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अभी मैं यही सब खड़ा खड़ा सोच रहा था और अपने लंड को मसल रहा था तभी मम्मी ने एक बार संगीता की
ओर देखा और फिर अपनी गंद लेटे लेटे उठा कर अपनी मॅक्सी अपनी गुदाज मोटी गंद को उठा कर उसने उपर चढ़ा
लिया और जब उसने अपनी दोनो जाँघो को फैला कर अपनी फूली हुई चूत पर मेरे सामने हाथ फेरा तो मेरा लंड
इतना कड़ा हो गया कि मुझे उसे अपनी लूँगी से बाहर निकालना पड़ा और उसे खूब कस कस कर सहलाना पड़ा,
मेरी मम्मी अपनी चूत मे एक उंगली धीरे धीरे सरकाती हुई किताब पढ़ रही थी और उसका चेहरा पूरा लाल नज़र आ
रहा था, मैं मम्मी की चूत और नंगी भरी गंद को देख कर खूब ज़ोर ज़ोर से लंड हिला रहा था और अपने
ख्यालो मे अपनी मम्मी को चोद रहा था, आज तक अपनी मम्मी की नंगी चूत और गंद मैने देखा नही था
इसलिए मुझे उनका ज़्यादा ख्याल कभी आया ही नही लेकिन अब मुझे सिर्फ़ और सिर्फ़ अपनी मम्मी को ही चोदने का मन
हो रहा था और मैं बस उसे चोद्ते हुए उसके रसीले होंठ गुलाबी गालो को चूमना चाटना चाहता था,
कुच्छ देर बाद मैने देखा मम्मी की चूड़ियो की आवाज़ ज़ोर ज़ोर से आने लगी थी क्यो कि मम्मी अब अपनी चूत मे
ज़ोर ज़ोर से अपनी उंगली पेलने लगी थी, तभी वह एक दम से बिस्तेर पर मूतने की स्टाइल मे बैठ गई और जब उसका
भोसड़ा खुल कर मेरी आँखो के सामने आया तो मम्मी की बड़ी सी बिना बालो वाली चिकनी गुलाबी चूत देख कर
मेरे मूह मे पानी आ गया और ऐसा लगने लगा कि जाकर अपनी मम्मी की चूत मे मूह डाल कर खूब उसकी चूत
चूस लू,
मम्मी अब तेज़ी से अपनी उंगली चला रही थी और मैं भी उसकी चूत देख कर अपना लंड हिला रहा था, तभी
अचानक मुझे ध्यान नही रहा और मेरे पास मे एक छ्होटा सा गमला रखा हुआ था और मेरे हाथ का धक्का
उस गमले मे लग गया मैने उसे पकड़ने की पूरी कोशिश की लेकिन वह गमला धदाम से गिर कर टूट गया और मेरे
होश उड़ गये, आवाज़ सुन कर मम्मी एक दम से रुक गई और उसने आवाज़ लगाई कौन है वहाँ,
ओर देखा और फिर अपनी गंद लेटे लेटे उठा कर अपनी मॅक्सी अपनी गुदाज मोटी गंद को उठा कर उसने उपर चढ़ा
लिया और जब उसने अपनी दोनो जाँघो को फैला कर अपनी फूली हुई चूत पर मेरे सामने हाथ फेरा तो मेरा लंड
इतना कड़ा हो गया कि मुझे उसे अपनी लूँगी से बाहर निकालना पड़ा और उसे खूब कस कस कर सहलाना पड़ा,
मेरी मम्मी अपनी चूत मे एक उंगली धीरे धीरे सरकाती हुई किताब पढ़ रही थी और उसका चेहरा पूरा लाल नज़र आ
रहा था, मैं मम्मी की चूत और नंगी भरी गंद को देख कर खूब ज़ोर ज़ोर से लंड हिला रहा था और अपने
ख्यालो मे अपनी मम्मी को चोद रहा था, आज तक अपनी मम्मी की नंगी चूत और गंद मैने देखा नही था
इसलिए मुझे उनका ज़्यादा ख्याल कभी आया ही नही लेकिन अब मुझे सिर्फ़ और सिर्फ़ अपनी मम्मी को ही चोदने का मन
हो रहा था और मैं बस उसे चोद्ते हुए उसके रसीले होंठ गुलाबी गालो को चूमना चाटना चाहता था,
कुच्छ देर बाद मैने देखा मम्मी की चूड़ियो की आवाज़ ज़ोर ज़ोर से आने लगी थी क्यो कि मम्मी अब अपनी चूत मे
ज़ोर ज़ोर से अपनी उंगली पेलने लगी थी, तभी वह एक दम से बिस्तेर पर मूतने की स्टाइल मे बैठ गई और जब उसका
भोसड़ा खुल कर मेरी आँखो के सामने आया तो मम्मी की बड़ी सी बिना बालो वाली चिकनी गुलाबी चूत देख कर
मेरे मूह मे पानी आ गया और ऐसा लगने लगा कि जाकर अपनी मम्मी की चूत मे मूह डाल कर खूब उसकी चूत
चूस लू,
मम्मी अब तेज़ी से अपनी उंगली चला रही थी और मैं भी उसकी चूत देख कर अपना लंड हिला रहा था, तभी
अचानक मुझे ध्यान नही रहा और मेरे पास मे एक छ्होटा सा गमला रखा हुआ था और मेरे हाथ का धक्का
उस गमले मे लग गया मैने उसे पकड़ने की पूरी कोशिश की लेकिन वह गमला धदाम से गिर कर टूट गया और मेरे
होश उड़ गये, आवाज़ सुन कर मम्मी एक दम से रुक गई और उसने आवाज़ लगाई कौन है वहाँ,