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Incest Ganne Ki Mithas

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हरिया खूब तबीयत से सुधिया की गंद मार रहा था और सुधिया खूब ज़ोर ज़ोर से सीसीया रही थी और उसके मूह से खूब सिसीकिया छूट रही थी, हरिया उसकी गुदाज गंद को खूब ज़ोर ज़ोर से ठोक रहा था और उसकी बुर की फांको को खूब सहला रहा था, उनकी चुदाई देख कर मैं समझ गया कि आज हरिया पूरा दिन खेत मे मस्ती मारने वाला है और उसे देख कर लग रहा था कि वह आज सुधिया को दिन भर चोदेगा,

मैने टाइम देखा और फिर मैने सोचा क्यो कबाब मे हड्डी बनू और मैं वापस तालाब के इधर आ गया और साइट पर मजदूरो को इन्स्ट्रक्षन देने लगा,

उस दिन हरिया से मुलाकात भी नही हुई और शाम को मैं घर चला गया,

जब घर पहुचा तो मुझे याद आया कल शनिवार है और मैने मम्मी को कह दिया कि हम लोग गाड़ी करके शिर्डी चलते है,

मम्मी और संगीता खुस हो गई और अगले दिन मैं यह कह कर साइट पर चला गया कि मैं शाम को 5 बजे तक आ जाउन्गा और फिर हम लोग 7 बजे तक यहाँ से चल देंगे तो सुबह सुबह वहाँ पहुच जाएगे,

मैं साइट पर पहुच गया और काम लगाना शुरू कर दिया तभी मुझे सामने से हरिया आता हुआ नज़र आया

राज- आओ हरिया क्या बात है एक दो दिन से नज़र नही आ रहे हो

हरिया- बाबूजी हम तो दिन रात आपको याद करते है और आपके एहसान तले दबे जा रहे है, बाबू जी अगर आप हमारी जिंदगी मे ना आते तो शायद हम सुधिया भौजी को कभी चोद ही नही पाते और ऐसे ही मर जाते

राज- अरे मरे तुम्हारे दुश्मन यह कोई एहसान नही था आख़िर तुम मेरे दोस्त हो और दोस्ती के लिए यह सब तो करना ही पड़ता है,

हरिया- बाबूजी कभी हमारी कही ज़रूरत हो तो बताओ हम भी अपनी दोस्ती निभायगे,

राज- मुस्कुराते हुए अरे हरिया जिस दिन तुम्हारी ज़रूरत हुई तुम्हे याद करूँगा और मुझे लगता है जल्दी ही तुम्हारी ज़रूरत पड़ेगी,

हरिया- क्या कुच्छ नई प्लानिंग है बाबू जी

राज- हाँ प्लॅनिंग तो है पर पहले घी सीधी उंगली से निकालेंगे और अगर नही निकला तो टेडी करेगे,

हरिया- साफ साफ बताइए बाबू जी क्या बात है

राज- हरिया अब तुमसे क्या छुपाऊ पर कल से मेरा मन अपनी बहन संगीता और मम्मी रति को चोदने का बहुत कर रहा है

हरिया- तो बाबू जी आपने क्या सोचा है

राज- हरिया अभी मैं एक दो दिन के लिए बाहर जा रहा हू उसके बाद मैं संगीता को लेकर यहा खेतो मे घुमाने लाउन्गा और मैं चाहता हू कि मैं संगीता को यही छ्चोड़ कर घूमने का बहाना करके चला जाउ और तुम संगीता के सामने जिसे भी चोद सको सुधिया को या चंदा को,

बस इतना करना है कि संगीता तुम्हे चोद्ते हुए देख ले उसके बाद मैं संगीता को यही गन्नो के बीच पूरी नंगी करके चोदना चाहता हू,

हरिया- बाबू जी आप बस इशारा कर देना बाकी मैं सब संभाल लूँगा,

राज- ठीक है और सूनाओ कल क्या किया तुमने दिन भर

हरिया- कल तो बाबूजी हमने जी भर कर सुधिया की चूत और गंद चोदि है कल तो रंडी को पूरी मस्त करके अपने साथ ही घर ले गये थे और तो और जब जाते वक़्त उसने हमसे कहा कि उसे फिर से पेशाब लगी है तो आप मनोगे नही बाबूजी हम रास्ते पर ही लेट गये और सुधिया को अपने मूह पर बैठा कर उससे खूब अपने मूह मे मुतवाया है खूब चूस चूस कर उसका मूत पिया है हमने बड़ा मज़ा आया बाबूजी,

राज- क्या बात है मतलब तुमने सुधिया को दिनभर चोद चोद कर उसका मूत पिया है

हरिया- अरे बाबूजी उसकी गंद भी हमने इस कदर चोदि है कि रंडी रात भर मेरे लंड के झटके अपनी गंद और चूत मे महसूस करती रही होगी इसलिए आज ना वह आई और ना ही रामू आया, दरअसल रामू की तबीयत खराब है पर कल शायद वह भी खेतो मे आए,

मैं हरिया से विदा लेकर घर चला गया और फिर एक स्कार्पीओ किराए से लेकर हम लोग शिर्डी की और रवाना हो गये, ड्राइवर गाड़ी चला रहा था और मैं और संगीता और मम्मी तीनो पिछे की सीट पर बैठे थे, संगीता मेरे और मम्मी के बीच बैठी थी और गाड़ी अपनी रफ़्तार से चली जा रही थी,

रत को 11 बजने को आ चुके थे और मम्मी सामने रोड पर देख रही थी और संगीता को मैं गौर से देख रहा था जो शायद नींद की वजह से झपकीया लेने लगी थी,

गाड़ी मे मधुर संगीत बज रहा था और मैने हमारी सीट के उपर की लाइट ऑफ कर दी और मम्मी ने भी अपने सर को सीट से टीका कर आँखे बंद कर ली, अब गाड़ी मे अंधेरा लगने लगा था और संगीता अपने सर को मेरे कंधे से टिकाए हुए सोने लगी थी,
 

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संगीता की गरम सांसो की खुश्बू ने मेरे लंड को खड़ा कर दिया था और मैने भी अपने सर को थोड़ा झुका कर संगीता के चेहरे के पास कर लिया था, संगीता जब सांस छ्चोड़ती तो उसकी साँसे सीधे मेरे चेहरे पर पड़ रही थी मैने धीरे से अपना हाथ संगीता की मोटी गुदाज जाँघो के उपर रख लिया और हल्के हल्के उसकी मोटी मखमली जाँघो को दबाने लगा,

मम्मी जाग रही थी या सो रही थी पता नही पर मुझे उनकी आँखे नज़र नही आ रही थी मैं बहुत गरम हो चुका था और संगीता के बदन से सटा हुआ था,

संगीता की रेड कलर की टीशर्ट से उसके मोटे मोटे कसे हुए ठोस दूध का उभार मुझे पागल किए जा रहा था और मुझसे रहा नही गया और मैने अपने मूह से संगीता के गालो को चूमते हुए अपना एक हाथ संगीता के गले मे डाल कर जब मैने उसके एक मोटे बोबे को अपने हाथ मे भर कर हल्के से दबाया तो क्या बताऊ मैं तो मस्त हो गया,

मेरे द्वारा संगीता के बोबे दबाने से भी उसने कोई प्रतिक्रिया नही की तो मुझे लगा वह गहरी नींद मे सो चुकी है फिर मैने संगीता के पूरे दूध का जयजा लेते हुए उसकी मोटाई को महसूस किया उसके मोटे गुदाज भरे हुए दूध को मैने अपने हाथो मे पूरा समाते हुए उसे हल्के हल्के दबाना शुरू कर दिया और अपने होंठो से कभी संगीता के गालो को चूमता कभी उसके रसीले होंठो को चूमने लगा,

दूसरे हाथ को जब मैने जाँघो पर फेरा तो घुटने के ज़रा सा उपर तक उसकी ब्लॅक कलर की स्कर्ट चढ़ि हुई थी मैने धीरे से संगीता की स्कर्ट को थोड़ा और उपर करके उसकी मोटी मसल जाँघो को अपने हाथो मे दबोच लिया और खूब गोरी गोरी जाँघो को सहलाने लगा,

एक हाथ से संगीता के मोटे-मोटे दूध उसकी पतली सी टीशर्ट के उपर से मसल रहा था और दूसरे हाथ से उसकी गुदाज जाँघो को सहला रहा था मेरा लंड पूरी ताक़त लगाए मेरे पेंट को फाड़ने की कोशिश कर रहा था, मैने धीरे से संगीता की जाँघो को थोड़ा सा खोल कर फैला दिया और फिर धीरे से उसकी मोटी जाँघो को सहलाते हुए उसकी फूली हुई पॅंटी मे कसी चूत तक ले जाने लगा,

मैने जैसे ही संगीता की पॅंटी के उपर से उसकी फूली हुई चूत को सहलाया मैं मस्त हो गया, संगीता ने लगता है दो तीन दिन पहले अपनी झांते बनाई थी जिसके कारण उसके बाल मुझे पॅंटी के उपर से भी हल्के हल्के चुभ रहे थे,

अब मैं संगीता की फूली हुई चूत को अपनी हथेली मे भर कर दबाते हुए उसके मोटे मोटे दूध को मसल रहा था, फिर मेरी उत्तेजना के साथ ही मेरे हाथ का दबाव भी संगीता के मोटे मोटे बोबो और उसकी फूली हुई चूत पर बढ़ने लगा था और अब मैं काफ़ी ताक़त से संगीता के बोबे और चूत मसल रहा था,

संगीता सो रही थी या नही यह तो मैं नही जानता लेकिन जब मैने संगीता की मोटी जाँघो को और भी फैला कर उसकी पूरी फूली हुई चूत को अपनी हथेली मे भर कर दबोचा तो मुझे उसकी पॅंटी मे गीले पन का एहसास हुआ और मुझे लगा शायद संगीता जाग रही है,

मैने संगीता के बोबे को खूब कस कस कर मसलना शुरू कर दिया मैं यह सोच कर और भी ज़्यादा उत्तेजित हो गया कि संगीता शायद जाग रही है अब मैं संगीता की चूत को पागलो की तरह खूब दबा दबा कर सहला रहा था और उसके दोनो दूध को बारी बारी से मसल रहा था तभी मथेर्चोद ड्राइवर ने गाड़ी एक ढाबे के पास जाकर रोक दी और मुझसे कहने लगा भैया जी चाइ पीना हो तो आ जाओ,

मैने मन मे कहा मथेर्चोद तू पी ले भोसड़ी वाले ने सारा मज़ा किरकिरा कर दिया, ड्राइवर की बात सुन कर मम्मी भी उठ गई और कहने लगी राज बेटे मेरे लिए भी एक चाइ ले आना, मैं उतार कर चाइ लेने चला गया पर संगीता अभी भी आँखे बंद किए हुए सो रही थी,

करीब 10 मिनिट बाद हम फिर चल दिए और मैने जब लाइट बंद करने का सोचा इससे पहले ही मम्मी ने लाइट ऑफ करने को कहा और फिर मैने लाइट ऑफ कर दी, अब मैने धीरे से फिर से संगीता के बोबो को जैसे ही च्छुआ संगीता के मूह से एक गहरी सांस निकल पड़ी,

क्रमशः........
 

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गतान्क से आगे......................

मैने उसके होंठो को चूमते हुए उसकी चूत पर जैसे ही हाथ रखा मैने देखा उसकी जंघे पहले से ही खूब फैली हुई थी और इस बार मैं पूरी तरह खुल कर उसकी गुदाज फूली चूत को उसकी पॅंटी के उपर से सहला रहा था,

संगीता की पूरी पॅंटी गीली हो चुकी थी और अब मुझसे रहा नही जा रहा था और मैने उसके मोटे मोटे बोबे दबाते हुए उसकी पॅंटी को एक साइड धीरे से हटा कर जब संगीता की चिकनी फूली हुई चूत को सहलाया तो संगीता ने अपनी जाँघो को और भी चौड़ा कर लिया और एक दम से मुझसे सॅट गई,

मैने संगीता के होंठो को अपने मूह मे भर कर चूसना शुरू कर दिया और उसके मोटे मोटे दूध को खूब कस कस कर मसालने लगा, संगीता की चूत की फांको को सहलाते हुए मैं धीरे धीरे उसकी चूत के दाने को सहला रहा था और उसकी चूत के छेद को अपनी उंगली से उपर ही उपर रगड़ रहा था मैं जानता था कि अगर मैने उंगली उसकी चूत मे घुसाने की कोशिश की तो कही उसके मूह से आवाज़ ना निकल जाए,

रात को 3 बजे हम औरंगाबाद पहुच गये और फिर अचानक मम्मी ने मुझे धीरे से आवाज़ दी

रति- बेटे राज

राज- हाँ मम्मी

रति- बेटा कही गाड़ी रुकवा ना मुझे बाथरूम जाना है,

मैने मम्मी की बात सुन कर ड्राइवर को एक ढाबे के पास गाड़ी रोकने को कहा और उससे कह दिया जाओ चाइ पी लो उसके बाद मम्मी को मैने इधर उधर देख कर एक तरफ जाकर मूतने का इशारा कर दिया और मम्मी अपनी गंद की दरार मैं फसि साडी को निकालते हुए मेरे सामने अपने भारी चूतादो को मतकाते हुए मूतने चल दी,

मैने देखा ड्राइवर ढाबे के अंदर चला गया है और गाड़ी जहाँ खड़ी थी उसके विपरीत दिशा मे मम्मी जा रही थी, मम्मी जिधर जा रही थी उधर एक दो पेड़ थे मैने भी मूतने के बहाने उन पेड़ो के पिछे खड़ा होकर अपने लंड को बाहर निकाल लिया और मम्मी को छुप कर देखते हुए अपने लंड को सहलाने लगा, मेरा लंड बाहर आते ही मस्ती मे खड़ा हो चुका था,

मुझे मम्मी साफ दिखाई दे रही थी तभी मम्मी ने एक बार इधर उधर देखा और अपनी मोटी गंद से साडी उठा कर फिर इधर उधर देखते हुए अपनी पॅंटी भी नीचे सरका दी, मैं मम्मी की नंगी भारी गंद देख कर मस्त हो गया, जैसे ही मम्मी नीचे बेती उसकी गंद पूरी खुल कर मेरे सामने आ गई और मैं उसकी गदराई गोरी गंद देख कर मस्त होने लगा, सच कहु तो मम्मी की मोटी गंद सुधिया की गुदाज गंद से कई गुना ज़्यादा भारी और चोदने लायक लग रही थी,

कुच्छ देर तक मम्मी मूतने के बाद उठी और अपनी पॅंटी चढ़ा कर अपनी साडी नीचे करके वापस आने लगी, मम्मी को वापस आता देख मैने जल्दी से अपना लंड अंदर किया और गाड़ी मे आकर बैठ गया,

मैने जब गाड़ी मे संगीता को नही पाया तो मैं ढाबे मे देखने लगा जहाँ वह चाइ की चुस्किया ले रही थी, मैं मंद मंद मुस्कुराते हुए उसके पास गया और मैने पुछा खुल गई मेडम आपकी नींद,

आप तो बड़ी गहरी नींद सोती हो कोई उठा कर बाहर भी फेक देता तो पता नही चलता,

संगीता- मुस्कुराते हुए भैया आप तो जानते है सफ़र मे मुझे कितनी नींद आती है,

राज- अच्छा ठीक है जल्दी से चाइ ख़तम करो और फिर एक चाइ मम्मी को पिलाने के बाद मम्मी ने मुझे कहा राज संगीता को भी बाथरूम लगी है जा ज़रा उसे बता दे किधर जाना है, मैं मम्मी की बात सुन कर संगीता की ओर देखने लगा तो वह मंद मंद मुस्कुराते हुए इधर उधर देखने लगी,

मैने उसे इशारे से अपने साथ आने को कहा और फिर सामने वाला पेड़ दिखाते हुए कहा जाओ और वहाँ जाकर कर लो,

संगीता- भैया आप यही रहना मुझे डर लग रहा है,

राज- अरे इतना क्यो डर रही है तू जा कर ले मैं तेरे पिछे ही खड़ा हू, उसके बाद संगीता उस पेड़ के पिछे जाकर अपनी स्कर्ट उठा कर अपनी पॅंटी निच्चे सरका कर मूतने लगी और उसके मूतने की आवाज़ मुझे साफ सुनाई दे रही थी, कुछ देर बाद संगीता आ गई और हम गाड़ी मे बैठ कर चल दिए, इस बार मम्मी बीच , मे बैठ गई थी और संगीता उनकी दूसरी तरफ बैठी थी,
 

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अब मैं मम्मी से सॅट कर बैठा था और मम्मी के बदन से उठती हुई खुश्बू ने मेरे लंड को फिर से खड़ा होने के लिए मजबूर कर दिया था, मैं समझ गया था कि मम्मी को अगर चोदने को मिल जाए तो साली मस्त कर देगी, उसकी भारी भरकम गुदज जवानी ने मुझे पागल कर रखा था और मैं हिम्मत करके मम्मी की मोटी जाँघो पर अपने हाथ को रख कर उनकी जाँघो की मोटाई और गुदाज मुलायम एहसास को महसूस करके मस्त हो रहा था,

करीब 5 बजे के लगभग हम लोग शिर्डी पहुच गये और फिर उस दिन हम लोगो ने दर्शन करने के बाद खूब घूमे फिरे और शाम को 4 बजे वापस चल दिए, इस बार ना मम्मी सोई और ना ही संगीता को सोने का मोका मिला और हम लोग रास्ते भर बाते करते हुए घर पहुच गये,

अगले दिन सुबह से ही संगीता मेरे आस पास मंडरा रही थी और मैं समझ गया था कि मेरी रंडी बहना की चूत खूब पानी छ्चोड़ रही है मैने देखा मम्मी किचन मे है और मैने संगीता को पकड़ कर अपनी गोद मे बैठा कर उसके गालो को चूमते हुए हल्के से उसके दूध को च्छू लिया और संगीता मेरे सीने से चिपकते हुए गहरी साँसे लेने लगी,

संगीता- भैया आज मुझे भी अपने साथ घुमाने ले चलो ना

राज- अरे बेबी मैं वहाँ घूमने थोड़े ही जाता हू जो तू कह रही है मैं वहाँ काम करने जाता हू

संगीता- भैया आप ने ही कहा था कि तुझे गन्ने चुसाने ले जाउन्गा और अब मना कर रहे हो

राज- अच्छा जा मम्मी से पुच्छ ले यदि मम्मी हाँ कह देगी तो ले चलूँगा,

संगीता मेरी गोद से उठी और दौड़ कर किचन मे चली गई और मम्मी से कहने लगी आज मुझे भी भैया के साथ गाँव घूमने जाना है,

रति- अरे पागल तू क्या करेगी वहाँ गाँव मे बोर हो जाएगी

संगीता- मूह बना कर मैं कुच्छ नही जानती मुझे तो बस भैया के साथ जाना है,

रति- ठीक है जा लेकिन अपने भैया को परेशान मत करना

संगीता खुशी से मम्मी का मूह चूम लेती है और फिर मेरे सीने से आ कर लिपटते हुए कहती है भैया अब तो मम्मी ने भी हाँ कह दिया है अब तो मुझे ले चलोगे ना,

राज- मैने संगीता के होंठो को एक दम से गहराई से चूम लिया और संगीता मुझसे चिपक गई, मैने कहा एक शर्त पर तुझे ले जाउन्गा

संगीता- वो क्या

राज- वहाँ मैं तुझसे जो कहूँगा वह तुझे करना पड़ेगा,

संगीता- मुस्कुराते हुए, भैया आप मुझे नही भी ले जाते तो भी आप जो कहते मैं वह ज़रूर करती आख़िर अपने भैया की बात कैसे टाल सकती हू

राज- मैने संगीता की चुचियों को अपने दोनो हाथो से हल्के से दबाते हुए कहा मेरी गुड़िया रानी को बड़ा ख्याल है अपने भैया का, अब तो मुझे अपनी बहना को आज लेजाना ही पड़ेगा और खूब मस्त गन्ने चुसवाने पड़ेंगे, बोल चुसेगी अपने भैया का गन्ना

संगीता- इठलाते हुए, मैं तो कब से यही चाहती हू भैया लेकिन आपको मेरा ख्याल ही कहाँ रहता है
 

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मैने संगीता की गुदाज जवानी को सहलाते हुए उससे कहा मेरी रानी आज मैं तेरी सारी शिकायत दूर कर दूँगा और तू एक दम मस्त हो जाएगी, कुच्छ देर बाद मैं और संगीता तैयार हो गये और फिर अपनी बाइक पर संगीता को बैठा कर मैं हरिया और रामू के गाँव की ओर चल दिया,

मैं बाइक बड़े आराम से चला रहा था और संगीता मेरे पिछे मुझसे सॅट कर बैठी थी, संगीता ने जीन्स और टीशर्ट पहना हुआ था और अपनी टाँगे बाइक के दोनो तरफ करके मेरी कमर पकड़ कर मुझसे पूरी तरह सटी हुई थी जब कोई ब्रकेर आता तो संगीता मुझसे और भी सॅट जाती और मेरा लंड खड़ा हो चुका था, कुच्छ ही देर मे हम साइट पर पहुच गये और मैने मजदूरो को काम पर लगाने के बाद पेदल संगीता का हाथ पकड़ कर उसे तालाब के आसपास घुमाने लगा और गाँव का नज़ारा दिखाने लगा, संगीता काफ़ी खुस लग रही थी और अपनी मोटी गंद मतकाते हुए मेरे आगे आगे चल रही थी, मैं थोड़ा उसके बराबर मे पहुच कर धीरे से उसकी मोटी गंद पर हाथ मारते हुए उससे पुच्छने लगा- संगीता कैसा लगा तुमको गाँव का महॉल संगीता- अच्छा लग रहा है भैया यहा तो पेड़ की च्चाँव मे बैठ कर ठंडी हवा लेने का मज़ा ही कुच्छ और है,राज- चल तुझे गाँव के गन्ने चुस्वाता हू, बड़े मीठे गन्ने है यहा केसंगीता और मैं पेदल घूमते हुए हरिया के खेत की ओर चल देते है कुच्छ देर बाद हम दोनो हरिया के खेत मे पहुच जाते है और हमे वहाँ चंदा मिल जाती है,राज- अरे चंदा तुम्हारा बाबा हरियाकहाँ हैचंदा- बाबू जी वह सुधिया चाची के खेत की ओर गये है और हमे कह गये है जब तक हम आए ना तुम कही नही जाना,राज- अच्छा चंदा देखो यह संगीता है और संगीता यह चंदा है तुम दोनो बाते करो मैं हरिया के पास से आता हू उसके बाद मैं वहाँ से चला गया और संगीता चंदा से बाते करने लगी,जब मैं रामू के खेतो की ओर पहुचा तो सुधिया बैठी बैठी घास काट रही थी और हरिया उसके सामने बैठा हुआ अपने लंड को धोती के उपर से मसल रहा था, मैने दूर से उसे आवाज़ दी और वह दौड़ कर मेरी तरफ आ गया

राज- अरे माफ़ करना हरिया मैने तुम्हे डिस्टर्ब किया लेकिन मैं अपनी बहन संगीता को लेकर आया हू और कुच्छ देर के लिए मैं उसे यही छ्चोड़ कर साइट पर जा रहा हू तब तक तुम उसे थोड़ा गरम करने की कोशिश करो, उसकी चूत से पानी बहने लगना चाहिए ताकि बाद मे मुझे उसे चोदने मे कोई दिक्कत ना हो,हरिया- आप फिकर ना करो बाबूजी बस आप हम पर छ्चोड़ दो, उसके बाद मैं वहाँ से चला गया और हरिया सुधिया से यह कह कर चला गया कि वह अभी आता है,हरिया जब अपने खेत मे गया तो संगीता और चंदा उसे देख कर खड़ी हो गई,हरिया- अरे बैठो संगीता बैठो हम जानते है तुम हमारे बाबूजी की प्यारी सी बहना हो ना, आपके भैया आपके बारे मे हमसे बहुत बाते करते है, वह आपको बहुत प्यार करते है,संगीता- अच्छा और क्या कहते है भीया मेरे बारे मे हरिया- वो सब हम आपको बताएगे संगीता लेकिन पहले कुच्छ पानी वग़ैरह तो पीलो, चंदा जा संगीता बहन के लिए पानी लेकर आ और फिर चंदा पानी लेकर आ जाती है, हरिया झोपड़ी मे जाता है और चंदा को इशारे से बुला कर उसके कान मे कुच्छ समझा कर बाहर आ जाता है, हरिया- अरे चंदा मैं ज़रा रामू भैया के खेतो मे काम से जा रहा हू तू संगीता बहन को गन्ने के खेतो मे घुमा कर उन्हे अच्छे मीठे मीठे गन्ने चूसने को दे दे तब तक मैं आता हू, हरिया वहाँ से चला गया और चंदा संगीता के पास आकरछंदा- चलो दीदी मैं आपको मस्त गन्ने चुस्वाउंगी, आपको देख कर लगता नही है कि कभी आपने गन्ने चूसे है,संगीता- गन्ने तो नही चूसे चंदा लेकिन हाँ गन्ने का रस ज़रूर पिया हैचंदा- ज़ोर से हस्ते हुए, अरे दीदी जब तक गन्ना चुसोगी नही रस कहाँ से निकलेगसांगीता- अरे पगली रस गन्ने को मशीन मे डाल कर निकाला जाता हैचंदा- मुस्कुराते हुए कौन सी मशीन उपर वाली या नीचे वाली या फिर पिछे वालीसंगीता उसे गौर से देख कर मैं तुम्हारा मतलब नही समझी,चंदा- दीदी कभी तुमने गन्ना देखा हैयसंगीता- अरे पागल वो सामने लगे तो है
 
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