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Incest Ganne Ki Mithas

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मैं रामू के दरवाजे के पास खड़ा हो गया और ज़ोर से चिल्लाया - अलख निरंजन, अलख निरंजन

तभी एक दम से दरवाजा खुला और सामने रामू की मा मुझे देखते ही हाथ जोड़ कर कहने लगी प्रणाम महराज वह शायद अंदर कपड़े धो रही थी उसके गोरे-गोरे भरे हुए गाल मोटे-मोटे दूध लाल कलर के ब्लाउज को फाड़ कर बाहर आ रहे थे दो बटन खुले होने से उसके गोरे-गोरे मोटे दूध पूरी तरह छल्के जा रहे थे बलौज के नीचे ब्रा का तो कोई नाम ही नही था

और फिर उसका गुदाज मखमली पेट और गहरी नाभि देख कर सचमुच उसकी मोटी गंद और उसकी मोटी-मोटी गदराई जाँघो का अंदाज़ा आसानी से लगाया जा सकता था मेरा तो उसे देखते ही लंड खड़ा हो गया, बहुत मस्त माल था लेकिन ना जाने क्यो मेरी मस्तानी मम्मी रति के आगे थोड़ी फीकी थी फिर भी अभी मैने उसे पूरी नंगी देखा कहा था खेर नंगी तो मैने कभी अपनी मम्मी को भी नही देखा था लेकिन फिगुर और उसके कटाव की बात करे तो मेरी मा रति का कोई तोड़ नही था खेर,

सुधिया- बाबा आप कौन है और कहाँ से पधारे है

राज- बेटी हम अपना परिचय नही बल्कि लोगो के दुखो के निवारण का उपाय बताते है, पर शायद घर की चौखट मे खड़े रख कर तुम हमारा अपमान करना चाहती हो,

सुधिया- माफ़ करो बाबा जी और भीतर पधारने का कष्ट करे, और फिर सुधिया ने मुझे एक आसन बैठने के लिए दे दिया, और मैं उस पर बैठ गया,

राज- सुधिया बेटी ला ज़रा जल ग्रहण करवा दे

सुधिया मेरे मूह की ओर चकित होकर देखते हुए, बाबा आप मेरा नाम कैसे जानते है

राज- बेटी हम तो आंतेरयामी है और हम तेरे गाँव के पास से गुजर रहे थे तभी हमे कोई काली छाया तेरे घर के उपर मंडराती नज़र आ गई इसलिए हम यहाँ चले आए तेरे घर पर संकट के बदल मंडरा रहे है बेटी,

सुधिया एक दम से घबरा कर मेरे पेरो को पकड़ कर बैठ गई और कहने लगी बाबा हम तो रोज पूजा पाठ करते है हमारे घर मे संकट कैसे आ सकता है,

राज- बेटी तेरे कुल तीन बच्चे है ना और तुझे मालिक ने एक ही बेटा दिया है बस उसी बेटे पर संकट आ सकता है और तुझे बहुत कष्ट देकर जाएगा,

सुधिया- बाबा दया करो कोई उपाय तो होगा इस संकट को टालने के लिए आप तो आंतेरयामी है आप तो सब जानते है,

राज- हाँ उपाय है बेटी तभी तो मैं तेरे पास आया हू पर उपाय ज़रा कठिन है शायद तू ना कर पाए

सुधिया- मैं हर उपाय करने को तैयार हू बाबा आप बताइए तो सही

राज- ठीक है तो ध्यान से सुन कल सुबह 5 बजे प्रातः उठ कर तुझे अपने गाँव के किसी भी तालाब या नदी पर जाकर पूरी नंगी होकर स्नान करना होगा उसके बाद वहाँ से 21 कदम नंगी चल कर जाना होगा 21 कदम चलने के बाद तुझे जो सबसे पहला आदमी अपने हाथ मे जल लेकर जाता हुआ नज़र आएगा तुझे उसी आदमी के साथ संभोग करना होगा,
 

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सुधिया- यह आप क्या कह रहे है बाबा यह मैं कैसे कर सकती हू

राज- सोच लो बेटी इसके अलावा कोई उपाय नही है और यह संकट भी इसलिए तुझ पर आया है क्यो कि तूने अपने बेटे के साथ अपनी काम वासना पूरी की है और फिर मैं ज़ोर से चिल्लाया, बता कि है कि नही अपने बेटे के साथ अपनी वासना की तृप्ति,

सुधिया सीधे मेरे पेरो मे गिर गई और रोने लगी,

सुधिया- बाबा मुझे माफ़ कर दीजिए मुझसे ग़लती हो गई

राज- नही बेटी तुझे पछटाने की ज़रूरत नही है बस मैने जो उपाय बताया है वह कर लेना तेरा बेटा लंबी उम्र प्राप्त कर लेगा,

सुधिया- पर बाबा अगर मुझे सुबह वहाँ कोई नही मिला तो

राज- रामू की मा के सवाल ने वाकई मेरी गंद फाड़ दी मैं सोचने लगा क्या जवाब दू फिर मैने उससे कहा यह तुमने बड़ा ही बुद्धिमानी का सवाल किया है जाओ हमारे लिए जल लेकर आओ हम अभी ध्यान लगा कर कुछ सोचते है और जैसे ही सुधिया उठ कर जाने लगी उसकी घाघरे मे मटकते गुदाज चूतादो की हर्कतो ने मेरे लोदे को तान कर रख दिया,

मैने मन मे सोचा इसकी गुदाज मोटी गंद मारने मे तो मज़ा आ जाएगा बस फिर जैसे ही सुधिया पानी लेकर लोटी मैने जल लेकर उसे वही अपने सामने बैठने को कहा जब वह बैठ गई तो उसके मोटे-मोटे दूध पूरी तरह मुझे नज़र आने लगे मेरा तो दिल उसके मोटे-मोटे दूध को देख कर मस्त हो गया मैने उसके उपर जल च्चिड़क कर अपनी आँखे बंद कर ली और अपने होंठो से बुदबुदाने लगा उसके बाद कुछ देर मे मैने अपनी आँखे खोली और कहा

राज- बेटी सच बताओ तुमने कई बार अपने बेटे से संभोग किया है ना

सुधिया- मेरी बात सुन कर थोड़ा शर्मा गई और हाँ मे अपनी गर्दन हिला दी

राज- बेटी कल तुम्हे एक साथ दो आदमियो के साथ संभोग करना होगा

सुधिया- आश्चर्या से मेरे मूह की ओर देखने लगी

मैं उसके अंदर के हालत समझ गया और मैने कहा क्या तुमने कभी एक साथ दो लोगो के साथ संभोग नही किया है ना

सुधिया- शायद मेरी बातो से गरम हो रही थी और अपने गले का थूक गटकते हुए कहने लगी नही बाबा जी मैने दो लोगो के साथ कभी नही किया,

राज- बेटी कल तुझे जो भी पहला आदमी जल लेकर आता हुआ नज़र आए उससे तुझे संभोग करना है जब वह तुझे नंगी देख कर तुझे अपनी बाँहो मे भर ले तब तू थोड़ा ना नुकुर करके उससे संभोग करेगी जब वह तुझे भोग रहा होगा तब तुझे इधर उधर ध्यान रख कर देखना होगा और जब तुझे कोई दूसरा आदमी नज़र आने तक पहले वाले आदमी को भेज कर उस दूसरे वाले आदमी को भी अपने पास बुलवाना होगा और फिर उस आदमी से भी तुझे संभोग करना होगा

लेकिन ध्यान रहे दोनो आदमी एक साथ तेरे दोनो अंगो मे अपना लिंग प्रवेश कराएगे तभी तू दोष मुक्त होगी, और यह भी ध्यान रखना दूसरे आदमी के हाथ मे भी जल का लोटा होना चाहिए,
 

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सुधिया- मेरी बातो बड़े ध्यान से सुन रही थी फिर मैने उसके गोरे गालो पर हाथ फेरते हुए कहा जा बेटी मेरा आशीर्वाद तेरे साथ है अब मुझे इजाज़त दे मेरा काम पूरा हुआ अब अपने घर को बचाने की जवाबदारी तेरी है उसके बाद सुधिया ने मेरे पेर च्छुए और मैं उसके घर से बाहर आ गया,

जब मैं बाहर आया तो आसपास देखने के बाद मैं उस ओर चल दिया जहाँ हरिया से मिलना था उसके बाद हरिया मुझे साथ लेकर अपने घर की ओर चल पड़ा,

हरिया- उत्सुकतावश मुझसे पुच्छने लगा क्या हुआ बाबूजी बात बन गई क्या

राज- पहले मुझे एक मस्त चिलम बना कर पिलाओ फिर मैं बताता हू क्या हुआ उसके बाद मैं और हरिया पेड़ की छाया मे बैठ गये और हम दोनो दम मारने लगे,

हरिया- अब बताओ भी बाबू जी क्या बात हुई सुधिया भाभी से

राज- मुस्कुराते हुए तुम्हारा काम हो गया है हरिया लेकिन मुझे भी तुम्हारे साथ सुधिया को चोदना होगा,

हरिया- लेकिन वह कैसे

राज- फिर मैने हरिया को सारी बात बता दी और उसे समझा दिया कि सुबह 5 बजे हम दोनो को पास वाले तालाब पर चलना होगा,

हरिया मेरी बात सुन कर खुशी से पागल हो गया और बोला बाबू जी आज से आप हमारे गुरु हुए जो आप कहेगे हम मानेगे,

राज- अरे हमे गुरु ना बनाओ और अब हमे अपने घर ले चलो और ज़रा अपनी बीबी के हाथ की चाइ ही पिलवा दो

हरिया- क्यो नही बाबू जी आपने तो हमे धन्य कर दिया बस एक बार हम सुधिया भौजी को चोद ले फिर देखना जब मन होगा उसकी मोटी गंद मार लिया करेगे,

हम दोनो बाते करते हुए हरिया के घर पहुच गये, रुक्मणी ने दरवाजा खोला और हरिया ने घर मे घुसते हुए मुझसे कहा आओ बाबू जी

उसने मुझसे अपनी बीबी के सामने बाबूजी कहा तो मैने हरिया को घूर कर देखा तो कहने लगा मेरा मतलब है बाबा जी आइए अंदर बैठिए

हरिया- अरे सुनती हो जाओ बाबा जी के लिए पानी की व्यवस्था करो तुम नही जानती यह बहुत पहुचे हुए महात्मा है,

मैने हरिया को इशारे से बुलाया और उससे कहा

राज - हरिया तुम अब यहाँ से सीधे खेतो मे चले जाओ और वहाँ जाकर रामू रमिया और चंदा तीनो को यहाँ भेज दो और अपनी पत्नी को समझा दो कि आज तुम खेतो मे ही सो जाओगे,

हरिया- लेकिन रामू को यहाँ क्यो बुला रहे हो

राज- अरे तुम समझ नही रहे हो मैने तुम्हारा काम तो कर दिया अब मैं भी तो थोड़ा रमिया के साथ मस्ती मार लू, मैं किसी भी तरह रामू और तुम्हारी बीबी और चंदा को बातो मे लगा कर अंदर ले जाकर रमिया को चोद लूँगा और उसके बाद शाम को रामू उसे लेकर अपने घर चला जाएगा और मैं तुम्हारे घर पर रात गुज़ार लूँगा,

हरिया- लेकिन बाबूजी मेरा मतलब है बाबाजी मैं खेतो मे रात भर तो बोर हो जाउन्गा कोई और आइडिया बताओ ना जिससे मैं भी रात को मस्त रहू और आप भी मज़ा ले लो, मैं कुछ सोचते हुए अच्छा एक काम करो रात को खाने के समय तुम घर आ जाना और फिर चंदा को लेकर खेतो मे चले जाना इस तरह तुम रात भर चंदा को चोदना और फिर सुबह-सुबह तो तुम्हे सुधिया चोदने को मिल ही जाएगी,
 

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हरिया- यह बात एक दम फिट है बाबू जी मैं जाता हू और फिर हरिया ने रुक्मणी को समझा दिया की बाबाजी बहुत पहुचे हुए है इनका शाम तक ख्याल रखना मैं खाने पर आउन्गा और रात को बाबा जी के लिए बढ़िया सा खाना तैयार कर लेना, हरिया के जाने के बाद रुक्मणी मेरे लिए पानी लेकर आई तब मैने उसके बदन पर नज़र डाली, रुक्मणी भी भरे बदन की औरत थी और उसकी भी गंद और चुचिया खूब बड़ी नज़र आ रही थी हालाकी रामू की मा से वह कम उमर की लग रही थी और पहनावा भी उसका साडी और ब्लौज था कुल मिला कर मस्त चोदने लायक माल था,

राज- रुक्मणी बेटी तुम्हारे जल मे मिठास है लेकिन तुम्हारे मन मे एक बहुत ही बड़ा भंवर है जिसमे कई बाते समाई हुई है और तुम्हारा मन बहुत चंचल है, तुम्हारी बड़ी कोशिशो से तुम्हारी बड़ी बेटी का घर वापस बस सका है लेकिन एक चीज़ है जो तुम्हारे घर मे परेशानी बन कर कष्ट देने वाली है

रुक्मणी - वह क्या बाबा जी

राज- तुम ने पराए मर्दो के साथ संभोग किया है इसलिए तुम्हारी बड़ी बेटी के जीवन मे समस्या आई लेकिन अब तुम लगातार पराए मर्द से संभोग करती रहती हो जिसके चलते तुम्हारी बेटी चंदा पर भी संकट आने की संभावना बढ़ गई है,

मेरी बाते सुन कर रुक्मणी के माथे पर पसीना आ गया और वह अपनी नज़रे नीचे करके मेरे सामने बैठ गई और कहने लगी नही -नही बाबा जी मैने कभी किसी के साथ ऐसा कुछ नही किया है

राज- चिल्लाते हुए, चुप रहो लड़की वरना अभी श्राप दे दूँगा, मेरे सामने झूठ कतई नही टिक सकता, अगर तुमने तुरंत सच स्वीकार नही किया तो हम रुष्ठ हो जाएगे और यदि हम नाराज़ हुए तो तुम जानती हो क्या हो सकता है,

रुक्मणी- मेरे पेरो को पकड़ कर, मुझे माफ़ कर दो बाबा जी मैने आपसे झूठ कहा आप बिल्कुल सच कह रहे है मैने यह अपराध किया है, मुझे माफ़ कर दीजिए,

राज- बेटी माफी नही इस समश्या का निवारण लेकर हम तेरे दर पे आए है लेकिन उसके लिए तुझे हमारे बताए अनुसार कर्म करना पड़ेगा तभी तेरी बेटी दोष मुक्त हो पाएगी,

रुक्मणी- मैं सब कुछ करने को तैयार हू बाबा जी आप बताइए मुझे क्या करना होगा

राज- बेटी अभी तुझे अपनी बेटी चंदा को लेकर उसी पुरुष के साथ बैठना होगा लेकिन ध्यान रहे तुम तीनो पूरी तरह नंगे होने चाहिए और फिर वही आदमी जिसके साथ तुम संभोग करती हो उसके साथ मिलकर अपनी बेटी चंदा को उत्तेजित करना होगा और फिर अपने हाथो से उस पराए मर्द के लिंग को अपनी बेटी के अंदर प्रवेश करवाना होगा, और फिर तुम तीनो को सामूहिक संभोग करना होगा,

रुक्मणी- लेकिन बाबा यह कैसे होगा आप जिस मर्द की बात कर रहे है वह तो कही दूर खेतो मे काम कर रहा होगा और मेरी बेटी चंदा भी यहाँ नही है, फिर आप कह रहे हो कि यह सब अभी करना होगा,

राज- बेटी हम हवा मे बाते नही करते है हम अभी अपने मन्त्र की शक्ति से उन दोनो आत्माओ को यहाँ जल्दी ही बुला लेते है और फिर मैं ऐसे ही उसे दिखाने के लिए मन्त्र पढ़ने लगा और करीब 10 मिनिट के बाद रामू रमिया और चंदा एक दम से घर के अंदर घुस आए जिन्हे देखते ही रुक्मणी की आँखे फटी की फटी ही रह गई,

रामू ने मुझे देखते ही मुस्कुरकर प्रणाम किया और मैने उसे आशीर्वाद दिया,

राज- क्यो रुक्मणी बेटी अब तो समझ गई होगी तुम कि बाबा क्यो पधारे है तुम्हारे यहाँ और तुम्हारे घर पर दोष है कि नही

रुक्मणी- मेरे पेरो मे गिर कर आप धन्य है बाबा जी वाकई आप बहुत पहुचे हुए महात्मा है,

रामू मुस्कुरकर मेरी ओर देखने लगा और मैने प्यार से मेरे पेरो मे झुकी हुई रुक्मणी की ब्लौज मे से झँकती नंगी पीठ को सहलाते हुए कहा बेटी आज हम तेरे सारे कष्ट दूर कर देंगे और मेरी आक्टिंग देख कर रामू मुस्कुराकर मुझे सलाम करने लगा
 
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राज- अब जाओ रुक्मणी और भीतर के कमरे मे अपनी बेटी चंदा को ले जाओ और जैसी क्रिया मैने बताई है उसकी तैयारी करो हम इस बालक को शुद्ध करके अंदर भेजते है, रुक्मणी के अंदर जाते ही रामू ने रमिया को कहा तू जाकर वहाँ बैठ मैं बाबा जी से तेरे बारे मे भी कुछ पुच्छ लू कही तुझे कोई समस्या तो नही है,

रामू की बात सुन कर रमिया मुस्कुराते हुए सामने जाकर बैठ गई, मैने जब रमिया को देखा तो मुझे लोंड़िया बड़ी चुदासी नज़र आ रही थी,

रामू- हाँ बाबूजी अब बोलिए क्या करना है

राज- रामू तेरा काम हो गया है तू जाकर दोनो मा बेटी को तबीयत से सारी दोपहर चोदना और थोड़ा रमिया को समझा देना कि बाबा जी जैसा कहे वैसे ही करना, शाम को 6 बजे तक जितना चाहे चोद लेना पर ध्यान रहे शुरुआत चंदा को चोदने से करना और दोनो मिलकर पहले चंदा को खूब चूसना चाटना ताकि रुक्मणी को कोई असर ना हो, और रुक्मणी से यह ना कहना कि तुझे हरिया ने यहाँ भेजा है,

रामू- मैं सब समझ गया साहेब जी लेकिन हरिया काका अब इधर आएगा तो नही

राज- नही वह रात से पहले नही आएगा तू आराम से मस्ती मार अब सुन रुक्मणी को मेरे पास भेज और तू जाकर कमरे मे ज़मीन पर चोदने के लिए बढ़िया सा बिस्तेर लगा दे,

रामू अंदर जाकर रुक्मणी को मेरे पास भेजता है

रुक्मणी- हाथ जोड़ कर जी बाबा जी आपने बुलाया

राज- देखो बेटी यह सब के पहले तुम सभी को शुद्ध होना पड़ेगा और रामू तुम सभी को जल से शुद्ध करके मेरे पास बारी-बारी से भेजेगा और फिर मैं जल के बाद तेल से तुम सभी के बदन को पवित्र करूँगा लेकिन पहले तुम और चंदा दोनो मिल कर रमिया को पूरी नंगी करके उसे पानी से अच्छी तरह से नहला कर पूरी नंगी ही मेरे पास भेज दो, तब रुक्मणी रमिया को लेकर सामने आँगन मे जहाँ रुक्मणी और चंदा रोज खुल्ले मे बैठ कर नहाती थी वहाँ बैठा कर रमिया का घाघरा और चोली उतार कर अलग कर देती है मैं रमिया को नंगी देखते ही उत्तेजित हो गया और उसकी कमसिन उठी हुई जवानी और मोटे-मोटे ठोस दूध को देख कर मेरे मूह मे पानी आ गया,

क्रमशः........



रुक्मणी रमिया की मोटी-मोटी जाँघो और चूत पर अच्छे से साबुन लगा कर उसे नहला रही थी और चंदा रमिया के मोटे-मोटे दूध को अपने नाज़ुक हाथो से सहला रही थी, रमिया वही बैठी हुई मेरी ओर देख रही थी और मैं अपनी धोती मे खड़े लंड को सहला रहा था,

तभी सामने से रामू आ जाता है और वह आँगन की ओर देखने लगता है और मुस्कुराता हुआ मेरे करीब आकर कहता है बाबू जी आपको तो मज़ा आ जाएगा रमिया के दूध खूब कसे हुए है और उसकी चूत जब आप चतोगे तो आपको मस्त कर देगी खूब अपनी जंघे फैला-फैला कर चुदवाती है वह,

राज- रामू अब तुम जाकर चंदा को पूरी नंगी करके रुक्मणी के साथ उसे भी खूब रगड़-रगड़ कर नहला दो और रमिया को मेरे पास भेज दो

रामू जल्दी से आँगन मे गया और उसने रुक्मणी से कहा अब चंदा को भी नंगी करके नहलाना है और साथ मे तुम भी पूरी नंगी हो जाओ और रमिया तू जा बाबा जी तुझे बुला रहे है और जो पुच्छे उन्हे सब सही -सही बताना और जैसा कहे वैसा करना नही तो बहुत समस्या आ जाएगी समझी

रमिया- आप चिंता ना करो भैया मैं समझ गई और फिर रमिया मेरी ओर नंगी ही चल कर आने लगी मैने पहली बार इतने करीब से किसी लोंड़िया को पूरी नंगी देखा था मेरा लंड बुरी तरह फंफना रहा था, रमिया जैसे ही मेरे पास आकर खड़ी हुई, मैने उससे कहा बेटी जाकर कटोरी मे तेल लेकर आओ और फिर रमिया तेल लाने के लिए जैसे ही पलटी उसकी गुदाज मोटी गंद देख कर मुझे मज़ा आ गया बहुत ही गोरी और उठी हुई गंद थी उसकी,

उधर रामू ने रुक्मणी की साडी उतार दी और फिर ब्लौज और पेटिकोट भी उतार दिया और रुक्मणी पूरी नंगी हो गई, रुक्मणी ने चंदा को भी पूरा नंगा कर दिया, चंदा थोड़ी रमिया से छ्होटी थी लेकिन उसके मोटे-मोटे दूध रमिया के बराबर ही नज़र आ रहे थे और उसकी गंद भी रमिया की गंद के बराबर नज़र आ रही थी लगता था जैसे हरिया ने खूब अपनी बेटी के बोबे मसले होंगे और खूब उसकी गुदाज गंद को दबोचा होगा तभी तो दोनो लोंदियों के बदन की चर्बी अब बढ़ती हुई नज़र आ रही थी,

उधर रुक्मणी जब नंगी हुई तो मुझे फिर से मेरी मम्मी रति की याद आ गई रुक्मणी की गंद का फैलाव देख कर मैं कल्पना करने लगा कि मेरी मम्मी रति की गंद तो रुक्मणी की गंद से भी ज़्यादा चौड़ी नज़र आती है जब मम्मी नंगी होती होगी तो उसकी भारी गंद कितनी खूबसूरत लगती होगी, जहाँ मैने अपनी मम्मी के नंगे बदन के बारे मे सोचा मेरा लंड झटके देने लगा, रुक्मणी का गुदाज उभरा हुआ पेट और गहरी नाभि मुझे बार-बार मम्मी की याद दिला रही थी,

और मैं मन ही मन मे सोच रहा था कि कैसे भी करके मम्मी और संगीता को पूरी नंगी ज़रूर देखूँगा,

तभी रमिया मेरे पास तेल की कटोरी ले कर आ गई और मैने उससे कहा अब तुम मेरी तरफ पीठ करके बैठ जाओ और मैं तुम्हे तेल से पवित्र करता हू और फिर क्या था

रमिया मेरे सामने पीठ करके बैठ गई और मैने कटोरी से तेल लेकर जब अपना हाथ आगे ले जाकर रमिया के मोटे-मोटे दूध को अपने हाथो मे भर कर दबोचा तो मेरी हालत खराब हो गई उसके दूध खूब कठोर थे और मैं सोचने लगा जब रमिया के दूध जो कपड़े के उपर से छ्होटे दिखते है इतने गुदाज और कठोर है तो मेरी बहन संगीता के मोटे-मोटे बोबे तो उसके कपड़े के उपर से भी कितने मोटे-मोटे नज़र आते है जब संगीता के मोटे-मोटे दूध मैं अपने हाथो मे भर कर मसलूंगा तब कितना मज़ा आएगा,

उधर रामू बड़े प्यार से एक हाथ से चंदा के बोबे पर साबुन लगा रहा था और दूसरे हाथ से रुक्मणी की मोटी गंद के नीचे हाथ लेजाकार उसकी गंद और चूत मे साबुन लगा रहा था और खूब मसल रहा था, दोनो रंडिया भी मस्ती मे नज़र आ रही थी और रुक्मणी भी चंदा के एक बोबे को मसल कर दबा रही थी और चंदा अपनी मा की चूत मे साबुन लगा रही थी तीनो एक दूसरे के सामने मूतने वाले अंदाज मे नंगे बैठे थे रामू का लोडा ही बस धोती मे क़ैद था ,

कुछ देर बाद जब रामू उन दोनो रंडियो को नहला चुका तब उसने वही से मेरी ओर देखा तब मैने उसे तेल की कटोरी ले जाने को कहा और रामू से कह दिया कि तुम वही सामने दोनो के बदन पर खूब अच्छे से तेल लगाओ लेकिन ध्यान रहे शरीर का कोई भी हिस्सा बचना नही चाहिए,

रामू ने दोनो के पिछे जाकर पहले उनकी पीठ पर तेल डाल कर मसलना शुरू कर दिया और मैं सामने का मस्त नज़ारा देखता हुआ रमिया के मोटे-मोटे बोबे खूब कस-कस कर मसल रहा था,

रमिया- आह सी सी

राज- क्या हुआ बेटी क्या दर्द हो रहा है

रमिया- आह नही बाबा जी बहुत अच्छा लग रहा है,

राज- तुम्हारा भाई रामू इन्हे दिन भर खेतो मे खूब दबाता है ना

रमिया- हाँ बाबा जी भैया मुझे खेतो मे पूरी नंगी करके ही रखते है और दिन भर मुझे चोद्ते है,
 

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राज- तुम्हारा भाई रात को तुम्हारी मम्मी को भी चोद्ता है ना

मेरी बात सुन कर रमिया ने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी चिकनी चूत पर रख दिया और मैने उसकी मस्त भोसड़ी को अपने हाथो मे भर कर दबोच लिया,

रमिया- हाँ बाबा जी भैया सोचते है मैं सो जाती हू और मा भी मुझे एक दो बार हिला कर देख लेती है लेकिन जब मैं नही उठती हू तब भैया उठ कर मम्मी का घाघरा और चोली उतार कर उन्हे पूरी नंगी कर देते है,

राज- फिर क्या करता है तुम्हारा भाई तुम्हारी मम्मी के साथ,

रमिया- बाबा जी रामू भैया फिर मम्मी को नंगी करके उन्हे झुका देते है और उनकी गंद के पीछे जाकर अपनी जीभ निकाल कर मम्मी की गंद और चूत के छेद को कम से कम आधे घंटे तक चूस्ते और चाटते है

राज- तुमने देखी है अपनी मम्मी की चूत और गंद, कैसी लगती है सुधिया की चूत और गंद

रमिया- अरे बाबा जी आप तो मेरी मा का नाम भी जानते हो, बाबा जी मेरी मा की चूत मेरी चूत से बहुत बड़ी है और उसकी चूत का छेद भी बहुत बड़ा है और गंद तो बहुत ही मोटी है रुक्मणी चाची से डबल है मेरी मा की गंद,

सामने रामू बड़े ही जोश मे दोनो मा बेटियो के पूरे बदन मे तेल लगा चुका था और दोनो रंडियो का बदन पूरी तरह तेल मे चमकाने लगा था आज तो मेरा दिन बहुत अच्छा था तीन-तीन रंडिया एक साथ नंगी देखने को मिल रही थी, मैं बिल्कुल जल्दी नही करना चाहता था और रुक्मणी को तो मैं अपने प्लॅनिंग के हिसाब से आज पूरी रात नंगी करके चोदना चाहता था,

मैने रमिया की चूत मे एक उंगली पूरी डाल कर उसके तेल मे भीगे मोटे अमरूदो को कस कर दबाते हुए कहा बेटी तुम दिखने मे तो बहुत शांत लगती हो लेकिन तुमसे बात करने पर लग रहा है जैसे तुम बहुत चंचल और नटखट हो, क्या तुमने रामू के अलावा भी किसी से अपनी चूत मरवाई है.

रमिया- नही बाबा जी हमे तो रामू भैया से चुदना ही अच्छा लगता है पर जब रामू भैया अपने मोटे लंड से मा के चूतादो को खूब नंगी करके थोन्क्ते है तब मुझे उनकी ठुकाई की ठप-ठप की आवाज़ से बहुत मज़ा आता है ऐसा लगता है कि रामू भैया मम्मी की मोटी गंद मे खूब ज़ोर-ज़ोर से अपने लंड को मारे,

आप नही जानते बाबा जी कभी-कभी तो मा नंगी खड़ी होकर रामू भैया के मूह मे मूतने लगती है और रामू भैया मा की पूरी चूत को अपने मूह मे भर कर उनका मूत चाटने लगते है तब मा खड़ी-खड़ी ऐसे अपनी चूत रामू भैया के मूह पर मारती है कि उसकी गंद को मटकती देख कर मेरा भी पानी निकल आता है,

रमिया की बात सुन कर मेरा लोडा एक दम से मेरी धोती से बाहर झाँकने लगता है और मैं अपने लंड के टोपे को सहलाते हुए रमिया को उठा कर अपनी ओर घुमा लेता हू और उसके नंगे बदन को खूब कस कर अपने सीने से दबा लेता हू, रमिया अपनी जंघे चौड़ी करके किसी बंदरिया की तरह मेरी छाती से चिपक जाती है,

जब रामू ने मेरी ओर देखा तो मैने उसे इशारे से दोनो को आराम से कमरे मे लाकर चोदने को कहा तब रामू ने दोनो रंडियो को कमरे मे चलने को कहा दोनो मा बेटी पूरी नंगी जब मेरे सामने से गुज़री तो उनका तेल से लथपथ बदन देख कर मेरा पानी छूटते-छूटते रह गया,

रामू और रुक्मणी ने चंदा को लेटा दिया और रामू ने अपना लंड निकाल कर चंदा के मूह मे दे दिया और चंदा उसे बड़े प्यार से चाटने लगी इधर रुक्मणी ने चंदा की जाँघो को खूब फैला दिया और उसकी चूत को चूसने लगी, अंदर का दरवाजा खुला था जहाँ से सीधे रमिया और मुझे अंदर का सारा नज़ारा दिखाई दे रहा था, मैने धीरे से रमिया से कहा बेटी तुम भी लंड चूसना चाहती हो ना
 

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रमिया- हाँ बाबा जी

राज- ठीक है तो आज हम तुम्हे अपना लंड चूसाएगे बोलो चुसोगी

मेरा इतना कहना था कि रमिया ने मेरा लंड पकड़ कर बाहर निकाल लिया और जैसे ही मेरे खड़े मोटे लंड को देखा तो उसकी आँखे खुली की खुली रह गई,

राज- क्या देख रही हो बेटी

रमिया- बाबा जी आपका लंड तो बहुत बड़ा और मोटा है आपका लंड तो भैया से भी दोगुना नज़र आ रहा है

राज- बेटी तुम्हारे जैसी जवान लोंदियो को ऐसे ही मोटे लंड से ज़्यादा मज़ा आता है, क्या तुम नही चाहती कि तुम्हारी गंद और चूत का छेद तुम्हारी मा सुधिया जैसा हो जाए,

मेरा इतना कहना था कि रमिया ने मेरे लंड के टोपे को अपनी जीभ निकाल कर चाटना शुरू कर दिया और मैं झुक कर उसके मोटे-मोटे बोबे को खूब कस कस कर मसल्ने लगा,

रमिया को अपना लंड चूसा-चूसा कर रामू ने एक दम उसे एक्सपर्ट बना दिया था और वह बड़े ही मस्त तरीके से मेरा लंड चूस रही थी, उधर रामू एक हाथ से चंदा के बोबे मसल रहा था और दूसरे हाथ से रुक्मणी चाची की मस्त चिकनी चूत को बड़े प्यार से सहला रहा था, रुक्मणी भी पूरी मस्ती मे चंदा की रसीली चूत चाट रही थी, चंदा रामू के लंड को अपने हाथो मे भर-भर कर दबोच रही थी,

रुक्मणी- रामू चंदा की चूत का छेद कितना बड़ा लग रहा है जैसे यह रोज चुदवाती हो

रामू- अरे नही चाची आज कल की लोंदियो की चूत का गुलाबी छेद जल्दी ही उनकी उमर के साथ बढ़ने लगता है रमिया की चूत का छेद तो चंदा की चूत से भी बड़ा नज़र आता है लगभग तुम्हारी चूत के जैसा दिखने लगा है,

रुक्मणी- मुस्कुराते हुए और अपनी मा सुधिया के भोस्डे के बारे मे क्या ख्याल है तेरा,

रामू- चाची की चूत मे उंगली पेल कर उसे चूमता हुआ हे चाची क्यो मा की मस्तानी छूट की याद दिलाती हो चलो मेरा मोटा लंड एक बार तुम चूस कर अपनी बेटी की गुलाबी चूत मे लगाओ और तुम चंदा के मूह के पास आकर बैठ जाओ और अपनी जंघे फैला लो ताकि मैं तुम्हारी बेटी को चोद्ते हुए उसकी मा की रसीली फूली हुई बुर को चूस सकु और फिर रामू ने अपने लंड को रुक्मणी के मूह मे दे दिया और रुक्मणी ने उसे अच्छे से चूसना शुरू कर दिया

रमिया लगातार मेरे लंड को खूब दबोचे जा रही थी और मैने अपने दोनो हाथो से उसके मोटे-मोटे दूध दबा-दबा कर लाल कर दिए थे उसका गुलाबी निप्पल बहुत कड़ा हो गया था और उसे मैं अपने होंठो से खूब दबा-दबा कर चूस रहा था, फिर मैने रमिया की दोनो जाँघो को खूब फैला दिया और सच आज पहली बार किसी जवान लोंड़िया की चिकनी चूत देख रहा था मैने उसकी चूत की फांको को फैला कर उसके गुलाबी रस से भीगे छेद को चाटने लगा और रमिया ओह बाबा जी सी आह बहुत अच्छा लग रहा है और चतो आह आह करने लगी,

उधर रुक्मणी ने रामू के लंड को पूरा गीला कर दिया और फिर उसे अपनी बेटी चंदा की मस्तानी चूत से लगा कर रामू की ओर इशारा किया और रामू ने सटाक से एक करारा धक्का चंदा की चूत मे मार दिया और चंदा आसानी से रामू के लंड को पूरा अंदर उतार गई और रामू उसकी चूत मे चढ़-चढ़ कर उसे चोदने लगा चंदा सिसकिया लेती हुई अपनी मा के बोबे से खेलने लगी और रामू चंदा के उपर लेट गया और अपने मूह को रुक्मणी चाची की चूत से सटा कर उसकी बुर चाटते हुए चंदा को खूब कस कस कर ठोकने लगा,

मुझे रमिया की चूत का रस पागल किए जा रहा था मैं जितनी बार रमिया की चूत का रस चूस्ता उसकी चूत और भी रस छ्चोड़ने लगती, रमिया मेरे सर को अपनी चूत मे दबाती हुई कह रही थी, ओह बाबा जी आप तो रामू भैया से भी अच्छा चूस्ते हो, ओह बाबा जी खा जाओ मेरी चूत को फाड़ दो बाबा जी आह आह सी ओह मा मर गई
 

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रामू रुक्मणी की चूत को खूब फैला कर चाट रहा था और इसकी वजह से उसके लंड मे बहुत तनाव आ रहा था और वह चंदा को खूब रगड़-रगड़ कर चोद रहा था, चंदा ठुकवाने मे एक्सपर्ट थी इसलिए अब वह अपनी गंद उछाल-उछाल कर रामू के लंड पर बहुत तेज़ी से मार रही थी और रामू भी उसके जोरदार धक्को का जवाब खूब हुमच-हुमच कर दे रहा था, तभी रामू ने अपना लंड बाहर निकाल कर खुद नीचे लेट गया और चंदा को अपने लंड पर बैठा लिया और फिर रुक्मणी चाची को अपनी चूत अपने मूह पर रख कर बैठने को कहा रुक्मणी ने अपनी दोनो जाँघो को रामू के आजू बाजू करके उसके मूह पर अपनी चूत खोल कर बैठ गई,

अब चंदा रामू के लंड पर तबीयत से कूदने लगी और इधर रुक्मणी अपनी फूली चूत को रामू को चूसाने लगी, दोनो मा बेटियाँ घोड़ी की तरह मस्ता रही थी और अपनी-अपनी चूत से रामू को रगड़ रही थी पूरे कमरे मे उन रंडियो की चूत की मादक गंध फैल गई थी,

मैं रमिया की गुलाबी चूत को बड़े प्यार से अपने होंठो मे दबा कर खिचता और उसके दाने को चूस्ते हुए सोच रहा था कि जब रमिया की चूत इतनी खूबसूरत है जब कि वह गाँव की लोंड़िया है तो फिर मेरी खुद की बहन संगीता तो रमिया से काफ़ी बड़ी हो गई है और उसका बदन भी खूब भरा हुआ है तो फिर उसकी चूत कितनी मस्त होगी और फिर मेरी मम्मी रति की चूत कितनी बड़ी और फूली होगी पता नही मम्मी और संगीता अपनी चूत के बाल साफ करती होगी या नही, वैसे मम्मी मेकप तो बहुत करती है और अपने होंठो पर लिपस्टिक लगाना कभी नही भूलती है ज़रूर मम्मी का मन भी खूब चुदवाने का होता होगा,

उधर चंदा ओह रामू भैया बड़ा मस्त लंड है तुम्हारा और रामू के लंड पर कूदते हुए रामू के मूह के उपर अपनी चूत फैलाए बैठी अपनी मम्मी की पीठ से चिपक जाती है और उसका पानी छूट जाता है तभी रामू चाची की चूत के खड़े दाने को खूब कस कर पकड़ लेता है और उसका भी पानी चंदा की चूत मे छूट जाता है

रुक्मणी आह आह करती हुई अपनी चूत को लगातार रगड़ रही थी और चंदा हाफते हुए एक और लुढ़क जाती है तभी रुक्मणी रामू के लंड के उपर से उठ कर उल्टी होकर घूम कर रामू के मूह पर अपनी गंद झुका कर लगा देती है और रामू का रस से भीगा लंड अपने मूह मे भर कर उसे चूसने लगती है, रामू का लंड जैसे ही चाची के मूह मे जाता है रामू चाची की गंद और चूत के छेद को खूब फैला कर चूसने और चाटने लगता है,

रमिया से अब रहा नही जा रहा था और वह बार-बार अपनी चूत उठा कर मेरे मूह पर मार रही थी कभी-कभी तो वह पूरी ताक़त से अपनी चूत मेरे मूह पर रगड़ने लग जाती थी मैने देर करना ठीक नही समझा और रमिया को खड़ी करके उसे आँगन की तरफ ले गया, मैं आज रमिया की चूत मे अपना मोटा लंड इतना ज़ोर से पेलना चाहता था कि रमिया भी हमेशा मेरे मोटे तगड़े लंड को याद करे,

मैने रमिया को घोड़ी बना कर झुका दिया और उसकी गंद को खूब अच्छे से उपर की ओर उभार दिया फिर मैने अपने मोटे लंड पर तेल लगा कर उसे खूब चिकना कर दिया और पिछे से रमिया की चूत मे अपना लंड लगा कर उसकी मोटी-मोटी गंद को खूब कस कर दबोच लिया और ऐसा जोरदार धक्का उसकी चूत मे मारा कि रमिया ज़ोर से चिल्ला उठी,

ओह बाबा जी मर गई रे आ उसके चेहरे पर दर्द उभर आया और उसकी आवाज़ सुन कर सभी का ध्यान इस ओर हो गया हालाकी रामू अब चाची के उपर चढ़ कर चोद रहा था लेकिन चंदा वह आवाज़ सुन कर उठ कर बाहर आकर हमे देखने लगी चंदा ने जैसे ही देखा कि मेरा आधे से ज़्यादा लंड रमिया की चूत मे फसा है मैने चंदा को देखते हुए दूसरा जोरदार धक्का रमिया की चूत मे ऐसा मारा कि मेरा पूरा लंड रमिया की चूत को खोलता हुआ जड़ तक समा कर उसकी मस्तानी बुर मे फिट हो गया और रमिया आह सी सी ओह बाबा जी बहुत बड़ा है आपका मैं मर जाउन्गि आह आह ओह.

मैं अब रमिया की चूत को धीरे-धीरे चोदते हुए उसकी मोटी गंद को फैला-फैला कर सहला रहा था तभी चंदा जो बड़े गौर से मेरे मोटे तगड़े लंड को रमिया की लाल नज़र आ रही चूत मे आते जाते देख रही थी, कहने लगी बाबा जी हमे भी रमिया दीदी की तरह ऐसे ही ज़ोर से चोदेगे क्या,

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मैने रमिया की चूत ठोकते हुए कहा क्यो तुम्हे रामू से मज़ा नही आया क्या

चंदा- बाबा जी आया तो है पर जितना तेज आप चोद्ते है उतना तेज तो मेरे बापू भी नही चोद्ते है और ना रामू भैया, देखो ना आपके इतना तेज चोदने से रमिया दीदी को कितना अच्छा लग रहा है,

रमिया- आह सी सी बाबा जी चंदा ठीक कह रही है आह सी ऐसे ही ज़ोर से ठोकिए आप बहुत मस्त चुदाई करते है

मैने रमिया की बात सुन कर उसकी चूत को खूब कस-कस कर ठोकने लगा और रमिया खूब सीसीयाने लगी

ओह बाबाजी बहुत मोटा और डंडे जैसा तना हुआ है आपका लंड, सच बाबा जी आपका लोडा तो मेरी मा सुधिया के भोस्डे के लायक है और मारिए आज फाड़ दीजिए मेरी चूत,

रमिया की बुर बिल्कुल रसीली हो गई थी और जहाँ मैने एक करारा धक्का उसकी चूत की जड़ मे मारा रमिया एक दम से मुझसे कस कर चिपक गई और उसकी चूत मेरे लंड को दबोचे हुए पानी छ्चोड़ने लगी, मैं अभी झाड़ नही पाया था और रमिया सुस्त पड़ गई तभी चंदा ने मेरे लंड को रमिया की चूत से बाहर खींच कर अपने मूह मे भर कर चूसने लगी,

चंदा-बाबा जी आपका तो मेरे बापू से भी ज़्यादा मोटा और तगड़ा है इसे पिछे से मेरी चूत मे डाल कर खूब कस-कस कर चोद दीजिए और फिर चंदा अपनी मोटी गंद उठा कर किसी कुतिया की तरह झुक कर अपनी गंद हिलाने लगी उसका गुलाबी भोसड़ा देख कर मैने उसकी चूत मे अपना लंड लगा कर अच्छे से रगड़ने लगा और फिर उसकी चूत मे लंड लगा कर एक तगड़ा धक्का मार दिया और मेरा लंड कच्छ से चंदा की चूत को फाड़ता हुआ आधे से ज़्यादा अंदर उतर गया और चंदा ने अपनी मोटी गंद और उपर उठा कर उल्टा मेरे लंड पर धकेलते हुए ओह बाबा जी बहुत मस्त लंड है आपका चोदो बाबा जी खूब कस कर चोदो,

मैं चंदा की चूत ठोकते हुए सोचने लगा जब यह ज़रा सी लोंड़िया इतने मस्त तरीके से अपनी चूत मे मेरा तगड़ा लंड लेकर मरवा रही है तो मेरी बहन संगीता कितने प्यार से अपने भैया का लंड लेगी, मैं सोच रहा था कि मेरा लंड वाकई बहुत मोटा और लंबा है,

उधर रामू चाची की मोटी गंद के नीचे हाथ डाल कर उसे उपर उठाए हुए उसकी चूत मे सतसट लंड पेल रहा था और रुक्मणी अपनी मोटी जाँघो को रामू की कमर मे लपेटे खूब मस्त तरीके से चुद रही थी उपर से रामू धक्का मारता तब रुक्मणी नीचे से अपनी गंद उठा कर रामू के लंड पर अपनी चूत का धक्का मार देती,

मैने चंदा को लगभग गोद मे उठा कर अपने लंड पर बैठा लिया चंदा मेरे सीने से चिपकी हुई थी और मैं उसकी चूत चोद रहा था तभी चंदा मेरे उपर चढ़ि-चढ़ि ही मूतने लगी और उसकी चूत ने पानी छ्चोड़ दिया मेरा पानी फिर भी नही निकला तब चंदा नीचे उतर आई और फिर रमिया और चंदा दोनो मेरे लंड को पागलो की तरह चूमने और चाटने लगी दोनो मेरे लंड को एक दूसरे के मूह से छुड़ा कर चूसने की कोशिश कर रही थी दोनो की रसीली जीभ से मेरे लंड मे खूब मस्ती आने लगी और फिर मैने एक दम से पानी छ्चोड़ना शुरू किया तो दोनो मेरे वीर्य को चूस-चूस कर चाटने लगी और मेरे लंड को पूरा चाट-चाट कर साफ कर दिया,

उधर रामू भी चाची की चूत मे पानी छ्चोड़ चुका था और चाची के नंगे बदन पर लेटा हुआ साँसे ले रहा था, कुच्छ देर बाद रामू अपनी धोती पहन कर बाहर आ गया और फिर चाची और चंदा और रमिया ने भी अपने -अपने कपड़े पहन लिए, शाम के 4 बज चुके थे और चाची ने हमारे लिए नीबू का शरबत बनाया और शरबत पीने के बाद रामू और रमिया मुझसे विदा लेकर अपने घर की ओर चल दिए,

शाम को करीब 6 बजे हरिया वापस आ गया और फिर घर के आँगन मे खाट डाल कर मुझे बैठने को कहा और फिर हरिया अपनी चिलम बनाने लगा,
 
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