसा फूला हुआ था । एकदम सख्त ।
पापा: प्रज्ञा , जरा चमरी नीचे खींच दे बड़ा दर्द हो रहा है ।
पापा का आधा सुपारा अभी भी टाइट चमरी से दब रहा था । प्रज्ञा ने मोटे चमरी को , कस के दम लगा के नीचे खींचा और पापा का सुपारा से चमरी पूरा हट गया । पापा का सुपारा जी इतना मोटा था जितना तो प्रज्ञा का पूरा चुत का चिरान भी नहीं था । चुत का छेद से शायद 5-6 गुना मोटा । प्रज्ञा की हालत खराब तो होने वाली थी ।
पापा ने प्रज्ञा का सर को पकड़ के हल्के से अपने लिंग की ओर बढ़ने की कोशिश की ओर बोला : चूसो बेटी ।
प्रज्ञा ने मुंह खोला ,पर जितना उसने खोला उसमें सुपारा नहीं समा सका।
प्रज्ञा ने ओर बड़ा मुंह खोला तब जा के उसके मुंह में लिंग घुस पाया । प्रज्ञा लिंग को अनाड़ी खिलाड़ी के जैसा चूसने की कोशिश करती रही । कभी जीभ से चाटने का प्रज्ञास करती तो कभी चूसने का । कभी कभी गलती से सुपारे में दांत भी लगा दे रही थी । पापा का मिजाज दांत लगते हो एकदम से झनझना जाता था । पापा ने थोड़ा दबाव बनाया तो प्रज्ञा गौक गौक करने लगती और उसकी सांसे उखड़ने लगती । पापा समझ गए पहली बार है तो जायदा ट्राई करना भी ठीक नहीं है। पापा प्रज्ञा के साथ अभी तक एकदम जेंटली प्यार करते आ रहे थे । बस चुत चूसाई ही उन्होंने थोड़ा जबरदस्त तरीके से किया था ।
पापा ने इस बीच प्रज्ञा को घूम के अपने मुंह ले बैठ के उनका लन्ड चूसने को बोला । प्रज्ञा ने पापा का आज्ञा का पालन किया और वो पापा के मुंह पे बैठने लगी । पापा ने प्रज्ञा का कमर पकड़ के सीधे उसका चुत का मुहाना पाने मुंह पे लगा दिया । और प्रज्ञा उनका लन्ड पकड़ के चूसने लगी । ये बाप बेटी एक दूसरे को 69 पोजीशन में सुख प्रधान के रहे थे । ये सिलसिला भी अलगे 20 मिनट तक चलता रहा । प्रज्ञा दुवारा फूल जोश में आ चुकी थी । और पापा के मुंह पे अपना कमर चला के चुत रगड़ रही थी । पापा समझ गए अब देर करना ठीक नहीं ।
पापा : प्रज्ञा , हो गया बेटी , आ नीचे चित के लेट जा ।
पापा ने ओर कुछ नहीं बोला । प्रज्ञा नीचे लेट गई ।
पापा ने प्रज्ञा के गांड के नीचे एक तकिया लगाया । और बेड के बगल में पड़े उस टोकरी से तेल की शीशी निकल के अपने लिंग में अच्छे से लगाने लगे। प्रज्ञा पापा को एक टक से देख रही थी । उसको पता चल गया कि अब क्या होने वाला है । जिस पल का इंतजार था वो होने वाला था । पापा प्रज्ञा में प्रवेश लेने वाले थे ।
पापा ने प्रज्ञा के चुत के मुहाने पे लुब्रिकेंट का डब्बा खोल के बहुत सारा उसके चुत ले चपोर दिया । प्रज्ञा की चुत चिकनाई से भर गई थी ।
पापा: बेटी , वो पल आ गया है । जब तेरा कौमार्य मै भंग करने वाला हूं। आज से तेरा चुत मेरे नाम हुआ । मै तेरे अंदर प्रवेश लेने वाला हु प्रज्ञा । तेरा सील अब टूटने वाला है । दर्द भी हो तो घबराना नहीं ,मै रहूंगा तुम्हारे साथ । और दर्द के बाद जो मजा है । वो तुम्हे पा के जो तृप्ति मिलेगी । उसके बाद तू अपने आप को मिलन के लिए रोक ना सकेगी । तैयार है मेरी बच्ची ?
प्रज्ञा ने सर हिला के हां बोला ।
पापा: कोंडोम की जरूरत नहीं है बेटी । प्यार किया है और शादी भी कर लूँगा। प्यार की निशानी आज नहीं तो कल आयेगा ही । चलेगा ना तुझे बिना कोंडोम के चुदाई ?
प्रज्ञा ने सर हां में हिलाया ।
पापा: आजा मेरी बच्ची । आजा तुझे अच्छे से प्यार करूं । चुदाई करूँ। आज घुसने दे मेरा लिंग अपने बुर में ।
प्रज्ञा ने अपनी आंखें बंद कर ली ।
पापा : प्रज्ञा आंखे खोल बेटी , और मुझे देख , मै चाहता हूं, जब मै पहली बार तेरे योनि में समाऊ तो तेरे नज़रे मुझे देख रही हो ।
प्रज्ञा ने आंखे खोल दी । वो बस अपने पापा का साथ देना चाहती थी । उसके आंखों में लाल डोरे उसके जोश में होने की गावाही दे रहे थे ।
चुदाई की बेला आ गई । पापा ने प्रज्ञा के चुत पे अपना सुपारा से ऊपर से नीचे तक सहलाने लगे । पापा का लन्ड प्रज्ञा के चुत पे सटते ही प्रज्ञा को एक करेंट सा लगा । सुपारा गरम था , ऐसा प्रज्ञा को महसूस हुआ ।
पापा ने प्रज्ञा का चुत बिंदोर के देखा तो चुत के अंदर एकदम पिंक और लाल सा था। झिल्ली साफ दिख रहा, एकदम छोटा सा छेद और जो कि बंद था । पापा को इसी को अपने लौडे के चोट से चीर देना था । पापा ने अपने चिपचिपा और चिकना लिंग का टोपा से प्रज्ञा के पूरे चुत , चुत के निकली चमरी , चुत के अगल बगल , मसाज सा करने लगे । प्रज्ञा का जोश और बढ़ता चला गया । पापा उसे तड़पा रहे थे । बस उसके चुत को छेड़ रहे थे । प्रज्ञा का चुत लूप लूप कर के पापा का लन्ड अंदर लेना चाह रहा था , मगर पापा है कि वार ही नहीं कर रहे । पापा प्रज्ञा को इसी तरह , अगले 5 मिनट तक छेड़ते रहे , प्रज्ञा की आंखें जोश से पथराने लगी और बंद होने लगी ।
पापा ने बोला: प्रज्ञा आंखे खोल मेरी बच्ची ।
प्रज्ञा ने जैसे ही अपना आंख खोल , पापा के आंखों से मिलाया । पापा ने बिना प्रज्ञा को बताए , बिना तैयार हो जाने या चेतावनी दिए , एक स्टॉक कस के चुत के मुहाने पे अपने लौडे से लगा दिया ।
पक्ककक....कि आवाज ऐसे आई जैसे किसी कोल्डिंक का ढक्कन खुला हो। उस आवाज के साथ ही प्रज्ञा के चुत में पाप का सुपारा दस्तक दे चुका था । प्रज्ञा के आंखों से आंसू का एक मोटा धार निकल गया और तकिया को भिगो गया । प्रज्ञा चीखना चाही मगर उसकी आवाज जैसे अटक गई हो । पापा के उस स्ट्रोक में प्रज्ञा का सिल तोड़ दिया था ।
प्रज्ञा अगले कुछ पल बाद चीत्कार उठी : पापा , बहुत दर्द हो रहा है ।
उसका आवाज बहुत धीमा था । ऐसा लग रहा था उसका दम खत्म हो गया है । पापा का बस सुपारा ही चुत में गया था वो भी , 60% ही, पापा ने प्रज्ञा की प्रतिक्रिया पे ध्यान ना देते हुए इस बार दूसरा स्ट्रोक मारा । स्ट्रोक जबदस्त था और प्रज्ञा को भी उछाल दिया था उस धक्के ने । इस बार पापा का आधा लिंग प्रज्ञा के चुत को चीर के समा गया । प्रज्ञा इस बार चिल्ला उठी : aaaahhhhhh.....पापा.....नहीं......मर जाऊंगी पापा.....बहुत दर्द हो रहा है .....आआ......ओह्ह्ह्ह.... ऊहह....पापा....रहम करिए पाप.....बहुत दर्द हो रहा है ....... और वो रोने लगी ।
उसके आंखों से आंसू निकल रहे थे ।
पापा: बस बस बस.....हो गया मेरी बाबू....हो गया...पापा का लिंग चला गया अंदर । हो गया मेरी बच्ची....बस ।
इतना बोल के पापा प्रज्ञा के शरीर को आलिंगन में भर लिए और चुचि को हल्के हल्के दबाने लगे।
प्रज्ञा रोये जा रही थी । पापा ने झुक के देखा , प्रज्ञा के चुत में उनका लिंग आधा ही अंदर था । पूरा चीरा गया था और चीरा के फैला हुआ था और लिंग उसमें टाइट कसा हुआ । हल्का सा खून भी लिंग के इर्द गिर्द लगा हुआ था सो प्रज्ञा का कौमार्य भंग होने की निशानी था। पापा प्रज्ञा के चुत में पूरा समाना चाहते थे । मगर अभी और अंदर ठेलना, प्रज्ञा के लिए बहुत जायदा दर्द भरा हो सकता था ।
पापा वही प्रज्ञा के ऊपर लेटे रहे। प्रज्ञा रोती रही । पापा की कान में प्रज्ञा के रोने के साथ साथ , हल्की हल्की आवाज में , लिंग को उसकी चुत से निकल लेने की बिनती भी सुनाई दे रही थी ।
प्रज्ञा एकदम धीरे धीरे ओर लगातार बस ये अब बोलते जा रही थी , वो भी रोते और सुबकते हुए : पापा....रहम....आह...कीजिए ना....पापा....निकल...आह्ह्ह...निकल लीजिए ना इसे....मै नहीं सह पा रही हु पापा....बहुत दर्द हो रहा है....अहह..... ओह्ह्ह्ह...सीईईई.... प्लीज़ पा....पा.... उफ्फ.....
पापा बस आधा लिंग घुसाए लेटे रहे प्रज्ञा के ऊपर । उसके कोई भी बिनती सुन के रहम नहीं दिखाया । क्योंकि अगर पापा रहम दिखा के अभी निकल लेते तो शायद पूरी रात बर्बाद हो जाती । और प्रज्ञा दुबारा उन्हें अंदर नहीं घुसने देती । और बाद में भी शायद चुदाई के नाम से ही डरती ।
5-10 मिनट में प्रज्ञा का रोना, सुबकने में बदला, और फिर एकदम बंद हो गया । पापा ने प्रज्ञा को जैसे ही शांत पाया , हल्के हल्के झटके के साथ चुदाई चालु किया। पहले एकदम धीरे से २-३ बार छोटे छोटे धक्के । प्रज्ञा ने भी उन धक्के का जवाब दिया और हल्के से गांड उठा कर अपने चुत को पापा के लन्ड के प्रतिरोध में धकेला।
पापा प्रज्ञा को जोश में लाने में कामयाब रहे ।
पापा: प्रज्ञा , दर्द अब भी है ।
प्रज्ञा धीमे से : थोड़ा थोड़ा पापा।
पापा: अब मजा आयेगा ।
पापा ने चुदाई शुरू किया । वो अभी भी प्रज्ञा को आधे लन्ड से ही चोदने लगे । पापा का लिंग प्रज्ञा के चुत में , अंदर बाहर , अंदर बाहर , लगातार होने लगा। प्रज्ञा भी अब रोना खत्म कर के सिसकारियां मारने लगी थी । पापा आराम आराम से ऐसे ही 5 मिनट तक प्रज्ञा को चोदते रहे । प्रज्ञा अब पूरी मदहोश हो के खुद लन्ड में अपने कमर चला के चुत में ले रही थी । पापा वही आधा लन्ड घुसा रहे थे । जब उन्होंने देख प्रज्ञा पूरी तरह से जोशीया चुकी है , कि पापा ने ताव में आ के कच से एक जबरदस्त सा धक्का मारा प्रज्ञा के चुत के अंदर । लन्ड पूरा का पूरा अब प्रज्ञा के चुत में उतर चुका था । लिंग का टोपा ,बच्चेदानी में टकरा गया था ।
प्रज्ञा को फिर से एक असहनीय दर्द हुआ ।
प्रज्ञा : aahhhhhhh.....पापा........बस ना.......उफ़.....
मगर इसबार जोश इतना ज्यादा चढ़ा हुआ था उसे की सहने में कामयाब रही । पापा लगभग २ मिनट ऐसे ही घुसा के रुकने के बाद धीरे धीरे पूरे लन्ड से चुदाई करने लगे ।
धीरे धीरे चुदाई के कारण पापा झर नहीं रहे थे । मगर प्राची का चुत उनकी लिंग में इतना टाइट जकड़ा हुआ था कि सहना मुश्किल था ।
पापा धीरे धीरे स्पीड बढ़ा दिए । मगर 5 मिनट चोदने के बाद ही प्रज्ञा का शरीर झटके खाने लगा और प्रज्ञा झरने लगी । पापा को लिंग प्रज्ञा के चुत रस से और गीला होता प्रतीत हुआ । फिर क्या था , पापा फुल स्ट्रोक , जोश से भर में मरने लगे ।
पापा ने चुदाई के रफ्तार बढ़ा दी । कमरे में बस तीन ही आवाज गूंज रही थी । एक पापा और प्रज्ञा की जोश भड़ी चीत्कार ।
पापा : आह....uhhhhhhhhhh....ehhhhhhh....उफ़....प्रज्ञा गजब की है तेरी चुत बेटी , एकदम टाइट....।
प्रज्ञा : आह पापा.... चोदते रहिये अपनी छोटी बेटी को....निहाल कर दीजिए....आह्ह....आईईईई...सीई....पापा
दूसरा पापा का जोर जोर से चुत पे स्टॉक लगाने की आवाज : ठप... ठप....ठप...ठप....ठप...
तीसरा प्रज्ञा की पायल की आवाज : छन....छन...छन...छन...
पापा के नीचे पड़ी प्रज्ञा एकदम छोटी बच्ची जैसी लग रही थी और पापा किसी दानव सा एकदम मूसल लन्ड पेले जा रहे थे ।
पापा के अंडकोष प्रज्ञा के टांगों के बीच गांड की छेद पर चोट कर रहा था । पापा ने अब अपना दोनों हाथ प्रज्ञा के चुतरो के नीचे ले जा के उसे कस के पकड़ लिया , और फिर और तेज स्ट्रोक मारने लगे । ठपाक ठपाक....ठप....ठप...
कमरा चीत्कार का गवाही बनता रहा । पापा ने अचानक स्ट्रोक बहुत तेज कर दिया । प्रज्ञा का रोम रोम हिल गया । और इस स्पीड में पापा ने प्रज्ञा की 1 मिनट तक चुदाई की जिसमें प्रज्ञा 30-30 sec में दो बार झड़ गई । जब प्रज्ञा दूसरी बार झड़ी तो पापा भी प्रज्ञा के चुत का टाइटंस सह नहीं पाए और थरथराते हुए अपना माल प्रज्ञा के बच्चेदानी में भर दिया । सुहागरात सफल हुआ । प्रज्ञा बिना शादी ही सुहागन बन गई । पापा ने अपना लिंग बाहर खींचा तो बहुत सारा वीर्य प्रज्ञा के चुत से बाहर भी गिरने लगा । शायद बच्चेदानी पूरी भर गई थी ।
पापा ने प्रज्ञा की बोला: प्रज्ञा आ मै तेरी मांग अपने माल से भर देता हूं। सिंदूर लगा के तो सब भरते है , तेरा मांग मेरे वीर्य से भरेगा ।
प्रज्ञा ने पापा का आदेश मानते हुए अपना सर आगे के दिया । पापा बेड पे ही खड़े हो गए और उनका लन्ड अभी भी वीर्य से लथपथ था , उसी वीर्य से पापा ने प्रज्ञा की मांग पे लन्ड रगड़ के वीर्य से भर दिया। प्रज्ञा सुहागिन हो चुकी थी । पापा की सुहागिन। पापा की दूसरी पत्नी ।
दोनों हांफते हुए एक दूसरे के बाहों में गिर गए और लेट गए ।
प्रज्ञा लंबी लंबी सांसे लेने लगी थी । पापा आज प्रज्ञा संग वो प्राची वाली गलती नहीं करना चाहते थे । प्राची को उन्होंने पहली रात को ही 5 बार पेला था । प्रज्ञा को भी अगर वो 5 राउंड की चुदाई करने लगे तो वो भी एक महीने तक शायद सेक्स करने लायक नहीं बचे ।
प्रज्ञा : आह पापा , दर्द तो बहुत हुआ , पर मजा भी बड़ा आया । थैंक्यू पापा ,मेरे हसबैंड बनने के लिए ।
पापा: आह...तुझे चोद के बड़ा सुकून मिला बेटी , मै तो तड़प रहा था तुझे पाने के लिए ।
प्रज्ञा पापा से कस के लिपट गई । आज उसे मर्द का सुख मिल गया था ।
दोनों रोमांटिक बाते करते रहे । थोड़े समय बात होने के बाद प्रज्ञा ने पापा से पूछा : पापा , यामिनी बड़ी अच्छी लड़की है ना। बड़ी मदद की उसने हमारी ।
पापा: ह्म्म्म... बेटी सच में ।
प्रज्ञा : देखिए ना , एक ही दिन में कितनी अच्छी दोस्त बन गई मेरी ।
पापा: हां...ओर तूने तो मेरे सारे राज भी उसे बता दिए है । की मेरा कितना बड़ा है ।
प्रज्ञा : तो क्या झूठ कहा मैने पापा।
पापा: हाहा... झूठ नहीं कहा ठीक है ...मगर वो भी तो एक लड़की है...इस तरह का लिंग है सुन के उसके अरमान भी तो जग गए होंगे ।
प्रज्ञा : हां सही कहा पापा...इसीलिए शायद कह रही थी कि आपकी जैसा पति चाहिए उसको ।
पापा: हां... और क्या...अब तेरी गलती है...हाहा..
प्रज्ञा : कोई गलती नहीं है पापा। मेरा पति इतना अच्छा मिला है तो मैने बोला । अब उसके अरमान जग गए है तो उसे भी चखा दीजिए अपना लन्ड पापा....बेचारी अभी तक कुवारी है । मेरी एज तो 18 साल है ओर मैने लौड़ा का मजा ले लिया पापा , मगर बेचारी को 25 साल की होने के बाबजूद लिंग के दर्शन भी नहीं हुए।
पापा: लिंग के दर्शन तो उसे हो चुके बेटी ।
प्रज्ञा : किसके लिंग के पापा।
पापा: मेरे .... और पापा ने सारी कहानी , जो उनके और यामिनी के बीच हुई , वो प्रज्ञा को बता दिया । पापा प्रज्ञा से कुछ छुपाना नहीं चाहते थे ।
प्रज्ञा अचंभित हो गई : वाह पापा, आप बड़े चालू निकले , बीवी और बीवी की दोस्त दोनों को लिंग दिखा दिया ।
पापा: ह्म्म...मैने बोला ना गलती से हुआ है । मगर अब उसके मन में जरूर अरमान प्रबल होने लगे होंगे बेटी , पुरुष से मिलन का।
प्रज्ञा : मेरी दोस्त तड़पे ये मुझे अच्छा नहीं लगेगा पापा । अगर उसके अरमान है तो आप अपना लिंग चखा दीजिए उसे । आप जैसे अपने मुझे इतने प्यार से सील तोड़ा। वो सुख उसे भी मिले तो मुझे कोई हर्ज नहीं ।
पापा के बांछे खिल गए : सच बेटी , मुझे लगा कि तुझे अच्छा नहीं लगेगा ।
प्रज्ञा : पापा प्यार बांटने से ही बढ़ता है । मै प्राची दीदी नहीं हु कि आप पे पाबंदी लगा दूं। आप मेरे दोस्त का भला ही करेंगे ।
पापा: वाह मेरी प्रज्ञा , बीवी हो तो ऐसी ।
पापा को जल्दी ही एक और सील पैक चुत खोलने का मौका मिलने वाला था ।
पापा: प्रज्ञा , यामिनी सच में मस्त माल है यार , उसके चुच बड़े बड़े है । जो मेरा मन ललचा गए थे । और उसकी चुत भी चॉकलेटी होगी । मज़ा आएगा ।
प्रज्ञा : मेरी दोस्त है पापा, उसे प्यासी मै नहीं देख सकती । आपको हक है कि आप उसे भी मेरे जैसा सुख दे । फिलहाल मुझे एकबार और आपकी जरूरत है पापा।
प्रज्ञा जोश में आ गई फिर से । अब प्रज्ञा जोश में आए तो पापा कैसे मना करते , उनका तो मन वैसे भी 5-6 बार करने से भरता है । अभी तो एक बार ही हुआ था । उनका बल्ले बल्ले हो गया ।
पापा ने फिर से एक राउंड प्रज्ञा की जम के चुदाई की । स्ट्रोक पे स्ट्रोक , चीत्कार पे चीत्कार, प्रज्ञा की आह.... ओह्ह्ह...ऊई..उफ़...अब चला । दोनों पसीने से लथपथ हो गए ,जब की AC चल रहा था । पापा ने इस बार भी प्रज्ञा की बच्चेदानी भर दी।
इसबार पापा ने नोटिस किया कि प्रज्ञा का चुत एकदम खुल गया है। सील फट गया है । और चुत पे सूजन हो गया है । पापा ने अब बस करने का फैसला लिया । और प्रज्ञा भी बहुत थक गई थी सुहागरात मना के । दोनों सुकू
न से नंगे ही एक दूसरे से चिपक के सो गए ।
इस तरह पापा ने आज अपनी छोटी बेटी प्रज्ञा को भी भोग लिया ।
रात के पापा और बेटी के मिलन के बाद सबेरे कमरे में काफी सन्नाटा था । पापा ओर प्रज्ञा अभी भी एकदूसरे से लिपटे नंगे ही पड़े हुए थे। घड़ी में समय 8:30 का हो चला था ओर बालकनी के शीशे वाली गेट और पर्दा से छन के थोड़ी बहुत धूप कमरे में आ रही थी ।
बेड एकदम बिखरा हुआ था । बेड पे साये दोनों मादा और नर का नंगापन , साथ में बेड पे पड़े खून के धब्बे , माल के छीटें जो सुख के कड़ी हो चुकी थी । चारों तरफ बिखरी गुलाब की पंखुड़ियां । रात को हुए सुहागरात की पहली चुदाई का गवाही दे रहा था । उधर प्रज्ञा के चुत पे सूजन भी हो गई थी । प्रज्ञा का नींद खुल गया । उसके पापा अभी भी उसे बाँहो में कसे सो रहे थे ।प्रज्ञा ने निगाहे नीचे छुका के देखो तो आपकी पापा का लौड़ा उसकी जांघों पर है और लिंग में टाइटन्स भी था पापा के । हाँ रात के चुदाई समय जैसा खड़ा था वैसा कड़क नहीं था ।
प्रज्ञा के मांग में पापा का वीर्य सुख के पपड़ी बन गया था । जो प्रज्ञा के बालों को जकड़ लिया था । प्रज्ञा को वो लम्हे याद कर के हंसी सी आ गई । पता नहीं पापा को रात को हो गया गया था । मेरे साथ क्या क्या कर डाला कल रात उन्होंने ।
प्रज्ञा ने घड़ी देखी तो समय 8:35 हो गया था । प्रज्ञा पापा को उठाने का सोची । प्रज्ञा पापा को हिलाते हुए : पापा , पापा, उठिए ना।
पापा की कोई प्रतिक्रिया नहीं ।
प्रज्ञा : पापा , ओह मेरे सैंया, उठ जाइए ।
पापा: हम्ममम...क्या हुआ...इतनी सबेरे क्यों जगा रही हो मेरी बच्ची, मेरी cutipie darling ।
और पापा ने उठाते ही प्रज्ञा को होंठो पे गई राउंड गिली पप्पिया की बरसात कर दी । सबेरे सबेरे दोनों का होंठ मिल गया था ।
आजा मेरी बेटी , पापा जरा अपना लिंग डाल के तेरी चुत की गहराई नाप ले जरा की रात को कितना खोल पाया हूं।
प्रज्ञा : नहीं नहीं पापा मुझे दर्द हो रहा है और चुत पे देखियें सूजन भी है ।
पापा: ला अभी ठीक कर देता हूं । पापा उठाते ही मूड में आ गए थे । पापा ने चुत पे एक चुम्मी ली और जीभ निकल के २ मिनट तक चाटते रहे ।
प्रज्ञा गिनगिना उठी । पापा : अब कोई सूजन नहीं । आ जरा ।
पापा ने प्रज्ञा को अपने आलिंगन में कसे हुए ही लिंग को चुत पे सेट किया ओर प्रेस कर दिया । चर चर की आवाज करता प्रज्ञा के योनि में पापा प्रवेश कर गए । प्रज्ञा मदहोश हो गई और मीठा दर्द का अनुभव करने लगी । उसके निचले होंठ को प्रज्ञा ने अपने दांतों में दबा के एक सिसकारी ली । बहुत सुखद अनुभव था उस मीठे दर्द का । पापा प्रेसर लगा के अगले पल पूरा का पूरा लन्ड अंदर घुसा दिए और टोपा बच्चेदानी को छू गया ।
फिर क्या था । प्रज्ञा की चीत्कार, पापा के स्ट्रोक की आवाज कमरे में अगले 15 मिनट तक होती रही । पापा निर्विरोध प्रज्ञा को थपथप करते हुए चोदे जा रहे थे । प्रज्ञा का बुर अब छितर गया था इस करना लिंग अभी आराम से अंदर बाहर ही रहा था । पापा प्रज्ञा के होंठों पे अपना होंठ मिलाए , प्रज्ञा के चुत पे धक्के मारते रहे ।
धक्के तेज हुए और कुछ पलों में ही फलफला के पापा ने प्रज्ञा के साथ creampie कर दिया । सारा पानी प्रज्ञा के चुत में भर दिया था । प्रज्ञा पापा का साथ देते हुए 15 मिनट में 4 बार झर गई थी ।
पापा सुकून की सांस लेने लगे । प्रज्ञा भी सुकून में दिख रही थी । छोटी बेटी को पापा 3 बार चुदाई के चुके थे रात से लेके अभी तक । अब 7 दिन तो दोनों को साथ एक कमरे ने ही रहना है । जब मन करेगा पापा, प्रज्ञा के बुर को जी भर के चोद सकते थे ।
तभी होटल सर्विस टेलीफोन पे घंटी बजी । पापा ने उठाया ।
पापा : हेलो।
स्टाफ जो पापा के सुहागरात का सारा इंतजाम करवाया था : हैलो सर ।
पापा: जी बताइए ।
पापा: सर , breakfast timing will be over in 10 to 15 mins , आपका रूम पे "Do not Disturbe" का साइन देखा तो आपके रूम का रिंग नहीं बजाया । ओर क्लिनी करने के लिए भी लेडी थोड़े टाइम में जाएगी । तो how you like to have ur breakfast sir ? Room service?
पापा: अरे , अच्छा , हां वही सही रहेगा । सुनिये 2 नहीं , 3 लोगों का ब्रेकफास्ट भिजवाना। और थोड़े देर में यामिनी आएगी तो उन्हें हमारे रूम में आने देना । We invited her for breakfast.
स्टाफ: अच्छा ओके सर नो प्रॉब्लम।
प्रज्ञा: वाह पापा यामिनी आ रही है ।
पापा : ह्म्म्म...मैने ब्रेकफास्ट पे इनवाइट तो किया था । फोन करो जरा ।
प्रज्ञा : वाव मेरे नॉटी बॉय, यामिनी से जुदाई सही नहीं जा रही ।
पापा : अब उसकी जुदाई, उसके चुदाई के बाद ही सही जाएगी बेटी , तेरी भी हरि झंडी मिल ही गई है तो शायद यामिनी को भी मर्द का एहसास जल्दी हो जाएगा ।
प्रज्ञा : ओके पापा, अभी कॉल करती हु , मगर उसने मना किया तो प्लीज़ कोई जबर्दस्ती मत करिएगा उसके साथ । उसका मन हो तभी मेरी हरि झंडी है पापा ।
पापा : जी मेरी मालकिन,ठीक है । वो मना नहीं कर पाएगी , तुम देखना ।
प्रज्ञा ने मुस्कुराते हुए फोन उठाया और यामिनी को कॉल लगा दिया , यामिनी के झट से फोन उठा लिया : हेलो मेरी दोस्त , कैसी हो प्रज्ञा , वाह तुमने हो मुझे कॉल कर दिया । मै थोड़े देर में तुम्हे करने ही वाली थी ।
प्रज्ञा : अच्छा , मेरी दोस्त , ऐसा क्या ।
यामिनी : हां , और बताओ दुल्हनिया , कैसी रही सैंया के साथ पहली रात का मिलन । पानी गया अंदर या अभी तक सूखी ही हो ?
प्रज्ञा शर्माते हुए : गया ना, 3 बार । २ बार रात को , एक तो अभी जस्ट ।
यामिनी : wao प्रज्ञा ,अभी जस्ट भी , वाह ,मै बहुत खुश हु तेरे लिए , फाइनली तुम्हारा डर दूर हुआ और पति देव का साथ तुम दे पाई। और बता ना कैसा रहा पूरा एक्सप्रेस, क्या क्या किया तेरे बदमाश हैंडसम हसबैंड ने ?
प्रज्ञा : सब बताऊंगी , आ जा तू नाश्ते के लिए , उन्होंने बोला था ना।
यामिनी : ह्म्म...मै आ ही रही थी होटल ही , आज 10 बजे से 3 बजे तक 3 दुल्हनों की मेहंदी लगानी है ।
प्रज्ञा : अच्छा आजा फिर , पहले ब्रेकफास्ट फिर काम।
यामिनी : ok पहुंच रही हूं, 10-15 मिनट में । फिर आराम से सारा स्टोरी बताना ।
प्रज्ञा : अच्छा , आप पहले आइए तो मेरी प्यारी यामिनी जी ।
पापा से : पापा , वो चल दी है , आ ही रही है 10 मिनट में ।
पापा: बढ़िया है । तू फ्रेश हो जा बेटी , फिर मै भी हो जाता हूं।
प्रज्ञा : ओके पापा।
प्रज्ञा उठ के बाथ रूम में चली गई नंगी ही ।
अचानक ही पापा के दिमाग में कुछ आया और वो प्रज्ञा के पीछे चल दिए । उनका लन्ड हवा में अटखेलिया कर रहा था ।
प्रज्ञा बाथ रूम में दाखिल हुई तो साथ में पापा भी दाखिल हो गए ।
प्रज्ञा: क्या हुआ पापा , मुझे फ्रेश होने बोल के आप भी आ गए।
पापा: ह्म्म...प्रज्ञा लोग फ्रेश क्यों होते है ।
प्रज्ञा : ताकि गंदा न रहे ।
पापा: तो मै तुझे गंदा कर दूंगा तब तो तू फ्रेश हो गई ना।
प्रज्ञा कुछ समझी नहीं , पापा ने प्रज्ञा को अंदर ले जा के । बाथरूम के फर्श पे बिठा दिया ।
पापा : प्रज्ञा , जरा मै अपना जल तुझे पिलाना चाहता हूं।
प्रज्ञा समझ गई क्या होने वाला है ।
प्रज्ञा : नहीं पापा ये नहीं कर पाऊंगी ।
पापा: बेटी , तू पियेगी भी और उससे नहाए गी भी । प्रज्ञा , एक बात मेरी समझ ले । मैं जो भी प्राची के साथ नहीं कर सका हूं वो सब तेरे साथ करना चाहता हूं। बस तू मेरा साथ बिना किसी विरोध के देती जा।
प्रज्ञा : मगर पापा.....
पापा ने उसके मुंह पे अपना उंगली रख के चुप होने को बोला ।
पापा: प्रज्ञा , एक बात याद रख , अब हमारे बीच एक अनोखा रिश्ता बनेगा , जिसमें विरोध की कोई गुंजाइश नहीं , सब निर्विरोध होगा , एक्सट्रीम लेवल का काम क्रीड़ा। और इस खेल में तुझे जो अनुभव और मजा मिलेगा मेरी बच्ची, उससे तू निहाल हो जाएगी ।
प्रज्ञा समझ गई पापा मनाने वाले नहीं है । पापा प्रज्ञा को अपना जल यानी पेशाब की धार चखना चाहते थे ।
प्रज्ञा को पापा ने घुटनों पे बैठने को बोला और प्रज्ञा को इस नए अनुभव से रुबरु, होने के लिए तैयार होना ही पड़ा।
प्रज्ञा बैठ गई और पापा उसके ठीक सामने खड़े हों गए और अपना लौड़ा अपने हाथों में थाम लिया ।
पापा: बेटी , मुंह खोल मेरी बच्ची ।
प्रज्ञा ने आ...कर के अपना मुंह पापा के सामने खोल दिया । पापा का लिंग प्रज्ञा के एकदम सामने था ।
पापा : तैयार मेरे रानी ?
प्रज्ञा ने बस सर हाँ में हिला दिया।
पापा ने थोड़ा जोर लगाया और एक मोटी मूत की धार उनके लिंग से झरने की तरह निकलने लगा ।
झूल झूल करता वो धार प्रज्ञा के मुंह में गिरने लगा , मगर प्रज्ञा एक भी घुट नहीं ले रही थी उस मूत का ।
पापा: थोड़ा गटक जा बेटी । बस थोड़ा सा ।
प्रज्ञा फिर भी मूत अंदर नहीं ले रही थी । पापा ने फिर जिद किया तो प्रज्ञा में कुछ मात्रा में उस मूत को अपने गले में उतरने दिया और गटक गई । एक घुट कुछ बुरा नहीं था ।
पापा ने देखा कि बेटी को अपना मूत पिला चुके है तो उसके मुंह से हट कर पूरे बॉडी पे ऐंम कर के मुतने लगे । प्रज्ञा पे पापा की मूत की धार झरने की तरह बहने लगी । और वो पूरी तरह मूत से सराबोर हो गई । उसे ऐसा लग रहा था जैसे वो गरम पानी से नहा रही हो ।
पापा की मूत खत्म हुई । अब पापा की बारी थी । वो बाथरूम के फ़र्श पे लेट गए और प्रज्ञा को अपने इर्द गिर्द पैर करके खड़े होने को बोला । फिर बोला : बेटी अपनी मूत की धार शायद मेरे लिंग पे टपकाते हुए लन्ड पे मूत दे । गिला कर दे इसे ।
प्रज्ञा बस पापा की आज्ञाकारी बेटी की तरह पालन कर रही थी । प्रज्ञा ने मुतना शुरू किया और जलधारा उसकी चुत से बेग से निकलने लगा और पापा के लन्ड पे गिरने लगा । पापा के लौडे पे , प्रज्ञा की पेशाब की तेज धार गिर रहा था , जो लन्ड पे तेज़ चपेट मार रहा था । पापा को बहुत मज़ा आ रहा था । प्रज्ञा भी शर्म से लाल थी । अपने पापा पे ही वो मूत रही थी ।पापा उसके मुतने के समय अपना लन्ड रगड़ रहे थे । पापा को बहुत मज़ा आगया । उसके बाद दोनों बाप बेटी ने साथ की फ्रेश हुए और नहाये । पापा को, भरे पानी में बाथटब में लेट के , प्रज्ञा की चुदाई करने का मन था । मगर यामिनी और नाश्ता दोनों कुछ ही देर में आने वाला था तो समय ज्यादा था नहीं । दोनों 15 मिनट में निकल गए । और कपड़े पहन के सज धज के रेडी हो गए ।
अब तो पापा का पूरा ध्यान एक और अनचुदी बुर खोलने पे था । यामिनी की कच्ची कली चॉकलेटी बुर।
यामिनी ने पापा को बाय कहा । और पापा ने भी उसे बाय कहने के बजाए , एक हग कर लिया और फिर उसके लिए कब का गेट खोल दिए : थैंक्यू यामिनी , फोर एवरीथिंग , जो अपने आज प्रज्ञा के लिए किया । आशा करता हु कि हमारे बीच हुए घटना का ज़िक्र आप प्रज्ञा से नहीं करेगी । वो जो मेरी गलती से आपको मेरा वो दिख गया था । सच में मै उसके लिए शर्मिंदा हूं, मुझे माफ कर दीजिएगा ।
यामिनी : please जीजी जी , इतना मत सोचिए , गलती सबसे होती है । वैसे मुझे बुरा नहीं लगा आपका वो । हाहाहा...
पापा : हाहाहा...लग रहा है , आपको बहुत पसंद आया है ।
यामिनी : ह्म्म्म...मुझे पसंद आया कि मेरे दोस्त को एक तगड़ा मर्द मिल रहा है ।
पापा : ह्म्म्म...ओके। चलिए जान के खुशी हुई । बस दोस्त के लिए ही खुश है या आपको भी ये मिल जाए तो खुश होंगी ।
यामिनी बस मुस्कुराई।
पापा: आपकी मनोदशा बता रही है कि आपको भी पसंद आया है मेरा लिंग ।
यामिनी ने हल्के से बोला : किस लड़की को पसंद नहीं आयेगा आपका वाला ।
पापा समझ गए कि इस ट्रिप में उन्हें एक और कच्ची कली मिलने वाली है । फिलहाल तो प्रज्ञा का यौवन उन्हें अपनी ओर ऊपर बुला रहा था ।
पापा: ओके यामिनी , घर पहुंच के एक मैसेज डाल दीजिएगा या कॉल के दीजिएगा ।
यामिनी : मै कॉल कर के आप दोनों को डिस्टर्ब नहीं करूंगी । मैसेज डाल दूंगी । ओर प्रज्ञा का ख्याल रखियेगा । और थोड़ा आराम से ।
पापा: घबराओ मत , सब अच्छा होगा । और कल सबेरे भी आप हमारे ब्रेकफास्ट पे ज्वाइन कर रही है । ठीक है ।
यामिनी : अच्छा देखती हूं।
कार का गेट बंद करते हुए पापा ड्राइवर से बोले : आराम से जाना भाई , सही से पहुंचना इनको घर तक।
और पापा ने यामिनी को बाय कहा ड्राइवर: जी सर ।
यामिनी को ये सब बहुत अच्छा लगा । कार चल पड़ी और पापा अपने दुल्हन के पास चल दिए । अब बस प्रज्ञा और वो , और आज रात का सुहाना तन्हा सफर।
पापा ऊपर जाने के लिए लिफ्ट में चढ़ गए । ऊपर कमरे में उनकी छुटकी प्रज्ञा उनका इंतजार कर रही थी । सुहागरात वो भी बिना शादी । ये पापा को अलग उत्तेजना दे रहा था । लिफ्ट में चढ़ते ही पापा को ये आभास हुआ कि वो ऊपर जा रहे है , वहां उनकी कच्ची कली बेटी अपना बुर उनके लन्ड के चोट से खुलवाने को तैयार बैठी है । उनका लौड़ा टनटना गया । खैर मनाइए लिफ्ट में कोई था नहीं , नहीं तो पापा के सलवार में बने तम्बू कोई भी नोटिस कर लेता । बड़ा सुखद एहसास था ये । बड़ी बेटी का चुत चोद के बच्चा लोड तो उन्होंने पहले ही कर दिया था , आज अपने छुटकी प्रज्ञा का भी छोटी सी बिल में अपना फनफ़नाता नाग का ठिकाना बनाने वाले थे पापा। जो भी हो आज रात चुदाई तो जबरदस्त होने वाली हो थी ।
पापा ऊपर पहुंच गए । उनका लिंग तन के एकदम 120° का एंगल, उनके शेरवानी के ढीले सलवार में बना दिया था । पापा ने हनीमून स्वीट के दरवाजे पे "Do Not Disturb" का एक टैग टांग दिए । वो उनके रूम में ही उपलब्ध था । इसका मतलब था कि अंदर चुदाई चल रही है , कोई भी डिस्टर्ब ना करे उन दोनों बाप बेटी को ।
पापा अंदर से दरवाज़ा अच्छे से बंद कर लिया । अब ये दरवाजा उनकी बेटी के सिल तोड़ चुदाई के बाद सुबह ही खुलने वाला था ।
उधर 18 साल की चढ़ती यौवन वाली नवयौवना , प्रज्ञा, सहमी बेड पे बैठी थी । पापा का इंतजार उसे भी बेसब्री से था । एक नया एहसास जीवन का उसे आज मिलने वाला था । एक जवान लड़की से आज महिला बनने का सफर रात भर तय करना था उसे । वो बस पापा का साथ खुल के देना चाहती थी ।
पापा रूम में दाखिल हो गए , और सीधे बालकनी की और गए । प्रज्ञा को ज़रा हैरानी हुई कि पापा उधर क्यों जा रहे है । बालकनी के पास जा के पापा ने सबसे पहले बालकनी का दरवाजा बंद किया , फिर उसके ऊपर पर्दा चढ़ा दिया । पापा प्रज्ञा को एकदम एकान्त में प्यार करना चाहते थे । प्रज्ञा का दिल ये देख के जोर से धड़कने लगा । उसे पता चल गया कि अब इस बंद कमरे में पापा को उसे प्यार करने से वो खुद भी रोक नहीं पाएगी ।
पापा बेड की ओर बढ़ चले । हाय रामा , प्रज्ञा क्या बला की खूबसूरत लड़की थी । एकदम मखमली बदन , संगमरमर सा तरसा हुआ यौवन , एकदम दमकती गोरी माल जैसे कोई रशियन लड़की हो । चुत भी एकदम गुलाबी , और चुत के अंदर से गुलाबी और लाल सी चुत की चमरी बाहर की ओर निकला हुआ था , जो पापा ने दिन में ही चख लिया था । क्या कसैला स्वाद था उस अनचुदी बुर का। पापा वो स्वाद फिर से चखना चाह रहे थे ।
पापा बेड पे आ के आराम से प्रज्ञा के सामने बैठ गए ।
पापा: प्रज्ञा ।
प्रज्ञा : जी पापा।
पापा: आज तुझे अपना बना लूंगा बेटी , बोल तैयार है ?
प्रज्ञा : हां पापा।
प्रज्ञा की आवाज थरथरा रही थी । उसे पापा का लिंग बहुत ज्यादा उत्तेजित कर रहा था । जिस लौड़े ने उसकी दीदी का चुत खोला था आज वही लौड़ा उसकी चुत के किस्मत में लिखा था ।
पापा: प्रज्ञा , आज बहुत ज़बरदस प्यास लगी है मुझे , तेरे बदन की प्यास , आज जी भर के तेरा चुचि चूसने का मन है , आज मन भर के तेरे चुत चाटने का मन है बेटी , आज मन भर के तुझे चोदने का मन है , नॉन स्टॉप , सटासट , निर्विरोध चुदाई । करने देगी ना।
प्रज्ञा शरम से पानी पानी हो चुकी थी । उसके होंठ थरथरा रहे थे । पहली बार ही प्रज्ञा को इतना फौलादी मर्द मिल गया था । जो आज उसके चुत के चिथरे उड़ा के रख देने वाला था अपने मोटे लौडे से ।
प्रज्ञा कुछ बोल नहीं पाई । पापा फिर से : बोल ना बेटी ।
प्रज्ञा बारी मुश्किल से बस इतना बोल पाई : जी पापा, अब तो आपकी हो चुकी हु मै।
पापा इतना सुनते ही : आजा मेरी छुटकी जानेमन , होठों से रसपान कर दे ज़रा।
इतना कहते हुए पापा ने प्रज्ञा को अपने अलिंगन में कस के गोद में बिठा लिया और उस के होंठो से होंठों का मिलन करा दिया । प्रज्ञा सहमी हुई , दुल्हन का जोड़ा पहने , पापा के गोद में बैठ थी , और पापा उसके थरथराती होंठ का कब्ज़ा ले चुके थे । चुप चुप चूं चुप... सरप्प सरूप.... की आवाज से कमरा गुलज़ार हो गया । प्रज्ञा खुश थी । कुछ समय तक पापा को ,अपनी नशीली निगाहों से , उनके आंखों में आंखें डाल के देखती रही , फिर उसकी आंखे बंद हो गई। पापा उसके होठों को किसी आम के जैसे चूसते रहे , और प्रज्ञा भी पापा को किस करती रही ।
पापा ने अपने मुंह के दवाब से प्रज्ञा का मुंह खोल दिया और उसके मुंह में अपना जीभ घुसा दिया । प्रज्ञा उनके जीभ को चूसने का नाकाम कोशिश करने लगी , जैसे कोई अनाड़ी लड़की हो। पापा को ये ओर जोश दिला रहा था । पापा लौडे का तान शायद आज से पहले इतना कड़क बस प्राची को पहली बार चोदने वाले दिन ही आया था ।
होठों से होठों का मिलन शायद 10-15 मिनट चलता रहा । प्रज्ञा का पूरा बदन पापा की गोद में थरथरा रहा था । शायद उसे भी पहली बार इतना जोश चढ़ा था ।
इसी बीच पापा ने हल्के हाथों से प्रज्ञा का पेट सहलाने लगे । कभी प्रज्ञा के गले पे तो कभी प्रज्ञा के कान के पास भी किस कर रहे थे । प्रज्ञा के उजोड़ तन चुके थे और स्तन का छोटा सा गुडी एकदम तन के मटर के दाने जैसा कड़ा हो गया था । पापा ने हाथ पेट से सरकते हुए उसकी चुचियो पे लाए और हल्के हाथो से ही प्रज्ञा के यौवन का जायज़ा लेने लगे । प्रज्ञा के मुंह से अनायास ही एक आवाज निकली : उह्हू...सीईईई.............।
पापा समझ गए, बेटी का यौवन ऊफान मार रहा है ।
पापा ने एक बार कस के प्रज्ञा का चुचि कपड़े के ऊपर से ही मसल दिया ।
प्रज्ञा : सीईईईई........आआह.......पापा.......।
पापा: उफ़....मेरी बेटी.....तेरी ये बेहतरीन जवानी.....।
प्रज्ञा उसे चुचि के दबाने से पूरी तरह गिनगिना उठी । और उसने लहंगे के नीचे से चुत को फड़कते महसूस किया ।
पापा अब उस जवान गोरी स्तनो का पान करना चाहते थे । झट झट वो प्रज्ञा का चोली खोलने लगे । प्रज्ञा मदहोश हो चुकी थी और पापा के साथ इस काम क्रीड़ा में रम गई थी । पापा ने प्रज्ञा की चोली जल्दी ही उतार के फर्स पे फेक दिया ।
प्रज्ञा की खरबूजा जैसी चुचिया अब बस ब्रा के पतले स्ट्रैप में कैद थी । प्रज्ञा ने एक चीत्कार भरी: सीईईई....पापा....आज पूरी नंगी कर दोगे क्या मुझे ?
पापा: पूरी की पूरी नंगी बेटी । पूड़ी तरह से नंगी ।
प्रज्ञा : आह पापा...मै सह नहीं पाई आपका मोटा मूसल तो ....
पापा: एकदम सह लोगी मेरी बच्ची । एकदम सह लोगी । इतना आराम से अंदर डालूंगा कि मक्खन की तरह आराम से जायेगा अंदर ।
प्रज्ञा : ओह...पापा...सीईईई...कितना झूठ बोलोगे । आपका लिंग तो मेरी कही मेरी चुत ना चिर के रख दे ।
पापा: ये सब मत सोच , अंदर जाने के बाद पहली बार जो तुझे मर्द का सुख भोगने को मिलेगा उसका सोच ।
प्रज्ञा भावबिभोर हो गई थी । पापा ने प्रज्ञा का स्तनो को अपने दोनों हाथों से थमा और एक बार धीरे से दबा दिया । प्रज्ञा की आंखें बंद हो गई । मदहोशी चरम पे थी ।
पापा ने प्रज्ञा के स्ट्रैप को सरकाया और एक चुचि को बाहर निकल दिया , गोरी गोलाई, गुलाबी निप्पल, एकदम मस्त । प्रज्ञा शर्मशार थी । पापा ने पूछा : चूम लूं तेरी यौवन मेरी बच्ची?
प्रज्ञा : आपका दिल करता है तो चूम लीजिए पापा ।
पापा: ओह मेरी बच्ची , दिल तो आज बहुत कुछ करने करने को करता है ।
प्रज्ञा : तो सब कर लो पापा ।
पापा ने प्रज्ञा के उस चुचि को मुंह पे भर लिया और लगे चुप चुप कर के चूसने । प्रज्ञा इस अनुभव से छटपटा सी गई ।
बस प्रज्ञा , पापा और तन्हाई में हो रहा उनका प्यार , कमरे में यही हो रहा था ।
पापा एक चुचि को मुंह पे भरे हुए ही ब्रा का हुक खोल , दोनों चुचियो को ब्रा के गिरफ्त से आजाद कर दिया । अब पापा को दोनों चुचियो का कब्जा मिल चुका था । पापा ने प्रज्ञा को अपने गोद से अब बेड पे लिटा दिया । और अपना शेरवानी का कुर्ता खोल प्रज्ञा के ऊपर छा गए । प्रज्ञा को ये सब बहुत जोश दिला रहा था । पापा अब बारी बारी प्रज्ञा के दोनों चुचियो को अपने होंठ लगा लगा के आराम आराम से चूसते रहे , जैसे आम चूस रहे हो।
पापा बिल्कुल नहीं रुक रहे थे । प्रज्ञा का कमर, पापा के इस जबर्दस्त चूसाई से , हवा में उठ के तैरने लगा । पापा प्रज्ञा के जोश देख के , प्रज्ञा के बूब्ज अब ज़ोर ज़ोर से दबाने और भींचने लगे । हर प्रेसिंग के बाद प्रज्ञा की आह निकल जाती थी : पापा.....सीईईई....आह्ह्ह्ह...धीरे धीरे करिए पापा ।
पापा कहां मनाने वाले थे । वो अब बेदर्दी से पापा का बूब्ज दबा रहे थे । प्रज्ञा अब चीत्कार मार मार के छटपटाने लगी । और उसके बुर से एक जल का बहाव छलछला के बह गई । प्रज्ञा पहली बार पापा के चूसाई से ही बह गई थी ।इस रात में चरम सुख पहली बार । और जब इतने में ही प्रज्ञा चु गई थी । तो अब आने वाले पलों में वो कितने बार झाड़ेगी उसका अंदेशा आप लगा सकते है ।
प्रज्ञा का बदन थोड़ा शांत हो गया ,मगर पापा स्तन पान करते ही रहे । चुपाचुप चूसाई।
लगभग पापा और प्रज्ञा का ये रसाकसी अगले 15-20 मिनट चलता रहा । प्रज्ञा की दोनों चूचियाँ लाल हो गई थी । पापा ने चूस चूस के दोनों गुडी भी फूला दिया था । साथ पापा का लिंग झटके मार रहा था । और प्रज्ञा को पेट पे पापा का लन्ड चुभ भी रहा था ।
आज सारी हदे पार होने वाली थी ।
पापा ने अब धीरे धीरे प्रज्ञा की सारी ज्वेलरी उतार दिया और अपना कब्ज़ा उसके होठों से ले कर चुचि और पेट तक कर दिया । कभी पागलो के तरह चूमते तो कभी जीभ निकल के चाटते। बेचारी 18 साल की नवयौवना पापा पे सर्वस्व लूटना चाहती थी आज और लुटा भी रही थी । पापा उसकी इज्जत के साथ अच्छे से खिलवाड़ कर रहे थे ।
पापा ने अब अपना हाथ प्रज्ञा के लहंगे पे फिराने लगे और नीचे जाके प्रज्ञा के कोमल गोरी पैरों को चूम लिया । प्रज्ञा झरने के बाद एकबार फिर जोशियाने लगी थी । प्रज्ञा के पांव में पायल झनझन कर रही थी । पापा प्रज्ञा के पैरों से सहलाते हुए प्रज्ञा का लहंगा अपने हाथों से सरकने लगे ऊपर की ओर। और जांघों तक उठा दिया ।ओफो प्रज्ञा का वो मखमली , कोमल , दूध सा सफेद जांघ। पापा उसपे हाथ फिराने लगे । उन्हें ऐसा लग रहा था जैसे बटर या मक्खन पे अपना हाथ चला रहे हो ।
पापा: मेरी बच्ची, बड़ी कोमल है तू तो।
प्रज्ञा: पापा , जैसी भी हू, बस अब आपकी ही हूँ।
पापा : उफ़ मेरी जान , आजा जरा चुत के दर्शन करा ।
पापा ने प्रज्ञा के लहंगे का नाड़ा खोल ,उसे खींज के कमर से सरकाते हुए पैरों तक ले गए और अलग कर दिया। प्रज्ञा जैसे पिघल सी गई , पापा के प्यार में । अब वो बस चड्डी में पापा के पास लेटी थी । पापा ने उसे भी सरका के निकल दिया । चुत के दर्शन हो गए ।दर्शन मात्र से ही पापा मदहोश हो गए ।
पापा: प्रज्ञा , तेरा अब कुछ सुंदर है , देख ना, कैसा तरसा हुआ चुत है तेरा । मन कर रहा है ,बस स्वाद चखाता रहू ।
प्रज्ञा कुछ बोलती उसे पहले ही पापा ने अपना जीभ निकल के मुंह प्रज्ञा के चुत पे लगा दिया । चुत से कसैला पानी निकल रहा था , सरप्प....कि आवाज के साथ पापा ने चुत का पानी अपनी मुंह में खींचा उसके बाद एक घुट मार लिया । उसके बाद पापा के होंठ प्रज्ञा के चुत के होठ पे जम गए । प्रज्ञा उतेजना से छटपटा पड़ी।
पापा अपने दोनों हाथों से प्रज्ञा का जांघों को पैर के नीचे से पकड़ लिया और पैरों को थोड़ा खोल दिया ,जिसे चुत खुल के पापा के सामने आ गई । बेटी की चुत । उनके छोटी बेटी प्रज्ञा की टेस्टी ,बटर जैसी मुलायम चुत । पापा ने मुंह में भर के चूसने लगे । कभी जीभ से चुत के दाने को झरते , तो कभी होंठो से चुत की पंखुड़ियों दबा देते , तो कभी जीभ से प्रेशर लगा के चुत के अंदर डाल के प्रज्ञा की सील यानी अंदरूनी झिल्ली को टच कर देते ।प्रज्ञा को पापा अपना हुनर दिखा रहे थे । पहली बार प्रज्ञा को ये आभास हुआ कि चुत किसी मर्द द्वारा चूस जाने पे इतना मजा दे सकता है।
पापा धीरे धीरे पागलो की तरह चुत पे अपना करतब दिखाने लगे । कभी कभी तो वो प्रज्ञा के झिल्ली में अपने जीभ से चोट के देते जिसे उसे हल्का दर्द भी उठ जाता । प्रज्ञा को पता नहीं नहीं चला कि कब उसका कमर हवा में उछलने लगा था । और हवा में लहराना बढ़ता ही गया । जब जब वो फोर्स लगा के अपना गांड उठाती , उसका चुत पापा के मुंह पे रगड़ जाता और वो आहे भरने लगती और सीसीया भी जाती । प्रज्ञा स्वर में तैर रही थी । पापा भी मक्खन में अपना मुंह डुबोए मजा ले रहे थे । ये सिलसिला अगले 10मिनट तक चलता रहा । अचानक प्रज्ञा का आवाज तेज से तेज होने लगा , आहे दीवारों को चीरने जैसा था । प्रज्ञा अह्ह्ह... आह्ह्ह्ह....कमरे में चारों तरफ की दीवार से टकरा के गूंज रहा था । अचानक से प्रज्ञा को एक बार फिर से जोर का उद्वेग आया, शरीर अकड़ने लगा और उसके चुत ने छलछला के पानी बह दिया । पापा को एक प्रज्ञा के चुत से एक धार आ निकलता महसूस हुआ और वो बिना देरी के प्रज्ञा का रसपान के लिए । चुत रस का रसपान। प्रज्ञा का जैसे सर दम चुत के ही निकल गया हो उस धारा के साथ ।
पापा ने जब मुंह हटाया प्रज्ञा के चुत से तो चुत के आजू बाजू का एरिया सुर्ख लाल हो गया था । वो थी ही इतनी गोरी की एक चाटा भी उसे मार दो तो लाल लाल दाग उभर आए ।
पापा ने प्रज्ञा से कहा : कैसा लगा मेरी बच्ची ?
प्रज्ञा : मत पूछिए पापा , आप का अंदाज मुझे पागल कर रहा था । मै तो अलग दुनिया में थी पापा।
पापा: मुझे भी तेरा ये कसैले स्वाद वाले चुत का अब बुरी आदत लगने वाली है । एकदम मक्खन है ।
प्रज्ञा शर्मा गई ।
पापा : प्रज्ञा ।
प्रज्ञा आंखे मूंदे : ह्म्म्म...पापा।
पापा: लॉलीपॉप चूसेंगी?
प्रज्ञा : इस प्यार के बीच लॉलीपॉप पापा ?
पापा: अरे अपने पापा का लॉलीपॉप?
प्रज्ञा : मै कुछ समझी नहीं पापा।
पापा ने अपने ढीले सालवार में बने तम्बू दिखाते हुए अपने लौडे के तरफ इशारा किया ।
प्रज्ञा अभी समझ गई : अच्छा पापा वो । मैने कभी नहीं किया है पापा।
पापा: आज तक चुदाई की है ?
प्रज्ञा : नहीं पापा।
पापा: तो आज हो रही है ना, फिर ये भी पहली बार कर रही हो ना।
प्रज्ञा: हां
पापा: तो फिर , आओ और ज़रा मेरी लॉलीपॉप का स्वाद चखो मेरी बच्ची । आगे आने वाले पलों में और आज के बाद तुझे ये लॉलीपॉप बड़ा सुख देने वाला है । इससे निकला बीज तेरे बुर को सींच के बच्चा भी देने वाला है बेटी । अब जब मुझे पति मान चुकी हो तो शादी तो होगा ही हमारा , उसके बाद बच्चा तो होगा। क्योंकि मै तो तेरे साथ जम के प्यार और चुदाई करने वाला हु मेरी बच्ची । इसी लॉलीपॉप से।
प्रज्ञा को पापा ने पकड़ के उठाया और खुद चित लेट गए ।
पापा: आ बेटी , जरा चूस दे , जितना गीला इसे करेगी , उतना दर्द कम होगा घुसने में तेरे चुत में ।
प्रज्ञा : अच्छा पापा, मै आपका पजामा खोल दूं फिर।
पापा: खोलेगी नहीं तो लॉलीपॉप का स्वाद कैसे लेगी बेटी ।
प्रज्ञा पापा का सलवार का नाड़ा खोलने लगी । ये नाडा यामिनी ने बांधी थी और प्रज्ञा खोल रही थी ।
पापा के टांगों से निकल के प्रज्ञा ने पापा को बस चड्डी में ला दिया था । पापा के जांघिया में ऐसा बड़ा सा तम्बू बना था और लग रहा था कि अभी कच्चा चीर के निकल जाएगा बाहर । प्रज्ञा शर्म के साथ सहम भी गई । अपने छोटे छोटे हाथों की उंगलियों से एकबार उस तम्बू को टच किया । बमपिलाठ था पापा का लिंग।
पापा: खोल बेटी पूरा खोल , जरा आजाद कर इसे , चड्डी में कैद कैद दर्द करने लगा है दबाव से ।
प्रज्ञा : ओह पापा , रुकिए तुरत खोलती हूं।
प्रज्ञा ने जैसे ही चड्डी नीचे खींचा । लन्ड झटका खाता , उछल के बाहर आ गया । एकदम 180° का एंगल । लिंग में जोश के कारण नसे उभर आई थी । लिंग का सुपारा लाल हो चुका था और एक बड़े से आलू जैसा फूला हुआ था । एकदम सख्त ।
पापा: प्रज्ञा , जरा चमरी नीचे खींच दे बड़ा दर्द हो रहा है ।
पापा का आधा सुपारा अभी भी टाइट चमरी से दब रहा था । प्रज्ञा ने मोटे चमरी को , कस के दम लगा के नीचे खींचा और पापा का सुपारा से चमरी पूरा हट गया । पापा का सुपारा जी इतना मोटा था जितना तो प्रज्ञा का पूरा चुत का चिरान भी नहीं था । चुत का छेद से शायद 5-6 गुना मोटा । प्रज्ञा की हालत खराब तो होने वाली थी ।
पापा ने प्रज्ञा का सर को पकड़ के हल्के से अपने लिंग की ओर बढ़ने की कोशिश की ओर बोला : चूसो बेटी ।
प्रज्ञा ने मुंह खोला ,पर जितना उसने खोला उसमें सुपारा नहीं समा सका।
प्रज्ञा ने ओर बड़ा मुंह खोला तब जा के उसके मुंह में लिंग घुस पाया । प्रज्ञा लिंग को अनाड़ी खिलाड़ी के जैसा चूसने की कोशिश करती रही । कभी जीभ से चाटने का प्रज्ञास करती तो कभी चूसने का । कभी कभी गलती से सुपारे में दांत भी लगा दे रही थी । पापा का मिजाज दांत लगते हो एकदम से झनझना जाता था । पापा ने थोड़ा दबाव बनाया तो प्रज्ञा गौक गौक करने लगती और उसकी सांसे उखड़ने लगती । पापा समझ गए पहली बार है तो जायदा ट्राई करना भी ठीक नहीं है। पापा प्रज्ञा के साथ अभी तक एकदम जेंटली प्यार करते आ रहे थे । बस चुत चूसाई ही उन्होंने थोड़ा जबरदस्त तरीके से किया था ।
पापा ने इस बीच प्रज्ञा को घूम के अपने मुंह ले बैठ के उनका लन्ड चूसने को बोला । प्रज्ञा ने पापा का आज्ञा का पालन किया और वो पापा के मुंह पे बैठने लगी । पापा ने प्रज्ञा का कमर पकड़ के सीधे उसका चुत का मुहाना पाने मुंह पे लगा दिया । और प्रज्ञा उनका लन्ड पकड़ के चूसने लगी । ये बाप बेटी एक दूसरे को 69 पोजीशन में सुख प्रधान के रहे थे । ये सिलसिला भी अलगे 20 मिनट तक चलता रहा । प्रज्ञा दुवारा फूल जोश में आ चुकी थी । और पापा के मुंह पे अपना कमर चला के चुत रगड़ रही थी । पापा समझ गए अब देर करना ठीक नहीं ।
पापा : प्रज्ञा , हो गया बेटी , आ नीचे चित के लेट जा ।
पापा ने ओर कुछ नहीं बोला । प्रज्ञा नीचे लेट गई ।
पापा ने प्रज्ञा के गांड के नीचे एक तकिया लगाया । और बेड के बगल में पड़े उस टोकरी से तेल की शीशी निकल के अपने लिंग में अच्छे से लगाने लगे। प्रज्ञा पापा को एक टक से देख रही थी । उसको पता चल गया कि अब क्या होने वाला है । जिस पल का इंतजार था वो होने वाला था । पापा प्रज्ञा में प्रवेश लेने वाले थे ।
पापा ने प्रज्ञा के चुत के मुहाने पे लुब्रिकेंट का डब्बा खोल के बहुत सारा उसके चुत ले चपोर दिया । प्रज्ञा की चुत चिकनाई से भर गई थी ।
पापा: बेटी , वो पल आ गया है । जब तेरा कौमार्य मै भंग करने वाला हूं। आज से तेरा चुत मेरे नाम हुआ । मै तेरे अंदर प्रवेश लेने वाला हु प्रज्ञा । तेरा सील अब टूटने वाला है । दर्द भी हो तो घबराना नहीं ,मै रहूंगा तुम्हारे साथ । और दर्द के बाद जो मजा है । वो तुम्हे पा के जो तृप्ति मिलेगी । उसके बाद तू अपने आप को मिलन के लिए रोक ना सकेगी । तैयार है मेरी बच्ची ?
प्रज्ञा ने सर हिला के हां बोला ।
पापा: कोंडोम की जरूरत नहीं है बेटी । प्यार किया है और शादी भी कर लूँगा। प्यार की निशानी आज नहीं तो कल आयेगा ही । चलेगा ना तुझे बिना कोंडोम के चुदाई ?
प्रज्ञा ने सर हां में हिलाया ।
पापा: आजा मेरी बच्ची । आजा तुझे अच्छे से प्यार करूं । चुदाई करूँ। आज घुसने दे मेरा लिंग अपने बुर में ।
प्रज्ञा ने अपनी आंखें बंद कर ली ।
पापा : प्रज्ञा आंखे खोल बेटी , और मुझे देख , मै चाहता हूं, जब मै पहली बार तेरे योनि में समाऊ तो तेरे नज़रे मुझे देख रही हो ।
प्रज्ञा ने आंखे खोल दी । वो बस अपने पापा का साथ देना चाहती थी । उसके आंखों में लाल डोरे उसके जोश में होने की गावाही दे रहे थे ।
चुदाई की बेला आ गई । पापा ने प्रज्ञा के चुत पे अपना सुपारा से ऊपर से नीचे तक सहलाने लगे । पापा का लन्ड प्रज्ञा के चुत पे सटते ही प्रज्ञा को एक करेंट सा लगा । सुपारा गरम था , ऐसा प्रज्ञा को महसूस हुआ ।
पापा ने प्रज्ञा का चुत बिंदोर के देखा तो चुत के अंदर एकदम पिंक और लाल सा था। झिल्ली साफ दिख रहा, एकदम छोटा सा छेद और जो कि बंद था । पापा को इसी को अपने लौडे के चोट से चीर देना था । पापा ने अपने चिपचिपा और चिकना लिंग का टोपा से प्रज्ञा के पूरे चुत , चुत के निकली चमरी , चुत के अगल बगल , मसाज सा करने लगे । प्रज्ञा का जोश और बढ़ता चला गया । पापा उसे तड़पा रहे थे । बस उसके चुत को छेड़ रहे थे । प्रज्ञा का चुत लूप लूप कर के पापा का लन्ड अंदर लेना चाह रहा था , मगर पापा है कि वार ही नहीं कर रहे । पापा प्रज्ञा को इसी तरह , अगले 5 मिनट तक छेड़ते रहे , प्रज्ञा की आंखें जोश से पथराने लगी और बंद होने लगी ।
पापा ने बोला: प्रज्ञा आंखे खोल मेरी बच्ची ।
प्रज्ञा ने जैसे ही अपना आंख खोल , पापा के आंखों से मिलाया । पापा ने बिना प्रज्ञा को बताए , बिना तैयार हो जाने या चेतावनी दिए , एक स्टॉक कस के चुत के मुहाने पे अपने लौडे से लगा दिया ।
पक्ककक....कि आवाज ऐसे आई जैसे किसी कोल्डिंक का ढक्कन खुला हो। उस आवाज के साथ ही प्रज्ञा के चुत में पाप का सुपारा दस्तक दे चुका था । प्रज्ञा के आंखों से आंसू का एक मोटा धार निकल गया और तकिया को भिगो गया । प्रज्ञा चीखना चाही मगर उसकी आवाज जैसे अटक गई हो । पापा के उस स्ट्रोक में प्रज्ञा का सिल तोड़ दिया था ।
प्रज्ञा अगले कुछ पल बाद चीत्कार उठी : पापा , बहुत दर्द हो रहा है ।
उसका आवाज बहुत धीमा था । ऐसा लग रहा था उसका दम खत्म हो गया है । पापा का बस सुपारा ही चुत में गया था वो भी , 60% ही, पापा ने प्रज्ञा की प्रतिक्रिया पे ध्यान ना देते हुए इस बार दूसरा स्ट्रोक मारा । स्ट्रोक जबदस्त था और प्रज्ञा को भी उछाल दिया था उस धक्के ने । इस बार पापा का आधा लिंग प्रज्ञा के चुत को चीर के समा गया । प्रज्ञा इस बार चिल्ला उठी : aaaahhhhhh.....पापा.....नहीं......मर जाऊंगी पापा.....बहुत दर्द हो रहा है .....आआ......ओह्ह्ह्ह.... ऊहह....पापा....रहम करिए पाप.....बहुत दर्द हो रहा है ....... और वो रोने लगी ।
उसके आंखों से आंसू निकल रहे थे ।
पापा: बस बस बस.....हो गया मेरी बाबू....हो गया...पापा का लिंग चला गया अंदर । हो गया मेरी बच्ची....बस ।
इतना बोल के पापा प्रज्ञा के शरीर को आलिंगन में भर लिए और चुचि को हल्के हल्के दबाने लगे।
प्रज्ञा रोये जा रही थी । पापा ने झुक के देखा , प्रज्ञा के चुत में उनका लिंग आधा ही अंदर था । पूरा चीरा गया था और चीरा के फैला हुआ था और लिंग उसमें टाइट कसा हुआ । हल्का सा खून भी लिंग के इर्द गिर्द लगा हुआ था सो प्रज्ञा का कौमार्य भंग होने की निशानी था। पापा प्रज्ञा के चुत में पूरा समाना चाहते थे । मगर अभी और अंदर ठेलना, प्रज्ञा के लिए बहुत जायदा दर्द भरा हो सकता था ।
पापा वही प्रज्ञा के ऊपर लेटे रहे। प्रज्ञा रोती रही । पापा की कान में प्रज्ञा के रोने के साथ साथ , हल्की हल्की आवाज में , लिंग को उसकी चुत से निकल लेने की बिनती भी सुनाई दे रही थी ।
प्रज्ञा एकदम धीरे धीरे ओर लगातार बस ये अब बोलते जा रही थी , वो भी रोते और सुबकते हुए : पापा....रहम....आह...कीजिए ना....पापा....निकल...आह्ह्ह...निकल लीजिए ना इसे....मै नहीं सह पा रही हु पापा....बहुत दर्द हो रहा है....अहह..... ओह्ह्ह्ह...सीईईई.... प्लीज़ पा....पा.... उफ्फ.....
पापा बस आधा लिंग घुसाए लेटे रहे प्रज्ञा के ऊपर । उसके कोई भी बिनती सुन के रहम नहीं दिखाया । क्योंकि अगर पापा रहम दिखा के अभी निकल लेते तो शायद पूरी रात बर्बाद हो जाती । और प्रज्ञा दुबारा उन्हें अंदर नहीं घुसने देती । और बाद में भी शायद चुदाई के नाम से ही डरती ।
5-10 मिनट में प्रज्ञा का रोना, सुबकने में बदला, और फिर एकदम बंद हो गया । पापा ने प्रज्ञा को जैसे ही शांत पाया , हल्के हल्के झटके के साथ चुदाई चालु किया। पहले एकदम धीरे से २-३ बार छोटे छोटे धक्के । प्रज्ञा ने भी उन धक्के का जवाब दिया और हल्के से गांड उठा कर अपने चुत को पापा के लन्ड के प्रतिरोध में धकेला।
पापा प्रज्ञा को जोश में लाने में कामयाब रहे ।
पापा: प्रज्ञा , दर्द अब भी है ।
प्रज्ञा धीमे से : थोड़ा थोड़ा पापा।
पापा: अब मजा आयेगा ।
पापा ने चुदाई शुरू किया । वो अभी भी प्रज्ञा को आधे लन्ड से ही चोदने लगे । पापा का लिंग प्रज्ञा के चुत में , अंदर बाहर , अंदर बाहर , लगातार होने लगा। प्रज्ञा भी अब रोना खत्म कर के सिसकारियां मारने लगी थी । पापा आराम आराम से ऐसे ही 5 मिनट तक प्रज्ञा को चोदते रहे । प्रज्ञा अब पूरी मदहोश हो के खुद लन्ड में अपने कमर चला के चुत में ले रही थी । पापा वही आधा लन्ड घुसा रहे थे । जब उन्होंने देख प्रज्ञा पूरी तरह से जोशीया चुकी है , कि पापा ने ताव में आ के कच से एक जबरदस्त सा धक्का मारा प्रज्ञा के चुत के अंदर । लन्ड पूरा का पूरा अब प्रज्ञा के चुत में उतर चुका था । लिंग का टोपा ,बच्चेदानी में टकरा गया था ।
प्रज्ञा को फिर से एक असहनीय दर्द हुआ ।
प्रज्ञा : aahhhhhhh.....पापा........बस ना.......उफ़.....
मगर इसबार जोश इतना ज्यादा चढ़ा हुआ था उसे की सहने में कामयाब रही । पापा लगभग २ मिनट ऐसे ही घुसा के रुकने के बाद धीरे धीरे पूरे लन्ड से चुदाई करने लगे ।
धीरे धीरे चुदाई के कारण पापा झर नहीं रहे थे । मगर प्राची का चुत उनकी लिंग में इतना टाइट जकड़ा हुआ था कि सहना मुश्किल था ।
पापा धीरे धीरे स्पीड बढ़ा दिए । मगर 5 मिनट चोदने के बाद ही प्रज्ञा का शरीर झटके खाने लगा और प्रज्ञा झरने लगी । पापा को लिंग प्रज्ञा के चुत रस से और गीला होता प्रतीत हुआ । फिर क्या था , पापा फुल स्ट्रोक , जोश से भर में मरने लगे ।
पापा ने चुदाई के रफ्तार बढ़ा दी । कमरे में बस तीन ही आवाज गूंज रही थी । एक पापा और प्रज्ञा की जोश भड़ी चीत्कार ।
पापा : आह....uhhhhhhhhhh....ehhhhhhh....उफ़....प्रज्ञा गजब की है तेरी चुत बेटी , एकदम टाइट....।
प्रज्ञा : आह पापा.... चोदते रहिये अपनी छोटी बेटी को....निहाल कर दीजिए....आह्ह....आईईईई...सीई....पापा
दूसरा पापा का जोर जोर से चुत पे स्टॉक लगाने की आवाज : ठप... ठप....ठप...ठप....ठप...
तीसरा प्रज्ञा की पायल की आवाज : छन....छन...छन...छन...
पापा के नीचे पड़ी प्रज्ञा एकदम छोटी बच्ची जैसी लग रही थी और पापा किसी दानव सा एकदम मूसल लन्ड पेले जा रहे थे ।
पापा के अंडकोष प्रज्ञा के टांगों के बीच गांड की छेद पर चोट कर रहा था । पापा ने अब अपना दोनों हाथ प्रज्ञा के चुतरो के नीचे ले जा के उसे कस के पकड़ लिया , और फिर और तेज स्ट्रोक मारने लगे । ठपाक ठपाक....ठप....ठप...
कमरा चीत्कार का गवाही बनता रहा । पापा ने अचानक स्ट्रोक बहुत तेज कर दिया । प्रज्ञा का रोम रोम हिल गया । और इस स्पीड में पापा ने प्रज्ञा की 1 मिनट तक चुदाई की जिसमें प्रज्ञा 30-30 sec में दो बार झड़ गई । जब प्रज्ञा दूसरी बार झड़ी तो पापा भी प्रज्ञा के चुत का टाइटंस सह नहीं पाए और थरथराते हुए अपना माल प्रज्ञा के बच्चेदानी में भर दिया । सुहागरात सफल हुआ । प्रज्ञा बिना शादी ही सुहागन बन गई । पापा ने अपना लिंग बाहर खींचा तो बहुत सारा वीर्य प्रज्ञा के चुत से बाहर भी गिरने लगा । शायद बच्चेदानी पूरी भर गई थी ।
पापा ने प्रज्ञा की बोला: प्रज्ञा आ मै तेरी मांग अपने माल से भर देता हूं। सिंदूर लगा के तो सब भरते है , तेरा मांग मेरे वीर्य से भरेगा ।
प्रज्ञा ने पापा का आदेश मानते हुए अपना सर आगे के दिया । पापा बेड पे ही खड़े हो गए और उनका लन्ड अभी भी वीर्य से लथपथ था , उसी वीर्य से पापा ने प्रज्ञा की मांग पे लन्ड रगड़ के वीर्य से भर दिया। प्रज्ञा सुहागिन हो चुकी थी । पापा की सुहागिन। पापा की दूसरी पत्नी ।
दोनों हांफते हुए एक दूसरे के बाहों में गिर गए और लेट गए ।
प्रज्ञा लंबी लंबी सांसे लेने लगी थी । पापा आज प्रज्ञा संग वो प्राची वाली गलती नहीं करना चाहते थे । प्राची को उन्होंने पहली रात को ही 5 बार पेला था । प्रज्ञा को भी अगर वो 5 राउंड की चुदाई करने लगे तो वो भी एक महीने तक शायद सेक्स करने लायक नहीं बचे ।
प्रज्ञा : आह पापा , दर्द तो बहुत हुआ , पर मजा भी बड़ा आया । थैंक्यू पापा ,मेरे हसबैंड बनने के लिए ।
पापा: आह...तुझे चोद के बड़ा सुकून मिला बेटी , मै तो तड़प रहा था तुझे पाने के लिए ।
प्रज्ञा पापा से कस के लिपट गई । आज उसे मर्द का सुख मिल गया था ।
दोनों रोमांटिक बाते करते रहे । थोड़े समय बात होने के बाद प्रज्ञा ने पापा से पूछा : पापा , यामिनी बड़ी अच्छी लड़की है ना। बड़ी मदद की उसने हमारी ।
पापा: ह्म्म्म... बेटी सच में ।
प्रज्ञा : देखिए ना , एक ही दिन में कितनी अच्छी दोस्त बन गई मेरी ।
पापा: हां...ओर तूने तो मेरे सारे राज भी उसे बता दिए है । की मेरा कितना बड़ा है ।
प्रज्ञा : तो क्या झूठ कहा मैने पापा।
पापा: हाहा... झूठ नहीं कहा ठीक है ...मगर वो भी तो एक लड़की है...इस तरह का लिंग है सुन के उसके अरमान भी तो जग गए होंगे ।
प्रज्ञा : हां सही कहा पापा...इसीलिए शायद कह रही थी कि आपकी जैसा पति चाहिए उसको ।
पापा: हां... और क्या...अब तेरी गलती है...हाहा..
प्रज्ञा : कोई गलती नहीं है पापा। मेरा पति इतना अच्छा मिला है तो मैने बोला । अब उसके अरमान जग गए है तो उसे भी चखा दीजिए अपना लन्ड पापा....बेचारी अभी तक कुवारी है । मेरी एज तो 18 साल है ओर मैने लौड़ा का मजा ले लिया पापा , मगर बेचारी को 25 साल की होने के बाबजूद लिंग के दर्शन भी नहीं हुए।
पापा: लिंग के दर्शन तो उसे हो चुके बेटी ।
प्रज्ञा : किसके लिंग के पापा।
पापा: मेरे .... और पापा ने सारी कहानी , जो उनके और यामिनी के बीच हुई , वो प्रज्ञा को बता दिया । पापा प्रज्ञा से कुछ छुपाना नहीं चाहते थे ।
प्रज्ञा अचंभित हो गई : वाह पापा, आप बड़े चालू निकले , बीवी और बीवी की दोस्त दोनों को लिंग दिखा दिया ।
पापा: ह्म्म...मैने बोला ना गलती से हुआ है । मगर अब उसके मन में जरूर अरमान प्रबल होने लगे होंगे बेटी , पुरुष से मिलन का।
प्रज्ञा : मेरी दोस्त तड़पे ये मुझे अच्छा नहीं लगेगा पापा । अगर उसके अरमान है तो आप अपना लिंग चखा दीजिए उसे । आप जैसे अपने मुझे इतने प्यार से सील तोड़ा। वो सुख उसे भी मिले तो मुझे कोई हर्ज नहीं ।
पापा के बांछे खिल गए : सच बेटी , मुझे लगा कि तुझे अच्छा नहीं लगेगा ।
प्रज्ञा : पापा प्यार बांटने से ही बढ़ता है । मै प्राची दीदी नहीं हु कि आप पे पाबंदी लगा दूं। आप मेरे दोस्त का भला ही करेंगे ।
पापा: वाह मेरी प्रज्ञा , बीवी हो तो ऐसी ।
पापा को जल्दी ही एक और सील पैक चुत खोलने का मौका मिलने वाला था ।
पापा: प्रज्ञा , यामिनी सच में मस्त माल है यार , उसके चुच बड़े बड़े है । जो मेरा मन ललचा गए थे । और उसकी चुत भी चॉकलेटी होगी । मज़ा आएगा ।
प्रज्ञा : मेरी दोस्त है पापा, उसे प्यासी मै नहीं देख सकती । आपको हक है कि आप उसे भी मेरे जैसा सुख दे । फिलहाल मुझे एकबार और आपकी जरूरत है पापा।
प्रज्ञा जोश में आ गई फिर से । अब प्रज्ञा जोश में आए तो पापा कैसे मना करते , उनका तो मन वैसे भी 5-6 बार करने से भरता है । अभी तो एक बार ही हुआ था । उनका बल्ले बल्ले हो गया ।
पापा ने फिर से एक राउंड प्रज्ञा की जम के चुदाई की । स्ट्रोक पे स्ट्रोक , चीत्कार पे चीत्कार, प्रज्ञा की आह.... ओह्ह्ह...ऊई..उफ़...अब चला । दोनों पसीने से लथपथ हो गए ,जब की AC चल रहा था । पापा ने इस बार भी प्रज्ञा की बच्चेदानी भर दी।
इसबार पापा ने नोटिस किया कि प्रज्ञा का चुत एकदम खुल गया है। सील फट गया है । और चुत पे सूजन हो गया है । पापा ने अब बस करने का फैसला लिया । और प्रज्ञा भी बहुत थक गई थी सुहागरात मना के । दोनों सुकू
न से नंगे ही एक दूसरे से चिपक के सो गए ।
इस तरह पापा ने आज अपनी छोटी बेटी प्रज्ञा को भी भोग लिया ।
रात के पापा और बेटी के मिलन के बाद सबेरे कमरे में काफी सन्नाटा था । पापा ओर प्रज्ञा अभी भी एकदूसरे से लिपटे नंगे ही पड़े हुए थे। घड़ी में समय 8:30 का हो चला था ओर बालकनी के शीशे वाली गेट और पर्दा से छन के थोड़ी बहुत धूप कमरे में आ रही थी ।
बेड एकदम बिखरा हुआ था । बेड पे साये दोनों मादा और नर का नंगापन , साथ में बेड पे पड़े खून के धब्बे , माल के छीटें जो सुख के कड़ी हो चुकी थी । चारों तरफ बिखरी गुलाब की पंखुड़ियां । रात को हुए सुहागरात की पहली चुदाई का गवाही दे रहा था । उधर प्रज्ञा के चुत पे सूजन भी हो गई थी । प्रज्ञा का नींद खुल गया । उसके पापा अभी भी उसे बाँहो में कसे सो रहे थे ।प्रज्ञा ने निगाहे नीचे छुका के देखो तो आपकी पापा का लौड़ा उसकी जांघों पर है और लिंग में टाइटन्स भी था पापा के । हाँ रात के चुदाई समय जैसा खड़ा था वैसा कड़क नहीं था ।
प्रज्ञा के मांग में पापा का वीर्य सुख के पपड़ी बन गया था । जो प्रज्ञा के बालों को जकड़ लिया था । प्रज्ञा को वो लम्हे याद कर के हंसी सी आ गई । पता नहीं पापा को रात को हो गया गया था । मेरे साथ क्या क्या कर डाला कल रात उन्होंने ।
प्रज्ञा ने घड़ी देखी तो समय 8:35 हो गया था । प्रज्ञा पापा को उठाने का सोची । प्रज्ञा पापा को हिलाते हुए : पापा , पापा, उठिए ना।
पापा की कोई प्रतिक्रिया नहीं ।
प्रज्ञा : पापा , ओह मेरे सैंया, उठ जाइए ।
पापा: हम्ममम...क्या हुआ...इतनी सबेरे क्यों जगा रही हो मेरी बच्ची, मेरी cutipie darling ।
और पापा ने उठाते ही प्रज्ञा को होंठो पे गई राउंड गिली पप्पिया की बरसात कर दी । सबेरे सबेरे दोनों का होंठ मिल गया था ।
आजा मेरी बेटी , पापा जरा अपना लिंग डाल के तेरी चुत की गहराई नाप ले जरा की रात को कितना खोल पाया हूं।
प्रज्ञा : नहीं नहीं पापा मुझे दर्द हो रहा है और चुत पे देखियें सूजन भी है ।
पापा: ला अभी ठीक कर देता हूं । पापा उठाते ही मूड में आ गए थे । पापा ने चुत पे एक चुम्मी ली और जीभ निकल के २ मिनट तक चाटते रहे ।
प्रज्ञा गिनगिना उठी । पापा : अब कोई सूजन नहीं । आ जरा ।
पापा ने प्रज्ञा को अपने आलिंगन में कसे हुए ही लिंग को चुत पे सेट किया ओर प्रेस कर दिया । चर चर की आवाज करता प्रज्ञा के योनि में पापा प्रवेश कर गए । प्रज्ञा मदहोश हो गई और मीठा दर्द का अनुभव करने लगी । उसके निचले होंठ को प्रज्ञा ने अपने दांतों में दबा के एक सिसकारी ली । बहुत सुखद अनुभव था उस मीठे दर्द का । पापा प्रेसर लगा के अगले पल पूरा का पूरा लन्ड अंदर घुसा दिए और टोपा बच्चेदानी को छू गया ।
फिर क्या था । प्रज्ञा की चीत्कार, पापा के स्ट्रोक की आवाज कमरे में अगले 15 मिनट तक होती रही । पापा निर्विरोध प्रज्ञा को थपथप करते हुए चोदे जा रहे थे । प्रज्ञा का बुर अब छितर गया था इस करना लिंग अभी आराम से अंदर बाहर ही रहा था । पापा प्रज्ञा के होंठों पे अपना होंठ मिलाए , प्रज्ञा के चुत पे धक्के मारते रहे ।
धक्के तेज हुए और कुछ पलों में ही फलफला के पापा ने प्रज्ञा के साथ creampie कर दिया । सारा पानी प्रज्ञा के चुत में भर दिया था । प्रज्ञा पापा का साथ देते हुए 15 मिनट में 4 बार झर गई थी ।
पापा सुकून की सांस लेने लगे । प्रज्ञा भी सुकून में दिख रही थी । छोटी बेटी को पापा 3 बार चुदाई के चुके थे रात से लेके अभी तक । अब 7 दिन तो दोनों को साथ एक कमरे ने ही रहना है । जब मन करेगा पापा, प्रज्ञा के बुर को जी भर के चोद सकते थे ।
तभी होटल सर्विस टेलीफोन पे घंटी बजी । पापा ने उठाया ।
पापा : हेलो।
स्टाफ जो पापा के सुहागरात का सारा इंतजाम करवाया था : हैलो सर ।
पापा: जी बताइए ।
पापा: सर , breakfast timing will be over in 10 to 15 mins , आपका रूम पे "Do not Disturbe" का साइन देखा तो आपके रूम का रिंग नहीं बजाया । ओर क्लिनी करने के लिए भी लेडी थोड़े टाइम में जाएगी । तो how you like to have ur breakfast sir ? Room service?
पापा: अरे , अच्छा , हां वही सही रहेगा । सुनिये 2 नहीं , 3 लोगों का ब्रेकफास्ट भिजवाना। और थोड़े देर में यामिनी आएगी तो उन्हें हमारे रूम में आने देना । We invited her for breakfast.
स्टाफ: अच्छा ओके सर नो प्रॉब्लम।
प्रज्ञा: वाह पापा यामिनी आ रही है ।
पापा : ह्म्म्म...मैने ब्रेकफास्ट पे इनवाइट तो किया था । फोन करो जरा ।
प्रज्ञा : वाव मेरे नॉटी बॉय, यामिनी से जुदाई सही नहीं जा रही ।
पापा : अब उसकी जुदाई, उसके चुदाई के बाद ही सही जाएगी बेटी , तेरी भी हरि झंडी मिल ही गई है तो शायद यामिनी को भी मर्द का एहसास जल्दी हो जाएगा ।
प्रज्ञा : ओके पापा, अभी कॉल करती हु , मगर उसने मना किया तो प्लीज़ कोई जबर्दस्ती मत करिएगा उसके साथ । उसका मन हो तभी मेरी हरि झंडी है पापा ।
पापा : जी मेरी मालकिन,ठीक है । वो मना नहीं कर पाएगी , तुम देखना ।
प्रज्ञा ने मुस्कुराते हुए फोन उठाया और यामिनी को कॉल लगा दिया , यामिनी के झट से फोन उठा लिया : हेलो मेरी दोस्त , कैसी हो प्रज्ञा , वाह तुमने हो मुझे कॉल कर दिया । मै थोड़े देर में तुम्हे करने ही वाली थी ।
प्रज्ञा : अच्छा , मेरी दोस्त , ऐसा क्या ।
यामिनी : हां , और बताओ दुल्हनिया , कैसी रही सैंया के साथ पहली रात का मिलन । पानी गया अंदर या अभी तक सूखी ही हो ?
प्रज्ञा शर्माते हुए : गया ना, 3 बार । २ बार रात को , एक तो अभी जस्ट ।
यामिनी : wao प्रज्ञा ,अभी जस्ट भी , वाह ,मै बहुत खुश हु तेरे लिए , फाइनली तुम्हारा डर दूर हुआ और पति देव का साथ तुम दे पाई। और बता ना कैसा रहा पूरा एक्सप्रेस, क्या क्या किया तेरे बदमाश हैंडसम हसबैंड ने ?
प्रज्ञा : सब बताऊंगी , आ जा तू नाश्ते के लिए , उन्होंने बोला था ना।
यामिनी : ह्म्म...मै आ ही रही थी होटल ही , आज 10 बजे से 3 बजे तक 3 दुल्हनों की मेहंदी लगानी है ।
प्रज्ञा : अच्छा आजा फिर , पहले ब्रेकफास्ट फिर काम।
यामिनी : ok पहुंच रही हूं, 10-15 मिनट में । फिर आराम से सारा स्टोरी बताना ।
प्रज्ञा : अच्छा , आप पहले आइए तो मेरी प्यारी यामिनी जी ।
पापा से : पापा , वो चल दी है , आ ही रही है 10 मिनट में ।
पापा: बढ़िया है । तू फ्रेश हो जा बेटी , फिर मै भी हो जाता हूं।
प्रज्ञा : ओके पापा।
प्रज्ञा उठ के बाथ रूम में चली गई नंगी ही ।
अचानक ही पापा के दिमाग में कुछ आया और वो प्रज्ञा के पीछे चल दिए । उनका लन्ड हवा में अटखेलिया कर रहा था ।
प्रज्ञा बाथ रूम में दाखिल हुई तो साथ में पापा भी दाखिल हो गए ।
प्रज्ञा: क्या हुआ पापा , मुझे फ्रेश होने बोल के आप भी आ गए।
पापा: ह्म्म...प्रज्ञा लोग फ्रेश क्यों होते है ।
प्रज्ञा : ताकि गंदा न रहे ।
पापा: तो मै तुझे गंदा कर दूंगा तब तो तू फ्रेश हो गई ना।
प्रज्ञा कुछ समझी नहीं , पापा ने प्रज्ञा को अंदर ले जा के । बाथरूम के फर्श पे बिठा दिया ।
पापा : प्रज्ञा , जरा मै अपना जल तुझे पिलाना चाहता हूं।
प्रज्ञा समझ गई क्या होने वाला है ।
प्रज्ञा : नहीं पापा ये नहीं कर पाऊंगी ।
पापा: बेटी , तू पियेगी भी और उससे नहाए गी भी । प्रज्ञा , एक बात मेरी समझ ले । मैं जो भी प्राची के साथ नहीं कर सका हूं वो सब तेरे साथ करना चाहता हूं। बस तू मेरा साथ बिना किसी विरोध के देती जा।
प्रज्ञा : मगर पापा.....
पापा ने उसके मुंह पे अपना उंगली रख के चुप होने को बोला ।
पापा: प्रज्ञा , एक बात याद रख , अब हमारे बीच एक अनोखा रिश्ता बनेगा , जिसमें विरोध की कोई गुंजाइश नहीं , सब निर्विरोध होगा , एक्सट्रीम लेवल का काम क्रीड़ा। और इस खेल में तुझे जो अनुभव और मजा मिलेगा मेरी बच्ची, उससे तू निहाल हो जाएगी ।
प्रज्ञा समझ गई पापा मनाने वाले नहीं है । पापा प्रज्ञा को अपना जल यानी पेशाब की धार चखना चाहते थे ।
प्रज्ञा को पापा ने घुटनों पे बैठने को बोला और प्रज्ञा को इस नए अनुभव से रुबरु, होने के लिए तैयार होना ही पड़ा।
प्रज्ञा बैठ गई और पापा उसके ठीक सामने खड़े हों गए और अपना लौड़ा अपने हाथों में थाम लिया ।
पापा: बेटी , मुंह खोल मेरी बच्ची ।
प्रज्ञा ने आ...कर के अपना मुंह पापा के सामने खोल दिया । पापा का लिंग प्रज्ञा के एकदम सामने था ।
पापा : तैयार मेरे रानी ?
प्रज्ञा ने बस सर हाँ में हिला दिया।
पापा ने थोड़ा जोर लगाया और एक मोटी मूत की धार उनके लिंग से झरने की तरह निकलने लगा ।
झूल झूल करता वो धार प्रज्ञा के मुंह में गिरने लगा , मगर प्रज्ञा एक भी घुट नहीं ले रही थी उस मूत का ।
पापा: थोड़ा गटक जा बेटी । बस थोड़ा सा ।
प्रज्ञा फिर भी मूत अंदर नहीं ले रही थी । पापा ने फिर जिद किया तो प्रज्ञा में कुछ मात्रा में उस मूत को अपने गले में उतरने दिया और गटक गई । एक घुट कुछ बुरा नहीं था ।
पापा ने देखा कि बेटी को अपना मूत पिला चुके है तो उसके मुंह से हट कर पूरे बॉडी पे ऐंम कर के मुतने लगे । प्रज्ञा पे पापा की मूत की धार झरने की तरह बहने लगी । और वो पूरी तरह मूत से सराबोर हो गई । उसे ऐसा लग रहा था जैसे वो गरम पानी से नहा रही हो ।
पापा की मूत खत्म हुई । अब पापा की बारी थी । वो बाथरूम के फ़र्श पे लेट गए और प्रज्ञा को अपने इर्द गिर्द पैर करके खड़े होने को बोला । फिर बोला : बेटी अपनी मूत की धार शायद मेरे लिंग पे टपकाते हुए लन्ड पे मूत दे । गिला कर दे इसे ।
प्रज्ञा बस पापा की आज्ञाकारी बेटी की तरह पालन कर रही थी । प्रज्ञा ने मुतना शुरू किया और जलधारा उसकी चुत से बेग से निकलने लगा और पापा के लन्ड पे गिरने लगा । पापा के लौडे पे , प्रज्ञा की पेशाब की तेज धार गिर रहा था , जो लन्ड पे तेज़ चपेट मार रहा था । पापा को बहुत मज़ा आ रहा था । प्रज्ञा भी शर्म से लाल थी । अपने पापा पे ही वो मूत रही थी ।पापा उसके मुतने के समय अपना लन्ड रगड़ रहे थे । पापा को बहुत मज़ा आगया । उसके बाद दोनों बाप बेटी ने साथ की फ्रेश हुए और नहाये । पापा को, भरे पानी में बाथटब में लेट के , प्रज्ञा की चुदाई करने का मन था । मगर यामिनी और नाश्ता दोनों कुछ ही देर में आने वाला था तो समय ज्यादा था नहीं । दोनों 15 मिनट में निकल गए । और कपड़े पहन के सज धज के रेडी हो गए ।
अब तो पापा का पूरा ध्यान एक और अनचुदी बुर खोलने पे था । यामिनी की कच्ची कली चॉकलेटी बुर।
रात के पापा और बेटी के मिलन के बाद सबेरे कमरे में काफी सन्नाटा था । पापा ओर प्रज्ञा अभी भी एकदूसरे से लिपटे नंगे ही पड़े हुए थे। घड़ी में समय 8:30 का हो चला था ओर बालकनी के शीशे वाली गेट और पर्दा से छन के थोड़ी बहुत धूप कमरे में आ रही थी ।
बेड एकदम बिखरा हुआ था । बेड पे साये दोनों मादा और नर का नंगापन , साथ में बेड पे पड़े खून के धब्बे , माल के छीटें जो सुख के कड़ी हो चुकी थी । चारों तरफ बिखरी गुलाब की पंखुड़ियां । रात को हुए सुहागरात की पहली चुदाई का गवाही दे रहा था । उधर प्रज्ञा के चुत पे सूजन भी हो गई थी । प्रज्ञा का नींद खुल गया । उसके पापा अभी भी उसे बाँहो में कसे सो रहे थे ।प्रज्ञा ने निगाहे नीचे छुका के देखो तो आपकी पापा का लौड़ा उसकी जांघों पर है और लिंग में टाइटन्स भी था पापा के । हाँ रात के चुदाई समय जैसा खड़ा था वैसा कड़क नहीं था ।
प्रज्ञा के मांग में पापा का वीर्य सुख के पपड़ी बन गया था । जो प्रज्ञा के बालों को जकड़ लिया था । प्रज्ञा को वो लम्हे याद कर के हंसी सी आ गई । पता नहीं पापा को रात को हो गया गया था । मेरे साथ क्या क्या कर डाला कल रात उन्होंने ।
प्रज्ञा ने घड़ी देखी तो समय 8:35 हो गया था । प्रज्ञा पापा को उठाने का सोची । प्रज्ञा पापा को हिलाते हुए : पापा , पापा, उठिए ना।
पापा की कोई प्रतिक्रिया नहीं ।
प्रज्ञा : पापा , ओह मेरे सैंया, उठ जाइए ।
पापा: हम्ममम...क्या हुआ...इतनी सबेरे क्यों जगा रही हो मेरी बच्ची, मेरी cutipie darling ।
और पापा ने उठाते ही प्रज्ञा को होंठो पे गई राउंड गिली पप्पिया की बरसात कर दी । सबेरे सबेरे दोनों का होंठ मिल गया था ।
आजा मेरी बेटी , पापा जरा अपना लिंग डाल के तेरी चुत की गहराई नाप ले जरा की रात को कितना खोल पाया हूं।
प्रज्ञा : नहीं नहीं पापा मुझे दर्द हो रहा है और चुत पे देखियें सूजन भी है ।
पापा: ला अभी ठीक कर देता हूं । पापा उठाते ही मूड में आ गए थे । पापा ने चुत पे एक चुम्मी ली और जीभ निकल के २ मिनट तक चाटते रहे ।
प्रज्ञा गिनगिना उठी । पापा : अब कोई सूजन नहीं । आ जरा ।
पापा ने प्रज्ञा को अपने आलिंगन में कसे हुए ही लिंग को चुत पे सेट किया ओर प्रेस कर दिया । चर चर की आवाज करता प्रज्ञा के योनि में पापा प्रवेश कर गए । प्रज्ञा मदहोश हो गई और मीठा दर्द का अनुभव करने लगी । उसके निचले होंठ को प्रज्ञा ने अपने दांतों में दबा के एक सिसकारी ली । बहुत सुखद अनुभव था उस मीठे दर्द का । पापा प्रेसर लगा के अगले पल पूरा का पूरा लन्ड अंदर घुसा दिए और टोपा बच्चेदानी को छू गया ।
फिर क्या था । प्रज्ञा की चीत्कार, पापा के स्ट्रोक की आवाज कमरे में अगले 15 मिनट तक होती रही । पापा निर्विरोध प्रज्ञा को थपथप करते हुए चोदे जा रहे थे । प्रज्ञा का बुर अब छितर गया था इस करना लिंग अभी आराम से अंदर बाहर ही रहा था । पापा प्रज्ञा के होंठों पे अपना होंठ मिलाए , प्रज्ञा के चुत पे धक्के मारते रहे ।
धक्के तेज हुए और कुछ पलों में ही फलफला के पापा ने प्रज्ञा के साथ creampie कर दिया । सारा पानी प्रज्ञा के चुत में भर दिया था । प्रज्ञा पापा का साथ देते हुए 15 मिनट में 4 बार झर गई थी ।
पापा सुकून की सांस लेने लगे । प्रज्ञा भी सुकून में दिख रही थी । छोटी बेटी को पापा 3 बार चुदाई के चुके थे रात से लेके अभी तक । अब 7 दिन तो दोनों को साथ एक कमरे ने ही रहना है । जब मन करेगा पापा, प्रज्ञा के बुर को जी भर के चोद सकते थे ।
तभी होटल सर्विस टेलीफोन पे घंटी बजी । पापा ने उठाया ।
पापा : हेलो।
स्टाफ जो पापा के सुहागरात का सारा इंतजाम करवाया था : हैलो सर ।
पापा: जी बताइए ।
पापा: सर , breakfast timing will be over in 10 to 15 mins , आपका रूम पे "Do not Disturbe" का साइन देखा तो आपके रूम का रिंग नहीं बजाया । ओर क्लिनी करने के लिए भी लेडी थोड़े टाइम में जाएगी । तो how you like to have ur breakfast sir ? Room service?
पापा: अरे , अच्छा , हां वही सही रहेगा । सुनिये 2 नहीं , 3 लोगों का ब्रेकफास्ट भिजवाना। और थोड़े देर में यामिनी आएगी तो उन्हें हमारे रूम में आने देना । We invited her for breakfast.
स्टाफ: अच्छा ओके सर नो प्रॉब्लम।
प्रज्ञा: वाह पापा यामिनी आ रही है ।
पापा : ह्म्म्म...मैने ब्रेकफास्ट पे इनवाइट तो किया था । फोन करो जरा ।
प्रज्ञा : वाव मेरे नॉटी बॉय, यामिनी से जुदाई सही नहीं जा रही ।
पापा : अब उसकी जुदाई, उसके चुदाई के बाद ही सही जाएगी बेटी , तेरी भी हरि झंडी मिल ही गई है तो शायद यामिनी को भी मर्द का एहसास जल्दी हो जाएगा ।
प्रज्ञा : ओके पापा, अभी कॉल करती हु , मगर उसने मना किया तो प्लीज़ कोई जबर्दस्ती मत करिएगा उसके साथ । उसका मन हो तभी मेरी हरि झंडी है पापा ।
पापा : जी मेरी मालकिन,ठीक है । वो मना नहीं कर पाएगी , तुम देखना ।
प्रज्ञा ने मुस्कुराते हुए फोन उठाया और यामिनी को कॉल लगा दिया , यामिनी के झट से फोन उठा लिया : हेलो मेरी दोस्त , कैसी हो प्रज्ञा , वाह तुमने हो मुझे कॉल कर दिया । मै थोड़े देर में तुम्हे करने ही वाली थी ।
प्रज्ञा : अच्छा , मेरी दोस्त , ऐसा क्या ।
यामिनी : हां , और बताओ दुल्हनिया , कैसी रही सैंया के साथ पहली रात का मिलन । पानी गया अंदर या अभी तक सूखी ही हो ?
प्रज्ञा शर्माते हुए : गया ना, 3 बार । २ बार रात को , एक तो अभी जस्ट ।
यामिनी : wao प्रज्ञा ,अभी जस्ट भी , वाह ,मै बहुत खुश हु तेरे लिए , फाइनली तुम्हारा डर दूर हुआ और पति देव का साथ तुम दे पाई। और बता ना कैसा रहा पूरा एक्सप्रेस, क्या क्या किया तेरे बदमाश हैंडसम हसबैंड ने ?
प्रज्ञा : सब बताऊंगी , आ जा तू नाश्ते के लिए , उन्होंने बोला था ना।
यामिनी : ह्म्म...मै आ ही रही थी होटल ही , आज 10 बजे से 3 बजे तक 3 दुल्हनों की मेहंदी लगानी है ।
प्रज्ञा : अच्छा आजा फिर , पहले ब्रेकफास्ट फिर काम।
यामिनी : ok पहुंच रही हूं, 10-15 मिनट में । फिर आराम से सारा स्टोरी बताना ।
प्रज्ञा : अच्छा , आप पहले आइए तो मेरी प्यारी यामिनी जी ।
पापा से : पापा , वो चल दी है , आ ही रही है 10 मिनट में ।
पापा: बढ़िया है । तू फ्रेश हो जा बेटी , फिर मै भी हो जाता हूं।
प्रज्ञा : ओके पापा।
प्रज्ञा उठ के बाथ रूम में चली गई नंगी ही ।
अचानक ही पापा के दिमाग में कुछ आया और वो प्रज्ञा के पीछे चल दिए । उनका लन्ड हवा में अटखेलिया कर रहा था ।
प्रज्ञा बाथ रूम में दाखिल हुई तो साथ में पापा भी दाखिल हो गए ।
प्रज्ञा: क्या हुआ पापा , मुझे फ्रेश होने बोल के आप भी आ गए।
पापा: ह्म्म...प्रज्ञा लोग फ्रेश क्यों होते है ।
प्रज्ञा : ताकि गंदा न रहे ।
पापा: तो मै तुझे गंदा कर दूंगा तब तो तू फ्रेश हो गई ना।
प्रज्ञा कुछ समझी नहीं , पापा ने प्रज्ञा को अंदर ले जा के । बाथरूम के फर्श पे बिठा दिया ।
पापा : प्रज्ञा , जरा मै अपना जल तुझे पिलाना चाहता हूं।
प्रज्ञा समझ गई क्या होने वाला है ।
प्रज्ञा : नहीं पापा ये नहीं कर पाऊंगी ।
पापा: बेटी , तू पियेगी भी और उससे नहाए गी भी । प्रज्ञा , एक बात मेरी समझ ले । मैं जो भी प्राची के साथ नहीं कर सका हूं वो सब तेरे साथ करना चाहता हूं। बस तू मेरा साथ बिना किसी विरोध के देती जा।
प्रज्ञा : मगर पापा.....
पापा ने उसके मुंह पे अपना उंगली रख के चुप होने को बोला ।
पापा: प्रज्ञा , एक बात याद रख , अब हमारे बीच एक अनोखा रिश्ता बनेगा , जिसमें विरोध की कोई गुंजाइश नहीं , सब निर्विरोध होगा , एक्सट्रीम लेवल का काम क्रीड़ा। और इस खेल में तुझे जो अनुभव और मजा मिलेगा मेरी बच्ची, उससे तू निहाल हो जाएगी ।
प्रज्ञा समझ गई पापा मनाने वाले नहीं है । पापा प्रज्ञा को अपना जल यानी पेशाब की धार चखना चाहते थे ।
प्रज्ञा को पापा ने घुटनों पे बैठने को बोला और प्रज्ञा को इस नए अनुभव से रुबरु, होने के लिए तैयार होना ही पड़ा।
प्रज्ञा बैठ गई और पापा उसके ठीक सामने खड़े हों गए और अपना लौड़ा अपने हाथों में थाम लिया ।
पापा: बेटी , मुंह खोल मेरी बच्ची ।
प्रज्ञा ने आ...कर के अपना मुंह पापा के सामने खोल दिया । पापा का लिंग प्रज्ञा के एकदम सामने था ।
पापा : तैयार मेरे रानी ?
प्रज्ञा ने बस सर हाँ में हिला दिया।
पापा ने थोड़ा जोर लगाया और एक मोटी मूत की धार उनके लिंग से झरने की तरह निकलने लगा ।
झूल झूल करता वो धार प्रज्ञा के मुंह में गिरने लगा , मगर प्रज्ञा एक भी घुट नहीं ले रही थी उस मूत का ।
पापा: थोड़ा गटक जा बेटी । बस थोड़ा सा ।
प्रज्ञा फिर भी मूत अंदर नहीं ले रही थी । पापा ने फिर जिद किया तो प्रज्ञा में कुछ मात्रा में उस मूत को अपने गले में उतरने दिया और गटक गई । एक घुट कुछ बुरा नहीं था ।
पापा ने देखा कि बेटी को अपना मूत पिला चुके है तो उसके मुंह से हट कर पूरे बॉडी पे ऐंम कर के मुतने लगे । प्रज्ञा पे पापा की मूत की धार झरने की तरह बहने लगी । और वो पूरी तरह मूत से सराबोर हो गई । उसे ऐसा लग रहा था जैसे वो गरम पानी से नहा रही हो ।
पापा की मूत खत्म हुई । अब पापा की बारी थी । वो बाथरूम के फ़र्श पे लेट गए और प्रज्ञा को अपने इर्द गिर्द पैर करके खड़े होने को बोला । फिर बोला : बेटी अपनी मूत की धार शायद मेरे लिंग पे टपकाते हुए लन्ड पे मूत दे । गिला कर दे इसे ।
प्रज्ञा बस पापा की आज्ञाकारी बेटी की तरह पालन कर रही थी । प्रज्ञा ने मुतना शुरू किया और जलधारा उसकी चुत से बेग से निकलने लगा और पापा के लन्ड पे गिरने लगा । पापा के लौडे पे , प्रज्ञा की पेशाब की तेज धार गिर रहा था , जो लन्ड पे तेज़ चपेट मार रहा था । पापा को बहुत मज़ा आ रहा था । प्रज्ञा भी शर्म से लाल थी । अपने पापा पे ही वो मूत रही थी ।पापा उसके मुतने के समय अपना लन्ड रगड़ रहे थे । पापा को बहुत मज़ा आगया । उसके बाद दोनों बाप बेटी ने साथ की फ्रेश हुए और नहाये । पापा को, भरे पानी में बाथटब में लेट के , प्रज्ञा की चुदाई करने का मन था । मगर यामिनी और नाश्ता दोनों कुछ ही देर में आने वाला था तो समय ज्यादा था नहीं । दोनों 15 मिनट में निकल गए । और कपड़े पहन के सज धज के रेडी हो गए ।
अब तो पापा का पूरा ध्यान एक और अनचुदी बुर खोलने पे था । यामिनी की कच्ची कली चॉकलेटी बुर।
Agr itna hi Hai to yamini se bhi shadi kara do uss bechari ka bhi kalyan ho jayega. Dadi aur prachi se Pragya ke liye to baat krenge hi Yamini ke liye bhi kr lega.. ek bibi ghar se bahar ki bhi ghar me ana chahiye.. tbhi to maza ayega or ek baat main pragya me jalan dekhna chahta hu Yamini or papa ke bich prem dekh kr
Agr itna hi Hai to yamini se bhi shadi kara do uss bechari ka bhi kalyan ho jayega. Dadi aur prachi se Pragya ke liye to baat krenge hi Yamini ke liye bhi kr lega.. ek bibi ghar se bahar ki bhi ghar me ana chahiye.. tbhi to maza ayega or ek baat main pragya me jalan dekhna chahta hu Yamini or papa ke bich prem dekh kr
Dhanyawad DB Singh ,
Apke sujhaw sach me acche hai , aisa kuch mahual ban sakta hai aage kahani me. Aisa to hai nhi ki papa ,yamini ko ek baar chod ke chor denge. Aage yamini ko apna bhi bana sakte hai . Betiyon se ki hue shadi ko wo ujagar nhi kar sakte magar yamini sang shadi to wo kr hi sakte hai.