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एक गर्मियों की दोपहर थी, अप्रैल का महीना, जब सूरज की किरणें घर की खिड़कियों से छनकर अंदर आ रही थीं। घर में सन्नाटा पसरा हुआ था। प्रिया का पति, अमित, सुबह ही ऑफिस के लिए निकल गया था – वो कहकर गया था कि आज देर रात लौटेगा, कोई जरूरी मीटिंग है। घर में सिर्फ प्रिया और उसका देवर अजय था। अजय 22 साल का था, कॉलेज का छात्र, लंबा-चौड़ा लेकिन थोड़ा शर्मीला और अनुभवहीन। प्रिया, 28 साल की खूबसूरत भाभी, लंबे काले बाल, गोरी चमड़ी, भरी-भरी देह वाली, हमेशा से अजय की नजरों में बसती थी। वो जानती थी कि अजय उसे चोरी-चोरी देखता है, उसके कर्व्स पर आंखें फिसलती हैं। लेकिन आज प्रिया ने मन बना लिया था – वो धीरे-धीरे अजय को अपनी ओर खींचेगी, उसे उकसाएगी, और फिर सब कुछ होने देगी जैसे वो अनजान हो। उसके बाद उसे सब सिखाएगी – प्यार का, काम का, चुदाई का।
प्रिया ने एक पतली सी नीली साड़ी पहनी थी, जो उसके शरीर से चिपक रही थी। ब्लाउज का गला थोड़ा गहरा, ताकि झुकने पर उसके स्तनों की झलक मिले। ब्रा नहीं पहनी थी, सिर्फ एक हल्का पेटीकोट। वो रसोई में खड़ी थी, जानबूझकर थोड़ा-थोड़ा झुककर काम कर रही थी। अजय लिविंग रूम में सोफे पर बैठा किताब पढ़ रहा था। प्रिया ने पहले से प्लान कर रखा था – सब धीरे-धीरे।
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प्रिया ने एक पतली सी नीली साड़ी पहनी थी, जो उसके शरीर से चिपक रही थी। ब्लाउज का गला थोड़ा गहरा, ताकि झुकने पर उसके स्तनों की झलक मिले। ब्रा नहीं पहनी थी, सिर्फ एक हल्का पेटीकोट। वो रसोई में खड़ी थी, जानबूझकर थोड़ा-थोड़ा झुककर काम कर रही थी। अजय लिविंग रूम में सोफे पर बैठा किताब पढ़ रहा था। प्रिया ने पहले से प्लान कर रखा था – सब धीरे-धीरे।
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