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Ye badhiya thaएक शेर अर्ज़ है...
बारिश की गिरती बूंदों को देख याद आया..
बारिश की गिरती बूंदों को देख याद आया..
तुम भी मेरे अरमानों पर ऐसे ही मूत कर चली गई थी।

Ye badhiya thaएक शेर अर्ज़ है...
बारिश की गिरती बूंदों को देख याद आया..
बारिश की गिरती बूंदों को देख याद आया..
तुम भी मेरे अरमानों पर ऐसे ही मूत कर चली गई थी।
